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भारत को दूसरी परमाणु पनडुब्बी लीज पर देगा रूस

आइएनएस चक्र के बाद भारतीय नौसेना के बेड़े को रूस से जल्द ही एक और परमाणु पनडुब्बी मिलेगी। लंबी बातचीत के बाद रूस ने यह पनडुब्बी देने के लिए हामी भरी है, जिसकी कीमत दो अरब डॉलर होगी।

आइएनएस चक्र के बाद भारतीय नौसेना के बेड़े को रूस से जल्द ही एक और परमाणु पनडुब्बी मिलेगी। लंबी बातचीत के बाद रूस ने यह पनडुब्बी देने के लिए हामी भरी है, जिसकी कीमत दो अरब डॉलर होगी। गोवा में 15 अक्तूबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर भारत-रूस शिखर वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद कई रक्षा सौदों के लिए समझौते पर दस्तखत किए गए, जिनमें एक परमाणु पनडुब्बी का भी सौदा था। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसका एलान नहीं किया गया। रक्षा मंत्रालय और नौसेना ने इस विषय पर कोई सूचना मुहैया नहीं कराई, क्योंकि यह प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रत्यक्ष दायरे में आने वाला एक रणनीतिक विषय था। रूसी दैनिक ‘वेदुमोस्ती’ के स्तंभकार एलेक्सी निकोलस्की ने अपने कॉलम में इस सौदे का खुलासा करते हुए लिखा, रूसी रक्षा उद्योग के एक सूत्र के अनुसार रूसी नौसेना द्वारा भारत को बहुउद्देश्यीय परियोजना 971 परमाणु पनडुब्बी देने की लीज पर गोवा में हस्ताक्षर हुआ, जिस पर बातचीत लंबे समय से चल रही थी।’ अकुला- दो श्रेणी की पनडुब्बी के वर्ष 2020- 2021 में भारत को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारतीय नौसेना में पहले से ही अकुला-दो श्रेणी की परमाणु पनडुब्बी काम कर रही है, जिसे रूस से मिलने के बाद ‘आइएनएस चक्र’ का नाम दिया गया। इसे के- 152 नेरपा के तौर पर जाना जाता था। इसे रूस ने 10 वर्ष की लीज पर दिया था और इसे चार अप्रैल 2012 को सेवा में शामिल किया गया था।
अकुला- दो श्रेणी की पनडुब्बी हालांकि विश्व की तेजी से हमला करने वाली परमाणु चालित नवीनतम श्रेणी की पनडुब्बियों में शुमार नहीं है, लेकिन इसे उन्नत पनडुब्बियों में से एक माना जाता है। पानी के भीतर 35 नॉट (करीब 65 किलोमीटर प्रतिघंटा) की गति से यह पनडुब्बी सबसे कम आवाज करती है।
भारत दूसरी परमाणु पनडुब्बी लीज पर लेने का इच्छुक था। भारतीय रक्षा सूत्रों ने बताया कि रूस ने परमाणु पनडुब्बी की लीज के सौदे के साथ चार स्टील्थ पोतों की खरीद का समझौता भी जोड़ दिया। गोवा में भारत और रूस ने तीन अरब डॉलर से अधिक के पोत सौदे की घोषणा की थी। समझौते के तहत दो स्टील्थ पोतों का निर्माण रूस में होगा, जबकि दो का निर्माण भारत में लाइसेंस उत्पादन के तहत होगा।

पाकिस्तान में योग कैंप लगाने को तैयार हैं रामदेव, बोले- भारत में पाकिस्तानी कलाकारों की सोच करोड़ों कमाकर बिरयानी खाने तक ही सीमित क्यों?

योग गुरु ने पाकिस्तान में भी पतंजलि की यूनिट लगाने की इच्छा जाहिर की और कहा कि पाकिस्तान में होने वाली कमाई को पाकिस्तानी के ही लोगों पर खर्च किया जाएगा।

देशभर में इस समय चीनी सामान का बहिष्कार करने और उससे होने वाले फायदे-नुकसान को लेकर बहस चल रही है। योग गुरु बाबा रामदेव भी उन लोगों मे से हैं जिन्होंने चीनी सामान का बहिष्कार करने की सबसे ज्यादा अपील की है। दरअसल चीन के प्रोडक्ट्स ना खरीदने के पीछे उनका तथ्य है कि “चीन भारत से पैसे कमाता है और फिर उसी पैसे से पाकिस्तान की मदद करता है।” द इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत गोयनका से बातचीत में बाबा रामदेव ने कहा कि ऐसा करने का उद्देश्य चीन पर सामाजिक-आर्थिक दबाव बनाना है।
भारत में पाकिस्तानी कलाकारों पर बैन लगाने को लेकर भी उनसे सवाल किया गया। इसपर बाबा रामदेव ने कहा, “कलाकार आतंकवादी नहीं होते हैं, लेकिन क्या उनमें जरा भी मानवता नहीं है? उन्हें सिर्फ अपनी फिल्म से, पैसा कमाने और फिर बिरयानी खाने से मतलब है। उन लोगों ने उरी अटैक और दूसरी आतंकवादी घटनाओं की निंदा क्यों नहीं की?” हालांकि पंतजलि आयुर्वेद के संस्थापक रामदेव ने कहा कि उन्हें मौका मिला तो वो पाकिस्तान जाकर योग जरूर सिखाएंगे।

