विशेष

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- राजमाता ने किया शंकराचार्य महाराज का पादुका पूजन।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज का कवर्धा स्थित राज महल में राजमाता शशिप्रभा देवी, उनके पुत्र एवं बहु ने परम् पूज्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती का अपने राजमहल में स्वागत किया और उनका पादुका पूजन कर महाराजश्री का आशीर्वाद प्राप्त किया। ज्ञात हो कि विगत दिनों कवर्धा में धर्म सभा को संबोधित करने हेतु परम् पूज्य महाराजश्री कवर्धा स्थित शंकरा निवास पर पधारे हुए थे। राजमहल में पादुका पूजन के समय पूज्य महाराजश्री के निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंन जी महाराज, रायपुर स्थित शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख डॉ इंदुभवानन्द ब्रह्मचारी जी महाराज, ज्योतिर्मयानंद ब्रह्मचारी जी महाराज, ब्रह्मचारी धरानन्द जी महाराज व अन्य विशिष्ट जन उपस्थित थे। इसके पश्चात पूज्य महाराजश्री का पदुकापुजन बिलासपुर के रास्ते पांडातराई में गुप्ता जी के परिवार द्वारा किया गया जिसमें काजल व माया गुप्ता के साथ साथ उनके परिवार के सदस्य एवं पांडातराई निवासी भी उपस्थित हुए। तत्पश्चात परम् पूज्य महाराजश्री दुल्लापुर में धर्म सभा को संबोधित कर सीधे बिलासपुर हेतु रवाना हो गए।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- काशी के मन की बात भी जानना आवश्यक - स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ।।

@ ।। जनभावना संग्रहण अभियान का हुआ शुभारम्भ ।। आजकल जहाँ सभी लोग अपने-अपने मन की बात को ही सुनाने में लगे हुए है वहीं परम धर्मसंसद् 1008 एक ऐसा ऐतिहासिक मंच प्रस्तुत कर रहा है जहाँ जनता अपने मन की बात को धर्माचार्यों के समक्ष रख सकती है। उक्त उद्गार परम धर्मसंसद् 1008 के परम सुयोजक स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने जनभावना संग्रहण अभियान के शुभारम्भ के अवसर पर कही । उन्होंने कहा कि काशी में आज जिन धर्मप्रेमियों ने जनभावना संग्रहण का कार्य किया है उन लोगों के सामने जनता ने अपनी समस्या बताई है । आज मुख्य रूप से  लोगों ने गंगा, गौ, मन्दिर, काशी का विकास आदि विषयों को धर्मसंसद् 1008 में उठाने के लिए लिखित रूप से दिए हैं । @ ज्ञातव्य है कि आज देश के सभी प्रदेशो की राजधानियों में धर्मसंसद् 1008 के दायित्वधारियों ने पत्रकार वार्ता कर आगामी 25 से 27 नवम्बर 2018 को काशी के सीर गोवर्धन मे आयोजित होने वाले सनातन वैदिक हिन्दू परमधर्मसंसद् 1008 की जानकारी दी है । लंका क्षेत्र में विक्रम पाण्डेय , सोनारपुरा में हर्ष पाण्डेय , लहुराबीर क्षेत्र में दीक्षित बुधानी, मलदहिया मे आकाश बुधानी जी, तेलियाबाग मे तनुज कौटिल्य , जंगमबाडी में दीनानाथ तिवारी , रेलवे स्टेशन में आशीष बिल्थरे , मालवीय मूर्ति BHU मे सौरभ शुक्ल, भदैनी मे अमित दीक्षित, श्रीविद्यामठ में आर्यन सुमन जी, रामनगर में सुनील मिश्र, सीर गोवर्धन मे अरुण योगी , आशापुर मे  आशीष ज, सिगरा में तरुण उपाध्याय जी, शंकराचार्य घाट में संदीप राय जी आदि ने जनभावना संग्रहण केन्द्र का दायित्व संभाला । इस अवसर पर प्रमुख रूप से सर्वश्री डॉ गिरीश चन्द्रतिवारी, राजमणि सनातन, त्रिभुवन दास , अनुराग द्विवेदी, अजय पाण्डेय, संजय पाण्डेय, सुनील शुक्ला, हरिनाथ दुबे, विनीत तिवारी,यतीन्द्र चतुर्वेदी,रामचंद्र सिंह, सतीश अग्रहरि, अनिल शुक्ला, सतेंद्र मिश्रा, गुड्डू मिश्रा, मुन्ना यादव, श्री प्रकाश पाण्डेय, राजेन्द्र कुमार चौबे आदि जन उपस्थित रहे ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- धर्मसंसद् 1008 की वेबसाइट का हुआ लोकार्पण ।।

