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राजनांदगांव : संस्कारधानी बना सेक्स रैकेट का अड्डा यहाँ के होटलों व लॉज में सैक्स रैकेट की लगातार शिकायत

राजनांदगांव-- संस्कारधानी के होटलों व लॉज में इन दिनों कई अनैतिक धंधा,सैक्स रैकेट चलने की लगातार शिकायत सामने आ रही है। होटल संचालकों द्वारा बेखौफ होकर प्रेमी जोड़ों को कमरा उपलब्ध करा कर गैर कानूनी काम कराया जा रहा है वहीं आज मुखबीर से सूचना मिली कि पुराना बस स्टैंड स्थित सुरेश लॉज में देह व्यापार चल रहा है पुलिस छापामार कार्रवाई करने सुरेश लॉज के कमरों में दबिश दी तो चौंकाने वाले नजारे सामने आए पुलिस ने लॉज से 3 युवक व 4 युवतियों को संदिग्ध अवस्था में दबोचा। पुलिस आरोपियों के खिलाफ पीटा एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में जुटी है। राजनांदगांव कोतवाली पुलिस को आज सूचना मिली थी कि शहर के पुराना बस स्टैंड स्थित सुरेश लॉज में जिस्मफरोशी का कारोबार किया जा रहा है सूचना पर कोतवाली पुलिस ने एक टीम बनाकर लाज में दबिश दी इस दौरान तीन युवक और चार युवती संदिग्ध हालत में मिले..पूछताछ करने पर लॉज संचालक के द्वारा उचित जवाब नहीं देने पर संचालक के खिलाफ भी कार्रवाई की गई पुलिस ने इस मामले में लॉज संचालक सहित 4 युवक और 4 युवती के खिलाफ पीटा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है..कोतवाली पुलिस की गिरफ्त में आयी युवती राजनांदगांव की है तो कोई युवक राजनांदगांव जिले से बाहर जिले से हैं ऐसे में यहां एक बड़ा सेक्स रैकेट चलाए जाने का खुलासा भी हो सकता है राजनंदगांव पुलिस ने आज जिस क्षेत्र में छापामार कार्रवाई कर संदिग्ध अवस्था में युवक-युवती को पकड़ा है वहां लगभग 2 माह पूर्व भी पुलिस ने सोनु लाज, कैलाश लाज एवं चंद्रा लाज में दबिश देकर संदिग्ध 12 जोड़ों को जिस्मफरोशी के मामले में पकड़ा था अब एक बार फिर इस लाज में इसी तरह का क्रियाकलाप सामने आया है अब जरूरत है तो ऐसे लाज संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की।

के.एस.के. पावर लिमिटेड के बंद होने के लिये मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियां जिम्मेदार - छतीसगढ़ कांग्रेस

