विश्व

भारत चीन को चारों तरफ से घेरने की कोशिश में लगा, कितना होगा कामयाब?

नई दिल्लीः ड्रेगन की जालसाजी पर भारत चीन को चारों तरफ से घेरने का मन बना चुका है। इसीलिए भारत उसे सामरिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर घेर रहा है। पूर्वी लद्दाख में जो हरकत चीन ने की, वो शर्मनाक है। उसके बाद भी वो अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा। लेकिन भारत द्वारा अपने 59 ऐप्स पर बैन लगाने के बाद से चीन के स्वर कुछ मद्धम पड़े हैं। बहरहाल, भारत ने ड्रेगन की चालाकी का जवाब कूटनीतिक तरीके से देते हुए हांगकांग (HongKong) में चीन के नए सुरक्षा कानून पर इशारों-इशारों में सवाल खड़े किए और साथ ही साथ चीन को खरी-खोटी भी सुना दी।

बुधवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत ने कहा कि हांगकांग को विशेष व्यवस्थापकीय क्षेत्र (Special administrative region) बनाना चीन का घरेलू मसला है, लेकिन भारत इन घटनाओं पर करीब से नजर रखे हुए है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव चंदर ने कहा, ‘‘हम हाल की इन घटनाओं पर चिंता जताने वाले कई बयान सुन चुके हैं। हमें उम्मीद है कि संबंधित पक्ष इन बातों का ध्यान रखेंगे और इसका उचित, गंभीर और निष्पक्ष समाधान करेंगे।’’ हालांकि भारत ने अपने बयान में चीन का नाम लेने से बचता दिखाई दिया।

एनबीटी के हवाले से भारत का यह बयान उस समय आया, जब दुनिया में मानवाधिकार की स्थिति पर चर्चा चल रही है। भारत पहली बार हांगकांग के मुद्दे पर बोला है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन के साथ गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत का यह बयान आया है। दोनों देशों के बीच एक महीने से ज्यादा वक्त से पूर्वी लद्दाख में तनाव बना हुआ है। 

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के बयान वाले दिन ही भारत का भी बयान आया है, जिसमें अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत में 59 चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध का खुलकर समर्थन किया। पोम्पियो ने कहा था कि भारत का क्लीन ऐप नजरिये से उसकी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि भारत हांगकांग के मुद्दे पर चीन के खिलाफ बोले। चीन के नए कानून से हांगकांग के निवासियों के मानवाधिकार उल्लंघन की बात कही जा रही है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में 27 देशों ने चीन से हांगकांग में लागू किए गए नए कानून पर फिर से विचार करने को कहा है।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया में केवल भारत ही एक ऐसा देश है जिसने हांगकांग के मुद्दे पर अभी तक कुछ नहीं बोला है। ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने चीन के नए कानून की खुलकर आलोचना की है। जापान ने भी हांगकांग की आजादी का समर्थन किया है। भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।

सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चलानी ने ट्वीट कर कहा, ‘‘चीन हांगकांग में यूएन संधि का उल्लंघन कर रहा है लेकिन भारत ने इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहा। चीन में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार पर भी भारत ने कोई बयान नहीं दिया। एससीएस (SCS) में चीन के कार्यों पर भारत चुप रहा। लेकिन चीन ने जम्मू-कश्मीर का मसला यूएनएससी (UNSC) में उठाया।’’

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ा झटका, ट्रंप ने H-1B Visa पर लगाई रोक

नई दिल्लीः ट्रम्प प्रशासन ने सोमवार को वर्तमान कैलेंडर वर्ष में सभी एच-1बी और एच-4 सहित विदेशियों के लिए, नए प्रवासियों और निलंबित वीजाधारकों के लिए ‘ग्रीन कार्ड’ जारी करने पर रोक लगा दी। यह रोक उन वीजाधारकों के लिए नहीं जो पहले से ही अमेरिका में रह रहे हैं। ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के तहत जो विदेशी छात्र अमेरिका में स्नातक होने के बाद योग्य होगें, वो छात्र भी इस समस्या से प्रभावित नहीं होंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से भारत समेत दुनिया के आईटी प्रोफेशनल को बड़ा झटका लगेगा। 

डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका में रहने वाले उन लोगों की मदद करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था। इसका उद्देश्य उन स्थानीय वर्कस को प्रोटेक्ट करना है जो कोविड-19 के फैलने के कारण बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ट्रम्प ने एक बयान में कहा, ‘‘हमारे पास एक आव्रजन प्रणाली बनाने का नैतिक कर्तव्य है जो हमारे नागरिकों के जीवन और नौकरियों की रक्षा करता है। यह निलंबन दिसंबर तक प्रभावी रहेगा।’’

