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राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु आवेदन करने के लिए छत्तीसगढ़ के युवाओं हेतु ज़िन-एड्यू ने रायपुर में शुरू किया अपनी तरह का पहला हाइब्रिड ऑफ़लाइन व ऑनलाइन कोचिंग सेंटर ।

रायपुर, 25 अगस्त, 2021: भारत की अग्रणी एडटेक कंपनी, ज़िन-एड्यू ने आज हाइब्रिड कक्षाएँ (ऑफ़लाइन व ऑनलाइन दोनों) करानेवाले अपने तरह के पहले लर्निंग सेंटर को शुरू करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य रायपुर व पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के युवा विद्यार्थियों के लिए उच्चस्तरीय प्रौद्योगिकी वाले मंच मुहैया कराके किफ़ायती लर्निंग सॉल्यूशंस उपलब्ध कराना है। यह संस्थान रायपुर शहर के सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित धान्द परिसर में है और इसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा मंत्री, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने किया था। साथ ही इस अवसर पर रायपुर के मेयर, श्री एजाज़ ढेबर (आईएनसी), और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव व RERA के वर्तमान अध्यक्ष, श्री विवेक धान्द भी उपस्थित थे। रायपुर और छत्तीसगढ़ राज्य के युवा प्रतिभागी पहली बार किफ़ायती शुल्क पर कोटा और दिल्ली के सबसे अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे, जिसके चलते जेईई (मेन्स/एडवांस्ड), NEET, NTSE, KVPY व अन्य विज्ञान ओलंपियाड जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्य की ओर से सर्वश्रेष्ठ परिणाम आ सकेंगे। इस अवसर पर बोलते हुए ज़िन-एड्यू के सह-संस्थापक व निदेशक, प्रशांत शर्मा ने कहा कि, “हम पूरो तत्परता व तेज़ी के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, जो कि विशेष रूप से द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के उन युवा विद्यार्थियों तक श्रेष्ठतम सेवाएँ पहुँचाना है जिन्हें गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध नहीं है। हम केवल तभी सफल होंगे जब हमारे विद्यार्थी सफल होंगे। पिछले महीने रांची में एक केंद्र की सफल शुरुआत के बाद हमें रायपुर शहर में यह केंद्र शुरू करते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है। हमारे पास देश की श्रेष्ठतम फ़ैकल्टी उपलब्ध है, जिनके उचित मार्गदर्शन में हमारे विद्यार्थी खुद में बदलाव होते हुए देख सकेंगे।“ ज़िन-एड्यू के सभी प्रोग्राम, निर्धारित परिणाम देनेवाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर केन्द्रित हैं। इन अनुशासित, केन्द्रित, मार्गदर्शित प्रोग्राम्स के साथ अब विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं। ज़िन-एड्यू एक ऐसा माहौल तैयार करने में यकीन रखता है जिसमें शिक्षक, उनके समकक्ष, व अभिभावक एक स्वस्थ व प्रतियोगी परिवेश में शैक्षिक व मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने के साथ-साथ देश के सभी भौगोलिक क्षेत्रों से आनेवाले विद्यार्थियों को शिक्षा की सुविधा प्रदान करते हैं ताकि वे श्रेष्ठतम ऑनलाइन व ऑफ़लाइन संसाधनों के उपयोग द्वारा अपने करियर कर लक्ष्यों को हासिल कर सकें। रायपुर में प्रतियोगी परीक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए श्रेष्ठ सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध, आईआईटी व आईआईएम के पुरा-विद्यार्थियों की हमारी टीम श्रेष्ठतम प्रौद्योगिकी समर्थित किफ़ायती लर्निंग सॉल्यूशंस प्रदान करती है। हम भारत में आईआईटीजेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का परिदृश्य बदलने के प्रति प्रेरित हैं। हमारा लक्ष्य उन विद्यार्थियों की मदद करना है जो हाइब्रिड (ऑफ़लाइन व ऑनलाइन, दोनों) कक्षाओं के माध्यम से देश के दूर-दराज़ के इलाकों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में पहली बार हम नवीनतम व उच्चस्तरीय सुविधाओं वाली कक्षाओं से लैस केन्द्रों की शुरुआत कर रहे हैं जो कोटा और दिल्ली के श्रेष्ठ शिक्षकों का किफ़ायती दाम पर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे, और जेईई (मेन्स/एडवांस्ड) व नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्य की ओर से बेहतरीन परिणाम लेकर आएंगे।

ब्लाक कांग्रेस कमेटी पामगढ़ के द्वारा भारत रत्न स्व.राजीव गांधी जी के जयंती मनाई ।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी पामगढ़ के द्वारा विश्राम गृह पामगढ़ में स्वर्गीय भारत रत्न राजीव गांधी जी के 77 वीं जयंती को सद्भावना दिवस के रूप में मनाया गया इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ठाकुर नवल सिंह ने संगोष्ठी का संचालन करते हुए कहा कि आज ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा स्वर्गीय बहोरिक लाल सूर्यवंशी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को फल वितरण तथा वृक्षारोपण एवं संगोष्ठी के माध्यम से स्वर्गीय राजीव गांधी जी के जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला इस अवसर पर हमारे जांजगीर-चांपा लोकसभा के छाया सांसद रवि परसराम भारद्वाज ने कहा की राजीव गांधी जी हमेशा लोगों के कल्याण के बारे में सोचते थे उन्होंने हमारे देश में बहुत से ऐसे परियोजना लाए जिसे आज भारत आत्मनिर्भर बन रहा है राजीव जी को सूचना क्रांति के जनक कहां जाता है मनोज खरे ने कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी जी आधुनिक भारत के दूर देश तथा हरित क्रांति के जनक तथा युवाओं के प्रेरणा स्रोत जिनके द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को विकेंद्रीकरण करते हुए पर पंचायत को बनाने की सपना उन्होंने देखा था उन्होंने 18 साल के युवाओं को मताधिकार का भी अधिकार दिया घासी राम चौहान ने कहा कि भारत रत्न स्वर्गीय राजीव गांधी जिन्होंने हमेशा अंतिम व्यक्ति को उत्थान के बारे में सोचा उन्होंने कहा कि आज राजीव गांधी जी के सपनों को साकार छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी कर रहे हैं उनके द्वारा राजीव गांधी न्याय योजना के तहत छग के किसानों को 10000 प्रति एकड़ के हिसाब से फायदा पहुंचा रहे हैं उसी प्रकार राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर नया योजना के तहत प्रतिवर्ष ₹6000 की दिया जा रहा है सरोज सारथी ने कहा कि स्वर्गीय राजीव गांधी जी स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले श्री गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे और जैसा कि वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता को बनाये रखने के उद्देश्य के अलावा उनके अन्य प्रमुख उद्देश्यों में से एक है – इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण। संगोष्ठी का आभार प्रदर्शन दिनेश थावाईत ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के द्वारा किया गया अजय दिव्य ललित नायक देव खोटेल के बी यादव राधेश्याम नोर्गे हृदय अंनत शत्रुहन यादव शकुंतला यादव सन्नी यादव अजय वर्मा घनश्याम प्रसाद साहू योगेश्वर सिंह ठाकुर रामायण पटेल सुरेंद्र यादव दिनेश खरे श्रवण कश्यप नीलसिंह सिंह यादव रमेश खरे किशोर सिंह राघवेंद्र योगेश बघेल जय कुमार साहू लखेश्वर साहू संजय गंधर्व दीना कश्यप सुनील कश्यप रमेश कश्यप कमलेश कश्यप मुकेश केवट मजनू कश्यप नरेश कश्यप राम कुमार जयसवाल रुपेश कश्यप मनीष रजक भागवत केवट चितरंजन कश्यप सूरज धिवर राम कुमार कश्यप मुकेश कश्यप उपस्थित रहे

