CM Bhupesh Baghel writes to Union Finance Minister Nirmala Sitharaman

CM says problem of scarcity of resources remains same as facility given is based on many conditions and criteria

Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel has written a letter to Union Finance Minister Nirmala Sitharaman requesting her to reconsider the Centres decision to link the increased borrowing limit of states to specific reforms and allow the states to enhance their resources during the Covid-19 crisis without any conditions.

 In his letter, the chief minister said that considering the demand of states, the Centre has allowed an additional borrowing limit of 2 per cent of GSDP, but the state governments are unable to avail the benefit due to non-fulfillment of conditions and norms. He demanded that states be allowed to avail the additional borrowing limit of 2 per cent without any conditions.

The chief minister said that the problem of scarcity of resource remains unchanged for the states and the responsibility of the state government has increased even more as economic packages announced by the Centre to deal with the anomalous situation arising due to the Corona crisis and nationwide lockdown are also insufficient to revive the economy and meet the needs of the common people. 

He further wrote that in view of the present crisis it is the states priority to provide free food grains to the poor families, regular salary to the salaried people and proper health facilities for all. To provide relief to the people of the state, it is necessary to take prompt and effective action in this direction along with additional financial resources, he added.

Mr Baghel said that automation of fair price shops including installation of POS machines in remote and forest areas is a difficult target for the state to achieve as 14 districts of Chhattisgarh are affected by LWE activities. Similarly, there are many technical hurdles in implementing the DBT system by ending the power subsidy being given to farmers in the agrarian state, he added. The chief minister said that although these reforms are quite important, this does not seem an appropriate time for these changes.

Mr Baghel said that in the present situation, it is more important that the state governments satisfactorily fulfill the immediate and primary responsibilities of public welfare and requested the union minister to allow the states to avail the additional borrowing limit and enhance their resources during the Covid-19 crisis without any conditions.

Ladakh deadlock part of Chinese strategy to keep India entangled in border dispute

Tensions along the  India-China border in Ladakh-Himalayas in the northern part of India rise once again in recent weeks. Defense experts believe that this action is part of China's well-thought-out strategy. Today, when the whole world is grappling with a serious humanitarian crisis in the wake of coronavirus outbreak, it is not difficult to discern the power politics of China. 

There are many reasons why China is apprehensive of India’s reaction to its activities on the border. The neighbouring country’s motives behind encroachment of Indian territories are far to seek.

However, observers say that the trigger for the current face-off between the two neighbours is suppressed when China raised objections to the construction of roads, airstrips and other infrastructural development by India in the region.

Let's take a look at the history of both countries in the context of the current relationship and the events.

Doklam imbroglio: 
Not too long ago, China had to step back in the face of India's strong opposition to its incursion in Doklam. Doklam is geographically located at the tip of the India, China and Bhutan borders. It is just 15 kilometers away from Nathula Pass in India. Doklam in the Chumbi Valley is strategically important for both India and China. China was trying to build a highway on Doklam which was opposed by India. The main reason for this was that if there was smooth movement of China to Doklam, it could further ease its access to the Chicken Neck connecting India with the northeastern states.
China wanted to forcibly start its own structural activity in this region which was strongly opposed to by India, hence the deadlock between the two countries. The two-month long deadlock between India and China for more ended when China retreated from Doklam.

भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण दोगुना रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. पिछले एक दिन में रिकॉर्ड 9 हजार से अधिक मरीज मिले हैं। इसके साथ ही कोरोना की कुल संख्या 2 लाख 17 हजार के करीब

नई दिल्ली। भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण दोगुना रफ्तार से आगे बढ़ रहा है. पिछले एक दिन में रिकॉर्ड 9 हजार से अधिक मरीज मिले हैं। इसके साथ ही कोरोना की कुल संख्या 2 लाख 17 हजार के करीब हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 9 हजार 304 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 260 लोगों की मौत हुई है। इसके बाद देशभर में कोरोना पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 2 लाख 16 हजार 919 हो गई है. जिनमें से 1 लाख 6 हजार 737 सक्रिय मामले हैं। वही इस महामारी से 1 लाख 4 हजार 107 लोग ठीक हो चुके हैं। अब तक 6 हजार 75 लोगों की मौत हो चुकी है।

Survey ranks Baghel second most successful Chief Minister

Raipur: Chhattisgarh Chief Minister Bhupesh Baghel is the second most popular CM in the country on the criteria of satisfaction of the people of the state. Just ahead of him is Odisha CM Naveen Patnaik. 

