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जयललिता को दिल का दौरा, स्‍वास्‍थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पीएम मोदी को दी जानकारी

मुख्‍यमंत्री जे जयललिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद से तमिलनाडु में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जयललिता को रविवार को अचानक दिल का दौरा पड़ा
मुख्‍यमंत्री जे जयललिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद से तमिलनाडु में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जयललिता को रविवार को अचानक दिल का दौरा पड़ा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की निगरानी में चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। उन्‍हें सीसीयू में रखा गया है। अस्‍पताल के बाहर उनके हजारों समर्थक इकट्ठे हो रखे हैं। बुखार एवं निर्जलीकरण की शिकायत के चलते जयललिता को 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिन पहले अपोलो हॉस्पिटल्स के चेयरमैन प्रताप सी रेड्डी ने कहा था कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ‘‘पूरी तरह स्वस्थ हो गई हैं।’’ अस्‍पताल की ओर से चार दिसंबर को जारी बुलेटिन में कहा गया, ”कार्डियोलॉजिस्‍ट, पल्‍मोनोलॉजिस्‍ट और क्रिटिकल केयर स्‍पेशलिस्‍ट्स उनका ट्रीटमेंट और मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वह एक्‍स्‍ट्राकार्पोरियल मेमब्रेन हर्ट असिस्‍ट डिवाइस पर हैं। लंदन से डॉक्‍टर रिचर्ड बैली से भी परामर्श लिया गया है।”

जयललिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने डॉक्‍टर्स से बात की थी। वहीं पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं ने उनके जल्‍द ठीक होने की कामना की थी। राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी ट्वीट के जरिए जयललिता के ठीक होने की कामना की।  इससे पहले जयल‍लिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद राज्‍यपाल सी विद्यासागर राव सहित तमिलानाडु के सभी मंत्रियों को भेज दिया गया। वित्‍त मंत्री ओ पन्‍नीरसेल्‍वम सहित पांच मंत्री पहले ही चेन्‍नई में मौजूद थे।

 

डिजिटल भुगतान के प्रोत्साहन को सरकार का बड़ा ऐलान, ई-पेमेंट पर हर नागरिक को मिलेंगे 10 रुपये

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद लोगों को डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहित करने के लिए नीति आयोग ने बड़ा ऐलान किया है। नीति आयोग इलेक्ट्रानिक भुगतान का विकल्प अपनाने वाले प्रत्येक नागरिकों के लिये संबंधित जिलाधिकारियों को 10-10 रुपये का ईनाम देगा।
नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अमिताभ कांत ने सभी जिला अधिकारियों, आयुक्तों और मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर कहा है कि आयोग की तरफ से हर जिले के अधिकारियों को तत्काल पांच लाख रुपये हस्तांतरित किया जाएगा। पत्र के अनुसार आयोग पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिये प्रत्येक जिले को पांच-पांच लाख रुपये तक हस्तांतरित करेगा।
प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिये जिला कलेक्टर, आयुक्त या मजिस्ट्रेट को यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यक्ति बताए गए पांच तरीकों में से किसी एक के जरिये कम-से-कम दो सफल नकद रहित लेन-देन करे। इन माध्यमों में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई), अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंटरी सर्विस डाटा (यूएसएसडी), आधार के जरिये भुगतान, ई-वालेट तथा रूपे डेबिट (क्रेडिट) प्रीपेड कार्ड शामिल हैं।नीति आयोग के ट्विटर संदेश में कहा गया है कि सरकार जिला प्रशासन को इस बात के लिये प्रोत्साहित करेगी कि वे नागरिकों को डिजिटल भुगतान के माध्यमों का उपयोग करने को प्रोत्साहित करें क्योंकि इनमें आसानी होती है। आयोग सबसे अच्छा काम करने वाले 10 जिलों को डिजिटल पेमेंट चैंपियनशिप आफ इंडिया अवार्ड देगा। इसी प्रकार, इस क्षेत्र में सबसे अच्छा काम करने वाली 50 पंचायतों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

केंद्र सरकार का फैसला: एक व्‍यक्ति को डिजिटल पेमेंट सिखाने पर IAS अफसरों को मिलेगा 10 रुपए का इंसेंटिव

व्‍यक्ति को डिजिटल पेमेंट के 5 तरीकों में किसी का इस्‍तेमाल करके कम से कम दो सफल ट्रांजेक्‍शन करने होंगे। 
देश में ‘कैशलेस’ लेन-देने को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अधिकारियों को इंसेंटिव देने का फैसला किया है। एएनआई के अनुसार, सरकार उन जिला कलेक्‍टरों/जिलाधिकारियों/डिप्‍टी कमिश्‍नर को एक व्‍यक्ति को डिजिटल पेमेंट करने योग्‍य बनाने के लिए 10 रुपए का इंसेंटिव देगी। शर्त ये है कि व्‍यक्ति को डिजिटल पेमेंट के 5 तरीकों में किसी का इस्‍तेमाल करके कम से कम दो सफल ट्रांजेक्‍शन करने होंगे। इन तरीकों में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस, यूएसएसडी (*99# बैंकिंग), आधार द्वारा भुगतान, वॉलेट्स और रुपे/डेबिट/क्रेडिट/प्रीपेड कार्ड्स शामिल हैं। इस संबंध में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले 10 जिलों को नीति आयोग/भारत सरकार द्वारा डिजिटल पेमेंट चैंपियंस का अवार्ड दिया जाएगा। कैशलेस होने वाली पहली 50 पंचायतों को नीति आयोग/भारत सरकार की तरफ से डिजिटल पेमेंट अवार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। सरकार ने सभी अहम विभागों से ऑनलाइन और डिजिटल ट्रांजैक्शन करने को कहा है।
सरकार डेबिट और क्रेडिट कार्ड की जगह आधार नंबर पर आधारित सभी ट्रांजैक्शन्स करने की योजना पर काम कर रही है। दरअसल, नीति आयोग चाहता है कि देश में सभी प्रकार के ट्रांजैक्‍शंस के लिए केवल आधार कार्ड का ही उपयोग किया जाए। अगर ऐसा होता है तो लोगों के पर्स में रहने वाला कार्ड (डेबिट/क्रेडिट) पुराने दिनों की बात रह जाएगी। इसकी जगह 12 अंकों वाला आधार नंबर ले लेगा।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर की रात 8 बजे 500 और 1000 के पुराने नोट को रद्द करने का एलान किया था। उसकी जगह रिजर्व बैंक ने नए किस्म के 500 और 2000 रुपये के नोट बाजार में उतारे हैं। सरकार कैशलेस सोसायटी के तहत डिजिटल ट्रांजैक्शन्स पर जोर दे रही है। सरकार का मानना है कि ऐसा करने से काला धन समाप्त होगा और समाज में पारदर्शिता आएगी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैशलेस सोसाइटी’ की वकालत पर सवाल खड़े किए। उनके मुताबिक, गांवों में रहने वाली आधी से ज्यादा आबादी को लेन-देन के इन डिजिटल तरीकों के बारे में बताने के लिये केंद्न सरकार ने कोई तैयारी नहीं की है। अखिलेश ने पीएम से पूछा कि ”आप (मोदी) बताएं कि डिजिटल इंडिया के लिये आपकी क्या तैयारी है। कैशलेस लेन-देन करना कौन सिखाएगा। इसे गांव तक कैसे पहुंचाएंगे। नौजवान तो फिर भी इसे कर लेते हैं लेकिन बाकी लोगों का क्या।”

