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अल जजीरा के बाद एनडीटीवी पर एक्‍शन ले रही मोदी सरकार, मनमोहन राज के 10 साल में 20 चैनल हुए थे ऑफ एयर

एनडीटीवी इंडिया बैन: भारत में किसी टीवी चैनल को ऑफ एयर करने की यह पहली सिफारिश/आदेश नहीं है। पिछले 10 साल में प्रसारण के नियमों का उल्‍लंघन किए जाने पर 28 बार टीवी चैनलों को ऑफ एयर किया गया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पैनल के एनडीटीवी इंडिया न्‍यूज चैनल को एक दिन के लिए ऑफ एयर करने की सिफारिश (हालां‍कि एनडीटीवी का कहना है किे उसे आदेश मिल गया है।) पर काफी हंगामा हो रहा है। भारत में किसी टीवी चैनल को ऑफ एयर करने की यह पहली सिफारिश/आदेश नहीं है। पिछले 10 साल में प्रसारण के नियमों का उल्‍लंघन किए जाने पर 28 बार टीवी चैनलों को ऑफ एयर किया गया है। ज्‍यादातर बार ऐसा फैसला एडल्‍ट कंटेंट प्रसारित करने पर लिया गया। हालांकि पहले किसी घटना के कवरेज को लेकर किसी भारतीय न्‍यूज चैनल पर कार्रवाई नहीं हुई। एनडीटीवी इंडिया को ऑफ एयर करने की सिफारिश न्‍यूज चैनल के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई है। साल 2015 में सरकार ने अल जजीरा को भारत का गलत नक्‍शा दिखाने पर पांच दिनों के लिए ऑफ एयर कर दिया था। साल 2007 में जनमत टीवी को 30 दिन के लिए ऑफ एयर करने का ऑर्डर हुआ था। यह आदेश फर्जी स्टिंग ऑपरेशन दिखाने के चलते दिया गया था। इस मामले में चैनल ने अपनी गलती मानी थी और स्टिंग फर्जी साबित हुआ था।
पहले कब-कब हुई कार्रवाई: अब तक एएक्‍सएन और फैशन टीवी सबसे ज्‍यादा बार ऑफ एयर किए गए। यूपीए सरकार के समय भी नियम तोड़ने पर चैनल्‍स पर दंडात्‍मक कार्रवाई की गई थी। साल 2005 से 2013 के बीच यूपीए शासन के समय 20 चैनलों को ऑफ एयर किया गया था। इनमें से ज्‍यादातर पर एंडल्‍ट कंटेंट और न्‍यूडिटी दिखाने के चलते कार्रवाई हुई। साल 2007 से 2010 के बीच तीन बार एफटीवी को ऑफ एयर किया गया। पहली बार ‘मिडनाइट हॉट’ कार्यक्रम प्रसारित करने पर दो महीने के लिए उसका प्रसारण रोक दिया गया। इसके बाद टॉपलैस महिलाएं दिखाए जाने पर साल 2010 में उस पर नौ दिन का प्रतिबंध लगाया गया। साल 2013 में अश्‍लील कंटेंट दिखाने पर एफटीवी को 10 दिन का बैन झेलना पड़ा। इसके अलावा एएक्‍सएन और सिने वर्ल्‍ड चैनल भी ऑफ एयर किए गए थे। सूचना प्रसारण मंत्रालय के अनुसार टीवी चैनलों पर केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्‍स 1994 के तहत कार्रवाई की जाती है। ये नियम नग्‍नता और एडल्‍ट कंटेंट दिखाने पर रोक लगाते हैं।
एनडीटीवी इंडिया पर कार्रवाई क्‍यों: अगर एनडीटीवी इंडिया ऑफ एयर होता है तो आतंकी हमलों के दौरान गैर जिम्मेदारी से कवरेज करने और संवेदनशील मुद्दों को जगजाहिर करने के आरोप में यह पहली बार ऐसा एक्शन होगा। इस सिफारिश को लेकर सरकार को मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया की ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कई बड़े पत्रकार और आम लोग भी बैन के खिलाफ तीखी टिप्‍पणियां कर रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर एक तबका इसका समर्थन भी कर रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पैनल के अनुसार पठानकोट हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी देने के चलते एनडीटीवी इंडिया पर कार्रवाई की गई है।
क्‍या कहना है चैनल का: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का आदेश प्राप्‍त हुआ है। बेहद आश्चर्य की बात है कि NDTV को इस तरीके से चुना गया। सभी समाचार चैनलों और अखबारों की कवरेज एक जैसी ही थी। वास्‍तविकता में NDTV की कवरेज विशेष रूप से संतुलित थी। आपातकाल के काले दिनों के बाद जब प्रेस को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, उसके बाद से NDTV पर इस तरह की कार्रवाई अपने आप में असाधारण घटना है। इसके मद्देनजर NDTV इस मामले में सभी विकल्‍पों पर विचार कर रहा है।’
एडिटर्स गिल्‍ड ने भी किया विरोध: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक प्रमुख हिंदी चैनल का प्रसारण एक दिन के लिए रोकने के एक अंतर-मंत्रालयी पैनल के अभूतपूर्व निर्णय की कड़ी आलोचना की है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता का ‘‘प्रत्यक्ष उल्लंघन’’ करार दिया है। संपादकों के समूह ने मांग की कि इस आदेश को ‘‘तत्काल रद्द’’ किया जाए।

पठानकोट हमला: NDTV पर बैन तो लगा दिया, पर उन आतंकियों के अस्तित्व पर लगा प्रश्नचिन्ह अब तक नहीं हटा सकी है सरकार

