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छत्तीसगढ़ में किसी भी तरह के माफिया को बर्दाश्त नही किया जाएगा : भूपेश बघेल

मुख्यमंत्री ने रेत सहित सभी तरह के माफियाओं पर सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

रायपुर, 20 जून 2020 मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में किसी भी तरह के माफिया को बर्दाश्त नही किया जाएगा। उन्होंने रेत सहित अन्य सभी तरह के माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारियों को दिए है।

   मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने धमतरी जिले में रेत माफियाओं द्वारा की गई मारपीट की घटना को गंभीरता से लेते हुए धमतरी जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।  बघेल ने कड़े शब्दों में कहा है कि पूरे प्रदेश में चाहे वह रेत का मामला हो या अन्य किसी भी तरह के माफिया को बर्दाश्त नही किया जाएगा, ऐसे प्रकरण संज्ञान में आने पर उनके विरूद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

भारत शांति चाहता है लेकिन अगर उकसाया गया है तो वह जवाब देने में सक्षम है पीएम मोदी ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बोले जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 सैनिकों के शहीद होने के बाद पहली बार बोले। उन्होंने बुधवार को देश को आश्वासन दिया कि लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प के दौरान शहीद हुए 20 भारतीय सेना के जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा “मैं राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत शांति चाहता है लेकिन अगर उकसाया गया है तो वह जवाब देने में सक्षम है।’’

पीएम मोदी ने बुधवार को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना वायरस पर वार्ता से पहले पीएम मोदी ने चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि ‘‘मैं देश को भरोसा दिलाता हूं कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि हमारे सैनिक मारते-मारते मरे हैं। इसके साथ ही शहीद जवानों के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया।’’

पीएम मोदी ने कहा, ‘‘हमने हमेशा से अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर काम किया है. हमेशा उनके विकास और कल्याण की कामना की है। जहां कहीं मतभेद भी रहे हैं, हमने हमेशा ये प्रयास किया है कि मतभेद विवाद न बने। हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं। लेकिन अपने देश की अखंडता और संप्रभुता के साथ समझौता भी नहीं करते। जब भी समय आया है हमने देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है, अपनी क्षमताओं को साबित किया है।’’

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, ‘‘त्याग और तपस्या हमारे चरित्र का हिस्सा है. विक्रम और वीरता भी हमारे चरित्र का हिस्सा है। देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने से हमें कोई भी रोक नहीं सकता। इसमें किसी को भी भ्रम नहीं होना चाहिए। भारत शांति चाहता है लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में यथोचित जवाब देने में सक्षम है और हमारे दिवंगत शहीद वीर जवानों के विषय में देश को इस बात का गर्व होगा कि वे मारते-मारते मरे हैं.।

गौरतलब है कि 15 जून की रात लद्दाख की गलवान घाटी में एलएसी पर चीन और भारत की सेना में हिंसक झड़प हुई है। इस हिंसा में भारत के 20 जवान शहीद हो गए हैं। जानकारी ये भी है कि चीन के करीब 40 जवान हताहत हुए हैं, लेकिन चीन ने अब आधिकारिक तौर पर कोई संख्या नहीं बताई है। साथ ही चीन ने भारत पर ही कार्रवाई का आरोप लगाया है। जबकि भारत ने साफ तौर पर कहा है कि ये पूरी घटना चीन की हिमाकत का नतीजा है और चीन को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।

हालांकि, आधिकारिक स्तर पर बातचीत जारी है। सीमा पर अब भी तनाव है. इस बीच पीएम मोदी ने 19 जून को सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है। दूसरी तरफ ये भी जानकारी आई है कि चीन के खिलाफ भारत कड़े आर्थिक फैसले कर सकता है। उन प्रोजेक्ट को रद्द किया जा सकता है, जिनमें चीनी कंपनियों ने करार हासिल किए है। 

भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में कांकेर का जवान गणेश कुंजाम शहीद, घर पर चल रही थी शादी की तैयारियां

कांकेर: गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों की हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों सहित एक भारतीय कमांडिंग अफसर शहीद हो गया। इस हिंसक झड़प में छत्तीसगढ़ का एक जवान गणेश कुंजाम भी शहीद हो गया। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के एक गाँव के निवासी गणेश कुंजाम इस साल जनवरी में घर आए थे। गणेश कुंजाम की एक महीने पहले ही लद्दाख बॉर्डर पर पोस्टिंग हुई थी। इस झड़प में गणेश बुरी तरह से घायल हो गया था। उसे सेना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन चोटें गंभीर होने की वजह से उन्हें नहीं बचाया जा सका। उनकी शहीद होने की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम परस गया है।

गणेश कुंजाम तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनकी एक छोटी बहन का नाम है गंगोत्री, जिनकी शादी हो चुकी है। उनकी दूसरी छोटी बहन गंगा है, जो इस समय पूना की किसी कम्पनी में काम कर रही है।

उनके पिता इतवारू राम एक मध्यम वर्गीय किसान हैं, परिवार की हालत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है। गणेश कांकेर जिला के चारम्मा विकासखंड का ग्राम पंचायत कुरूभाट गांव किराली का रहने वाला है। गणेश ने स्कूली शिक्षा कुरूभाट से की तथा काॅलेज की पढ़ाई चारम्मा से पूरी की। उनके पिता इतवारू राम ने ही उन्हें सेना में भर्ती होने के लिए तैयार किया था।

27 साल के गणेश कुंजाम जब पिछली बार जनवरी में घर आए थे, तो उनकी शादी तय कर दी गई थी। घरवाले शादी की तैयारी भी कर रहे थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते तारीख फाइनल नहीं हो सकी थी। ड्यूटी ज्वाइन करने से पहले जब बात हुई तो गणेश ने परिवार वालों से कहा था कि वे कोरोना के बाद घर आएंगे। इसके चलते एक बार फिर उनकी शादी को लेकर घर वाले उत्साहित थे, लेकिन उससे पहले ही उनकी शहादत की खबर आ गई।

