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भाजपा नेता पर लगाया दुष्कर्म का आरोप, पिता की जेल में मौत, अब होगी मजिस्ट्रेटी जांच

उन्नाव । भारतीय जनता पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली किशोरी के पिता की उन्नाव जेल में मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री के बेहद गंभीर होने पर जिलाधिकारी रवि कुमार एनजी ने मौके पर जाकर परीक्षण किया और अब इस प्रकरण की मजिस्ट्रेटी जांच का आदेश दिया गया है।

माखी निवासी दुष्कर्म पीडि़ता के जेल में बंद पिता की मौत प्रशासन के गले की फांस बन गई। जिसकी गूंज अब लखनऊ से चलकर दिल्ली तक पहुंच गई है। मामला तूल पकडने के बाद डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच लिए एसडीएम हसनगंज को जिम्मेदारी सौंपी है। उन्नाव गैंगरेप मामले में एसपी क्राइम दिनेश कुमार सिंह लखनऊ के नेतृत्व में टीम जांच करने उन्नाव पहुंची।

आज पोस्टमार्टम पहुंचे डीएम रवि कुमार एनजी ने घटना को गंभीरता से लेते हुए उसकी मजिस्ट्रेटी जांच कराने के आदेश दिए हैं। डीएम ने बताया किशोरी के पिता के शरीर पर गंभीर चोटे थी, उसकी हालत भी गंभीर होने के बाद उसका इलाज नहीं कराया गया बल्कि उसे जेल में ही रखा गया, इस जांच में इस बिंदु को गंभीरता से लिया जाएगा। एसडीएम हसनगंज मनीष बंसल पूरे मामले की जांच करेंगे।
तहरीर देने के बाद भी एफआईआर में उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई का नाम न शामिल करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रकरण संज्ञान में शासन भी इसे लेकर गंभीर है। पूरे मामले की जांच की जा रही है। जो भी दोषी होगा उसे छोड़ा नहीं जाएगा।

एसओ निलंबित

दुष्कर्म पीडि़ता की शिकायत को गंभीरता से न लेने के मामले के साथ ही उसके पिता के प्रति संवेदनहीनता दिखाने पर माखी के एसओ अवधेश भदौरिया को निलंबित कर दिया गया है। कल ही लखनऊ के एडीजी राजीव कृष्णा ने इस प्रकरण में माखी के एसओ अवधेश भदौरिया की कार्यशैली पर संदेह जताया था। पीडि़तों की तहरीर बदलकर मुख्य आरोपी रहे विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई का नाम तहरीर से हटा देने पर एसओ माखी अवधेश भदौरिया को एसपी ने निलंबित कर दिया है।

आईएएस अफसरों का तबादला: अवनीश शरण कवर्धा, महादेव कावर को बेमेतरा और डोमन सिंह मुंगेली कलेक्टर,जनक पाठक बलौदाबाजार

रायपु लोक सुराज अभियान में प्रशासनिक कामकाज की समीक्षा लेने के बाद मुख्यमंत्री डाॅ.रमन सिंह ने बड़ी प्रशासनिक फेरबदल की है. बड़े पैमाने पर हुए प्रशासनिक फेरबदल में राज्य के 18 अखिल भारतीय सेवा स्तर के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं. छत्तीसगढ़ में स्थांनातरित आईएएस अफसरों की सूची जारी हो गई है। सूची में जिनके नाम शामिल है वे है, बलरामपुर कलेक्टर अवनीश शरण को कवर्धा की जिम्मेदारी देते हुए वहां का कलेक्टर बनाया गया है। कबीरधाम के कलेक्टर नीरज बंसोड, जांजगीर-चांपा के कलेक्टर होंगे। जनक पाठक बलौदाबाजार के नए कलेक्टर बनाए गए है। डोमन सिंह को खाघ विभाग से हटाकर मुंगेली का कलेक्टर बनाया गया है। महादेव आरडीए के सीईओ महादेव कांवरे बेमेतरा के कलेक्टर होंगे। हीरालाल नायक को एडिशनल कलेक्टर बस्तर से बलरामपुर कलेक्टर बनाया गया है। कार्तिकेय गोयल को बेमेतरा से हटा कर आईजी रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदराी सौंपी गई है। राजेश राणा को बलौदाबाजार कलेक्टर से डायरेक्टर अकादमी का प्रभार दिया गया है।

भाजपा बंद सफल, दोबारा आग से न खेले भाजपाः मायावती

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने देश भर में दो अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ भारत बंद को बेहद सफल बताया है। लखनऊ में आज मायावती ने कहा कि दो अप्रैल को भारत बंद की सफलता से भारतीय जनता पार्टी बेहद भयभीत है। इसी भय के कारण दलित नेताओं पर केस दर्ज हो रहे हैं। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा है कि दलितों के खिलाफ बेवजह केस दर्ज कर भाजपा आग से न खेले।

देश में दो अप्रैल को दलितों के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के बाद भी बसपा मुखिया इसको बेहद सफल बता रही हैं। इस मामले में बसपा मुखिया मायावती ने एक बार फिर भाजपा और नरेंद्र मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। मायावती ने आरोप लगाया है कि एससी एसटी एक्ट में बदलाव के खिलाफ भारत बंद में शामिल होने वाले लोगों का पुलिस उत्पीडन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दलितों को निशाना बनाया जा रहा है।

