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जांजगीर चांपा : विवादों के कारण चर्चा में रहने वाला विकासखंड शिक्षा कार्यालय अकलतरा फिर सुर्खियों में , दो बीईओ के बीच कुर्सी की खींचातानी का मामला पंहुचा थाने.... पढ़े पूरा मामला..देख विडियों

A REPORT BY : यश कुमार लाटा

हमेशा अपने विवादों के कारण चर्चा में रहने वाला विकासखंड शिक्षा कार्यालय अकलतरा फिर सुर्खियों में है | दो बीईओ के बीच कुर्सी की खींचातानी का मामला थाने तक पहुच गया है | नवपदस्थ बीईओ  वेंकट रमन  सिंह पाटले द्वारा कार्यालय में ताला लगा कर चले जाने का आरोप लगाते हुए पुराने बीईओ लक्ष्मण सराफ बाहर बैठकर काम करते नजर आए तथा अवैधानिक रूप से चार्ज लेने की बात को लेकर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है |

देखे विडियों....

वही नए बीईओ वेंकट रमन  सिंह पाटले का कहना है कि मैंने शासन के आदेश का पालन करते हुए पद ग्रहण किया है और कार्यालय में जरूरी दस्तावेज तथा कीमती सामान होने के कारण ताला लगाया था |पुराने बीईओ लक्ष्मण सराफ का स्थानांतरण अकलतरा से पाली कर दिया गया था वही उनके स्थान पर वेंकट रमन  सिंह पाटले को अकलतरा बीईओ का प्रभार दिया गया है वही बीईओ लक्ष्मण सराफ शासन के इस आदेश को कोर्ट में चुनोती दिया है  वही बीईओ लक्ष्मण सराफ  कोर्ट से  फिलहाल स्थानांतरण पर स्टे होने का दावा कर रहे हैं | 

अवैध शराब कि बिक्री जोरों पर, बिर्रा पुलिस की कार्यप्रणाली उठ रहे है सवाल ...पढ़े ये खास रिपोर्ट

बिर्रा :- क्षेत्र में अवैध शराब कि बिक्री जोरों पर है, लेकिन बिर्रा पुलिस मौन है, इनदिनों बिर्रा थाना क्षेत्र के तालदेवरी, सेमरिया,बसुंला,करनौद,बसंतपुर, किकिरदा, करही में अवैध शराब कि बिक्री जोरों पर, लेकिन बिर्रा पुलिस द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं कि जा रही हैं अवैध शराब के कारण युवा पीढ़ी नशे की चपेट में है। नशे में चूर हो कर युवा पीढ़ी अपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। अवैध शराब की बिक्री से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं व विद्यार्थियों को होती है। शाम होते ही शराबियों का जमावड़ा होता है जिससे महिलाओं का शाम ढलते ही घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। शराबियों द्वारा शराब पी कर जमकर उत्पात मचाया जाता है। शराबियों द्वारा विद्या के मंदिर को भी नहीं बख्सा गया है। शराब पीकर शराबियों द्वारा बोतल को विद्यालय में फोड़कर जमकर उत्पात मचाते हैं जिससे विधार्थीयों को परेशानी होती है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत पुलिस, आबकारी विभाग से की है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी बिर्रा पुलिस, आबकारी विभाग को नहीं हैं इसकी सूचना समय - समय पर दी जाती है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस व आबकारी विभाग की अनदेखी से अवैध शराब विक्रेताओं के हौसले बुलंद है। बिर्रा क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रों से सुबह, शाम, रात को बोरी, कार्टून व थैला से भारी मात्रा में शराब की खेप पंहुचती है। शराब बाकायदा पन्नी में भर कर पहुंचाया जाता हैं। घर तो घर अब दुकानों में भी शराब बिक रही है। इस बात की जानकारी आबकारी अधिकारियों के साथ पुलिस को भी है फिर भी शराब धड़ल्ले बिक रहा है। वही एक व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बिर्रा थाना में टीआई,एसआई द्वारा एक बाहरी व्यक्ति को रखा गया है जो दिन-रात थाना में ही रहता है, साथ ही SI के साथ ही घुमता है इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि अवैध शराब विक्रेताओं से यही व्यक्ति सांठगांठ - वसूली करता है, साथ ही पुलिस कि गोपनीय जानकारी भी भंग करता है। अब देखना होगा कि मीडिया में खबर आने के बाद अधिकारियों द्वारा इसे कितना गंभीरता से लिया जाता है और कार्यवाही कि जाती है, या हमेशा कि तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

मोर तीजा तिहार

कइसन सुघघर लागथे वो, मयके के तिहार.,, करू भात के दिन अउ तीजा उपवास...बड़े बड़े डेचकि में चुरही डुबकी कढ़ही, ठेठरी अउ खुरमी के भोग परसाद चढ़ही।।। सरी मंझनीया द्वारी में संगवारी मन संग गोठीयाबोन, काकर लइका कातेक बाड़हीस यहु ला देखबोन, बइठे- बइठे अइसने अपन दुःख संसो ला बताबोन, अउ खेलत खेलत गिरही लइका तेला दु मुटका मार के सुताबोन।।। नवा लूगरा अउ साटी मुँदरी, ए दरी बीसाए हो फूलसकरी, भरे बीहीनया सबो ला पहिन के मंदिर जाबोन, पाँव पर के, बीनसा पी के नवा दुलहीन कस इतराबोन।।। अइसने मया दया ला राखे रहीबे भौजी ला सुरता देवाबोन, चार दिन के तिहार ला हँसी खुसी ले बीताबोन।।। फेर जाए के बेरा आही अउ काम के सुरता लाही.. जतका जल्दी आए के ओतका जल्दी जाए के घेरी बेरी गोठीयाही।।। अपन अपन मोटरा ला जोर के, मइके के मया ला भुला के, आँसू ला अचरा में पोंछ के, एक दरी फेर अंगना ला छोर के मोटर में बैठ जाबोन।।। लेखक:- ।।।कामायनी।।।

