विशेष

पढ़िए सविता सिंह से खास बात चीत मनहर चौधरी के साथ सिर्फ BBN24 पर

 

1 : सविता जी सबसे पहले आप को बहुत बहुत बधाई अब आप लेखन के क्षेत्र में भी आ गई है तो सबसे पहले इसी से जुड़ा एक सवाल आज का युवा जो  पढ़ने और लिखने से कही ना कही भाग रह है तो आपने फिर से कैसे  सोचा की अब कुछ लिखने का भी कार्य करना चाहिए

 

उत्तर 1 : आपका बहुत बहुत शुक्रिया। आज का युवा भी मेरे विचार में पढ़ता तो बहुत है, मगर हां शायद सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन के कारण उसने लिखना कम कर दिया है। मुझे काफी समय से लग रहा था कि कोई क़िताब लिखी जाए क्योंकि किताब आज भी एक सशक्त तथा permanent  माध्यम है अपने विचारों को लोगों के बीच पहुंचाने का और मौजूदा व्यवस्था पर अपने विचार व्यक्त करना मुझे फिलहाल ठीक लगा। इसलिए मैंने ये बुक लिखी ।

 

2- अकसर एसा देखा गया है  कि जो जिस बैकग्रांउड का होता है या जिसरी जो फिल्ड है वो उसी पर लिखना या फिर बोलना पसंद करता है  और आपका बैकग्राउंड आर्मी का रहा है तो फिर आप के मन मे कहां से कहा कि चलो थोड़ा पोलिटिकल सोचा जाए |

 

उत्तर 2: Well I must say it's a very good question. I have tried to answer the same question right in the preface of my book if you read it carefully. I'm not from any political family and have an army background completely. But being from any background doesn't stop you from having your views about the political system in your country. In fact, I feel that being responsible citizens we should be well aware of our political system and happenings. After all, it's political parties who frame all the policies in the country, run the country and thus affect the daily lives of each and every one of 125 crore plus Indians.

Thus it's imperative for all of us to do our tasks sincerely and at the same time be aware of mindset, ideologies, background and vision of our political representatives because the country has to bear the burden of their actions not for a month or two but for next 5 years. In fact, entire country and even our next generations will have to bear the consequences of their actions for years to come. The country should come first and foremost for all of us and only a well aware citizen will be able to exercise its option of frenchise to choose the right candidates who will take our nation forward at a faster pace. जागरुक, देश से प्यार करने वाले और उत्तरदायी नागरिक होने के नाते हमारा दायित्व बनता है कि हर नागरिक लोकतन्त्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे तथा धर्म- जात- पात - क्षेत्र- भाषा - पैसा इन सबसे उपर उठकर अच्छे प्रतिनिधी चुनकर आगे भेजे जो देश को तेज़ी से आगे ले जाएं ताकि 125 करोड़ देशवासियों के सपनों को पूरा करने की सच्ची कोशिश ईमानदारी से की जा सके । बल्कि समय आ गया है कि जब हमें चुनाव में पैसा लुटाने वाले और धन का अवांछित प्रदर्शन करने वाले प्रत्याशियों को भी दुत्कार कर सिर्फ काबिल तथा अच्छे प्रतिनिधियों को ही चुनना चाहिए। आर्मी की बैकग्राउंड होना मेरे लिए फख्र की बात है। आर्मी मतलब सम्पूर्ण कुर्बानी, तन - मन - धन - समय - परिवार - खुद की जान । सबकी कुर्बानी। मेरे विचार में आर्मी से बढ़कर कोई देशसेवा नहीं है। असलियत में आर्मी बैकग्राउंड होना भी इस किताब को लिखने का शायद एक बड़ा कारण है। आर्मी मैं देश को सबसे पहले और सबसे ऊपर रखा जाता है। आज शायद मेरी नज़र में आने वाले 5 सालों में मोदी जी ही ऐसे राजनेता हैं जो देश की सेना को उतनी मजबूती देंगे जितनी उसको ज़रूरत है और देश को लाचारी वाले हालातों से उभारकर आगे ले जाएंगे, एक मज़बूत भारत बनायेंगे।

 

3- आपकी किताब का नायक को है वो भारत के प्रधानंमत्री मोदी हैं ,  मोदी ही क्यो

 

उत्तर 3 - I would request readers to go through my book in detail. It gives an answer to this question in detail. एक नहीं अनेक कारण हैं कि मोदी जी मेरी किताब के नायक हैं। मेरी किताब मेें खुलकर लिखा हुआ है। फिर भी मैं यहां कहूंगी कि श्री नरेन्द्र मोदी जी वो इंसान हैं जिनसे सिर्फ मैं ही नहीं अपितु देश का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है । चाहे कुछ लोग उन्हें वोट भी नहीं करें मगर शायद उनसे प्रभावित सभी हैं। इस बात से शायद ही कोई इंकार कर पाए कि पिछले पांच सालों मेें मोदी जी ने रात दिन जी जान से देश को तरक्की के मार्ग पर मुखर करने कि मेहनत की है ताकि देश के 125 करोड़ लोगों की आशाओं को ज्यादा से ज्यादा पूरा किया जा सके। हम सब जानते हैं कि सारी और सबकी समस्याएं कोई भी रातों रात ख़त्म नहीं कर सकता पर उनके हल की सच्ची कोशिश तोह की जा सकती है। उन्होंने मेरे विचार मैं यही कोशिश की है।

