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यक्ष प्रश्नों के साथ गोधन न्याय योजना उम्मीद की नई किरण

रायपुर जिस समय पूरा विश्व कोरोना महामारी और उससे उपजे आर्थिक संकट से जूझ रहा है तब छत्तीसगढ़ सभी मोर्चों पर विशेषकर आर्थिक मोर्चे पर विन विन सिचुएशन में है। यहां यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि यह सब कैसे संभव हुआ? इसका एक सामान्य सा जवाब है प्रदेश की कमान ऐसे व्यक्ति के हाथ में है जिसकी पृष्ठभूमि कृषि कर्म और छत्तीसगढ़िया संस्कारों से पगी हुई है। प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने कई मोर्चों पर अपनी सोच को अपनी ज़मीन पर उतारने के लिए सत्ता को माध्यम बनाया है। प्रदेश, किसानों और छत्तीसगढ़ के संस्कारों को आगे बढ़ाना उनकी पहली प्राथमिकता है। इसी प्राथमिकता के कारण वे खेती-किसानी और यहां के संस्कारों को आर्थिक दिशा में मोड़ते दिखाई देते हैं। संपूर्ण भारतीय व्यवस्था में कृषि सर्वोच्च है। ग्रामीण व्यवस्था में कृषि, पशुधन और उनसे मनुष्य को प्राप्य भारत के संस्कारों का निर्माण करते हैं। जिसने पशु और पशुधन संस्कारों को समझ लिया, उसके लिए समृद्धि और वैभव सुलभ हो जाएगा।

सर्वविदित है कि कोरोना लॉकडाउन की प्रारंभिक स्थिति में सरकारी प्रयासों के कारण काफी कुछ नियंत्रण में रहा। लॉकडाउन खुल जाने के बाद से छत्तीसगढ़ में भी कोविद महामारी की स्थिति बिगड़ी है लेकिन आर्थिक मोर्चे पर प्रदेश सम गति से आगे बढ़ता रहा है। ग्रामीण व्यवस्था से जुड़े पशुधन और किसानी को समृद्ध बनाने के लिए प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल की नवीनतम योजना है गोधन न्याय योजना जिसमें सरकार ने प्रदेश में गोबर खरीदी का निर्णय लिया है। यह उत्कृष्ट पहल की सफलता इस बात में है कि जब इससे जैविक खाद का निर्माण पूरी गति पकड लेगा और गोबर के कंडे और लकड़ी का प्रयोग आम होगा। यह कहने में भी कोई गुरेज नहीं कि पशुपालकों और किसानी के काम से जुड़े लोगों के लिए एक सहायक आर्थिक उपार्जन का बड़ा स्रोत बन सकता है। यहां यब बात गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बघेल ने गोधन न्याय योजना की घोषणा तो कर दी है लेकिन अभी गोबर क्रय की कीमतें क्या होंगी इसका निर्णय होना शेष है।

स्वाभाविक है शिक्षा के विस्तार के कारण पहले ही युवा शक्ति कृषि कर्म की बजाय नौकरी को दे रहे हैं। रोजगार और आय की फिक्र में गांवों से शहरों की ओर पलायन यक्ष प्रश्न है। ग्रामीण क्षेत्रों में चारागानों की कमी है, ऐसे में गोधन न्याय योजना का क्रियान्वयन गौठानों पर निर्भर रह जाएगा। गोबर संग्रहण के लिए क्या सरकार तकनीकी तौर तरीकों के विकास का काम करेगी या फिर ग्रामीण ही गोबर संग्रहण करेंगे? यदि ऐसा नहीं है तो गोबर संग्रहण का काम किस तरह से होगा। प्रशासनिक मशीनरी को ऐसे ही सवालों से जूझना होगा।

अब इसके आर्थिक पक्ष पर जाएं तो गोबर क्रय की कीमतें क्या होंगी? कीमत तय करने के लिए किन बातों को प्राथमिकता दी जाएगी और सबसे बड़ी बात इससे तैयार होने वाले उत्पाद, जैसे जैविक खाद, गोबर के कंडे तथा दाह संस्कार के लिए तैयार की जाने वाली लकड़ी उनके बिक्री के लिए कैसा नेटवर्क होगा और उनकी कीमतें क्या होगी? महासमुंद से गोबर की खाद निर्माण से जुड़े एक शख्स ने इस व्यवस्था पर जो अनुमान प्रस्तुत किए हैं, वे महत्वपूर्ण हैं।

इन आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर से संकलित गोबर की खरीदी दर सरकार मात्र 1 रुपए तय करती है तो प्रदेश में सरकार को लगभग 22 अरब रुपयों की आवश्यकता होगी। गोबर से निर्मित उत्पादों की दर यदि 5 रु. निर्धारित की जाती है तो लगभग 110 अरब रुपयों की आय होगी। इस तरह गोधन न्याय योजना ग्रामीण व्यवस्था तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहायक होगा इसमें संदेह नहीं। ग्राम सुराज के लिए एक नई उम्मीद तो बनती ही है, साथ ही यह प्रदेश में पलायन रोकने में योजना भी सहयोगी साबित होगी। योजना किसानों तथा ग्रामीण जनों में उम्मीद की एक नई किरण तो है ही।

अंततः सवाल वहीं पर आ कर रुक जाता है कि सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन का अब तक का जो दृश्य है उसमें यह कहना जल्दबाजी ही होगी कि योजना को जमीन पर साकार होने में कितना वक्त लग जाएगा।

"दुसरा जन्म” वर्षा गल्पांडे की कलम से.......

“दर्द से कर्राती है एक औरत
 अपनी नाल से बंधे एक शुशु को
जन्म देकर एक औरत से बन जाती है माँ
शिशु के जन्म के साथ ही जन्म लेता है एक
नया रिश्ता और एक पुरुष बन जाता है एक पिता”
 

आज हम बाजार में बहुत सारी शौपिंग में व्यस्त थे हाथों में बहुत से खिलौने और कुछ टॉय के कैरी बैग हमने हाथों में पकड़ रखे थे एक दूकान से निकलते ही माँ ने कहाँ अरे हमने अभी तो कुछ सोने की चीजें ली ही नहीं मैंने माँ से कहाँ इतना सब तो ले लिया अब सोने का क्या लोगी मैं बहुत थक चुकी हूँ हो गया अब घर चलों ना मेरी बात सुनकर माँ थोड़ी नाराज होकर बोली थक मैं भी गई हूँ मगर कुछ रस्में होती है जो लड़की वालों के मायके वालों को पूरी करनी होती है माँ की बाते सुनकर मैं चलते हुए रुक गई और माँ से बोली एसी कौन सी रस्म बच गई है जो हमनें पूरी नहीं की है वैसे भी दीदी तो ससुराल में खुश है और जीजू तो इतने सीधे है कभी कुछ कहते ही नहीं और आज तक दीदी के ससुराल वालों ने कोई भी शिकायत नहीं की और वैसे मुझे याद है माँ हमनें शायद ही कोई रस्म हो जिसे हमनें पूरी न की हो| माँ ने कहाँ हाँ हमनें सारी रस्में पूरी की थी मैंने कहाँ तो फिर किस लिए सोना लेना है मैंने माँ से पूछा ?

