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पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम बोले- नए नोट लाने पर खर्च होंगे 15 से 20 हजार करोड़ रुपए, उस अनुपात में नहीं होगा फायदा

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार रात 12 बजे से 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने के फैसले पर बुधवार को पूर्व वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। साथ ही चिदंबरम ने कहा कि अगर इसके पीछे अगर सरकार की मंशा कालेधन को खत्म करने की है तो इसे हमारा समर्थन है। मीडिया को संबोधित करते हुए चिदंबरम में कहा, ‘पुराने नोटों को नए नोटों से बदलने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी होनी चाहिए, ताकि गरीब लोगों को समस्या कम हो। 1978 में भी बड़े नोट बंद किए गए थे, लेकिन इसमें सफल नहीं रही। नए सीरिज के नोट जारी करने में 15 से 20 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसलिए इन नोटों को बंद करने से कम से कम इतना फायदा तो होना ही चाहिए। कई सरकारों ने भी इस बारे में पहले सोचा था, लेकिन उन्होंने इसे लागू नहीं किया क्योंकि इससे फायदा कम होगा और असुविधा ज्यादा होगी।

साथ ही चिदंबरम ने कहा, ‘हमने कल इस फैसले का समर्थन किया था, लेकिन हमें देखना होगा कि मकसद हासिल हुआ है या नहीं। लोगों ने अघोषित धन कंस्ट्रक्शन और ज्वैलरी में लगा रखा रखा है, यहा नहीं पता कि लोगों के पास कैश कितना होगा। मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि जब 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए गए हैं तो 2000 रुपए का नोट क्यों लॉन्च किया गया है।’

परिवहन मंत्री का ऐलान: 11 नवंबर तक किसी नेशनल हाईवे पर नहीं लगेगा टोल टैक्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने बुधवार को घोषणा की है कि 11 नवंबर रात 12 बजे तक कहीं पर भी टोल टैक्स नहीं लगेगा। इसकी घोषणा नितिन गड़करी ने अपनी टि्वटर अकाउंट पर की है। गड़करी ने लिखा है, ’11 नवंबर रात 12 बजे तक सभी नेशनल हाईवे पर टोल टैक्स नहीं लेने का फैसला किया गया है, ताकि ट्रैफिक जाम से निजात मिल सके।’ परिवहन मंत्रालय ने यह फैसला 500,1000 के नोट बंद होने से हो रही दिक्कतों के चलते लिया है। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की थी। इसके अलावा सरकार ने दैनिक यात्रियों को राहत देते हुए बुधवार को मेट्रो के रेलवे स्टेशनों पर पुराने 500 और 1,000 के नोटों का शनिवार तक इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी। सरकार ने मंगलवार को 500 और 1,000 के नोटों को वापस लेने की घोषणा करते हुए कहा था कि कुछ सार्वजनिक सुविधाओं में पुराने नोटों को अगले 72 घंटों तक स्वीकार किया जाएगा। इनमें सरकारी अस्पताल, सरकारी अस्पतालों की फार्मेसी, रेल टिकट काउंटर, सार्वजनिक परिवहन के टिकट काउंटर, हवाई अड्डों पर एयरलाइंस के टिकट काउंटर, मिल्क बूथ, अंत्येष्टि स्थलों, पेट्रोल पंप और गैस स्टेशन शामिल हैं। इस सूची में मेट्रो स्टेशनों का नाम शामिल नहीं था।

बुधवार सुबह मेट्रो स्टेशनों पर घोषणा की जा रही थी कि 500 और 1,000 के नोट स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके बाद आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव शक्तिकान्त दास ने शहरी विकास मंत्रालय से बात की और इस गलती को सुधारा। उन्होंने कहा कि एक स्पष्टीकरण जारी किया गया है कि ऊंचे मूल्य के नोट मेट्रो स्टेशनों पर पहले 72 घंटों तक स्वीकार किए जाएंगे। यानी शनिवार तक यात्री 500 और हजार रुपए का नोट चला सकेंगे।

मोदी स्‍टाइल में जीते ट्रंप: नरेंद्र और डोनाल्‍ड में हैं ये 5 समानताएं

मोदी और ट्रंप, दोनों राइट विंग राजनैतिक दलों से आते हैं।

डोनाल्‍ड ट्रंप अमेरिका के अगले राष्‍ट्रपति चुने गए हैं। राजनैतिक विश्‍लेषकाें को गलत साबित कर ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन को हराया। उनकी यह जीत भारत में 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत से जोड़कर देखी जा रही है। एक बिजनेसमैन और रियल एस्‍टेट डेवलपर के तौर पर ट्रंप ने मोदी और उनके नेतृत्‍व को सराहा है। मोदी और ट्रंप, दोनों राइट विंग राजनैतिक दलों से आते हैं। दाेनों के बीच में कई समानताएं हैं, मसलन- नरेंद्र मोदी को जनता की नब्‍ज पकड़ने में माहिर माना जाता है। अपने विदेशी दौरों पर पीएम मोदी भीड़ को आकर्षित करने के लिए काफी कोशिश करते हैं। टोक्‍यों में ड्रम बजाने से लेकर अफ्रीका में बच्‍चे के कान खींचने से लेकर, कई मौकों पर मोदी ने औपचारिकता दरकिनार कर लोगों से सीधा संपर्क किया है। डोनाल्‍ड ट्रंप एक शौमैन हैं, उन्‍होंने व्‍हाइट हाउस के उत्‍तराधिकारी के चुनाव को पूरी तरह से बदल दिया है। उनकी प्रचार शैली पूरी तरह से नाटकीय रही है। आइए आपको बताते हैं, नरेंद्र मोदी और डोनाल्‍ड ट्रंप में और क्‍या समानताएं हैं.

