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राखी बिड़लान के पिता सहित दो आप नेताओं पर टिकट का झांसा देकर रेप का आरोप

आरोप लगाने वाली महिला ने शिकायत में भूपेंद्र बिड़लान और रामप्रताप गोयल का नाम लिया। महिला ने रोहिणी इलाके में रेप होने की बात कही है।

आम आदमी पार्टी(आप) के दो नेताओं पर रेप का आरोप लगा है। खबर है कि आप विधायक राखी बिड़लान के पिता और एक अन्‍य नेता पर टिकट दिलाने का झांसा देकर रेप करने का आरोप लगा है। आरोप लगाने वाली महिला ने शिकायत में भूपेंद्र बिड़लान और रामप्रताप गोयल का नाम लिया। महिला ने रोहिणी इलाके में रेप होने की बात कही है। रोहिणी साउथ थाने में धारा 376डी और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। भूपेंद्र बिड़लान मंगोलपुरी से विधायक राखी बिड़लान के पिता हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों ही आप नेता और पूर्व मंत्री संदीप कुमार को सेक्‍स सीडी के चलते पद से हटाया गया था। उन्‍हें सोमवार को ही जमानत मिली है। आप के लिए ये नए आरोप परेशानियां खड़े कर सकते हैं। इससे पहले उसके एक दर्जन विधायक अलग-अलग मामलों में जेल जा चुके हैं.

अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव 2016: डोनाल्‍ड ट्रंप या हिलेरी क्लिंटन, किसकी जीत से भारत को होगा फायदा?

सोमवार को जब एफबीआई ने क्लिंटन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज करने से इनकार किया तो ज्‍यादातर बाजारों में उछाल देखा गया

अगले 24 घंटों के भीतर अमेरिका का नया राष्‍ट्रपति चुन लिया जाएगा। रिपब्लिकन उम्‍मीदवार डाेनाल्‍ड ट्रंप और डेमाेक्रेटिक उम्‍मीदवार हिलेरी क्लिंटन में से कोई एक, दुनिया के सबसे ताकतवर राष्‍ट्र का प्रमुख बनेगा। इस चुनाव से न सिर्फ वैश्विक समीकरण बदलने के आसार हैं, बल्कि द‍ुनिया भर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं में भी आमूल-चूल बदलाव आने की आशंका है। वित्‍तीय विशेषज्ञों ने डर जताया है कि ट्रंप की जीत उभर रहे बाजारों जैसे- भारत के लिए नकरात्‍मक साबित होगी। इससे सोने और विकसित दुनिया के बॉन्‍ड्स की मांग में इजाफा होगा। वर्तमान में इसी बात पर उतार चढ़ाव जारी है कि अगर हिलेरी क्लिंटन जीत जाती हैं और ट्रंप ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह नतीजे मानेंगे या नहीं। एक आर्थिक विशेषज्ञ के अनुसार, ”यह रिस्‍क लेने का सही समय नहीं है।” सोमवार को जब एफबीआई ने क्लिंटन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज करने से इनकार किया तो ज्‍यादातर बाजारों में उछाल देखा गया। इससे क्लिंटन की जीत की संभावना प्रबल होती दिख रही है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति चुनाव 2016 के परिणाम का भारत पर क्‍या प्रभाव पड़ सकता है।

चुनाव का असर अमेरिका-रूस और अमेरिका-चीन के रिश्‍तों पर पड़ सकता है, इन दोनों देशों को लेकर हिलेरी और ट्रंप, दोनों का रुख प्रचार के दौरान आलोचनात्‍मक रहा है। अमेरिका का अगला राष्‍ट्रपति इन दोनों देशाें के साथ कैसे संंबंध बनाकर चलेगा, इस बात का असर भारत के चीन व रूस से रिश्‍तों पर भी पड़ सकता है। ट्रंप ने चीन को ‘पूरी व्‍यापारिक कमी के लगभग आधे’ के लिए जिम्‍मेदार ठह‍राया है। दूसरी तरफ क्लिंटन पहले से ही चीन की कड़ी आलोचक रही हैं। हिलेरी ने चीन की परिवार नियोजन नीति, 1996 के बाद मानवाधिकार रिकॉर्ड तथा इंटरनेट की आजादी पर लगाम लगाने की तीखी आलोचना की थी। ऐसे में अगर हिलेरी चुनी जाती हैं तो चीन को बिल क्लिंटन के राष्‍ट्रपति काल जैसी स्थितियों से दो-चार होना पड़ सकता है, हालांकि ट्रंप के मुकाबले हिलेरी का रवैया चीन के प्रति ज्‍यादा सौहार्दपूर्ण हैं। भारत के लिहाज से देखें तो ट्रंप की जीत में ज्‍यादा फायदा है क्‍योंकि इससे अमे‍रिका चीन को छोड़कर बाकी एशियाई सहयोगियों के साथ हो जाएगा, भारत के साथ अमेरिका के रिश्‍ते हाल के वर्षों में बेहतर हुए हैं।

