बड़ी खबर

रायपुर : मुख्यमंत्री की रेडियो वार्ता ‘‘लोकवाणी‘‘ का पहला प्रसारण 11 अगस्त को


सुबह 10.30 से 10.55 बजे तक होगा लोकवाणी का प्रसारण


 रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समाज के हर वर्ग की भावनाओं, सवालों, सुझावों से अवगत होने तथा अपने विचार साझा करने के लिए ‘‘लोकवाणी‘‘ की शुरूआत कर रहे हैं। लोकवाणी का पहला प्रसारण 11 अगस्त रविवार को सुबह 10ः30 बजे से 10ः55 बजे तक छत्तीसगढ़ में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों, एफएम रेडियो और क्षेत्रीय न्यूज चैनलों से किया जाएगा। लोकवाणी का प्रसारण प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को होगा। अधिक से अधिक जनसमुदाय लोकवाणी को सुन सके इसके लिए ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों और सार्वजनिक स्थलों में विशेष व्यवस्था भी की जा रही है। 

DAKMS अध्यक्ष सहित 4 स्थायी वारंटी गिरफ्तार

 
बीजापुर:- नक्सली के मौजुदगी की सूचना पर थाना बासागुड़ा एवं कोबरा 204 की संयुक्त कार्यवाही पर मौके से डीएकेएमएस अध्यक्ष(1.00 लाख ईनामी) सहित 04 स्थाई वारंटी को गिरफ्तार किया गया है।
थाना बासागुड़ा से उप निरीक्षक राणासिंह ठाकुर एवं 204 कोबरा के सहायक कमांडेंट अभिनव पाण्डेय व बलराम के हमराह जिला बल एवं कोबरा 204 का संयुक्त बल चिलकापल्ली में नक्सलियों के मौजुदगी की थाना बासागुड़ा के लोकल इंट(int) पर सर्चिंग पर रवाना हुये थे । 
 
अनिल मड़कम एवं कुंजाम मारा 2014 में टेकुलगुड़ा में कोबरा बटालियन एवं थाना बासागुड़ा पर बम बलास्ट एवं फायरिंग कर हमला करने की घटना में शामिल थे । ओयाम मुत्ता विधानसभा चुनाव 2018 के पुलिस नक्सली मुठभेड़ में मारे गये नक्सली के पुलिस मुखबीरी के शक में तिमापुर निवासी बुधराम पुनेम की हत्या एवं वर्ष 2017 में आईईडी बलास्ट हुआ था जिसमें तिमापुर निवास अवलम मारा का बांया पैर कट गया था, उक्त दोनो घटनाओं में शामिल था । पकड़े गये 04 स्थाई वारंटी के विरूद्ध थाना बासागुड़ा में 06 स्थाई वांरट लंबित था । 
 
पुलिस अधीक्षक बीजापुर दिव्यांग पटेल द्वारा थाना बासागुड़ा की लोकल इंट की कार्यवाही से खुश होकर थाना बासागुड़ा को 5000 रूपये की नगद राशि से प्रोत्साहित किया ।थाना बासागुड़ा में विधिवत कार्यवाही उपरान्त न्यायालय दंतेवाड़ा पेश किया गया ।

बड़ी खबर : छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के केंद्रीय विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई करने वाली छात्रा का दिनदहाड़े अपरहण

अजीत मिश्रा : छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के केंद्रीय विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई करने वाली छात्रा का दिनदहाड़े अपरहण की खबर से शहर में दहशत फैल गई । छात्रा का अपरहण विश्वविद्यालय से कुछ दूरी पर स्थित पेट्रोल पंप के सामने से किया गया । अपरहण करने वाला मुख्य आरोपी उसी केंद्रीय विश्विद्यालय में ला की पढ़ाई करता है । मुख्य आरोपी का नाम प्रशांत काटले है जो कि छत्तीसगढ़ मंत्रालय में शिक्षा विभाग में पदस्थ असिटेंट डायरेक्टर का पुत्र है ।  मिली जानकारी के अनुसार अपने पिता के रशुख के दम पर पहले भी आरोपी प्रशांत ने कई बार पीड़ित छात्रा को इस घटना के पूर्व भी प्रताड़ित करता रहता था और जिला कोर्ट में भी छात्रा को जबरन ले जाने का प्रयास भी किया था जिसका विरोध और हो हल्ला होने पर आरोपी प्रशांत काटले वहाँ से भाग गया थापीड़िता छात्रा ने आरोपी की शिकायत केंद्रीय विश्वविधालय प्रशासन और पुलिस विभाग में कई गई थी । लेकिन छात्रा की शिकायत को न तो  गुरु घासीदास केंद्रीय प्रशासन ने गंभीरता से लिया ना ही पुलिस विभाग ने भी।। रशुखदार के सामने नतमस्तक ही रह है और छात्रा  की शिकायत के बाद भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जिसके चलते आरोपी ने आज दिनदहाड़े सफ़ेद रंग की  स्विफ्ट डिजायर जिसका क्रमांक सीजी 10 ऐ जी ,8173 से अपने दो दोस्तों के साथ छात्रा का अपरहण कर लिया । लेकिन वारदात के समय  छात्रा के साथ मौजूद उसकी दोस्तो ने  तत्काल इसकीं सूचना अपने अन्य साथियों और पुलिस को दी । मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शहर में नाकेबंदी कर दिया । जिसके बाद छात्र ने छात्रा को घर के पास छोड़ दिया और फरार ही गया लेकिन सकरी पुलिस ने आरोपी को उसके साथ धरा दबोचा। छात्रा के अपहरण के सनसनीखेज मामले के कुछ ही घंटों  बाद ही पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली । पुलिस ने अपहरण में संलिप्त 3 युवकों को दबोच लिया है । मामला आज दोपहर सवा 1 बजे के आसपास का  है  कोनी पेट्रोल पंप के सामने से एक युवक ने युवती अपहरण कर लिया । उस समय युवती के साथ उसकी कुछ सहेलियां भी थी जिसने मामले की पूरी जानकारी कोनी पुलिस को दी । सूचना पर पुलिस छात्रा की तलाश में जुट गई । सकरी थाना क्षेत्र के उसलापुर निवासी नाबालिग किशोरी सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बीकॉम एलएलबी की छात्रा है। यूनिवर्सिटी में ही पढ़ने वाला छात्र प्रशांत बाइक से पेट्रोल पंप के पास पहुंचा और वहीं से अपने सफेद कार में   दोस्तों की मदद से छात्रा को जबर्दस्ती उठा कर साथ ले गया। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी प्रशांत समेत उसके दो अन्य साथियों को दबोच लिया है। पुलिस को जैसे ही इस मामले की जानकारी मिली तो पुलिस ने कोनी और आसपास के मार्गों में नाकेबंदी कर युवक की तलाश शुरू कर दी । पुलिस को लगातार युवक का लोकेशन सकरी क्षेत्र का मिल रहा था । बाद में अपहरणकर्ताओं ने युवती को सकरी क्षेत्र में ही छोड़ दिया जहां से युवती को सुरक्षित लाया गया । मिली जानकारी के मुताबिक युवती से मुख्य अपहरणकर्ता ने पहले भी मारपीट की है । पुलिस मामले में विवेचना कर रही है । वही पूरे मामले में केंद्रीय विश्विद्यालय प्रशासन विभाग ने एक बार फिर जांच का बहाना बनाकर  कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया ।