बता दें कि पतंजलि एक दशक से कम समय में 5,000 करोड़ रुपए की कंपनी बन गई है। योग गुरु ने पाकिस्तान में भी पतंजलि की यूनिट लगाने की इच्छा जाहिर की और कहा कि वह पाकिस्तानी कलाकारों की तरह नहीं करेंगे और वहां से पैसे कमाकर अपने देश नहीं लाएंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में होने वाली कमाई को पाकिस्तानी के ही लोगों पर खर्च किया जाएगा।

हाल ही में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “बुराई का अंत करना हिंसा नहीं होती। मुझे लगता है मोदी जी दाउद इब्राहिम, मसूद अजहर और हाफिज सईद जैसे लोगों का भी अंत करेंगे। इस तरह देश के लोगों में गरीबी और काले धन को लेकर जो शिकायत है वह मिट जाएगी। मैंने इस संबंध में मोदी जी को ट्वीट भी किया था कि उन्हें बुद्ध और युद्ध को साथ लेकर चलाना चाहिए, क्योंकि क्रांति के बिना शांती नहीं होती।”

पाकिस्तान की नाक तले भारत और चीन का साझा अभ्यास

भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख के चूशुल में संयुक्त अभ्यास किया।

भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने बुधवार को पूर्वी लद्दाख के चूशुल में संयुक्त अभ्यास किया। जम्मू-कश्मीर में दोनों देशों के बीच यह पहला सैन्य-समन्वय अभ्यास है, जिसके मद्देनजर लाइन आॅफ कंट्रोल (एलओसी) के पार पाकिस्तानी एजंसियों में काफी हरकत देखी गई। देशों देशों के बीच संधि के तहत इस अभ्यास का समय पहले से तय था। सीमा पर बसे एक भारतीय गांव में भूकम्प के हालात बनाकर दिन भर राहत और बचाव का संयुक्त अभ्यास किया गया।
ऐसे वक्त में जब चीन का रवैया महत्त्वपूर्ण मसलों पर भारत के खिलाफ रहा है, इस कवायद को राजनयिक और सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। जाहिर है, राजनयिक और सामरिक स्तर पर चीन को साधे रखने के लिए भारत अपनी ओर से पहल कर रहा है। संयुक्त अभ्यास के लिए दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने जिस जगह का चयन किया, वह सामरिक दृष्टि से बेहद महत्त्वपूर्ण रही है। 1962 के भारत-चीन युद्ध में चूशुल अहम रणक्षेत्र था। दोनों देशों के बीच इस इलाके में सीमा का निर्धारण नहीं है और इसका विवाद चला आ रहा है। पूर्वी लद्दाख के इस इलाके में चूशुल और 17000 फीट की ऊंचाई पर दौलत बेग ओल्डी में दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने बैठक स्थल बना रखे हैं। बुधवार के संयुक्त अभ्यास की तैयारी को लेकर एक अक्तूबर को दोनों देशों की सेना के आला अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी।
भारत-चीन सीमा पर तनाव कम रहे, इसके मद्देनजर दोनों देशों की सेनाओं के बीच संवाद और सहयोग के लिए 2013 में ‘सीमा सुरक्षा सहयोग संधि’ पर दस्तखत किए गए। इसी के तहत बुधवार को भारत और चीन की सेना ने संयुक्त अभ्यास किया। इस तरह का पहला अभ्यास दौलत बेग ओल्डी इलाके में छह फरवरी 2016 को किया गया था। दिन भर के अभ्यास में दोनों देशों की संयुक्त टीम ने राहत आॅपरेशन चलाए, लोगों को बचाया और मेडिकल सुविधाएं पहुंचाईं। भारतीय सेना की अगुवाई ब्रिगेडियर आरएस रामन और चीनी सेना का नेतृत्व सीनियर कर्नल फान जून कर रहे थे। भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस अभ्यास से दोनों देशों की सेना के बीच न सिर्फ परस्पर विश्वास बढ़ा है, बल्कि सीमा पर आपसी सहयोग भी बढ़ने की उम्मीद है।

शीर्ष अदालत में पेश होने को तैयार, लेकिन क्या मैं ऐसा कर सकता हूं : मार्कंडेय काटजू

नई दिल्ली: सौम्या दुष्कर्म मामले में फैसले पर टिप्पणी को लेकर स्पष्टीकरण के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा तलब किए गए न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने कहा कि वह ऐसा करने के लिए तैयार हैं लेकिन चाहते हैं कि शीर्ष अदालत इस बारे में विचार करे कि क्या संविधान का अनुच्छेद 124 (7) उन्हें शीर्ष अदालत के समक्ष पेश होने से रोकता तो नहीं है.