माँ ने कहाँ ये तुम्हारी दीदी का पहला बच्चा है और उस बच्चे का ये पहला जन्म दिन है और ऊपर से लड़का है ।अक्सर हमारा समाज जब भी ऐसे कुछ कार्यक्रम होतो उनकी नज़रे मायके के घरवालों पर ज्यादा होती है की उन लोगों ने क्या दिया है उनकी उम्मीद होती है की वो अपने नाती के जन्म दिन पर कुछ सोने की वस्तु भेट करें ऐसा नहीं है की मायके से ही अपेक्षा की जाती है ये अपेक्षा ससुराल वालों से भी की जाती है की दादा-दादी ने अपने पोते को क्या दिए है भेट में |माँ की बातें मुझे अच्छी नहीं लगी भला दादा-दादी और नाना-नानी के आशीर्वाद के सामने इन अपेक्षाओं का क्या ज़्यादा महत्व है?जब ससराल के लोग अपनी बहुओं को प्रताड़ित करते है तो हम उन्हें ही बुरा भला कहते है असल में हम ही उसके जिम्मेदार होते है ऐसी रिवाजों को पूरा करके फिर भला हमें बुरा भी नहीं लगना चाहिए अपनी लड़कियों को तकलीफ में देखकर।माँ ने आवाज़ लगाई कहाँ खो गई माँ ने अपनी बात आगे जारी रखते हुए कहाँ इसलिए अब हम किसी ज्वेलरी शॉप चलते है और वहां से कुछ ले लेते है गर्मी बहुत है वो देख सामने एक जूस की दूकान है वहां से मैं नीबू शरबत पी लुंगी और तुम नारियल पानी पी लेना माँ ने कहाँ और हम जूस दूकान की तरफ चल पड़े|

हम ज्वेलरी शॉप पहुचें तो शॉप की दूकान में खड़ी लड़की ने एक अच्छी सी मुस्कान के साथ हमारा स्वागत किया और कहाँ आप लोगों को क्या दिखाऊं माँ ने कहाँ आपके पास एक साल के बच्चे के लिए क्या है वो क्या है ना मेरे नाती का पहला जन्म दिन है तो उसे उपहार देना है ऐसा माँ ने उस लड़की से कहां उसने भी झट से कहाँ हमारे पास बहुत सुन्दर पैंडल है और वो एक लाल कपड़ा बिछाकर सोने के पैंडल को एक-एक करके हमें दिखाने लगी उसमें से कुछ पैंडल माँ ने अलग कर दिए जो माँ को पसंद आये थे ऐसे ही उसने और भी बहुत सी चीजें हमें बता चली गई लास्ट में सब देखने के बाद माँ ने एक पैंडल और चांदी की एक गिलास ली और हम वहां से निकल ही रहे थे तो फिर उस लड़की ने प्यारी सी मुस्कान के साथ हमें फिर से आइयेगा आपलोग बोल के हमें विदा किया|आखिर कार सब कुछ खरीदकर हम घर तो पहुच चुके थे पर अभी भी काम ख़त्म नहीं हुए थे सुबह की ट्रेन थी जिससे हमें दीदी के ससुराल यानी बैंगलौर के लिए रवाना होना था और अभी जो हमने इतनी खरीदारियां की थी उसे और खुद के सामान की पैकिंग भी करनी अभी बची थी|
पुरे एक दिन के सफ़र के बाद आखिरकार हम दीदी के ससुराल पहुचें|हमें देखकर दीदी के ख़ुशी का ठिकाना न था हाँ भई हर लड़की को मायके के लोगों से एक अलग की तरह का स्नेह होता है| दीदी ने हमें हमारा रूम दिखाया और कुछ देर आराम करने को कहाँ माँ ने दीदी से कहाँ हाँ पर पहले तुम्हारी सास से मिल लूँ कहकर वो उनसे मिलने चली गई और मैं तो अपने शहजादे को गोदी पे लिए उससे खूब प्यार और दुलार करने में व्यस्त हो गई | उसके गालों को स्पर्श मानो नाजुक फुल को छूने जैसा था वो भी हमें देख कर प्यारी सी मुस्कान से हमारा दिल जित रहा था और न जाने अपनी तोतली भाषा में क्या-क्या हमें कह रहां था शायद वो हमें देख ख़ुशी का इज़हार कर रहां हो|शाम हो चुकी थी सब मेहमानों का आना शुरू हो चुका था मेहमानों में नन्हें-नन्हें बच्चे ज्यादा दिख रहें थे और उनके शोर से पूरा हौल गूंज रहा था और उन बच्चों के माता-पिता उनकी बदमाशी को देख परेशान होकर उन्हें शांत रहने की सलाह दे रहे थे दीदी भी हौल में पहुच चुकी थी |

दीदी-जीजू और उनका शहजादा तीनों ने पिक कलर के मैचिंग कपडे पहन रखे थे जिसमें वे लोग काफी अच्छे लग रहे थे कुछ देर बाद केक कटिंग किया गया माँ ने मुझे आवाज लगाईं की चलों हम भी भी गिफ्ट दे देते है मैं और माँ दीदी के पास जाकर वो सारी चीजें उसे दी जो हमनें शहजादे के लिए खरीदी थी |इतना सब देख कर जीजू ने माँ से कहाँ मम्मी इसकी क्या जरूरत थी आप आ गई आपने आशीर्वाद दे दिया इतना ही काफी है इसकी जरूरत नहीं थी अगली बार से ये सब लाने की जरूरत नहीं घर वालों का प्यार ही सबसे बड़ा उपहार होता है उनके बच्चों के लिए उनकी बातें सुनकर माँ ने भी उनके सर पर आशीर्वाद का हाथ फेरा|
मैं सब कुछ खड़ी देख रही थी पर मन मेरा उदास हो रहा था कुछ था जिसकी कमी मुझे खल रही थी हौल की साजसजा बहुत ही सुन्दर थी खाना भी काफी अच्छा बना था सब बिलकुल परफैक्ट था पर फिर भी कुछ कमी लग रही थी एक प्रशन था जो मुझे काफी देर से परेशान कर रहा था वो ये की हमनें सब कुछ उस बच्चे के पहले जन्म दिन की ख़ुशी के उपलक्ष में किया और काफी खुश थे सब लोग यहाँ तक की हमनें भी उस बच्चे के लिए न जाने क्या कुछ नहीं खरीदा पर हम एक बात भूल गये की एक बच्चे के जन्म के साथ एक माँ का भी दुसरा जन्म होता है |वो नौ महीने बच्चे को अपने पेट में रखती और एक असहनीय दर्द सहकर उसे जन्म देती है हम उस माँ को क्यूँ भूल जाते है वो भी तो उस दिन माँ बनती है,उसका भी उस दिन नया जन्म होता है तो हमें उसे भी तो बधाइयां देनी चाहिए उसके दुसरे जन्म की ख़ुशी में उसके माँ बन्ने की ख़ुशी में उसे भी हर साल उपहार देना चाहिए माँ के साथ-साथ पीता भी उतना ही हकदार इन सब चीजों का हाँ वो बच्चे को जन्म भले ही न दे पर वो भी बच्चे के जन्म के बाद पिता बनता है इसलिए वो भी बधाई का पत्र है पर अक्सर हम इन बातों को भूल जाते है केवल हमें याद रहता है तो केवल बच्चे का जन्म दिन|

मैं दीदी और जीजू के पास गई और उन्हें भी हैप्पी बर्थडे कहाँ सब लोगो मुझे आश्चर्य भरी नज़रों से देखने लगे उन्हें लगा की बच्चे के साथ कही दीदी या जीजू का भी जन्म दिन तो नहीं और वो लोग भूल गये हों ।दीदी और जीजू ने मुझे कहाँ अरे आज भला हम दोनों का जन्म दिन कहाँ है जो तुम हमें बधाइयां दे रही हो मैंने कहाँ एक बच्चे का जन्म होता है तो माता-पिता का भी एक नया जन्म होता है साथ ही एक नया नाम भी उनके साथ जुड़ जाता है और एक नया रिश्ता भी तो हुआ ना इस हिसाब से आप लोगों को भी जन्म दिन तो बधाई देना तो बनता है मेरी ये बातें सुनकर दीदी और जीजू के साथ ही हौल के सारे लोग भावुक हो गये और पूरा हौल तालियों के शोर से गूंजने लगा|

वर्षा गल्पांडे

कुत्ते पाल रहे हैं तो हो जाएं सावधान, हो सकता है गंभीर बीमारी हाईडैटिड सिस्ट का खतरा