महारानी पद्मिनी का बलिदान।चित्तौड़ का पहला जौहर

नीलकमल सिंह ठाकुर : जौहर की गाथाओं से भरे पृष्ठ भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे अवसर एक नहीं, कई बार आये हैं, जब हिन्दू ललनाओं ने अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए ‘जय हर-जय हर’ कहते हुए हजारों की संख्या में सामूहिक अग्नि प्रवेश किया था। यही उद्घोष आगे चलकर ‘जौहर’ बन गया। जौहर की गाथाओं में सर्वाधिक चर्चित प्रसंग चित्तौड़ की रानी पद्मिनी का है, जिन्होंने 26 अगस्त, 1303 को 16,000 क्षत्राणियों के साथ जौहर किया था। पद्मिनी का मूल नाम पद्मावती था। वह सिंहलद्वीप के राजा रतनसेन की पुत्री थी। एक बार चित्तौड़ के चित्रकार चेतन राघव ने सिंहलद्वीप से लौटकर राजा रतनसिंह को उसका एक सुंदर चित्र बनाकर दिया। इससे प्रेरित होकर राजा रतनसिंह सिंहलद्वीप गया और वहां स्वयंवर में विजयी होकर उसे अपनी पत्नी बनाकर ले आया। इस प्रकार पद्मिनी चित्तौड़ की रानी बन गयी। पद्मिनी की सुंदरता की ख्याति अलाउद्दीन खिलजी ने भी सुनी थी। वह उसे किसी भी तरह अपने हरम में डालना चाहता था। उसने इसके लिए चित्तौड़ के राजा के पास धमकी भरा संदेश भेजा; पर राव रतनसिंह ने उसे ठुकरा दिया। अब वह धोखे पर उतर आया। उसने रतनसिंह को कहा कि वह तो बस पद्मिनी को केवल एक बार देखना चाहता है। रतनसिंह ने खून-खराबा टालने के लिए यह बात मान ली। एक दर्पण में रानी पद्मिनी का चेहरा अलाउद्दीन को दिखाया गया। वापसी पर रतनसिंह उसे छोड़ने द्वार पर आये। इसी समय उसके सैनिकों ने धोखे से रतनसिंह को बंदी बनाया और अपने शिविर में ले गये। अब यह शर्त रखी गयी कि यदि पद्मिनी अलाउद्दीन के पास आ जाए, तो रतनसिंह को छोड़ दिया जाएगा। यह समाचार पाते ही चित्तौड़ में हाहाकार मच गया; पर पद्मिनी ने हिम्मत नहीं हारी। उसने कांटे से ही कांटा निकालने की योजना बनाई। अलाउद्दीन के पास समाचार भेजा गया कि पद्मिनी रानी हैं। अतः वह अकेले नहीं आएंगी। उनके साथ पालकियों में 800 सखियां और सेविकाएं भी आएंगी। अलाउद्दीन और उसके साथी यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्हें पद्मिनी के साथ 800 हिन्दू युवतियां अपने आप ही मिल रही थीं; पर उधर पालकियों में पद्मिनी और उसकी सखियों के बदले सशस्त्र हिन्दू वीर बैठाये गये। हर पालकी को चार कहारों ने उठा रखा था। वे भी सैनिक ही थे। पहली पालकी के मुगल शिविर में पहुंचते ही रतनसिंह को उसमें बैठाकर वापस भेज दिया गया और फिर सब योद्धा अपने शस्त्र निकालकर शत्रुओं पर टूट पड़े। कुछ ही देर में शत्रु शिविर में हजारों सैनिकों की लाशें बिछ गयीं। इससे बौखलाकर अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर हमला बोल दिया। इस युद्ध में राव रतनसिंह तथा हजारों सैनिक मारे गये। जब रानी पद्मिनी ने देखा कि अब हिन्दुओं के जीतने की आशा नहीं है, तो उसने जौहर का निर्णय किया। रानी और किले में उपस्थित सभी नारियों ने सम्पूर्ण शृंगार किया। हजारों बड़ी चिताएं सजाई गयीं। ‘जय हर-जय हर’ का उद्घोष करते हुए सर्वप्रथम पद्मिनी ने चिता में छलांग लगाई और फिर क्रमशः सभी हिन्दू वीरांगनाएं अग्नि प्रवेश कर गयीं। जब युद्ध में जीत कर अलाउद्दीन पद्मिनी को पाने की आशा से किले में घुसा, तो वहां जलती चिताएं उसे मुंह चिढ़ा रही थीं।

