BBN24 : बड़ी खबर : राजनांदगांव - मतदान दल और सुरक्षाकर्मी कर रहे अपनी मनमानी , मतदान केन्द्र का दरवाजा किया बंद, सैकडो मतदाता केन्द्र के बाहर रहे खडे   |   राजनांदगांव -- धूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र की 120 वर्षीय बुजुर्ग महिला नोहरी तोपसे ने लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा लिया और चिलचिलाती धूप में किया मतदान   |   BIG BREAKING NEWS : राजनांदगांव --नक्सलियो ने किया आईईडी ब्लास्ट,एक जवान घायल....   |   राजनांदगांव -- नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोरचाटोला मे शांति पूर्ण तरीकें से चल रहा मतदान   |   राजनांदगांव-- राजनांदगांव के जिला निर्वाचन अधिकारी जय प्रकाश मौर्य ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया   |   राजनांदगांव - डोगरगांव विधानसभा क्षेत्र के बुध्दूभरदा मतदान केन्द्र मे दुल्हन ने शादी के बाद किया मतदान।   |   राजनांदगांव -- दुल्हन ने ससुराल जाने से पहले पहुची मतदान केन्द्र   |   राजनांदगांव -- नक्सल प्रभावित क्षेत्र चिल्हाटी मे शांति पूर्ण तरीकें से चल रहा मतदान..   |   राजनांदगांव -- राजनांदगांव लोकसभा राजनांदगांव जिले में 7 से 9 बजे के बीच औसत 15.99 प्रतिशत मतदान।   |   राजनांदगांव -- नक्सल प्रभावित मोहला मानपुर मे शांति पूर्ण तरीके से चल रहा मतदान..   |  
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08-February-2019
Posted Date

स्थानीयता पर उपेक्षा पूर्ण रवैया बरत रहीं सीमेंट फैक्ट्रियां

भाटापारा  दिनों दिन कृषि का घटता रकबा लाभकारी व्यवसाय के रुप मे चूकती खेती आज भी छत्तीसगढ़ मे बहुसंख्य आबादी की जीविका का आधार है छत्तीसगढ़ ही एक ऐसा राज्य है जहां निम्न से निम्न आर्थिक स्थिति वालों के पास भी थोड़ी न थोड़ी जमीन है इसीलिए आर्थिक मर्म के जानकार मानते है कि यदि इस राज्य मे खेती के लिए ठोस कवायद की जाये तो छत्तीसगढ़ के दिन बहुरते देर नहीं लगेगी किन्तु दुर्भाग्य इस राज्य मे कृषि मसले पर मुआवजे और खैरात से आगे बात नही बढ़ती और यही कमजोर कड़ी धीरे धीरे कृषि को निगलने का कारक साबित हो रही है पैसे पर टिकी राज्य की कृषि अवधारणा का भरपूर लाभ उठाते हुए उद्योग मनमाने पैसे का लालच देते हुए तेजी से कृषि भूमि हडप रहीं है और व्यवस्था मूकदर्शक बनी हुई एक तरह से उद्योगों के हौसलाअफजाई का ही कार्य कर रहीं है
 नही बख्शे जा रहे उर्वरा भूमि
भाटापारा बलौदा बाजार जिले मे लगभग आधा दर्जन सीमेन्ट फैक्ट्रियां संचालित है जो अधिकतर बलौदा क्षेत्र मे स्थापित हैं गांव वालों से रुबरु होने पर वहां की पीड़ा स्पष्ट रुप से झलकती है और यह पीड़ा उर्वरा भूमि भी सीमेंट संयंत्रों मे कुर्बान होने एवं जमीन जाने के बाद भी ढंग से मुआवजा नही मिलने एवं रोजगार नहीं मिलने के रुप मे नजर आती है, क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि अर्थाभाव के चलते बहुत सारे किसान अपनी नहर अपासी की उर्वरा भूमि को बेचने के लिए मजबूर हुए और संयंत्रों का वादा था कि परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा किन्तु आज पर्यन्त संयत्र इस मसले पर पूरी तरह खरा नही उतर पायी है आये दिन विरोध प्रदर्शन के बाद भी उद्योगों की गतिविधियों मे कोई बदलाव नही और बकायदा बाहर से कामगार लाकर धडल्ले से स्थानीयता की धज्जियां उड़ाई जा रही है
सतत संवेदना का अभाव
चुनाव के समय गरीब मजदूर किसान की स्तुति एवं उनकी पीड़ा मे जमकर साहनुभूति का इजहार करते हुए तरह तरह की सब्जबाग दिखाने वाले राजनैतिक दलों के प्रति आक्रोश अभिव्यक्ति करते हुए जनमानस का यही कहना है कि यह संवेदना सतत क्यों नही रहती क्यों चुनावों के बाद यह भावना बिसरा दी जाती है और उद्योगों को मनमानी की खुली छुट दे दी जाती है जिसके चलते आज राज्य की किसानी दिनों दिन हाथ से फिसलती हुई लोगों को बेरोजगार करती हुई बाहर राज्यों मे काम ढूंढने को मजबूर कर रही है,वर्ष दर वर्ष बढ़ रहे पलायन के आंकड़े खेती छिनने एवं रोजगार नही मिलने की  कहानी कह रहें है,
 क्रांति सेना से उठती आवाज
 संपन्न हुए विधानसभा सभा चुनाव मे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भ्रष्टाचार व्यवस्था गत विकास एवं आउटसोर्सिंग जैसे कुछ अहम जन संवेदना के मुद्दों को लेकर चुनाव मे उतरी जिसे जनता ने हाथों हाथ लिया और भारी बहुमत से विजयी बनाया, अब उन वादों को पूरा करने की बारी है जिस पर सरकार की गतिविधि प्रतिबद्धता की भी नजर आ रही है किन्तु स्थानीयता के मुद्दे पर किसी भी शुरुवात की भनक नही लगने पर जनता के बीच सवालों का दौर शुरू हो रहा है जिसकी संवेदना महसूस कर स्थानीय भावनाओं की प्रखर पैरोकार संगठन छत्तीसगढिया क्रांति सेना मे हलचल शुरू होती जान पड़ रही है और अंदाजा लगाया जा रहा है कि क्रांति सेना जनभावनाओ की मांग कृषि योग्य भूमि का संरक्षण एवं स्थानीय लोगों को रोजगार तथा जिनकी भूमि उद्योगों द्वारा ली गयी है उन्हें पर्याप्त मुआवजा और रोजगार जैसे मसले पर जनता की आवाज बन कर व्यवस्था तक यह पीड़ा पहुँचाएगी, अब देखना यही है कि आगे आगे क्या होता है वैसे नयी सरकार की सक्रियता के आधार पर जनमानस मे आशाएँ अपार है


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