सरकार ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयरबेस की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया।

सरकार ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयरबेस की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया लेकिन सरकार जिन आतंकियों को उससे फायदा होने की बात कर रही है फिलहाल उसकी ही जांच पूरी नहीं हुई है कि असल में वे वहां थे भी या नहीं। दरअसल, सरकार का कहना है कि 4 जनवरी 2016 को अपने लाइव शो में एनडीटीवी के पत्रकार ने कहा था कि बिल्डिंग में दो आतंकी जिंदा हैं और उनके पास ही हथियारों का डिपो भी है। सेना और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के जो जवान वहां आतंकियों से लड़ रहे थे उनका कहना था कि आतंकियों को नहीं पता था कि पास में ही हथियारों का डीपो है। ऐसे में अगर वे वहां तक पहुंच जाते तो उन्हें रोकना और पकड़ना काफी कठिन हो जाता। हालांकि, ऑपरेशन खत्म होने के बाद भी उस जली हुई बिल्डिंग में से कोई मृत शरीर बरामद नहीं किया गया जिसके वहां छिपे होने का शक था। वहां से कोई हथियार या किसी तरह की गोलियां भी नहीं मिली थीं। लेकिन उससे पहले हुए हमले में चार आतंकी जरूर मारे गए थे।
16 मई 2016 को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में फोरेंसिक जांच में मिले अवशेषों का हवाले देते हुए कहा था कि जो दो लोग बिल्डिंग में थे वे आतंकी थे। लेकिन 21 मई को फोरेंसिक टेस्ट के हवाले से एक खबर आई थी कि रिपोर्ट में मिले सेंपल से कुछ पता नहीं लगा था और वह जलने की वजह से पूरी तरह खराब हो गए थे। रिपोर्ट में बस पुरुष के DNA सैंपल मिले थे। उससे यह नहीं पता लगा था कि वह कितने लोगों के थे। जले अवशेष से पता चला था कि उसमें कई व्यक्तियों से आनुवंशिक सामग्री शामिल थी।
वहीं एनडीटीवी की जिस रिपोर्ट को लेकर उसपर कार्रवाई हो रही है उसके जैसी ही रिपोर्ट कई न्यूज चैनल 2 जनवरी से ही दिखा रहे थे। साथ ही गूगल मैप पर भी पठानकोट एयरफोर्स बेस की ‘अच्छी और साफ’ तस्वीरें थी जिसमें उन लोकेशन को साफ देखा जा सकता था जहां पर भारतीय एयरक्राफ्ट खड़े थे। ऐसे में आतंकी जानकारी के लिए किसी न्यूज चैनल पर निर्भर हों इसके आसार कम ही लगते हैं।

प्रियंका गांधी के चलते कांग्रेस से नाता तोड़ सकते हैं प्रशांत किशोर

रणनीतिकार प्रशांत किशोर आने वाले वक्त में कांग्रेस से नाता तोड़ सकते हैं। उत्तरप्रदेश में चुनाव की तैयारियों को लेकर उनकी पार्टी के कुछ लोगों से नोकझोंक होती रहती है।

रणनीतिकार प्रशांत किशोर आने वाले वक्त में कांग्रेस से नाता तोड़ सकते हैं। उत्तरप्रदेश में चुनाव की तैयारियों को लेकर उनकी पार्टी के कुछ लोगों से नोकझोंक होती रहती है। इतना ही नहीं पंजाब में भी कई कांग्रेसी प्रशांत के खिलाफ हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि राहुल गांधी से अच्छे रिलेशन होने के बावजूद प्रशांत किशोर कांग्रेस से अपनी राहें अलग कर सकते हैं। सूत्रों से इंडियन एक्सप्रेस को पता लगा है कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह भी प्रशांत से खुश नहीं हैं। यूपी में बहस का मुद्दा प्रियंका का कैंपेन प्लान है। एक तरफ किशोर प्रियंका का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर और आक्रामक तरीके से करना चाहते हैं लेकिन पार्टी के लोग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वहीं पंजाब में अमरिंदर और किशोर का काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है।

वहीं पंजाब में प्रशांत के खिलाफ विरोध अलग तरह का है। वहां कांग्रेस के समर्थक और अमरिंदर सिंह प्रशांत से इसलिए नाराज हैं क्योंकि प्रशांत ने कांग्रेस से निकाले गए जगमीत बरार और बीर देवेंद्र सिंह से मुलाकात की थी। अमरिंदर सिंह ने उस वक्त सवाल उठाते हुए कहा भी था कि प्रशांत किशोर उनसे मीटिंग करने वाले कौन होते हैं ? हालांकि, कांग्रेस के अंदर ही कुछ लोगों को इस बात का भी डर है कि अगर प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले कांग्रेस का साथ छोड़ दिया तो लोगों तक गलत संदेश जाएगा।