मायावती ने नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि देश में इमरजेंसी से बदतर हालात हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा आग से खेल रही है। इस दौरान मायावती ने कहा कि प्रदेश में अपनी सरकार बनने पर दलितों के खिलाफ किए गए केस वापस लेने का भी ऐलान किया है।

एनडीए के दलित सांसदों के विरोधी स्वर के बाद अब बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती भी बेहद मुखर हैं। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को बुलाया गया भारत बंद बेहद सफल रहा है। इस बड़े भारत बंद ने भाजपा को परेशान कर दिया है।

प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आरोप लगाया कि भारत बंद की कामयाबी के कारण अब भाजपा शासित राज्यों में दलितों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्दोष दलित और उनके परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार किया जा रहा है। दलित समुदाय के सदस्यों को प्रताडि़त किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले दलितों पर अत्याचार की खबरें मिल रही हैं। यह रुकना चाहिए।

15 किमी तक बिना इंजन दौड़ती रही पुरी एक्सप्रेस, जानें क्या है पूरा मामला

अहमदाबाद-पुरी सुपर फास्ट एक्सप्रेस के साथ एक हादसा होने से बच गया. यह ट्रेन शनिवार को बिना इंजन के 15 किलोमीटर तक दौड़ती रही. यह मामला टिटलागढ़ रेलवे स्टेशन का है. इस मामले में रेलवे के दो कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है. हालांकि, इस दौरान ट्रेन में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं.

यह ट्रेन केसिंगा की ओर जा रही थी. इस घटना का कारण रेलवे कर्मचारियों द्वारा कोचों के व्हील पर स्किड ब्रेक न लगाना है. नियमों के मुताबिक इन पर भी ब्रेक लगाने पड़ते हैं. जब ट्रेन से इंजन हटाया जाता है तो उसे दूसरी ओर से लगाया जाता है. इस दौरान ट्रेन के डिब्बों को स्किड ब्रेक लगाकर अपनी जगह पर रोका जाता है.

इस मामले में संभावना जताई जा रही है कि या तो स्किड ब्रेक नहीं लगाए गए या लगाए भी गए तो ठीक ढंग से नहीं लगाए गए. मामले की असलियत जांच के बाद ही सामने आ पाएगी. बिना इंजन के 15 किमी तक दौड़ी ट्रेन पटरी से भी उतर सकती थी, हालांकि ऐसा नहीं हुआ.

घटना के बाद ट्रेन के डिब्बों को लेने के लिए शनिवार रात करीब 11 बजे टिटलागढ़ से इंजन भेजा गया. यह घटना इसलिए घटी, क्योंकि टिटलागढ़ के बाद रेलवे लाइन ढलान पर है. इसलिए बिना इंजन के ही ट्रेन ढलान की दिशा में चलती रही.

ईस्ट कोस्ट रेलवे के जीएम ने कहा है, श्रेलवे की सुरक्षा के नियमों से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. किसी भी रेलवे कर्मचारी के दोषी पाए जाने पर उस पर कार्रवाई की जाएगी.

वहीं, संबलपुर डीआरएम ने कहा है कि जिन कर्मचारियों ने इंजन शंटिंग प्रोसीजर को नहीं अपनाया, उन्हें सस्पेंड किया गया है. डीआरएम ने इस मामले में वरिष्ठ अधिकारी के स्तर की जांच का आदेश दे दिया है.

मोदी को चिट्ठीः कोर्ट में दलितों का प्रतिनिधित्व नहीं, इसीलिए खत्म किए जा रहे अधिकार

लखनऊ। यूपी में भाजपा के दलित सासंदों की पार्टी से नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब नगीना लोकसभा सीट से सांसद डॉ. यशवंत सिंह का नरेंद्र मोदी को लिखा लेटर सामने आया। 2 अप्रैल को सांसद ने चिट्ठी में कहा कि कोर्ट में हमारे समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं है, इसी वजह से अदालतें हमारे खिलाफ नए-नए फैसले देकर दलितों के अधिकारों को खत्म कर रही हैं। पिछले दिनों रॉबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से दलित सांसद छोटेलाल खरवार और इटावा के बीजेपी सांसद अशोक दोहरे भी मोदी को चिट्ठी लिख चुके हैं। उन्होंने एससीध्एसटी एक्ट में बदलाव और दलितों पर अत्याचार के मुद्दे उठाए हैं।

1. यशवंत सिंह, सांसद
 नगीना से सांसद ने प्रधानमंत्री से दलितों के लिए आरक्षण बिल पास कराने की मांग की। लेटर में लिखा, जब सांसद चुनकर आया था तब मैंने आपसे मिलकर प्रमोशन में आरक्षण के लिए बिल पास कराने का अनुरोध किया। संगठन के लोग भी यही चाहते हैं, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी इस देश में करीब 30 करोड़ दलितों के लिए कोई बिल पेश नहीं हुआ।

कोर्ट में हमारे समाज का कोई प्रतिनिधि नहीं है, इसी वजह से कोर्ट हर समय हमारे खिलाफ नए-नए फैसले देकर दलितों के अधिकारों को खत्म कर रहा है। मौजूदा हालात में बीजेपी के दलित सांसद तक अपने समाज की रोज-रोज की प्रताड़ना का शिकार हैं। दलित समाज के हितों का ध्यान रखते हुए आरक्षण बिल पास कराइएं और इसे प्राइवेट क्षेत्र में भी आरक्षण लागू करें।