विश्व आदिवासी दिवस पर रंगारंग कार्यक्रम, प्रदेश के मुखिया हुए कार्यक्रम में शामिल

कोंडागांव (शैलेश गुप्ता) : विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर उत्तर बस्तर कोंडागांव ज़िला मुख्यालय में रंगारंग कार्यक्रम हुए। इस अवसर पर मुख अतिथी के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उपस्थित रहें। आपको बता देकि आज सुबह लगभग शासकीय हेलीकॉप्टर से कोंडागांव पहुंचे जहां कांग्रेस संगठन के कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आज कोण्डागांव में विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में परम्परागत रूप से सफेद पगड़ी और तीर कमान भेंट का स्वागत किया गया। इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री कवासी लखमा, खाद्य मंत्री श्री अमरजीत भगत, बस्तर सांसद श्री दीपक बैज, कोण्डागांव विधायक श्री मोहन मरकाम सहित अनेक विधायक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आदिवासीय समुदाय के लोग उपस्थित थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने ज़िले में कई विकासकार्यों का भी लोकार्पण किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धारा 370 हटने के बाद का पूरा संदेश पढ़े BBN24 न्यूज़ पर…

मेंरे प्यारे देशवासियों, एक राष्ट्र के तौर पर, एक परिवार के तौर पर, आपने, हमने, पूरे देश ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। एक ऐसी व्यवस्था, जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे, जो उनके विकास में बड़ी बाधा थी, वो अब दूर हो गई है। जो सपना सरदार पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्तों का था, वो अब पूरा हुआ है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एक नए युग की शुरुआत हुई है। अब देश के सभी नागरिकों के हक भी समान हैं, दायित्व भी समान हैं। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को, लद्दाख के लोगों को और प्रत्येक देशवासी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। साथियों, समाज जीवन में कुछ बातें, समय के साथ इतनी घुल-मिल जाती हैं. कि कई बार उन चीजों को स्थाई मान लिया जाता है।

ये भाव आ जाता है कि, कुछ बदलेगा नहीं, ऐसे ही चलेगा। अनुच्छेद 370 के साथ भी ऐसा ही भाव था। उससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहनों की, हमारे बच्चों की जो हानि हो रही थी, उसकी चर्चा ही नहीं होती थी। हैरानी की बात ये है कि आप किसी से भी बात करें, तो कोई ये भी नहीं बता पाता था कि अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में क्या लाभ हुआ। भाइयों और बहनों, अनुच्छेद 370 और 35-ए ने जम्मू-कश्मीर को अलगाववाद- आतंकवाद- परिवारवाद और व्यवस्थाओं में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। इन दोनों अनुच्छेद का देश के खिलाफ, कुछ लोगों की भावनाएं भड़काने के लिए पाकिस्तान द्वारा एक शस्त्र के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इसकी वजह से पिछले तीन दशक में लगभग  42 हजार निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विकास उस गति से नहीं हो पाया, जिसका वो हकदार था।

