ज्योतिष

बिना किसी संत के जीवात्मा को परमात्मा स्वीकार नहीं करते- रामकृष्णाचार्य जी महाराज

*प्रतिभाशाली को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए*

*जीवन में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र सहजता ही है*

राजकुमारी जानकी ने धनुष टूट जाने के पश्चात राघव जी से कहा हे प्रभु इस समाज में जिस ने धनुष को तोड़ा वह तो विनम्रता से सिर झुकाए खड़ा है और जो इसे डिगा तक नहीं सके वे अभी भी अकड़ कर खड़े हैं आप कुछ समय और ऐसे ही खड़े रहें ताकि इन अभिमानीयों को शिक्षा मिले यह बातें निकुंज आश्रम श्रीधाम अयोध्या से पधारे हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी रामकृष्णाचार्य जी महाराज ने शिवरीनारायण मठ महोत्सव में राम कथा के रस पान करने के लिए भारी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए व्यासपीठ की आसंदी से अभिव्यक्त की उन्होंने कहा कि रावण और बाणासुर जैसे महान योद्धा शिव धनुष को उठाना, तोड़ना तो बहुत बड़ी बात है तिल भर भूमि डिगा नहीं सके, तब दस हजार राजा एक साथ धनुष को उठाने लगे "भूप सहस दस एकहीं बारा, लगे उठावन टरहिं न टारा" कुछ लोग यह प्रश्न करते हैं कि दस हजार राजागण एक साथ धनुष को कैसे पकड़े होंगे याद रखना यह कोई साधारण धनुष नहीं भगवान शिव का धनुष है यह राजाओं को देखकर उनकी क्षमता के अनुसार भारित या हल्का हो जाता था यह धनुष जड़ नहीं चेतन है, राजाओं का जो समूह है वह तारों की तरह है और धनुष अंधकार की तरह *अहंकार शिव बुद्धि अज, मन शशि चित्त महान* शिव का धनुष अहंकार का प्रतीक है और अहंकार को कभी भी अहंकार तोड़ नहीं सकता उसे तो कोई विनम्र पुरुष ही तोड़ सकता है! सभी राजा श्रीहत हो गए अर्थात उनके चेहरे की कांति मलिन पड़ गई पूरे राजसभा में सन्नाटा छा गया, राजा जनक के हृदय में पीड़ा भर आया उन्होंने कहा *वीर विहीन महि मैं जानी* मैं समझ गया कि अब धरती वीरों से रहित हो गई है, वैदेही का विवाह ब्रह्मा ने लिखा ही नहीं है,हे राजाओं अपने -अपने घर को लौट जाओ मैं अपना प्रतिज्ञा छोड़ नहीं सकता अपने सुकृत पुण्य को जाने नहीं दूंगा, भले ही मेरी बेटी कुंवारी ही क्यों न रह जाए, जनक की बातों को सुनकर लक्ष्मण जी क्रोधित हो गए *कही जनक जस अनुचित बानी, विद्यमान रघुकुल मणि जानी* रघुकुल तिलक के समाज में रहते हुए कोई भी ऐसा अनुचित बानी कहने की साहस नहीं कर सकता जैसा जनक ने कहा है! उनके होंठ फड़कने लगे "जब मणि पर विपत्ति आती है तब फनी ही बोलता है" लक्ष्मण जी शेषनाग हैं उन्होंने एक को धनुष टूटने के पहले डांटा और दूसरे को धनुष टूटने के बाद। उन्होंने ज्ञानी जनक जी को भी डाटा और वीर परशुराम जी को भी कारण कि लक्ष्मण जी *रघुपति कीरति बिमल पताका* रघुनाथ जी की कीर्ति को फहराने वाले दंड के समान हैं, वे जीवों के आचार्य हैं जब कोई परमात्मा के विरुद्ध कार्य करता है तब वे उन्हें दंड देने से नहीं चूकते। लक्ष्मण जी की क्रोध से धरती डगमगाने लगी, लेकिन सीता जी के हृदय में प्रसन्नता छा गई वह जानती थी कि जब तक लक्ष्मण बोलेंगे नहीं तब तक रघुनाथ जी डोलेंगे नहीं, वह शांत ही रहेंगे कारण कि रामजी ब्रह्म हैं, उन्हें ना तो संसार में कुछ पाने की लालसा है और ना ही कुछ खोने की चिंता! जब तक किसी का जीवन बाँकी हो