अरनब गोस्वामी ने लाइव शो में लगाए खुल कर ठहाके, असददुद्दीन औवेसी ने कहा- आप टाइम्स नाउ छोड़ेंगे तो भी मैं आपको नहीं छोड़ूंगा

अरनब गोस्वामी ने लाइव शो में लगाए खुल कर ठहाके, असददुद्दीन औवेसी ने कहा- आप टाइम्स नाउ छोड़ेंगे तो भी मैं आपको नहीं छोड़ूंगा

अरनब जल्द ही टाइम्स नाउ छोड़ने वाले हैं। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

इंग्लिश न्यूज चैनल टाइम्स नाउ में 7 नवंबर को कश्मीर के मुद्दे (हिंसा और विरोध प्रदर्शन) पर डिबेट हुई। इस शो में अरनब गोस्वामी ने असद्दुदीन औवेसी को भी बुलाया हुआ था। जहां अपने शो में अरनब ज्यादातर काफी गुस्से और आक्रमक रूप में रहते हैं। वहीं औवेसी की एक बात पर अरनब अपने शो में ठहाके लगाकर हंसने लगे। अरनब औवेसी से बोलते हैं, ‘मुझे काफी खुशी है कि आप न्यूज हॉर पर आए। आप ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर बोलने के लिए बुलाने के बाद भी नहीं आए थे। आप बाकी कई चैनलों पर बोले। शायद आप उन चैनलों पर बोलना पसंद करते हैं जिनमें कठिन सवाल नहीं पूछे जाते। इसलिए आप टाइम्स नाउ पर नहीं आ रहे थे। अगर आपके अंदर हिम्मत है तो मैं आपको ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर मेरे चैनल पर डिबेट करने का चैलेंज देता हूं। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आप काफी दिन से मुझसे भाग रहे थे लेकिन आखिरकार कब तक भागोगे। क्या अब मुझे आपसे सीखना पड़ेगा कि मुझे बीजेपी से क्या पूछना है।?

इसपर औवेसी हंसने लगते हैं। फिर आगे अरनब बोलते हैं, ‘आप गिलानी को समर्थन करते हैं। वह सुरक्षा जवानों पर पत्थर फेंकने को जायज ठहराते हैं। वह हाफिज सईद की सभाओं को संबोधित करते हैं। गिलानी कश्मीर के लोगों की वोट ना डालने की बात का समर्थन करते हैं। आप ऐसा क्यों करते हैं मुझे इस बात का जवाब दीजिए। अगर जवाब नहीं है तो भी बता दो।’

 

इसपर औवेसी बोलते हैं, ‘अरनब मेरे भाई, मित्र सुनो, अगर आप टाइम्स नाउ छोड़कर भी जाएंगे तो भी मैं आपको छोड़ूंगा नहीं, ना आप मुझे छोड़ेंगे। मैं आउंगा आपके पास आपके प्रोग्राम में। जब आप ऐसे चैलेंज देते हैं तो हॉलीवुड एक्‍टर और रजनीकांत का मिक्स रूप लगते हैं। इस बात को सुनकर अरनब खूब जोर-जोर से हंसने लगते हैं। गौरतलब है कि अरनब जल्द ही टाइम्स नाउ छोड़ने वाले हैं। उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा- मैंने अपने अधिकारियों से कह दिया है, करो या मरो

नरेंद्र मोदी सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में प्रतिदिन 40 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा है।

बीजेपी नेता और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई में सोमवार (7 सितंबर) को एक कार्यक्रम में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार 2014 के लोक सभा चुनाव में किए गए आर्थिक विकास के वादों को पूरा करने के लिए सड़क, बंदरगाह और हवाईअड्डों के निर्माण पर पूरा जोर लगा रही है। गडकरी ने कहा कि अगर भारत को दुनिया की सबसे तेजी से विकसित अर्थव्यस्था बने रहना है तो उसे सड़क और बंदरगाह से जुड़ी योजनाओं पर ध्यान देना होगा। गडकरी ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग के एक कार्यक्रम में कहा, “अभी आधारभूत ढांचा क्षेत्र में ब्याज की दर 11 प्रतिशत है जो आदर्श नहीं है। इस सेक्टर के लिए आदर्श दर सात प्रतिशत से कम होनी चाहिए।”  गडकरी ने कहा कि मोदी सरकार का मकसद कारोबार में सहूलियत को बढ़ाना है।
गडकरी ने कार्यक्रम में बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय इस साल दिसंबर तक करीब दो लाख किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण कराना चाहता है। इनके तहत दक्षिण एशिया के कई देश आएंगे। विदेश निवेशको को ध्यान में रखते हुए सरकार 101 टोल रोड की अनुमति देगी। गडकरी के अनुसार भारत में ऊंची ब्याज दरों की वजह से विदेशी कर्ज सस्ता पड़ता है। केंद्र सरकार इस साल परिवहन सेक्टर में किए पिछले तीन सालों के औसत खर्च से तीन गुना अधिक खर्च करने वाली है।

