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INS अरिहंत तैयार, धरती और आकाश के बाद पानी से भी परमाणु हमला करने में भारत सक्षम!

 


भारत लंबे समय के इंतजार के बाद परमाणु हथियार संपन्‍न तिकड़ी का काम पूरा करना जा रहा है। भारत परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल और लड़ाकू विमानों को सैन्‍य बेड़े में शामिल कर चुका है लेकिन नौसेना के क्षेत्र में यह कार्य बाकी था। खबर है कि देश की पहली स्‍वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्‍बी आर्इएनएस अरिहंत को अगस्‍त में गोपनीय रूप से कमीशन दे दिया गया। दिसंबर 2014 से इसके गहन परीक्षण चल रहे थे। यह पनडुब्‍बी 83 एमडब्‍ल्‍यू प्रेशराइज्‍ड लाइट वाटर रिएक्‍टर पर काम करती है। इसके जरिए 750 और साढ़े तीन हजार किलोमीटर दूर तक निशाना लगाया जा सकेगा। हालांकि अमेरिका, रूस और चीन की तुलना में यह क्षमता कम है। इन देशों के पास 5000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली सबमैरीन लॉन्‍चड बैलिस्टिक मिसाइलें (एसएलबीएम) हैं।

परमाणु संपन्‍न पनडुब्‍बी की खास बात यह होती है कि दुश्‍मन को महीनों तक पता चले बिना इससे परमाणु हमले की जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। 6 हजार टन वजनी अरिहंत हालांकि अभी तक पूरी तरह से तैनाती के लिए तैयार नहीं हैं। रक्षा मंत्रालय और नेवी की ओर से भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस रणनीतिक प्रोजेक्‍ट पर प्रधानमंत्री का दफ्तर नजर रखे हुए है। आईएनएस अरिहंत को ट्रायल के दौरान हर तरह के परीक्षण से गुजारा गया जिससे कि पानी में यह एक अहम हथियार साबित हो। हालांकि के सीरीज की सबमैरीन लॉन्‍चड बैलिस्टिक मिसाइलों को पूरी तरह से इसमें लगाने में वक्‍त लगेगा। के सीरीज की मिसाइलों का नाम पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम पर रखा गया है। के-15 एसएलबीएम की रेंज 750 किलोमीटर तक है जबकि के-4 3500 किलोमीटर तक जा सकती है।

 

आईएनएस अरिहंत को कई दशकों पहले शुरू किए गए गोपनीय एडवांस्‍ड टेक्‍नोलॉजी वेसेल कार्यक्रम के तहत बनाया गया है। इसके साथ ही आईएनएस अरिदमन और एक अन्‍य पनडुब्‍बी का निर्माण भी हो रहा है। अरिदमन लगभग बनकर तैयार है और साल 2018 तक इसके मिलने की उम्‍मीद है।

चीन ने लॉन्‍च किया मानव रहित अं‍तरिक्ष अभियान, 30 दिन तक स्‍पेस में रहेंगे दो एस्‍ट्रोनॉट

चीन ने लॉन्‍च किया मानव रहित अं‍तरिक्ष अभियान, 30 दिन तक स्‍पेस में रहेंगे दो एस्‍ट्रोनॉट

