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पढ़ने के लिए जुनून होना चाहिए सफलता आपके कदम चूमेगी -हेमंत जायसवाल..... MBBS की परीक्षा में शानदार नम्बरो से पास होकर बढ़ाया क्षेत्र का मान

जांजगीर चांपा :-जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर डभरा ब्लॉक के साराडीह का होनहार हेमंत जायसवाल एमबीबीएस के फाइनल परीक्षा में शानदार नंबर अर्जित कर क्षेत्र के साथ-साथ जिले का भी नाम रोशन किया है। हेमंत जायसवाल मध्यम वर्गीय परिवार होने के बावजूद का भी आगे बढ़ने को लेकर हिम्मत नहीं हारी और सन 2014 बैच में एमबीबीएस की प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चयन होकर रायगढ़ में स्थित स्व लखीराम मेडिकल कॉलेज दाखिला होकर अपनी पढ़ाई शुरू की और 25 मार्च को एमबीबीएस फाइनल ईयर की रिजल्ट जवाई जिसमें शानदार नंबरों से पास होकर क्षेत्र के साथ-साथ जिला का नाम रोशन किया। वहीं हेमंत जायसवाल ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और अपने गुरुजनों के साथ साथ अपने बड़े भाई को दिया आपको बता दें कि हेमंत जायसवाल जिले के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जनर्लिस्ट एवं समलेश्वरी हॉस्पिटल के संचालक हुमेश जायसवाल के छोटे भाई हैं।

पढ़ने के लिए जुनून होना चाहिए सफलता आपके कदम चूमेगी

हालांकि मैं मध्यम वर्गीय परिवार से हूं पर्याप्त संसाधन नहीं था और मैं हिंदी मीडियम का छात्र था लेकिन भैया जब मेडिकल की पढ़ाई करने रायपुर गए थे तब उनसे मुझे प्रेरणा मिली भैया मुझे हमेशा कहते थे कि मैं तुझे डॉक्टर के रूप में देखना चाहता हूं और भैया की यह बात मुझे भाग गई पर मन में जुनून था कि मैं डॉक्टर बनूंगा फिर मैंने पीएमटी की तैयारी की जिसके बाद मेरा चयन रायगढ़ में स्थित स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज में हुआ शुरू शुरू में तो मुझे हिंदी मीडियम होने के कारण समझने में थोड़ा दिक्कत होता था क्योंकि मेडिकल की पढ़ाई इंग्लिश मीडियम में होती है लेकिन मैंने हार नहीं मानी और बिना किसी रूकावट के मैं आगे बढ़ते गया और फाइनली अब मैं एमबीबीएस कंप्लीट कर लिया मैं सभी प्रतियोगी परीक्षा के लिए तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को कहना चाहूंगा कि अपने लक्ष्य पर ध्यान देवें कंसंट्रेट होकर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए मेहनत करें तो सफलता उन्हें जरूर मिलेगी। हेमंत जायसवाल (मेडिकल छात्र)

छत्तीसगढ़ कलार महासभा के महाअध्यक्ष विजय जायसवाल के नेतृत्व में निरन्तर आगे बढ़ रहा कलार समाज

रायगढ़:- छत्तीसगढ़ कलार महासभा के महाअध्यक्ष विजय जायसवाल के नेतृत्व में निरन्तर कलार समाज आगे बढ़ रहा है। यू कहे तो विजय जायसवाल कलार समाज में उस धागे के समान है जो एक माला सभी मोती को सजो के रखते हैं। 14 मार्च को हुए कलार महोत्सव एवं सम्मान समारोह का आयोजन सिद्धेश्वर नाथ धाम बरगढ़ में भव्य रूप से हुआ हुआ इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री उमेश पटेल एवं आसपास के क्षेत्रीय विधायक कार्यक्रम में शामिल हुए इस कार्यक्रम में विजय जायसवाल का विशेष योगदान रहा। आपको बता दें कि कलार समाज एक वक्त ऐसा था जिसमें तमाम सामाजिक कुरीतियां पनप रहे थे मगर विजय जायसवाल द्वारा महा अध्यक्ष बनने के बाद सभी सामाजिक कुरीतियों पर लगाम लगाते हुए समाज को एक नई दिशा की ओर ले जा रहे हैं। वर्तमान की बात की जाए तो बरगढ़ में कलार समाज द्वारा भव्य भगवान सहस्त्रबाहु का मंदिर स्थापित हो रहा है, वहीं समाज की गतिविधि को जन जन तक पहुंचाने के लिए कलार महासभा का मोबाइल एप भी लॉन्च हो चुका है। वहीं विजय जायसवाल का कहना है कि समाज को आगे ले जाने के लिए हर वर्ग के लोगों की सहयोग जरूरी है तभी समाज आगे बढ़ पाएगा साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि समाज के बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद के बगैर कुछ भी संभव नहीं है।

