विश्व

डोनाल्ड ट्रंप ने दी भारत को चेतावनी

  वाशिंगटन : डोनाल्ड ट्रंप ने दी भारत को चेतावनी. ट्रंप ने उत्पादों पर ज्यादा शुल्क को लेकर भारत को चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को उत्पादों पर ज्यादा शुल्क को लेकर भारत को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि इसे अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। जापान के ओसाका में 28 जून को जी 20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के बाद ट्रंप का यह बयान

भारत की अहम कूटनीतिक जीत, एशिया प्रशांत समूह ने किया सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए समर्थन

पंद्रह सदस्यीय परिषद में 2021-2022 के कार्यकाल के लिए पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव जून 2020 के आस-पास में होना है।
संयुक्त राष्ट्र। एशिया-प्रशांत समूह (Asia Pacific Group ) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो साल की अस्थायी सदस्यता के लिए भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया है। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत है 15 सदस्यीय परिषद में 2021-2022 के कार्यकाल के लिए पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव जून 2020 में होना है।

भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले 55 देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, इंडोनेशिया, ईरान, जापान, कुवैत, किर्गिस्तान, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, सीरिया, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और वियतनाम शामिल हैं।

इन सदस्यों का कार्यकाल जनवरी 2021 से शुरू होगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने मंगलवार को ट्वीट किया, 'सर्वसम्मति से लिया गया फैसला। सभी 55 सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद।'

महासभा दो साल के कार्यकाल के लिए यूएनएससी के पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव करती है। यूएनएससी के पांच स्थायी सदस्य हैं चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका। अफ्रीका और एशिया के हिस्से में पांच जबकि पूर्वी यूरोप के हिस्से में एक, लातिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के हिस्से में दो, पश्चिमी यूरोप के हिस्से में दो सीटें हैं।

पहले भी रह चुका है भारत अस्थायी सदस्य

इससे पहले भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और हाल ही में 2011-12 में यूएनएससी का अस्थायी सदस्य रह चुका है।
साभार 

शपथ ग्रहण से पहले मोदी ने महात्मा गांधी, अटल जी और शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि

 

 नई दिल्ली।   आज शाम 7 बजे नरेंद्र दामोदर दास मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण से पहले मोदी का कार्यक्रम सुबह 7 बजे से ही शुरू हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी आजादी के बाद शहीद हुए जवानों के लिए बने नेशनल वॉर मेमोरियल पहुंचे जहां उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इससे पहले मोदी ने अपने दिन की शुरुआत सबसे पहले महात्मा गांधी की समाधि पहुंचकर की और यहां श्रद्धासुमन अर्पित किए।

मोदी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में 14 देशों के प्रमुखों व 8000 लोगों की मौजूद होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाएंगे। उनके बाद भाजपा नीत राजग के मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। यह चौथा मौका होगा जब शपथ समारोह दरबार हॉल की बजाए राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होगा। समारोह के लिए कोलकाता से 54 परिवारों के खास मेहमानों को बुलाया गया है। ये उन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार हैं, जिनके मुखियाओं की बंगाल में हिंसा में मौतें हुई हैं।

अब तक का सबसे बड़ा समारोह

मोदी की दूसरी पारी के औपचारिक आगाज के मौके पर राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोह अब तक का सबसे बड़ा होगा। इसमें हाई टी (अल्पाहार) की भी व्यवस्था की गई है। हालांकि समारोह में शरीक होने वाले बिम्स्टेक देशों के प्रमुखों को राष्ट्रपति कोविंद निजी रूप से रात्रिभोज देंगे। राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अशोक मलिक ने बताया कि समारोह का आकार मोदी सरकार को दोबारा मिले जनादेश का प्रतिबिंब होगा। 2014 में भी मोदी ने खुले प्रांगण में ही शपथ ली थी।