डोनाल्‍ड ट्रंप अमेरिका के अगले राष्‍ट्रपति चुने गए हैं। राजनैतिक विश्‍लेषकाें को गलत साबित कर ट्रंप ने हिलेरी क्लिंटन को हराया। उनकी यह जीत भारत में 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत से जोड़कर देखी जा रही है। एक बिजनेसमैन और रियल एस्‍टेट डेवलपर के तौर पर ट्रंप ने मोदी और उनके नेतृत्‍व को सराहा है। मोदी और ट्रंप, दोनों राइट विंग राजनैतिक दलों से आते हैं। दाेनों के बीच में कई समानताएं हैं, मसलन- नरेंद्र मोदी को जनता की नब्‍ज पकड़ने में माहिर माना जाता है। अपने विदेशी दौरों पर पीएम मोदी भीड़ को आकर्षित करने के लिए काफी कोशिश करते हैं। टोक्‍यों में ड्रम बजाने से लेकर अफ्रीका में बच्‍चे के कान खींचने से लेकर, कई मौकों पर मोदी ने औपचारिकता दरकिनार कर लोगों से सीधा संपर्क किया है। डोनाल्‍ड ट्रंप एक शौमैन हैं, उन्‍होंने व्‍हाइट हाउस के उत्‍तराधिकारी के चुनाव को पूरी तरह से बदल दिया है। उनकी प्रचार शैली पूरी तरह से नाटकीय रही है। आइए आपको बताते हैं, नरेंद्र मोदी और डोनाल्‍ड ट्रंप में और क्‍या समानताएं हैं.

विकास के वादे ने किया कमाल: चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप अमेरिका के पुराने प्रभुत्‍व को वापस लाने और विकास की जोरदार वकालत करते रहे। उनके चुनाव प्रचार अभियान का नारा था- मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (अमेरिका को फिर से महान बनाओ)। ट्रंप ने 2008 के बाद बुरी तरह लड़खड़ाई अर्थव्‍यवस्‍था को दुरुस्‍त करने का वादा करते हुए नई नौकरियां सृजित करने का दावा किया। वैश्विक मंदी के दौर में अमेरिका में बड़े पैमाने पर लोगों की नौकरियां छिन रही थीं। ट्रंप ऐसे में आशा की एक किरण बनकर उभरे और अमरीकियों ने उन्‍हें अपना नेता चुनने में हिचक नहीं दिखाई। दूसरी तरफ, नरेंद्र मोदी ने 2014 में पूरा लोकसभा चुनाव ही विकास के मुद्दे को आगे कर लड़ा। प्रचार के दौरान ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसे नारे ने मोदी की चुनावों पर पकड़ और मजबूत कर दी। इसके अलावा भ्रष्‍टाचार के खिलाफ मोदी के मुखर होने से भी भाजपा को प्रचंड बहुमत हासिल करने में कामयाबी मिली।

अप्रत्‍याश‍ित नतीजों से चौंकाया: 2014 में जब भारत में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार चल रहा था, तो किसी राजनैतिक विश्‍लेषक ने भाजपा की इतनी बड़ी जीत की कल्‍पना नहीं की थी। खुद भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षणों में इतनी ज्‍यादा सीटों का अनुमान नहीं लगाया गया था, मगर जब नतीजे आए तो बीजेपी अपने स्‍थापना काल से अब तक सबसे ज्‍यादा सीटें जीतकर सरकार बनाने को तैयार थी। 2016 में डोनाल्‍ड ट्रंप के जीत का अनुमान बेहद कम सर्वेक्षणों में किया गया था, मगर जिस तरह से ट्रंप ने चुनावों में जीत हासिल की, उसने बड़े-बड़े राजनैतिक समीक्षकों को एक बार फिर गच्‍चा दे दिया।

कट्टर छवि, तुरंत एक्‍शन का वादा: नरेंद्र मोदी और डोनाल्‍ड ट्रंप, दोनों को राजनैतिक समीक्षक ‘कट्टर’ बताते रहे हैं। प्रचार के दौरान डोनाल्‍ड ट्रंप के मुस्लिमों के खिलाफ की गई नकरात्‍मक टिप्‍पणि‍यों की वजह से कई बार उनकी तुलना नरेंद्र मोदी से की गई। ट्रंप हर मुद्दे पर तुरंत एक्‍शन लेने की वकालत करते हैं, चाहे वो सीरिया में इस्‍लामिक स्‍टेट के खिलाफ जंग छेड़ने का मसला हो या फिर अमेरिका में मुुस्लिमों पर प्रतिबंध लगाने की बात करना हो। दूसरी तरफ, नरेंद्र मोदी ने कई मुद्दों पर कड़े और तत्‍काल फैसले किए हैं।

 

नोटों को बंद के फैसले को ममता ने कहा Heartless, धन वापसी को लेकर मोदी को बताया नाटकबाज

