विशेष

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (कवर्धा) ::- दूसरे के खाते से धान बेचते पाए जाने पर 127 बोरा धान एवं ट्रैक्टर जब्त ।।

खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के तहत हरिनछपरा धान खरीदी केन्द्र में आकस्मिक जांच के दौरान किसी अन्य के खाते से धान बेचते पाए जाने पर कृषक सुरेश से 127 बोरा धान और धान परिवहन के उपयोग में लिए गए सोल्ड ट्रैक्टर जब्त कर समिति प्रबंधक के सुपुर्द किया गया है। डिप्टी कलेक्टर श्री अनिल सिदार ने बताया कि धान खरीदी के दौरान कोचियों-बिचौलियों की धर-पकड़ के लिए धान खरीदी केन्द्रों का सतत रूप से निरीक्षण किया जा रहा है, इसी क्रम में बुधवार को सवेरे साढे आठ बजे हरिनछपरा धान खरीदी केन्द्र में यह कार्यवाही की गई। इस कार्यवाही में नायब तहसीलदार श्री मनीष वर्मा और खाद्य निरीक्षक श्री अमित द्विवेदी एवं जानकी शरण कुशवाह शामिल थे।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- आईएएस डॉ संजय अलंग ने न्यायधानी के कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किये ।।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संचालक छग शासन समाज कल्याण विभाग एवं प्रबंध संचालक छग राज्य पाठ्य पुस्तक निगम के पद पर कार्यरत वर्ष 2004 बैच के आईएएस डॉ संजय अलंग ने 25 दिसंबर क्रिसमस के दिन बिलासपुर के नवनियुक्त कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण किये। इस मौके पर आईएएस डॉ संजय अलंग से पत्रकार खबरीलाल की विशेष बातचीत हुई जिसमें उन्होंने कहा कि नवगठित छत्तीसगढ़ शासन के योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना, समग्र विकास हेतु योजनाओं का सही क्रियान्वयन तथा माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किसानों के ऋण माफी, समर्थन मूल्य किसानों को जल्द मिले और इसमें किसानों को कोई कठिनाई न हो यह देखना प्राथमिकता के तालिकाओं में सबसे ऊपर है साथ ही जिले के कलेक्टर के रूप में और जो भी कार्य हैं वह बिना कोई अवरोध के हो यह भी देखना हमारा परम् कर्तव्य है। हमारा लक्ष्य है कि आम जनता को कोई परेशानी न हो और उनके परेशानियों का त्वरित निराकरण हो यह देखना भी हमारा कार्य है। विदित हो कि बिलासपुर के नवपदस्थ कलेक्टर डॉ संजय अलंग एक लेखक हैं, कवि हैं तथा छत्तीसगढ़ के इतिहास एवं संस्कृति के बारे में लिखने हेतु अधिकृत भी हैं। बिलसपुर जिले के निवासियों को एक बेहद संवेदनशील, सौम्य, मृदुभाषी व सरल व्यक्तित्त्व के धनी कलेक्टर मिला है जिनसे आम जनता अनायास ही अपना फरियाद लेकर पहुंच सकते हैं। ज्ञात हो कि डॉ संजय अलंग सन 2014 से 2016 तक मुंगेली जिला के कलेक्टर भी रह चुके हैं।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- भूपेश बघेल की सरकार द्वारा किसानों के हित में एक और बड़ा फैसला - टाटा संयंत्र हेतु अधिग्रहित जमीन किसानों को वापस होगी ।।

@ टाटा संयंत्र की जमीन किसानों को वापस किये जाने का व्यापक स्वागत ।। प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि यूपीए सरकार के समय बनाए गए अधिग्रहण कानून के अनुसार एक निश्चित समय अवधि तक औद्योगिक निकाय द्वारा उपयोग नहीं किए जाने पर किसानों की जमीन उनको वापस की जानी है। बस्तर में टाटा की स्टील संयंत्र हेतु किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बावजूद संयंत्र स्थापित नहीं हो सका। कांग्रेस ने बार-बार मांग की थी कि यूपीए सरकार के भू अधिग्रहण कानून के अनुसार यह जमीन किसानों को वापस किए जाये, लेकिन रमन सिंह सरकार ने कांग्रेस की मांगे नहीं मानी और किसानों की जमीनें वापस नहीं की गयी। शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद कांग्रेस की मांगों के अनुसार आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किसानों की जमीनें वापस दिए जाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। भूपेश बघेल सरकार के एक और किसान हितकारी फैसले का बस्तर सहित पूरे प्रदेश में व्यापक स्वागत हो रहा है। आज सुबह बस्तर के विधायकों और कांग्रेस नेताओं ने सीएम हाऊस में मुख्यमंत्री जी से मुलाकात कर टाटा प्रभावित किसानों की जमीन वापसी पर चर्चा की और दोपहर तक मुख्यमंत्री जी ने टाटा प्रभावित किसानों की जमीन वापसी की घोषणा कर दी। ज्ञात हो कि भाजपा सरकार के द्वारा वर्ष 2006 से ही लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में टाटा संयंत्र लगाने की प्रकिया चल रही थी, जिसमे शासन ने 1709 किसानों की 5000 हेक्टेयर से अधिक जमीनों को जबरिया अधिग्रहित किया था। टाटा प्रभावित किसानों की जमीन वापसी की मांग को लेकर बस्तर के कांग्रेस विधायकों ने और पूरी कांग्रेस पार्टी ने लगातार सदन से सड़क तक की लड़ाई लड़ी है।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती की पत्रकार वार्ता । प्रशासन से पूछे कई बड़े सवाल ।।

