राज्य

NDA में दरार, LJP 143 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

नई दिल्लीः-आज चिराग पासवान की अध्यक्षता में लोक जन शक्ति पार्टी की बिहार प्रदेश संसदीय बोर्ड की बैठक हुई। दिल्ली में हुई इस बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव संबंधित सभी प्रकार के निर्णय के लिए चिराग पासवान को अधिकृत किया गया। बैठक के दौरान बिहार संसदीय बोर्ड में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

दोपहर को शुरू हुई इस बैठक में आगामी चुनाव को लेकर पार्टी को 143 विधानसभा सीट पर प्रत्याशियों की सूची बनाकर जल्द केंद्रीय संसदीय बोर्ड को देने पर चर्चा हुई। साथ ही विधानसभा चुनाव में NDA में बने रहने या किसी अन्य फैसले पर निर्णय को लेकर लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को तय करने पर सहमति बनी है।

बैठक में सीट बंटवारे के अलावा एनडीए में बने रहने या नहीं बने रहने पर फैसला लिया जा सकता है। इसके साथ जनता दल यूनाइटेड के साथ पार्टी के रिश्तों पर भी फैसला संभव है। बता दें कि चिराग पासवान इन दिनों नीतीश सरकार को कटघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। आजकल वो जेडीयू पर हमलावर हैं। दूसरी तरफ एनडीए में शामिल हुए हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के अध्यक्ष जीतनराम मांझी जेडीयू को ढाल बनकर चिराग पासवान पर हमलावर हैं।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी की इस बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं। कयास लगाया जा रहा है कि पार्टी जदयू के खिलाफ मोर्चा खोल सकती है। उधर जेडीयू ने भी स्पष्ट किया है कि वह एलजेपी के साथ सीटों की साझेदारी को लेकर कोई बात नहीं करेगी क्योंकि जेडीयू के संबंध परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ हैं।

Bihar Election: चुनाव से पहले सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षकों के वेतन में 15 फीसदी की वृद्धि

पटना- बिहार में होनेवाले विधानसभा चुनाव 2020 से पहले नितीश सरकार ने आज प्रदेश के शिक्षकों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने शिक्षकों के वेतन में वृद्धि करने का बड़ा फैसला किया है। इसके तहत पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के शिक्षकों के मूल वेतन में 15 प्रतिशत का इजाफा किया गया है।  हालांकि इसका लाभ शिक्षकों को अप्रैल 2021 से मिलेगा।

अभी हाल ही में पंचायती राज और शहरी निकायों के शिक्षकों की नई सेवा शर्त नियमावली को राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिल गई थी। जिसके तहत लाखों शिक्षकों को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) का लाभ इसी साल सितंबर महीने से ही दिया जाएगा। साथ हीं इन शिक्षकों के मूल वेतन में 15 प्रतिशत की वृद्धि भी की गई है, जिसका लाभ एक अगले साल अप्रैल से मिलेगा।


 सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्तमान शिक्षकों के जुलाई और अगस्त के वेतन के लिए 1560 करोड़ जारी होंगे। कैबिनेट ने राशि जारी करने की स्वीकृति दे दी है। 

नई नियमावली के तहत प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के योग्य शिक्षकों का प्रोमोशन होगा। वहीं माध्यमिक विद्यालय और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 50 प्रतिशत पद प्रमोशन से ही भरे जाएंगे। योग्य शिक्षकों का प्रमोशन कर हेड मास्टर भी बनाया जायेगा। 

सरकार के इस फैसले को लोग चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं। इस साल के अंत में राज्य में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ऐसे में नीतीश कुमार सरकार का ये फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।

ऐच्छिक स्तानांतरण का लाभ
महिला और दिव्यांग शिक्षकों तथा पुस्तकालयाध्यक्षों को अपने नियोजन इकाई तथा अपने जिले से बाहर एक बार ऐच्छिक स्थानांतरण का लाभ मिलेगा। वहीं पुरुष शिक्षकों तथा पुस्तकालयाध्यक्षों को इसका लाभ आपसी सहमति (पारस्परिक) से मिलेगा। आरके महाजन ने कहा कि कई महिला शिक्षक थी, जो शादी से पहले से नियुक्त थी, पर बाद में उन्हें दिक्कत होने लगी। इस फैसले से ऐसी महिला शिक्षकों को भी काफी लाभ होगा।

Bihar Election: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज, कहा चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग स्वतंत्र

नई दिल्लीः कोविड-19 महामारी के दौरान चुनाव कराने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। बिहार विधानसभा चुनाव को कोरोना संक्रमण के चलते टालने की मांग को लेकर लगाई गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि कोरोना के चलते बिहार विधानसभा चुनाव को टाला नहीं जा सकता।

कोरोना प्रसार को रोकने की दलील देते हुए बिहार विधानसभा चुनाव टालने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। जनहित याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के उस बयान का उल्लेख किया गया जिसमे विधानसभा चुनाव तय समय में कराये जाने की बात कही गयी थी। चुनाव आयोग के अनुसार बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव तय समय पर कराये जाने की बात कही गयी थी।

आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने भी बिहार में विधानसभा चुनाव तय समय पर कराये जाने बात कही थी। साथ ही कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए जाने वाले इंतजाम का गाइडलाइन भी जारी की थी। इसका जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग स्वतंत्र है। सर्वोच्च न्यायलय चुनाव आयोग को निर्देश नहीं दे सकता।

गौरतलब है की पटना उच्च न्यायलय ने इस तरह की बिहार चुनाव टालने की मांग से जुड़ी हुई दो जनहित याचिकाओं पर संज्ञान नहीं लिया था।

Bihar Election: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज, कहा चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग स्वतंत्र

नई दिल्लीः कोविड-19 महामारी के दौरान चुनाव कराने वाला बिहार देश का पहला राज्य है। बिहार विधानसभा चुनाव को कोरोना संक्रमण के चलते टालने की मांग को लेकर लगाई गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को इस मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि कोरोना के चलते बिहार विधानसभा चुनाव को टाला नहीं जा सकता।

कोरोना प्रसार को रोकने की दलील देते हुए बिहार विधानसभा चुनाव टालने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। जनहित याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के उस बयान का उल्लेख किया गया जिसमे विधानसभा चुनाव तय समय में कराये जाने की बात कही गयी थी। चुनाव आयोग के अनुसार बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव तय समय पर कराये जाने की बात कही गयी थी।

आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने भी बिहार में विधानसभा चुनाव तय समय पर कराये जाने बात कही थी। साथ ही कोरोना संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए जाने वाले इंतजाम का गाइडलाइन भी जारी की थी। इसका जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव कराने के लिए निर्वाचन आयोग स्वतंत्र है। सर्वोच्च न्यायलय चुनाव आयोग को निर्देश नहीं दे सकता।

गौरतलब है की पटना उच्च न्यायलय ने इस तरह की बिहार चुनाव टालने की मांग से जुड़ी हुई दो जनहित याचिकाओं पर संज्ञान नहीं लिया था।

ग्राउंड रिपोर्ट तैयार करने के लिए उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व में भाजपा की टीमें जुटीं

पटनाः आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार में राजनीतिक पार्टियां जोरों-शोरों से तैयारियों में जुटी हैं। पक्ष और विपक्ष कोई भी पार्टी चुनाव में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ने वाले हैं। इधर, भाजपा ने भी अपनी चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। हिन्दुस्तान के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल सहित पार्टी के दर्जनों नेताओं ने मंगलवार से बिहार के हर विधानसभा क्षेत्र में दौरा शुरू कर दिया है। भाजपा के सभी नेता जमीनी स्तर पर पार्टी की वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे। 

जानकारी के मुताबिक नेताओं को ये काम सौंपा गया है कि वह हर विधानसभा में जाकर पता करेंगे कि किस पार्टी की स्थिति कैसी है। एनडीए के साथ महागठबंधन की क्या स्थिति है। अगर एनडीए की स्थिति बेहतर है तो कौन सा प्रत्याशी किस दल के लिए उपयुक्त होगा, इसका भी आकलन पार्टी नेता करेंगे। पिछले चुनाव को देखते हुए पार्टी के प्रदर्शन का भी लेखा-जोखा किया जाएगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि अगर मौजूदा विधायक हैं तो क्षेत्र में उनका कामकाज पिछले 5 सालों में कैसा रहा है और उनकी जनता के बीच क्षेत्र में छवि कैसी है।

बहरहाल, सिर्फ 5 दिनों तक ही भाजपा ने यह विशेष अभियान चलाया है। उसके बाद पाटी देखेगी कि भाजपा की ग्राउंड लेवल पर क्या स्थिति है। भविष्य में चुनाव में होने वाले सीट बंटवारे से लेकर प्रत्याशियों के चयन तक, यह दौरा काफी उपयोगी साबित होने वाला है। 

भाजपा ने इसके लिए 23 टीमों का गठन किया है। सभी टीमों में कम से कम 2 और अधिकतम 3 सदस्य रखे गए हैं। सभी टीमों को कम से कम 8 और ज्यादा से ज्यादा 14 विधानसभा सीटों की रिपोर्ट लाने की जिम्मेदारी दी गई है। टीम के नेताओं का काम है कि वो क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों से लेकर स्थानीय नागरिकों से बात कर रिपोर्ट तैयार करें। 

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय के इस्तीफे की खबर से मचा हड़कंप, ट्वीट कर नकारा

पटनाः बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। विकास दुबे केस से लेकर सुशांत केस तक वो अपने बयानों को लेकर काफी सक्रिय रहे। अभी हाल ही में बिहार के किसी पोर्टल पर उनके इस्तीफा देने की खबर वायरल हो गई। जिसके बाद बिहार प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गहमागहमी फैल गई। पांडेय ने ट्वीट कर इस खबर को अफवाह करार दिया और झूठी खबर पर, पत्रकारिता के स्तर पर उंगली उठाई।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने ट्वीट कर कहा, अभी बिहार के एक पोर्टल न्यूज ने मेरे नौकरी से इस्तीफा देने के बारे में एक झूठी खबर चला कर सनसनी फैला दी है। इसको किस स्तर की पत्रकारिता कहेंगे आप?