बीजिंग : चीन ने अब तक के सबसे लंबे मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान के तहत दो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ आज एक अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किया और इसके साथ ही वह वर्ष 2022 तक अपना स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने के लक्ष्य के एक कदम करीब पहुंच गया। यह यान बाद में पृथ्वी की परिक्रमा कर रही चीन की दूसरी अंतरिक्ष प्रयोगशाला में मिलेगा। ‘शेनझोउ-11’ अंतरिक्ष यान में सवार चीन के अंतरिक्ष यात्रियों जिंग हाइपेंग (50) और चेन दोंग (37) ने चीन में गोबी रेगिस्तान के पास जियुक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से स्थानीय समयानुसार साढ़े सात बजे (भारतीय समयानुसार सुबह पांच बजे) अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। सरकारी चीन सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी) ने इस प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण किया। ‘लॉन्ग मार्च-2 एफ’ वाहक रॉकेट शेनझोउ 11 को कक्षा में लेकर गया। चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष इंजीनियरिंग कार्यालय की उपनिदेशक वू पिंग ने बताया कि यह दो दिन में पृथ्वी की परिक्रमा कर रही थियानगोंग-2 अंतरिक्ष प्रयोगशाला से मिल जायेगा और दोनों अंतरिक्षयात्री 30 दिन तक यहां रहेंगे। अंतरिक्ष से रवाना होने से कुछ घंटों पहले दोनों अंतरिक्ष यात्री प्रसन्नचित्त दिखे और उन्होंने कई प्रश्नों के उत्तर दिए।

इस मिशन के कमांडर जिंग ने कल संवाददाताओं से कहा, ‘‘हालांकि यह काम मुश्किल, जोखिम भरा और खतरनाक है लेकिन मैं यही करना चाहता हूं।’’ जिंग की अंतरिक्ष में यह तीसरी उड़ान है। इससे पहले उन्होंने सितंबर 2008 में शेनझोउ-7 और मार्च 2012 में शेनझोउ-9 अभियान में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा, ‘‘(इस अभियान के लिए) हमने आपात स्थितियों से निपटने, प्राथमिक चिकित्सा और अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं के संबंध में अपनी क्षमताओं में सुधार किया है।’’ चेन ने कहा, ‘‘मैं अंतरिक्ष में बिताए जाने वाले हर पल को स्मृतियों में संजो कर रखूंगा और यह सुनिश्चित करूंगा कि मैं अपना अनुभव डायरी में लिख सकूं और इस दुनिया के बाहर के दृश्य का आनंद ले सकूं।’’

चीन ने अपना पहला मानवयुक्त अभियान 2003 में शुरू किया था। वह अमेरिका तथा यूरोप की बराबरी करने की मुहिम के तहत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भारी राशि खर्च करता है। चीन की भारत एवं अन्य की बराबरी करने मकसद से वर्ष 2020 तक अपना पहला मंगल अभियान शुरू करने की योजना है। चीन ने कहा है कि उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है लेकिन उसने अपने असैन्य मकसदों के अलावा उपग्रह रोधी मिसाइल का भी परीक्षण किया है।

वू के अनुसार शेनझोउ-11 अंतरिक्षयान दोनों अंतरिक्षयात्रियों को थियानगोंग-2 अंतरिक्ष प्रयोगशाला में उतारने और इससे खुद को अलग करने के बाद एक दिन के अंदर पृथ्वी पर वापस आ जाएगा।

आतंकवाद की जननी बताने पर पाकिस्तान बोला, नरेंद्र मोदी ब्रिक्स देशों को गुमराह कर रहे हैं

सरताज अजीज ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय नेतृत्व जम्मू-कश्मीर में अपनी निर्ममता को छिपाने के लिए व्यग्रता से प्रयास कर रहा है।

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के ‘आतंकवाद की जननी’ होने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने रविवार (16 अक्टूबर) को आरोप लगाया कि भारतीय नेता इस मुद्दे पर ब्रिक्स देशों को ‘गुमराह’ कर रहे हैं। अजीज ने कहा, ‘श्री मोदी अपने ब्रिक्स और बिम्सटेक सहयोगियों को गुमराह कर रहे हैं।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय नेतृत्व जम्मू-कश्मीर में ‘अपनी निर्ममता को छिपाने के लिए व्यग्रता से प्रयास कर रहा है।’ अजीज ने कहा कि आतंकवाद की निंदा करने में पाकिस्तान ब्रिक्स और बिम्सटेक के सभी सदस्यों के साथ है तथा वह ‘पाकिस्तान की धरती पर भारतीय राज्य द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सहित’ बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद की समस्या से मुकाबला करने के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताता है।

