ज्योतिष

हनुमान जयंती आज, सैकड़ों साल बाद बन रहे हैं ये विशेष योग, जानिए क्या हैं मान्यताएं

आज हनुमान जयंती है. बजरंग बली धीर-वीर परम रामभक्त हनुमान जी के भक्तों के लिए भगवान हनुमान का जन्मदिन यानी उनकी जयंती विशेष महत्त्व रखती है. पंडितों और ज्योतिषियों की मानें तो इस साल की हनुमान जयंती विशेष महत्त्वपूर्ण है. बताया जा रहा है कि 120 सालों के बाद बाद इस साल की हनुमान जयंती पर बड़े ही खास संयोग बन रहे हैं. इसलिए इस दिन हनुमानजी की पूजा-अर्चना से भक्तों पर ख़ास अनुकम्पा होगी.
 
ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल हनुमान जयंती पर कुछ वैसा ही योग बन रहा है, जैसा कि शास्त्रों में हनुमानजी के जन्म के समय बताए गए हैं. इस दिन मंगलवार, पूर्ण‍िमा तिथि, चित्रा नक्षत्र रहेगा. पोथियों और शास्त्रों में अंजनीपुत्र हनुमान के जन्म के समय भी यही योग बताए गए हैं.
 
साथ ही इस दिन एक विशेष योग गजकेसरी भी बन रह है और दिन का योग अमृत रहेगा, जो शुभदायी माना जाता है. ज्योतिषियों के अनुसार, जिन व्यक्तियों पर कर्माधीश शनि महाराज की साढ़ेसाती या उनकी ढैया चल रही होगी तो यह दिन उनके लिए बहुत शुभ रहेगा. इस दिन हनुमानजी की पूजा व आराधना से ये दोष मलिन होने लगेंगे.
 
उल्लेखनीय है कि मारुतिनंदन हनुमानजी देवाधिदेव भगवान शिव के 11वें अवतार माने जाते हैं. वे वानरराज केसरी और देवी अंजना के यहां इस धरती पर अवतरित हुए. उनकी रामभक्ति और राम कार्य को सेवा की पराकाष्ठा माना जाता है

रामनवमी पर बना ले दोस्‍तों के दिल में खास जगह

 रामनवमी पर चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को हर साल नये विक्रम संवत्सर का प्रारंभ होता है और उसके आठ दिन बाद ही चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को एक पर्व राम जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिसे रामनवमी के नाम से जानते हैं. इस पर्व को पूरे देश में बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. रामनवमी, भगवान राम की यादों को समर्पित है. राम को ‘मर्यादा पुरुषोतम’ कहा जाता है. राम को भगवान विष्णु का अवतार भी कहा गया है. यही कारण है कि इस दिन लोग अपने दोस्‍तों को इस पर्व की शुभकामना देना नहीं भूलते. सुबह से ही हमारे वॉट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया के माध्‍यम इन एसएमएस से भर जाते हैं. 
आज प्रभु राम ने लिया अवतार,
जैसे संत सौम्‍य है रामजी,
वैसे ही आपका जीवन भी मंगलमय हो.
राम नवमी मुबारक हो.
 
राम नवमी के अवसर पर,
आप और आपके परिवार पर,
राम जी का आशीर्वाद, हमेशा बना रहे,
हमारी तरफ से आपको रामनवमी की शुभकामनाएं.
 
मन में जिनके श्री राम हैं,
उसके ही बैकुंठ-धाम हैं,
उनपर जिसने जीवन वार दिया,
उसका सदा होता कल्याण है,
आपको रामनवमी की बधाई.

नवरात्र के आठवें दिन मां के आठवें स्‍वरूप महागौरी की पूजा की जाती है. शंख और चन्द्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी महागौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरुप हैं. यह भगवान शिवजी की अर्धांगिनी हैं. कठोर तपस्या के बाद देवी ने शिवजी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया था.

महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं तथा भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक कुंवारी कन्याओं को भोजन करवाने का विधान है लेकिन अष्टमी के दिन का विशेष महत्व है. इस दिन मां को चुनरी भेट करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

मां दुर्गा का आठवां रुप महागौरी व्यक्ति के भीतर पल रहे कुत्सित और मलिन विचारों को समाप्त कर प्रज्ञा और ज्ञान की ज्योति जलाता है. मां का ध्यान करने से व्यक्ति को आत्मिक ज्ञान की अनुभूति होती है उसके भीतर श्रद्धा विश्वास व निष्ठ की भावना बढ़ाता है. मां दुर्गा की अष्टम शक्ति है महागौरी जिसकी आराधना से उसके भक्तों को जीवन के सही राह का ज्ञान होता है जिस पर चलकर वह अपने जीवन का सार्थक बना सकता है.

भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था. देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने इन्हें स्वीकार किया और गंगा जल की धार जैसे ही देवी पर पड़ी देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो गईं और उन्हें मां गौरी नाम मिला.

माना जाता है कि माता सीता ने श्रीराम की प्राप्ति के लिए महागौरी की पूजा की थी और इनकी पूजा करने से शादी-विवाह के कार्यों में आ रही बाधा खत्‍म हो जाती है. कहा जाता है कि विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है.

मां महागौरी का मंत्र
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दघान्महादेवप्रमोददा।।

एक दिन है अष्‍टमी और नवमी तिथि
चैत्र नवरात्र की अष्‍टमी और नवमी तिथि एक दिन यानि 4 अप्रैल को है. सुबह 10:10 बजे अष्‍टमी तिथि के खत्‍म होने के बाद नवमी तिथि आरंभ हो जाएगी. दोनों तिथियां एक साथ होने से मां के आठवें और नौवें स्‍वरूप की पूजा भी एक साथ ही किया जाना चाहिए. इसके साथ ही भगवना श्रीराम की जन्‍मतिथि भी इसी दिन है, तो इसके साथ राम नवमी भी मनाई जाएगी.

नवरात्र के सातवें दिन की जाती है मां कालरात्रि की पूजा, जानें किस मंत्र से करें मां का खुश

नवरात्र के सातवें दिन महाशक्ति मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से काल का नाश होता है. इसी वजह से मां के इस रूप को कालरात्रि कहा जाता है. असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था. इनकी पूजा शुभ फलदायी होने के कारण इन्हें 'शुभंकारी' भी कहते हैं.

इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित रहता है. इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है. मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं. इसी कारण इनका एक नाम शुभंकारी भी है.

मां कालरात्रि का मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

मां कालरात्रि का रूप
देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में विधुत की माला है. इनके चार हाथ है जिसमें इन्होंने एक हाथ में कटार तथा एक हाथ में लोहे कांटा धारण किया हुआ है. इसके अलावा इनके दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में है. इनके तीन नेत्र है और इनके श्वास से अग्नि निकलती है. कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है.

चैत्र नवरात्र: जानें कलश स्थापना की संपूर्ण विधि, मंत्र और महूर्त

 

28 मार्च से चैत्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं। नवरात्र में कलश स्थापना या घटस्थापना का बड़ा महत्व है। कोई भी पूजा तभी सफल होती है जब पूजा विधि-विधान से हो। इसके लिए पूजा विधि का ज्ञान होना आवश्यक है। इस कलश स्थापना विधि से आप पंडित के बिना भी स्वयं ही पूजा कर सकते हैं।

​कलश स्थापना के लिए पूजन सामग्री 
मिट्टी का पात्र (जौ बोने के लिए), जौ बोने के लिए शुद्ध मिट्टी, बोने के लिए जौ, दो कलश (1 शांति कलश और दूसरा पूजा कलश), कलश में भरने के लिए शुद्ध जल, गंगाजल, मौली, इत्र, साबुत सुपारी, दूर्वा, कलश में डालने के लिए सिक्के, पंचरत्न, सप्तधान्य (सात प्रकार का अनाज), सप्तमृत्तिका, सर्वऔषधी, पंचपल्लव, अशोक या आम के 5 पत्ते, कलश ढकने के लिए मिट्टी का दीया, ढक्कन में रखने के लिए बिना टूटे चावल, धूप, दीप, नैवेद्य (मिठाई), फल, लाल रंग का अक्षत (चावल), दूध, दही, घी, शहद, फूल, अगरबत्ती, देवी के लिए वस्त्र पानी वाला नारियल और नारियल पर लपेटने के लिए लाल कपड़ा।
 
