ज्योतिष

आज के दिन डॉक्टर इंजीनियर के साथ राम जैसा पुत्र जरूरी-पं. नवल किशोर

शनि सूर्यवंशी

जांजगीर-चाम्पा जिले के अकलतरा के संजय नगर वार्ड क्रमांक -03 के कार्तिक राम थवाईत के घर पर आयोजित श्री मद देवी भागवत का आयोजन किया गया हैं जिसके व्यासपीठ पं श्री नवल किशोर तिवारी चारपारा बलौदा वाले ने बताया कि आज के समय में घर पर बच्चों को अंग्रेजी का ज्ञान बहुत दिया जाता हैं लेकिन अपनी संस्कृति भूल जाते हैं अगर घर पर बच्चों को संस्कार दिया जाये तब वह भी श्री रामचंद्र जी के समान बन सकते हैं अधिकर हम देखते हैं कि हर घर बच्चों को इंजीनियर, डॉक्टर बनाने की सोचते हैं लेकिन बच्चे को संस्कारित नही किया जाता बच्चे भी इंजीनियर, डॉक्टर बनने की होड़ में व्यस्त हो जाते हैं जिससे वे वेद, शास्त्रों से दूर होते चले जा रहे हैं । श्री मद देवी भागवत में नगर के सैकड़ो की संख्या में पहुँचकर भागवत कथा का लाभ ले रहे हैं। अमृतरूपी धारा प्रवाह कथा श्रवण करने की श्रेणी में लव सिंह चंदेल, इमरान खान, बसन्त गुप्ता,विनीत गुप्ता, हरिनारायण महोबिया पहुँचकर व्यासपीठ पं श्री नवल किशोर तिवारी जी से आशीर्वाद लिये। देवी भागवत के आचार्य पं श्री मनोज कृष्ण शास्री जी व पं योगेन्द्र तिवारी जी के द्वारा भागवत कथा के साथ साथ प्रतिदिन पूजन एवं हवन कराया जा रहा हैं। कार्तिक राम थवाईत के द्वारा आग्रह किया कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में भागवत कथा में पहुँचकर कथा श्रवण करने की अपील की गई हैं।

संसार में मां की ममता हे सर्वोपरि - पं.गीताप्रसाद तिवारी

 

हेमंत जयसवाल @ BBN24NEWS.COM

 

 बिर्रा में श्रीमद देवी भागवत का तीसरे दिन महिषासुर वध की कथा

 

 बिर्रा-भगवान की पूजा अर्चना करने से जो फल प्राप्त होता है उससे सौ गुना मातारानी की पूजन-अर्चन से प्राप्त होता है क्योंकि माता की महिमा अपार है।उक्त बातें नवरात्रि पर्व के सुअवसर पर जीवेन्द्र कश्यप परिवार द्वारा आयोजित संगीतमय  श्रीमद देवी भागवत कथा के तृतीय दिवस की कथा में महिषासुर मर्दन की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए व्यासाचर्य पं.गीताप्रसाद तिवारी ने कहा।उन्होंने कहा कि माता की वंदना करने से धन के साथ संतान व यशकीर्ति प्राप्त होती है।माता की वंदना सब करते है क्योंकि मां की ममता सर्वोपरि है।कथा के बीच बीच में संगीत के माध्यम से जसगीत में श्रोता झुमते रहते हैं।आज कथा श्रवण करने सह आचार्य पं.जितेन्द्र तिवारी, पं.नेमीशरण तिवारी,पं.ब्रजेश दुबे,मुख्य यजमान श्रीमती कौशिल्या-जीवेन्द्र कश्यप, जीवनलाल यादव,घनश्याम कश्यप, हिरेन्द्र कश्यप,भगवान प्रसाद, कांशीराम, अभिराम, रामकृपाल, राजकुमार, लखनलाल तिवारी, फिरतूराम गुप्ता, फेकूलाल,रामकृष्णो कश्यप, नंदकुमार,उमेश कश्यप, एम के तिवारी, कमल कश्यप, सौखीलाल, शोषकप्रसाद,सुरेशचंद कर्ष,कुलदीप, राजू कश्यप,पेमेन्द्र, पंचराम,राधेश्याम कश्यप, मनोजकुमार सहित भारी संख्या में महिला श्रद्धालु उपस्थित होकर देवी भागवत का श्रवण कर रहे है

