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रिअल टाइम अल्ट्रासाउंड गाइडेड तकनीक से हुआ लीवर एब्सेस का उपचार ....रेडियोडाग्नोसिस व मेडिसीन रोग विभाग में हुआ इलाज

रायपुर. :-पं. जवाहर लाल नेहरु स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से सम्बद्ध डाॅ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के रेडियोडायग्नोसिस तथा मेडिसीन विभाग के डाॅक्टरों द्वारा हाल ही में एक विशेष प्रकार की चिकित्सा प्रक्रिया के जरिये मरीज को नई जिंदगी दी है। मरीज को लीवर एब्सेस नामक बीमारी थी जिसका उपचार पिन होल तकनीक से करते हुए लीवर में स्थित फोड़े से मवाद निकाला गया। इस प्रक्रिया को रिअल टाइम अल्ट्रासाउंड गाइडेड ट्रीटमेंट कहते हैं अर्थात् अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिये वास्तविक स्थिति का पता लगाने के साथ-साथ त्वरित उपचार करना। मरीज अभी मेडिसीन रोग विभाग में चिकित्सकों की देख-रेख में भर्ती है। लीवर का फोड़ा या एब्सेस एक ऐसी बीमारी है जिस दौरान लीवर में कोई गांठ या फोड़ा हो जाता है। इसे लीवर एब्सेस या जिगर का फोड़ा भी कहते हैै। इस दौरान लीवर में बहुत अधिक मात्रा में मवाद या पस एकत्रित हो जाता है। इसके लक्षण आमतौर पर लोगों को समझ नहीं आते क्योकि वो इसे सामान्य पेट दर्द समझ लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है।

रेडियोडायग्नोसिस विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. एस. बी. एस. नेताम कहते हैं कि वर्तमान में नई तकनीक के आ जाने से रेडियोडायग्नोसिस के उपकरणों जैसे- एक्स रे, सोनोग्राफी तथा सीटी स्कैन जैसी मशीन का उपयोग न केवल जांच में बल्कि उपचार में भी किया जा रहा है। इनकी सहायता से जोड़ो-मांसपेशियों , किडनी व पित्ताशय की पथरी, एबलेशन, ट्यूमर और सिस्ट इत्यादि बीमारी का उपचार तथा जांच के लिए उत्तकों के नमूने लेने की सुविधा भी उपलब्ध है। रेडियोडायग्नोसिस का क्षेत्र काफी व्यापक है। यह दिनों-दिन उन्नत होते जा रहा है।

*पेट दर्द की समस्या के साथ पहुंचा मरीज

बैकुंठपुर कोरिया का 52 वर्षीय एक मरीज पेट दर्द और तेज बुखार के साथ 16 जुलाई को अम्बेडकर अस्पताल के मेडिसीन रोग विशेषज्ञ डाॅ. आर. के. पटेल के पास पहुंचा। मरीज की स्थिति को देखते हुए डाॅ. पटेल ने तुरंत प्रारंभिक जांच व सोनोग्राफी की सलाह दी। सोनोग्राफी करवाने के लिए मरीज रेडियोडायग्नोसिस के इंटरवेंशन रेडियोलाॅजिस्ट डाॅ. विवेक पात्रे के पास पहुंचा जहां पर डाॅ. पात्रे ने गंभीरता के आधार पर मरीज की तुरंत सोनोग्राफी की जिसमें मरीज के लीवर के अंदर बहुत बड़ा फोड़ा (एब्सेस) दिखाई दिया। मरीज की स्थिति बेहद गंभीर होने के कारण डाॅ. पात्रे ने लीवर में स्थित फोड़े से मवाद को तुरंत निकालने का निर्णय लिया।

*पिन होल तकनीक से किया प्रोसीजर

सबसे पहले मरीज के परिजनों को मरीज की गंभीर स्थिति के बारे में समझाते हुए हाई रिस्क कंसेट लिया। उसके बाद अल्ट्रासाउंड मशीन के मार्गदर्शन में फोड़े पर नीडिल डालते हुए वायर की सहायता से रास्ता बनाकर उसमें नली डालकर मवाद को बाहर निकाला। मवाद अत्यंत गाढ़ा था इसलिए उसको पतला करने के लिए डाॅ. विवेक पात्रे ने नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए उसमें दवा डालकर मवाद को पतला किया। यदि मवाद को पतला नहीं करते तो वह ट्यूब की सहायता से बाहर नहीं निकलता। फोड़े से करीब ढाई से तीन लीटर मवाद निकला। इस प्रक्रिया के लिये मरीज को बेहोशी की जरूरत नहीं पड़ी। केवल उसी स्थान को सुन्न किया गया जहां से मवाद निकालना था। मरीज का इलाज पिन होल तकनीक से किया गया। पिन होल तकनीक अर्थात् बिना चीर-फाड़ के नीडिल की सहायता से लीवर के मवाद निकालने की एक प्रक्रिया। मरीज के उपचार से संतुष्ट उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीना द्विवेदी का कहना है कि मेरे पति यहां बेहोशी की हालत में आये थे। उपचार के बाद आज वे बिलकुल स्वस्थ्य हैं और डाॅक्टरों ने उनका त्वरित इलाज किया इससे हम लोग खुश हैं।