कलश स्थापना विधि
सुबह स्नान करके पूजन सामग्री के साथ पूजा स्थल पर पूर्वाभिमुख (पूर्व दिशा की ओर मुंह करके) आसन लगाकर बैठें। उसके बाद नीचे दी गई विधि अनुसार पूजा प्रारंभ करें-
घट स्थापना मुहूर्त- सुबह 08:26 से 10:23
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- सुबह 08:26, 28 मार्च 2017
प्रतिपदा तिथि समाप्त- सुबह- 05:44, 29 मार्च 2017
 
1. नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण कर पूजन सामग्री और अपने शरीर पर जल छिड़कें
    ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोअपी वा
     य: स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाहान्तर: शुचि:
2. हाथ में अक्षत, फूल, और जल लेकर पूजा का संकल्प करें।

3. माता शैलपुत्री की मूर्ती के सामने दोनों कलश मिट्टी के ऊपर रखकर हाथ में अक्षत, फूल, और गंगाजल लेकर वरूण देव का आवाहन करें। बाएं भाग वाला कलश शांति कलश होगा। इसी कलश में सर्वऔषधी, पंचरत्न डालें। दोनों कलश के नीचे रखी मिट्टी में सप्तधान्य और सप्तमृतिका मिलाएं। आम के पत्ते को दूसरे कलश में डालें। इसी कलश के ऊपर एक पात्र में अनाज भरकर उसके ऊपर एक दीया जलाएं। शांति कलश में पंचपल्लव डालकर उसके ऊपर पानी वाला नारियल रखकर लाल वस्त्र से लपेट दें। दोनों कलश के बीच में जौ बो दें।

4. अब नीचे लिखे मंत्र से देवी का ध्यान करें।
  खडगं चक्र गदेषु चाप परिघांछूलं भुशुण्डीं शिर:।
  शंखं सन्दधतीं करैस्त्रि नयनां सर्वांग भूषावृताम।।
  नीलाश्म द्युतिमास्य पाद दशकां सेवे महाकालिकाम।
  यामस्तीत स्वपिते हरो कमलजो हन्तुं मधुं कैटभम॥

4. इसके बाद बारी-बारी से पूजन सामग्री, अक्षत धूप, दीप नैवेध और वस्त्र के साथ विधिवत पूजा करें।
5. अंत में आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।

अलग-अलग राशियों का भविष्य जानें कैसा रहेगा 2017

जाने  साल 2017  कैसा होगा आप के लिए    
राशि फल 
मेष (Aries) राशि के बारे में राशि स्वामी: मंगल | शुभ रत्न: मूंगा | शुभ रुद्राक्ष: तीन मुखी | शुभ दिशा: दक्षिण आपको अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए आपको कठोर परिश्रम करना पड़ सकता है, साल के शुरुआती महीनों में थोड़ी कोशिश करके अपने खर्चों पर काबू रखें। पारिवारिक स्तर पर अधिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा, काफी सारी चीजें सामान्य रहेंगी। शिक्षा के लिहाज से यह वर्ष लाभदायक सिद्ध होगा; प्रतियोगी परिक्षाओं और विदेश में पढ़ने का सपना देखने वाले छात्रों को इस साल थोड़ी अधिक मेहनत करनी पड़ेगी। वैवाहिक लोगों के लिए यह साल वैवाहिक जीवन बेहद खुशियों भरा बीतेगा, वर्ष के अंत तक अविवाहित लोगों के लिए अच्छे रिश्ते आने व विवाह होने की संभावना है। इस वर्ष लाल रंग आपके लिए काफी शुभ साबित होगा। आप सर दर्द, तनाव, अनिद्रा आदि के शिकार हो सकते हैं।