 

छतीसगढ़ में एक ऐसा मंदिर जहा तालाब के पानी से छिडकाव करने पर शरीर कि बीमारी व खेतो के फसलो मे लगे कीडे होते है दूर.....पढ़े BBN24NEWS की ये विशेष खबर

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माँ मावली का मंदिर कब और किसने बनवाया इसका कही कोई प्रमाण नही मिलता जनश्रुति है कि पहले राजस्थान से बंजारा जाति के लोग अपने काफिले के साथ गेरू बेचने आया करते थे जो ग्राम सिंगारपुर मे महिनो अपना पडाव डालकर रहते थे और इस मंदिर तथा तलाब का निर्माण उन्ही के द्वारा कराया गया था प्राचीन काल मे यह क्षेत्र मंडला,गढा, कोटा के गोड राजाओ के अधीन था, और गोड आदिवासी जाति के लोग ही रहा करते थे मराठा शासको के आधिपत्य में इस क्षेत्र के आ जाने के पश्चात रघुजी तृतीय ने सन 1827 मे रायपुर के जगदेव साव को इस इलाके के 11 ग्राम इनाम स्वरूप  प्रदान किये थे। जिसमे सिंगारपुर भी एक था तब भाटापारा का अस्तित्व था ही नही और उस समय सिंगारपुर मे माँ मावली का मंदीर था जिसका उल्लेख प्रथम अंग्रेजी गजेटियर सन 1901 मे मिलता था गजेटियर मे अचंल के प्राचीन मंदिरों मे सिंगारपुर की माँ मावली एवं तरेंगा की महामाया का ही उल्लेख है लोगो का कथन है कि मॅा मावली का मंदिर तीन से चार सौ वर्ष पुराना है आज तरेंगा के महामाया मंदीर और सिगारपुर की माँ मावली की ख्याति दिनो दिन बढती जा रही है।  प्राचीन काल से ही दोनो स्थानो पर गोड जाति के पुजारी ही माँ की पुजा अर्चना किया करते थे और आज भी मावली माँ की पुजा अर्चना उन्ही गोड पुजारियो के वंशज करते आ रहे है।

 

आप को बता दे कि जनश्रुति है कि वीरू नाम का बैगा माॅ मावली की पुजा अर्चना किया करता था उसके साथ माॅ मावली बालिका रूप मे बाजार आदि घुमने जाया करती थी वीरू के पश्चात उसके वंशज गुलाल,गंजन,गोपाल पीढी दर पीढी पुजन करते रहे गोपाल बैंगा की बहन  सुखरी बाई थी जो माॅ मावली को अन्नन्त भक्त थी वह प्रति दिन और  रात्रि मे माॅ का पुजन करती थी कहते है कि सुखरी को माॅ का प्रत्यक्ष दर्शन होता था।सुखरी को देखने वाले आज भी अनेक वृद्व मोजुद है ||

NEWS EDIT BY : YASH LATA 

बिर्रा में गृह प्रवेश निमित्त श्रीमद् देवी भागवत कथा 06 अप्रैल से .

हेमंत जयसवाल @BBN24

 नवरात्रि पर्व पर भागवताचार्य पं.गीताप्रसाद तिवारी के मुखारविंद से 

 बिर्रा-स्थानीय दाऊमुहल्ला निवासी  जिवेन्द्र कश्यप परिवार द्वारा नवरात्रि पर्व में नूतन गृह प्रवेश के शुभ अवसर पर 06 अप्रेल से 13 अप्रेल तक श्रीमद्देवीभागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है।कथावाचक भागवताचार्य पं.गीताप्रसाद तिवारी(बिर्रा) तथा  सहयोगी आचार्य पं.जितेन्द्र कुमार तिवारी होंगें।कथा का समय सुबह 09 -से -12 व दोपहर 03-से-06 बजे।प्रथम दिवस 06 अप्रेल को नूतन गृह प्रवेश-पूजन-स्थापना तथा श्रीमद्देवीभागवत महात्म्य,07 को ऐं बीज महिमा, सुदर्शन कथा,रामशक्ति कथा,08 को महिषासुर वध,कृष्णावतार,09 को शुंभ निशुम्भ, वृत्तासूर वध,सुकन्या वृतांत,10 अप्रेल को देवी पुण्य क्षेत्र,हरिश्चंद्र कथा,11को शिव विवाह, मूल प्रकृति वर्णन,12 को तुलसी महिमा,सावित्री वृतान्त, सदाचार, चढोत्री,13 को गायत्री सहस्त्रनाम, यज्ञ-हवन,कन्याभोज आदि से संपन्न होगा।आयोजन को लेकर श्रीमती कौशिल्या देवी-जिवेन्द्र कश्यप, घनश्याम प्रसाद कश्यप, रामकृष्णो कश्यप, भगवान प्रसाद, यादराम, फेंकूलाल, कांशीराम कश्यप, हिरेन्द्र कुमार,उमेशकुमार,देवचंद, चंदराम,नंदकुमार, कुलदीप,अमित एवं समस्त कश्यप परिवार दाऊमुहल्ला जुटे हुए है।