According to a survey conducted by IANS-C voter, 56.74 percent people are completely satisfied with the functioning of Chhattisgarh State Government. In this way, Bhupesh Baghel government is at number two in the country with 81.06 percent satisfaction level. Only slightly ahead of them is the Odisha government with a satisfaction level of 82.96 percent. 

According to the survey, 48.95 percent people are fully satisfied with the functioning of governments across the country, while in Chhattisgarh this percentage is 56.74 percent, which itself explains the success of the government's work.

The Bhupesh government has achieved a major achievement in the period of global pandemic corona. The country's economy is not as good as before due to Corona infection. Industries are closed, the public is plagued by unemployment and inflation. In such a situation, Chhattisgarh has left behind states like Maharashtra, Uttar Pradesh and Madhya Pradesh to stand the test of the people. The special thing is that compared to other states, the number of corona infection patients in Chhattisgarh is also very less.

सेनिटाइजर का प्रयोग जरा संभलकर ,जरा सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती

नई दिल्लीः कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सेनिटाइजर (Senitizer) का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। मगर जरा सी लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण भी बन सकती है। सेनिटाइजर में एल्कोहल (Alcohal) होने की वजह से यह ज्वलनशील (Flammable) हो जाता है। किसी भी तरह की गैस या आग के सम्पर्क में आने से परिणाम भयंकर हो सकते हैं। इसलिए सेनिटाइजर का इस्तेमाल बड़े ही सोच-समझकर करें। इससे जुड़ी सावधानियों को समझें फिर इसका इस्तेमाल करें।

इसी तरह की लापरवाही का एक मामला हरियाणा (Haryana) के रेवाड़ी (Rewari) से सामने आया है। एक शख्स अपने घर के किचन में खड़ा होकर सेनिटाइजर से अपने मोबाइल (Mobile) फोन की स्क्रीन (Screen) साफ कर रहा था। गलती से हैंड सैनिटाइजर उसके कपड़ों पर गिर गया, और वह रसोई गैस के पास ही खड़ा था। उसके कपड़ों में तुरंत ही आग लग गई। आनन-फानन में उसके परिजनों ने उसे दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के मुताबिक, शख्स 35 फीसदी जल गया था। हालांकि उसकी हालत अभी स्थिर है।

गनीमत है कि समय पर उसे प्राथमिक उपचार मिल गया और उसकी जान बच गई। अगर आग फैल जाती तो जान का नुकसान भी हो सकता था। वरिष्ठ डाॅक्टर महेश मंगल ने बताया कि लोग सेनिटाइजर में एल्कोहल की मात्रा को नहीं समझ पाते और अनजाने में किसी अनहोनी घटना का शिकार हो जाते हैं। 

डाॅक्टरों के मुताबिक, सेनिटाइजर में 75 फीसदी तक एल्कोहल होता है। यह ज्वलनशील होता है। इसलिए सेनिटाइजर का उपयोग में सावधानी बरतें। हर चीज को सेनिटाइज करने की जरूरत नहीं है। सिर्फ अपने हाथ को ही सेनिटाइज करें, क्योंकि हाथ से ही नाक और मुंह छुआ जाता है, जिससे कोरोना वायरस आपके शरीर में पहुंच सकता है। इसकी पहुंच से खासकर बच्चों को दूर रखें। गलती से अगर यह आपके मुंह के अंदर चला गया तो नुकसान हो सकता है। अगर आप अपने घर पर ही हैं तो इसके इस्तेमाल से बचें। घर पर आप पानी और साबून के इस्तेमाल से भी सुरक्षित रह सकते हैं। 

आज हम आपको बताते हैं कि क्यों हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल मे सावधानी बरतना जरूरी है?

