ज्योतिष

गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की स्थापना करते वक़्त ध्यान रखे ये बातें

गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक है और भगवान गणेश के भक्तों ने अपने हिसाब से इस त्योहार की तैयारियां शुरू कर दी हैं. गणेश जी के भक्त 10 दिनों के लिए अपने घरों में उनकी मूर्ति की स्थापना करते हैं  भाद्रपक्ष के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है की इस दिन भगवान श्री गणेश का जन्म हुआ था। इसी दिन से श्रीगणेश के 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुवात होती है। इन दिनों हर कोई भगवान श्रीगणेश की मूर्ति घर-दुकान में स्थापित कर, उनकी पूजा-अर्चना करता है। भगवान श्री गणेश की मूर्ति की स्थापना करते वक़्त कुछ बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। यहां हम आपको कुछ ऐसी ही आवश्यक बातों के बारे में बता रहे है।

किस जगह कैसी मूर्ति रखना होगा शुभ
घर में भगवान गणेश की बैठी मुद्रा में और दुकान या ऑफिस में खड़े गणपति की मूर्ति या तस्वीर रखना बहुत ही शुभ माना जाता है।

मूर्ति रखते समय ध्यान रखें ये बात
घर या दुकान में गणेश मूर्ति रखते समय ध्यान रखें की उनके दोनों पैर ज़मीन का स्पर्श करते हुए हों। इससे कामों में स्थिरता और सफलता आती है।
ख़ास होती है सिंदूरी रंग की प्रतिमा
सर्व मंगल की कामना करने वालों को सिंदूरी रंग के गणपति की आराधना करनी चाहिए। ऐसा करने से सभी मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती है।

किस ओर हो श्रीगणेश की सूंड
श्रीगणेश की मूर्ति या चित्र में इस बात का ध्यान रखें की उनकी सूंड बाएं हाथ की और घुमी हुई हो। दाएं हाथ की और घुमी हुई सूंड वाले गणेश जी हठी होते हैं।
श्री गणेश के साथ जरूर हो ये दो चीज़ें
घर में श्री गणेश का चित्र लगाते समय ध्यान रखें कि चित्र में मोदक और चूहा अवश्य हो। इससे घर में बरकत रहती है।

मेन गेट पर इस तरह लगाएं श्रीगणेश की तस्वीर
घर के मेन गेट पर गणपति की दो मूर्ति या चित्र लगाने चाहिए। उन्हें ऐसे लगाएं कि दोनों गणेशजी की पीठ मिली रहे। ऐसा करने से सभी वास्तु दोष खत्म हो जाते है।
इस तरह कर सकते है वास्तुदोष का अंत
घर का जो हिस्सा वास्तु के अनुसार सही न हो, वहां घी मिश्रित सिंदूर से श्रीगणेश स्वरुप स्वास्तिक दीवार पर बनाने से वास्तु दोष का प्रभाव कम होने लगता है।

सुख-शांति के लिए घर लाए सफ़ेद मूर्ति
घर या दुकान में सुख-शांति, समृद्धि की इच्छा रखने वालों को सफ़ेद रंग के विनायक की मूर्ति या तस्वीर लगानी चाहिए।

घर में यहां जरूर लगाएं श्रीगणेश का चित्र
घर के ब्रह्म स्थान यानी केंद्र में और पूर्व दिशा में मंगलकारी श्री गणेश की मूर्ति या चित्र जरूर लगाना चाहिए। ऐसा करना बहुत ही शुभ माना जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी का धूम अपने आराध्य के दर्शन के लिए लोग बड़ी संख्या में मंदिरों सहित घरो में लगाए भगवान के झूले

देशभर में जन्माष्टमी धूमधाम से मनायी जा रही है। बांके बिहारी का इंतजार श्रद्धालु बेसब्री से कर रहे हैं। मथुरा-वृंदावन के मंदिरों को खास तरह से सजाया गया है। अपने आराध्य के दर्शन के लिए लोग बड़ी संख्या में मंदिरों सहित घर-घर भगवान के झूले सजाएंगे  और विशेष आराधना होगी। मंदिरों में मोहक झांकी के साथ ही भगवान के दर्शन होंगे। विभिन्ना मंदिरों में मध्य रात्रि भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर भगवान को झूला झुलाने और उनकी एक झलक पाने के लिए भक्तों की कतार लगेगी। बाल-गोपाल की रहेगी धूम विभिन्ना चौक-चौराहों पर दही-हांडी की प्रतियोगिता होगी। गीत-संगीत के साथ ही बाल-गोपालों की धूम रहेगी। बाजे-गाजे के साथ ही गोपालों की टोलियां निकलेंगी और दही-हांडी प्रतियोगिता के साथ कृष्ण जन्मोत्सव देर रात्रि तक रहेगा। 
विशेष संयोग के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनेगा। 25 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त को रात्रि 8.13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। इसके साथ ही मध्य रात्रि भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के समय रोहिणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इससे कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी।