स्वामिश्री: ने कहा कि काशी के लंका थाना क्षेत्र के रोहित नगर इलाके में 19 दिसम्बर 2018 को मलबे में मिले सैंकड़ों शिवलिंगों के सन्दर्भ में जो कहानी काशी की पुलिस ने सुनाई है उसकी आशा हमें पहले से ही थी । इसीलिए हम न्यायिक जांच की मांग कर रहे थे । कार्यालय वरिश्ठ पुलिस अधीक्षक से जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 91/2018 दिनांक 21 दिसम्बर 2018 तथा एस.एस.पी. महोदय के इसी सन्दर्भ में सोशल मीडिया पर आई वीडियो क्लिप को देखने के बाद हमारे मन में सवालों के लच्छे उठ खड़े हुए हैं जिन्हें हम क्रमशः आपके (प्रेस) सामने रख रहे हैं ::- ???? घटना 19 दिसम्बर 2018 को पूर्वाह्न ही पुलिस के संज्ञान में आ गई थी जब वे मौके से शिवलिंग गाड़ियों में भरकर लंका थाने ले गए थे । यदि मलबा बताई गई जगह से ही गया था तो फिर इतनी सी जानकारी करने में वह भी इतने संवेदनशील मामले में पुलिस को 50 घण्टे से भी अधिक समय क्यों लगा ? ???? मूर्तियों के लंका थाने पहुंचने पर ही तहसीलदार महोदय द्वारा उनको तत्काल गंगा में विसर्जित करने की कोशिश क्यों की गई ? ???? यदि मूर्तियां बताए गए मन्दिर की ही हैं तो फिर किस आधार पर सरकारी विषेशज्ञ जिसका उल्लेख श्री विशाल सिंह जी द्वारा 20 दिसम्बर 2018 की शाम दिए गए वक्तव्य में है यह कह रहे थे कि मूर्तियां चुनार से लाई गई और निर्मित / अर्धनिर्मित प्रतीत होती हैं ? ????यह कैसे मान लिया जाए कि इतना अन्धेरा था कि मलबा फेंकने वालों को मूर्तियां दिखी ही नहीं, पर वे बाकायदा मलबा भरते और उठाते रहे ? ????यह भी कैसे समझा जाए कि अॅंधेरे के कारण मजदूरों को मूर्तियां दिखीं नहीं । एक दो मूर्ति होती तो बात अलग थी । दो सौ के करीब मूर्तियां और उनमें भी कोई तो खूब भारी हैं । मजदूर सामान्यतः बेलचे से मलबा खॅंचिया में भरते हैं । कैसे उनके बेलचे में वे आ पाई और उन्हें पता ही न चला ? जबकि कुछ मूर्तियाँ तो इतनी वजनी हैं कि उन्हें कोई एक व्यक्ति आसानी से उठा ही नहीं सकता । ????यदि मलबा की जगह में अॅंधेरा था तो मूर्तियां उन्हें खॅंचिया में, गधे की पीठ पर लादते समय या ट्रैक्टर की ट्राली में लोड करते समय दिख जानी चाहिए थी । क्या इन सभी स्थानों में अॅंधेरा था ? ???? स्वयं को उच्चाधिकारी और जिम्मेदार व्यक्ति मानने वाले श्री विशाल सिंह जी ने 20 दिसम्बर 2018 को सायंकाल अर्थात् घटना के प्रकाश में आने के लगभग 30 घण्टे बाद वीडियो वक्तव्य दिया है जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि मूर्तियां सोनारपुरा की दुकान से ली गई और राजनैतिक लाभ के लिए मलबे में फेंकी गई लगती है तो फिर यह गणेश महाल के मन्दिर की कैसे हो गईं ? क्या विशाल सिंह जी को गलत जानकारी पुलिस द्वारा दी गई थी ? या फिर विशाल सिंह जी अलग से कोई जांच करवा रहे थे ? या फिर उन्होंने कहानी गढ़ने की शुरुआत कर दी थी ? ???? हमने जांच की अवधि में ही दिनांक 20 दिसम्बर 2018 को सायं 5 बजे प्रेस कान्फ्रेन्स करके कुछ सबूत सामने रखे थे । रोहित नगर के मलबे में से जो टाइल्स के टुकड़े मिले थे ठीक उसी पैटर्न के टाइल्स चित्रा सिनेमा के सामने डम्प मलबे से भी उठाये थे और यह भी बताया था कि इसी तरह का टाइल्स दुर्मुख विनायक मन्दिर की तोड़ी जा रही दीवाल के शेष अंग में आज भी लगा है । इतने बड़े सबूत की जांच की अधिकारियों ने क्यों उपेक्षा की ? ????हमने यह भी कहा था कि रोहित नगर के मलबे की प्रकृति (पत्थर, ईट और मिट्टी) चित्रा सिनेमा के सामने डम्प कोरिडोर के मलबे से मिलती है । तब क्यों नहीं दोनों जगह के मलबे का तुलनात्मक परीक्षण किया गया और इतने बड़े तथ्य की उपेक्षा कर निष्कर्ष सामने रख दिया गया ? ????गणेश महाल के जिस मकान से मलबा फेंका गया बताया गया है प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि वहां मन्दिर की दीवार पर कोई टाइल्स नहीं लगाए गए थे । ???? गणेश महाल के जिस मकान का मलबा पुलिस की कहानी में फेंका गया बताया गया है वह इतना बड़ा नहीं कि उसमें इतने शिवलिंग स्थापित रहे हों । प्रश्न यही है कि आधे बिस्वा के करीब के इस प्लाट में किस तरह इतने शिवलिंग स्थापित रहे हैं ? ???? आज दोपहर हम स्वयं स्थान के निरीक्षण के लिए गए थे । गणेश महाल के लोगों ने भी हमसे बातचीत में बताया कि वहां इतने शिवलिंग स्थापित नहीं थे और इतने शिवलिंग वहां कभी देखे नहीं गए थे तो फिर पुलिस किस आधार पर वहां शिवलिंगों के होने की बात कह रही है ? ???? पुलिस ने अपनी कहानी के समर्थन में कोई सबूत, कोई सी सी टी वी फुटेज नहीं प्रस्तुत किया है जिससे उनकी कहानी को बल मिलता हो । क्यों ? ???? पुलिस ने यह भी नहीं बताया कि रोहित नगर के प्लाट पर कितनी ट्राली मलबा गणेश महाल के उक्त मकान से ले जाया गया और लगभग कितनी ट्राली मलबा अभी भी वहा विद्यमान है । इसका आकलन क्यों नहीं किया गया ? ????गणेश महाल के जिस भवन का मलबा बताया गया उसके मालिकों और मलबा ढोने वाले मजदूरों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई ? क्योंकि उनके इस कृत्य से बहुत बड़ी अशान्ति फैल सकती थी क्योंकि हिन्दू देवताओं को नीचा दिखाने जैसा काम करके धार्मिक उन्माद ये फैला रहे थे । ???? जिस दिन मलबा रोहित नगर में मिला था उसी दिन श्री विशाल सिंह जी का वक्तव्य आ गया था कि मलबा विश्वनाथ कोरिडोर का नहीं है । इस वक्तव्य का आधार क्या था ? ???? जिस गणेश महाल के मकान में से मलबे के साथ शिवलिंग फेंके जाने की कहानी पुलिस द्वारा बताई गई है उसके मालिकों ने तत्काल सामने आकर यह बात क्यों नहीं कही कि ये मूर्तियां हमारे यहां की हैं और मजदूरों की भूल से और अॅंधेरे के कारण मलबे के साथ चली गई हैं ? सारे शहर में लोग दुःखी होते रहे और इन लोगों ने क्यों स्पष्टता नहीं की ? ???? यदि यह कहें कि उन्हें पता ही नहीं चला कि उनके यहां की कुछ मूर्तियां मलबे में चली गई हैं तो इसका मतलब उनके यहां हजारों मूर्तियां होनी चाहिए । क्योंकि इसी सूरत में किसी को पता नहीं चल सकता कि हजारों की संख्या में मूर्तियां हों तो फिर डेढ़ दो सौ इधर उधर हो जाएं तो पता न चले । तो फिर वहां की हजारों मूर्तियां कहां हैं ? ???? पुलिस ने कहानी तो खूब बनाई पर जिस व्यक्ति के मकान से इतनी सारी मूर्तियां मलबे में फेंक दी गई हैं न तो उसे गिरफ्तार किया है, न ही उसे प्रस्तुत किया है और न ही उसका कोई बयान जारी किया है । क्यों ? ???? जब इतनी बड़ी घटना के हो जाने पर क्षेत्रीय लोग, पार्षद, नेता और धार्मिक लोगों ने उस स्थान पर पहुंच कर लोगों की भावना को संभाला तो फिर पुलिस ने उन पर अशान्ति फैलाने का आरोप लगाकर कार्यवाही करने की बात वह भी रासुका जैसी कार्यवाही करने की बात क्यों फैलाई ? ???? जिस व्यक्ति के घर से इतनी बड़ी घटना की गई और जिस ठेकेदार ने संवेदनशील मामले को घटित किया उसके ऊपर अभी तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं ? ???? गणेश महाल वाला मकान जिस व्यक्ति का है उससे हम लोगों ने सम्पर्क करने का प्रयास किया । वह व्यक्ति डरा हुआ है । क्या शासन उसे बलि का बकरा बना रहा है ? ???? आज स्थान का निरीक्षण करने के दौरान हम सबने देखा कि उक्त मन्दिर की स्थापित और मन्दिर के परिसर में स्थित सूखकर गिर चुके पीपल के पेड के चबूतरे पर स्थापित मूर्तियाँ आज भी वहाँ पर हैं । जिनकी संख्या मुख्य शिवलिंग और नन्दी को लेकर 34 है । ???? यह कहा जा रहा है कि वहाँ बहुत जर्जर मन्दिर और बरामदा था जबकि वहाँ मन्दिर तो था बरामदे की बात तो वहाँ के किसी ने नहीं बताई । ???? कहा जा रहा है कि बरामदे के मलबे को सुमन मिश्र द्वारा ठेके पर साफ कराया जा रहा था । उक्त मलबे में छत गिरने के कारण तमाम शिवलिंग क्षत-विक्षत हो गये थे जो अन्य पत्थ vर के टुकडों के साथ मिल जाने के कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहे हैं जबकि सच्चाई यह है कि कोई भी मूर्ति छत के गिरने से खरोच तक नहीं आई है । क्षेत्र के लोगों ने बार-बार इस चमत्कार का उल्लेख किया । पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से सर्वश्री- अजय राय पूर्व विधायक, संजीव सिंह आप नेता, विश्व्नाथ मन्दिर महंत परिवार के राजेन्द्र तिवारी, कुवँर सुरेश सिंह, शम्भूनाथ बाटुल, यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी, सतेंद्र मिश्रा, सुनील शुक्ला, सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, प्रकाश पाण्डेय, डॉ अभय शंकर तिवारी, पण्डित रवि त्रिवेदी, संजय पाण्डेय , अजय पाण्डेय, मृदुल कुमार ओझा आदि लोग प्रमुख रूप से सम्मलित थे।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- मलबे में मिली मूर्तियों के मामले की न्यायिक जांच हो - मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् ।।