 वृषभ (Taurus) राशि के बारे में राशि स्वामी: शुक्र | शुभ रत्न: हीरा | शुभ रुद्राक्ष: छह मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: दक्षिण पूरब धन, व्यापार और कारोबार के नजरिए से यह साल जीवन में कुछ नया करने के लिए प्रेरित करेगा। फिजूलखर्ची पर कंट्रोल करना बहुत जरूरी है। छात्रों के लिए यह वर्ष अनुकूल रहेगा, सफलता अवश्य मिलेगी। जिनको अभी तक नौकरी नहीं मिली है उन्हें आने वाले समय में कामयाबी मिलेगी। पारिवारिक सुख सामान्य बना रहेगा। परिवार में किसी नए सदस्य के आने की भी संभावना है। संपत्ति विवाद या बंटवारे को लेकर बात करते समय अपने क्रोध पर काबू रखें। जीवनसाथी की तलाश करने वालों को थोड़ा निराश होना पड़ सकता है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। वाहन चलाते हुए पूर्ण सावधानी अपनाने की जरूरत है।

 मिथुन (Gemini)राशि के बारे में राशि स्वामी: बुध | शुभ रत्न: पन्ना | शुभ रुद्राक्ष: चार मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: उत्तर धन के मामले में यह साल काफी भाग्यशाली साबित होगा। इस साल नए प्रोजेक्ट या नई जॉब मिल सकर्ती है। प्रॉपर्टी या शेयर बाजार में निवेश करना लाभदायक हो सकता है। छात्रों को काफी मेहनत करनी होगी। जो छात्र उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें अवश्य सफलता मिलेगी। नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। पारिवारिक स्तर पर इस साल आपको खुशियां हासिल होंगी। घर परिवार में सब आपका साथ देते दिखेंगे। इस साल घर में किसी नए सदस्य की एंट्री हो सकती है, संतान सुख की प्राप्ति भी हो सकती है। साथी के साथ चल रही अनबन खत्म हो सकती है, जो लोग शादी के लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे हैं उनकी तलाश समाप्त हो सकती है। किसी को प्रपोज करने का सोच रहे हैं तो भी यह एक बेहतरीन समय है। बीमारियों से भी सावधान रहने की जरूरत है। 

कर्क (Cancer) राशि के बारे में राशि स्वामी: चंद्रमा | शुभ रत्न: मोती | शुभ रुद्राक्ष: दो मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: उत्तर पश्चिम आपको बेहद सोच समझ कर काम करना चाहिए। यह साल आपके धैर्य की परीक्षा लेता दिखेगा, लेकिन इससे घबराने की जगह आपको संयम से काम लेना चाहिए। पैसों के मामलों में साल आपके लिए अच्छा साबित हो सकता है, कहीं से अचानक धन आ सकता है। छात्रों को प्रतियोगी परिक्षाओं का भी परिणाम आपके पक्ष में ही नजर आएगा। नौकरी पेशा लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है। प्रोमोशन, अच्छी जॉब, वेतन में बढ़ोतरी के साथ के भी योग दिख रहे हैं। पारिवारिक स्तर पर यह साल बेहद शानदार साबित होगा। घर-परिवार के साथ इस साल आपको अपने दोस्तों और परिचितों का भी साथ मिलेगा। प्रेम संबंधों और दांपत्य जीवन के लिए यह साल काफी अच्छा साबित होगा। स्वास्थ्य स्तर पर भी अधिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।