"बस इतना साथ देना तुम"- महिला दिवस विशेष

जब कभी मैं गिर जाऊँ तो मुझे सहारा मत देना, मेरे खुले पंखो को यूँ ही छोड़ देना, अपेक्षाओं की बाण से ज़ख़्मी ना कर देना तुम, दूर खड़े रहना मेरा हौसला बड़ा देना तुम।।।एक बस इतना साथ देना तुम.... वो जो ममता के आँचल में छुपाया था तुमको, जिसकी छांव में लोरी गाकर सुलाया था तुमको, मेरे संस्कार को नीचा ना दिखाना तुम, हारकर मौत को गले ना लगाना तुम।।।एक बस इतना साथ देना तुम... मेरी सूरत नहीं सीरत देखो, मेरी ना को सिर्फ़ ना देखो, प्रेमिका हूँ इश्क़ की कसक देखो, तेज़ाब डालकर या बलात्कार कर अपने पुरुषार्थ को ना खोना तुम।। एक बस इतना साथ देना तुम.... है राखी की क़सम तुमको, वो रोली की सौगंध तुमको,है बहन का आशीर्वाद तुमको, किसी का दिल ना तोड़ना तुम।।।एक बस इतना साथ देना तुम.. साथी बनकर साथ निभाऊँगी तुम्हारा, टूट कर चाहूँगी, रखूँगी सदा मान तुम्हारा।।।ऊँची आवाज़, लहराते हाथ, अभद्र शब्दों में अपने वजूद को ना खोना तुम।।। एक बस इतना साथ देना तुम.... लक्ष्मी रूप में आऊँगी, सरस्वती रूप में बढ़ती जाऊँगी, तुम जनक की तरह विदा करना मैं सीता की तरह देहरी छोड़ चली जाऊँगी, पर कोख में ही ना मसलना तुम।।। एक बस इतना साथ देना तुम..... ...कामायनी...

नरवा घुरवा गरुवा बारी कितनी होगी सार्थक पहल सरकारी,

 धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान बतौर धरा का सम्मान है जिसकी संपूर्ण जीवन शैली खेत खलिहान नदिया तालाब कोला बारी और गाय भैंस बैल पशु धन के रुप मे है किन्तु कटु सत्य यह है कि बदलते समय के साथ राज्य के पहचान की भरपूर उपेक्षा हुई, बेरोजगारी से कभी अंजान यह राज्य आज इन्ही आयामों की उपेक्षा की वजह से खाली हाथ और मुंह ताकता नजर आ रहा है रोजगार के नाम पर महज सरकारी नौकरी एवं उद्योगों की मोहताज बन चुके छत्तीसगढ़ मे युवाओं को छलावा के सिवाय कुछ नही मिल रहा है और धीरे धीरे यह परिस्थिति यहां की नियति बनती जा रही है ऐसी बात नही है कि इस दिशा मे प्रयास नही हुए है किन्तु यह प्रयास इस शैली मे रही कि बचा खुचा लगाव भी खत्म हो गया,
 
मुआवजा और मुनाफाखोरी
 खेती के उन्नयन के नाम पर अब तक केवल मुआवजे एवं खैरात का ही प्रावधान बना है कभी भी कृषि को वैश्विक पटल पर सम्मान जनक स्थान दिलाने की कोशिश नही हुई  जिसके चलते अधिक फसल हुई तो पानी के भाव उपज बिकने और कम फसल हुई तो अभाव का रोना आज भी बरकरार है उसी तरह प्रमुख पशुधन के लिए सरकार की नीति गायों के मौत की वजह बनती गयी और दर्दनाक कारण बनी गौसेवा मे भ्रष्टाचार और मुनाफाखोरी की प्रवृत्ति का चलन,
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समाज मे पड़ा दुष्प्रभाव 
सरकार की इस अव्यवस्थित नीति का प्रभाव समाज पर भी पड़ा क्योंकि इन कार्यों मे लगे हुए लोगों का अपना प्रभामंडल था और जैसे कि भगवान श्रीकृष्ण ने गीता मे कहा है कि प्रभावशाली का अनुकरण समाज करता है बस उसी तर्ज पर कृषि और गाय उपेक्षित होती गयी तथा ऐनकेन प्रकारेण धन प्राप्ति की अभिलाषा बलवती होती गयी तथा गायों की दुर्दशा पर दुख व्यक्त करने का भाव भी लोपित होता गया, अभी कुछ समय पूर्व भाटापारा के ग्राम कोदवा गौशाला मे लगभग 185गायों की मौत मे भाटापारा जैसे धार्मिक आयोजनों के शहर मे गहन चुप्पी इसका ज्वलंत उदाहरण है
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सरकार पर उठते सवाल
 भाटापारा क्षेत्र मे हुई गायों की मौत का दर्दनाक हादसा एक तरह से छत्तीसगढ़ की ग्राम्य विथा को गहरा आघात पहुँचाने वाली घटना है उस पर सभी की चुप्पी तथा सरकार की इस दिशा मे उदासीनता सीधे तौर पर सरकार की भावी योजनाओं पर सवाल खड़ा करती है कि छत्तीसगढ़ की पहचान कहे जाने वाले नरवा घुरवा गरुवा बारी जैसी मर्म भरी योजनाओं के साथ सरकार कितना न्याय कर पायेगी जबकि माहौल सीधे इसके उलट है|, बजट की समीक्षा के दौर मे कडार के किसान संतोष सेन जैसे कई लोगों द्वारा इसी तरह का सवाल उठाया गया कि क्रियान्वयन मे कितनी सुचिता बरती जाएगी जिसका सीधा तौर पर यही मतलब है कि पूर्व मे इस तरह की योजनाओं का बुरा हश्र क्रियान्वयन मे खामी और पारदर्शिता के अभाव के चलते हुआ था इसी कड़ी मे जनमानस की पुनः मांग है | कि इस दिशा मे गंभीरता एवं पर्याप्त संवेदना की आवश्यकता है और कोदवा जैसी घटनाओं मे शिथिलता एक तरह से उन्ही हौसलों को बुलंद करेगी जो इसमे सेवा नही महज लाभ देखतें है और उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते है भले ही उस विधा की दुर्गति हो जाये, इसलिए इस पर लगाम कसने ऐसी घटनाओं पर त्वरित तत्परता एवं कठोर कार्यवाही की दरकार है जिससे समाज मे यह संदेश जाए की छत्तीसगढ़ की अस्मिता कितनी अहम है वरन इसके अभाव मे योजनाओं का खेल चलता रहेगा और ढाक के तीन पात की दशा बरकरार रहेगी|