अब बाजार में आएंगे 50 और 20 रुपए के नए नोट, आरबीआई ने किया ऐलान

भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही 50 और 20 रुपए के नए नोट जारी करेगा। हालांकि, 50 और 20 रुपए के पुराने नोट भी चलते रहेंगे। दोनों नोटों में आरबीआई कुछ बदलाव करने जा रहा है। 20 रुपए के नए नोट में दोनों नंबर पैनल पर इनसेट लेटर ‘L’ लिखा होगा। वहीं 50 रुपए के नए नोट पर दोनों नंबर पैनल पर आने वाले इनसेट लेटर को हटाया जाएगा। इन नए नोटों पर आरबीआई के नए गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे।
बता दें, इससे पहले आरबीआई ने 500 और 2000 रुपए के नए नोट जारी किए थे। ये नोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद जारी किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 रुपए और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने का ऐलान आठ नवंबर को किया था। इसके बाद 2000 रुपए के नए नोट जारी किए गए थे। 500 रुपए के भी पुराने नोट बंद कर दिए गए और नए नोट जारी किए गए। बाद में आरबीआई ने ऐलान किया था कि 1000 रुपए के नए नोट भी जल्द ही जारी किए जाएंगे।

नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मिट्टी का तेल और चीनी के लिए 70 साल से कतारें लगा रही जनता से वह आखिरी बार कतार लगवा रहे हैं।