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज पांच सौ और एक हजार रूपये के नोटों को हटाने के केन्द्र के फैसले को ‘‘निर्मम एवं बिना सोच समझकर’’ किया गया फैसला बताया जिससे ‘‘वित्तीय दिक्कतें’’ होंगी।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज पांच सौ और एक हजार रूपये के नोटों को हटाने के केन्द्र के फैसले को ‘‘निर्मम एवं बिना सोच समझकर’’ किया गया फैसला बताया जिससे ‘वित्तीय दिक्कतें’ होंगी।  ममता ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने पीएम मोदी के इस फैसले को हर्टलेस करार दिया। ममता ने मोदी सरकार पर ‘‘विदेश से काला धन वापस लाने में नाकामी से ध्यान हटाने के लिए नाटक करने’’ का आरोप लगाया। उन्होंने कई ट्वीट करके कहा कि इस कठोर फैसले को वापस लिया जाए। मैं कालेधन, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त हूं, लेकिन आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों के बारे में गहराई से चितिंत हूं। वे कल सामान कैसे खरीदेंगे? यह वित्तीय अव्यवस्था और आपदा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अमीरों से विदेश में जमा कालाधन वसूलने का वादा नहीं पूरा कर पाए इसलिए इस नाकामी से ध्यान हटाने के लिए नाटक किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन और जाली नोट पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए आठ नवंबर की आधी रात से 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर दिए  हैं। पीएम मोदी ने अचानक से देश को संबोधित करते हुए यह एलान किया। उन्‍होंने यह मुद्राएं कानूनी रूप से अमान्‍य होगी। 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट कागज के टुकड़े के समान रह जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि पिछले दशकों से हम यह अनुभव कर रहे हैं कि देश में भ्रष्‍टाचार और कालाधन ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। देश से गरीबी हटाने में भ्रष्‍टाचार और कालाधन सबसे बड़ी बाधा है। एक तरफ तो हम विश्‍व में आगे बढ़ने वाले देशों में शामिल है लेकिन दूसरी ओर भ्रष्‍टाचार के मामले में हम 76वें नंबर पर पहुंच गए हैं। यह दर्शाता है कि भ्रष्‍टाचार किस तरह फैला हुआ है। कुछ वर्ग गरीबों को नजरअंदाज कर रहे हैं। इससे वे फलते-फूलते रहे हैं। वहीं देश के करोड़ों लोगों ने ईमानदारी को जीकर दिखाया है। पीएम ने कहा कि 100, 50, 20, 10, 5, 2 और 1 रुपया जारी रहेंगे।

500-1000 रुपए के नोट बदलने में आपको ना हो परेशानी, इसलिए बैंक उठाएंगे यह कदम

सरकार ने कहा है कि बैंक लोगों को 500 रुपए व 1000 रुपए के चलन से बाहर हो चुके नोट बदलने में मदद के लिए अतिरिक्त काउंटर खोलेंगे तथा अतिरिक्त काम करेंगे।

सरकार ने कहा है कि बैंक लोगों को 500 रुपए व 1000 रुपए के चलन से बाहर हो चुके नोट बदलने में मदद के लिए अतिरिक्त काउंटर खोलेंगे तथा अतिरिक्त काम करेंगे। सरकार ने 500 रुपए व 1000 रुपए मूल्य के मौजूदा करेंसी नोटों को मंगलवार रात (8 नवंबर) से अवैध घोषित कर दिया है। आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैंक काउंटरों पर अफरा तफरी व भीड़ की संभावना को देखते हुए सरकार व रिजर्व बैंक ने मुंबई व दिल्ली में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं ताकि किसी तरह के संकट को टाला जा सके। बैंक बुधवार यानी आज बंद रहेंगे। लोगों को दस नवंबर से अपने मौजूदा अवैध 500 रुपए व 1000 रुपए के नोट बैंक और डाकघरों के जरिए बदलने की अनुमति होगी।
ग्राहक 30 दिसंबर तक 500 व 1000 रुपए के कितनी भी राशि के नोट अपने बैंक खातों में जमा करवा सकते हैं। इसके अलावा 24 नवंबर तक वे किसी भी बैंक अथवा डाकघर से 4000 रुपए प्रतिदिन तक अदला बदली कर सकेंगे इसके लिए उन्हें अपना पहचान पत्र दिखाना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने 500 रुपए व 2000 रुपए के उच्च सुरक्षा मानकों वाले नये नोटों का विनिर्माण तेजी से शुरू कर दिया है। ये नोट पुराने नोट का स्थान लेंगे। 500 व 2000 रुपए के नये नोट 10 नवंबर से चलन में आ जाएंगे।

डोनाल्ड ट्रंप जीते तो हो सकता है भारत को नुकसान, बदल सकती हैं ये अमेरिकी नीतियां

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर वो राष्ट्रपति बने तो आतंकवाद प्रभावित देशों से आने वाले प्रवासियों पर अंकुश लगा देंगे।