स्त्री के मन की बात

"अपमान मत करना नारियों का, इनके बल पर जग चलता है, पुरुष जन्म लेकर तो, इन्हीं की गोद में पलता है।" हम अक्सर एक औरत के बाहरी रूप को देख के प्रभावित होते है चाहे उसके सौन्दर्य की बात हो या या उसके गुणों की |जब लड़की स्कुल में पढ़ रही होती है तो हम उसके परीक्षा के परिणामों की चर्चा करते है बाद में उसके बाद उसके कॉलेज के चयन की फिक्र करते है कभी-कभी लडकियां माता-पिता के द्वारा बताये कैरियर को चुनती है जैसे की हम सब को पता है भारत में सदियों से लड़की की शादी उसके घर वालों की मर्जी से की जाती है जिसका पालन हर लड़की आज भी करती है| हां आज की लडकियां इन लड़कियों में हम भी शामिल है जो अपनी पसंद के लड़के से शादी करने की मर्जी अपने परिवार के सामने रखने में नहीं झिझकती है और माता-पिता को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं होती है |आज हम लड़कियों के मन की बात करेंगे जिन बातों को हम महसूस नहीं कर पाते वो बातें जो लडकियां अपने फर्ज को पूरा करने के लिए अपनी इच्छा को अक्सर मार देती है और हम उन बातों को गौर नहीं कर पाते | जब लडकियां छोटी होती है तो उसे अक्सर हम उसे ये याद दिलाते रहते है की तुम लड़की हो भाई को वो उससे ज्यादा छुट दी जाती है जो लड़कियों को आज भी नहीं दी जाती लडकियां बहुत कुछ करने की काबिलियत रखती है पर हम उसकी इन बातों का गला बचपन से ही घोटते आते है ये याद दिलादिला कर की हम लडकियां है यदि उसे अपनी सहेलियों के साथ कहीं घुमने भी जाना हो तो वो खुले मन से हाँ नहीं कह सकती क्यूँ क्यूंकि उसके मन में डर होता है की नहीं उसे परिवार वालों की इजाजत मिलेगी या नहीं और समय और परिवार वालों का मुड़ देखकर जाने की परमिशन मिल जाती है चलो परमिशन मिल भी गई उसमें भी कई प्रश्नों के जवाब देने के बाद समय अवधि भी बता दी जाती है कब तक अना है |लडकियां अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकती यदि कर ले तो उसे बिगडैल का टैग मिल जाता है और पाबंदियां बड़ा दी जाती है जब हम बड़े होने का फर्ज निभाते है तब हम एक बार भी इस बात को सोचते है की हमारे इन फैसलों का असर हमारी बच्चियों पर कैसा होगा ?कभी हम उनके पास बैठकर उनकी मन की बात समझने का प्रयास करते है ?कभी हम उनके लिए खुद के फैसलों की तारीफ़ करते है नहीं ? जब लड़की की शादी होती है तब उसकी जिम्मेदारी और भी बड जाती है यहाँ से उसका असली सफ़र या यूँ कहें उसकी परीक्षा शुरू होती है| माता-पिता के घर को छोड़ नए लोगों के बिच वो एकदम अनजान लोगों के बिच अकेली होती है तब यदि पति उसका दोस्त बनकर उसका हौसला दे दे तो वो कम समय में ही सब कुछ संभाल लेती है पर एसा कम ही होता है| हम लड़कियों को खुद ही सब कुछ अपनी सूझबुझ से करना होता है पति,सास-ससुर,देवर-देवरानी और समाज के लोगों का ध्यान रखना होता है ये तो सच है की लडकियां कितना भी करे वो कम ही होता है |अब लडकियों के कंधे पर दो घरों की जिम्मेदारियां होती है अब बात-बात पर उनके संस्कारों पे सवाल खड़े होते है |घर में सब को खाना खिलाने के बाद घर की बहुएं खाना खाती है इसे हम अच्छी बहुओं के संस्कार कहते है चाहे उसे भूख लगी हो तो भी वो इस परम्परा का पालन करती है |आज कल नारियां अक्सर पड़ी लिखी होती है कुछ लडकियां शादी के बाद भी जॉब करती है पर कुछ होती है जो पारिवारिक कारण से शादी के बाद नौकरियां छोड़ देती है और सारा समय घर के काम करने में बिताती है पर हम उसके त्याग को समझ नहीं पाते की वो किस कारण से अपनी जॉब छोड़ी है हम हमेंशा उसे कमजोर समझ बैठते है और उसके इस त्याग को हम लड़कियों को ये सब करना ही पड़ता है क्या करें किस्मत का खेल है एसा बोलकर उसे सांत्वना देते है पर उसके मन की बात को समझने की कोशिश करते है |वो भी चाहती तो नौकरी कर सकती है पर नहीं कर रही क्यूँ क्या वो किसी से कम हा या शादी के बाद बेड़ियाँ बाँध दी गई उसके पैरों में नहीं? यही हम उसे समझने में गलती कर देते है उसके मन की बात,उसकी भावना को नहीं समझ पाते यहाँ तक की उसका जीवन साथी भी उसके मन की बात नहीं समझ पाता|कई बार उसकी गलती न होने पर भी बातें सुन लिया करती है वो एसा क्यूँ करती है?हमने कभी सोचा है नहीं?पति के मन की बातों को पत्नियां हमेशा समझ जाती है पर पति कभी उसके मन की बात समझने की कोशिश नहीं करते बहुत ही कम पति होते है जो पत्नियों के मन को समझते हो |पत्नियां पतियों से ज्यादा काम करती है वो उसके उठने से पहले उठती है और उसके सोने के बाद सोती है वो जली हुई रोटी और ठंडा खाना खा लेती है पर पतियों को अक्सर गर्म खाना ही परोसेगी,कभी यदी मुड़ न हो खाना बनाने का या तबियत खराब हो तो भी वो दूसरों का ख़याल करके खाना बनाती है पर आराम करने की इच्छा होते हुए भी नहीं करती वो दूसरों का ख़याल रखने में कोई कसर नहीं छोडती पर जब बात खुद की हो तो वो बहाने बना देती है |ये सब वो क्यूँ करती है क्यूँ की उसका फर्ज है करके करती है या कुछ और कारण भी हो सकता है ये सोचा है नहीं ? मुझे अक्सर मेरी माँ ने कभी बासी खाना नहीं खिलाया हाँ पर मैंने अपनी माँ को रात की बची रोटी को गर्म करके चाय के साथ खाते देखा है या रात का खाना गर्म करके खाते देखा है जब भी मैं कहती माँ मुझे दे देते आप, आप गर्म रोटी खा लेते तो मुस्कुराकर कहती नहीं मुझे आदत है अब खाना बचा है इसे फेकेंगें तो नहीं ना |ऐसा हर माँ करती है अपने बच्चों के लिए पर हम कभी उसकी भावनाओं को समझ पायें है ?हमने कभी उसे अपने दोस्तों पार्टियों में ले गये है हाँ भले उसने अपनी कई सहेलियों से तुम्हे मिलवाया होगा |कभी हमने उसे फिल्म दिखाने की सोची या उसे कभी ये कहाँ की मम्मी आप रोज काम करते हो आज आप आराम करो हम सारा काम करते है? हम तो सन्डे एन्जॉय करते है पर हमारी माँ का किस दिन हॉलिडे होता है ये सब बातें हमनें कभी सोची है उसने सारी उम्र हमारे बारे में सोच कर अपना पूरा जीवन निकाल दिया उसने एसा क्यूँ किया ये बात कभी हमारे जहन में आई ?उसने हर वक्त हमारी पसंद ना पसंद का ख़याल रखा क्या हमने रखा ? दोस्तों जो बाते हम नहीं समझ पाए की लडकियां,पत्नियां और हमारी माँ ये सब क्यूँ करती है इसका जवाब बहुत ही सिंपल है क्यूँ की वो हमसे प्यार करती है हमारी फिक्र करती है इसलिए वो ये सब करती है पर हम उसके इस प्यार को,त्याग को फर्ज का नाम दे देते है इसके बदले हम कई बार उसका तिरस्कार भी कर देते है पर वो हमसे क्या चाहती है इस पर कभी गौर नहीं करते |वो सिर्फ हमसे थोड़ा प्यार,समय और सम्मान चाहती है यही बात हम नहीं समझ पाते ?स्त्रियाँ कभी-भी किसी से कम नहीं होती वो सीता है तो राधा भी और जरूरत पड़ने पर वो दुर्गा भी बन जाती है ऐसा कोई काम नहीं जो स्त्री न कर सके |आज की स्त्री हर बात पर लड़कों से आगे है वो घर के काम के साथ-साथ ऑफिस के काम को भी बखूबी निभाती है | वो अक्सर अपने मन की बात भले ही नहीं कहती पर इसका ये मतलब हर कीज ये नहीं की वो कमजोर है |उम्मीद करती हूँ की ये पड़ने के बाद हम स्त्रियों के मन की बात को समझ सके जो वो नहीं कह पाती है उसके प्यार को समझे और उसका सम्मान करें | लेखक वर्षा

अकलतरा : ट्रैलर वाहन और अकलतरा लायंस DAV स्कूल बस की टक्कर के बाद जिस मांग को लेकर लगा रहा 5 घंटों तक रोड पर चक्काजाम ! प्रशासन की तत्परता साबित हुई खोखली स्टॉपर लगाने के आधे घंटे बाद ही सड़क किनारे दिखे स्टॉपर...पढ़े लापरवाह प्रशासन की पूरी खबर