 सिंह (Leo) राशि के बारे में राशि स्वामी: सूर्य | शुभ रत्न: माणिक्य | शुभ रुद्राक्ष: एक मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: पूरब यह साल व्यापारी वर्ग के लिए शानदार साबित होगा। धन आगमन के साथ ही इस साल निवेश किए गए धन पर भी आपको अधिक लाभ हासिल होगा। जो छात्र इस साल कोई नया सीखना चाहते हैं उनके लिए यह साल काफी फायदेमंद और लाभकारी सिद्ध होगा। पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी। उच्च शिक्षा या विदेश में शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए यह साल अनुकूल है। कार्यस्थल पर भी लाभ होगा, नौकरी बदलने के भी योग हैं। परिवार में स्वास्थ्य को लेकर समस्याएं हो सकती हैं। रिश्तों को मजबूत बनाने और उन्हें नए आयाम तक पहुंचाने के लिए यह साल काफी अच्छा है। शादी के लिए इच्छुक जातकों को भी नए रिश्तें मिल सकते हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। 

कन्या (Virgo) राशि के बारे में राशि स्वामी: बुध | शुभ रत्न: पन्ना | शुभ रुद्राक्ष: चार मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: उत्तर इस साल आपका पैसा या कोई कोई कीमती सामान चोरी या गुम होने के संकेत हैं। खर्च आसमान छू सकते हैं, फिजुलखर्ची के कारण आपको धन की कमी हो सकती है। बिजनेस से जुड़े लोगों को इस साल अपना व्यवसाय बढ़ाने के कई मौके मिलेंगे परंतु पार्टनरशिप में नुकसान भी हो सकता है। छात्रों को सफलता प्राप्त करने के लिए विशेष मेहनत करनी पड़ सकती है, वर्ष के अंत में मेहनत का पूर्ण फल मिलता दिखाई देगा। पारिवारिक स्तर पर चीजें काफी सामान्य रहेंगी, मनमुटाव हो सकता है। जीवनसाथी के किसी को प्रपोज करने या शादी के लिए जीवनसाथी देखने के लिए अधिक लाभकारी नहीं है। सेहत को लेकर कोई बड़ी समस्याएं नहीं आएगी। 

तुला (Libra) राशि के बारे में राशि स्वामी: शुक्र | शुभ रत्न:  हीरा | शुभ रुद्राक्ष: छह मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: दक्षिण पूरब यह साल मिला-जुला साबित होगा। जहां आर्थिक स्तर पर मुनाफा होता दिखेगा वहीं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से दो-चार होना पड़ सकता है। यदि कोई नया बिजनेस शुरु करना चाहते हैं तो यह समय शुभ है। छात्रों को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी एवं फल मिलने में देरी होगी। प्रतियोगी परिक्षाओं में भाग लेने वाले और विदेश जाने के इच्छुक छात्रों को विशेष मेहनत करनी होगी। पारिवारिक स्तर पर सावधान रहने की आवश्यकता है, घर में किसी सदस्य की तबीयत खराब हो सकती है। किसी को प्रपोज करने का सोच रहे हैं तो थोड़ा इंतजार करना सही होगा। दांपत्य एवं लव लाइफ में गलतफहमियों के कारण आपके आपसी रिश्ते कमजोर होंगे। इस साल मौसम जनित बीमारियों से बचकर रहना अनिवार्य है। 

वृश्चिक (Scorpio) राशि के बारे में राशि स्वामी: मंगल | शुभ रत्न: मूंगा | शुभ रुद्राक्ष: तीन मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: दक्षिण धन संबंधी मामलों के आपको फायदा होगा। इस साल अगर कोई नया जॉब या काम शुरु करना है, भाग्य आपके साथ है। इस साल निवेश किए गए धन पर भी आपको अधिक लाभ हासिल होगा। छात्रों के लिए साल संतोषजनक रहेगा, मेहनत का फल मिलेगा। ऑफिस या कार्यस्थल पर सहयोगियों से मनमुटाव हो सकता है। पारिवारिक जीवन में सामान्य रहेगा, साल के मध्य में दांपत्य जीवन में कुछ अनबन हो सकती है। नए रिश्ते, दोस्त या संबंध बनाने के लिए उपयुक्त समय है। किसी को प्रपोज करने का सोच रहे हैं तो करना सही होगा। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम होंगी, बीमारियों से भी सावधान रहने की जरूरत है।