अमेरिका का अगला राष्ट्रपति कौन बनेगा ये अब से कुछ ही देर में साफ हो जाएगा। अभी तक मिले रुझान में रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप आगे चल रहे हैं। ट्रंप का चुनाव प्रचार काफी विवादित रहा था। उन्होंने चुनाव जीतने पर अमेरिका की कई नीतियों को बदलने की बात कही है। आइए देखते हैं कि ट्रंप चुनाव जीतते हैं तो किन नीतियों में बदलाव कर सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार में प्रवासियों का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। संभव है कि राष्ट्रपति बनते ही वो अवैध रूप से अमेरिका में रहने वाले प्रवासियों को उनके देश वापस भेजने की शुरुआत कराएं। एक ताजा अध्ययन के अनुसार अमेरिका में करीब एक लाख साठ हजार अवैध प्रवासी हैं। लेकिन ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अमेरिका में 20 लाख अवैध प्रवासी हैं। ट्रंप आतंकवाद प्रभावित इलाकों से आने वाले प्रवासियों पर भी अंकुश लगा सकते हैं। ट्रंप ने अमेरिका की दक्षिणी सीमा से आने वाले प्रवासियों पर भी रोक लगाने की बात कही है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रचार के दौरान कहा था कि वो नाटो के सहयोगी देशों को सैन्य मदद पर भी अंकुश लगा सकते हैं। ट्रंप ने कहा है कि अगर वो जीते तो अमेरिका उन्हीं देशों की सैन्य मदद करेगा जो उसकी शर्तें मानेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद शायद पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगी देशों की सैन्य मदद को लेकर ऐसा बयान दिया है। ट्रंप ने अमेरिकी जनता से वादा किया है कि अगर वो जीते तो इराक और लेवांत में इस्लामिक स्टेट पर कहर टूट पड़ेगा। ट्रंप के बयानों से संकेत मिलता रहा है कि वो सीरिया में बशर अल असद सरकार के समर्थक हैं। जबकि मौजूदा अमेरिका प्रशासन बशर विरोधियों को समर्थन दे रहा है।
ट्रंप ने पर्यावरण और ऊर्जा क्षेत्र में भी पुरानी अमेरिकी नीति बदलने की बात कही है। ट्रंप ने अमेरिका के क्लाइमेट चेंज प्रोग्राम को दिए जाने अरबों डॉलर की मदद को बंद करने की बात कही है। ट्रंप ने कहा है कि वो इस पैसे को अमेरिका में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में खर्च करेंगे।ट्रंप ने अमेरिकी तेल और प्राकृतिक गैस क्षेत्र पर पर लगे प्रतिबंध भी हटाने की बात कही है ताकि इनका उत्पादन बढ़ाया जा सके।
ट्रंप ने कहा है कि ओबामा के दिए हर एक्जिक्यूटिव एक्शन, मेमोरंडम और आर्डर को रद्द कर देंगे। ट्रंप के प्रचार टीम से जुड़े एक सदस्य ने हाल ही में कहा था कि अगर ट्रंप जीतते हैं तो बराक ओबामा द्वारा दिए गए करीब 25 एग्जिक्यूटिव ऑर्डर रद्द किए जा सकते हैं। ट्रंप ओबामा के जिन एग्जिक्यूटिव ऑर्डर को रद्द करने की तरफ इशारा करते रहे हैं उनमें सबसे ऊपर ओबारा द्वारा लायी गई स्वास्थ बीमा योजना है। इस योजना का लाभ एक करोड़ से अधिक अमेरिकयों को मिला था। ट्रंप ने कहा है कि वो इसकी जगह नई स्वास्थ्य बीमा योजना लाएंगे जिस पर अमेरिका सरकार का ज्यादा नियंत्रण होगा।

ट्रंप ने मतदान से दो दिन पहले ही बयान दिया था कि चीन और भारत अमेरिकियों के रोजगार छीन रहे हैं। ऐसे में अगर वो चुनाव जीतते हैं तो अमेरिका से नौकरियों की आउटसोर्सिंग पर भी असर दिखेगा। भारत के सॉफ्टवेयर सेक्टर पर इसका काफी असर पड़ सकता है। नस्ली भेदभाव का लेकर भी ट्रंप का नजरिया काफी रूढ़िवादी रहा है। उन्होंने कालों की हत्या के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों को कड़ाई से निपटने की बात कही है। समलैंगिक अधिकारों को लेकर भी ट्रंप का नजरिया रूढ़िवादी हैं। उन्होंने साफ तौर पर समलैंगिक विवाहों का विरोध नहीं किया लेकिन वो संकेत दे चुके हैं को वो इसे लेकर सकारात्मक राय नहीं रखते। ट्रंप ने गर्भपात के कारोबार पर भी अंकुश लगाने की बात कही है। हालांकि इस मुद्दे पर ट्रंप अपने बयान बदलते रहे हैं। ट्रंप ने वाशिंगटन में “काला धन” पर रोक लगाने की भी बात कह चुके हैं। ऐसे में अगर वो चुनाव जीते तो अमेरिकी की कई दशकों से चली आ रही कई नीतियों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

इंदौर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला ,सभी जिलों में स्कूल ट्रीब्यूनल खोलने का दिया आदेश

 


इंदौर : हाईकोर्ट  की इंदौर खंडपीठ ने निजी स्कूल के मामले में मंगलवार को बड़ा फैसला दिया है.कोर्ट ने मंदसौर के निजी विद्यालय से नौकरी पर से निकाली गई शिक्षका की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला दिया है कि प्रत्येक जिले में स्कूल ट्रीब्यूनल खोला जाए.वहीं,शिक्षिका को 2015 से लेकर अब तक का पूरा हर्जाना स्कूल दें.दरअसल,मंदसौर के दशपूर स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका कीर्ति  पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए नौकरी से निकाल दिया गया था.इसके विरोध में कीर्ति ने हाईकोर्ट  में याचिका दायर की थी.याचिका पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने प्रमुख सचिव स्कूली शिक्षा को निर्देश दिए है कि निजी स्कूलों की मनमानी के लिए प्रत्येक जिले में स्कूल ट्रीब्यूनल की स्थापना की जाए क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1975 में निर्देश दिए थे.प्रत्येक जिले में स्कूल ट्रिब्यूनल होना चाहिए,लेकिन मध्यप्रदेश में आज तक इसकी स्थापना नहीं की गई है.ट्रिब्यूनल में निजी शिक्षक और स्कूल से संबंधित मामलों की सुनवाई की जाएगी.साथ ही स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए है कि पीड़िता कीर्ति  को 2015 से लेकर अब तक की पूरा वेतन हर्जाने के साथ दिया जाए.
 

इंदौर हाईकोर्ट खंडपीठ ने दिया DME के खिलाफ फैसला,रद्द किए गए 32 छात्रों का दाखिला बहाल

 


इंदौर : एक बार फिर से निजी मेडिकल कॉलेज और सरकार की सांठगाठ की कलई खुल गई है.इंदौर हाईकोर्ट   खंडपीठ ने DME के खिलाफ फैसला देते हुए रद्द किए गए 32 छात्रों के दाखिलें को बहाल कर दिया है.इन छात्रों को डीएमई ने काउंसलिंंग के बाद देवास के निजी मेडिकल कॉलेज में सीटें आवंटित की थी.लेकिन बाद में इनके दाखिले रद्द कर दिए है.इस आदेश के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए.हाइकोर्ट ने 32 छात्रों का दाखिला बहाल किया है.वहीं,राज्य सरकार से हर्जाना देने के लिए भी कहा है.
 