अब इस नाम से जाना जायेगा बलौदाबाजार मुख्यमार्ग पढ़े पूरी जानकारी ।

*विकासपुरोधा पूर्व विधायक बंशराज तिवारी के नाम से जाना जायेगा बलौदाबाजार मुख्यमार्ग* *नगर के मुख्य मार्ग मे लगेगी पंडित बंशराज तिवारी की मूर्ति* बलौदाबाजार। विधानसभा के विकास मे अमिट छाप छोडने वाले विकासपुरोधा पूर्व विधायक स्व पंडित बंशराज तिवारी की मूर्ति नगर के मुख्य मार्ग मे स्थापित हो रही है। जिसके बाद से यह मार्ग पंडित बंशराज तिवारी मुख्य मार्ग के नाम से जाना जायेगा। मुर्ति का अनावरण बलौदाबाजार भाटापारा जिले के निर्माता एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डा रमनसिह द्वारा संपन्न होगा। बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के विकास मे अमिट छाप छोडने वाले बलौदाबाजार के पूर्व विधायक विकासपुरोधा स्व पंडित बंशराज तिवारी के योगदान को जीवंत रखने के उददेश्य से जिले के मुख्यमार्ग का नाम उनके नाम पर करने का निर्णय लिया गया है इसके साथ ही उनकी मूर्ति भी स्थापित की जा रही है ताकि जिले वासी उनके द्वारा समाजसेवा मे किये गये कार्यो को याद करे एव उनके बताये मार्ग पर चलकर बलौदाबाजार जिले को विकास की दिशा मे अग्रसर कर सके । पंडित बंशराज तिवारी का जन्म बलौदाबाजार के तात्कालिन पटेल सेनी टेशन पंचायत के अध्यक्ष एवं मुकादम पंडित महावीर प्रसाद तिवारी के पुत्र रूप मे 6 मई 1925 को हुआ। बाल्यावस्था मे ही पिता के स्वर्गारोहण उपरांत बंशराज जी अल्पायु मे ही पटेल के रूप मे पदस्थ हो गये । महात्मा गाँधी जी के प्रेरणा से 1940 मे पटेल पद से इस्तीफा देकर स्वतंत्रता आंदोलन मे सक्रिय भूमिका निभाई । सन 1946 मे बंशराज जी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे । विधि स्नातक उर्तीण बंशराज जी ने बलौदाबाजार में वकालत प्रारंभ की । वकालत के साथ ही साथ राजनीति मे भी सक्रिय होने लगे और इस दौरान उन्होने असहाय लोगो की मदद करना प्रारंभ कर दिया । बार कौंसिल बलौदाबाजार मे सचिव रहते हुए उन्होने पृथक छत्तीसगढ राज्य एवं बलौदाबाजार को जिला बनाने मे अपनी आवाज मुखर की । आपातकाल के दौरान बंशराज जी ने अपने साथियो सहित तात्कालिन दमनकारी सरकार के विरूद्ध जुलुस निकाला जिस पर उन्हे गिरफतार कर लिया गया और उनपर राजद्रोह का मामला चला। समाजवादी नेता मधु लिमये , जार्ज फर्नाडीज आदि के साथ सेंट्रल जेल रायपुर मे रहे । सन 1977 मे आपातकाल समाप्त होने के बाद जब देश मे जनतापार्टी की सरकार बनी तब वे बलौदाबाजार विधानसभा के विधायक निर्वाचित हुए और सन 1977 से 1980 के बीच विधायक रहते हुए उन्होने क्षेत्र के विकास के लिए अप्रत्याशित कार्य किये । जिसमे बलौदाबाजार नगर को पानी की किल्लत से निजात दिलाने के लिए शिवनाथ नदी मे सोनाडीह से बलौदाबाजार नगर तक पाईप लाईन के द्वारा जलप्रदाय योजना के तहत पानी उपलब्ध कराया । बलौदाबाजार नगर को गांवो से जोडने के लिए सडको एवं पुल पुलियो का निर्माण खोरसीनाला पर बडे पुल का निर्माण , बलौदाबाजार न्यायालय मे अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय की स्थापना , क्षेत्र के एक मात्र निजी महाविधालय को शासन के आधीन कर सुविधाजनक बनाना , नगर मे टेलीफोन एक्सचेंज, डाकघर, पानी टंकी का निर्माण, शासकीय चिकित्सालय को बडे हास्पीटल का स्वरूप देना आदि कार्य प्रमुख रूप से शामिल रहे । सन 2001 मे पंडित बंशराज तिवारी द्वारा अपनी पत्नि श्रीमती चंदादेवी तिवारी के देहावसान के पश्चात उनकी याद मे चंदादेवी तिवारी हास्पीटल की स्थापना की गयी । जिसका संचालन क्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक डा प्रमोद तिवारी द्वारा कुशलता पूर्वक किया जा रहा है । 9 फरवरी सन 2006 को बंशराज तिवारी जी का स्वर्गारोहण हो गया उनकी याद मे चंदादेवी हास्पिटल द्वारा प्रत्येक वर्ष निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं आपरेशन किया जा रहा है जिसमे हजारो लोग लाभान्वित हो चुके है और यह शिलशिला निंरंतर जारी है । बंशराज जी की याद मे उनके पुत्र डा प्रमोद तिवारी द्वारा मुख्यमार्ग के चौड़ीकरण के लिए करोडो की जमीन शासन को दान दी गयी । जिसके बाद बलौदाबाजार मुख्यमार्ग पंडित बंशराज तिवारी के नाम से जाना जा रहा है । उनकी यादो को जीवंत बनाये रखने के उददेश्य से परिवारजनो द्वारा चौक मे उनकी मूर्ति की स्थापना की जा रही हैै जिसका अनावरण बलौदाबाजार भाटापारा जिले के निर्माता एवं पूर्व मुख्यमंत्री डा रमनसिह करेगे । कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल करेगे वही इस अवसर पर विशिष्ट अतिथी के रूप मे छग पाठयपुस्तक निगम के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री शैलेषनितिन त्रिवेदी, कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा, भाटापारा विधायक एवं भाजपा प्रवक्ता शिवरतन शर्मा, बलौदाबाजार विधायक प्रमोद शर्मा, जिलापंचायत के अध्यक्ष राकेश वर्मा, नगरपालिका के अध्यक्ष चितावर जायसवाल सहित जनप्रतिनिधी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेगे । इस अवसर पर एक्सट्रा आडिनरी क्लास वर्ल्ड स्कुल के नवीन भवन का शुभारंभ भी किया जा रहा है ।