रायपुर/19 सितंबर 2019। छत्तीसगढ़ के के.एस.के. पावर प्लांट के बंद होने के लिये कांग्रेस ने केन्द्र की मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि के.एस.के. पावर प्लांट का बंद होना, पिछली राज्य सरकार और केन्द्र की मोदी सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है। के.एस.के. पावर प्लांट के बंद होने की घटना को राज्य की कांग्रेस सरकार ने पूरी गंभीरता से लिया है। कांग्रेस सरकार के.एस.के. पावर प्लांट के बंद होने से प्रभावित 10,000 परिवारों की रोजी-रोटी ने छिने यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से काम कर रही है। के.एस.के. पावर प्लांट में हो रहे बिजली उत्पादन की भी क्षति न केवल राज्य बल्कि देश की भी क्षति है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों के परिणामस्वरूप देश में जो औद्योगिक वातावरण है, चारों तरफ मंदी है, जीडीपी गिर रहा है इसीलिये के.एस.के. पावर प्लांट बंद हुये है। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने केन्द्र सरकार की कोयला नीति और पावर परचेस एग्रीमेंट की नीतियां को के.एस.के. पावर प्लांट के बंद होने के लिये उत्तरदायी ठहराते हुये कहा है कि के.एस.के. पावर प्लांट को षड़यंत्र करके अडानी ग्रुप को बेचने का आरोप लगाया। के.एस.के. पॉवर प्लांट वही प्लांट है जिसके लिये रमन सिंह ने खेती के सिंचाई के लिये काम आ रहा एक पूरा जिंदा बांध (रोगदा बांध) समाप्त करके प्लांट लगाने के लिए दिया था। पूर्व की रमन सरकार ने तिल्दा के पेन्ड्रावन जलाशय क्षेत्र में निजी सिमेंट कंपनी अल्ट्राटेक को माईनिंग की अनुमति दिये जाने की कोशिश की थी, जिसका कांग्रेस ने और किसानों ने डटकर विरोध किया था। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि देश की आर्थिक हालात खराब है। मंदी की मार से सभी उद्योग व्यवसाय प्रभावित हो रहे है। देश की जीडीपी 5 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। आर्थिक प्रगति नहीं हो पा रही है। बैंकों के एनपीए बढ़ती जा रही है। आटो मोबाईल सेक्टर, टेक्सटाईल सेक्टर, पारले बिस्कुट जैसे कंपनियां बंद हो चुकी है। देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि पिछले 5 वर्षो में निजी निवेश में तेजी से गिरावट आई है। आंकड़े बताते है कि यह संकट केवल वित्तीय संकट भर नहीं और इसकी जड़ें कहीं ज्यादा गहरी है। मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर देश को आर्थिक मोर्चे पर लगातार बुरी खबरें मिल रही है। औद्योगिक उत्पादन कम हो गया है। देश की जीडीपी में गिरावट आई है। रुपए की कीमत नीचे गिरी है। अब एक और बुरी खबर सामने आई है, पिछले 5 साल में भारतीय परिवारों का कार्य दोगुना हो गया है और इस दौरान शुद्ध देनदारी 58 फीसदी बढ़कर 7.4 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। पहले साल 2017 में यह बढ़ोतरी महज 22 फ़ीसदी रही थी। ये आंकड़े देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च के अध्ययन में सामने आए हैं। 5 साल में परिवारों का खर्च दोगुना हुआ है जबकि इस दौरान खर्च करने वाली आमदनी महज डेढ़ गुना बढ़ी है। इसका नतीजा हुआ है कि देश का कुल बचत में 4 फ़ीसदी की बड़ी गिरावट आई है और यह 4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 34.6 किसी से गिरकर 30.5 फीसदी पर सिमट गई है। एसबीआई की ओर से साफ कर दिया कि केवल ब्याज की दर कम कर देने से काम चलने वाला नहीं है। अब मोदी सरकार को आर्थिक मोर्चे पर बड़े फैसले लेने ही होंगे। सरकार को ग्रामीण क्षेत्र में खर्चों को बढ़ाने के लिए उपाय करने होंगे। सरकार ने किसानों को आर्थिक मदद देने के लिए जिस योजना को शुरू किया था उसका लाभ आधे किसानों को ही मिल पा रहा है।

मंतूराम का बड़ा खुलासा-अंतागढ़ में नाम वापिस लेने एनकाउंटर की धमकी दी गई,...कहा .....पढ़े पूरी खबर