शुरूआत में नजर नहीं आते लक्षण

मेंडिसीन रोग विशेषज्ञ डाॅ. आर. के. पटेल कहते हैं कि प्रारंभिक दौर में लीवर से संबंधित बीमारियों का कोई लक्षण नजर नहीं आता इसलिए 30 से 40 साल की उम्र के बाद सभी को साल में एक बार लीवर फंक्शन टेस्ट और सोनोग्राफी जरूर करवाना चाहिए। पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे पेट में दर्द, कब्ज या लूज मोशन और वोमिटिंग, हल्का बुखार, भोजन में अरुचि, थकान और बेचैनी, वजन का घटना लीवर से सम्बन्धित बीमारी के लक्षण हैं। बैक्टीरिया के लिए रक्त का कल्चर परीक्षण, लीवर बायोप्सी, लीवर इन्फेक्शन परीक्षण, सीबीसी इत्यादि जांच महत्वपूर्ण होते हैं। पेट के अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से लीवर एब्सेस की जांच की जाती है। अगर लीवर में कोई जख्म हो तो शुरुआत में मरीज को एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं, जिससे वह घाव सूख जाता है। अगर तकलीफ ज्यादा बढ़ जाए तो खास तरह की नली या सीरिंज द्वारा उसके पस को बाहर निकाला जाता है। लीवर एब्सेस के मरीज उपचार के बाद पूर्णतः स्वस्थ हो जाते हैं। उपचार के बाद मरीज को समय-समय पर लीवर फंक्शन टेस्ट/एल. एफ. टी. जरूर करवाना चाहिए।

शरीर सबसे बड़ी अंतः स्त्रावी व महत्वपूर्ण ग्रंथि लीवर

लीवर मानव शरीर की सबसे बड़ी अंतः स्त्रावी ग्रंथि और मानव शरीर का दूसरा सबसे बड़ा अंग है। वयस्क व्यक्ति में लीवर का वजन 1.3 से 1.6 किलोग्राम तक होता है। यह रक्त में फैट, अमीनो एसिड और ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखता है और शरीर को इन्फेक्शन और हैमरेज से भी बचाता है। लीवर में आयरन, जरूरी विटामिंस और केमिकल्स का संग्रह होता है और यहीं से शरीर की जरूरत के मुताबिक इन तत्वों की आपूर्ति होती है। आकस्मिक रूप से जब भी शरीर को एनर्जी की जरूरत होती है तो यह स्टोर किए गए कार्बाेहाइड्रेट को ग्लाइकोजेन में परिवर्तित करके शरीर को तुरंत एनर्जी देता है।

कोर्ट की लंबी तारिखो और पेशी के् कारण आप ने इंसान को बरसो फैसले का इंतजार करते देखा होगा,लेकिन ये कहानी उन तीन कछुओ की..पढ़े पूरी खबर

सूर्यकान्त यादव :

राजनांदगांव-- कोर्ट की लंबी तारिखो और पेशी के् कारण आप ने इंसान को बरसो फैसले का इंतजार करते देखा होगा,लेकिन ये कहानी उन तीन कछुओ की है,जो रिहाई का फैसला आने के इंतजार मे चार साल से एक पानी(सिनटेक्स पानी टंकी) की टंकी मे जीवन गुजार रहे है...जब तक कोर्ट से रिहाई के फैसले की काफी वन विभाग तक नही पहुचती इन्हे...यही रहना पडेगा...दरासल ये कछुए राजनांदगाँव के फारेस्ट डिपो मे सितम्बर 2015 से रखे गए है...जिनकी निगरानी मे एक डिप्टी रेंजर सहित वन अमले के 4 कर्मचारीयो को लगाया गया है..जो 24 घंटे इन कछुओ की निगरानी करते है।

इन कछुओ को बसंतपुर पुलिस ने 6 आरोपीयो से बरामद किया था...जो तंत्र मंत्र से नेट (रूपये) की बारिश करने के अंधविश्वास मे इन्हे लेकर आये थे....पुलिस ने रेड डाली और सभी 6 आरोपीयो को गिरफ्तार किया इनके साथ बतौर साक्ष्य इन चार कछुओ को रखा गया...जिसमे कुछ दिन बाद चार मे से एक कछुए की मौत हो गई थी....मामले मे आरोपीयो को तो कोर्ट से जमानत मिल गई,...लेकिन ट्रायल जारी है...ऐसे मे कभी भी इन कछुओ को बतौर साक्ष्य प्रस्तुत तकना पड सकता है...इसके चलते 2015 मे बरामद किये गए इन कछुओ को अब तक वन विभाग की निगरानी मे रखा गया है....कछुओ को बचाये रखने दाना पानी का खर्च भी अधिकारी उठा रहे है।

इस मामले मे पुलिस को कोर्ट मे हुए फैसले की कांपी वन विभाग को सौपनी चाहिए वही ऐसे मामलो मे जो भी वन्य जीव आरोपीयो के कब्जे से बरामद होते है,वो शासन के आधिन होते है...वन विभाग चाहे तो संरक्षित क्षेत्र मे वन जीवो को छोड सकता है...वही वन्य जीव सरक्षण अधिनियम के तहत इन जीवो को सरक्षित रखना है..वही कानुनी नजरो मे वन विभाग को इन कछुओ को अपने पास रखना पडेगा जब तक कोर्ट का फैसला नही आ जाता..अंधविश्वास के चलते लोग आज भी ऐसे वन्य जीव और जंतुओ को तंत्र विधाया मे उपयोग करते है...और कन्ही ना कन्ही तो देश मे ऐसी स्थिती बनती है...कि जानवरो का बली भी दिया जाता है.....लोग अंधविश्वास और पैसे के लालच मे इंतने अंधे हो जाते है,कि उनको अपने स्वार्थ के अलावा कुछ भी नही दिखता है।

 

नंदी के दूध पीने को लेकर उमड़ा जनसैलाब,,पढ़े ये अनोखी खबर

आशीष कश्यप :