वट सावित्री व्रतः में इस बार बन रहा है शुभ संयोग

हिंदू धर्म के मुताबिक, जो भी स्त्री वट सावित्री व्रत रखती हैं, उनका वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति को लंबी उम्र मिलती है. इस साल इसी दिन स्नान दान की अमावस्या और शनि जयंती भी है. पंचांग के मुताबिक, गुरुवार को सुबह 5.18 मिनट पर सुर्योदय का संयोग है. इसके बाद ही महिलाएं पूजा-अर्चना के लिए वट वृक्ष के नजदीक जाएंगी और पति की लंबी उम्र की कामना, सुख-समृद्धि के लिए भगवान से प्रार्थना करेंगी. इस व्रत की मान्यता इनती अधिक है कि इसे करवाचौथ से जरा सा भी कम नहीं आंका जाता है. 
 
वट वृक्ष के नजदीक पूजा अर्चना करने के बाद महिलाएं कथा सुनती हैं और वृक्ष की चारों ओर परिक्रमा कर उसमें कच्चा सूता बांधती हैं. पूजा की विधि यहीं समाप्त नहीं हो जाती. वट वृक्ष की पूजा के बाद महिलाएं बड़ों का आशीर्वाद लेती हैं और अपने पति की पूजा कर उनका पैर धोती हैं. सबको घर में प्रसाद देकर फिर खुद मीठा भोजन ग्रहण करती हैं. बता दें कि गुरुवार को वट वृक्ष की पूजा का समापन शुक्रवार को होगा. 
मान्यताएं
वट सावित्री व्रत में महिलाएं 108 बार बरगद की परिक्रमा कर पूजा करती हैं. कहते हैं कि गुरुवार को वट सावित्री पूजन करना बेहद फलदायक होता है. ऐसा माना जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस ले लिया था. इस दिन महिलाएं सुबह से स्नान कर लेती हैं और सुहाग से जुड़ा हर श्रृंगार करती हैं. मान्यता के अनुसार इस दिन वट वृक्ष की पूजा करने के बाद ही सुहागन को जल ग्रहण करना चाहिए.

 महत्व
वट का मतलब होता है बरदग का पेड. बरगद एक विशाल पेड़ होता है. इसमें कई जटाएं निकली होती हैं. इस व्रत में वट का बहुत महत्व है. कहते हैं कि इसी पेड़ के नीचे स‍ावित्री ने अपने पति को यमराज से वापस पाया था. सावित्री को देवी का रूप माना जाता है. हिंदू पुराण में बरगद के पेड़े में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया जाता है. मान्यता के अनुसार ब्रह्मा वृक्ष की जड़ में, विष्णु इसके तने में और शि‍व उपरी भाग में रहते हैं. यही वजह है कि यह माना जाता है कि इस पेड़ के नीचे बैठकर पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है. 

पूजा का तरीका:
जैसा की हिंदू धर्म में इस व्रत की मान्यता है, ठीक वैसे ही इस व्रत से जुड़े पूजन को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं. मान्यता के अनुसार इस दिन विवाहित महिलाएं वट वृक्ष पर जल अर्पण करती हैं और हल्दी का तिलक, सिंदूर और चंदन का लेप लगाती हैं. इस व्रत के पूजन के दौरान पेड़ को फल-फूल अर्पित करने की भी मान्यता है. 