## विगत उन्नीस दिसम्बर को धर्म नगरी वाराणसी के रोहित पुर क्षेत्र से मलबे में मिली 150 से भी अधिक मूर्तियों का मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने वाला है । आज भी मलबे को उलटने पलटने से पन्द्रह से बीस के बीच मूर्तियाँ निकली हैं जिन्हें लंका थाने में कल से रखी मूर्तियों के साथ आज ले जाकर रखा गया है । अभी भी मलबे में अनेक मूर्तियों के दबे होने की आशंका है । परन्तु जिस तरह से वाराणसी जिला और काशी विश्वनाथ मन्दिर प्रशासन कल से ही मामले की लीपापोती में लग गया है उससे आम जनमानस में यह आशंका उभरने लगी है कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से खेलने का कार्य करने वाला कहीं बच न जाये। इसलिए हम काशी के अधोहस्ताक्षरकर्ता प्रबुद्धजन मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश की अध्यक्षता में मामले की न्यायिक जांच कराये जाने की मांग करते हैं । @ खण्डित शिवलिंग भी काशी में पूजनीय # कुछ लोगों ने कल मलबे में मिली मूर्तियों की हमारे द्वारा की गई पूजा और पूजा के लिए मूर्तियों की कस्टडी मांगने को शास्त्र विरुद्ध बताने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके शास्त्र और परम्परा के अज्ञान अथवा पूर्वाग्रह का ही द्योतक है । क्योंकि स्कन्द पुराण का काशी खण्ड स्पष्ट कहता है कि दुरवस्था में पड़े और समय के फेर से टूट फूट गये शिवलिंग भी सर्वथा पूजनीय हैं । अदृश्यान्यपि दृश्यानि दुरवस्थान्यपि प्रिये । भग्नान्यपि च कालेन तानि पूज्यानि सुन्दरि ।।काशीखण्ड 73/24-25 @ विश्वनाथ के प्रतिनिधि हैं काशी के बाकी शिवलिंग # काशी खण्ड 64/62 के अनुसार काशी के सभी शिवलिंग विश्वनाथ जी के प्रतिनिधि के रूप में स्थापित हैं । ताकि एक ही स्थान पर सारे भक्त एकत्र हो अव्यवस्था न उत्पन्न करें । तव प्रतिनिधीकृत्या- स्माभिस्त्वद्भक्तिभावितैः। प्रतिष्ठतेषु लिंगेषु सान्निध्यं भवतोस्त्विह।। @ काशी के शिवलिंग विश्वनाथ जी के शरीर के अंग # काशीखण्ड 33/168-173 के अनुसार काशी के सभी शिवलिंग विश्वनाथ जी के शरीर के अंग हैं । ऊंकारेश्वर शिखा,त्रिलोचन आंखें, गोकर्णेश्वर और भारभूतेश्वर कान,विश्वेश्वर अविमुक्तेश्वर दाहिने हाथ,धर्मेश्वर तथा मणिकर्णिकेश्वर बायें हाथ, कालेश्वर और कपर्देश्वर चरण,ज्येष्ठेश्वर नितम्ब,मध्यमेश्वर नाभि,महादेव जटायें,चन्द्रेश्वर हृदय,वीरेश्वर आत्मा हैं । इनके अतिरिक्त सभी लिंग उनके शरीर के नाखून, रोयें और धातुएँ तथा आभूषण हैं । अतः काशी के एक लिंग को उखाडने का मतलब है कि शिवजी को पीड़ा देना । @ काशी के सुअर भी शिवलिंग को उसकी जगह से नहीं हटाना चाहिए, यह जानते थे । # भूदारोपि न भूदारं तथा कुर्याद्यथान्यतः। सर्वा लिंगमयी काशी यतस्तद्भीतियन्त्रितः।। काशीखण्ड 3/36 के अनुसार काशी के सुअर भी स्वभाव के विपरीत भूमि नहीं खोदते थे कि कहीं कोई शिवलिंग अपने स्थान से चलित न हो जाये । दुःख की बात है कि उसी काशी में आज मन्दिर तोड़े जा रहे और शिवलिंग मलबे में फेंके जा रहे । @ झूठ बोल रहे हैं कार्यपालक # कार्यपालक अधिकारी ने कल मलबे से मिली मूर्तियों के काशी विश्वनाथ कारीडोर के तोड़े मन्दिरों की होने की संभावना के हमारे द्वारा व्यक्त किये जाने के तत्काल बाद बिना किसी जांच के यह घोषित कर दिया कि यह मलबा विश्वनाथ कारीडोर का नहीं है जबकि मलबा खुद बोल रहा है । मलबे की मिट्टी,पत्थर, ईंट और टाइल्स का मिलान करने से सिद्ध होता है कि मलबा वहीं का है । कल जिस स्थान से मूर्तियां मिलीं उसी मलबे के एक अंश की टाइल्स जो कि मूर्तियों के साथ लंका थाने में उपस्थित है का मिलान रात को बांसफाटक के पास पड़े मलबे के अंश से मैच कर रही है । और संयोग से उसी टाइल्स का अंश विश्वनाथ कारीडोर के अन्तर्गत गिराये जा रहे दुर्मुख विनायक की अवशिष्ट दीवार में आज भी लगे हैं । # हम सनातनी जन काशी में तोड़े जा रहे मन्दिरों, मलबे में फेंकी जा रहीं मूर्तियों को देख अत्यन्त आहत हैं । हमारी क्षेत्रीय प्रशासन, प्रदेश - केन्द्र की सरकार और देश की न्यायपालिका सहित लोकतन्त्र के चौथे स्तम्भ मीडिया से गुहार है कि हमारे हृदय पर चल रहे हथौडों से हमें बचायें ।