अम्बिकापुर:- अम्बिकापुर में भगवान भोले नाथ के सामने स्थापित होने वाला नंदी भगवान की मूर्ती दूध और पानी पीने का मामला सामने आया है। मामला अम्बिकापुर के गंगापुर इलाके का है। नंदी के दूध और पानी पीने की बात जंगल में आग की तरह पूरे शहर में फैल गई है। कुदरत के इस अनोखे दृश्य को देखने मंदिर में लोगों का तांता लग गया है। 20 साल पुराने इस मंदिर के पुजारी संतोष तिवारी का कहना कि ऐसा पहली बार हुआ है और ये किसी चमत्कार से कम नहीं है। गंगापुर इलाके के तुलसी चौक के पास स्थित शिव मंदिर में जब संध्या आऱती के वक्त पूजा पाठ करने वाले लोगों को ये अहसास हुआ कि नंदी जल पी रहे हैं तो लोगों की भीड़ मंदिर में इसे देखने उमड़ने लगी। लोगों का मानना है कि भोलेनाथ की हमने इतनी सेवा की है कि वो साक्षात मंदिर में आ गए है। लोगों की मानें तो ये उनके लिए चमत्कार है।

यहाँ है छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी और छत्तीसगढ़ का गुप्त प्रयाग ...पढ़े ये विशेष रिपोर्ट

 संतोष साहू ( विशेष रिपोर्ट )

 

शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ में महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के त्रिधारा संगम के तट पर स्थित प्राचीन एवं विख्यात कस्बा है। यह क़स्बा जांजगीर-चाम्पा जिले में स्थित है। इसे छत्तीसगढ़ का गुप्त प्रयाग भी कहते है।

इतिहास : इस स्थान का वर्णन महाकाव्य रामायण में भी है। इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने शबरी नमक कोल आदिवासी महिला के जूठे बेर खाये थे। शबरी की स्मृति में 'शबरी-नारायण` नगर बसा है। यह स्थान बैकुंठपुर, रामपुर, विष्णुपुरी और नारायणपुर के नाम से विख्यात था। शिवरीनारायण स्थित शबरीनारायण मंदिर का निर्माण शबर राजा द्वारा कराया गया मानते हैं। यहाँ ईंट और पत्थर से बना ११-१२ वीं सदी केशवनारायण मंदिर का मंदिर है। चेदि संवत् ९१९ का 'चंद्रचूड़ महादेव'' का एक प्राचीन मंदिर भी है। महानदी के तट पर महेश्वर महादेव और कुलदेवी शीतला माता का भव्य मंदिर, बरमबाबा की मूर्ति और सुन्दर घाट है। जिसका निर्माण निर्माण संवत् १८९० में मालगुजार माखन साव के पिता श्री मयाराम साव और चाचा श्री मनसाराम और सरधाराम साव ने कराया है।

किंवदंती : एक किंवदंती के अनुसार शिवरीनारायण के शबरीनारायण मंदिर और जांजगीर के विष्णु मंदिर में छैमासी रात में बनने की प्रतियोगिता थी। सूर्योदय के पहले शिवरीनारायण का मंदिर बनकर तैयार हो गया इसलिये भगवान नारायण उस मंदिर में विराजे और जांजगीर का मंदिर को अधूरा ही छोड़ दिया गया जो आज उसी रूप में स्थित है।

रामायण में एक प्रसंग आता है जब देवी सीता को ढूंढते हुए भगवान राम और लक्ष्मण दंडकारण्य में भटकते हुए माता शबरी के आश्रम में पहुंच जाते हैं। जहां शबरी उन्हें अपने जूठे बेर खिलाती है जिसे राम बड़े प्रेम से खा लेते हैं। माता शबरी का वह आश्रम छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में शिवरीनारायण मंदिर परिसर में स्थित है। महानदी, जोंक और शिवनाथ नदी के तट पर स्थित यह मंदिर व आश्रम प्रकृति के खूबसूरत नजारों से घिरे हुए है।

शबरी माता का आश्रम : शिवरी नारायण मंदिर के कारण ही यह स्थान छत्तीसगढ़ की जगन्नाथपुरी के नाम से प्रसिद्ध हुआ है | मान्यता है कि इसी स्थान पर प्राचीन समय में भगवान जगन्नाथ जी की प्रतिमा स्थापित रही थी, परंतु बाद में इस प्रतिमा को जगन्नाथ पुरी में ले जाया गया था । इसी आस्था के फलस्वरूप माना जाता है कि आज भी भगवान जगन्नाथ जी यहां पर आते हैं |शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में आता है। यह बिलासपुर से 64 और रायपुर से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान को पहले माता शबरी के नाम पर शबरीनारायण कहा जाता था जो बाद में शिवरीनारायण के रूप में प्रचलित हुआ।

शिवरीनारायण मंदिर : शिवरीनारायण कहलाता है गुप्त धाम : देश के प्रचलित चार धाम उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम्, पूर्व में जगन्नाथपुरी और पश्चिम में द्वारिका धाम स्थित हैं। लेकिन मध्य में स्थित शिवरी नारयण को ”गुप्तधाम” का स्थान प्राप्त है। इस बात का वर्णन रामावतार चरित्र और याज्ञवलक्य संहिता में मिलता है।

शबरी का असली नाम श्रमणा था, वह भील सामुदाय के शबर जाति से सम्बन्ध रखती थीं। उनके पिता भीलों के राजा थे। बताया जाता है कि उनका विवाह एक भील कुमार से तय हुआ था, विवाह से पहले सैकड़ों बकरे-भैंसे बलि के लिए लाये गए जिन्हें देख शबरी को बहुत बुरा लगा कि यह कैसा विवाह जिसके लिए इतने पशुओं की हत्या की जाएगी। शबरी विवाह के एक दिन पहले घर से भाग गई। घर से भाग वे दंडकारण्य पहुंच गई।