गणेश ने सन् 2011 में फौज में ज्वानिंग की थी। ज्वानिंग के बाद इन्होंने बिहार से ट्रेनिंग ली। बाद में इनकी पोस्टिंग अरूणाचल प्रदेश में हुई। पिछले दो साल से इनकी पोस्टिंग लद्दाख में थी। लगभग 1 महीने पहले इन्होंने फोन करके अपने चाचा को बताया था कि मेरी पोस्टिंग अब भारत-चीन बार्डर गलवान में हो रही है। ये इनकी अपने परिवार से आखिरी बातचीत थी। गलवान में पोस्टिंग के बाद से ही इनका फोन मिलना बंद हो गया था।

परिवारवालों को सेना की ओर से बताया गया कि गणेश कुंजाम ने वीरगति पाई है। सेना के अफसरों ने बताया है कि गुरुवार शाम तक शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव में भेजा जाएगा। 

छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने ट्विटर पर गणेश कुंजम के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा छत्तीसगढ़ के कांकेर के श्री गणेश राम कुंजम को मेरी श्रद्धांजलि, जिन्होंने हमारे देश की रक्षा करने वाले हमारे 20 बहादुर सैनिकों के साथ लद्दाख में सर्वोच्च बलिदान दिया। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवारों के साथ हैं।

प्रधानमंत्री महामारी से निपटने के लिए उठा सकते हैं सख्त कदम अलग अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से करेंगे विचार-विमर्श

नई दिल्लीः जिस तरह देश में कोरोना महामारी फैल रही है, वो चिंता का विषय है। केन्द्र सरकार इस पर कुछ बड़ा निर्णय ले सकती है। इसके लिए  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज  मंगलवार और बुधवार को अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये बात करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी आज 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों और ऐडमिनिस्ट्रेटरों से वार्तालाप करेंगे, और उनके सुझाव लेंगे। बैठक दोपहर 3 बजे शुरू होने की संभावना है। 

कोरोना महामारी पर आज होने वाली बैठक में पंजाब, असम, केरल, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, नागालैण्ड, लद्दाख, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा नागर हवेली और दमन दीव, सिक्किम, लक्ष्यद्वीप जैसे राज्य वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये इस मीटिंग में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री 17 जून, बुधवार को 15 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से विचार-विमर्श करेंगे। इन 15 राज्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, यूपी, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और ओडिशा शामिल हैं।

देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे कैसे कंट्रोल किया जाए, इसके लिए दो दिनों की डिजिटल बैठक वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिये होने जा रही है। देश में सोमवार को कोरोना वायरस के 11 हजार से अधिक मामले सामने आए, जिससे कुल संक्रमितों की संख्या 3.32 लाख हो गई है, जबकि 325 और लोगों की मौत के साथ मरने वालों की संख्या 9520 तक पहुंच गई है।

लाॅकडाउन 5.0 में आम लोगों को नौकर पर जाने और व्यवसाय के लिए कई छूट दी गई थी, ताकि लॉकडाउन से प्रभावित जनजीवन और अर्थव्यवस्था पटरी पर फिर से लौट सके। इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को कोरोना महामारी से ज्यादा प्रभावित इलाकों में इसे कैसे फैलने से रोका जाए और इसके लिए राज्यों ने क्या-क्या कदम उठाएं हैं, उसकी समीक्षा की।

प्रधानमंत्री मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ यह छठे दौर की बातचीत होगी, इससे पहले इस तरह की बैठक 11 मई को हुई थी। जिसके फलस्वरूप केन्द्र ने देश के जिन राज्यों खासकर दिल्ली में बढ़ रहे मामलों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए रेलवे के 500 कोचों को कोरोना से संक्रमित मरीजों के ईलाज के उपलब्ध कराया है।

उच्चस्तरीय बैठक के बाद शाह ने कहा कोरोना की लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे घर-घर सर्वे, टेस्टिंग होगी दोगुना, हर मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी कोरोना से बदतर होते हालात पर दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बुलाई गई बैठक में  उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को केन्द्र सरकार की तरफ से आश्वासन दिया है कि कोरोना की लड़ाई में हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और दिल्ली सरकार को केन्द्र की तरफ से जितना भी संभव हो मदद दी जाएगी। लगभग 1 घंटे 20 मिनट तक चली इस बैठक में कोरोना महामारी से निपटने के लिए की जा रही व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई और आगे क्या कदम उठाए जाने चाहिए, इस पर भी विचार किया गया।

बैठक के बाद अमित शाह ने ट्वीट कर बताया कि आज स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, उपराज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर दिल्ली की जनता की सुरक्षा व इस संक्रमण को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। दिल्ली में कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए बेड की कमी को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने तुरंत 500 रेलवे कोच दिल्ली को देने का निर्णय लिया है। इन रेलवे कोच से न सिर्फ दिल्ली में 8000 बेड बढ़ेंगे बल्कि यह कोच कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए सभी सुविधाओं से लैस होंगे।

 

दिल्ली के कंटेनमेंट जोन में कॉन्टेक्ट अच्छे से नजर रखी जाएगी। इसके लिए घर-घर जाकर हर एक व्यक्ति का व्यापक स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा, जिसकी रिपोर्ट 1 सप्ताह में आ जाएगी। साथ ही अच्छे से मॉनीटरिंग हो इसके लिए वहां हर व्यक्ति के मोबाइल में आरोग्य सेतु ऐप डाउनलोड कराया जाएगा।

दिल्ली में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए अगले दो दिन में कोरोना की टेस्टिंग को बढ़ाकर दो गुना किया जाएगा और 6 दिन बाद टेस्टिंग को बढ़ाकर तीन गुना कर दिया जाएगा। साथ ही कुछ दिन के बाद कंटेनमेंट जोन में हर पोलिंग स्टेशन पर टेस्टिंग की व्यवस्था शुरू कर दी जाएगी। साथ ही दिल्ली के छोटे अस्पतालों तक कोरोना के लिए सही जानकारी व दिशानिर्देश देने के लिए मोदी सरकार ने एम्स में टेलीफोनिक गाइडेंस के लिए वरिष्ठ डॉक्टर्स की एक कमेटी बनाने का निर्णय लिया है, जिससे नीचे तक सर्वश्रेष्ठ प्रणालियों का संचार किया जा सके। इसका हेल्पलाइन नंबर कल जारी हो जाएगा।