2. अशोक दोहरे, सांसद
इटावा से दलित सांसद ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीएम योगी और अन्य राज्यों में अपनी ही पार्टी की सरकारों पर एससी-एसटी के लोगों पर अत्याचार करने और झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया। सांसद ने पत्र में लिखा, 2 अप्रैल को ‘भारत बंद’ के बाद एससी-एसटी के लोगों को उत्तर प्रदेश सहित दूसरे राज्यों में सरकारें और स्थानीय पुलिस झूठे मुकदमे में फंसा रही है उन पर अत्याचार हो रहा है। पुलिस निर्दोष लोगों को जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए घरों से निकाल कर मारपीट कर रही है। अफसरों पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश दें।

3. छोटेलाल खरवार, सांसद
16 मार्च को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज से भाजपा सांसद छोटेलाल खरवार ने मोदी को लिखा, ष्मेरे घर पर जबरन कब्जा करके अधिकारियों ने उसे जंगल की मान्यता दे दी। जबकि, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश पर दोबारा जांच हुई तो पता चला कि मेरा घर वन क्षेत्र में नहीं है। जिले के आला अधिकारी मेरा उत्पीड़न कर रहे हैं। दो बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की लेकिन सीएम ने डांटकर भगा दिया।
ष्अक्टूबर 2017 में मेरे भाई के खिलाफ सपा की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। वोटिंग के दौरान असलहों से लैस अपराधियों ने मेरी कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर धमकी और दी गाली दी। उस समय अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। पार्टी के कुछ लोग मेरा टिकट काटने की साजिश भी रच सकते हैं।

पुलिस गाड़ी में शराब-मुर्गा, एसपी ने पूरी टीम को किया सस्पेंड

गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज में पुलिस की गाड़ी से कुचलकर एक गर्भवती महिला की मौत हो गई, घटना के बाद गाड़ी से शराब और मुर्गा बरामद हुआ। इस मामले पर संज्ञान लेते हुए एसपी रविरंजन कुमार ने पूरी पुलिस टीम को निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना मोहम्मदपुर थाना के मोहम्मदपुर छपरा रोड की थी। गर्भवती महिला की मौत होने पर आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया था। घटना के बाद एसपी के जांच के लिए एसडीपीओ को नियुक्त किया था। जांच के बाद पेट्रोलिंग टीम में शामिल एक प्रमोटी एएसआई सहित एक हवलदार और तीन सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया। 

बता दें कि शुक्रवार को बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस वैन की टक्कर से एक गर्भवती महिला की मौत हो गई थी। घटना के बाद पेट्रोलिंग करने वाली पुलिस की गाड़ी से चिकन और शराब बरामद की गई थी। इस मामले को लेकर विपक्ष द्वारा भी नीतीश सरकार पर जमकर हमला बोला गया।

काला हिरण केसः सलमान 20 साल बाद दोषी करार, 5 साल की सजा

जोधपुर। बीस साल पुराने काला हिरण शिकार मामले में जोधपुर की चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की कोर्ट ने सलमान खान को दोषी करार दिया है। लंच ब्रेक के बाद सीजेएम देव कुमार खत्री ने सलमान खान को 5 साल कैद और 10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई गई। सलमान को हिरासत में लिया गया है, उन्हें जोधपुर जेल भेजा जाएगा। इस केस में सह आरोपी सैफ अली, तब्बू, सोनाली और नीलम को संदेह के लाभ पर बरी कर दिया गया है। पेशी के लिए ये सभी बुधवार को यहां पहुंच गए थे। मामला सितंबर-अक्टूबर 1998 का है। तब ये सभी फिल्म श्हम साथ-साथ हैंश् की शूटिंग के सिलसिले में जोधपुर में थे। सलमान खान और उनके साथियों पर 2 चिंकारा और 3 काले हिरणों (ब्लैक बक) के शिकार का आरोप लगा था। सलमान पर आर्म्स एक्ट के तहत भी केस दर्ज हुआ था।

सजा सुना रहे थे जज, दीवार के सहारे खड़े थे सलमान
- लंच के दौरान सलमान की दोनों बहनें कोर्ट रूम के बाहर गैलरी में फोन पर बात कर रही थीं। सलमान कुर्सी पर अकेले बैठे थे। 
- लंच के बाद जज डायस पर आए और सलमान खान कुर्सी से उठकर दीवार के सहारे खड़े हो गए। बहनें भी सलमान के साथ खड़ी हो गईं।
- जज ने सलमान खान को 5 साल कैद और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। फैसला सुनते ही उनकी दोनों बहनें रोने लगीं।
- विश्नोई समाज ने फैसले के बाद नारेबाजी की और बरी किए गए लोगों के खिलाफ अपील करने की बात कही।

सलमान की वजह से फिल्ममेकर्स के 385 करोड़ दांव पर
रेस 3ः 100 करोड़
भारतः 200 करोड़, शूटिंग शुरू होना बाकी है
दबंग 3ः 85 करोड़, शूटिंग शुरू होना बाकी है

जोधपुर जेल में ही बंद है आसाराम
सलमान खान को मेडिकल के बाद जोधपुर जेल ले जाया गया। इसी जेल में यौन शोषण का आरोपी आसाराम भी बंद है।

क्यों दोषी करार दिए गए?