यह कटोरीनुमा पत्‍ता कृष्‍ण वट का है। लोगों का मानना है कि शबरी ने इसी पत्‍ते में रख कर श्रीराम को बेर खिलाए थे।

दंडकारण्य में ऋषि तपस्या किया करते थे, शबरी उनकी सेवा तो करना चाहती थी पर वह हीन जाति की थी और उनको पता था कि उनकी सेवा कोई भी ऋषि स्वीकार नहीं करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक रास्ता निकाला, वे सुबह-सुबह ऋषियों के उठने से पहले उनके आश्रम से नदी तक का रास्ता साफ़ कर देती थीं, कांटे बीन कर रास्ते में रेत बिछा देती थी। यह सब वे ऐसे करती थीं कि किसी को इसका पता नहीं चलता था।

एक दिन ऋषि मतंग की नजऱ शबरी पर पड़ी, उनके सेवाभाव से प्रसन्न होकर उन्होंने शबरी को अपने आश्रम में शरण दे दी, इस पर ऋषि का सामाजिक विरोध भी हुआ पर उन्होंने शबरी को अपने आश्रम में ही रखा। जब मतंग ऋषि की मृत्यु का समय आया तो उन्होंने शबरी से कहा कि वे अपने आश्रम में ही भगवान राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे मिलने जरूर आएंगे।

शिवरीनारायण में स्तिथ शबरी सेतु : 

मतंग ऋषि की मौत के बात शबरी का समय भगवान राम की प्रतीक्षा में बीतने लगा, वह अपना आश्रम एकदम साफ़ रखती थीं। रोज राम के लिए मीठे बेर तोड़कर लाती थी। बेर में कीड़े न हों और वह खट्टा न हो इसके लिए वह एक-एक बेर चखकर तोड़ती थी। ऐसा करते-करते कई साल बीत गए।

एक दिन शबरी को पता चला कि दो सुकुमार युवक उन्हें ढूंढ रहे हैं। वे समझ गईं कि उनके प्रभु राम आ गए हैं, तब तक वे बूढ़ी हो चुकी थीं, लाठी टेक के चलती थीं। लेकिन राम के आने की खबर सुनते ही उन्हें अपनी कोई सुध नहीं रही, वे भागती हुई उनके पास पहुंची और उन्हें घर लेकर आई और उनके पाँव धोकर बैठाया। अपने तोड़े हुए मीठे बेर राम को दिए राम ने बड़े प्रेम से वे बेर खाए और लक्ष्मण को भी खाने को कहा।

लक्ष्मण को जूठे बेर खाने में संकोच हो रहा था, राम का मन रखने के लिए उन्होंने बेर उठा तो लिए लेकिन खाए नहीं। इसका परिणाम यह हुआ कि राम-रावण युद्ध में जब शक्ति बाण का प्रयोग किया गया तो वे मूर्छित हो गए थे।

मस्तूरी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय मल्हार में अव्यस्था का आलम

【एसडीएम मस्तूरी ने जांच करने की बात कही।】 सन्नी रघु यादव■

मस्तूरी-: मल्हार स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में टूटे वॉश बेसिन, टपकते हुए टॉयलेट व वहां पर पसरी हुई गंदगी को देखा जा सकता हैं खिड़की में जाली नही बाथरूम की दरवाजा टूटा हुआ है जिस पर नाराजगी जाहिर की जाती हैं परिजन पेरेंट्स मीटिंग में भी आवाज उठाने की कोशिश करते हैं लेकिन दबा दिया जाता हैं इतना ही नही प्रचार्य के आतंग से शिक्षको के साथ बच्चे भी परेशान हैं बच्चों द्वारा शिकायत करने पर भी कोई नही सुनते नवोदय विद्यालय परिसर में चारो तरफ झाडि़यों का साम्राज्य देखा जा सकता हैं प्राचार्य बच्चों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने की बात करते हैं लेकिन सुविधा नजर नही आता विद्यालय की रसोई में भी अव्यस्थाओ का आलम देखने को मिल सकता हैं नालियों से आती हैं बदबू प्रचार्य एक दिन में स्कूल जर्जर हालत में छात्रावास पानी टंकी भी पूरी तरह से जर्जर हैं इस भी कोई ध्यान नही दिया जा स्कूल में समिति से मिलने वाले फंड का भी स्कूल प्रबन्धक दुरुपयोग कर रहा हैं । वही 14 जुलाई को मस्तूरी स्वास्थ केंद्र में छात्र लक्ष्मी, दीपिका, एवं अन्य कुछ छात्रो को उल्टी दस्त हुआ था जिसको मस्तूरी स्वास्थ केंद्र में भर्ती करवाया गया जिसके बाद स्कूल के मेट्रन और प्रचार्य दबाने की कोशिश में लगे पूछने कोई जानकारी नही दी गई रेखा सिंह हॉस्टल में वार्डन की दबंगई से भी छात्रा परेशान है सूत्रों से मिंली जानकारी के अनुशार वार्डन वहा पीसीओ चलाती हैं छात्रो से अनाप सनाप पैसा ले रही इसकी शिकायत छात्रो ने प्रचार्य सुरेश चंद्र से कर चुके हैं लेकिन प्रचार्य सुनने को तैयार नही है छात्रो में एक डर सा महशूस रहता हैं प्रचार्य भी भद्दी भद्दी स्कूल परिसर में कार्यरत छोटे छोटे कर्मचारियो को गालियां भी को देते रहते हैं और अपनी ऊँची पहुच के साथ राजनीति पकड़ का हवाला देते रहता है क्यो की इस आवासीय विद्यालय में अधिकारियों की नजर नही पड़ती अगर निरीक्षण किया जाए तो टॉयलेट में गंदगी टूटे हुए बेड ने होस्टल में खिड़किया टूटी हुई नजर आएगी पंखे लटकते हुए मिल जाएगा यदि स्कूल में जांच किया जाए तो खुल सकती हैं नवोदय नवोदय विद्यालय मल्हार की पोल ■नवोदय विद्यालय के प्राचार्य सुरेश चंद्र कहना है कि कौन पत्रकारिता कर रहा है सब को ठीक कर दूंगा कोई भी आदमी नहीं घुस सकता स्कूल के खिलाफ कोई भी नहीं छाप सकता उनको नहीं पता कि भारतवर्ष के सभी अखबारों को मान्यता देता है वह मेरा दोस्त है प्रसार भारती का डायरेक्टर था तुम्हारा अखबार ही बंद हो जाएगा 500 बच्चे हैं तो वहां 10 बीमार तो पड़ेंगे ही हमारे यहां यह सिर्फ मैं कोई भी अखबार में छपता है तो 500 पेरेंट्स नेता इकट्ठा कर दूंगा मैं रिटायर होने के बाद यहां राजनीति करूंगा बसपा के नेताओं से मेरा संबंध है ■मस्तूरी एसडीएम वीरेंद्र लकड़ा का कहना है कि विद्यालय में अव्यवस्था होने के संबंध में जानकारी नही अभी तक कोई शिकायत नही किया है निरीक्षण करेंगे और प्रचार्य से जानकारी ली जाएगी विद्यालय में अव्यवस्था है तो इसका जांच किया जाएगा..l

