रायपुर : राजिम माघी-पुन्नी मेला के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने दी शुभकामनाएं   |   रायपुर : शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रमा सिंह का विशेष सहायक पद पर किया गया पदस्थापना आदेश निरस्त   |   रायपुर : राजिम माघी-पुन्नी मेला के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने दी शुभकामनाएं   |   रायपुर : राजिम माघी पुन्नी मेला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक: मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं   |   ब्रेकिंग न्यूज़ : लोहर्सी और शिवरीनारायण के बीच खरौद मोड़ के पास अज्ञात वाहन ने मारी बाइक सवार को ठोकर....   |   रायपुर - विधानसभा में आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वन मंत्री मोहम्मद अकबर और पीएचई मंत्री रूद्रकुमार गुरू करेंगे सवालों का सामना….विकास यात्रा के खर्चों को लेकर गरमा सकता है सदन…   |   रायपुर : मुख्यमंत्री आज दामाखेड़ा में आयोजित संत समागम में शामिल होंगे   |   जशपुर:- बगीचा कैलाश गुफा सड़क निर्माण युद्धस्तर पर जल्द किये जाने की मांग को लेकर जनजातीय समाज उतरा सड़कों पर,धरना प्रदर्शन कर आश्रम प्रबन्धन की तानाशाही के खिलाफ खोला मोर्चा,आगामी लोकसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी,   |   रायपुर : कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वर्तमान परिदृश्य में फेक न्यूज की चुनौतियां’’ विषय पर संगोष्ठी आज   |   रायपुर : जिला निर्वाचन अधिकारियों ने ली मतदान करने की शपथ : सीईओ सुब्रत साहू ने दिलाई शपथ   |  

 

कृषि

Share
30-August-2018
Posted Date

धान पौधों के कमजोर होने पर यूरिया डालनेे की सलाह धान में कन्से निकलने की स्थिति में यूरिया की दूसरी मात्रा जरूरी

रायपुर 30 अगस्त 2018 कृषि वैज्ञानिकों ने पिछले 15-20 दिनों से सूर्य प्रकाश की कमी की स्थिति में धान के पौधे कमजोर होने पर यूरिया डालने की सलाह किसानों को दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने आज यहां जारी विशेष कृषि बुलेटिन में कहा है कि सूर्य प्रकाश की कमी की वजह से पौधों की बढ़ोतरी कम हो जाती है। इस स्थिति में पौधों की बाढ़ संतुलित रखने के लिए यूरिया डालना जरूरी होता है।
    कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि रोपाई वाले खेतों में लगभग 5 सेंटीमीटर पानी रोक कर रखना चाहिए। अधिक मात्रा में पानी रखने से कन्सो की संख्या प्रभावित होती है। धान फसल की बियासी करने के बाद तत्काल सघन चलाई करनी चाहिए। इसके बाद 10 से 15 प्रतिशत अधिक यूरिया छिड़काव करना फायदे मंद होता है। धान फसल में कन्से निकलने की स्थिति हो तो यूरिया की दूसरी मात्रा डालनी चाहिए। इससे कन्सो की स्थिति में सुधार आती है। धान फसल में कीट या खरपतवार होने की स्थिति में दोनों के नियंत्रण के बाद ही 40 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़कना चाहिए।

धान खेतों की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए। धान फसल में पत्ती मोड़क का प्रकोप एक पौधे में एक से अधिक दिखाई देने पर क्लोरोप्यरीफोस 1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कना चाहिए। जिन खेतों में तना छेदक की तितली एक वर्ग मीटर में एक से अधिक दिखाई दे रही हो तो वहां कार्बोफुरान 33 किलोग्राम या फर्टेरा 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से डालना लाभदायक होता है। रोपा धान में सकरी पत्ती वाली खरपतवार के नियंत्रण के लिए रोपाई के तीन दिन के अंदर ब्यूटाक्लोर डेढ़ किलोग्राम सक्रिय तत्व या आक्साडायर्जिल 70 ग्राम सक्रिय तत्व डालना चाहिए। धान फसल में हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए प्रकाश प्रपंच उपकरण का उपयोग किया जा सकता है। प्रकाश प्रपंच उपकरण फसल से थोडी दूर पर लगाकर शाम 6.30 बजे से रात्रि 10.30 बजे तक ही बल्ब जलाना चाहिए तथा सुबह एकत्रित कीड़ों को नष्ट कर देना चाहिए।


कृषि » More Photo

कृषि » More Video

LEAVE A COMMENT