 
 
हाइकोर्ट ने  इंदौर खंडपीठ के  डॉयरेक्टर मेडिकल एजुकेशन यानी DME को करारा झटका दिया है. हाई कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला देते हुए निजी मेडिकल कॉलेज में पीड़ित छात्रों का  दाखिला बरकरार रखते हुए सरकार को प्रति छात्र 10 हजार रुपए हर्जाना देने के लिए निर्देश दिया है.दरअसल,DME ने ऑफलाइन काउंसलिंग करते हुए 32 छात्रों को देवास के अमलतास निजी मेडिकल कॉलेज में सीट आवंटित की थी.छात्रों ने दाखिला लेकर पढ़ाई भी शुरू कर दी.लेकिन कुछ ही दिनों बाद डॉयरेक्टर मेडिकल एजुकेशन ने सभी छात्रों के दाखिले को निरस्त कर दिया था.DME ने माना था कि मानवीय त्रुटी की वजह से छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेज में सीटें आवंटित कर दी गई है.लिहाजा,दाखिला पाने वाले सभी छात्रों की सीेटें रद्द कर की जाती है.इस आदेश के खिलाफ छात्रों ने याचिका लगाई थी.जिस पर फैसला सुनाते हुए हाइकोर्ट ने ये निर्देश दिए है कि सभी छात्रों को फिर से दाखिला दिया जाए.वहीं,राज्य सरकार प्रति 10 हजार जुर्माने के तौर पर दे.

हाईकोर्ट से फैसला आने के बाद छात्रों में खुशी है..छात्रों का कहना है..कि उनसे कम नंबर लाने वाले छात्र निजी मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे है..जबकि उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया था.
आकाश शर्मा,वकील

फिलहाल,केवल 32 छात्र ही सामने आए थे..लेकिन इस फैसले के बाद उम्मीद है कि दूसरे और भी कई छात्र सामने आएंगे.जिन्हें प्रदेश के दूसरे निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिया गया था.वहीं,DME के फैसले के बाद उनका दाखिला रद्द कर दिया गया था.

लगातार तीन टेस्‍ट सीरीज में टीम इंडिया को धूल चटा चुका है इंग्‍लैंड, 16 साल में भारत में सबसे सफल विदेशी टीम

विराट कोहली की कप्‍तानी वाली टीम इंडिया के सामने टेस्‍ट रैंकिंग बचाने के साथ ही इंग्‍लैंड से पिछली तीन टेस्‍ट सीरीज में मिली हार का बदला लेने का भी मौका होगा।

भारत और इंग्‍लैंड पांच मैचों की सीरीज के पहले टेस्‍ट में राजकोट में आमने-सामने होंगे। विराट कोहली की कप्‍तानी वाली टीम इंडिया के सामने टेस्‍ट रैंकिंग बचाने के साथ ही इंग्‍लैंड से पिछली तीन टेस्‍ट सीरीज में मिली हार का बदला लेने का भी मौका होगा। विदेशी टीमों में केवल इंग्‍लैंड ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने साल 2000 के बाद से भारत में सबसे अच्‍छा प्रदर्शन किया है। साल 2000 के बाद से इंग्‍लैंड का भारत में रिकॉर्ड तीन जीत और चार हार का है। इंग्‍लैंड एकमात्र ऐसा देश है जिसने पिछले 10 साल में भारत में सीरीज जीती है। अंग्रेजों ने साल 2012 में भारत को 2-1 से हराया था। वहीं इंग्‍लैंड का भारत में जीत-हार का रेश्‍यों भी सबसे बे‍हतर हैं। इंग्‍लैंड ने का भारत में हार का रेश्‍यो 33.33 प्रतिशत रहा है। इंग्‍लैंड उन देशों में से जिनका प्रदर्शन भारत में बेहतर रहा है।

पिछले 30 सालों में इंग्‍लैंड ने दो बार 1984-85 और 2012-13 में 2-1 से जीत दर्ज की थी। वहीं 1993 में 3-0, 2001-02 में 1-0 और 2008-09 में 1-0 से हार मिली थी। साल 2005-06 में सीरीज 1-1 से ड्रा रही थी। भारत और इंग्‍लैंड के बीच भारत में 17 टेस्‍ट सीरीज हुई हैं और इनमें छह बार टीम इंडिया और पांच बार इंग्‍लैंड जीता है। तीन सीरीज ड्रा रही। यहां यह बात गौर करने वाली है कि वर्तमान इंग्‍लैंड टीम के एलिस्‍टेयर कुक, जो रूट, जॉनी बेयरस्‍टो, स्‍टुअर्ट ब्रॉड और स्‍टीवन फिन को ही भारत में टेस्‍ट खेलने का अनुभव है। इसी सीरीज में भारत के कप्‍तान विराट कोहली और आर अश्विन के पास अपने रिकॉर्ड को ठीक करने का मौका होगा।

कोहली का इंग्‍लैंड के खिलाफ टेस्‍ट रिकॉर्ड काफी खराब है। अंग्रेजों के खिलाफ उनकी औसत 20.12 का है। वहीं भारत में खेले गए टेस्‍ट को भी जोड़ लें तो बढ़कर 31.33 हो जाता है। इस टीम के अलावा बाकी सभी उनसे ज्‍यादा औसत तो आर अश्विन की है। वहीं गेंदबाजी में अश्विन का औसत भी इंग्‍लैंड के खिलाफ खराब है। इंग्‍लैंड के खिलाफ एकमात्र घरेलू सीरीज में अश्विन ने चार टेस्‍ट में 14 विकेट लिए थे और उनका औसत 52.64 रहा था। इसके बाद की चार घरेलू सीरीज में उन्‍होंने 16.56 की औसत से 99 विकेट लिए हैं।

भारत इस समय जबरदस्‍त फॉर्म में है। कोहली की कप्‍तानी में भारत ने श्रीलंका को उसी के घर में 2-1 से, बांग्‍लादेश को उसी की जमीं पर 1-0 और वेस्‍ट इंडीज को 2-0 से हराया था। इसके अलावा पिछले साल दक्षिण अफ्रीका को 3-0 व पिछले महीने ही न्‍यूजीलैंड को 3-0 से परास्‍त किया था.