1) हिरण शिकार के चारों केस में सबसे मजबूत था यह मामला
यह केस सबसे पुख्ता था, क्योंकि 1 अक्टूबर 1998 की रात जब इन बॉलीवुड स्टार्स ने कांकाणी में संरक्षित वन्य प्राणी दो काले हिरणों का शिकार किया था तो ग्रामीणों ने गोली की आवाज सुनकर उनका पीछा भी किया था। ग्रामीणों ने उन्हें मौके पर देखा था और हिरणों के शव भी वन विभाग को सुपुर्द किए थे। इस मामले में सलमान गोली चलाने के आरोपी बनाए गए।
शिकार से जुड़े बाकी के दोनों केस में इकलौता चश्मदीद हरीश दुलानी था, उसने भी बयान बदल लिए थे। उसने सलमान के अलावा दूसरे कलाकारों को पहचानने से इनकार कर दिया था। दूसरा कमजोर पक्ष यह भी था कि उसमें हिरणों के शव नहीं मिले थे।

2) दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई
कांकाणी केस में पहली रिपोर्ट डॉ. नेपालिया की थी। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, एक हिरण की मौत दम घुटने से और दूसरे हिरण की मौत गड्ढे में गिर जाने और श्वानों द्वारा उसे खाने से हुई थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि यह रिपोर्ट सही नहीं थी क्योंकि इसमें गन इंजरी की बात नहीं थी। इसके बाद मेडिकल बोर्ड बैठाया गया। बोर्ड ने दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दोनों काले हिरणों की मौत की वजह गन शॉट इंजरी ही बताई।

इस मामले में सलमान पर कितने केस, उनमें क्या हुआ?
कुल चार केस थे। तीन हिरणों के शिकार के और चौथा आर्म्स एक्ट का। दरअसल, तब सलमान के कमरे से उनकी निजी पिस्टल और राइफल बरामद की गई थीं, जिनके लाइसेंस की मियाद खत्म हो चुकी थी।

कहां और कब किए गए शिकार?
सलमान पर जोधपुर के घोड़ा फार्म हाउस और भवाद गांव में 27-28 सितंबर 1998 की रात हिरणों का शिकार करने का आरोप। कांकाणी गांव में 1 अक्टूबर को 2 काले हिरणों के शिकार करने का आरोप।

सैफ अली, नीलम, सोनाली और तब्बू क्यों आरोपी थे?
कांकाणी गांव शिकार मामले में गवाहों ने कोर्ट में बताया था कि गोली की आवाज सुनकर वे मौके पर पहुंचे थे। शिकार सलमान ने किया था। जीप में उनके साथ सैफ अली, नीलम, सोनाली और तब्बू भी थे। इन पर सलमान को उकसाने का आरोप था। गांव वालों को देखकर सलमान मारे गए हिरणों को वहीं छोड़कर गाड़ी लेकर चले गए थे।

एसटी-एससी एक्टः बवाल पर मोदी बोले- बाबा साहेब का जैसा सम्मान हमने किया, किसी और सरकार ने नहीं किया

नई दिल्ली। एससी-एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बदलाव के फैसले के बाद देश में दलित संगठनों की तरफ से बवाल मचा हुआ है. इस बीच आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि किसी अन्य सरकार ने बीआर अंबेडकर का उस तरह सम्मान नहीं किया, जैसा हमने किया है.

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘’बाबा साहेब जी के नाम पर सभी राजनीति करते हैं, लेकिन बाबा साहेब आंबेडकर को जितना मान सम्मान और श्रद्धांजलि हमारी सरकार ने दी है, उतना सम्मान किसी और सरकार ने कभी नहीं दिया. पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘’बाबा साहेब के नाम पर राजनीति करने के बजाए बाबा साहेब ने जो हमें रास्ते दिखाएं है, उन रास्तों पर चलने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए. बता दें कि पीएम मोदी का ये बयान ऐसे समय आया है जब इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार पीएम मोदी पर निशाना साध रहा है. 

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
वहीं दो अप्रैल को देश के कई राज्यों में फैली हिंसा पर बीजेपी ने ट्वीट करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा, आजादी के दशकों बाद तक कांग्रेस ने कभी बाबासाहेब को सम्मान नहीं दिया. बीजेपी का बाबासाहेब के प्रति समर्पण ही है कि सरकार में आते ही बाबासाहेब के जीवनकाल के पांच स्थलों को भव्य पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया गया. इसी सच्चे समर्पण से दलित वोटों के तथाकथित ठेकेदार बौखला गए हैं.’’

क्या है पूरा मामला
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने एसटी-एससी उत्पीड़न की शिकायतों में तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शिकायत की शुरुआती जांच करें. शिकायत की शुरुआती पुष्टि होने के बाद ही मामला दर्ज किया जाए. सुप्रीम कोर्ट के इसी आदेश के बाद दलितों ने दो अप्रैल को भारत बंद का ऐलान किया था.
दो अप्रैल को दलितों के भारत बंद आंदोलन के दौरान सैकड़ों की संख्या में भीड़ ने हिंसक प्रदर्शन किया. यूपी, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे ज्यादा हिंसा हुई. प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा  मौतें हुई. हिंसा के बाद से मध्य प्रदेश के कई इलाकों में अभी भी कर्फ्यू जारी है.