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, राजधानी में शनिवार को 2,134 नए मामले सामने आए, जिसके बाद यहां कुल संक्रमितों की संख्या 38,958 हो गई जबकि मौत के 57 नए मामलों के साथ ही मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 1,271 हो गया। यह दूसरा दिन है जब एक ही रोज में संक्रमण के मामले दो हजार से अधिक पाए गए हैं। इससे पहले, शुक्रवार को 2,137 मामले सामने आए थे। कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के लिहाज से महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में दिल्ली तीसरे स्थान पर है। 

दिल्ली : कोरोना के बढ़ते मामले को लेकर गृह मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक जारी

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी अब कोरोना कैपिटल में तब्दील होती जा रही है। कोरोना से बदतर होते हालात पर मोदी सरकार हरकत में आ गई है। इस पर फैसला लेने के लिए दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक जारी है। बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के अलावा स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, उपराज्यपाल अनिल बैजल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत स्वास्थ्य सेवाओं व प्रशासन के सीनियर अधिकारी हिस्सा लेंगे। इसके बाद अमित शाह दिल्ली के तीनों मेयरों से मिलकर दिल्ली की परिस्थिति पर चर्चा करेंगे। 

इससे पहले, दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए दिल्ली के 10 से लेकर 49 बेड के सभी नर्सिंग होम को कोविड नर्सिंग होम घोषित कर दिया। केजरीवाल सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा कि तीन दिन के अंदर मरीजों के लिए व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। एलजी अनिल बैजल ने आदेश दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए और उनसे जुर्माना वसूला जाए।  

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली केन्द्र सरकार के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। दिल्ली में शनिवार को फिर 2,000 से अधिक नए मामले सामने आए। महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद देश में कोरोना के सबसे अधिक मामले दिल्ली में हैं।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक शनिवार को राजधानी में 2,134 नए लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई और 57 लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या 38,958 पहुंच गई है। इनमें 22,742 ऐक्टिव केस हैं जबकि 14,945 मरीज इस महामारी से उबर चुके हैं। राजधानी में अब तक 1,271 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। इससे पहले शुक्रवार को दिल्ली में कोरोना के 2,137 नए मामले सामने आए थे जबकि 129 लोगों की मौत हुई थी।

अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं 15 जुलाई से : शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यार्थियों का प्रवेश 30 जून तक होगा पूरा

रायपुर, 14 जून 2020 प्रदेश में अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वर्चुअल कक्षाएं 15 जुलाई से प्रारंभ होंगी। इन अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति और विद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया 30 जून तक पूर्ण कर ली जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।

    अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के संचालन के लिए कलेक्टरों से कहा गया है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूल के लिए शिक्षकों की व्यवस्था के संबंध में राज्य शासन द्वारा कुछ पदों पर पदस्थापना की गई है, परंतु अधिकांश पद रिक्त हैं। रिक्त पदों पर स्थानीय स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति द्वार संविदा पर भर्ती की कार्रवाई पूर्व निर्देशानुसार की जानी है। प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा ने जिला कलेक्टरों से कहा है कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के लिए शिक्षकों की व्यवस्था की कार्रवाई आगामी 15-20 दिनों में पूर्ण कर ली जाए। जिससे जुलाई माह से वर्चुअल क्लास के रूप में प्रारंभ किया जा सके।

 कलेक्टर स्कूलों की अधोसंरचना के संबंध में अन्य अधिकारियों के साथ जिले के सर्वश्रेष्ठ निजी स्कूलों का भ्रमण करें और देखें की उन निजी स्कूलों में किस प्रकार की अधोसंरचनाएं हैं। कलेक्टरों का पूरा प्रयास होना चाहिए कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में निजी स्कूलों से बेहतर स्तर की अधोसंरचनाएं विकसित की जाएं। इसके लिए विशेष रूप से कक्षा के फर्नीचर, प्रयोगशाला, उपकरण और पुस्तकालय की अधोसंरचना और अच्छी पुस्तकों की सूची महत्वपूर्ण है। कलेक्टर स्वयं इस कार्य में रूचि लेकर उच्च गुणवत्ता के स्कूल तैयार करवाएं। इस कार्य की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग करें।

    अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में विद्यार्थियों की भर्ती के संबंध में जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि विद्यार्थियों की भर्ती एक जुलाई से अनिवार्य रूप से प्रारंभ कर दें और 15 जुलाई तक इसे पूर्ण कर लिया जाए। प्रवेश में प्राथमिकता का क्रम निर्धारित करने के लिए कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए एक किलोमीटर के भीतर निवासरत परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। कक्षा 6वीं से 8वीं तक के लिए 3 तीन किलोमीटर की परिधि में निवासरत परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। कक्षा 9वीं और 10वीं के विद्यार्थियों के लिए 5 किलोमीटर तथा कक्षा 11वीं, 12वीं के लिए 7 किलोमीटर की परिधि में रहने वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। इसी प्रकार कक्षा पहली से पांचवी तक हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए दोनों ही प्रकार के विद्यार्थियों को एक समान प्राथमिकता दी जा सकती है, परंतु इसके बाद की कक्षाओं में पूर्व में अंग्रेजी माध्यम से पढ़े हुए विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए। विद्यालयों में उपलब्ध स्थान से अधिक विद्यार्थी आवेदन करते हैं तो कक्षा पहली से पांचवी तक के लिए लॉटरी निकालकर प्रवेश प्रक्रिया की जाए। इसके ऊपर की कक्षाओं के लिए पूर्व की कक्षाओं के परीक्षा परिणाम के आधार पर मेरिट सूची बनाकर प्रवेश दिया जाए। मेरिट सूची में एक से अधिक विद्यार्थी का नाम एक ही स्थान पर हो तो उनका भी निर्णय लॉटरी निकालकर किया जाए। प्रवेश के समय विद्यार्थियों के अभिभावकों से यह सहमति पत्र लिया जाए कि वे विद्यार्थी को घर से पढ़ाई के लिए वर्चुअल कक्षा के लिए मोबाईल और डाटा उपलब्ध कराएंगे और प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर की कक्षाओं के लिए कक्षा की अवधि में विद्यार्थियों के कोई न कोई अभिभावक उनके साथ उपस्थित रहेंगे, जिससे शिक्षा द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार वे विद्यार्थियों की गतिविधियां आदि करा सकें। प्रवेश के समय यह भी बताया जाए कि विद्याथियों की वर्चुअल कक्षा में उपस्थिति 70 प्रतिशत से कम रहती है तो उसका नाम स्कूल से काटा जा सकेगा।