बलौदाबाजार जिले में शासन प्रशासन के नाक के नीचे धड़ल्ले से हो रहा रेत खनन

 

सावन में बारिश नही होने के कारण  सुखा महानदी का अमेठी एनीकट  खनिज विभाग के नाक के नीचे से हो रहा है अवैध रेत उत्खनन 
 

बलौदाबाजार :' कैलाश जायसवाल@bbn24new


पलारी ब्लाक के अंतिम छोर से गुजरने वाली महानदी अमेठी एनीकट पहली बार सावन में भी इतना सूखा है कि लोगो को एनीकट में निस्तारी के लिए भी पानी नही मिल रहा है तो वही लोग एनीकट के नीचे  से बेरोकटोक अवैध रेत उत्खनन कर टेक्टरों से भारी मात्रा में रेत ढुलाई कर रहे है ।ज्ञात हो कि सावन में बारिश नही होने के कारण  अमेठी एनीकट में  पानी भी कम होने लगा और कुछ ही दिनों में पूरा एनीकट खाली हो गया जिसका लाभ रेत माफिया  उठा रहे है जो रात दिन रेत निकाल कर बेच रहे है  ।


,,खनिज विभाग भी सोये हुए है ,,


महानदी में अवैध रेत उत्खनन आज भी जारी है पहले हाइवा और बड़े बड़े मशीनों से रेत का उत्खनन होता था पर अब लोगो ने श्रमिको के माध्यम से रेत उत्खन करा रहे है वैसे भी नियमतः एनीकट से तीन किलोमीटर के परिधि में रेत खनन पर पाबधि होती है  बाउजूद उसके खनन होना समझ से परे है ।

,,पहली बार महानदी सावन में सुखा है ,,

महानदी तट पर बसे अमेठी पीपरछेड़ी  गांव के ग्रामीणों  का कहना है कि उनके जानकारी में सावन में महानदी को सूखे हुए  पहली बार देख रहे है जब आकाल पड़ा तब भी महानदी में पानी था मगर इस बार तो एनीकट बन जाने के बाद भी सावन में सुखा है जो सोचनीय बात है ।

बारिश ही नही होने के कारण नदी में ही पानी नही है
 ई ई  जल संसाधन कसडोल टी सी वर्मा  


वही खनिज विभाग के अधिकारियों ने फोन नही उठाया

छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा गरुवा घुरवा बारी , जवाबदार अधिकारी एवं कर्मचारियों के सुस्त रवैए..पढ़े पूरी खबर

 

 

 सन्नी रघु यादव : BBN24NEWS

मस्तूरी : छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा गरुवा घुरवा बारी छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी जैसी योजनाओं को मस्तूरी विकासखंड के जवाबदार अधिकारी एवं कर्मचारियों के सुस्त रवैए ने बंदरबांट करके रखा हुआ है. एक और जहां  कई सारे  विकासखंड मे नरवा गरुवा घुरवा बारी से बनने वाले गौठान पूर्ण हो गए हैं । तो मस्तूरी विधानसभा में अभी भी कर्मचारियों अधिकारियों की उदासीनता के नाम से एक भी गौठान पूर्ण नहीं हो पाया है।
 मस्तूरी विकासखंड के पचपेड़ी परीक्षेत्र के ग्राम पंचायत जैतपुरी और हरदी में छत्तीसगढ़ शासन के महत्वाकांक्षी योजना गौठान निर्माण कराया जा रहा है। जिसमें बहुत सारी अनियमितताएं पाई जा रही है। शासन के निर्देशानुसार हर विकासखंड के ग्राम पंचायतों में गौठान निर्माण को 30जुलाई तक पूर्ण कराया जाना है। पर जिस हिसाब से ग्राम पंचायत जैतपुरी और हरदी में गौठान का निर्माण कार्य चल रहा है उसमें 6 माह और लग सकता है। बन रहे गौठान का निरीक्षण करने इंजीनियर खुद हफ्ते में एक दो बार ही आते हैं। ग्राम पंचायत कार्य एजेंसी है जिन्होंने जिला पंचायत सदस्य एस कुमार मनहर को गौठान बनाने के लिए ठेके पर दिए हैं। जो खुद हफ्ता 15 दिन में एक बार ही निर्माणाधीन गौठान पास आते हैं। सरपंच का कहना है कि मैं सरकार को गौठान बनाने के लिए जगह दे दिया हूं। उसको पूर्ण करने के लिए ठेका दे दिया हूं अब बाकी काम ठेकेदार जाने और सरकार जाने करके पल्ला झाड़ देता है। निर्माण कार्य का पूरा देखरेख रोजगार सहायीका करवाती है। जो सिर्फ संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण हाथ से हाथ धरे हुए बैठी रहती।  उद्यानिकी विभाग के द्वारा गौठान में पौधारोपण करने के लिए हजारों नग पौधे भिजवाए गए थे जिसे देखरेख के अभाव में एवं वहां रहने वाली चौकीदारीओके लापरवाही के कारण जानवर पौधों को खा दिये है। जानवरों के खाने के लिए  पैरा भी इकट्ठा किया गया था  उसको भी जानवर खा दिये । अभी तक गोठान बन रहे एरिया में फैंसी तार भी नहीं करवाया गया है इतनी सारी अनियमितताएं होते हुए भी ना वहां पर कोई जवाबदार अधिकारी सुध लेने जाते हैं और ना ही किसी को काम का परवाह है सब अपने अपने में मस्त हैं। एवं काजी करवा ही में गौठान निर्माण को मस्तूरी में नंबर वन बता रहे हैं।