रायपुर. 23 जून 2020 जी हां, आपने सही सुना फेफड़े एवं पेट के हाइडैटिड सिस्ट का सफल ऑपरेषन डॉक्टरों द्वारा एक ही बार में किया गया जिससे कि मरीज को बार-बार बेहोशी (एनेस्थेसिया) देने की जरूरत नहीं पड़ी। कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू एवं गैस्ट्रोसर्जन डॉ. रोमिल जैन ने मिलकर एक साथ कुत्तों के जरिये फैलने वाली इस गंभीर बीमारी का सफल ऑपरेशन किया। लिवर एवं फेफड़े में एक साथ हाइडैटिड सिस्ट होना बहुत ही दुर्लभ होता है। 

पं. जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में कार्डियोथोरेसिक सर्जन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. के. के. साहू एवं डीकेएस अस्पताल के गैस्ट्रोसर्जन डॉ. रोमिल जैन ने मिलकर 42 वर्षीय युवक के फेफड़े एवं लिवर के हाईडैटिड सिस्ट का एक साथ ऑपरेशन करके मरीज को नया जीवन दिया। एक साथ दो ऑपरेशन होने से मरीज को बार-बार बेहोश करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। मरीज का ऑपरेशन 15 दिन पहले हुआ एवं आज मरीज डिस्चार्ज होकर घर जाने को तैयार है।  

हाईडैटिड सिस्ट नामक बीमारी लिवर (यकृत) में कॉमन होता है। लिवर में इसके होने की संभावना लगभग 65 प्रतिशत तक होती है। वहीं फेफड़े में 10-15 प्रतिशत एवं मस्तिष्क व हृदय में कहीं पर भी हो सकता है लेकिन एक साथ फेफड़े एवं लिवर में होने की संभावना लगभग 4 प्रतिशत तक ही होती है। कृमि जिसको इकाइनोकोकस ग्रेन्युलोसस ( echinococcus granulosus ) कहा जाता है उसके संक्रमण से हाइडैटिड सिस्ट होता है। कुत्ते के मल के जरिये यह लोगों में फैलता है। 

खरोरा थानांतर्गत सारागांव निवासी 40 वर्षीय व्यक्ति खांसी, सांस फूलने एवं पेट दर्द की शिकायत से एसीआई के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन डॉ. कृष्णकांत साहू के पास मार्च के महीने में आया। उस समय कोरोना के कारण सब जगह लॉडाऊन था। एक्स-रे, सोनोग्राफी एवं छाती एवं पेट का सीटी स्कैन कराने पर पता चला कि उसके बायें फेफड़े एवं लिवर के बायें लोब में बहुत ही बड़ा सिस्ट हो गया है जिसको मेडिकल भाषा में हाइडैटिड सिस्ट कहा जाता है जो कि कुत्तों से संपर्क मे आने पर फैलता है परंतु इस व्यक्ति के घर में कोई कुत्ता नहीं था। हो सकता है कि गली के कुत्तों के संपर्क में आने पर या कच्ची एवं अधपकी सब्जी, सलाद खाने पर या फिर ठीक से हाथ न धोने पर कुत्ते के मल से निकला कृमि इकाइनोकोकस ग्रेन्युलोसस ( echinococcus granulosus   ) उसके पेट में चला गया हो। कोरोना की वजह से अस्पताल में नॉनइमर्जेंसी ऑपरेशन बंद होने के कारण मरीज को फौरी राहत के लिए कृमि की दवाई एलबेन्डाजॉल (albendazole) देकर घर भेज दिया गया। मरीज को कोरोना नियंत्रण के बाद आने को कहा गया परंतु मरीज के सांस फूलने की शिकायत बढ़ने लगी जिसके कारण मरीज को इमर्जेंसी में भर्ती करना पड़ा। चूंकि मरीज को फेफड़े के साथ-साथ लिवर में भी बहुत बड़ा सिस्ट था इसलिए पहले सिर्फ फेफड़े के ऑपरेशन के लिए प्लान किया गया क्योंकि सांस फूलने की शिकायत बहुत अधिक थी परंतु ऐसा करने से मरीज को दूसरी बार पेट (लिवर) का ऑपरेशन करवाना पड़ता जिससे उसको ज्यादा खतरा हो सकता था इसलिए दो ऑपरेशन से बचने के लिये डॉ. कृष्णकांत साहू ने डॉ. रोमिल जैन से सम्पर्क किया एवं एक साथ फेफड़े एवं लिवर की सर्जरी की प्लानिंग की जिससे मरीज को एक ही बेहोशी में दोनों ऑपरेशन हो जाये। 

ऐसे हुआ ऑपरेशन
एसीआई के ऑपरेशन थियेटर में सर्जरी की प्लानिंग करके सबसे पहले मरीज को डबल ल्युमेन एन्डोट्रेकियल ट्यूब ( double lumen endotracheal tube ) की सहायता से बेहोश किया। इस ट्यूब का फायदा यह होता है कि एक तरफ के फेफड़े को जिसमें ऑपरेशन हो रहा है उसका वेन्टीलेशन बंद करके दूसरे स्वस्थ्य फेफड़े को वेन्टीलेशन किया जाता है जिससे सर्जन आसानी से फेफड़े का ऑपरेशन कर सकता है एवं मरीज को बराबर ऑक्सीजन प्राप्त होता रहता है। 

मरीज के बेहोश होते ही डॉ. कृष्णकांत साहू ने बायीं छाती में चीरा लगाकर फेफड़े के सिस्ट को सावधानी पूर्वक ऑपरेशन करके निकाला एवं पुनः फेफड़ों को रिपेयर किया जिससे भविष्य में ब्रोन्कोप्लुरल फिस्चुला ( bronchopleural fistula ) न बने। सिस्ट को अन्य जगह फैलने से रोकने के लिए कृमिनाशक (Scolicidal) का उपयोग किया एवं छाती के घाव को बंद किया। उसके बाद गैस्ट्रोसर्जन डॉ. रोमिल जैन ने पेट में चीरा लगा कर लिवर के सिस्ट को निकाला। 

फेफड़े के सिस्ट का आकार 15x12 सेंटीमीटर एवं लिवर के सिस्ट का आकार 25x5 सेंटीमीटर था। यह ऑपरेशन चार घंटे चला। मरीज का इलाज डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत हुआ।

ऑपरेशन में शामिल टीम
डॉ. कृष्णकांत साहू (विभागाध्यक्ष- हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी), डॉ. रोमिल जैन (गैस्ट्रो सर्जन डीकेएस), डॉ. निशांत चंदेल (हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जन), डॉ. अश्विन (रेजीडेंट), एनेस्थेटिस्ट एवं क्रिटिकल केयर - डॉ. अरूणाभ मुखर्जी एवं टीम, नर्सिंग स्टॉफ - राजेन्द्र, चोवा राम। 

क्या होता है हाइडैटिड सिस्ट एवं कैसे फैलता है
हाइडैटिड सिस्ट इकाइनोकोकस ग्रेन्युलोसस नामक कृमि से कुत्तों से इंसानों में फैलता है। इस कृमि को जिन्दा रहने के लिए दो जीवों, कुत्ता एवं भेड़/बकरी का सहारा लेना पड़ता है जिससे इसका जीवन चक्र (  life cycle ) संपूर्ण होता है। यह कृमि सामान्यतः कुत्ते या लोमड़ी में पाया जाता है एवं यही उसका घर होता है। कुत्ते के मल के जरिये ये खुले में पहुंचते हैं। मल, धूल व मिट्टी में मिलता है फिर घास-फूस खाते हुए भेड़ बकरी में पहुंच जाता है। फिर मरी हुई भेड़ बकरी को कुत्ते खा जाते हैं एवं इसी प्रकार इनका जीवन चक्र चलता रहता है। 