यश कुमार लाटा : अकलतरा

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा थाना अंतर्गत ग्राम तरौद के पास एनएच 49 पर सोमवार सुबह एक तेज रफ्तार ट्रैलर वाहन ने लॉयन डीएवी स्कूल अकलतरा की बस को जोरदार टक्कर मार दी साथ की एक मोटरसायकल को भी अपनी चपेट में ले लिया वही मोटरसायकल चालक ने गाड़ी से कूद कर अपनी जान बचाई वही स्कूल बस में सवार छात्र छात्राओं को गंभीर चोटे आई थी जन्हें ग्रमीणों की मदद से अकलतरा के हरि कृष्ण अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहाँ से प्रथमिक उपचार के बाद गंभीर छात्र छात्राओं को बिलासपुर रेफर कर दिया गया था वही हादसे के बाद गुस्साए परिजनों व आसपास के ग्रामीणों ने एनएच 49 में ओवरब्रिज की मांग को लेकर लगभग 5 घंटे तक चक्काजाम किया छात्र के परिजन और ग्रामीणों का कहना था कि यहां पर ओवरब्रिज होना चाहिए परंतु SDM के द्वारा लोगो को समझाया गया कि तत्काल ओवरब्रिज बनना संभव नहीं है तब परिजनों और ग्रामणो ने कहा कि हमें यहां पर तत्काल स्टॉपर और ब्रेकर , चोराहे पर लाइट , यातायात पुलिस एवं सिग्नल की व्यवस्था कराई जाए , इस पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम द्वारा तत्काल जांजगीर से स्टॉपर मंगवाया गया और चौक के चारों ऒर में स्टॉपर लगवाया गया माहौल शांत होने के आधे घंटे बाद ही स्टॉपर जिनको रोड के बीच में वाहन की गति धीमी करने के लिए लगाया गया था वह रोड किनारे नजर आए इससे शासन की तत्परता पर सवाल उठ रहे हैं बार-बार एनएच पर हो रही घटनाओं पर शासन के द्वारा कोई उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं जिनसे इन हादसों पर कोई कमी हो सके ।

स्वस्थ रहना है तो इन 6 मौकों पर जरूर पिएं पानी

जीवन में पानी का बहुत महत्व है। इसके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। पानी हमारे शरीर के हर सेल में मौजूद है। मानव शरीर का लगभग 60 प्रतिशत पानी से बना है। अगर आपको भी स्वस्थ और फिट रहना है तो इन छः मौकों पर अवश्य पानी पीना चाहिए। 1- सुबह उठते ही, 2- खाने से पहले, 3- जब भी आपको भूख लगे, 4- वर्कआउट करने से पहले और बाद में, 5- जब आप बीमार हों, 6- जब आप थके हुए हों।

जाने कटहल खाने के पांच बड़े फायदे

अब तक आपको जानकारी नहीं रही होगी कि कटहल खाने के क्या फायदे हो सकते हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कटहल खाने की ये 5 बड़े फायदे

■कटहल वेट लॉस में बेहद कारगर है।

■यह उच्च रक्त चाप को कंट्रोल करता है।

■प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है।

■ यह आंखों के लिए बेहद फायदेमंद है।

■ कटहल रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।

मंत्री जी ने ऐसा कर दिखाया जो हिंदू और मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वालों के लिए यह करारा जवाब... छत्तीसगढ़ महतारी को गर्व है अपने इस लाल पर

 

 

 

सबसे पहले तस्वीरों को आप एक बार गौर से देखिए क्योंकि ऐसी तस्वीरें बार बार देखने को नहीं मिलती यह तस्वीर जहां एक और हिंदू मुस्लिमों को लड़ाने सांप्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ने की कोशिश की जाए वहां यह तस्वीर या बताने और समझाने के लिए काफी है कि हिंदू मुस्लिम के बीच आज भी प्यार अमन भाईचारा कायम है ।आज छत्तीसगढ़ महतारी को अपने इस लाल के ऊपर गर्व जरूर होगा जिसने आज प्रदेश का सर ऊंचा कर दिया सूबे के मंत्री ने यह काम कर दिखाया और एक मिसाल पेश कर दी जिसके चलते उन्हें हमेशा याद किया जाएगा ।यह उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो हिंदू मुस्लिम के बीच नफरत फैलाते हैं ।सूबे के मंत्री ने यह बतला दिया कि प्यार आस्था और विश्वास के बीच धर्म कभी आड़े नहीं आता भाईचारे की ना तो कोई जात होती है ना कोई बात होती है ना ऊंच-नीच ना गरीब ना अमीर ।

देखे विडियों...........

दरसल में महादेव को रुद्राभिषेक करता यह शख्स हिंदू नहीं बल्कि मुस्लिम है आर्य छत्तीसगढ़ सरकार में कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर का है जो कवर्धा विधानसभा सीट से विधायक है जो सावन के अंतिम दिन 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन के पावन दिन पर कवर्धा के ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर पहुंचे जहां उन्होंने गर्भगृह में जाकर विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महादेव की पूजा की इन तस्वीरों को देखकर एक सुकून सा भी लगता है ।क्योंकि वर्तमान के दौर में हिंदू मुस्लिम को लेकर विवाद दंगे और तरह तरह की खबरें आते हैं लेकिन इस तस्वीर को देखकर आंखों को सुकून और चैन मिलता है ।BBN24 न्यूज़ परिवार मोहम्मद अकबर की इस पहल का जमकर तारीफ भी करता है।

आखिर क्यों कहते हैं गौ को माता ....क्यों गायों को मां का दर्जा दिया जाता है.... पढ़े इस ममतायी गौ माता की खबर

हिंदू धर्म में गायों को मां का दर्जा दिया गया है क्योंकि इनका दूध अमृत के समान होता है । यह बिना किसी भेदभाव के अपना दूध देती है और कई लोगों के लिए जीवनदायिनी भी होता है ।आज इसी ममतामई गौ माता की एक तस्वीर जो निकल कर सामने आए हैं यह तस्वीर बताया जा रहा है कि


उत्तर प्रदेश के बिजनौर में गाय की ममता का एक अद्भुत वीडियो इंटरनेट पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें एक गाय सूअर के बच्चे को अपना दूध पिलाती हुई दिखाई दे रही है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि वर्षा हो रही है और गाय एक जगह खड़ी हुई है, बगल में सूअर का बच्चा बड़े आनंद से उसके दूध का सेवन कर रहा है।

इसी बीच किसी ने इस मनोरम दृश्य को अपने कैमरे में कैद कर लिया और धीरे-धीरे यह सोशल मीडिया में काफी वायरल होने लगा।

कैसे मान लूं सुषमा मां...तुम मुखर थी पर मौन हो हुईं... पारुल

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है क्या पक्ष या विपक्ष पूरे देश शोक में डूबा हुआ है सभी अपनी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं और नम आंखों से उन्हें विदाई दिए..... चंद लाइन उस महान ममतामयी आत्मा के लिए जनर्लिस्ट पारुल केशवानी की कलम से...