आज जब परिस्थितियाँ धर्म के विपरीत हो गयी हैं ऐसे मे यह आवश्यक प्रतीत हो रहा है कि हम अपने स्वयं के प्रचार तन्त्र को विकसित करें । प्राचीन समय में एक दूसरे तक अपनी बात पहुँचाने के जो साधन थे उस ओर भी हम ध्यान दे और साथ ही आज के युग की तकनीक का भी लाभ धर्म प्रचार के लिए करें । उक्त उद्गार धर्मसंसद् 1008 के परम संयोजक स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने आज श्रीविद्यामठ सभागार में आयोजित वेबसाइट लोकार्पण समारोह के अवसर पर कही । उन्होने कहा कि काशी के जिस पक्का महाल क्षेत्र में लोग दबाव या अन्य किसी कारण से मकान आदि बेचकर जा रहे है उसी क्षेत्र मे आज भी महालक्ष्मी जी एक वीरांगना की भांति डटी हुई है यह हम सबके लिए गौरव की बात है । सत्य धर्म के प्रति समर्पित ऐसे ही लोगों की ईश्वर रक्षा करते हैं और उनका ही अभ्युदय भी होता है । श्री अभिषेक श्रीवास्तव जी द्वारा कम समय में निर्मित www.dharmasansad1008.co.in नाम की इस वेबसाईट का लोकार्पण पक्का महाल क्षेत्र की निवासी श्रीमती महालक्ष्मी जी ने तथा हरियाणा से पधारे 5 वर्ष के बटुक पं दुष्यन्त पाराशर ने किया । अपने उद्बोधन में महालक्ष्मी जी ने कहा कि आज जो काशी की स्थिति है वह दयनीय है । धर्म यह नहीं सिखाता कि हम बनी बनाई चीजों को बिगाड़े । आज काशी में विकास के नाम पर मकान दुकान ही नहीं, मन्दिर तक तोड़े जा रहे हैं । धर्म नगरी में हो रहे इस अन्याय के विरुद्ध स्वामिश्रीः ने जो संघर्ष छेडा है उसमे तन मन से हम साथ है । पं श्री प्रकाश पाण्डेय जी ने कहा कि धर्मसंसद् के एक एक समाचार को यहाँ की मीडिया को दिखाना चाहिए क्योंकि यह आयोजन काशी ही नही, अपितु पूरे विश्व के कल्याण के लिए आयोजित हो रही है । कार्यक्रम का शुभारम्भ हैदराबाद से पधारे पं सत्यनारायण जी के वैदिक मंगलाचरण से हुआ । संचालन श्री रवीन्द्र चतुर्वेदी जी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन साध्वी पूर्णाम्बा जी ने किया । इस अवसर पर प्रमुख रूप से अनिल शुक्ला, संजय पाण्डेय, सुनील शुक्ला सुनील उपाध्याय, हरिनाथ दुबे, यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी, कन्हैया जायसवाल, अरुण योगी, विनीत तिवारी, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, शरद शुक्ला, किसन जायसवाल, राजेन्द्र कुमार चौबे जन आदि उपस्थित रहे ।

पेड़ लगाना ही हमारी जिम्मेदारी है या...?