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- चुनाव रूपी महाभारत में अर्जुन बने भूपेश को रणनीति व जीत के लिए कृष्ण बने टीएस बाबा का मिला भरपूर सहयोग।।

सन 2003 के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस 15 वर्षों के लिए वनवास पे चले गए जबकि भगवान श्रीराम का 14 वर्षों हेतु वनवास हुआ था। सन 2013 छत्तीसगढ़ कांग्रेस एवं भारतीय राजनीति के लिये काला दिन था जब झीरम घाटी में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता सहित प्रदेश के कद्दावर नेता शाहिद हो गए। इस घटना के बाद सन 2014 में कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को प्रदेश कांग्रेस का कमान सौंपा गया । अध्यक्ष बने भूपेश का प्रत्येक पग पर सरगुजा नरेश टीएस बाबा ने उनका भरपूर साथ दिया। यह साथ कृष्ण-अर्जुन जैसा साथ भी कहा जा सकता है। रणनीति एवं प्रबंधन में माहिर टीएस ने जुझारू और मैदानी जंग लड़ने वाले अर्जुन रूपी भूपेश का प्रत्येक पग पर साथ दिया और झीरम कांड के बाद मायूस कार्यकर्ताओं के अंदर जान फूंकी और उन्हें 2018 विधानसभा युद्ध हेतु तैयार किया। बूथ स्तर , मंडल, जिला, शहर, ग्रामीण और प्रदेश कार्यालय में दोनों - भूपेश और टीएस ने जिस तरह जान फूंकी की प्रत्येक कांग्रेसी कार्यकर्ता, समर्थक पूरी तरह चार्ज हो गए और युद्ध स्तर पर विधानसभा युद्ध जितने के लिए दिन और रात एक कर दिए। नेता प्रतिपक्ष के रूप में टीएस ने सरकार को सदन में घेरा तो जमीनी स्तर पर भूपेश ने सरकार को घेरा। जहां पर भी सरकार द्वारा चूक होती , बिना समय गंवाए भूपेश और टीएस मोर्चा संभाल लेते थे। इन दोनों का खासकर भूपेश का विरोध करने वाले , उनपर टिप्पणी करने वाले को भूपेश एंड टीम ने बाहर का रास्ता दिखा दिया जिससे कांग्रेस, छत्तीसगढ़ प्रदेश में और ज्यादा मजबूत हो गई। इस मजबूती का फायदा उन्हें ऐसा मिला कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा छग बीजेपी को दिया गया 65 प्लस का टारगेट अकेले कांग्रेस ने पूरा किया और बीजेपी को 15 सीट पर ही रोक दिया और बचे सीट पर छजकां एंड अलायन्स ने कब्जा किया। छत्तीसगढ़ में जब भी चुनाव हुए , बस्तर और सरगुजा संभाग डिसाइडिंग फैक्टर रहा है और 2018 विधानसभा में इन दोनों संभाग के जनता ने कांग्रेस का पूरा साथ दिया जिससे कांग्रेस को लीड मिल गयी। रायपुर के चारों विधानसभा सीटों में से रायपुर दक्षिण को छोड़ बाकी 3 सीट कांग्रेस के पाले में आ गए। इस चुनाव में भाजपा के कई मंत्री और कद्दावर नेता को हार का स्वाद चखने मिला जो किसी ने कभी नहीं सोचा था कि ये कद्दावर मंत्री भी हार जाएंगे। इन सभी बातों से ऐसा प्रतीत होता है कि भूपेश-टीएस के जुगलबंदी ने छत्तीसगढ़ के जनता को राज्य में हो रहे घटनाक्रम को समझाने में सफल रहे साथ ही कांग्रेस का मैनिफेस्टो भी बहुत हद तक उन्हें सफलता दिलाई जिसे बनाने में टीएस की बहुत बड़ी भूमिका रही। अब भूपेश एंड टीम के लिए किए गए वादों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है और जनता आशा में है कि भूपेश-टीएस द्वारा किये गए वादे जरूर कांग्रेस की सरकार छग प्रदेश में पूरा करेगी और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाएगी।

महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने मीडिया को रोका - खबरीलाल

रायपुर, 16 दिसंबर 2018 ::- छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय "राजीव भवन" में आज दोपहर 12 बजे सीएम के नाम की घोषणा हुई थी, विधायक दल की बैठक होनी थी तथा प्रेस कांफ्रेंस भी होना था। जब कुछ रायपुर के पत्रकार साथी मेन गेट से जाने की लिए बढ़े तो पुलिस द्वारा जानकारी दी गई कि मेन गेट टूटा हुआ है आप लोग पीछे के गेट से आ जाइए। सिक्योरिटी में लगे पुलिस अधिकारी की बात मानकर जब कुछ पत्रकार पीछे के गेट से जाने हेतु गए वहां मौजूद कांग्रेस की महिला कार्यकर्ता जिन्होंने पहचान पत्र भी धारण किये हुए था उन्होंने पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया। जबकि आज के इस ऐतिहासिक दिन पर जब पूरे देश की निगाहें टिकी है उस पल के समाचार संकलन हेतु उक्त महिला कांग्रेस कार्यकर्ता ने मीडिया कर्मियों को सीधे मना कर दिया गया साथ ही उन्होंने अपना पावर दिखाते हुए यह भी कहा कि - आप बाबा को फ़ोन लगाओ या ....। इसकी वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुई जिससे पता चल जाएगा कि अन्य पत्रकार साथियों ने क्या कहा। @ सवाल यहाँ यह है कि - जिस मीडिया को ये सम्मानित कार्यकर्ता अपने समाचार, कवरेज आदि हेतु सीढ़ी बनाते हैं वे एका एक कांग्रेस के सरकार में आते ही शपथ ग्रहण के पहले ही अपने तेवर बदल लिए जो कि बहुत बड़ा प्रश्न है। इस मामले को नवनिर्वाचित सीएम भूपेश बघेल के साथ साथ कांग्रेस के नेता संज्ञान में लें और उक्त महिला कार्यकर्ता से बात कर उचित निर्णय ले।

खबरीलाल रिपोर्ट ::- कुम्भ मेले में षंकराचार्य जी की उपेक्षा से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हुए व्यथित।।

राज्य सरकार द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी के उपेक्षा से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अत्यंत पीड़ा पहुंची है और वो क्षुब्ध हो गये हैं राज्य सरकार के इस कुकृत्य का निंदा करते हुए स्वामी अविमुकेश्वरनन्द ने जी ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि परमपूज्य पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती जी महाराज ने जिस तरह कुम्भ मेले के सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा उपेक्षा की पीड़ा को प्रकट किया है वह अत्यन्त दुःख दायिनी है । जिस देश में और प्रदेश में तथाकथित रूप से हिन्दुओं की सरकार हो,जहाँ शासक स्वयं भगवाधारी हो वहाँ सनातन धर्म के सर्वोच्च आचार्यों में से एक के प्रति ऐसा व्यवहार अकल्पनीय है । ऐसा नहीं है कि ऐसी गलती सरकारों द्वारा पहली बार हो रही हो । परम पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के साथ भी कुछ इसी तरह का व्यवहार इस सरकार का रहा है । विगत पैंसठ से अधिक वर्षों से लगातार माघमेले और कुम्भ पर्वों पर जिनका शिविर लगता था उनका शिविर अगर विगत वर्ष नहीं लगा था तो इसी सरकार की वजह से । हम आदि शंकराचार्य जी के अनुयायी भगवत्पाद आदि शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित चारों शंकराचार्य पीठों में समान श्रद्धा रखते हैं और जब कहीं उन परम श्रद्धेय पीठों या उन पर विराजे पूज्य आचार्यों का अनादर होता दिखाई देता है तो खून खौल उठता है । हमारी केन्द्र और प्रदेश की सरकारों से यह अपेक्षा है कि वे तत्काल पूज्यपाद पुरी पीठाधीश्वर जी महाराज की कुम्भ के सन्दर्भ की मानसिक पीड़ा को दूर करने के कदम उठायें अन्यथा हम सनातनी जनों को भी कुछ निर्णय लेने पड सकते हैं । हम स्मरण कराना चाहते हैं कि यह हिन्दू हितों की अनदेखी ही है जो तीन राज्यों से भाजपा सत्ता से बाहर हो चुकी है ।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- छगनलाल मूंधड़ा पहले निगम अध्यक्ष हैं जिन्होंने छग में बीजेपी के करारी हार के बाद इस्तीफा दिया।।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- आज 12-12-2018 को उद्योग भवन स्थित सभागार में एमडी अरुण प्रसाद एवं समस्त अधिकारीयों के समक्ष अपना स्तीफा सौपा । साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह जी की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा की सर्वाधिक तीव्र गति से विकसित होते राज्य की श्रेणी में लाकर खड़ा करने के लिए डॉ. रमन सिंह जी एवं उनके योगदान को जनता हमेशा याद करेगी । समस्त अधिकारीयों एवं कर्मचारियों को अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग हेतु धन्यवाद दिया तथा अधिकारीयों द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर सम्मान किया गया । इस अवसर पर सीएसआईडीसी के वरिष्ठ अधिकारी आलोक त्रिवेदी , एके दुबे , श्री शुक्ला , श्री एस के सोनी , श्री ओ पी बंजारे , श्री अभ्यंकर खरे , श्री जी के स्वर्णकार , श्री स्वपनिल अवस्थी सहित विभाग के अधिकारी कर्मचारी सहित मीडियकर्मी उपस्थित थे ।

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी ::- कब तक मंदिर यूं ही टूटते रहेंगे ??? एक अकेला दंडी सन्यासी, मंन्दिरों कि रक्षा हेतु लड़ रहे हैं , लेकिन कब तक ......