सेमरा में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ

हेमंत जयसवाल @BBN24

 कथावाचक-योगेश उपाध्याय-योगेशानंद-कोडाभाठ वाले 

 नवागढ विकासखंड के गौरव ग्राम सेमरा में नवरात्रि पर्व पर 05 अप्रैल से स्व.श्रीमती पुत्रीबाई गौरहा के पुण्य स्मृति (वार्षिकश्राद्ध) निमित्त श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा का शुभारंभ हुआ।।कथावाचक पं. योगेश उपाध्याय-योगेशानंद महराज(कोडाभाठ वाले) है।कथा का समय दोपहर 03 बजे से राधेकृपा तक।श्रीमद्भागवत कथा का कार्यक्रम इस प्रकार से है। 05 अप्रैल को कलश स्थापना, देव आह्वान व कथा महात्म्य से हुआ।उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कलियुग के लिये मोक्ष का मार्ग प्रसश्त करता है। आज प्रथम दिवस धूंधकारी की कथा का विस्तार से वर्णन किया।कल  06 अप्रैल को राजा परीक्षित जन्म कथा,07 को ध्रुव चरित्र,08 को सती चरित्र व गजेन्द्र मोक्ष कथा, 09 को समुद्र मंथन, वामनावतार, 10 अप्रैल श्रीराम जन्म कथा,11 को श्रीकृष्ण जन्म, बाल लीला,रूख्मणी विवाह, 12 को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष,कथा विश्राम व चढोत्री 13 को तुलसीवर्षा, यज्ञ-हवन-सहस्तरधारा तथा 14 अप्रैल को वार्षिकश्राद्ध होगा।आयोजन को लेकर बनमाली प्रसाद गौरहा,श्यामसुंदर, दूर्गाप्रसाद, संजय,नंदकुमार, गोपेश्वर प्रसाद,कमल,नवल,तारकेश्वर,रामनिवास, टिकेश्वर,रविश,विकास ,प्रशांत,प्रकाश सहित समस्त गौरहा परिवार व परिजन जूटे हुए है।