हद दर्जे तक बढ़ा भारत-पाक का तनाव, राजदूतों को बुला सकते हैं वापस

हद दर्जे तक बढ़ा भारत-पाक का तनाव, राजदूतों को बुला सकते हैं वापस

इस्लामाबाद। शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान अपने-अपने राजदूतों को अस्थाई रुप से वापस बुला सकते हैं। रिपोर्ट में जासूसी प्रकरण पर ताजा राजनयिक तनातनी के मद्देनजर भारत और पाकिस्तान संबंधों में ताजा तल्खी का संकेत देते हुए अपने उच्चायुक्तों को अस्थायी रूप से वापस बुला सकते हैं और दोनों देश एक दूसरे के मिशनो में राजनयिक स्टाफ की संख्या कम कर सकते हैं की बात कही गई।‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने कहा कि तनातनी की ताजा स्थिति पिछले सप्ताह उस समय शुरू हुई जब नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग के एक कर्मचारी को पुलिस ने जासूसी संबंधी आरोपों को लेकर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
समाचार पत्र ने कहा कि संबंधों में इस ताजा तल्खी के मद्देनजर दोनों पड़ोसी देश अपने राजनयिक स्टाफ की संख्या कम कर सकते हैं। कथित जासूसी गतिविधि के मामले में दोनों देशों द्वारा जैसे को तैसे की कार्रवाई के तहत राजनयिक स्टाफ का नाम लेने से तनाव गहरा गया। पाकिस्तानी उच्चायोग में वीजा अधिकारी के तौर पर काम कर रहे महमूद अख्तर को बाद में भारत से निष्कासित कर दिया गया था।

समाचार पत्र ने कहा कि हालांकि भारत ने नई दिल्ली की सरकार द्वारा बल प्रयोग करके अख्तर से प्राप्त किए गए बयान का इस्तेमाल करके अन्य पाकिस्तानी कर्मियों को भी फंसाया। मीडिया में ऐसे कम से कम छह अधिकारियों की पहचान लीक की गई जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। इस कदम के कारण पाकिस्तान को उन्हें नई दिल्ली से वापस बुलाना पड़ा। उसने कहा कि जैसे को तैसे की कार्रवाई प्रतीत होने वाले कदम के तहत पाकिस्तान ने गुरुवार को दावा किया कि इस्लामाबाद में भारत के उच्चायोग में तैनात आठ अधिकारी रॉ एवं आईबी के एजेंट है। इस खुलासे के बाद नई दिल्ली के पास इन अधिकारियों को वापस बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

समाचार पत्र ने लिखा कि ताजा घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि नई दिल्ली में तैनात कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों की पहचान का खुलासा करके भारत ने एक समझ का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया कि अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्ष जानते हैं कि कुछ अधिकारी गोपनीय रूप से काम करते हैं और वे पूर्ण आधिकारिक जानकारी के साथ ऐसा करते हैं। अधिकारी ने कहा कि भारत ने जो किया वह कल्पना से परे है। उन्होंने कहा कि भारत के इस कदम से दोनों देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
समाचार पत्र ने कहा कि अधिकारी ने कहा कि इस विवाद का तत्काल असर यह पड़ सकता है कि दोनों देश कुछ समय के लिए उच्चायुक्तों को वापस बुला लें। अधिकारी ने कहा कि एक अन्य प्रभाव यह हो सकता है कि स्थिति सामान्य होने तक एक दूसरे के देश में तैनात राजनयिक स्टाफ की संख्या को कम कर दिया जाए।

नरेन्द्र मोदी पर लालू यादव का हमला, बोले- लोकलाज को दरकिनार कर कौन सा लोकतंत्र गढ़ रहे हो

लालू ने ट्वीट किया, "मोदीजी, कौन सा लोकतंत्र गढ़ रहे हो? लोकलाज से लोकराज चलता है। लोकतंत्र में लोकशर्म को दरकिनार नही कर सकते। देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं।"


राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है और कहा है कि उनकी सरकार सिर्फ सुर्खियां बटोरनेवाली सरकार बनकर रह गई है। आरजेडी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी के शासन में आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। लालू ने ट्वीट किया, “मोदीजी, कौन सा लोकतंत्र गढ़ रहे हो? लोकलाज से लोकराज चलता है। लोकतंत्र में लोकशर्म को दरकिनार नही कर सकते। देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं।” उन्होंने लगातार पांच ट्वीट किए हैं। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “देश में फासीवाद दस्तक दे चूका है। संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्य खतरे में है। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को गिरफ्तार और बैन किया जा रहा है।”
पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिजनों से मुलाकात करने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को हिरासत में लेने के एक दिन बाद लालू ने ये ट्वीट किए हैं। लालू प्रसाद ने अपने ट्वीट में कहा कि जो भी लोग मोदी सरकार के खिलाफ बोलते हैं उसे सरकार गिरफ्तार करा देती है। उन्होंने मोदी सरकार को हेडलाइन्स और मार्केटिंग गवर्नमेंट करार दिया है। उन्होंने लिखा है, “संविधान की धज्जियाँ उड़ा रही है केंद्र सरकार। लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए राज्य के मुखिया को पीड़ितों से मिलने के कारण गिरफ्तार किया जा रहा है।” लालू ने लिखा है, “अभिव्यक्ति व गैरसरकारी संस्थाओं की आजादी को जिसने भी कुचलने का प्रयास किया उनको न्यायप्रिय जनता ने क्या सबक सिखाया, इनको भूलना नही चाहिए।

लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में लेने की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल एक राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं। उन्हें किसी से भी मिलने का संवैधानिक अधिकार है। मोदी सरकार को संविधान का सम्मान करना चाहिए।

चीन के साथ बढ़ी तनातनी, इंडियन एयरफोर्स ने सीमा से सिर्फ 29 किमी दूर लैंड कराए लड़ाकू विमान

चीन और भारतीय सैनिकों के बीच लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर बुधवार से ही गतिरोध कायम है।

लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव के बीच, भारतीय वायुसेना ने गुरुवार को अपने लड़ाकू विमानों को चीनी सीमा के नजदीक लैंड कराया है। एयरफोर्स ने सी-17 ग्‍लोबमास्‍टर एयरक्राफ्ट को मेचुका के एडवांस्‍ड लैंडिंग ग्राउंड पर लैंड कराया। यह जगह पश्चिमी हिमालय में लद्दाख से लेकर पूर्वी हिमालय में अरुणाचल प्रदेश तक फैसली 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा से सिर्फ करीब 29 किलोमीटर दूर है। विमान ने 4,200 फुट के रवने पर लैंड किया जो भारतीय वायुसेना की देश के दुर्गम इलाकों पर पहुंच की क्षमता को प्रदर्श‍ित करता है। मेचुका अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित है। एयरफोर्स का कहना है कि इतनी ऊंचाई से दुर्गम इलाकों- घाटियों और ऊंची पहाड़‍ियों में सैनिकों को ले जाने में मदद मिलती है। लद्दाख और अरुणाचल में ऐसे कई लैंडिंग ग्राउंड्स बनाए गए हैं। भारतीय वायुसेना ने यह कार्रवाई तब की है, जब बुधवार को भारत-चीन के बीच लद्दाख में तनाव की खबर आई है।

चीन और भारतीय सैनिकों के बीच लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर बुधवार से ही गतिरोध कायम है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान उस क्षेत्र में घुस गए जहां मनरेगा योजना के तहत सिंचाई नहर का निर्माण किया जा रहा था और उन्होंने कार्य को रोक दिया। यह घटना बुधवार दोपहर देमचोक सेक्टर में हुयी जो लेह से करीब 250 किलोमीटर पूर्व में है। वहां महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत एक गांव को ‘‘हॉट स्प्रिंग’’ से जोड़ने के लिए काम चल रहा था।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि करीब 55 चीनी सैनिक वहां पहुंचे और आक्रामक तरीके से काम रोक दिया। इसके बाद सेना तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान वहां पहुंचे और उन्होंने चीनी सैनिकों की ज्यादती को रोका। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने बैनर निकाल लिये है और वे वहां डटे हुए हैं । सेना तथा आईटीबीपी के जवान चीनी सैनिकों को एक इंच आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं जबकि पीएलए का दावा है कि यह क्षेत्र चीन का है।

मार गिराए गए सिमी सदस्‍य के बेटे का दावा-हमें पहले ही उठा ले गई थी पुलिस, 10 घंटे बाद कहा-तुम्‍हारे पिता का हो गया है एनकाउंटर

पुलिस एनकाउंटर में मारे गए आठ सिमी सदस्यों में से पांच खंडवा के रहने वाले थे।

भोपाल जेल से भागे सिमी के आठ सदस्यों के एनकाउंटर के बाद खंडवा के रहने वाले पांच कैदियों का अंतिम संस्कार मंगलवार रात को किया गया। अमजद खान, जाकिर हुसैन, मोहम्मद सलिक, शेख मोहम्मद और अकील खिलजी सोमवार तड़के अन्य तीन के साथ मिलकर भोपाल जेल से फरार हो गए थे, उसके बाद पुलिस ने उन्हें एनकाउंटर में मार गिराया। बुधवार को खंडवा के रहने वाले चार सिमी सदस्यों के वकील जावेद चौहान ने कहा कि हमें पुलिस से अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। चौहान ने कहा, ‘हमारे पास शवों को दफनाने से पहले की वीडियो रिकोर्डिंग है, अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो हम वीडियो को सबूत के तौर पर दिखा सकते हैं।’ बुधवार को दो सिमी सदस्यों के रिश्तेदारों ने दावा किया कि एनकाउंटर से पहले उन्हें आंखों पर पट्टी और हाथ-पैर बांधकर इंदौर के पास किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया था। वहां पर उनसे कथित रूप से झूठा बयान कबूल करने के लिए कहा गया।

अकील खिजली के 22 वर्षीय बेटे मोहम्मद जलील ने दावा किया कि सुबह 4.30 बजे साधारण कपड़ों में कुछ लोग उसके घर आए और उसे उनके साथ चलने के लिए कहा। उसने बताया कि उसे जेल तोड़ने के बारे में नहीं बताया गया और ना ही यह बताया गया कि उसे हिरासत में क्यों लिया गया है। जलील ने दावा किया, ‘मेरी आंखों पर पट्टी बांधी हुई थी और हाथ-पैर भी बांध दिए गए थे। इसके बाद मुझे कार में डाला गया। मुझे करीब 10 घंटे हिरासत में रखा गया। रात में 10.30 मुझे मेरे पिता के एनकाउंटर में मारे जाने की सूचना दी गई और अंतिम संस्कार में जाने के लिए मुझे छोड़ दिया गया।’ जलील के मुताबिक उससे एक ही सवाल बार-बार पूछा जा रहा था, ‘एक बारी उसको यूज करना, उसको फेंक देना, और डरना मत’ इसका मतलब क्या है। उनका कहा था कि जब मैं मेरे पिता से जेल में मिलता था तो इसका यूज करता था और यह मेरा कॉडवर्ड था। हालांकि, मैंने ऐसा कभी नहीं कहा।’

OROP सुसाइड: अरविंद केजरीवाल ने की पूर्व सैनिक के परिवार को 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा

बुधवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन के मामले पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व फौजी रामकिशन ग्रेवाल ने सुसाइड कर लिया था।