स्थानीयता पर उपेक्षा पूर्ण रवैया बरत रहीं सीमेंट फैक्ट्रियां

भाटापारा  दिनों दिन कृषि का घटता रकबा लाभकारी व्यवसाय के रुप मे चूकती खेती आज भी छत्तीसगढ़ मे बहुसंख्य आबादी की जीविका का आधार है छत्तीसगढ़ ही एक ऐसा राज्य है जहां निम्न से निम्न आर्थिक स्थिति वालों के पास भी थोड़ी न थोड़ी जमीन है इसीलिए आर्थिक मर्म के जानकार मानते है कि यदि इस राज्य मे खेती के लिए ठोस कवायद की जाये तो छत्तीसगढ़ के दिन बहुरते देर नहीं लगेगी किन्तु दुर्भाग्य इस राज्य मे कृषि मसले पर मुआवजे और खैरात से आगे बात नही बढ़ती और यही कमजोर कड़ी धीरे धीरे कृषि को निगलने का कारक साबित हो रही है पैसे पर टिकी राज्य की कृषि अवधारणा का भरपूर लाभ उठाते हुए उद्योग मनमाने पैसे का लालच देते हुए तेजी से कृषि भूमि हडप रहीं है और व्यवस्था मूकदर्शक बनी हुई एक तरह से उद्योगों के हौसलाअफजाई का ही कार्य कर रहीं है
 नही बख्शे जा रहे उर्वरा भूमि
भाटापारा बलौदा बाजार जिले मे लगभग आधा दर्जन सीमेन्ट फैक्ट्रियां संचालित है जो अधिकतर बलौदा क्षेत्र मे स्थापित हैं गांव वालों से रुबरु होने पर वहां की पीड़ा स्पष्ट रुप से झलकती है और यह पीड़ा उर्वरा भूमि भी सीमेंट संयंत्रों मे कुर्बान होने एवं जमीन जाने के बाद भी ढंग से मुआवजा नही मिलने एवं रोजगार नहीं मिलने के रुप मे नजर आती है, क्षेत्रीय ग्रामीणों का कहना है कि अर्थाभाव के चलते बहुत सारे किसान अपनी नहर अपासी की उर्वरा भूमि को बेचने के लिए मजबूर हुए और संयंत्रों का वादा था कि परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा किन्तु आज पर्यन्त संयत्र इस मसले पर पूरी तरह खरा नही उतर पायी है आये दिन विरोध प्रदर्शन के बाद भी उद्योगों की गतिविधियों मे कोई बदलाव नही और बकायदा बाहर से कामगार लाकर धडल्ले से स्थानीयता की धज्जियां उड़ाई जा रही है
सतत संवेदना का अभाव
चुनाव के समय गरीब मजदूर किसान की स्तुति एवं उनकी पीड़ा मे जमकर साहनुभूति का इजहार करते हुए तरह तरह की सब्जबाग दिखाने वाले राजनैतिक दलों के प्रति आक्रोश अभिव्यक्ति करते हुए जनमानस का यही कहना है कि यह संवेदना सतत क्यों नही रहती क्यों चुनावों के बाद यह भावना बिसरा दी जाती है और उद्योगों को मनमानी की खुली छुट दे दी जाती है जिसके चलते आज राज्य की किसानी दिनों दिन हाथ से फिसलती हुई लोगों को बेरोजगार करती हुई बाहर राज्यों मे काम ढूंढने को मजबूर कर रही है,वर्ष दर वर्ष बढ़ रहे पलायन के आंकड़े खेती छिनने एवं रोजगार नही मिलने की  कहानी कह रहें है,
 क्रांति सेना से उठती आवाज
 संपन्न हुए विधानसभा सभा चुनाव मे प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भ्रष्टाचार व्यवस्था गत विकास एवं आउटसोर्सिंग जैसे कुछ अहम जन संवेदना के मुद्दों को लेकर चुनाव मे उतरी जिसे जनता ने हाथों हाथ लिया और भारी बहुमत से विजयी बनाया, अब उन वादों को पूरा करने की बारी है जिस पर सरकार की गतिविधि प्रतिबद्धता की भी नजर आ रही है किन्तु स्थानीयता के मुद्दे पर किसी भी शुरुवात की भनक नही लगने पर जनता के बीच सवालों का दौर शुरू हो रहा है जिसकी संवेदना महसूस कर स्थानीय भावनाओं की प्रखर पैरोकार संगठन छत्तीसगढिया क्रांति सेना मे हलचल शुरू होती जान पड़ रही है और अंदाजा लगाया जा रहा है कि क्रांति सेना जनभावनाओ की मांग कृषि योग्य भूमि का संरक्षण एवं स्थानीय लोगों को रोजगार तथा जिनकी भूमि उद्योगों द्वारा ली गयी है उन्हें पर्याप्त मुआवजा और रोजगार जैसे मसले पर जनता की आवाज बन कर व्यवस्था तक यह पीड़ा पहुँचाएगी, अब देखना यही है कि आगे आगे क्या होता है वैसे नयी सरकार की सक्रियता के आधार पर जनमानस मे आशाएँ अपार है