अब व्यवस्था की ये कमी दूर होने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों का वर्तमान तो सुधरेगा ही,  उनका भविष्य भी सुरक्षित होगा। साथियों, हमारे देश में कोई भी सरकार हो, वो संसद में कानून बनाकर, देश की भलाई के लिए काम करती है। किसी भी दल की सरकार हो, किसी भी गठबंधन की सरकार हो, ये कार्य निरंतर चलता रहता है। कानून बनाते समय काफी बहस होती है,  चिंतन-मनन होता है, उसकी आवश्यकता, उसके प्रभाव को लेकर गंभीर पक्ष रखे जाते हैं। इस प्रक्रिया से गुजरकर जो कानून बनता है, वो पूरे देश के लोगों का भला करता है। लेकिन कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संसद इतनी बड़ी संख्या में कानून बनाए और वो देश के एक हिस्से में लागू ही नहीं हों। यहां तक कि, पहले की जो सरकारें, एक कानून बनाकर वाहवाही लूटती थीं,  वो भी ये दावा नहीं कर पाती थीं कि उनका बनाया कानून जम्मू-कश्मीर में भी लागू होगा। जो कानून देश की पूरी आबादी के लिए बनता था, उसके लाभ से जम्मू-कश्मीर के डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग वंचित रह जाते थे। सोचिए, देश के अन्य राज्यों में बच्चों को शिक्षा का अधिकार है, लेकिन  जम्मू-कश्मीर के बच्चे इससे वंचित थे। देश के अन्य राज्यों में बेटियों को जो सारे हक मिलते हैं,  वो सारे हक जम्मू-कश्मीर की बेटियों को नहीं मिलते थे। देश के अन्य राज्यों में सफाई कर्मचारियों के लिए सफाई कर्मचारी एक्ट लागू है, लेकिन  जम्मू-कश्मीर के सफाई कर्मचारी इससे वंचित थे। देश के अन्य राज्यों में दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए सख्त कानून लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण के लिए माइनॉरिटी एक्ट लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। देश के अन्य राज्यों में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए Minimum Wages (वेजेस) Act लागू है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले श्रमिकों को ये सिर्फ कागजों पर ही मिलता था। देश के अन्य राज्यों में चुनाव लड़ते समय अनुसूचित जनजाति के भाई-बहनों को आरक्षण का लाभ मिलता था, लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं था। साथियों, अब आर्टिकल 370 और 35-ए, इतिहास की बात हो जाने के बाद, उसके नकारात्मक प्रभावों से भी जम्मू-कश्मीर जल्द बाहर निकलेगा, इसका मुझे पूरा विश्वास है। भाइयों और बहनों,  नई व्यवस्था में केंद्र सरकार की ये प्राथमिकता रहेगी कि राज्य के कर्मचारियों को, जम्मू-कश्मीर पुलिस को, दूसरे केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों और वहां की पुलिस के बराबर सुविधाएं मिलें। अभी केंद्र शासित प्रदेशों में, अनेक ऐसी वित्तीय सुविधाएं जैसे LTC, House Rent Allowance,  बच्चों की शिक्षा के लिए Education Allowance, हेल्थ स्कीम, जैसी अनेक सुविधाएं दी जाती हैं,  जिनमें से अधिकांश जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को नहीं मिलती। ऐसी सुविधाओं का review कराकर, जल्द ही जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों और वहां की पुलिस को भी ये सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। साथियों, बहुत जल्द ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी केंद्रीय और राज्य के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे स्थानीय नौजवानों को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही केंद्र सरकार की पब्लिक सेक्टर यूनिट्स और प्राइवेट सेक्टर की बड़ी कंपनियों को भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए, प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा सेना और अर्धसैनिक बलों द्वारा, स्थानीय युवाओं की भर्ती के लिए रैलियों का आयोजन किया जाएगा। सरकार द्वारा प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप योजना का भी विस्तार किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके। जम्मू-कश्मीर में राजस्व घाटा भी बहुत ज्यादा है। केंद्र सरकार ये भी सुनिश्चित करेगी की इसके प्रभाव को कम किया जाए। भाइयों और बहनों, केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही, अभी कुछ कालखंड के लिए जम्मू-कश्मीर को सीधे केंद्र सरकार के शासन में रखने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है। इसके पीछे की वजह समझना भी आपके लिए महत्वपूर्ण है। जब से वहां गवर्नर रूल लगा है, जम्मू-कश्मीर का प्रशासन, सीधे केंद्र सरकार के संपर्क में है। इसकी वजह से बीते कुछ महीनों में वहां Good Governance और Development का और बेहतर प्रभाव जमीन पर दिखाई देने लगा है। जो योजनाएं पहले सिर्फ कागजों में रह गई थीं,  उन्हें अब जमीन पर उतारा जा रहा है। दशकों से लटके हुए प्रोजेक्ट्स को नई गति मिली है। हमने जम्मू-कश्मीर प्रशासन में एक नई कार्यसंस्कृति लाने, पारदर्शिता लाने का प्रयास किया है। इसी का नतीजा है कि IIT, IIM, एम्स, हों, तमाम इरिगेशन प्रोजेक्ट्स हो, पावर प्रोजेक्ट्स हों,  या फिर एंटी करप्शन ब्यूरो, इन सबके काम में तेजी आई है। इसके अलावा वहां कनेक्टिविटी से जुड़े प्रोजेक्ट हों, सड़कों और नई रेल लाइनों का काम हो, एयरपोर्ट का आधुनिकीकरण हो,  सभी को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