आज 12 अगस्त विश्व हाथी दिवस पर विशेष आलेख -ज्ञानेंद्र पाण्डेय, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर

विश्व हाथी दिवस चित्रांकन: श्री प्रताप सिंह खोडियार आलेख ज्ञानेंद्र पाण्डेय, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर लेखक वर्तमान में पी एचडी चैंबर के छत्तीसगढ़ इकाई के रेजिडेंट ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं। ये विगत 4 वर्षों से महासमुंद जिले के जंगली हाथी प्रभावित क्षेत्रों में मानव हाथी द्वंद पर अध्ययन कर रहे हैं। रायपुर - प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को "विश्व हाथी दिवस" (World Elephant Day) के रूप में मनाया जाता है। हाथियों के लिए समर्पित यह खास दिन हाथियों के संरक्षण, गैर-कानूनी शिकार एवम तस्करी रोकने, हाथियों के बेहतर स्वास्थ्य और पुनर्वास के लिए जागरुकता प्रदान करने के लिए मनाया जाता है। "विश्व हाथी दिवस" का उद्देश्य प्राकृतिक रहवास में स्वच्छंद विचरण कर रहे हाथियों की संख्या, सुरक्षा एवम प्रबंधन के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है। विश्व हाथी दिवस की शुरुआत वर्ष 2011 में की गई थी परंतु आधिकारिक रूप से इसका शुभारंभ 12 अगस्त, 2012 को सिम्स और एलिफेंट की इंट्रोडक्शन फाउंडेशन ने किया था। आईयूसीएन (IUCN: International Union for Conservation of Nature) द्वारा खतरों के सूचकांक (रेड लिस्ट) में ‘अफ्रीकन’ एवं ‘एशियन हाथी’ को लुप्त प्राय वन्य जीवों की श्रेणी में रखा गया है। वर्तमान में देश के 14 राज्यों में लगभग 65000 वर्ग किलोमीटर में हाथियों के लिए 30 वन क्षेत्र सुरक्षित हैं। एशियाई हाथियों की वैश्विक आबादी का 60 प्रतिशत से अधिक भारत में है। परंतु हाल के वर्षों में जिस अनुपात से मानव हाथी संघर्ष की घटनाएं हुई हैं, वह अत्यंत चिंता का विषय है। हाथियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि वन विभाग, गैर सरकारी संस्थाएं एवम पर्यावरण प्रेमियों के समूह द्वारा संयुक्त रूप से जन जागरूकता तथा हाथियों के पुनर्वास के लिए सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

बलौदाबाजार की राजनीति के शिखर पुरुष रहे पंडित बंसराज तिवारी का अवतरण दिवस आज, जानिए बलौदा बाजार के विकास में उनके योगदान को और उनके जीवन के संघर्षों की कहानी .....

बलोदा बाजार -  बलौदा बाजार की राजनीति के इतिहास पुरुष रहे पंडित बंसराज तिवारी का अवतरण दिवस है। उनके समय में बलोदा बाजार साधन सुविधा विहीन हुआ करता था। उस समय वह विधायक निर्वाचित होकर बलोदा बाजार के लिए अविस्मरणीय योगदान देकर बलोदा बाजार को एक नए शिखर तक पहुंचाया । उन सुविधाओं को उपलब्ध करवाया जो बलोदा बाजार में नहीं थी। आज हम जानते हैं राजनीति के उस महापुरुष की जीवन गाथा। 

  पं. बंशराज तिवारी का जन्म बलौदाबाजार के तत्कालीन पटेल सेनी टेशन पंचायत के अध्यक्ष एवं मुकद्दम पं. महावीर प्रसाद तिवारी के पुत्र रूप मे 6 मई 1925 को हुआ था। बाल्यावस्था मे ही पिता के स्वर्गारोहण के उपरांत बंशराज जी अल्पायु मे ही पटेल के पद पर पदस्थ हुए।महात्मा गांधी जी की प्रेरणा से सन 1940मे पटेल पद से इस्तीफा देकर स्वतंत्रता आंदोलन मे सक्रिय भूमिका निभाई। सन 1946मे बंशराज जी कांग्रेस समाजवादी पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे। विधि स्नातक उत्तीर्ण बंशराज जी ने बलौदाबाजार मे वकालत प्रारंभ की। वकालत के साथ साथ राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हुए बंशराज जी ने असहाय और कमजोर लोंगो की भरपूर मदद की। बार कौंसिल बलौदाबाजार मे सचिव रहते हुए उन्होंने पृथक छत्तीसगढ राज्य एवं बलौदाबाजार को जिला बनाने के लिए अपनी आवाज मुखर की। आपातकाल के दौरान बंशराज जी ने अपने साथियों सहित बलौदाबाजार मे तत्कालीन दमनकारी सरकार के विरुद्ध जुलूस निकाला जिसके फलस्वरूप वह गिरफ्तार कर लिए गए और उन पर राजद्रोह का मामला चला।समाजवादी नेता मधु लिमये, जार्ज फर्नांडिस आदि के साथ सेंट्रल जेल रायपुर मे रहे। सन 1977 मे आपातकाल समाप्त होने के बाद जब देश मे जनता पार्टी की सरकार बनी तब बंशराज तिवारी जी बलौदाबाजार विधानसभा से विधायक निर्वाचित हुए और सन 1977 से 1980 के बीच विधायक रहते हुए उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए अप्रत्याशित कार्य किए जिसमे बलौदाबाजार नगर को पानी की किल्लत से निजात दिलाने के लिए शिवनाथ नदी मे सोनाडीह से बलौदाबाजार नगर तक पाईप लाईन के द्वारा जल प्रदाय योजना लाकर पानी उपलब्ध कराना, बलौदाबाजार नगर को गावों से जोड़ने के लिए सडको एवं पूल पूलियों का निर्माण, खोरसी नाला पर बडे पूल का निर्माण, बलौदाबाजार न्यायालय मे अतिरिक्त जिला सत्र न्यायालय की स्थापना, क्षेत्र के एकमात्र निजी महाविद्यालय को शासन के आधिन करके सुविधाजनक बनाना,नगर मे टेलीफोन एक्सचेंज, डाकघर, पानी टंकी का निर्माण, शासकीय अस्पताल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से बड़े अस्पताल का स्वरूप देना आदि कार्य प्रमुख रूप से शामिल रहे। सन 2001मे पं. बंशराज तिवारी द्वारा अपनी पत्नी श्रीमती चंदा देवी तिवारी के देहावसान के पश्चात उनकी याद मे चंदा देवी तिवारी हास्पिटल की स्थापना की गई जिसका संचालन क्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक प्रमोद तिवारी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। 9फरवरी 2006 को बंशराज तिवारी जी का स्वर्गारोहण हुआ और उनकी याद मे चंदा देवी तिवारी हास्पिटल बलौदाबाजार प्रत्येक वर्ष नि:शुल्क रोग निदान शिविर का आयोजन किया जाता रहा है जिसमे अभी तक हजारों जरूरत मंद लाभांवित हो चुके हैं।बंशराज जी की याद मे उनके पुत्र डा.प्रमोद तिवारी द्वारा मुख्य मार्ग बलौदाबाजार के चौड़ीकरण के लिए करोड़ों की जमीन शासन को दान की गई जिसके बाद बलौदाबाजार मुख्य मार्ग पं. बंशराज तिवारी के नाम से जाना जाता है

