ज्योतिष

बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं का सम्मान कर दिया भाईचारा का संदेश

राजधानी की पंजीकृत सर्वधर्म संस्था अवाम-ए-हिन्द सोशल वेलफेयर कमेटी, रामनगर, रायपुर द्वारा संस्थापक, मो. सज्जाद खान की अगुवाई में भाईचारा, मानवता का संदेश देने के उपदेश से रायपुर रेल्वे प्लेटफार्म में सुबह 8 बजे छ.ग. प्रदेश (साउथ बिहार दानापुर एक्सप्रेस) से बाबाधाम यात्रा जाने वाले 100 श्रद्धालुओं का सम्मानपूर्वक पुष्पमाला से स्वागत किया गया एवं चाय-नाश्ता, पानी प्रदान कर श्रद्धालुओं की सेवा की गयी।

संस्थापक, मो. सज्जाद खान द्वारा बताया गया कि प्रदेश में भाईचारा, अमन-शांति का पैगाम पहुँचाने के उद्देश्य से, हर धर्म का सम्मान करते हुए प्रतिवर्ष इस तरह का कार्य संस्था करती आ रही है एवं आने वाले दिनों में हज में जाने वाले जायरीनों का इस्तक़बाल कार्यक्रम करेगी।

आज के इस कार्यक्रम में संस्थापक श्री मोहम्मद सज्ज़ाद खान जी के प्रेणादायी मार्गदर्शन में पदाधिकारी व सदस्य विश्वनाथ अग्रवाल, पं. अनिल शुक्ल, सैय्यद ज़ाकिर हुसैन, मजीद खान, शेख नजीर, जुबैर खान, बलराम कश्यप, श्रीमती श्रद्धा बंजारे, अब्दुल रफीक खान, महमूद आलम, मुजीबुर्रहमान व अन्य सदस्य उपस्थित थे।

 

शंशय और अहंकार को केवल गुरु ही दूर कर सकता है - इंदुभवानन्द।।

गुरुपूर्णिमा के शुभ अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के आश्रम एवं भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर में बड़े ही भक्तिमय परिवेश में गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। इस शुभ अवसर पर सात सौ से अधिक की संख्या में शिष्य एवं भक्तों ने भगवती राजराजेश्वरी एवं गुरु पूजन में सम्मिलित हुए तथा अनार व केले से अर्चन पश्चात महाआरती किये। आश्रम प्रमुख व ज्योतिषविद ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद के सान्निध्य व मंत्रिचचारण के बीच प्रमुख रूप से एमएल पांडेय, सुमिता ब्रह्मा, ज्योति नायर, विजय आनंद शर्मा, पंकज वर्मा, तारिणी तिवारी, ज्ञानेश शर्मा, अजय तिवारी, पंकज अग्रवाल, नरसिंह चंद्राकर, रत्नेश शुक्ला, राजू सक्सेना, सोनू चंद्राकर व आदि ने मिलकर अर्चन एवं आरती कर भगवती राजराजेश्वरी व गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किये। इस अवसर पर ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द महाराज ने उपस्थित सभी को कहा कि गुरु ही एक मात्र व्यक्ति हैं जो व्यक्ति के शंशय, क्रोध, अहंकार को समाप्त कर सकते हैं साथ ही धर्मसम्मत , सत्य की राह में चलने हेतु प्रेरणा देते हैं। उक्त जानकारी शंकराचार्य आश्रम एवं भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर के समन्वयक एवं प्रवक्ता सुदीप्तो चटर्जी ने साथ ही बताए कि ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द ने आगे अपने प्रवचन में कहा कि गुरु कभी शिष्य नहीं बनाते अपितु व्यक्ति गुरु का चयन कर शिष्य बनाते हैं और उनके सान्निध्य में जीवन जीने की कला, धर्म, अधर्म, आध्यात्म, शास्त्रों का ज्ञान आदि का रस पान गुरु ही कराते हैं। इसलिए संसार मे गुरु का स्थान उच्च है जो व्यक्ति के आत्मा को जागृत कर परमात्मा से मिलाते हैं साथ ही चंचल मन को शांत कर एकाग्रचित करते हैं।