    जिला कलेक्टरों से कहा गया है कि अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में वर्चुअल कक्षा 15 जुलाई से प्रारंभ कर दी जाए। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में एक हाई ब्राडबेंड का इंटरनेट कनेक्शन लगाया जाए। जहां संभव हो वहां ऑप्टिकल फायबर का इंटरनेट लगाया जा सकता है। इसके पश्चात विद्यालय के भीतर आंतरिक वायरिंग करके प्रत्येक कक्षा में पृथक वाई-फाई राउटर लगाया जाए, जिससे शिक्षक अपनी-अपनी कक्षाओं से वर्चुअल क्लास ले सकेंगे। प्राचार्य प्रत्येक कक्षा के लिए वर्चुअल कक्षाओं हेतु एक टाईम-टेबल निर्धारित करें और सभी शिक्षक टाईम-टेबल के अनुसार कक्षाओं में अध्ययन-अध्यापन का कार्य करें। टाईम-टेबल विद्यार्थियों को वाट्सअप आदि से सूचित किया जा सकता है। कलेक्टरों से कहा गया है कि यह ध्यान रखा जाए कि प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में वर्चुअल कक्षाओं का समय प्रतिदिन एक-दो घंटे से अधिक न रखा जाए और वर्चुअल कक्षाएं इस रूप में आयोजित की जाए जिससे विद्यार्थी आनंददायी तरीके से अपने अभिभावकों से मिलकर शैक्षणिक गतिविधियां कर सके। इस स्तर के विद्यार्थियों के लिए स्क्रीन टाईम कम से कम रखा जाए। इसी प्रकार माध्यमिक स्तर की कक्षाओं में दो-तीन घंटे का समय और उससे ऊपर की कक्षाओं के लिए इससे अधिक समय निर्धारित किया जा सकता है। प्रत्येक विषय का पीरियड भी छोटा किया जा सकता है। वर्चुअल कक्षाओं में विद्यार्थियों को होमवर्क भी दिया जाए, जो स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर ’पढ़ई तुंहर दुआर’ से कराया जा सकता है। वर्चुअल कक्षाएं कराने के संबंध में विस्तृत निर्देश राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा पृथक से जारी किया जाएगा और एससीईआरटी वर्चुअल कक्षाएं आयोजित करने के लिए विद्यालयों के शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण भी कराएगा।

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छत्तीसगढ़ के घटमड़वा महानदी में अवैध रेत खनन का खेल जारी खनिज विभाग की मिलीभगत से ही रात में हो रहा है उत्तखनन

बलौदाबाजार जिला के घटमड़वा में महानदी में अवैध रेती खनन चल रहा जोरो पर शासन प्रशासन जानकर भी अनजान बने बैठे ।


रायपुरः शिवरीनारायण रेत ठेकेदार के द्वारा लठैत रखकर रात मे भी अवैध रेत का खनन किया जा रहा है। बलौदा बाजार जिला के कसडोल ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत घटमड़वा (गिधौरी) में अवैध खनन करने का मामला प्रकाश में आया है। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घाट ठेकेदार अभिषेक अग्रवाल के नाम से जिला जांजगीर चांपा के शिवरीनारायण रेत घाट स्वीकृति हुआ है। परंतु शिवरीनारायण के रास्ते से घटमड़वा रेत घाट पर दिन-रात महानदी से अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। उक्त ठेकेदार अपने लठैतों को साथ मे रखता है और मारपीट की धमकी देता रहता है। वह दूसरे जिला बलौदा बाजार के कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत घटमड़वा के सीमा पर भी अवैध तरीके से लाखो रूपये की रेत खनन कर चोरी कर रहा है।
 जिस पर ग्राम पंचायत घटमड़वा के जनप्रतिनिधि राजेंद्र घृतलहरे, महाबीर गोड़, एवं ग्रामीणों में शिवनाथ चैहान, सूरज चैहान, छोटेलाल ब्रिजवानी, बद्री वर्मा, संतोष वर्मा, शैलेन्द्र चैहान, सहित आदि लोगो ने अवैध रेत खनन कर रहे मौके पर पहंचे। उन्होंने अपने गांव घटमड़वा में अवैध रेत खनन कर रहे लोगो को मना किया तो उन लोगों ने मारपीट की धमकी दी  और मंत्री तक पहुंच होने की धमकी देने लगे। जिससे लोगो को यह लग रहा है कि ये अवैध खनन उपरी लोगों के संरक्षरण में चल रहा है।