भारत के माननीय संवेदनशील और विकाशशील पीएम नरेंद्र मोदी के सपनों को पूरा करने का बीड़ा उठाये हैं उत्तरप्रदेश के शासन एवं प्रशासन ने। विकास क्या - विश्वनाथ कॉरिडोर / गंगा पाथवे निर्माण करने का। बहुत ही उत्तम निर्णय जिससे लोगों की परेशानी न हो और श्रद्धालुगण सीधे गंगा स्नान पश्चात बाबा विश्वनाथ का दर्शन, पूजन कर सके। क्या इस विकास और सुविधा हेतु विश्व की धर्म राजधानी माने जाने वाली काशी जो शिवजी के त्रिशूल पर बसा है , जहां बाबा विश्वनाथ का मंदिर है उसके चारों ओर स्थित पुराणों में वर्णित मंदिर, प्राचीन मंदिर, देव विग्रहों को तोड़ना जरूरी था ? क्या करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था के केंद्र, विश्वास के केंद्र पर कुठाराघात करना जरूरी था ? क्या दूसरे तरीके से पीएम मोदीजी के सपनों को पूरा नहीं किया जा सकता था ? क्यों पक्कामहाल उजड़ गया ? क्यों बाबा विश्वनाथ परिसर के लोगों को अपना मकान, दुकान बेचना पड़ा ? क्या लोगों ने स्वतः ही अपने मकान-दुकान को प्रशासन के हाथों में सौंप दिए ? क्या उनके ऊपर प्रशासन ने किसी तरह का दवाब नहीं बनाकर उनके मकान-दुकान को अपने कब्जे में लिए हैं और उसे तोड़ रहे हैं ? इसे स्वीकार करना थोड़ा मुश्किल है कि प्रशासन / बिचौलियों ने कोई दवाब नहीं बनाए होंगे। काशी के मंन्दिरों एवं देव विग्रहों को बचाने एक अकेला दंडी सन्यासी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती केवल सामने आए हैं साथ मे कुछ आस्थावान प्रतिष्ठित लोग, श्रद्धालु उनके साथ खड़े हुए। लेकिन काशी शहर की लाखों सनातन धर्मी जनता, इन मंन्दिरों मे माथा टेकने वाली जनता, मन्नते मांगने वाली जनता, पूजार्चना करने वाली जनता कहाँ चले गए यह बहुत ही आश्चर्य की बात है। जिस काशी में आकर लोग धन्य महसूस करते हैं, जहां लोग मोक्ष की कामना करते हैं वहां इस तरह की घटना घटित हुई यह सभी सनातन धर्मियों के समझ से परे है। तकलीफ तब और हुई जब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ने सही मायने में अपनी भूमिका अदा नहीं किये। क्या यह समझ लिया जाए कि वे देखकर भी अंधे बने हुए थे और वस्तु स्थिति को जन मानस के सामने नहीं लाए। इतना विरोध हुआ लेकिन इन्हें मेन स्ट्रीम मीडिया ने उचित स्थान नहीं दिया। यदि दिया होता तो आज काशी में मंदिर, प्राण प्रतिष्ठित देव विग्रह टूटने से बच जाते और असमय देवताओं को मृत्यु वरण नहीं करना होता। प्राण प्रतिष्टित मूर्तियों को तोड़ना किसी की हत्या कर देने के समान हैं और इस हेतु कानून के जानकारों को, संविधान के जानकारों को आगे आना चाहिए था और सरकार व प्रशासन को समझाना था। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती, ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द महाराज, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज, ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानन्द महाराज, साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश उपाध्याय, बाबा विश्वनाथ मंदिर के महंत बबलू महाराज, सुनील शुक्ल, संजय पांडे, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, सतीश अग्रहरि आदि सन्त, विद्ववत जन ही केवल काशी के मंन्दिरों को बचाने हेतु लड़ाई शुरू किए जिस हेतु दंडी स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज के नेतृत्त्व में काशी की जनता को जागृत करने हेतु पंचक्रोशी की यात्रा किये, स्वामिश्री: ने पराक व्रत रखा, वाराणसी जिले के प्रत्येक गांवों में जाकर लोगों को इस घोर अनिष्ठ कार्य के बारे में बताया, सर्व देव कोपाहर महायज्ञ किये तथा विभिन्न समय अपनी आवाज बुलंद किये। इतने सब के बावजूद प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंगी और प्रशासन खुद पाप कार्य के भागीदार बने। कहावत है जो जैसा करता है उसे इस जीवन मे ही उस किये गए कार्य का फल भोगकर जाना पड़ता है । यह कहावत सच न हो इस हेतु स्वामिश्री: ने यज्ञ कर सभी लोगों की तरफ से परब्रह्म परमात्मा से माफी भी मांगे। बाबा विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने बाबा विश्वनाथ को ही वीवीआइपी बना दिया है और वीआईपी दर्शन हेतु 300/- रुपये का टिकट बेचने लगे हैं और ऑनलाइन भी टिकट बिकने लगा है। जो व्यक्ति 300/- रुपये का टिकट लेगा वह चंद मिनटों में दर्शन, पूजन कर आ जायेगा । क्या अपने ही भगवान के दर्शन हेतु अब श्रद्धालुओं को पैसे देने होंगे ? जो व्यक्ति पैसा न दे उनके दर्शन क्या नहीं होंगे ? उनके भी दर्शन होंगे जिस हेतु उन्हें आम श्रद्धालु की तरह पंक्ति में खड़े होकर घण्टों बाद दर्शन करने मिलेंगे। क्या ऐसी व्यवस्था कर प्रशासन ने श्रद्धालुओं को वीआईपी और आम में नहीं बांट दिया ? इस पर कोई व्यक्ति हिम्मत कर नहीं पूछ पा रहा है कि ऐसा व्यवस्था क्यों और किसलिए बनाया गया। काशी को यदि काशी बनाये रखना है तो काशीवासियों के साथ साथ भारत के समस्त सन्त, महात्मा, सनातन धर्मियों को स्वामिश्री: के साथ खड़ा होना पड़ेगा, मंदिरों व देव विग्रहों को तोड़ने से रोकना होगा तभी पाप मुक्त हो सकते हैं। स्वामिश्री: ने कभी विकास का विरोध नहीं किये हैं। उन्होंने केवल और केवल मंदिर और देव विग्रहों को तोड़ने का विरोध किये हैं। समय बड़ा बलवान है और वह सही वक्त पर सही समय ठीक दिखा देगा। हर हर महादेव।