प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी ईशवरीय विश्वविध्यालय में मनाई गई गुरू पूर्णिमा _सतगरू परमात्मा से मिलती है मनुष्य को सद्गति-बी.के.शशिप्रभा।।

सन्नी यादव @bbn24news :

मस्तुरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत लटियापारा में स्थित ब्रम्हाकुमारीज़ संस्थान में गुरू पुर्णिमा हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।बी.के.शशिप्रभा ने साधको को गुरूपूर्णिमा के महात्म बतलाते हुए कहा कि गरू ही हमें सत्य ज्ञान देकर सद्मार्ग की ओर अग्रसर कर मंजिल तक पहुंचाने में सामर्थंवान है।वर्तमान परिवेष में जहां मानवमन अनेक परिस्थितीयों में उलझा हुआ है ऐसे में श्रेष्ठ गुरू का चयन कर उनका आश्रय प्राप्त करना कठिन है।अतःसर्वशक्तिमान,सर्वसामर्थंवान परमसतगुरू एक परमात्मा ही हैं जो हमारे हृदय को हर क्षण सत्य ज्ञान से आलोकित करते हैं और सद्गति प्रदान करते हैं इसलिए अपनी टीम में परमात्मा सच्चे सतगुरू को जरूर शामिल करें व जीवन में सफलता प्राप्त करें।सभी साधकों नें राजयोग मेंडिटेशन के अभ्यास द्वारा सतगुरू परमात्मा के वरदानों की अनुभूति की।इस अवसर पर बी.के.श्यामा ने मंचसंचालन किया।सुनिता मिश्रा ,सुखान्नंद मानिकपुरी,कुशल निर्णेजक,प्रतिभा राठौर,होरीलाल निर्मलकर, बुधराम साहू,शांति साहू,बी.के.सुरेश आदि उपस्थित रहे । 

देवभूमि में शराब की फैक्ट्री का हम विरोध करते है - स्वरूपानन्द सरस्वती।।

BBN24NEWS :

【हिमालय की जड़ीबूटियों से रोजगार एवं आमदनी हो सकती है।】

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान हेतु कोलकाता प्रस्थान करने से पूर्व कहा कि हमे पता चला है कि उत्तराखंड सरकार देवभूमि में "हिलटॉप" नामक ब्रांड से शराब का निर्माण कर विदेश में निर्यात कर रही है साथ ही देश मे भी इसका विक्रय किया जा रहा है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और हम यह कहना चाहते हैं कि हिमालय में बहु संख्या में दुर्लभ जड़ी बूटी उपलब्ध है और इसका निर्यात कर करोड़ों डॉलर सरकार के राजस्व में आ सकता है साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है। आज भारत जैसे धर्मपरायण देश मे लोग शराब के नशे में अधर्म के साथ साथ महिलाओं एवं बच्चों के साथ दुराचार कर रहे हैं, उनका उत्पीड़न कर रहे हैं और सरकार वही शराब देवभूमि में बना रही है जो व्यक्ति के मस्तिष्क को खराब कर रहा है। ऐसा होता रहा तो एक दिन देवभूमि, असुरभूमि बन जायेगा। हम सरकार से कहना चाहते हैं कि देवभूमि में धार्मिक लोग साधना करने, जप करने, पूजा करने आते हैं तो उसे देवभूनि ही रहने दिया जाए शराब की फैक्ट्री लगाकर उस भूमि को असुरभूमि न बनाया जाए। एक प्रश्न के जवाब में पूज्य शंकराचार्य ने कहा कि गौ हत्या बन्द करना तो दूर अपितु विदेश से अत्याधुनिक मशीन के खरीदी पर सब्सिडी दे रही है सरकार।  देश के लगभग 100 करोड़ सनातन धर्मियों को चाहिए कि वे गौ हत्या को रोके और गौ माता के लिए गौशाला बनवाये तथा गाय के गोबर से खाद, कंडे, गौ मूत्र, दूध से घी, मक्खन आदि बनाकर खुद उपार्जन कर सकते है। इस पर सरकार को प्रोत्साहित करना चाहिए । शंकराचार्य आश्रम व भगवती राजराजेश्वरी मन्दिर के समन्वयक सह प्रवक्ता पं सुदीप्तो चटर्जी ने उक्त जानकारी विज्ञप्ति के माध्यम से देते हुए कहा कि महाराजश्री के साथ उनके निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द, रायपुर आश्रम प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद बिलासपुर के चिचिरदा में स्थित हरीश शाह के कुंज कुटीर में उपस्थित थे तथा पूज्य शंकराचार्य कोलकाता हेतु प्रस्थान करने के पूर्व उपस्थित शिष्यों एवं भक्तों - हरीश शाह, चंद्रप्रकाश उपाध्याय, ज्ञानेश शर्मा, नरसिंह चंद्राकर, मुकेश बैद, एमएल पांडेय, योगेंद्र शंकर शुक्ल, मंगतराय अग्रवाल व आदि भक्तों से कहा कि चातुर्मास बहुत पवित्र मास माना जाता है और इस दो माह के दौरान लोगों को धर्मानुष्ठान , पूजन, शास्त्रों का श्रवण और सत्संग करना चाहिए साथ ही मानव जाति की सेवा भी दिल से करे। सेवा बहुत ही पुण्य का कार्य है जो आज के समय मे अधिकतर लोग नहीं करते हैं। दूसरों के बारे में सोचना भी हम सभी का कर्तव्य है जिसे सभी को निर्वहन करना चाहिए।