 

5- किताब के शीषर्क से लग रहा है कि आप नरेन्द्र मोदी से काफी प्रभावित है और एक अपील भी है  इसके पीछे कया कारण है आप उनमें क्या अलग देखती है

 

उत्तर 5 - जी हां इसमें कोई शक नहीं कि मैं श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व तथा व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हूं। क्योंकि मुझे देश की तरक्की और मजबूती से प्यार है, देश की जनता की खुशहाली से प्यार है। अतः मेरे विचार से मोदी जी का सत्ता में दुबारा बने रहना बेहद ज़रूरी है। वह फ़िलहाल अकेले ऐसे राजनेता हैं जो भारत को तेज़ी से आगे बढ़ा सकते हैं। उनके पास बहुत नई सोच है। और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी आइडियाज को लागू करने का अनूठा जज़्बा है जो आज किसी और शक्सियत में नहीं दिखता। ये मैं नहीं शायद ज़्यादातर भारतीयों का मानना है। Moreover, I feel he is man who has risen to become Prime Minister of India from a common man. He is not born in some rich or family or doesn't have a kingly background. He has given dreams to billions of Indians that they have 'one of them' sitting in Prime Minister's office. Besides this we all know very well that he is hardworking, decisive, visionary, down-to-earth and a tough Prime Minister India needs at this time.

 

6- एक सीघा सवाल है सेना को राजनिति से अलग रखा जााना चाहिए या नही

 

उत्तर 6 - Of course Army should be kept away from politics. In fact, our Army has itself stayed away from politics always. Indian army is a professional army always known for focussing only upon the tasks it's assigned. It only keeps preparing itself to fight successfully with its adversaries 24*7. In fact, discipline is the bedrock of Indian Army. Loyalty to the nation is ingrained into them right from day one and it cannot be questioned at any point of time. They are the ones who have been in the situations on so many occasions where they even lose their lives for country. They are playing with their own lives for the country day in and day out. They are going for operations or war being fully aware that they might not come back again. They don't even question you once that why should they march forward to face the bullets right in the chest when live bullets are flying from front and all around them. Mind you, a soldier has to bat and battle those live bullets or bombshells and not hit few sixes with a cricket ball and become a hero overnight. What else anyone can expect from army men. Therefore, in my opinion and with due respect, Army people are the REAL HEROES who are far superior than any of our sportspersons or filmi heroes who get paid heavily for playing sports or making films. सच्चाई तो ये है कि असल में आर्मी वाले लोग आजाद भारत के मॉडर्न भगत सिंह और चंद्र शेखर आजाद हैं। देश को उन पर गर्व होना चाहिए और उनका शुक्रगुजार भी होना चाहिए कि वो देश के लिए थोड़ी सी तनख्वाह में भी अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। उधर यहां पर कुछ अज्ञान और स्वार्थी नेता सेना के लिए गलत बयानबाजी भी करने से नहीं चूकते कि जवान तो मरने के लिए ही सेना में भर्ती होते हैं। Ieel that even if few people from army background join the politics, there is no harm. It should be a welcome step and I'm sure they will do a real good job for the country. But that's a personal choice of any individual whether to join politics or not.

 

7 किताब लिखने में आपने कहां कहां से सहयोग लिया  आतंकवाद पर आपकी क्या राय है

उत्तर 7 - इस क़िताब को लिखने में मैंने जहां से भी संभव हुआ सहयोग लिया। Aim was to pen down my thoughts with certain supporting material most of which I took from open domain. As regards terrorism, it seems like a cancer to me for humanity. We should all get together as nation as a whole and fight with it.  Actions of toughest nature should be taken to wipe off this menace. In fact, time has come now when countries should get together at international level to take on this big challenge with a collective might and will.

 

8- अपनी किताब का कोई एसा अंश  जो इस किताब का सबसे प्रभावी हिस्सा है वो कौन सा है और क्यो

उत्तर 8 -  ये मेरे लिए काफी मुश्किल सवाल है क्योंकि मेरे हिसाब से किताब का हर हिस्सा ज़रूरी और प्रभावी है। फिर भी शायद 'प्रीफेस' और आखिरी अध्याय 'मोदी बनाम कौन'  मेरे हिसाब से काफी अच्छे हैं क्योंकि ये पढ़ने वालों को सोचने पर मजबूर कर देता है। मेरे हिसाब से ये पुरी किताब हर समझदार नागरिक और युवा वर्ग को एक बार जरूर पढ़नी चाहिए

 