 भारत को ‘बेईमानों’ से मुक्ति दिलाने का संकल्प दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के आगे लंबी कतारें लगने पर शनिवार (3 दिसंबर) को कहा कि मिट्टी का तेल और चीनी के लिए 70 साल से कतारें लगा रही जनता से वह आखिरी बार कतार लगवा रहे हैं। देश को नकद लेनदेन से मुक्ति दिलाने का आहवान करते हुए मोदी ने मोबाइल के जरिए खरीद फरोख्त करने का सुझाव दिया और नौजवानों से अपील की कि वे देशवासियों को मोबाइल के जरिए लेनदेन करना सिखायें। उन्होंने यहां भाजपा की परिवर्तन यात्रा के तहत आयोजित जनसभा में कहा, ‘आपने वो सरकारें अब तक देखी हैं जो अपने लिए काम करती हैं। अपनों के लिए करने वाली सरकारें बहुत आयीं। आपके लिए करने वाली सरकार भाजपा ही हो सकती है।’ मोदी ने कहा, ‘इस देश को भ्रष्टाचार ने बर्बाद किया है। इस देश को भ्रष्टाचार ने लूटा है। गरीब का सबसे ज्यादा नुकसान किया है। गरीब का हक छीना है। हमारी सभी मुसीबतों की जड़ में भ्रष्टाचार है। कानून का उपयोग करके बेईमान को ठीक करना होगा। भ्रष्टाचार को ठिकाने लगाना होगा।’ उन्होंने पूछा, ‘अगर कोई ये काम करता है तो वह गुनाहगार है क्या? कोई भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता तो गुनाहगार है क्या? मैं हैरान हूं कि आजकल मेरे ही देश में कुछ लोग मुझे गुनाहगार कह रहे हैं। क्या मेरा यही गुनाह है कि भ्रष्टाचार के दिन पूरे होते जा रहे हैं? क्या यही मेरा गुनाह है कि गरीबों का हक छीनने वालों को अब हिसाब देना पड़ रहा है?’
मोदी बोले, ‘हिन्दुस्तान की पाई-पाई पर अगर किसी का अधिकार है तो सवा सौ करोड़ देशवासियों का है। मैं आपके लिए लड़ाई लड़ रहा हूं। ज्यादा से ज्यादा (विरोधी) मेरा क्या कर लेंगे? हम तो फकीर आदमी हैं, झोला लेकर चल पड़ेंगे। ये फकीरी है, जिसने मुझे गरीबों के लिए लड़ने की ताकत दी है।’ नोटबंदी के फैसले को सही बताते हुए मोदी ने कहा कि गरीबों का हक छीनने वालों को अब हिसाब देना पड़ रहा है। बैंकों का राष्ट्रीयकरण गरीबों के नाम पर हुआ था लेकिन इस देश के आधे से अधिक लोग ऐसे गरीब थे जिन्हें कभी बैंक के दरवाजे तक जाने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने कहा कि सबसे पहले बैंक में गरीबों का खाता खुलवाउंगा तो लोग मेरा मजाक उड़ा रहे थे। बड़े-बड़े लोग अपनी पाकेट में कार्ड रखते हैं। कुछ लोगों की जेब में तो पांच पांच दस दस कार्ड होते हैं। हमने 20 करोड़ गरीबों को रूपे कार्ड दे दिया। अगर इस देश के गरीब को ताकत दी जाए तो गरीबी खत्म हो जाएगी।’ मोदी ने कहा कि पहले नोटें छपती थीं और महंगाई बढ़ रही थी और नोटों के बंडल कहीं छिप जाते थे। ‘मैं अभी पीछे लगा हूं … निकालो आ रहा है … आपने देखा होगा कोने कोने से। कुछ लोग तो गरीबों के पैर पकड़ रहे हैं। ऐसा करो कि मेरा दो तीन लाख रुपये खाते में डाल दो। कभी किसी अमीर को गरीब के पैर पकड़ते नहीं देखा था। आज जिन बेईमान लोगों ने पैसा जमा किया है वो गरीबों के घर पर भी कतार लगाकर खड़े हैं। बैंक के बाहर तो वो कतार लगाता है जिसमें ईमानदारी का माद्दा होता है। बेईमान गरीबों के घर के बाहर चोरी चुपके कतार लगाये हुए हैं।’
उन्होंने कहा कि जब जनधन खाता खोला गया था तब गरीबों को भी पता नहीं था कि ये कैसे काम आएगा। ‘अब बताइये … काम आ रहा है कि नहीं? मैं देश के सभी जनधन खाते वाले गरीबों को कहना चाहता हूं कि जिसका भी पैसा बैंक में रखा है वो उठाइये मत। एक रूपया मत उठाइये। वो आपके घर के चक्कर काटेगा, आपके पैर पकड़ेगा।’ मोदी ने नोटबंदी के कारण हो रही परेशानियों के निदान के लिए 50 दिन का समय मांगते हुए कहा, ‘ये कतार कतार की चर्चा करने वाले नेताओं से पूछना चाहता हूं … भूल गये कि चीनी के लिए भी कभी कतार में खडा रहना पडता था। मिटटी के तेल के लिए कतार लगानी पड़ती थी …. आपने (अन्य दल) इस देश को कतार में 70 साल तक खड़ा किया है। उन कतारों को खत्म करने के लिए ये मैंने आखिरी कतार लगायी है।’ उन्होंने जनधन खाताधारकों से अपील की कि जितने पैसे उनके बैंक में आये हैं, कोई कितना भी दबाव डाले उसे नहीं निकालें। ‘अगर रखे रखा तो मैं कोई रास्ता खोजूंगा। मैं दिमाग लगा रहा हूं अभी। दिमाग खपा रहा हूं। गरीब के खाते में जिन्होंने गैर कानूनी ढंग पैसा से डाला है वो जाए जेल में और गरीब के घर में जाए रुपया।’
मोदी बोले, ‘मैं हैरान हूं। आपने देखा होगा अच्छे अच्छे लोगों के चेहरे से चमक चली गयी है। पहले पूरा दिन मनी मनी करते थे अब मोदी मोदी बोल रहे हैं। मैं देशवासियों को फिर कहता हूं कि आपको कष्ट हो रहा है और देश के लिए आप कष्ट झेल भी रहे हैं। लोग आपको आकर भड़काने की कोशिश करते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘लोग दो तीन घंटे से खड़े हैं। बैंक पैसा नहीं दे रहा है लेकिन कोई गुस्सा नहीं कर रहा है क्योंकि देश की जनता के इरादे नेक हैं। जनता को पता है कि ये ईमानदारी का प्रयास है। जब विश्वास हो जाता है तो ये देश कुछ भी सहने को तैयार होता है, ये मैंने अनुभव किया है।’ मोदी ने कहा कि देश का सामान्य नागरिक बेईमानी से तंग आ चुका है। आज देश के सवा सौ करोड़ लोगों ने कष्ट झेलकर भी इस लडाई को अपने कंधों पर उठा लिया है क्योंकि देश का सामान्य नागरिक बेईमानी नहीं चाहता। मोदी ने कहा कि देश में ऐसी हवा बन गयी थी कि सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। नेताओं की जेब भर दो, काम चल जाएगा। अब वो नहीं चलेगा। पुराने रास्ते बंद हो चुके हैं। असहाय लोगों को आज लगने लगा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को जीतना है। उन्होंने कहा, ‘मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि आपने जो मेहनत की है …. घंटों कतार में बिना खाये पिये खड़े रहे हैं …. मैं मेरे देशवासियों की तपस्या को बेकार नहीं जाने दूंगा। ईमानदारी के जितने रास्ते मुझे सूझेंगे, मैं देश को उस रास्ते पर ले जाने के लिए कोई कमी नहीं रहने दूंगा, ये विश्वास दिलाना चाहता हूं।’
कैशलेस अर्थव्यवस्था की वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि अब मोबाइल फोन में ही बैंक आ गया है। जो खर्च करना है, मोबाइल के जरिए करें। एटीएम पर जाकर नोट निकालना अब जरूरी नहीं है। आप अपने मोबाइल से भी खर्च कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बेईमानी का पैसा बाहर निकालना है और भ्रष्टाचार समाप्त करना है। भविष्य में ये बीमारी खड़ी ना हो, इसके लिए भी दरवाजे बंद करने हैं। मोदी ने जनता से अपील की कि वह मोबाइल पर कारोबार सीखे। ये कोई मुश्किल कार्य नहीं है। बहुत आसानी से पैसे देकर माल खरीदा जा सकता है। वक्त बदल चुका है। ‘बेईमानी के सारे दरवाजे बंद करने के लिए मुझे मदद चाहिए। नोट छाप छाप कर हम बेईमान की मदद नहीं करना चाहते। मैं रात दिन लगा हूं। आपकी तकलीफ मेरी तकलीफ है।’ मोदी ने नोटबंदी से किसानों को समस्या होने की विपक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा, ‘मैं किसानों का विशेष रूप से वंदन करना चाहता हूं कि तकलीफ के बावजूद बुवाई में कमी नहीं आयी। पिछले साल से बुवाई बढ़ी है। वो (विरोधी) भ्रम फैला रहे हैं और निराशा का वातावरण पैदा कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि देश सशक्त है और देश का नौजवान सशक्त है। जिस देश के पास 65 प्रतिशत लोग 35 साल से कम उम्र के हों वो नौजवान देश को कहीं से कहीं पहुंचा सकता है। मोदी ने युवाओं से अपील की कि वे लोगों को सिखायें कि हाथ में नोट नहीं होने के बावजूद पैसे चुकता किये जा सकते हैं। इससे ईमानदारी के सारे रास्ते खुल जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘बेईमानों को संदेश दीजिए। तालियां बजाकर संदेश दीजिए कि देश बेईमानी को स्वीकार नहीं करेगा ईमानदारी की ओर चलेगा। सबको मिलकर सत्तर साल की बीमारी बंद करनी है। 