ग्राम पंचायत जैतपुरी एवं हरदी  मैं गौठान निर्माण का कार्य जिला पंचायत सदस्य एस कुमार मनहर करवा रहे हैं। और दोनों ही ग्राम पंचायत की गौठान  निर्माण अधर में लटके हुए हैं। जिला पंचायत के जनप्रतिनिधि होने के  करण मस्तूरी कार्यपालन अधिकारी भी उन्हें कुछ बोल नहीं पाते। लिहाजा शासन की इतनी बड़ी योजना मस्तूरी विकासखंड में फ्लॉप होती नजर आ रही है।

मैं इंजीनियर और ठेकेदार एस कुमार मनहर हम तीनों ने जितना पैसा रखा हुआ था सबको लगा दिया है हमारे पास फंड उपलब्ध नहीं है जिसके वजह से कार्य में देरी हो रही है
 प्रताप पटेल सरपंच जैतपुरी
निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत सरपंच होता है और जैतपुरी के सरपंच और सचिव गोठा निर्माण के कार्य में सहयोग नहीं कर रहे हैं हमारे पास फंड की कमी है इस बात को मैं सीओ साहब को भी बता चुका हूं जैसे तैसे मैं खुद उधारी में सामान लेकर काम को पूरा कराने की कोशिश कर रहा हूं सरपंच सचिव दोनों ही अपने हाथ खड़े कर दिए हैं
 राहुल सोनी इंजीनियर
ठेकेदार के पास पैसे की कमी की वजह से  काम रुका हुआ है व सरपंच और सचिव दोनों को ही मैं फोन करके बुलाया था दूसरे काम के लिए आए हुए पैसे को गोठान निर्माण में लगाएंगे बाद में जब गोठान का पैसा आ जाएगा तब दूसरे काम के पैसों को उनको वापस कर दिया जाएगा सोमवार तक इनको फंड की व्यवस्था करवा कर काम पूरा  करवाते है
 अजय पटेल सीईओ मस्तूरी

हेलमेट के नाम पर डेढ़ करोड़ की वसूली, फिर भी पुलिस की कार्रवाई बेअसर


लोगों को जागरूक करने और ट्रेफिक नियमों का पाठ पढ़ाने के नाम पर ट्रेफिक पुलिस जमकर चलान काट रही है। लोगों से जुर्माना भी वसूला जा रहा है, लेकिन जागरूकता के नाम पर सड़कों पर तो कुछ दिखायी नहीं दे रहा है। जिस तेजी से साल दर साल ट्रेफिक पुलिस का चलान काटने और जुर्माना वसूलने का रिकार्ड टूटता जा रहा है, उस अनुपात में लोग बिल्कुल भी जागरूक नहीं हो रहे हैं। बिलासपुर में हेलमेट के नाम पर ट्रेफिक पुलिस ने तीन साल में 46 हजार 903 लोगों से 1 करोड़ 40 लाख रूपए वसूले हैं। यह कार्रवाई इसलिए की गई ताकि लोग हेलमेट लगाएं और दुर्घटनाओं में लोगों की मौत के आंकड़ों में कमी आए, हालांकि ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया और कुल संख्या की तुलना में सिर्फ एक चौथाई ही हेलमेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। साल 2018-2019 में 976 सड़क हादसों में बिना हेलमेट के 270 लोगों की मौत हुई, जबकि उसके पहले 2017-18 में मौत की संख्या 189 थी, यानि की चलान और जुर्माना तो बढ़ रहा है, लेकिन मौत के आंकड़े कम होने की बजाए वो बढ़ते ही जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष बाइक पर तीन सवारियों वालों की संख्या लगभग 3000 बढ़ रही है, पिछले एक वर्ष में 1567 बिना नंबर की गाड़ी चलाने वालों की संख्या बढ़ गई है, आंकड़े ये भी बता रहे हैं कि नशे में गाड़ी चलाने वालों की संख्या चार गुना बढ़ गई है। 2016 में ऐसे 214 लोगों का चलान किया गया था जबकि 2018 में यह संख्या बढ़कर 796 हो गई है। यानि की हर तरह से ट्रेफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की संख्या बढ़ ही रही है, साफ है कि पुलिस कार्रवाई तो कर रही है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई का असर लोगों के उपर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।

लाख चूड़ी निर्माण में निपुण हैं आदिवासी महिलायें : घर बैठे हो रही हैं 300 रूपये की आमदनी