ट्रंप का ये ऐलान नवंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनावों के मद्देनज़र देखा जा रहा है। राष्ट्रपति चुनावों से ठीक पहले ये ऐलान करते हुए ट्रंप ने विभिन्न व्यापारिक संगठनों, कानूनविदों और मानवाधिकार निकायों द्वारा आदेश के बढ़ते विरोध की अनदेखी की है।

एच-1बी वीजा पर रोक 24 जून से लागू होगी। इससे बड़ी संख्या में भारतीय आईटी पेशेवरों के प्रभावित होने की संभावना है। अब उन्हें स्टैम्पिंग से पहले कम से कम इस साल के खत्म होने का इंतजार करना पड़ेगा। ये कदम उन भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी संख्या में भी प्रभावित करेगा जिनका एच-1बी वीजा खत्म होने वाला है और वो उसे रिन्यू कराना चाहते हैं।

आज तक के हवाले से डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से दुनियाभर से अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। यहां बता दें कि अमेरिका में काम करने वाली कंपनियों को विदेशी कामगारों को मिलने वाले वीजा को एच-1बी वीजा कहते हैं। इस वीजा को एक तय अवधि के लिए जारी किया जाता है।

क्या है एच-1बी वीजा
एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो। इस वीजा की वैलिडिटी छह साल की होती है। अमेरिकी कंपनियों की डिमांड की वजह से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स इस वीजा को सबसे ज्यादा संख्या में हासिल करते हैं।

Lac पर तनाव कम करने की कोशिशें जारी, आज फिर होगी दोनों देशों के बीच बातचीत......

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक लद्दाख सीमा पर तनाव को कम करने के लिए भारतीय सेना व चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बीच आज बातचीत हो सकती है. हालांकि, बातचीत का एजेंडा और स्थान के बारे में अभी पुष्ता जानकारी नहीं है. इस बीच मिडीया रिपोर्ट के अनुसार गलवान घाटी में खूनी झड़प वाली जगह पर तनातनी जारी है. दोनों तरफ से हजार सैनिक जमे हुए हैं.

यूरोपियन यूनियन ने कहा, WHO का अनुदान रोकने के फैसले पर दोबारा विचार करें राष्ट्रपति ट्रंप

A News Edit By : Yash Kumar Lata

मिडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यूरोपियन यूनियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुदान रोकने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया. आपको बतादे कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि डब्ल्यूएचओ महामारी से सही ढंग से निपटने में नाकाम रहा है और उसपर पूरी तरह चीन का नियंत्रण हो गया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वोन डेर लेयेन ने शनिवार को ट्रंप से उनके फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाईयों से बचना चाहिए जिनसे अंतरराष्ट्रीय कोशिशें कमजोर हों. यह समय अंतराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने और मिलजुल कर प्रयास करने का है.

उन्होंने कहा, डब्ल्यूएचओ को फिलहाल और भविष्य में कोरोना वायरस से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का नेतृत्व करते रहना चाहिये। इसके लिये सभी के सहयोग की बहुत ज्यादा जरूरत है.

लद्दाख में चीन का शक्ति प्रदर्शन, मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने भेजी एक्‍स्‍ट्रा फोर्स

नई दिल्लीः वैसे तो आमतौर पर भारत और चीन की सेनाओं का कई बार आमना-सामना होता रहा है। लेकिन 5 मई को पूर्वी लद्दाख में चीनी और भारत के जवान आपस में भिड़ गए थे। दोनों ओर से करीब 100 से ज्यादा सैनिक घायल हुए थे। तब से दोनों सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में शुरू हुआ तनाव बढ़ता ही जा रहा है। 

दोनों ही देशों ने विवादित क्षेत्र में भारी संख्या में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। गल्वान घाटी में चीनी सैनिक पिछले दो सप्ताह से अस्थायी रूप से वहां डटे हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि चीनी सैनिक जिस तरह से यहां मशीनरी ला रहे है, उससे वह बंकर्स बनाने में इस्तेमाल करेंगे। भारत ने भी कोई कसर न छोड़ते हुए पैगोंग झील और गल्वान घाटी में सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। भारत चीन की चालाकी भांप गया है और पिछली गल्तियों से सबक लेते हुए वह कोई भी भूल नहीं करना चाहता। वैसे यहां बता दें कि कई इलाकों में भारत की स्थिति चीन से बेहतर है।