9 - पाठको के लिए क्या संदेश देना चाहती है आप

उत्तर 9 - To all my readers, I would like to say that live harmoniously and happily. Have healthy competition but cut out the animosity amongst each other. Work hard in life, raise your performance and strive to do well in life. Be happy in your own lives. Enjoy your lives but at the same time have unquestionable feelings for this country where we have been born and try to contribute our best to make it a great country.  भारत के अच्छे भविष्य के लिए जात-पात -धर्म -भाषा - क्षेत्र - पैसा आदि से ऊपर उठकर अच्छे कर्मठ प्रतिनिधी चुनें जिससे कि हम सबका देश भारत विश्व में अपना डंका बजाने में कामयाब हो। आपस में शांति से मिलकर रहें। हमारी अगली पीढ़ियां भी तभी खुश रहेंगी। अपनी अगली पीढ़ियों को एक मजबूत भारत, एक शांतिपूर्ण भारत दें जो कि लगभग हर क्षेत्र में एक सुपरपावर हो। आखिरी संदेश कि एक बार ये किताब जरूर पढ़ें। आपको भारतीय होने के नाते ये किताब पढ़कर ज़रूर कुछ अच्छा महसूस होगा।

 

 

 

पढ़िए जांजगीर जिले के एक छोटे गाँव में रहने वाले बुजुर्ग पति पत्नी की अनोखी कहानी

शनि सूर्यवंशी@ BBN24-- पकरिया- कहते हैं ना कि जिस उम्र में अपने भी साथ छोड़ देते हैं उस उम्र में पत्नी साथ निभाती है ऐसा ही एक वाक्य पामगढ ब्लॉक के छोटे से गांव झूलन का है जहां पति पत्नी मिलकर मनिहारी का ठेला चलाते हैं जिसमें महिलाओं के श्रृंगार को लेकर पति पत्नी सुबह से ही बिना चप्पल के निकल पड़ते हैं और आसपास में घूम-घूम कर अपना रोजगार करते हैं ऐसा नहीं कि उनकी घर के सदस्य उन्हें मना नहीं करते हो उनके घर के और कोई नही बल्कि उनके पुत्र ही हमेशा मना करते हैं कि आप यह कारोबार मत करो फिर भी काम करने की ऐसी इच्छा की बच्चों के बातों को नजरअंदाज करके भी आज भी काम करते हैं। 8 वर्ष से आसपास के गांव गांव में घूम कर ठेला के माध्यम से मनिहारी की दुकान चलाते है। इनके दो पुत्र है जोकि एक पामगढ़ के शिशु विद्या मंदिर में पढ़ाते है । दूसरा खेती किसानी का काम देखते है। खास बात यह है कि रामाधीन कश्यप ने बताया कि कितना भी तेज धूप या चिलचिलाती गर्मी हो हमेशा ही वो और साथ मे उनकी पत्नी दोनों ही पैदल सड़क हो गाँव के रास्ते में ही पैदल ठेला को चलाते है। साथ ही उन्होंने बताया कि हम अपना काम के साथ भगवान के भक्ति में भी लीन रहते है इतना ही नही वो अपने ठेले में गाना सुनने के लिए एक साउंड सिस्टम लागये जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ धार्मिक गाना ही बचता रहता है। जब हमने पूछा ठेला में सिर्फ धार्मिक गाना ही बजाते है तो उन्होंने ने बोला कि उम्रदराज में धार्मिक गीत संगीत अच्छा लगता है इससे मन साफ रहता है और अपने अंदर अच्छा विचार भी पैदा होता है जिससे अच्छे काम करने का इच्छा भी जगजाहिर होता है। इस लिए धार्मिक गाना सुनते है। पति पत्नी ने बताया कि आज भी बहुत से माँ बहन बहु बेटी है जो अब भी दुकान में अपने जरूरत की समान लेने जाने में शर्माते है झिझकते है ये सभी चीज़ को देखते हुए हम दोनों पति पत्नी ने इस काम को चुना साथ ही सेवा के रूप में ठेला पर घर घर जाकर समान बेचते है। इतना ही नही इनके बच्चो के द्वारा कई बार मना किया गया उसके बावजूद भी पत्नी पत्नी की जिद्द के आगे कुछ बात काम न आया फिर भी ये अपने बच्चो के एक भी न सुने और अपने काम को सच्चे लगन मेहनत ईमानदारी से करते आ रहे है। इन दोनों पति पत्नी के काम को लेकर गांव के लोग सराहना करते थाकते नही है और इनके हिम्मत जज्बे को सलाम करते है।

पढ़ने के लिए जुनून होना चाहिए सफलता आपके कदम चूमेगी -हेमंत जायसवाल..... MBBS की परीक्षा में शानदार नम्बरो से पास होकर बढ़ाया क्षेत्र का मान

जांजगीर चांपा :-जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर डभरा ब्लॉक के साराडीह का होनहार हेमंत जायसवाल एमबीबीएस के फाइनल परीक्षा में शानदार नंबर अर्जित कर क्षेत्र के साथ-साथ जिले का भी नाम रोशन किया है। हेमंत जायसवाल मध्यम वर्गीय परिवार होने के बावजूद का भी आगे बढ़ने को लेकर हिम्मत नहीं हारी और सन 2014 बैच में एमबीबीएस की प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चयन होकर रायगढ़ में स्थित स्व लखीराम मेडिकल कॉलेज दाखिला होकर अपनी पढ़ाई शुरू की और 25 मार्च को एमबीबीएस फाइनल ईयर की रिजल्ट जवाई जिसमें शानदार नंबरों से पास होकर क्षेत्र के साथ-साथ जिला का नाम रोशन किया। वहीं हेमंत जायसवाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और अपने गुरुजनों के साथ साथ अपने बड़े भाई को दिया आपको बता दें कि हेमंत जायसवाल जिले के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जनर्लिस्ट एवं समलेश्वरी हॉस्पिटल के संचालक हुमेश जायसवाल के छोटे भाई हैं।