रायपुर, 18 जुलाई 2019 आदिवासी महिलायें रंगीन लाख की चूड़ी बनाने में निपुण हो गई हैं और इसके द्वारा प्रतिदिन 300 रूपये तक की आमदनी वे घर बैठे प्राप्त कर रही हैं। लाख से चूड़ी निर्माण का काम चार गांव के महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा शुरू किया गया है। देवसेना महिला समूह द्वारा निर्मित चूड़ियों की बिक्री संभागीय मुख्यालय बिलासपुर के 36 मॉल की जा रही है और इसे लोगों द्वारा पसंद भी किया जा रहा है। समूह द्वारा लोगों की पसंद के अनुसार आधुनिक डिजाईन की चूड़ियां बनाने के लिये प्रशिक्षण लेने की योजना बनाई जा रही है।
    बिलासपुर जिले के मरवाही विकासखंड के ग्राम बंशीताल, दानीकुंडी, बरगवां, बघर्रा की ग्रामीण महिलायें स्व-सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न व्यवसाय अपनाकर अपने घर की आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान कर रही हैं। मरवाही क्षेत्र में रंगीन लाख बहुत मात्रा में होता है। व्यापारियों द्वारा इसे सस्ते में खरीदकर महंगे दामों में बाहर बेचा जाता है। क्षेत्र में पहली बार लाख का मूल्य वर्धित कर इसे लघु व्यवसाय के रूप में स्थापित कर ग्रामीण आदिवासी महिलाओं द्वारा अतिरिक्त आय प्राप्त करने का कार्य किया जा रहा है। 
    मरवाही के विभिन्न ग्रामों की महिलायें देवसेना स्व-सहायता समूह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता प्राप्त कर रही हैं। इसी समूह की महिलाओं ने लाख चूड़ी एवं गहना निर्माण का व्यवसाय प्रारंभ किया है। इसके लिये वनमंडल मरवाही द्वारा ईएसआईपी परियोजना अंतर्गत उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है। ग्राम बरगवां की श्रीमती रेणु, श्रीमती सियावती, श्रीमती जयकुमारी, दानीकुंडी की श्रीमती नीता बाई कोरवा, श्रीमती केशकली श्याम, श्रीमती कृष्ण कुमारी पाव, श्रीमती सियावती आदि महिलायें इस कार्य में जुटी हुई हैं। वे 10 मिनट में बिना नग वाले लाख की चूड़ी सेट और डेढ़ घंटे में नग वाली चूड़ी सेट तैयार कर लेती हैं। चूड़ी बनाने के लिये लाख उन्हें व्यापारी से खरीदना पड़ रहा है लेकिन समूह की महिलाओं की योजना है कि वे खुद ही गांव के लोगों से लाख खरीदेंगी और उसकी प्रोसेसिंग भी करेंगी। जिससे उन्हें ज्यादा फायदा मिलेगा और बिचौलियों से भी मुक्ति मिलेगी।
    देवसेना महिला समूह द्वारा निर्मित चूड़ियों की बिक्री हेतु 36 मॉल बिलासपुर के बिहान बाजार में जगह उपलब्ध कराया गया है और इसे लोगों द्वारा पसंद भी किया जा रहा है। चूड़ियों के तरह-तरह के डिजाईन के संबंध में भी लोग सुझाव दे रहे हैं। जिससे इन महिलाओं का उत्साहवर्धन हो रहा है। अब वे लोगों की पसंद के अनुसार आधुनिक डिजाईन की चूड़ियां बनाने के लिये प्रशिक्षण लेने की योजना बना रही हैं। इस उपलब्धि से ग्रामीण महिलाओं की आमदनी के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।  

 

ध्यान दीजिए डीईओ साहब , एक शिक्षक के हाथों 110 बच्चो का भविष्य , आखिर कैसे होगी बच्चो की पढ़ाई...

शनि सुर्यवंशी : पकरिया-

विकासखंड अकलतरा के ग्राम पंचायत झलमला के टांड़पारा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला जहाँ 5 वी क्लास तक स्कूल संचालित होता है। ज्ञात हो कि शासकीय प्राथमिक शाला टांड़पारा में शाला के दर्ज संख्या के अनुसार 2 शिक्षक 1 शिक्षिका नियुक्ति हुआ था । जिससे वहाँ का पढ़ाई सुचारू रूप से चल रहा था आपको बता दे कि शासकीय प्राथमिक शाला टांड़पारा में पदस्थ रहे प्रधान पाठक खोलबहरा निर्मलकर का मृत्यु 2016 -17 में हो गया जिसके बाद वही शाला में शिक्षक गजाधर मरकाम को प्रभारी प्रधान पाठक बनाया गया था वही शाला में पदस्थ प्रभारी प्रधान पाठक मरकाम अपने शाला में शराब पीकर आता था जिसके हरकत से शिक्षक व बच्चे बहुत ज्यादा परेशान थे जिससे बच्चो का पढ़ाई बाधित हो रहा था । वही इसकी शिकायत शाला के टीचर व बच्चो अभिभवाकगण ने शाला समिति को अवगत कराया गया जिसके बाद शाला समिति के सदस्यो ने प्रभारी प्रधान पाठक को ब्यवहार को सुधारने और अच्छे तरीके से शाला का।संचालन करने को कहा गया था और अच्छा शिक्षक का परिचय देने को कहा उसके बावजूद भी प्रभारी प्रधान पाठक किसी एक कि भी सुनने को तैयार नही हुआ ।

