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विशेष

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05-December-2018
Posted Date

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी :: स्वामिश्री ने भरी हुंकार, पूछा " कहाँ है हमारे भगवान " ।।

पूरे भारत मे एक मात्र क्रांतिकारी सन्त तथा ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ही मंदिर एवं मूर्तियों के तोड़े जाने पर अपनी आवाज उठा रहे हैं और मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़कर जो विकास काशी में हो रहा है उसका तीव्र विरोध कर रहे हैं। जब कि केंद्र और उत्तरप्रदेश राज्य में हिंदुत्त्ववादी सरकार है फिर भी विकास , विकास और विकास के नाम पर प्राणप्रतिष्ठित देव विग्रहों की हत्या क्यों कि जा रही है। भगवान का पूजन, आरती, राग भोग इत्यादि प्राणप्रतिष्ठित मूर्तियों की होती है। ज्ञात हो कि काशी में पुराणों में वर्णित मंदिर हैं, अति प्राचीन मंदिर है जिनका रोजाना पूजार्चना की जाती है। ऐसी स्थिति में क्या हिंदुत्त्ववादी सरकार के मन मे कोई दया अपने आराध्य देवों पर नहीं आ रही है। विश्व के धार्मिक राजधानी के रूप में जाने जाना वाला काशी का ऐसा स्वरूप / हाल होगा शायद किसी ने कभी नहीं सोचा होगा। एक बात और गौर करने वाली है कि काशी के सनातन धर्मी जनता भी चुप है और वे क्यों चुप हैं यह वे ही बता सकते हैं। ऐसे परिस्थिति से प्रतीत होता है कि काशी की जनता शायद नास्तिक हो चुकी है या वे किसी कारण वश डरी हुई है। क्यों प्रहार हो रहे हैं सनातन धर्मियों के आस्था के केंद्र पर ? क्या मूर्ति, मन्दिर तोड़ने वालों के हाथ नहीं कांप रहे हैं ? यह किस तरह की विवशता है ? @ स्वामिश्री ने पूछा और कहा - ???? कहाँ हैं हमारे भगवान ? ???? टूटे में ही हम तो दर्शन कर के संतुष्ट हैं लेकिन मूर्ति को कम से कम टूटे में ही रहने दो। आप मूर्ति ही हटा दे रहे हो यह कहाँ का नियम है ?????यह विश्वनाथ जी के नाम से अनर्थ हो रहा है।???? जिम्मेदार अधिकारी आकर बताए हमें। ???? हम ने स्वयं नियम का पालन किया है । ???? यहां तो हमारी मूर्ति ही गायब है, हम को दर्शन करना है, ये कैसे होगा ? ऐसा कोई विकास नहीं होता ।

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