उच्चतम न्यायालय ने दो दिन पहले काटजू को उन ‘बुनियादी खामियों’ को इंगित करने के लिए निजी तौर पर पेश होने को कहा जिनके बारे में उन्होंने सौम्या बलात्कार मामले में दावा किया है.

काटजू ने फेसबुक पर एक टिप्पणी में लिखा था, "मुझे खुली अदालत में मामले में पेश होने और विचार-विमर्श करने पर खुशी होगी, लेकिन केवल इतना चाहता हूं कि न्यायाधीश इस बारे में विचार कर लें कि क्या उच्चतम न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश होने के नाते संविधान के अनुच्छेद 124 (7) के तहत मेरा पेश होना निषिद्ध तो नहीं है. अगर न्यायाधीश कहते हैं कि यह अनुच्छेद मुझे नहीं रोकता तो मुझे पेश होने में और अपने विचार रखने में खुशी होगी."

अनुच्छेद 124 उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन से संबंधित है और इसका खंड सात कहता है, "उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर रहा कोई व्यक्ति भारत के क्षेत्र में किसी अदालत या किसी प्राधिकरण के समक्ष दलील नहीं देगा या कार्रवाई नहीं करेगा."  

काटजू ने अपनी ताजा पोस्ट में यह भी कहा कि वह अपना विस्तृत जवाब तैयार कर रहे हैं जिसे उनके फेसबुक पेज पर अपलोड किया जाएगा. उन्होंने कहा, "मुझे सौम्या मामले में उच्चतम न्यायालय से अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है.
हालांकि इस बारे में केरल सरकार के वकील ने मुझे अनौपचारिक रूप से सूचित किया है."

त्रिशूर की एक अदालत ने एक फरवरी, 2011 को 23 वर्ष की सौम्या से बलात्कार के मामले में गोविंदाचामी को मौत की सजा सुनाई थी. उच्च न्यायालय ने मौत की सजा पर मुहर लगा दी. शीर्ष अदालत ने मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया.

काटजू ने पहले फेसबुक पर एक पोस्ट में शीर्ष अदालत के फैसले की आलोचना करते हुए इस पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति यूयू ललित की शीर्ष अदालत की पीठ ने 17 अक्टूबर को काटजू को इस मामले में नोटिस जारी कर अदालत में 11 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और कार्यवाही में भाग लेने को कहा.

हम इस्राइल के बारे में सुनते थे, भारतीय सेना भी किसी से कम नहीं: मोदी

मंडी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सेना के लक्षित हमलों (सर्जिकल स्ट्राइक) की तुलना आज इस्राइली तर्ज के अभियानों से की। उन्होंने कहा कि भारतीय बलों ने दिखा दिया कि वे किसी से कम नहीं हैं। मोदी आज मंडी में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
मोदी ने कहा कि इन दिनों देशभर में हमारी सेना के पराक्रम की चर्चा की जा रही है। पूर्व में हम सुना करते थे कि इस्राइल ने यह किया है। राष्ट्र ने देखा है कि भारतीय सेना किसी से भी कम नहीं है। इस्राइल दुश्मन देशों और आतंकी संगठनों के खिलाफ लक्षित हमलों के लिए जाना जाता है। मोदी हिमाचल प्रदेश में एक रैली में बोल रहे थे जहां उन्होंने तीन पनबिजली परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

सर्जिकल स्ट्राइक का मुद्दा राजनीतिक हल्कों में चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष आरोप लगा रहा है कि भाजपा और इसकी सरकार द्वारा इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए किया जा रहा है। भाजपा इस आरोप से इनकार करती रही है। उसका कहना है कि वह सेना का मनोबल बढ़ाने और प्रधानमंत्री की मजबूत इच्छाशक्ति को बताने के लिए मुद्दे को जनता तक ले जा रही है।

सशस्त्र बलों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जताते हुए मोदी ने आज कहा कि उनकी सरकार ने भूतपूर्व सैनिकों के लिए ‘एक रैंक एक पेंशन’ के वायदे को पूरा किया है जो 40 साल से अधिक समय से लटका हुआ था।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने लंबे-चौड़े वायदे कर लोगों को बहकाया और उनमें से कुछ ने इस संबंध में 200 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक आवंटित भी किए, लेकिन इस बारे में कोई विश्लेषण नहीं किया कि कितनी लागत आएगी और इसे किस तरह अंजाम दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने इसे किया और यह पाकर चकित रह गया कि आर्थिक भार बढ़ता रहा। यह 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सरकार के लिए एक बार में इतनी बड़ी राशि का आवंटन करना मुश्किल था। मोदी ने कहा कि उन्होंने सशस्त्र बलों से बात की और धन चार किश्तों में जारी करने की पेशकश की जिस पर वे सहमत हो गए।
उन्होंने कहा कि पहली किश्त में 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। शेष राशि बाद में दी जाएगी। 40 साल से अधिक समय से लटकता चला आ रहा वायदा पूरा कर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने परिवर्तन रैली में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर भी निशाना साधा और कहा कि भाजपा के मुख्यमंत्रियों ने खुद को पेयजल और सड़कों जैसे मुद्दों के प्रति समर्पित किया, जबकि कांग्रेस नेता ने अपने खुद के कल्याण की चिंता की।
उन्होंने कहा कि क्या मुझे यह बयां करने की आवश्यकता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री किस चीज के लिए जाने जाते हैं? मोदी ने कहा कि जब भाजपा के मुख्यमंत्री थे तो तब किसी ने खुद को पेयजल के प्रति समर्पित किया तो किसी ने खुद को सड़कों के प्रति समर्पित किया, लेकिन जब अन्य लोग आए तो उन्होंने अपने खुद के कल्याण के लिए बहुत सारी चीजें समर्पित कीं।