कांग्रेस- शाह जी, सीएम से मंत्री तक सब कमीशन खाते हैं, बीजेपी- नौटंकी के लिए इतने मत फैलो कि फट जाओ

रायपुर। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के रायपुर आगमन को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने अपने ट्विटर पर ट्वीट कर जोरदार तंज कसा है। बता दें कि जब से मीडिया में यह खबर आई कि अमित शाह रायपुर एयरपोर्ट पर भाजपा नेताओं की बैठक लेंगे तब से भाजपा विपक्ष के निशाने पर है। पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कर लिखा है कि-
‘अमित शाह जी रायपुर में आपका स्वागत है। उम्मीद है कि आज आप छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं को ‘जय शाह-जादा’ वाला बिजनेस मॉडल जरूर बताएंगे, क्योंकि आपके मुख्यमंत्री से लेकर कार्यकर्ता तक कमीशन बहुत ज्यादा खाते हैं।’
उन्होंने रीट्वीट कर लिखा कि ‘भाजपा को अगर मीटिंग के लिए जगह की कमी हो तो रायपुर के कांग्रेस भवन में @amitshah का स्वागत है। आपको वहां मीटिंग कक्ष भी मिलेगा और चाय-नाश्ता भी। कांग्रेस पार्टी को विमानपत्तन अधिनियम के नियमों की रक्षा के लिए एवं आम लोगों की सुविधा के लिए कक्ष देने से कोई गुरेज नहीं है।’
भाजपा का करारा पलटवार
भूपेश के ट्वीट पर भाजपा ने पलटवार करते हुए लिखा कि ‘नौटंकी के लिए अपने दिल को इतना मत फैलाओ कि फट जाए। वैसे भी आपका दिल बहुत छोटा है, जिसमें आपकी पार्टी के लोग ही नहीं रहते। दूसरी पार्टी के लोगों को क्या जगह देंगे।

 

फेक न्यूजः जिस पर दुनियाभर में मचा है बवाल...

नई दिल्ली। पिछले कुछ साल में फेक न्यूज को लेकर दुनियाभर में बवाल मचा है। खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार फेक न्यूज शब्द का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा भी नहीं है कि फेक न्यूज जैसा शब्द सिर्फ पश्चिमी जगत के मीडिया में ही हो। भारत में भी इसका इस्तेमाल खूब धड़ल्ले से होता है। दरअसल फेक न्यूज एक बड़ी समस्या है। जिसके तहत किसी की छवि को धूमिल करने या अफवाह फैलाने के लिए झूठी खबर पब्लिश की जाती है। ऐसी झूठी खबरों पर रोक लगाने की पहल दुनियाभर में चल रही है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। पहले जानते हैं फेक न्यूज क्या है...

क्या है फेक न्यूज
अगर आप मीडिया इंडस्ट्री से हैं या नजदीक से जुड़े हैं तो आप जानते ही होंगे कि फेक न्यूज क्या है। यह एक तरह की पीत पत्रकारिता (येलो जर्नलिज्म) है। इसके तहत किसी के पक्ष में प्रचार करना व झूठी खबर फैलाने जैसे कृत्य आते हैं। किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने या लोगों को उसके खिलाफ झूठी खबर के जरिए भड़काने को कोशिश फेक न्यूज है। सनसनीखेज और झूठी खबरों, बनावटी हेडलाइन के जरिए अपनी रीडरशिप और ऑनलाइन शेयरिंग बढ़ाकर क्लिक रेवेन्यू बढ़ाना भी फेक न्यूज की श्रेणी में आते हैं। फेक न्यूज किसी भी सटायर (व्यंग) या पैरोडी से अलग है। क्योंकि इनका मकसद अपने पाठकों का मनोरंजन करना होता है, जबकि फेक न्यूज का मकसद पाठक को बरगलाने का होता है।

दरअसल फेक न्यूज पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आईबी मिनिस्ट्री) ने सोमवार शाम पत्रकारों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों के तहत फेक न्यूज का प्रकाशन करने पर पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई। इसके तहत उनकी मान्यता को निलंबित और रद करने तक के प्रावधान थे। मंत्रालय की ओर से जारी इन दिशा-निर्देशों के खिलाफ मीडिया में माहौल बिगड़ता कि इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दिशा-निर्देशों को वापस लेने की बात कही। उन्होंने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह अपने दिशा-निर्देशों को वापस ले लें और इस मामले को प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया पर ही छोड़ दिया जाए।

लोकतंत्र की हत्या का प्रयास

इससे पहले दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित इस मामले में कूद पड़ीं। शीला ने आईबी मंत्रालय के सोमवार के दिशा-निर्देशों पर सवाल उठाते हुए फेक न्यूज की परिभाषा पूछी। उन्होंने कहा, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया पर प्रतिबंध लगाना लोकतंत्र की हत्या जैसा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, आज हम केवल ऐसी खबरें देखते हैं जो सरकार समर्थित हैं। भारत स्वतंत्र मीडिया में विश्वास रखता है और यह जारी रहना चाहिए।