ब्लूमबर्ग इंटेलीजेंस एनालिसिस के अनुसार भारत की केवल 55-60 प्रतिशत सड़कों के किनारे फुटपाथ हैं। जबकि चीन के 45 लाख किलोमीटर लंबे सड़क जाल का एक तिहाई से अधिक पूरी तरह पक्का है। एजेंसी के अनुसार अगले साल पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव और 2019 में होने वाले लोक सभा चुनाव से पहले परिवहन क्षेत्र नरेंद्र मोदी सरकार के लिए  रोजगार निर्माण के लिए काफी अहम है। भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर सात प्रतिशत से अधिक है। हालांकि आधारभूत ढांचा क्षेत्र में भारत चीन और इंडोनेशिया जैसे देशों से पीछे है। गडकरी ने कहा कि परिवहन क्षेत्र में विकास भारत की स्थिति बेहतर बनाने में अहम है।


गडकरी के अनुसार केंद्र सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में प्रतिदिन 40 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि  देश की 95 प्रतिशत सड़क परियोजनाएं ठीक चल रही हैं। दो साल पहले केंद्र में मोदी सरकार के आने से पहले प्रति दिन सड़क निर्माण तीन किलोमीटर प्रतिदिन तक सिमट गया था। तो क्या सरकार ये लक्ष्य प्राप्त कर पाएगी? इस पर गडकरी ने कहा, “मंत्री के तौर बड़े लक्ष्य रखना और उन्हें पूरा करना ये मेरी जिम्मेदारी है।” काम में हीलाहवाली करने वाले अफसरों पर टिप्पणी करते हुए गडकरी ने कहा, “मैंने उनसे कह दिया है कि मैं मंत्री हूं, या तो करो या मरो.

अरविंद केजरीवाल बोले- नजीब की मां को पीटा, बहुत हाय लगेगी, युवाओं से पंगा न लो मोदी जी.

नजीब अहमद पिछले 23 दिनों से लापता है। दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अभी तक उसका पता नहीं लगा पाई हैं।

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की तरह, मोदी सरकार भी पुलिस के पीछे छिपकर अत्‍याचार कर रही है। उन्‍होंने ट्वीट किया- ”ज़ाहिर है कि पुलिस ख़ुद नहीं करती, अपने आकाओं के आदेश मानती है। पहले कांग्रेस ने पुलिस के पीछे छुपकर अत्याचार किए, अब मोदी जी वही कर रहे हैं।” जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के 23 दिन से लापता छात्र, नजीब अहमद का पता लगाने के लिए उसके परिजनों और जेएनयू स्‍टूडेंट्स ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया था। जिसमें दिल्‍ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबर्दस्‍ती खींचकर हिरासत में लिया, नजीब की मां से भी बदसलूकी हुई। केजरीवाल ने इस पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ”नजीब, जो 23 दिन से लापता है, उसकी माँ को दिल्ली पुलिस घसीटते हुए। कुछ दिन पहले, मृत राम किशन के बेटों को पीटा था। मोदी जी, बहुत हाए लगेगी।” अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, ”आप जितना युवाओं को रोकोगे, वो उतना ही और भड़केंगे। मैंने कई बार समझाया है- मोदी जी, युवाओं से पंगा मत लो।

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के लापता छात्र नजीब अहमद का पता लगाने के लिए विरोध-प्रदर्शन कर रहे जामिया और जेएनयू के छात्रों को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हिरासत में ले लिया था। जेएनयू छात्रों का कहना है कि हम लोग शांति से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन तभी पुलिस वहां पहुंची और जबरदस्ती हमें वाहनों में डालकर थाने ले जाने लगी। प्रदर्शन कर रही छात्रों के साथ नजीब की मां भी थीं। पुलिस छात्रों को तीन बसों में भरकर ले गई हैं। बता दें, नजीब अहमद पिछले 23 दिनों से लापता है। दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अभी तक उसका पता नहीं लगा पाई हैं।