कैसा हो आपका सेनिटाइजर
फिलहाल हर किसी को कोरोना वायरस का खतरा है। ऐसे में हाथ साफ रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टर्स ने यूं तो 20 सेकेंड तक साबुन से हाथ धोने की सलाह दी है। मगर सैनिटाइजर का यूज खूब हो रहा है। इससे हाथ को डिसइंफेक्ट करना आसान तो हो जाता है, मगर सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, लोगों को अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर यूज करने चाहिए। इनमें कम से कम 60ः अल्कोहल होना चाहिए।

क्यों है खतरनाक
चूंकि हैंड सैनिटाइजर्स में कम से कम 60 पर्सेंट अल्कोहल होता है, ऐसे में वे बेहद ज्वलनशील होते हैं यानी उनमें बड़ी तेजी से आग लगती है। डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सैनिटाइजर्स को ऐसी जगह के पास इस्तेमाल ना करें जहां आग लगने की संभावना हो जैसे- रसोई गैस, लाइटर, माचिस आदि। सैनिटाइजर्स को पर्याप्त मात्रा में इस्तेमाल करें और फिर उसे सूख जाने दें।

इस्तेमाल का सही तरीका
अगर आपके हाथ गंदे हों तो सैनिटाइजर ना इस्तेमाल करें। पहले साबुन और पानी से हाथ धो लें। हैंड सैनिटाइजर में मौजूद अल्कोहल तभी काम करता है जब आपके हाथ सूखे हों। ऐसे में आप सैनिटाइजर की दो-तीन बूंद लें और उसे अपने हाथों पर रगड़ें। उंगलियों के बीच में सफाई करें और हथेलियों के पीछे भी लगाएं। सूखने से पहले सैनिटाजर को ना पोछें, ना ही धोएं।

साबुन है बेहतर
सैनिटाइजर का इस्तेमाल वहीं करें जहां साबुन और पानी न हो। घर पर रहने के दौरान चार से पांच बार साबुन से 20 सेकंड तक हाथ धोना चाहिए। घर से बाहर निकलने पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च बताती है कि सैनिटाइजर कोरोना वायरस से लड़ने में साबुन जितना कारगर नहीं है। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए वही सैनिटाइजर असरदार होगा जिसमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होगी। घरों में इस्तेमाल होने वाला साबुन सैनिटाइजर के मुकाबले ज्यादा असरदार है।

हावडा-मुम्बई एवं हावडा-अहमदाबाद स्पेशल ट्रेनों का ठहराव टाटारनगर एवं चक्रधरपुर रेलवे स्टेशनों में नही रहेगा।

बिलासपुर - दक्षिण पूर्व रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरोना सकंमण को ध्यान में रखते हुये झारखंड राज्य सरकार के अनुरोध पर 01 जून 2020 से चल रही 02810/02809 हावडा-मुम्बई-हावडा स्पेशल ट्रेन एवं 02834/02833 हावडा-अहमदाबाद-हावडा स्पेशल ट्रेन का टाटानगर एवं चक्रधरपुर रेलवे स्टेशनों में ठहराव दिनांक 04 जून, 2020 से हटाया जा रहा है। दोनों दिशाओं में दिनांक 04 जून, 2020 से दोनों गाडियों का टाटानगर एवं चक्रधरपुर रेलवे स्टेशनों में ठहराव नहीं रहेगा।