Kabaddi World cup 2016: इंग्लैंड पर शानदार जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में पहुंची टीम इंडिया

कबड्डी वर्ल्ड कप में नॉरथ कोरिया से हारने के बाद टीम इंडिया काफील ने लगातार चार मैचों में जीत हासिल कर सेमीफाइनल में जगह बना ली है।

कबड्डी वर्ल्ड कप में नॉरथ कोरिया से हारने के बाद टीम इंडिया काफील ने लगातार चार मैचों में जीत हासिल कर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। मंगलवार को हुए मैच में भारत ने ग्रुप ए के अपने आखिरी मुकाबले में इंग्लैंड को 69-18 से बुरी तरह हरा दिया। इस मैच में टीम इंडिया ने पहले हाफ का अंत 45-6 अंक से किया। इंग्लैंड की टीम डिफेन्स में सिर्फ एक ही अंक हासिल कर पाई। भारत ने  इंग्लैंड को 20 अंकों तक भी नहीं पहुंचने दिया और 51 अंकों के बड़े अंतर की जीत ने भारत को काफी राहत दी होगी। सेमीफाइनल में जगह बनाने के बाद अब भारत की टीम को थाईलैंड या ईरान का सामना करना होगा। इसके बारे में बुधवार को लीग मुकाबलों के आखिरी दिन ये तय होगा कि ग्रुप बी से ईरान के अलावा और कौन सी टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेगी। गौरतलब है कि इससे पहले भारत ने चार मैचों में अपना बेहतरीन परफोर्मेंस किया है। भारत के लिए आज परदीप नरवाल ने सुपर 10 पूरा किया और उनके नाम कुल 13 अंक रहे। तो वहीं अजय ठाकुर ने भी अपना एक और सुपर 10 पूरा किया और उनके नाम 11 अंक रहे। सुरजीत ने टैकल में हाई 5 हासिल किया और उनके नाम 6 अंक रहे। नितिन तोमर ने 7 और राहुल चौधरी ने 5 अंक हासिल किया। संदीप नरवाल ने भी मैच में 7 और सुरेंदर नाडा ने 3 अंक हासिल किया। ग्रुप बी में ईरान को पोलैंड ने मात देकर यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जापान, थाइलैंड और कीनिया तीनों में से कोई भी टीम सेमीफाइनल में पहुंच सकती है।

सायना नेहवाल को मिली नई जिम्मेदारी, एथलीट आयोग की बनीं IOC

भारत की शीर्ष महिला बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक की सदस्य समिति में शामिल कर लिए गया है।

भारत की शीर्ष महिला बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक की सदस्य समिति में शामिल कर लिए गया है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) एथलीट आयोग ने सायना नेहवाल को अपना सदस्य नियुक्त किया है। आईओसी के अध्यक्ष थॉमस बाक ने सायना को भेजे पत्र में कहा, ‘रियो ओलंपिक के दौरान आईओसी एथलीट आयोग के चुनाव में आपकी उम्मीदवारी को देखते हुए अध्यक्ष से बातचीत के बाद आपको एथलीट आयोग का सदस्य नियुक्त करने में हमें काफी प्रसन्नता हो रही है।’ आयोग की अध्यक्ष एंजेला रूगियेरो हैं। इसमें नौ उपाध्यक्ष और 10 अन्य सदस्य है। आयोग की अगली बैठक अगले महीने छह तारीख को होगी। पूर्व विश्व नंबर वन सायना घुटने की चोट से जूझ रही थीं और अब वह नवंबर में बैडमिंटन कोर्ट पर वापसी करने में जुटी हुई हैं। सायना के पिता हरवीर सिंह ने अपनी बेटी के आईओसी पैनल के सदस्य चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की है। 26 वर्षीय सायना अब तक 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत चुकीं हैं। इसके अलावा वह राजीव गांधी खेल रत्न, पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित की जा चुकीं हैं।