वन रैंक वन पेंशन को लेकर सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल का उनके भिवानी स्थित गांव में गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया।  हरियाणा में भिवानी जिले के गांव बामला के निवासी सुबेदार रामकिशन ने बुधवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर सुसाइड कर लिया था, जिसके बाद से ही सियासत गर्मा गई थी। गुरुवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई राजनेता पहुंचे। सीएम केजरीवाल ने रामकिशन के परिवार को एक करोड़ रुपए का मदद देने का एलान किया है। वहीं हरियाणा सरकार भी 10 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्‍य को नौकरी देने की घोषणा की है।

अंतिम संस्‍कार में आए केजरीवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार वन रैंक वन पेंशन लागू करे। पीएम मोदी ने देश से झूठ बोला है। हमें कल दिल्‍ली में पीड़‍ित परिवार से मिलने नहीं दिया गया इसलिए हम आज उनसे मिले। अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस नेता कमलनाथ, भूपेंद्र सिंह, दीपेंद्र सिंह हूडा, टीएमसी नेता डेरेक ओब्रायन समेत कई नेता मौजूद थे।

टीएमसी के मुख्य प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन ने सुबह ही गांव पहुंचकर परिवार वालों से मुलाकात कर ली थी। डेरेक ब्रायन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बुधवार को अस्पताल में परिवार से मिलने की कोशिश कर रहे राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल को मिलने दिया जाना चाहिए था।

डेरेक ओब्रायन ने कहा कि कल (बुधवार) को जो भी हुआ उसमें परिवार का दोगुना नुकसान हुआ है। उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को तो खोया ही, साथ ही उनके साथ मारपीट भी की गई। ऐसा नहीं होना चाहिए था। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने राजनेताओं से इस मामले पर राजनीति ना करने की अपील की है।

बता दें कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन के मामले पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व फौजी रामकिशन ग्रेवाल ने सुसाइड कर लिया था। इसके बाद मामले पर दिनभर सियासी संग्राम चला। परिवार से मिलने अस्पताल पहुंचे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को मिलने नहीं दिया गया और पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया था। हालांकि बाद में तीनों को छोड़ दिया गया।

जासूसी विवाद: पाकिस्तान उच्चायोग के चार अधिकारियों ने छोड़ा भारत

भारत ने पहले पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी को जासूसी के आरोप में पकड़ने के बाद देश छोड़ देने का आदेश दिया था।

दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के चार अधिकारियों ने बुधवार को भारत छोड़ दिया। डॉन न्यूज ने मंगलवार को खबर प्रकाशित की थी कि पाकिस्तान दिल्ली स्थित उच्चायोग में कार्यरत चार अधिकारियों को वापस बुलाने की सोच रहा है। भारत ने पहले पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी को जासूसी के आरोप में पकड़ा था और उसके बाद उसे देश छोड़ देने का आदेश दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की ओर से जासूसी के लिए हाल में निष्कासित पाकिस्तानी उच्चायोग कर्मचारी ने 16 अन्य ‘कर्मचारियों’ के नाम लिए हैं जो कथित तौर पर जासूसी गिरोह में शामिल थे।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि दिल्ली पुलिस और गुप्तचर एजंसियों की ओर से निष्कासित पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारी महमूद अख्तर से की गई साझा पूछताछ में उसने दावा किया कि उच्चायोग के 16 अन्य कर्मचारी सेना और बीएसएफ की तैनाती संबंधी संवेदनशील सूचना व दस्तावेज निकलवाने के लिए जासूसों के संपर्क में हैं। अधिकारी ने कहा कि उसके दावों की अभी जांच की जा रही है और यदि ये सही पाए गए तो पुलिस मामले को आगे बढ़ाने के लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिख सकती है। अपराध शाखा की टीमें राजस्थान में छापेमारी कर रही हैं ताकि उन स्थानीय लोगों को पकड़ा जा सके जो अख्तर को गोपनीय दस्तावेज और सूचना मुहैया करा रहे थे। अख्तर कथित तौर पर जासूसी गिरोह चला रहा था।

सूत्रों ने कहा कि अपराध शाखा की दो टीमें अन्य गिरफ्तार आरोपियों मौलाना रमजान, सुभाष जांगिड़ और शोएब के साथ राजस्थान में हैं ताकि उन अर्द्धसैनिक कर्मियों के बारे में जानकारी हासिल की जा सके जो उन्हें सूचना लीक करने में शामिल हो सकते हैं। अधिकारी के मुताबिक राजस्थान में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। सपा के राज्यसभा सांसद मुनव्वर सलीम के निजी सहायक फरहत खान को पिछले हफ्ते जासूसी गिरोह के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तानी उच्चायोग कर्मचारी अख्तर 26 अक्तूबर को गोपनीय दस्तावेज हासिल करते हुए पकड़ा गया था। अख्तर के साथ राजस्थान के नागौर निवासी रमजान और जांगिड़ भी पकड़े गए थे। अन्य आरोपी शोएब को जोधपुर में हिरासत में लिया गया था और पुलिस उसे दिल्ली लेकर आई थी जहां उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

मुसलमानों के वोट पाने को मायावती ने अपने करीबी मुस्लिम नेता के बेटे को बनाया चेहरा

उत्‍तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती मुस्लिमों को अपने साथ लेने के लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजल सिद्दीकी की मदद ले रही हैं।

