विशेष

बेख़ौफ़ चल रहा अवैध कच्ची शराब का कारोबार , जान कर भी अनजान बने जिम्मेदार अधिकारी

 

 

गिधौरी थाना के अगल बगल में शासन प्रशासन के आँख के निचे बड़े ही मात्र में जोरो व धडल्ले से बेख़ौफ़ चल रहा है अवैध कच्ची शराब की बिक्री सुबह और शाम जब देखो तब लगा रहता है पिने वालो के मेला लगा रहता है जिसे यहाँ के जिम्मेदार लोग जान कर भी अनजान हुए बैठे है,

यह खेल गिधौरी टुण्ड्रा थाना से लगे हुए भैसामुड़ा और थाना परिसर से लगे हुए शबरिया डेरा का जहा पर प्रतिदिन सुबह एवं शाम को कच्ची शराब पीने वालो का मेला लगा रहता है, जिससे गिधौरी टुन्ड्रा अंचल में नशे का कारोबार लगातार बढ़ते जा रहा है इसी कच्ची और सस्ती अवैध शराब के गिरफ्त में आने से आज युवाओ का भी भविष्य ख़राब और बर्बाद होते जा रहा है।


किन्तु इसकी चिंता न यहाँ के स्थानीय पुलिस को है ना ही सामाजिक सुरक्षा रखने वाली संस्थाओ को है क्षेत्र में बढ़ते शराब की बिक्री पर किसी की चिंता दिखाई देते नहीं दिख रहा है तभी तो इतनी ही बड़ी मात्रा में गिधौरी टुन्ड्रा क्षेत्र में नशे का कारोबार उफान पर है इस क्षेत्र में अवैध कच्ची शराब जोरो और बेख़ौफ़ तरीके से धडल्ले से चल रहा है अवैध कच्ची शराब की बिक्री से कम उम्र के छोटे युवा बच्चे भी प्रतिदिन इसका शिकार होते जा रहे है इसलिए अंचल में आये दिन कई प्रकार के अनहोनी घटना होते जा रहे युवाओ को इसके गिरफ्त में आने से एवं आस पास के लोगो द्वारा शराब की नशे में छोटे बड़े वाहनों को अनियंत्रित तरीके से चलाया जा रहा है, जिसकी फिकर किसी को लगता नहीं दिख रहा है , इसलिए ज्यादा मात्रा में बिक रहा है अवैध शराब क्योकि देशी व अंग्रेजी शराब के तुलना में कच्ची महुआ शराब की किम्मत बहुत ही कम है जिससे सस्ते होने से देशी के बजाय अक्सर लोग महुआ शराब ज्यादा पिने में लगे हुए है और शासन प्रशन के लोग आख मुंड कर बठे है अब देखना होगा की आखिर कब तक ऐसी जिम्मेदार लोग बठे रहेगे या फिर एन पर कुछ कार्यवाही करेगे।

छत्तीसगढ़ :100 पुलिस जवानों के साथ मिलकर किया गया कोम्बीग गस्त् कोम्बींग गस्त में 09 वारंटी धर दबोचे गये , ,होटल ढाबों का की गई सघन चेकिंग , शराब सेवन कर वाहन चलाने वालो पर की गई सख्त कार्यवाही ,निगरानी गुंडा बदमाशों की गई चेकिंग , देर रात खुले रहने वाले दुकानों को सही समय पर बंद करने की दी गई हिदायत

कोतवाली बलौदाबाजार में पुलिस अधीक्षक बलौदाबाजार नीतू कमल के मार्गदर्शन में तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जे आर ठाकुर एवं अनुभागीय अधिकारी पुलिस बलौदाबाजार राजेश जोशी के निर्देशन में थाना प्रभारी सिटी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक नरेश चौहान द्वारा तीन अलग-अलग टीम बनाकर दिनांक 29-30 जून 2019 की दरमयानी रात को थाना क्षेत्र में सघन अभियान चलाकर चलाया गया है। जिसमें थाना क्षेत्र के होटल-ढाबा, बैंक, एटीएम, स्कूल- कॉलेज, शराब दुकान आदि का सघन चेकिंग किया गया है। चेकिंग में थाना सिटी कोतवाली बलौदाबाजार के क्षेत्र में सघन अभियान चलाकर कॉम्बिन गस्त किया गया। थाना सिटी कोतवाली बलौदा बाजार के 09 वारंटीओं को धर दबोचा गया। वारंटीओं के नाम क्रमशः संतोष बघेल पिता दुकलहा बघेल उम्र 30 साल निवासी पनगांव, द्वारिका प्रसाद पिता लुअई राम उम्र 40 निवासी लवनवन, मनीराम निराला पिता बुधराम निराला 42 साल लवनवन, संतोष गायकवाड पिता आजू राम गायकवाड लवनबन, छोटू उर्फ प्रेमलाल पिता राम प्यारे निराला उम्र 30 साल साकिन लवनबन, सुनील कुमार डहरिया पिता रामचंद उम्र 28 साल निवासी खोरसीनाला पनगांव, सतीश पटेल पिता मनहरण पटेल उम्र 19 साल निवासी इंदिरा कॉलोनी बलोदाबाजार, रीरिन आरती साहू पति भरत भूषण साहू लवनरोड गायत्री मंदिर के पास बलौदाबाजार भरत भूषण साहू पिता मूल शंकर साकिन लवनरोड गायत्री मंदिर बलौदाबाजार को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया तथा थाना सिटी कोतवाली बलौदा बाजार के निगरानी बदमाश, गुंडा बदमाश ,माफी बदमाशों की सघन चेकिंग की गई। क्षेत्र में सड़क दुर्घटना पर लगाम लगाने हेतु ब्रीथ एनालाईजर से वाहन चालको की चेकिंग की गई जिसमें 11 वाहन चालाको के विरूद्ध चलानी कार्यवाही कर इस्तगाशा न्यायालय पेश किया गया है। टीम में उप निरीक्षक संतोष साह, सहायक उपनिरीक्षक देवनाथ वर्मा, सनित कुमार साहू, कमल किशोर देवांगन, प्रधान आरक्षक भीम कुमार साहू गिरीश टंडन, समीर शुक्ला, अमीर नेताम आरक्षक 670 छालो प्रसाद खुराना, 432 सहदेव पटेल, 727 बीरबल पंकज, 760 रोहित निषाद को विशेष योगदान रहा है।

