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रेलवे सुरक्षा बल, डब्ल्यू.आर.एस. बैरक रायपुर में सबसिडिअरी कैन्टीन का शुभारंभ..

 
 
डब्ल्यू.आर.एस. बैरक रायपुर में रेलवे सुरक्षा बल सबसिडिअरी कैन्टीन का उद्घाटन कार्यक्रम में  आर.एस. चौहान, महानिरीक्षक- सह-प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त/रे.सु.ब. बिलासपुर, मंडल रेल प्रबंधक   कौशल किशोर की उपस्थिति में 31मई, को सेवानिवृत्त होने वाले   एस.के. सिंह, सहायक उप-निरीक्षक के द्वारा शुभारंभ किया गया । उद्घाटन कार्यक्रम में मंडल रेल प्रबंधक/रायपुर, मंडल सुरक्षा आयुक्त/रे.सु.ब. रायपुर, एवं रायपुर मंडल से अन्य शाखा अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ । 
 
रायपुर मुख्यालय रेलवे सुरक्षा बल सबसिडिअरी कैन्टीन प्रारंभ करने हेतु रेलवे बोर्ड द्वारा रेलवे सुरक्षा कल्याण निधी से सहायता राशि प्रदान की गई है तथा गृह मंत्रालय द्वारा रेलवे सुरक्षा बल सबसिडिअरी कैन्टीन को दैनिक उपयोग की सामग्री उपलब्ध कराने के लिये मास्टर कैन्टीन/सीमा सुरक्षा बल/भिलाई को अधिकृत किया है । रेलवे सुरक्षा बल सबसिडिअरी कैन्टीन प्रारंभ हो जाने से रायपुर मंडल के करीब 600 अधिकारियों एवं बल सदस्यों को सबसिडी दर पर दैनिक उपयोग की वर्तमान में 62 प्रकार सामग्री प्राप्त होगी। आवश्यकता अनुसार और सामग्री मगायी जायेगी। रेलवे सुरक्षा बल सबसिडिअरी कैन्टीन पूर्णतः कैशलेस एवं कार्यप्रणाली पूर्णतः कम्प्यूटरीकृत है। साथ ही कैन्टीन पी.ओ.एस. मशीन सुविधायुक्त एवं सी.सी.टी.व्ही. कैमरा की सुरक्षा से सुसज्जित है।
 
यह रेलवे सुरक्षा बल सदस्यों की काफी पुरानी मांग थी कि रायपुर मंडल मुख्यालय में एक सबसिडिअरी कैन्टीन की सुविधा मिले, जो कि   अनुराग मीना, मंडल सुरक्षा आयुक्त/रायपुर के काफी प्रयास से संभव हो पाया है । सबसिडी दर पर दैनिक उपयोग की सामग्री मिलने से बल सदस्यों में खुशी का माहौल है तथा रेलवे प्रशासन को धन्यवाद दे रहे है। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक(इंफ्रा)   शिव शंकर लकड़ा भी उपस्थित रहे।

महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने नागपुर से रायपुर तक हैदराबाद-रक्सौल एक्सप्रेस में किया रियर विंडो निरीक्षण

 

गजानन माल्या महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे आज प्रातः दक्षिण मध्य रेलवे सिकंदराबाद से बिलासपुर पहुंचे । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रभार के पश्चात गजानन माल्या का दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में यह पहला आधिकारिक दौरा  है ।

इस अवसर पर   गजानन माल्या, महाप्रबंधक, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने नागपुर से रायपुर तक हैदराबाद रक्सौल एक्सप्रेस में रियर विंडो निरीक्षण कर नागपुर-रायपुर रेलखंड पर रेल लाइन, सिग्नल कार्य तथा साइडिंग व इस मार्ग पर चल रहे हैं निर्माण कार्यों का जायजा लिए साथ ही उपस्थित दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अधिकारियों से इन सभी कार्यों के विषय में आवश्यक चर्चा भी किए ।

इस दौरान रायपुर स्टेशन पर मंडल रेल प्रबंधक   कौशल किशोर ने महाप्रबंधक से मुलाकात की।