NDTV के बाद एक और न्यूज चैनल को सरकार ने सुनाया एक दिन के लिए बंद रखने का आदेश

न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया को एक दिन के लिए बंद रखने के सरकार के फैसले पर अभी विवाद थमा भी नहीं थी कि भारत सरकार ने एक और न्यूज चैनल के लिए भी यहीं आदेश सुना दिया है। एनडीटीवी के बाद भारत सरकार ने ‘न्यूज टाइम असम’ नाम एक एक न्यूज चैनल को एक दिन के लिए बंद रखने का आदेश सुनाया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर ‘न्यूज टाइम असम’ एक दिन ऑफ एयर रहेगा। न्यूज टाइम असम को 9 नवंबर को ही एक दिन के लिए बंद रखा जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 2 नवंबर को इस आदेश को पारित किया है।  चैनल पर तय की गई गाइडलाइन के उल्लघंन का आरोप है। चैनल पर लगाए गए आरोपों में से एक आरोप मालिक द्वारा प्रताड़ित किए गए नाबलिग घरेलू नौकर की पहचान को सार्वजनिक करना भी है। इसके अतिरिक्त चैनल द्वारा दिखाए चित्रण में बालक की निजता और सम्मान को ठेस पहुंचाने का भी आरोप है।
इससे पहले हिंदी समाचार चैनल एनडीटीवी इंडिया पर केंद्र सरकार ने एक दिन बंद रखने का आदेश सुनाते हुए कहा कि, ‘भारतभर में किसी भी मंच के जरिए एनडीटीवी इंडिया के एक दिन के प्रसारण या पुन: प्रसारण पर रोक लगाने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश 9 नवंबर, 2016 को रात 12 बजकर 1 मिनट से 10 नवंबर, 2016 को रात 12 बजकर 1 मिनट तक प्रभावी रहेगा।’

भारत सरकार द्वारा केबल टीवी नेटवर्क (नियमन) कानून के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये आदेश सुनाया है। एनडीटीवी पर सरकार के फैसले के समूचे राजनीतिक जगत में भी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर इसे  ‘मीडिया की स्वतंत्रता का हनन’ बताया जा  रहा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस प्रतिबंध के आदेश को स्तब्ध करने वाला और अभूतपूर्व बताया है। जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले पर कहा, ‘क्या यही वे अच्छे दिन हैं, जिनका वादा किया गया था?’ वहीं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा है कि इस फैसले से लग रहा है कि देश में आपातकाल जैसे हालात हैं।

अपने वीडियो के बारे में एनडीटीवी इंडिया ने कहा, ”सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का आदेश प्राप्‍त हुआ है। बेहद आश्चर्य की बात है कि NDTV को इस तरीके से चुना गया। सभी समाचार चैनलों और अखबारों की कवरेज एक जैसी ही थी। वास्‍तविकता में NDTV की कवरेज विशेष रूप से संतुलित थी। आपातकाल के काले दिनों के बाद जब प्रेस को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, उसके बाद से NDTV पर इस तरह की कार्रवाई अपने आप में असाधारण घटना है। इसके मद्देनजर NDTV इस मामले में सभी विकल्‍पों पर विचार कर रहा है।”

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहली बार होगी किसी नेता की ‘एंट्री’, बीजेपी उपाध्यक्ष को दिया जाएगा पद

भारतीय जनता पार्टी के नेता अविनाश राय खन्ना को जल्द ही नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन (NHRC) का मेंबर चुना जा सकता है। ऐसा होता है तो अविनाश वह पहले नेता होंगे जो NHRC के सदस्य बनेंगे क्योंकि अबतक इसमें किसी राजनेता को शामिल नहीं किया जाता था। मिली जानकारी के मुताबिक, अविनाश को जिस पोस्ट पर रखा जा रहा वह पिछले दो साल से खाली पड़ी थी। अविनाश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। वह जम्मू कश्मीर में पार्टी के इंचार्ज भी हैं। वह इस साल के अप्रैल तक राज्य सभा के सदस्य भी रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि अगले कुछ दिनों में उनको सदस्य के रूप में चुन लिया जाएगा। गौरतलब है कि NHRC के मेंबर चुनने के लिए हाई लेवल मीटिंग होती है। उस मीटिंग की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। उनके अलावा मीटिंग में लोकसभा के स्पीकर, केंद्रीय गृहमंत्री, लोकसभा के विपक्षी नेता, राज्यसभा के विपक्ष के नेता और राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन शामिल होते हैं। सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने यह मीटिंग हुई थी। मीटिंग में अविनाश के अलावा कुछ और नामों पर चर्चा की गई थी लेकिन उनमें से अविनाश का नाम फाइनल किया गया। पैनल के एक सदस्य ने बताया कि अविनाश का नाम बिना किसी विरोध के फाइनल किया गया था।