शनि जयंती का महत्व और फल

 

शनि जयंती महत्व 
इस दिन प्रमुख शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है. भारत में स्थित प्रमुख शनि मंदिरों में भक्त शनि देव से संबंधित पूजा पाठ करते हैं तथा शनि पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. शनि देव को काला या कृष्ण वर्ण का बताया जाता है इसलिए इन्हें काला रंग अधिक प्रिय है. शनि देव काले वस्त्रों में सुशोभित हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन हुआ है. जन्म के समय से ही शनि देव श्याम वर्ण, लंबे शरीर, बड़ी आंखों वाले और बड़े केशों वाले थे. यह न्याय के देवता हैं,  योगी, तपस्या में लीन और हमेशा दूसरों की सहायता करने वाले होते हैं. शनि ग्रह को न्याय का देवता कहा जाता है यह जीवों को सभी कर्मों का फल प्रदान करते हैं.

 ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाएगी. इस दिन शनि देव की विशेष पूजा का विधान है. शनि देव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्रों व स्तोत्रों का गुणगान किया जाता है. शनि हिन्दू ज्योतिष में नौ मुख्य ग्रहों में से एक हैं. शनि अन्य ग्रहों की तुलना मे धीमे चलते हैं इसलिए इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार शनि के जन्म के विषय में काफी कुछ बताया गया है और ज्योतिष में शनि के प्रभाव का साफ़ संकेत मिलता है. शनि ग्रह वायु तत्व और पश्चिम दिशा के स्वामी हैं. शास्त्रों के अनुसार शनि जयंती पर उनकी पूजा-आराधना और अनुष्ठान करने से शनिदेव विशिष्ट फल प्रदान करते हैं.
शनि जन्म के संदर्भ में एक पौराणिक कथा बहुत मान्य है जिसके अनुसार शनि, सूर्य देव और उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं. सूर्य देव का विवाह संज्ञा से हुआ कुछ समय पश्चात उन्हें तीन संतानो के रूप में मनु, यम और यमुना की प्राप्ति हुई. इस प्रकार कुछ समय तो संज्ञा ने सूर्य के साथ निर्वाह किया परंतु संज्ञा सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन नहीं कर पाईं उनके लिए सूर्य का तेज सहन कर पाना मुश्किल होता जा रहा था . इसी वजह से संज्ञा ने अपनी छाया को पति सूर्य की सेवा में छोड़ कर वहां से चली चली गईं. कुछ समय बाद छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ.
शनि जयंती के अवसर पर शनिदेव के निमित्त विधि-विधान से पूजा पाठ तथा व्रत किया जाता है. शनि जयंती के दिन किया गया दान पूण्य एवं पूजा पाठ शनि संबंधि सभी कष्टों दूर कर देने में सहायक होता है. शनिदेव के निमित्त पूजा करने हेतु भक्त को चाहिए कि वह शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी स्नान आदि से निवृत्त होकर नवग्रहों को नमस्कार करते हुए शनिदेव की लोहे की मूर्ति स्थापित करें और उसे सरसों या तिल के तेल से स्नान कराएं तथा षोड्शोपचार पूजन करें साथ ही शनि मंत्र का उच्चारण करें 

इसके बाद पूजा सामग्री सहित शनिदेव से संबंधित वस्तुओं का दान करें. इस प्रकार पूजन के बाद दिन भर निराहार रहें व मंत्र का जप करें. शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति हेतु तिल , उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए, शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए. शनि के लिए दान में दी जाने वाली वस्तुओं में काले कपडे, जामुन, काली उडद, काले जूते, तिल, लोहा, तेल,  आदि वस्तुओं को शनि के निमित्त दान में दे सकते हैं.

शनिवार को क्या रूख लेंगे आपके सितारे जानने के लिए पढ़ें, राशिफल

उपाय: सभी 12 राशियों के व्यक्ति मुश्किलों से बचने के लिए काली गाय को गुड़-चना खिलाएं।

मेष: महत्वपूर्ण समय का लाभ उठाएं। जरूरी काम दोपहर तक निपटा लें। प्रयासों में अड़चनें आएंगी। विरोधी वर्ग परेशानfयां खड़ी करेगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम,  शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।

वृष: दाम्पत्य जीवन में अनुकूलता रहेगी। दौड़-भाग व परिश्रम के अच्छे नतीजे मिलेंगे। भौतिक सुख-साधनों में निश्चित वृद्धि होगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा उत्तर, शुभ समय सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक।
 
मिथुन: घरेलू क्लेश परेशान करेंगे। ग्रह स्थिति खर्चीली साबित होगी। कारोबार में विश्वासपात्र से धोखा मिलेगा। सावधान होकर काम करें। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग नीला, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक। 
 