01 जून से मंडल से प्रारम्भ/गुजरने वाली गाड़ियों का परिचालन प्रारम्भ बिलासपुर –

रेलवे द्वारा 01जून से 200 (100 जोड़ी) ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। बिलासपुर मंडल से 03 गाड़ियाँ जिसमें रायगढ़ - गोंदिया-रायगढ़ जनशताब्दी एक्सप्रेस तथा यहाँ से गुजरने वाली हावड़ा-सीएसएमटी-हावड़ा मेल एवं हावड़ा-अहमदाबाद-हावड़ा का परिचालन शामिल है । ये सभी गाड़ियां स्पेशल के रूप मेन चलाई जा रही है तथा पूर्णतया आरक्षित है । जनरल कोच के लिए भी सेकंड सिटिंग का आरक्षण किया जा रहा है। इसके अलावा नईदिल्ली-बिलासपुर-नईदिल्ली स्पेशल ट्रेन भी चल रही है। लॉकडाउन के बाद आज पहली बार बिलासपुर स्टेशन से प्रातः हावड़ा-सीएसएमटी व दोपहर हावड़ा-अहमदाबाद स्पेशल एक्सप्रेस गुजरी | दपूम रेलवे के ठहराव वाले सभी स्टेशनों से हावड़ा-सीएसएमटी स्पेशल एक्सप्रेस से कुल 177 यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुये तथा कुल 238 यात्री विभिन्न स्टेशनों में उतरे | इसीप्रकार हावड़ा-सीएसएमटी स्पेशल एक्सप्रेस से कुल 431 यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुये तथा कुल 570 यात्री विभिन्न स्टेशनों में उतरे | बिलासपुर स्टेशन में रायगढ़ – गोंदिया ट्रेन से 82 यात्री उतरे तथा 72 यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुये, हावड़ा-सीएसएमटी ट्रेन से 56 यात्री उतरे तथा 46 यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुये तथा हावड़ा-अहमदाबाद स्पेशल एक्सप्रेस से 75 यात्री उतरे तथा 76 यात्री अपने गंतव्य के लिए रवाना हुये | बिलासपुर सहित ठहराव वाले सभी स्टेशनों पर कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम हेतु केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश के तहत सुरक्षा के सभी मानकों के अनुपालन के साथ इस गाडी में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को सोशल डिस्टेन्सिंग, टिकट चेकिंग, स्क्रीनिंग व स्वास्थ्य परीक्षण के साथ ट्रेन में सुरक्षित प्रवेश/निकास कराया गया।

Raipur Division has developed Remotely Operated Ultra-Violet Sanitization Robot,

Raipur Division has developed Remotely Operated Ultra-Violet Sanitization Robot, that can be used for sanitization of coaches in Raipur division without entering the coach. Key features of the robot include – remote based movement of robot, remote controlled blasting of UV-C rays to sanitize the coach, remote camera based vision. It will be helpful in sanitization of coaches and fighting against coronavirus. It is a non-chemical based technology, thus there will be no issue of residual contaminations. UV-C rays are effective in killing pathogens and viruses. It helps in keeping safety of the sanitization team as there is no contact, no physical presence necessary. Cost of similar item at market near about two and half Lakhs while in house developed cost is around twenty-five thousand. This is one more effort of Raipur division, Indian Railways to fight against coronavirus.

राज्य सभा की 18 सीटों के लिए 19 जून को होगा चुनाव, नतीजे शाम तक

चुनाव आयोग ने लाॅकडाउन के चलते टाले गये 18 सीटों के चुनाव 19 जून को करवाने की घोषणा की है । आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और राजस्थान के राज्य सभा की 18 सीटों के लिए 19 जून को वोटिंग होगी। चुनाव आयोग ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इसी दिन शाम पांच बजे वोटों की गिनती की जाएगी और नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। आपको बता दे की कोरोना संक्रमण की वजह से चुनाव टाल दिये गये थे। आपको बता दें कि इन सभी सीटों के पिछली बार चुने गए प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। कोरोना संकट के चलते निर्वाचन आयोग ने गत तीन अप्रैल को आदेश जारी कर इन सभी सीटों के लिए चुनाव अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दिए था।

उद्धव राज में बाल ठाकरे ट्रॉमा सेंटर की उखड़ी सांसें, ऑक्सीजन की कमी से 12 मरे

मुम्बईः महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुंबई के जोगेश्वरी स्थित हिंदू हृदय सम्राट बाला साहेब ठाकरे ट्रॉमा सेंटर में भर्ती संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं की जा रही है। इस अस्पताल का संचालन की जिम्मेदारी बीएमसी की है। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण दो सप्ताह के भीतर यहां कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है।