उसे तोड़ा नहीं जा सकता इसलिए विश्वामित्र जी समय की प्रतीक्षा कर रहे थे अभी धनुष का जीवन बाँकी था उचित समय आने पर विश्वामित्र ने राघव को आदेश दिया। याद रखना राजा जनक ज्ञानी हैं और जब ज्ञानी दुखित हो जाता है तब समाज का अहित होता है इसलिए मुनि विश्वामित्र ने कहा हे राम उठो धनुष का भंजन करो और हे तात जनक जी के हृदय की संताप को मिटाओ *सहज ही चले सकल जग स्वामी* संपूर्ण जगत के स्वामी साधारण चाल से सहजता पूर्वक चलने लगे, याद रखना आप जब समाज में आगे बढ़ जाओगे तब आपको आलोचना -समालोचना का सामना करना ही पड़ेगा, आप इन सभी के मध्य अपनी सहजता को बनाए रखना राम जी जब धनुष तोड़ने के लिए आगे बढ़े तब माता सुनैना व्याकुल हो गई उसने सोचा कि यह छोटा सा बालक धनुष कैसे तोड़ पाएगा ?इसे कोई समझाता क्यों नहीं है? तब उनकी सखीयों ने कहा- हे महारानी प्रतिभाशाली को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए! एक छोटा सा दीपक कमरे का अंधकार दूर कर देता है। धनुष टूटने के पश्चात माता जानकी जय माला लेकर राघव के सामने उपस्थित हुई वह प्रेम से विहल हो गई है, उनसे प्रेम विवसता के कारण जय माला पहनाई नहीं जा रही थी रामचंद्र जी ने कहा हे राजकुमारी जयमाला पहनाओ तब सीता जी ने कहा प्रभु इस समाज में जिस ने धनुष को तोड़ा वह तो विनम्रता से सिर झुकाए हैं, और जो इसे तिल भर भूमि हिला तक न सके वह अभी भी अकड़ कर खड़े हैं आप कुछ समय ऐसे ही खड़े रहें ताकि अभिमानियों को शिक्षा मिले। धनुष अहंकार का प्रतीक है जब तक अहंकार रहता है तब तक भक्त और भगवान का मिलन हो ही नहीं सकता बिना किसी संत के जीवात्मा को परमात्मा स्वीकार नहीं करते *बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति उपस्थित हुए कथा श्रवण के लिए* शिवरीनारायण मठ महोत्सव अपने पूरे शबाब पर है लोगों का हुजूम उमड़ रहा है लोग दूर-दूर से बड़ी संख्या में सपरिवार आकर के भगवान की कथा को सुनकर अपना जीवन धन्य बना रहे हैं, इसी सिलसिले में अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति श्री जी डी शर्मा कथा सुनने के लिए उपस्थित हुए उनके साथ श्री लक्ष्मण प्रसाद मिश्र भी थे कुलपति ने व्यासपीठ का अभिवादन किया एवं आशीर्वाद प्राप्त की इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यहां आकर शिक्षा की पद्धति पर विचार करने का मन करता है हम लोग बहुत परिश्रम करके भी ऐसी शिक्षा अपने विश्वविद्यालय एवं विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को प्रदान नहीं कर पाते। हमें भी अपने विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह के शिक्षा पद्धति का समावेश करना होगा ताकि लोगों को अच्छे से अच्छा संस्कार मिल सके, वर्तमान परिवेश में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त तो कर रहीं हैं लेकिन उचित संस्कार के अभाव में वे अपनी माता पिता एवं समाज से दूर होते जा रहे हैं जो कि चिंता का विषय है उन्होंने राजेश्री महन्त जी महाराज के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि हमें बार-बार इस तरह के कार्यक्रम में उपस्थित होने का सौभाग्य प्रदान करते हैं। मंच में हमेशा की तरह मुख्य यजमान के रूप में राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज विराजित थे।