सदस्य ने आगे बताया कि नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन के संविधान के मुताबिक भारत का कोई भी पूर्व चीफ जस्टिस NHRC का चेयरपर्सन चुना जा सकता है। इसके अलावा चार फुल टाइम मेंबर होते हैं। उनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस के अलावा दो और सदस्य शामिल होते हैं। लेकिन उन दो लोगों को मानव अधिकार से संबंधित ज्ञान होना चाहिए। NHRC के एक पूर्व सदस्य ने अविनाश का नाम सामने आने पर विरोध जाहिर किया। उन्होंने कहा, ‘किसी राजनेता के इसमें शामिल होने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन फिर भी उनको चुनना सवालों के घेरे में है। यह गलत संदेश देता है। क्या कमेटी को कोई ऐसा नहीं मिला जिसका राजनीति से कोई संबंध ना हो?’
खन्ना ने उनकी होशियारपुर सीट के रिजर्व हो जाने के बाद 2009 से चुनाव नहीं लड़ा है। पंजाब में शिरोमणि आकाली दल और बीजेपी की गठबंधन सरकार ने अविनाश को पंजाब राज्य के ह्यूमन राइट कमीशन का मेंबर बनाया था। हालांकि, उन्होंने 13 महीने बाद राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद ही उस पोस्ट से इस्तीफा दे दिया था।
गौरतलब है कि जब बीजेपी विपक्षा में थी तब उसकी तरफ से सरकार पर दवाब डाला जाता था कि वह किसी ऐसे को ना चुने जिसके राजनीति से संबंध हों। 2013 में तब के राज्यसभा के विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज Cyriac Joseph को ना चुनने के लिए कहा था। इसके लिए जेटली ने लिखित में दिया था कि जोफस कुछ राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के करीबी हैं। हालांकि, तब से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनकी बात नहीं मानी थी और जोसफ को चुन लिया गया था।

पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर रेंजर्स को हटा कर सेना तैनात की.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा '"यह नहीं कहा जा सकता कि पाकिस्तानी सेना ने रेंजर पोस्ट पर नियंत्रण कर लिया है, लेकिन लगातार पिछले 8-9 दिनों से गाड़ियों में सैनिकों को लाया जा रहा है।"
अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तनाव को और बढ़ाने वाली कार्रवाई के तहत पाकिस्तान जम्मू कश्मीर से सटे करीब 190 किलोमीटर की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अपने रेंजर्स को हटा कर सेना के जवानों को तैनात कर रहा है। पाकिस्तान की तरफ से इस तैनाती में बदलाव किए जाने की जानकारी सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने दी है। बीएसएफ और सरकार के शीर्ष सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि पाकिस्तानी सेना ने भारी संख्या में सेना को हथियार के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनात किया है।
भारतीय सुरक्षा बलों के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ‘”यह नहीं कहा जा सकता कि पाकिस्तानी सेना ने रेंजर पोस्ट पर नियंत्रण कर लिया है, लेकिन लगातार पिछले 8-9 दिनों से गाड़ियों में सैनिकों को लाया जा रहा है।” हालांकि इस बारे में अभी तक कोई खुफिया जानकारी नहीं मिल सकी है कि पाकिस्तानी सेना फिलहाल क्या कर रही है?

अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर ज्यादा से ज्यादा सैन्य मौजूदगी चिंता का विषय है। माना जा रहा है कि इस महीने के आखिर तक सीमा पर तनातनी देखने को मिल सकती है क्योंकि पाकिस्तानी सेना के चीफ राहिल शरीफ इस महीने रिटायर हो रहे हैं। शायद शरीफ की रणनीति है कि सीमा पर बढ़े तनाव को देखते हुए उन्हें सेवा विस्तार मिल जाय। गौरतलब है कि उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान की तरफ से सरहद पर लगातार सीज़फायर का उलंघन किया जा रहा है। रक्षा सूत्रों ने के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने कुल 99 बार सीजफायर का उल्लंघन किया है।

अल जजीरा के बाद एनडीटीवी पर एक्‍शन ले रही मोदी सरकार, मनमोहन राज के 10 साल में 20 चैनल हुए थे ऑफ एयर