साथियों हमारे देश का लोकतंत्र इतना मजबूत है। लेकिन आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि  जम्मू-कश्मीर में दशकों से, हजारों की संख्या में ऐसे भाई-बहन रहते हैं, जिन्हें लोकसभा के चुनाव में तो वोट डालने का अधिकार था, लेकिन वो विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते थे। ये वो लोग हैं जो 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे। क्या इन लोगों के साथ अन्याय ऐसे ही चलता रहता? साथियों, जम्मू-कश्मीर के अपने भाई-बहनों को मैं एक महत्वपूर्ण बात और स्पष्ट करना चाहता हूं। आपका जनप्रतिनिधि आपके द्वारा ही चुना जाएगा, आपके बीच से ही आएगा। जैसे पहले MLA होते थे, वैसे ही MLA आगे भी होंगे। जैसे पहले मंत्रिपरिषद होती थी, वैसी ही मंत्रिपरिषद आगे भी होगी। जैसे पहले आपके सीएम होते थे, वैसे ही आगे भी आपके सीएम होंगे। साथियों, मुझे पूरा विश्वास है कि इस नई व्यवस्था के तहत हम सब मिलकर आतंकवाद-अलगाववाद से जम्मू-कश्मीर को मुक्त कराएंगे। जब धरती का स्वर्ग, हमारा जम्मू-कश्मीर फिर एक बार विकास की नई ऊंचाइयों को पार करके पूरे विश्व को आकर्षित करने लगेगा, नागरिकों के जीवन में Ease of Living बढ़ेगी, नागरिकों को जो उनके हक का मिलना चाहिए, वो बेरोक-टोक मिलने लगेगा, शासन-प्रशासन की सारी व्यवस्थाएं जनहित कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाएंगी, तो मैं नहीं मानता कि केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था जम्मू कश्मीर के अंधर चलाए रखने की जरूरत पड़ेगी। भाइयों और बहनों, हम सभी चाहते हैं कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव हों, नई सरकार बने, मुख्यमंत्री बनें। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा देता हूं कि आपको बहुत ईमानदारी के साथ, पूरे पारदर्शी वातावरण में अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा। जैसे बीते दिनों पंचायत के चुनाव पारदर्शिता के साथ संपन्न कराए गए, वैसे ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा के भी चुनाव होंगे। मैं राज्य के गवर्नर से ये भी आग्रह करूंगा कि ब्लॉक डवलपमेंट काउंसिल का गठन, जो पिछले दो-तीन दशकों से लंबित है, उसे पूरा करने का काम भी जल्द से जल्द से जल्द किया जाए। साथियों, ये मेरा खुद का अनुभव है कि चार-पाँच महीने पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पंचायत चुनावों में जो लोग चुनकर आए, वो बहुत बेहतरीन काम कर रहे हैं। कुछ महीनों पहले जब मैं श्रीनगर गया था, तो वहां मेरी उनसे लंबी मुलाकात भी हुई थी। जब वो यहां दिल्ली आए थे, तब भी मेरे घर पर, मैंने उनसे काफी देर तक बात की थी। पंचायत के इन साथियों की वजह से जम्मू-कश्मीर में बीते दिनों ग्रामीण स्तर पर बहुत तेजी से काम हुआ है। हर घर बिजली पहुंचाने का काम हो या फिर राज्य को ODF बनाना हो, इसमें पंचायत के प्रतिनिधियों की बहुत बड़ी भूमिका रही है। मुझे पूरा विश्वास है कि अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद, जब इन पंचायत सदस्यों को नई व्यवस्था में काम करने का मौका मिलेगा तो वो कमाल कर देंगे। मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर की जनता अलगाववाद को परास्त करके नई आशाओं के साथ आगे बढ़ेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर की जनता, Good Governance और पारदर्शिता के वातावरण में, नए उत्साह के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगी। साथियों, दशकों के परिवारवाद ने जम्मू-कश्मीर के मेरे युवाओं को नेतृत्व का अवसर ही नहीं दिया। अब मेरे ये युवा, जम्मू-कश्मीर के विकास का नेतृत्व करेंगे और उसे नई ऊंचाईयो पर ले जाएंगे। मैं जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नौजवानों, वहां की बहनों-बेटियों से विशेष आग्रह करूंगा कि अपने क्षेत्र के विकास की कमान खुद संभालिए। साथियों, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में दुनिया का सबसे बड़ा टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनने की क्षमता है। इसके लिए जो वातावरण चाहिए, शासन प्रशासन में जो बदलाव चाहिए, वो किए जा रहे हैं लेकिन मुझे इसमें हर देशवासी का साथ चाहिए।

एक जमाना था, जब बॉलीवुड की फिल्मों की शूटिंग के लिए कश्मीर पसंदीदा जगह थी। उस दौरान शायद ही कोई फिल्म बनती हो, जिसकी कश्मीर में शूटिंग न होती हो। अब जम्मू-कश्मीर में स्थितियां सामान्य होंगी, तो देश ही नहीं, दुनिया भर के लोग वहां फिल्मों की शूटिंग करने आएंगे। हर फिल्म अपने साथ कश्मीर के लोगों के लिए रोजगार के अनेक अवसर भी लेकर आएगी। मैं हिंदी फिल्म इंडस्ट्री, तेलगू और तमिल फिल्म इंडस्ट्री और इससे जुड़े लोगों से आग्रह करूंगा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में निवेश के बारे में, फिल्म की शूटिंग से लेकर थिएटर और अन्य साधनों की स्थापना के बारे में जरूर सोचें। जो टेक्नोलॉजी की दुनिया से जुड़े लोग हैं, चाहे वो प्रशासन में हों या फिर प्राइवेट सेक्टर में, उनसे भी मेरा आग्रह है कि अपनी नीतियों में, अपने फैसलों में इस बात को प्राथमिकता दें कि जम्मू-कश्मीर में कैसे टेक्नोलॉजी का और विस्तार किया जाए। जब वहां डिजिटल कम्यूनिकेशन को ताकत मिलेगी, जब वहां BPO सेंटर, कॉमन सर्विस सेंटर बढ़ेंगे, जितना ज्यादा टेक्नोलॉजी का विस्तार होगा, उतना ही जम्मू-कश्मीर के हमारे भाई-बहनों का जीवन आसान होगा, उनकी आजीविका और रोजी-रोटी कमाने के अवसर बढ़ेंगे। साथियों,  सरकार ने जो फैसला लिया है, वो जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के उन नौजवानों को भी मदद करेगा, जो स्पोर्ट्स की दुनिया में आगे बढ़ना चाहते हैं। नई स्पोर्ट्स एकैडमीज, नए स्पोर्ट्स स्टेडियम, साइंटिफिक इनवायर्नमेंट में ट्रेनिंग, उन्हें दुनिया में अपना टैलेंट दिखाने में मदद करेगी। साथियों, जम्मू-कश्मीर के केसर का रंग हो या कहवा का स्वाद सेब का मीठापन हो या खुबानी का रसीलापन, कश्मीरी शॉल हो या फिर कलाकृतियां, लद्दाख के ऑर्गैनिक प्रॉडक्ट्स हों या फिर हर्बल मेडिसिन इसका प्रसार दुनियाभर में किए जाने का जरूरत है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। लद्दाख में सोलो नाम का एक पौधा पाया जाता है। जानकारों का कहना है कि ये पौधा,  High Altitude पर रहने वाले लोगों के लिए, बर्फीली पहाड़ियों पर तैनात सुरक्षाबलों के लिए संजीवनी का काम करता है। कम ऑक्सीजन वाली जगह पर शरीर के इम्यून सिस्टम को संभाले रखने में इसकी बहुत बड़ी भूमिका है।