पाक कलाकारों के बैन की मांग पर बोले मुकेश अंबानी- मेरे लिए पहले भारत

भारत में पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध के मुद्दे पर जारी बहस के बीच रिलायंस इंड्रस्टी के मुखिया मुकेश अंबानी ने कहा कि पहले देश की बात होनी चाहिए न कि कला और संस्कृति की। अंबानी ने डिजिटल मीडिया संगठन ‘द प्रिंट’ के कार्यक्रम में सोमवार रात को कहा, ‘‘मैं निश्चित रूप से एक बात को लेकर साफ हूं कि मेरे लिए देश पहले है। मैं एक बुद्धिजीवी व्यक्ति नहीं हूं, ऐसे में मैं इन चीजों को नहीं समझता हूं। लेकिन निसंदेह सभी भारतीयों की तरह मेरे लिए भारत पहले है।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या वह राजनीति में शामिल होंगे, अंबानी ने कहा, ‘‘मैं राजनीति के लिए नहीं बना हूं।’’ अपने नए उपक्रम जियो के बारे में उन्‍होंने कहा कि उनका टेलीकॉम उपक्रम ‘जियो’ कोई जुआ नहीं है बल्कि व्यापार के लिए सोच विचार के बाद लिया गया फैसला है। उन्होंने दूसरे नेटवर्क पर इंटरकनेक्टिविटी की समस्या को रैगिंग किए जाने के समान बताया। साथ ही जियो को उन्‍होंने मेधावी छात्र बताया।

अबांनी ने कहा कि यह कोई जुआ नहीं है। यह एक सोचा समझा, अच्छी तरह तैयार किया गया तंत्र है। इसमें 2,50,000 करोड़ रूपए का निवेश किया गया है। वह नये उद्यम में 1.5 ट्रिलियन रूपए के निवेश के जोखिम के बारे में पूछे गये सवाल का जवाब दे रहे थे। जियो से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के बारे में उन्होंने कहा कि हां, उनके सामने मुसीबतें थीं। उन्होंने इसकी तुलना किसी प्रतिभाशाली छात्र के अपनी मेधा के सहारे प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेने लेकिन मेधावी होने के कारण छात्रावास में रैगिंग का शिकार होने से की।


गौरतलब है कि उरी हमले के बाद से भारत और पाकिस्‍तान के रिश्‍तों में तनाव है। भारत ने इस हमले के जवाब में सर्जिकल स्‍ट्राइक भी की थी। पाक की ओर से आतंकी हमलों को बढ़ावा दिए जाने के बाद से पाकिस्‍तानी कलाकारों को भारत में बैन किए जाने की मांग उठ रही है। राज ठाकरे की महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना ने पाक कलाकारों से भारत छोड़ जाने को कहा था। इसके बाद हाल ही में थियेटर मालिकों ने करण जौहर की फिल्‍म ए दिल है मुश्किल को रिलीज न करने का फैसला किया है। इस फिल्‍म में फवाद खान भी है।

पाक ने राजौरी में दागे मोर्टार बम, भारत की सर्जिकल स्‍ट्राइक केे बाद 29वीं बार तोड़ा युद्धविराम

जम्मू : पाकिस्‍तान की ओर से मंगलवार को युद्ध विराम तोड़ा गया। पाक की ओर से राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा पर स्थित सीमा चौकियों पर मोर्टार बम दागे गएऔर छोटे हथियारों से गोलीबारी की। भारत की ओर से इसका जवाब दिया गया। रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी सैनिकों ने संघर्षविराम उल्लंघन किया। पाकिस्तानी सैनिकों ने साढ़े आठ बजे से देर रात डेढ़ बजे तक नौशेरा में लाम बटालियन इलाके में स्थित भारतीय चौकियों पर 82 मिमी के मोर्टार बम दागे और छोटे तथा स्वचालित हथियारों से गोलीबारी की। उन्होंने बताया कि नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय जवानों ने जवाबी कार्रवाई की। संघर्षविराम उल्लंघन की इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। इससे पहले सोमवार देर रात को नौशेरा सेक्टर में कुछ गोलियां भी चलाई गईं।

सेना द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए किए गए सर्जिकल हमलों के बाद से अब तक जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का 29 बार उल्लंघन किया जा चुका है। बीते 16 अक्तूबर को पाकिस्तानी सैनिकों ने नौशेरा और रजौरी सेक्टरों में दो बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया था, जिस दौरान एक जवान शहीद हो गया। आठ अक्तूबर को पाकिस्तानी सैनिकों ने पुंछ जिले में मेंधर-कृष्णागति सेक्टर में अग्रिम भारतीय चौकियों पर गोलीबारी की थी, जिसमें एक जवान घायल हो गया था। पाकिस्तानी सैनिकों ने पांच अक्तूबर को संघर्षविराम का तीन बार उल्लंघन किया और पुंछ एवं रजौरी जिलों के तीन सेक्टरों में कई भारतीय चौकियों और असैन्य इलाकों में भारी गोलीबारी एवं गोलाबारी की।