1 नवंबर को अचानक खुल जाएगी इन राशियों की बंद किस्मत

काफी समय से इन पांच राशि वाले लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। परंतु अब आपके जीवन से सारे दुख और कष्ट दूर होने वाले हैं। आप सभी को जीवन में सफलता प्राप्त करने के नए अवसर मिलेंगे। आपका मन शांत रहेगा। प्रेमी जोड़ों के लिए भी यह समय बहुत उचित होने वाला है। आपके घर में सुख समृद्धि और खुशहाली आएगी। लक्ष्मी माता की कृपा आप सभी लोगों पर बनी रहेगी।अब आप सभी लोगों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है बजरंगबली की कृपा से अब आपके घर में धन की कोई कमी नहीं रहेगी आपके सारे दुख और कष्ट समाप्त हो जाएंगे आप सभी को जीवन में सफलता प्राप्त करने के नए अवसर मिलेंगे।

 

आपका कोई भी शत्रु आपका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा बजरंगबली कृपा आप सभी लोगों पर बनी रहेगी।आपको अचानक से धन लाभ हो सकता है। आपका रुका हुआ धन भी आपके पास वापस आ जाएगा। यदि आपका कोई कार्य पिछले काफी समय से अधूरा पड़ा है तो वह भी संपन्न हो जाएगा। आपकी मुलाकात किसी पुराने मित्र से हो सकती है। आपके घर में धन की कोई कमी नहीं रहेगी। आपका मन प्रसन्न रहेगा। कुबेर भगवान की कृपा आप सभी लोगों पर बनी रहेगी।

वे 5 राशियां मिथुन, कर्क, तुला, धनु और कुंभ हैं।

लगभग साढ़े 04 किलो स्वर्ण आभूषणो से मां का किया राजकीय श्रृंगार।

अजीत मिश्रा --शारदीय(क्वांर)नवरात्र की नवमी पर सोमवार को रतनपुर महामाया मंदिर में माता के राजसी श्रृंगार से सजे स्वरूप का दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी । राजसी श्रृंगार,आरती और राजसी नैवेद्य चढ़ाने के बाद ट्रस्ट द्वारा कन्या और ब्राम्हण भोज का आयोजन किया गया । इसके बाद सुबह से शाम तक भंडारा चलता रहा।


-नवरात्रि की नवमीं तिथि पर सोमवार को सुबह 06 बजे राजसी श्रृंगार के बाद मंदिर का पट खोला गया। तो दर्शनार्थीयो ने माता के भव्य स्वरूप का दर्शन किया। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बताया कि माता को रानीहार, कंठ हार, मोहर हार,ढार,चंद्रहार,पटिया समेत 9 प्रकार के हार,करधन,नथ धारण कराया गया। राजश्री श्रृंगार के बाद मां महामाया की महाआरती हुआ । इसमें ट्रस्ट के पदाधिकारी और सदस्यों के अलावा आम श्रद्धालु जन भी मौजूद रहें। पूजा अर्चना के बाद मां को राजश्री नैवेद्य समर्पित किया गया । जिसके बाद भोग प्रसाद वितरण के बाद ट्रस्ट की पुरानी धर्मशाला में कुंवारी कन्याओं के पैर धुलवाकर उन्हें आसन पर बिठाकर आरती की गई। वही कन्या भोज कराने के बाद उन्हें उपहार दिया गया। इसके बाद धर्मशाला में ही ब्राम्हण भोज का आयोजन में मंदिर के पुरोहितों समेत ब्राम्हणों को भोज कराया गया । कन्या और ब्राम्हण भोज के बाद ज्योति कलश रक्षकों को भोज कराकर उन्हें वस्त्र और दक्षिणा प्रदान की गई । इसके बाद भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें अतिथियों को भोजन प्रसाद का वितरण किया गया। कन्या, ब्राम्हण भोज और भंडारे के बाद दोपहर करीब तीन बजे पूजन सामग्री के साथ पुजारी सभी ज्योति कलश कक्ष में प्रज्जवलित मनोकामना ज्योति कलश की पूजा अर्चना किया । पूजा अर्चना के बाद मंत्रोच्चारण कर ज्योति विसर्जित की गई ।