सोचिए, ऐसी अद्भुत चीज, दुनिया भर में बिकनी चाहिए या नहीं? कौन हिन्दुस्तानी नहीं चाहता है और साथियों, मैंने सिर्फ एक का नाम लिया है। ऐसे अनगिनत पौधे, हर्बल प्रॉडक्ट जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बिखरे पड़े हैं। उनकी पहचान होगी, उनकी बिक्री होगी तो इसका बहुत बड़ा लाभ वहां के लोगों को मिलेगा, वहां के किसानों को मिलेगा। इसलिए मैं देश के उद्यमियों से, Export से जुड़े लोगों से,फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े लोगों से आग्रह करूंगा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के स्थानीय Products को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए आगे आएं। Union Territory बन जाने के बाद अब लद्दाख के लोगों का विकास, भारत सरकार की स्वाभाविक जिम्मेदारी बनता है। स्थानीय प्रतिनिधियों, लद्दाख और कारगिल की डवलपमेंट काउंसिल्स के सहयोग से केंद्र सरकार, विकास की तमाम योजनाओं का लाभ अब और तेजी से पहुंचाएगी। लद्दाख में स्पीरिचुअल टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और इकोटूरिज्म का, सबसे बड़ा केंद्र बनने की क्षमता है। सोलर पावर जनरेशन का भी लद्दाख बहुत बड़ा केंद्र बन सकता है। ब वहां के सामर्थ्य का उचित इस्तेमाल होगा और बिना भेदभाव विकास के लिए नए अवसर बनेंगे। अब लद्दाख के नौजवानों की इनोवेटिव स्पिरिट को बढ़ावा मिलेगा, उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए बेहतर संस्थान मिलेंगे, वहां के लोगों को अच्छे अस्पताल मिलेंगे, इंफ्रास्ट्रक्चर का और तेजी से आधुनिकीकरण होगा। लोकतंत्र में ये भी बहुत स्वाभाविक है कि कुछ लोग इस फैसले के पक्ष में हैं और कुछ को इस पर मतभेद है। मैं उनके मतभेद का भी सम्मान करता हूं और उनकी आपत्तियों का भी। इस पर जो बहस हो रही है, उसका केंद्र सरकार जवाब भी दे रही है। समाधान करने का प्रयास भी कर रही है. ये हमारा लोकतांत्रिक दायित्व है। लेकिन मेरा उनसे आग्रह है कि वो देशहित को सर्वोपरि रखते हुए व्यवहार करें और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख को नई दिशा देने में सरकार की मदद करें। देश कि मदद करें. संसद में किसने मतदान किया, किसने नहीं किया,किसने समर्थन दिया, किसने नहीं दिया, इससे आगे बढ़कर अब हमें जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के हित में मिलकर, एकजुट होकर काम करना है।

मैं हर देशवासी को ये भी कहना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों की चिंता,  हम सबकी चिंता है, 130 करोड़ नागरिकों का चिंता है. उनके सुख-दुःख, उनकी तकलीफ से हम अलग नहीं हैं। अनुच्छेद 370 से मुक्ति एक सच्चाई है, लेकिन सच्चाई ये भी है कि इस समय ऐतिहास के तौर पर उठाए गए कदमों की वजह से जो भी परेशानी हो रही है, उसका मुकाबला भी वही लोग कर रहे हैं। कुछ मुट्ठी भर लोग, जो वहां हालात बिगाड़ना चाहते हैं, उन्हें धैर्यपूर्वक जवाब भी वहां के हमारे भाई बहन दे रहे हैं। हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने की पाकिस्तानी साजिशों के विरोध में जम्मू-कश्मीर के ही देशभक्त लोग डटकर खड़े हुए हैं। भारतीय संविधान पर विश्वास करने वाले हमारे ये सभी-भाई बहन अच्छा जीवन जीने के अधिकारी हैं। हमें उन सब पर गर्व है। मैं आज जम्मू-कश्मीर के इन साथियों को भरोसा देता हूं कि धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएंगे और उनकी परेशानी भी कम होती चली जाएगी। साथियों, ईद का मुबारक त्योहार भी नजदीक ही है। ईद के लिए मेरी ओर से सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। सरकार इस बात का ध्यान रख रही है कि जम्मू-कश्मीर में ईद मनाने में लोगों को कोई परेशानी न हो। हमारे जो साथी जम्मू-कश्मीर से बाहर रहते हैं और ईद पर अपने घर वापस जाना चाहते हैं, उनको भी सरकार हर संभव मदद कर रही है।

साथियों, आज इस अवसर पर, मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा में तैनात अपने सुरक्षा बलों के साथियों का भी आभार व्यक्त करता हूं। प्रशासन से जुड़े सभी लोग, राज्य के कर्मचारी और जम्मू-कश्मीर पुलिस जिस तरह से स्थितियों को सँभाल रही है, वो बहुत बहुत प्रशंसनीय है। आपके इस परिश्रम ने, मेरा ये विश्वास और बढ़ाया है , बदलाव हो सकता है। भाइयों और बहनों, जम्मू-कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। गर्व करते है इसकी रक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर के अनेकों वीर बेटे-बेटियों ने अपना बलिदान दिया है, अपना जीवन दांव पर लगाया है। पुंछ जिले के मौलवी गुलाम दीन,  जिन्होंने 65 की लड़ाई में पाकिस्तानी घुसपैठियों के बारे में भारतीय सेना को बताया था,  उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था, लद्दाख के कर्नल सोनम वानंचुग जिन्होंने कारगिल की लड़ाई में दुश्मन को धूल चटा दी थी, उन्हें महावीर चक्र दिया गया था. राजौरी की रुखसाना कौसर, जिन्होंने एक बड़े आतंकी को मार गिराया था. उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था,