क्या कहा गया था आईबी मंत्रालय की प्रेस रिलीज में
आईबी मंत्रालय ने सोमवार को जो प्रेस रिलीज जारी की थी, उसमें कहा गया कि प्रिंट व टेलीविजन मीडिया के लिए दो रेगुलेटरी संस्थाएं हैं- प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, यह संस्थाएं तय करेंगी कि खबर फेक है या नहीं। दोनों को यह जांच 15 दिन में पूरी करनी होगी। एक बार शिकायत दर्ज कर लिए जाने के बाद आरोपी पत्रकार की मान्यता जांच के दौरान भी निलंबित रहेगी। दोनों एजेंसियों द्वारा फेक न्यूज की पुष्टि किए जाने के बाद पहली गलती पर छह माह के लिए मान्यता रद की जाएगी, दूसरी बार में एक साल के लिए मान्यता रद हो जाएगी और तीसरी बार में स्थायी रूप से पत्रकार की मान्यता रद हो सकती है।

डिजिटल मीडिया में ज्यादा फेक न्यूज
हालांकि मंत्रालय ने जो दिशा-निर्देश जारी किए थे उसमें डिजिटल मीडिया की बात नहीं कही गई थी। लेकिन इससे पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी कह चुकी हैं कि सरकार डिजिटल मीडिया के लिए भी दिशा-निर्देश जारी करेगी। फेक न्यूज पर रोकथाम लगाने की कोशिशें वैश्विक स्तर पर जारी हैं। खासतौर पर डिजिटल मीडिया में फेक न्यूज को लेकर तमाम सरकारें अलर्ट हैं। माना जाता है कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने फेसबुक पर फेक न्यूज का इस्तेमाल कर लोगों का मत बदलने की कोशिश की थी। ऐसा ही कुछ भारत में भी होने का खतरा है। जो आने वाले दिनों में कई राज्यों व केंद्र सरकार के लिए होने वाले चुनावों पर असर डाल सकता है।

राहतः सस्ती हुई रसोई गैस, बगैर सब्सिडी 36 तो सब्सिडी पर 1.74 रू. की बचत

रायपुर। बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों के लिए राहत की खबर है. कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बाद तेल कंपनियों ने गैर सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कटौती कर दी है. गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में 36 रुपए और सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में 1.74 रुपए की कमी की गई है.

अब नोएडा, गाजियाबाद में नॉन सब्सिडाइज सिलेंडर की कीमत 649 रुपए हो गई है. दिल्ली में गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर का भाव 653.50 रुपए होगा. लखनऊ के उपभोक्ताओं को 724 रुपए में पड़ने वाला सिलेंडर 688 रुपए में मिलेगा.
रायपुर में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 721.50 रुपए हो गई है. वहीं सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 489.04 रुपए हो गई है. जबकि गाजियाबाद, नोएडा में सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 479 रुपए होगी.

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने कीमतें घटा दी हैं. 5 किलो के एलपीजी सिलेंडर पर भी 15 रुपए घटाए गए हैं. 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भी 54 रुपए की कटौती की गई है. बढ़ी हुई कीमतें 1 अप्रैल से लागू हो गई हैं.

इन शहरों में सब्सिडी वाले सिलेंडर की ये है नई कीमतें
दिल्ली- 491.35 रुपए

कोलकता- 494.33 रुपए

मुंबई- 489.04 रुपए

चेन्नई- 479.44 रुपए

गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर
14.2 किलोग्राम वाले गैर-सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत अब दिल्ली में 653.50 रुपए होगी, जबकि पहले ये 689 रुपए थी. वहीं इंदौर में गैर सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 713.50 रुपए से घटकर 677.50 रुपए हो गई है. कोलकाता में 676 रुपए, मुंबई में 625 रुपए और चेन्नई में 663.50 रुपए गैर सब्सिडी वाला सिलेंडर हो गया है. कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1267.50 रुपए से घटकर 1222.50 रुपए हो गई है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध, सडकों पर उतरे कई संगठन

रायपुर। शहर में सुबह 11 बजे तक का नजारा रोजाना की तरह ही था। वहीं 11 बजे के बाद एससीएसटी संगठन के लोग शहरभर में झंडे लेकर विरोध करते नजर आए । कुछ शहर के जय स्तंभ चौक पर जमा हुए तो कुछ ने पंडरी बस अंड्‌डे के पास चक्काजाम कर दिया। जिसके बाद बसों की लंबी कतारें लग गईं। राजधानी के पेट्रोल पम्प और सभी दुकानों को बंद करवा दिया गया| यह आन्दोलन कोई विकराल रुप न ले ले इसके लिए राजधानी पुलिस चप्पे चप्पे पर मुस्तैद है| इसके चलते पंजाब, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा में भी बंद का व्यापक असर है।

 

 

 

दशक के सबसे बड़े एनकाउंटर में 11 हिजबुल आतंकी ढेर, 50 हुए घायल

जम्मू-कश्मीर। अनंतनाग और शोपियां में सुरक्षाबलों ने आतंकियों पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है. तीन अलग-अलग जगह चले एनकाउंटर में अबतक कुल 11 आतंकियों को मार गिराया गया है. जबकि एक आतंकी ने आत्मसमर्पण कर दिया है. कश्मीर में इस दशक का ये अब तक का सबसे बड़ा एनकाउंटर है. जिसमें एक ही दिन इतने आतंकियों को ढेर किया गया है.