मंतूराम का बड़ा खुलासा-अंतागढ़ में नाम वापिस लेने एनकाउंटर की धमकी दी गई, छह और प्रत्याशियों ने भाजपा के प्रेशर में नामंकन लिया था वापिस, रमन, जोगी, मूणत और अमन सिंह के खिलाफ थाने में रिपोर्ट रायपुर, 19 सितंबर 2019। अंतागढ़ टेप कांड में मंतूराम पवार ने आज बड़ा खुलासा करते हुए आरोप लगाया कि अंतागढ़ चुनाव से नाम वापिस लेने के लिए मुझे एनकाउंटर करने की धमकी दी गई। कहा गया कि तुम कभी भी दुर्घटना के शिकार हो जाओगे। मंतूराम ने कहा कि मेरा परिवार गांव में रहता है। लिहाजा, भयवश मैं अपना नामंकन वापिस ले लिया था। मंतूराम अपने साथ उन छह प्रत्याशियों को लेकर रायपुर प्रेस क्लब पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि धमकी में नाम वापिस लेने वाला सिर्फ मैं ही नहीं था, ये सभी छह लोग भी रमन सरकार के दबाव में नामंकन वापिस लिया था। नाम वापिस लिए प्रत्याशियों में उन्होंने देवनाथ, भीम सिंह उसेंडी, भोजराज नाग, महादेव उसेंडी, समंदर नेताम और चुरेद्र कुमार का नाम गिनाया। मंतूराम ने आरोप लगाया कि अंतागढ़ कांड में रमन सिंह के साथ अजीत जोगी और अमित जोगी का हाथ था। दोनों ने मिलकर षडयंत्र रचा। अजीत जोगी के चलते ही बीजेपी तीन बार सरकार बनाने में कामयाब हो गई। मंतूराम ने रमन सिंह पर आरोप लगाया कि उन्हें टिकिट देने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन, उन्होंने न विधानसभा का टिकिट मिला और न लोकसभा का। मुझे रमन सिंह ने बुरी तरह ठग लिया। मंतूराम ने कहा कि मुझे अंतागढ़ कांड में मोहरा बनाया गया। बीजेपी ने मेरा अपमान किया। पहले पैसों का लालच दिया गया। बाद में जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। मंतूराम ने कहा कि मैं आज भी दबाव में हूं। अजीत जोगी और रमन सिंह ने मुझे इस कांड में मुझे फंसा दिया। मंतूराम ने बताया कि इन छह प्रत्याशियों को एक-एक करोड़ दिया जाएगा। लेकिन, किसी को पचास मिला, किसी को 40 हजार मिला। सभी छह प्रत्याशियों ने मजिस्ट्रेट के सामने 164 के तहत बयान दर्ज करा दिए हैं। इनमें रमन सिंह, अजीत जोगी, अमन सिंह और राजेश मूणत का नाम से धमतरी थाने में शिकायत भी की गई है। मंतूराम ने कहा कि रमन सिंह ने मेरे साथ, आदिवासियों के साथ घोखा किया है। इसलिए दंतेवाड़ा की जनता से अपील करता हूं कि वह बीजेपी को परास्त करें।

बिलासपुर नगर सैनिकों ने खोला मोर्चा ,वेतन विसंगति के लिए उठाई आवाज ,हाईकोर्ट में किया मामला दाखिल ,कोर्ट ने शासन को दिया नोटिस

A REPORT BY - अजीत मिश्रा

0 हाई कोर्ट में 4 सप्ताह बाद होगी सुनवाई।

0 वित्त विभाग, डिजी और गृह सचिव को नोटिस।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नगर सैनिकों ने शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वेतन विसंगति और मूल विभाग में संविलियन जैसी मांग को लेकर नगर सैनिकों ने आखिरकार बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर कोर्ट ने वित्त विभाग, डीजी पुलिस और छत्तीसगढ़ शासन को नोटिस भी दे दिया है। कोर्ट ने 4 सप्ताह बाद इस मामले में सुनवाई करने की व्यवस्था दी है । वही अपनी उपेक्षा और विभाग के आलाअधिकारियों से निराश इन नगर सैनिकों ने इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। यही कारण है कि उन्होंने ज्ञापन और प्रदर्शन जैसे रास्तों को ना अपनाते हुए, सीधे हाईकोर्ट से न्याय की गुहार लगाई है। याचिकाकर्ता परमेश्वर की मानें तो उन्हें उम्मीद है कि मध्य प्रदेश के तर्ज में जल्दी छत्तीसगढ़ में भी उन्हें मूल विभाग में सम्मिलित कर लिया जाएगा साथ ही वेतन विसंगति और दूसरी तमाम मांगे भी पूरी हो जाएंगे। इस बीच में नगर सैनिक बड़ी संख्या में कोर्ट परिसर में मौजूद रहे जिससे काफी समय तक कोर्ट परिसर में गहमागहमी का माहौल बना रहा इतनी ज्यादा संख्या में नगर सैनिक हो के कोर्ट परिसर में मौजूद होना यह साबित करता है कि वह शासन की नीतियों और अपनी अपेक्षाओं से कितने ज्यादा परेशान है।