ये कहानी है पुणे की जहां एक रिहान नाम का लड़का रहता था जो एक आईटी कंपनी में जॉब करता था वहां एक दिन सारे आफिस वाले मिलके किसी एक स्थान पर पेड़ लगाने की बात करने लगे उन लोगों ने एक दिन डिसाईड किया और वहां खूब सारे पेड़ लगाने गये काफी मेहनत करके काफी सारे पेड़ लगा के आये।दूसरे दिन आकर सोशल मीडिया पर अपने द्वारा किये इस कार्य के बारे में अपने दोस्तों से शेयर भी किया जिसमें उन्हें बहुत अच्छे अच्छे कॉमेंट भी आये पर लेकिन रिहान बहुत कशमकश में था कुछ प्रश्न उसके दिमाग मे घूम रहा था कि क्या हमने पेड़ लगा दिए तो क्या बस पर्यावरण की तरफ हमारी जो जिमेदारी है वो खत्म हो गई या अब यहां से हमारी जिम्मेदारी और बढ़ गई है? ये तो ऐसी बात हो गई कि किसी ने बच्चा तो पैदा कर दिया और उसको अनाथ भगवान भरोसे छोड़ आये की बस बच्चा पैदा करना ही मेरी जिम्मेदारी थी ? हम भी ठीक ऐसा ही करते है पर्यावरण संरक्षण के नाम से कई कार्यक्रम आयोजित करते है पेड़ लगाते है पर क्या कभी आप लोग ने ये सोच है की हमने भी रिहान के आफिस के लोगों के जैसे ही काम किया पेड़ लगाए और आ गये उसके बाद क्या ? जब हम पेड़ लगाते है तो उसे एक नवजात बच्चे की भाती संरक्षण की आवश्यकता होती है जैसे एक नवजात को दूध की भूख लगती है वैसे ही इसे भी पानी की आवश्यकता होती है ,बच्चे को टाइम टाइम पे हम टीके लगाते है वैसे ही पेड़ को भी समय-समय पर खाद की जरूरत होती है।उसे कोई नुकसान न हो इन सब का ध्यान रखने की जरूरत होती है । अच्छा हम सब आज कल सोसाईटी में रहते है तो उसमें हमारे सोसाइटी का मेंटेनेंस देते है तो उसमें हम गार्डन के लिए भी देखभाल करने और माली के भी पैसे देते है यदि हम जैसे पेड़ लगा के गए वैसे यहां भी लगा के छोड़ दो क्या जरूरत है इतने पैसे खर्च करने की ।हम पैसे इसलिए खर्च करते हैं ताकि उसका संरक्षण हो और वो हरे भरे रहे। मेरे कहने का ये मतलब है कि यदि हम पेड़ लगा रहे हैं तो उसके संरक्षण का भी ध्यान रखे तभी हमारे पेड़ लगाने का मकसद पूरा होगा।उसके लिए हम ये कर सकते है की जहां हमने पेड़ लगाये थे वहां हर संडे परिवार के साथ उस स्थान पर जाए और पानी दे जरूरी खाद भी डाल आये और जहां तक हो ये काम हम अपने घर के छोटे बच्चों को करने दे और पेड़ के महत्व को समझाए की वो है तो हम है ये ना हो तो मानवजाति लुप्त हो जाएगी जैसे कई जानवर इस दुनिया से लुप्त होते जा रहे है।इस करने से हम उनमें अच्छे संस्कार निर्माण करेंगें और ऐसा करने से आने वाली पीढ़ी में जागरूकता बढ़ेगी। आज कल बच्चे कंप्यूटर गेम टीवी में ही खोये रहते है हम इनसब से बाहर निकलने के लिए अपने घरों में अलग-अलग तरह के पेड़ लाके उनको उस पेड़ के बारे में बताए उनके नाम ढूंढने और सुबह शाम पानी देने लगाए हफ्ते में खाद देने का और उससे दोस्ती कराए जिससे पेड़ का संरक्षण भी होगा और बच्चे टीवी और कंप्यूटर गेम से बाहर आयेंगें उन्हें कहानी की तरह पेड़ों की कहानी बता सकते है जैसे हमारे समाज में बहुत से पेड़ों की पूजा की जाती है उनकी कहानी बता सकते है इससे उनके महत्व को बच्चे और भी अच्छे से समझ सकते है मनघड़न कहानी से अच्छा ये कहानी सुनाई जाए तो उनमें अच्छे संस्कार भी पड़ेगें। शायद आप लोग समझ गए होंगे कि मैं आप लोगों को क्या समझना चाहती हूं ।आज इस दुनिया को बचाना है तो हम जितना ज्यादा पेड़ लगाए उतना ही अच्छा है ये काम हम पेड़ संरक्षण के लिए नहीं खुद के लिए कर रहे है ये बात हमें याद रखनी चाहिए यदि हम ये महत्वपूर्ण काम नहीं करेंगे तो शायद एक दिन ऐसा आएगा कि हम भी विलुप्त हो जाएंगे और ये मानवजाति ही न हो । वर्षा गलपांडे

कांग्रेस की गुट बाजी के चलते हराने-जिताने का खेल जारी

कैलाश जयसवाल 
भाटापारा -  विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीतेगी या हारेगी, यह तो चुनाव के परिणाम बताएंगे, मगर पार्टी के भीतर चुनाव से पहले ही हराने और जिताने का खेल तेज हो गया है। नेताओं की आपस में लामबंदी जारी है।
टिकट की एक लम्बी कतार है लेकिन किसको मिलेगी टिकट अभी तक कुछ भी तय नहीं हो पाया है ,  लेकिन आला कमान के आदेश पर सतीश अग्रवाल,अमित बंटी शर्मा ,सुनील माहेश्वरी और कसडोल के पूर्वे विधायक राजकमल सिंघानिया भी लाइन में लगे हुए है,जिन्हें परोक्ष रूप से पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का साथ हासिल है। 