हालांकि यह खबर कहां से आई इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाई है, लेकिन रविवार की देर शाम से यह खबर बड़ी तेजी से फैली। इस संबंध में डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से अफवाह है। इस खबर में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। जिस किसी ने भी इस तरह की खबर फैलाई वह पूरी तरह से गलत है।

सुशांत सिंह राजपूत केस में रिया चक्रवर्ती पर अपने बयान औकात पर सोशल मीडिया में ट्रोल हुए थे डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय। ट्रोल होने के बाद बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने अपनी सफाई दी। डीजीपी ने एक बयान में कहा था कि औकात का अंग्रेजी में मतलब ‘कद’ से है। रिया चक्रवर्ती का ऐसा कद नहीं है कि वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर कोई कमेंट कर सके। उन्होंने कहा कि उसे नहीं भूलना चाहिए कि वह सुशांत सिंह राजपूत केस में नामजद आरोपी है, जो केस मेरे पास था और अब सीबीआई के पास है।

डीजीपी ने कहा था कि अगर कोई राजनीतिक नेता बिहार के सीएम पर टिप्पणी करता है तो मैं इस पर टिप्पणी करने वाला कोई नहीं हूं। लेकिन अगर कोई आरोपी बिहार के सीएम पर कुछ बेबुनियाद टिप्पणी करता है तो यह आपत्तिजनक है। रिया चक्रवर्ती की टिप्पणी अनुचित थी उसे अपनी लड़ाई कानूनी रूप से लड़नी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि बिहार कैडर के 1987 बैच के IPS गुप्तेश्वर पांडेय ने 2009 में लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस ले लिया था। वे बीजेपी के टिकट पर बक्सर सीट से लड़ना चाहते थे। टिकट नहीं मिलने पर आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय ने वीआरएस वापस लेने की अर्जी दी। जिसे नीतीश सरकार ने मंजूर करके करीब 9 महीने बाद उन्हें एक बार फिर सर्विस में रख लिया और लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें प्रमोशन देते हुए बिहार का डीजीपी बना दिया गया।

नीतीश का मास्टर स्ट्रोक, होगी मांझी की घर वापसी...

पटनाः जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव पास आता जा रहा है, चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ता ही जा रहा है। अक्सर चुनाव नजदीक अपने पर दल-बदल की राजनीति शुरू हो जाती है और सियासी समीकरण बदलने लगते हैं। बिहार में ठीक इसी तर्ज पर हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया है। पहले श्याम रजक के पार्टी छोड़ने की बात चली, फिर अचानक पार्टी ने ही रजक को निष्कासित कर दिया। रजक ने निष्कासन की खबर सुनते ही आरजेडी में जाने की घोषणा कर दी है। इससे लग रहा है कि जेडीयू के लिए आने वाले चुनाव में राह आसान नहीं होगी।

आपको बता दें कि श्याम रजक पार्टी का एक दलित चेहरा था, जिसके जाने से पार्टी को आने वाले चुनाव में दलित वोटों का नुकसान झेलना पड़ सकता है। लेकिन जेडीयू ने भी कमर कस ली है। नीतीश कुमार किसी भी कीमत पर दलित वोट को खोना नहीं चाहेंगे। इसलिए नीतीश अब इस नुकसान की भरपाई करने में जुट गए हैं। वह इस समय जीतनराम मांझी के संपर्क में हैं और रजक के जाने से जो नुकसान पार्टी को हुआ है, उसकी भरपाई में लग गये हैं। सूत्रों की मानें तो मांझी महागठबंधन से जल्दी ही नाता तोड़कर जेडीयू का दामन थाम सकते हैं।

दूसरी तरफ, श्याम रजक ने आरजेडी में शामिल होते ही अपना दलित कार्ड खेल दिया है। रजक ने कहा, ‘‘मैंने 2 अप्रैल को दलित उत्पीड़न के खिलाफ विधानसभा वेल में आकर प्रदर्शन किया था, तभी से मैं उन लोगों की नजर में खटकने लगा था। वे सोच रहे थे कि दलितों की बात करने वाला कैसे आगे बढ़ रहा है। बिहार का कोई ऐसा थाना नहीं है जहां दलितों के साथ हत्या, बलात्कार और छेड़खानी नहीं होती। दलित, पिछड़ा और मुस्लिमों के साथ हो रहे अत्याचार के चलते मैं तड़प रहा था।’’

बहरहाल, श्याम रजक ने आरजेडी की गोद में जाते ही नीतीश कुमार को दलित विरोधी करार दे रहे हैं। दलित नेता उदय नारायण चैधरी पहले ही जेडीयू से अलग हो चुके हैं। वहीं, एलजेपी प्रमुख चिराग पासवान भी इन दिनों नीतीश कुमार से नाराज़ दिखाई दे रहे हैं और उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। इस तरह पार्टी के दिग्गज दलित नेताओं की नाराजगी कहीं जेडीयू को आने वाले चुनाव में संकट में न डाल दे। इसीलिए नीतीश कुमार दूरर्शिता दिखाते हुए जीतनराम मांझी के संपर्क में हैं। उनके आने से दलित वोट बैंक फिर से पार्टी के पक्ष में आ सकता है।

