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ध्यान दीजिए डीईओ साहब , एक शिक्षक के हाथों 110 बच्चो का भविष्य , आखिर कैसे होगी बच्चो की पढ़ाई...

शनि सुर्यवंशी : पकरिया-

विकासखंड अकलतरा के ग्राम पंचायत झलमला के टांड़पारा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला जहाँ 5 वी क्लास तक स्कूल संचालित होता है। ज्ञात हो कि शासकीय प्राथमिक शाला टांड़पारा में शाला के दर्ज संख्या के अनुसार 2 शिक्षक 1 शिक्षिका नियुक्ति हुआ था । जिससे वहाँ का पढ़ाई सुचारू रूप से चल रहा था आपको बता दे कि शासकीय प्राथमिक शाला टांड़पारा में पदस्थ रहे प्रधान पाठक खोलबहरा निर्मलकर का मृत्यु 2016 -17 में हो गया जिसके बाद वही शाला में शिक्षक गजाधर मरकाम को प्रभारी प्रधान पाठक बनाया गया था वही शाला में पदस्थ प्रभारी प्रधान पाठक मरकाम अपने शाला में शराब पीकर आता था जिसके हरकत से शिक्षक व बच्चे बहुत ज्यादा परेशान थे जिससे बच्चो का पढ़ाई बाधित हो रहा था । वही इसकी शिकायत शाला के टीचर व बच्चो अभिभवाकगण ने शाला समिति को अवगत कराया गया जिसके बाद शाला समिति के सदस्यो ने प्रभारी प्रधान पाठक को ब्यवहार को सुधारने और अच्छे तरीके से शाला का।संचालन करने को कहा गया था और अच्छा शिक्षक का परिचय देने को कहा उसके बावजूद भी प्रभारी प्रधान पाठक किसी एक कि भी सुनने को तैयार नही हुआ ।

जिसके बाद शाला समिति एवं ग्रामीणों के द्वारा प्रभारी प्रधान पाठक के खिलाफ शिकायत किया गया था वही शिकायत पर स्कूल जांच अधिकारी के द्वारा सही पाया गया था जिसके बाद उसे विकासखंड के अंतर्गत झिरिया के स्कूल में 11 दिसम्बर को अटैच कर दिया गया था । जिसके बाद शाला विकास समिति के द्वारा शिक्षक ब्यवस्था की मांग किया जिसपर उनके जगह में झिरिया स्कूल से शिक्षक रामप्रकाश खरे को लाया गया जो कि खरे के द्वारा अक्टूम्बर माह 2018 से दिसम्बर 2018 तक स्कूल में ब्यावस्थापक के रूप में सेवा दिया जा रहा था उसके बाद झिरिया शिक्षक रामप्रकाश खरे को झलमला से अपने मूल शाला मे वापस बुला लिया गया ।

हद तो तब हो गया कि 22 दिसम्बर को फिर से गजाधर मरकाम को पुनः पदस्थापना शाला में कर दिया गया था उसी बीच मे ही शासकीय प्रथमिक शाला पकरिया झुलन के शिक्षक जगदीश निर्मलकर जगदीश कुर्रे को वार्षिक परीक्षा के दौरान बच्चो के पढ़ाई प्रभवित न उसको देखते हुए जनवरी माह 2019 से अप्रैल 2019 तक वही 1 सप्ताह के लिए पकरिया शिक्षक ललिता देवांगन को भी टांड़पारा शाला में भेजा गया था । वही आपको बता दे सत्र 2018- 19 में शिकायत के बाद फिर से अधिकारियों के द्वारा 24 जून 2019 को उन्हें शाला टांड़पारा से दूसरे जगह रिलीव किया गया है।

●110 बच्चो की जिम्मेदारी प्रभारी प्रधानपठिका के हाथों●

आपको बता दे शासकीय प्राथमिक शाला टांड़पारा झलमला में पदस्थ प्रभारी प्रधानपठिका विंध्यवासिनी टांडे ने बताया कि वर्तमान में शाला रजिस्टर में दर्जसंख्या के अनुसार 110 बच्चो का स्कूल में उपस्थित है। जिनका पढ़ाई अकेले रहने के वजह से नही हो पा रहा वही आएदिन प्रिसिंध डाक का काम स्कूल के कागजी काम के वजह से दिनभर समय इसी में लग जाता है जिसके वजह से पढ़ाई नही हो पा रहा है इतना ही नही इस मामले को लेकर शिकायत न कि गयी हो विगत दो सालों से कई बार शिक्षक की मांग की गई उसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। वही इसकी शिकायत संकुल केंद्र से लेकर बीइओ डीईओ को कई बार अवगत कराया गया लेकिन शाला में नियमित शिक्षक अभी तक नही भेजा गया है जिसके कारण बच्चो के पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होता दिख रहा है। वही कभी कभी तो ये देखना पड़ता है कि शाला में सफाईकर्मी गोपेस्वर यादव के द्वारा बच्चो का पार्थना हाजिरी लेना तक पड़ जाता है । यहाँ तक गोपेस्वर यादव खुद समय निकालकर बच्चो को पढ़ाते भी है। आपको बता दे कि जुलाई माह से बच्चो का पढ़ाई चालू हो गया है लेकिन यहाँ के बच्चो का अभी तक कोई भी विषय का पाठ्यक्रम शुरुआत नही हुआ है जिसके कारण पढ़ाई नही हो पा रहा है वही बच्चो का भविष्य अभी से अंधकार मय दिख रहा है। यहाँ तक नौबत यह है कि पहली दूसरी क्लास के बच्चो को पांचवी क्लास के छात्रा पढ़ाती है। जिससे थोड़ा बहुत छोटे छोटे बच्चो का मन पढ़ाई में बना रहे ।