बिलासपुर : जहा बच्चे जान जोखिम में डाल कर लगा रहे मौत की छलांग , वहा लगता है अनहोनी के बाद खुलेगी शासन प्रशासन की आंख ....पढ़े ये खास रिपोर्ट

NEWS Edited By :YASH LATA

अजीत मिश्रा @ बिलासपुर (विशेष खबर )


मूकदर्शक बना  जल संसाधन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी,,  


क्या हादसा के बाद खारँग विभाग  होगा जिम्मेदार ,, 

बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्तिथ खारँग जलाशय (खूंटाघाट बांध) अपनी खूबसूरती के लिए प्रख्यात है.. मगर वहा पर सुरक्षा के अनदेखी और विभाग की लापरवाही इन तस्वीरों में साफ देखी जा सकती है जहाँ छोटे छोटे बच्चे और युवक अपनी जान दांव पर लगाकर मौत की छलांग लगा रहे है । गर्मी के मौसम में उसका जलस्तर इन दिनों नीचे चला गया है और पानी कम होने से नीचे की चट्टाने ऊपर आ गयी है.. जिसके कारण छलांग लगाते बच्चों पर कभी भी जान भी जा सकता है.. खारँग जलाशय पर बने गेज से लगातार छलांग लगाते बच्चों को देखकर आपका दिल एक पल के लिए जरूर सहम जाएगा.. करीब 70 फिट ऊंचे गेज से कूदकर कर  नवयुवक अपनी जान को जोखिम में डाल रहे है.. हैरत की बात यह भी है कि इस जलाशय से कई बार मगरमच्छ भी पकड़े गए है और अभी भी इस जलाशय में मगरमच्छ मौजूद है इसके बावजूद विभाग को बच्चो की सुरक्षा की कोई परवाह नही है । पास में ड्यूटी पर लगे गार्ड भले ही लोगों को मेन गेट से अंदर जाने के लिए रोकने काम करते है पर जाम जोखिम में डाल इन बच्चों को मना करने की ज़हमत कोई उठाना नहीं चाहता.. और ये सुरक्षाकर्मी बच्चो के इस खतरनाक खेल को मूकदर्शक बन कर देखते रहते है । इस मामले में जब खारँग जलाशय के कार्यपालन अभियंता आर के साव से पूछा गया तो उन्होंने मामले की जानकारी न होने का हवाला दिया..और कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया  पर इतना तो साफ है कि 70-80 फिट नीचे छलांग लगाते बच्चों को मूकदर्शक बने देखते रहने से हादसे को जरूर निमंत्रण दिया जा रहा है..अब देखना होगा कि वीडियो सामने आने के बाद खारँग जलाशय के जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते है । ताकि इस तरह की मौत की छलांग को रोका जा सके।।

पढ़े क्या है रेलवे में लेवल – 1 की नौकरियों के लिए अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता

 

अजीत मिश्र @ BBN24NEWS


रेलवे में तकनीकी विभागों जैसे इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, एवं सिग्नल एवं टेलीकाम विभागों इसके अतिरिक्त कैटरिंग विभाग में पे-मैट्रिक्स के लेवल-1 में कर्मचारियों की सीधी भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता नेशनल काऊंसिल फ़ॉर वोकेशनल ट्रेनिंग द्वारा प्रदत्त नेशनल अपरेंटिसशिप सर्टिफिकेट (एनएसी) सहित 10वीं उत्तीर्ण या आई.आई.टी. सहित 10 वीं उत्तीर्ण है |  
हालांकी रेलवे के तकनीकी विभागों में लेवल -1 में कर्मचारियों की सीधी भर्ती के लिए रेलवे भर्ती बोर्डों द्वारा केंद्रीयकृत रोजगार सूचना क्रमांक 02/0218 एवं RRC- 01/2019 के तहत क्रमशः फरवरी 2018 एवं मार्च 2019 में प्रकाशित / अधिसूचित पदों / रिक्तियों के लिए इस निर्धारित शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास या आई.आई.टी.या समकक्ष रखी गयी है | 
जनसाधारण को सूचित किया जाता है, कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में यह छूट केवल एक विशेष व्यवस्था थी तथा केंद्रीयकृत रोजगार सूचना क्रमांक 02/0218 एवं RRC- 01/2019 के तहत हो रही भर्तियों के लिए ही है |  रेलवे में तकनीकी विभागों ( यानी इंजीनियरिंग, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, एवं सिग्नल एवं टेलीकाम विभागों इसके अतिरिक्त कैटरिंग विभागों ) एवं कैटरिंग विभाग में पे - मैट्रिक्स के लेवल -1 में भविष्य में होने वाली भर्तियों जिनकी सूचना 15.06.2019  के बाद जारी होगी, के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नेशनल काऊंसिल फ़ॉर वोकेशनल ट्रेनिंग द्वारा प्रदत्त नेशनल अपरेंटिसशिप सर्टिफिकेट (एनएसी) सहित 10वीं उतीर्ण ही होगी | यह सूचना सभी भावी उम्मीदवारों के लिए है एवं इसके अनुसार आगे की भर्तियाँ किये जायेंगे |