सुषमा दी,अलविदा

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क्या कहू तुम्हे तुम सबकी मां

नारीशक्ति की मिसाल हो,

बेटियां कहती तुम मेरी मां महिला कहती तुम दीदी हो

,बहना कहे तुम्हे सब नेता , विरोधियों को भी तुम भाती थीं ...

प्रतिद्विंधी कहें करू विरोध कैसे व्यक्तित्व तुम्हारा अनोखा है...

देश का अभिमान हो तुम...महिला का स्वभिमान हो...

मुखर तो हो पर मौन क्यों हुई..

कुछ कहो न तुम में सुनूंगी..

सदन की धमक न खो जाए जो आवाज यूएन तक गई थी

विदेश मंत्रालय हो या स्वास्य मंत्रालय हर कर्तव्य तुमने निभाया था...

कैसे मान लूं सुषमा मां...तुम मुखर थी पर मौन हो हुईं...

ओजस्वी हो तेज से सराबोर.

.बिमारी में भी सब पर भारी थी..

विश्वास नहीं स्वराज की तुम अब इस धरा में नहीं रहीं....

भारतीय राजनीती का वो चेहरा जो आज रूठ गया...

जो नाता उनका हम सब से था वो आज हमसे टूट गया..

दूसरी दुनिया में तो चली गई हो..इस दुनिया को भी कुछ और वक्त दिया होता...

कुछ नेता ही है शेष ऐसे जिनके लिए जनसैलाब उमड़ता है...

हर किसी का संस्मरण से बस अब यादों का फेरा है

 

 

 

मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है, हर पहलू जिंदगी का इम्तिहाँ होता है। डरने वालों को मिलती नहीं कुछ जिंदगी में लड़ने वालों के कदमों में जहान होता अमर शहीद युगल किशोर वर्मा आइये कुछ सीखते हैं... एक शहीद की जिंदगी से