प्रदेश की बात करे तो राज्य की सियासत में कांग्रेस डेढ़ दशक से सत्ता से बाहर है। लगातार तीन विधानसभा चुनावों में और राज्य की लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस बार चुनाव सिर पर है और कांग्रेस पार्टी की भीतरी लड़ाई जारी है। यही कारण है कि अब तक उम्मीदवारों के नाम तय नहीं हो पाए हैं। 

सूत्रो के अनुसार  बात करे तो पार्टी में जहां एक ओर टिकट बंटवारे पर खेमेबाजी है और अपने अपने आकाओ के आदेश से टिकट के लाइन में लगे हुए है जैसे ही टिकट फाइनल होगा फिर मान मनव्वल का खेल भी जारी हो जाएगा लेकिन कोई किसी से कम नहीं है और यही अंदरूनी कला बाजी टिकट मिलने वाले प्रत्याशी के ऊपर भारी पड़ेगा टिकट मांगने वाले टिकट नहीं मिलने पर साथ देने का वादा भी किये है लेकिन अपने वादे में कितना खरे उतरेंगे , यह तो आने वाला समय ही बताएगा

वही जिले के कमान सँभालने वाले दिनेश यदु का कहना है की उम्मीदवारों के नाम तय होते ही सब अपने वादे के अनुसार कॉग्रेस की सिपाही की तरह काम करंगे और प्रत्याशी को जीता कर लाने की जवाबदारी भी उन्ही की रहेगी  

फिलहाल  `राज्य में सत्ता के पक्ष में माहौल नहीं है, कांग्रेस के लिए संभावनाएं बन रही हैं, मगर कांग्रेस की अंदुरूनी लड़ाई नई बात नहीं है। ठीक वैसा ही हाल है कि, छीका को लपकने से पहले ही उसे फोड़ने की जुगत तेज हो गई है। कांग्रेस में गुटबाजी के चलते उम्मीदवार चयन में सहमति नहीं बनी तो भाजपा के लिए जीत की राह एक बार फिर आसान हो जाएगी। भाजपा भी इसी के इंतजार में है।`

खबरीलाल रिपोर्ट ::- इंदुभवानन्द ने शक्ति रूपी देवी दुर्गा का किया आह्वान।।

जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम एवं भगवती राजराजेश्वरी मंदिर रायपुर में शारदीया नवरात्रि के महा सप्तमी के दिन आश्रम प्रमुख डॉ इंदुभवानंद ब्रह्मचारी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ 1008 कमल पुष्प से शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा का पूजन व अर्चन किया। इस विशेष दिन पर आचार्य धर्मेंद्र महाराज, डीजीपी जेल आईपीएस गिरधारी नायक, सुमिता ब्रह्मा, ज्योति नायर, तारिणी तिवारी, नरसिंह चंद्राकर, रत्नेश शुक्ला, सोनू चंद्राकर, शैलू नन्दा, आश्रम के समन्वयक व प्रवक्ता पं सुदीप्तो चटर्जी सहित अनेक भक्तगण उपस्थित हुए और शक्ति की उपासना किये। तत्पश्चात सभी भक्तों ने मिलकर ज्योत का दर्शन किये, पुष्पांजलि अर्पित कर महाआरती में सम्मिलित हुए। रात्रिकालीन पूजन पश्चात उपस्थित भक्तों को ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद जी महाराज ने खुद चरणामृत और प्रसाद दिए। ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानंद महाराज ने कहा कि यह तीन दिन विशेष रूप से बहुत अधिक महत्त्वपूर्ण है क्यों कि इस समय शक्ति चारों ओर व्याप्त रहती है और यदि कोई उपासक सही तरीके से शक्ति की उपासना करें तो उन्हें मन वांछित फल की प्राप्ति होती है।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- काशी स्थित श्रीविद्यामठ जहाँ साधिकाएॅ करती हैं नवरात्रि अनुष्ठान ।।