राखी बिड़लान के पिता सहित दो आप नेताओं पर टिकट का झांसा देकर रेप का आरोप

आरोप लगाने वाली महिला ने शिकायत में भूपेंद्र बिड़लान और रामप्रताप गोयल का नाम लिया। महिला ने रोहिणी इलाके में रेप होने की बात कही है।

आम आदमी पार्टी(आप) के दो नेताओं पर रेप का आरोप लगा है। खबर है कि आप विधायक राखी बिड़लान के पिता और एक अन्‍य नेता पर टिकट दिलाने का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगा है। आरोप लगाने वाली महिला ने शिकायत में भूपेंद्र बिड़लान और रामप्रताप गोयल का नाम लिया। महिला ने रोहिणी इलाके में रेप होने की बात कही है। रोहिणी साउथ थाने में धारा 376डी और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। भूपेंद्र बिड़लान मंगोलपुरी से विधायक राखी बिड़लान के पिता हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही आप नेता और पूर्व मंत्री संदीप कुमार को सेक्‍स सीडी के चलते पद से हटाया गया था। उन्‍हें सोमवार को ही जमानत मिली है। आप के लिए ये नए आरोप परेशानियां खड़े कर सकते हैं। इससे पहले उसके एक दर्जन विधायक अलग-अलग मामलों में जेल जा चुके हैं.

अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव 2016: डोनाल्‍ड ट्रंप या हिलेरी क्लिंटन, किसकी जीत से भारत को होगा फायदा?

सोमवार को जब एफबीआई ने क्लिंटन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज करने से इनकार किया तो ज्‍यादातर बाजारों में उछाल देखा गया

अगले 24 घंटों के भीतर अमेरिका का नया राष्‍ट्रपति चुन लिया जाएगा। रिपब्लिकन उम्‍मीदवार डाेनाल्‍ड ट्रंप और डेमाेक्रेटिक उम्‍मीदवार हिलेरी क्लिंटन में से कोई एक, दुनिया के सबसे ताकतवर राष्‍ट्र का प्रमुख बनेगा। इस चुनाव से न सिर्फ वैश्विक समीकरण बदलने के आसार हैं, बल्कि द‍ुनिया भर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं में भी आमूल-चूल बदलाव आने की आशंका है। वित्‍तीय विशेषज्ञों ने डर जताया है कि ट्रंप की जीत उभर रहे बाजारों जैसे- भारत के लिए नकरात्‍मक साबित होगी। इससे सोने और विकसित दुनिया के बॉन्‍ड्स की मांग में इजाफा होगा। वर्तमान में इसी बात पर उतार चढ़ाव जारी है कि अगर हिलेरी क्लिंटन जीत जाती हैं और ट्रंप ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह नतीजे मानेंगे या नहीं। एक आर्थिक विशेषज्ञ के अनुसार, ”यह रिस्‍क लेने का सही समय नहीं है।” सोमवार को जब एफबीआई ने क्लिंटन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज करने से इनकार किया तो ज्‍यादातर बाजारों में उछाल देखा गया। इससे क्लिंटन की जीत की संभावना प्रबल होती दिख रही है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव 2016 के परिणाम का भारत पर क्‍या प्रभाव पड़ सकता है।

चुनाव का असर अमेरिका-रूस और अमेरिका-चीन के रिश्‍तों पर पड़ सकता है, इन दोनों देशों को लेकर हिलेरी और ट्रंप, दोनों का रुख प्रचार के दौरान आलोचनात्‍मक रहा है। अमेरिका का अगला राष्‍ट्रपति इन दोनों देशाें के साथ कैसे संंबंध बनाकर चलेगा, इस बात का असर भारत के चीन व रूस से रिश्‍तों पर भी पड़ सकता है। ट्रंप ने चीन को ‘पूरी व्‍यापारिक कमी के लगभग आधे’ के लिए जिम्‍मेदार ठह‍राया है। दूसरी तरफ क्लिंटन पहले से ही चीन की कड़ी आलोचक रही हैं। हिलेरी ने चीन की परिवार नियोजन नीति, 1996 के बाद मानवाधिकार रिकॉर्ड तथा इंटरनेट की आजादी पर लगाम लगाने की तीखी आलोचना की थी। ऐसे में अगर हिलेरी चुनी जाती हैं तो चीन को बिल क्लिंटन के राष्‍ट्रपति काल जैसी स्थितियों से दो-चार होना पड़ सकता है, हालांकि ट्रंप के मुकाबले हिलेरी का रवैया चीन के प्रति ज्‍यादा सौहार्दपूर्ण हैं। भारत के लिहाज से देखें तो ट्रंप की जीत में ज्‍यादा फायदा है क्‍योंकि इससे अमे‍रिका चीन को छोड़कर बाकी एशियाई सहयोगियों के साथ हो जाएगा, भारत के साथ अमेरिका के रिश्‍ते हाल के वर्षों में बेहतर हुए हैं।

अरनब गोस्वामी ने लाइव शो में लगाए खुल कर ठहाके, असददुद्दीन औवेसी ने कहा- आप टाइम्स नाउ छोड़ेंगे तो भी मैं आपको नहीं छोड़ूंगा