पुंछ के शहीद औरंगजेब, जिनकी पिछले वर्ष आतंकियों ने हत्या कर दी थी और जिनके दोनों भाई अब सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं, ऐसे वीर बेटे-बेटियों की ये लिस्ट बहुत लंबी है। आतंकियों से लड़ते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनेक जवान और अफसर भी शहीद हुए हैं।  देश के अन्य भू भाग से भी हज़ारों लोगों को हमने खोया है इन सभी का सपना रहा है-  एक शांत, सुरक्षित, समृद्ध जम्मू-कश्मीर बनाने का। उनके सपने को हमें मिलकर पूरा करना है। ये फैसला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ ही पूरे भारत की आर्थिक प्रगति में सहयोग करेगा। जब दुनिया के इस महत्वपूर्ण भूभाग में शांति और खुशहाली आएगी, तो स्वभाविक रूप से विश्व शांति के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।मैं जम्मू-कश्मीर के अपने भाइयों और बहनों से, लद्दाख के अपने भाइयों और बहनों से, आह्वान करता हूं। आइए, हम सब मिलकर दुनिया को दिखा दें कि इस क्षेत्र के लोगों का सामर्थ्य कितना ज्यादा है, यहां के लोगों का हौसला, उनका जज्बा कितना ज्यादा है। आइए, हम सब मिलकर,नए भारत के साथ-साथ अब नए जम्मू-कश्मीर और नए लद्दाख का भी निर्माण करें।

स्वास्थ्य विभाग में थोक में फेरबदल…17 को किया गया इधर से उधर…डॉ. खेमराज सोनवानी को रायपुर से बलौदाबाजार, डॉ. मिथलेश चौधरी को राजनांदगांव से जांजगीर-चांपा भेजा गया…देखें आदेश…

रायपुर। राज्य शासन ने स्वास्थ्य विभाग में फेरबदल आदेश जारी किया है। जारी आदेश में 17 चिकित्सा विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है।

नहीं रही पूर्व विदेश मंत्री बीजेपी के कद्दावर नेता सुषमा स्वराज .... दिल्ली के एम्स में उपचार के दौरान हुआ निधन

नई दिल्ली:- भारत सरकार की पूर्व विदेश मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी की कद्दावर नेता सुषमा स्वराज का आज 6 अगस्त की रात्रि देश की राजधानी दिल्ली के एम्स में उपचार के दौरान निधन हो गया, ज्ञात हो कि सुषमा स्वराज की अस्वस्थता के कारण एम्स में उनका उपचार चल रहा था, सुषमा स्वराज के निधन से भारतीय जनता पार्टी को एक गहरी क्षति पहुंची है, तथा भारतीय जनता पार्टी सहित देश के लोगों ने सुषमा स्वराज के निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।

सुषमा स्वराज से जुड़ी उपलब्धियां

1977 में ये देश की प्रथम केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल सदस्या बनीं, वह भी 25 वर्ष की आयु में।

1979 में 27 वर्ष की आयु में ये जनता पार्टी, हरियाणा की राज्य अध्यक्षा बनीं।

स्वराज भारत की किसी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी की प्रथम महिला प्रवक्ता बनीं।

इनके अलावा भी ये भाजपा की प्रथम महिला मुख्य मंत्री, केन्द्रीय मन्त्री, महासचिव, प्रवक्ता, विपक्ष की नेता एवं विदेश मंत्री बनीं।

ये भारतीय संसद की प्रथम एवं एकमात्र ऐसी महिला सदस्या हैं जिन्हें आउटस्टैण्डिंग पार्लिमैण्टेरियन सम्मान मिला है। इन्होंने चार राज्यों से 11 बार सीधे चुनाव लडे।

इनके अलावा ये हरियाणा में हिन्दी साहित्य सम्मेलन की चार वर्ष तक अध्यक्षा भी रहीं।

जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल हुआ पास लोकसभा में पक्ष में 370 तो विपक्ष में पड़े 70 वोट

नई दिल्ली: -जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल मंगलवार को लोकसभा में पारित हो गया. बिल के पक्ष में 370 वोट जबकि विपक्ष में 70 वोट पड़े. बता दें सोमवार को यह बिल राज्यसभा से पारित हो गया है. 

राज्यसभा में सोमवार को इस बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े थे, वहीं विपक्ष में 61 सांसदों में मतदान किया. राज्यसभा में बिल के पास होने के बाद मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पेश किया गया. 

इससे पहले लोकसभा में इस बिल पर चर्चा करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाओं के अंदर कोई भी फैसला लेने के लिए भारत की संसद को पूरा अधिकार है. गृहमंत्री ने कहा कि यहां उपस्थित एक दो लोगों के अलावा किसी ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध नहीं किया. वो भी चाहते हैं कि 370 हट जाए, लेकिन उनके सामने वोट बैंक का प्रश्न आ जाता है. 

बड़ी खबर :-कश्मीर से अब अनुच्छेद 370 खत्म … जम्मू-कश्मीर व लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश... गृह मंत्री ने सदन में किया इसका ऐलान … जानिये अनुच्छेद 35A और धारा 370 के बारे में ...

नई दिल्ली :- कश्मीर में केंद्र सरकार ने सबसे बड़ा फैसला लिया है। कश्मीर में धारा 370 हटाने का फैसला ले लिया है। आज गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कश्मीर को लेकर 4 बिल और संकल्प प्रस्तुत किया। अमित शाह के इस ऐलान के साथ ही कश्मीर में 370 हटाया जायेगा। विपक्ष उग्र हो गया और जोरदार हंगामा शुरू हो गया। जोरदार हंगामे से बीच ही अमित शाह ने धारा 370 हटाने का बिल प्रस्तुत किया।

राज्यसभा में आज केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक बिल प्रस्तुत किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का प्रस्ताव पेश किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य का पुनर्गठन का भी प्रस्ताव रखा है। जम्मू कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। जम्मू कश्मीर से अब लद्दाख को अलग कर दिया गया है।

जम्मू कश्मीर को लेकर मोदी सरकार ने बहुत बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में पेश कर दिया है. गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा- राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे. यानी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की सिफारिश कर दी है. इसके साथ ही जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन का भी फैसला किया गया है.