फीकी पड़ने लगी ताजमहल की रंगत, कूड़ा जलाने से होने लगा बदरंग

एक भारतीय-अमेरिकी अनुसंधान दल ने पाया है कि ऐतिहासिक ताजमहल के पास शहर का ठोस कूड़ा जलाना इस विश्व धरोहर स्मारक को बदरंग करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

एक भारतीय-अमेरिकी अनुसंधान दल ने पाया है कि ऐतिहासिक ताजमहल के पास शहर का ठोस कूड़ा जलाना इस विश्व धरोहर स्मारक को बदरंग करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस नए अनुसंधान में ताजमहल और इसके आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर उपलों के जलाने और ठोस कूड़ा जलाने के असर की तुलना की गई। नए उपायों के प्रयोग से, मिनेसोटा विश्वविद्यालय के अजय नागपुरे और जार्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी के राज लाल सहित शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक सबूत दिए कि स्मारक के पास ठोस कूड़ा जलाना वायु प्रदूषक ‘पार्टीकुलेट मैटर’ (पीएम) के नुकसानदेह स्तर में योगदान कर सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि खुले में ठोस कूड़ा जलाने से पीएम 2.5 का प्रति वर्ष करीब 150 मिलीग्राम प्रति वर्ग मीटर ताजमहल की सतह पर जमा होता है जबकि इसकी तुलना में उपले जलाने पर यह आंकड़ा 12 मिलीग्राम प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि ये दोनों स्रोत मिल कर पीएम 2.5 से जुड़ी समयपूर्व मृत्युदर के आकलन पर आधारित एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता पेश करते हैं।

जार्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से आर्मिस्टेड रसेल ने कहा, ‘हमारे शुरुआती अन्वेषण में पाया गया कि ठोस कूड़ा जलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाना असरदार नहीं है क्योंकि हो सकता है कि लोगों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं हो।’ रसेल ने कहा कि बल्कि, कूड़ा उठाने के साथ गंदगी वाले क्षेत्रों में सेवाएं देने के नई तरीके अपनाने चाहिए। विश्लेषण में भारत के अलग अलग शहरों में धनाढ्य, गरीब और मध्यम आय वाले लोगों के क्षेत्रों के पास में ठोस कूड़ा जलाने और उत्सर्जन पर गौर किया गया।
आइआइटी कानपुर के सच्चिदा त्रिपाठी और मिनेसोटा विश्वविद्यालय के अनु रामस्वामी सहित अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि शहर में पार्टीकुलेट मैटर स्वास्थ्य चिंताएं पैदा करता है। वहीं वायु गुणवत्ता में गिरावट और प्राचीन इमारतों के बदरंग होने जैसी कई समस्याएं भी बढ़ाता है। उन्होंने पत्रिका ‘एनवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में लिखा कि ताज नगरी आगरा में अधिकारियों ने इस स्मारक में स्थानीय वायु प्रदूषण के असर पर काबू पाने के लिए कई उपाय किए हैं।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की मीटिंग में अचानक पहुंच गए पीएम मोदी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की मीटिंग में अचानक पहुंच गए पीएम मोदी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ब्रिक्स डिनर के बाद बैठक कर कर रहे थे। लेकिन वहां पर अचानक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंच गए। इसके बाद यह दि्वपक्षीय बैठक त्रिपक्षीय में बदल गई। मोदी ने दोनों नेताओं के साथ 20 मिनट से ज्यादा वक्त बिताया। इस घटना से सब लोग हैरान हो गए, दि्वपक्षीय बैठक में इस तरह पहुंचना थोड़ा हैरान करने वाला था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पीएम मोदी उस सेशन में क्यों पहुंचे। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि प्रचंड वहां से निकलने से पहले ब्राजील के प्रतिनिधि मंडल का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद शी ने भी उनका साथ देने का फैसला किया है। तभी पीएम मोदी वहां पहुंचे और उन्होंने भी उनको ज्वाइन करने का फैसला किया।