अमर शहीद युगल किशोर वर्मा 
जन्म : 13 जुन 1984
जन्म स्थान : कनकी, खरोरा
जिला : रायपुर (छ.ग.)
शहादत दिनांक : 06 अगस्त 2017
शहादत स्थान : खम्हारडीह, थाना गातापर
जिला : राजनांदगांव (छ.ग.)
शहीद युगल किशोर वर्मा का जन्म दिनांक 13 जुन 1984 को ग्राम कनकी, थाना खरोरा, जिला रायपुर की पावन धरा में हुआ था। धन्य है उस माँ की कोख जिसने शहीद युगल किशोर वर्मा को जन्म दिया। धन्य हैं वह पिता जिसने अपने लहू से सींचकर शहीद युगल किशोर वर्मा जैसे पुष्प को पल्लवित किया जिनकी वीरतापूर्ण शहादत से समूचा अंचल महक उठा है। शहीद युगल किशोर वर्मा का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था। परिवार के सभी सदस्य शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी हैं। पिताजी श्री शिव कुमार वर्मा लोक निर्माण विभाग से समयपाल के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। माताजी का नाम श्रीमती यशोदा वर्मा है जो एक कुशल गृहणी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को विनम्रता और व्यवहारिकता का शिक्षा और संस्कार का पाठ भली भाँति पढ़ाया है। शहीद युगल किशोर वर्मा के बड़े भाई श्री गोविन्द कुमार वर्मा सूबेदार के पद पर पुलिस लाइन रायपुर में अपनी सेवाएं दे रहें हैं। जबकि उनकी बड़ी बहन श्रीमती फिंगेश्वरी वर्मा जी. आर. पी. पुलिस अधीक्षक कार्यालय रायपुर में सहायक उपनिरीक्षक के पद पर पदस्थ हैं। शहीद युगल किशोर वर्मा सबसे छोटे थे, घर में प्यार से गोलू कहकर पुकारा जाता था। उनका बचपना बहुत ही प्यार-दुलार में बीता है, उनके चेहरे की मासूमियत और उनकी चंचलता बरबस ही सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेती थी। वे बड़े ही प्रतिभाशाली और मेधावी व बहुमुखी प्रतिभा के धनी एवं दृढ़ निश्चयी थे। शहीद युगल किशोर की प्राथमिक शिक्षा पांचवी तक की ग्राम पलारी जिला बलौदाबाजार में हुई। कक्षा छठवीं से बारहवीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय माना रायपुर से किया।  आगे की महाविद्यालय की पढ़ाई शासकीय नागार्जुन विज्ञान महाविद्यालय रायपुर से किया, बी. एससी. करने के पश्चात डिफेन्स स्टडीज में एम. एससी. उत्तीर्ण कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहे। शहीद युगल किशोर वर्मा सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं खेल-कूद में भी अपना सर्वोच्च प्रदर्शन करते थे उनका लंबा कद और छरहरा बदन खेलों में सहायक साबित हुआ। उनमें गज़ब की स्फूर्ति थी। महाविद्यालय में 2003 से 2006 तक चार वर्ष लगातार सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना जाना, किसी खिलाड़ी के लिये इससे गौरवपूर्ण पुरुस्कार और कुछ नहीं हो सकता। वर्ष 2003 खेल प्रतियोगिताएं तो पूरी तरह शहीद युगल किशोर वर्मा के नाम रहीं। वार्षिक क्रीड़ा उत्सव 2003 में 100, 200, 400 मीटर दौड़ में शहीद किशोर वर्मा प्रथम रहे थे। भाला फेंक, लम्बी कूद एवं ऊँची कूद में भी प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उनके प्रथम पुरुस्कार प्राप्त करने की सूचि बहुत लम्बी है, यह तो सिर्फ 2003 के परिणाम है। उनके नाम खेलों में एक और उपलब्धि जुड़ा है उन्होंने दो बार हैंडबॉल प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया है। शहीद युगल किशोर वर्मा रेल्वे द्वारा आयोजित परीक्षा में 287 चयनित छात्रों में प्रथम स्थान प्राप्त किया था, ततपश्चात सी.आई.एस.एफ. में उपनिरीक्षक के पद पर चयनित होकर सिकन्दराबाद प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। इसी बीच छत्तीसगढ़ पुलिस में वर्ष 2007-2008 में उपनिरीक्षक के पद पर उनका पदार्पण हुआ। छत्तीसगढ़ पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर चयनित होने के साथ ही जैसे युवा मन को पंख लग गए देशभक्ति, जनसेवा की भावनाएं प्रबल होने लगी। उन्होंने जिस लगन, निष्ठा, त्याग, समर्पण और कर्तव्यपरायणता से अपने दायित्यों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है, समस्त युवा पुलिस जवानों एवं पुलिस विभाग के लिये अनुकरणीय हैं। शहीद युगल किशोर वर्मा जैसे जांबाज विरले ही मिलते हैं जो अपने बाद वीरता की शौर्य और पराक्रम का इतिहास छोड़ जाते हैं जिसे जानकर स्वयमेव गर्व की अनुभूति होने लगती है। अपनी पदस्थापना दिनांक से ही धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहे, परिवीक्षा अवधि में दंतेवाड़ा जिला में रहे, उसके बाद प्रथम पदस्थापना जिला बलरामपुर में नक्सल क्षेत्र में रहते हुए उन्होंने अद्भुत साहस व स्फूर्ति का परिचय देते हुए कई उपलब्धिपूर्ण कार्य किए एवं मिली हुई समस्त चुनौतीयों का वीरतापूर्वक सामना करते रहे । मजबूत इरादों और साहसिक कार्यों के वजह से वरिष्ठ अधिकारियों के विश्वास भरोसेमंद बने रहे। जिला बीजापुर में एस.आई.बी. में उनकी पदस्थापना की उन्होंने प्राप्त अपनी इस जबाबदारी का उत्साह उमंग के साथ जिस प्रकार सफलतापूर्वक निर्वहन किया, वह किसी मिसाल से कम नहीं। वे बीजापुर से लगे ईसाई मिशनरी स्कूल में बतौर शिक्षक रहने लगे और विद्यार्थियों को पढ़ाने लगे अपना रूप-रंग, हुलिया सब कुछ बदल रखा था, बच्चों एवं विद्यार्थियों से मिलने उनके ग्रामीण क्षेत्रों के निवास जाया करते थे। इसी बहाने आम ग्रामीणों में घुसपैठ बनाकर नक्सली मूवमेंट की जानकारी एकत्रित किया करते थे। कभी-कभी अपने एक सहयोगी को साथ लेकर साइकिल से गुटखा बेचने निकल जाते। रात होती तो कहीं भी रुक जाते, कई रातें तो इन्होंने नक्सलियों के बीच गुजारी थी इतना साहस और इतनी निडरता अद्भुत है जबकि वे जानते थे कि यदि उनका भेद खुल गया तो अंजाम क्या होगा। कभी-कभी तो स्लीपर पहनकर, फटे-पुराने कपड़े पहनकर अकेले निकल पड़ते थे, बाल बढ़ा लिए थे, सर पे गमछा लपेट निकल पड़ते थे। जब तक शहीद युगल किशोर वर्मा बीजापुर एस.आई.बी. में रहे नक्सली किसी भी बड़े वारदात को अंजाम नही दे पाए, इसलिए नक्सली वारदातों में बहुत कमी देखी गई। बीजापुर जिले का चप्पा-चप्पा उनकी निगाहों में समाया हुआ था। नक्सली सदस्यों से, नक्सलियों के संगठन के नामों से भली-भांति वाकिफ हो चुके थे। उन्होंने बीजापुर में बोली जाने वाली स्थानीय बोली भी सीख लिया था, पुलिस अधिकारी से पूरी तरह अपने आपको कलाकार बना डाला था।
अमर शहीद युगल किशोर वर्मा जिला बीजापुर से स्थानांतरण पर जिला राजनांदगांव आए, उन्होंने लगभग 10 माह तक डोंगरगांव में अपनी सेवायें दी। उनकी बहादुरी निडरता और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए नक्सल उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान जिसका नाम ई.-30  दिया था, उनका उन्हें प्रभारी बनाया गया। अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान ही उन्होंने नक्सलियों से 57 बार सामना1 किया। कई मुठभेड़ में पुलिस जवानों के पराक्रम से, शहीद युगल किशोर वर्मा की गोलियों से नक्सली गम्भीर रूप से घायल हुए एवं कुछ नक्सलियों के मारे जाने की सम्भावना से इंकार नही किया जा सकता। चूंकि नक्सली मुठभेड़ पश्चात अपने गम्भीर रूप से घायल साथियों एवं मारे गए साथियों के शव को अपने साथ उठा ले जाते हैं। शहीद युगल किशोर वर्मा के नेतृत्व में पुलिस लगातार धुर नक्सली क्षेत्रों के जंगलों में पहाड़ों में लगातार सर्चिंग कर रही थी। पुलिस द्वारा अपनी जान की परवाह न करते हुए जिस तरह से लगातार सर्चिंग किया जा रहा था उससे नक्सली भयभीत होकर भागने के लिये मजबूर हो रहे थे। पुलिस और ग्रामीणों के बीच बेहतर सामन्जस्य स्थापित करते हुए शहीद युगल किशोर वर्मा ग्रामीणों के मन में पुलिस के प्रति आस्था और विश्वास कायम करने में आम ग्रामीणजनों का समर्थन एवं सहयोग प्राप्त करने में कामयाब हो रहे थे। इसी बीच मुखबिर से सूचना मिली की थाना गातापार क्षेत्रान्तर्गत मावे और खम्हारडीह जंगल में नक्सली एकत्रित होकर किसी भयानक घटना को अंजाम देने की तैयारी में लगे हैं। सूचना मिलते ही शहीद युगल किशोर वर्मा तत्काल मौके के लिये रवाना हुए। सूचना पुख्ता थी पुलिस द्वारा नक्सलियों के कैंप को ध्वस्त कर दिया गया। पुलिस और नक्सलियों के बीच जमकर मुठभेड़ हुआ। दोनों तरफ से गोलियों की बौछार हुई। शहीद किशोर वर्मा स्वयं सामने आकर अपने साथी जवानों को बचाते हुए डटकर नक्सलियों का सामना करते रहे, चीते की स्फूर्ति से जांबाज शहीद युगल किशोर वर्मा नक्सलियों पर कहर बनकर टूट पड़े थे, उनकी हर सांस पर कई गोलियां नक्सलियों पर बरसती थी। नक्सली पुलिस के शौर्य और पराक्रम के आगे भयभीत होकर भागने के लिए मजबूर हो रहे थे। तभी अचानक नक्सलियों की ओर से चली गोली शहीद युगल किशोर वर्मा को सीधे आकर गले के पास लगी। फिर भी जांबाज साहसी युवा शहीद युगल किशोर वर्मा दहाड़ कर नक्सलियों को ललकारते हुए अपनी अंतिम सांस तक वीरतापूर्वक नक्सलियों का डटकर सामना किया और वीरता शब्द को अलंकृत करते हुए धरती माँ की आँचल समा गए। शहीद युगल किशोर वर्मा जिस साहस, स्फूर्ति और शौर्य तथा पराक्रम से शहादत को प्राप्त हुए वह सदैव जीवन्त रहेगी। उनकी शहादत सदैव अजर-अमर रहेगी।अपने आप में ब्लड बैंक थे , शहीद युगल किशोर वर्मा ने रक्तदान महादान-जीवनदान को चरितार्थ किया था। उन्होंने अपनी 33 वर्ष की उम्र में 53 बार रक्तदान किया था। जहाँ भी, जब भी उन्हें पता चलता कि किसी को रक्त की आवश्यकता है वे तुरंत रक्तदान हेतु तत्पर हो जाते थे।
   मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है,
   हर पहलू जिंदगी का इम्तिहाँ होता है।
   डरने वालों को मिलती नहीं कुछ जिंदगी में,
  लड़ने वालों के कदमों में जहान होता है।