डोगरगढ मे माँ बम्लेश्वरी पहाड़ों के उपर है विराजमान ,,मन्दिर ट्रस्ट द्वारा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए किए गए है व्यापक इंतजामात

A REPORT BY : अजीत मिश्रा

राजनांदगांव-- क्वांर नवरात्रि की शुरूवात आज से हो गई है...जिसमे देश के सभी माता देवालयों मे भक्तों का ताता लगेगा और भक्त मातारानी के दर्शन करने पहुचेगें..आज से नवरात्री की शुरूवात हो रही है....आज मां के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है...राजनांदगाँव जिले के डोगरगढ मे माँ बम्लेश्वरी पहाड़ों के उपर विराजमान है...और प्रत्येक वर्ष यहां नवरात्रि का मेला लगता है, इस वर्ष भी मेले को लेकर मन्दिर ट्रस्ट द्वारा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजामात कर रखे है, मन्दिर ट्रस्ट के सचिव द्वारा बताया गया कि इस वर्ष साढ़े 7 हजार ज्योति कलश भक्तों द्वारा प्रज्वलित करवाये जा रहे है, जिसमे भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा अमेरिका,कनाडा,ब्रिटेन इत्यादि देशों में बसे भारतीय मूल के लोग भी ज्योति कलश स्थापित करवाते है।


- नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था के कडे इंतेजाम किये जाते है..इसी कडी मे पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की तैयारी यहां पुरी कर ली गई है....इसी तैयारी के बीच नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से लगभग 6 सौ से अधिक पुलिस के अधिकारी और जवान को यहा तैनात किया गया है...वही इन नव दिनो मे लगभग 15 लाख से अधिक भक्त मातारानी के दर्शन करने डोगरगढ पहुंचते है...जिसमे भक्तों की सुरक्षा से लेकर माता के दर्शन करने तक का पुरा इंतेजाम किया गया है....नवरात्रि मे चप्पे चप्पे मे पुलिस के जवान तैनात रहेगे।

मन्नत हुई पूरी चौहान परिवार दर्शन करने पहुँचे 12 किलोमीटर दूर से जमीन पर लोटते माँ चंडी दाई मंदिर के दरबार ...

शनि सूर्यवंशी *पकरिया*:- पामगढ़ ब्लॉक के मदनपुर गांव के एक परिवार को पकरिया के मंदिर चंडी दाई में अटूट आस्था है। परिवार के दंपति ने पकरिया में विराजित चंडी दाई से बच्चो के स्वस्थ व खुशियाली की मन्नत मांगी थी। उनकी मन्नत पूरी हुई तो परिवार ने खुशी मनाई। वही आज नवरात्रि पर्व के शुरुवात दिन अपने घर से पूरे लोग तेज बारिश के बीच एक साथ भीगते-भीगते पूरे समय तक श्रद्धा में इस कदर लीन की अपनी हार नही मानी व जमीन पर लौटते हुए श्रद्धा भाव से पूरे परिवार के लोग हाथ मे नारियल पकड़ कर चल निकल पड़े चौहान परिवार के रूप सिंह का कहना है कि उसके पूरे परिवार व जच्चा बच्चा के कुछ दिन तबियत खराब था और उनके परिवार के पूरे लोग अस्वस्थ थे तभी स्वस्थ होने के लिए पकरिया स्थित चंडी दाई मंदिर पर मन्नत मांगी थी जो पूरा हुआ और उनका घर परिवार अब खुशहाली की जिंदगी जी रहे है साथ ही उनका कहना है कि माँ चंडी दाई के छत्र छाया से उनका परिवार व घर सब अच्छे है और अब चंडी दाई का दया दृष्टि उन परिवार पर अच्छे से बना हुआ है इसी लिए आज उनके पूरे परिवार के द्वारा माँ चंडी दाई के दरबार में अपने गाँव मदनपुर से 12 किलोमीटर दूर जमीन पर लोटते हुए पकरिया पहुँचकर उन सभी के द्वारा चंडी दाई को नारियल चढ़ाया गया साथ ही उनके परिवार के द्वारा मंदिर पहुँचकर पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना किया गया। वही इनके परिवार के इस अथाह भक्ति को देखकर आसपास व सड़क पर चलते राहगीरों ने इनकी श्रद्धा कि खूब सरहना किया । इनके परिवार में रतन सिंह , जतन सिंह , सम्राट सिंह , बाऊबंडल सिंह , गिरजा बाई समेत परिवार के लोग शामिल थे।