सबसे पहले चंद्रशेखर ने 1990 में खुले प्रांगण में शपथ ली थी। फिर 1998 में अटलजी ने और 2014 में नरेंद्र मोदी ने खुले में शपथ ग्रहण की थी। पिछली बार करीब 4000 मेहमान शरीक हुए थे। शाह से मिले नीतीशबुधवार को जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। माना जा रहा है कि उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले जदयू नेताओं के नामों को लेकर चर्चा की। जदयू कोटे से दो मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
 
 नई दिल्ली मोदी के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में 14 देशों के प्रमुखों व 8000 लोगों की मौजूद होंगे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाएंगे। उनके बाद भाजपा नीत राजग के मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। यह चौथा मौका होगा जब शपथ समारोह दरबार हॉल की बजाए राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होगा। समारोह के लिए कोलकाता से 54 परिवारों के खास मेहमानों को बुलाया गया है। ये उन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार हैं, जिनके मुखियाओं की बंगाल में हिंसा में मौतें हुई हैं।

अब तक का सबसे बड़ा समारोह
मोदी की दूसरी पारी के औपचारिक आगाज के मौके पर राष्ट्रपति भवन में होने वाले समारोह अब तक का सबसे बड़ा होगा। इसमें हाई टी (अल्पाहार) की भी व्यवस्था की गई है। हालांकि समारोह में शरीक होने वाले बिम्स्टेक देशों के प्रमुखों को राष्ट्रपति कोविंद निजी रूप से रात्रिभोज देंगे। राष्ट्रपति के प्रेस सचिव अशोक मलिक ने बताया कि समारोह का आकार मोदी सरकार को दोबारा मिले जनादेश का प्रतिबिंब होगा। 2014 में भी मोदी ने खुले प्रांगण में ही शपथ ली थी।

सबसे पहले चंद्रशेखर ने 1990 में खुले प्रांगण में शपथ ली थी। फिर 1998 में अटलजी ने और 2014 में नरेंद्र मोदी ने खुले में शपथ ग्रहण की थी। पिछली बार करीब 4000 मेहमान शरीक हुए थे। शाह से मिले नीतीशबुधवार को जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की। माना जा रहा है कि उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले जदयू नेताओं के नामों को लेकर चर्चा की। जदयू कोटे से दो मंत्री बनाए जाने की संभावना है। 
साभार 

परवेज मुशर्रफ के बिगड़े बोल कहा पाकिस्तान पर हमला नरेंद्र मोदी की जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होगी

मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने पुलवामा हमले की निंदा करते हुए कहा कि ये हमला बेहद अमानवीय था. इंडिया टुडे से खास बातचीत में मुशर्रफ ने पुलवामा हमले की निंदा तो की, लेकिन उन्होंने धमकी भरे अंदाज में कहा कि अगर पाकिस्तान पर हमला किया गया तो ये मोदी की जिंदगी की सबसे बड़ी भूल होगी. मुशर्रफ ने कहा कि पाकिस्तान को धमकी देना बंद कीजिए. आप हमें सबक नहीं सिखा सकते.

पुलवामा हमला: भारत ने पाकिस्तान को दिया तगड़ा झटका, लिया ये बड़ा फैसला...!

भारत ने पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को आर्थिक स्तर पर बड़ा झटका दिया है. एक्शन लेने की शुरुआत को आगे बढ़ाते हुए भारत ने पाकिस्तान से आयातित सभी सामान पर कस्टम ड्यूटी को बढ़ाकर 200 प्रतिशत कर दिया है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्विटर पर यह जानकारी दी है.वही इससे पहले 15 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान से सबसे पसंदीदा देश का दर्जा वापस ले लिया था. ।। भारत सरकार के इस फैसले से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना तय है. कस्टम ड्यूटी बढ़ने के बाद पाकिस्तान के लिए भारत को सीमेंट, पेट्रोलियम पदार्थ, तैयार चमड़ा, ताजे फल और अन्य सामान का निर्यात करना काफी महंगा पड़ेगा. इससे उसकी अर्थव्यवस्था को झटका लगेगा.