प्रचंड के बेटे प्रकाश दहल ने इस बैठक की कई तस्वीरें अपने फेसबुक पेज पर शेयर की हैं। इसके बाद से ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर होने लगीं। दहल ने इस बैठक को ‘संयोगात्मक’ बताया है। नेपाली भाषा में लिखते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों की मदद से ही नेपाल की समृद्धि संभव है।

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा, सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में लगाएं जोर

 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों को 16 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र को प्राथमिकता देने को कहा है. गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की नियमित मासिक बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने के लिए भी कहा.

पीएम मोदी ने कहा, 'सरकार ने बेहद सफलतापूर्वक कई योजनाओं की शुरुआत की है. इन्हें लागू करने के लिए भी सफलतापूर्वक काम किया गया है.' उन्होंने कहा कि अब इन योजनाओं को जमीन पर ले जाने के लिए ज्यादा काम करने की जरूरत है, ताकि न सिर्फ योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके, बल्कि लोगों को अधिक से अधिक फायदा मिल सके.

मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वच्छ भारत अभियान पर ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से प्रजेंटेशन भी दिया गया. स्किल इंडिया योजना पर मंत्रालय के सचिव और मंत्री राजीव प्रताप रूडी की ओर से जानकारी दी गई. वहीं कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि सरकार योजना और गैर योजना बजट खर्च के विलय के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.
गौरतलब है कि मंत्रिपरिषद की बैठक हर महीने बुलाई जाती है. इसमें अलग-अलग मंत्रालयों के कामों की रिपोर्ट दी जाती है. विभिन्न मंत्रालयों को बजट आवंटन और उसके खर्च के बारे में जानकारी ली जाती है.

भारत ने बांग्लादेश को दिया था दो अरब डॉलर का कर्ज़, अब चीन देने जा रहा है 24 अरब डॉलर

ढाका: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शुक्रवार को अपनी बांग्लादेश यात्रा के दौरान 24 अरब अमेरिकी डॉलर से भी ज़्यादा रकम के कर्जों को मंज़ूरी देने वाले हैं, जो बांग्लादेश को अब तक का सबसे बड़ा विदेशी कर्ज़ होगा, और इसकी मदद से वह ऊर्जा संयंत्र व बंदरगाह बना सकेगा, और रेलवे में भी सुधार करेगा.

पिछले 30 साल में किसी चीनी राष्ट्रपति द्वारा की जा रही पहली बांग्लादेश यात्रा का उद्देश्य बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं में चीन की शिरकत को बढ़ाना है, और यह ऐसे समय में किया जा रहा है, जब भारत खुद भी बांग्लादेश में निवेश बढ़ा रहा है. बांग्लादेश को भारत अपने प्रभावक्षेत्र का हिस्सा मानता रहा है.

भारत की ही मदद से जापान भी बांग्लादेश से जुड़ गया है, और उसने बंदरगाह निर्माण तथा ऊर्जा कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए कम ब्याज पर बांग्लादेश को रकम दी है, जिससे 16 करोड़ की आबादी वाले देश में प्रभुत्व बढ़ाने का 'खेल' शुरू हो गया है.

बांग्लादेश के वित्त उपमंत्री एमए मन्नन ने बताया कि चीन की योजना लगभग 25 परियोजनाओं में पैसा लगाने की है, जिनमें 1,320 मेगावॉट का ऊर्जा संयंत्र भी शामिल है, और इसके अलावा वह गहरे समुद्र में बंदरगाह बनाने के लिए भी इच्छुक है.

एमए मन्नन ने समाचार एजेंसी रॉयटर से कहा, "शी की यात्रा मील का नया पत्थर स्थापित करेगी... इस यात्रा के दौरान रिकॉर्ड समझौतों पर दस्तखत किए जाएंगे, लगभग 24 अरब अमेरिकी डॉलर..."

