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बिहार विधानसभा चुनावः‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ यानि ‘हम’ के मुखिया जीतन राम माझी ने ली प्रेस वार्ता एक्स सी एम् के बयान से महागठबंधन में बिखराव के संकेत

पटनाः बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है। राजनितिक दल अपने राजनितिक प्रतिद्वंदी से भिड़ने से पहले की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। इस प्रक्रिया के तहत गठबंधन के घटक दल सीटों को लेकर अपने साथी दलों पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर चुके हैं। इसी कड़ी में महागठबंधन का एक घटक दल ‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का हालिया बयान इसका स्पष्ट उदाहरण है।

‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ यानि ‘हम’ के मुखिया जीतन राम माझी ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने साथी घटक दल ‘राष्ट्रीय जनता दल’ के नेता और पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर तेजस्वी यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार कोरोना से त्रस्त है और नेता प्रतिपक्ष घर में बैठे हैं, जबकि ऐसे संकट काल में उन्हें घर से बाहर निकलकर प्रदेशवासियों की समस्या का हल ढूँढना चाहिए था। राजनितिक विशेषज्ञ इसे मांझी द्वारा परोक्ष रूप से नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए अपने साथी घटक दल ‘राष्ट्रीय जनता दल’ पर मानसिक दबाव बनाने के तौर पर देख रहे हैं। 

इसी वर्ष नवम्बर में विधानसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में इस बयान के कई मायने लगाए जा रहे हैं। बिहार की राजनीती में रूचि रखनेवालों का कहना है कि मांझी ने इस बयान के लिए जो जगह चुनी है वो खास मायने रखती है। मैथिली भाषा बोले जाने वाले वोट बैंक के नजरिये से बिहार का एक बड़ा हिस्सा मिथिलांचल के झंझारपुर और दरभंगा के मध्य में ‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ यानि ‘हम’ के मुखिया जीतन राम माझी का प्रेस वार्ता करना एक तीर में कई शिकार करने जैसा है। क्योंकि मिथिलांचल की ये वो जगह है जहां मुस्लिम और यादवों की तादाद बनिस्बत अधिक है जो ‘राष्ट्रीय जनता दल’ का बड़ा वोट बैंक है।

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की ‘हम’ पार्टी महागठबंधन में रहेगी या नहीं रहेगी, इसका फैसला पार्टी के मुखिया मांझी 25 जून के बाद ले सकते हैं। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि वो हमेशा महागठबंधन में coordination committee बनाने की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन कभी भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया।

आगे उन्होंने कहा कि शायद अब महागठबंधन के घटक दल इसकी अहमियत को समझेंगे और समन्वय समिति की गठन कर आगे की रणनीति तैयार कर लेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस माह में महागठबंधन के घटक दलों के नेता आपसी सहमति बना लेंगे, जिससे एनडीए को टक्कर देना सरल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि सहमति नहीं बनती है तो ऐसी स्थिति में ‘हम’ का विकल्प खुला रहेगा और फिर ‘हम’ अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए आजाद होगा।

गुजरात में भूकम्प के झटके, केंद्र राजकोट से 122 किमी दूर, तीव्रता 5

गांधी नगर: रविवार शाम गुजरात के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। 8 बजकर 13 मिनट पर भूंकप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र गुजरात के उत्तर-पश्चिमोत्तर राजकोट में था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NSC) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.8 मापी गई। अभी तक इस भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

बिहार में बैठको का दौर शुरू क्या आरक्षण फिर से बनेगा चुनावी मुद्दा?

पटनाः सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण को लेकर हालिया टिप्पणी से बिहार के चुनावी मैदान में एक बार फिर आरक्षण को लेकर बहस छिड़ गई है। तमिलनाडु के राजनीतिक दलों द्वारा मेडिकल कॉलेजों में ऑल इण्डिया कोटा में ओबीसी को पचास फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि आरक्षण का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण पर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जताई है। इसको लेकर बिहार में बैठको का दौर शुरू हो गया है। सभी दलों के अनुसूचित जाति और जनजाति के नेता आरक्षण को लेकर लामबंद होने लगे हैं।

लोजपा सुप्रीमो तथा केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा ‘‘आरक्षण के मुद्दे पर बार बार विवाद उठता रहता है। आरक्षण पूना पैक्ट की उपज है, इस पर सवाल उठाना, पूना पैक्ट को नकारना है। संविधान के मुताबिक अनुसूचित जातिध्जनजाति पहले से ही पिछड़ा है। संविधान में प्रदत्त अधिकारों के तहत न सिर्फ अनुसूचित जाति/जनजाति बल्कि अन्य पिछड़े वर्ग और ऊंची जाति के गरीब लोगों को भी आरक्षण दिया गया है। बार-बार आरक्षण पर उठने वाले विवाद को खत्म करने के लिए आरक्षण संबंधी सभी कानूनों को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने ने के लिए सभी दल मिलकर प्रयास करें।’’
 

रामविलास पासवान के ट्वीट पर रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया ‘‘सत्ताभोग के कारण आरक्षण खत्म करने वालों के साथ खड़े है। आपकी मंशा पाक है तो मंत्री पद से इस्तीफा देकर सर्वदलीय बैठक बुलाइ, हम सब आपके साथ जरूर खड़े होंगे।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ अशोक कुमार के आवास पर शुक्रवार को अनुसूचित जाति/जनजाति के विधायकों की आरक्षण को लेकर बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस, जदयू, भाजपा, हम के विधायकों ने बिहार विधानमंडल अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा का गठन किया।

मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राज्यपाल फागू चैहान से मिल कर अनुसूचित जाति/जनजातियों के विभिन्न मांगों संबंधी  ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के मांगों में आरक्षण संबंधी विवादों के स्थायी निराकरण के लिए आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने, बैकलाॅग पदों पर अभियान चलाकर शीघ्र नियुक्ति करने, प्रमोशन में आरक्षण देने, निजी क्षेत्र के नौकरियों में आरक्षण देने के अलावा आरक्षित वर्ग के छात्रों को सामान्य वर्ग का कट ऑफ माक्र्स प्राप्त करने पर उनकी नियुक्ति पहले की तरह सामान्य वर्ग से करना शामिल है।
 

वहीं राजद इस मोर्चे से अलग अपनी राजनीति कर रहा है। प्रदेश कार्यालय में पार्टी के अनुसूचित जाति/जनजाति के विधायकों ने शुक्रवार को बैठक कर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया है। राजद नेता शिवचंद्र राम ने कहा कि आरक्षण समाप्त किया जा रहा है, इसी को लेकर हमलोग चिंतन मनन किए हैं।

जदयू नेता तथा सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि राज्य में पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण नीतीश कुमार ने ही दिया है।

बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव तथा 2019 के लोकसभा चुनाव में भी आरक्षण चुनावी मुद्दा बना था, जिसने नतीजों पर भी अपना असर दिखाया था। एक बार फिर चुनावी आहट के साथ आरक्षण भी चर्चा में है।

चुनावी एजेंडे को लेकर वार पलटवार के बीच सूबे का सदाबहार चुनावी मुद्दा नया जिला बनाने की मांग

पटनाः आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल चुनावी मूड़ में आ चुके हैं। चुनावी एजेंडे को लेकर वार पलटवार के बीच सूबे का सदाबहार चुनावी मुद्दा जिले को दर्जा देने की मांग फिर सामने आ गया है। इसका कई विधानसभा सीटों पर असर दिखाई दे सकता है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को जदयू कार्यकर्ताओं के साथ विडियो कान्फ्रेसिंग से हो रहे संवाद में नवगछिया को जिले का दर्जा दिए जाने की बात कही। इससे क्षेत्र को जिला बनाने की मांग कर रहे अन्य अनुमंडलों में भी उत्साह का संचार हो गया है। चुनाव के ठीक पहले नये जिला, अनुमंडल, प्रखंड का गठन किया जाता है, तो इसका सीधा फायदा जदयू को मिल सकता है। वहीं इस बार भी इसका इस्तेमाल अगर चुनावी झुनझुने के लिए होता है तो जनता जदयू को उल्टा सबक भी सिखा सकती है। 

राज्य में 20 अगस्त, 2001 को राजद शासनकाल में जहानाबाद से अलग अरवल जिला बनाया गया था। उसके बाद बीते 19 सालों में कई अनुमंडल के लोगों ने जिला बनाने की मांग उठाई। बगहा, विक्रमगंज, रोसड़ा, नवगछिया सहित कई अनुमंडलों में जिला बनाने को लेकर जनता ने तीव्र आंदोलन भी किए। रोसड़ा में ऐतिहासिक मानव श्रृंखला बनाई गई। लेकिन लोगों की आकांक्षाएं धरी की धरी रह गईं। सरकार ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

हालांकि, इन सभी मंडलों में रोसड़ा अनुमंडल की कहानी थोड़ी अलग है। वर्ष 1994 में रोसड़ा को जिला बनाने की सरकारी अधिसूचना जारी हो गई थी। लेकिन ऐन वक्त पर इसे रद्द कर दिया गया। तत्कालीन राजद सरकार के दो ताकतवर मंत्रियों की नूराकुश्ती में रोसड़ा जिला कहानी बन कर रह गया।

वर्ष 2011 की सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रोसड़ा में कहा कि अगर राज्य में नया जिला बनता है तो उसमें पहला नाम रोसड़ा का होगा। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो रोसड़ा को जिला बनाया जाएगा। अभी इन दोनों की सरकार राज्य में शासन कर रही है, वहीं जनता आश्वासन के पूरा होने के इंतजार में है।

बगहा में वर्ष 2018 की समीक्षा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिला बनाने की मांग को अफसरों की कमी के आधार पर खारिज कर दिया था। वहीं बगहा को भी जिला बनने वाली सूची में पहले नंबर पर रखने की बात कही।

इधर, जिला प्रशासन के द्वारा प्रखंड, अनुमंडल और जिला बनाने का प्रस्ताव दिया जाता है। ग्रामीण विकास विभाग को मिले प्रस्तावो के अनुसार राज्य में 3 नये प्रमंडल, 11 जिले के अलावा 18 नये अनुमंडल तथा 310 नये प्रखंडों का प्रस्ताव रखा गया है। जिस पर मंत्री मंडलीय कमेटी वर्ष 2015 से ही विचार कर रही है। जिन 11 नये जिलों के गठन का प्रस्ताव है, उनमें बाढ, गढ़पुरा, नवगछिया, हसनपुर, हथुआ, झंझारपुर, डेहरी, रक्सौल, चकिया, बगहा तथा शेरघाटी का नाम बताया जा रहा है।

कोरोना काल में खर्चों को कम करने की कवायद हो रही है। ऐसे में नया जिला बनाने से सरकारी राजस्व पर और ज्यादा बोझ पड़ेगा। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से नवगछिया को जिला का दर्जा दिए जाने की बात कही है, इससे कयास लगाया जा रहा है कि चुनाव पूर्व सरकार के द्वारा जिला बनाने की घोषणा की जा सकती है।