एनडीटीवी इंडिया बैन: भारत में किसी टीवी चैनल को ऑफ एयर करने की यह पहली सिफारिश/आदेश नहीं है। पिछले 10 साल में प्रसारण के नियमों का उल्‍लंघन किए जाने पर 28 बार टीवी चैनलों को ऑफ एयर किया गया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पैनल के एनडीटीवी इंडिया न्‍यूज चैनल को एक दिन के लिए ऑफ एयर करने की सिफारिश (हालां‍कि एनडीटीवी का कहना है किे उसे आदेश मिल गया है।) पर काफी हंगामा हो रहा है। भारत में किसी टीवी चैनल को ऑफ एयर करने की यह पहली सिफारिश/आदेश नहीं है। पिछले 10 साल में प्रसारण के नियमों का उल्‍लंघन किए जाने पर 28 बार टीवी चैनलों को ऑफ एयर किया गया है। ज्‍यादातर बार ऐसा फैसला एडल्‍ट कंटेंट प्रसारित करने पर लिया गया। हालांकि पहले किसी घटना के कवरेज को लेकर किसी भारतीय न्‍यूज चैनल पर कार्रवाई नहीं हुई। एनडीटीवी इंडिया को ऑफ एयर करने की सिफारिश न्‍यूज चैनल के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई है। साल 2015 में सरकार ने अल जजीरा को भारत का गलत नक्‍शा दिखाने पर पांच दिनों के लिए ऑफ एयर कर दिया था। साल 2007 में जनमत टीवी को 30 दिन के लिए ऑफ एयर करने का ऑर्डर हुआ था। यह आदेश फर्जी स्टिंग ऑपरेशन दिखाने के चलते दिया गया था। इस मामले में चैनल ने अपनी गलती मानी थी और स्टिंग फर्जी साबित हुआ था।
पहले कब-कब हुई कार्रवाई: अब तक एएक्‍सएन और फैशन टीवी सबसे ज्‍यादा बार ऑफ एयर किए गए। यूपीए सरकार के समय भी नियम तोड़ने पर चैनल्‍स पर दंडात्‍मक कार्रवाई की गई थी। साल 2005 से 2013 के बीच यूपीए शासन के समय 20 चैनलों को ऑफ एयर किया गया था। इनमें से ज्‍यादातर पर एंडल्‍ट कंटेंट और न्‍यूडिटी दिखाने के चलते कार्रवाई हुई। साल 2007 से 2010 के बीच तीन बार एफटीवी को ऑफ एयर किया गया। पहली बार ‘मिडनाइट हॉट’ कार्यक्रम प्रसारित करने पर दो महीने के लिए उसका प्रसारण रोक दिया गया। इसके बाद टॉपलैस महिलाएं दिखाए जाने पर साल 2010 में उस पर नौ दिन का प्रतिबंध लगाया गया। साल 2013 में अश्‍लील कंटेंट दिखाने पर एफटीवी को 10 दिन का बैन झेलना पड़ा। इसके अलावा एएक्‍सएन और सिने वर्ल्‍ड चैनल भी ऑफ एयर किए गए थे। सूचना प्रसारण मंत्रालय के अनुसार टीवी चैनलों पर केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्‍स 1994 के तहत कार्रवाई की जाती है। ये नियम नग्‍नता और एडल्‍ट कंटेंट दिखाने पर रोक लगाते हैं।
एनडीटीवी इंडिया पर कार्रवाई क्‍यों: अगर एनडीटीवी इंडिया ऑफ एयर होता है तो आतंकी हमलों के दौरान गैर जिम्मेदारी से कवरेज करने और संवेदनशील मुद्दों को जगजाहिर करने के आरोप में यह पहली बार ऐसा एक्शन होगा। इस सिफारिश को लेकर सरकार को मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया की ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कई बड़े पत्रकार और आम लोग भी बैन के खिलाफ तीखी टिप्‍पणियां कर रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर एक तबका इसका समर्थन भी कर रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पैनल के अनुसार पठानकोट हमले के दौरान संवेदनशील जानकारी देने के चलते एनडीटीवी इंडिया पर कार्रवाई की गई है।
क्‍या कहना है चैनल का: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का आदेश प्राप्‍त हुआ है। बेहद आश्चर्य की बात है कि NDTV को इस तरीके से चुना गया। सभी समाचार चैनलों और अखबारों की कवरेज एक जैसी ही थी। वास्‍तविकता में NDTV की कवरेज विशेष रूप से संतुलित थी। आपातकाल के काले दिनों के बाद जब प्रेस को बेड़ियों से जकड़ दिया गया था, उसके बाद से NDTV पर इस तरह की कार्रवाई अपने आप में असाधारण घटना है। इसके मद्देनजर NDTV इस मामले में सभी विकल्‍पों पर विचार कर रहा है।’
एडिटर्स गिल्‍ड ने भी किया विरोध: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने एक प्रमुख हिंदी चैनल का प्रसारण एक दिन के लिए रोकने के एक अंतर-मंत्रालयी पैनल के अभूतपूर्व निर्णय की कड़ी आलोचना की है और इसे प्रेस की स्वतंत्रता का ‘‘प्रत्यक्ष उल्लंघन’’ करार दिया है। संपादकों के समूह ने मांग की कि इस आदेश को ‘‘तत्काल रद्द’’ किया जाए।

पठानकोट हमला: NDTV पर बैन तो लगा दिया, पर उन आतंकियों के अस्तित्व पर लगा प्रश्नचिन्ह अब तक नहीं हटा सकी है सरकार

सरकार ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयरबेस की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया।