●कैसे सुधरेगे का शिक्षा का ब्यवस्था●

प्राथमिक शाला स्तर की बात करे तो शाला में 30 से 35 बच्चो में 1 शिक्षक का पदस्थ किया जाता वही यहाँ झलमला स्कूल में 110 बच्चे है फिर भी 1 शिक्षक के भरोशे स्कूल को छोड़ दिया गया वही यहाँ आसपास स्कूलों की बात करे तो जहा कम।दर्ज संख्या है उसके बावजूद भी जरुरत से ज्यादा शिक्षक पदस्थ है । अब इस तरह के ब्यवस्था से सहज अन्दाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय अधिकारी के जानकारी के बाद भी इस तरह से भर्राशाही अब भी जारी है। ऐसा लगता है कि बच्चो के भविष्य से कोई मतलब ही न हो ऐसे बदहाली का भुगतना बच्चो को झेलना पड़ता है।

शिक्षक को हटाने व नए शिक्षक के मांग को लेकर स्कूल के गेट पर लटक चुका है ताला

आपको बता दे कि शिक्षक की मांग को लेकर शाला विकास समिति और छात्र छात्राओं के द्वारा नियमित शिक्षक की मांग को लेकर पिछले साल शाला के गेट सामने ताला जड़कर 2 दिनों तक बैठ कर विरोध प्रदर्शन किया गया था इतना ही नही इसकी जानकारी शिक्षक ने अपने उच्च अधिकारियों को फोन पर सूचना भी दिया था लेकिन अधिकारियों के द्वारा आष्वासन के नाम पर सिर्फ और सिर्फ झूनझुना थमाया था वही दो सालों से में शिक्षक का ब्यवस्था न कर पाना कही न कही अधिकारियों की लापरवाही ही समझा जाये । अब देखना यह होगा कि यह कुम्भकर्णी विभाग कब नींद से बाहर आती है और बच्चो को उनके शिक्षक कब मिल पाता है यह देखना लाजिमी होगा ।

BBN24 कि खबर का असर : कन्या आश्रम में बालिका की मौत पर आश्रम अधीक्षिका निलंबित

 

पीड़ित परिवार को 20 हजार की तात्कालिक सहायता
कलेक्टर ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया

बलौदाबाजार: जिले के पलारी विकासखण्ड के गांव देवसुन्दरा में संचालित अनुसूचित जाति कन्या आश्रम की बालिका कुमारी मुस्कान की आज सवेरे आकस्मिक मृत्यु हो गई। करीब 9 साल की बालिका आश्रम में रहकर कक्षा चैथी की पढ़ाई कर रही थी। आश्रम अधीक्षिका ने बताया कि घटना के एक दिन पहले 11 जुलाई को शाम में बालिका को उल्टी हुई थी, जिसका ससहा के उप स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज कराया गया था। रात में भोजन और दवाई लेने के बाद वह सो गई। सोने के दौरान ही उनका इंतकाल हो गया। शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उनका अंतिम संस्कार गृहग्राम बिनौरी में किया गया। अंतिम संस्कार में आदिम जाति कल्याण विभाग के अनुसंधान सहायक  शिव बांधे सहित विभागीय कर्मचारी शामिल हुए। 


जिला कलेक्टर  कार्तिकेया गोयल ने बालिका के निधन पर अत्यंत गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके निर्देश पर आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा 20 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। उन्होंने छात्र सुरक्षा बीमा योजना के तहत भी एक लाख रूपये की सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इसका प्रकरण तैयार किया जा रहा है। आश्रम अधीक्षिका रीना तिमोथी को देख-रेख में लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। और देवसुन्दरा कन्या आश्रम का प्रभार पलारी आश्रम की अधीक्षिका जसिता मिंज को सौंप दिया गया है। इधर सहायक आयुक्त आदिवासी विकास राधेश्याम भोई ने भी आज देवसुन्दरा कन्या आश्रम का दौरा किया। उन्होंने आश्रम की खान-पान और साफ-सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। आश्रम में फिलहाल कक्षा पहली से पांचवी तक की कक्षा में 54 कन्याएं रहकर पढ़ाई कर रही हैं। 

आत्मसमर्पित नक्सली और पुलिस कप्तान का अभिनय , शार्ट फ़िल्म से नक्सलवाद पर करेंगे चोट , बस्तर में बन रही नक्सलवाद आधारित फिल्म

अब तक आप ने देखा होगा कि माओवादी किसी भी बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद मिली कामयाबी का वीडियो बना कर सोशल मीडिया में वायरल करते है। साथ ही स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को, गांव में सभा कर ग्रामीणों को भी दिखाते हैं। ताकि बस्तर के भोले भाले ग्रामीणों के दिल और दिमाग मे माओवादी अपनी जगह बना सके। जिससे लोकतंत्र के खिलाफ ग्रामीणों के मन में गुस्सा फूट सके। इसके लिए नक्सलियो ने विशेष रणनीति के तहत अपना एक प्रोडक्शन हाउस बना कर रखा है।

इस प्रोडक्शन हाउस से माओवादी अपनी जल, जंगल, जमीन की लड़ाई और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ , किसी बड़े नेता को मौत के घाट उतारने जैसे कहानियों की शार्ट फ़िल्म बना के ग्रामीणों को दिखाते है, साथ ही सोशल मीडिया में धड़ल्ले से वायरल भी करते है। इन सब को देखते हुए अब दन्तेवाड़ा पुलिस भी नक्सलियो की खोखली विचारधारा पर आधारित सच्ची घटना की शार्ट फ़िल्म बना रहीं है। इस शार्ट फ़िल्म में सरेंडर माओवादी, डीआरजी के जवान , महिला डीआरजी के साथ दन्तेवाड़ा एसपी व एएसपी खुद रोल प्ले कर रहे है। इस फ़िल्म निर्माण के लिए रायपुर ,और भिलाई से वीडियो ग्राफर बुलाये गए है।