 धनु (Sagittarius) राशि के बारे में राशि स्वामी :गुरु | शुभ रत्न:पुखराज | शुभ रुद्राक्ष: पांच मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: उत्तर पूरब यह वर्ष आपके लिए उतार-चढ़ाव भरा होगा। इस साल जितना हो सके पैसा बचाने पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि आय कम और खर्चा अधिक होने की संभावना है। कोई नई जमीन या वाहन खरीदने से पहले उसके विषय में अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लें। छात्रों के लिए अन्य वर्षों की अपेक्षा अधिक लाभदायी है। कला, साहित्य या प्रबंधन से जुड़े छात्रों को अपेक्षाकृत अधिक सफलता मिल सकती है। पारिवारिक स्तर पर यह साल काफी मिला-जुला साबित होगा। घर पर किसी धार्मिक आयोजन या किसी धार्मिक जगह घूमने का प्लान बन सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती है। गाड़ी चलाते समय या सड़क पार करते हुए सावधानी बरतें।

 मकर (Capricon) राशि के बारे में राशि स्वामी: शनि | शुभ रत्न: नीलम | शुभ रुद्राक्ष: सात मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: पश्चिम यह साल आपके लिए पैसों के मामलों में सामान्य होगा, ना ही अधिक घाटा और ना ही अधिक फायदा होगा। आर्थिक जीवन एक समान पटरी पर चलेगा अतः बचत की आदत डालने का यह सही समय है। शेयर बाजार में निवेश के लिए यह समय बेहतर है। काम या व्यापार के सिलसिले में की गई यात्राओं का इस साल आपको अवश्य फल मिलेगा। छात्रों को अप्रत्याशित लाभ होने की उम्मीद है, उनकी मेहनत का फल मिलेगा। प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी के लिए यह उचित समय है इस समय दी गई परीक्षाओं में उतीर्ण होने के लाभ हैं। घर पर किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हो सकता है या तीर्थ स्थान पर घूमने का प्लान कर सकते हैं। साथी की तलाश खत्म हो सकती है। दांपत्य जीवन में भी पूर्ण सुख की प्राप्ति होगी। स्वास्थ्य के कारण कुछ समस्याएं आ सकती हैं।

 कुंभ (Aquarius) राशि के बारे में राशि स्वामी: शनि | शुभ रत्न: नीलम | शुभ रुद्राक्ष: सात मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: पश्चिम यह साल आपके लिए काफी बेहतर है, नया बिजनेस शुरु करना चाहते हैं तो भी समय अनुकूल है। हालांकि पैसा कमाने के लिए आपको काफी परिश्रम करना पड़ेगा, परंतु जितनी मेहनत करेंगे आपको उतना अधिक फल मिलेगा। छात्रों को वर्ष की शुरुआत में काफी मेहनत करनी पड़ सकती है, उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परिक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को इस साल अवश्य सफलता मिलेगी। परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन हो सकता है। परिवार के साथ बाहर घूमने का प्लान बन सकता है। घर में किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होने की संभावना है। परिजनों से संबंध मधुर होंगे, अगर सिंगल हैं और किसी को प्रपोज कर रहे हैं तो समय अनुकूल है। स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहना होगा। 

मीन (Pisces) राशि के बारे में राशि स्वामी :गुरु | शुभ रत्न:पुखराज | शुभ रुद्राक्ष: पांच मुखी रुद्राक्ष | शुभ दिशा: उत्तर पूरब आपको इस वर्ष पैसा कमाने के लिए अतिरिक्त मेहनत जरूर करनी पड़ सकती है, लेकिन इसका फल अंत में अवश्य मिलेगा। किसी नई प्रॉपर्टी को खरीदने का मन भी बना सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को इस साल कड़ी मेहनत करनी होगी। जॉब चेंज का सही टाइम नहीं है, नई जॉब पाने और वहां सेटल होने में समस्या आएगी। पारिवारिक स्तर पर थोड़ी परेशानी नजर आ रही है। वैवाहिक जीवन में काफी उथल पुथल रहेगी। आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा परंतु परिजनों के स्वास्थ्य को लेकर कुछ समस्याएं हो सकती हैं।  