महाप्रबंधक के साथ सचिव दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे   हिमांशु जैन, नागपुर से दुर्ग के बीच अपर मंडल रेल प्रबंधक, नागपुर,  बी.के. रथ, दुर्ग से रायपुर के बीच अपर मंडल रेल प्रबंधक, रायपुर  अमिताव चौधरी तथा नागपुर एवं रायपुर मंडल के अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

रेल यात्रियों के आरामदायक सफर के लिए अधिकाधिक आरक्षित बर्थ/ सीट की उपलब्धता हेतु अतिरिक्त कोच एवं भीड़भाड़ के समय विशेष रूटों पर स्पेशल ट्रेनों की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु रेलवे के द्वारा किए जाते है कार्य... पढ़े खबर

 
मार्च से मई-जून महीने के बीच दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा अलग-अलग ट्रेनों में लगाए जा रहे है  732 अतिरिक्त कोच एवं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से होकर चल रही है  236 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेन
 
 
 
 
भारतीय रेलवे द्वारा रेल यात्रियों को आरक्षित बर्थ/ सीट के साथ आरामदायक यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु लगातार कार्य किए जाते है । इसके लिए त्यौहारों, छुट्टियों एवं अन्य अवसरों जिसके दौरान ट्रेनों में ज्यादा भीड़भाड़ रहती है, ऐसे समय पर ट्रेनों में अतिरिक्त कोचों की सुविधा आदि उपलब्ध कराई जाती है साथ ही साथ अत्यधिक भीड़भाड़ वाले विशेष रूटों पर स्पेशल ट्रेनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है ।
 
इसी कड़ी में मार्च’ 2019 से जुलाई महीने तक अलग-अलग स्कूलों में शुरू होने वाली ग्रीष्मकालीन छुट्टियों, जिसमें लोग देश के अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर सैर-सपाटे के लिए जाते है तथा शादी ब्याह के सीजन,  के दौरान दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के द्वारा कुल 732 अतिरिक्त कोच मार्च महीने से मई-जून महीने तक अलग-अलग ट्रेनों में लगाए जा रहे है । इसके साथ ही साथ ज्यादा भीड़-भाड़ वाले रूटो में छत्रपति शिवाजी टर्मिनल–शालीमार, शालीमार-जयपुर, सिकंदराबाद-बरौनी, हैदराबाद-रक्सौल, सिकंदराबाद-दरभंगा एवं हबीबगंज-पुरी स्टेशनों के बीच मार्च से जून-जुलाई महीने तक 236 फेरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाए जा रहे है । इन स्पेशल ट्रेनों से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायगढ़-बिलासपुर-रायपुर-दुर्ग-गोंदिया-नागपुर रेल रूट के साथ ही साथ बिलासपुर-पेंड्रारोड-अनुपपुर-शहडोल-कटनी रूट के रेल यात्रियों को सुविधा मिल रही है ।
 
रेल प्रशासन यात्रियों से अनुरोध करती है कि शादी ब्याह एवं स्कूलों की छुट्टियों के दौरान भीड़-भाड़ के इस सीजन में यात्रा के दौरान असुविधा से बचने व सुखद रेल यात्रा के लिए नियमित ट्रेनों के अलावा रेलवे के द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिए चलाई जा रही इन स्पेशल ट्रेनों में भी यात्रा के लिए बर्थ आरक्षित कर अपनी यात्रा को सुखद बनावें ।

महिला ने फेंकी नवजोत सिंह सिद्धू पर चप्पल.... पढ़े पूरी खबर

 

नई दिल्ली। कांग्रेस के स्टार प्रचारक नवजोत सिंह सिद्धू की तरफ एक महिला ने चप्पल फेंकी, हालांकि चप्पल सिद्दू को नहीं लगी। घटना हरियाणा के रोहतक की है जहां सिद्दू कांग्रेस प्रत्याशी दीपेंद्र हुड्डा के प्रचार करने रैली को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने उनकी तरफ चप्पल फेंक दिया। ये चप्पल मंच के पास गिरा। पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया और उससे पूछताछ की।