मंत्री जी कृपया ध्यान दें : जांजगीर चापा में विभाग के अधिकारियो की मिलीभगत कहें या फिर लापरवाही , क्रेशर और खदान में होने वाली ब्लास्टिंग से आए दिन ग्रामीणों को हो रही है परेशानी , विभाग कुंभकरण की नींद में... पढ़े पूरा मामला

(शनि सूर्यवंशी)@BBN24NEWS.COM पकरिया- पकरिया से लगरा सिल्ली मुख्य मार्ग से लगा हुआ सड़क किनारे संचालित हो रहा बाके बिहारी मिनरल्स क्रेसर द्वारा नियमो की धज्जिया उड़ाते हुए मनमानी तरीके से बलपूर्वक संचालित हो रहा है। जानकारी के अनुसार बीते बुधवार को दोपहर करीब 1 बजे ब्लास्टिंग के पहले क्रेशर के संचालक द्वारा सड़क किनारे स्थित श्रेया फ्लाई ब्रिक्स के मजदूर लोग काम कर रहे थे जिसका काम बंद करवा के संचालक ने कहा कि बलस्टिंग होने वाला है काम को थोड़ा देर के लिए बंद करके थोड़ा दूर सुरक्षित जगह पर चले जाने की बात कही वही मजदूरो ने बताया की जब ब्लास्टिंग हुआ तो फ्लाई ब्रिक्स में खुद क्रेशर संचालक बलस्टिंग के दौरान इस भयावह नजारा को अपने आंखों में खड़े होकर् खुद देख रहे थे वही बलस्टिंग के समय फ्लाई ब्रिक्स का ऊपर का शेड (टीना) पर आकर बलस्टिंग के दौरान पत्थर का बड़ा टुकड़ा दो जगह पर आ गिरा जिससे शेड टीना बुरी तरह से फट गया वही नीचे काम कर रहे मजदूरो ने अपना जान बचाकर मशीन छोड़ बाहर निकल कर भाग खड़ा हुए वही पत्थर शेड में एंगल के बीचोंबीच फंस गया जिससे बड़ी घटना होते हुए बच गया । वही फ्लाई ब्रिक्स के संचालक के द्वारा क्रेशर संचालक को खूब खरी खोटी सुनाया और शेड को बनवाने की बात कही *बलस्टिंग के दौरान वहां बसे लोगो को मकान से बाहर निकलवा भीषण गर्मी में परिवार समेत खड़ा करवाया* बलस्टिंग के समय वहाँ रह रहे लोगो को पहले उनके मकान से इतना भीषण गर्मी में दोपहर एक बजे करीब छोटे छोटे बच्चो के साथ पूरे परिवार के लोगो को लगरा मोड़ तक लेकर गए उसके बाद बलस्टिंग करवाया गया । वहा रह रहे लोगो ने बलस्टिंग का जो मंजर देखा उससे पूरे के पुरे परिवार सहम सा गए थे । वही बलस्टिंग के बाद जब लोग अपने अपने घर पर आए तो देखा कि किसी के घर का खप्पर टूटा किसी का शीट टूटा हुआ था तो किसी के घर बाहर पत्थर के बड़े बड़े टुकड़े पड़े हुए मिला इस तरीके के बलस्टिंग आये दिन यहाँ रह रहे लोगो को जान माल का खतरा बना हुआ बलस्टिंग से कभी भी बड़ा घटना घट सकता है। वही जब वहां रह रहे लोगो के घर् पर बलस्टिंग का पत्थर गिरा तो उसके विरोध करने पहुँचे तो क्रेशर संचालक ने कहा कि आज बड़ा बलस्टिंग लागये थे जिसे चेक करके के देख रहे थे अब दोबारा बड़ा बलस्टिंग नही होगा करके चलते बने। *इससे पहले भी बलस्टिंग के दौरान गाय की हो चुकी है मौत* आपको बता दे अभी हाल ही में 24 मई को पहले ही बलस्टिंग के दौरान एक दुधारू गर्भवती गाय की मौत हो चुकी है जो पकरिया निवासी दसुवा यादव का था जिससे वह दूध बेचकर अपना परिवार का भरण पोषण करता था *शिकायत के बावजूद भी कार्यवाही नही* इतना ही नही इस तरह की घटना के बारे में कई बार खबर प्रकाशित किया गया अधिकारीयो को अवगत कराया गया फिर भी इस ओर कार्यवाही न करना समझ से परे है। जिससे क्रेशर संचालक की मनमानी चरम सीमा पर है। लगता है इनका ऊपर तगड़ा सेटिंग है तभी तो इस तरह के कई बार घटना हो चुका है उसके बावजूद भी जांच तक न करना मुनासिब नही समझते तो कार्यवाही करना तो भगवान भरोसे लगता है। *क्रेशर संचालक के द्वारा घर छोड़ कर चले जाने की दी जाती है धमकी* क्रेशर संचालक ने लगरा रोड सड़क किनारे बसे कई बर्षो से राह रहे यहाँ के स्थानीय लोगो को हमेशा घर तोड़ने घर छोड़ के जाने की धमकी दिया जाता है इससे सजह अंदाजा लगाया जा सकता है कितना दबंगई बल पूर्वक क्रेशर का संचालन कर रहा है। *क्रेशर के पास रहने वालों लोगो ने तंग आकर थाने में जाकर शिकायत की* क्रेशर के पास रह रहे लोगो ने रोज रोज के ब्लास्टिंग से होने वाले परेशानियों को लेकर आज थाना में जाकर क्रेशर संचालक के नाम पर लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई है वही जांच कर उचित कार्यवाही की बात कही है। (edited by : Yash@BBN24news)