पढ़ने के लिए जुनून होना चाहिए सफलता आपके कदम चूमेगी

हालांकि मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूं पर्याप्त संसाधन नहीं था और मैं हिंदी मीडियम का छात्र था लेकिन भैया जब मेडिकल की पढ़ाई करने रायपुर गए थे तब उनसे मुझे प्रेरणा मिली भैया मुझे हमेशा कहते थे कि मैं तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता हूं और भैया की यह बात मुझे भाग गई पर मन में जुनून था कि मैं डॉक्टर बनूंगा फिर मैंने पीएमटी की तैयारी की जिसके बाद मेरा चयन रायगढ़ में स्थित स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज में हुआ शुरू शुरू में तो मुझे हिंदी मीडियम होने के कारण समझने में थोड़ा दिक्कत होता था क्योंकि मेडिकल की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम में होती है लेकिन मैंने हार नहीं मानी और बिना किसी रूकावट के मैं आगे बढ़ते गया और फाइनली अब मैं एमबीबीएस कंप्लीट कर लिया मैं सभी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को कहना चाहूंगा कि अपने लक्ष्य पर ध्यान देवें कंसंट्रेट होकर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करें तो सफलता उन्हें जरूर मिलेगी। हेमंत जायसवाल (मेडिकल छात्र)

छत्तीसगढ़ कलार महासभा के महाअध्यक्ष विजय जायसवाल के नेतृत्व में निरन्तर आगे बढ़ रहा कलार समाज

रायगढ़:- छत्तीसगढ़ कलार महासभा के महाअध्यक्ष विजय जायसवाल के नेतृत्व में निरन्तर कलार समाज आगे बढ़ रहा है। यू कहे तो विजय जायसवाल कलार समाज में उस धागे के समान है जो एक माला सभी मोती को सजो के रखते हैं। 14 मार्च को हुए कलार महोत्सव एवं सम्मान समारोह का आयोजन सिद्धेश्वर नाथ धाम बरगढ़ में भव्य रूप से हुआ हुआ इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री उमेश पटेल एवं आसपास के क्षेत्रीय विधायक कार्यक्रम में शामिल हुए इस कार्यक्रम में विजय जायसवाल का विशेष योगदान रहा। आपको बता दें कि कलार समाज एक वक्त ऐसा था जिसमें तमाम सामाजिक कुरीतियां पनप रहे थे मगर विजय जायसवाल द्वारा महा अध्यक्ष बनने के बाद सभी सामाजिक कुरीतियों पर लगाम लगाते हुए समाज को एक नई दिशा की ओर ले जा रहे हैं। वर्तमान की बात की जाए तो बरगढ़ में कलार समाज द्वारा भव्य भगवान सहस्त्रबाहु का मंदिर स्थापित हो रहा है, वहीं समाज की गतिविधि को जन जन तक पहुंचाने के लिए कलार महासभा का मोबाइल एप भी लॉन्च हो चुका है। वहीं विजय जायसवाल का कहना है कि समाज को आगे ले जाने के लिए हर वर्ग के लोगों की सहयोग जरूरी है तभी समाज आगे बढ़ पाएगा साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि समाज के बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद के बगैर कुछ भी संभव नहीं है।

"बस इतना साथ देना तुम"- महिला दिवस विशेष

जब कभी मैं गिर जाऊँ तो मुझे सहारा मत देना, मेरे खुले पंखो को यूँ ही छोड़ देना, अपेक्षाओं की बाण से ज़ख़्मी ना कर देना तुम, दूर खड़े रहना मेरा हौसला बड़ा देना तुम।।।एक बस इतना साथ देना तुम.... वो जो ममता के आँचल में छुपाया था तुमको, जिसकी छांव में लोरी गाकर सुलाया था तुमको, मेरे संस्कार को नीचा ना दिखाना तुम, हारकर मौत को गले ना लगाना तुम।।।एक बस इतना साथ देना तुम... मेरी सूरत नहीं सीरत देखो, मेरी ना को सिर्फ़ ना देखो, प्रेमिका हूँ इश्क़ की कसक देखो, तेज़ाब डालकर या बलात्कार कर अपने पुरुषार्थ को ना खोना तुम।। एक बस इतना साथ देना तुम.... है राखी की क़सम तुमको, वो रोली की सौगंध तुमको,है बहन का आशीर्वाद तुमको, किसी का दिल ना तोड़ना तुम।।।एक बस इतना साथ देना तुम.. साथी बनकर साथ निभाऊँगी तुम्हारा, टूट कर चाहूँगी, रखूँगी सदा मान तुम्हारा।।।ऊँची आवाज़, लहराते हाथ, अभद्र शब्दों में अपने वजूद को ना खोना तुम।।। एक बस इतना साथ देना तुम.... लक्ष्मी रूप में आऊँगी, सरस्वती रूप में बढ़ती जाऊँगी, तुम जनक की तरह विदा करना मैं सीता की तरह देहरी छोड़ चली जाऊँगी, पर कोख में ही ना मसलना तुम।।। एक बस इतना साथ देना तुम..... ...कामायनी...