इंसानो में कैसे पहुंचता है यह कृमि
ये कृमि (वार्म) कुत्ते के मल के साथ सिस्ट के रूप में बाहर निकलता है एवं मल सूख कर मिट्टी में मिल जाता है। ये सिस्ट (कृमि का अंडा) जिसका बाहरी खोल बहुत ही सख्त होता है एवं यह बहुत दिनों तक मिट्टी एवं हवा में जिंदा रह सकता है। सांस के जरिये, फल, सब्जी, सलाद के माध्यम से या गंदे हाथों से खाना-खाने पर यह इंसानों में प्रवेश कर जाता है। जब हम ऐसे कुत्तों के साथ रहने लगते हैं या खेलने लग जाते हैं तो उसके शरीर में चिपक कर सिस्ट इंसानों में प्रवेश कर जाता है। 

कुत्ते पाल रहे हैं तो क्या सावधानी बरतें:
कुत्तों को नियमित वेटनेरी डॉक्टर की सहायता से डिवर्मिंग करवायें।
अधपकी कच्ची सब्जी न खायें। अच्छे से धोकर सब्जी पकायें।
गंदे हाथों से खाना न खायें विशेषकर बच्चे ।
कुत्तों से नजदीकियां रखने पर मास्क लगायें और खेलने के बाद हाथ अच्छे से धोयें।

मेरी प्रिय सखी रसोई

“रसोई में जलने वाले चूल्हे की आंच को 
सबसे अधिक पता होता है स्त्री मन का अन्धेरा|”
 
आज रसोई से किसी की सिसकियों की आवाजें आ रही थी चूल्हे पर पक रही चाय बर्तन से बाहर गिर रही थी|वो सिसकियों की आवाजें अक्सर ही सुनाई दे जाती है मुझे या कोई सलाह देती दूसरी आवाजें भी कभी कभार आ जाती है |रसोई बहुत सी बातों की राजदार भी होती है तो कभी किसी स्त्री की आखरी चीखों को सुनती है |कभी कोई इन रसोई में कोई किसी की याद में आसूं बहाता है तो किसी की मंद मुस्कान किसी को याद करती है |कहीं कोई पीछे से आकर प्यार से अरे ये क्या आगे आप समझ ही गये क्या कहना चाह रही हूँ मैं|जी हाँ आज मै रसोई और स्त्री के बिच की सदियों से चली आ रही दोस्ती और उनके रिश्ते की बात कर रही हूँ |
घर में या यूँ कहें स्त्री अपने जीवन का सबसे ज्यादा वक्त कहीं बिताती है तो वो होती है उसकी रसोई सहीं कहाँ ना मैंने|जब स्त्री की शादी होती है तो वो बिलकुल नये सामान की तरह होती बिलकुल फ्रेश पिस और उसका रैपर खुलता है कुछ रस्मों के जरिये तो इसी दौरान उसका परिचय होता है उसकी नई सहेली रसोई से जहाँ उसे पहली बार उसकी नई रहेली के साथ मिलकर घर वालों के लिए कुछ मीठा बानाना होता है फिर क्या इस पल से वो दोनों पक्की सहेली ही बन जाती है ससुराल हो या मायका रसोई कभी स्त्री का साथ नहीं छोड़ती| स्त्री को बचपन से ही रसोई की बाते बता कर उसका परिचय करा दिया जता है ताकि जब वो उससे मिले तो अजनबी न लगे|
शादी से पहले भी रसोई से बातचित थी पर बस फौर्मली ही पर शादी के बाद वाली दोस्ती एक दम पक्की सहेली ओहो टच वुड नज़र न लगे इनकी दोस्ती को | जब घर में कुछ कहा सुनी हो जाए तो स्त्री सबसे पहले पैरो को जमीं में जोर-जोर से पटकती हुई हाथों से चाय का ट्रे पटकर अपने दिल का गुस्सा अपनी बातें जो वो उनके सामने न कह सकी वो सारी बातें वो रसोई से कहती और फिर धीरे से पल्लू के कोने से अपने आसुओं को पोछ लेती|
जब स्त्री कुछ गाना गुनगुनाती हुई चेहरे पर मुस्कान लिए आती है तो वो किसी के मन पसंद की स्वादिष्ट चीजें बना रही होती है जो उसके किसी ख़ास ने फरमाइश की होती है उस वक्त केवल रसोई को अपनी मुस्कान के जरिये ही अपने मन में उठ रहे प्यार को बता रही होती है और उसकी सखी भी उसकी भाषा को बिना शब्दों के ही समझ जाती है |कभी यहां शक्कर के बहाने या पानी के बहाने भी अपने और दुसरे के घर की बुराइयां भी होती है जिसमें बहुत से मसालेदार बाते भी होती जिसे सुनने और कहने के बाद अंत में ये स्त्रियाँ किसी को कुछ न कहना मैंने जो सुनी वो कह दी तो दूसरी नहीं बहन अब तक क्या जो बातें तुमने कहीं है वो कभी किसी से कहीं है क्या मैंने? कहकर चली तो जाती है

 पर अब ये बातें एक रसोई से निकलकर महौले की हर रसोई में चर्चा का विषय बन जाती है |रात के अँधेरे में कभी किसी से फ़ोन में बाते भी की जाती है किसी को वो प्यार के शब्द अरे वही यार आप लोग समझ तो गये हो हाँ वही बोल देती है और साथ में प्यारी सी अब ये नहीं लिख सकती समझ जाओ यार|
आज बहुत सी स्त्रियाँ अपनी सखी स्त्री के साथ मिलकर इन पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाके चल रही है वो क्या कहावत है जो अक्सर स्त्रियों को ताने के रूप में सदियों से सुनाया जा रहा है “पढ़ लिखकर क्या करोगी ससुराल में चुला ही तो फुकना है” हाँ ये सहीं है पढ़ लिख कर भी स्त्री चुल्हा जरुर फुक रही है पर आज की स्त्री इससे पैसे भी कमा रही है अपना खुद का कुकरी शोव करके|

स्त्री पसीने से तर-बतर होती है कभी बिखरी अपनी लटों को सवारते हुए माथे में आटे को लगा लेती है कभी वहीँ खड़ी किसी अपने को खाना समय पर खा लेना जल्दी दुध फिनिश करो कहकर उनकी फिक्र करती है कभी हाथों में चाय लिए स्त्री सर को पल्लो से ढकर संस्कारों को जीवित रखती है तो कहीं “अतिथि देवो भव:” की परम्परा को दिल से निभाती है |
स्त्री की सुबह की शुरुवात यहीं से और थकान के साथ रात का अंत भी यहीं पर होता है |स्त्री के सारे रंगों को उसकी रसोई से बेहतर शायद ही कोई समझ सकता होगा |स्त्री का जीवन बचपन से जवानी और बुडापे तक का हर रास्ता  रसोई से ही होकर गुजरता है |इसी लिए तो स्त्री की सबसे अच्छी सखी रसोई ही होती है जो उसके सारे रूप से परिचित होती है |
 
वर्षा गल्पांडे   

पंडित माधव राव सप्रे की लेखनी ने छत्तीसगढ़ में साहित्य को नई दिशा दी बघेल : मुख्यमंत्री ने पंडित माधवराव सप्रे की जयंती पर उन्हें किया नमन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक और साहित्यकार पंडित माधवराव सप्रे की जयंती 19 जून पर उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने आज यहां जारी संदेश में कहा है कि सप्रे जी ने अपनी लेखनी से छत्तीसगढ़ में साहित्य को एक नई दिशा दी। सन् 1900 में जब यहां प्रकाशन के लिए पर्याप्त सुविधाएं और तकनीकी नही थी, तब उन्होंने वामनराव लाखे जी और श्री रामराव चिंचोलकर के सहयोग से छत्तीसगढ़ में पहले मासिक पत्र ‘छत्तीसगढ़ मित्र‘ का प्रकाशन आरंभ किया। वे जीवन भर साहित्य साधना में लगे रहे। उनके द्वारा रचित कहानी ‘टोकरी भर मिट्टी‘ को हिन्दी की पहली मौलिक कहानी होने का श्रेय जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम के दौरान भी जन-जागरण में उनकी लेखनी ने छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रीय और साहित्यिक चेतना को विकसित करने में सप्रे जी का अमूल्य योगदान सदा याद किया जाता रहेगा।  

राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों के परिवारों में आयी खुशहाली - बीजापुर

 
 
Danteshwar kumar ( chintu) 
बीजापुर -  राज्य सरकार की राजीव गांधी किसान न्याय योजना से लाभान्वित किसानों के चेहरे में एक अलग रौनक और खुशी देखने को मिल रही है। वैश्विक महामारी कोविड़-19 के कारण लाॅकडाउन के दौरान किसान जब परेशान थे, ऐसे मुश्किल वक्त में सरकार ने इन किसानों को उक्त योजना से मदद दी, तो किसानों के परिवारों में खुशहाली आयी है। 
बीजापुर जिले के नैमेड़ निवासी किसान  रविशंकर पटेल पिता स्वर्गीय अग्रहरि पटेल ने इस योजना से लाभान्वित होने पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार संवेदनशीलता के साथ किसानों के हित में कार्य कर रही है और किसानों को खेती-किसानी के लिए हरसंभव मदद कर रही है। उन्होंने बताया कि मुझे इस योजना से 26 हजार 468 रूपये की राशि मिलेगी, जिसमें से अभी पहली किश्त में 6 हजार 617 रूपए सीधे बैंक खाता में जमा हो गयी है। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान इस मुश्किल वक्त में यह सहायता राशि मेरे लिए महत्वपूर्ण है और उक्त राशि से बारिश के पहले खेती-किसानी की तैयारी कर लिया है।
रवि पटेल ने बताया कि उन्होंने खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 के तहत लैम्पस सोसायटी में कुल 36 क्विंटल 80 किलोग्राम धान का विक्रय किया था और लैम्पस सोसायटी द्वारा 66 हजार 792 रूपए का पहले ही भुगतान किया गया था। अब सरकार की 2500 रूपए समर्थन मूल्य के मान से शेष अंतर की राशि 26 हजार 468 रूपए का भुगतान चार किश्तों में किया जायेगा, जो खेती-किसानी के साथ ही घर-परिवार की जरूरत के लिये काम आयेगी। नैमेड़ के किसान रविशंकर पटेल ने कहा कि उसके पास करीब 6 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें धान की फसल लेते हैं और रबी के सीजन में लगभग एक एकड़ रकबा में साग-सब्जी की खेती करते है। साग-सब्जी की फसल के लिए स्वयं के द्वारा स्थापित नलकूप के पानी का उपयोग कर रहे हैं। इसी आर्थिक गतिविधि के जरिये 6 सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण चलता है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं 10वीं तक पढे़ हैं
लेकिन अपने बच्चों की पढ़ाई का ध्यान रखा है और बड़ी बेटी कंचन को 12वीं की पढ़ाई के बाद विवाह कर दिया है। वहीं मंझली बेटी गायत्री अभी नर्सिंग काॅलेज बेंगलुर में बीएससी नर्सिंग कर रही है और लाकडाउन के कारण अब घर में है और कामनी ने काॅलेज कर रही है। छोटी बेटी सुचिता 12वीं की पढ़ाई कर रही है। तथा सबसे छोटा बेटा जिन्तेन्द्र 8वीं में पढ़ रहा है। नैमेड़ के इस लघु - सीमांत कृषक रवि पटेल ने राजीव गांधी किसान न्याय योजना से किसानों की मदद करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि किसानों से जुड़ी लाभकारी योजनाओं के जरिये हम सब के जीवन में बदलाव आया है। अब वह खेती - किसानी को उन्नत तरीके से करने के लिए अपने नलकूप में ड्रिप पद्धति अपनायेंगे, ताकि साग-सब्जी की पैदावार को बढ़ावा मिलेगा और पानी का समुचित दोहन कर सकेंगे।

पढ़े मंगलवार को क्या करें और क्या नहीं

यश कुमार लाटा : BBN24NEWS

मंगलवार का दिन हनुमानजी और मंगलदेव का है। लाल किताब के अनुसार मंगल नेक के देवता हनुमानजी और बद के देवता वेताल, भूत या जिन्न है। हर कार्य में मंगलकारी परिणाम प्राप्त करने के लिए मंगलवार का उपवास रखना चाहिए।

ये कार्य करें :
1. इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में मिश्रित सिन्दूर लगाएं।
2. मंगलवार ब्रह्मचर्य का दिन है। यह दिन शक्ति एकत्रित करने का दिन है।
3. दक्षिण, पूर्व, आ‍ग्नेय दिशा में यात्रा कर सकते हैं।
4. शस्त्र अभ्यास, शौर्य के कार्य, विवाह कार्य या मुकदमे का आरंभ करने के लिए यह उचित दिन है।
5. बिजली, अग्नि या धातुओं से संबंधित वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर सकते हैं।
6. मंगलवार को ऋण चुकता करने का अच्छा दिन माना गया है। इस दिन ऋण चुकता करने से फिर कभी ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।


लाल किताब के अनुसार निम्नलिखित उपाय पूछकर कर सकते हैं-
 
7. मंगल को नीम के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार करें। हो सके तो इस दिन कहीं पर नीम का पेड़ लगाएं।
8. मंगलवार का व्रत रखकर हनुमानजी की उपासना करें। फिर किसी भी हनुमान मंदिर में मंगरवार को नारियल, सिंदूर, चमेली का तेल, केवड़े का इत्र, गुलाब की माला, पान का बीड़ा और गुड़ चना चढ़ाएं। गुड़ खाएं और खिलाएं।
9. मंगल खराब की स्थिति में सफेद रंग का सुरमा आंखों में डालना चाहिए। सफेद ना मिले तो काला सुरमा डालें।
10. बहते पानी में तिल और गुड़ से बनी रेवाड़ियां प्रवाहित करें या खांड, मसूर व सौंफ का दान करें।
11. मीठी तंदूरी रोटी कुत्ते को खिलाएं या लाल गाय को रोटी खिलाएं।
12. बुआ अथवा बहन को लाल कपड़ा दान में दें।

13. रोटी पकाने से पहले गर्म तवे पर पानी की छींटे दें।

14. मंगलवार के दिन लाल वस्त्र, लाल फल, लाल फूल, लाल चंदन और लाल रंग की मिठाई चढ़ाने से मनचाही कामना पूरी होती है।
15. मंगलवार के दिन मंदिर में ध्वजा चढ़ाकर आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। पांच मंगलवार तक ऐसा करने से आर्थिक परेशानी हट जाती है।
16. मंगलवार को बढ़ के पत्ते पर आटे के पांच दीपक बनाकर रखें और उन्हें हनुमानजी के मंदिर में प्रज्वलित करके रख आएं।
 
ये कार्य न करें :
1. मंगलवार सेक्स के लिए खराब है। इस दिन सेक्स करने से बचना चाहिए।
2. मंगलवार को नमक और घी नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है।
3. पश्‍चिम, वायव्य और उत्तर दिशा में इस दिन यात्रा वर्जित।
4. मंगलवार को मांस खाना सबसे खराब होता है, इससे अच्छे-भले जीवन में तूफान आ सकता है।
6. मंगलवार को किसी को ऋण नहीं देना चाहिए वर्ना दिया गया ऋण आसानी से मिलने वाला नहीं है।
7. इस दिन भाइयों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। हालांकि किसी भी दिन नहीं करना चाहिए।