माया बड़ी विचित्र है और मन बड़ा चंचल है... पूज्या पूजा किशोरी

हेमंत जायसवाल@BBN24 (दुर्गा चौक मौहाडीह द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस की कथा) बिर्रा - संसार की समस्त प्राणी संसार में आते है कर्मवश पर भगवान आते है -करूणावश , जिसका नाम , श्रवण, संकीर्तन, सब मंगलमय है। धरती से पाप का भार उतारने अठाइसें द्वापर युग में भगवान विष्णु का बीसवाँ अवतार लीला पुरूषोत्तम श्रीकृष्ण जी के रूप मे हुआ जिनकी सम्पूर्ण लीलाएं माधुर्यता सें भरी हुई है। भगवान कथा में दिव्य आंनद है, क्यों कि बच्चों कि वह सच्चिदानन्द कि कथा है इससे केवल मनोरंजन की नहीं मनोभंजन भी करना चाहिए। कलयुग के ताप और दोष से बचने के लिए भागवत एक औषधि ही नहीं वह वैघ भी है। ये बाते सिलादेही में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कृष्णावतार का वर्णन करते हुए व्यासपीठ सें पूज्या पूजा किशोरी जी ने कही द्वारा समुद्र मत्थन वामन अवतार श्री राम जन्म की कथा सुनाई गई, उन्होंने श्रोताओं से कहा संसार में मांगने वाला ही हमेंशा छोटा कहाता है देनेवाला तो दाता होता है। वामन भगवान भी राजा बलि सें मांगने गये तो छोटा ही बने और राजा बलि को दाता का सम्मान दिया। बलि ने अपना सर्वस्य समर्पण कर दिया तो भगवान वामन ने कहा सर्वस्व समर्पण का रखने पर मैं ऐसे दाता का सदैव ऋणी बन जाता हूँ। दानकी भूमि है जहां राम की संस्कृति है रोम की नहीं। श्रोताओं को प्रतिदिन जीवन्त झांकियों के साथ कथा ज्ञान एवं संकीर्तन का लाभ मिल रहा हैं। चौथे दिन की कथा में शैलेन्द्र पटेल, छोटू महराज, राजकुमार पटेल, प्यारेलाल पटेल, नरसिंग पटेल, माखन पटेल, कमलकिशोर साहू, जितेंद्र पटेल, दल्लू पटेल, छेदी पटेल, गेंदलाल, रतिराम पटेल, कौशिक पटेल, ,सालिक राम, संजू साहू, एम.एल. साहू, रामखिलावन वैष्णव, बलद राम, ओमप्रकाश पटेल,तीजूराम- श्रीमतीमोहनकुमारी साहू, अमृत बाई, दुरपति पटेल, जीवन पटेल, हेमंत जायसवाल, नवधा केवट सहित सैकडो श्रोता उपस्थित थे।

आत्मा अदृश्य है जो हमारे बीच होकर भी दिखाई नहीं देता-पं.राजा गुरूद्वान

स्व.पंडित कृष्णकुमार तिवारी को दी गई श्रद्धांजलि बिर्रा-भगवान परसुराम ब्राह्मण विकास समीति जांजगीर-चांपा के जिला मिडिया प्रभारी जितेन्द्र तिवारी के पिताश्री तथा दाऊमुहल्ला बिर्रा के प्रतिष्ठित नागरिक व राजपुरोहित पं.कृष्णकुमार तिवारी जी के निधन पर निज निवास में श्रद्धांजलि कार्यक्रम रखा गया था।जिन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।आचार्य पं.राजा गुरूद्वान ने स्व.कृष्णकुमार तिवारी को सहज ,सरल व्यक्तित्व के धनी बताते हुए कहा कि इस इस संसार में हर जीव का जिस प्रकार जन्म होता है वैसे ही मृत्यु अनिवार्य है।लोगों का आना जाना लगा रहता है।इस शरीर से आत्मा ही जाती है क्योंकि आत्मा नश्वर है।जो हमारे बीच रहकर भी दिखाई नहीं देता।श्र्द्धांजलि देते हुए पं.गीताप्रसाद तिवारी ने शोकाकुल परिवार को इस दुखद समय में भगवान से सहन करने की क्षमता प्रदान करने की बात कहकर कहा कि हम किसी के खोने पर कितना भी प्रयत्न करें पर वह वापस नहीं आता अत:शोक का त्याग करना चाहिए।पं.धनंजय प्रसाद गौरहा ने कहा कि जिस प्रकार से पंछी रात में किसी वृक्ष का सहारा लेकर विश्राम करते है व सुबह अपने काम मे लग जाता है वैसे ही यह मानव शरीर में बसी आत्मा है जो इस शरीर से निकलकर अन्य शरीर को धारण करता है।आज उनकी कमी इस परिवार, इस गांव व क्षेत्र को खल रही है।पं. तुलसीप्रसाद पांडेय ने कहा कि संसार एक आवागमन है जो आता है उसे जाना ही पडता है अतः इस आवागमन की सत्यता को नकारा नही जाता।व्याख्याता पं.मनोजकुमार तिवारी ने कहा कि स्व.श्री तिवारी जी बहुत ही शांत स्वाभाव के थे उनकी कमी इस परिवार व विप्र समाज के लिए अकल्पनीय क्षति है।हम उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करते है।

इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पं.गिरजाशंकर दुबे,लाल रेवतीरमण सिंह, डां ईश्वर प्रसाद शुक्ला, पं.ब्रह्मा प्रसाद पांडेय, बालगोविंद तिवारी, पं. लक्ष्मीप्रसाद गौरहा, मुरारीलाल तिवारी, दूर्गाप्रसाद तिवारी,चंद्रशेखर तिवारी, छविकुमार, रूपेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार, दूर्गाप्रसाद, भरतलाल तिवारी,श्रीकांत तिवारी,राजीव तिवारी,योगेश उपाध्याय,सुखनंदन पांडेय, प्रेम शर्मा,भागवत पांडेय, चित्रभानु पांडेय, बलराम सिंह, दिलीप तिवारी, बिनोद, प्रमोद,संजय तिवारी, गुलाबचंद, अविनाश, विकास, रविकांत,सहित शोकाकुल परिवार के सदस्य व ग्रामवासी उपस्थित रहे।अंत में दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि सभा का समापन किया।

बसंत पंचमी देने वाली है दस्तक, ऐसे करें मां सरस्वती की पूजा और वंदना

रायपुर  हिन्दू धर्म की प्रमुख देवियों में से एक हैं। वे ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं जो विद्या की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। इनका नामांतर 'शतरूपा' भी है। इसके अन्य पर्याय हैं, वाणी, वाग्देवी, भारती, शारदा, वागेश्वरी इत्यादि। ये शुक्लवर्ण, श्वेत वस्त्रधारिणी, वीणावादनतत्परा तथा श्वेतपद्मासना कही गई हैं। इनकी उपासना करने से मूर्ख भी विद्वान् बन सकता है। माघ शुक्ल पंचमी को इनकी पूजा की परिपाटी चली आ रही है। देवी भागवत के अनुसार ये ब्रह्मा की स्त्री हैं।

सरस्वती माँ के अन्य नामों में शारदा, शतरूपा, वीणावादिनी, वीणापाणि, वाग्देवी, वागेश्वरी, भारती आदि कई नामों से जाना जाता है। देवी सरस्वती का पूजन करने के लिए बसंत पचंमी की इंतजार किया जाता है। माघ महीने में पूर्वी भारत में इसे बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है। बंग्लादेश के पश्चमी भाग और नेपाल के कुछ हिस्सों में बसंत पचंमी मनाई जाती है। इस दिन महिलाएं पूर्वी भारत में पीले कपड़े पहनती हैं। कई जगहों पर इस महीने में गुप्त नवरात्रि भी मनाई जाती है। बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इस बार बसंच पंचमी 10 फरवरी को पड़ने वाली है। 

संकष्टी चतुर्थी आज, 48 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग, इस विधि से करें पूजन, होंगे सारे काम पूरे

इस दिन कहते हैं कि मां सरस्वती का अविर्भाव हुआ था। इस दिन पले रंग क वस्त्र पहनकर पीले रंग के पकवान खाते हैं। साथ ही ये दिन सबसे शुभ माना जाता है इसलिए सभी शुभ और मंगलकारी काम इस दिन किए जाते हैं। मां सरस्वती को ज्ञान और बुद्धि की देवी माना जाता है इसलिए इस दिन बच्चों को जोकि पढ़ाई करते हैं उन्हें अच्छी पुस्तकें भेंट की जा सकती हैं। साथ ही सरस्वती मां वीणा वादिनी थीं, इस दिन गायन में रुचि रखने वालों को भी वाद्य यंत्र भेंट दिया जा सकता है। 

बसंत पंचमी के साथ ही मौसम में भी बहार आ जाती है। इससे सरसों के फूल खिल जाते हैं और आम के पेड़ों पर बौर आ जाती हैं और साथ ही ठंड जाने के साथ मौसम खिल उठता है। 

कैसे होता है बसंत पंचमी पर पूजन?

इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है साथ ही उन्हें कमल के फूल अर्पित किए जाते हैं। 

इस दिन पुस्तकों और वाद्य यंत्रों की पूजा की जाती है। 

इस दिन दान करने का बहुत महत्व है। गरीब बच्चों को और जरुरतमंदों को दान देने से सौभाग्य बढ़ता है। इस दिन अध्ययन से संबंधी कुछ दान करने से ज्ञान में बढ़ोत्तरी होती है और मां सरस्वती का आर्शिवाद मिलता है। 

बगलामुखी जयंती: ऐसे करें उपासना, शत्रु बाधा से मिलेगी मुक्ति

दस महाविद्या में आठवीं स्वरूप देवी बंगलामुखी का है. माता बंगलामुखी पीली आभा से युक्त हैं इसलिए इन्हें पीताम्बरा कहा जाता है. बंगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है. बंगलामुखी जयंती 23 अप्रैल 2018 (सोमवार) को है. इनका प्राकट्य स्थान गुजरात का सौराष्ट्र में माना जाता है. मां बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं. इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है. माता बंगलामुखी की पूजा तंत्र विधि की पूजा होती है. इसलिए इनकी पूजा बिना किसी गुरु के निर्देशन में नहीं करनी चाहिए.