पढ़े अस्तित्व खोती अरपा नदी की ये विशेष खबर ..सिर्फ BBN24NEWS पर

अजीत मिश्रा (विशेष रिपोर्ट ) - बिलासपुर-सरकार और प्रशासन की अनदेखी के कारण न्यायधानी बिलासपुर की जीवनदायनी कहलाने वाली अरपा नदी किनारे वर्षों पुरानी पचरी घाट और शिव मंदिर घाट का अस्तित्व लगभग समाप्त होने की कगार पर है..कभी बिलासपुर की पहचान रही इस घाट पर आज प्रशासन ही गन्दगी फैला रहा है..शहर की जीवनदायिनी नदी कहलाने वाली अरपा नदी आज जनप्रतिनिधि और प्रशासन के लिए महज राजनीति करने का एक जरिया बनकर रह गया है बिलासा की नगरी बिलासपुर अरपा नदी के नाम से जानी जाती रही है..यहां के दो प्राचीन घाट पचरी और शिवघाट हैं..इस घाट में लोग वर्षों तक पूजा पाठ से लेकर पिंडदान तक करते रहे हैं..स्थानीय लोगों और प्रशासन की अनदेखी के कारण आज इस घाट की स्थिति किसी से नही छिपी..दुर्भाग्य है कि प्रशासन इस ओर कभी ध्यान नहीं दे रही है बल्कि शहर की गंदगी इसमें डालकर अरपा नदी और नदी किनारे मौजूद पचरी घाट व शिवघाट के अस्तित्व को खत्म करने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहा अरपा नदी को स्वच्छ रखने समय-समय पर अनेक संगठन और जनप्रतिनिधि एकजुटता दिखाते हैं पर महज चंद घण्टों की खानापूर्ति के बाद लोगों को अरपा नदी याद नही आती..पिछले कई वर्षों से अरपा नदी में निगम के द्वारा शहर की गंदगी फेंकी जा रही है पर आज तक किसी भी संगठन य जनप्रतिनिधि ने कभी कुछ कहना मुनासिब नही समझा..केवल स्वच्छता व पर्यावरण दिवस पर लोगों को अरपा की याद आती है..अरपा नदी व घाटों पर कब्जा और फेंके गए गंदगी के चलते नदी की चौड़ाई सिकुड़ गई है। बिलासपुर में अरपा नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिये मुख्यमंत्री के विशेष निर्देश मिले हैं। इसी क्रम में जिला प्रशासन द्वारा दो दिवसीय अरपा उत्थान अभियान का आयोजन किया जा रहा है। ‘ अरपा उत्थान ’ अभियान में जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के तमाम अधिकारी सुबह से ही छठ घाट पहुंचकर नागरिकों के साथ सफाई में जुट गये। अरपा नदी पर प्रशानिक लापरवाही इतना ज्यादा है की नदी के बीचों बीच झूल रही विद्युत तार अधिकारियों को दिखाई नही पड़ रहा.. बरसात में कभी भी इस झूलते विद्युत तार से कोई बड़ा हादसा हो सकता है.. शायद विभाग को किसी हादसे का इंतजार है बहरहाल अब देखना होगा की अस्तित्व खो रही अरपा नदी के बचाव पर प्रशासन कोई ठोस कदम उठाती है य महज श्रमदान और उत्थान की बात कर खानापूर्ति ही करती रहेगी। बिलासपुर के लोगो की प्यास बुझाने वाली अरपा अपना अस्तित्व खो देगी

शिक्षा अधिकार नहीं उपभोग की वस्तु कीमत तो चुकानी ही होगी शिक्षा अधिकार नहीं उपभोग की वस्तु कीमत तो चुकानी ही होगी