महिला का नाम जितेंद्र कौर बताया जा रहा है। पुलिस ने इस घटना के पीछे महिला की नाराजगी को वजह बताया है। जब सिद्धू कार्यक्रम से वापस जाने लगे तो कुछ लोगों ने उन्हें काले झंडे दिखाए और मोदी-मोदी के नारे भी लगाए। इसे लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता और झंडे दिखाने वाले आमने-सामने आ गए। टकराव की स्थिति को देख पुलिस हरकत में आ गई और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया।

सारे मंत्री-पदाधिकारी मिलकर उठाएंगे नरवा,गरूवा,घुरवा,बारी योजना की जिम्मेदारी: CM

 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, नरवा, गरुवा, घुरवा, बारी पर सरकार ने अब काम शुरू कर दिया है। इसकी जिम्मेदारी सारे मंत्री और पदाधिकारी मिलकर संभालेंगे। गुरुवार को ये बातें प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने न्यू सर्किट हाउस में कही। उन्होंने आगे कहा कि  इस योजना की जिम्मेदारी किसी एक विभाग को नहीं दी जाएगी।  कैबिनेट के सभी मंत्री, कांग्रेस के सब पदाधिकारी, कार्यकर्ता इसकी जिम्मेदारी उठाएंगे।

अलग से आएगा बजट

सीएम बघेल ने कहा विधानसभा में भी प्रश्न किया गया। इस योजना के लिए अलग से बजट तैयार किया जाएगा क्या या किस विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी तो हमने साफ कर दिया कि ये योजना प्रदेश की जनता के लिए है और कांग्रेस के सभी मंत्री और विभाग अपने-अपने स्तर पर इस योजना का पूरा करेंगे।

कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनाव के पहले ही इस योजना की रूपरेखा बना ली थी और वादा किया था। सत्ता में आते ही इस पर काम किया जाएगा। और अब भूपेश सरकार की यह सबसे महत्वपुर्ण योजनाओं में से एक है जिसपर काम शुरू भी कर दिया गया है।  2019 के सत्रहवें लोकसभा चुनाव में 1298083 से ज्यादा मतदाता अपने क्षेत्र के सांसद का चुनाव करेंगे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का ट्वीट - पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने पर वायुसेना की ओर से किए गए हमले पर कहा , भारतीय वायुसेना को सलाम

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर पाकिस्तान में आतंकी ठिकाने पर वायुसेना की ओर से किए गए हमले पर कहा है कि भारतीय वायुसेना को सलाम करते हैं. अब वक्त आ गया है कि पूरी तरह से आतंकवाद को समाप्त कर दिया जाए. यह वक्त आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने फेंकने का है.।

मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद 3 लाख 35 हजार 675 मतदाताओं की वृद्धि : सुब्रत साहू

 

रायपुर:- मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुब्रत साहू शनिवार को पत्रकार वार्ता के दौरान ने बताया कि मतदाता सूची की प्रारंभिक प्रकाशन 26 दिसम्बर 2018 में किया गया था। उस समय मतदाताओं की संख्या 1करोड़ 85 लाख 80 हजार 610 थी जिसमें पुनरीक्षण के दौरान 3 लाख 35 हजार 675 मतदाताओं की वृद्धि हुई है। इसी प्रकार सेवा निर्वाचकों से संबंधित मतदाताओं की संख्या 15 हजार 758 है। जिसमें पुरूष मतदाता 15 हजार 182 है और महिला मतदाता की संख्या 576 है। अधिकतम मतदाता संख्या वाले विधानसभा कसडोल है जहां मतदाताओं की संख्या 3 लाख 39 हजार 701 है। वहीं न्यूनतम मतदाता वाले क्षेत्र मनेन्द्रगढ़ है। जहां मतदाताओं की संख्या 1 लाख 32 हजार 743 है। इसी तरह शिफ्टेड मतदाताओं की संख्या 81 हजार 782 है। वहीं दिव्यांग जन मतदाताओं की संख्या 1 लाख 70 हजार 492 है। पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं की संख्या 4 लाख 60 हजार 394 है। वहीं सुब्रत साहू ने कहा कि वाट्सअप और सोशल मीडिया पर भ्रामक खबर चली थी आॅनलाइन वोटिंग कर सकते हैं वे गलत है। जिस पोलिंग बूथ में जिसका नाम है उसे वहा जाकर ही वोटिंग करना होगा।