बंगलामुखी पूजा के नियम और सावधानियां

शास्त्रों के अनुसार माँ बंगलामुखी की पूजा शत्रु के नाश के लिए नहीं करनी चाहिए.

बंगलामुखी की पूजा में पीले आसन, पीले वस्त्र, पीले फल और पीले भोग का प्रयोग करना चाहिए.

माँ बंगलामुखी के मंत्र जाप के लिए हल्दी की माला का प्रयोग करना चाहिए.

इनकी पूजा के लिए उपयुक्त समय संध्याकाल या मध्यरात्रि मानी गई है.

बगलामुखी जयंती के दिन माँ बगलामुखी को दो गाँठ हल्दी अर्पित करें.माँ से शत्रु और विरोधियों के शांत हो जाने की प्रार्थना करें. एक हल्दी की गाँठ अपने पास रख लें. दूसरी गाँठ को जल में प्रवाहित कर दें.ऐसा करने से हर प्रकार के शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है.

आज देशभर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है जाने कैसे मानते है भाई दूज

 रायपुर आज देशभर में भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा. कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है. रक्षाबंधन की ही तरह यह पर्व भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है.इस दिन बहन भाई का तिलक कर उसके दीर्घायु की प्रार्थना करती है. भाई भी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है. बहन देवता की तरह अपने प्यारे भाई की आरती उतरती है.

बहन चावल के आटे से चौक बनाती है. इस पर भाई को बैठाकर उसकी पूजा करती है. भाई की हथेली पर चावल का घोल लगाके पान, सुपारी, पुष्प इत्यादि रखकर उसके हाथ पर जल गिराती है. अब बहन भाई की आरती उतरेगी और उसके उसके हाथों में कलावा बांधेगी. इसके बाद बहन भाई को मिठाई खिलाएगी. भाई अगर बड़ा है तो बहन उसका आशीर्वाद लेगी और अगर भाई छोटा है तो वह बहन का आशीर्वाद लेगा.
 ऐसा मन जाता है की 
भगवान सूर्य नारायण की पत्नी का नाम छाया था. उनकी कोख से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था, यमुना यमराज से बड़ा स्नेह करती थी. वह उससे बराबर निवेदन करती कि इष्ट मित्रों सहित उसके घर आकर भोजन करो. अपने कार्य में व्यस्त यमराज बात को टालता रहा, कार्तिक शुक्ला का दिन आया. यमुना ने उस दिन फिर यमराज को भोजन के लिए निमंत्रण देकर, उसे अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर लिया.
यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं. मुझे कोई भी अपने घर नहीं बुलाना चाहता, बहन जिस सद्भावना से मुझे बुला रही है. उसका पालन करना मेरा धर्म है. बहन के घर आते समय यमराज ने नरक निवास करने वाले जीवों को मुक्त कर दिया. यमराज को अपने घर आया देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उसने स्नान कर पूजन करके व्यंजन परोसकर भोजन कराया. यमुना द्वारा किए गए आतिथ्य से यमराज ने प्रसन्न होकर बहन को वर मांगने का आदेश दिया.

यमुना ने कहा कि भद्र! आप प्रति वर्ष इसी दिन मेरे घर आया करो, मेरी तरह जो बहन इस दिन अपने भाई को आदर सत्कार करके टीका करें, उसे तुम्हारा भय न रहे. यमराज ने तथास्तु कहकर यमुना को अमूल्य वस्त्राभूषण देकर यमलोक की राह की. इसी दिन से पर्व की परम्परा बनी. ऐसी मान्यता है कि जो आतिथ्य स्वीकार करते हैं, उन्हें यम का भय नहीं रहता. इसीलिए भैयादूज को यमराज तथा यमुना का पूजन किया जाता है.
भाई दूज मुहूर्त
सुबह- 9:20 से 10:35 तक
दोपहर-1:20 से 3:15 तक
शाम-4:25 से 5:35 और 7:20 से रात 8:40 तक