नागपंचमी BBN24 विशेष:- हम इसे आस्था कहे कि अंधविश्वास यहां की मिट्टी खाने से ही ठीक हो जाते हैं सर्पदंश के मरीज जाने यहां की रोचक बातें

जांजगीर चाम्पा :- भले ही हम 21वीं सदी के डिजिटल  आधुनिकीकरण में जी रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे अनसुलझे पहेली आज भी वर्तमान के दौर पर मौजूद है सर्पदंश स्नेक बाईट जैसे खतरनाक केस के मरीज किसी मिट्टी को खाने से कोई सर्प दंश के मरीज किसी मिट्टी को खाने से ठीक यह बात सुनकर गले से उतरती नहीं लेकिन ऐसा हो रहा है और लोगों की आस्था भी यहां पर बढ़ती जा रही है हम बात कर रहे हैं जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर ब्लाक में स्थित ग्राम कैथा की यहां की मिट्टी को खाते ही सर्पदंश स्नेक बाइट के मरीज ठीक हो जाते हैं और यही कारण है कि लोग यहां दूर-दूर से आते हैं।

यहां की मिट्टी को है शेषनाग का वरदान

दरसल में यहां की मिट्टी को स्वयं शेषनाग का आशीर्वाद है कहा जाता है कि एक समय बिरितिया बाबा नाम के एक व्यक्ति जो रात में सोया हुआ था उन्हें स्वयं शेषनाग सपने में आकर उन्हें कहते हैं कि गांव की एक तालाब में वह है जहां पर उनके गले में हड्डी फंसा हुआ है सपने में देखे हुए जगह पर बिरितिया बाबा पहुंचते हैं और उन्हें नागदेव कहते हैं कि वह हड्डी उनके गले से निकाल दे यह सुनकर बिरितिया बाबा उनके गले से हड्डी को निकाल देते हैं वही शेषनाग दैवीय रूप में प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं कि उनकी इस मिट्टी को जो भी खा लेगा उसके शरीर से कोई भी विषैले जीव का जहर उतर जाएगा जिसके बाद से यहां पर लोगों का आने का सिलसिला जारी हो गया वही ग्रामीणों का कहना यह भी है कि यहां पर अब तक लाखों लोग ठीक हो कर चले जा चुके।जिसके बाद बढ़ती आस्था को देखकर लोगो ने वहां मंदिर बना दिया ।अब हर वर्ष नांगपंचमी के दिन वहाँ मेला लगता है ।

वही जब BBN24 की टीम इस चमत्कारी मंदिर की खबर सुनकर कवरेज करने पहुंचे तो उनके सामने ही एक विषैले सांप करैत  के काटे हुए मरीज वहां पर पहुंचे जिसे बेहोशी की हालत में चलाया गया लेकिन मंदिर के अंदर पूजा पाठ और जयकारा फिर मिट्टी को उसके मुंह में डालने के बाद वह मरीज खुद ही चलकर आने लगी मरीज और उनके परिजनों से क्या बात हुई आप खुद ही सुन ले।

वही जब हमने चिकित्सकों से बात की तो उनका कहना है कि यह सब एक अंधविश्वास है दरसल में भारत में लगभग 500 से भी अधिक सांप पाए जाते हैं जिसमें से कुछ ही सांप है जिनके जहर से लोगों की मृत्यु होती है बाकी लोग घबरा कर ही हार्टअटैक या फिर सोच-सोचकर उनकी मृत्यु हो जाती है वहीं कुछ सांप के काटने से उन्हें चक्कर बेहोशी जैसे हालात होते हैं अगर उन्हें एंटी स्नेक वेनम का ट्रीटमेंट दिया जाए तो बेहतर होगा साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की वह चिकित्सकीय इलाज का प्रयोग करें तांत्रिक झाड़-फूंक के झांसे में ना आए । हम अपने पाठकों एवं दर्शकों को बताना चाहेंगे कि BBN24न्यूज़ किसी भी अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देता ना है इस खबर की सत्यता की पुष्टि करता है यह खबर केवल क्षेत्रवासियों के आस्था पर आधारित है । वही BBN 24 न्यूज़ यह भी अपील करता है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास पर ना आए एवं सर्प दंश एवं जहरीले किसी भी जीव जंतु के काटने पर झाड़-फूंक कराने के बजाय चिकित्सकीय उपचार कराने की भी अपील करता है।

 

 

छत्तीसगढ़ राज्य में हरेली त्यौहार को मनाने का अपना एक अलग अंदाज है,,जाने क्या है,,

 

 

 