कोरोना वायरस और मंगरोहन वाले मुडही के फूल (लेख) - एच. पी. जोशी

सावधान और सुरक्षित रहिए क्योंकि कोरोना वायरस इस तस्वीर में दिख रहे फूल जैसे नग्न आंखों से दिखाई नही देता। दीगर राज्य और विदेशों से आने वाले अथवा कोरोना संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले कोई भी व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं, संक्रमित व्यक्ति के हथेली देखकर आप नही जान पाएंगे कि वह संक्रमित है या नहीं। मेरे हथेली में जो कोरोना वायरस जैसे दिख रहा है वह मुडही का फूल है, मुडही को नग्न आंखों से देखा जा सकता है मगर वास्तव में कोरोना वायरस अत्यंत तुच्छ आकार के होने के कारण विशेष वैज्ञानिक तकनीक अर्थात स्पेशल कोरोना टेस्टिंग किट से ही पता चल पाता है और दिख सकता है। इस मुडही को कोई अंधा व्यक्ति भी छूकर जान सकता है कि यह कोई फूल है सायद उन्हें लगे कि यह कोई फल है, मगर आप चाहे कितने ही अच्छे या दिव्य दृष्टि रखते हों आपको कोरोना के वायरस दिखाई नही देंगे, कोरोना वायरस की भविष्यवाणी कोई ज्योतिष भी नहीं कर सकता। आपसे अनुरोध है एक ही घर परिवार में निवासरत अपने पारिवारिक सदस्यों के अलावा शेष सभी व्यक्तियों से फिजिकल डिस्टेनसिंग रखें। जब दूसरे किसी स्थान पर या किसी अन्य व्यक्ति से मिलने जाना पड़े या किसी अन्य व्यक्ति से वार्तालाप करना पड़े तो वार्तालाप और घर से बाहर रहने के दौरान नाक और मुह को अच्छे से ढ़कने योग्य मास्क जरूर लगाएं। घर में रहें तब भी समय समय पर साबुन से हाथ धोते रहें जब साबुन से हाथ धोएं तो कम से कम 20 सेकंड तक हाथ को धोते रहें। घर या कार्यालय से बाहर जब साबुन से हाथ धोने का व्यवस्था न मिले तब अल्कोहल बेस्ड सेनेटाइजर से हाथ साफ करते रहें। लिफ्ट के बटन, गेट, संदेहास्पद वस्तुओं अथवा सामग्री इत्यादि को छूने के पहले या बाद में साबुन से हाथ धोएं या सेनेटाइजर लगाएं; घर से बाहर निकलें तो बेहतर होगा सेनेटाइजर की एक छोटी बॉटल लेकर चलें। यह उसी मुडही का फूल है जिसके तना और हरे डालियों का उपयोग छत्तीसगढी परंपरा में विवाह के दौरान मंगरोहन (लकड़ी का पुतला पुतली) बनाने और मड़वा छाने में किया जाता है। मंगरोहन मंडप के बीच में गड़ाया जाता है। मंगरोहन के सामने ही मिट्टी के 02 करसा में पानी भरकर उसके बाहरी आवरण में गोबर से चित्र बनाकर हल्दी और कुमकुम इत्यादि से रंगे हुए चाँवल से सजाया जाता है इस करसा के ढक्कन में ही तेल के जोत जलाया जाता है। जिसके चारों ओर दूल्हा दुल्हन भांवर घूमते हैं तब विवाह संपन्न होता है। सम्भव है आप इसे अर्थात मुडही को दूसरे किसी नाम से जानते हों।

विशेष : कल मदारी आज नगीना, शोक में डूबा सारा सिनेमा

WRITTEN BY : RAKESH RANJAN

सिनेमा जगत ने महज चौबीस घंटे के भीतर अपने दो बड़े सितारों को खो दिया है। कल हर दिल अज़ीज़ कलाकार इरफान खान के बाद आज दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर ने भी इस दुनिया को अलविदा कह दिया।  

इसे महज एक संयोग ही कहेंगे की दोनों अभिनय के कुबेर कि बीमारी के इलाज से लेकर कैंसर से मौत तक में उन दोनों के बीच काफी समानताएं देखी गईं।दरअसल, यह एक अजीब इत्तिफ़ाक़ हिन् है की ऋषि कपूर और इरफ़ान खान की मौत दो या तीन पहर के अंतराल पर हुआ। दोनों हिन् कला के धनि, दोनों हिन् कैंसर से पीड़ित, 2018 में दोनों के बीमारी का इलाज विदेशों में होना, इलाज के बाद 2019 में दोनों का वतन आना और 2020 में एकसाथ अपने चाहनेवालों को छोड़ जाना।  
ऋषि कपूर और इरफ़ान खान ने सिर्फ एक फिल्म D-DAY में एकसाथ काम किया। असल ज़िन्दगी में दोनों दोस्त इस फिल्म में बतौर कलाकार एक दूसरे के दुश्मन थे। इस फिल्म में ऋषि कपूर जहाँ एक अंडरवर्ल्ड डॉन थे वहीँ इरफ़ान खान एक रॉ एजेंट की भूमिका में थे।  जिसमे रॉ एजेंट को अंडरवर्ल्ड डॉन की तालाश थी।   
D-DAY फिल्म पूरा होने पर इरफ़ान ने अपना अनुभव साझा करते हुए ऋषि कपूर के बारे में कहा की वो एक असाधारण व्यक्ति और कलाकार हैं  जिनके साथ काम करके बहुत अच्छा लगा।  साथ हिन् इरफ़ान ने उनके बारे में यह भी बताया की फिल्म शूटिंग के दौरान वो लोगों का खूब मनोरंजन किया करते थे।
यह एक संयोग हिन् था की इस फिल्म के बाद दोनों कभी परदे पर एकसाथ नहीं दिखे। दोनों को अपनी बीमारी का पता साल 2018 में चला। दोनों साल 2018 में इलाज के लिए विदेश का रूख किया। साल 2019 में दोनों हिंदुस्तान लौटे और अपने काम में मशगूल हो गए। उन्हें अपनी बीमारी का पता था बावजूद इसके वो अपने चेहरे पर शिकन तक नहीं आने दिया। अपने चाहनेवालों से हमेशा मुस्करा कर मिलते रहते। ऋषि कपूर और इरफ़ान खान महज एक दिन के फासले  पर मौत को गले लगाया और छोड़ गए जिन्दा किरदार।

THE Beauty Tips पुराने दाग-धब्बों को भी ठीक कर देगा, शहद से बना यह नेचुरल उबटन

 दाग-धब्बे दूर करने के लिए आप कई जतन करते हैं लेकिन यह जिद्दी निशान आपके चेहरे से हटने का नाम ही नहीं लेतेl आज हम आपको इस समस्या से निजात दिलाने के लिए एक ऐसा उपाय बता रहे हैं जिससे आपके चेहरे के दाग-धब्बे जरूर साफ हो जाएंगेl शहद सेहत के लिहाज से ही नहीं बल्कि ब्यूटी सीक्रेट्स में भी इस्तेमाल किया जाता हैl आइए, जानते हैं इसके गुण- 

पुराने दाग-धब्बों पर कारगर 

आप कच्चे शहद को जले हुए निशान पर लगा सकती हैं, क्योंकि शहद में एंटीसेप्टिक और हीलिंग गुण होते हैं। नियमित रूप से जले पर शहद लगाने से दाग जल्दो गायब हो जाते हैं। आप शहद को मलाई, चंदन और बेसन के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती हैं। यह मास्कत चेहरे की अशुद्धियों को हटाता है और त्वचा को मुलायम और चिकना भी बनाता है। आपके चेहरे पर अगर कोई पुराना दाग या झाईयां हैं, तो आप इस उपाय को फॉलो करके उनसे निजात पा सकते हैं ||