शिक्षा, चिकित्सा, बिजली और पानी इन्हें निजी हाथों में सौंपे जाने का असर अब समाज में स्पष्ट दिखने लगा है। हो भी क्यों न जब हम बाजार में उपभोक्तावादी मानसिकता के साथ खड़े हों खासकर तब। शिक्षा का अधिकार कानून बनाने वाले भला आप की इस मानसिकता का फायदा क्यों नहीं उठाएंगे। जबकि वे ये जानते हैं कि शिक्षा आप का अधिकार नहीं आपके उपभोग का संसाधन है। और संसाधन चाहिए तो जेब तो ढ़ीली करनी ही पड़ेगी। लेकिन कितनी.. इसका पैरामीटर क्या होगा.. तय कौन करेगा.. । ये सवाल है सभी के मन में.. तो जो अधिकार देगा वही यह भी तय कर देगा कि आपको शिक्षा कैसी चाहिए.. कहां चाहिए.. किन से चाहिए.. किनके साथ चाहिए.. इस आधार पर तय करेंगे की आपको जो शिक्षा चाहिए उसकी कीमत कितनी हो। तो आप के बजट में जो शिक्षा की दुकान फिट बैठे उसे चुन लीजिए। फिलहाल न्यूनतम दरों पर तो सरकारी शिक्षा ही उपलब्ध हो सकेगी। यह सरकार तय कर चुकी है। मैं कुछ नहीं कह रहा। आरटीई (शिक्षा का अधिकार) लागू होने के साथ ही सरकार ने यह भी तय कर दिया था कि आप अगर बच्चे को किसी नजदीकि निजी स्कूल यानि शिक्षा की किसी बेहतर दुकान पर अधिकार के साथ शिक्षा दिलवाना चाहते हैं तो उसकी कीमत सरकार को चुकानी होगी। क्योंकि आप उस श्रेणी में हैं जहां आपको ये अधिकार सरकार की ओर से मिला है। यदि आप इस श्रेणी में नहीं हैं तो आपको खुद यह कीमत चुकानी ही होगी।क्योंकि सरकार भी तो चुका ही रही है। ये और बात है कि 5का प्रवेश करवाकर 25 के पैसे उन बड़ी दुकान वालों ने सरकार से तब तक लिए जब तक कि सरकार का खजाना ही खाली नहीं हो गया। अब जरा सोचिए... क्या सरकार को लूटना इतना आसान है... या फिर सरकार खुद लुट रही थी.. मेरा काम तो सवाल खड़े करना है.. जवाब तो आप ही को मांगना और ढ़ूंढ़ना है। अब जरा यह भी समझिए.. शिक्षा की बड़ी दुकानें हर साल फीस में 10 से 30 फीसदी तक का इजाफा कर रहीं हैं। पूछने पर पता चला कि इसकी छूट शासन.. माफ कीजिए सरकार ने दे रखी है। कई शिक्षा अधिकारियों से बात की जवाब यही मिला। तो हर साल बच्चे की फीस पर कम से कम दस प्रतिशत खर्च बढ़ेगा ही यह तय है.. क्योंकि सरकार ने कहा है। तो आपको मानना ही चाहिए... हां ठीक कहा मानना ही पड़ेगा। नहीं मानोगे.. तो आइए शिक्षा की सरकारी दुकान पर। फिर एक सवाल खड़ा होता है कि जो सरकार शिक्षा शुल्क में10 फीसदी इजाफे का अधिकार हर साल शिक्षा की दुकान चलाने वालों को दे रही है वह यह तय क्यों नहीं कर पा रही कि शासकीय, निजी, अर्धशासकीय संस्थाओं में कार्य करने वाले कर्मचारियों के वेतन में भी कम से कम 10 फीसदी का इजाफा हर साल होना ही चाहिए। लेकिन यह होगा नहीं.. दरअसल मामला निजीकरण, बाजारवाद और उपभोक्तावाद से जुड़ा है। आप शिक्षा ले नहीं रहे आपको दी जा रही है .. आपकी पहुंच में हो तो ले लीजिए.. नहीं तो वही सरकारी दुकान शिक्षा वाली खुली है सबके लिए.. आप भी आ जाइए.. बिलकुल राशन की दुकान की तरह जो मिल रहा है उसी में खुश रहिए... गुणवत्ता की बात न पूछिए... शिक्षा की सरकारी दुकान पर व्यवस्था ठीक न लगे तो जिम्मेदारों के जवाब आपको नहीं जम रहा तो निजी स्कूल जाइए... और निजी स्कूलों में मंहगी शिक्षा की बात की तो सरकारी दुकान पर जाने का ताना.. जरा सोचिए... कि आम आदमी आखिरकार जाए तो जाए कहां... आप खास हों तो सोचने की जरूरत ही नहीं... सवाल आम आदमी के लिए ही है। आप जरा नेताजी.. मंत्री जी...साहब लोगों से पूछ ही लो आप मोहल्ले के सरकारी स्कूल में अपने बच्चे का एडमिशन करवाएंगे क्या... संभावित जवाब फलाने ने करवाया था... ढिकाना तो सरकारी स्कूल से ही पढ़कर निकला है... अरे उन्हें छोड़िए वो चुनावी साल था आप तो आज की बात कीजिए... Kumar Sanjay ke

पढ़िए सविता सिंह से खास बात चीत मनहर चौधरी के साथ सिर्फ BBN24 पर

 

1 : सविता जी सबसे पहले आप को बहुत बहुत बधाई अब आप लेखन के क्षेत्र में भी आ गई है तो सबसे पहले इसी से जुड़ा एक सवाल आज का युवा जो  पढ़ने और लिखने से कही ना कही भाग रह है तो आपने फिर से कैसे  सोचा की अब कुछ लिखने का भी कार्य करना चाहिए

 

उत्तर 1 : आपका बहुत बहुत शुक्रिया। आज का युवा भी मेरे विचार में पढ़ता तो बहुत है, मगर हां शायद सोशल मीडिया के बढ़ते प्रचलन के कारण उसने लिखना कम कर दिया है। मुझे काफी समय से लग रहा था कि कोई क़िताब लिखी जाए क्योंकि किताब आज भी एक सशक्त तथा permanent  माध्यम है अपने विचारों को लोगों के बीच पहुंचाने का और मौजूदा व्यवस्था पर अपने विचार व्यक्त करना मुझे फिलहाल ठीक लगा। इसलिए मैंने ये बुक लिखी ।