नगर पालिका की आरक्षण प्रक्रिया पूरी, देखिए पूरी लिस्ट

पिछड़ा वर्ग महिला के लिए खैरागढ़, आरंग, तखतपुर, सरायपाली, भाटापारा (महिला) के लिए आरक्षित

अकलतरा नगर पालिका अनुसूचित जाति पुरुष।

रायपुर– नगर निगम के बाद अब नगर पालिकाओं के लिए भी आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। प्रदेश के 44 नगर पालिकाओं में अनुसूचित जाति के लिए छह, अनुसूचित जनजाति के लिए पांच और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 11 नगर पालिका आरक्षित रखे गए हैं, वहीं 21 नगर पालिका में अध्यक्ष का पद अनारक्षित रखा गया है।


महासमुंद, तिल्दा-नेवरा, गोबरा नवापारा, गरियाबंद, बलौदा बाजार, खरसिया, चांपा, सक्ती, कटघोरा, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़ और बैकुंठपुर सहित खरसिया, कांकेर, बेमेतरा, सक्ती, बैकुंठपुर और तिल्दा-नेवरा महिला के लिए आरक्षित रखा गया है। अनुसूचित जाति-इनमें से बागबहरा और सारंगढ़ को महिला के लिए आरक्षित रखा गया है।

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित नगर पालिकाओं में नारायणपुर, दंतेवाड़ा शामिल हैं। इनमें से नारायणपुर और दंतेवाड़ा नगरपालिका को महिला के लिए आरक्षित रखे गए हैं। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए बड़े बचेली (महिला), कोंडागांव (महिला), खैरागढ़, आरंग, तखतपुर, शिवपुर चरचा, सरायपाली, भाटापारा महिला, अहिवारा, दीपिका (महिला) के लिए आरक्षित है।

BBN24 : ब्रेकिंग- रायपुर बिलासपुर समेत 6 निगम सामान्य वर्ग तो कोरबा, धमतरी, राजनांदगांव के लिए आरक्षित रायपुर बिलासपुर समेत 6 निगम सामान्य वर्ग तो कोरबा, धमतरी, राजनांदगांव के लिए आरक्षित

रायपुर– रायपुर, जगदलपुर, बिलासपुर सहित 6 निगमों के महापौर का पद सामान्य वर्ग के खाते में, राजनांदगांव, कोरबा और धमतरी ओबीसी के लिए आरक्षित। प्रदेश के कुल 13 नगर निगमों से सिर्फ दो सीटें अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है। रायपुर (अनारक्षित) जगदलपुर (अनारक्षित महिला) बिलासपुर (अनारक्षित) भिलाई (अनारक्षित) चिरमिरी (अनारक्षित महिला) दुर्ग (अनारक्षित) भिलाई चरौदा (अनुसूचित जाति) रायगढ़ (अनुसूचित जाति महिला) अंबिकापुर (अनुसूचित जनजाति) धमतरी (अन्य पिछड़ा वर्ग) राजनांदगाँव (अन्य पिछड़ा वर्ग महिला) कोरबा (अन्य पिछड़ा वर्ग) छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण बुधवार को तय हुआ। पहले नगर निगम के महापौर का आरक्षण तय हुआ, इसके बाद नगर पालिका और नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की प्रक्रिया होगी। प्रदेश में कुल 13 नगर निगमों में से 10 में आगामी नवंबर दिसंबर माह में चुनाव होने की संभावना है। इसके तहत ही कवायद शुरू कर दी गई है।

बिलासपुर : एचआईवी पीड़ितों को किया बेघर ,विभाग ने खारिज की संस्था की मान्यता

A REPORT BY : अजीत मिश्रा  

0 15  hiv पीड़ित बच्चों को बाल संप्रेषण भेजा जाएगा? 