भाटापारा में मोहल्ले से लेकर कालोनियों तक अपराधों की धमक

हवा चलती है तो वह जैसी फिजा होती है वैसा महक बिखेरती है बाग के पास चलती हुई हवा गर खुशबू का माहौल बनाती है तो सडांध के पास से गुजरी हवा बदबू का कारक बनती है कुछ ऐसा ही वातावरण अभी व्यवस्था मे नजर आ रहा है जहां कानून व्यवस्था की शिथिलता भाटापारा मे एक तरह से अपराधों की दुर्गन्ध बिखेर रही है और जनमानस हलाकान सा हुआ इससे निजात की बाट जोह रहा है _________________________ अपराध दर अपराध की कड़ी सामान्यतः शांत क्षेत्र मे गिनती होने वाले शहर मे कुछ वर्षों से अपराध मे बढोत्तरी का नजारा देखने मे आ रहा है और निरंतर घट रहे विविध अपराधों मे आम जन से लेकर प्रभावशाली तबका तथा मोहल्ले से लेकर कालोनियों तक अपराधों की धमक दिखाई दे रही है जिससे सारा शहर एक तरह से अपराधिक पीड़ा से परेशान नजर आ रहा है नित नयी घटती अपराधिक घटनाओं मे चोरी मारपीट हत्या जैसे जघन्य अपराधों के अलावा अपहरण जैसी घटनाओं के घटने से एक तरह से क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर सवाल उठना शुरू हो गया है कि जिस हौसले से अपराधी अपराध की विविधताओं को अंजाम दे रहे हैं उतनी ही उदासीनता से प्रशासन यह नजारा देखने को क्यों मजबूर है _________________________ चूकती व्यवस्था बढ़ती व्यथा जुआ सट्टा अवैध शराब की बिक्री जैसे घातक असमाजिक आचरण क्षेत्र मे घटने के बजाय निरंतर प्रगति पर हैं और यदाकदा इस पर कड़ाई के अलावा इसके उन्मूलन के लिए अब तक ठोस कदम नही उठाया जाना जिसके चलते इससे जुड़े पूरक अपराधों को एक तरह से संरक्षण प्राप्त हो रहा है वहीं यह अपराधियों के लिए हौसले का कारक साबित होते हुए दुस्साहसिक अपराधों को अंजाम देने की पृष्ठभूमि बन रहें है विधायक के गाड़ी को लूटने एवं कृष्णा सिटी जैसे पाॅश कालोनी जहां जज एवं बड़े बड़े प्रशासनिक अधिकारियों का निवास स्थान है वहां भी चोरी की घटना इसका ज्वलंत उदाहरण है और यह पुष्टि है कि किस तरह अपराधियों के हौसले बुलंद है और व्यवस्था किस हद तक चुकी हुई तथा लाचार नजर आ रही है _________________________ नयी सरकार आशाएं अपार ढांचागत विकास मे कीर्तिमान बना चुकी पूर्ववर्ती सरकार के संबंध मे जनमानस का कथन है कि उनका विकास एक पक्षीय था जिसके तहत महज ढांचा निर्माण को तवज्जों दी गयी और व्यवस्था गत विकास की भरपूर उपेक्षा हुई जिसके चलते अस्पताल स्कूल अन्य सुविधाओं के ढांचों का भरपूर निर्माण हुआ किन्तु वहां व्यवस्था सुचारु नही हो पायी और इस नीति का दंश भाटापारा को भी झेलना पड़ा सुविधा विहिन अस्पताल और अभाव ग्रस्त विद्यालय इसका ज्वलंत उदाहरण है इस व्यवस्था विहिन विकास की हवा चहुंओर अव्यवस्था की फिजा का निर्माण कर गयी कानून व्यवस्था की लचरता भी इसी व्यवस्था हीनता का प्रतीक है चूँकि नयी सरकार का गठन भी भ्रष्टाचार और व्यवस्था के मुद्दे पर हुआ है और इस विधा मे उनकी बड़ी बड़ी घोषणाएं भी है जिसके चलते जनमानस को आस है कि अब संपूर्ण विकास का दर्शन होगा और व्यवस्था मे कसावट के दर्शन होंगे अब देखना यही है कि भाटापारा समेत संपूर्ण राज्य की व्यवस्था गत फिजा बदलेगी या समस्या वहीं खड़ी रह जाएगी