चुनावी सभा में बोले मनोहर पर्रिकर – दुश्मन उकसाएगा तो उसकी आंखे निकालकर उसके हाथ में रख देंगे

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शनिवार (26 नवंबर) को कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन अगर उसे उकसाया गया तो वह दुश्मन की आंखें निकाल कर उसके हाथ में डाल देगा।
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शनिवार (26 नवंबर) को कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन अगर उसे उकसाया गया तो वह दुश्मन की आंखें निकाल कर उसके हाथ में डाल देगा। गोवा के एल्डोना विधानसभा क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करते हुए पर्रिकर ने कहा, ‘‘हम लड़ने के लिए बेचैन नहीं होते, लेकिन यदि किसी ने देश पर बुरी नजर डाली तो हम उसकी आंखें निकालकर उसके हाथ में रख देंगे, हमारे पास इतनी ताकत है।’’ पर्रिकर ने कहा कि गोवा के लोग दुनिया को बता सकते हैं कि उन्होंने केंद्र में एक ऐसे शख्स को भेजा था जिसने दुश्मन के गाल पर करारा तमाचा जड़ा। तीन दिन पहले पाकिस्तान की ओर से डीजीएमओ स्तर की वार्ता के अनुरोध की तरफ इशारा करते हुए पर्रिकर ने कहा, ‘‘सीमा पर पिछले तीन दिनों से फायरिंग नहीं हुई है क्योंकि यदि वे (पाकिस्तान) एक बार फायरिंग करते हैं तो हम उन पर दो बार फायरिंग करते हैं। हम जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब दे रहे हैं। जब उन्हें यह बात समझ आ गई तो उन्होंने हमसे अनुरोध किया कि हम इसे रोक दें ।’’ सशस्त्र बलों के पूरी तरह तैयार होने की बात पर जोर देते हुए पर्रिकर ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें सिखाया था कि ‘‘यदि तुम खरगोश के शिकार के लिए भी जाओ तो किसी बाघ को मारने के लिए तैयार रहो ।’’

इसके अलावा मनोहर पर्रिकर ने दावा किया कि केंद्र के नोटबंदी के कदम से मुंबई में सुपारी लेकर हत्या करने, हत्या, जबरन वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी समेत अपराध के दर में भारी कमी आई है। पर्रिकर ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया फैसला ऐतिहासिक है। कालाधन, भ्रष्टाचार का धन, आतंक का वित्तपोषण और मादक पदार्थों से मिलने वाले धन को गहरा झटका लगा है।’’उन्होंने दावा किया, ‘‘मुंबई से मेरे एक मित्र बता रहे थे कि सुपारी लेकर की जाने वाली हत्याएं वहां घट गई हैं। सुपारी देने वालों की कमी नहीं है लेकिन देने के लिए पैसा नहीं है। पिछले 20 दिनों में मुंबई में हत्या की दर आधी हो गई है।’’

पर्रिकर ने आगे कहा, ‘‘मुंबई में जबरन वसूली की घटनाएं भी कम हो गई हैं। अगर कोई किसी बिल्डर के पास जाता है और धन वसूली का प्रयास करता है तो वह धन देने को तैयार है लेकिन उस धन का कोई मूल्य नहीं है क्योंकि वो पुराने नोट हैं। इसकी वजह से जो जबरन वसूली करना चाहते थे, उन्होंने भी इसे रोक दिया है। यहां तक कि गोवा में भी बिल्डरों से जबरन वसूली के प्रयास रुक गए हैं।’’

कानून मंत्री ने सीजेआई ठाकुर के दावे से जताई असहमति, कहा- इस साल 120 जजों की नियुक्ति की गई

न्याय मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस साल 120 नियुक्तियां की हैं जो 1990 के बाद से दूसरी बार सबसे अधिक हैं।
न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच मतभेदों का सिलसिला अभी भी जारी है। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने एक बार फिर शनिवार को उच्च न्यायालयों और न्यायाधिकरणों में न्यायाधीशों की कमी का मामला उठाया जबकि विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने जोरदार तरीके से इससे असहमति व्यक्त की। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने कहा, ‘उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के पांच सौ पद रिक्त हैं। ये पद आज कार्यशील होने चाहिए थे परंतु ऐसा नहीं है। इस समय भारत में अदालत के अनेक कक्ष खाली हैं और इनके लिये न्यायाधीश उपलब्ध नहीं है। बड़ी संख्या में प्रस्ताव लंबित है और उम्मीद है सरकार इस संकट को खत्म करने के लिये इसमें हस्तक्षेप करेगी।’ न्यायमूर्ति ठाकुर केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के अखिल भारतीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