इस जिले के SDM ने किया शादी के आदेश को स्थगित, देखे आदेश

रायपुर:- पूरे प्रदेश में कोरोना संक्रमण का खतरा मंडराना शुरू हो चुका है इसे ही देखते हुए मुंगेली अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा संक्रमण के रोकथाम के लिए मुंगेली के विभिन्न जगहों को कंटेंटमेंन जोन घोषित कर शादी के लिए जारी आदेश की सूचना को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।

बच्चों ने रखा रोजा, कहा- अल्लाह की इबादत कर कोरोना दूर भगाना है

बैकुंठपुर- इस्लाम के पवित्र माह रमजान में पिछले साल की तरह लोग घरों में इबादत कर रहे हैं। रोजा रखने में छोटे बच्चे भी पीछे नहीं है। बच्चे न सिर्फ रोजा रख रहे हैं, बल्कि नमाज अता कर कोरोना से मुक्ति के लिए दुआ कर रहे हैं। पूरी दुनिया में कोरोना महामारी फैली हुई है। लोग भयभीत हैं और लॉकडाउन की वजह से घरों में कैद हैं। ऐसे में खुदा की इबादत कर बस यही दुआ है कि दुनिया कोरोना से मुक्त हो जाए। शनिवार को रमजान माह के चौथे दिन मुस्लिम समुदाय के लाेगाें ने सवेरे से रोजा रखकर भूखे प्यासे शाम को इफ्तार के समय रोजा खोला। इसके बाद रब का शुक्रिया अता किया। बता दें कि हर साल की तरह भीषण गर्मी में रमजान शुरू हुआ है। 38 डिग्री के तापमान व कोरोना वायरस के प्रकोप के बीच कई तरह की परेशानियां रोजेदारों हो रही हैं, लेकिन इससे वह डगमग नहीं हैं, अल्लाह के लिए सबकी आस्था दोगुनी हो गई है। मुस्लिम समुदाय के घर, मोहल्लों में रमजान को लेकर उत्साह दिख रहा है। राेजेदाराें सुबह जल्दी उठकर परिजनों के साथ सहरी कर रहे हैं, और दिनभर रोजे का पूरे नियम के साथ पालन कर रहे हैं। इसमें खासकर ऐसे बच्चे अधिक उत्साहित हैं जो अपने जीवन में पहली बार रोजा रख रहे हैं। चिरमिरी पोड़ी के रेयान अली, सुफियान सिद्धिकी, सहन अख्तर खान, सादिया अली, अयान सिद्धिकी, जुनेरा फातिमा बताते है कि रोजा रखकर काफी खुशी हो रही है। उनका कहना था कि निश्चित तौर पर इस रमजान महीने में की जाने वाली इबादत से कोरोना वायरस से छुटकारा मिलेगा। बच्चों ने कहा कि वे सजदा के साथ अल्लाह की इबादत कर रहे है। रोजा के दौरान अल्लाह से नेक दिल बनने और खूब शिक्षा अर्जित करने की दुआ मांग रहे है। जुम्मे पर घर से नमाज अता करने की अपील : बैकुंठपुर जामा मस्जिद के इमाम वाहिद अली ने बताया कि काेराेना के गाइडलाइन का पालन करते हुए रोजेदारों को घरों पर ही नमाज अता करना है। माहे रमजान की मुबारकबाद देते हुए कहा है कि इस बार इफ्तार में पड़ोस के जरूरतमंद लोगों की मदद भी करें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर लोग घरों पर ही परिवार के साथ रोजा इफ्तार करें। उन्हांेने कहा कि काेराेना संक्रमण काे देखते हुए घर पर ही नमाज अता करें।

BBN24 सेहत मंत्रा : सर्दियों में खाएं चना भाजी, स्वादिष्ट होने के साथ ही रोगों से लड़ने में है मददगार

रायपुर। बदलते मौसम के साथ खुद का ध्यान रखना भी काफी जरूरी है. वहीं, कोरोना की इस महामारी में सेहत का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है. सर्दियों का मौसम चल रहा है ऐसे में इस मौसम में लोग सेहत को लेकर काफी लापरवाही बरतते हैं. इस मौसम में सर्दी जुकाम होना आम बात है. साथ ही इस मौसम में मार्केट में कई तरह के साग-भाजी मिलने लगते हैं. यह स्वादिष्ट होने के साथ ही सेहत के लिए काफी अच्छा होता है. ऐसे में आज हम आपको सर्दियों में मिलने वाले चने की भाजी के बारे में बताने जा रहे हैं. चना भाजी में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. आइए जानते हैं इससे मिलने वाले फायदों के बारे में-

कब्ज की समस्या करे दूर- सर्दियों में चना भाजी का साग खाने से कब्ज की समस्या दूर होती है. चना भाजी के साग में प्रोटीन की मात्रा अधिक पाई जाती है. जो ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है.

वजन घटाने के लिए- इसमें कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है. ऐसे में अगर आप वजन घटाने के बारे में सोच रहे हैं तो चना भाजी का साग आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

रोगों से लड़ने में मददगार- चना भाजी का साग शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. इसके सेवन से आपको सर्दी-जुकाम, बुखार, इंफेक्शन आदि का खतरा नहीं रहता. साथ ही इसमें आयरन की मात्रा भी कााफी अधिक होती है.