चीन अपनी पुरानी रणनीति पर कायम है और वह भारी संख्या में बॉर्डर डिफेंस रेजिमेंट के जवानों को तैनात कर रहा है। भारत भी चीन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए वही रणनीति अपना रहा है। इसका मतलब ये है कि चीन जितने भी सैनिक और संसाधन लगाएगा, भारत भी उसी लहज़े में उसका जवाब देगा। चीन ने सिर्फ सैनिक ही नहीं बुलाए, झील में नावों की संख्या बढ़ा दी है। हवाई निगरानी के लिए गल्वान घाटी में हेलिकॉप्टर्स उड़ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने करीब 1300 सैनिक यहां पर तैनात किए हैं। भारत भी उसी हिसाब से सैनिकों की तैनाती कर रहा है। भारत ने लेह की इन्फैट्री डिजिवन की कुछ यूनिट्स को आगे भेजा है। कई और बटालियंस भी लद्दाख में मूव कराई गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि चीन मुझे चुनाव हरवाना चाहता है और मेरे विरोधी जो बिडेन को राष्ट्रपति बनाना चाहता है।

कोरोना वायरस महामारी के कहर के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन पर हमला करना लगातार जारी है। बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को दुनिया में हुई लाखों लोगों की मौत का जिम्मेदार बताया था, अब गुरुवार को एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर चीन है। अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि चीन मुझे चुनाव हरवाना चाहता है और मेरे विरोधी जो बिडेन को राष्ट्रपति बनाना चाहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर लिखा, ‘चीन ने लगातार गलत जानकारी फैलाना शुरू कर दिया है, क्योंकि वो चाहता है कि जो बिडेन राष्ट्रपति का चुनाव जीत जाए। ताकि चीन एक बार फिर अमेरिका को बर्बाद कर सके, वो लंबे वक्त से ऐसा ही करता आया है. लेकिन जब से मैं आया हूं वो ऐसा करने में नाकाम रहा है’।

गौरतलब है कि अमेरिका में इस साल नवंबर में राष्ट्रपति पद के चुनाव होने हैं, ऐसे में उसके लिए अभी से ही प्रचार शुरू हो चुका है। डोनाल्ड ट्रंप पिछली बार की तरह इस बार भी अमेरिका फर्स्ट का झंडा बुलंद किए हुए है और कोरोना वायरस महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

इससे पहले भी डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन पर लगातार निशाना साधा जा चुका है, जहां उन्होंने चीन को कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों का जिम्मेदार ठहराया। और कहा वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अभी कोई बात नहीं करेंगे। इतना ही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने धमकी दी थी कि अगर जरूरत पड़ी और हालात बिगड़े तो वह चीन से संबंध भी तोड़ सकते हैं।

भारत-चीन के सैनिकों के बीच टकराव, दोनों तरफ के जवान हुए घायल

सिक्किम बॉर्डर पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव की खबर आ रही है। भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक उत्तर सिक्किम इलाके में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हल्की झड़प हुई। इस दौरान दोनों तरफ के सैनिक मामूली रूप् से घायल हो गए। ये घटना सिक्कम बॉर्डर पर नाकूला सेक्टर के पास की है। 

सूत्रों के मुताबिक इस झगड़े को स्थानीय स्तर के सुलझा लिया गया। बाद में दोनों तरफ के सैनिक अपनी-अपनी पोस्ट पर वापस लौट गए। बता दें कि सीमा विवाद के चलते सैनिकों के बीच ऐसे छोटे-मोटे विवाद होते रहते हैं। इस तरह की घटना काफी लंबे समय के बाद हुई है। थोड़ी  देर बाद इस्टर्न कमॉड की तरफ से आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी।

बता दें कि साल 2017 में डोकलाम सेक्टर में भारत और चीन की सेनाओं के बीच 73 तक गतिरोध चला था। चीनी सेना ने इस इलाके में सड़क निर्माण शुरू कर दिया था। भूटान की तरफ मदद का हाथ बढ़ाते हुए भारतीय सेना डोकलाम तक पहुंच गई और उसने सड़क निर्माण कार्य रोक दिया। इसके बाद 73 दिनों तक दोनों देशों की सेनाएं उसी स्थिति में तैनात रहीं।