बता दे कि छग का बस्तर संभाग और इसका एक एक जिला , एक एक गांव आज लाल आतंक की चादर ओढ़े हुए है। पुलिस के एक्शन मोड़ में आने के बाद भी लगातार माओवादी इन इलाकों में अपनी पैठ जमाये हुए है। बस्तर जैसे खूबसूरत जगह के लिए अभिशाप बने ये माओवादी कई छोटी बड़ी घटनाओं को अंजाम देते है, और हर घटना के पीछे मिली कामयाबी की वीडियो बना कर बस्तर के भोले भाले ग्रामीणों को दिखाते है। ताकि ग्रामीणों के मन , मस्तिष्क मे भी सरकार व , पुलिस तंत्र के खिलाफ गुस्सा फूट सके और नक्सली ग्रामीणों के दिल और दिमाग मे अपनी जगह बना सके व उनका विश्वास पा सके।

बस्तर में माओवादियो ने रानिबोधली, ताड़मेटला, बुर्कापाल, झीरम , जैसी कई बड़ी घटना को अंजाम दिया है। और इसकी वीडियो भी बनाई है। इस वीडियो को अपने प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से एडिटिंग कर माओवादी इसे रिलीज भी किये है। वही अब दन्तेवाड़ा पुलिस भी माओवादियो को उन्ही की बोली से उन्ही को जवाब देने की तैयारी कर रही है। नक्सलियो पर दन्तेवाड़ा पुलिस अब वीडियो वार करने जा रही है। नक्सलियो के द्वारा ग्रामीणों पर अत्याचार, लिंग भेद, अपने ही साथियों को मौत के घाट उतारना, महिला नक्सल साथियों की नशबंदी जैसे कई मुख्य बिंदुओं पर दन्तेवाड़ा एडिशनल एसपी सूरज सिंह परिहार ने स्क्रिप्ट लिखी है। लगभग एक महीने में तैयार हुई स्क्रिप्ट के बाद अब इस स्क्रिप्ट पर अलग अलग भूमिका अदा करने कलाकार दन्तेवाड़ा के जंगल में अलग अलग लोकेशन पर शूटिंग कर रहे है।

इस 10 मिनट की शार्ट फ़िल्म में सेंट्रल कमेटी के शीर्ष माओवादी नेता गणपति का रोल प्ले करने रायपुर के कलाकार को बुलाया गया है। वही खूंखार इनामी माओवादी हिड़मा का रोल दन्तेवाड़ा डीआरजी जवान मुकेश तांती कर रहे है, और खूंखार महिला नक्सली हूँगी का रोल महिला डीआरजी की आरक्षक सुनैना पटेल कर रही है। साथ ही एसपी की भूमिका स्वयं एसपी ही निभा रहे है।

पहले और दूसरे दिन शूटिंग के दौरान दिखे यह दृश्य- दन्तेवाड़ा के घने जंगलों में पिछले 2 दिनों से यह शूटिंग चल रहीं है। वही इस शॉर्ट फिल्म की कहानी में सबसे मुख्य बात नक्सलियों द्वारा अपने ही महिला नक्सल साथियों की नश बंदी कराई जानी है। इस कहानी में महिला नक्सली हूँगी गर्भवती हो जाती है, जिसे बड़े माओवादी हूँगी को गर्भपात करवाने कहते। हूँगी गर्भपात करवाने की बजाए माओवाद संगठन छोड़ कर दन्तेवाड़ा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर देती है। और अपनी एक नई जिंदगी की शुरुवात करती है। ऐसे में माओवादी हूँगी के खिलाफ मौत का फरमान जारी कर देते है। आत्मसमर्पण के बाद हूँगी को सरकार की नीति के तहत पुलिस में नौकरी दी जाती है। जिससे वो अपनी हसी खुशी जिंगदी जीती है। इस शार्ट फ़िल्म का दूसरा पार्ट है माओवाद के शीर्ष लीडर गणपति जो ग्रामीणों की व अपने ही डिवीजन नक्सल लीडरों की बैठकें लेता है। किस तरह से माओवादी ग्रामीणों को नक्सल संगठन का साथ देने मजबूर करते है। सरकार की नीतियों का बहिष्कार करने कहते है। स्कूल, कॉलेज , सड़क, अस्पताल बनने नहीं देते, शासन प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को जो सुविधाएं मुहैया कराई जाती है नक्सली उसका बहिष्कार करते है। मजबूरन ग्रामीण लाल आतंक के पैरों तले कुचले जाते है। वही इस कहानी में एसपी का किरदार स्वयं दन्तेवाड़ा एसपी अभिषेक पल्लव ही निभा रहे है। शिविक एक्शन कर ग्रामीणों के बीच नजदीकियां बड़ा रहे है। वही जल्द ही इस फ़िल्म को रिलीज कर हाट बाजारों में, स्कूल व आश्रमो में दिखाया जाएगा।

जनप्रतिनिधियों की कमजोरी, मस्तूरी से पेंड्री कोहरौदा मार्ग जर्जर .....