प्रोटीन से भरपूर- इसमें प्रोटीन की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है. यह प्रोटीन का काफी अच्छा सोर्स है. ऐसे में शरीर में जब भी प्रोटीन की कमी हो तो इसे जरूर खाएं.

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से दो शिक्षक की सामने आई ऐसी तस्वीरें , पढ़े क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ कोरिया से सरवर अली की रिपोर्ट....

कुछ दिनों पहले कोरिया जिले में एक शिक्षक की ऐसा तस्वीर  हमने दिखाई थी  अशोक लौधी  शिक्षक सिनेमा वाले बाबू कहे जाने वाले... बाईक में LEDTV बांध कर पहुंच रहे जहा छात्र-छात्राओं के पास पहुंचकर शिक्षा दे रहे हैं 

अब छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले शिक्षक रुद्र मोटरसाइकिल में छतरी, घण्टी, ब्लैक बोर्ड और माईक के साथ हमेशा मौजूद...घण्टी की आवाज से दौड़े आते है बच्चें....शिक्षक मोटरसाइकिल में बांध के छाता रुद्र पहुचते है लेने मोहल्ला क्लास...रौजाना राष्ट गान के बाद यहाँ होती है पढ़ाई.... कोरोना काल मे बेहतर शिक्षा देने का बीड़ा उठाया रुद्र ने निजी खर्चो में बच्चों को दे रहे  शिक्षा...

आप को पता है की कोविड-19 कोरोना महामारी की वजह से स्कूल बंद हैं। इस वजह से छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से वर्चुअल क्लास, मोहल्ला क्लास और लाउडस्पीकर के माध्यम से पढ़ाई कराई जा रही है। सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए एक साथ सभी बच्चों को साथ बैठाना भी जोखिम भरा है। इसलिए शिक्षा विभाग की ओर से गांव - गांव चलाए रहे मोहल्ला क्लास सफल साबित हो रहे है। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी मदद से पढ़ाई का अच्छा माहौल तैयार हो रहा हैं जिसमें बच्चें भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते दिखाई दे रहे हैं ।

आज हम बात करेंगे एक और अजब गजब छतरी वाले शिक्षक की जो छत्तीसगढ़ कोरिया जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर कोरिया और पेंड्रा जिला के सरहदी इलाका या यूं कहें कि जिला कोरिया का वो अंतिम स्कूल जो ग्राम सकड़ा में प्राथमिक शाला सकड़ा के नाम से जाना जाता हैं। यहाँ के शिक्षक रुद्र प्रताप सिंह राणा अपनी मोटरसाइकिल में छतरी, एक सूटकेस में पुस्तकालय, माईक, घण्टी, ब्लैक बोर्ड लेकर बच्चों को पढ़ाने मोहल्ला क्लास में पहुचते हैं और प्राथमिक शाला सकड़ा के आसपास गुरच्वापारा, पटेल पारा, स्कूल पारा, बिही पारा, मुहारी पारा में मोहल्ला क्लास आयोजित कर बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। यहाँ हम आपको बता दे कि शिक्षक रुद्र प्रताप सिंह राणा रौजाना पेंड्रा मरवाही जिले के लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम प्रारासी से आना जाना करते हैं। 

छतरी वाले बाबू रुद्र प्रताप सिंह राणा शिक्षक जिस भी मोहल्लों में मोहल्ला क्लास लेने जाते है, तो सर्वप्रथम मोहल्ला पहुच कर अपनी मोटरसाइकिल को स्टैंड में खड़ा कर घण्टी बजाते है जिसे सुन कर मोहल्ला के सभी बच्चें कहीं भी रहे दौड़ते भागते अपने - अपने घरों के बाहर झज्जे में चटाई, स्कूल बैग लेकर मौहल्ला क्लास में शामिल होते है और फिर मोहल्ला क्लास शुरू करने से पहले अपनी - अपनी जगहों में खड़े हो कर राष्ट गान गया जाता है जिसके बाद पढ़ाई प्रारम्भ होती है। यह परिक्रिया रौजाना सभी मोहल्ला क्लास में अपनाई जाती है। छतरी वाले बाबू रुद्र प्रताप सिंह राणा गीतों के माध्यम से अपनी सूटकेस में रखे पुस्तको से बेहतर शिक्षा मुहैया कराने का प्रयास कर रहें है।

छतरी वाले बाबू रुद्र प्रताप सिंह राणा ने बताया कि जिस दिन से मोहल्ला क्लास शुरू हुई है उस दिन से बच्चे भी बड़ी उत्सुकता से इस क्लास में शामिल हो रहे हैं। सही मायने में यह मोहल्ला क्लास बच्चों को कोरोना से बचा रही है और कोरोनकाल में शिक्षा के नजदीक ला रही है। मेरा मोहल्ला क्लास गांव के लम्बी गलियों के बीचों बीच संचालित होता है जो चारों ओर से खुला है। बारिश हो या आंधी, बच्चे अपने घरों के बहार झज्जे के नीचे बैठ कर पढ़ते हैं और मैं छाते के नीचे खड़े हो कर पढ़ाता हु। यह छतरी मुझे धूप - बारिश से बचाता है और ग्रामीणों सहित बच्चों को मेरा यह अनोखा तरीका बेहद पसंद आता हैं।


जितेंद्र कुमार गुप्ता विकास खण्ड मॉनिटरिंग अधिकारी खड़गवां ने तारीफ करते हुए बताया कि नित नए नवाचार किए जाते है इनके द्वारा बच्चों के सामने एक आकर्षक शाला प्रस्तुत की जाती है। इनके द्वारा बेहतर पढ़ाई का एक बेहतर माहौल बनाया गया है। इस तरह के शिक्षा को देख कर अन्य और भी शिक्षक जरूर जागरूक होंगे ऐसा आशा मैं करता हु।

कुछ दिन पहले हमनें आपको सिनेमा वाले बाबू अशोक लोधी के बारे में बताया था जिन्होंने अपनी मोटरसाइकिल में LED TV बांध कर मोहल्ला क्लास में बच्चों को पढ़ाते दिखाया था।