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बिहार में सियासी घमासान अब पोस्टर वार में तब्दील

 पटनाः बिहार में सियासी घमासान अब पोस्टर वार में तब्दील हो गया है। पटना की सड़कों पर लगाए गए होर्डिंग से राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त लेने की जुगत में लगे हैं। सतारूढ़ एनडीए और राजद को लेकर लगाए पोस्टर चुनावी एजेंडे को भी सेट कर रहा है, जिसकी लोगों में चर्चा है।

पटना के विभिन्न चैराहों पर जनता दल यूनाइटेड के समर्थकों द्वारा बुधवार को पोस्टर लगाया गया। पोस्टर में लालू यादव, रावड़ी देवी के अलावा मोहम्मद शहाबुद्दीन और राजबल्लभ यादव का फोटो है। जिसमें राजद के 15 साल के शासनकाल के बारे में बताया गया है। व्यवस्था खराब नहीं थी, बल्कि व्यवस्था थी ही नहीं। लोगों में किस तरह के भय का माहौल था, इसको पोस्टरों में दर्शाया गया है।

गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के 73वे जन्मदिन पर पटना में जदयू समर्थकों ने पोस्टर वार को आगे बढ़ा दिया। पोस्टर में लालू प्रसाद यादव की 73 संपत्तियों को दिखाया गया है।

पोस्टर से लालू यादव पर जारी हमले से राजद के नेता तिलमिला उठे हैं। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि, ‘जदयू के पास अपनी उपलब्धि गिनाने को कुछ नहीं है तो उनके नेता को पोस्टरों में बदनाम कर रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड की राजनीति लालू यादव से शुरू होती है और लालू यादव पर आकर समाप्त हो जाती है।                                                                           

हालांकि पोस्टर वार की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने खुद पोस्टर लगाकर की थी। तेजस्वी के द्वारा लगाए गए पोस्टर में डीजीपी कार्यालय की प्रवासी मजदूरों को लेकर लिखी गई चिट्ठी के साथ प्रवासी मजदूरों के बदहाल स्थिति, बेरोजगारी, क्वारंटीन सेंटर पर कुव्यवस्थाओ पर सवाल उठाए गए थे।  

राज्य के विधानसभा चुनाव में जनता तक पहुंचने के लिए जहां वर्चुअल रैली हो रही  है, वहीं पोस्टर वार भी साथ-साथ चल रही है।

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राज्यसभा चुनावः गहलोत ने बीजेपी पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगाये, कहा हमारे विधायक एकजुट

जयपुरः राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, इससे बीजेपी को
 झटका लग सकता है। इस चुनाव के लिए कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल को राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार हैं, साथ ही पश्चिमी राजस्थान से दलित युवा चेहरा नीरज दांगी हैं। बीजेपी ने राजेंद्र गहलोत को अपना पहला उम्मीदवार बनाया है जबकि ओमकार सिंह लखावत बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।

सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले निर्दलीय विधायकों के साथ कांग्रेस के विधायकों ने आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर जयपुर के शिव विलास रिजॉर्ट में एक बैठक की। बैठक के बाद गहलोत ने कहा कि बैठक बहुत सफल रही है और सब एकजुट होकर यहां से गए हैं। कल फिर बैठक होगी जिसमें पार्टी के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे भी मौजूद रहेंगे।

उन्होंने कहा, राजस्थान में चुनाव है, यह दो महीने पहले भी आयोजित किया जा सकता था। लेकिन उन्होंने गुजरात और राजस्थान में खरीद फरोख्त पूरी नहीं हुई थी, इसलिए उन्होंने चुनाव कराने में देरी की। अब चुनाव होने वाला है और स्थिति जस की तस है। हमारे विधायक बहुत अच्छी स्थिति में हैं, वे समझ गए। उन्हें खूब लोभ लालच देने की कोशिश की गयी।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ‘बीजेपी कब तक खरीद-फरोख्त की राजनीति करेगी। कांग्रेस आने वाले समय में उन्हें झटका देती है तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी। जनता सब कुछ समझ सकती है। आज की बैठक बहुत सफल रही। हर कोई एकजुट है, कल फिर मिलेंगे’। एक निर्दलीय विधायक महादेव सिंह खंडला ने कहा कि ‘मैं कांग्रेस के साथ हूं। मुझे ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है’।

 
गहलोत ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं राजस्थान का मुख्यमंत्री हूं, जिसके विधायक बिना लालच के सरकार का साथ देते हैं। इसलिए की राज्य में सरकार स्थिर रहनी चाहिए। राज्य के कुछ विधायकों को प्रलोभन दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘करोड़ों अरबों रुपये भेजे जा रहे हैं। सुन रहे हैं कि नकदी स्थानांतरित हो रही है जयपुर में। कौन भेज रहा है। बांटने के लिए एडवांस देने की बातें हो रही हैं। आप लीजिए दस करोड़ एडवांस ले लीजिए। बाद में दस और देंगे फिर पांच और देंगे। क्या हो रहा है। खुला खेल हो रहा है यहां पर।’

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला राज्यसभा चुनाव पर विचार-विमर्श करने के लिए जयपुर पहुंचे, उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास सम्पूर्ण बहुमत है और उसके विधायक किसी भी लालच में नहीं आएंगे। भाजपा द्वारा कुछ निर्दलीय विधायकों को कथित तौर पर लालच दिये जाने के सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान की वीर भूमि में भाजपा के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे।

उधर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा, भले ही कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगाये लेकिन उनका खुद का घर सुरक्षित नहीं है, उनको अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है।