 सन्नी यादव @ bbn24news  (विशेष )

मस्तूरी से पेंड्री कोहरौदा नेशनल हाईवे मार्ग बद से बदतर हो चुकी है विगत कई वर्षों से इस रोड की मरम्मत कार्य नहीं हो पाई है। इस मामले में कर्मचारी अधिकारियों की उदासीनता समझे या फिर जनप्रतिनिधियों की कमजोरी क्योंकि विगत 10 वर्षों से ना तो इस रोड के लिए कोई भी जवाबदार अधिकारी एक्शन ले रहे हैं और ना ही कोई सांसद विधायक जैसे जनप्रतिनिधि  लोग इस समस्या को उच्च स्तर तक पहुंचा रहे हैं। रोड की समस्या को लेकर जब कभी भी मस्तूरी के व्यापारिक संगठन या फिर विद्यार्थी संगठन या फिर कोई राजनीतिक संगठन के लोगों ने मुद्दे को लेकर जवाबदार अधिकारी के पास अपनी बात रखी है। तो सिर्फ रोड के मरम्मत के नाम पर लीपापोती कर  नजर अंदाज किया गया है। आज उच्च आला अधिकारियों की नजर अंदाज करने के कारण रोड की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि आवागमन करने वाले यात्रियों से लेके रोज दूरदराज के अंचल से पढ़ाई करने आ रहे विद्यार्थी गढ़ बहुत ही ज्यादा परेशानियों का उन लोगों को सामना करना पड़ रहा है।

 मस्तूरी एक मुख्यालय जगह है जिले से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यहां आसपास के क्षेत्रों के लोगों की छोटे से लेकर बड़े कार्य होते हैं । जितने भी शासकीय कार्यालय हैं मस्तूरी में उपस्थित होने के कारण लोग अपनी अपनी समस्या को लेकर  रोजाना आवागमन करते हैं। लेकिन रोड के बदतर स्थिति को लेकर कोई दुर्घटना का शिकार होते तो किसी के कपड़े खराब हो जाते हैं। लोगों को रोड के नाम से इतनी भारी-भरकम समस्या है इसको क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी बखूबी अच्छी तरह से समझते हैं बावजूद इसके सब मूकदर्शक बने हुए निद्रा में लीन है।


 कार्यालय काम से आने जाने वाले लोगों को कीचड़ और गड्ढों से इतनी ज्यादा ही परेशानी हो रही है कि कभी उन लोगों के कपड़े खराब हो जा रहे हैं तो रोड खराब होने की वजह से वाहन खराब हो जाते हैं या तो लेटलतीफी हो जाता है अगर बरसात नहीं होते तो धूल और कंकड़ से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैl आने जाने वाले लोगों के साथ साथ सड़क के आस-पास व्यापारी लोग काफी हद तक परेशान है धूल धक्कड़ से सामान खराब हो जाते हैं और कीचड़ होने से धंधा पानी में मंदी हो रही है लोक सामने में कीचड़ देखकर आगे निकल जाते हैंl सारी समस्याओं को देखते हुए लोगों में भारी रोष है और अपने अपने संगठन के रूप में शासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करने की तैयारी में लगे हुए हैं।

रोड की इस गंदी दशा को देखते हुए भी शासन प्रशासन चुप्पी साधे बैठी है स्कूली सीजन चल रहा है छात्र-छात्राओं को स्कूल आने-जाने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है रोड के जर्जर स्थिति को देखते हुए ना तो कोई प्रकार की मरम्मत कार्य करवाई जा रही है और ना ही किसी प्रकार की ठोस कदम उठाए जा रहे हैं जिसे लेकर हम लोग काफी परेशान हैं।
 राहुल यादव
 पंचायत जनप्रतिनिधि मस्तूरी।
मस्तूरी रोड की जर्जर स्थिति को देखते हुए भी शासन प्रशासन के लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं हम लोगों को स्कूल कॉलेज जाने में रोड के नाम से और रोड के गंदगी के नाम से इतनी सारी  परेशानियां हो रही है कि कई कई दिन ड्रेस खराब होने यह सड़क के गड्ढों के नाम से गिर जाने के कारण घर वापस भी होना पड़ा है, कई छोटे-छोटे दुर्घटनाओं से बचे हैं।
 अभिषेक मौर्य
 छात्र मस्तूरी कॉलेज।
दुकान के सामने में रोड के बड़े-बड़े गड्ढों  के होने से वाहनों के आवागमन पर थोड़ी सी बरसात होने पर सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है बड़े वाहनों के चलने से सामानों पर आए दिन कीचड़ पढ़ते ही रहता है दुकान के सामने में गंदगी होने के कारण ग्राहकों का आवागमन भी कम हो जाता है और यह सब सारी समस्याएं सिर्फ रोड के मरम्मत नहीं होने से हो रही है जिससे हम लोग काफी परेशान हैं।
 पारस गुप्ता
 व्यापारी मस्तूरी।
हमें रोजाना ऑफिशियल वर्क के नाम से मस्तूरी आना जाना पड़ता है लेकिन रोड की जर्जर स्थिति को देख कर कभी भी दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई रहती है। रोड के जर्जर होने की वजह से कई सारी दुर्घटनाएं भी हो चुकी है पर अभी तक शासन-प्रशासन के और से रोड की मरम्मत के नाम पर  कोई भी प्रकार का एक्शन नहीं लिया जा रहा है जिससे हमें बहुत सारी समस्याएं हो रही है।
 जितेंद्र यादव।
 शासकीय कर्मचारी
मस्तूरी में नेशनल हाईवे रोड की स्थिति वाकई में बहुत ही  जर्जर स्थित है सड़क में बड़े-बड़े गड्ढे हो जाने के नाम से आम लोगों को बहुत सारी समस्याएं हो रही है जिसे हमने सड़क विभाग के अधिकारियों को अवगत करा दिया है बहुत जल्दी मरम्मत कार्य करवाया जाएगा।
 वीरेंद्र लकड़ा
 एसडीएम मस्तूरी।