यह अद्वैत सिद्धान्त के प्रतिपादकाचार्य भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी की परम्परा का वह महान् स्थल है जहाँ प्रति प्रकट नवरात्रि में श्रीविद्या साधिकाएं अनुष्ठान कर भगवती राजराजेश्वरी देवी की कृपा प्राप्त करती हैं । प्रतिदिन पूर्वाह्न 9 से 11 बजे तक आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित सौन्दर्य लहरी स्तोत्र के प्रथम श्लोक का 108 बार जप एवं सम्पूर्ण सौन्दर्य लहरी का सामूहिक रूप से सस्वर पारायण पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज के दिशानिर्देश में हो रहा है । यह उन बुद्धिजीवियों के लिए उत्तर है जो सनातन धर्मोद्धारक हमारे आदि आचार्य पर स्त्रियों से भेद-भाव करने और उन्हें धार्मिक क्रियाकलापों में पीछे रखे जाने का झूठा आक्षेप कर उन्हें मातृशक्ति के विरोधी के रूप में प्रचारित करते हैं । सनातन धर्म में शास्त्र-मर्यादानुसार सभी के लिए सम्मानजनक स्थान सुरक्षित है । तभी तो हमें सनातनी होने पर गर्व है ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- स्थित श्रीविद्यामठ जहाँ साधिकाएॅ करती हैं नवरात्रि अनुष्ठान ।।

यह अद्वैत सिद्धान्त के प्रतिपादकाचार्य भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी की परम्परा का वह महान् स्थल है जहाँ प्रति प्रकट नवरात्रि में श्रीविद्या साधिकाएं अनुष्ठान कर भगवती राजराजेश्वरी देवी की कृपा प्राप्त करती हैं । प्रतिदिन पूर्वाह्न 9 से 11 बजे तक आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित सौन्दर्य लहरी स्तोत्र के प्रथम श्लोक का 108 बार जप एवं सम्पूर्ण सौन्दर्य लहरी का सामूहिक रूप से सस्वर पारायण पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज के दिशानिर्देश में हो रहा है । यह उन बुद्धिजीवियों के लिए उत्तर है जो सनातन धर्मोद्धारक हमारे आदि आचार्य पर स्त्रियों से भेद-भाव करने और उन्हें धार्मिक क्रियाकलापों में पीछे रखे जाने का झूठा आक्षेप कर उन्हें मातृशक्ति के विरोधी के रूप में प्रचारित करते हैं । सनातन धर्म में शास्त्र-मर्यादानुसार सभी के लिए सम्मानजनक स्थान सुरक्षित है । तभी तो हमें सनातनी होने पर गर्व है ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- स्थित श्रीविद्यामठ जहाँ साधिकाएॅ करती हैं नवरात्रि अनुष्ठान ।।

यह अद्वैत सिद्धान्त के प्रतिपादकाचार्य भगवत्पाद आद्य शंकराचार्य जी की परम्परा का वह महान् स्थल है जहाँ प्रति प्रकट नवरात्रि में श्रीविद्या साधिकाएं अनुष्ठान कर भगवती राजराजेश्वरी देवी की कृपा प्राप्त करती हैं । प्रतिदिन पूर्वाह्न 9 से 11 बजे तक आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित सौन्दर्य लहरी स्तोत्र के प्रथम श्लोक का 108 बार जप एवं सम्पूर्ण सौन्दर्य लहरी का सामूहिक रूप से सस्वर पारायण पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज के दिशानिर्देश में हो रहा है । यह उन बुद्धिजीवियों के लिए उत्तर है जो सनातन धर्मोद्धारक हमारे आदि आचार्य पर स्त्रियों से भेद-भाव करने और उन्हें धार्मिक क्रियाकलापों में पीछे रखे जाने का झूठा आक्षेप कर उन्हें मातृशक्ति के विरोधी के रूप में प्रचारित करते हैं । सनातन धर्म में शास्त्र-मर्यादानुसार सभी के लिए सम्मानजनक स्थान सुरक्षित है । तभी तो हमें सनातनी होने पर गर्व है ।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- शंकराचार्य घाट पर भव्य धर्मोत्सव का आयोजन किया गया।।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को ज्योतिष पीठ एवं द्वारका शारदा पीठ का संयुक्त शंकराचार्य घोषित करने पर हर्षित सनातन धर्मियों द्वारा आज केदारघाट के समीप शंकराचार्य घाट पर धर्मोत्सव का आयोजन किया । शंकराचार्य घाट पर पूज्यपाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने गंगा जी का षोडशोपचार पूर्वक पूजन किया तत्पश्चात मां गंगा की १०८ दीए से आरती की । उसके बाद ५१ शंखों के द्वारा शंखनाद कर सनातन धर्म के उत्थान की मंगल कामना की और आतिशबाजी कर हर्षोल्लास किया । कार्यक्रम स्थल पर धर्म सभा का आयोजन जिसको सम्बोधित करते हुए पूज्यपाद स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि बहुत दिनों बाद सनातन धर्मियों को एक सुखद समाचार प्राप्त हुआ है जो आने वाले दिनों में सनातन धर्म को पुष्ट करेगा सम्पूर्ण विश्व सनातन वैदिक हिन्दू परम्पराओं और ज्ञान को अपना रहा है हमको भी अपने परम्पराओं से जुड़ना चाहिए तभी हमारा सर्वांगीण विकास होगा । कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित थे सर्वश्री राजेन्द्र तिवारी जी, श्रीमहन्त महाराजमणि शरण सनातन जी महाराज, ज्योतिशंकर जी, रमेश उपाध्याय, संजय पांडेय प्रदेश समन्वय गंगा सेवा अभियान, अनुराग द्विवेदी, प्रभात वर्मा, सुनील शुक्ल, हरिनाथ दुबे, सुनील उपाध्याय, यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी, सत्येंद्र मिश्र, आलोक भारद्वाज, पद्माकर पांडेय, शरद शुक्ल, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, किसन जायसवाल, सतीश अग्रहरि जी आदि सैकड़ों उपस्थित थे ।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::- ममता चंद्राकर ने शंकराचार्य से लिया आशीर्वाद।