श्याम रजक के मोर्चा खोलते ही मांझी मुख्यमंत्री नीतीश के साथ खड़ नज़र आए। मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार दलित विरोधी हैं तो श्याम रजक इतने दिनों तक उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी के रूप में कैसे काम करते रहे। चुनाव के समय जब वो आरजेडी में चले गए हैं और जेडीयू ने उन्हें मंत्रिमंडल एवं पार्टी से निकाल दिया है तब वे इस तरह की बाते कर रहें हैं जिसे सही नहीं कहा जा सकता है। मांझी ने कहा कि श्याम रजक मंत्रिमंडल में इतने दिनों तक लाभ लेने के बाद चुनाव के समय में नीतीश कुमार को दलित विरोधी कह रहें हैं, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता है।
आपको बता दें कि जीतनराम मांझी की घर वापसी को लेकर जेडीयू की तरफ से काफी समय से कवायद चल रही थी। जेडीयू चाहती है कि मांझी की पार्टी ‘हम’ का पूरी तरह से जेडीयू में विलय हो जाए, लेकिन ऐसा नहीं होने की सूरत में मांझी की पार्टी के साथ कुछ सीटों पर समझौते का फॉर्मूला तय किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो 20 अगस्त को जीतन राम मांझी अपनी पार्टी के सियासी भविष्य को लेकर बड़ा फैसला करने वाले हैं, क्योंकि उसी दिन उन्होंने अपनी पार्टी की कोर कमेटी की बैठक बुलाई है।

इस तरह से बिहार चुनाव नजदीक आने के साथ ही दलित मतों को अपनी ओर खींचने की कवायद तेज हो गई है। श्याम रजक के जाने और चिराग पासवान के विरोधाभाषी तेवर के चलते नीतीश दलित मतों को साधने के लिए मांझी के घर वापसी की नूराकुश्ती तेज हो गई है। ऐसे में अगर नीतीश का पासा सही पड़ा तो मांझी के पार्टी में आते ही दलित वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। अब देखना ये है कि आने वाले चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाला, सचिव ने किया फर्जी जियोटैगिंग से राशि का गबन, सचिव का हुआ स्थानांतरण, न वसूली हुई न आवास बने।

बीजापुर :- वर्ष 2016 में भैरमगढ़ ब्लॉक के केतुलनार ग्राम पंचायत में 64 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए थे जिसमें कुछ आवासों को बेतरतीब निर्माण किया गया वहीं करीब 12 आवासों का सचिव ने फर्जी जियोटैगिंग बताकर राशि आहरण कर लिया जिनका निर्माण कार्य शुरू भी नही हुआ है। इस मामले में 30/12/2019 को सीईओ जनपद पंचायत भैरमगढ़ ने सचिव रामबती भोगामी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया मगर अब तक दोषी सचिव पर कोई कार्यवाही नही हुई है। और न ही आवासों का काम शुरू हो पाया है। हालात ये हैं जिनका कार्य पूर्ण भी बताया गया वहां मवेशी ही सो रहे हैं। क्योंकि प्लास्टर और फ्लोरिंग के बगैर इंसानों का सोना और रहना संभव नही है।

जिले के कुटरू थानाक्षेत्र में केतुलनार ग्राम पंचायत आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं जहां की 80% आबादी कम पढ़ी लिखी है। हिंदी बोलने में भी कठिनाई होती है।  भाजपा शासनकाल में यहां 64 प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति मिली थी। जिसमे प्रत्येक आवास के लिए 1 लाख 30 हजार की राशि और मनरेगा से 15 हजार यानी कुल 1 लाख 45 हजार की राशि स्वीकृत हुई थी। 

सचिव पति श्रीनिवास झाड़ी ने यहां कुछ हितग्रहियों के यहां आवास का कार्य प्रारंभ कराया मगर नियमो को ताक पर रखकर पूरा निर्माण कार्यो का खेल खेला गया। तकीनीकी आधार पर लगभग सभी आवास बिना ड्राइंग के बने होने की वजह से अलग अलग हैं। वहीं आधे अधूरे मकानों को उनके हाल पर छोड़कर राशि निकाल ली गई है।

ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें सचिव पति नैमेड और बीजापुर बैंक लेजाकर पूरी स्वीकृत एक लाख तीस हजार की राशि दुकानदार को देने के नाम पर निकाल लिया करता था। आज भी दर्जनों मकान ऐसे हैं जहां स्लैब तक नही डाली गई है। दर्जनों मकानों की छत 7-8 फ़ीट ऊंची है कहीं खिड़की नही तो कहीं वेंटिलेटर नही। कई मकानों में सचिव ने मुख्य द्वार में दरवाजे तक नही लगवाए हैं। और जियोटैगिंग कर पूरा भुगतान का खेल खेल डाला और अधिकारियों को खबर तक नही नही होना दुखद और हास्यपद है। 