नरवा घुरवा गरुवा बारी कितनी होगी सार्थक पहल सरकारी,

 धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान बतौर धरा का सम्मान है जिसकी संपूर्ण जीवन शैली खेत खलिहान नदिया तालाब कोला बारी और गाय भैंस बैल पशु धन के रुप मे है किन्तु कटु सत्य यह है कि बदलते समय के साथ राज्य के पहचान की भरपूर उपेक्षा हुई, बेरोजगारी से कभी अंजान यह राज्य आज इन्ही आयामों की उपेक्षा की वजह से खाली हाथ और मुंह ताकता नजर आ रहा है रोजगार के नाम पर महज सरकारी नौकरी एवं उद्योगों की मोहताज बन चुके छत्तीसगढ़ मे युवाओं को छलावा के सिवाय कुछ नही मिल रहा है और धीरे धीरे यह परिस्थिति यहां की नियति बनती जा रही है ऐसी बात नही है कि इस दिशा मे प्रयास नही हुए है किन्तु यह प्रयास इस शैली मे रही कि बचा खुचा लगाव भी खत्म हो गया,
 
मुआवजा और मुनाफाखोरी
 खेती के उन्नयन के नाम पर अब तक केवल मुआवजे एवं खैरात का ही प्रावधान बना है कभी भी कृषि को वैश्विक पटल पर सम्मान जनक स्थान दिलाने की कोशिश नही हुई  जिसके चलते अधिक फसल हुई तो पानी के भाव उपज बिकने और कम फसल हुई तो अभाव का रोना आज भी बरकरार है उसी तरह प्रमुख पशुधन के लिए सरकार की नीति गायों के मौत की वजह बनती गयी और दर्दनाक कारण बनी गौसेवा मे भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति का चलन,
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समाज मे पड़ा दुष्प्रभाव 
सरकार की इस अव्यवस्थित नीति का प्रभाव समाज पर भी पड़ा क्योंकि इन कार्यों मे लगे हुए लोगों का अपना प्रभामंडल था और जैसे कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता मे कहा है कि प्रभावशाली का अनुकरण समाज करता है बस उसी तर्ज पर कृषि और गाय उपेक्षित होती गयी तथा ऐनकेन प्रकारेण धन प्राप्ति की अभिलाषा बलवती होती गयी तथा गायों की दुर्दशा पर दुख व्यक्त करने का भाव भी लोपित होता गया, अभी कुछ समय पूर्व भाटापारा के ग्राम कोदवा गौशाला मे लगभग 185गायों की मौत मे भाटापारा जैसे धार्मिक आयोजनों के शहर मे गहन चुप्पी इसका ज्वलंत उदाहरण है
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सरकार पर उठते सवाल
 भाटापारा क्षेत्र मे हुई गायों की मौत का दर्दनाक हादसा एक तरह से छत्तीसगढ़ की ग्राम्य विथा को गहरा आघात पहुँचाने वाली घटना है उस पर सभी की चुप्पी तथा सरकार की इस दिशा मे उदासीनता सीधे तौर पर सरकार की भावी योजनाओं पर सवाल खड़ा करती है कि छत्तीसगढ़ की पहचान कहे जाने वाले नरवा घुरवा गरुवा बारी जैसी मर्म भरी योजनाओं के साथ सरकार कितना न्याय कर पायेगी जबकि माहौल सीधे इसके उलट है|, बजट की समीक्षा के दौर मे कडार के किसान संतोष सेन जैसे कई लोगों द्वारा इसी तरह का सवाल उठाया गया कि क्रियान्वयन मे कितनी सुचिता बरती जाएगी जिसका सीधा तौर पर यही मतलब है कि पूर्व मे इस तरह की योजनाओं का बुरा हश्र क्रियान्वयन मे खामी और पारदर्शिता के अभाव के चलते हुआ था इसी कड़ी मे जनमानस की पुनः मांग है | कि इस दिशा मे गंभीरता एवं पर्याप्त संवेदना की आवश्यकता है और कोदवा जैसी घटनाओं मे शिथिलता एक तरह से उन्ही हौसलों को बुलंद करेगी जो इसमे सेवा नही महज लाभ देखतें है और उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते है भले ही उस विधा की दुर्गति हो जाये, इसलिए इस पर लगाम कसने ऐसी घटनाओं पर त्वरित तत्परता एवं कठोर कार्यवाही की दरकार है जिससे समाज मे यह संदेश जाए की छत्तीसगढ़ की अस्मिता कितनी अहम है वरन इसके अभाव मे योजनाओं का खेल चलता रहेगा और ढाक के तीन पात की दशा बरकरार रहेगी|