कर्क: सुख-सुविधा के साधन प्राप्त होंगे। अकस्मात लाभदायक कार्य पूरे होंगे। दुर्भाग्य से निश्चित मिलेगी मुक्ति। साख मज़बूत होगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 1, शुभ रंग मेहरून, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय सायं 06:00 से सायं 07:30 तक।
 
सिंह: शारीरिक कष्ट के कारण हुए खर्च से दुखी रहेंगे। करियर में नई रणनीति अपनानी पड़ेगी। नियोजित योजनाओं पर अमल करेंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 9, शुभ रंग लाल, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय सुबह 09:00 से सुबह 1030 तक।
 
कन्या: स्थायी व्यवसाय से लाभ होगा। बुजुर्गों की सेवा में रूचि बढ़ेगी। प्रयास और दौड़भाग निरर्थक रहेंगे। धनहानि के संकेत हैं।
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग नीला, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक। 
 
तुला: व्यवहार से लोग प्रभावित होंगे। प्रभावशाली व्यक्ति मददगार साबित होगा। पेचीदा काम सफल रहेंगे। लक हर काम में साथ देगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा उत्तर, शुभ समय सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 तक। 
 
वृश्चिक: नौकरी में उन्नति के संकेत हैं। सूझबूझ से किए कार्य सफल रहेंगे। शुभ कार्य की योजना बनेगी। अधिकारी सहयोग करेंगे। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम,  शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।
 
धनु: साजिशों से सतर्क रहें। लाभार्जन से रुकावट दूर होगी। महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी। जीवन में उत्साह बना रहेगा। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा दक्षिण-पूर्व, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।
 
मकर: घर के रख-रखाव का कार्य होने के संकेत हैं। काम लटकने से परेशान रहेंगे। व्यक्ति विशेष के सहयोग के बावजूद काम नहीं बनेगा। 
शुभाशुभ: शुभ अंक 7, शुभ रंग ग्रे, शुभ दिशा उत्तर-पूर्व, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।
 
कुंभ: करियर में प्रगति से धन लाभ होगा। अधिकारी कामकाज की सराहना करेंगे। चंचल मन को कंट्रोल करें। अनावश्यक विवादों से बचें।
शुभाशुभ: शुभ अंक 7, शुभ रंग ग्रे, शुभ दिशा उत्तर-पूर्व, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।
 
मीन: लंबित कार्यों कf पूर्णता से खुशी बढ़ेगी। धन कोष की वृद्धि के साथ ही लाइफस्टाइल पर खर्चा बढेगा। प्रोफेशनल सक्सैस मिलेगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा दक्षिण-पूर्व, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।
 
आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

न्याय के देवता शनिदेव को करें संतुष्ट, फिर देखें करिश्मा किस्मत का

भगवान शनिदेव कलियुग में भी निष्पक्ष न्याय में विश्वास करने वाले माने जाते हैं और संतुष्ट होने पर अच्छी किस्मत और भाग्य के साथ अपने भक्त की हर मनोकामना पूरी करके मनवांछित फल प्रदान करते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार सूर्य देव के पुत्र शनि देव की माता का नाम छाया है। सूर्य देव का विवाह प्रजापति दक्ष की पुत्री संज्ञा से हुआ था। विवाह के पश्चात कुछ समय तक दोनों साथ रहे, जिससे उन्हें तीन संतान की प्राप्ति हुई। भगवान सूर्य देव की तीन संतान मनु, यम तथा यमुना हैं लेकिन सूर्य देव के तेज को संज्ञा ज्यादा दिन सहन न कर सकी। जिस कारण एक दिन संज्ञा अपनी छाया को पति सूर्य देव की सेवा में छोड़कर सूर्यलोक से चली गई। उत्तरार्द्ध में छाया के गर्भ से भगवान शनिदेव का जन्म हुआ।

शनि के कष्ट निवारक उपाय आजमाएं, फिर देखें करिश्मा किस्मत का
नित्य-प्रतिदिन भगवान भोलेनाथ पर काले तिल व कच्चा दूध चढ़ाना चाहिए।
यदि पीपल वृक्ष के नीचे शिवलिंग हो तो अति उत्तम होता है।
सुंदरकांड का पाठ सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करता है।
संध्या के समय जातक अपने घर में गूगल की धूप दे।
चींटियों को गोरज मुहूर्त में तिल चोली डालना।
सांप को दूध पिलाना।
अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति के लिए मां भगवती काली की आराधना करें।
काल भैरव की साधना, मंत्र जप आदि करें।
भिखारियों को काले उड़द का दान दें।