रिकॉर्ड में आज 54 प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हैं। 12 आवासों का काम चल रहा है वहीं 7 आवासों की पूरी राशि सचिव और सचिव पति ने हजमकर डकार तक नही ली है। जनपद पंचायत सीईओ द्वारा सचिव रामबती भोगामी को कारण बताओ नोटिस जारी कर लिखा है कि आपके द्वारा किये जियोटैगिंग के आधार पर उच्च कार्यालय द्वारा सत्यापित कर हितग्राही के खाते में राशि जारी करने की प्रक्रिया पूर्ण की गई है। निर्मित आवासों का भौतिक सत्यापन किये जाने पर आपके द्वारा निर्मित आवासों का नही बनना पाया गया। जिससे से प्रतीत होता है कि आप उच्च कार्यालय को गुमराह एवं फर्जी तरीके से आवासों को पूर्ण बताया गया है। जो सिविल सेवा आचरण 1998 के नियम के विपरीत कदाचार की श्रेणी में आता है। क्यो न आपके निलंबन का प्रस्ताव सक्षम अधिकारी को भेजा जाए।

30 दिसंबर 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बावजूद आज पर्यंत सचिव पर कोइ कार्यवाही नही हुई है और न ही सचिव से राशि की वसूली की गई और न ही आजतक प्रधानमंत्री आवास के भवन पूर्ण हो पाए हैं।

ग्रामीणों ने कई दफ़े अधिकारियों को गुहार लगाई मगर सचिव रामबती भोगामी और पति श्रीनिवास झाड़ी पर कोई फर्क नही पड़ा। पंचायत के हितग्रहियों के पैसे पर आलीशान मकान और लक्ज़री गाडियो का आनंद ले रहे सचिव के कारण केतुलनार ग्राम पंचायत के लोग अपने पक्के मकान की आस में मिट्टी के घरों में ही सो रहे हैं।

हितग्राही  शंकर पोयाम ने बताया कि वर्ष 2016 में जब मेरे पिता मोजो पोयाम के नाम आवास स्वीकृत हुआ था तब पिता जीवित थे उसी दरमियान सचिव उन्हें नैमेड बैंक ले गया और पूरी राशि निकाल ली। लगातार हमारे द्वारा आवास निर्माण की मांग करने पर हमे डराता और नक्सल मामले में जेल भेजने की धमकी देता था। मेरे पिता बिना स्वीकृत मकान की खोदाई देखे ही गुजर गए। शिकायत के बाद उसने काम शुरू किया लेकिन खिड़की स्तर तक कार्य सचिव मनमानी काम कर रहा है। 

दूसरे हितग्राही सुखराम की माने तो उसकी दादी के नाम आवास स्वीकृत हुआ था जिसको बैंक लेजाकर सचिव ने पूरी राशि निकाली और 4 सालो तक मकान अधूरा पड़ा हुआ है। शिकायत के काम शुरू करता है और कुछ दिनों बाद बंद कर देता है। जिसकी शिकायत कलेक्टर को हमने की थी लेकिन आज तक आवास पूरा नही बना है।

दीसरे हितग्राही कारे के नाम भी प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ था मकान बना भी मगर सभी मापदंडों से जुदा। आवास में न दरवाजे लगे, न खिड़की और न ही ढंग की स्लैब है यहां तक कि स्लैब की ऊंचाई 8 फ़ीट से ज्यादा ऊंची नही है। स्लैब में छड़ स्पष्ठ नजर आ रहे हैं। सचिव पति कहता है कि बस आवास बन गया। मुख्य द्वार पर मच्छरदानी और लकड़ी की गेट लगाकर हम सोते हैं।

इस मामले में मुख्यकार्यपालन अधिकारी भैरमगढ़ ए के अरकरा ने बताया कि सचिव रामबती भोगामी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था लेकिन सचिव ने कोई जवाब नही दिया जिसके संबंध में उच्चाधिकारियों को जानकारी दी गई है। सचिव द्वारा अपूर्ण कार्यो को पूरा करने का आश्वासन दिया जा रहा है लेकिन कार्य पूर्ण नही करना घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। जिस पर कार्यवाही की जाएगी।

कोरोना के बढ़ते आंकड़ों के मद्देनज़र, पटना में 15 अगस्त तक बढ़ सकता है लॉकडाउन

पटनाः बिहार की राजधानी पटना में पिछले 24 घंटों में 552 नए कोरोना के मरीज मिले हैं। लगातार चैथे दिन पटना में एक दिन में 500 से ऊपर मरीज मिले हैं। पटना शहर में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसको देखकर लग रहा है कि पटना में 15 अगस्त तक लॉकडाउन बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल राजधानी में 31 जुलाई तक लॉकडाउन है।

सोमवार को अधिकतम कोरोना पाॅजिटिव मामले पटना में दर्ज किए गए थे, जहां 552 लोगों का कोरोनो वायरस का सकारात्मक परीक्षण किया था। पटना में चार दिन से लगातार 500 से ऊपर मामले दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही पटना में कोरोना पाॅजिटिवों संख्या बढ़ कर 7,067 हो गई है। हालांकि, 4171 लोग अब तक इस बीमारी से रिकवर हो चुके हैं। जिले में अभी 3007 एक्टिव मरीज हैं, जबकि 41 की मौत हो चुकी है। जिन अन्य जिलों में बड़ी संख्या में कोरोना के मामले दर्ज किए गए उनमें सुपौल (78), भोजपुर (77), पश्चिम चंपारण (76), गया (74), रोहतास (69) और मुजफ्फरपुर (64) शामिल हैं।

