BBN24 : बड़ी खबर : राजनांदगांव - मतदान दल और सुरक्षाकर्मी कर रहे अपनी मनमानी , मतदान केन्द्र का दरवाजा किया बंद, सैकडो मतदाता केन्द्र के बाहर रहे खडे   |   राजनांदगांव -- धूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र की 120 वर्षीय बुजुर्ग महिला नोहरी तोपसे ने लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लिया और चिलचिलाती धूप में किया मतदान   |   BIG BREAKING NEWS : राजनांदगांव --नक्सलियो ने किया आईईडी ब्लास्ट,एक जवान घायल....   |   राजनांदगांव -- नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोरचाटोला मे शांति पूर्ण तरीकें से चल रहा मतदान   |   राजनांदगांव-- राजनांदगांव के जिला निर्वाचन अधिकारी जय प्रकाश मौर्य ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया   |   राजनांदगांव - डोगरगांव विधानसभा क्षेत्र के बुध्दूभरदा मतदान केन्द्र मे दुल्हन ने शादी के बाद किया मतदान।   |   राजनांदगांव -- दुल्हन ने ससुराल जाने से पहले पहुची मतदान केन्द्र   |   राजनांदगांव -- नक्सल प्रभावित क्षेत्र चिल्हाटी मे शांति पूर्ण तरीकें से चल रहा मतदान..   |   राजनांदगांव -- राजनांदगांव लोकसभा राजनांदगांव जिले में 7 से 9 बजे के बीच औसत 15.99 प्रतिशत मतदान।   |   राजनांदगांव -- नक्सल प्रभावित मोहला मानपुर मे शांति पूर्ण तरीके से चल रहा मतदान..   |  
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13-April-2019
Posted Date

शिक्षा के संस्थान बन रहे लूट की दुकान

_________________________ विश्वगुरु का खिताब प्राप्त कर चुका हिन्दुस्तान एक समय मे दुनियाभर मे शिक्षा का अहम केंद्र था, नालंदा तक्षशिला जैसे विश्व विद्यालय सारी दुनियां को सर्वांग शिक्षा प्रदान करने के संस्थान के रुप मे जाने जाते थे, किन्तु गुलामी दर गुलामी ने भारत की सारी व्यवस्था को छिन्न भिन्न कर दिया और उसमे सबसे ज्यादा आहत हुई शिक्षा व्यवस्था तथा यह कार्य अंग्रेजों द्वारा सुनियोजित तरीके से किया गया, क्योंकि उन्हे मालूम था कि इस देश की असली ताकत है यहाँ कि शिक्षा व्यवस्था जो लोगों को ज्ञान के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ती है और स्वालंबी बनाती है, और इसी स्वालंबन एवं एकजुटता पर वार करने के लिए उनके द्वारा बाबू बनाओ शिक्षा पद्धति लायी गयी जो स्वालंबन नही निर्भरता का पाठ पढ़ाती है,आजादी के बाद बहुत कुछ बदला किन्तु शिक्षा पद्धति नही बदली, _________________________ प्रारंभ मे शासकीय नियंत्रण _________________________ आजाद भारत मे बाबू बनाओ शिक्षा के जरिए ही नये भारत का सफर शुरू हुआ, और पूरी तरह शिक्षा शासकीय नियंत्रण मे थी जिसके चलते एक तरह से सेवा एवं वास्तविक ज्ञानार्जन का माहौल नजर आता था, वैसे उस समय बेरोजगारी ने अपने पर उतने नही फैलाए थे इसलिए इस शिक्षा की विडम्बना उतनी नजर नही आती थी, किन्तु नब्बे का दशक आते आते बेरोजगारी विकराल दशा की ओर बढ़ने लगी और यहीं से शुरू हुआ शिक्षा पर सवालिया निशान लगने का सिलसिला जिसे बड़ी चालाकी से बाजारवाद ने अपने कब्जे मे लिया और अंग्रेजी शिक्षा मे सुनहरे भविष्य का ख्वाब दिखाते हुए निजी स्कूलों का जाल फेंक दिया गया, जिसमे सरलता से आमजन इस जाल में फंसते चले गये और धीरे धीरे यह व्यवस्था मनमानी फीस एवं आडम्बर मय शिक्षा के रुप मे जनमानस को लूट की राह ले जाने लगी, _________________________ फीस कापी किताब मनमानी बेहिसाब _________________________ जिस सब्जबाग के चलते जनमानस निजी विद्यालयों के जरिए नई शिक्षा की ओर आकर्षित हुई उसमे नया कुछ नही है महज माध्यम का बदलाव है क्योंकि पद्धति तो वही है लिहाजा बेरोजगारी की कतार कम नही हुई वरन बढ़ती ही जा रही है, लेकिन इतना जरुर हुआ कि शिक्षा बेतहासा मंहगाई के रुप मे आगे बढ़ रही है और धीरे धीरे यह फीस से लेकर कापी किताबों मे भी लूट के रुप मे नजर आ रही है, बताया जाता है कि नर्सरी से लेकर आठवीं तक की पांच सौ से छः सौ मे एन सी ई आर टी की जो किताबें मिल जाती है वही किताबें विद्यालयों द्वारा निजी प्रकाशको की तीन हजार से चार हजार मे दी जाती है और ड्रेस नोट बुक मे भी इसी तरह की लूट की जानकारी पालकों के माध्यम से प्राप्त हो रही है, भाटापारा मे भी यह गोरखधंधा धडल्ले से चल रहा है बताया जाता है कि बकायदा इसके लिए विद्यालय अपने विद्यालय से या पसंदीदा स्टेशनरी दुकानों से इस लूट को अंजाम दे रहें है, चूंकि अभी नये सत्र का आगमन हो रहा है इसलिए इस तरह की विडम्बनाए खुलकर सामने आ रहीं है, _________________________ व्यवस्था एवं जनता की लाचारी _________________________ मुनाफाखोरी एवं कमीशनखोरी के जाल मे फंसती एवं पालकों को आर्थिक रुप से डसती इस विडम्बना के बारे मे व्यवस्था को पूरी जानकारी है, इसिलिए शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया जिसमे इन विडम्बनाओं से निपटने के लिए प्रावधान तय है किन्तु उसका सही ढंग से क्रियान्वयन नही होना अवश्य ही व्यवस्था की लाचारी को प्रकट कर रही है, उसी तरह निजी विद्यालयों के शिक्षित पालकों को इस लूट का भान हैं किन्तु उनकी चुप्पी शायद उसी लाचारी को प्रकट करती है की कहीं इन विडम्बनाओं का विरोध उनके बच्चों के शैक्षणिक अवरोध का कारण न बन जाए, और इसी लाचारी का ये निजी संस्थान जमकर फायदा उठाते नजर आ रहें है, और इस लाचारी और मनमानी आचरण का प्रभाव पूरी तरह समाज पर पढ़ता नजर आ रहा है जिससे शिक्षा की सुचिता प्रभावित होकर प्रदूषित हो रही है

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