प्रधान न्यायाधीश के इस कथन से असहमति व्यक्त करते हुए विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस साल 120 नियुक्तियां की हैं जो 1990 के बाद से दूसरी बार सबसे अधिक हैं। इससे पहले 2013 में सबसे अधिक 121 नियुक्तियां की गई थीं। रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘हम ससम्मान प्रधान न्यायाधीश से असहमति व्यक्त करते हैं। इस साल हमने 120 नियुक्तियां की हैं जो 2013 में 121 नियुक्तियों के बाद सबसे अधिक है। साल 1990 से ही सिर्फ 80 न्यायाधीशों की नियुक्तियां होती रही हैं। अधीनस्थ न्यायपालिका में पांच हजार रिक्तियां हैं जिसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह ऐसा मामला है जिसपर सिर्फ न्यायपालिका को ही ध्यान देना है।’

साथ ही कानून मंत्री ने कहा, ‘जहां तक बुनियादी सुविधाओं का संबंध है तो यह एक सतत् प्रक्रिया है। जहां तक नियुक्तियों का मामला है तो उच्चतम न्यायालय का ही निर्णय है कि प्रक्रिया के प्रतिवेदन को अधिक पारदर्शी, उद्देश्य परक, तर्कसंगत, निष्पक्ष बनाया जाये और सरकार का दृष्टिकोण पिछले तीन महीने से भी अधिक समय से लंबित है और हमें अभी भी उच्चतम न्यायालय का जवाब मिलना शेष है।’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायाधिकरणों में भी ‘मानवशक्ति का अभाव’ है और वे भी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं जिसकी वजह सें मामले पांच से सात साल तक लंबित हैं। इसकी वजह से शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों की इन अर्द्धशासी न्यायिक निकायों की अध्यक्षता करने में दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरणों की स्थिति मुझे आभास दिलाती है कि आप ( न्यायाधिकरण) भी बेहतर नहीं है। आप भी मानवशक्ति की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं। आप न्यायाधिकरण की स्थापना नहीं कर सकते, आप कई स्थानों पर इसकी पीठ गठित नहीं कर सकते क्योंकि आपके पास सदस्य ही नहीं है।

‘गुजरात सीएम’ नरेंद्र मोदी के खिलाफ घूस लेने की याचिका पर बोला सुप्रीम कोर्ट- ये सबूत जीरो हैं, कुछ ठोस लाओ वर्ना याचिका वापस लो

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी समेत कई राजनेताओं के खिलाफ दायर कथित तौर पर भारी रिश्वत देने की याचिका पर जांच कमेटी बैठाने के लिए इंकार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सीएम नरेंद्र मोदी समेत कई राजनेताओं के खिलाफ दायर कथित तौर पर भारी रिश्वत देने की याचिका पर जांच कमेटी बैठाने के लिए इंकार दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वकील और समाजसेवी प्रशांत भूषण द्वारा सूबत के तौर पर जो चीजें दिखाई गईं वे जीरो, झूठी पर विश्वास ना करने योग्य है। गौरतलब है कि प्रशांत भूषण ने कोर्ट के सामने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (आईटी) द्वारा जब्त किए गए कुछ कागजात पेश किए थे। वे दस्तावेज आईटी ने सहारा और बिरला ग्रुप की जगहों पर रेड मारने के बाद जुटाए थे। प्रशांत ने कोर्ट को बताया था कि वे सारे कागजात उनको किसी विस्लटब्लोअर ने सौंपे थे। प्रशांत ने सारे कागजार कॉमन कॉज नाम के एक एनजीओ को दिए थे। उसने ही जनहित याचिका डालकर जांच की मांग की थी। केस की सुनवाई के वक्त वकील शांति भूषण कॉमन कॉज की तरफ से खड़े हुए थे। उन्होंने जनहित याचिका की सुनवाई कर रही बेंच के जस्टिस जीएस केहर और जस्टिस अरुण मिश्रा के सामने दोनों ग्रुप्स के पास से सीज किए गए कागजात रखे थे। लेकिन बेंच ने उनके मानने से इंकार कर दिया। बेंच ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक सहारा ग्रुप के पास से सीज किए गए कागजात फर्जी हैं। हम लोग उनके दम पर जांच के आदेश नहीं दे सकते।’
लेकिन फिर जब भूषण ने बात सहारा से बिरला ग्रुप के पास से मिले कागजात की तरफ घुमाई तो बेंच ने कहा, ‘हम लोगों को मामले की सुनवाई करने में कोई परहेज या दिक्कत नहीं है लेकिन हमारे सामने कोई ठोस सबूत भी तो होना चाहिए। बिरला और सहारा के पास से मिले कागजात कुछ नहीं हैं। ये दोनों जीरो हैं। आपको पक्के सबूत लाने चाहिए।’ बेंच ने भूषण को 14 दिसंबर तक का वक्त देते हुए कहा, ‘अगर आपको कुछ नहीं मिलता तो अपनी याचिका वापस ले लीजिएगा।’ कॉमन कॉज मामले में एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन कमेटी) के गठन की बात कर रहा था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी बिरला ग्रुप के पास से मिले कागजात दिखाकर पीएम मोदी पर निशाना साध चुके हैं। केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा के आपात सत्र के दौरान कहा कि आदित्य बिरला ग्रुप के एक्‍जीक्‍यूटिव प्र‍ेसिडेंट के पास से बराबद 2012 के मैसेज से पता चला कि उसने गुजरात सीएम को पैसे दिए थे। केजरीवाल ने कहा, ‘आदित्य बिरला ग्रुप पर अक्टूबर 2013 में छापा पड़ा था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सभी कागजात ले लिए थे। ग्रुप के एक्‍जीक्‍यूटिव प्र‍ेसिडेंट शुभेंन्दु अमिताभ के लेपटॉप, ब्लैकबेरी को भी लिया गया था। उसमें एक एंट्री में लिखा था गुजरात सीएम 25 करोड़। गुजरात के सीएम के आगे 25 करोड़ और ब्रेकिट में 12 दिए और बाकी ? लिखा था। गुजरात सीएम कौन थे उस वक्त….नरेंद्र मोदी जी 2012 में।

राहुल गांधी की नरेंद्र मोदी को चुनौती, कहा- संसद में आइए फिर देखते हैं उनमें कौनसा इमोशन है