राजस्थान से राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव 19 जून को होने तय हैं। इस चुनाव के लिए कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल को राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार हैं, साथ ही पश्चिमी राजस्थान से दलित युवा चेहरा नीरज दांगी हैं। बीजेपी ने राजेंद्र गहलोत को अपना पहला उम्मीदवार बनाया है जबकि ओमकार सिंह लखावत बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।

बंगाल में ममता का किला ढहाने की तैयारी, शाह आज फूकेंगे चुनावी रैली का बिगुल

 नई दिल्लीः कोरोना वायरस (कोरोना  वायरस ) की वजह से आने वाले चुनावों में प्रचार के नये-नये तरीके दिखाई देने वाले हैं। बिहार (बिहार ) में वर्चुअल रैली (वर्चुअल  रैली ) की सफलता के बाद गृह मंत्री (होम  मिनिस्टर ) अमित शाह (अमित  शाह ) ने अब इस फार्मूले को पश्चिम बंगाल (वेस्ट  बंगाल ) में अपनाने का सोचा है। इसी कड़ी में मंगलवार को पश्चिम बंगाल में वर्चुअल रैली के जरिए अपने कैंपेन (कैंपेन ) की शुरूआत करने जा रहे हैं। बंगाल में जमीन तलाश रही बीजेपी (बीजेपी ) की यह अहम रैली मानी जा रही है। इस रैली के जरिए अमित शाह प्रदेश में आने वाले चुनावों का बिगुल फूंकने जा रहे हैं। बंगाल में चुनाव अगले साल (2021) में है, लेकिन बीजेपी अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती, इसीलिए इस महामारी में भी बीजेपी के कार्यकर्ता पीछे नहीं हटने वाले।

सूत्रों से पता चला है कि अमित शाह अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म से सुबह से ही बीजेपी कार्यकर्ताओं और पश्चिम बंगाल की आम जनता से रूबरू होंगे। इस रैली में बंगाल बीजेपी के सभी बड़े नेताओं के शिरकत करने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह रैली बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है, इस रैली से प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। अलगे साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर यह पहली रैली है और बीजेपी के सारे नेता इस रैली को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।

जैसे बिहार में भी बीजेपी ने शाह की वर्चुअल रैली को सफल बनाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। बिहार में जिस तरह से लगभग हर बूथ पर एलईडी लगाकर बीजेपी कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता से संवाद किया गया था। ठीक वैसे ही बंगाल में भी वर्चुअल रैली को वास्तविक रूप देने के लिए बीजेपी की तैयारी वैसी ही है। 

पश्चिम बंगाल में कुल 80 हजार बूथ हैं और बूथ कमेटी 65 हजार बूथों में है। अगर सारे बूथों को जोड़ा जाए तो इस रैली से लगभग 5 लाख से ज्यादा लोग सपरिवार इस वर्चुअल रैली में शामिल होंगे। साथ ही वॉट्सऐप (व्हाट्सप्प ), फेसबुक (फेसबुक ) और दूसरे सोशल मीडिया के जरिए संदेश पहुंचाया जाएगा। जहां इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है वहां भी एलईडी स्क्रीन (लेद  स्क्रीन ) के माध्यम से लोग इस रैली से जुडेंगे।

उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (ममता  बनर्जी ) बीजेपी के इस महामाारी के दौर में प्रचार बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। ममता ने कहा, ‘इतना खर्च बीजेपी ही वहन कर सकती है, हमारी पार्टी नहीं।’ सूत्रों से पता चला है कि बीजेपी को मंुह तोड़ जवाब देने के लिए ममता बनर्जी भी 21 जुलाई को वर्चुअल रैली कर सकती हैं और जिस तरह भाजपा की वर्चुअल रैली के विरोध में राजद ने बिहार में ‘गरीब अधिकार दिवस’ मनाया था, उसी शैली में ममता बनर्जी इसे ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनायेंगीं।

हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी ने बंगाल में जबर्दस्त कामयाबी हासिल की थी। भारतीय जनता पार्टी ने 42 में से 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे में बंगाल का राजनीतिक दंगल बेहद दिलचस्प होता दिख रहा है। इस जानलेवा महामारी के दौर में भी बीजेपी ममता सरकार को ढील देने के मूड़ में बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनावों को लेकर सियासी लड़ाई बेहद दिलचस्प होती दिखाई दे रही है। 

बिहारः एनडीए और महागठबंधन के बीच आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर -प्रत्यारोप का दौर जारी, कौन है किस पर भारी

पटनाः एनडीए और महागठबंधन के बीच आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पलटवार का दौर शुरू हो गया है। अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। एनडीए अपने पंद्रह साल के विकास के साथ राजद के पंद्रह साल के कुशासन की याद जनता को दिला रही है, वहीं राजद लाॅकडाउन में प्रवासी मजदूरों के समस्या सुलझाने में सरकार की नाकामी को मुद्दा बना रही है।

सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पहेली से हुई वर्चुअल एंट्री ने राज्य में सियासी पारा बढ़ा दिया। लालू यादव ने ट्विटर पर पहेली से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। लालू यादव ने जनता से कोरोना काल में 83 दिनों से गायब रहने वाले रणछोड़ के हिसाब-किताब आने वाले चुनाव में लेने को कहा।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के ट्वीट के बाद जनता दल यूनाइटेड के नेताओं ने राजद और लालू यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जदयू सांसद ललन सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि जमीन के बदले नौकरी देने वाले कौन हैं। जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि लालू प्रसाद बताए कि तीन साल से रांची के होटवार जेल में क्यो बंद हैं। जानवरों का चारा खाने वाले कौन हैं। जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा कि लालू यादव आधुनिक युग के धृतराष्ट्र हैं।

