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विशेष

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28-November-2018
Posted Date

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- राम मंदिर को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे सरकार - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

काशी के सीरगोवर्धनपुर में आयोजित तीन दिवसीय सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 के 27 नवम्बर 2018 को समापन पश्चात 28 नवम्बर को सुबह केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में पत्रकार वार्ता में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने ने अपने परम धर्मादेश में सरकार से आग्रह किया कि यह जनहित से जुड़ा मामला है जिस हेतु राम मंदिर मुद्दे को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित कर आगामी शीत कालीन संसद सत्र में इस परम् धर्मादेश पर विचार कर संविधान में संशोधित करे। इस संशोधन के होने पर सर्वोच्चय न्यायालय को चार हफ्ते के अंदर अपना फैसला देना होगा अन्यथा जो स्टे लगा हुआ है वह स्वतः ही निष्प्रभावी हो जाएगा। आगे शंकराचार्य महाराज ने कहा कि यह परम धर्मादेश लोकसभा अध्यक्ष के साथ साथ सभी सांसदों को प्रतिलिपि भेजी जाएगी जिससे आगामी शीतकालीन सत्र में इस जनहित और अहम मुद्दे पर विचार हो सके और संविधान में संशोधन कर इसे राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे। लोकतंत्र में सरकार जनता के अविभावक के रूप में होती है इसलिए जनता की मांग को अविभावक को महत्त्व देना चाहिए साथ ही राम मंदिर मुद्दों को देश के चारों पीठ के शंकराचार्यों और धर्माचार्यों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। प्रेस वार्ता में दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के उपस्थिति में परम धर्मादेश को पढ़कर सुनाया। ज्ञात हो कि सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 का आयोजन स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने काशी के सीरगोवर्धनपुर में आयोजित किया जिसमें शंकराचार्य के साथ साथ देश के प्रमुख सिद्ध संत, महात्मा, धर्म सांसद व जनता सम्मिलित हुए। आज के प्रेस वार्ता में ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द , ब्रह्मचारी सहजानन्द, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, ब्रह्मचारी धारानन्द, ब्रह्मचारी शारदानन्द अन्य सन्त, महात्माओं के साथ लता पांडेय, चुन्नू पंडित, रमेश उपाध्याय, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, बबलू महाराज व आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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