पाकिस्तानी सैनिकों ने चार अक्तूबर को जम्मू, पुंछ और रजौरी जिलों के चार इलाकों में 10 अग्रिम क्षेत्रों में मोर्टार दागे। उन्होंने जम्मू जिले और पुंछ जिले के विभिन्न इलाकों में मोर्टार बम दागे और छोटे एवं स्वचालित हथियारों से गोलीबारी की। पाकिस्तानी सैनिकों ने तीन अक्तूबर को चार बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया और पुंछ जिले के सौजियां, शाहपुर-कर्णी, मंडी और केजी सेक्टरों में भारी गोलीबारी की और मोर्टार दागे। दो अक्तूबर को पाकिस्तान ने जम्मू जिले की पल्लानवाला के अग्रिम इलाके में नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी की। एक अक्तूबर को, पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय चौकियों और असैन्य इलाकों में मोर्टार बम, आरपीजी और एचएमजी से गोलाबारी की।

INS अरिहंत तैयार, धरती और आकाश के बाद पानी से भी परमाणु हमला करने में भारत सक्षम!

 


भारत लंबे समय के इंतजार के बाद परमाणु हथियार संपन्‍न तिकड़ी का काम पूरा करना जा रहा है। भारत परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल और लड़ाकू विमानों को सैन्‍य बेड़े में शामिल कर चुका है लेकिन नौसेना के क्षेत्र में यह कार्य बाकी था। खबर है कि देश की पहली स्‍वदेश निर्मित परमाणु पनडुब्‍बी आर्इएनएस अरिहंत को अगस्‍त में गोपनीय रूप से कमीशन दे दिया गया। दिसंबर 2014 से इसके गहन परीक्षण चल रहे थे। यह पनडुब्‍बी 83 एमडब्‍ल्‍यू प्रेशराइज्‍ड लाइट वाटर रिएक्‍टर पर काम करती है। इसके जरिए 750 और साढ़े तीन हजार किलोमीटर दूर तक निशाना लगाया जा सकेगा। हालांकि अमेरिका, रूस और चीन की तुलना में यह क्षमता कम है। इन देशों के पास 5000 किलोमीटर तक मार कर सकने वाली सबमैरीन लॉन्‍चड बैलिस्टिक मिसाइलें (एसएलबीएम) हैं।

परमाणु संपन्‍न पनडुब्‍बी की खास बात यह होती है कि दुश्‍मन को महीनों तक पता चले बिना इससे परमाणु हमले की जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। 6 हजार टन वजनी अरिहंत हालांकि अभी तक पूरी तरह से तैनाती के लिए तैयार नहीं हैं। रक्षा मंत्रालय और नेवी की ओर से भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इस रणनीतिक प्रोजेक्‍ट पर प्रधानमंत्री का दफ्तर नजर रखे हुए है। आईएनएस अरिहंत को ट्रायल के दौरान हर तरह के परीक्षण से गुजारा गया जिससे कि पानी में यह एक अहम हथियार साबित हो। हालांकि के सीरीज की सबमैरीन लॉन्‍चड बैलिस्टिक मिसाइलों को पूरी तरह से इसमें लगाने में वक्‍त लगेगा। के सीरीज की मिसाइलों का नाम पूर्व राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम पर रखा गया है। के-15 एसएलबीएम की रेंज 750 किलोमीटर तक है जबकि के-4 3500 किलोमीटर तक जा सकती है।

 

आईएनएस अरिहंत को कई दशकों पहले शुरू किए गए गोपनीय एडवांस्‍ड टेक्‍नोलॉजी वेसेल कार्यक्रम के तहत बनाया गया है। इसके साथ ही आईएनएस अरिदमन और एक अन्‍य पनडुब्‍बी का निर्माण भी हो रहा है। अरिदमन लगभग बनकर तैयार है और साल 2018 तक इसके मिलने की उम्‍मीद है।

चीन ने लॉन्‍च किया मानव रहित अं‍तरिक्ष अभियान, 30 दिन तक स्‍पेस में रहेंगे दो एस्‍ट्रोनॉट

चीन ने लॉन्‍च किया मानव रहित अं‍तरिक्ष अभियान, 30 दिन तक स्‍पेस में रहेंगे दो एस्‍ट्रोनॉट

बीजिंग : चीन ने अब तक के सबसे लंबे मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान के तहत दो अंतरिक्ष यात्रियों के साथ आज एक अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किया और इसके साथ ही वह वर्ष 2022 तक अपना स्थायी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने के लक्ष्य के एक कदम करीब पहुंच गया। यह यान बाद में पृथ्वी की परिक्रमा कर रही चीन की दूसरी अंतरिक्ष प्रयोगशाला में मिलेगा। ‘शेनझोउ-11’ अंतरिक्ष यान में सवार चीन के अंतरिक्ष यात्रियों जिंग हाइपेंग (50) और चेन दोंग (37) ने चीन में गोबी रेगिस्तान के पास जियुक्वान उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से स्थानीय समयानुसार साढ़े सात बजे (भारतीय समयानुसार सुबह पांच बजे) अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। सरकारी चीन सेंट्रल टेलीविजन (सीसीटीवी) ने इस प्रक्षेपण का सीधा प्रसारण किया। ‘लॉन्ग मार्च-2 एफ’ वाहक रॉकेट शेनझोउ 11 को कक्षा में लेकर गया। चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष इंजीनियरिंग कार्यालय की उपनिदेशक वू पिंग ने बताया कि यह दो दिन में पृथ्वी की परिक्रमा कर रही थियानगोंग-2 अंतरिक्ष प्रयोगशाला से मिल जायेगा और दोनों अंतरिक्षयात्री 30 दिन तक यहां रहेंगे। अंतरिक्ष से रवाना होने से कुछ घंटों पहले दोनों अंतरिक्ष यात्री प्रसन्नचित्त दिखे और उन्होंने कई प्रश्नों के उत्तर दिए।