सरकार ने हिंदी न्यूज चैनल एनडीटीवी इंडिया पर पठानकोट एयरबेस की संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में एक दिन का प्रतिबंध लगाया लेकिन सरकार जिन आतंकियों को उससे फायदा होने की बात कर रही है फिलहाल उसकी ही जांच पूरी नहीं हुई है कि असल में वे वहां थे भी या नहीं। दरअसल, सरकार का कहना है कि 4 जनवरी 2016 को अपने लाइव शो में एनडीटीवी के पत्रकार ने कहा था कि बिल्डिंग में दो आतंकी जिंदा हैं और उनके पास ही हथियारों का डिपो भी है। सेना और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड के जो जवान वहां आतंकियों से लड़ रहे थे उनका कहना था कि आतंकियों को नहीं पता था कि पास में ही हथियारों का डीपो है। ऐसे में अगर वे वहां तक पहुंच जाते तो उन्हें रोकना और पकड़ना काफी कठिन हो जाता। हालांकि, ऑपरेशन खत्म होने के बाद भी उस जली हुई बिल्डिंग में से कोई मृत शरीर बरामद नहीं किया गया जिसके वहां छिपे होने का शक था। वहां से कोई हथियार या किसी तरह की गोलियां भी नहीं मिली थीं। लेकिन उससे पहले हुए हमले में चार आतंकी जरूर मारे गए थे।
16 मई 2016 को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में फोरेंसिक जांच में मिले अवशेषों का हवाले देते हुए कहा था कि जो दो लोग बिल्डिंग में थे वे आतंकी थे। लेकिन 21 मई को फोरेंसिक टेस्ट के हवाले से एक खबर आई थी कि रिपोर्ट में मिले सेंपल से कुछ पता नहीं लगा था और वह जलने की वजह से पूरी तरह खराब हो गए थे। रिपोर्ट में बस पुरुष के DNA सैंपल मिले थे। उससे यह नहीं पता लगा था कि वह कितने लोगों के थे। जले अवशेष से पता चला था कि उसमें कई व्यक्तियों से आनुवंशिक सामग्री शामिल थी।
वहीं एनडीटीवी की जिस रिपोर्ट को लेकर उसपर कार्रवाई हो रही है उसके जैसी ही रिपोर्ट कई न्यूज चैनल 2 जनवरी से ही दिखा रहे थे। साथ ही गूगल मैप पर भी पठानकोट एयरफोर्स बेस की ‘अच्छी और साफ’ तस्वीरें थी जिसमें उन लोकेशन को साफ देखा जा सकता था जहां पर भारतीय एयरक्राफ्ट खड़े थे। ऐसे में आतंकी जानकारी के लिए किसी न्यूज चैनल पर निर्भर हों इसके आसार कम ही लगते हैं।

प्रियंका गांधी के चलते कांग्रेस से नाता तोड़ सकते हैं प्रशांत किशोर

रणनीतिकार प्रशांत किशोर आने वाले वक्त में कांग्रेस से नाता तोड़ सकते हैं। उत्तरप्रदेश में चुनाव की तैयारियों को लेकर उनकी पार्टी के कुछ लोगों से नोकझोंक होती रहती है।

रणनीतिकार प्रशांत किशोर आने वाले वक्त में कांग्रेस से नाता तोड़ सकते हैं। उत्तरप्रदेश में चुनाव की तैयारियों को लेकर उनकी पार्टी के कुछ लोगों से नोकझोंक होती रहती है। इतना ही नहीं पंजाब में भी कई कांग्रेसी प्रशांत के खिलाफ हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि राहुल गांधी से अच्छे रिलेशन होने के बावजूद प्रशांत किशोर कांग्रेस से अपनी राहें अलग कर सकते हैं। सूत्रों से इंडियन एक्सप्रेस को पता लगा है कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह भी प्रशांत से खुश नहीं हैं। यूपी में बहस का मुद्दा प्रियंका का कैंपेन प्लान है। एक तरफ किशोर प्रियंका का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर और आक्रामक तरीके से करना चाहते हैं लेकिन पार्टी के लोग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। वहीं पंजाब में अमरिंदर और किशोर का काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है।

वहीं पंजाब में प्रशांत के खिलाफ विरोध अलग तरह का है। वहां कांग्रेस के समर्थक और अमरिंदर सिंह प्रशांत से इसलिए नाराज हैं क्योंकि प्रशांत ने कांग्रेस से निकाले गए जगमीत बरार और बीर देवेंद्र सिंह से मुलाकात की थी। अमरिंदर सिंह ने उस वक्त सवाल उठाते हुए कहा भी था कि प्रशांत किशोर उनसे मीटिंग करने वाले कौन होते हैं ? हालांकि, कांग्रेस के अंदर ही कुछ लोगों को इस बात का भी डर है कि अगर प्रशांत किशोर ने चुनाव से पहले कांग्रेस का साथ छोड़ दिया तो लोगों तक गलत संदेश जाएगा।