नेपाल में 200, 500 और 2000 के भारतीय नोटों पर प्रतिबंध, मचा हड़कंप

पूर्वी चंपारण। नेपाल सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 200, 500 और 2000 के भारतीय नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोई भी व्यक्ति यदि इन भारतीय रुपयों के साथ पकड़ा जाएगा तो उस पर आर्थिक अपराध के तहत मामला दर्ज होगा। गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जाएगा। इस निर्णय से दोनों देश के व्यापार पर असर पड़ेगा। नेपाल का पर्यटन उद्योग भी प्रभावित होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनकपुर आगमन के समय नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी यह मामला उठाया था। माना जा रहा कि भारतीय सरकार की ओर से पुराने नोटों को लेकर कोई कदम नहीं उठाने के चलते भारत के नए नोटों को अवैध घोषित किया गया है।

नेपाल सरकार के प्रवक्ता और सूचना एवं प्रसारण मंत्री गोकुल प्रसाद बास्कोटा ने इन नोटों पर प्रतिबंध की पुष्टि करते हुए कहा कि मंत्री परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। सरकार ने लोगों से कहा है कि वे 200, 500 और 2,000 रुपये के नोट न रखें। इन्हें अमान्य करार दिया जा चुका है।

बास्कोटा ने बताया कि भारत में नोटबंदी के बाद नेपाल में अब भी पुराने एक हजार और पांच सौ के भारतीय नोट पड़े हैं, जिन्हें वापस नहीं लिया गया। केंद्रीय बैंक का कहना है कि उसके पास भारत के तकरीबन आठ करोड़ रुपये मूल्य के पुराने नोट हैं। विदेशी विनिमय व्यस्थापन विभाग के कार्यकारी निदेशक भीष्मराज ढुंगाना ने बीते सितंबर में कहा था कि भारत अपने पुराने नोट को क्यों नहीं बदल रहा।

इंडोनेशिया में भूकंप से 3 की मौत

 
जर्काता (वीएनएस/आईएएनएस)| इंडोनेशिया में गुरुवार सुबह रिक्टर पैमाने पर छह तीव्रता वाले भूकंप ने बाली समुद्री क्षेत्र को हिला दिया। भूकंप के कारण हुए हादसों में तीन लोग की मौत जबकि चार घायल हो गए।
इंडोनेशिया के आपदा निवारण एजेंसी के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुग्रोहो ने ट्विटर पर भूकंप के कारण ध्वस्त हुई कई इमारतों की तस्वीरें साझा कीं।
समाचार एजेंसी `एफे` के मुताबिक, अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) ने कहा कि भूकंप का केंद्र समुद्र से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। भूकंप के झटके पूर्वोत्तर जावा के पंजी और बाली के देनपसार में महसूस किए गए।
भूकंप के झटके ऐसे समय में दर्ज किए गए हैं जब इंडोनेशियाई अधिकारियों ने सुलावेसी द्वीप में दो सप्ताह पहले आए भूकंप और सुनामी पीड़ितों के लिए खोज अभियान समाप्त करने की योजना बनाई थी। 
एजेंसी 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में 23 करोड़ भारतीय आय का 10 फीसदी इलाज पर करते हैं खर्च:

 नई दिल्ली  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आधे भारतीयों की आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं है, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने वाले लोग अपनी आय का 10 फीसदी से ज्यादा इलाज पर ही खर्च कर रहे हैं।