यह अवैध खनन का खेल खनिज विभाग प्रसाशन की मिलीभगत से ही रात में किया जा रहा है। शासन का कोई नियम यहां नहीं चल रहा है। घाट नियम में खनन शाम 6 बजे के बाद बंद होना चाहिए। परन्तु उक्त ठेकेदार द्वारा जिला बलौदाबाजार के कसडोल विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत घटमडवा सीमा की महानदी में अवैध तरीके से धडल्ले से बेखौफ रेत का खनन किया जा रहा है। जिस पर ग्राम पंचायत घटमडवा के सरपंच उपसरपंच पंच को जानकारी होने पर रेत की चोरी करने तथा राजस्व की लाखो रूपये क्षति पहुंच रहे लोगो को मना किया गया, पर रेत माफिया अपनी दादागिरी से बाज नही आ रहे पहंचे हैं।
ठेकेदार के गुंडों ने घटमडवा पंचायत के जनप्रतिनिधियों को धमकी दी है। जिसके बाद ग्राम पंचायत घटमडवा के जनप्रतिनिधियों ने दिनांक 08/06/2020 को गिधौरी थाना में आकर लिखित शिकायत की है। इतना सब होने के बाद भी जिम्मेदार लोग और जिला जांजगीर चांपा और बलौदाबाजार जिले का खनिज विभाग गहरी कुम्भकरणीय के नींद मे सोये हुये है और इस पर कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है। जिससे रेत माफियो का हौसला और बुलंद हो रहा है। 
रेत के अवैध खनन करने वाले रेत माफियाओं पर प्रशासन रोक लगाने का लाख दावा करती है, लेकिन प्रशासन इस दावे पर नाकाम साबित हो रहा है। रेत के दाम इस समय आसमान छू रहे हंै। वर्तमान में बलौदाबाजार जिले के गिधौरी क्षेत्र के बलौदा हसुवा क्षेत्र में भी रेत का अवैध खनन जोरो पर चल रहा हैं। ग्राम बलोदा पंचायत के आस-पास महानदी और जोक नदी के आसपास की घाटां से रेत का अवैध खनन लगातार जोरो पर चल रहा है। 


नदी से रोजाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का उत्खनन कर ले जाया जा रहा है। विभाग को जानकारी होने बावजूद भी यह खेल चल रहा है। अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है, जिससे हर दिन शासन को लाखो रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। लेकिन अधिकारियों के कान में जूं तक नही रेंग रही, जबकि इन रेत माफियाओ पर तत्काल छापा मार कार्यवाही करते हुए इन पर लगाम लगाना अति आवश्यक हो गया है, जिससे शासन को हो रहे लाखो रुपये के राजस्व के नुकसान को रोक जा सके। अब आगे देखना होगा कि इस पर प्रशासन सहित जिम्मेदार लोग इस पर क्या कार्यवाही करते है। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। इस सम्बंध मे जिला बलौदाबाजार के माईनिंग स्पेक्टर बबलू पांडे से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा कि मौके पर आकर वो जांच करेंगे।
इस सम्बंध मे जिला जांजगीर चांपा के असिस्टेंट माईनिंग स्पेक्डर आर. के. सोनी से बात की गयी। उनसे पूछने पर कि जांजगीर चांपा के शिवरीनारायण रेत ठेकेदार बलौदा बाजार सीमा से रेत मशीन से चोरी कर रहा है। यह बात पूछने पर उन्होंने कहा कि बलौदा बाजार खनिज विभाग को सूचना दे दी गयी है, वह उस पर कार्यवाही करेगा।

गरीब को किया जा रहा है बेघर। बिलासपुर के तिलक नगर से सैकड़ों घर उजाड़ गये।लॉक डाउन के दौरान बेघर हो रहे तकरीबन 145 गरीब।

अजीत मिश्रा : बिलासपुर छत्तीसगढ़

0 परेशान लोगों ने कहा- जहर दे दो हमें..!

0कार्रवाई पूर्णता शांतिपूर्ण तरीके से-पुलिस।

0 शासन ने कहा-दिया था 7 दिन पहले नोटिस।

0 गरीबों ने कहा-जहां भेज रहे हैं वहां कोई सुविधा नहीं।

बिलासपुर के तिलक नगर से तकरीबन 145 घरों को उजाड़ा जा रहा है..! जी हां लॉक डाउन के समय ऐसा किया जा रहा है। शासन के द्वारा की जा रही इस कार्रवाई के विरोध में गरीब और बेघर हो रहे इन लोगों ने यहां तक कहा कि, अगर सरकार उन्हें जहर दे दे तो ज्यादा बेहतर होगा..! लॉक डाउन और कोरोना महामारी के दौरान आखिरकार वे जाएं तो जाएं कहां..? वही प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने सरकार के कार्रवाई की कड़ी शब्दों में आलोचना की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की माने तो, बिना विस्थापन की पूरी तैयारी किए बगैर यू लोगों को बेघर करना गलत है..! सरकार को कम से कम इस कोरोना संक्रमण काल या महामारी का तो ध्यान रखना चाहिए । वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन की तरफ से अधिकारियों का कहना है कि, तिलक नगर स्थित नदी के किनारे बेजा कब्जा किए इन लोगों को 7 दिनों पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। शासन ने घर खाली कराने के लिए पूरी व्यवस्था कर रखी है। लोगों को और उनके सामानों को सही सलामत विस्थापन की जगह पर पहुंचाया जा रहा है। इतना ही नही पुलिस प्रशासन ने भी बेजा कब्जा हटाने की इस कार्रवाई को पूर्णता शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होना बताया है। जबकि तस्वीर बताती है कि, किस तरह से बेघर हो रहे इन लोगों ने शासन और पुलिस के साथ जमकर संघर्ष किया है। पूरे परिवार और सामानों के साथ सड़कों पर बैठे ये लोग अब भी चाहते हैं कि उन्हें यहां से ना हटाया जाए। और कम से कम विस्थापन के लिए जहां भेजा जा रहा है वहां की व्यवस्था को पहले दुरुस्त कर लिया जाए।

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत संशोधन बिल समाज के गरीब तबकों, किसानों और आम जनता के हित में नहीं : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर, 08 जून 2020  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत संशोधन बिल 2020 को समाज के गरीब तबको एवं किसानों के लिए अहितकारी बताते हुए इस संबंध में केन्द्रीय विद्युत राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  आर.के. सिंह को पत्र लिखकर देश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस संशोधन बिल को फिलहाल स्थगित रखने का आग्रह किया है। 

मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए संशोधन बिल को लागू करने से पूर्व सभी राज्य सरकारों से इस पर विचार-विमर्श करने तथा समाज के गरीब तबको एवं जन सामान्य के हितों का ध्यान रखने की बात कही है।

 मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने केन्द्रीय मंत्री को प्रेषित अपने पत्र में कहा है कि इस संशोधन बिल में क्रास सब्सिडी का प्रावधान किसानों और गरीबों के हित में नही है। समाज के गरीब तबके के लोगों और किसानों को विद्युत सब्सिडी दिए जाने का वर्तमान प्रावधान जांचा परखा और समय की जरूरत के अनुरूप है। किसानों को विद्युत पर दी जाने वाली सब्सिडी यदि जारी नहीं रखी गई तो किसानों के समक्ष फसलों की सिंचाई को लेकर संकट खड़ा हो जाएगा। इससे खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा और देश के समक्ष संकट खड़ा हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसानों और मजदूरों की मेहनत का सम्मान होना चाहिए। जिन्होंने अपनी मेहनत से देश को खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने कहा है कि समाज के गरीब वर्ग के लोगों और किसानों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने के लिए उन्हें रियायत दिया जाना जरूरी है। उन्होंने संशोधित बिल में क्रास सब्सिडी को समिति किए जाने के प्रावधान को अव्यवहारिक बताया है। 

 मुख्यमंत्री   भूपेश बघेल ने कहा है कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर सिस्टम जो वर्तमान में लागू है, वह सही है। इसमें बदलाव करने से समाज के गरीब तबके के लोग और लघु एवं सीमांत कृषक लाभ से वंचित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा है कि खेती-किसानी के सीजन में प्रति माह फसलों की सिंचाई के लिए यदि कोई किसान एक हजार यूनिट विद्युत की खपत करता है तो उसे सात से आठ हजार रूपए के बिल का भुगतान करना होगा, जो उसके लिए बेहद कष्टकारी और असंभव होगा। 

       मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह संशोधन बिल वातानुकूलित कमरों में बैठ कर तैयार करने वाले उच्च वर्ग के लोगों और सलाहकारों के अनुकूल हो सकता है लेकिन यह जमीन सच्चाई से बिलकुल परे है। इस संशोधन बिल को लागू करने से देश के समक्ष कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होंगी । इससे गरीब, किसान और विद्युत कम्पनियों और आम लोगों को नुकसान होगा। रियायती दर पर किसानों को बिजली न मिलने से फसल सिंचाई प्रभावित होगी। खाद्यान्न उत्पादकता घटेगी जिसके चलते देश के समक्ष खाद्यान्न का संकट पैदा हो जाएगा। 

      मुख्यमंत्री ने कहा कि इस संशोधन बिल के माध्यम से राज्य सरकारों के अधिकारों की कटौती तथा राज्य विद्युत नियामक आयोग की नियुक्तियों के अधिकारों को केन्द्र सरकार के अधीन किया जाना संघीय ढांचे की व्यवस्था के विपरीत है। यह बिल राज्य विद्युत नियामक आयोग के गठन के संबंध में राज्यों को सिर्फ सलाह देने का प्रावधान देता है। नियुक्ति के संबंध में राज्य की सहमति आवश्यक नहीं है। यह प्रावधान राज्य सरकार की शक्तियों का स्पष्ट अतिक्रमण है। 

             विद्युत संशोधन बिल 2020 में विद्युत के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सब लाइसेंसी और फ्रेन्चाईजी की नियुक्ति का भी प्रावधान है। यह प्रावधान चेक और बेलेन्स की नीति के विरूद्ध है, क्योंकि नियामक आयोग से लाईसेंस लेने के लिए सब लाईसेंसी और फ्रेंचाईजी बाध्य नहीं हैं। इससे यह स्पष्ट है कि यह अधिकार और कर्तव्य के सिद्धांत के भी विपरीत है। 

          मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विद्युत वितरण प्रणाली को आम जनता की जीवन रेखा बताते हुए कहा है कि इसे निजी कम्पनियों का सौंपा जाना किसी भी मामले में उचित नहीं होगा। यह संशोधन विधेयक पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला और निजी कम्पनियों को इलेट्रिसिटी बोर्ड को कब्जा दिलाने वाला है। 

          मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह संशोधन बिल केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) के गठन का प्रस्ताव करता है। उन्होंने इस संबंध में माननीय सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपील के संबंध में दिए गए निर्णय का भी विस्तार से उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन पूरे देश में किया जा चुका है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखते हुए केंद्रीकृत विद्युत अनुबंध प्रवर्तन प्राधिकरण (ईसीईए) का गठन औचित्यहीन है। यदि ऐसा किया जाता है तो राज्य विद्युत नियामक आयोग अधिकार विहीन हो जाएंगे। 

    प्रस्तावित संशोधन केंद्र सरकार को नवीकरणीय और पनबिजली खरीद दायित्व को संरक्षित करने के लिए भी शक्ति प्रदान करता है। देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग संसाधन हैं। मुख्यमंत्री  बघेल ने कहा है कि इसे देखते हुए पूरे देश के लिए इसको लागू किया जाना उचित नहीं होगा।

टिड्डी दल के बड़े आक्रमण की आशंका फसलों के बचाव के लिए किसानों से सतर्क रहने का आग्रह वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अंगद सिंह राजपूत