सूत्रों से पता चला है कि हालात को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने को पत्र लिखा है। डॉक्टरों ने लिखा है कि उन्हें आईसीयू में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि साँस के लिए हांफते हुए मरीजों को मरते देखने के बाद उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक 200 बेड पर लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। एक रेजिडेंट डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ICU की 25 बेड में से 15 मशीनें ऐसी होती हैं, जिसमें Low O2 प्रेशर की शिकायत रहती है।

एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर, जो पिछले हफ्ते ICU में ड्यूटी पर था, उसने भयावह दृश्य को याद करते हुए कहा, "दो मरीज साँस के लिए हाँफ रहे थे और उन्हें प्रति मिनट 8 से 10 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत थी। हालाँकि, आपूर्ति इतनी धीमी थी कि स्क्रीन लगातार कम दबाव वाले O2 का अलर्ट दे रही थी और जब तक मैंने अस्पताल के टेक्नीशियन के साथ दबाव को ठीक करने की कोशिश की, तब तक दोनों मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी।"

एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर 51 वर्षीय मरीज की मौत से काफी आहत थे। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए बताया, वह आईसीयू में उनका चैथा दिन था। उसकी स्थिति में काफी सुधार आ रहा था। मुझे यकीन था कि वह जल्द ही आईसीयू से बाहर निकल कर आ जाएगा। वे आगे कहते हैं,"उस दिन कम से कम सात वेंटिलेटर लो प्रेशर दिखा रहे थे, इसलिए मैं टेक्नीशियन को बुलाने गया। जब मैं पाँच मिनट में वापस आया, तब तक इमरान की मौत हो चुकी थी। उसकी स्क्रीन पर 'लो ऑक्सीजन प्रेशर' दिखाई दे रहा था। उसकी मृत्यु ने मुझे बहुत दुखी किया। आईसीयू हमारे लिए एक निराशाजनक स्थान बन गया है। इन परिस्थितियों की वजह से कोई भी यहाँ ड्यूटी पर नहीं करना चाहता।"

कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मरीज जो भर्ती होते हैं वे गंभीर रूप से साँस लेने में कठिनाई से पीड़ित होते हैं। प्रत्येक मरीज को प्रति मिनट 3 से 10 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। एक आईसीयू डॉक्टर ने कहा, “अब आप अस्पताल में ऑक्सीजन की आवश्यकता की कल्पना कर सकते हैं।”

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने ने स्वीकार किया कि वर्तमान में अस्पताल ऑक्सीजन की माँग को पूरा करने के लिए जूझ रहा है, लेकिन उन्होंने कम आपूर्ति के कारण किसी भी मौत से इनकार कर दिया।

डॉक्टर माने ने कहा, "जब हमने 50 कोविड -19 बेड शुरू किए थे तब 100 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता थी। अब 200 बेड के साथ हमने सिलेंडर की संख्या 350 तक बढ़ा दिया है। यह सच है कि हमारी माँग अधिक है, क्योंकि वर्तमान में हमें कई गंभीर मामले मिल रहे हैं। इनमें से लगभग सभी को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता होती है। मरीजों की मौत इसलिए हो गई है क्योंकि वे गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुँचे थे।"

उन्होंने कहा कि गुरुवार को रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा इस मुद्दे को उनके संज्ञान में लाने के बाद अस्पताल ने 500 सिलेंडरों के लिए ऑर्डर दिया है। डॉ. माने ने आगे कहा कि एचबीटी ट्रॉमा हॉस्पिटल फायर सेफ्टी मानदंडों के अनुसार एक बड़े ऑक्सीजन लिक्विड टैंक लगाने के लिए फिट नहीं है। उन्होंने कहा, "हम मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाकर इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं।"

श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मुम्बई से लौटे मजदूर की डेड बाडी चार दिन तक पड़े रहने का मामला रेल्वे के माथे पर कलंक