इन गुणों से भरा होता है शहद 

शहद में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन ए, बी, सी, आयरन, मैगनीशियम, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सोडियम आदि गुणकारी तत्व होते हैं। यह कार्बोहाइड्रेट का भी प्राकृतिक स्रोत है, इसलिए इसके सेवन से शरीर में शक्ति, स्फूर्ति और ऊर्जा आती है और यह रोगों से लड़ने के लिए शरीर को शक्ति देता है।

कोरोना संक्रमण के कठिन समय में भी अपने मानसिक संक्रमण से बाहर नहीं आ पा रही है भाजपा- मोहन मरकाम

ताउम्र ग़ालिब ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और वो आइना साफ़ करता रहा.. किसी के द्वारा लिखी गयी पंक्तियाँ वर्तमान समय में भाजपा पर सटीक बैठती हुई दिखाई देतीं हैं।

आज जबकि कोरोना के रूप में सम्पूर्ण मानवता पर वैश्विक संकट आ खड़ा हुआ है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी झूठ और अफ़वाह की बुनियाद पर टिके अपने मूल चरित्र से बाहर नहीं निकल पा रही है।

कांग्रेस संगठन और सरकार ने इस लड़ाई के ख़िलाफ़ शंखनाद करते समय ही स्पष्ट कर दिया था कि हम माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा इस संक्रमण से लड़ने हेतु उठाए गये प्रत्येक सकारात्मक क़दम के साथ खड़े हैं।

जब माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा पहली बार लॉकडाउन की घोषणा की, हमने उसका स्वागत किया। जब केंद्रीय वित्त मंत्री जी द्वारा राहत पैकेज की घोषणा की गयी, राहुल जी सहित पूरी कांग्रेस पार्टी ने स्वागत किया और अन्य सुझाव भी दिए।

लेकिन छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी कोरोना संक्रमण से लड़ने में कोई योगदान तो देना दूर, अपनी झूठ और अफ़वाह से भरे मानसिक संक्रमण से बाहर नहीं आ पा रही है।

जहाँ एक तरफ़ लगभग समाप्त हो चुका भाजपा संगठन भी कहीं किसी सेवा कार्य में दिखाई नहीं दे रहा है वहीं आश्चर्य की बात यह भी है कि प्रदेश की जनता द्वारा चुनकर लोकसभा भेजे गये भारतीय जनता पार्टी के 9 सांसदों में से सिर्फ़ 2 सांसदों से मुख्यमंत्री सहायता कोष में योगदान दिया है।

7 लोकसभा सांसदों और 2 राज्यसभा सांसद ने सांसद निधि एवं अपने वेतन से पी एम केयर्स में दान देकर और मुख्यमंत्री सहायता कोष में कोई भी योगदान न देकर न केवल अपने मानसिक दिवालियापन का परिचय दिया है बल्कि प्रदेश की जनता का भी अपमान किया है।

यह एक ऐसी लड़ाई है जो शासन और प्रशासन के स्तर पर ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर की ओर लड़ी जा रही है। ऐसे मैं अपने प्रदेश की सरकार को योगदान न देकर सीधा केंद्र सरकार के फ़ंड में सांसद निधि से दान देना समझ से परे है।

इसके अलावा भाजपा के नेताओं द्वारा प्रतिदिन सरकार के प्रयासों को झूठ और अफ़वाह के साथ सोशल मीडिया में प्रस्तुत करना भाजपा के नेताओं की अकर्मण्यता और संकट के समय भी अपनी सस्ती राजनीति से बाहर न निकल पाना दर्शाता है।

आज जब रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया अपनी रिपोर्ट में कहता है कि लॉकडाउन के बावजूद भी छत्तीसगढ़ आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ जब दूसरी रिपोर्ट कहती है कि संक्रमण से बाहर ग्रीन ज़ोन वाले जिलों का सर्वाधिक प्रतिशत छत्तीसगढ़ में है, ऐसे में भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाई जा रही नकारात्मकता को प्रदेश की महान जनता देख रही है।

हमने पहले भी कहा है और आज पुनः दोहराता हूँ, कि यह संकट पूरी मानवता पर आया हुआ संकट है। इससे हम सबको मिलकर लड़ना है। ऐसे समय में दल से ऊपर देश और मानवता को रखकर भाजपा को सोचना चाहिए।

प्रदेश सरकार के ख़िलाफ़ अफ़वाह फैलाने से आपका मक़सद तो सफल नहीं होगा क्योंकि सरकार के कामों की सराहना तो पूरा देश कर रहा है।

बिलासपुर पुलिस की अनोखी पहल। डीएसपी ने गाया शानदार गाना। दिया  कोरोना से दूरी बनाए रखने का संदेश। बिलासपुर के लोगों ने की सराहना। 

अजीत मिश्रा ■ बिलासपुर छत्तीसगढ़ ■ बिलासपुर पुलिस ने एक के बाद एक कई ऐसे काम किए जिनसे वे चर्चा में बने रहे हैं।  एक तरफ देश भर में कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।  तो दूसरी तरफ कोरोना जैसे महामारी से बचने के लिए बिलासपुर के एक प्रशिक्षु डीएसपी अभिनव  उपाध्याय ने सुंदर और सुरीली आवाज में गाना गाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है प्रशिक्षु डीएसपी के इस प्रयास को छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने ट्विटर अकाउंट से सराहा है भूपेश बघेल ने अपने ट्विटर अकाउंट में जाने के लिए को पोस्ट किया है।  गाने की धुन फिल्मी थी लेकिन संदेश बेहद साफ और स्पष्ट था।  लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचना है,  और दूसरों को भी बचाना है।  इस संदेश को  प्रशिक्षु DSP अभिनव उपाध्याय ने अपने गाने के माध्यम से कुछ इस तरह से लोगों के सामने प्रस्तुत किया कि, लोग ना सिर्फ उनके मोहक अंदाज और सुर में मंत्रमुग्ध हो गए बल्कि उनके लिए तालियां भी बजाएं। गौरतलब है कि प्रशिक्षु डीएसपी ने इस गाने को एक दिन पहले बिलासपुर शहर के अलग-अलग कई जगहों पर गाया है। इन्ही में से एक जगह *भारती अपार्टमेंट* के लोगों को यह गाना इतना पसंद आया कि उन्होंने ना सिर्फ इस गाने को सुनकर आनंद लिया बल्कि तालियां बजाकर प्रशिक्षु डीएसपी के इस प्रयास की सराहना की और उनका मनोबल बढ़ाया। 

क्या आपको पता है नीम की पत्‍तियां चबाने से कई रोगों में मिलेगा आराम, डायबिटीज भी होगी दूर

प्रकृति में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं जो हमारी सेहत के लिए खास हैं। नीम की पत्तियां भी कई रोगों को दूर करने में सहायक हैं। शोध के बाद पता चला है कि नीम की पत्ती रोजाना चबाने से डायबिटीज का खतरा काफी कम हो जाता है। नीम में मौजूद फाइबर खाने को पचाने में मदद करता है और पेट की गैस को भी दूर करता है। वहीं नीम की दातून से पायरिया जबकि पत्ती चबाने से डिप्रेशन में भी आराम मिलता है।

छतीसगढ़ : डिजिटल तकनीक से आयेगी शिक्षा में गुणवत्ता

शिक्षा विभाग की पहल: शिक्षकों की कमी दूर करने तैयार किए जा रहे वीडियो लेक्चर: एनिमेशन के जरिए पाठ्यक्रम को बनाया जा रहा रोचक और ज्ञानवर्धक