बुजुर्ग महिला को घसीटते हुए घर से ले गई योगी आद‍ित्‍यनाथ की पुलिस, बेअसर रही मासूम की मनुहार और पर‍िवार की गुहार

उत्तर प्रदेश में बेशक सरकार बदल गई हो लेकिन यूपी पुलिस की कार्यशैली पर अभी भी सवाब खड़े होते हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार में कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां पर पुलिस द्वारा लोगों से बदसलूकी की जाती थी। सरकार बदल गई लेकिन पुलिस नहीं बदली। राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में भी पुलिसकर्मियों द्वारा लोगों के साथ गंदा बर्ताव करने के मामले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला अमरोहा का है जहां पर पुलिसवालों ने 70 वर्षीय महिला को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस वीडियो को अब तक एक मिलियन लोग देख चुके हैं और 20 हजार से ज्यादा लोग शेयर कर चुके हैं।
इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैसे कुछ महिला और पुरुष पुलिसकर्मी एक घर में घुसते हैं और बुजुर्ग महिला को घर से बाहर लाने के लिए जमीन पर घसीटते हैं। महिला के परिजन पुलिसवालों से उसे छोड़ने की विन्नती करते हैं लेकिन वे परिजनों की एक नहीं सुनते और महिला का घसीटते रहते है। एक छोटा सा बच्चा भी इस वीडियो में दिखाई दे रहा है जो कि रोते हुए महिला पुलिसकर्मी से उसकी दादी को छोड़ने के लिए कहता है कि तभी एक पुलिसवाला उसे गोद में उठा लेता है। इस बीच बुजुर्ग महिला भी खुद को पुलिसवालों से छुटाने की जी-तोड़ कोशिश करती है लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाती। इसके बाद दो महिला पुलिसकर्मी बुजुर्ग महिला को घसीटकर बाहर ले आती हैं और उसे जीप में बैठाकर अपने साथ ले जाते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बुजुर्ग महिला का परिवार जिस घर में रह रहा था, उसपर उन्होंने गैर कानूनी कब्जा कर रखा था। 15 साल पहले सुधीर सिंघल नाम के व्यक्ति ने इस मकान को शौकीन अली नाम के आदमी को बेच दिया था। बुजुर्ग महिला का परिवार इस घर में किराए पर रहता था लेकिन वह इसे खाली नहीं कर रहा था। इसके बाद शौकीन अली ने इसकी शिकायत कोर्ट में की और कोर्ट ने पुलिस को इस मकान को खाली कराने का आदेश दिया। वहीं इस वीडियों के सामने आने के बाद पुलिस ने अपनी सफाई में कहा कि हमने केवल कोर्ट के आदेश का पालन किया।

आज का पंचांग: 10 मई 2017, बुधवार वैशाख शुक्ल तिथि पूर्णिमा

10 मई 2017, बुधवार वैशाख शुक्ल तिथि पूर्णिमा (10-11 मध्य रात 3.13 तक)
विक्रमी सम्वत् : 2074, वैशाख प्रविष्ट: 28, राष्ट्रीय शक सम्वत: 1939, दिनांक: 20 (वैशाख), हिजरी साल: 1438, महीना: शब्बान, तारीख: 13, सूर्योदय: 5.40 बजे, सूर्यास्त: 7.09 बजे (जालंधर समय), नक्षत्र: स्वाति (बाद दोपहर 2.34 तक), योग: व्यतिपात (सायं 4.10 तक), चंद्रमा तुला राशि पर, भद्रा रहेगी (दोपहर 2.10 तक)।
पर्व, दिवस तथा त्यौहार: वैशाख पूर्णिमा, श्री सत्य नारायण व्रत, श्री बुद्ध जयंती, श्री बुद्ध पूर्णिमा, श्री छिन्न मस्तिका जयंती, श्री कूर्म जयंती, वैशाख स्नान समाप्त।  दिशा शूल: उत्तर एवं वायव्य दिशा के लिए, राहू काल:  दोपहर 12.00 से 01.30 बजे तक। सूर्योदय समय ग्रहों की स्थिति :-
सूर्य मेष में
चंद्रमा तुला में
मंगल वृष में
बुध मेष में
गुरु कन्या में
शुक्र मीन में
शनि धनु में
राहू सिंह में
केतु कुम्भ में