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में आकर बहस करने की चुनौती दी है।
कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद में आकर बहस करने की चुनौती दी है। राहुल ने पत्रकारों से कहा कि जैसे ही पीएम हाउस में आएंगे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सब साफ हो जाएगा। हम भी बोलेंगे और वो भी बोंलेगे। उन्‍होंने कहा, ”मैं कहता हूं हाउस में आइए फिर देखते हैं मोदीजी में कौनसा इमोशन दिखता है।” नोटबंदी को लेकर बहस की मांग कर रहे विपक्ष के हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही सोमवार तक टल जाने के बाद राहुल गांधी ने यह बयान दिया। गौरतलब है कि लोकसभा में विपक्ष बहस के बाद इस फैसले पर वोटिंग कराने की मांग कर रहा है। इसके चलते शीतकालीन सत्र में अभी तक कोई काम नहीं हो पाया है।

शुक्रवार (25 नवंबर) को विपक्ष जहां पीएम के संसद में आने की मांग करता रहा वहीं मोदी भटिंडा में रैली कर रहे थे। रैली के दौरान उन्‍होंने कहा कि कालेधन और भ्रष्टाचार ने मध्यम वर्ग को लूटा है और गरीबों के हक को छीना है। उन्हें वह वापस दिलाना चाहता हूं। नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा, ‘जब लोग इस समय मुश्किलों के दौर में जी रहे थे, ऐसे में भी वे मेरे साथ खड़े थे। उन लोगों का शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। कठिनाईयों का रास्ता भी है, उस रास्ते के लिए आपकी मदद चाहिए। आप के पास जो मोबाइल फोन है। वे सिर्फ फोन नहीं है। मोबाइल फोन को आप अपने बैंक बना सकता है। आप अपना बटुआ बना सकते हैं। रुपए को छुए बिना मोबाइल से व्यापार हो सकता है। डिजिटल कैश की ओर बढ़ना है। मोबाइल फोन में बैंकों के ऐप होते हैं। व्यापारियों को शिक्षित करें।’

इधर राज्‍य सभा में भी हंगामा जारी रहा। विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी से माफी मांगने को कहा। विपक्ष का कहना है कि मोदी ने अपने बयान से विपक्ष को भ्रष्‍टाचारी बताया है।

दिल्ली-एनसीआर में अब नहीं फूटेंगे पटाखे, सुप्रीम कोर्ट ने बेचने पर लगाया बैन

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखे बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखे बेचने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। यह फैसला बढ़ते प्रदूषण की वजह से लिया गया है। रोक कब तक के लिए लगी है यह फिलहाल नहीं बताया गया है। गौरतलब है कि पिछले महीने दिवाली के बाद दिल्ली में प्रदूषण का लेवल काफी बढ़ गया था। पूरा आसमान धुंए की चपेट में था। लोगों की आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। बताया गया कि वह दिवाली पर चलाए गए पटाखों की वजह से हो रहा था। काफी दिनों बाद आसमान साफ हुआ।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली में खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके एयर पॉल्यूशन और स्मॉग से निपटने में “ढिलाई” दिखा रही दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई थी। शहर में क्रेन के जरिए पानी का छिड़काव करने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए एनजीटी ने पूछा था कि इस काम के लिए क्रेन का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है, हेलीकॉप्टर का क्यों नहीं।

30 नवंबर तक बढ़ सकती है पुराने नोट चलाने की तारीख, आज है आखिरी दिन: सूत्र

नई दिल्ली। 8 नवंबर की नोटबंदी के बाद 500 और 1000 के पुराने नोटों को पेट्रोल पंपों, अस्‍पतालों, मेडिकल स्‍टोर्स लिए जान की आज आखिरी तारीख है। गुरुवार रात 12 बजे से इन जगहों पर भी पुराने नोट नहीं चल पाएंगे। इस बीच खबर है कि सरकार पुराने नोटों के चलन की तारीख बढ़ा सकती है। सूत्रों के अनुसार सरकार नया ऐलान करते हुए पुराने नोटों के चलन की तारीख 30 नवंबर कर सकती है जिसे लेकर शाम तक ऐलान संभव है।

बता दें कि नोटबंदी के बाद 24 नवंबर तक यह नोट चुनिंदा जगहों पर चल रहे थे जिसकी मियाद आज रात 12 बजे खत्‍म हो रही है। इसके बाद सरकार इस पर अगर कोई फैसला लेती है इसकी जानकारी गुरुवार को दी जा सकती है। हालांकि अभी इसे लेकर कोई स्‍पष्‍ट जानकारी उपलब्‍ध नहीं है। यह पुराने नोट 31 दिसंबर तक बैकों में जमा किए जा सकेंगे साथ ही बैंकों में इन्हें 31 दिसंबर तक बदलवाया जा सकता है।

अब होगा यह

आज नोटबंदी का 16वां दिन है और अब भी लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुई है। गुरुवार रात 12 बजे से पुराने नोट पूरी तरह से बंद होने के चलते सरकार कोई नए कदम उठा सकती है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि सरकार गुरुवार को अस्‍पतालों और पेट्रोल पंप पर इनके चलन की तारीख को लेकर कोई फैसला ले लेकिन इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी या बयान नहीं आया है।

शुक्रवार से यह बचेंगे विकल्‍प

गुरुवार को पुराने नोट पूरी तरह से बंद होने के बाद लोगों के पास सिर्फ यही विकल्‍प बचेगा कि वो इन्‍हें बैंकों या डाकघरों में जाकर जमा करवा दें। वहीं बैंकों में लगी लाइन में खड़े होकर इन्‍हें बदलवा सकते हैं।(नई दुनिया इनपुट )

 

पूर्व प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को बताया “संगठित लूट”

देश के पूर्व प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के फैसले पर आज राज्य सभा में अपनी बात रखी।
संसद के शीतकालीन सत्र का आज सातवां दिन है और नोटबंदी के मुद्दे पर बोलने के लिए देश के पूर्व प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस फैसले पर अपनी बात रखी। सिंह ने नोटबंदी को संगठित तरीके से की जाने वाली लूट करार दिया है और पीएम मोदी को जल्दी ही इसका समाधान ढंढने की बात कही है।