पत्रकार खबरीलाल की विशेष टिप्पणी :: स्वामिश्री ने भरी हुंकार, पूछा " कहाँ है हमारे भगवान " ।।

पूरे भारत मे एक मात्र क्रांतिकारी सन्त तथा ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ही मंदिर एवं मूर्तियों के तोड़े जाने पर अपनी आवाज उठा रहे हैं और मंदिर एवं देव विग्रहों को तोड़कर जो विकास काशी में हो रहा है उसका तीव्र विरोध कर रहे हैं। जब कि केंद्र और उत्तरप्रदेश राज्य में हिंदुत्त्ववादी सरकार है फिर भी विकास , विकास और विकास के नाम पर प्राणप्रतिष्ठित देव विग्रहों की हत्या क्यों कि जा रही है। भगवान का पूजन, आरती, राग भोग इत्यादि प्राणप्रतिष्ठित मूर्तियों की होती है। ज्ञात हो कि काशी में पुराणों में वर्णित मंदिर हैं, अति प्राचीन मंदिर है जिनका रोजाना पूजार्चना की जाती है। ऐसी स्थिति में क्या हिंदुत्त्ववादी सरकार के मन मे कोई दया अपने आराध्य देवों पर नहीं आ रही है। विश्व के धार्मिक राजधानी के रूप में जाने जाना वाला काशी का ऐसा स्वरूप / हाल होगा शायद किसी ने कभी नहीं सोचा होगा। एक बात और गौर करने वाली है कि काशी के सनातन धर्मी जनता भी चुप है और वे क्यों चुप हैं यह वे ही बता सकते हैं। ऐसे परिस्थिति से प्रतीत होता है कि काशी की जनता शायद नास्तिक हो चुकी है या वे किसी कारण वश डरी हुई है। क्यों प्रहार हो रहे हैं सनातन धर्मियों के आस्था के केंद्र पर ? क्या मूर्ति, मन्दिर तोड़ने वालों के हाथ नहीं कांप रहे हैं ? यह किस तरह की विवशता है ? @ स्वामिश्री ने पूछा और कहा - ???? कहाँ हैं हमारे भगवान ? ???? टूटे में ही हम तो दर्शन कर के संतुष्ट हैं लेकिन मूर्ति को कम से कम टूटे में ही रहने दो। आप मूर्ति ही हटा दे रहे हो यह कहाँ का नियम है ?????यह विश्वनाथ जी के नाम से अनर्थ हो रहा है।???? जिम्मेदार अधिकारी आकर बताए हमें। ???? हम ने स्वयं नियम का पालन किया है । ???? यहां तो हमारी मूर्ति ही गायब है, हम को दर्शन करना है, ये कैसे होगा ? ऐसा कोई विकास नहीं होता ।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (काशी, 29-11-2018) ::- आदर्श राम का मंदिर नहीं, आराध्य देव राम का मंदिर होगा - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने परमधर्मादिश के आसंदी से परम् धर्मादेश सुनाते हुए कहा कि - हमे आदर्श राम का मंदिर नहीं अपितु आराध्य देव राम का मंदिर चाहिए जो हम सभी धर्माचार्यों की राय है। ज्ञात हो कि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 का आयोजन 25 से 27 नवंबर 2018 तक सीरगोवर्धनपुर, काशी में आयोजित किया गया जिसमें काशी व अन्य स्थानों पर मंदिर तोड़े जाने पर, गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर, गंगा के अविरल प्रवाह पर, राम मंदिर निर्माण पर व अन्य मुद्दों पर उपस्थित देश एवं विदेश से पधारे धर्म सांसद एवं धर्माचार्यों ने अपनी बात बेबाकी से रखी जिसमे राम मंदिर का मुद्दा सबसे ज्यादा अहम था। परम् धर्माधीश के आसंदी से बोलते हुए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि आराध्य देव राम के मंदिर में प्रभु राम का सच्चिदानन्द स्वरूप विराजमान होगा। आगे उन्होंने कहा कि श्रीराम के जन्म स्थान पर कोई भी परिवर्तन नहीं होगा और प्रभु राम का मंदिर उसी स्थान पर ही बनेगा। अब सही समय है कि मुस्लिम स्वयं हिंदुओं को भगवान श्रीराम का जन्म भूमि सौंप दे और मंदिर बनाने में अपनी सहभागिता प्रदान करे। आगे शंकराचार्य स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि धर्म पर बांटने वालों की साजिशें कभी सफल नहीं होगी क्यों कि धर्म के नाम पर सभी भारतीय एक हैं और एक ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि काशी में आयोजित परम् धर्म संसद 1008 किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं किया गया अपितु यह आयोजन सौ करोड़ सनातनियों को अधर्म से बचाने के लिए किया गया है तथा जनवरी 2018 में होने वाले प्रयाग कुम्भ में इस बाबत और भी चर्चा होंगे।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- राम मंदिर को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे सरकार - शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ।।