इस मिशन के कमांडर जिंग ने कल संवाददाताओं से कहा, ‘‘हालांकि यह काम मुश्किल, जोखिम भरा और खतरनाक है लेकिन मैं यही करना चाहता हूं।’’ जिंग की अंतरिक्ष में यह तीसरी उड़ान है। इससे पहले उन्होंने सितंबर 2008 में शेनझोउ-7 और मार्च 2012 में शेनझोउ-9 अभियान में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा, ‘‘(इस अभियान के लिए) हमने आपात स्थितियों से निपटने, प्राथमिक चिकित्सा और अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं के संबंध में अपनी क्षमताओं में सुधार किया है।’’ चेन ने कहा, ‘‘मैं अंतरिक्ष में बिताए जाने वाले हर पल को स्मृतियों में संजो कर रखूंगा और यह सुनिश्चित करूंगा कि मैं अपना अनुभव डायरी में लिख सकूं और इस दुनिया के बाहर के दृश्य का आनंद ले सकूं।’’

चीन ने अपना पहला मानवयुक्त अभियान 2003 में शुरू किया था। वह अमेरिका तथा यूरोप की बराबरी करने की मुहिम के तहत अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भारी राशि खर्च करता है। चीन की भारत एवं अन्य की बराबरी करने मकसद से वर्ष 2020 तक अपना पहला मंगल अभियान शुरू करने की योजना है। चीन ने कहा है कि उसका अंतरिक्ष कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए है लेकिन उसने अपने असैन्य मकसदों के अलावा उपग्रह रोधी मिसाइल का भी परीक्षण किया है।

वू के अनुसार शेनझोउ-11 अंतरिक्षयान दोनों अंतरिक्षयात्रियों को थियानगोंग-2 अंतरिक्ष प्रयोगशाला में उतारने और इससे खुद को अलग करने के बाद एक दिन के अंदर पृथ्वी पर वापस आ जाएगा।

आतंकवाद की जननी बताने पर पाकिस्तान बोला, नरेंद्र मोदी ब्रिक्स देशों को गुमराह कर रहे हैं

सरताज अजीज ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय नेतृत्व जम्मू-कश्मीर में अपनी निर्ममता को छिपाने के लिए व्यग्रता से प्रयास कर रहा है।

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के ‘आतंकवाद की जननी’ होने संबंधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने रविवार (16 अक्टूबर) को आरोप लगाया कि भारतीय नेता इस मुद्दे पर ब्रिक्स देशों को ‘गुमराह’ कर रहे हैं। अजीज ने कहा, ‘श्री मोदी अपने ब्रिक्स और बिम्सटेक सहयोगियों को गुमराह कर रहे हैं।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय नेतृत्व जम्मू-कश्मीर में ‘अपनी निर्ममता को छिपाने के लिए व्यग्रता से प्रयास कर रहा है।’ अजीज ने कहा कि आतंकवाद की निंदा करने में पाकिस्तान ब्रिक्स और बिम्सटेक के सभी सदस्यों के साथ है तथा वह ‘पाकिस्तान की धरती पर भारतीय राज्य द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ सहित’ बिना किसी भेदभाव के आतंकवाद की समस्या से मुकाबला करने के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताता है।

फीकी पड़ने लगी ताजमहल की रंगत, कूड़ा जलाने से होने लगा बदरंग

एक भारतीय-अमेरिकी अनुसंधान दल ने पाया है कि ऐतिहासिक ताजमहल के पास शहर का ठोस कूड़ा जलाना इस विश्व धरोहर स्मारक को बदरंग करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

एक भारतीय-अमेरिकी अनुसंधान दल ने पाया है कि ऐतिहासिक ताजमहल के पास शहर का ठोस कूड़ा जलाना इस विश्व धरोहर स्मारक को बदरंग करने में अहम भूमिका निभा रहा है। इस नए अनुसंधान में ताजमहल और इसके आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर उपलों के जलाने और ठोस कूड़ा जलाने के असर की तुलना की गई। नए उपायों के प्रयोग से, मिनेसोटा विश्वविद्यालय के अजय नागपुरे और जार्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी के राज लाल सहित शोधकर्ताओं ने वैज्ञानिक सबूत दिए कि स्मारक के पास ठोस कूड़ा जलाना वायु प्रदूषक ‘पार्टीकुलेट मैटर’ (पीएम) के नुकसानदेह स्तर में योगदान कर सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि खुले में ठोस कूड़ा जलाने से पीएम 2.5 का प्रति वर्ष करीब 150 मिलीग्राम प्रति वर्ग मीटर ताजमहल की सतह पर जमा होता है जबकि इसकी तुलना में उपले जलाने पर यह आंकड़ा 12 मिलीग्राम प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि ये दोनों स्रोत मिल कर पीएम 2.5 से जुड़ी समयपूर्व मृत्युदर के आकलन पर आधारित एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता पेश करते हैं।