स्थानीयता पर उपेक्षा पूर्ण रवैया बरत रहीं सीमेंट फैक्ट्रियां

भाटापारा  दिनों दिन कृषि का घटता रकबा लाभकारी व्यवसाय के रुप मे चूकती खेती आज भी छत्तीसगढ़ मे बहुसंख्य आबादी की जीविका का आधार है छत्तीसगढ़ ही एक ऐसा राज्य है जहां निम्न से निम्न आर्थिक स्थिति वालों के पास भी थोड़ी न थोड़ी जमीन है इसीलिए आर्थिक मर्म के जानकार मानते है कि यदि इस राज्य मे खेती के लिए ठोस कवायद की जाये तो छत्तीसगढ़ के दिन बहुरते देर नहीं लगेगी किन्तु दुर्भाग्य इस राज्य मे कृषि मसले पर मुआवजे और खैरात से आगे बात नही बढ़ती और यही कमजोर कड़ी धीरे धीरे कृषि को निगलने का कारक साबित हो रही है पैसे पर टिकी राज्य की कृषि अवधारणा का भरपूर लाभ उठाते हुए उद्योग मनमाने पैसे का लालच देते हुए तेजी से कृषि भूमि हडप रहीं है और व्यवस्था मूकदर्शक बनी हुई एक तरह से उद्योगों के हौसलाअफजाई का ही कार्य कर रहीं है
 नही बख्शे जा रहे उर्वरा भूमि
भाटापारा बलौदा बाजार जिले मे लगभग आधा दर्जन सीमेन्ट फैक्ट्रियां संचालित है जो अधिकतर बलौदा क्षेत्र मे स्थापित हैं गांव वालों से रुबरु होने पर वहां की पीड़ा स्पष्ट रुप से झलकती है और यह पीड़ा उर्वरा भूमि भी सीमेंट संयंत्रों मे कुर्बान होने एवं जमीन जाने के बाद भी ढंग से मुआवजा नही मिलने एवं रोजगार नहीं मिलने के रुप मे नजर आती है, क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि अर्थाभाव के चलते बहुत सारे किसान अपनी नहर अपासी की उर्वरा भूमि को बेचने के लिए मजबूर हुए और संयंत्रों का वादा था कि परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा किन्तु आज पर्यन्त संयत्र इस मसले पर पूरी तरह खरा नही उतर पायी है आये दिन विरोध प्रदर्शन के बाद भी उद्योगों की गतिविधियों मे कोई बदलाव नही और बकायदा बाहर से कामगार लाकर धडल्ले से स्थानीयता की धज्जियां उड़ाई जा रही है
सतत संवेदना का अभाव
चुनाव के समय गरीब मजदूर किसान की स्तुति एवं उनकी पीड़ा मे जमकर साहनुभूति का इजहार करते हुए तरह तरह की सब्जबाग दिखाने वाले राजनैतिक दलों के प्रति आक्रोश अभिव्यक्ति करते हुए जनमानस का यही कहना है कि यह संवेदना सतत क्यों नही रहती क्यों चुनावों के बाद यह भावना बिसरा दी जाती है और उद्योगों को मनमानी की खुली छुट दे दी जाती है जिसके चलते आज राज्य की किसानी दिनों दिन हाथ से फिसलती हुई लोगों को बेरोजगार करती हुई बाहर राज्यों मे काम ढूंढने को मजबूर कर रही है,वर्ष दर वर्ष बढ़ रहे पलायन के आंकड़े खेती छिनने एवं रोजगार नही मिलने की  कहानी कह रहें है,
 क्रांति सेना से उठती आवाज
 संपन्न हुए विधानसभा सभा चुनाव मे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भ्रष्टाचार व्यवस्था गत विकास एवं आउटसोर्सिंग जैसे कुछ अहम जन संवेदना के मुद्दों को लेकर चुनाव मे उतरी जिसे जनता ने हाथों हाथ लिया और भारी बहुमत से विजयी बनाया, अब उन वादों को पूरा करने की बारी है जिस पर सरकार की गतिविधि प्रतिबद्धता की भी नजर आ रही है किन्तु स्थानीयता के मुद्दे पर किसी भी शुरुवात की भनक नही लगने पर जनता के बीच सवालों का दौर शुरू हो रहा है जिसकी संवेदना महसूस कर स्थानीय भावनाओं की प्रखर पैरोकार संगठन छत्तीसगढिया क्रांति सेना मे हलचल शुरू होती जान पड़ रही है और अंदाजा लगाया जा रहा है कि क्रांति सेना जनभावनाओ की मांग कृषि योग्य भूमि का संरक्षण एवं स्थानीय लोगों को रोजगार तथा जिनकी भूमि उद्योगों द्वारा ली गयी है उन्हें पर्याप्त मुआवजा और रोजगार जैसे मसले पर जनता की आवाज बन कर व्यवस्था तक यह पीड़ा पहुँचाएगी, अब देखना यही है कि आगे आगे क्या होता है वैसे नयी सरकार की सक्रियता के आधार पर जनमानस मे आशाएँ अपार है