जिसके बाद शाला समिति एवं ग्रामीणों के द्वारा प्रभारी प्रधान पाठक के खिलाफ शिकायत किया गया था वही शिकायत पर स्कूल जांच अधिकारी के द्वारा सही पाया गया था जिसके बाद उसे विकासखंड के अंतर्गत झिरिया के स्कूल में 11 दिसम्बर को अटैच कर दिया गया था । जिसके बाद शाला विकास समिति के द्वारा शिक्षक ब्यवस्था की मांग किया जिसपर उनके जगह में झिरिया स्कूल से शिक्षक रामप्रकाश खरे को लाया गया जो कि खरे के द्वारा अक्टूम्बर माह 2018 से दिसम्बर 2018 तक स्कूल में ब्यावस्थापक के रूप में सेवा दिया जा रहा था उसके बाद झिरिया शिक्षक रामप्रकाश खरे को झलमला से अपने मूल शाला मे वापस बुला लिया गया ।

हद तो तब हो गया कि 22 दिसम्बर को फिर से गजाधर मरकाम को पुनः पदस्थापना शाला में कर दिया गया था उसी बीच मे ही शासकीय प्रथमिक शाला पकरिया झुलन के शिक्षक जगदीश निर्मलकर जगदीश कुर्रे को वार्षिक परीक्षा के दौरान बच्चो के पढ़ाई प्रभवित न उसको देखते हुए जनवरी माह 2019 से अप्रैल 2019 तक वही 1 सप्ताह के लिए पकरिया शिक्षक ललिता देवांगन को भी टांड़पारा शाला में भेजा गया था । वही आपको बता दे सत्र 2018- 19 में शिकायत के बाद फिर से अधिकारियों के द्वारा 24 जून 2019 को उन्हें शाला टांड़पारा से दूसरे जगह रिलीव किया गया है।

●110 बच्चो की जिम्मेदारी प्रभारी प्रधानपठिका के हाथों●

आपको बता दे शासकीय प्राथमिक शाला टांड़पारा झलमला में पदस्थ प्रभारी प्रधानपठिका विंध्यवासिनी टांडे ने बताया कि वर्तमान में शाला रजिस्टर में दर्जसंख्या के अनुसार 110 बच्चो का स्कूल में उपस्थित है। जिनका पढ़ाई अकेले रहने के वजह से नही हो पा रहा वही आएदिन प्रिसिंध डाक का काम स्कूल के कागजी काम के वजह से दिनभर समय इसी में लग जाता है जिसके वजह से पढ़ाई नही हो पा रहा है इतना ही नही इस मामले को लेकर शिकायत न कि गयी हो विगत दो सालों से कई बार शिक्षक की मांग की गई उसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। वही इसकी शिकायत संकुल केंद्र से लेकर बीइओ डीईओ को कई बार अवगत कराया गया लेकिन शाला में नियमित शिक्षक अभी तक नही भेजा गया है जिसके कारण बच्चो के पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित होता दिख रहा है। वही कभी कभी तो ये देखना पड़ता है कि शाला में सफाईकर्मी गोपेस्वर यादव के द्वारा बच्चो का पार्थना हाजिरी लेना तक पड़ जाता है । यहाँ तक गोपेस्वर यादव खुद समय निकालकर बच्चो को पढ़ाते भी है। आपको बता दे कि जुलाई माह से बच्चो का पढ़ाई चालू हो गया है लेकिन यहाँ के बच्चो का अभी तक कोई भी विषय का पाठ्यक्रम शुरुआत नही हुआ है जिसके कारण पढ़ाई नही हो पा रहा है वही बच्चो का भविष्य अभी से अंधकार मय दिख रहा है। यहाँ तक नौबत यह है कि पहली दूसरी क्लास के बच्चो को पांचवी क्लास के छात्रा पढ़ाती है। जिससे थोड़ा बहुत छोटे छोटे बच्चो का मन पढ़ाई में बना रहे ।

●कैसे सुधरेगे का शिक्षा का ब्यवस्था●

प्राथमिक शाला स्तर की बात करे तो शाला में 30 से 35 बच्चो में 1 शिक्षक का पदस्थ किया जाता वही यहाँ झलमला स्कूल में 110 बच्चे है फिर भी 1 शिक्षक के भरोशे स्कूल को छोड़ दिया गया वही यहाँ आसपास स्कूलों की बात करे तो जहा कम।दर्ज संख्या है उसके बावजूद भी जरुरत से ज्यादा शिक्षक पदस्थ है । अब इस तरह के ब्यवस्था से सहज अन्दाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय अधिकारी के जानकारी के बाद भी इस तरह से भर्राशाही अब भी जारी है। ऐसा लगता है कि बच्चो के भविष्य से कोई मतलब ही न हो ऐसे बदहाली का भुगतना बच्चो को झेलना पड़ता है।

शिक्षक को हटाने व नए शिक्षक के मांग को लेकर स्कूल के गेट पर लटक चुका है ताला

आपको बता दे कि शिक्षक की मांग को लेकर शाला विकास समिति और छात्र छात्राओं के द्वारा नियमित शिक्षक की मांग को लेकर पिछले साल शाला के गेट सामने ताला जड़कर 2 दिनों तक बैठ कर विरोध प्रदर्शन किया गया था इतना ही नही इसकी जानकारी शिक्षक ने अपने उच्च अधिकारियों को फोन पर सूचना भी दिया था लेकिन अधिकारियों के द्वारा आष्वासन के नाम पर सिर्फ और सिर्फ झूनझुना थमाया था वही दो सालों से में शिक्षक का ब्यवस्था न कर पाना कही न कही अधिकारियों की लापरवाही ही समझा जाये । अब देखना यह होगा कि यह कुम्भकर्णी विभाग कब नींद से बाहर आती है और बच्चो को उनके शिक्षक कब मिल पाता है यह देखना लाजिमी होगा ।