वहीं भाजपा प्रवक्ता निखिल मंडल ने तेजस्वी यादव को घेरा। भाजपा नेता ने कहा कि 47 हजार का अरमानी शर्ट पहनने वाले तेजस्वी गरीबों का मसीहा बनने का ढोंग करते हैं। चार्टर्ड प्लेन में दोस्तों के साथ जन्मदिन मनाने वाले कैसे गरीबों की बात करते हैं।

तेजस्वी यादव के परिधान पर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने को राजद ने ओछी राजनीति बताया। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि तेजस्वी यादव किक्रेटर रहे हैं। उनके परिवार के लोग विदेशों में रहते हैं। तेजस्वी गरीबों के नेता हैं, इसे कोई बदल नहीं सकता है।

कोरोना काल में होने वाले विधानसभा चुनाव में वर्चुअल प्रचार का जोर रहेगा, जिसमें लालू यादव ने अपने खास अंदाज में एंट्री कर दिलचस्प बना दिया है।

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, राज्य में सिर्फ दिल्लीवालों का इलाज

नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोनो वायरस (Corona virus) के मामलों में रिकॉर्ड उछाल देखी जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी में कटेंनमेंट जोन (Containment zone) की संख्या रविवार को बढ़कर 219 हो गई है। जिसमें उत्तरी जिले में सबसे अधिक 33 कटेंनमेंट जोन एक्टिव हैं। दिल्ली सरकार (Delhi Govt.) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को कुल 163 जोन शामिल थे, और शनिवार को 169 थे।

ऐसे में केजरीवाल (Kejriwal) सरकार ने बड़ा फैसला आया है। अब दिल्ली में बाहर से आने वाले लोगों को दिल्ली में इलाज करवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। केजरीवाल के फैसले के मुताबिक, दिल्ली में मौजूद दिल्ली सरकार के सरकारी अस्पतालों और प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ दिल्लीवासियों का ही इलाज होगा। वहीं केंद्र सरकार के हॉस्पिटल सभी के लिए खुले होंगे।

दिल्ली सरकार ने की घोषणा
दिल्ली सरकार की कैबिनेट (Cabinet) बैठक में यह फैसला लिया गया है। अरविंद केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों और दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली के लोगों का ही इलाज किया जाएगा। वहीं केंद्र सरकार के हॉस्पिटल जैसे एम्स (AIIMS), सफरदरजंग (Safdarjung) और राम मनोहर लोहिया (RML) में सभी लोगों का इलाज हो सकेगा, जैसा अब तक होता भी आया है। हालांकि, कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल जो स्पेशल सर्जरी करते हैं जो कहीं और नहीं होती उनको करवाने देशभर से कोई भी दिल्ली आ सकता है, उसे रोक नहीं होगी।

केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के आदेश के मुताबिक, सोमवार से देशभर में होटल, रेस्टोरेंट, मॉल और धार्मिक स्थान खोलने की बात है। दिल्ली सरकार भी इसी के अनुसार इन रेस्टोरेंट, मॉल और धार्मिक स्थान को खोलने जा रही है। हालांकि, इस दौरान केंद्र सरकार के बनाए सोशल डिस्टेंसिंग के नियम लागू रहेंगे।

बार्डर खोले जायेंगे
केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में होटल और बैंक्वेट हॉल को अभी नहीं खोला जाएगा, आने वाले वक्त में होटल और बैंक्वेट हॉल को अस्पतालों के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही यह भी बताया कि सोमवार से दिल्ली के बॉर्डर (Border) को खोल दिया जाएगा। पिछले सप्ताह दिल्ली की सीमा को बंद कर दिया गया था। इसके बाद यह मामला अदालत तक पहुंच गया था। जनता की परेशानियों को देखते हुए सोमवार से दिल्ली के सारे बार्डर खोल दिए जायेंगे।

यूपी: फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर 25 जिलों में नौकरी करने वाली टीचर