राजनयिक बातचीत के बाद अगस्त में गतिरोध तो समाप्त हो गया. डोकलाम एक विवादित भूभाग है जिसपर चीन और भूटान दोनों ही अपना दावा ठोंकते हैं। भारत मानता है कि वह भूखंड भूटान का है। इसके साथ ही यह इलाका भारतीय मुख्य भू-भाग को नॉर्थ ईस्ट से जोड़ने वाले चिकन नेक के बेहद करीब है इसलिये यह सामरिक दृष्टि से भी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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दुनियाभर में कोरोना से अब तक 2,59,612 लोगों की हुई मौत

कोरोना से जूझ रहे देशों में संक्रमण की कोरोना की वजह से मौतों का स‍िलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी से प्राप्‍त आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के 3,659,243 मामले सामने आए हैं जबकि 259,612 लोगों की मौत हो गई है। हालांकि 1,197,313 लोग संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं। यही नहीं समाचार एजेंसी रॉयटर की रिपोर्ट केअनुसार, दुनियाभर में 90,000 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारी कोरोना संक्रमण के शिकार हुए हैं। इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेज ने बताया है कि इस जानलेवा वायरस ने दुनियाभर में 260 से ज्‍यादा नर्सों की जान चली गई है।
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कोरोना वायरस के खौफ के बीच चढ़ रहा प्यार, एक महीने पहले मिले और शेल्टर होम में ही कर ली शादी

कोरोना वायरस खतरे को देखते हुए कोलंबिया सरकार ने अन्य देशों की तरह राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है. इस दौरान कॉफी उत्पादक क्षेत्र मनिज़ेल्स में ऐसे लोगों की लिए शेल्टर का निर्माण किया गया, जिनके पास सिर छिपाने की जगह नहीं है. इसी शेल्टर में मारिया सेसिलिया ओसोरियो और अल्फांसो अर्डीला की एक महीने पहले मुलाकात हुई.

एक मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक अर्डीला ने बताया कि मेरा ख्याल रखने वाला कोई नहीं था, लेकिन जब मैं शेल्टर में आया तो मुझे अपनापन महसूस हुआ. ओसोरियो से मिलकर लगा कि कोई है जो मुझसे प्यार करता है, मेरी चिंता करता है. शादी के बाद दोनों फिलहाल शेल्टर में बने एक टेंट में अपना जीवन गुजार रहे हैं और 11 मई को खत्म होने वाले लॉकडाउन का इंतजार कर रहे हैं.

कोरोना संकट में फंसा अमेरिका, जिनपिंग के फोन से ढीले पड़े ट्रंप के तेवर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कोरोना वायरस की महामारी पर रोक लगाने के लिए अमेरिका से सहयोग बढ़ाने की अपील की है. शी जिनिपिंग ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की. जिनपिंग ने कहा कि वह अमेरिका में फैली महामारी को लेकर चिंतित हैं और उसकी मदद करना चाहते हैं. ट्रंप ने भी ट्वीट कर इस बातचीत की जानकारी दी और चीन के प्रति आभार जताया.

पाकिस्तान में ट्रेन और बस की टक्कर में कम से कम 20 लोगों की मौत

मिडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के दक्षिणी सिंध प्रांत में रोहरी "रेलवे स्टेशन" के निकट तेज गति से आ रही ट्रेन और एक यात्री बस की भीषण टक्कर में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए. सुक्कुर आयुक्त शफीक अहमद महेसर ने बताया कि इस हादसे में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई और कई घायलों की हालत नाजुक होने कारण मृतक संख्या बढ़ने की आशंका है.

अब पाकिस्तान की इमरान सरकार सोशल मीडिया पर कसेगी नकेल, जानकारी के अनुसारपाकिस्तान में फैसले का भारी विरोध

पाकिस्तान सरकार ने सोशल मीडिया पर नकेल कसने के लिए नए नियम और कानून लाने का फैसला किया है. इस पर देश में व्यापक आलोचना होने के साथ बहस छिड़ गई है. इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार की ओर से बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने की मंशा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं.  सोशल मीडिया कंपनिया और मीडिया एक्टिविस्ट्स, प्रधानमंत्री इमरान खान के उठाए गए कदमों को लेकर हैरान हैं. ये वही वर्ग है जिसने इमरान के विपक्ष में रहते हुए उनके सरकार विरोधी प्रदर्शनों को पूरा समर्थन और कवरेज दिया था.