रायपुर/BBN24NEWS। रेलवे द्वारा 21 डॉक्टरों की नियुक्ति आदेश जारी करने के बाद भी पूरा मई माह बीत जाने पर भी नियुक्ति न करने पर सवालिया निशान खड़े करते हुए प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि करोना से लड़ने के नाम पर केंद्र सरकार और रेलवे द्वारा खिलवाड़ लगातार जारी है।इन 21 डॉक्टरों की नियुक्ति 1 मई से होनी थी लेकिन पूरा मई माह बीत जाने के बावजूद रेलवे द्वारा इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं की गई है । कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि रेलवे ने 2500 डॉक्टरों और 352 नर्सों की तैनाती का झूठा और खोखला दावा किया था। छत्तीसगढ़ में भी डाक्टरों के पदों के लिए विज्ञापन निकाले गए और डॉक्टरों के साक्षात्कार भी लिए गए 20 अप्रैल को 21 डाक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी भी कर दिए । इन डॉक्टरों को एक मई से ड्यूटी ज्वाइन करना था लेकिन आज तक इन डाक्टरों की ड्यूटी ज्वाइन नहीं कराया गया है इससे केंद्र सरकार और रेलवे की करोना से लड़ने की गंभीरता को लेकर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं ।

रेल मंत्री पीयूष गोयल द्वारा ट्रेनों को लेकर भी छत्तीसगढ़ के मामले में असत्य कथन किए जाने का उल्लेख करते हुए कांग्रेस संचार प्रमुख शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि रेल पहले समय पर चलने और यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए जानी जाती थी लेकिन मोदी सरकार में और पीयूष गोयल के रेल मंत्री रहते हुए अब सिर्फ ट्रेनें ही रास्ता नहीं भटक रहे हैं पूरा रेल मंत्रालय अपनी दिशा भटक गया है यह करोना के मामले में रेलवे के आचरण से स्पष्ट है।

शैलेश त्रिवेदी ने कहा है कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन में मुम्बई से लौटे मजदूर की डेड बाडी चार दिन तक पड़े रहने का झांसी का मामला रेल्वे के माथे पर कलंक है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी रेल्वे की अव्यवस्था के परिणामस्वरूप मजबूर मजदूरों के साथ हुयी बर्बरता का संज्ञान लेते हुए इसे यात्रियों के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया है। रेल्वे के अन्य दावे भी खोखले निकले।

रेलवे ने कहा था कि देश में 5000 डब्बो को आइसोलेशन वार्ड में बदला जाएगा 35 हॉस्पिटल और ब्लॉक करो ना के लिए चिन्हित किए गए हैं लेकिन अगर डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होगी तो यह आइसोलेशन वार्ड और हॉस्पिटल ब्लॉक चिन्हित करने का क्या फायदा ?

त्रिवेदी ने कहा है कि करोना से निपटने के नाम पर मोदी सरकार और रेलवे का रवैया लगातार निराशाजनक बना हुआ है । भारतीय रेल ने करोना महामारी से लड़ाई और लाक डाउन के समय देश को निराश किया है।