डब्ल्यूएचओ की वेबसाइट पर प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य सांख्यिकी 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की आबादी का 17.3 फीसदी या लगभग 23 करोड़ नागरिकों को 2007-2015 के दौरान इलाज पर अपनी आय का 10 फीसदी से अधिक खर्च करना पड़ा।
भारत में इलाज पर अपनी जेब से खर्च करनेवाले पीड़ित लोगों की संख्या ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की संयुक्त आबादी से भी अधिक है। भारत की तुलना में, इलाज पर अपनी आय का 10 फीसदी से अधिक खर्च करने वाले लोगों का कुल देश की कुल जनसंख्या में प्रतिशत श्रीलंका में 2.9 फीसदी, ब्रिटेन में 1.6 फीसदी, अमेरिका में 4.8 फीसदी और चीन में 17.7 फीसदी है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस एडहानोम गेबेरियस ने एक विज्ञप्ति में कहा, 'बहुत से लोग अभी भी ऐसी बीमारियों से मर रहे हैं, जिसका आसान इलाज और बड़ी आसानी से जिसे रोका जा सकता है। बहुत से लोगों केवल इलाज पर अपनी कमाई को खर्च करने के कारण गरीबी में धकेल दिए जाते हैं और बहुत से लोग स्वास्थ्य सेवाओं को ही पाने में असमर्थ हैं। यह अस्वीकार्य है।'

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट ने आगे बताया गया की देश की आबादी का 3.9 फीसदी या 5.1 करोड़ भारतीय अपने घरेलू बजटा का एक चौथाई से ज्यादा खर्च इलाज पर ही कर देते हैं। जबकि श्रीलंका में ऐसी आबादी महज 0.1 फीसदी है, ब्रिटेन में 0.5 फीसदी, अमेरिका में 0.8 फीसदी और चीन में 4.8 फीसदी है।

इलाज पर अपनी आय का 10 फीसदी से ज्यादा खर्च करने वाली आबादी का वैश्विक औसत 11.7 फीसदी है। इनमें 2.6 फीसदी लोग अपनी आय 25 फीसदी से ज्यादा हिस्सा इलाज पर खर्च करते हैं और दुनिया के करीब 1.4 फीसदी लोग इलाज पर खर्च करने के कारण ही अत्यंत गरीबी का शिकार हो जाते हैं। sabhar 

संयुक्त राष्ट्र ने उत्तर कोरिया की मदद करने पर शिपिंग कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

अमेरिका। संयुक्त सुरक्षा परिषद ने 27 जहाजों, 21 शिपिंग कंपनियों और एक व्यक्ति को इसलिए ब्लैकलिस्ट कर दिया क्योंकि उन्होंने उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों को ताक पर रखते हुए उसकी सहायता की और कारोबार किया। इन कारोबारियों ने उत्तर कोरिया को उस पर लगे प्रतिबंधों से बचाने का भी प्रयास किया। इसे लेकर फरवरी 2018 में अमेरिका ने इन कारोबारियों पर प्रतिबंध लगाने की संयुक्त राष्ट्र से मांग की थी। साथ ही तेल और कोयले जैसे कोरियाई माल की तस्करी पर भी चिंता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र ने मांग मानते हुए उत्तर कोरिया के साथ कारोबार करने वालों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने अभी तक उत्तर कोरिया पर कई बार प्रतिबंध लगाया है, बावजूद इसके वह बाज नहीं आ रहा है। बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को जारी किए गए नए प्रतिबंधों के जरिए न सिर्फ उत्तर कोरिया के शिपिंग ऑपरेशन को निर्देश दिए गए थे, बल्कि चीन की उन कंपनियों को भी निर्देश जारी किए गए थे, जो प्योंगयांग के साथ व्यापार कर रही हैं। 

जिन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया है, उनमें से 16 उत्तर कोरिया में हैं, जबकि 5 हॉन्ग कॉन्ग में, 2 चीन में, दो ताइवान में हैं, जबकि 1 पनामा और एक सिंगापुर में है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मूल की अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने कहा कि हालिया कदम से साफ संदेश दिया जा रहा है कि उत्तर कोरिया पर दबाव बनाने के लिए पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय एकजुट है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्योंगयांग पर लगाए गए अब तक के प्रतिबंधों में यह सबसे बड़ा प्रतिबंध है। बता दें कि उत्तर कोरिया पर 2006 से लेकर अभी तक कई प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। इनकी वजह से उत्तर कोरिया के निर्यात में काफी कटौती भी हुई है।

