रायपुर : राजिम माघी-पुन्नी मेला के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने दी शुभकामनाएं   |   रायपुर : शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रमा सिंह का विशेष सहायक पद पर किया गया पदस्थापना आदेश निरस्त   |   रायपुर : राजिम माघी-पुन्नी मेला के शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल ने दी शुभकामनाएं   |   रायपुर : राजिम माघी पुन्नी मेला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक: मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं   |   ब्रेकिंग न्यूज़ : लोहर्सी और शिवरीनारायण के बीच खरौद मोड़ के पास अज्ञात वाहन ने मारी बाइक सवार को ठोकर....   |   रायपुर - विधानसभा में आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वन मंत्री मोहम्मद अकबर और पीएचई मंत्री रूद्रकुमार गुरू करेंगे सवालों का सामना….विकास यात्रा के खर्चों को लेकर गरमा सकता है सदन…   |   रायपुर : मुख्यमंत्री आज दामाखेड़ा में आयोजित संत समागम में शामिल होंगे   |   जशपुर:- बगीचा कैलाश गुफा सड़क निर्माण युद्धस्तर पर जल्द किये जाने की मांग को लेकर जनजातीय समाज उतरा सड़कों पर,धरना प्रदर्शन कर आश्रम प्रबन्धन की तानाशाही के खिलाफ खोला मोर्चा,आगामी लोकसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी,   |   रायपुर : कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित वर्तमान परिदृश्य में फेक न्यूज की चुनौतियां’’ विषय पर संगोष्ठी आज   |   रायपुर : जिला निर्वाचन अधिकारियों ने ली मतदान करने की शपथ : सीईओ सुब्रत साहू ने दिलाई शपथ   |  

 

कृषि

Share
10-August-2018
Posted Date

धान की रोपाई में देरी होने की स्थिति में एक स्थान पर चार-पांच पौधे लगाना जरूरी : रोपाई वाले खेतों में 5 सेंटीमीटर भरना चाहिए

रायपुर  कृषि वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों से हो रही बारिश के पानी को धान के खेतों में रोकने के लिए समुचित प्रबंध करने की सलाह किसानों को दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने आज  कहा है कि धान के बोता तों में बियासी के लिए तथा रोपाई वाले खेतों में रोपा लगाने के लिए पानी रोकना चाहिए।
    कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि धान की रोपाई में देरी होने पर रोता लगाते समय एक स्थान पर चार-पांच पौधों की रोपाई करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में 10 प्रतिशत अधिक खाद डालना चाहिए। रोपे गए खेतों में लगभग 5 सेंटीमीटर पानी भर कर रखना लाभदायक होता है। ऐसे खेतों में अधिक पानी भरा होने से धान के कन्सो की संख्या प्रभावित होती है। धान नर्सरी में कार्बोफ्यूरान दानेदार दवा 20 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से थरहा निकालने के चार दिन पहले नर्सरी में डालना चाहिए।
    कृषि वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में कम वर्षा की स्थिति है। इन क्षेत्रों की धान फसलों में कटुआ इल्ली की आशंका है। सूखे खेतों में कटुआ इल्ली का प्रकोप होने पर डाइक्लोरोवास एक मिली लीटर एक लीटर पानी में घोल कर 200 लीटर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए। जिन खेतों में पानी भरा है और वहां कटुआ इल्ली दिखाई दे तो एक लीटर मिट्टी तेल प्रति एकड़ की दर से खेतों के पानी में डालकर पौधों के ऊपर रस्सी चलाना चाहिए, ताकि इल्लियां मिट्टी तेल युक्त पानी में गिरकर मर जाएं।
    कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि धान फसल में हानिकारक कीड़ों पर सतत निगरानी रखनी चाहिए। इसके लिए प्रकाश प्रपंच उपकरण का उपयोग किया जा सकता है। प्रकाश प्रपंच उपकरण फसल से थोड़ी दूरी पर लगाकर शाम 6.30 से रात्रि 10.30 बजे तक बल्ब जलाना चाहिए। सुबह कीड़ों को एकत्र कर नष्ट कर देना चाहिए। सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियां एवं चक्र भंृग कीड़े ज्यादा दिखने पर ट्राईजोफास दवा की 2 मिली लीटर मात्रा एक लीटर पानी या फ्लुबेंडामाईट आधा मिली लीटर एक लीटर पानी में घोल बनाकर 200 लीटर घोल प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करना चाहिए। दवा छिड़कने के तीन घंटे के भीतर बारिश हो जाने पर पुनः घोल छिड़कना जरूरी होता है


कृषि » More Photo

कृषि » More Video

LEAVE A COMMENT