बिहार में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,192 नये केस मिले हैं। इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 40,000 को पार कर गया है। सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार रविवार को 812, शनिवार को 1048 और शुक्रवार को 332 पॉजिटिव पाये गये। यह लगातार तीसरा दिन है, जब नये केसों का आंकड़ा 2100 के पार है। इसके साथ ही संक्रमितों की संख्या 41,111 तक पहुंच गयी है।

जुलाई के महीने में अब तक 30,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई को कोरोना संक्रमितों की संख्या 10075 थी, जो अब बढ़कर चार गुना हो गई है।

सुरक्षाबल से मुठभेड़ में 4 नक्सली ढेर, 2 ग्रामीणों की अगवा कर हत्या

 

पटनाः एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) और एसटीएफ के संयुक्त टीम ने चार नक्सलियों को बेतिया जिले मे हुई मुठभेड़ में मार गिराया। दोनों ओर से 15 मिनट से ज्यादा अंधाधुंध फायरिंग हुई। मारे गए नक्सलियों से 3 एसएलआर, 3 नॉट 3 की राइफल और एक सीरीज का हथियार बरामद किया गया है। जानकारी के मुताबिक नक्सली आईईडी ब्लास्ट कर भाग रहे थे। दूसरी घटना बिहार के मुंगेर जिले की है, जिसमें नक्सलियों ने दो ग्रामीणों को अगवा कर उनकी निमर्मता से हत्या कर दी।

न्यूज एजेंसी एनएनआई के हवाले से, पश्चिम चंपारण के बगहा इलाके में सशस्त्र सीमा बल और एसटीएफ के संयुक्त अभियान में चार नक्सली मारे गए। एसएसबी आईजी ने बताया, ‘‘ऑपरेशन के दौरान एक इंस्पेक्टर के हाथ पर गोली लगी है। हथियार बरामद हुए और अन्य नक्सलियों की तलाश जारी है।’’
 
एक दूसरी घटना में गुरुवार देर रात बिहार के मुंगेर जिले में नक्सलियों ने हमला कर दिया। घटना हवेली खड़गपुर प्रखंड के बघेल गांव की है। बताया जा रहा है कि देर रात 15 से 20 की संख्या मे वर्दीधारी नक्सली बघेल गांव पहुंचे। इनमें कई महिला नक्सली भी शामिल थे। नक्सलियों ने दो ग्रामीणों को अगवा कर उनकी हत्या कर दी। शुक्रवार सुबह दोनों का सिर क

बिहार आता तो बच नहीं पाता, मध्य प्रदेश पुलिस को बधाई: डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे

पटनाः कानपुर में बिकरू गांव में हुए शूटआउट मामले में पुलिस को फरार अभियुक्त विकास दूबे आज उज्जैन में गिरफ्तार हो गया। इससे पहले, हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के बिहार में छिपे होने की खबरों पर राज्य के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने बड़ा बयान दिया था। डीजीपी  गुप्तेश्वर पांडे ने कहा कि यूपी के कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों हत्या करके हिस्ट्रीशीटर विकास दूबे बिहार में घुस आएगा और यहां से सुरक्षित निकल जाएगा? यह कैसे हो सकता है? लेकिन आज उसके उज्जैन पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने मध्य प्रदेश पुलिस की प्रशंसा की और बधाई दी।

बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने न्यूज एजेंसी एएनआई को कहा, ‘‘मैं विकास दुबे की गिरफ्तारी पर मध्य प्रदेश पुलिस को सलाम करता हूं और बधाई देता हूं। हम भी अलर्ट पर थे। अगर वह यहां आया होता, तो हम भी उसे पकड़ लेते। वह बिहार नहीं आया क्योंकि मैंने कहा था कि अगर वह यहाँ आता है, तो वह बच नहीं पाता।’’ 

आपको बता दें कि सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार चल रहे मुख्य आरोपी विकास दुबे पर अब इनाम की राशि बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दी गई थी। इस हत्याकांड को अंजाम देकर फरार चल रहे विकास दुबे की गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी। 40 थानों की फोर्स, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम चप्पे-चप्पे पर उसकी तलाश में लगी थी। बावजूद इसके लगभग सप्ताह बाद वो पुलिस के हत्थे चढ़ा है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