नक्सलियों के गढ़ महलापारा में बीएसएफ 114वी बटालियन ने किया सिविक एक्सन कार्यक्रम

आशीष कश्यप@BBN24- पखांजुर। घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र प्रतापपुर पंचायत के आश्रित गांव महला पारा जहां साल भर पहले नक्सलियों की मौजिदगी दिन रात रहा करती थी। बीएसएफ जवानों ने गुरुवार को सिविक एक्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें पहली बार लालआतंक के चीखों को चीरते हुए देशभक्ति के गीत से सारा गांव झूम उठा। क्षेत्र के सबसे बुजूर्ग महिला से फीता कटवाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। बीएसएफ के सुपरिटेंडेंट ऑफिसर जीएस धालीवाल एवं उनके अधिकारी आज ग्रामीणों के साथ आदिवासी समुदाय के नृत्य में ठुमके लगाए। धालीवाल का कहना है कि ग्रामीणों के साथ घुलमिलकर ग्रामीणों का दिल जीतना आसान हुआ है। आज ग्रामीणों को बीएसएफ पर भरोसा जागा है। बीएसएफ के महला में कैम्प लगाने पर महला एवं आसपास के अति संवेदनशील गांवों में विकास कार्य जोरो पर है। राहगीरों एवं ग्रामीणों के लिए कैम्प के सामने वाटर कूलर लगाया गया है ताकि गर्मियों के दिनों में लोगों को शीतल पेय जल पीने को मिल सके।

देश के विभिन्न हिस्सों से आए LGBTQ समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपने प्रेम अनुभवों को साझा किया

महाराष्ट्र  - वेलेंटाइन दिवस की पूर्व संध्या पर महाराष्ट्र के वर्धा में 'लैंगिक हिरासत और संघर्षशील प्रेम' पर केन्द्रित भब्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए LGBTQ समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपने प्रेम अनुभवों से संबंधित अनसुने किस्से और उनका मौखिक इतिहास साझा किया। कार्यक्रम का आयोजन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के महात्मा गांधी फ्यूजी गुरुजी सामाजिक कार्य अध्ययन केंद्र के कस्तूरबा सभागार में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों व शिक्षकों से पूरा सभागार खचाखच भरा हुआ था। कार्यक्रम का संचालन स्त्री अध्ययन विभाग की शोधार्थी प्रीति ने किया। कार्यक्रम में स्वागत वक्तव्य केंद्र के निदेशक प्रो. मनोज कुमार ने दिया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना शिवानी अग्रवाल ने रखी। लेस्बियन सबरी रैना ने उक्त मौके पर कहा कि, हम पितृसत्तात्मक समाज में रहते हैं और यहाँ हमें अपनी पहचान को स्वीकारने और बताने में दिक्कत होती है। LGBTQ समूह अपनी अस्मिता की लड़ाई हमेंशा लड़ती हुई दिखती हैं और फिर अगर वे इस समाज में तीसरे लिंग के साथ पैदा हुई हैं तब उनकी स्थिति और भी दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में स्थान पाती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि 'मैं खुशनसीब हूँ कि मेंरे परिवार ने इसे स्वीकारने में कोई दिक्कत महसूस नहीं की। उन्होंने मेंरी निजी अस्मिता को स्वीकारने और उसके साथ जीने की पूरी आजादी दी। मेंरे पड़ोस में ही एक लड़की ने आत्महत्या की थी क्योंकि वह होमोसेक्सुयल थी और उसके साथ यौन हिंसा की घटना हुई थी। मैं आपसे अनुरोध करती हूँ कि अगर आपको कोई बात अच्छी नहीं लगती तो उसका मजाक न बनाएँ बल्कि उनको स्वीकार्यता दें। वह भी आपके समाज में पैदा हुए हैं। वे भी अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने तक रहे हैं। हम (थर्ड जेंडर) लोग कैसे जियें, आज यह एक बड़ी चुनौती है।'
ट्रांसवुमेंन ऋतु बी. उमड़े ने अपने कॉलेज के दिनों के बारे में अपने संघर्षों को साझा करते हुए कहा कि 'स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षक उनके चलने को लेकर बेहद भद्दी टिप्पणियाँ करते थे। ठीक ऐसा ही व्यवहार मेंरे साथ पढ़ने वाले बच्चों का भी होता था। इस कारण मुझे कक्षा दस के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। ऐसे कठिन वक्त में मेंरी माँ ने उनका इसमें सहयोग किया और मेंरे स्कूल के शिक्षक और प्रिंसिपल से कहा कि बेटी हमारी है और पैसा भी हम दे रहे हैं तो आपको पढ़ाने में क्या दिक्कत है! इसके बाद से मैंने पढ़ाई फिर से शुरू किया। वे बताती हैं कि वर्धा में थर्ड जेंडर के लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है, उनके साथ यौन हिंसा आम बात हो गयी है। मेंरे पड़ोसी पूर्व में मुझसे समाज को खतरा मानते थे। वे हमारे अस्तित्व को अस्वीकार करते थे। वे कहते हैं कि आपका लिंग हमारे समाज का नहीं है। कुछ दिन पूर्व एक लड़के ने आत्महत्या कर ली क्योंकि उसके पिता उसे एक लड़की से शादी करने का दबाव डाल रहे थे। आज हम एक एनजीओ चलाते हैं जो शैक्षिक, लैंगिक स्वीकार्यता और संवेदनशीलता के लिए कार्य करता है।