  देश के कई राज्यों में फसलों को नुकसान पाहुचानें वाले टिड्डी दल का आक्रमण छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी हो सकता है । कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय भाएकीकृत नाशीजीवरत सरकार के केंद्रीय  प्रबंधन केंद्र नें छत्तीसगढ़ राज्य को पहले से ही सतर्क कर दिया है।
 दाऊ कल्याण सिंह कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र के अधिष्ठाता डॉ. राजेंद्र लाकपाले के अनुसार इन टिड्डी दलों के आक्रमण से खेतों को भारी तबाही का सामना करना पड़ सकता है। टिड्डी दलों में करोड़ों की संख्या में कीड़े एक साथ खेतों और खड़ी हुई फ़सलों पर हमला करते हैं और उनको खाने के बाद उसमें बहुत आसानी से छुप जाते हैं। इन दलों में एक दिन में एक कीड़ा अपने वज़न के बराबर फ़सल खा जाता है जो करीब 2 ग्राम होता है लेकिन आम तौर पर एक टिड्डी दल के सिर्फ़ एक छोटे से हिस्से के कीड़े एक दिन में उतनी ही खाद्य सामग्री खा जाते हैं जितनी की 2500 मनुष्य खा सकते हैं। डॉ. लाकपाले ने बताया इन कीड़ों की उम्र ज़्यादा नहीं होती, आमतौर पर यह तीन से पांच महीने ही जी पाते हैं।इन कीड़ों के इतनी ज़्यादा संख्या में होने के कारण खेती और हरियाली की व्यापक पैमाने पर तबाही होती है।

टिड्डी दल से फसलों के बचाव के लिए किसानों से सतर्क रहने का आग्रह कृषि विज्ञान केंद्र भाटापारा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख  डॉ. अंगद सिंह राजपूत ने किया है अभी अधिकांश जिले में ग्रीष्मकालीन धान,  मूंग, उर्द व मौसमी सब्जियों की फसल लगी हुई है ऐसे में जिले के किसान टिड्डी दल से सतर्क रहें। अपने खेतों की लगातार निगरानी रखें।  कृषि विज्ञान केंद्र में पदस्थ तकनीकि अधिकारी सागर पाण्डे ने बताया कि टिड्डी दल रात्रि के समय खेतो में रूककर फसलों को नुकसान पहुचाता है। बताया गया कि जमीन पर लगभग 500 से 1500 अंडे प्रति मादा कीट देकर सुबह उड़कर के दूसरी जगह चला जाता है। टिड्डी दल के समूह में लाखों की संख्या में टिड्डीयां होती है, ये जहां भी पेड़ पौधे या अन्य वनस्पति दिखाई देती है उसको खाकर आगे बढ़ जाते हैं। टिड्डी दल के प्रकोप से बचाव के लिए सभी किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने गांव में समूह बनाकर खेतो में रात्रिकालीन के समय निगरानी रखने का कार्य शुरू कर दें। 
कृषि विज्ञान केंद्र नें किसानों को दी यह सलाह

1. किसान भाई इस कीट की सतत् निगरानी रखें, यह कीट किसी भी समय खेतों भें आक्रमण कर क्षति पहुंचा सकता है। शाम 7 बजे से 9 बजे के मध्य यह दल रात्रिकालीन विश्राम के लिए कही भी बैठ सकते हैं। इसकी पहचान एवं जानकारी के लिए स्थानीय स्तर पर दल बनाकर सतत निगरानी रखें।


2. जैसे किसी गांव में टिड्डी दल के आक्रमण एवं पहचान की जानकारी मितलती है तो तत्काल स्थानीय प्रशासन कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर जानकारी दें।
3. टिड्डी दल आकाश में दिखे तो उसको उतरनें से रोकनें के लिए धुआं करें इससे टिड्डी दल खेत में नहीं बैठेगा ।


4. यदि टिडडी दल का प्रकोप हो गया है तो सभी किसान भाई टोली बनाकर विभिन्ना तरह की परम्परागत उपाय जैसे ढोल, डीजे बजाकर, थाली, टीन के डिब्बे से शोर मचाकर, ट्रैक्टर का साइलेंसर निकालकर चलाकर, ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर खेतों से भागाया जा सकता है।


5. यदि शाम के समय टिड्डी दल का प्रकोप हो गया है तो टिड्डी की विश्राम अवस्था में सुबह 3 बजे से 5 बजे के बीच में तुरंत कीटनाशी दवाएं, ट्रैक्टर चलित स्प्रे पम्प (पावर स्प्रेयर) दवा क्लोरोपायरीफास 20 ईसी 200 मि.ली. या लेम्डासाईलोयिन 5 ईसी 400 मिली या डाईफ्लूबेन्जूसन 25, 240 ग्राम प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
6. रासायनिक कीटनाशी पाउडर फेनबिलरेड 0.4 प्रतिशत 20-25 किग्राया क्यूना लफास 5 प्रतिशत 25 किग्रा. प्रति हेक्टेयर भुरकाव करें।

फिर दौड़ेगी सिटी बसें, सरकार ने दी संचालन की अनुमति

A News Edit By : Yash Kumar Lata

रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने सीटी बसों के संचालन की अनुमति दे दी है। जारी निर्देश के अनुसार अब सिटी बसें एक जिले से दूसरे जिले में चलेगी । आपको बता दें कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार सिटी का परिचलन रोक दिया गया था। लेकिन अब सरकार ने फिर बसों को शुरू करने की अनुमति दे दी है।

कुलपतियों की कमेटी की रिपोर्ट के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने आज विवि परीक्षाओं के बारे में आदेश किया जारी

रायपुर, 1 जून 2020 कुलपतियों की कमेटी की रिपोर्ट के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने आज विवि परीक्षाओं के बारे में आदेश जारी कर दिया। विश्वविद्यायों के फायनल ईयर के छात्रों को परीक्षा देनी होगी। बाकी फर्स्ट एवं सेकेंड ईयर के छात्रों को परीक्षा में बैठने की जरूरत नहीं होगी। इसके अनुसार फायनल ईयर के छात्रों एवं सेमेस्टर में फायनल के लिए लॉकडाउन के बाद एग्जाम लिए जाएंगे। बाकी फर्स्ट एवं सेकेंड ईयर के लिए जितने परीक्षा हो गई है। उसका मूल्यांकन किया जाएगा। और बचे पेपर के लिए तीन केटेगरी बनाए गए हैं। पिछली परीक्षा, आंतरिक मूल्यांकन या असाईनमेंट वर्क। सेमेस्टर फायनल की भी परीक्षा होगी। विस्तृत आदेश इस प्रकार है-