सिंह ने इसे लंबे समय में फायदेमंद बताने वालों को जॉन्किंस के लंबे समय में सभी के खत्म हो जाने की बात को याद दिलाया। सिंह ने राज्य सभा में फैसले से जुड़ी कई कमियों पर अपनी बात रखते हुए इस फैसले के खराब क्रियान्वयन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने इस फैसले से आतंकवाद खत्म करने की बात कही और मैं इससे सहमत भी हूं लेकिन इसे मैनेज करने में बड़ी चूक हुई है।

इसके अलावा डॉ. सिंह ने पीएम के लोगों से 50 दिन का समय मांगने वाली बात पर कहा कि गरीबों के लिए 50 दिन भी बहुत पीड़ादायक हैं। साथ ही उन्होंने फैसले से देश की अर्थव्यवस्था पर खराब असर पड़ने की बात कही उन्होंने बताया कि 55% खेती करने वाले लोग इस फैसले से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।

साथ ही उन्होंने जीडीपी के 2% तक घट जाने की भी आशंका जताई और इसे असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए काफी नुकसान दायक बताया

नोटबंदी के बाद जन धन खातों में आए 32 गुना ज्यादा पैसे, औसतन हर हफ्ते जमा हो रहे हैं 10500 करोड़

नौ नवंबर 2016 तक देश भर के जन धन खातों में 45,636.61 करोड़ रुपये जमा थे। 22 नवंबर को सभी जन धन खातों में जमा कुल राशि बढ़कर 66,636 करोड़ रुपये हो गयी थी।
नोटबंदी की घोषणा के बाद 14 दिनों में प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खुले बैंक खातों में जमा की जाने वाली राशि में 30 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार नोटबंदी की घोषणा के बाद जन धन खातों में 21 हजार करोड़ रुपये जमा किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की थी। इन आंकड़ों के अनुसार पिछले दो हफ्तों में जन धन खातों में जमा की जाने वाली साप्ताहिक राशि में 3200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।  31 मार्च 2016 से नौ नवंबर 2016 के बीच जन धन खातों में औसत साप्ताहिक जमाराशि 311 करोड़ थी। पिछले दो हफ्तों में ये राशि बढ़कर 10,500 करोड़ रुपये हो गई है। इस तरह आम तौर पर जितनी राशि जन धन खातों में एक साल में जमा होती करीब उतनी ही राशि पिछले 14 दिनों में जमा की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2014 में जन धन योजना शुरू की थी। तब से नौ नवंबर 2016 तक देश भर के जन धन खातों में 45,636.61 करोड़ रुपये जमा थे। 22 नवंबर को सभी जन धन खातों में जमा कुल राशि बढ़कर 66,636 करोड़ रुपये हो गयी थी। सरकारी सूत्रों के अनुसार जन धन खातों में पैसे जमा करने के मामले में सबसे ज्यादा तेजी पश्चिम बंगाल और कर्नाटक में आई है। नौ नवंबर तक पश्चिम बंगालके जन धन खातों में 6286.65 करोड़ रुपये जमा थे।  जन धन खातों और जीरो बैलेंस खातों में सबसे अधिक 7493.50 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश में जमा किए गए हैं। कर्नाटक में नौ नवंबर को इन खातों में 1456.96 करोड़ रुपये जमा किए गए। नौ नवंबर के बाद के राज्यवार आंकड़े अभी नहीं आए हैं।

जन धन योजना के तहत खोले हुए 25.51 करोड़ बैंक खातों में करीब 10 प्रतिशत (2.44 करोड़) पश्चिम बंगाल में खोले गए थे लेकिन इन खातों में जमा कुल राशि का करीब 14 प्रतिशत राज्य में जमा हुए हैं। पश्चिम बंगाल में जन धन खातों में औसतन 2577.83 रुपये जमा हैं। इस मामले में पश्चिम बंगाल पंजाब (3400.88 रुपये) और हरियाणा (3084 रुपये) के बाद देश में तीसरे स्थान पर है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार कालेधन को ठिकाने लगाने में जुटे कुछ लोग जन धन खातों की दुरुपयोग की कोशिश कर सकते हैं।

जन धन खातों में 50 हजार रुपये तक ही जमा किए जा सकते हैं। नौ नवंबर तक जन धन खातों में जमा राशि का राष्ट्रीय औसत 1788.85 रुपये था। इनमें से 23.27 प्रतिशत खाते जीरो बैलेंस खाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल मई में आगाह किया था कि जन धन खातों का दुरुपयोग कालेधन को सफेद करने में किया जा सकता है। नोटबंदी लागू होने के बाद वित्त मंत्रालय ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि जन धन खातों पर विशेष नजर रखी जाए और सभी खाताधारकों से केवाईसी भरवाई जाए।

बीजेपी समर्थक सांसद के दामाद के पास मिले “लापता” 3.5 करोड़ के पुराने नोट, गिरफ्तार