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- परम धर्म संसद में ऐलान - 21 फरवरी से शुरू होगा राम मंदिर का निर्माण, 4 शिलाएं ले जाएंगे अयोध्या ।।

ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता में संपन्न हुई तीन दिवसीय परम धर्म संसद के आखिरी दिन राम मंदिर निमार्ण के शिलान्यास पूजन का धर्मादेश जारी किया गया। परम धर्म संसद के सभी सांसदों, साधु, सन्त, महात्माओं ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि 21 फरवरी से राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा तथा 4 शिलाएं लेकर साधु-संत अयोध्या जाएंगे। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्य प्रतिनिधि व क्रांतिकारी सन्त दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा - मंदिर तोड़ने वाली सरकार राम मंदिर का निर्माण नहीं करा सकती है। इसलिए हम 21 फरवरी को अयोध्या में भगवान राम के भव्य राम मंदिर का शिलान्यास करेंगे। बसंत पंचमी (10 फरवरी 2019) के बाद संत प्रयागराज से अयोध्या के लिए कूच करेंगे।  शंकराचार्य महाराज ने कहा कि मंदिर बनाने में समय लगता है , लेकिन अगर प्रारम्भ नहीं होगा तो कभी नहीं होगा।  धर्म संसद में संतों ने कहा - "हम कोर्ट और और प्रधानमंत्री का सम्मान करते हैं। हम चार शिलाएं लेकर आयोध्या जाएंगे"। संतों ने यह भी कहा कि शंकराचार्य महाराज हमारे नेता है और उन्हीं का नेतृत्व हमें स्वीकार है। स्वामीश्री ने कहा कि जिस तरह सिखों के गुरु गोविंद सिंह ने देश के करोड़ों हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना बलिदान दिया था, ठीक उसी तरह महाराजश्री जगदगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सबसे आगे चलते हुए नेतृत्व करेंगे।  स्वामीश्री ने आगे कहा कि हम किसी कानून का उलंघन नहीं कर रहे हैं। चार लोग चलने से कोई कानून नहीं टूटता। जिस तरह अंग्रेजों के नमक का कानून को तोड़ने के लिए दांडी मार्च किया गया था, ठीक उसी तरह शंकराचार्य महाराज ने रास्ता दिखाया है। हम भगवान राम के मार सहेंगे, क्योंकि वह भगवान का प्रसाद होगा।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::-  इंजी. शैलेन्द्र शुक्ला छग पाॅवर कंपनीज के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किये।  ????विद्युत विकास के मामले में छत्तीसगढ़ को अग्रणी रखना होगी मेरी प्राथमिकता - शैलेन्द्र शुक्ला।।