अरनब गोस्वामी ने लाइव शो में लगाए खुल कर ठहाके, असददुद्दीन औवेसी ने कहा- आप टाइम्स नाउ छोड़ेंगे तो भी मैं आपको नहीं छोड़ूंगा

अरनब जल्द ही टाइम्स नाउ छोड़ने वाले हैं। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

इंग्लिश न्यूज चैनल टाइम्स नाउ में 7 नवंबर को कश्मीर के मुद्दे (हिंसा और विरोध प्रदर्शन) पर डिबेट हुई। इस शो में अरनब गोस्वामी ने असद्दुदीन औवेसी को भी बुलाया हुआ था। जहां अपने शो में अरनब ज्यादातर काफी गुस्से और आक्रमक रूप में रहते हैं। वहीं औवेसी की एक बात पर अरनब अपने शो में ठहाके लगाकर हंसने लगे। अरनब औवेसी से बोलते हैं, ‘मुझे काफी खुशी है कि आप न्यूज हॉर पर आए। आप ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर बोलने के लिए बुलाने के बाद भी नहीं आए थे। आप बाकी कई चैनलों पर बोले। शायद आप उन चैनलों पर बोलना पसंद करते हैं जिनमें कठिन सवाल नहीं पूछे जाते। इसलिए आप टाइम्स नाउ पर नहीं आ रहे थे। अगर आपके अंदर हिम्मत है तो मैं आपको ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर मेरे चैनल पर डिबेट करने का चैलेंज देता हूं। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आप काफी दिन से मुझसे भाग रहे थे लेकिन आखिरकार कब तक भागोगे। क्या अब मुझे आपसे सीखना पड़ेगा कि मुझे बीजेपी से क्या पूछना है।?

इसपर औवेसी हंसने लगते हैं। फिर आगे अरनब बोलते हैं, ‘आप गिलानी को समर्थन करते हैं। वह सुरक्षा जवानों पर पत्थर फेंकने को जायज ठहराते हैं। वह हाफिज सईद की सभाओं को संबोधित करते हैं। गिलानी कश्मीर के लोगों की वोट ना डालने की बात का समर्थन करते हैं। आप ऐसा क्यों करते हैं मुझे इस बात का जवाब दीजिए। अगर जवाब नहीं है तो भी बता दो।’

 

इसपर औवेसी बोलते हैं, ‘अरनब मेरे भाई, मित्र सुनो, अगर आप टाइम्स नाउ छोड़कर भी जाएंगे तो भी मैं आपको छोड़ूंगा नहीं, ना आप मुझे छोड़ेंगे। मैं आउंगा आपके पास आपके प्रोग्राम में। जब आप ऐसे चैलेंज देते हैं तो हॉलीवुड एक्‍टर और रजनीकांत का मिक्स रूप लगते हैं। इस बात को सुनकर अरनब खूब जोर-जोर से हंसने लगते हैं। गौरतलब है कि अरनब जल्द ही टाइम्स नाउ छोड़ने वाले हैं। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- मैंने अपने अधिकारियों से कह दिया है, करो या मरो

नरेंद्र मोदी सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में प्रतिदिन 40 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा है।

बीजेपी नेता और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में सोमवार (7 सितंबर) को एक कार्यक्रम में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 2014 के लोक सभा चुनाव में किए गए आर्थिक विकास के वादों को पूरा करने के लिए सड़क, बंदरगाह और हवाईअड्डों के निर्माण पर पूरा जोर लगा रही है। गडकरी ने कहा कि अगर भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकसित अर्थव्यस्था बने रहना है तो उसे सड़क और बंदरगाह से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान देना होगा। गडकरी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग के एक कार्यक्रम में कहा, “अभी आधारभूत ढांचा क्षेत्र में ब्याज की दर 11 प्रतिशत है जो आदर्श नहीं है। इस सेक्टर के लिए आदर्श दर सात प्रतिशत से कम होनी चाहिए।”  गडकरी ने कहा कि मोदी सरकार का मकसद कारोबार में सहूलियत को बढ़ाना है।
गडकरी ने कार्यक्रम में बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय इस साल दिसंबर तक करीब दो लाख किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण कराना चाहता है। इनके तहत दक्षिण एशिया के कई देश आएंगे। विदेश निवेशको को ध्यान में रखते हुए सरकार 101 टोल रोड की अनुमति देगी। गडकरी के अनुसार भारत में ऊंची ब्याज दरों की वजह से विदेशी कर्ज सस्ता पड़ता है। केंद्र सरकार इस साल परिवहन सेक्टर में किए पिछले तीन सालों के औसत खर्च से तीन गुना अधिक खर्च करने वाली है।

ब्लूमबर्ग इंटेलीजेंस एनालिसिस के अनुसार भारत की केवल 55-60 प्रतिशत सड़कों के किनारे फुटपाथ हैं। जबकि चीन के 45 लाख किलोमीटर लंबे सड़क जाल का एक तिहाई से अधिक पूरी तरह पक्का है। एजेंसी के अनुसार अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव और 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव से पहले परिवहन क्षेत्र नरेंद्र मोदी सरकार के लिए  रोजगार निर्माण के लिए काफी अहम है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर सात प्रतिशत से अधिक है। हालांकि आधारभूत ढांचा क्षेत्र में भारत चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों से पीछे है। गडकरी ने कहा कि परिवहन क्षेत्र में विकास भारत की स्थिति बेहतर बनाने में अहम है।


गडकरी के अनुसार केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में प्रतिदिन 40 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि  देश की 95 प्रतिशत सड़क परियोजनाएं ठीक चल रही हैं। दो साल पहले केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले प्रति दिन सड़क निर्माण तीन किलोमीटर प्रतिदिन तक सिमट गया था। तो क्या सरकार ये लक्ष्य प्राप्त कर पाएगी? इस पर गडकरी ने कहा, “मंत्री के तौर बड़े लक्ष्य रखना और उन्हें पूरा करना ये मेरी जिम्मेदारी है।” काम में हीलाहवाली करने वाले अफसरों पर टिप्पणी करते हुए गडकरी ने कहा, “मैंने उनसे कह दिया है कि मैं मंत्री हूं, या तो करो या मरो.