क्रोध और अहंकार होते हैं पतन के कारक।


ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज बिलासपुर के चिचिरदा में स्थित उनके शिष्य हरीश शाह के कुंज कुटीर में आयोजित सत्संग में उपस्थित शिष्यों एवं भक्तों को धर्म सन्देश देते हुए कहा कि व्यक्ति को क्रोध पीना सीखना होगा और अहंकार को छोड़ना होगा। ये दोनों पतन के कारक होते हैं। सत्संग से पूर्व पूज्य शंकराचार्य महाराज का हरीश शाह, एमएल पांडेय, डीपी तिवारी, चंद्रप्रकाश उपाध्याय, विजय आनंद शर्मा, अशोक अग्रवाल, नरसिंह चंद्राकर, व आदि भक्तों ने एक साथ गुरु पूर्णिमा पूर्व ब्रह्मचारी ब्रह्मविद्यानन्द के मंत्रोच्चारण के साथ पादुका पूजन किये। इस विशेष अवसर पर रायपुर शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द , लक्षेश्वर धाम के ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, ब्रह्मचारी धरानंद, आचार्य धर्मेंद्र मंच पर पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के साथ मंचासीन थे। शंकराचार्य महाराज ने आगे अपने धर्म संदेश में कहा कि व्यक्ति को कभी भी किसी भी परिस्थिति में धर्म की राह नहीं छोड़ना चाहिए साथ ही गौ हत्या को रोकना चाहिए। उन्होंने गौ मांस निर्यात में पूरे विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत के शीर्ष स्थान पर आने हेतु चिंता व्यक्त किये तथा गौ माता के सुरक्षा और सेवा हेतु ज्यादा से ज्यादा गौ शाला का निर्माण करने हेतु आग्रह किये। आगे पूज्य महाराजश्री ने कहा कि आज के समय लोग माया के पीछे भाग रहे हैं और उसे पाने की तमन्ना में अधर्म का राह पकड़ने में भी संकोच नहीं कर रहे हैं। हम प्रत्येक को चाहिए कि आज के युवा पीढ़ी को सनातन धर्म के महत्ता के बारे में बताते हुए सत्य की राह पर चलने हेतु प्रेरित करना चाहिए। उक्त जानकारी शंकराचार्य आश्रम के समन्वयक एवं प्रवक्ता पं सुदीप्तो चटर्जी ने विज्ञप्ति जारी कर के दी और यह भी बताया कि पूज्य महाराजश्री 14 जुलाई की शाम 5आजाद हिंद एक्सप्रेस से चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान हेतु कोलकाता के लिए प्रस्थान करेंगे।