फर्जी कम्पनियां बनाकर करते थे टैक्स चोरी, आरटीआई के जरिए होगा खुलासा

चंडीगढः लगभग दो वर्ष पूर्व सिरसा शहर में आम लोगों के नाम से फर्जी कम्पनियां बनाकर करोड़ों रूपये का लेनदेन कर टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। आईजी स्पेशल टीम ने एक व्यापारी से भावदीन टोलनाका पर 1 करोड़ 10 लाख रूपये जब्त किया थे। लेकिन आज तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई, इसके बारे में कोई भी खबर सामने नहीं आई। इस मामले में शिवकुमार जिंदगर ने आयकर विभाग से इस मामले की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है। आरटीआई में उन्होंने पूछा है कि भावदीन टोलनाका पर जब्त किए गए एक करोड 10 लाख रूपये के मामले में आयकर विभाग व पुलिस विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की गई। इस फर्जीवाड़े से जुड़े सरगनाओं अपने बचाव के लिए पहले से ही रास्ते ढूंढ रखे हैं, मगर आरटीआई लगाने के बाद इस मामले की सच्चाई बाहर आ ही जाएगी। शिवकुमार ने आयकर विभाग से आरटीआई के माध्यम से पूछा है कि मई 2018 में हुए खुलासे के बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया गया है? किस विभाग ने क्या कार्रवाई की है? किस अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जा रही है? टोल प्लाजा पर जब्त किया गया पैसा किस व्यक्ति अथवा फर्म का है? इन लोगों का फर्जी फर्मों से क्या कनेक्शन है? जांच में किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आई है। हालांकि मामला आयकर विभाग में पिछले दो साल से विचाराधीन है, लेकिन आरटीआई लगन के बाद विभाग को मामले की पूरी जानकारी देनी ही होगी। शिवकुमार ने बताया कि उन्हें निर्धारित समयावधि में सूचना नहीं दी गई है, इसलिए अब वे फर्स्ट अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करेंगे, ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। उधर, पुलिस द्वारा जब पड़ताल की गई तो मामले में महेश बंसल, प्रमोद बंसल और रविंद्र नामक व्यक्ति की आरोपी बनाकर जांच शुरू की। महेश बंसल पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया। रविंद्र को जब पुलिस ने रिमांड पर लिया तो पूर्व पार्षद कृष्ण सिंगला के पुत्र अनुपम सिंगला का नाम भी सामने आया। साथ ही दर्जनों फर्जी फर्मों का खेल भी सामने आया, जिसके बाद अनुपम सिंगला के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया। पूरा मामला है क्या? दलअसल, सन् 2018 में भावदीन टोल नाका पर आईजी पुलिस टीम ने एक कार को छानबीन के लिए रोका। तलाशी के दौरान गाड़ी से एक करोड़ 10 लाख रूपये की रकम बरामद की गई। इतनी बड़ी रकम नकद बरामद होने के बाद मामला उछला। आईजी पुलिस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल शुरू की तो उन्होंने पाया कि कुछ व्यापारियों ने आम लोगों दस्तावेज लेकर उनके नाम से फर्जी कम्पनियां बनाई और करोड़ों रूपये के लेनदेन के टैक्स की चोरी की जा रही थी। बरामद कैश को आयकर विभाग के हवाले कर दिया गया। आयकर विभाग ने अपने स्तर पर जांच शुरू की, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला जस का तस है।

कानपुर केसः गैंगस्टर विकास दूबे को पकड़ने में पुलिस क्यों रही नाकाम

 लखनऊः गैंगस्टर विकास दूबे को पकड़ने गई पुलिस टीम और अधिकारियों की भारी भूल का खामियाजा आठ पुलिसकर्मियों ने अपनी जान देकर चुकाया। पुलिस को पता ही नहीं चल पाया कि विकास दूबे किस स्तर का अपराधी है। पुलिस दल ने सूचना के आधार पर अचानक छापा मारने का योजना बनाई, लेकिन भीतरघात की वजह से ये सूचना विकास दूबे तक पहुंच गई और उसने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे डाला और मौके से फरार हो गया।

हालांकि, चौबेपुर के थानेदार विनय तिवारी की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस को शक है कि उसने ही दबिश देने की सूचना विनय दुबे तक पहुंचाई, जिसकी वजह से वो सतर्क हो गया और इतना बड़ा कांड करने में कामयाब हो गया। थानेदार विनय तिवारी को स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

क्यो रहीं नाकाम पुलिस
पुलिस टीम छापा मारने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। इसके पीछे कई वजहें हैं। एक पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह से नाकाम रहा, जिससे पुलिसवालों को ये पता चलता की जहां छापेमारी करने जा रहे हैं, वहां कितने लोग मौजूद हैं, उनके पास कितना असला-बारूद हैं। पुलिस टीम का रवैया ऐसा लगा जैसे वो किसी आम अपराधी को पकड़ने जा रहे हैं। 

दूसरा, कानपुर थाने में कुछ अधिकारी नए आए हैं और जो पहले से हैं वह पहले कभी कानपुर में तैनात नहीं रहे हैं, जिसके चलते उन्हें विकास दूबे के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। जो अधिकारी इस क्षेत्र को जानते थे, उनका पहले ही तबादला हो चुका था।

तीसरा, अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को हल्के में लिया, जिसका खामियाजा पूर पुलिस डिपार्टमेंट को उठाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक दबिश देने गई पुलिस टीम के पास अपराधी को पकड़ने की कोई योजना नहीं थी। किसी पुलिसवाले के शरीर पर बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं थी और न ही किसी ने हेलमेंट पहना था। पुलिस की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगा जैसे कि कानपुर पुलिस का पहला कोई बड़ा ऑपरेशन था, जिसमें वो पूरी तरह से फेल हो गई। अगर ऑपरेशन के समय पुलिस थोड़ा भी सतर्क रहती तो शायद इतना बड़ा हादसा होने से बच जाता।