कोरिया जिला मुख्यालय से सटे सलका संकुल क्षेत्र के ग्राम पंचायत सारा, गदबदी, रटन्गा, ढोड़ी बहरा, जलियांढांड में सिनेमा वाले बाबू यानी अशोक लौधी रौजाना सुबह अपनी मोटरसाइकिल में LED TV बांध कर बच्चों के पढ़ाई के लिए निकल जाते है और मौहल्ला - मौहल्ला जा कर घरों में एकत्र हुए ग्रामीण बच्चों को मोबाईल से वाई फाई कनेक्ट कर TV पर कार्टून, संगीत के माध्यम से पढ़ाई कराते है।सिनेमा वाले बाबू अशोक लौधी शासकीय प्राथमिक शाला फाटपानी के शिक्षक हैं जिन्होंने बताया कि मोटरसाइकिल चलित वाहन पर एलईडी टीवी बांधकर चौराहे-चौराहे एवं मोहल्ले में सिनेमा दिखा कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का एक छोटा सा प्रयास मेरे द्वारा किया जा रहा हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक शिक्षक की ऐसा तस्वीर,अशोक लौधी शिक्षक सिनेमा वाले बाबू कहे जाने वाले,बाईक में LEDTV बांध कर पहुंच रहे जहा छात्र-छात्राओं के पास

कोरिया से सरवर अली की रिपोर्ट

कोरिया:-छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक शिक्षक की ऐसा तस्वीर .... अशोक लौधी शिक्षक सिनेमा वाले बाबू कहे जाने वाले... बाईक में LEDTV बांध कर पहुंच रहे जहा छात्र-छात्राओं के पास पहुंचकर शिक्षा दे रहे हैं .. बच्चे इन्हें सिनेमा वालेे गुरु जी कहते हैं।

देश में कोरोना महामारी के दस्तक एवं खतरे को भांपते हुए शासन के द्वारा जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई, शहर, गांव, देश सब रूक से गए थे और कोरोना संक्रमण के बीच लंबे समय से स्कूलों की छुट्‌टी कर दी गई थी। बच्चे कई माह पढ़ाई से वंचित रहे। बच्चों की होने वाली पढ़ाई बाधित होते देखकर शिक्षा विभाग ने पढ़ई तुंहर दुआर नामक शिक्षा की शुरुआत की। अब शिक्षकों द्वारा प्रतिदिन छात्र-छात्राओं को मोहल्ला क्लास लगा कर शिक्षा दी जा रही है।

सुनने में जरूर यह थोड़ा अजीब लगा हो पर वाकई शिक्षक हो तो ऐसा, जिन्होंने कोरोना काल मे बच्चों को बेहतर शिक्षा उनके घरों मुहल्लों में देने की तरकीब क्या खूब निकाली है।

इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला मुख्यालय से सटे सलका संकुल क्षेत्र के ग्राम पंचायत सारा, गदबदी, रटन्गा, ढोड़ी बहरा, जलियांढांड में सिनेमा वाले बाबू यानी अशोक लौधी रौजाना सुबह अपनी मोटरसाइकिल में lED TV बांध कर बच्चों के पढ़ाई के लिए निकल जाते है और मौहल्ला - मौहल्ला जा कर घरों में एकत्र हुए ग्रामीण बच्चों को मोबाईल से वाई फाई कनेक्ट कर TV पर कार्टून, संगीत के माध्यम से पढ़ाई कराते है। सिनेमा वाले बाबू अशोक लौधी शासकीय प्राथमिक शाला फाटपानी के शिक्षक हैं जिन्होंने बताया कि मोटरसाइकिल चलित वाहन पर एलईडी टीवी बांधकर चौराहे-चौराहे एवं मोहल्ले में सिनेमा दिखा कर बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का एक छोटा सा प्रयास मेरे द्वारा किया जा रहा हैं। मुझे और मेरे इस गतिविधि को सिनेमा वाले बाबू के नाम से लोग अब पहचान मिलने लगी है। यह गतिविधि अब स्कूल तक ही सीमित नहीं है अपितु संकुल के अन्य स्कूल ग्राम पंचायत के मोहल्लों में जाकर बच्चों को वीडियो दिखा कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रहा हु और सिनेमा वाला बाबू एलईडी टीवी के द्वारा वीडियो दिखाकर 1 से 5 कक्षा के विभिन्न विषयों को वीडियो के माध्यम से दिखाने से बच्चों में उत्सुकता बढ़ गई। बच्चे बहुत ही मनोरंजक ढंग से विषय वस्तु को सीख रहे हैं। नियमित उपस्थित होकर विभिन्न गतिविधियों में भी भाग भी ले रहे है। मुझे खुशी हैं कि बच्चों को सिनेमा वाले बाबू का इंतजार समयानुसार रहता है वे मेरे आने का रास्ता देखते है जिससे मुझे काफी खुशी हैं।

आपको बता दे कि 5 माह से स्कूल बंद है और बच्चे पढ़ाई से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के लिए कई योजनाएं लागू कर रखी है। ऑनलाइन और वर्चुअल क्लास के साथ अब सरकार बिना स्कूल खोले ऑफलाइन क्लास लेने मोहल्ला क्लास का फैसला ली है। जो कोरिया में सही और सफल साबित होते दिखाई दे रही है।LED TV के माध्यम से पढ़ाई का बच्चों में खासा प्रभाव दिख रहा है। बच्चों को उनके मौहल्लों और घरों में पढ़ाई वो भी इस हाईटेक तरीके से बेहद पसंद आ रहा है। बच्चें किताबों के पाठ्यक्रम के साथ कार्टून के माध्यम से बेहतर शिक्षा ग्रहण कर रहें है जिनसे बच्चों में खुशी है।

शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक गांव मोहल्ला में संक्रमण के खतरे को देखते हुये सोशल डिस्टेंसिंग में कक्षा लगाई जा रही है। यह क्लास ब्लाक के लगभग स्कूलों में लगाई जा रही है। बच्चें कम जगह होने के वावजूद एकदूसरे से दूर बैठ कर चेहरे पर मास्क लगा पढ़ाई कर रहे है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ प्रमुख शिक्षा सचिव डॉ आलोक शुक्ला का कोरिया दौरा हुआ, उन्होंने भी सिनेमा वाले बाबू अशोक लौधी के इस कार्य की सराहना करते हुए जिला प्रशासन की भी तारीफ की थी। उन्होंने इस दौरान कहा कि कोरोना काल मे भी कोरिया में शिक्षा की रफ्तार कम नही हुई है शिक्षा के अलख जगाने वाले शिक्षक अलग - अलग पद्धति से शिक्षा दे रहे हैं। बच्चों को ऐसी विषम परिस्थिति में शिक्षा से जोड़कर रखे हैं इस दौरान अशोक लौधी शिक्षक की तारीफ करते नही थके जो बाइक में घुमघुमकर LED TV के माध्यम से मोहल्ले मोहल्ले में जाकर पढ़ाने का काम कर रहे हैं।

ये कोई कहानी नहीं बल्कि ऐसे जाबांज और हुनरमंद और खेल भावना से ओतप्रोत जवान की सच्ची गाथा है, जिन्होंने वनांचल के गरीब,वनवासी बच्चों को शून्य से शिखर पर पहुंचाने में अपना जीवन समर्पित कर दिया है

छात्तीसगढ़ पुलिस के (विशेष टास्क फ़ोर्स ) जवान मनोज प्रसाद। जो छत्तीसगढ़ के खेलजगत और मलखम्ब खेल के इतिहास को अमिट स्वर्ण अकक्षारों में लिख दिया है..