जंहा लगे हैं प्रेसर आईईडी वहा जान जोखिम में डाल कर रोज जाते है शिक्षक स्कुलो तक .पढ़े ये विशेष रिपोर्ट

एक दर्जन से अधिक स्कूल कटेकल्याण में पहुच विहीन।

दंतेवाड़ा।।

कटेकल्याण में एक दर्जन से जादा स्कुलो तक पहुचने शिक्षक रोज अपनी जान जोखिम में डाल ते हैं। विकास खण्ड मुख्यालय से 3 से 4 किलोमीटर के बाद पूरा क्षेत्र नक्सलियों के कब्जे में है विगत कई सालों से इन गांवो तक पहुचने वाली सड़क नक्सली कई सालों से बंद कर रखे हैं | नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही कटेकल्याण विकास खण्ड के चिकपाल,मरजुम,मुनगा, तेलंम,टेटम,जियाकोडता,कोडरीपाल, एटेपाल, नदी कोंटा स्कुलो में पदस्थ शिक्षकों की परेशानी एक बार फिर से शुरू हो गई है।

*9 गांव के 16 से अधिक स्कूल के शिक्षक अपने स्कूलों तक अकेले सायकल से भी नही जा पाते डियूटी नक्सलियों द्वारा खोदे गये बड़े, बड़े गड्ढो को पार करने में लगते है दो आदमी।

कभी भी कंही भी हो सकता है इन क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों के साथ हादसा ,इन सड़कों पर नक्सली आय दिन लगाते है प्रेसर आईईडी जवानों को नुकशान पहुचाने ,सोमवार को भी एक प्रेसर आईईडी इसी रास्ते मे पिकअप वाहन का चक्का चढ़ने से फ़टी थी। चिकपाल ,मरजुम ,तेलंम ,टेटम क्षेत्र में डियूटी जाने वाले शिक्षकों ने बताया मुख्यालय में रह नही सकते कारण नही है आवास ब्लाक मुख्यालय से सुबह 9 बजे निकलते है रोज तब डेढ़ घण्टे में पहुच पाते है स्कुलो तक 6 से सात साल से शिक्षक इसी तरह परेशानी उठा रहे है।


इतने स्कुलो को शिफ्ट नही कर सकते ,तीन आश्रम सहित दर्जनों स्कूल है पहुच विहीन। 
बीईओ कटेकल्याण गोपाल पांडे 

शिवरीनारायण हॉस्पिटल की सुधरेगी दशा, स्वास्थ्य मंत्री ने पत्रकार आशीष कश्यप के पोस्ट पर दिया आश्वासन,

प्रियांश केशरवानी@Bbn24: जांजगीर चाम्पा/ शिवरीनारायण हॉस्पिटल की दशा अब सुधरने वाली है पत्रकार आशीष कश्यप की पोस्ट पर स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने कमेंट के माध्यम से आश्वासन भरा जवाब दिया है जिसके बाद अब आम जनता को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है। स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा है कि हम आपकी समस्या से अवगत है और इस समस्या का जल्द निदान होगा।दरअसल गौरतलब है कि शिवरीनारायण आसपास के 50 गांवों का केंद्र बिंदु हैं।यहाँ रोजाना बड़ी संख्या में आसपास के लोग अपने व परिजनों के इलाज के लिए पहुँचते हैं।लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम एक सिविल डिस्पेंसरी संचालित है।जिसमे एक सरकारी डॉक्टर अपने कुछ कर्मचारियों के साथ लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रही हैं।अक्सर देखा जाता हैं कि यदि दुर्घटना में घायल कोई मरीज इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुँचता हैं तो उसे अन्यत्र रिफर करने के आलावा कोई रास्ता नही होता।समय पर इलाज नही मिलने से बहुतों की जान भी चली जाती हैं। शिवरीनारायण क्षेत्रवासियों की इस समस्या को सभी अखबारों ने प्रमुखता से उठाया था वही पत्रकार आशीष कश्यप ने स्वास्थ्य मंत्री टीएससी देव को मैसेज के माध्यम से भी इस समस्या को बताया था। इसके बाद उन्हें जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने शीघ्र व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया है।

आवास निर्माण में सरपंच व ठेकेदारों के द्वारा बरती जा रही है भारी लापरवाही ..पढ़े ये खास रिपोर्ट

BBN24:NEWS ( विशेष  खबर )

जनपद पंचायत मस्तूरी से  महज 8 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बेलटूकरी के आवास निर्माण में सरपंच व ठेकेदारों के द्वारा बरती जा रही है भारी लापरवाही जहां प्रधानमंत्री आवास के ऐसे कई मकान मिलेंगे जिसको आधा अधूरा करके छोड़ दिया गया है किसी को डोर लेंटर करके छोड़ा गया है किसी को सैंटरिंग लगा कर छोड़ा गया है किसी का दीवार उठा कर छोड़ा गया तो किसी की छबाई नहीं हुई है कई मकान तो ऐसे पड़े हुए हैं जिनको लगभग 1 से 2 साल हो चुका है और अधूरा आज भी पड़ा हुआ है जिसके वजह से मकान मालिकों में भारी आक्रोश देखी जा सकती है कई हितग्राही तो ऐसे भी हैं जिन्होंने घर से पैसा लगाकर आवास की छबाई कराई है हितग्राहियों का आरोप है कि अशोक पटेल ठेकेदार आवाज की दीवाल को आधा उठाकर काम बंद कर दिया है और काम शुरू करने के लिए जब बोलते हैं तो बोलते हैं मैं सामान भिजवा दूंगा आप लोग बना लेना एक हितग्राही को अशोक पटेल के द्वारा बोला गया की सेंटरिंग करवा लो अपने पैसे से बाकी काम में मिस्त्री भेजकर करवा दूंगा सेंटरिंग लगे 15 दिन हो गया है लेकिन उसका काम अभी भी रुका हुआ है उसका आवास निर्माण का कार्य 2 साल पहले शुरू हुआ था जो अब तक कंप्लीट नहीं हुआ है. 