देश में वैसे तो फर्जीवाड़े (Fraud) के मामले आते ही रहते हैं, लेकिन एक ही इंसान एक साथ कई जगह नौकरी करे, ये बात कुछ हजम नहीं हुई। ऐसा ही एक मामला जनपद कासगंज (kashganj) से सामने आया है। जहां फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर यूपी के 25 जिलों में नौकरी करने वाली टीचर (teacher) अनामिका शुक्ला (Anamika Shukla) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इस बीच अनामिका शुक्ला को लगभग 1 साल ऊपर की सैलरी करीब एक करोड़ (1 crore) रुपए का भुगतान भी सरकार द्वारा किया गया। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के दौरान ये बात सामने आई थी कि अनामिका शुक्ला के नाम से एक टीचर प्रदेश के कई जिलों में काम कर रही है। इसके बाद उसे नोटिस भेजा गया। नोटिस मिलने के बाद जब अनामिका इस्तीफा देने कासगंज पहुंची तो फर्जीवाड़े के आरोप में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, कस्तूरबा गांधी (Kasturbra Gandhi) आवासीय स्कूलों में संविदा पर लगने वाली नौकरी में दस्तावेज (documents) की जांच नहीं होती है। इंटरव्यू (Interview) के दौरान ही असली रिकार्ड देखे जाते हैं। चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है। ऐसे में केस दर्ज करने के लिए अनामिका के दस्तावेजों को आधार बनाया गया है। क्योंकि इसमें ग्रेजुएशन को छोड़कर हाईस्कूल से इंटर तक 76 फीसद से ज्यादा अंक हैं। नेटवर्क 18 के हवाले से पता चला है कि जनपद कासगंज में पकड़ी गई कथित अनामिका असली नाम प्रिया जाटव (Priya Jatav) के अनुसार, उसकी मुलाकात गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में बीएससी करते वक्त ही मैनपुरी निवासी से हुई थी। उसने प्रिया को कहा कि वह उसकी नौकरी लगवा देगा, बशर्ते वह उसे 1 लाख रूपये दे। उसने प्रिया को यह भी बताया की फर्जी दस्तावेज तैयार करवाने होंगे, उसके बाद ही नौकरी मिल सकती है। पैसे मिलने के बाद उसने प्रिया से नौकरी दिलवाने का वायदा किया। अगस्त 2018 में उसने प्रिया को नियुक्ति पत्र भी दिला दिया था। क्या है गोरखधंधा? बेसिक एजूकेशन अधिकारी अंजली अग्रवाल (Anjali Aggrawal) के मुताबिक अनामिका शुक्ला के मूल दस्तावेजों में धुंधली फोटो इस कांड में मददगार बनी। इंटरव्यू के दौरान यह फोटो देखी जाती है, लेकिन स्पष्ट न होने पर कैंडिडेट के आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र के आधार पर चयन किया जाता है। जिस तरह से बैंकों में अनामिका शुक्ला के नाम से खाता खुलवाया गया, उससे माना जा रहा है कि आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज फर्जी तैयार कराए गए हैं। पुलिस ने बेसिक एजूकेशन अधिकारी (Education Officer) अंजलि अग्रवाल की शिकायत पर अनामिका के खिलाफ धोखाधड़ी एवं फर्जी दस्तावेज तैयार करने के मामले में धारा 420, 467 एवं 468 में मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, पुलिस धारा 471 लगाने की भी तैयारी कर रही है। पुलिस का कहना है मुकदमा दर्ज कर लिया है, लेकिन पूछताछ में नाम सहित कई अन्य जानकारियां मिली है। उनको भी जांच में शामिल किया जा रहा है। कौन है असली खिलाड़ी? सवाल ये है कि आखिर वह व्यक्ति है कौन जो इस तरह से घूस लेकर लोगों की नौकरियां लगवा रहा है। ये तो सिर्फ एक मामला सामने आया है। अभी तो इस मामले में कई परतें खुलना बाकी है। आखिर इस गोलमाल में शिक्षा विभाग के कौन से लोग शामिल हैं, जो इस तरह के फर्जीवाड़ों में उस व्यक्ति का साथ दे रहे हैं, और सरकार का खजाना खाली करने में लगे हैं। योगी सरकार (Yogi govt.) को इसका जवाब जल्द ही ढूंढना होगा।

मानव क्रूरताः प्रेग्नेंट हथिनी को खिलाया पटाखे से भरा अनानास, कुछ दिन बाद हुई मौत

 नई दिल्लीः केरल में प्रेग्नेंट हथिनी मानव क्रूरता का शिकार हो गयी। बताया जा रहा है की कुछ लोगों ने एक गर्भवती हथिनी को पटाखों से भरा अनानास खिला दिया। हथिनी के अनानास चबाने पर एक तेज विस्फोट हुआ जिससे दांत सहित उसका जबड़ा भी टूट गया। जिसके कुछ दिनों बाद तड़प-तड़पकर उसकी मौत हो गयी।

पलक्कड़ जिले में हुई इस प्रेग्नेंट हथिनी की मौत के एक हफ्ते बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हथिनी पेट से थी और उसकी मौत किसी मानव द्वारा क्रूरता पूर्वक मजाक के कारण हुई। अब अपराधियों के खिलाफ पूरे देश से कड़ी कार्रवाई की हजारों आवाजें उठ रही है।

इन आवाजों में बॉलीवुड अभिनेताओं की भी आवाज शामिल है। रणदीप हुडा ने ट्वीट के जरिये दोषियों के खिलाफ सख्त करवाई की मांग की। वहीं अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर हथिनी की फोटो लगाते हुए सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग की है।
वन अधिकारी मोहन कृष्णन ने फेसबुक पर लिखा, “हथिनी लोगों पे भरोसा करती थी तो उसने अनानास खा लिया । वह खुद के बारे में नहीं सोच रही थी, लेकिन वह 18 से 20 महीने में जिस बच्चे को जन्म देने जा रही थी, उसके बारे में सोचकर परेशान थी।”

उसके मुंह में इतना शक्तिशाली पटाखा विस्फोट था कि उसकी जीभ और मुंह बुरी तरह घायल हो गए। हथिनी दर्द और भूख में, गाँव में घूमती रही। चोट लगने के कारण वह कुछ भी नहीं खा पा रही थी।

“चोट लगने के बावजूद भी उसने गाँव के एक भी इंसान को नुकसान नहीं पहुँचाया। उसने एक भी घर को नहीं उखाड़ा। यही कारण है कि मैंने कहा, वह अच्छाई से भरी थी,” श्री कृष्णन ने रोते हुए लिखा।

हथिनी नदी तक चली गयी और वहां खड़ी हो गयी। तस्वीरों में दिखाया गया है कि हथिनी नदी में अपने मुंह को पानी में डूबा रखा है , शायद असहनीय दर्द से कुछ राहत मिल जाए। वन अधिकारी ने कहा कि उसने अपनी चोटों पर मक्खियों और अन्य कीड़ों से बचने के लिए ऐसा किया होगा।