 

17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना रहे हैं अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया का सर्वसिद्ध मुहूर्त के रूप में भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किए जा सकते हैं।[3] नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है। पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है। यह तिथि यदि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप-तप का फल बहुत अधिक बढ़ जाता हैं। इसके अतिरिक्त यदि यह तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है। यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिए अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान माँगने की परंपरा भी है। 

इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्घि और गजकेसरी दोनों योग मिलकर 17 साल बाद अमृत सिद्घि योग बना रहे हैं। इसी के चलते शहर के पंडित ने इस पर्व को मनाने के लिए 28 अप्रैल की तिथि को उचित माना क्योंकि इस वर्ष शुभ मुहूर्त के चलते अक्षय तृतीया 28 और 29 को दो दिन मनाने को लेकर लोगों में संशय की स्थिति देखी जा रही है। इस दिन सभी कार्य करना शुभ तथा फलदायक होगा वहीं 15 संस्कारों का मुहूर्त रहेगा। इस तिथि को विवाह करने वाले लोगों का दाम्पत्य जीवन सुखमय रहेगा।

पंडित किशोर तिवारी  के  अनुसार इस वर्ष साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त हैं जिसमें प्रमुख स्थान अक्षय तृृतीया का ही है। अक्षय तृतीया के दिन जो शुभ कार्य होंगे उनका क्षय नहीं होता। इस तिथि को प्रमुख रूप से शादी, सोने की खरीदारी, नया सामान, गृह प्रवेश, वाहन खरीदारी, व्यापार प्रारंभ और भूमिपूजन आदि कार्य किए जा सकते हैं जो फलदाय सिद्घ होंगे।

इस वर्ष अक्षय तृतीया की तिथि को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में श्रद्घालु आज 28 और 29 दोनों दिन पर्व मनाने की सोच रहे हैं। पंडित पुनेश्वर तिवारी ने बताया कि पंचाग के अनुसार 28 अप्रैल को सुबह 10ः28 बजे से अक्षय तृतीया तिथि की शुरूआत हो रही है जो अगले दिन 29 अप्रैल को सुबह 6ः45 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी शुरू हो जाएगा चूंकि तृतीया पर्व पर भगवान विष्णु व देवी लक्ष्मी की पूजा दोपहर को की जाती है इसलिए आज 28 अप्रैल का मुहूर्त ठीक रहेगा। इस पर्व को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि वे इस तिथि को गुड्डे-गुड़ियों की धूमधाम से शादी रचाते हैं जिसकी तैयारी वे पहले से कर चुके हैं। इसके साथ ही शहर में अक्षय तृतीया पर सोने व चांदी के आभूषणों की जमकर खरीदारी भी होगी। शादियों के लिए मुहूर्त होने से सराफा कारोबारी उत्साहित नजर आ रहे हैं। शादियों के सीजन के चलते और अक्षय तृतीया पर बाजारों में ग्राहकी में तेजी आ गई है।

17 साल बाद बना पुनः सर्वार्थ सिद्घि व गजकेसरी योग

पंडित की माने तो इस वर्ष अक्षय तृतीया पर सर्वार्थ सिद्घि व गजकेसरी योग भी बन रहा है। इसके साथ ही अमृत सिद्घि योग भी है। जो श्रद्घालुओं के लिए विशेष फलदायी सिद्घ होगा। ऐसा दुलर्भ योग पिछली बार सन 2000 में बना था। जो इस वर्ष 2017 में 17 साल बाद फिर बन रहा है। इसके बाद ऐसा योग 2037 में बनेगा। इस मुहूर्त पर बड़ी संख्या में विवाह होते हैं।

मेष: 21 मार्च से 20 अप्रैल : किसी के प्रति सहानुभूति रखें लेकिन समय पर। अपनी योजना को कार्यान्वित करने का मौका मिलने की संभावना है। प्रेमी के साथ खास समय व्यतीत कर सकते हैं। पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। शुभ अंक-8, शुभ रंग-गहरा फिरोजा।