इस महामारी के समय लाकडाउन के समय भारतीय रेलवे आम आदमी का सहारा बन सकती थी। करोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में भारतीय रेलवे ने भी पूरी ताकत से जुटने और अपनी भागीदारी निभाने के दावे किये थे. भारतीय रेलवे ने कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए 2500 डॉक्टरों और 35,000 नर्सों को तैनाती का भी झूठा खोखला दावा किया था। छत्तीसगढ़ में अभी तक नही हुई 21 है डॉक्टरों की ज्वाइनिंग। अधिकतर डॉक्टर्स और नर्सों की टेंपरेरी आधार पर विभिन्न जोन में नियुक्ति प्रस्तावित है और वह भी नहीं हो पायी। रेलवे ने अपने 17 डेकिकेटेड हॉस्पिटल्स और 33 हॉस्पिटल ब्लॉक कोरोना वायरस मरीजों के इलाज के लिए रेलवे द्वारा चिन्हित किए गए हैं। रेलवे ने बिना डॉक्टर के खड़ी ट्रेनों के 500 डिब्बों को कोरोना पीड़ितों की पहचान और इलाज के लिए आइसोलेशन वार्ड में बदलने का दावा भी किया था। लेकिन चिकित्सक की नियुक्ति भी नही की गयी है। रेलवे ने कहा था कि इन कोचों में कोरोना संक्रमण के संदिग्धों को क्वारनटीन किया जा सकेगा। रेलवे के भोजन से लेकर दवाइयों की भी व्यवस्था के दावे झूठे निकले। भूख प्यास दवाई चिकित्सीय सुविधा के अभाव में श्रमिकों की हो रही रेल यात्रा में मौत तक के मामले उजागर हुए हैं। रेलवे में सफर करने वालो को भी नही मिल रही है इलाज की सुविधा । कोरोना से लड़ाई में भागीदारी निभाने का रेलवे का दावा भी अभी तक जमीनी तौर पर कोई साकार रूप नहीं ले सका है। इसके पूर्व लॉक डाउन में भूख प्यास रोजी रोटी का संकट इलाज की बेबसी रहने की जगह की परेशानी भुगत रहे मजदूरों से किराया और वह भी बढ़ा हुआ किराया मांग कर रेलवे ने अपना जनविरोधी चरित्र पहले ही उजागर कर दिया है।

आगरा में तूफान ने मचाई तबाही, ताजमहल को नुकसान; मुख्य मकबरे की रेलिंग टूटी

A News Edit By : Yash Kumar Lata

मौसम में अचानक आये बदलाव से ताजमहल को काफी नुकसान पहुंचा है. मिडिया रिपोर्ट के अनुसार शुक्रवार देर रात आगरा में आंधी-तूफान ने दस्तक दी. हवा इतनी तेज थी कि  ताजमहल के मुख्य मकबरे की संगमरमर की रेलिंग टूट गई और उसकी जालियां भी बाहर आ गईं है   

 वही मिडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार तेज आंधी की वजह से जनपद में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए हैं. इसके अलावा, कई स्थानों पर पेड़ों के गिरने की भी खबर मिली है. भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ.बसंत स्वर्णकार ने शनिवार को बताया कि आंधी से ताजमहल में संगमरमर की जालियां और लाल पत्थर की जालियां क्षतिग्रस्त हुई हैं. परिसर में कई पेड़ और एक दरवाजा भी उखड़ गया है. इसके अलावा ताजमहल परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाई गई शेड की फॉल्स सीलिंग भी उखड़ गई है. ताजमहल के अतिरिक्त महताब बाग की दीवार और मरियम के मकबरे में कई पेड़ गिरे हैं.

प्रवासी मजदूरों की मजबूरी का दर्द, सियासतदां बनी बेदर्द

कोरोना महामारी काल में लाॅकडाउन का चैथा चरण लागू है। प्रवासी मजदूरों की घर पहुंचने की बेवसी के बीच बिहार के दरभंगा की ज्योति ने अपने साहस और ज़ज्बे से हर किसी को प्रभावित किया। साइकिल गर्ल ज्योति आत्मनिर्भर भारत की ब्रांड बन गई हैं, जिसकी उपलब्धि पर गर्व किया जा रहा है।

अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसी नौबत कैसे आ गयी कि प्रवासी मजदूरों ने अपने घरों को जाने के लिए नेशनल हाईवे से लेकर रेल की पटरियों पर पैदल चलने का खतरा उठा लिया। सिर पर सामानों से भरा बैग,गोद में बच्चा लिए हजारों लोग निकल पड़े। बैलगाड़ी में जुते किशोर की तस्वीर हो या अपने बीमार मां को कंधे पर लेकर चलते बेटे की तस्वीरें देख लोग बेचैन हो उठे। हजारों की भीड़ में पैसे और राशन के अभाव में 13 साल की बेटी अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठा कर 1200 किमी की यात्रा करने को मजबूर हो गयी। इन्हें क्यो नही उन प्रदेशों में रोकने का प्रयास किया गया। आज प्रवासी मजदूरों के कर्मभूमि और जन्मभूमि की सरकारें तनातनी की स्थिति में है। प्रवासी मजदूरों के देश में कहीं भी जाने, कोई भी व्यवसाय करने के मौलिक अधिकारों पर भी संशय नजर आ रहा है।प