 
छत्तीसग्ढ़ के दुर्ग से आई ट्रांसवुमेंन सोनाली ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं स्कूल के अलावा कहीं नहीं गयी हूँ क्योंकि मुझे बचपन से कहीं नहीं लेकर जाया जाता था जिसकी वजह से मेंरा सामाजिक बहिष्करण बहुत आसानी से किया जा सका। मेंरे पिता और मेंरे भाई मेंरी लैंगिक पहचान को लेकर बहुत शर्मिंदगी महसूस करते थे। मेंरे चलने के तरीके को वे ‘हक लेडी’ बुलाते थे क्योंकि मैं महिलाओं से थोड़ी भिन्न चाल चलती थी। मैं स्कूल में पढ़ने में बहुत अच्छी थी लेकिन मेंरे दोस्तों का व्यवहार बहुत अभद्र था वो मेंरी लैंगिक पहचान से मेंल खाती हुई पितृसत्तात्मक गालियों का उपयोग कर उपहास उड़ाते थे जिसकी वजह से मैंने पढ़ाई छोड़ी और फिर घर भी छोड़ दिया। घर छोड़ते वक्त मेंरे पास कुछ भी नहीं था। मैंने ट्रेन में भीख मांगी। होटलों में काम करके रुकती थी तो पुलिस का डर लगता था कि कहीं वह मुझे सेक्स वर्कर न समझ कर जेल में डाल दें। आगे उन्होंने कहा कि मैंने वहाँ से हिजड़ों के साथ जाना उचित समझा। मैं उनके साथ काम करती थी, खाना बनाती थी, गुरु की सेवा करती थी, उनके पैर दबाती थी। लेकिन एक दिन साथ के सदस्य ने मुझसे बुरा व्यवहार किया, फिर मैं छत्तीसगढ़ आ गई, वहाँ मेंरी मुलाक़ात अजय से हुई जिनसे बाद में मैंने शादी भी की। मेंरे सास-ससुर ने हमारी लैंगिक पहचान के पीछे वंश वृद्धि के क्रम के रुकने के प्रति चिंता जताई जिसे मैंने सामान्य व्यक्तियों के निसंतान रह जाने के सवाल से तुलना कर किसी और बच्चे को गोद लेने का विकल्प दिया। तब वह स्वीकारने को तैयार हुए।
 कार्यक्रम के अंत में छत्तीसगढ़ ट्रांसजेंडर बोर्ड की सदस्य एवं 'मितवा समिति' की रवीना बारीहा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एक सर्वे के अनुसार 6 राज्यों में 8 लाख ट्रांसजेंडर रहते हैं। जिन्हें 8 बिन्दुओं के आधार पर चिन्हित किया गया। जिसमें केवल 12 ट्रांसजेंडर हैं जो शादीशुदा जीवनयापन करते हैं बाकी किसी भी ट्रांसजेंडर का कोई पार्टनर नहीं है। आगे उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि वे समाज में सामने नहीं आ पाते हैं। यह एक माइंड सेट होता है जो समाज की मान्यताओं से तैयार होता है, जिसमें स्त्री- पुरूष ही जीवनसाथी के रूप में हो सकते हैं। मनोविज्ञान के मुताबिक अनुभव पहली कड़ी होती है जो मनुष्य के व्यवहार को बनाती है। समाज द्वारा हमारे व्यवहार को तैयार किया जाता है जिसमें फिल्म, सिरियल व अन्य माध्यमों का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए अपने आयु समूह के व्यक्तियों में ही संबंधों को स्वीकार किया जाता है। इसी प्रकार एक सिंगल व्यक्ति किसी विधवा से संबंध रखता है तो इसे समाज द्वारा स्वीकार नहीं किया जाता। इसी का परिणाम है कि समाज द्वारा ट्रांसजेंडर को स्वीकार नहीं किया जाता क्योंकि यह पहले ही समाज द्वारा निर्धारित है। तृतीय लिंग समुदाय का शरीर मन से भिन्न होता है किन्तु उनमें भी भावनाएं होती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने ट्रांसजेंडर के संबंधों व उनके सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं को बताया। समान लिंग में प्यार संबंध बनने के बाद परिवार वालों के दबाव के कारण तथा स्वयं के जरूरतों के कारण उन्हें अपने संबंधों को छोड़ना पड़ता है। इसी के फलस्वरूप करीमा नाम की ट्रांस महिला ने अपने आप को जला दिया। इसी प्रकार रानी नाम की ट्रांस महिला की उन्होंने