24 साल बाद फिर आ रही है ये शुभ घड़ी, इन 8 राशि वालों को अचानक मिलेगी कोई बड़ी खुशखबरी


आपको अगले २४ घंटो के अन्दर कोई बहुत बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। जिनको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और अधिक धन की प्राप्ति होगी। आप प्रापर्टी, दलाली, ब्याज से अधिक धन कमाएंगे। शनिदेव की कृपा से आपके ऊपर जमकर खुशियों की बरसात होगी। चलिए जानते है उन राशियों के बारे में....

मेष, वृषभ, तुला, कर्क : - इन राशियों के जीवन में चौबीस साल बाद शुभ घड़ी आई है। ,पैसों से जुड़े मामले सभी आसनी से हल हो सकते है। आपकी बौद्धिक चिंतन से कुछ आशंकाएं दूर हो सकती है। लंबे समय बाद परिवार वालों के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर प्राप्त होगा। कार्यभार में इजाफा होगा। आपको कई तरह से धन लाभ होने का योग है आपके परिवार में आपसी प्रेम बढ़ेगा, दिन आनन्द व उल्लास से भरा हुआ होगा व शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य भी काफी अच्छा होगा।

सिंह, कन्या, मिथुन, मीन : - जीवन के हर मोड़ पर आपको सफलता प्राप्त होगी। व्यापार में उन्नति के योग बनते नजर आ रहे हैं और धन लाभ भी हो सकता हैं। आपका खोया हुआ प्यार वापस मिलेगा, आपके बीच की दूरियां मिट जाएंगे। ससुराल पक्ष की तरफ से भी कोई खुशखबरी मिल सकती है। राजकीय कर्मचारियों के लिए नौकरी का वातावरण सुखद होगा। कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना आप आसानी से करेंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर घर में उत्पन्न मतभेद की स्थिति समाप्त हो जाएगी। आपके सभी अटके हुए काम बनने लगेंगे। आपको अपने कामकाज का अच्छा परिणाम मिल सकता है। 

 

333 साल बाद भोलेनाथ सिर्फ इन राशियों पर हुए मेहरबान, कहीं आपकी राशि तो नहीं.. पढ़े ..!!


333 साल बाद महादेव इन 4 राशियों पर प्रसन्न हुए हैं जिस कारण इन्हें जल्द ही बड़ी खुशखबरी मिलेगी। इस समय आपकोअधिक मेहनत करनी होगी तभी आपको उस कार्य में सफलता मिल सकती है। घर परिवार की चल रही समस्याएं कुछ कम हो सकती हैं। कुछ छोटे-छोटे कामों में अधिक भागादौड़ी हो सकती है। कुछ अनजान लोगों से बहस होने के योग भी बन रहे हैं। आपको इस प्रकार की स्थिति से बचने का प्रयास करना चाहिए।

आपको बतादे कि आने वाला समय आपके लिए लाइफ चेंजिंग साबित होगा । जिससे आप समाज में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहेंगे। और आने वाले समय में आपको जीवन साथी की तरफ से अचानक कोई बहुत बड़ी खुशखबरी सुनने को मिल सकती है, व्यापार करने वाले लोगों को एक बार में बड़ा धन लाभ होने के योग बन रहे हैं, नौकरी करने वाले लोगों को नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है।
वे 4 राशियां मेष, सिंह, तुला और कुंभ हैं।

भगवान करमदेव जी का किया जा रहा पूजा अर्चना

कोटमी सोनार। आदिवासी समाज द्वारा ग्राम परसाही बाना में भगवान करमदेव जी का पूजा अर्चना किया जा रहा है, यहां पर समाज में सुखसमृद्धि ,भाईचारा ,एकता बनी रहे यही कामनाओं के साथ आदिवासी समाज के लोग जुटे हुए है । मांदर के थाप पर कर्मा नृत्य किया जाता है जो आकर्षण का केंद्र बना रहता है आदिवासी समाज के लोग अपने पारम्परिक वेश भूषा धारण किये रहते है ।यह जानकारी रूपेश कुमार कँवर ने दी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में ईश्वर सिंह ,मनमोहन ,फिरत राम,रामसिंह,मनोहर सिंह प्यारे लाल सिंह , संतोष कुमार सहित समाज के लोग जुटे हुए है