मेरे चाचा जी का आवास निर्माण का काम लगभग 6 महीना पहले शुरू हुआ था जो अभी तक कंप्लीट नहीं हुआ जिसके लिए सरपंच ने चाचा जी को बोले थे कि और पैसा लगेगा करके तो चाचा जी ने ₹10000 सरपंच को दिया है इसके बावजूद काम रुक गया है
ज्ञानेंद्र कुमार
 

डेढ़ साल पहले मेरे आवास निर्माण का कार्य शुरू हुआ था शुरू में ठेकेदार अशोक पटेल के द्वारा स्टार सीमेंट रेट दिया गया था उसके बाद डोर लेंटर तक पहुंचते-पहुंचते अशोक पटेल ने सामान देना बंद कर दिया उसके बाद हम लोग जाकर अशोक पटेल को बोले कि हमारा घर का काम रुक गया है उसको जल्दी से पूरा कराइए तब अशोक पटेल ने बोला आप लोग सेंटरिंग के लिए लकड़ी किराया पर ले आई है या घर से लगा लीजिए बाकी काम में करवा दूंगा तो हम लोगों ने घर की लकड़ी को लगा कर दो लेंटर का काम कंप्लीट किया लेकिन उसके बाद आगे का काम अभी भी रुका हुआ है कई बार जनपद में अशोक पटेल के खिलाफ शिकायत कर चुके हैं लेकिन अशोक पटेल की पहुंच होने की वजह से उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता
 रामकुमार.
 

लगभग एक डेढ़ साल पहले मेरे पिताजी सुखनंदन पाटले के नाम पर प्रधानमंत्री आवास आया था और उसी समय बनना शुरू हुआ पर छत लेवल पर ले जाकर ठेकेदार अशोक पटेल के द्वारा छोड़ दिया गया है ठेकेदार ने कुछ दिन पहले बोला था कि सेंटरिंग लगवा लो हम लोगों ने सेंट्रिक लगवा लिया है लगभग 20 दिन हो गया है लेकिन काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है हम लोग बहुत गरीब आदमी हैं मेरे पापा जी भट्ठा गए हैं काम करने के लिए
सुनील पाटले.
 

हमारे देवर जी का घर बन चुका है लेंटर दरवाजा खिड़की सब लग चुका है ठेकेदार के द्वारा छबाई अभी तक नहीं कराया गया है लगभग डेढ़ साल हो चुका है
उमा बाई 
हितग्राही का रिश्तेदार.

 

मैं अभी बाहर आया हूं इसलिए कुछ बता नहीं सकता देखकर घर आकर बता सकता हूं.  क्योंकि आवास का कार्य अधिकतर ठेके पर दिए हैं. ठेकेदारों से संपर्क  कर लूं उसके पश्चात ही कुछ जानकारी दी जाएगी
चैतराम बंजारे
सरपंच बेलटूकरी.

 

शिवरीनारायण में लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी...पढ़े ये विशेष रिपोर्ट

NEWS Edited By :YASH LATA

प्रियांश केशरवानी ( विशेष  खबर )

जांजगीर चाम्पा  जिले का शिवरीनारायण नगर लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रही हैं। इसके बाद भी आजतक इस ओर किसी का ध्यान नही गया। यहां के जनप्रतिनिधि महज वोट मांगने तक ही जनता से वास्ता रखते हैं वहीं अधिकारी मंदिर दर्शन के अतिरिक्त यहाँ आकर और कोई काम नही करते है एसा कहना है यहाँ के नगरवासियों का | 

गौरतलब है कि शिवरीनारायण आसपास के 50 गांवों का केंद्र बिंदु हैं।यहाँ रोजाना बड़ी संख्या में आसपास के लोग अपने व परिजनों के इलाज के लिए पहुँचते हैं।लेकिन यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम एक सिविल डिस्पेंसरी संचालित है।जिसमे एक सरकारी डॉक्टर अपने कुछ कर्मचारियों के साथ लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रही हैं।अक्सर देखा जाता हैं कि यदि दुर्घटना में घायल कोई मरीज इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुँचता हैं तो उसे अन्यत्र रिफर करने के आलावा कोई रास्ता नही होता।समय पर इलाज नही मिलने से बहुतों की जान भी चली जाती हैं।क्योंकि शिवरीनारायण में कोई दुर्घटना होती हैं तो घायलों को पामगढ़ ,बिलासपुर, जांजगीर हॉस्पिटल में रिफर कर दिया जाता हैं।नगर के हॉस्पिटल से इन जगहों की दूरी 20 से 60 किलोमीटर हैं।गम्भीर रूप से घायल मरीजो को इतनी दूरी तय करने के दौरान बहुतो की जान पर बन आती हैं।समय पर इलाज नही मिलने से दुर्घटना में घायल व्यक्ति काल के गाल में समा जाते है।