एनकाउंटर पर जम्मू-कश्मीर के डीजीपी ने एसपी वैद्य ने बताया है कि दो जगह ऑपरेशन खत्म हो चुका है, जबकि तीसरी जगह अभी भी जारी है. उन्होंने बताया कि अनंतनाग के एसएसपी ने परिवार वालों से बात कर उनके नौजवानों को आतंक का रास्ता छोड़ देने की भरपूर कोशिश की, लेकिन आतंकियों ने किसी की बात नहीं मानी.

उन्होंने बताया, हमने अनंतनाग में एक आतंकवादी को जिंदा गिरफ्तार किया है, जबकि एक की मौत हो गई है. पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के कुछ जवानों को भी चोट आई हैं.

शोपियां में 10 आतंकी ढेर

शोपियां के द्रागड गांव में 7 आतंकियों को ढेर किया गया है. जबकि दूसरे ऑपरेशन में शोपियां के काचदोरा में 3 आतंकियों को मारा गया है. इसके अलावा अनंतनाग के दयालगाम में 1 आतंकी सुरक्षाबलों की गोलियों का निशाना बना है. इस तरह तीन अलग-अलग जगह चल रहे एनकाउंटर में अब तक 11 आतंकियों को मारा जा चुका है.

नागरिक की मौत से गुस्सा

शोपियां में एनकाउंटर के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं. इसके अलावा साउथ कश्मीर के दूसरे इलाकों में भी माहौल संवेदनशील हो गया है. दरअसल, एनकाउंटर के दौरान 1 स्थानीय नागरिक की मौत की खबर है. साथ ही 50 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है. जिसके बाद इलाके के लोगों में भारी गुस्सा नजर आ रहा है.

बंद का ऐलान

इस घटना के बाद अलगाववादी नेताओं ने दो दिन का बंद बुलाया है. अलगावादियों के समूह जेआरएल ने आज और कल के लिए बंद बुलाया है. साथ ही लोगों से कामकाज छोड़कर आज शाम 4 बजे जनाजे की नमाज में हिस्सा लेने के भी कहा गया है.

शोपियां में मारे गए हिजबुल आतंकी

बताया जा रहा है कि शोपियां के दरागड़ गांव में मरने वाले सातों आतंकी हिजबुल मुहाजिदीन से जुड़े थे. इनमें से चार की पहचान यावर इट्टू, आदिल ठाकुर, नाजिम नजीर डार और ओबैद शफी के रूप में की गई है. बाकी तीन की शिनाख्त अभी नहीं हो पाई है.

अनंतनाग में भी मुठभेड़

जम्मू पुलिस के मुताबिक, खुफिया जानकारी मिलने के बाद अनंतनाग पुलिस थाना क्षेत्र के डायलगाम इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया. सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेर लिया और उनसे आत्मसमर्पण के लिए कहा गया. इस दौरान एक आतंकी के परिवार ने भी उसे सरेंडर करने के लिए मनाने की कोशिश की. जिसके बाद उसने खुद को सुरक्षाबलों के हवाले कर दिया और उसे हिरासत में ले लिया गया.

वहीं, दूसरे आतंकी ने सुरक्षाबलों की अपील नहीं मानी और वो फायरिंग करता रहा. जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भी फायरिंग की और आतंकी को ढेर कर दिया.

4 जवान घायल

इन दोनों घटनाओं में 4 जवान भी घायल हुए हैं. एक जवान अनंतनाग में और तीन जवान शोपियां में घायल हुए हैं.

रेलवे सेवा और इंटरनेट बंद
एनकाउंटर के बाद साउथ कश्मीर में रेल सेवा बंद कर दी गई है. रेलवे अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर से बानिहाल के बीच आज रेल बंद रहेगी. जबकि श्रीनगर से बारामूला के बीच निर्धारित समय के तहत ही रेल चलेगी. वहीं, घाटी में इंटरनेट पर बैन लगा दिया गया है.

भागलपुर हिंसाः केंद्रीय मंत्री के बेटे अर्जित को 14 दिन की जेल, रघुवंश बोले- पहले होनी चाहिए थी गिरफ्तारी

भागलपुर। बिहार में भागलपुर के नाथनगर हिंसा मामले में आरोपी बनाये गये केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे एवं भाजपा नेता अर्जित शाश्वत चौबे को आज 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. बिहार में पिछले कुछ दिनों से सियासत का केंद्र रहे अर्जित शाश्वत को शनिवार देर रात गिरफ्तार किये जाने के साथ ही रविवार को पुलिस उन्हें पटना से नवगछिया के रास्ते भागलपुर पुलिस लेकर पहुंची. यहां उन्हें एसीजेएम-7 एआर उपाध्याय के समक्ष भागलपुर के लालबाग स्थित जज कॉलोनी स्थित आवास में पेश किया गया. इसके बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. अर्जित को भागलपुर के कैंप जेल में ले जाया गया है. 