उत्‍तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती मुस्लिमों को अपने साथ लेने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। इसके लिए वह पार्टी के मुस्लिम चेहरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बेटे अफजल सिद्दीकी की मदद ले रही हैं। 28 साल के अफजल पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में बसपा के प्रचार में लगे हुए हैं। वे मुजफ्फरनगर दंगों और शामली व दादरी में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारने के मुद्दों के जरिए सत्‍तारूढ़ समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हें। अपनी रैलियों में वे कहते हैं, ”समाजवादियों का वास्‍तविक चेहरा सामने आ गया है। उनके पास मत जाओ। ना भूले हैं ना भूलनें देंगे। आप लोगों को लव जिहाद और गौ हत्‍या के नाम पर पीटा गया। अब एक होने का समय है। यह आपकी मौजूदगी की लड़ाई है।” अफजल चार साल पहले मायावती के साथ हुए थे। 2012 विधानसभा चुनावों में मायावती की रैलियों की जिम्‍मेदारी उनके पास ही थी। हालांकि बसपा को उस समय हार झेलनी पड़ी थी लेकिन अफजल के सांगठनिक कौशल से मायावती काफी प्रभावित हुईं।

नोएडा से लॉ की पढ़ाई करने वाले अफजल इस बार बसपा के मुस्लिमों को साथ लेने के अभियान के मुखिया हैं। उन्‍हें आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बरेली में मुसलमानों को बसपा से जोड़ने का जिम्‍मा दिया गया है। इन छह मंडलों में कुल 140 विधानसभा सीटें हैं। पश्चिमी यूपी के मुस्लिम बहुल इलाकों में कई सीटों पर उनका वोट प्रतिशत 70 तक है। बसपा इसे अपने पाले में लाने पर काम कर रही है। इस बार के चुनावों में बसपा ने 125 मुसलमानों को उम्‍मीदवार बनाया है और इनमें से आधे प्रत्‍याशी पश्चिमी यूपी में हैं। उदाहरण के तौर पर बिजनौर जिले की आठ में छह सीटों पर बसपा ने मुसलमानों को खड़ा किया है। बाकी की दो सीटें आरक्षित हैं।

अफजल सिद्दीकी के रणनीतिकारों का मानना है कि मुसलमानों ने पहले भी मायावती को वोट किया है लेकिन एक बड़ा हिस्‍सा सपा को गया है। बसपा को यह बात पता है कि यूपी के कुल मतों के 40 प्रतिशत मुसलमान और दलित हैं और ये साथ आने पर खेल बदला जा सकता है। रैलियों के दौरान अफजल पूछते हैं, ”बसपा ने 2009 में पांच मुसलमानों को लोकसभा भेजा। 2014 में मुसलमानों का एक भी सांसद नहीं है। क्‍या आप अगले साल विधानसभा में भी एक भी मुस्लिम विधायक नहीं चाहते?” वे साथ ही याद दिलाते हैं कि मायावती के मुख्‍यमंत्री काल के दौरान मदरसा अध्यापकों को हज के पेड लीव मिलती थी जो कि अखिलेश यादव के कार्यकाल के समय हटा ली गई।
चुनावों में अब कुछ ही महीने रह गए हैं। इसलिए अफजल हर रोज प्रत्‍येक मंडल में रैली करते हैं। पिछले सप्‍ताह उन्‍होंने सहारनपुर, बिजनौर, मेरठ और गाजियाबाद में रैली की। अफजल की स्‍कूली पढ़ाई देहरादून में बोर्डिंग स्‍कूल में हुई। इसके बाद नोएडा में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उन्‍होंने मांस निर्यात का काम शुरू कर दिया। यहां उन्‍हें सेना से भी सप्‍लाई कॉन्‍ट्रेक्‍ट मिला। यूपी और हरियाणा में उनका कत्‍लखाना है और हाल ही में उन्‍होंने नोएडा मॉल में दुकान खोली है। अफजल अपने साथ 20 विश्‍वस्‍त लोग रखते हैं। ये सब मिलकर बसपा के लिए सोशल मीडिया पर भी काम करते हैं। अफजल ने 2014 में फतेहपुर सीटर से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उन्‍हें हार झेलनी पड़ी थी।

वन रैंक वन पेंशन की मांग पर बैठे पूर्व सैनिक ने जहर खाकर जान दी, सुसाइड नोट में लिखा- जवानों के लिए प्राण दे रहा हूं

दिल्‍ली में वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर बैठे एक पूर्व सैनिक के सुसाइड करने की खबर है। मरने वाले सैनिक का नाम रामकिशन ग्रेवाल है।

दिल्‍ली में वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर बैठे एक पूर्व सैनिक के सुसाइड करने की खबर है। मरने वाले सैनिक का नाम रामकिशन ग्रेवाल है। वह हरियाणा के भिवानी जिले के बामला गांव का रहने वाले थे। बताया जाता है कि ग्रेवाल ने जहर खाकर जान दी। राम किशन हरियाणा सरकार के पंचायत विभाग में भी कार्यरत थे। राम किशन के बेटे ने बताया कि उसके पिता ने घर पर फोन किया और बताया कि वह सुसाइड कर रहे हैं क्‍योंकि सरकार वन रैंक वन पेंशन पर उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है। राम किशन की ओर से मांग पत्र पर कथित तौर पर लिखा गया, ”मैं मेरे देश के लिए, मेरी मातृभूमि के लिए लिए एवं मेरे देश के वीर जवानों के लिए अपने प्राणों को न्‍यौछावर कर रहा हूं।”
इधर, दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल मृतक रामकिशन के परिवार से मिलने के लिए हरियाणा जाएंगे। इस घटना के बाद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। उन्‍होंने ट्वीट किया, ”बहुत दुखद। सैनिक सीमा पर बाहरी दुश्‍मनों से और अंदर अपने अधिकारों केलिए लड़ रहे हैं। पूरे देश को उनके अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए। सका मतलब प्रधानमंत्री जी झूठ बोल रहे हैं की OROP लागू कर दिया। OROP लागू हो जाता तो राम किशन जी को आत्महत्या क्यों करनी पड़ती? मोदी राज में किसान और जवान दोनो आत्महत्या कर रहे हैं।