मन की बातः देश अब खुल गया है, देशवाशियों को ज्यादा सतर्कता बरतने की जरुरत...प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को रेडियो पर 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से एक बार फिर देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने 'मन की बात' कार्यक्रम के 65वें भाग में संबोधन के आरम्भ में कहा कि पिछली बार जब मैंने आपसे मन की बात साझा की थी, तब देश में पूर्णतः लॉकडाउन लागू था। यानी अत्यंत आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी सेवाएं बंद थी। अनावश्यक यात्राएं बंद थी, यात्री ट्रेनें बंद थीं, बसें बंद थीं, हवाई सेवा बंद थी यहाँ तक की मूलभूत रोजमर्रा की सामग्री को छोड़ सभी दुकाने बंद थी। 

लेकिन आज, बहुत सारी सेवाएं पुनः शुरू कर दी गयी है। सावधानियों के साथ, श्रमिक विशेष ट्रेन, अन्य यात्री स्पेशल ट्रेनें चलनी शुरू हो गई हैं, घरेलू हवाई उड़ानों की सेवाएं बहाल कर दी गयी है, व्यापार, दुकानें, उद्योग-धंधा भी चलना शुरू हुआ है, मतलब अर्थव्यवस्था अब धीरे-धीरे पटरी पर आना शुरू हो गई है। ऐसे में, हमें और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की जनसंख्या दुनिया के ज्यादातर देशों से कई गुना ज्यादा है, फिर भी हमारे देश में कोरोना उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के अन्य देशों में फैला। ऐसा इसलिए की सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है। पीएम मोदी ने संकट की इस घड़ी के दौरान इनोवेशन को जरूरी बताया। उन्होंने प्रवासी मजदूर की समस्या, चक्रवाती तूफान अम्फान से लेकर देश में टिड्डी संकट पर अपने विचार व्यक्त किए।

इसके अलावा प्रधानमंत्री ने योग की विशेषता पर बल देते हुए कहा की 'कपालभाती' और 'अनुलोम-विलोम', 'प्राणायाम' से अधिकतर लोग परिचित होंगे। लेकिन 'भस्त्रिका', 'शीतली', 'भ्रामरी' जैसे कई प्राणायाम के प्रकार हैं, जिसके अनेक लाभ भी हैं। उन्होंने बताया कि कैसे अतंरराष्ट्रीय स्तर पर लोग योग को अपना रहे हैं। साथ ही उन्होंने देशवासियों से अनुरोध किया की इस प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस में आप हिस्सेदार बनिए। आपके जीवन में योग को बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय ने इस बार एक अनोखा प्रयोग किया है। हमारे देश में करोडों गरीब दशकों से एक बहुत बड़ी चिंता में रहते आए हैं- अगर बीमार पड़ गए तो क्या होगा? इस तकलीफ को समझते हुए, इस चिंता को दूर करने के लिए ही, करीब डेढ़ साल पहले आयुष्मान भारत योजना शुरू की गई थी।

इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना से होने वाली मृत्यु दर भी हमारे देश में बनिस्पत बहुत कम है। हमें नुकसान भी हुआ है, जिसका दुःख हम देशवासियों को है, लेकिन जो कुछ भी हम बचा पाएं हैं, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है।  

पीएम मोदी ने सेवा भाव को सर्वोपरि बताते हुए देश के सभी इलाकों से 'वुमन सेल्फ हेल्प ग्रुप' के परिश्रम की चर्चा करते हुए कहा की दूसरों की सेवा में लगे व्यक्ति के जीवन में कोई डिप्रेशन या तनाव कभी नहीं दिखता, जीवन को लेकर उसके नजरिए में, भरपूर आत्मविश्वास, सकारात्मकता और जीवंतता हमेशा नजर आती है। उन्होंने एक बार फिर कहा की हमारे डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी, मीडिया के साथी, ये सब जो सेवा कर रहे हैं, उसकी चर्चा मैंने कई बार की है। सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर देने वाले लोगों की संख्या हमारे देश में अनगिनत है। 

उन्होंने आयुष्मान भारत योजना की एक बड़ी विशेषता पोर्टेबिलिटी की सुविधा की जानकारी देते हुए कहा की पोर्टेबिलिटी ने देश को एकता के रंग में रंगने में भी मदद की है, यानी बिहार का कोई गरीब अगर चाहे तो, उसे कर्नाटक में भी वही सुविधा मिलेगी, जो उसे अपने राज्य में मिलती है।

लॉकडाउन 5.0 - 30 जून तक बढ़ा देशभर में लॉकडाउन, रेस्टोरेंट, धार्मिक स्थल, सैलून खोलने की इजाजत

A News Edit By : Yash Kumar Lata

कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश में एक बार फिर से लॉकडाउन लागू कर दिया है. लॉकडाउन 5.0 की गाइडलाइंस सरकार ने जारी कर दी है. लॉकडाउन 5.0 1 जून से 30 जून तक रहेगा. कंटेनमेंट जोन के बाहर सरकार की ओर से चरणबद्ध तरीके से छूट दी गई है. गाइडलाइंस के मुताबिक, लॉकडाउन तीन फेज में खुलेगा. सरकार ने पहले फेज के तहत 8 जून से धार्मिक स्थल, होटल, सैलून, रेस्टोरेंट खोलने की इजाजत दे दी है. हालांकि सरकार ने शर्तों के साथ खोलने की अनुमति दी है.

बता दें कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश फिलहाल लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा है. लॉकडाउन 4.0 की अवधि 31 मई को खत्म हो रही है. ऐसे में सरकार ने इसे और बढ़ा दिया है. दूसरे फेज के तहत स्कूल-कॉलेज खोलने का फैसला केंद्र ने राज्यों पर छोड़ दिया है. जुलाई में राज्य इसपर फैसला लेंगे.