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विशेष

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04-January-2019
Posted Date

तुम पहले जैसी नहीं रही....?

सौम्या पिहू के रूम की लाइट बंद करके अपने रूम में आती है तो देखती है की अनूप उसका इन्तजार कर रहा होता है वो सौम्या को कहता है, हो गये तुम्हारे काम| ताना देने वाले के स्वर में कहता की आज कल तुम्हारे पास मेरे लिए समय ही नहीं बचा है तुम पहले जैसी नहीं रही ?तुम पहले कितनी जिन्दा दिल थी हम कितने खुश थे पर अब...इतना कहकर वो पलंग पर लेट जाता है सोम्या इन  बातों को लेटे-लेटे सोचती रही| पहले और अब में कितना कुछ बदल गया है वो अनूप को सुबह होते ही एक पत्र लिखती है और उस पत्र में वो इन बातों के प्रश्नों का उत्तर अनूप को देती है |सुबह जब अनूप उठता है तो उसके साइड में रखी टेबले पर एक लिफाफा होता है इस लिफाफे में वही पत्र होता है जो सौम्या ने अनूप को लिखा था जिसे वो खोल कर पड़ता है जिसमें लिखा होता है|

 अनूप मैं कल रात तुम्हारी बातों को सोचती रही तूमने सच कहाँ मैं पहले जैसी नहीं रही पहले मैं अकेली थी बिलकुल आजाद उस वक्त केवल मैं अपने बारे में ही सोचती थी केवल खुद का ख़याल ही रखना था उस वक्त आजाद पंछी थी मै |फिर समय के साथ घर वालों ने शादी के लिए जोर डाला फिर तुम्हारा रिश्ता आया मैंने भी समय के साथ हो रहे इस बदलाव को ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार किया इस तरह हम दोनों का विवाह सारी परम्पराओं और विधि-विधान से संपन्न हुआ|शादी के बाद हम परिवार से दूर पुणे आ गये |यहाँ आने के बाद पहला बदलाव आया मेरी जिन्दगी में अब मैं खुद के साथ तुम्हारा भी ख़याल रखना मेरा फर्ज बन गया अब सौम्या  की जगह एक पत्नी ने ली |समय बीतता गया अब एक नन्ही सी किलकारी का शोर हमारे घर में गुजने लगा यहाँ से अब पत्नी के  सफ़र के साथ एक माँ का सफ़र भी शुरू हो गया ये था मेरी जिन्दगी का दूसरा बदलाव| अब पिहू भी स्कूल जाने लगी थी और पूरा दिन तुम्हारे और पिहू की खुशियों का ख्याल रखने में बीतने लगा था |सुबह से तुम्हारा और पिहू का टिफिन बनाने में,पिहू का होम वर्क करना घर को साफ़ करना ,कपडे तय करना,घर में आये मेहमानों का ख़याल रखना ,खाना बनाना,तुम्हारी और पिहू की सेहत का ख़याल रखना,घर की बचत का ख़याल करना आने वाले भविष्य की चिंता करना इन सब जिम्मेदारियों का ख़याल करते करते मेरा पूरा दिन चला जाता है |

तुम सही कहते हो मुझमें वो पहले वाली बात नहीं रही क्यूँ की आज मैं एक पत्नी ,माँ, टीचर ,शैफ ,नर्स और हाउस कीपर न जाने कितनी भूमिकाओं को इस जिन्दगी के रंग मंच पर ये किरदार रोज निभाती हूँ और इसे निभाते निभाते मैं थक जाती हूँ और इसलिए तुम्हे समय नहीं दे पाती हूँ |ये सब मैं इसलिए करती हूँ क्यूँ की मैं तुमसे और अपने इस परिवार को बहुत प्यार करती हूँ ये जिन्दगी हमने खुद बनाई है और इसमें मैं बहुत खुश हूँ। शायद अब तुन्हारे प्रश्न का जवाब मिल गया होगा की क्यूँ मैं पहले जैसी नहीं रही |आज समय के साथ भले ही जिम्मेदारियां भी बड गई हो पर मेरा प्यार इस समय के साथ तुम्हारे लिए और बड गया है और हमारा ये रिश्ता भी और मजबूत हो गया है |कभी सोचा है की ये बदलाव क्यूँ आया इस बदलाव की वजह क्या है? इस बदलाव की वजह तुम्हारा प्यार और मेरा इस परिवार के प्रति प्यार |यदि मैं इन जिम्मेदारियों को रोज न निभाऊं तो क्या होगा हमारे इस परिवार का?अनूप की आंखे भर आई इस पत्र को पड़ कर और उसे अपनी कही बातों पर अफ़सोस हुआ |पीछे से आवाज आई की आज ऑफिस नहीं जाना क्या? पानी गर्म कर दिया है नहाकर जल्दी आओ टेबल पर नाश्ता लग गया है |

दोस्तों अनूप जैसे ऐसे बहुत से पुरुष होंगें जिसे अपनी बीवियों से हमेशा यही शिकायत होती होगी की वो उन्हें समय नहीं देती |उनकी लाइफ में वो पहले वाली बात नहीं रही यहाँ तक की इस शिकायत के बहाने वो इन खुशियों को बहार भी तलाशने की कोशिश में अपने घर को बर्बाद तक कर देते है |पर कभी भी वो इस बदलाव का कारण नहीं तलाशना चाहते|शादी के बाद स्त्रियाँ एक दिन में जितना काम करती है अपने परिवार की खुशियों की खातिर शायद ही एक पुरुष इतना सब कुछ कर पाये |स्त्रियाँ घर की सही मायने में नीव होती है जिसके कारण पूरा परिवार मजबूती से खडा होता है |यदि नींव हील जाए तो पूरा परिवार ही तबाह हो जयेगा|इसलिए अपनी बीवियों को प्यार करे उन्हें समझे,उमके आत्सम्मान को ठेस न पहुचाये और इस बात को हमेशा ध्यान रखे की इस बदलाव की वजह आप है और उसका आपके प्रति उसका प्यार है|कई स्त्रियाँ पड़ी लिखी होने के कारण भी जॉब नहीं करती सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार की खुशियों के खातिर इसलिए उनके त्याग को समझे उन्हें घर में पडा बेकार सामान न समझे उनकी खुशियों का ख़याल रखें |आप उनसे उम्मीद न रखे की वो आपके लिए टाइम निकाले बल्कि आप कभी उनके लिए टाइम निकाल कर देखें देखिये फिर कैसा जादू होता है आपकी जिन्दगी में |

 

वर्षा गलपांडे


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