कहानी बताया कि उसके साथी द्वारा छोड़े जाने पर वह डिप्रेशन में चली गयी थी। इसके लिए उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाया लेकिन पुलिस वालों ने यह कहकर उन्हें वापस भेज दिया कि उनकी शादी को कानून द्वारा मान्यता नहीं मिली है। वर्तमान समय में जरूरत है कि इन समस्याओं के कारणों की खोज करते हुए इन संबंधों को समाज, परिवार के दबाव से इन संबंधों को स्वीकार न कर पाने का डर आज भी है। वर्तमान समय में जब अंतरजातीय विवाह को समाज द्वारा पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया है तो समलैंगिक व ट्रांस संबंधों को स्वीकारना काफी कठिन है। उन्होंने लोगों से अपील की कि जब दिव्यांगजनो को सक्षम बनाने तथा मुख्य धारा से जोड़ने के लिए योजनाए व कार्यक्रम चलाए जाते हैं तथा उन्हें आर्थिक सहयोग दिया जाता है तो उसी प्रकार ट्रांसजेंडर समूह के लिए भी ऐसे कार्य किये जाने की आवश्यकता है। हाल ही में छतीसगढ़ राज्य में सर्वे से पता चला कि 27 ट्रांसजेंडर जोड़े हैं जो शादी के संबंध में बन्धे हुए हैं। समाज की मानसिकता इसके विरोध में क्यों खड़े हो रहे हैं इन्हें सोचने की आवश्यकता है तथा समाज द्वारा तैयार किये जा रहे माइंड सेट को तोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संघर्षशील प्रेम के विभिन्न आयाम हैं जो धर्म, जाति, रंग, लिंग इत्यादि के आधार पर हमारे सामने हैं। यह कार्यक्रम इसके विरोध में शंखनाद है वो दिन दूर नहीं जब हम प्रेमी स्वतंत्र होकर अपने संबंधों को स्वीकार कर पाएंगे। यह संघर्षशील प्रेम नई नहीं है यह पुराने समय से ही हमारे सामने विद्यमान है। पुराने समय में मंदिरो पर बनी मुर्तिया इसी बात का परिमाण है कि यह संघर्षशील प्रेम पहले से ही चली आ रही है। अंत में उन्होंने कहा कि यही आशा है कि ऐसी बिन्दुओं पर कोई प्रोग्राम करने की आवश्यकता न पड़े।
कार्यक्रम का समापन ट्रांसजेंडर मुद्दे पर शोध कर रहे डिसेन्ट कुमार साहू के वक्तव्य और डॉ. मुकेश कुमार के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक क्रमशः डॉ. शैलेश मर्जी कदम, डॉ. राकेश मिश्र, संदीप सपकाले, डॉ. अमित राय, संदीप वर्मा, डॉ. अमरेन्द्र शर्मा, डॉ. चित्रा माली, डॉ. अवन्तिका शुक्ला, डॉ. शिव सिंह बघेल, डॉ. पल्लवी शुक्ला, शरद जयसवाल, गुंजन सिंह, मनोज पाण्डेय, डॉ. सत्यम सिंह, डॉ. वीरेंद्र प्रताप यादव, गजानन निलामे, डॉ. आमोद गुर्जर, शिवाजी जोगदंड, ऋषभ मिश्रा, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. सुधीर ज़िंदे, डॉ. अस्मिता राजुरकर, डॉ. नरेश कुमार साहू, चैताली, हुस्न तबस्सुम, रजनीश अंबेडकर, ज्योति ललिता, रवीद्र रोहण, नुरीश, बृजेश चौहान, वासू पवार, नेहा सुपारे, ज्योति, खुशबू, दीप्ति, माधुरी, निकिता, नेहा, सोनल, सोनम, स्नेहा, प्रियंका, पुजा, सुधीर, नायिका सिंह, नितिन, धम्म रत्न, कौशल यादव, चन्दन सरोज, राज लक्ष्मी, दीपमाला, श्वेता कुमारी, वैभव, प्रणय कांबले, अमित कुमार चौबे, प्रेरित, राकेश विश्वकर्मा, पलाश किशन, परमेश्वर, सौरभ, गणेश, रवि चन्द्र, शिवाजी कार्ले, चंद्रकांत, पीहू, प्रतीक्षा, ब्यूटी, प्रीति, आबिद, राधेश्वरी, पन्ना लाल ध्रुवे, रक्षा, अनीता, विजय करण, रुशाली, वर्षा, तमिलनाडु विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य के शोधार्थी गंगाधर, रवीन्द्र सहित सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पहुंचे रायपुर एयरपोर्ट, कार्यक्रम स्थल के लिए हुए रवाना