दिल्ली AIIMS में एक और मेस कर्मचारी कोरोना पाॅजिटिव

नई दिल्लीः दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में RPC कैंटीन के कर्मचारी की Covid-19 से मौत के कुछ दिन बाद, एम्स के डॉक्टरों ने बताया कि एक और मेस वर्कर कोरोना वायरस से सक्रंमित पाया गया है।

संक्रमित मेस कर्मचारी उन 15 लोगों में से है जो मृतक मेस वर्कर के संपर्क में था। कैंटीन को पहले ही बंद कर दिया गया था और 15 मेस कर्मचारियों को उनके साथी की मौत के बाद से ही क्वारंटाईन कर दिया गया था। डॉक्टरों ने सूचित किया कि उनमें से पांच के नमूने एकत्र किए गए थे जिनकी रिपोर्ट सोमवार रात को आई थी। उनमें से चार लोग नेगेटिव पाये गये, जबकि एक वर्कर पाॅजिटिव निकला। अभी दस मेस वर्करों की रिपोर्ट का इंतजार है।
मेस कर्मचारी की मौत के बाद, उन्होंने मांग की थी कि हॉस्टल सुपरीटेंडेंट और वरिष्ठ वार्डन दोनों को इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे दें। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि छात्रावास प्रशासन ने एक महीने से ज्यादा समय से एहतियाती उपाय बरतने की उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया जिससे उसकी मौत हो गई।
मार्च में, आरडीए ने छात्रावास प्रशासन को छात्रावास में रखे जाने वाले एसोसिएशन ने थर्मल स्कैनर, सैनिटाइजर, मास्क आदि जैसे सुरक्षा उपाय तथा नियमित जांच की मांग की थी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि मेस के कर्मचारी सुरक्षित रूप से काम कर सकें।
पिछले सप्ताह एम्स निदेशक को पत्र लिखकर आरडीए ने कहा, ‘‘आरपीसी कैंटीन के एक मेस कर्मचारी की कोविड-19 से मौत हो गई क्योंकि एक महीने से भी ज्यादा समय पहले एहतियाती उपाय बरतने की आरडीए की मांग की तरफ छात्रावास ने ध्यान नहीं दिया।’’
आगे कहा गया, ‘‘ये मांगें नहीं मानी गईं जिसका ऐसा घातक परिणाम हुआ है.’’इसने एम्स प्रशासन ने मेस कर्मचारी के परिजन को मुआवजा देने की मांग की जो महामारी के दौरान उनकी सेवा में जुटा हुआ था।

Domestic air services resumed in the country with vague new guidelines

All passenger airlines were suspended from last week of March after a lockdown enforced to control COVID-19 in the country. After two months,  now the government has resumed domestic flights. These services have been restored with some certain conditions, which is completely different from the earlier guidelines.

On Monday, after the resumption of domestic flight service in the country, the aircraft, which left more than 150 passengers from Delhi, reached Patna Airport. It is the first passenger aircraft to arrive at Patna airport in the early morning after nearly two months. An official said that 16 passenger aircraft will leave from Patna and 17 passenger aircraft arrive here from other parts of the country. He informed that the thermal examination of all the passengers is being done by the medical team deployed at the airport. He said that the district administration has clarified that passengers will not be quarantined outside the airport.

Some states have made it mandatory for air travelers to be quarantined, while other states have issued instructions to stay quarantined at home. However, Civil Aviation Minister Hardeep Puri questioned the need to keep the passenger in quarantine despite the green status appearing in the Arogya Setu app in his phone. Green status shows that the passenger is safe from COVID-19.

The central government announced last week that domestic airlines would resume from May 25 under certain rules and guidelines. These included rules such as limiting ticket prices, wearing masks by passengers, not giving food inside the aircraft, and providing medical status details to passengers via the Arogya Setu app or self-declaration form.