इंजी. शैलेन्द्र कुमार शुक्ला को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज का अध्यक्ष नियुक्त किया गया जिसका आदेश 28 जनवरी 2019 को देर शाम जारी हुआ। सोलर मैन के रूप के ख्याति प्राप्त वरिष्ठ अभियंता शैलेन्द्र शुक्ल आज 29 जनवरी 2019 को पूर्वान्ह अपना पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण करने के पश्चात सोलर मैन शैलेन्द्र शुक्ल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी की मंषानुरूप ‘‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘‘ को बिजली के बूते साकार करना और राज्य शासन के रीति नीति के अनुरूप विद्युत विकास के मामले में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाये रखना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। नई पदस्थापना के पूर्व इंजी. शैलेन्द्र शुक्ला हरियाणा राज्य नवीकरण ऊर्जा एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। नवनियुक्त अध्यक्ष इंजी. शुक्ला को आज विद्युत सेवा भवन में पाॅवर कंपनीज के प्रबंध निदेषक श्रीमती तृप्ति सिन्हा, के.आर.सी. मूर्ति सहित डाॅयरेक्टर जी.सी. मुखर्जी, एच.आर.नरवरे, ओ.सी.कपिला, अजय दुबे, महाप्रबंधक एम.जेड. रहमान एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी तथा विभिन्न श्रमिक संघ-संगठनों के प्रतिनिधियों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दिए। विदित हो कि 05 फरवरी 1960 को बिलासपुर में श्री हरिभूषण शुक्ला के परिवार में सोलर मैन शैलेन्द्र शुक्ला का जन्म हुआ। आपने स्कूली शिक्षा के साथ ही ग्यारहवीं की परीक्षा बिलासपुर से उत्र्तीण करने के उपरांत इंजीनियरिंग कालेज जबलपुर से बी.ई.(गोल्ड मेडलिस्ट) की उपाधि प्राप्त की है। शैलेन्द्र शुक्ल बीते 37 वर्ष के अपने सेवाकाल में वल्लभ भवन भोपाल में ओ.एस.डी. के पद सहित जबलपुर, जगदलपुर, रीवा, सतना में विभिन्न पदों पर तथा छत्तसीगढ़ गठनोपरांत मंत्रालय में ओ.एस.डी. के पद पर  अपनी सफलतम सेवायें दी है। शैलेन्द्र शुक्ला राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के डायरेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर 16 वर्षों तक सेवायें दी है और उनके उत्कृष्ट सेवा , निष्ठा और कार्यकुशलता के आधार पर शैलेन्द्र शुक्ल को छत्तीसगढ़ के सोलर मैन के रूप में ख्याति मिली। शैलेन्द्र शुक्ल न केवल छत्तीसगढ़ अपितु समूचे भारत वर्ष में सोलर पावर के ऊपर किये गए उत्कृष्ट कार्यों हेतु पहचाने जाने लगे। क्रेडा में रहते हुए उनके योगदान, कार्यकुशलता के आधार पर विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये। रायपुर में निर्मित विषालकाय ऊर्जा पार्क में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। उनके कार्य के प्रति निष्ठा एवं लगन के बूते आगे बढ़ते हुये हरियाणा में दो वर्षों तक हेरेडा के अध्यक्ष पद पर सोलर मैन शैलेन्द्र शुक्ला ने अपनी सेवाएं दी है।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- 70 वें गणतंत्र दिवस पर नितिन भंसाली ने 65 वीं बार रक्तदान किया।।

26 जनवरी 2019 भारत के 70 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर केयरिंग हेड्स फाउंडेशन द्वारा राजधानी के श्री नारायणा हॉस्पिटल में आयोजित रक्तदान शिविर में बतौर अतिथि नितिन भंसाली शामिल हुए तथा उन्होंने अभी तक अपने जीवन का 65 वां रक्तदान किया। इस विशेष दिन पर युवा राजनेता तथा जेसीसीजे के वरिष्ठ प्रवक्ता नितिन भंसाली ने उपस्थित लोगों को रक्तदान के फायदे के बारे में बताते हुए उनका हौसला बढ़ाया साथ ही इस सफल आयोजन के लिए केयरिंग हैंड्स फाउंडेशन की पूरी टीम ओर मित्रों को शुभकामनाएं दिए। ऐसा बहुत कम देखा जाता है कि कोई व्यक्ति इतनी बार रक्तदान कर किसी की जान बचाने में समाज के जिम्मेदार नागरिक की तरह अपनी महती जिम्मेदारी निभाते हैं । हम यदि राजनेताओं की बात भी करें तो ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलते हैं कि कोई राजनेता रक्तदान किये हों और किसी की जान बचाने हेतु अपने शरीर का रक्त दान किये हों। अधिकतर मौकों पर राजनेता शुभारंभ करने पहुंचते हैं और रक्तदाताओं को बधाई के साथ रक्तदान हेतु अपील करते हैं। लेकिन प्रखर वक्ता व छत्तीसगढ़ के युवा राजनेता नितिन भंसाली अन्य राजनेताओं हेतु उदाहरण साबित हुए हैं। उन्होंने प्रदेश वासियों से अपील किये हैं खासकर युवाओं से की वे रक्तदान अवश्य करें और व्यक्ति की जान बचाएं। आगे उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से कोई बुरा असर नहीं पड़ता है अपितु शरीर मे नए रक्त बनते हैं जो व्यक्ति के शरीर के लिए जरूरी है साथ ही नए रक्त से शरीर का रक्त प्यूरीफाय हो जाता है। इसलिए हम सभी को विशेष विशेष मौकों पर रक्त दान करते रहना चाहिए और एक जिम्मेदार नागरिक की जिम्मेदारी निभाना चाहिए।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट (वाराणसी) ::- राजीव मोहन शर्मा ने वाराणसी में प्रवासी भारतीयों को काशी विश्वनाथ के महत्त्व के बारे में बताया। ???? 6 भाषाओं के हैं जानकार।।