इजरायली सेना और फिलिस्तीनी नागरिकों में झड़प, 16 की मौत, 2000 से ज्यादा जख्मी

येरुशलम। गाजा-इजरायल बॉर्डर पर हजारों फिलिस्तीनी नागरिकों ने प्रदर्शन किया। ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न कहे जाने वाले 6 हफ्ते के विरोध प्रदर्शन के पहले दिन इजरायली सेना से झड़प में करीब 16 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। साथ ही करीब 2000 से ज्यादा लोग घायल बताए गए हैं। घटना के सामने आने के बाद यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने इजरायल से संयम बनाए रखने की अपील की है।


तीन पॉइंट्स में जानिए पूरा मामला?
1. बॉर्डर पर क्या हुआ?

- इजरायली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) के मुताबिक, जमीन दिवस के दिन करीब 17 हजार फिलिस्तीनी नागरिक बॉर्डर स्थित पांच स्थानों पर जुटे थे। ज्यादातर लोग अपने कैंप्स में ही थे हालांकि, कुछ युवा इजरायली सेना की चेतावनी के बावजूद सीमा पर ही हंगामा करने लगे। उन्होंने बार्डर पर पेट्रोल बम और पत्थरों से हमला किया। जिसके बाद आईडीएफ ने भीड़ को हटाने के लिए फायरिंग कर दी। 
- इजरायल के अखबार येरुशलम पोस्ट के मुताबिक, सेना की गोलीबारी में मारे गए लोग सीमा पर स्थित बाड़े को लांघने की कोशिश कर रहे थे। फिलिस्तीनियों की भीड़ को देखते हुए इजरायल ने टैंकों और स्नाइपर्स का भी सहारा लिया। चश्मदीदों के मुताबिक, उन्होंने आंसू गैस के गोले गिराने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए भी देखा।

2. गोलीबारी पर इजरायल का पक्ष?
- इजरायल की सेना सुरक्षा को देखते हुए गाजा बॉर्डर पर नो-गो जोन की रखवाली करती है। सेना को फिलिस्तीन के जमीन दिवस में हजारों नागरिकों के जुटने की आशंका थी। इसी लिए यहां सेना को बढ़ाया गया था, ताकि फिलिस्तिनियों की ओर से बॉर्डर पार करने जैसी घटनाओं को रोका जा सके। 
- इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इसे इजरायल से जानबूझकर टकराव बढ़ाने का प्रयास बताया। साथ ही इसके लिए फिलिस्तीन के संगठन हमास को जिम्मेदार बताया।

3. क्यों हो रहा टकराव?
- इजरायल-गाजा बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन के लिए फिलिस्तीन की ओर से 5 कैंप्स लगाए गए हैं। इन्हें ‘ग्रेट मार्च ऑफ रिटर्न’ नाम दिया गया है। 
- विरोध प्रदर्शन 30 मार्च से शुरू हुए हैं। इस दिन फिलिस्तीन जमीन दिवस मनाता है। कहा जाता है कि इसी दिन 1976 में फिलिस्तीन पर इजरायल के कब्जे के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले 6 नागरिकों को इजरायली सेना ने मार दिया था। 
- ये विरोध प्रदर्शन 15 मई के आसपास खत्म होंगे। इस दिन को फिलिस्तीन में नकबा (कयामत) के तौर पर मनाया जाता है। 1948 में इसी दिन इजरायल बना था, जिसके चलते हजारों फिलिस्तीनियों को अपने घर छोड़ने पड़े थे।

गाजा में और बिगड़ सकते हैं हालातः यूएन
- यूएन सिक्युरिटी काउंसिल ने न्यूयॉर्क में बैठक के दौरान मामले में जांच की बात कही। यूएन में राजनीतिक मामलों के डिप्टी चीफ ताए ब्रूक ने काउंसिल को बताया कि गाजा में आने वाले दिनों में हालात ज्यादा बिगड़ सकते हैं। उन्होंने मानवाधिकार मामलों में इजरायल से अपनी जिम्मेदारी समझने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा औरतों और बच्चों को निशाना ना बनाए जाने की भी मांग की।

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