वृष: 21 अपै्रल से 20 मई : शैक्षणिक मोर्चे पर जी-तोड़ मेहनत कर सकते हैं। कार्यस्थल पर पुरानी समस्या को हल करने का नया तरीका अपनाएंगे। किसी खास समारोह में बुलाए जा सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। शुभ अंक-11, शुभ रंग- पीच।

मिथुन: 21 मई से 21 जून : पेशवर मोर्चे पर अपनी छवि बदलने का प्रयास करेंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। सामाजिक जीवन का आनंद लेंगे। अपने प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब देंगे। शुभ अंक- 3, शुभ रंग- बैंगनी।

कर्क: 22 जून से 23 जुलाई : काम में मददगार हाथ मिलने से भार कम होगा। निवेश में पैसा लगाना फायदेमंद साबित हो सकता है। स्वास्थ्य को लेकर सचेत रहेंगे। दिल के मोर्चे पर भाग्यशाली साबित होंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर सबकुछ अच्छा रहेगा। शुभ अंक-4, शुभ रंग-आसमानी।

सिंह: 24 जुलाई से 22 अगस्त : कार्य संबंधी बातों को सबके सामने जाहिर करने से बचें। किसी प्रतियोगिता में बैठने का विचार कर सकते हैं। प्यार के मामले में अपनी सीमा का ख्याल रखें। जरूरमंद की मदद करेंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर सबकुछ बढिय़ा रहेगा। शुभ अंक-2, शुभ रंग- लेमन।

कन्या: 23 अगस्त से 22 सितंबर : दिल की आवाज सुनने की कोशिश करें। वित्तीय मोर्चे पर खर्च को लेकर सतर्क रहें। शैक्षणिक मोर्चे पर नेटवर्किंग का फायदा मिलेगा। पेशेवर मोर्चे पर काम को लेकर अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता जाहिर करें। शुभ अंक- 6, शुभ रंग- क्रीम।

तुला: 23 सितंबर से 23 अक्तूबर : फिजूलकार्य में व्यस्त रह कर शैक्षणिक मोर्चे पर नुकसान उठा सकते हैं। जगह परिवर्तन से ताजगी और ऊर्जा का अनुभव करेंगे। पुराने मित्रों से मिलने के कारण अतीत की यादों में खो जाने की संभावना है। शुभ अंक-5, शुभ रंग-गहरा हरा।

वृश्चिक: 24 अक्तूबर से 21 नवंबर : अतिरिक्त नौकरी और जिम्मेदारी आपको थका सकती है। शैक्षणिक मोर्चे पर भेड़ चालना सही नहीं है। निजी मामले में खुद को मजबूर महसूस कर सकते हैं। ड्राइविंग को लेकर सावधान रहें। शुभ अंक- 1, शुभ रंग- हल्का लाल।

धनु: 22 नवंबर से 21 दिसंबर : किसी के द्वारा दिया गया प्रस्ताव आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर हौसला कायम रखेंगे। दो मालिकों के बीच पिस सकते हैं। बिगड़ चुके रिश्ते को लेकर पार्टनर से बात करना बेहतर होगा। शुभ अंक-15, शुभ रंग-हरा।

मकर: 21 दिसंबर से 19 जनवरी : अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का मौका मिल सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर स्वयं का मूल्यांकन करना फायदेमंद होगा। फिटनेस को लेकर आपका जुनून बरकरार रहेगा। पेशेवर मोर्चे पर महत्वपूर्ण कार्य को टाल सकते हैं। शुभ अंक-22, शुभ रंग-परपल।

कुम्भ: 20 जनवरी से 18 फरवरी : निजी जिंदगी को प्रभावित करने के लिए गहनता से छानबीन करेंगे। शैक्षणिक मोर्चे पर अधूरा ज्ञान आपके लिए घातक साबित हो सकता है। जीवनशैली में परेशान करनी वाली समस्या को दूर सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। शुभ अंक-9, शुभ रंग-लाल।

मीन: 19 फरवरी से 20 मार्च : किसी मुद्दे के संदर्भ में कोई आपको भड़का सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर सबकुछ अच्छा चलता रहेगा। फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की जरूरत है। पेशेवर मोर्चे पर खुद को साबित करने का प्रयास करना पड़ सकता है। शुभ अंक-7, शुभ रंग-क्रीम।