सावधान : पितृ पक्ष में भूलकर भी मत करें ये 6 काम,खुशियों में लग सकता है ग्रहण

यह बात तो आप सभी जानते ही होंगे की पितृ पक्ष में 16 श्राद्ध होते है, जिनमे लोग अपने पितरों को खुश करते है। हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इन दिनों लोग अपने पितरों को खुश करने के लिए और उनका आशीर्वाद पाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य करते है। लेकिन आज की इस पोस्ट में हम आपको उन कामों के बारे में बताएंगे जो आपको भूलकर भी पितृ पक्ष में नहीं करने चाहिए।


आपको बता दे कि 13 सितंबर दिन शुक्रवार को सुबह सात बजकर 34 मिनट पर चतुर्दशी तिथि की समाप्ति है। सात बजकर 35 मिनट पर पूर्णिमा का प्रारंभ होगा, जो कि 14 सितंबर दिन शनिवार को सुबह 10 बजकर 02 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। श्राद्ध तर्पण पिंडदान का समय दोपहर का होता है, इसलिए पूर्णिमा 13 सितंबर दिन शुक्रवार को होगी।

-पितृ पक्ष में अगर कोई आपके घर भोजन-पानी मांगने आए तो उसको कभी भी ख़ाली हाथ वापिस मत जाने दे।
-पितृ पक्ष में गाय, कुत्ता, बिल्ली और कौए आदि को नहीं मारना चाहिए बल्कि इनको खाने के लिए कुछ जरूर देना चाहिए।
-पितृ पक्ष में मांसाहार भोजन का सेवन भूलकर भी मत करे। इसके अलावा इस दौरान शराब आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
-पितृ पक्ष में परिवार में होने वाली आपसी कलह से बचे। इस दौरान अपने घर शांत माहौल रखे।
-पितृ पक्ष के दौरान आप अपने घर में जो भी भोजन पकाते है, उसका सेवन करने से पहले उस भोजन में से कुछ भोजन अपने पित्तरो के लिए निकाल कर रख ले।
-पितृ पक्ष के दौरान भौतिक सुख जैसे सोने के आभूषण, नए वस्त्र, वाहन आदि बिलकुल मत खरीदे। ऐसा करना अशुभ माना जाता है।

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12, 13 और 14 तारीख के दिन इन राशि वालों को मिलेंगे शुभ समाचार कहीं आपकी राशि तो नही, जानने के लिए पढ़े

मिथुन, सिंह, कर्क : -

किसी बड़ी खुशखबरी से आप का मन प्रसन्न रह सकता है। कार्य में तरक्की मिल सकती है। नौकरी तलाश कर रहे लोगो को जल्द ही नौकरी की प्राप्ति भी हो सकती है। आर्थिक स्थिति पहले से काफी ज्यादा मजबूत होती दिखेगी। अछ्हा समय आपके जीवन के लिए शुरू हो चूका है। कार्य क्षेत्र में आपको अच्छा मुनाफा हासिल हो सकता है। कर्मकाज में आपका मन अच्छा रह सकता है। नए मौके आपको मिल सकते है। मान सम्मान के स्तर वृद्धि हो सकती है। भावात्मक संतुलन आपके बने रह सकते है।

मेष, वृषभ, तुला : -

आपके सेहत के मामले में पहले से काफी ज्यादा सुधार देखने को मिलेगा। लेन-देन से जुड़े सभी प्रकार के फैसले आपके ठीक साबित होंगे। कामकाज पर कुछ बड़ी रोक लगानी पड़ सकती है। रुके हुए कुछ कार्य आपके पूर्ण होने वाले हैं। लंबे समय से चली आ रही कुछ परेशानी आपकी खत्म हो सकती है। विदेश यात्रा करने जाने के लिए दिन अच्छा रहने वाला है। सोचा समझा सभी प्रकार का कार्य सिद्ध हो सकता है। खान-पान के प्रति थोड़ी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।