रायपुर - छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए डिजिटल तकनीक का उपयोग किया जा रहा हैै। इस तकनीक का उपयोग के जरिए विद्यार्थियों के लिए स्तरीय सामग्री तैयार की जा रही है। राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों में विषय शिक्षकों की कमी की समस्या को हल करने के लिए वीडियो पाठ्यक्रम के जरिए पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। हाल ही में एक पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में वीडियो कॉल एप्लीकेशन का उपयोग करने की पहल की गई है।
स्कूलों में जिन विषयों के शिक्षक नहीं है, वहां विषय विशेषज्ञों के माध्यम से पढ़ाई शुरू की गई है। पांच मिनट के वीडियों और लाईव-लेक्चर के माध्यम से पढ़ाई के बाद ऑनलाईन होमवर्क भी दिया जाता है। पॉयलेट प्रोजेक्ट के तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 12 शासकीय स्कूल सेल, कोमाखान, चांपा, बरना, नवापारा और खरोरा, सांकरा, बालोद, कोमाखान, मुंगेली, बेमेतरा में इसकी शुरूआत 10 फरवरी से हो चुकी है। इसमें सभी विषयों की ई-कक्षाएं उपलब्ध है। आने वाले समय में इसी योजना से करीब एक हजार स्कूलों को लाभांन्वित करने का लक्ष्य है।
       स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वीडियो लैक्चर तैयार करने के लिए राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद और एनआईसी नवा रायपुर में अध्ययन सामग्री तैयार करने के लिए स्टूडियो स्थापित किया गया है। विशेषज्ञ शिक्षकों को पहले एनिमेशन, सिमुलेशन और टीचर लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) का उपयोग करके वीडियो व्याख्यान शूट करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस वीडियो की समीक्षा विषय-विशेषज्ञों द्वारा की जाती है और यू-ट्यूब पर अपलोड की जाती है, ताकि कोई भी इसे देख सके और सीख सके।
    तैयार की गई पाठ्य सामग्री यू-ट्यूब चैनल डीइएल छत्तीसगढ़ में अपलोड की जाती है। आम तौर पर प्रत्येक अवधारणा वीडियो लम्बाई में 4-5 मिनट का है, जो एक अध्याय के रूप में एक साथ मिले हुए हैं। स्कूल द्वारा एक टेक फ्रेंडली स्कूल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है, जिसे राज्य द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। ताकि वह बेहतर तैयारी के लिए विद्यार्थियों की मदद हेतु उचित अनुशासन और प्रक्रिया का पालन कर सके।
    चरण 1 - स्कूल हर दिन एक विषय वीडियो अंग्रेजी, जी-विज्ञान, भौतिक विज्ञान आदि जो खेलते हैं, उन छात्रों की आवश्यकता का 12 बजे तक निर्भर करता है।
    चरण 2 - छात्र वीडियो कॉलिंग एप (जूम) का उपयोग करके दोपहर 12.30 बजे विषय-विशेषज्ञ से जुड़ते हैं। छात्र ऑनलाईन शिक्षक से अपना संदेह पूछते हैं और शिक्षक यह भी परखता है कि उन्होंने बेतरतीब ढंग से चूने गए छात्रों से मौखिक प्रश्न पूछकर क्या सीखा है।
    चरण 3 - छात्रों कोे होमवर्क दिया जाता है, जिसे उन्हें अगले दिन स्कूल समन्वयक के पास जमा करना होता है। स्कूल समन्वयक तब होमवर्क को स्कैन करता है और वाट्सअप के माध्यम से सभी छबियों को संबंधित ऑनलाइन विषय शिक्षक को भेजता है।
    चरण 4 - ऑनलाइन विषय शिक्षक इस पीडीएफ का प्रिंट लेता है और प्रत्येक जमा होमवर्क को ध्यान से देखता है। शिक्षक फिर सभी प्रस्तुत करने और स्कैन करने के लिए सुधार हेतु प्रतिक्रिया लिखता है और इसे समन्वयक को वापस भेजता है। बाद में समन्वयक द्वारा इसे छात्रों के साथ साझा किया जाता है। इस प्रकार व्यक्तिगत सीखने का चक्र पूरा होता है। यह सब केवल 2 दिनों के समय में होता है।   
 लेख-सहायक संचालक द्वय ललित चतुर्वेदी,  जी.एस. केशरवानी

आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ...जिम्मदारो की लापरवाही से बुझा गरीब घर का चिराग


रायगढ़:- माँ बाप अपने घर के चिराग को बेहतर शिक्षा और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए घर से बाहर भेजते है ताकि उसकी जिंदगी सवर सके जिंदगी में वो बेहतर कर सके …. सभी अपनी अपनी हैसियत के अनुसार अपने घर के लाल को बेहतर शिक्षा की तालीम देने की कोशिश करते हैं चाहे अमीर हो या गरीब … जिनके पास पैसे होते हैं वो बड़े बड़े प्राइवेट स्कूल पब्लिक स्कूल भेजते है …. तो वहीं गरीब तपके के लोग अपने घर के चिराग को शासकीय छात्रावास भेजते है….उन्हें उम्मीद होती है कि उनके घर के चिराग उनका नाम रौशन करें लेकिन उन गरीब माँ बाप को क्या पता कि जहां जिन जिम्मदारो के हवाले अपने घर का चिराग को छोड़ आये हो उनकी लापरवाही से उनके घर का चिराग बुझ जाए……वो चिराग अपने घर वापस न आ पाए….

 

 

ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले कापू थाना क्षेत्र में स्थित शासकीय छात्रावास का है जहां के जिम्मदारो के लापरवाही से एक मासूम की जान चली गयी …इस छात्रावास में एक मासूम गोविंदा कुर्रे जो…..कक्षा 8वी में पढ़ता था …..जहां उसके साथी उसके साथ बेरहमी के साथ मारपीट करते थे लेकिन जिम्मदारो ने कभी इसपर ध्यान नही दिया …नतीजा उसके ही साथी बच्चों ने उसे बेरहमी के साथ मार मार कर अधमरा कर दिया ….जिसे अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गयी….छात्रावास में क्या क्या हुआ इसकी जानकारी मृतक के छोटे भाई रोविन्द कुर्रे के परिजनों और मीडिया को जानकारी उसने बताया कि छात्रावास में बेवजह के उसके 4 साथी उसके साथ मारपीट किया करते थे जिसकी शिकायत छात्रावास अधीक्षक से की गई मगर कोई संज्ञान नही लिया गया जिसकी वजह से उन बच्चों का हौसला और बुलन्द होते गया अंजाम आज गोविंदा आज हमारे बीच नही रहा …..आज उस गरीब परिवार के घर का चिराग तो बुझ गया मगर सिस्टम पर कई सवाल भी खड़े हो गए …सवाल पहला .. आप अपनी स्क्रीन पर जो तस्वीर देख रहे हैं इसको कहने की जरूरत नहीं कि किस तरीके से बेरहमी से उसके साथ मारपीट की गई लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर साहब का कहना है कि यह नेचुरल डेथ मृतक के शरीर पर कहीं पर भी कोई चोट के निशान नहीं है….. जिसे अंधा भी कह देगा कि गोविंदा के साथ क्रूरता के साथ मारपीट की गई लेकिन डॉक्टर साहब का कहना है कि यह नेचुरल डेथ है….. तो वही दूसरा छात्रावास में छात्रावास अधीक्षक साहब का न रहना यहां तो साहब की जब मर्जी होती है तब साहब आते हैं और जब मर्जी नहीं होती तो नहीं आते जिस दिन गोविंदा के साथ बेहरहमी के साथ मारपीट की गई उस अधीक्षक साहब रहते तो ये न होता आज उस गरीब के घर का चिराग न बुझता…. सवाल तीसरा जब सभी छात्रावास में सेक्युरिटी अनिवार्यता है तो यहां क्यो नही…मामले की लीपापोती करने वाले के ऊपर कार्यवाही होगा या नही …. सवाल तो कई खड़े हो रहे है… लेकिन क्या उस गरीब घर के चिराग को फिर से वापस लाया जा सकता है क्या सिस्टम में सुधार हो पायेगा ….या फिर नियम कानून कार्यवाही सिर्फ बड़े लोगो के लिए है और गरीबों के लिए सिर्फ बेबसी ही लिखी है….आखिर कब मिलेगा गोविंदा को इंसाफ…..

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