शनिवार की रात महालक्ष्मी आएंगी आपके द्वार, कर लें तैयारी

 

15 अक्टूबर, शनिवार को आश्विन मास की पूर्णिमा है, जिसे शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस रात के अत्यधिक महत्वपूर्ण होने का एक कारण यह है की राधारानी रूप में महालक्ष्मी और श्री कृष्‍णचन्द्र रूप में श्री हरि व‌िष्‍णु ने इसी रात को महारास क‌िया था इसल‌िए यह रात युगल सरकार की परमप्र‌िय रात है। 

माना जाता है की वर्ष में कुछ खास ऐसी रातें आती हैं जब महालक्ष्मी अपने भक्तों पर धन की वर्षा करती हैं। उन्हीं खास रातों में है शरद पूर्ण‌िमा की रात। इस रात मां लक्ष्मी अपने भक्तों की धन से जुड़ी हर तरह की समस्याएं दूर करती हैं। इतना ही नहीं, देवी साधकों को यश और कीर्ति भी देती हैं।     

यह रात अन्य रातों से खास इसलिए भी है क्योंकि देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है और कौन सो रहा है। जो लोग रात को जाग कर श्री भगवान का नाम जाप, भजन, सिमरण कर रहे होते हैं देवी लक्ष्मी उनका कल्याण कर उनके घर पर अपना निवास बनाती हैं तथा जो लोग नींद में खोए होते हैं वहां देवी लक्ष्मी नहीं ठहरती। शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी को अपनी भक्ति और प्रेम के बल पर खुश करके उन्हें अपने घर रूकने के लिए प्रार्थना करें। 

* इस रात को कोजागरा की रात भी कहा जाता है अर्थात कौन जाग रहा है की रात। कहते हैं की जो मनुष्य शरद पूर्ण‌िमा की रात में जागरण करके महालक्ष्मी और श्री हरि व‌िष्‍णु का पूजन, अराधना, भजन और कीर्तन करते हैं देवी लक्ष्मी उन्हें धन के साथ ही वैभव भी प्रदान करती हैं।

* रात के समय मंदिर, चौराहे, तुलसी के नीचे, घर के भीतर और बाहर शुद्ध गाय के घी का दिपक जलाएं।

* मंदिर में आसन बिछा कर बैठें श्रीसूक्त और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ  करें। ऐसा करने से आपके धन-धान्य और मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

मंगलवार अौर शनिवार करें ये उपाय, आर्थिक तंगी से मिलेगी मुक्ति

व्यक्ति को अपनी मूल आवश्यकताअों की पूर्ति हेतु धन की जरुरत होती है। धन की कमी होने पर कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ सरल उपायों को अपनाकर धन संबंधी समस्या से मुक्ति मिल सकती है। प्रत्येक मंगलवार अौर शनिवार ये उपाय करने से समस्या से छुटकारा मिलेगा अौर धन में वृद्धि होगी। 
 
 
* प्रत्येक मंगलवार अौर शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत होकर पीपल के वृक्ष से 11 पत्ते तोड़ लें। 
 
* पत्ते खंड़ित नहीं होने चाहिए। 
 
* स्वस्थ जल में कुमकुम, अष्टगंध या चंदन मिलाएं। इस मिश्रण से पीपल के 11 पत्तों पर श्रीराम का नाम लिखें। 
 
* पत्तों पर नाम लिखते समय हनुमान चालीसा का पाठ करें। उसके पश्चात श्रीराम लिखे पत्तों की माला बना लें। इस माला को मंदिर जाकर बजरंगबली को अर्पित कर दें। 
 
* प्रत्येक मंगलवार अौर शनिवार ये उपाय करने से धन से संबंधित समस्याअों से मुक्ति मिलती है।