 

2- अकसर एसा देखा गया है  कि जो जिस बैकग्रांउड का होता है या जिसरी जो फिल्ड है वो उसी पर लिखना या फिर बोलना पसंद करता है  और आपका बैकग्राउंड आर्मी का रहा है तो फिर आप के मन मे कहां से कहा कि चलो थोड़ा पोलिटिकल सोचा जाए |

 

उत्तर 2: Well I must say it's a very good question. I have tried to answer the same question right in the preface of my book if you read it carefully. I'm not from any political family and have an army background completely. But being from any background doesn't stop you from having your views about the political system in your country. In fact, I feel that being responsible citizens we should be well aware of our political system and happenings. After all, it's political parties who frame all the policies in the country, run the country and thus affect the daily lives of each and every one of 125 crore plus Indians.

Thus it's imperative for all of us to do our tasks sincerely and at the same time be aware of mindset, ideologies, background and vision of our political representatives because the country has to bear the burden of their actions not for a month or two but for next 5 years. In fact, entire country and even our next generations will have to bear the consequences of their actions for years to come. The country should come first and foremost for all of us and only a well aware citizen will be able to exercise its option of frenchise to choose the right candidates who will take our nation forward at a faster pace. जागरुक, देश से प्यार करने वाले और उत्तरदायी नागरिक होने के नाते हमारा दायित्व बनता है कि हर नागरिक लोकतन्त्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे तथा धर्म- जात- पात - क्षेत्र- भाषा - पैसा इन सबसे उपर उठकर अच्छे प्रतिनिधी चुनकर आगे भेजे जो देश को तेज़ी से आगे ले जाएं ताकि 125 करोड़ देशवासियों के सपनों को पूरा करने की सच्ची कोशिश ईमानदारी से की जा सके । बल्कि समय आ गया है कि जब हमें चुनाव में पैसा लुटाने वाले और धन का अवांछित प्रदर्शन करने वाले प्रत्याशियों को भी दुत्कार कर सिर्फ काबिल तथा अच्छे प्रतिनिधियों को ही चुनना चाहिए। आर्मी की बैकग्राउंड होना मेरे लिए फख्र की बात है। आर्मी मतलब सम्पूर्ण कुर्बानी, तन - मन - धन - समय - परिवार - खुद की जान । सबकी कुर्बानी। मेरे विचार में आर्मी से बढ़कर कोई देशसेवा नहीं है। असलियत में आर्मी बैकग्राउंड होना भी इस किताब को लिखने का शायद एक बड़ा कारण है। आर्मी मैं देश को सबसे पहले और सबसे ऊपर रखा जाता है। आज शायद मेरी नज़र में आने वाले 5 सालों में मोदी जी ही ऐसे राजनेता हैं जो देश की सेना को उतनी मजबूती देंगे जितनी उसको ज़रूरत है और देश को लाचारी वाले हालातों से उभारकर आगे ले जाएंगे, एक मज़बूत भारत बनायेंगे।

 

3- आपकी किताब का नायक को है वो भारत के प्रधानंमत्री मोदी हैं ,  मोदी ही क्यो

 

उत्तर 3 - I would request readers to go through my book in detail. It gives an answer to this question in detail. एक नहीं अनेक कारण हैं कि मोदी जी मेरी किताब के नायक हैं। मेरी किताब मेें खुलकर लिखा हुआ है। फिर भी मैं यहां कहूंगी कि श्री नरेन्द्र मोदी जी वो इंसान हैं जिनसे सिर्फ मैं ही नहीं अपितु देश का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ है । चाहे कुछ लोग उन्हें वोट भी नहीं करें मगर शायद उनसे प्रभावित सभी हैं। इस बात से शायद ही कोई इंकार कर पाए कि पिछले पांच सालों मेें मोदी जी ने रात दिन जी जान से देश को तरक्की के मार्ग पर मुखर करने कि मेहनत की है ताकि देश के 125 करोड़ लोगों की आशाओं को ज्यादा से ज्यादा पूरा किया जा सके। हम सब जानते हैं कि सारी और सबकी समस्याएं कोई भी रातों रात ख़त्म नहीं कर सकता पर उनके हल की सच्ची कोशिश तोह की जा सकती है। उन्होंने मेरे विचार मैं यही कोशिश की है।

 

5- किताब के शीषर्क से लग रहा है कि आप नरेन्द्र मोदी से काफी प्रभावित है और एक अपील भी है  इसके पीछे कया कारण है आप उनमें क्या अलग देखती है

 

उत्तर 5 - जी हां इसमें कोई शक नहीं कि मैं श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व तथा व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हूं। क्योंकि मुझे देश की तरक्की और मजबूती से प्यार है, देश की जनता की खुशहाली से प्यार है। अतः मेरे विचार से मोदी जी का सत्ता में दुबारा बने रहना बेहद ज़रूरी है। वह फ़िलहाल अकेले ऐसे राजनेता हैं जो भारत को तेज़ी से आगे बढ़ा सकते हैं। उनके पास बहुत नई सोच है। और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी आइडियाज को लागू करने का अनूठा जज़्बा है जो आज किसी और शक्सियत में नहीं दिखता। ये मैं नहीं शायद ज़्यादातर भारतीयों का मानना है। Moreover, I feel he is man who has risen to become Prime Minister of India from a common man. He is not born in some rich or family or doesn't have a kingly background. He has given dreams to billions of Indians that they have 'one of them' sitting in Prime Minister's office. Besides this we all know very well that he is hardworking, decisive, visionary, down-to-earth and a tough Prime Minister India needs at this time.