सिमी सदस्यों के एनकाउंटर पर बोले CM शिवराज सिंह, कहा- जवानों को बधाई, स्थानीय लोगों ने भी दिया साथ

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जेल से कैदियों का भाग जाना काफी गंभीर मामला है जिसकी जांच की जाएगी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई भी की जाएगी।

सोमवार तड़के भोपाल की सेंट्रल जेल से फरार हुए सिमी के 8 सदस्यों के एनकाउंटर मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने बयान जारी किया है। सीएम शिवराज सिंह ने तुरंत कार्रवाई को लेकर जवानों की तारीफ की, लेकिन साथ ही मामले की जांच की बात भी कही है। उन्होंने कहा कि यह काफी गंभीर मामला है जिसकी जांच की जाएगी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई भी की जाएगी।
शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों ने काफी साथ दिया और लगातार कैदियों की लोकेशन अपडेट मिलती रही। साथी ही उन्होंने जवानों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा, “जवानों को उनके काम के लिए बधाई देना चाहता हूं। लेकिन साथ ही बताना चाहता हूं कि हम इसे गंभीरता से ले रहे हैं। जेल से कैदियों का भाग जाना काफी गंभीर मामला है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से बात की और NIA से इस मामले की जांच की मांग की है, जिसपर गृहमंत्री की अनुमति मिल गई है।
 

पाकिस्तान को ‘करारा जवाब’ देने के लिए बीएसएफ ने 11 दिनों में दागे 5 हजार मोर्टार, चलाईं 35 हजार गोलियां

जम्मू कश्मीर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा की जा रही 'बदला' लेने की कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दे रही है।

जम्मू कश्मीर में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा की जा रही ‘बदला’ लेने की कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब दे रही है। इसके लिए पिछले 11 दिनों में बीएसएफ द्वारा 3000 (81 mm) रेंज के मोर्टर शैल जो कि 5 से 6 किलोमीटर की रेंज में टारगेट को हिट करते हैं और 2000 (51 mm) रेंज के मोर्टार दागे गए हैं। ये 900 मीटर की रेंज में हिट करते हैं। इसके अलावा 35 हजार से ज्यादा गोलियां भी चलाई जा चुकी हैं। उनके लिए MMG, LMG और राइफल जैसे छोटे हथियारों का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों की तरफ से बताया गया कि लंबी रेंज के मोर्टार का इस्तेमाल दुश्मन की पोजिशन को नष्ट करने के लिए किया गया था और छोटी रेंज के मोर्टार से आतंकी और उन पाकिस्तानी रेंजर्स को निशाना बनाया गया था जो बॉर्डर से सटी पोस्ट्स से हमला कर रहे थे।
क्रॉस बॉर्डर फायरिंग के ज्यादातर मामले जम्मू सेक्टर में हुए हैं। पाकिस्तनी रेंजर्स अक्सर रात को फायरिंग शुरू करते हैं जिससे भारत में दाखिल हो रहे आतंकियों को कवर मिल सके। पिछले दो हफ्तों में लगभग 60 से ज्यादा बार सीजफायर तोड़ा जा चुका है।। बीएसएफ के (वेस्ट्रन सेक्टर) के एडीजी अरुण कुमार ने बताया कि भारत की तरफ से पाकिस्तानी फायरिंग का बराबर जवाब दिया जा रहा है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, बॉर्डर के हालात को देखते हुए बीएसएफ के लिए गोलाबारूद की अतिरिक्त इनवेंटरी भेजी गई है। आने वाले वक्त में सर्दी के मौसम में बीएसएफ का काम और कठिन होता जाएगा।

गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते जम्मू कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले के बाद से ज्यादा बिगड़ गए। उस हमले में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। इसके बदले में भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया था। स्ट्राइक में पीओके में बने आतंकी कैंप्स को काफी नुकसान पहुंचा था। भारत की उस कार्रवाई से ही पाकिस्तान तिलमिलाया हुआ है और लगातार भारत पर हमले कर रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कैसे मुठभेड़ में मार गिराए गए सिमी के 8 आतंकी

ये सभी आतंकी तड़के सुबह तीन से चार बजे के बीच जेल में एक कॉन्स्टेबल के गले में फंदे डालकर उसकी हत्या कर दी और फिर वहां से फरार हो गए थे।
भोपाल सेन्ट्रल जेल से फरार सिमी के सभी 8 आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया गया है। जेल से 20 किलोमीटर की दूरी पर ईंटखेड़ी गांव के पास आतंकी मार गिराए गए हैं।  ईंटखेड़ी गांव के प्रत्यक्षदर्शियों ने आईबीसी 24 चैनल को बताया कि उनलोगों ने कुछ लोगों को भागते हुए देखा था। जब उनलोगों ने उसे रोकने की कोशिश की तो आतंकी उन पर रोड़े बरसाने लगे। इसके तुरंत बाद गांववालों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर तुरंत पहुंची पुलिस ने थोड़ी ही देर में एनकाउंटर में इन सभी आतंकियों को मार गिराया। ये सभी आतंकी तड़के सुबह तीन से चार बजे के बीच जेल में एक कॉन्स्टेबल के गले में फंदे डालकर उसकी गला रेतकर हत्या कर दी और फिर वहां से फरार हो गए थे। ये सभी आतंकी कोर्ट से आरोपी ठहराए जा चुके थे और कोर्ट में इनका ट्रायल चल रहा था।
दिवाली की रात जेल से फरार होने से पहले आतंकियों ने हेड कांस्टेबल की गला रेतकर हत्या कर दी थी और फिर दीवार फांदकर फरार हो गए थे।  फरार होने वाले आतंकियों में शेख मुजीब, माजिद खालिद, अकील खिलची, जाकिर, सलीख महबूब और अमजद शामिल था। इन आतंकियों का सुराग देने पर 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