नगर में मुख्यमंत्री से लेकर विभिन्न विभागों के मंत्रियों का आनाजाना लगा रहता हैं।हर बार नगर केजनप्रतिनिधि,समाजसेवी, युवा वर्ग,जिम्मेदार नागरिकों द्वारा नगर में आये मुख्यमंत्री,मंत्रीगण तक नगर में व्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से अवगत कराया जाता हैं।लेकिन नगर की स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने का आश्वासन देकर जिम्मेदार मंत्री अधिकारी चलते बनते है।इन जिम्मेदार लोगों के जाने के बाद नगर की स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए दिया गया आवेदन रद्दी को टोकरी में चला जाता हैं।हर बार नगर के लोग इसी आस में सरकार के नुमाइंदों को अपना मांग पत्र सौपते हैं की नगर में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी हो जाये लेकिन हर बार लोगो को निराशा ही हाथ लगती हैं।बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण लोगो को अन्यत्र इलाज कराने मजबूर होना पड़ता हैं।सरकारी हॉस्पिटल में न तो ठीक से इलाज मिल पाता हैं और न ही दवाई की व्यवस्था रहती हैं।सरकारी हॉस्पिटल में असुविधा को देखते हुए लोग निजी डॉक्टरों से इलाज कराने विवश हैं।निजी डॉक्टर भी इलाज कराने आये लोगो की मजबूरियों का जम कर फायदा उठाते हैं।सरकारी हॉस्पिटल में सुविधाएं नही होने के कारण गरीब तबके के लोग निजी डॉक्टरों के क्लीनिक में लूटने मजबूर है।नगर में ब्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे बड़ा कारण जिम्मेदार विभाग का ध्यान नही देना है।हर बार आश्वासन देकर नेता मंत्री चलते बनते है।नगर के सिविल डिस्पेंसरी में आजतक स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ोतरी के लिए कुछ भी नही किया गया।नगर व आसपास के लोग शासन प्रशासन की उदासीनता के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से रोजाना अपने किसी न किसी को खोने को मजबूर है।लोग इलाज के अभाव में अपने परिजनों को खो रहे है और प्रशासनिक अमला मुख दर्शक बने हुए है।
 

सिविल डिस्पेंसरी हॉस्पिटल में नही है पर्याप्त स्टॉप।


नगर में स्वास्थ्य सुविधाओं की पूर्ति के लिए जिस सिविल डिस्पेंसरी हॉस्पिटल संचालन नगर में हो रहा है उस हॉस्पिटल में स्टॉप की कमी है।एक डॉक्टर और कुछ नर्स नगर के लोगो को जैसे तैसे स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करा रहे है।नगर के हॉस्पिटल में न तो एम्बुलेंस है और न ही स्टॉप, लेबर रूम, बॉउंड्रीवाल का निर्माण नही होने से हॉस्पिटल की भूमि पर लोगो ने अतिक्रमण भी कर लिया है।हर बार शासन प्रशासन से इस ओर ध्यान देने की बात की जाती है लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

यदि शिवरीनारायण थाना अंतर्गत आने वाले शहर हो या गांव में किसी की दुर्घटना,फाँसी,जहर खुरानी,करंट से मौत, या अन्य कारणों से मौत हो जाने पर शव का पोस्टमार्टम करने का नियम होता है।नगर में पोस्टमार्टम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी की नियुक्ति नही होने से पोस्टमार्टम का काम नगर के एक ठेकेदार से कराया जाता है।ठेकेदार द्वारा शव का विच्छेदन करने के एवज में 3 हजार से पांच हजार की राशि की मांग मृतक के परिजनों से की जाती है।मृतक के परिजन किसी न किसी तरह ठेकेदार द्वारा मांगी गई राशि की व्यवस्था करते है।क्योंकि वह जानते है कि राशि की व्यवस्था नही कर पाए तो पोस्टमार्टम नही हो पाएगा और शव पड़ा रहेगा।पोस्टमार्टम कराने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करने को लोग मजबूर होते रहते है।यदि मृतक के परिवार वाले राशि की व्यवस्था नही कर पाते तो उन्हें पोस्टमार्टम करने वाले द्वारा पैसे के लिए दबाव बनाया जाता है।यह घटना रोजना देखने को मिल ही जाती है। शव पोस्टमार्टम के लिए गरीब परिवार आखिर कब तक लूटते रहेंगे अधिकारी भी नही बता पा रहे है।

डॉक्टर की मनमानी गांव वालों की बनी परेशानी

 

गुलाब दीवान@BBN24 : 

बिलाईगढ़ :- डॉक्टर की मनमानी गांव वालों की परेशानी बन कर रह गई है. इन दिनों मौसम में परिवर्तन होने से गांव वालों को कई बीमारी से जूझना पड़ रहा है. लेकिन डॉक्टरों के मनमानी के चलते गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र होने के बाद भी गांव वालो को झोलाछाप डॉक्टरों के पास आपना इलाज कराने पर मजबूर हैं. जिसकी शिकायत गांव वालों ने कई बार बिलाईगढ़ बीएमओ से किया है. लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नही हुआ जिससे लापरवाह डॉक्टरो का मनोबल बड़ा हुआ है.