0  पीड़ितों ने कलेक्टर से लगाई गुहार।

0  खुद के आशियाना को बचाने की फरियाद की। 

0 संस्था के संचालक ने लगाए गंभीर आरोप ।

0 कहां-कमीशन खोरी के चक्कर में रद्द की मान्यता। 

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में संचालित "अपना घर" नाम की संस्था की मान्यता रद्द कर दी गई है।  यह वह संस्था है जहां एचआईवी पीड़ित 15 बच्चियां रहती हैं।  अब इन बच्चों को महिला बाल विकास के माध्यम से बाल संप्रेषण गृह भेजा जा रहा है । जिसका संस्था के संचालक और बच्चों का विरोध किया है।  1 से 17 वर्ष की इन बच्चियों को एचआईवी के अलावा और भी कई गंभीर बीमारियां हैं। ये बच्चियां मिर्गी, टीवी, सिफलिस और मंदबुद्धि जैसी समस्या से ग्रसित है । इतना ही नहीं उनके पास केवल अगले 2 दिनों के लिए दवाइयां उपलब्ध है। एचआईवी और ट्यूबरक्लोसिस की दवाई में अगर बीच में रोक दी जाए तो बच्चों की सेहत गंभीर हो सकती है। ऐसे में संस्था के संचालक संजीव ठाकुर ने अधिकारियों का कमीशन खोरी का आरोप लगाया है।  वहीं इनकी मानें तो उन्होंने संस्था के बेहतर संचालन के लिये एक प्रपोजल सरकार को दिया था।  जो तकरीबन 58 लाख रुपए का था । जिसका 30% बतौर कमीशन सरकारी अधिकारी मांग रहे थे। संचालक के इन आरोपों के उलटे विभागीय अधिकारी सुरेश सिंह ने  स्पष्ट किया कि जो भी कार्रवाई उन पर हुई है।  वह पूरी तरह नियम और कायदे कानून को ध्यान पर रखकर की गई है । ऐसे में इस तरह के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं।  

वाद- विवाद और आरोप प्रत्यारोप से दिगर एचआईवी पीड़ित इन बच्चों ने जिला कलेक्टर और दंडाधिकारी के सामने खड़े होकर अपनी फरियाद सुनाई है । इनकी मांग है कि , इन बच्चों को जहां वह पहले रह रहे थे।  वही रहने दिया जाए । वही समाजिक संगठन भी अब इन बच्चों क साथ मदद के लिए सामने आ रही हैं। 

गौरतलब है कि सभी बच्चे स्कूलों की पढ़ाई करते हैं इनकी मेडिकल स्थिति ऐसी नहीं है कि इन्हें किसी बाल संप्रेषण की में रखी जाए लिहाजा जिला प्रशासन और उनके अधिकारियों ने फिलहाल संस्थान और उनके इन फरियादी बच्चों को थोड़ी राहत दी है और अब यह अपने परीक्षा समाप्त होने तक अपने पुराने संस्थान में रह सकते हैं।

दवा व्यापारी की दंबगई ,पत्रकार को धमकी, धड़ल्ले से चल रहा ज़िले में अवैध तरीके से दवा कारोबार,अधिकारियो की पर उठ रहे सवाल