यहां के जंगलों में फैली है भीषण आग अब तक 50 करोड़ जानवरों की आग में झुलसने से हुई मौत

चार महीने का समय बीत चुका है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के इकोलॉजिस्ट ने अनुमान जताया है कि अब तक 48 करोड़ जानवरों की मौत आग में झुलसने से हुई है. इसमें स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया के जंगल में अब तक का सबसे बड़ा अग्निकांड हुआ है. यहां के जंगल कई दिनें से धधक रहे हैं. जंगल की आग को देखते हुए देश के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 13 जनवरी से शुरू होने वाली अपनी चार दिवसीय भारत यात्रा शनिवार को रद्द कर दी. हालांकि प्रधानमंत्री मॉरिसन ने कहा कि वह आगामी महीनों में सही समय पर एक बार फिर से यात्रा की तारीख तय करेंगे. वह 13 जनवरी से शुरू होने वाली अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय बातचीत करने वाले थे.एक बयान में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, हमारा देश इस वक्त देश भर में फैली भीषण जंगल की आग संकट से जूझ रहा है. इस मुश्किल घड़ी में हमारी सरकार का पूरा ध्यान ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की मदद करने पर केंद्रित है. कई लोग फिलहाल आग के खतरे का सामना कर रहे हैं और कई लोग इससे उबर चुके हैं.बयान के अनुसार प्रधानमंत्री ने भारत की अपनी राजकीय यात्रा एवं जापान की आधिकारिक यात्रा रद्द कर दी ताकि वह ऑस्ट्रेलिया में आई आपदा के समय देश में रहें और बचाव कार्यों पर करीब से नजर रख सकें.इसके अनुसार, हम लोग इस यात्रा को लेकर भारत और जापान की ओर से की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हैं और आगामी महीनों में यात्रा को पुननिर्धारित करने को लेकर आशावान हैं.बयान के अनुसार, देश भर में हमलोग जहां भी गए वहां हमें जंगल की आग के कारण तबाही और निराशा ही दिखी. सबसे अच्छी बात यह दिखी कि संकट की इस घड़ी में ऑस्ट्रेलियावासी एक साथ मिलकर एक दूसरे की मदद को आगे आए हैं.।

ट्रंप ने दिया था ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर की हत्या का आदेश:-पेंटागन

अमेरिका के रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेश में अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट रक्षात्मक कार्रवाई करते हुए ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर कासिम सुलेमानी को मारने का आदेश दिया था। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा,जनरल सुलेमानी सक्रिय रूप से इराक में अमेरिकी राजनयिकों और सैन्यकर्मियों पर हमले की सक्रिय रूप से योजना बना रहा था। जनरल सुलेमानी और उसका कुद्स फोर्स सैकड़ों अमेरिकियों और अन्य गठबंधन सहयोगियों के सदस्यों की मौत और हजारों को जख्मी करने के लिए जिम्मेदार हैं। सुलेमानी की मौत के बाद ट्रंप ने बिना किसी विस्तृत जानकारी के अमेरिकी झंडा ट्वीट किया।ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड ने सरकारी टेलीविजन पर एक बयान में कुद्स यूनिट के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत की पुष्टि की है। बयान में कहा गया है कि बगदाद में अमेरिकी बलों के हमले में उनकी मौत हो गई। समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक, बगदाद एयरपोर्ट पर अमेरिकी हवाई हमले में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के क्वाड फोर्स के कमांडर मेजर जनरल कासिम सोलेमानी की मौत हुई है। इराक की टीवी और तीन अधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि बगदाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हवाई हमले में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के क्वाड फोर्स के कमांडर जनरल कासिम सोलेमानी समेत सात लोगों की मौत हुई है, इसमें इरान द्वारा समर्थित सेना का डिप्टी कमांडर की शामिल है। इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेवार बताया जा रहा है।

खबर जरा हट के : पढ़े कौन हैं दुनिया की सबसे सुरक्षित और समय की पाबंद एयरलाइंस ?

एयरलाइनरेटिंग्स डॉट कॉम की टॉप-20 सेफेस्ट एयरलाइंस फॉर 2020 रिपोर्ट के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया की विमानन कंपनी कंतास एयरवेज़ दुनिया की सबसे सुरक्षित एयरलाइंस है। वहीं ओएजी ऐविएशन वर्ल्डवाइड की सूची के मुताबिक, इंडोनेशियाई विमानन कंपनी गरुड़ इंडोनेशिया सर्वाधिक समय की पाबंद एयरलाइंस है। गौरतलब है कि शीर्ष 10 विमानन कंपनियों की इस सूची में सिर्फ एक अमेरिकी एयरलाइंस शामिल है।
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