जगदलपुर:- नरायनपुर में मालखम्ब खेल शुरुआत करना आसान नही था।। जिन बच्चों को मलखम्ब खेल सिखाया गया वह सभी बच्चे *अबुझमाड़* ,के, दुर्गम,इलाके के रहने वाले है उन्हें मलखम्ब की *म* भी नही आता था ।। मगर इनकी ताकत को पहचान और उनको राष्ट्रीय स्तर में *गोल्ड* मेडलिस्ट खिलाड़ी बनाया।

मनोज प्रसाद ने अपने जीवन में सबसे ज्यादा रिक्स लिया है तो वह इन बच्चे के प्रतिभा को दुनिया तक पहुचाने में।। आज चार वर्षों से लगातार छुट्टीयो के दिन घर नही जाकर उनको सुबह और शाम बिना किसी लाभ के बच्चों को तैयार करना।। सप्ताह भर जंगलो में डयूटी के साथ ,लड़ कर बारिश ,तूफान, सड़ा हुआ खाना,हजारो पहाड़ियों को मापडाला ।। बाथरूम लैटरिंग साफ करना पड़ा सिर्फ कुछ वक्त ज्याद मिल जाये अभ्याश करने के लिए ।। सुबह 4 बजे उठना 10 किलो मीटर दिन भर में 8 से 10 बार अपने खिलाड़ियो को प्रशिक्षण देना उनके पास जाना उनकी कमियों को पूरा करना मल्लखम्ब खेल के बेहतरीन तरकीब शिखलाई देना। बर्थडे ना किसी प्रकार का पार्टी ना शादी ना त्योहार यहां तक कि कैम्प से बाहर नही निकलने देने से।। नारायणपुर की ही लड़की से शादी भी कर लिया ताकि फैमली रखने की अनुमति मिल जाये कुछ बिना सोचे समझे सिर्फ कैम्प से बाहर निकलने के लिए माँ बाप का सपनो को हमेसा के लीये दफन कर दिया।। ना ही किसी प्रकार का प्रशासनिक मदद के बिना 400 बालक और बलिकयो को मल्लखम्ब खेल सीखना बच्चों को , दिल्ली,मुम्बई,गुजरात,आंध्रप्रदेश,तमिलनाडु जैसे बड़े शहरों में प्रतियोगिता के लिए लेजाना और ओ भी रिज़र्वेशन करवा कर खाना, पीना,भी अपने हाथों से बनाकर खिलाया कपड़े ,लाते ,जूते ,पढ़ाई के साथ साथ आगे बढ़ाना फिर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे राज्यो के खिलाड़ियो को हरा कर स्वर्ण पदक जितना आसान नही था।। 5,6,7मार्च 2020 को 32वी राष्ट्रीय मलखम्ब प्रतियोगिता में 8 स्वर्ण 3 कास्य के साथ बिजय घोषित हुआ ।। इस कार्य मे रामकृष्ण मिशन आश्रम*पोर्टा केबिन देवगांव,असीम महाराज, हिमान्द्री महाराज ,आकाश जैन ,आर पी.मीरे ,उदय देशपांडेय ,सुजीत सेगड़े,* और लोगो ने आर्थिक मद्त किया।

आज भारत सरकार द्वारा इन बच्चों को 13लाख 20000 हजार का स्कोलर शिप मिल रहा है ।। उनका मकसद था कि इन बच्चों को खेल के माध्यम से *बीपीएड* एमपीएड जैसे डिग्री प्राप्त कर खेल जगत में फ्रोफेशर बनाना ताकि खेल में विकास हो।।

मगर आज वह जवान जंगलो में भटकने के लिए मजबूर है।। प्रशासनिक मदद का इन्तेजार में ।।जिला नारायणपुर को पूरे भारत मे एक पहचान दिलाया ।। नारायणपुर को एक नए मुकाम पर पहुचाया आज वह जवान जंगलो में भटकने को मजबूर है।।

सावधान : जोखिम भरा है गड्ढों में तब्दील ... अर्जुनी,लाफार्ज पहुच मार्ग

सुबोध थवाईत-BBN24NEWS

BBN_24-NEWS अकलतरा। अकलतरा जनपद पंचायत के ग्राम अर्जुनी में फ़ोरलेन सड़क से ग्राम बूटरा भवँर तंक बने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क में गड्ढे ही गड्ढे है यहां से गुजरने वाले लोगों को बरसात आते हु परेशानियों से झूझना पड़ता है अर्जुनी बाजार पारा से लाफार्ज पहुच मार्ग की सड़क तो बद बत्तर हो चुकी है ग्राम पंचायत द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था करने मुरुम,डस्ट डाला गया था उसके बाद भी कीचड़ का साम्राज्य स्थापित हो चूका है इस सड़क से प्रतिदिन सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियो का आना जाना लगा रहता है इसके साथ ही  गांव के ह्दय स्थल का सड़क जर्जर हालत में हो चूका है।सड़क किनारे निर्माण की करने की अतिआवश्यक है जिससे पानी ठहराव का समस्या से छुटकारा मिल सकता है।यह सड़क की समस्या लम्बे समय से बनी हुई है।अर्जुनी के ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने के समय क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा बड़े बड़े वादे किए जाते है परंतु चुनाव जीतने के बाद संस्याओ को नजरअंदाज कर दिया जाता है। जल्द ही सड़क की व्यवस्था सुधारने ग्रामीणों द्वारा मांग की गई है।

बोध घाट सिंचाई परियोजना : आदिवासियों में आक्रोश, इसके खिलाफ कर सकते हैं आंदोलन

रायपुर :  छत्तीसगढ़ का बहुउद्देशीय बोध घाट सिंचाई परियोजना के काम को आगे बढ़ने से पहले ही ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है। तकरीबन 22 हजार करोड़ की लागत वाली इस बहुचर्चित परियोजना से प्रदेश में सिंचाई और बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ किये जाने की योजना है। लेकिन इस विकास में एक वर्ग विशेष को अनदेखा किये जाने की बात सामने आ रही है। ये वो वर्ग है जिसने पेड़-पौधों-नदियों को परिवार का सदस्य माना और पर्यावरण को धरोहर की तरह संजोकर रखा। ये वर्ग हैं आदिवासी, जिनपर विस्थापन का खतरा मंडराने लगा है।

इंद्रावती नदी पर बनने वाली इस परियोजना को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रमुख और शांतिदूत डॉ. उदयभान सिंह चौहान​ ने जमीनी हकीकत जानने के लिए इस परियोजना से प्रभवित होने वाले बस्तर संभाग के सुदूर गांवों जंगलों में रह रहे आदिवासियों से बात की। उन्होनें इस सम्बन्ध में इससे होने वाले फायदे-नुकसान का अध्ययन किया। अपने दौरे को लेकर डॉ उदयभान ने BBN24 NEWS.com से कैलाश जयसवाल के प्रश्नो का खुलकर जवाब दिया। प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंशः-

BBN24 : डॉ साहब बोधघाट परियोजना कि जमीनी हकीकत क्या है?