छत्तीसगढ़ की मशहूर कलाकार एवं पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त डॉ ममता प्रेम चंद्राकर ने ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के 68 वें चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में "चिन्हारी" लोक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित भक्तों को भावविभोर कर दिया। छत्तीसगढ़ी फिल्मों के मशहूर निर्माता व निर्देशक प्रेम चंद्राकर द्वारा कृत "चिन्हारी" में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जातियों के लोक गीतों को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया जिसमें गणेश वंदना, नाचा, मल्हारी व आदि प्रस्तुतियां ममता चंद्राकर एवं उनके साथियों द्वारा मंचन किया गया। नाचा छत्तीसगढ़ का बहुत प्रसिद्द नृत्य शैली है जिसमे पुरुष महिला बनकर नृत्य करते हैं तथा अन्य जातियों द्वारा नाव रात्रि, दीपावली में जिस तरह का लोक गीत व नृत्य करते हैं उसका प्रस्तुतिकरण उनके द्वारा किया गया। ममता चंद्राकर का कहना है कि हम देश के अलग अलग जगह पर जाकर छत्तीसगढ़ के संस्कृति से लोगों को "चिन्हारी" के मध्यम से अवगत करवाते हैं जिससे दूसरे प्रदेश के लोग हमारे छत्तीसगढ़ की संस्कृति , भाषा, शैली आदि को जान सके। इस कार्यक्रम के आयोजन में शंकराचार्य आश्रम रायपुर के नरसिंह चंद्राकर का विशेष योग दान रहा और इस विशेष कार्यक्रम में देश के अलग अलग प्रान्तों से आये सन्यासी, साधु, सन्त, महात्मा एवं वृंदावन वासी विशेष रूप से उपस्थित थे।