वन अधिकारियों ने उसे नदी से बाहर ले जाने के लिए दो हाथियों को बुलाया, जिन्हें सुरेंद्रन और नीलकंठन कहा जाता था। मोहन कृष्णन ने लिखा, “लेकिन मुझे लगता है कि उसके पास 6जी सेंस थी। उसने हमें कुछ करने नहीं दिया।”

अधिकारियों द्वारा हथिनी को बचाने के घंटों प्रयास के बाद, 27 मई की शाम 4 बजे, पानी में खड़े होकर उसकी मौत हो गई। हथिनी को एक ट्रक में जंगल के अंदर वापस ले जाया गया, जहां वन अधिकारियों ने उसका अंतिम संस्कार किया।

पुलिस अधीक्षक ने भूतपूर्व सैनिकों का किया सम्मान

अजीत मिश्रा : बिलासपुर (छतीसगढ़)

पुलिस अधीक्षक बिलासपुर प्रशान्त अग्रवाल ने पुलिस अधीक्षक प्रांगण में भूतपूर्व सैनिकों (Ex Armymen) का जो कि कोरोना वाइरस संक्रमण आपातकाल लॉक डाउन के क्रियान्वयन में बिलासपुर पुलिस के साथ कदम से कदम मिलाते हुए स्वयंसेवक एसपीओ की भूमिका निर्वहन करने के फलस्वरूप प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। पुलिस अधीक्षक की पहल पर रेडक्रास सोसायटी के माध्यम से समस्त एसपीओ को प्रोत्साहन राशि भी प्रदाय किया गया। इस अवसर पर भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण व अधिकारों के लिये गठित SIPAHI संस्था के प्रमुख व पूर्व एसीपी (सेना) के श्री महेन्द्र प्रताप सिंग राणा ने बिलासपुर पुलिस एवं एसपी बिलासपुर का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि भूतपूर्व सैनिक अपनी देश की सेवा जिस प्रकार से पूर्व में किये हैं। रिटायरमेंट पश्चात भी ज़रूरत पड़ने पर देश के लिये कर गुजरने का जज़्बा हमेशा है और रहेगा। तथा ऐसा सम्मान मिलता है तो हमारी प्रेरणा दुगुनी हो जाती है। प्रोत्साहन राशि के रूप में मिले राशि को समिति के माध्यम से सैनिकों के कल्याण हेतु खर्च किया जाएगा।

पढ़े कोविड-19 के संक्रमण से बचाव हेतु 01जून से ट्रेनों में सुरक्षित यात्रा हेतु आवश्यक दिशा निर्देश

अजीत मिश्रा : बिलासपुर (छतीसगढ़)
 

मंडल द्वारा बिलासपुर, अकलतरा, नैला, चाम्पा, बाराद्वार, सक्ती, खरसिया, रायगढ़, बेलपहाड़, ब्रजराजनगर रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही के लिए की गई है विशेष व्यवस्था 


भारतीय रेलवे द्वारा 01जून से 200 (100 जोड़ी ) ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है। बिलासपुर मंडल से रायगढ़ -गोंदिया-रायगढ़ जनशताब्दी एक्सप्रेस का परिचालन व हावड़ा-सीएसएमटी-हावड़ा मेल एवं हावड़ा-अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस गुजरेगी। ये सभी गाड़ियां पूर्णतया आरक्षित होगी।  जनरल कोच के लिए भी सेकंड सिटिंग का आरक्षण किया जा रहा है।  इसके अलावा नईदिल्ली-बिलासपुर-नईदिल्ली स्पेशल ट्रेन भी चल रही है।  मंडल के बिलासपुर सहित ठहराव वाले सभी स्टेशनों पर 1 जून से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए प्रवेश एवं निकास की अलग-अलग व्यवस्था एवं सुविधा केंद्र बनाए गए हैं जहाँ थर्मल स्क्रीनिंग व आवश्यक मेडिकल परीक्षण के उपरांत प्रवेश/निकास की अनुमति दी जाएगी।
बिलासपुर स्टेशन में यात्रियों को टिकट चेकिंग उपरांत उचित परिचय-पत्र के साथ गेट नं 02 से प्रवेश दिया जाएगा तथा सुविधा केंद्र में थर्मल स्क्रीनिंग व आवश्यक मेडिकल परीक्षण मेँ सफल यात्रियों को गाड़ियों मेँ प्रवेश दिया जाएगा | इसीप्रकार बिलासपुर स्टेशन में उतरने वाले यात्रियों के लिए सुविधा केंद्र में थर्मल स्क्रीनिंग व आवश्यक मेडिकल परीक्षण के बाद गेट नं 04 से निकास की व्यवस्था की गई है | यात्रियों के मार्गदर्शन हेतु स्टेशन के सभी प्रमुख स्थानों पर बैनर, पोस्टर का प्रावधान किया गया है साथ ही कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
रेल प्रशासन सभी यात्रियों से अनुरोध करता है कि कोविड-19 के रोकथाम हेतु निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मास्क लगा कर सुखद सफल यात्रा करें एवं स्टेशन ट्रेनों में प्रवेश एवं निकासी करते समय सहयोग करें तथा आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन करें।


यात्रियों को सुरक्षित व आरामदायक सफर हेतु निम्न निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा - 