आठ दिन बाद मौसी के घर से लौटे भगवान जगन्नाथ

बिर्रा- बिर्रा में आज भगवान जगन्नाथ की मौसी घर के वापसी पर जगह - जगह पूजा अर्चना हुई ! भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा आज मौसी घर से वापसी पहुँचे और मंदिर में विराजमान हुए ! 4 जुलाई को रथयात्रा के दिन शाम लगभग 4 बजे पूजा अर्चना के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्रतिमा के साथ रथयात्रा निकली और वे मौसी के घर पहुंचे! आज तिति दशमी पर वे जनकपुर से रथ पर सवार होकर वापस मंदिर पहुँचे! रथयात्रा जहाँ से श्रद्धालु किर्तन भजन करते हुए रथ के रस्सी को खींचते ग्राम के महाबीर मंडली चौक,साहूमुहल्ला, घानवासागर,राजमहल चौक(दीवान मुहल्ला),ठाकूरदेव मुहल्ला, दाऊमुहल्ला, मुख्य मार्ग, बस स्टैंड, भाठापारा, कंकालीन मंदिर,चंडीमंदिर, लीलामंडली होते हुए पुन:कहार मुहल्ले से मंदिर में देर रात तक वापस पहुंची।जगह-जगह पूजा अर्चना व श्रीफल,लाई,मिठाई चढाई गई।प्रसाद स्वरूप मूंग व लाई का विशेष प्रसाद वितरण किया गया।रथयात्रा पर्व पर बहन-बहू-बेटियों का आगमन हुआ।इस प्रकार हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रथयात्रा को लेकर लोगों में भारी उत्साह रहा। इस अवसर पर चेतनबाबा,सुबुबाबा,सौखीलाल पटेल,जगराम पटेल,एकांश पटेल,भानू पटेल,बिर्रा नगर कांग्रेस अध्यक्ष देवचंद यादव,मिडिया प्रभारी जितेन्द्र तिवारी,भाजपा मंडल कोषाध्यक्ष घनश्याम कर्ष,कांशीराम कश्यप, निलाम्बर सिंह दाऊ, संतोष कहार,खदा कहार,छतराम कहार,सुरेश कहार,अमन आदित्य,कमला कटकवार,सुरेश कहार भाई,शुभम थवाईत, राजू कुलकीत,संतराम,महेश साहू,राजकुमार थवाईत, बरतराम,मोहन,कृष्णा कहार,तरूण,जागेश्वर कहरा, गनपत,इंदल सहित समस्त ग्रामवासी शामिल हुए।

जगह जगह निकली रथयात्रा लोगों ने किया दर्शन

 

शिवरीनारायण में रथयात्रा की धूम

भक्तों को मिला गजा मूंग का प्रसाद

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया दिन गुरुवार दिनांक 4 जुलाई को पूरे प्रदेश भर में रथ यात्रा का त्यौहार हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया श्री दूधाधारी मठ रायपुर, राजिम , शिवरीनारायण मठ सहित प्रमुख सभी आध्यात्मिक स्थानों पर लोगों ने भगवान जगन्नाथ जी का दर्शन लाभ प्राप्त कर अपना जीवन धन्य बनाया विदित हो कि रथयात्रा के पावन अवसर पर पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में जगन्नाथ यात्रा का यह पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया छत्तीसगढ़ की सबसे प्रमुख आध्यात्मिक तीर्थ भगवान शिवरीनारायण की पावन धरा में यह त्यौहार हर वर्ष की तरह अत्यंत ही गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ

इस अवसर पर होम, हवन ,पूजन, भोग भंडारे का भी आयोजन किया गया सायंकालीन बेला में भगवान जगन्नाथ जी भ्राता बलदाऊ जी एवं बहन सुभद्रा मैया के साथ 20 फीट ऊंचे रथ पर विराजित होकर नगर भ्रमण पर निकले भक्तों की खुशी एवं असीम प्रेम छलक रहा था लोग जगन्नाथ स्वामी की जय, जगन्नाथ स्वामी की जय, का जय जय कार करते हुए रथ खींचने के लिए लालायित थे एक के बाद एक लोग आकर भगवान के रथ को हाथ लगा कर खींचते हुए भगवान का जय जयकार करके अपना जीवन धन्य बनाते गए अनेक स्थानों से गुजरा रथ मठ मंदिर में पूजा-अर्चना संपन्न होने के पश्चात श्री शिवरीनारायण मंदिर के सामने खड़े हुए रथ पर भगवान को विराजित कर मंदिर प्रांगण से मध्य नगरी चौक, हनुमान मंदिर चौक, राधा कृष्ण मंदिर मेला ग्राउंड, होते हुए जनकपुरी तक ले जाया गया जगह जगह पर लोगों ने किया आरती पूजन एवं दर्शन भगवान जगन्नाथ जी का रथ जिन -जिन रास्तों से होकर गुजरा रास्तों में दूरदराज के क्षेत्र से दर्शन के लिए आए हुए लोग भगवान की एक झलक पाने के लिए आतुर दिखाई दिए भगवान को नारियल, अगरबत्ती ,पुष्प, चंदन ,तुलसी, द्रव्य अर्पित कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर अपना जीवन धन्य बनाय ।

जगह जगह पर प्रत्येक द्वारों पर जहां से भगवान का रथ गुजरा नगर वासियों ने सपरिवार भगवान का खूब सेवा सत्कार किया अपने दरवाजे पर भगवान जगन्नाथ जी को आता देख वे गदगद एवं भाव विह्वल हो गए। गजामूंग का प्रसाद जगन्नाथ यात्रा के अवसर पर विशेष रूप से प्राप्त होने वाला गजा मूंग का प्रसाद जो कि चने एवं मूंग के अंकुरित दाने से तैयार किया जाता है लोगों को प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया दशमी तिथि तक विराजेगें भगवान जनकपुरी में समाचार लिखे जाने तक भगवान की रथ यात्रा जारी थी वह धीरे धीरे चलते हुए मेला ग्राउंड के अंतिम छोर पर स्थित जनकपुरी जिसे जोगीडीपा के नाम से भी जाना जाता है पहुंचेंगे यहां भगवान आषाढ़ शुक्ल दशमी तक अपनी मौसी के घर विश्राम करेंगे दशमी तिथि को सायंकालीन बेला में पुनः वे अपने मूल स्थान के लिए प्रस्थान करेंगे रथ यात्रा में जगदीश मंदिर के पुजारी श्री त्यागी जी महाराज, मुख्तियार श्री सुखराम दास जी राम मंदिर के पुजारी श्री ज्ञान दास जी नागा ,सहित बड़े मंदिर के पुजारी गण एवं मठ मंदिर के सभी अधिकारी कर्मचारी गण भगवान की सेवा में निरंतर लगे हुए थे दूर-दूर से आए हुए श्रद्धालु गण एवं भक्तजन भी भगवान की सेवा में अपना हाथ बंटा रहे थे यह आध्यात्मिक यात्रा है जिसमें मनुष्य के जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति भगवत कृपा स्वरूप प्राप्त होती हैं इसलिए नगर के प्रत्येक नागरिक गण किसी न किसी रूप में भगवान की सेवा में तल्लीन थे वे सभी जानते हैं कि यह भगवान शिवरीनारायण की नगरी है उनकी कृपा से यहां शरीर धारण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

शिष्य जो गुरु-आज्ञा का पालन करता है, उसी का कल्याण होता है, दूसरे का नहीं - भानुजी शुक्ल ।