खबरीलाल रिपोर्ट :: पढ़िए शंकराचार्य महाराज ने स्वामी हरिदास जयंती पर क्या कहा ।।

मनुष्य यदि दूसरे में अपने ईष्ट देवता को देखे और उनके सुख में सुखी हो जाए तो आज जो भीषम परिस्थिति है वह सदा के लिए समाप्त हो जाएगा ::- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती । 17 सितंबर को राधाष्टमी के विशेष दिन पर वृंदावन में स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया जिसमे प्रमुख रूप से धर्म सम्राट अनंत श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज, उत्तराखंड की महामहिम राज्यपाल श्रीमती बेबी रानी मौर्य, उत्तरप्रदेश के डिप्टी सीएम केशव मौर्य व आदि सन्त , महात्मा, विधायक, नेतागण एवं कला प्रेमी उपस्थित थे। सर्व प्रथम शंकराचार्य जी महाराज एवं महामहिम राज्यपाल व डिप्टी सीएम के हाथों से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुवात की गई। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने अपने आशीर्वाचन में कहा कि आज वृंदावन का विशिष्ठ दिन है। आज राधा रानी का प्राकट्य उत्सव है साथ ही संगीत सम्राट हरिदास जी का जन्मोत्सव भी है। वृंदावन एक दिव्य क्षेत्र है जहां से बड़े बड़े संगीतकार उभरे हैं। आगे महाराजश्री ने कहा कि राधा और कृष्ण में कोई अंतर नहीं है, वस्तुतः एक ही ने दोनों रूप धारण किये हुए हैं। भगवान जब अवतरित होते हैं तो उनके श्रीरूपेण को देखकर प्रत्येक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। इतना अद्भुत सौंदर्य है जिसे शब्दों में पिरोया नहीं जा सकता। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने आप को दो रूप में विभक्त कर लिया। श्रीकृष्ण ने राधा और श्रीकृष्ण ने कृष्ण बन गए। राधा रानी श्रीकृष्ण के नेत्रों से अपने आप को देखती थी। दोनों एक दूसरे के दर्शन में, मिलन के सुख में दोनों जो दंपति बने हैं इतने मग्न हो जाते हैं कि एक दूसरे की चिंता भी भूल जाते हैं। शंकराचार्य महाराज ने अंत मे कहा की इससे हमें यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य यदि मनुष्य में अपने ईष्ट देवता को देखे और उनके सुख में सुखी हो जाए तो आज जो भीषम परिस्थिति है वह सदा के लिए समाप्त हो जाएगा। महामहिम राज्यपाल उत्तराखंड श्रीमती बेबी रानी मौर्य, यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने अपने उद्बोधन में उपस्थित सभी वृंदावन वासियों को राधाष्टमी पर्व और स्वामी हरिदास जी की जयंती की बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित किये तथा पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से आशीर्वाद प्राप्त किये। तत्पश्चात विद्यार्थियों द्वारा नृत्य प्रेषित किया गया और प्रत्येक संगीत एवं नृत्य ने समूचे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  जो भगवान के अनन्य भक्त हैं वे भगवान के स्वरूप ही माने जाते हैं :: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने वृंदावन धाम स्थित मलूक पीठ के पीठाधीश स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज के जन्मोत्सव में कहा - जो भगवान के अनन्य भक्त हैं वे भी भगवान के स्वरूप ही माने जाते हैं। महाराजश्री ने आगे कहा कि भगवान समस्त विश्व मे है और विश्व उनका स्वरूप है। भगवान श्रीराम ने अपने अनन्य भक्तों को संबोधित कर बताया कि मैं सेवक हूँ और सारा विश्व मेरे सामने भगवान राम हैं। इस तरह का भाव जिसका है वे भागवत कहलाते हैं और उन भागवतों में ऐसे अनेक महापुरुष हुए हैं जिन्होंने आज सनातन धर्म को बचा कर रखा है। पूज्य महाराजश्री ने बताया कि मलूक दास जी मुग़ल शासक के समय रहे, वो बड़ा संकट का समय था और उसमे भी औरंगज़ेब का जो शासन था वो तो हिंदुओं के लिए बड़ा दमनकारी था। उस समय जो भी महापुरुष थे उन्होंने सनातन धर्म को बचा कर रखा। अगर कोई व्यक्ति छुपकर पाप करता है और सोचता है उसे कोई नहीं देख रहा है तो वो गलत है। उसे भगवान देख रहा है। उसका आत्मा देख रहा है और वही आत्मा परमात्मा है। यही शिक्षा यदि लोगों तक पहुंच जाए तो अपराध खत्म हो जाएंगे। हम लोग कहा करते हैं कि दो आंख को तो धोखा दे सकते हो पर परमात्मा के हजारों आंखों को कैसे धोखा दोगे ? आप सभी धर्म रक्षा के कार्य मे सहयोग करें और अपने मठों से निकलकर लोगों के बीच पहुंचे और उन्हें जागृत करें। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के मलूक पीठ पर पहुंचते ही भव्य स्वागत किया गया तथा पुष्प वर्षा करते हुए उन्हें मंच तक ले आये और मलूक पीठ के पीठाधीश्वर राजेन्द्र दास जी महाराज ने उनका सम्मान किया एवं पादुका पूजन किये। इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि तथा द्वारका पीठ के मंत्री दंडी स्वामी सदानन्द सरस्वती, निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज, दंडी स्वामी सदाशिवेंद्र सरस्वती, ब्रह्मचारी ब्रह्म विद्यानन्द महाराज, ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द महाराज, ब्रह्मचारी रामेश्वरानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज व आदि सन्त, महात्मा एवं भक्तगण विशेष रूप से उपस्थित हुए।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  वृंदावन में प्रवेश करते ही प्राणी सच्चिदानन्द स्वरूप हो जाते हैं ::- स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती।।