छत्तीसगढ़ (कोंडागांव) शैलेश गुप्ता । कोंडागांव ज़िला मुख्यालय में कांग्रेस भवन के सामने संचालित अरिहंत मेडिकल कोंडागांव से ग्राम कोकोड़ी के स्थानीय चिकित्सक ने बताया हैकि वे इन दवा दुकानों से हमेशा खरीदतें हैं। औषधी भण्डारण व वितरण नियमानुसार किसी डिग्रीधारक की उपस्थिति में ही दवाओं का कारोबार करने का नियम है। परंतु कोंडागांव ज़िला मुख्यालय में प्रसाशन के नाक के नीचे दूसरे किसी के नाम के लाइसेंस का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से थोक दवा कारोबार करने का मामला सामने आया है। अरिहंत मेडिकल स्टोर्स से ले सप्लाई हेतु ले जाये जा रहै दवाओं को पुलिस ने अपने क़ब्जे में लेने के बाद ज़िला औषधी निरीक्षक सुखचैन धुर्वे को भी कोतवाली तलब किया था। वहीं इस पूरे मामलें में औषधी निरीक्षक की मिलीभगत से इंकार नही नही किया जा सकता। औषधी निरीक्षक स्वयं को व्यस्त बताते रहे परंतु शाम ढ़लते ढ़लते आखिर वे कोतवाली पहुंचे और जिसके बाद पूरे मामले में खाना पूर्ति करते नजर आए। इस घटना से यह बात सामने आई हैकि औषधी विभाग ने इन मेडिकल दुकानों को चिल्हर विक्रय लाइसेंस जारी किया है परंतु ज़िला मुख्यालय में प्रसाशन के नाक के तले उनके द्वारा धड़ल्ले से ज़िले के संवेदनशील क्षेत्रों से आये लोगों को थोक मात्रा में दवाइयों की सप्लाई कर रहे हैं। हैरत कि बात तो यह हैकि इस पीर मामले पर खाद्य एवं औषधी विभाग के अधिकारी किसी प्रकार की कोई कार्यवाहीं करते कभी भी नजर नही आये बल्कि इन सभी में उनकी मिलीभगत प्रतीत हो रही है। ग्राम कोकोड़ी के स्थानीय चिकित्सक को जांच के दौरान पूंछने पर उन्होंने अरिहंत मेडिकल के अतिरिक्त कोंडागांव के अन्य दवा दुकानों "गणेश मेडिकल, शांति मेडिकल, कुशल मेडिकल" से भी थोक में दवाइयों की खरीदी करने की बात स्वीकार किया है। इन ड्रग माफियाओं को विभागीय संरक्षण का ही नतीज़ा हैकि जब इस मामले पर प्रकाश डालने एक स्थानीय पत्रकार ने हिम्मत दिखाया तो अरिहंत मेडिकल स्टोर्स के संचालक ने उन्हें "देख लेने व जान से मरवाने तक कि धमकी दे डाली।" वही इस सारे मामले में विभागीय कार्यवाही मात्र खानापूर्ती ही नजर आ रही है, ज़िले के औषधी निरीक्षक दवा दुकानदारों पर मेहरबान हो उन्हें बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

शिकायत : ऐसे जनदर्शन का क्या फायदा जहाँ शिकायत करते करते घिस जाएं चप्पल ...जाने पूरा मामला