 

6- एक सीघा सवाल है सेना को राजनिति से अलग रखा जााना चाहिए या नही

 

उत्तर 6 - Of course Army should be kept away from politics. In fact, our Army has itself stayed away from politics always. Indian army is a professional army always known for focussing only upon the tasks it's assigned. It only keeps preparing itself to fight successfully with its adversaries 24*7. In fact, discipline is the bedrock of Indian Army. Loyalty to the nation is ingrained into them right from day one and it cannot be questioned at any point of time. They are the ones who have been in the situations on so many occasions where they even lose their lives for country. They are playing with their own lives for the country day in and day out. They are going for operations or war being fully aware that they might not come back again. They don't even question you once that why should they march forward to face the bullets right in the chest when live bullets are flying from front and all around them. Mind you, a soldier has to bat and battle those live bullets or bombshells and not hit few sixes with a cricket ball and become a hero overnight. What else anyone can expect from army men. Therefore, in my opinion and with due respect, Army people are the REAL HEROES who are far superior than any of our sportspersons or filmi heroes who get paid heavily for playing sports or making films. सच्चाई तो ये है कि असल में आर्मी वाले लोग आजाद भारत के मॉडर्न भगत सिंह और चंद्र शेखर आजाद हैं। देश को उन पर गर्व होना चाहिए और उनका शुक्रगुजार भी होना चाहिए कि वो देश के लिए थोड़ी सी तनख्वाह में भी अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। उधर यहां पर कुछ अज्ञान और स्वार्थी नेता सेना के लिए गलत बयानबाजी भी करने से नहीं चूकते कि जवान तो मरने के लिए ही सेना में भर्ती होते हैं। Ieel that even if few people from army background join the politics, there is no harm. It should be a welcome step and I'm sure they will do a real good job for the country. But that's a personal choice of any individual whether to join politics or not.

 

7 किताब लिखने में आपने कहां कहां से सहयोग लिया  आतंकवाद पर आपकी क्या राय है

उत्तर 7 - इस क़िताब को लिखने में मैंने जहां से भी संभव हुआ सहयोग लिया। Aim was to pen down my thoughts with certain supporting material most of which I took from open domain. As regards terrorism, it seems like a cancer to me for humanity. We should all get together as nation as a whole and fight with it.  Actions of toughest nature should be taken to wipe off this menace. In fact, time has come now when countries should get together at international level to take on this big challenge with a collective might and will.

 

8- अपनी किताब का कोई एसा अंश  जो इस किताब का सबसे प्रभावी हिस्सा है वो कौन सा है और क्यो

उत्तर 8 -  ये मेरे लिए काफी मुश्किल सवाल है क्योंकि मेरे हिसाब से किताब का हर हिस्सा ज़रूरी और प्रभावी है। फिर भी शायद 'प्रीफेस' और आखिरी अध्याय 'मोदी बनाम कौन'  मेरे हिसाब से काफी अच्छे हैं क्योंकि ये पढ़ने वालों को सोचने पर मजबूर कर देता है। मेरे हिसाब से ये पुरी किताब हर समझदार नागरिक और युवा वर्ग को एक बार जरूर पढ़नी चाहिए

 

9 - पाठको के लिए क्या संदेश देना चाहती है आप

उत्तर 9 - To all my readers, I would like to say that live harmoniously and happily. Have healthy competition but cut out the animosity amongst each other. Work hard in life, raise your performance and strive to do well in life. Be happy in your own lives. Enjoy your lives but at the same time have unquestionable feelings for this country where we have been born and try to contribute our best to make it a great country.  भारत के अच्छे भविष्य के लिए जात-पात -धर्म -भाषा - क्षेत्र - पैसा आदि से ऊपर उठकर अच्छे कर्मठ प्रतिनिधी चुनें जिससे कि हम सबका देश भारत विश्व में अपना डंका बजाने में कामयाब हो। आपस में शांति से मिलकर रहें। हमारी अगली पीढ़ियां भी तभी खुश रहेंगी। अपनी अगली पीढ़ियों को एक मजबूत भारत, एक शांतिपूर्ण भारत दें जो कि लगभग हर क्षेत्र में एक सुपरपावर हो। आखिरी संदेश कि एक बार ये किताब जरूर पढ़ें। आपको भारतीय होने के नाते ये किताब पढ़कर ज़रूर कुछ अच्छा महसूस होगा।

 

 

 

पढ़िए जांजगीर जिले के एक छोटे गाँव में रहने वाले बुजुर्ग पति पत्नी की अनोखी कहानी