देश एवं विदेशों में धर्म की राजधानी माने जाने वाली काशी में भारत देश ही नहीं अपितु विश्व के सभी देशों और विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग बाबा विश्वनाथ की नगरी जो एक त्रिशूल पर बसा है उसे देखने, जानने और समझने पहुंचते हैं। साथ ही वे वेद, पुराण की भी चर्चा धर्माचार्यों से करते हैं। देखने मे यह भी आया कि भारत की प्राचीन संस्कृति, कला, सभ्यता को करीब से देखकर अन्य देशों के लोग काशी में बस जाते हैं। भारत के अनेक प्रान्तों और विभिन्न भाषा बोलने वाले लोग भी काशी में बस जाते हैं जिससे कि अंतिम समय उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो। काशी के रहने वाले पं राजीव मोहन शर्मा जिन्होंने मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर किये हैं वे प्रत्येक वर्ष काशी में प्रवासी भारतीयों का सम्मेलन कर काशी स्थित बाबा विश्वनाथ की महिमा, काशी की गलियां तथा बाबा विश्वनाथ परिसर के आस पास स्थित पुराणों में वर्णित मंन्दिरों तथा प्राचीन मंदिरों के बारे में हिंदी, बांग्ला, तमिल, तेलगु, भोजपुरी, राजस्थानी एवं अंग्रेजी भाषाओं में उन्हें इस नगरी के साथ साथ बाबा विश्वनाथ के महत्त्व, उनके पूजन आदि के बारे में बताते हैं । पं राजीव मोहन शर्मा विगत 27 वर्षों से भारतीय संस्कृति, सभ्यता आदि के बारे में विदेशों से आये प्रवासी भारतीयों को इसकी जानकारी देते आ रहे हैं। ऐसा बहुत ही कम दिखाई देता है कि कोई अपने देश की संस्कृति, सभ्यता, धर्म आदि को विदेशों तक इन प्रवासी भारतीयों के माध्यम से भेज रहे हैं। ऐसा देखने और सुनने भी मिलता है कि भारतीय संस्कृति, धर्म, सभ्यता आदि की ओर आकृष्ट होकर विदेश के लोग भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं, पूजन विधि सीखकर देवी देवताओं का पूजन कर रहे हैं, वेद-पुराण में लिखे श्लोकों को समझने का प्रयास कर रहे हैं और अपने जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं। पं राजीव मोहन शर्मा उन प्रवासी भारतीयों को प्राचीन भारतीय ज्योतिष विद्या के बारे में भी बताते हैं साथ ही कुंडली के माध्यम से सठीक गणना कैसे होती है, उसके पीछे लॉजिक क्या है, साइंटिफिक कैसे है इन सबके बारे में भी पं राजीव मोहन शर्माबताते हैं और उनका ज्ञानवर्धन करते हैं।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- देश के 12 उत्तम सांसदों के साथ छत्तीसगढ़ के कार्टूनिस्ट का भी हुआ सम्मान ।।

⭕️ चेन्नई के राजभवन में हुआ समारोह ।।  देश की 16वीं लोकसभा के उत्तम प्रदर्शन करने वाले सांसदों को सांसद रत्न सम्मान शनिवार को चेन्नई के राजभवन में राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित के हाथों प्रदान किया गया। विशेष अतिथि के रूप में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी एस कृष्णमूर्ति उपस्तिथ थे। इस आयोजन में भाजपा, कांग्रेस, एन सी पी और शिवसेना के सांसद और राज्य सभा सांसद सम्मानित हुए। इस अवसर पर कार्टून के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए छत्तीसगढ़ के कार्टूनिस्ट त्र्यम्बक शर्मा का सम्मान राज्यपाल द्वारा किया गया। राज्यपाल श्री पुरोहित ने अपने उदबोधन में कहा कि संसद के सेंट्रल हॉल में बनने वाले सम्बन्ध बहुत अच्छे होते हैं। वहाँ हंसी मज़ाक़ में ही कई समस्याओं का हल निकल जाता है। इस मौक़े पर वीरप्पा मोईली, अनुराग सिंह ठाकुर, सुप्रिया सुले सहित 12 सांसद सम्मानित हुए। उल्लेखनीय है कि संसद रत्न सम्मान का यह दसवाँ वर्ष है और यह प्राइम पोइंट चेन्नई के श्रीनिवासन और संसद रत्न अवार्ड कमेटी द्वारा आयोजित किया जाता है।