बिलाईगढ़ ब्लाक के सुतिउरकुली में रहने वाले ग्रामीणों को मौसम में परिवर्तन होने से इन दिनों कई बीमारी से जूझना पड़ रहा है. जब कि गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र होने के बाद भी डॉक्टरों के मनमानी के चलते। झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज कराने पर मजबूर हैं। ग्राणीणो ने बताया की डॉक्टर अपने मनमानी करते है जब मन करता है तब उपस्वास्थ्य केंद्र आता हैं और मन लगता है तो इलाज करता हैं। जिसके चलते गांव वालो को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास इलाज करना पड़ता हैं। जिसकी शिकायत गांव वालों ने कई बार बीएमओ से किया है। उसके बाद भी कोई कार्रवाई नही हुआ है. जिसके कारण गांव वाले परेशान होकर झोलाछाप डॉक्टरों के पास अपना इलाज कराने पर मजबूर हैं। अभी तो चार दिनों से सुतिउरकुली के उपस्वास्थ्य केंद्र में ताला लगा है। डॉक्टर इतने ज्यादा चतुर हैं कि अंदर से ताला लगा दिये हैं। ताकि कोई आने जाने वाले गांव वालों को लगे कि डॉक्टर उपस्वास्थ्य के में उपस्थित है। लेकिन 4 दिनों से डॉक्टर उपस्वास्थ्य केंद्र आये ही नही है। ग्रामीणों ने डॉक्टर के ऊपर बदसलूकी एवं गाली गलौज का भी आरोप लगाया है.

जब इस संबंध में हमने दूरभाष से प्रभारी बीएमओ एस के खूंटे से जानकरी चाही तब उनके द्वारा कोई भी जानकरी नही दिया गया. ऐसे में अस्पताल में ताला लगा कर एक ओर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तो दूसरी ओर उप स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत डॉक्टरों के ऊपर उचित कार्यवाही नही होने से लापरवाह डॉक्टरों का मनोबल बढ़ा हुआ है. जिससे गांव के लोग परेशान

यहाँ बदहाल स्कुल में पढ़े रहे है बच्चे ..

 

 


 भाटापारा के शासकिय प्राथमिक शाला नवीन मातदेवालय के छात्र-छात्राओ का नही है कोई सुध लेने वाला, इस स्कुल मे न तो छात्र-छात्राओ के लिए खेलने का मैदान है और न ही पढाने के लिए पर्याप्त शिक्षक, विधुत विभाग ने भी स्कुल के सामने लगा दिए है दो बडे बडे ट्ांसफार्मर।


आप को बता दे कि भाटापारा के शासकिय प्राथमिक शाला नवीन मातदेवालय मे कक्षा पहली से पाॅचवी तक की कक्षाएं है जहा 99 छात्र -छात्राओ की संख्या है तथा जुलाई माह मे अभी और भी छात्र छात्राओ का भर्ति होना है, इस स्कुल मे केवल दो शिक्षक है जिसमे एक हेडमास्टर के पद पर है , यह व्यवस्था बिते वर्ष 2017-18 व 2018-19 से चले आ रही है लेकिन स्कुल को पर्याप्त शिक्षक नही मिल पाई है।

नियम:- नियम कहता है कि 35 छात्र-छात्राओ के लिए एक शिक्षक अनिर्वाय है लेकिन , नियम का पालन करवाने वाले हि नियम की धज्जीया उडा रहे है , और जिले के अधिकारी पिछले दो वर्षो से आंख मुन्दे बैठे है। 



आप को बता दे कि शिक्षा मे खेल का बडा महत्व है ऐसे कहा जाता है लेकिन भाटापारा के शासकिय प्राथमिक शाला नवीन मातदेवालय के छात्र-छात्राओ को खेल के लिए मैदान तो बहुत दुर की बात है सही ढग से उचित जगह भी नही है, अगर स्कुल से बाहर निकलना है या स्कुल के अन्दर जाना है तो इस स्कुल के मासुम छात्र-छात्राओ बहुत ध्यान से आना जाना पडता है, क्योकि इस स्कुल के सामने जब शहर मे रोड चैडीकरण हो रहा था तो बडे बडे गहरे नाली बनाए गए है जो इस स्कुल के मुख्य दरवाजे के सामने है, जहा स्वच्छ भारत के सपना को चुर-चुर करते देखा जा सकता है


ठेकेदार ने गहरे नाली बनाकर यू ही बीना कव्हर लगाए छोड दिया है जिसमे गंदगी से नाली बजबाजा रही है, छात्र-छात्राओ का ध्यान थोडा भी भटका तो सिधे गंदगी मे, 
आप को बता दे भाटापारा के शासकिय प्राथमिक शाला नवीन मातदेवालय मे शिक्षा विभाग अपने जिम्मेदारी से भागता नजर आ रहा है तो विधुत विभाग भी छात्र-छात्राओ को तकलिफ देने मे कोई कसर नही छोडी है , विधुत विभाग स्कुल के सामने ही दो बडे बडे ट्ासंफारमर लगा दिया है, 
जब सहायक शिक्षक राम गोपाल वर्मा से पुछे की ट्ांसफारमर पर शिक्षा विभाग से किसी को तकलिफ नही हुई तो उन्होने बताया कि जब विधुत विभाग के लोगो के द्वारा यहा खम्भा लगाने आए तो ब्लाक शिक्षा अधिकारी व उच्च अधिकारियो को जानकारी दी गई थी लेकिन किसी के द्वारा कोई भी उचित कदम नही उठाया गया। 

आप को बता दे कि जब इन सभी मामलो को लेकर  ब्लाक शिक्षा अधिकारी अमृत लाल धृतलहरे के पास पहुंचे तो उन्होने रटा रूटाया जवाब दिया, कहा सम्बधित विभाग को लिखा पढी किए है अभी तक कोई जवाब नही आया है। 

आब देखना यह होगा कि बिते वर्ष 2017-18 व 2018-19 से चले आ रही बदहाल शिक्षा व्यवस्था और विधुत विभाग की लापरवाही के चलते छात्र-छात्राओ को निजाद कब मिलती है ?