मौका था ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के 95 तम जन्मदिवस उत्सव के पावन अवसर पर वृंदावन के संत , महात्माओं द्वारा उनका पादुका पूजन एवं सम्मान साथ ही संत सम्मेलन। 10 सितम्बर 2018 वृंदावन स्थित फोगला आश्रम में सायं 5 बजे कार्यक्रम आयोजित था जिसमे वृंदावन के संत, महात्मा, महामंडलेश्वर आदि बहु संख्या में उपस्थित हुए और प्रत्येक संतों ने पूज्य महाराजश्री के पादुका का पूजन पश्चात पुष्पमाला पहनकर उनका श्रीधाम वृंदावन में नन्दन, वंदन, अभिनंदन किया साथ ही अपने मन के अंदर के भावों को प्रकट किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में भक्तगण उपस्थित हुए। सर्वप्रथम महाराजश्री के निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी महाराज ने पूज्य महाराजश्री के जीवन पर प्रकाश डाला तत्पश्चात पूज्य महाराजश्री के शिष्य प्रतिनिधि नारायण स्वरूप दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज ने अपनी बात रखी कि किस तरह आज हमारे समाज के बच्चे संस्कार से दूर होते जा रहे हैं और टीवी पर सूर्योदय देखते हैं जिस पर उन्होंने एक सच्ची वाकया भी सुनाया। स्वामिश्री: के कथन के पश्चात मंचासीन संत, महात्मा, महामंडलेश्वर आदि ने अपने मन के भाव महाराजश्री के सम्मान में, उनके कार्यों पर, उनके संकल्पों पर, उनके धर्म के प्रति अडिग रहने पर प्रकट किये। पूज्य महाराजश्री ने अपने उद्बोधन में कहा - विद्वानों ने कहा है कि वृंदावन सच्चिदानन्द स्वरूप है। जो यहां आते हैं, प्रवेश करते ही सभी प्राणी सच्चिदानन्द स्वरूप हो जाते हैं। आज जो हम यहां सब बैठे हैं प्रत्येक सच्चिदानन्द स्वरूप हैं। जो वृंदावन धाम में निवास करते हैं उनकी बात ही कुछ अलग है। आगे महाराजश्री ने कहा हम लोग यह मानते हैं कि आराध्य मनुष्य नहीं होता है। मनुष्य होने से वह आदरणीय हो सकता है, पूज्यनीय हो सकता है पर आराध्य नहीं हो सकता है। आराध्य तो सिर्फ एक है और वह है परब्रह्म परमात्मा। अंत मे महाराजश्री ने कहा कि यहां के संत, महात्मा भागवत चिंतन कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त कर रहे हैं और यही आध्यात्मिक आनंद का मार्गदर्शन वृंदावन के माध्यम से सारे विश्व को दिया जाए।

खबरीलाल रिपोर्ट (वृंदावन) ::-  आशा से क्रोध उत्पन्न होता है : स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने 9 सितम्बर 2018 को कहा - आशा से ही क्रोध की उत्पत्ति होती है। यदि आपको किसी वस्तु या व्यवहार की आशा नहीं होगी तो आपको क्रोध कभी नहीं आएगा और न ही आप निराश होंगे। इसलिए महात्माओं के हृदय में क्रोध कभी नही आता है क्यों कि वे किसी चीज की आशा ही नहीं करते है। उक्त बातें महाराजश्री ने वृंदावन में चल रहे अपने 68 तम चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान में उपस्थित भक्तों से कहा। इस अवसर पर उनके शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती मंच पर उपस्थित थे और सत्संग सभा की अध्यक्षयता कर रहे थे।  महाराजश्री ने आगे कहा कि महात्माओं को किसी भी वस्तु की न तो कामना होती है और न ही चाहत होती है की उसके न मिलने से उनका जीवन न चले और निराशा से क्रोध की उत्पत्ति हो। महाराजश्री ने यह भी कहा कि - महात्माओं को भी कभी कभी क्रोध आ जाता है। क्रोध यदि महापुरुषों के मन मे आ भी गया तो वह "क्रोधाभास" है। आपने सुना होगा , पढ़ा भी होगा कि बड़े बड़े महात्माओं ने जिन जिन को श्राप दिया है अंत मे उन्ही का कल्याण ही हुआ है। पानी मे जैसे लकीर ठहरता नहीं है ठीक उसी तरह महात्माओं के मन मे क्रोध ठहरता नहीं है, आई और मिट गई। यदि थोड़ा भी क्रोध किसी पर रह गया हो तो समझ लो उस जीव का कल्याण ही होगा। इसलिए महात्माओं का क्रोध भी अच्छा ही होता है।