राष्ट्रपति ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है। कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के साथ खुद ही 35A भी हट गया है। अनुच्छेद 370 के साथ-साथ

अनुच्छेद 35 A क्या है 

अनुच्छेद 35ए जम्मू-कश्मीर विधानसभा को राज्य के ‘स्थायी निवासी’ की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है। अस्थायी नागरिक जम्मू-कश्मीर में न स्थायी रूप से बस सकते हैं और न ही वहां संपत्ति खरीद सकते हैं। उन्हें कश्मीर में सरकारी नौकरी और छात्रवृत्ति भी नहीं मिल सकती। 1954 में इसे संविधान में जोड़ा गया था। आर्टिकल 35A के अनुसार गैर-निवासी नागरिकों के पास जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासियों के समान अधिकार और विशेषाधिकार नहीं हो सकते हैं.आर्टिकल 35A एक महिला को उसकी मर्जी के पुरुष के साथ शादी करने के बाद उसके बच्चों को जायजाद में हक न देकर उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है. अगर कोई महिला किसी ऐसे पुरुष से शादी करती है जिसके पास कश्मीर का स्थायी निवास प्रमाण पत्र न हो तो उसके बच्चों को न तो स्थायी निवास प्रमाण पत्र मिलता है और न ही जायजाद में हिस्सा. उन्हें जायजाद में हिस्सा पाने के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता है भले ही महिला के पास कश्मीर की नागरिकता हो.इस अनुच्छेद से उन श्रमिकों और मूल निवासियों जैसे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की भी खुली छूट मिलती है जो कई पीढ़ियों से कश्मीर में निवास कर रहे हैं. जिन दलितों और वाल्मीकियों को 1950-60 के बीच जम्मू-कश्मीर राज्य में लाया गया था, उन्हें इस शर्त पर स्थायी निवास प्रमाण पत्र दिया गया था कि वे और उनकी आने वाली पीढ़ियां राज्य में तभी रह सकती हैं, जब वे मैला ढोने वाले बने रहें. आज राज्य में छह दशक की सेवा करने के बाद भी उन मैला ढोने वालों के बच्चे सफाई कर्मचारी हैं और उन्हें कोई और पेशा चुनने का अधिकार नहीं है.

आर्टिकल 35A से जम्मू कश्मीर सरकार को यह अधिकार मिला है कि वह किसे अपना स्थायी निवासी माने और किसे नहीं.

-जम्मू कश्मीर सरकार उन लोगों को स्थायी निवासी मानती है जो 14 मई 1954 से पहले कश्मीर में बस गए थे.

-कश्मीर के स्थायी निवासियों को जमीन खरीदने, रोजगार पाने और सरकारी योजनाओं में विशेष अधिकार मिला है.

-देश के किसी दूसरे राज्य का निवासी जम्मू-कश्मीर में जाकर स्थायी निवासी के तौर पर नहीं रह सकता.

-दूसरे राज्यों के निवासी ना कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं, ना राज्य सरकार उन्हें नौकरी दे सकती है.

-अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उसके और उसके बच्चों के प्रॉपर्टी राइट छीन लिए जाते हैं. उमर अब्दुल्ला का निकाह गैर कश्मीरी महिला से हुआ है लेकिन उनके बच्चों को सारे अधिकार हासिल हैं. उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला का निकाह गैर कश्मीरी व्यक्ति से होने के कारण संपत्ति के अधिकार से वह वंचित कर दी गई हैं.

अनुच्छेद 370 

यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देता है। इसके मुताबिक, भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर के मामले में सिर्फ तीन क्षेत्रों-रक्षा, विदेश मामले और संचार के लिए कानून बना सकती है। इसके अलावा किसी कानून को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार की मंजूरी चाहिए होती है।

अनुच्छेद 35A की वजह से जम्मू कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता है.

-अनुच्छेद 370 की वजह से जम्मू कश्मीर में अलग झंडा और अलग संविधान चलता है.

-आर्टिकल 370 के कारण कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का होता है, जबकि अन्य राज्यों में 5 साल का होता है.

-आर्टिकल 370 के कारण भारतीय संसद के पास जम्मू-कश्मीर को लेकर कानून बनाने के अधिकार बहुत सीमित हैं.

-संसद में पास कानून जम्मू कश्मीर में तुरंत लागू नहीं होते हैं. शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार, मनी लांड्रिंग विरोधी कानून, कालाधन विरोधी कानून और भ्रष्टाचार विरोधी कानून कश्मीर में लागू नहीं है. इससे यहां ना तो आरक्षण मिलता है, ना ही न्यूनतम वेतन का कानून लागू होता है.

जनसंपर्क विभाग में अधिकारियों का तबादला, देखिए सूची

रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग में काम कर रहे 22 कर्मचारियों का तबादला कर दिया गया है. राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में जिला संपर्क से छत्तीसगढ़ संवाद और दिल्ली स्थित सूचना केन्द्र तक नई पदस्थापना सूची जारी कर दी गई. 
देखिए सूची.