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित परियोजनाओं में हाईवे तथा सूचना प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाएं भी शामिल हैं. मन्नन के मुताबिक, "बुनियादी ढांचे से जुड़ी हमारी ज़रूरतें बड़ी हैं, सो, हमें कर्ज़ भी बड़े चाहिए..."

चीन की जियांगसू एटर्न कंपनी लिमिटेड ने गुरुवार को बताया था कि उसने बांग्लादेश में पॉवर ग्रिड नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर का सौदा किया है.
अधिकारियों का कहना है कि चीन खासतौर से सोनाडिया में बहुत साल से अटके पड़े गहरे समुद्र में बनने वाले बंदरगाह के निर्माण के लिए उत्सुक है. चीन के राष्ट्रपति की बांग्लादेश यात्रा भारत के गोवा में होने जा रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रही है.


गौरतलब है कि शी चिनफिंग की बांग्लादेश यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पड़ोसी देशों - श्रीलंका, नेपाल तथा बांग्लादेश - से संबंधों को मजबूत करने के लिए काफी प्रयास कर रहे हैं, और इसके लिए तेज़ी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था में से उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका दिया जा रहा है. पिछले साल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के लिए दो अरब अमेरिकी डॉलर की क्रेडिट लाइन की घोषणा की थी, लेकिन अब चीन उससे कहीं आगे जाता दिखाई दे रहा है.

शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ में साउथ एशिया स्टडीज़ के निदेशक झाओ गानचेंग का कहना है कि चीन और भारत दोनों ही बांग्लादेश में विकास का समर्थन करते हैं, और ऐसा नहीं है कि किसी एक को ही ऐसा करना चाहिए. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता, बांग्लादेश में भारत और चीन के बीच कोई खेल जारी है... बांग्लादेश दोनों देशों से आ रहे निवेश का स्वागत करता है..."

बांग्लादेश ने शी चिनफिंग की 'एक बेल्ट, एक सड़क' पहल का समर्थन किया है, ताकि समूचे एशिया तथा यूरोप में व्यापार व आवागमन को बढ़ावा दिया जा सके, क्योंकि बांग्लादेश इसे वृद्धि का अवसर मानता है.

इस योजना को लेकर हालांकि भारत को कुछ शंका है, और इस बात की चिंता भी है कि यह एशिया में शक्ति संतुलन को चीन के पक्ष में झुकाने की कोशिश है.

झाओ गानचेंग ने कहा, "चीन ने बांग्लादेश, म्यांमार, चीन और उत्तरी भारत को जोड़ने वाले आर्थिक गलियारे को बनाने का प्रस्ताव भी रखा था, लेकिन भारत उस प्रस्ताव को लेकर उत्सुक नहीं दिखा..."

उन्होंने कहा, "बांग्लादेश को निवेश की सख्त ज़रूरत है, और मुझे नहीं लगता कि यहां कोई रणनीतिक मुकाबला शुरू हो जाएगा..."

NSUI द्वारा PM नरेंद्र मोदी का पुतला जलाए जाने के मामले में जेएनयू प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

नई दिल्ली : जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस में विजयदशमी के मौके पर एनएसयूआई द्वारा रावण की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाए जाने के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। विगत मंगलवार को कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के कुछ सदस्यों ने मौजूदा सरकार के कामकाज के प्रति अपनी अप्रसन्नता जाहिर करने के लिए जेएनयू परिसर स्थित साबरमती ढाबे के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया था। इसके अतिरिक्त इन छात्रों ने योग गुरू रामदेव, साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, नाथूराम गोडसे और आसाराम बापू सहित जेएनयू के कुलपति जगदेश कुमार का भी पुतला जलाया था। इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति जगदेश कुमार ने ट्वीट किया, ‘जेएनयू में पुतले जलाए जाने की घटना हमारे संज्ञान में आई है। हम इस मालले में सारी जरूरी सूचनाओं के आधार पर जांच कर रहे हैं।