ज्योतिष गुरु एवं कथा वाचक पंडित भानुजी महाराज ने बताया कि जैसे किसान खेत में बीज बोने से पहले उसकी घासादि निकालकर खेत की सफाई करता है, हल चलाकर नरम करता है, उसके कंकड़-पत्थर निकालकर खाद डालता है, जब भूमि बोने योग्य हो जाती है, तब उसमें ऋतु के अनुसार निर्दोष बीज बोता है। फिर समय-समय पर उसकी गुड़ाई-सिंचाई करता है। जब तक फसल नहीं पकती, उसको हानि पहुँचाने वाले जीव-जन्तु तथा मनुष्यों से रक्षा करता है,  पक जाने पर काटता है। वैसे ही सद्गुरु रूपी किसान शिष्य के चित्तरूपी भूमि में कर्म-उपासनादि बीज बोने से पहले उसके दुर्व्यसनों को दूर करते हैं। उक्त कथन ज्योतिष गुरु पं भानुजी महाराज आदर्श नगर मोवा में सत्संग के दौरान भक्तों से कही। आगे उन्होंने बताया यदि उसकी कर्म में रुचि है, संसार के भोगों से वैराग्य नहीं है, तो वह कर्म का अधिकारी है, उसे कर्म का उपदेश देते हैं। यदि वह संसार में न अधिक अनुरक्त है न विरक्त ही है,  मध्यम श्रेणी का है, तो भक्तियोग का उपदेश देते हैं। यदि लोक-परलोक के भोगों से परम विरक्त है, तो ज्ञान का बीज डालकर जब तक वह परिपक्व नहीं होता, तबतक कामादि शत्रुओं से रक्षा करते हैं। किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि शिष्य कुछ भी न करे, उसे गुरु आज्ञानुसार चलना चाहिए। पं भानुजी महाराज ने आगे बताया कि जीव पर चार कृपा होने से ही जीव का कल्याण होता है - १. ईश्वर कृपा - मनुष्य शरीर की प्राप्ति। २. शास्त्र कृपा - शास्त्रानुसार आचरण व शास्त्रोक्त गुरु की प्राप्ति। ३. गुरु कृपा - रहस्यों सहित सद्गुरु से दीक्षा की प्राप्ति। ४. आत्म कृपा - ऊपर कहे तीनों प्रकार की कृपा होने पर भी यदि शिष्य शास्त्र और गुरुओं की आज्ञा का पालन नहीं करता, तो तीनों कृपा व्यर्थ हो जाती है। अतः जो शिष्य गुरु-आज्ञा का पालन करता है, उसी का कल्याण होता है, दूसरे का नहीं।

श्रीमद्भावत कथा का आयोजन ग्राम चोरिया में ...

 

सुबोध थवाईत-BBN24NEWS

श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा का आयोजन ग्राम चोरिया(सारागांव )में भरतलाल थवाईत के निवास स्थान में अचार्य श्री श्रीकांत तिवारी जी द्वारा रसपान कराया जा रहा है ।कथा के छठवें दिवस पर व्यास पीठ द्वारा रूखमणी विवाह की कथा सुनाते हुए बतलाये की भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मिणि ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी को भी पति रूप में वरण नहीं करेगी। उधर, भगवान श्रीकृष्ण को भी इस बात का पता हो चुका था कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी परम रूपवती तो है ही, परम सुलक्षणा भी है।

भीष्मक का बड़ा पुत्र रुक्मी भगवान श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। वह बहन रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था, क्योंकि शिशुपाल भी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था। भीष्मक ने अपने बड़े पुत्र की इच्छानुसार रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ ही करने का निश्चय किया। उसने शिशुपाल के पास संदेश भेजकर विवाह की तिथि भी निश्चित कर दी।


रुक्मिणी को जब इस बात का पता लगा, तो वह बड़ी दुखी हुई। उसने अपना निश्चय प्रकट करने के लिए एक ब्राह्मण को द्वारिका श्रीकृष्ण के पास भेजा। उसने श्रीकृष्ण के पास जो संदेश भेजा था, वह इस प्रकार था—‘हे नंद-नंदन! आपको ही पति रूप में वरण किया है। मै आपको छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ विवाह नहीं कर सकती। मेरे पिता मेरी इच्छा के विरुद्ध मेरा विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहते हैं। विवाह की तिथि भी निश्चित हो गई। मेरे कुल की रीति है कि विवाह के पूर्व होने वाली वधु को नगर के बाहर गिरिजा का दर्शन करने के लिए जाना पड़ता है। मैं भी विवाह के वस्त्रों में सज-धज कर दर्शन करने के लिए गिरिजा के मंदिर में जाऊंगी। मैं चाहती हूं, आप गिरिजा मंदिर में पहुंचकर मुझे पत्नी रूप में स्वीकार करें। यदि आप नहीं पहुंचेंगे तो मैं आप अपने प्राणों का परित्याग कर दूंगी।