शाही अंदाज में घूमता दिखा जंगल का राजा देखे ये खूबसूरत तस्वीर

कवर्धा: जिले के भोरमदेव अभ्यारण क्षेत्र में घूमते बाघ की तस्वीर कैमरे में कैद हो गई है. वहीं इस सूचना पर सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट हो चुका है और चरवाहे भी मवेशियों को लेकर शाम होने से पहले वापस लौट रहे हैं.दरअसल कान्हा नेशनल पार्क से विचरण करते बाघ भोरमदेव अभ्यारण पहुंच चुके हैं कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्रों में अनेक प्रकार के वन्य प्राणी विचरण करते नजर आते हैं सबसे पहले कबीरधाम जिले के क्षेत्र तरेगांव जंगल में वर्ष 2001 में पहला बाघ देखा गया था. वहीं एक बार फिर वनांचल क्षेत्र में बाघ की दहाड़ सुनने को मिल रही है, जिसकी तस्वीर वन विभाग द्वारा लगाए गए कैमरे में कैद हुई है. कैद हुई तस्वीरों में जंगल के राजा का शाही अंदाज कुछ अलग ही नजर आ रहा है इन तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि बाघ-बाघिन के लिए वनांचल का यह क्षेत्र अनुकूल है. गौरतलब है कि, वन विभाग द्वारा ज्यादातर ऐसे स्थानों का चयन किया जाता है जहां वन्य प्राणियों की आवागमन होने का अंदेशा रहता है उस स्थान पर ट्रैप कैमरा लगाकर रखा जाता था इसी के मदद से कैमरे में बाघ और बाघिन की तस्वीरें कैद हो गई. बताया जाता है कि इस मौसम में इनका आवागमन बना रहता है. वातावरण अनुकूल होने के कारण यहां मैटिंग के लिए भी पहुंचते हैं जो लगभग 1 दिन में 50 से 80 किलोमीटर का सफर आसानी से तय कर लेते हैं. भोरमदेव अभ्यारण क्षेत्र में इनकी उपस्थिति जहां विभाग के लिए सुखद एहसास है. वहीं इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी विभाग पर बढ़ गई है.

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- 111 दिवसीय गंगा सद्भावना यात्रा का समापन मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में हुआ।।

भगवान् शिव ने समुद्र मन्थन के समय एक बार विषपान किया था पर विष्णुस्वरूप भगवान् समुद्र आज तक समस्त नदियों से निरन्तर प्रवाहित होकर आ रहे विष का पान कर रहे हैं । एक ओर जहाँ गंगा जी को अपने पति समुद्र से मिलते देखने का सुख मिला वहीं यह भाव भी आया । जय गंगासागर तीर्थ की जय। पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती जी महाराज की प्रेरणा से स्वामी सानन्द जी के सानिध्य में काशी के केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ के साध्वी द्वय पूर्णाम्बा एवं शारदाम्बा तथा जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जी के नेतृत्व में गंगोत्री से आरम्भ हुई 111 दिवसीय गंगा सद्भावना यात्रा का समापन आज मकर संक्रांति के दिन गंगा सागर में समापन हुआ।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- सांकल घाट पर शंकराचार्य महाराज ने किया पुण्य स्नान।।

।। रेवा तटे जपं कुर्यात , मरणं जाह्नवी तटे ।। ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गुरू गुफा सांकल घाट, धूमगड़ में महाराजश्री ने सनातन धर्म प्रेमी जनता को अपने अमृत प्रवचन में बतलाया की माँ नर्मदा जी के दर्शन से पाप से मुक्ति मिलती है। मनुष्य को तप नर्मदा जी के तट पर करना चाहिए और यदि (अंतिम समय ) मृत्यु का समय आये तो गंगा जी के तट (किनारे ) पर जाना चाहिए।

पत्रकार खबरीलाल रिपोर्ट ::- सुप्रसिद्ध विचारक 93 वर्षीय देवेन्द्र स्वरूप का नईदिल्ली में हुआ निधन ।।

राष्ट्रवादी विचारक, पांचजन्य के पूर्व संपादक तथा आरएसएस के पूर्व प्रचारक, 93 वर्षीय देवेन्द्र स्वरूप का आज नई दिल्ली में निधन हो गया। वे भाजपा के रायपुर शहर जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल के चाचाजी थे। देवेंद्र स्वरूप संघ के थिंक टैंक कहे जाते थे। वे संघ के पूर्व प्रचारक व संघ के मुखपत्र पान्चजन्य के काफ़ी समय तक संपादक रहे। उन्हें आपातकाल में गिरफ़्तार कर तिहाड़ जेल में रखा गया था। उनकी संघ यात्रा 1945 से अनवरत जारी रही व दो माह पूर्व तक लेखन कार्य भी निर्वाधगति से चलता रहा। स्वरूप जी, स्व. अटल जी, नानाजी देशमुख के साथ वैचारिक यात्रा की। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा पुस्तकें लिखी थीं। स्वरूपजी ने रायपुर के कई दौरे किये तथा उनके विचारों को सुनने पढ़ने का मौका मिलता रहा। देश की साहित्य, पत्रकार बिरादरी और लेखक संघों ने उनके निधन पर शोक.संवेदना व्यक्त की है।