इस संबंध में एनएसयूआई की तरफ से छात्र नेता सन्नी धीमान ने कहा, ‘हमने कैंपस परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाया था और इसके अतिरिक्त कुछ नहीं हुआ। जेएनयू में किसी मुद्दे पर विरोध जताने के लिए पुतले जलाना एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके लिए किसी के इजाज़त की जरूरत नहीं होती।’ गौरतलब है कि जेएनयू प्रशासन ने कुछ दिनों पहले ही विश्वविद्यालय परिसर में गुजरात सरकार और गोरक्षकों का पुतला जलाए जाने के मामले में चार छात्रों को प्रॉक्टोरियल नोटिस दिया था।
एनसयूआई (नेशनल स्‍टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के सदस्‍य मसूद ने कहा, ‘हां, जेएनयू की एनएसयूआई यूनिट ने ऐसा किया है। हमारा प्रदर्शन वर्तमान सरकार से हमारा असंतोष प्रदर्शित करता है। विचार ये है कि सरकार से बुराई को बाहर किया जाए और एक ऐसा सिस्‍टम लाया जाए जो प्रो-स्‍टूडेंट और प्रो-पीपल हो।’ कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई के कुछ सदस्‍यों ने बुराई के प्रतीक रावण की तरह पीएम मोदी को दर्शाते हुए पुतला फूंका। स्‍टूडेंट्स ने कार्ड पर स्‍लोगन लिखे- ‘बुराई पर सत्‍य की जीत होकर रहेगी।’

आतंकी सरगना मसूद अजहर ने पाक सरकार को ललकारा, कहा- हिम्मत दिखाओ, भारत के खिलाफ जिहाद की राह खोल दो


इस्लामाबाद : एजेंसी /आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर ने जिहादी गुटों से कश्मीर में अपनी सक्रियता बढ़ाने के लिए कहा है। जैश-ए-मोहम्मद की साप्ताहिक पत्रिका अल-क़लाम में प्रकाशित अज़हर की अपील में कहा गया है कि “निर्णायक फैसला लेने में दिखाई गई देरी” से पाकिस्तान कश्मीर में “ऐतिहासिक मौका” खो सकता है। अज़हर की ये अपील ऐसे समय में आई है जब उरी हमले और भारत की सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्ते तल्ख हैं। भारत लगातार पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करता रहा है। पाकिस्तान स्थित भारत विरोधी जिहादी गुटों पर कार्रवाई के मसले पर पाकिस्तानी सरकार और पाकिस्तानी सेना के बीच मतभेद की भी खबरें आई हैं। भारत के पठानकोट में हुए आतंकी हमले के लिए जैश-ए-मोहम्मद ही जिम्मेदार था।
पत्रिका के पहले पन्ने पर अज़हर ने लिखा है, “अगर पाकिस्तान सरकार थोड़ी हिम्मत दिखाए तो कश्मीर की मुश्किल और पानी की समस्या एक बार में हमेशा के लिए हल हो जाएंगे। कुछ और नहीं तो (पाकिस्तानी) सरकार को मुजाहिद्दीनों के लिए रास्ता साफ कर देना चाहिए। फिर अल्लाह की मर्जी रही तो 1971 की सभी कड़वी यादें 2016 की फतह की खुशी में गायब हो जाएंगी।” सीधे पाकिस्तानी सरकार को संबोधित करते हुए मसूद अज़हर ने लिखा है कि 1990 से जारी जिहादी नीति से पाकिस्तान को रणनीतिक फायदा हुआ है। अज़हर ने आगे लिखा है कि भारत अखण्ड भारत बनाना चाहता है लेकिन जिहादियों की मौजूदगी के कारण उसके मंसूबे पूरे नहीं हो रहे हैं क्योंकि जिहादियों ने “उसके हर अंग को घायल कर दिया है।” अज़हर ने लिखा है, भारत की “सैन्य क्षमता की पोल पठानकोट और उरी में खुल चुकी है।”