डॉ. उदयभानः मैंने जब बस्तर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष व विधायक लाखेश्वर बघेल, सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविन्द नेताम, बस्तर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी और सर्व आदिवासी समाज के अन्य सदस्यों से इस सम्बन्ध में बात की। उनका जवाब यही मिला कि जब तक व्यवस्थापन की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी तब तक बोध घाट परियोजना का सुचारु होना संभव नहीं है। दूसरी बात ये निकल कर आई कि इस परियोजना से जो गांव प्रभावित होगा उन ग्रामवासियों कि राय लेना आवश्यक है। जब तक प्रभावित होने वाले ग्रामवासी नहीं चाहेंगे तब तक ये आसान नहीं होगा।

BBN24 : इस परियोजना के सम्बन्ध में प्रभावित होने वाले स्थानीय लोगों और सरकार के बीच कोई बात हुई?
डॉ. उदयभानः जब मेरी बात मनीष कुंजाम (Ex MLA, CPI) से हुई तो उन्होंने कहा कि 1987-89 में इस परियोजना को लेकर आंदोलन हुआ था। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी और मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा की सरकार के समय ये परियोजना रिजेक्ट हुई थी। फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि अनुसूचित जाति और जनजाति की बैठक की जानकारी के बगैर इस परियोजना को पुनः आरम्भ करने की अनुमति दे दी गयी? आदिवासियों को इस प्रश्न का जवाब न मिलने के कारण उनमे आक्रोश है। ये स्थानीय आदिवासी अपना जल, जंगल, जमीन आसानी से नहीं छोड़ेंगे।

 

BBN24 : क्या प्रभावित लोगों ने बोध घाट परियोजना के सम्बन्ध में अपनी शिकायत प्रशासन को बताई? 
डॉ. उदयभानः इस परियोजना को लेकर जब प्रभावित होने वाले ग्रामवासियों को इस परियोजना की पुनः आरम्भ होने की जानकारी मिली तो उन्होंने बीजापुर के कलेक्टर को इस सम्बन्ध में एक ज्ञापन सौंपा। उसके बाद कलेक्टर ने उन आदिवासियों को ‘ऐसा कुछ नहीं है’ कहकर गुमराह किया और वापस भेज दिया। 

BBN24 : जिलाधिकारी के इस रवैये पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?
डॉ. उदयभानः जिलाधिकारी द्वारा टालमटोल करने के बाद, आदिवासियों ने इस सम्बन्ध में बेल्लूर में एक बैठक की, जिसमे स्थानीय प्रशासन द्वारा कोरोना काल में सोशल डिस्टेंसिंग के नाम पर बैठक जारी रखने को मना कर दिया। जिसके बाद, स्थानीय समाचार पत्र ने इस परियोजना के सम्बन्ध में आदिवासियों की सहमति की खबर लगाकर छापी गई। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था, सच्चाई ये है की इस सम्बन्ध में न तो प्रभावित होने वाले आदिवासी समाज से बात हुई, न ही इस परियोजना को लेकर पूर्व के आंदोलनकारियों से बात हुई। 

BBN24 : परियोजना वाली भूमि किसकी है, अब इसको लेकर लोगों की आगे की योजना क्या होगी?

डॉ. उदयभानः मुख्य बात ये है कि यहां कोई राजस्व भूमि नहीं है। यहां सारी भूमि वन विभाग की है। इस तरह राजस्व के चक्कर में पूरा वन सम्पदा नष्ट होगी। दूसरी तरफ जंगली इलाका होने के कारण कोई बंदोबस्त भी नहीं है। तीसरी बात ये है कि बस्तर में प्रचूर मात्रा में खनिज है, जिसके खनन के लिए पानी की जरुरत होगी। अगर ऐसे में पानी का इस्तेमाल कहीं और होता है, तो खनन का काम अवरुद्ध होगा। आदिवासी इस परियोजना को लेकर सहमत नहीं है, वो कभी भी इस परियोजना को लेकर आंदोलन शुरू कर सकते हैं।  

सरकार की इसी लचर व्यवस्था के कारण बहुउद्देशीय बोध घाट सिंचाई परियोजना पिछले 40 सालों से लंबित है। वर्ष 1992-93 में इस परियोजना के खिलाफ एक बड़ा जनांदोलन यहां के स्थानीय आदिवासियों द्वारा किया गया। उस समय की तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकारों ने इस परियोजना पर आगे काम करने पर रोक लगा दी थी। इस परियोजना को लेकर अभी तक सरकार और आदिवासी समाज के बीच सामंजस्य ना बन पाना चिंता का विषय है। सरकार अगर स्थानीय आदिवासियों को गंभीरता से लेती, उनकी समस्याओं पर गौर करती, तो यहां का परिदृश कुछ और ही होता।

 

 

अकलतरा : शराब दुकान पर नियमो की उड़ाई जा रही धज्जियां यहाँ सैल्समैन द्वारा नहीं किया जा रहा मास्क का उपयोग ...कोरोना संक्रमण फैलने का अंदेशा ... अधिकारी बेखबर

कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार द्वारा शराब की दुकानों पर सामाजिक दूरी बनाए रखने एवं ग्राहकों को मास्क लगे होने पर ही शराब बेचे जाने की अनुमति दी गई है। लेकिन आबकारी विभाग की अनदेखी के चलते अकलतरा मेन रोड पर स्थित शराब की दुकान पर नियमो  की धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहाँ सैल्समैन द्वारा मास्क नहीं लगाया जा रहा है। यहीं नहीं सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए गोले तो बनाए गए है। लेकिन उनकी पालना नहीं की जा रही है। जिसके चलते कोरोना संक्रमण फैलने का अंदेशा बना हुआ है। ऐसे में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहा है। 

मिडिया के माध्यम से हमें जानकारी प्राप्त हुई है उक्त अधिकारी से बात करके कार्यवाही कि जाएगी 
मेनका प्रधान ( एस डी एम जांजगीर )

 

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