दीमापुर एयरपोर्ट पर पकड़े गए साढ़े तीन करोड़ रुपयों पर दावा करने वाले झिमोमी के सांसद पिता नगालैंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
नगालैंड के हवाई अड्डे से मगंलवार (22 नवंबर) को लापता हुए साढ़े तीन करोड़ रुपये बुधवार (23 नवंबर) को बरामद कर लिए गए। ये पूरी राशि 500 और 1000 के बंद किए जा चुके नोटों के रूप में थी जिसे सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों ने तब जब्त किया था जब इन्हें एक चार्टेड फ्लाइट से लाया जा रहा था। बाद में खबर आई कि ये पूरी राशि हवाईअड्डे से गायब हो गई। नगालैंड पुलिस के प्रमुख एलएल दोउंगल ने बताया, “सीआईएसएफ द्वारा जब्त किए गए पैसे आयकर विभाग के अधिकारियों को सौंप दिए गए।  नगा कारोबारी अनातो झिमोमी ने आयकर छूट से जुड़े प्रमाणपत्र दिखाए जिसके बाद ये पैसे आयकर विभाग ने उन्हें वापस कर दिए।” झिमोमी नगालैंड पीपल्स फ्रंट के नेता और राज्य के एकमात्र सांसद नेफियू रियो के दामाद हैं। रियो केंद्र की बीजेपीनीत एनडीए सरकार के समर्थक हैं। झिमोमी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली स्थित आयकर विभाग और खुफिया अधिकारियों को अंदेशा था कि बंद किए गए नोटों के रूप में बरामद साढ़े तीन करोड़ रुपये किसी बड़े मनी लॉन्डरिंग रैकेट का हिस्सा हो सकते हैं।  इनका सूत्रधार पूर्वोत्तर के आदिवासियों को मिलने वाले टैक्स छूट और छोटे एयरपोर्ट पर तुलनात्मक रूप से कम सुरक्षा व्यवस्था होने का लाभ उठाना रहा है। झिमोमी के ससुर नेफियू नगालैंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। झिमोमी के पिता खेकिहो झिमोमी भी नगा पीपल्स फ्रंट पार्टी के राज्य सभा सांसद रह चुके हैं।

आयकर विभाग की छानबीन में पता चला है कि दिल्ली-एनसीआर के कुछ कारोबारियों ने झिमोमी को ये पैसे दिए थे। इन कारोबारियों में गुड़गांव स्थित एक प्रिंटिंग और पैकेजिंग कंपनी के मालिक भी शामिल हैं।  झामोमी ने हिसार के छोटे एयरफील्ड की साधारण सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठाते हुए एक चार्टेड विमान से बंद किए गए 500 और 1000 के नोटों में कम से कम 11 करोड़ रुपये दीमापुर पहुंचाए। इन पैसों को झिमोमी ने अपने बैंक खातों में जमा कराया। माना जा रहा है कि झिमोमी सभी कारोबारियों को आरटीजीएस के माध्यम से उनके पैसे लौटा रहा था। आयकर विभाग को पता चला है कि झिमोमी ने कथित तौर पर अपने दिमापुर स्थित एक्सिस बैंक के खाते में पहले भी सात करोड़ रुपये जमा कराए थे।

आयकर विभाग के सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार को बताया कि झिमोमी ने “कबूल” कर लिया है कि वो उसी विमान से 12 नवंबर, 14 नवंबर और 14 नवंबर को भी हिसार से दीमापुर बंद नोटों में बड़ी धनराशि ले जा चुका है। आयकर अधिकारियों ने गुड़गांव स्थित प्रिंटिंग और पैकेजिंग कारोबारी अनिल सूद से भी पूछताछ की है जिनके अकाउंट में झिमोमी ने आरटीजीएस से पैसे जमा किए थे। आयकर विभाग चार्टेड विमान उपलब्ध कराने वाली कंपनी की भी जांच कर रही है क्योंकि झिमोमी ने पूछताछ में दावा किया कि पिछली बार जो धनराशि वो लेकर आया थो विमान कंपनी का था। जांच अधिकारियों ने हिसार फ्लाइंग क्लब पर सुरक्षा व्यवस्था को भी लेकर भी खतरे की घंटी बजा दी है।

2015 में नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले अमर्त्य सेन को नालंदा विश्वविद्यालय बोर्ड में नहीं मिली जगह, बीजेपी सांसद हुए शामिल

नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को नालंदा यूनिवर्सिटी के बोर्ड में जगह नहीं मिली।
नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन को नालंदा यूनिवर्सिटी के बोर्ड में जगह नहीं मिली। वह यूनिवर्सिटी के चांसलर, गवर्निंग बोर्ड के मेंबर रह चुके हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में सेन ने मोदी सरकार के खिलाफ काफी कुछ कहा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना के बाद फरवरी 2015 में चांसलर के पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद वह गवर्निंग बॉडी के सदस्य रहे। उन्हें 2007 में मनमोहन सरकार द्वारा नालंदा यूनिवर्सिटी का पुनः प्रवर्तन करने के बाद नालंदा मेंटर ग्रुप (NMG) का सदस्य बनाया गया था। सेन के अलावा हॉवर्ड के पूर्व प्रोफेसर और टीएमसी सांसद सुगता बोस और यूके के अर्थशास्त्री मेघनाथ देसाई को भी नए बोर्ड में जगह नहीं मिली है। वे दोनों भी NMG के सदस्य थे। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि साथ ही साथ नए बोर्ड का भी गठन हो गया है। नए बोर्ड में चांसलर, वाइस चांसलर और पांच सदस्य होंगे। ये पांच सदस्य भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया, लाउस पीडीआर और थाईलैंड के होंगे। बोर्ड को तीन साल तक अधिकतम वित्त सहायता भी प्रदान की जाती है।
सूत्रों से पता चला है कि भारत की तरफ से पूर्व नौकरशाह एन के सिंह को चुना गया है। वह भाजपा सदस्य और बिहार से राज्यसभा सांसद भी हैं। उनके अलावा केंद्र सरकार द्वारा तीन और नामों को दिया गया है। उनमें प्रोफेसर अरविंद शर्मा (धार्मिक अध्ययन संकाय, मैकगिल विश्वविद्यालय, कनाडा), प्रोफेसर लोकश चंद्रा (अध्यक्ष, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद) और डॉ अरविंद पनगढिया (वाइस चेयरमैन, नीति आयोग) के नाम शामिल हैं।
जानकारी मिली है कि प्रणब मुर्खजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी के विजिटर की क्षमता से गर्वनिंग बॉडी के निर्माण की इजाजत दी थी। गौरतलब है कि नालंदा विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2013 को अगस्त 2013 में राज्यसभा के सामने लाया गया था। जिसमें नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम 2010 के कुछ प्रावधानों में संशोधन करने को कहा गया था। लेकिन फिर लोकसभा चुनाव की वजह से उसपर काम नहीं हो पाया था।