अरविंद केजरीवाल बोले- नजीब की मां को पीटा, बहुत हाय लगेगी, युवाओं से पंगा न लो मोदी जी.

नजीब अहमद पिछले 23 दिनों से लापता है। दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अभी तक उसका पता नहीं लगा पाई हैं।

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तरह, मोदी सरकार भी पुलिस के पीछे छिपकर अत्‍याचार कर रही है। उन्‍होंने ट्वीट किया- ”ज़ाहिर है कि पुलिस ख़ुद नहीं करती, अपने आकाओं के आदेश मानती है। पहले कांग्रेस ने पुलिस के पीछे छुपकर अत्याचार किए, अब मोदी जी वही कर रहे हैं।” जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के 23 दिन से लापता छात्र, नजीब अहमद का पता लगाने के लिए उसके परिजनों और जेएनयू स्‍टूडेंट्स ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया था। जिसमें दिल्‍ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबर्दस्‍ती खींचकर हिरासत में लिया, नजीब की मां से भी बदसलूकी हुई। केजरीवाल ने इस पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ”नजीब, जो 23 दिन से लापता है, उसकी माँ को दिल्ली पुलिस घसीटते हुए। कुछ दिन पहले, मृत राम किशन के बेटों को पीटा था। मोदी जी, बहुत हाए लगेगी।” अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, ”आप जितना युवाओं को रोकोगे, वो उतना ही और भड़केंगे। मैंने कई बार समझाया है- मोदी जी, युवाओं से पंगा मत लो।

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के लापता छात्र नजीब अहमद का पता लगाने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे जामिया और जेएनयू के छात्रों को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हिरासत में ले लिया था। जेएनयू छात्रों का कहना है कि हम लोग शांति से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन तभी पुलिस वहां पहुंची और जबरदस्ती हमें वाहनों में डालकर थाने ले जाने लगी। प्रदर्शन कर रही छात्रों के साथ नजीब की मां भी थीं। पुलिस छात्रों को तीन बसों में भरकर ले गई हैं। बता दें, नजीब अहमद पिछले 23 दिनों से लापता है। दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अभी तक उसका पता नहीं लगा पाई हैं।

NDTV के बाद एक और न्यूज चैनल को सरकार ने सुनाया एक दिन के लिए बंद रखने का आदेश

न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया को एक दिन के लिए बंद रखने के सरकार के फैसले पर अभी विवाद थमा भी नहीं थी कि भारत सरकार ने एक और न्यूज चैनल के लिए भी यहीं आदेश सुना दिया है। एनडीटीवी के बाद भारत सरकार ने ‘न्यूज टाइम असम’ नाम एक एक न्यूज चैनल को एक दिन के लिए बंद रखने का आदेश सुनाया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर ‘न्यूज टाइम असम’ एक दिन ऑफ एयर रहेगा। न्यूज टाइम असम को 9 नवंबर को ही एक दिन के लिए बंद रखा जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 2 नवंबर को इस आदेश को पारित किया है।  चैनल पर तय की गई गाइडलाइन के उल्लघंन का आरोप है। चैनल पर लगाए गए आरोपों में से एक आरोप मालिक द्वारा प्रताड़ित किए गए नाबलिग घरेलू नौकर की पहचान को सार्वजनिक करना भी है। इसके अतिरिक्त चैनल द्वारा दिखाए चित्रण में बालक की निजता और सम्मान को ठेस पहुंचाने का भी आरोप है।
इससे पहले हिंदी समाचार चैनल एनडीटीवी इंडिया पर केंद्र सरकार ने एक दिन बंद रखने का आदेश सुनाते हुए कहा कि, ‘भारतभर में किसी भी मंच के जरिए एनडीटीवी इंडिया के एक दिन के प्रसारण या पुन: प्रसारण पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश 9 नवंबर, 2016 को रात 12 बजकर 1 मिनट से 10 नवंबर, 2016 को रात 12 बजकर 1 मिनट तक प्रभावी रहेगा।’

भारत सरकार द्वारा केबल टीवी नेटवर्क (नियमन) कानून के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये आदेश सुनाया है। एनडीटीवी पर सरकार के फैसले के समूचे राजनीतिक जगत में भी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर इसे  ‘मीडिया की स्वतंत्रता का हनन’ बताया जा  रहा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस प्रतिबंध के आदेश को स्तब्ध करने वाला और अभूतपूर्व बताया है। जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले पर कहा, ‘क्या यही वे अच्छे दिन हैं, जिनका वादा किया गया था?’ वहीं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा है कि इस फैसले से लग रहा है कि देश में आपातकाल जैसे हालात हैं।

अपने वीडियो के बारे में एनडीटीवी इंडिया ने कहा, ”सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का आदेश प्राप्‍त हुआ है। बेहद आश्चर्य की बात है कि NDTV को इस तरीके से चुना गया। सभी समाचार चैनलों और अखबारों की कवरेज एक जैसी ही थी। वास्‍तविकता में NDTV की कवरेज विशेष रूप से संतुलित थी। आपातकाल के काले दिनों के बाद जब प्रेस को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, उसके बाद से NDTV पर इस तरह की कार्रवाई अपने आप में असाधारण घटना है। इसके मद्देनजर NDTV इस मामले में सभी विकल्‍पों पर विचार कर रहा है।”