रायपुर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ दौरे पर आज रायपुर पहुंच गए हैं. वे यहां किसान आभार रैली में हिस्सा लेंगे. प्रदेश में सरकार बनने के बाद ये दूसरा मौका है जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं. इससे पहले वे नई सरकार के शपथ ग्रहण के अवसर पर पहुंचे थे. जब सीएम भूपेश बघेल, मंत्री टीएस सिंहदेव और ताम्रध्वज साहू ने शपथ ली थी.

राहुल गांधी दोपहर तकरीन 2ः30 बजे  स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पहुंचे. जहां सीएम भूपेश बघेल और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने उनका स्वागत किया. जिसके बाद वे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हो गए.
आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रचार के दौरान किसानों से कांग्रेस के पक्ष में वोट देकर सरकार बनाने का आह्वान किया था. लिहाजा अब कांग्रेस अध्यक्ष किसानों को उनके समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद देने उनका आभार जताने के लिए वापस छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं.

गौरतलब है कि देशभर के किसान ऋण माफी, फसलों का सही दाम सहित कई मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे. दिल्ली में कई बार किसानों ने धरना प्रदर्शन भी किया. वहीं राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव से पहले किसानों से उनका कर्ज 10 दिनों के भीतर माफ करने का वादा किया था. भूपेश बघेल के नेतृत्व में जैसे ही कांग्रेस की सरकार ने शपथ लिया उसके कुछ घंटे बाद ही सीएम ने किसानों का कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी थी. इसके साथ ही सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये भी कर दिया. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जहां किसानों की फसल का सर्वाधिक समर्थन मूल्य सरकार द्वारा दिया जा रहा है.

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