शनि सूर्यवंशी@ BBN24-- पकरिया- कहते हैं ना कि जिस उम्र में अपने भी साथ छोड़ देते हैं उस उम्र में पत्नी साथ निभाती है ऐसा ही एक वाक्य पामगढ ब्लॉक के छोटे से गांव झूलन का है जहां पति पत्नी मिलकर मनिहारी का ठेला चलाते हैं जिसमें महिलाओं के श्रृंगार को लेकर पति पत्नी सुबह से ही बिना चप्पल के निकल पड़ते हैं और आसपास में घूम-घूम कर अपना रोजगार करते हैं ऐसा नहीं कि उनकी घर के सदस्य उन्हें मना नहीं करते हो उनके घर के और कोई नही बल्कि उनके पुत्र ही हमेशा मना करते हैं कि आप यह कारोबार मत करो फिर भी काम करने की ऐसी इच्छा की बच्चों के बातों को नजरअंदाज करके भी आज भी काम करते हैं। 8 वर्ष से आसपास के गांव गांव में घूम कर ठेला के माध्यम से मनिहारी की दुकान चलाते है। इनके दो पुत्र है जोकि एक पामगढ़ के शिशु विद्या मंदिर में पढ़ाते है । दूसरा खेती किसानी का काम देखते है। खास बात यह है कि रामाधीन कश्यप ने बताया कि कितना भी तेज धूप या चिलचिलाती गर्मी हो हमेशा ही वो और साथ मे उनकी पत्नी दोनों ही पैदल सड़क हो गाँव के रास्ते में ही पैदल ठेला को चलाते है। साथ ही उन्होंने बताया कि हम अपना काम के साथ भगवान के भक्ति में भी लीन रहते है इतना ही नही वो अपने ठेले में गाना सुनने के लिए एक साउंड सिस्टम लागये जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ धार्मिक गाना ही बचता रहता है। जब हमने पूछा ठेला में सिर्फ धार्मिक गाना ही बजाते है तो उन्होंने ने बोला कि उम्रदराज में धार्मिक गीत संगीत अच्छा लगता है इससे मन साफ रहता है और अपने अंदर अच्छा विचार भी पैदा होता है जिससे अच्छे काम करने का इच्छा भी जगजाहिर होता है। इस लिए धार्मिक गाना सुनते है। पति पत्नी ने बताया कि आज भी बहुत से माँ बहन बहु बेटी है जो अब भी दुकान में अपने जरूरत की समान लेने जाने में शर्माते है झिझकते है ये सभी चीज़ को देखते हुए हम दोनों पति पत्नी ने इस काम को चुना साथ ही सेवा के रूप में ठेला पर घर घर जाकर समान बेचते है। इतना ही नही इनके बच्चो के द्वारा कई बार मना किया गया उसके बावजूद भी पत्नी पत्नी की जिद्द के आगे कुछ बात काम न आया फिर भी ये अपने बच्चो के एक भी न सुने और अपने काम को सच्चे लगन मेहनत ईमानदारी से करते आ रहे है। इन दोनों पति पत्नी के काम को लेकर गांव के लोग सराहना करते थाकते नही है और इनके हिम्मत जज्बे को सलाम करते है।

पढ़ने के लिए जुनून होना चाहिए सफलता आपके कदम चूमेगी -हेमंत जायसवाल..... MBBS की परीक्षा में शानदार नम्बरो से पास होकर बढ़ाया क्षेत्र का मान

जांजगीर चांपा :-जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर डभरा ब्लॉक के साराडीह का होनहार हेमंत जायसवाल एमबीबीएस के फाइनल परीक्षा में शानदार नंबर अर्जित कर क्षेत्र के साथ-साथ जिले का भी नाम रोशन किया है। हेमंत जायसवाल मध्यम वर्गीय परिवार होने के बावजूद का भी आगे बढ़ने को लेकर हिम्मत नहीं हारी और सन 2014 बैच में एमबीबीएस की प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चयन होकर रायगढ़ में स्थित स्व लखीराम मेडिकल कॉलेज दाखिला होकर अपनी पढ़ाई शुरू की और 25 मार्च को एमबीबीएस फाइनल ईयर की रिजल्ट जवाई जिसमें शानदार नंबरों से पास होकर क्षेत्र के साथ-साथ जिला का नाम रोशन किया। वहीं हेमंत जायसवाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और अपने गुरुजनों के साथ साथ अपने बड़े भाई को दिया आपको बता दें कि हेमंत जायसवाल जिले के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जनर्लिस्ट एवं समलेश्वरी हॉस्पिटल के संचालक हुमेश जायसवाल के छोटे भाई हैं।

पढ़ने के लिए जुनून होना चाहिए सफलता आपके कदम चूमेगी

हालांकि मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूं पर्याप्त संसाधन नहीं था और मैं हिंदी मीडियम का छात्र था लेकिन भैया जब मेडिकल की पढ़ाई करने रायपुर गए थे तब उनसे मुझे प्रेरणा मिली भैया मुझे हमेशा कहते थे कि मैं तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता हूं और भैया की यह बात मुझे भाग गई पर मन में जुनून था कि मैं डॉक्टर बनूंगा फिर मैंने पीएमटी की तैयारी की जिसके बाद मेरा चयन रायगढ़ में स्थित स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज में हुआ शुरू शुरू में तो मुझे हिंदी मीडियम होने के कारण समझने में थोड़ा दिक्कत होता था क्योंकि मेडिकल की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम में होती है लेकिन मैंने हार नहीं मानी और बिना किसी रूकावट के मैं आगे बढ़ते गया और फाइनली अब मैं एमबीबीएस कंप्लीट कर लिया मैं सभी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को कहना चाहूंगा कि अपने लक्ष्य पर ध्यान देवें कंसंट्रेट होकर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करें तो सफलता उन्हें जरूर मिलेगी। हेमंत जायसवाल (मेडिकल छात्र)