भाटापारा में मोहल्ले से लेकर कालोनियों तक अपराधों की धमक

हवा चलती है तो वह जैसी फिजा होती है वैसा महक बिखेरती है बाग के पास चलती हुई हवा गर खुशबू का माहौल बनाती है तो सडांध के पास से गुजरी हवा बदबू का कारक बनती है कुछ ऐसा ही वातावरण अभी व्यवस्था मे नजर आ रहा है जहां कानून व्यवस्था की शिथिलता भाटापारा मे एक तरह से अपराधों की दुर्गन्ध बिखेर रही है और जनमानस हलाकान सा हुआ इससे निजात की बाट जोह रहा है _________________________ अपराध दर अपराध की कड़ी सामान्यतः शांत क्षेत्र मे गिनती होने वाले शहर मे कुछ वर्षों से अपराध मे बढोत्तरी का नजारा देखने मे आ रहा है और निरंतर घट रहे विविध अपराधों मे आम जन से लेकर प्रभावशाली तबका तथा मोहल्ले से लेकर कालोनियों तक अपराधों की धमक दिखाई दे रही है जिससे सारा शहर एक तरह से अपराधिक पीड़ा से परेशान नजर आ रहा है नित नयी घटती अपराधिक घटनाओं मे चोरी मारपीट हत्या जैसे जघन्य अपराधों के अलावा अपहरण जैसी घटनाओं के घटने से एक तरह से क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर सवाल उठना शुरू हो गया है कि जिस हौसले से अपराधी अपराध की विविधताओं को अंजाम दे रहे हैं उतनी ही उदासीनता से प्रशासन यह नजारा देखने को क्यों मजबूर है _________________________ चूकती व्यवस्था बढ़ती व्यथा जुआ सट्टा अवैध शराब की बिक्री जैसे घातक असमाजिक आचरण क्षेत्र मे घटने के बजाय निरंतर प्रगति पर हैं और यदाकदा इस पर कड़ाई के अलावा इसके उन्मूलन के लिए अब तक ठोस कदम नही उठाया जाना जिसके चलते इससे जुड़े पूरक अपराधों को एक तरह से संरक्षण प्राप्त हो रहा है वहीं यह अपराधियों के लिए हौसले का कारक साबित होते हुए दुस्साहसिक अपराधों को अंजाम देने की पृष्ठभूमि बन रहें है विधायक के गाड़ी को लूटने एवं कृष्णा सिटी जैसे पाॅश कालोनी जहां जज एवं बड़े बड़े प्रशासनिक अधिकारियों का निवास स्थान है वहां भी चोरी की घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है और यह पुष्टि है कि किस तरह अपराधियों के हौसले बुलंद है और व्यवस्था किस हद तक चुकी हुई तथा लाचार नजर आ रही है _________________________ नयी सरकार आशाएं अपार ढांचागत विकास मे कीर्तिमान बना चुकी पूर्ववर्ती सरकार के संबंध मे जनमानस का कथन है कि उनका विकास एक पक्षीय था जिसके तहत महज ढांचा निर्माण को तवज्जों दी गयी और व्यवस्था गत विकास की भरपूर उपेक्षा हुई जिसके चलते अस्पताल स्कूल अन्य सुविधाओं के ढांचों का भरपूर निर्माण हुआ किन्तु वहां व्यवस्था सुचारु नही हो पायी और इस नीति का दंश भाटापारा को भी झेलना पड़ा सुविधा विहिन अस्पताल और अभाव ग्रस्त विद्यालय इसका ज्वलंत उदाहरण है इस व्यवस्था विहिन विकास की हवा चहुंओर अव्यवस्था की फिजा का निर्माण कर गयी कानून व्यवस्था की लचरता भी इसी व्यवस्था हीनता का प्रतीक है चूँकि नयी सरकार का गठन भी भ्रष्टाचार और व्यवस्था के मुद्दे पर हुआ है और इस विधा मे उनकी बड़ी बड़ी घोषणाएं भी है जिसके चलते जनमानस को आस है कि अब संपूर्ण विकास का दर्शन होगा और व्यवस्था मे कसावट के दर्शन होंगे अब देखना यही है कि भाटापारा समेत संपूर्ण राज्य की व्यवस्था गत फिजा बदलेगी या समस्या वहीं खड़ी रह जाएगी