चौथा, पुलिस टीम का रास्ता रोकने के लिए रास्ते में जेसीबी खड़ी थी, उसपर भी पुलिस टीम ने कोई ध्यान नहीं दिया। एसओपी के तहत पुलिस को अलग-अलग टीमें बनाकर अपराधी को चारों तरफ से घेरना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। घटनास्थल पर पहुंचते ही जब चारों तरफ से गोलियां चलना शुरू हो गईं, तब पुलिस टीम मोर्चा संभालना तो दूर अपनी खुद की रक्षा भी नहीं कर पाई। जिसका नतीजा ये रहा कि पुलिस टीम के सीओ, एसओ समेत आठ पुलिसकर्मी बेमौत मारे गये।

हालांकि पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया गया है। यूपी पुलिस ने शनिवार को राज्यभर में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों की 20 टीमों का गठन किया, जो खूंखार गैंगस्टर विकास दूबे को गिरफ्तार करने प्रयास में लगी हैं। शनिवार को पूछताछ के लिए 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। आशंका जताई जा रही है कि विकास दूबे नेपाल भागने की फिराक में है। इसलिए नेपाल बार्डर पर लगे थानों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। राज्य में इस तरह से 8 पुलिसकर्मियों की हत्या से कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। जब राज्य की पुलिस ही सुरक्षित नही ंतो आम नागरिक का क्या होगा। अब ये मामला यूपी सरकार के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस टीमें चैबीसों घंटे काम कर रही हैं
 

तेजस्वी यादव की माफी पर बिहार में राजनीतिक हलचल शुरू

 
पटनाः विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने लालू-राबड़ी राज के 15 साल के लिए माफी मांगी है, जिसे राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके इस ताजा बयान से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। सबके मन में एक ही विचार आ रहा है कि आखिर क्या वजह है जो, तेजस्वी यादव राबड़ी और लालू यादव की सरकार को गलत ठहरा रहे है।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘ठीक है 15 साल हम लोग सत्ता में रहे, पर हम सरकार में नहीं थे, हम छोटे थे। फिर भी हमारी सरकार रही। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि लालू प्रसाद यादव के राज में सामाजिक न्याय नहीं हुआ। 15 साल में हमसे कोई भूल हुई हो, तो हम उसके लिए माफी मांग रहे हैं।’’

छवि सुधारने की कोशिश
बिहार में इस समय तीन मुख्य राजनीतिक पार्टियां हैं, जेडीयू, बीजेपी और आरजेडी। राज्य में जेडीयू और बीजेपी का गठबंधन है। चुनाव में दोनों पार्टियों का एक ही मुद्दा रहता है कि लालू-राबड़ी जब सत्ता में थे, तब बिहार में गुंडाराज था और बिहार में उनके 15 साल के कार्यकाल में कोई विकास नहीं हुआ। अब बिहार में चुनाव सर पर हैं। ऐसे समय में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने फैसला किया है कि अपने विरोधी दलों को फिर से ये मुद्दा भुनाने नहीं देंगे। इसी के चलते उन्होंने सार्वजनिक मंच पर बिहार की जनता से माफी मांगकर अपनी पार्टी की छवि सुधारने की एक छोटी सी कोशिश की है।

तेजस्वी का नया पासा 
इससे पहले, तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय और तेजप्रताप यादव की तलाक की खबरों के बीच तेजस्वी यादव ने एक नया पासा फैंका है। तेजस्वी ने गुरुवार को चंद्रिका राय के बड़े भाई विधान चंद्र राय की बेटी करिश्मा राय को राजद की सदस्यता दी है। करिश्मा पेशे से डॉक्टर हैं और ऐश्वर्या की चचेरी बहन हैं।

कम्युनिस्ट नेता पर अंधाधुंध फायरिंग, हालत नाजुक

 पटना:   बिहार में एक बड़ी वारदात हुई। पूर्वी चंपारण जिले के लखौरा थाना क्षेत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेता बिंदेश्वरी गिरि किसी बारात से घर लौट रहे थे। अचानक बाइक पर सवार अपराधियों ने उनका रास्ता रोका और उनपर ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अकस्मात हुई इस घटना से उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला और वह इस फायरिंग में गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए मोतिहारी के एक निजी अस्पताल ले जाया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीपीआई नेता बिंदेश्वरी गिरि एक बारात से अपने एक साथी के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक घर के पास ही उनपर अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि अपराधियों का निशाना केवल सीपीआई नेता पर ही था। वारदात के समय बाइक चला रहे उनके साथी को खरोंच तक भी नहीं आई। अपराधी वारदात के बाद घटनास्थल से फरार हो गए।
 वारदात की सूचना मिलते ही लखौरा थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस संबंधित क्षेत्र की नाकेबंदी कर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। हालांकि, पुलिस के हाथ अभी तक कुछ नहीं लगा है। पुलिस की दावा है कि जल्द ही मुजरिम उनकी गिरफ्त में होगा।

 फिलहाल वारदात किस कारण से हुई यह अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक सीपीआई नेता बिंदेश्वरी गिरि पर हत्या का एक मुकदमा भी चल रहा है। पुलिस इस वारदात को रंजिश से जोड़कर केस की छानबीन कर रही है, साथ ही अन्य मामलों को भी ध्यान में रख रही है

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