जार्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी से आर्मिस्टेड रसेल ने कहा, ‘हमारे शुरुआती अन्वेषण में पाया गया कि ठोस कूड़ा जलाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाना असरदार नहीं है क्योंकि हो सकता है कि लोगों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं हो।’ रसेल ने कहा कि बल्कि, कूड़ा उठाने के साथ गंदगी वाले क्षेत्रों में सेवाएं देने के नई तरीके अपनाने चाहिए। विश्लेषण में भारत के अलग अलग शहरों में धनाढ्य, गरीब और मध्यम आय वाले लोगों के क्षेत्रों के पास में ठोस कूड़ा जलाने और उत्सर्जन पर गौर किया गया।
आइआइटी कानपुर के सच्चिदा त्रिपाठी और मिनेसोटा विश्वविद्यालय के अनु रामस्वामी सहित अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि शहर में पार्टीकुलेट मैटर स्वास्थ्य चिंताएं पैदा करता है। वहीं वायु गुणवत्ता में गिरावट और प्राचीन इमारतों के बदरंग होने जैसी कई समस्याएं भी बढ़ाता है। उन्होंने पत्रिका ‘एनवायरमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में लिखा कि ताज नगरी आगरा में अधिकारियों ने इस स्मारक में स्थानीय वायु प्रदूषण के असर पर काबू पाने के लिए कई उपाय किए हैं।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की मीटिंग में अचानक पहुंच गए पीएम मोदी

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की मीटिंग में अचानक पहुंच गए पीएम मोदी

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ब्रिक्स डिनर के बाद बैठक कर कर रहे थे। लेकिन वहां पर अचानक भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंच गए। इसके बाद यह दि्वपक्षीय बैठक त्रिपक्षीय में बदल गई। मोदी ने दोनों नेताओं के साथ 20 मिनट से ज्यादा वक्त बिताया। इस घटना से सब लोग हैरान हो गए, दि्वपक्षीय बैठक में इस तरह पहुंचना थोड़ा हैरान करने वाला था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि पीएम मोदी उस सेशन में क्यों पहुंचे। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से लिखा है कि प्रचंड वहां से निकलने से पहले ब्राजील के प्रतिनिधि मंडल का इंतजार कर रहे थे। इसके बाद शी ने भी उनका साथ देने का फैसला किया है। तभी पीएम मोदी वहां पहुंचे और उन्होंने भी उनको ज्वाइन करने का फैसला किया।

प्रचंड के बेटे प्रकाश दहल ने इस बैठक की कई तस्वीरें अपने फेसबुक पेज पर शेयर की हैं। इसके बाद से ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर होने लगीं। दहल ने इस बैठक को ‘संयोगात्मक’ बताया है। नेपाली भाषा में लिखते हुए उन्होंने कहा कि इन देशों की मदद से ही नेपाल की समृद्धि संभव है।

पीएम मोदी ने मंत्रियों से कहा, सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने में लगाएं जोर

 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों को 16 नवंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र को प्राथमिकता देने को कहा है. गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की नियमित मासिक बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से सरकार की योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने के लिए भी कहा.

पीएम मोदी ने कहा, 'सरकार ने बेहद सफलतापूर्वक कई योजनाओं की शुरुआत की है. इन्हें लागू करने के लिए भी सफलतापूर्वक काम किया गया है.' उन्होंने कहा कि अब इन योजनाओं को जमीन पर ले जाने के लिए ज्यादा काम करने की जरूरत है, ताकि न सिर्फ योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो सके, बल्कि लोगों को अधिक से अधिक फायदा मिल सके.

मंत्रिपरिषद की बैठक में स्वच्छ भारत अभियान पर ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से प्रजेंटेशन भी दिया गया. स्किल इंडिया योजना पर मंत्रालय के सचिव और मंत्री राजीव प्रताप रूडी की ओर से जानकारी दी गई. वहीं कैबिनेट सचिव ने जानकारी दी कि सरकार योजना और गैर योजना बजट खर्च के विलय के प्रस्ताव पर विचार कर रही है.
गौरतलब है कि मंत्रिपरिषद की बैठक हर महीने बुलाई जाती है. इसमें अलग-अलग मंत्रालयों के कामों की रिपोर्ट दी जाती है. विभिन्न मंत्रालयों को बजट आवंटन और उसके खर्च के बारे में जानकारी ली जाती है.