रुक्मिणी का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर शीघ्र ही कुण्डिनपुर की ओर चल दिए। उन्होंने रुक्मिणी के दूत ब्राह्मण को भी रथ पर बिठा लिया था। श्रीकृष्ण के चले जाने पर पूरी घटना बलराम के कानों में पड़ी। वे यह सोचकर चिंतित हो उठे कि श्रीकृष्ण अकेले ही कुण्डिनपुर गए हैं। अतः वे भी यादवों की सेना के साथ कुण्डिनपर के लिए चले। इसअवसर पर लक्ष्मीनारायण,राजेश, जितेंद्र ,महेंद्र,प्रवीण,प्रियांशु, मोक्ष,पार्थ थवाईत सहित भगवान श्री कृष्ण की कथा सुनने भारी संख्या में श्रद्धालुगण पहुच रहे 

मन की सफाई जरूरी है - शक्ति राज

 


प्रख्यात मोटिवेशनल स्पीकर ब्रह्माकुमार शक्ति राज सिंह द्वारा रायपुर के सिविल लाइन्स स्थित वृंदावन हॉल में नाकोड़ा ग्रुप द्वारा आयोजित मेमोरी मैनेजमेंट वर्कशॉप के अंतर्गत " खुशियों की चाबी" विषय पर सत्र लिया गया जिसमें नाकोड़ा परिवार के अलावा प्रदेश के बिज़नेस टाइकून रमेश गोयल, रमेश अग्रवाल, दीपक गुप्ता, उमेश अग्रवाल, महेंद्र अग्रवाल, विक्रम गोयल, संजय गोयल व आदि परिवार के लोगों ने सत्र का विशेष लाभ उठाया। इस विशेष सत्र में आज के इस व्यस्ततम समय मे व्यक्तियों को खुशियां कैसे प्राप्त हो इस विषय पर ब्रह्माकुमार शक्ति राज सिंह ने बताया साथ ही कुछ अभ्यास के साथ मेडिटेशन भी करवाये।

उन्होंने कहा कि रोजाना व्यक्ति को मेडिटेशन करना चाहिए जिससे ब्रह्मांडीय ऊर्जा शरीर मे प्रवेश कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है और मन मे जितने भी प्रकार के नकारात्मक सोच या ऊर्जा भरी रहती है वह धीरे धीरे साफ हो जाता है और व्यक्ति तरोताजा महसूस करने के साथ साथ खुशियों को प्राप्त करता है। उन्होंने आगे कहा कि 75% प्रतिशत बीमारी साइकोसोमैटिक होता है तथा इसे केवल मेडिटेशन के माध्यम से ही इलाज संभव है। नेगेटिव थॉट के कारण रक्त कोशिकाओं में क्लॉट उत्पन्न होता है जो वैज्ञानिकों द्वारा पुष्टि भी किया जा चुका है। राग, द्वेष, अहंकार आदि नकारात्मक चीजों को व्यक्ति यदि दूर कर ले और योग दान करे तो वह व्यक्ति जीवन सफलता हासिल करता है। पैसा बहुत ही महत्त्वपूर्ण है पर जीवन अनमोल है। हमे परमात्मा ने किसी खास उद्देश्य हेतु मानव जीवन प्रदान कर धरती में भेजें हैं। परमात्मा कहते हैं कि तुम्हारा मन अमन है, चमन है लेकिन हम मनुष्य इसे डस्टबिन बना दिये हैं। इसलिए मन के बोझ को कम करना जरूरी है, बोझ के साथ कोई भी व्यक्ति दौड़ नहीं सकता है। इसी बोझ को हटाने के लिए मेडिटेशन जरूरी है। समूचा विश्व "एम" पर निर्भर है और यही "एम" माइंड है, मन है।

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