नीलकमल सिंह ठाकुर : मुंगेली- मुंगेली जिले में भी हरेली पर्व आज धूमधाम से मनाया गया इस दौरान ग्राम देवताओ की पूजा अर्चना की गयी किसानो ने अपने कृषि यंत्रो की पूजा की लोगो ने विभिन्न प्रकार के छत्तीसगढ़िया पकवानो का आनंद लिया वही बच्चो ने भी गेड़ी का भरपूर मजा लिया.…। हरेली पर्व में घर-आँगन में छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा झलकती हुई दिखाई देती है यह पर्व मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ में ही मनाया जाता है हरेली पर्व किसानो का प्रमुख त्यौहार है इस पर्व में कृषि औजारो जैसे नागर,गैती,रापा,केजव्हील जैसे कृषि यंत्रो की पूजा की जाती है और भगवान से अच्छी फसल की कामना की जाती है हरियाली के प्रतिक इस पर्व के दिन पूजा-अर्चना मनोरंजन के लिए विभिन्न खेलो का आयोजन किया जाता है गाव में लोग देवताओ को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के मिठाईया चढ़ाकर कुलदेव और महादेव की आराधना कर कुसल मंगल की कामना करते है पर्व को मनाने क्षेत्र के लोगो में उत्साह देखा गया सावन में कई दिनों के बाद बरसात हुई है जिसका किसान बड़ी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे हरेली पर्व छत्तीसगढ़ का प्रमुख त्यौहार माना जाता है इस पर्व के लिए लोगो में खासा उत्साह देखने को मिलता है इस पर्व में गेड़ी दौड़ होता है और युवाओ और बच्चो के द्वारा बॉस की गेड़ी बना कर दौड़ लगाते है इसके अलावा कबड्डी और कुश्ती का आयोजन कर ग्रामीण अंचलो में लोग मनोरंजन करते है मौसमी बीमारियो और बरसात के बीमारियो से रक्षा के लिए घर-घर नीम की टहनी लगाई जाती है शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो में जगह जगह पर नारियल फेकने एवं अन्य किस्मो के दांव लगाये जाते हैं और इस त्यौहार में अलग अलग समाजो में भिन्न भिन्न तरीको से इस त्यौहार को मनाते है ।

छत्तीसगढ़ के पहली तिहार.. हरेली ...किसान मन के पहली तिहार के शुरूआत हरेली तिहार ले होथे

रमेश साहू

छत्तीसगढ़ मा किसान मन के पहली तिहार के शुरूआत हरेली तिहार ले होथे। ये तिहार ला किसान मन खेती के बोआई, बियासी के बाद मनाथे। जेमा नागर, गैंती, कुदाली, फावड़ा ला चक उज्जर करके औउ गौधन के पूजा-पाठ करथे संग मा कुलदेवी-देवता, इन्द्र देवता, ठाकुर देव ला घलो सुमरथे। ये दिन किसान मन पर्यावरण बनाये राखे बर और सुख-शांति बनाये रखे के प्रार्थना करथे। बैगा मन रात में गांव के सुरक्षा करे बर पूजा-पाठ करथे। धान के कटोरा छत्तीसगढ़ महतारी ला किसान मन खेती-किसानी के उन्नति और विकास बर सुमरथे।

ये बखत हरेली तिहार में खुशहाली बढ़हिस हे जब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल हा गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ राज्य के सपना ला सच करे बर छत्तीसगढ़ के पहली तिहार ‘‘हरेली’’ मा सामान्य छुट्टी देके प्रदेश के सबो लोगन ला भेंट दीस हे। मुख्यमंत्री हा सरकार बने के तुरंत बाद किसान मन के किसानी करजा ला माफ करिस हे। धान खरीदी ला 2500 रूपया प्रति क्विंटल करीस, कृषि भूमि के अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा के नियम बनाईस। एखरे साथ नरवा-गरवा-घुरवा औउ बारी के योजना चालू करके किसान मन बर उखर नदाये लोक संस्कृति औउ पारंपरिक चिन्हारी ला वापस लाईस हे। किसान मन ला ऐखर ले आर्थिक मजबूती मिलही। ये दरी हरेली तिहार छत्तीसगढ़ी संस्कृति के नवा कलेवर में नजर आही। प्रदेश में हरेली तिहार में सबे जिला मा विशेष आयोजन कर पकवान बनाये औउ आनी-बानी के खेल कराये जाही। नदाये तिहार ला अब सबो लोग-लईका मन जानए औउ मनाये येखर बर तिहार मन छुट्टी ला लागू करे गेहे।

ये दिन गांव-देहात में घरो-घर गुड़-चीला, फरा के संग गुलगुला भजिया, ठेठरी-खुरमी, करी लाडू, पपची, चैसेला, औउ भोभरा घलो बनाए जाथे, जेखर ले हरेली तिहार के उमंग ला दुगुना कर देथे। ये साल हरेली अमावस्या गुरूवार के पड़त हे, किसान मन अपन किसानी औजार के पूजा-पाठ कर गाय-बैला ला औषधि खवाये जाथे, ताकि वो हा सालभर स्वस्थ्य रहाय। गांव-देहात के संगे-संग शहर मन डाहर घलो हरेली तिहार मनाये जाथे। ऐसे माने जाथे कि हरेली तिहार बर खेती-किसानी के पहली काम हा पूरा हो जथे। यानी बोआई, बियासी के बाद किसान औउ गरवा मन आराम करथे। ये दिन गाय-गरवा मन ला बीमारी ले बचाय बर बगरंडा और नमक खवाय जाथे औउ आटा मा दसमूल-बागगोंदली ला मिलाके घलो खवाथे।

हरेली के दिन लोहार औउ राऊत मन घरो-घर मुहाटी मा नीम के डारा औउ चैखट में खीला ठोंके जाथे। मान्यता हे कि ऐसे करे ले ओ घर में रहैय्या मन के अनिष्ट ले रक्षा होथे। हरेली अमावस्या ला गेड़ी तिहार के नाम से घलो जानथे। ये दिन लईका मन बांस में खपच्ची लगाकर गेड़ी खपाथे। गेड़ी मा चढ़कर लईका मन रंग-रंग के करतब घलो दिखाते औउ लईका मन अपन साहस और संतुलन के प्रदर्शन घलो करथे। गांव मा लईका मन बर गेड़ी दौड़, खो-खो, कबड्डी, फुगड़ी, नरियल फेक खेल के आयोजन घलो करे जाथे।

खेती किसानी के पहली काम-बुआई औउ बियासी के बाद किसान भाई मन पानी औउ चीखला में खेत जाए बर गेड़ी बनाथे। ऐसे माने जाथे कि ऐखर ले सांप, बिच्छी, कीड़ा-मकोड़ा ले डर नहीं रहाय। छत्तीसगढ़ के पहली हरेली तिहार ले तिहार मन चालू हो जथे। एक के बाद एक तिहार आथे, जेमा हरेली तीज, नागपंचमी, राखी, कृष्ण जन्माष्टमी, तीजा, गणेश चैथ, श्राद्ध पक्ष प्रारंभ, नवरात्री, दशहरा, करवा चैथ, धनतेरस, दिवाली आथे। सबो तिहार ला छत्तीसगढ़ मा बड़े धूमधाम और जुरमिल के मनाये जाथे। ये दिन सबोझन ला खेती-किसानी औउ हरयाली ला बचाये बर कीरिया खाना चाही, तभे तो उपज बढ़ही औउ सबे सुखी रिही। जय छत्तीसगढ़ महतारी।