काशी के सीरगोवर्धनपुर में आयोजित तीन दिवसीय सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 के 27 नवम्बर 2018 को समापन पश्चात 28 नवम्बर को सुबह केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में पत्रकार वार्ता में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने ने अपने परम धर्मादेश में सरकार से आग्रह किया कि यह जनहित से जुड़ा मामला है जिस हेतु राम मंदिर मुद्दे को राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित कर आगामी शीत कालीन संसद सत्र में इस परम् धर्मादेश पर विचार कर संविधान में संशोधित करे। इस संशोधन के होने पर सर्वोच्चय न्यायालय को चार हफ्ते के अंदर अपना फैसला देना होगा अन्यथा जो स्टे लगा हुआ है वह स्वतः ही निष्प्रभावी हो जाएगा। आगे शंकराचार्य महाराज ने कहा कि यह परम धर्मादेश लोकसभा अध्यक्ष के साथ साथ सभी सांसदों को प्रतिलिपि भेजी जाएगी जिससे आगामी शीतकालीन सत्र में इस जनहित और अहम मुद्दे पर विचार हो सके और संविधान में संशोधन कर इसे राष्ट्रीय महत्त्व का मुद्दा घोषित करे। लोकतंत्र में सरकार जनता के अविभावक के रूप में होती है इसलिए जनता की मांग को अविभावक को महत्त्व देना चाहिए साथ ही राम मंदिर मुद्दों को देश के चारों पीठ के शंकराचार्यों और धर्माचार्यों के ऊपर छोड़ देना चाहिए। प्रेस वार्ता में दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के उपस्थिति में परम धर्मादेश को पढ़कर सुनाया। ज्ञात हो कि सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 का आयोजन स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने काशी के सीरगोवर्धनपुर में आयोजित किया जिसमें शंकराचार्य के साथ साथ देश के प्रमुख सिद्ध संत, महात्मा, धर्म सांसद व जनता सम्मिलित हुए। आज के प्रेस वार्ता में ब्रह्मचारी डॉ इंदुभवानन्द , ब्रह्मचारी सहजानन्द, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, ब्रह्मचारी धारानन्द, ब्रह्मचारी शारदानन्द अन्य सन्त, महात्माओं के साथ लता पांडेय, चुन्नू पंडित, रमेश उपाध्याय, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश पांडेय, बबलू महाराज व आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे।

जानिए ब्रह्मचारी धारानन्द ने राम मंदिर पर क्या कहा :- पत्रकार खबरीलाल ।।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (काशी, 28-11-2018) ::- काशी के सीरगोवर्धनपुर में ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि व क्रांतिकारी सन्त दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती द्वारा 25 से 27 नवंबर 2018 तक आयोजित सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 में परमहंसी स्थित जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम के ब्रह्मचारी धारानन्द जी महाराज ने कहा कि किसी भी सूरत में हम सभी 100 करोड़ सनातन धर्मियों के आराध्य भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या स्थित राम जन्म भूमि पर अतिशीघ्र बनना चाहिए और इस हेतु सर्वोच्चय न्यायालय विलंब न करते हुए इस पर त्वरित सुनवाई कर राम मंदिर निर्माण का मार्ग सुगम करे जिससे करोड़ों सनातन धर्मियों के आस्था पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात न हो। हम सब यह चाहते है कि द्विपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के नेतृत्त्व में देश के अन्य संत, महात्माओं व सनातन धर्मियों के अरमान पूर्ण हो। काशी में आयोजित सनातन वैदिक हिन्दू परम् धर्म संसद 1008 में उपस्थित देश विदेश से आये धर्म सांसद ने एक सुर में कहा कि सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर निर्माण पर अतिशीघ्र फैसला दे।

छत्तीसगढ़ भाषा दिवस पर विशेष

छत्तीसगढ़ी भाषा किसी परिचय की मोहताज नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य से इसका गहरा संबंध है। यह करोड़ों छत्तीसगढ़ियों के आत्म सम्मान और उसकी अस्मिता की भाषा है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पृष्ठभूमि में छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति ने नींव के पत्थर का काम किया है। छत्तीसगढ़ी के लोक में जो अलोक है वह अन्य भारतीय भाषाओं से कहीं अधिक है। छत्तीसगढ़ी छत्तीगसढ़ का दरपन है, श्रृंगार है। यह छत्तीसगढ़ियों के रग-रग में दिखाई देती है।

छत्तीसगढ़ की भाषा है छत्तीसगढ़ी। पर क्या छत्तीसगढ़ी पूरे छत्तीसगढ़ में एक ही बोली के रुप में बोली जाती है? हम पूरे छत्तीसगढ़ में बोलीगत विभेद पाते हैं। डॉ. सत्यभामा आडिल अपने "छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य" (विकल्प प्रकाशन, रायपुर, 2002 , प-.7 ) में कहते हैं कि यह बोलीगत विभेद दो आधारों - जातिगत एवं भौगोलिक सीमाओं के आधार विवेचित किये जा सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने छत्तीसगढ़ की बोलियों का निर्धारण निश्चयन किया है -

छत्तीसगढ़ी बोली बहुत ही मधुर है। इस बोली में एक अपनापन है जो हम महसूस कर सकते हैं। हिन्दी जानने वालों को छत्तीसगढ़ी बोली समझने में तकलीफ नहीं होती - "उसने कहा" को छत्तीसगढ़ी में कहते हैं "कहीस","मेरा" को कहते हैं "मोर", "हमारा" को "हमार", "तुम्हारा" को "तोर" और बहुवचन में "तुम्हार"।

छत्तीसगढ़ी - रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में जो बोली सुनाई देती है वह है छत्तीसगढ़ी।

खल्टाही - छत्तीसगढ़ की यह बोली रायगढ़ जिले के कुछ हिस्सों में बोली जाती है। यह बोली हमें बालाघाट जिले के पूर्वी भाग में, कौड़िया में, साले-टेकड़ी में और भीमलाट में सुनाई देती है।

सरगुजिया- सरगुजिया छत्तीसगढ़ी बोली सरगुजा में प्रचलित है। इसके अलावा कोरिया और उदयपुर क्षेत्रों में भी बोली जाती है।

लरिया - छत्तीसगढ़ कीे यह बोली महासमुंद, सराईपाली, बसना, पिथौरा के आस-पास बोली जाती है।

सदरी कोरबा - जशपुर में रहनवाले कोरबा जाति के लोग जो बोली बोलते हैं वह है सदरी कोरबा। कोरबा जाति के लोग जो दूसरे क्षेत्र में रहते हैं जैसे पलमऊ, सरगुजा, विलासपुर आदि, वे भी यही बोली बोलते हैं।

बैगानी - बैगा जाति के लोग बैगानी बोली बोलते हैं। यह बोली कवर्धा, बालाघाट, बिलासपुर, संबलपुर में बोली जाती है।

बिंझवारी - बिंझवारी में जो बोली बोलते हैं, वही है बिंझवारी। वीर नारायन सिंह भी बिंझवार के थे। रायपुर, रायगढ़ के कुछ हिस्सो में यह बोली

जब हम छत्तीसगढ़ी कहते हैं तो उसका तात्पर्य छत्तीसगढ़ में जन्मी हल्बी और गोंड़ी भी है। यह सनातन सत्य है कि हल्बी और गोंड़ी छत्तीसगढ़ की सहोदरा भाषाएं हैं