 

25वीं मन की बात: पीएम मोदी ने जवानों के नाम की दिवाली, कहा- ज़िंदगी के हर मोड़ पर देश के लिए काम करते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रविवार (30 अक्टूबर) को 25वीं मन की बात है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 अक्टूबर) को देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए इस त्यौहार को देश के जवानों के नाम किया। सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए तैनात सेना के लिए उन्होंने #Sandesh2Soldiers अभ्यान का भी जिक्र किया। देश पर जान न्यौछावर करने वाले जवानों के लिए उन्होंने कहा, ‘हमारे जवान ज़िंदगी के हर मोड़ पर राष्ट्र भावना से प्रेरित हो करके काम करते रहते हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने दीपावली के त्योहार को स्वच्छता अभियान से भी जोड़ा। मोदी ने कहा कि दिवाली का पर्व ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ – अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने का एक सन्देश देता है। उन्होंने कहा, ‘समय की माँग है कि सिर्फ़ घर में सफ़ाई नहीं, पूरे परिसर की सफ़ाई, पूरे मोहल्ले की सफ़ाई, पूरे गाँव की सफ़ाई है।’ इस मौक़े पर प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाले छठ पर्व का भी उल्लेख किया। ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता अभियान के अंतर्गत केरल और हिमाचल प्रदेश की तारीफ की। उन्होंने कहा, इन राज्यों में जिस तरह से ‘खुले में शौच’ को लेकर चलाया जा रहा है वह वास्तव में दूसरे राज्यों के लिए मिसाल है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार पटले के जन्मदिन और इंदिरा गांधी की हत्या (31 अक्टूबर) का भी उल्लेख किया। इस संबंध में उन्होंने पंजाब के एक युवक जसजीत के सवाल का जवाब दिया। जसजीत ने पीएम से पूछा कि सरदार पटेल के जन्मदिन के दिन यानी 31 अक्टूबर के दिन ही इंदिरा गांधी की हत्या हुई और फिर हजारों सरदारों को मौत के घाट उतार दिया गया। इसे कैसे रोका जा सकता है। इसपर पीएम मोदी ने कहा, ‘इतिहास गवाह है कि चाणक्य के बाद सबको एक करने का काम पटेल ने किया। लेकिन सरदार के जन्मदिन पर ही श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सरदारों पर अत्याचार हुआ जो ठीक नहीं है। हम सबको साथ रहना है। सबका विकास करने के लिए सबको एक साथ आगे बढ़ना होगा।’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मन की बात’ के मुख्य अंश:
मेरे प्यारे देशवासियों, आप सबको दीपावली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
भारत एक ऐसा देश है कि 365 दिन, देश के किसी-न-किसी कोने में, कोई-न-कोई उत्सव नज़र आता है।
ये दीपावली का पर्व ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ – अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने का एक सन्देश देता है।
समय की माँग है कि सिर्फ़ घर में सफ़ाई नहीं, पूरे परिसर की सफ़ाई, पूरे मोहल्ले की सफ़ाई, पूरे गाँव की सफ़ाई।
दीपावली, ये प्रकाश का पर्व, विश्व समुदाय को भी अंधकार से प्रकाश की ओर लाए जाने का एक प्रेरणा उत्सव बन रहा है।
दीपावली का त्योहार भी मनाते हैं और छठ-पूजा की तैयारी भी करते हैं।
सेना के जवान सिर्फ़ सीमा पर नहीं, जीवन के हर मोर्चे पर खड़े हुए पाए जाते हैं। प्राकृतिक आपदा हो, कभी क़ानूनी व्यवस्था के संकट हों, कभी दुश्मनों से भिड़ना हो, कभी ग़लत राह पर चल पड़े नौजवानों को वापिस लाने के लिये साहस दिखाना हो – हमारे जवान ज़िंदगी के हर मोड़ पर राष्ट्र भावना से प्रेरित हो करके काम करते रहते हैं।
मैं हरियाणा प्रदेश का अभिनन्दन करना चाहता हूँ कि उन्होंने एक बीड़ा उठाया है। हरियाणा प्रदेश को Kerosene मुक्त करने का।
समय की माँग है कि हमें अब, देश के ग़रीबों का जो aspirations जगा है, उसको address करना ही पड़ेगा।
मुसीबतों से मुक्ति मिले, उसके लिए हमें एक-के-बाद एक कदम उठाने ही पड़ेंगे।
समाज को बेटे-बेटी के भेद से मुक्त करना ही होगा।
31 अक्टूबर, देश के महापुरुष – भारत की एकता को ही जिन्होंने अपने जीवन का मंत्र बनाया -ऐसे सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म-जयंती का पर्व है।
महापुरुषों को पुण्य स्मरण तो हम करते ही हैं, करना भी चाहिए।