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विशेष

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06-January-2019
Posted Date

दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द ने दोहराया इतिहास - पत्रकार खबरीलाल ।।

पूज्यपाद शंकराचार्य महाराज के नेतृत्व में परमधर्मसंसद् की रचनात्मक धर्म शासन को मजबूती से किया स्थापित जिस पर पूरा विश्व एक होकर विचार करने को बाध्य हैं। ऐसी धर्मसंसद् व्यवस्था की कल्पना को साकार किया जिसमें जिसमें यह चरितार्थ करके दिखाया वसुदेव कुटुंबकम सारा विश्व हमारा है और हम सारे विश्व के, संपूर्ण जगत एक परिवार है और इस परिवार का कोई सीमा रेखा नहीं है यह सीमा रेखाओं से परे है इस भूमंडल पर आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित वैदिक धर्म वर्णाधर्म व्यवस्था को संचालित करने हेतु चार शंकराचार्य पीठ की स्थापना करके चार पीठो पर आसीन चार शंकराचार्य ही सनातन धर्म के सर्वोच्च पद है सभी मत पंथ के अनुयाई शंकराचार्य जी के धर्म शासन में ही आते हैं इस पर गहन विचार कर इस प्रणाली को आगे बढ़ाते हुए परम पूज्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने धर्म नगरी काशी विश्वनाथ से किया भारत को विश्व गुरु की ओर ले जाने का स्वर्णिम संकल्प , किया धर्म की राजधानी अध्यात्मिक राजधानी काशी विश्वनाथ में परम धर्म संसद 1008। अस्थाई स्वरुप को अब स्थाई स्वरूप देने का समय आ गया है । आप सभी आमंत्रित हैं परम आयोजन में इस स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा बनकर स्वयं को गौरवान्वित करें । 28 ,29 ,30 जनवरी को यह आयोजन कुंभ नगरी प्रयागराज में होने जा रहा है जिसमें लगभग 100 देशों के गणमान्य सदस्यों के साथ भारतवर्ष के सभी वर्ग, वर्ण, मत , पंथ के अनुयायी भाग ले रहे हैं। धर्म में आस्था रखने वाले सभी धर्मावलंबियों का स्वागत है ।

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