1, यात्रियों को गाडियो के निर्धारित समय से डेढ घण्टे (90 मिनिट) पहले स्टेशन आना आवश्यक होगा।
  2 केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को ही रेलवे स्टेशन में प्रवेश करने की अनुमति दी जाएगी। 
 3 . सभी यात्रियों को प्रवेश करते समय और यात्रा के दौरान फेस कवर/मास्क पहनने होंगे।
 4. स्टेशन और ट्रेनों में सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
 5. थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से कराना होगा।
 6. ट्रेन के भीतर किसी तरह की चादर, कंबल और पर्दे उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। 
 7 सभी यात्रियों को आरोग्य सेतु एप्लीकेशन को डाउनलोड और इस्तेमाल करना आवश्यक होगा।

A News Edit By : Yash Kumar Lata

गोरखपुर के लिए निकली ट्रेन पहुंची ओडिशा, रेलवे ने मामले की जांच शुरू की

लॉकडाउन खत्म होने की राह देख रहे प्रवासी श्रमिक पहले ही मुसीबत की मार झेल रहे थे, ऊपर से रेलवे ने उनके लिए एक और मुसीबत खड़ी कर दी है। भारतीय रेल ने प्रवासी श्रमिकों की दुर्गति को देखते हुए उनके लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने की सोची। इससे मजदूरों को लगा की सरकार को आखिर देर से ही सही, लेकिन उनकी याद तो आयी। इससे शहरों में फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को एक उम्मीद जगी कि जैसे-तैसे सही सलामत वह अपने गांव पहुंच ही जायेंगे। 

लेकिन लापरवाही की हद तो तब हो गई जब मुंबई से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जाने के लिए निकली ट्रेन ओडिशा पहुंच गई। मुंबई से ट्रेन में बैठे लोग जब आज सुबह उठकर घर जाने के लिए तैयार हुए तो उन्होंने खुद को गोरखपुर नहीं, बल्कि ओडिशा में पाया। रेलवे की इस लापरवाही ने एक पुराने गाने "जाना था जापान पहुंच गए चीन" की याद दिला दी।

21 मई को मुंबई के वसई स्टेशन से गोरखपुर (यूपी) के लिए रवाना हुई ट्रेन अलग मार्ग पर चलते हुए ओडिशा के राउरकेला पहुंच गई। नाराज यात्रियों ने जब रेलवे से इसका जवाब मांगा तो वहां मौजूद अधिकारियों ने कहा कि कुछ गड़बड़ी के चलते ट्रेन के चालक अपना रास्ता भूल गया।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में रेल चालक की कोई गलती नहीं है। गंतव्य में परिवर्तन डिजाइन द्वारा किया गया था। हालांकि ये सवाल अभी बरकरार है कि रेल में यात्रा कर रहे यात्रियों को रूट में बदलाव को लेकर कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई? रेलवे ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रवासी मजदूर मुंबई से निकलकर अब ओडिशा में फंस गए हैं और अभी भी अपने घर जाने का इंतजार कर रहे हैं।

बस पर सियासत या वाकई प्रवासी मजदूरों की मदद करना चाहती है कांग्रेस?

उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों के लिए बसें चलाने को लेकर सियासत कांग्रेस ने तेज कर दी है। क्या कांग्रेस वाकई इन मजदूरों की मदद करना चाह रही है या उत्तर प्रदेश में अपनी ढीली होती पकड़ को फिर से मजबूत करने की एक कोशिश है? वैसे तो इस मुद्दे पर अखिलेश यादव  और मायावती भी सरकार को लिख रही हैं। लेकिन प्रियंका गांधी ने एक कदम आगे बढ़कर 1000 बसें चलवाने की पेशकश सरकार को कर दी। यही नहीं अगले दिन यूपी बॉर्डर पर कांग्रेस की तरफ से मजदूरों को ले जाने वाली बसें भी खड़ी कर दीं। देर से ही सही प्रियंका की 1000 बसों के प्रस्ताव को योगी सरकार ने मंजूरी दी तो सवाल उठे कि आखिर धुर-विरोधी कांग्रेस की बात बीजेपी ने कैसे मान ली?

खैर कुछ देर में यूपी सरकार ने नया दांव चलते हुए प्रियंका के निजी सचिव को पत्र लिखकर 1000 बसों को लखनऊ भेजने को कहा। कांग्रेस ने इसे ओछी राजनीति के साथ समय और संसाधन की बर्बादी बताया। देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में जहां प्रियंका की कोशिश यूपी में कांग्रेस को प्रवेश कराने की है तो वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कोशिश दो बड़े सियासी दलों समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को उत्तर प्रदेश से पूरी तरह से सफाया करने की है। 
2022 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना चाहती है और इससे अच्छा समय और क्या हो सकता है, जब लाखों प्रवासी मजदूर अपने घर जाना चाह रहे थे, और उन्हें कोई राह नज़र नहीं आ रही है। इस समय जो भी पार्टी इनके सहयोग के लिए हाथ बढ़ायेगी, समझों अगले चुनाव में उसका बेड़ा पार हो सकता है। 

वहीं योगी सरकार ने कांग्रेस के प्रस्ताव को मानकर एक तीर से कई शिकार करने की तैयारी में है। जहां योगी सरकार ने एक ओर सकारात्मक पॉलिटिक्स की राह दिखाई तो वहीं मंजूरी के साथ शर्तों से कांग्रेस को 1000 बसें चलाने की चुनौती भी दी है। इसके अलावा यूपी के दो मजबूत दल एसपी-बीएसपी की राजनीति को किनारे कर दिया है।
इस बीच यूपी सरकार ने प्रियंका गांधी को एक और लेटर जारी करते हुए 500-500 बसों को नोएडा और गाजियाबाद सीमा पर भेजने को कहा है। कांग्रेस का आरोप- सरकार जानबूझकर मजदूरों की मदद में देरी करा रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।