शिकायत जनदर्शन का क्या फायदा जहाँ शिकायत करते करते चप्पल घिस जाएं ।लेकिन अब तक कार्यवाही ना होने पर दर्जनभर शिकायतों को लेकर ग्रामीण भ्रस्टाचार सरपंच के खिलाफ कार्यवाही नही होने  पर दी आंदोलन की चेतावनी..केकती ग्राम के दर्जनभर लोग भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर सोमवार को जनदर्शन में पहुंचे  गांव के ग्रामीण.. शौचालय से सड़क और मनरेगा जैसी तमाम ग्राम सुविधाओं के काम में भारी भ्रस्टाचार करने वाले तखतपुर ब्लॉक् के केकती ग्राम के सरपंच शैलेंद्र सिंह क्षत्रिय की शिकायत लेकर ग्रामीणवासी बिलासपुर कलेक्ट्रेट में जनदर्शन कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे.. शिकायत करने पहुंचे ग्रामवासियों ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि.. ग्राम पंचायत में बने शौचालयों के पैसों को सरपंच सचिव डकार दिया है.. साथ ही मनरेगा में होने वाले काम को मशीनों द्वारा कराकर ग्रामीणों के नाम से आने वाले पैसों को दबा दिया जाता है.. इसके अलावा ग्राम में बनने वाली सीमेंट की सड़कों के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार किया गया है.. ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी जनपद से लेकर जनदर्शन तक पहले भी शिकायत की जा चुकी है.. लेकिन सरपंच सचिव अपने राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर सरपंच शैलेंद्र सिंह क्षत्रिय और ग्राम पंचायत के सचिव द्वारा सीना चौड़ा करके भ्रष्टाचार किया जा रहा है.. शिकायत करने पहुंचे ग्रामवासियों ने कहा कि अगर आगे भ्रष्टाचारियों पर कर्रवाई पर नहीं किया जाएगा तो आंदोलन का सहारा लिया जाएगा..

बड़ी खबर : नान मामले में शिवशंकर भटट ने लगाए गंभीर आरोप कहा रमन, भोजवानी, मोहले नान घोटाले के मास्टरमाइंड, घोटाले का सच सामने आने के बाद मेरी जान को खतरा-भट्ट

रायपुर 15 सितंबर 2019। नान मामले में मुख्य आरोपी शिवशंकर भटट ने पूर्व की बीजेपी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बेबाकी से कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, पूर्व खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले और नान के चेयरमैन लीलाराम भोजवानी घोटाले के मास्टरमाइंड है। भट्ट ने कहा, मैंने राशन घोटाले को उजागर किया इसलिए नान घोटाले का ठीकरा मुझ पर फोड़ा गया। साढ़े चार साल तक जेल में रहा….इस वजह से सच्चाई सामने नहीं आ सकी। सच्चाई सामने आने के बाद भट्ट ने अपने जान को खतरा बताया है।


रायपुर के प्रेस क्लब में आज पत्रकारों से बात करते हुए भट्ट ने कहा कि मैंने नान में राशन कार्ड में हो रही गड़बड़ियों को उजागर किया था इसलिए उसे ढापने के लिए नान में छापा मारा गया। भट्ट ने दावा किया कि चुनावी खर्चे के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री डा0 रमन सिंह की प्लानिंग के अनुसार हजारों की संख्या में फर्जी राशन कार्ड बनवाए गए। उन्होंने कहा कि नान पर दस लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त उपार्जन का प्रेशर बनाया गया। राशन कार्ड की संख्या 51 लाख से बढ़ाकर 72 लाख कर दी गई। हम पर दबाव बनाया गया कि तुरंत चावल सप्लाई किया जाए। मुझे धमकी दी गई कि ऐसा नहीं करोगे तो नौकरी से निकाल दिए जाओगे। इस सवाल पर रमन सिंह ने उन्हें आदतन अपराधी कहा है, भट्ट ने कहा कि वे अपराधी नहीं हैं। बल्कि, जानबूझकर उन्हें नान के केस में फसाया गया। साढ़े चार साल तक जेल में रहे, इसलिए सच्चाई बाहर नहीं आ सकी। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का चार महीने तक ओएसडी रहा हूं। आदतन अपराधी कहने पर वे रमन सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। भट्ट ने इस सवाल को खारिज किया कि किसी दवाब में उन्होंने शपथ पत्र दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे उपर कोई दबाव नहीं है। मैं पूरी तरह सोच-समझकर शपथ पत्र दिया हूं। भट्ट ने घोटाले का उजागर होने के बाद अपनी जान को खतरा भी बताया।

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