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- परम धर्म संसद में ऐलान - 21 फरवरी से शुरू होगा राम मंदिर का निर्माण, 4 शिलाएं ले जाएंगे अयोध्या ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुई तीन दिवसीय परम धर्म संसद के आखिरी दिन राम मंदिर निमार्ण के शिलान्यास पूजन का धर्मादेश जारी किया गया। परम धर्म संसद के सभी सांसदों, साधु, सन्त, महात्माओं ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 21 फरवरी से राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा तथा 4 शिलाएं लेकर साधु-संत अयोध्या जाएंगे। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि व क्रांतिकारी सन्त दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा - मंदिर तोड़ने वाली सरकार राम मंदिर का निर्माण नहीं करा सकती है। इसलिए हम 21 फरवरी को अयोध्या में भगवान राम के भव्य राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे। बसंत पंचमी (10 फरवरी 2019) के बाद संत प्रयागराज से अयोध्या के लिए कूच करेंगे।  शंकराचार्य महाराज ने कहा कि मंदिर बनाने में समय लगता है , लेकिन अगर प्रारम्भ नहीं होगा तो कभी नहीं होगा।  धर्म संसद में संतों ने कहा - "हम कोर्ट और और प्रधानमंत्री का सम्मान करते हैं। हम चार शिलाएं लेकर आयोध्या जाएंगे"। संतों ने यह भी कहा कि शंकराचार्य महाराज हमारे नेता है और उन्हीं का नेतृत्व हमें स्वीकार है। स्वामीश्री ने कहा कि जिस तरह सिखों के गुरु गोविंद सिंह ने देश के करोड़ों हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना बलिदान दिया था, ठीक उसी तरह महाराजश्री जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सबसे आगे चलते हुए नेतृत्व करेंगे।  स्वामीश्री ने आगे कहा कि हम किसी कानून का उलंघन नहीं कर रहे हैं। चार लोग चलने से कोई कानून नहीं टूटता। जिस तरह अंग्रेजों के नमक का कानून को तोड़ने के लिए दांडी मार्च किया गया था, ठीक उसी तरह शंकराचार्य महाराज ने रास्ता दिखाया है। हम भगवान राम के मार सहेंगे, क्योंकि वह भगवान का प्रसाद होगा।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::-  इंजी. शैलेन्द्र शुक्ला छग पाॅवर कंपनीज के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किये।  ????विद्युत विकास के मामले में छत्तीसगढ़ को अग्रणी रखना होगी मेरी प्राथमिकता - शैलेन्द्र शुक्ला।।

इंजी. शैलेन्द्र कुमार शुक्ला को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया जिसका आदेश 28 जनवरी 2019 को देर शाम जारी हुआ। सोलर मैन के रूप के ख्याति प्राप्त वरिष्ठ अभियंता शैलेन्द्र शुक्ल आज 29 जनवरी 2019 को पूर्वान्ह अपना पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के पश्चात सोलर मैन शैलेन्द्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी की मंषानुरूप ‘‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘‘ को बिजली के बूते साकार करना और राज्य शासन के रीति नीति के अनुरूप विद्युत विकास के मामले में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाये रखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। नई पदस्थापना के पूर्व इंजी. शैलेन्द्र शुक्ला हरियाणा राज्य नवीकरण ऊर्जा एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नवनियुक्त अध्यक्ष इंजी. शुक्ला को आज विद्युत सेवा भवन में पाॅवर कंपनीज के प्रबंध निदेषक श्रीमती तृप्ति सिन्हा, के.आर.सी. मूर्ति सहित डाॅयरेक्टर जी.सी. मुखर्जी, एच.आर.नरवरे, ओ.सी.कपिला, अजय दुबे, महाप्रबंधक एम.जेड. रहमान एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी तथा विभिन्न श्रमिक संघ-संगठनों के प्रतिनिधियों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दिए। विदित हो कि 05 फरवरी 1960 को बिलासपुर में श्री हरिभूषण शुक्ला के परिवार में सोलर मैन शैलेन्द्र शुक्ला का जन्म हुआ। आपने स्कूली शिक्षा के साथ ही ग्यारहवीं की परीक्षा बिलासपुर से उत्र्तीण करने के उपरांत इंजीनियरिंग कालेज जबलपुर से बी.ई.(गोल्ड मेडलिस्ट) की उपाधि प्राप्त की है। शैलेन्द्र शुक्ल बीते 37 वर्ष के अपने सेवाकाल में वल्लभ भवन भोपाल में ओ.एस.डी. के पद सहित जबलपुर, जगदलपुर, रीवा, सतना में विभिन्न पदों पर तथा छत्तसीगढ़ गठनोपरांत मंत्रालय में ओ.एस.डी. के पद पर  अपनी सफलतम सेवायें दी है। शैलेन्द्र शुक्ला राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के डायरेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर 16 वर्षों तक सेवायें दी है और उनके उत्कृष्ट सेवा , निष्ठा और कार्यकुशलता के आधार पर शैलेन्द्र शुक्ल को छत्तीसगढ़ के सोलर मैन के रूप में ख्याति मिली। शैलेन्द्र शुक्ल न केवल छत्तीसगढ़ अपितु समूचे भारत वर्ष में सोलर पावर के ऊपर किये गए उत्कृष्ट कार्यों हेतु पहचाने जाने लगे। क्रेडा में रहते हुए उनके योगदान, कार्यकुशलता के आधार पर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये। रायपुर में निर्मित विषालकाय ऊर्जा पार्क में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। उनके कार्य के प्रति निष्ठा एवं लगन के बूते आगे बढ़ते हुये हरियाणा में दो वर्षों तक हेरेडा के अध्यक्ष पद पर सोलर मैन शैलेन्द्र शुक्ला ने अपनी सेवाएं दी है।
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