पटना से जैसे ही अर्जित को लेकर पुलिस की टीम ने विक्रमशिला सेतु को पार किया, भाजपा कार्यकर्ताओं ने टोल टैक्स वैरियर के पास उन्हें रोक दिया और हंगामा करने लगे. लेकिन, पुलिस अर्जित को लेकर आगे निकल गयी. पुलिस को इससे पहले भी विरोध का सामना करना पड़ा. भाजपा के कई नेता जेल के सामने खड़े हैं. जज आवास के पास पुलिस की तैनाती कर दी गयी है.

उधर, अर्जित शाश्वत की गिरफ्तारी पर राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा, कानून ने अपना काम किया, ये गिरफ्तारी पहले होनी चाहिए थी. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, अर्जित शाश्वत की गिरफ्तारी हुई या समर्पण हुआ, ये बताना पुलिस का काम है.

वहीं, अर्जित शाश्वत प्रकरण पर भागलपुर एसएसपी मनोज कुमार ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी के लिए पांच टीमें बनायी गयी थीं. हमें अर्जित की गतिविधि की सूचना मिली और सर्विलांस पर हमें उनकी योजना मालूम हुई. जिसके आधार पर अंततः पटना स्टेशन के गोलंबर के पास हमने उन्हें गिरफ्तार किया. भागलपुर एसएसपी ने कहा कि अर्जित शाश्वत के खिलाफ एफआइआर दर्ज है. कोर्ट ने भी उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. एसएसपी ने कहा कि उनके खिलाफ पुख्ता प्रमाण हैं. शहर में 250 कैमरे लगाये गये हैं. अर्जित शाश्वत को आज मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जायेगा. वहां भी आधे दर्जन कैमरे लगाये हैं. शहर में सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था है.

इससे पहले गिरफ्तारी के बाद अर्जित शाश्वत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने पुलिस के सामने सरेंडर किया. इस दौरान महावीर मंदिर के बाहर अर्जित शाश्वत के समर्थक जय श्रीराम के नारे लगाते रहे. उन्होंने कहा कि भागलपुर के नाथनगर में शोभायात्रा निकाली गयी थी. शोभा यात्रा के डेढ़ घंटे बाद हमें सूचना मिलती है कि वहां घटना घटी है. फिर दो दिन बाद एफआइआर दर्ज की जाती है. प्रशासन ने अपनी विफलता का ठिकरा मेरे सर पर फोड़ने का काम किया है. 

उधर, पटना पुलिस का साफ तौर पर कहना है कि अर्जित शाश्वत को गिरफ्तार किया. पुलिस शाम से ही अर्जित के मोबाइल फोन को ट्रैक कर रही थी. बाद में पटना पुलिस अर्जित शाश्वत को लेकर गांधी मैदान थाना पहुंची. जहां करीब डेढ़ घंटे तक अर्जित शाश्वत को रखा गया, फिर अर्जित शाश्वत को भारी सुरक्षा के साथ भागलपुर के लिए रवाना किया गया. 

गौर हो कि अर्जित शाश्वत की अगुवाई में एक जुलूस के दौरान तेज संगीत बजाये जाने पर कुछ लोगों की आपत्ति के बाद 17 मार्च को भड़की सांप्रदायिक हिंसा को लेकर भागलपुर के नाथनगर थाने में दो एफआइआर दर्ज करायी गयी थी. इन एफआइआर में से एक में शाश्वत के अलावा आठ अन्य लोगों का नाम था. हिंदू कैंलडर के मुताबिक, नये साल के उपलक्ष्य में कथित तौर पर बिना अनुमति के यह जुलूस निकाला जा रहा था. संघर्ष में दोनों तरफ से पत्थरबाजी, आगजनी और गोलीबारी की घटना में दो पुलिस कर्मियों सहित कई लोग घायल हो गये थे. इस मामले में अर्जित शाश्वत की अग्रिम जमानत भागलपुर कोर्ट ने शनिवार को ही खारिज कर दी थी.

कहाँ लापता हुए नगर निगम कमिश्नर रजत बंसल... चस्पा हुए गुमशुदगी के पोस्टर

रायपुर | आपको यह सुन कर आश्चर्य तो जरुर हो रहा होगा कि रायपुर नगर निगम के कमिश्नर रजत बंसल लापता हैं | रायपुर के वाइट हाउस में जगह-जगह पर गुमशुदगी के यह पोस्टर लगाए गए हैं | ये पोस्टर इस तरीके से लगाए गए हैं मानो सच में निगम कमिश्नर गुमशुदा हो गए है | बकायदा इस पोस्टर में अपील भी की गई है की – प्रिय आयुक्त महोदय, आपसे निवेदन है कि शहर की व्यवस्था ठप पड़ी है लोग बीमार हो रहे पीलिया से मर रहे हैं आप जल्दी आ जाइए आप से कोई कुछ नहीं कहेगा | वहीं पोस्टर में निवेदक की जगह लिखा गया है – मरता रायपुर और बेहाल होते रायपुर वासी | आपको बता दें कि रजत बंसल इन दिनों ताइवान की अधिकारी की यात्रा पर गए हुए हैं, लेकिन वे जिस वक्त विदेश यात्रा पर हैं ठीक उसी वक्त रायपुर शहर में पीलिया की चपेट में है | वहीं आरटीआई कार्यकर्ता कुनाल शुक्ला ने इसका विरोध करते हुए कहा है की उन्हें इस समय रायपुर वापस आ जाना चाहिए था |