 

 

 

2 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण ... 80 वाहिनी बटालियन मुख्यालय जगदलपुर में दो नक्सली जुरू, चमरू ने किया समर्पण

 

 

 

दंतेश्वर कुमार (चिंटू)

जगदलपुर:-80 वाहिनी बटालियन मुख्यालय जगदलपुर में आज दो नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया दो नक्सली चमरू जुरु ने 80 बटालियन जगदलपुर के कमांडेड अमिताभ कुमार के सामने आत्मसमर्पण किया आपको बता दें कि यह दोनों नक्सली अप्रैल 2018 में सुरक्षा बल के साथ मुठभेड़ में शामिल थे और यह दोनों कुतुल एरिया कमिटी एलओएस जन्मिलिशिया सदस्य एवं परलकोट एलओएस सदस्य उप एरिया कमांडर के सदस्य थे।

बड़ी खबर -DGP ने ली प्रेस कॉन्फ्रेंस, कहा की राजनांदगांव और कवर्धा से इंटेलिजेंस सूचना पर चलाया गया था यह ऑपरेशन, कई नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि

रायपुर :- आज जवानों को बड़ी सफलता मिली जहाँ मुठभेड़ में 7 नक्सलियों को ढेर किये ।जिसके बाद आज DGP डीएम अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस ली है। दरअसल इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र की सीमा पर पहाड़ियों में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में सात नक्सली मारे गए है। वहीं मौके से 7 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं यह जानकारी DGP डीएम अवस्थी ने दी। वही इस मुठभेड़ के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी DGP डीएम अवस्थी से फोन पर इसकी जानकरी ली। DGP डीएम अवस्थी ने कहा कि राजनांदगांव और कवर्धा से इंटेलिजेंस सूचना थी जिस पर एक ऑपरेशन चलाया गया था। जिसमें नक्सलियों के साथ मुठभेड़ हुई। जिसमें कई नक्सलयों के मारे जाने की सूचना है और आगे की कार्रवाई जारी है साथ ही एक्स्ट्रा फोर्स भी भेजा गया है। उन्होंने कहा कि एक और ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। मिली जानकरी अनुसार, इस मुठभेड़ में 3 जवानों को चोटें भी आई है। दूसरी ओर यह भी खबरे आ रही है जहां मारे गए नक्सलयों में बड़े कमांडर हो भी सकते हैं। आपको बता दें कि जिस क्षेत्र में यह मुठभेड़ हुई वहां बारिश भी जारी है जिसके कारण जवानों को थोड़ी मुश्किल हो रही है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार, इस मुठभेड़ में 4 पुरुष 3 महिला नक्सली मारे गए हैं। आपको बता दें कि इस साल 55 नक्सलयों के शव बरामद किया गया है। विदित हो कि आज नक्सली शहीदी सप्ताह का आखरी दिन है जहां जवानों को इस मुठभेड़ में बड़ी सफलता मिली है।

जवान और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 7 नक्सली ढेर

सूर्यकांत यादव

राजनांदगांव:-सुरक्षा बल के जवान और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 7 नक्सली मार गिराए गए है। मुठभेड़ बागनदी थाना के शेरपार और सिटागोटा के जंगल में हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर इलाके की सर्चिंग की जा रही है, मौके से जवानों ने हथियार भी बरामद किया है। जानकारी के मुताबिक जिला पुलिस बल, डीआरजी और सीएएफ की टीम शनिवार सुबह सर्चिंग के लिए निकली थी। इसी दौरान बागनदी इलाके में नक्सलियों के साथ सुरक्षा बल की मुठभेड़ हुई, जवाबी कार्रवाई करते हुए जवानों ने 7 नक्सलियों को ढेर कर दिया, जवानों ने सभी मारे गए नक्सलियों के शव बरमाद कर लिए है, और मौके से AK-47, 303 राइफल,12 बोर बंदूक और अन्य सामग्री बरामद की है। अभी इलाके में सर्चिंग जारी है।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक एडवाइजरी जारी कर तत्काल अमरनाथ यात्रियों को तुरंत घाटी छोड़ने को कहा ....बड़े आतंकी हमले की आशंका

जम्मू कश्मीर:- जम्मू कश्मीर सरकार ने पर्यटकों और अमरनाथ यात्रियों को तत्काल घाटी छोड़ने के निर्देश दिये हैं।साथ ही जम्मू-कश्मीर सरकार ने एक एडवाइजरी जारी कर तत्काल अमरनाथ यात्रियों को तुरंत घाटी छोड़ने को कहा है। एडवाइजरी में साफ तौर पर कहा गया है कि घाटी में आतंकी हमले का खतरा है। उन्होंने बताया कि अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकियों ने घाटी का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी. बता दें कि घाटी में आतंकी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं, इसलिए हमने ग्राउंड पर ग्रिड को मजबूत करने की कोशिश की है. आपको बता दें कि 4 अगस्त तक पहले ही सरकार ने अमरनाथ यात्रा रोक दी थी, लेकिन अब यात्रा पूरी तरह से रोक दी गयी है। आतंकियों के पास से एम-24 स्नाइपर राइफल बरामद की गई थी. एडवाइजरी में कहा गया कि राज्य में बड़े आतंकी हमले इनपुट है, इसलिए आप लोग जल्द से जल्द अपनी यात्रा को पूरी करके लौट जाएं. इसके साथ ही अमरनाथ यात्रा को रोक दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कृषि यंत्रों की पूजा करने के बाद हरेली यात्रा की शुरुआत की ..... गेड़ी डांस ..बैलगाड़ी की सवारी

रायपुर:– प्रदेश में छत्तीसगढ़ का लोक पर्व हरेली धूमधाम से मनाया जा रहा है  । सुबह हरेली तिहार यात्रा की शुरुवात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास से हुई। मुख्यमंत्री निवास पर ग्रामीण साज़ सज्जा के साथ बैलगाड़ी में सवार होकर पहुँचे, जहां मुख्यमंत्री ने कृषि यंत्रों की पूजा करने के बाद हरेली यात्रा की शुरुआत की।

हरेली के दिन सुबह से किसान अपने हल, बैल,कुदाल और कृषि कार्य मे लगने वाले सभी यंत्रो को सफाई करने के बाद पूजा करते है, साथ ही गांव में अगल अलग खेल भी खेले जाते है। हरेली में गेड़ी का महत्व भी है। बच्चो से लेकर बड़ो तक गेड़ी चढ़कर घूमते और नाचते है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली यात्रा का शुभारम्भ कर अपने आवास से बैलगाड़ी की सवारी की। फिर गेड़ी में चढ़कर डांस किया, और प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की बधाई दी।