हद दर्जे तक बढ़ा भारत-पाक का तनाव, राजदूतों को बुला सकते हैं वापस

हद दर्जे तक बढ़ा भारत-पाक का तनाव, राजदूतों को बुला सकते हैं वापस

इस्लामाबाद। शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि भारत और पाकिस्तान अपने-अपने राजदूतों को अस्थाई रुप से वापस बुला सकते हैं। रिपोर्ट में जासूसी प्रकरण पर ताजा राजनयिक तनातनी के मद्देनजर भारत और पाकिस्तान संबंधों में ताजा तल्खी का संकेत देते हुए अपने उच्चायुक्तों को अस्थायी रूप से वापस बुला सकते हैं और दोनों देश एक दूसरे के मिशनो में राजनयिक स्टाफ की संख्या कम कर सकते हैं की बात कही गई।‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ ने कहा कि तनातनी की ताजा स्थिति पिछले सप्ताह उस समय शुरू हुई जब नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग के एक कर्मचारी को पुलिस ने जासूसी संबंधी आरोपों को लेकर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
समाचार पत्र ने कहा कि संबंधों में इस ताजा तल्खी के मद्देनजर दोनों पड़ोसी देश अपने राजनयिक स्टाफ की संख्या कम कर सकते हैं। कथित जासूसी गतिविधि के मामले में दोनों देशों द्वारा जैसे को तैसे की कार्रवाई के तहत राजनयिक स्टाफ का नाम लेने से तनाव गहरा गया। पाकिस्तानी उच्चायोग में वीजा अधिकारी के तौर पर काम कर रहे महमूद अख्तर को बाद में भारत से निष्कासित कर दिया गया था।

समाचार पत्र ने कहा कि हालांकि भारत ने नई दिल्ली की सरकार द्वारा बल प्रयोग करके अख्तर से प्राप्त किए गए बयान का इस्तेमाल करके अन्य पाकिस्तानी कर्मियों को भी फंसाया। मीडिया में ऐसे कम से कम छह अधिकारियों की पहचान लीक की गई जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ गई। इस कदम के कारण पाकिस्तान को उन्हें नई दिल्ली से वापस बुलाना पड़ा। उसने कहा कि जैसे को तैसे की कार्रवाई प्रतीत होने वाले कदम के तहत पाकिस्तान ने गुरुवार को दावा किया कि इस्लामाबाद में भारत के उच्चायोग में तैनात आठ अधिकारी रॉ एवं आईबी के एजेंट है। इस खुलासे के बाद नई दिल्ली के पास इन अधिकारियों को वापस बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

समाचार पत्र ने लिखा कि ताजा घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि नई दिल्ली में तैनात कुछ पाकिस्तानी अधिकारियों की पहचान का खुलासा करके भारत ने एक समझ का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया कि अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्ष जानते हैं कि कुछ अधिकारी गोपनीय रूप से काम करते हैं और वे पूर्ण आधिकारिक जानकारी के साथ ऐसा करते हैं। अधिकारी ने कहा कि भारत ने जो किया वह कल्पना से परे है। उन्होंने कहा कि भारत के इस कदम से दोनों देशों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।
समाचार पत्र ने कहा कि अधिकारी ने कहा कि इस विवाद का तत्काल असर यह पड़ सकता है कि दोनों देश कुछ समय के लिए उच्चायुक्तों को वापस बुला लें। अधिकारी ने कहा कि एक अन्य प्रभाव यह हो सकता है कि स्थिति सामान्य होने तक एक दूसरे के देश में तैनात राजनयिक स्टाफ की संख्या को कम कर दिया जाए।

नरेन्द्र मोदी पर लालू यादव का हमला, बोले- लोकलाज को दरकिनार कर कौन सा लोकतंत्र गढ़ रहे हो

लालू ने ट्वीट किया, "मोदीजी, कौन सा लोकतंत्र गढ़ रहे हो? लोकलाज से लोकराज चलता है। लोकतंत्र में लोकशर्म को दरकिनार नही कर सकते। देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं।"


राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जोरदार हमला बोला है और कहा है कि उनकी सरकार सिर्फ सुर्खियां बटोरनेवाली सरकार बनकर रह गई है। आरजेडी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बीजेपी के शासन में आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं। लालू ने ट्वीट किया, “मोदीजी, कौन सा लोकतंत्र गढ़ रहे हो? लोकलाज से लोकराज चलता है। लोकतंत्र में लोकशर्म को दरकिनार नही कर सकते। देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं।” उन्होंने लगातार पांच ट्वीट किए हैं। अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “देश में फासीवाद दस्तक दे चूका है। संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्य खतरे में है। सरकार के खिलाफ बोलने वालों को गिरफ्तार और बैन किया जा रहा है।”
पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल के परिजनों से मुलाकात करने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को हिरासत में लेने के एक दिन बाद लालू ने ये ट्वीट किए हैं। लालू प्रसाद ने अपने ट्वीट में कहा कि जो भी लोग मोदी सरकार के खिलाफ बोलते हैं उसे सरकार गिरफ्तार करा देती है। उन्होंने मोदी सरकार को हेडलाइन्स और मार्केटिंग गवर्नमेंट करार दिया है। उन्होंने लिखा है, “संविधान की धज्जियाँ उड़ा रही है केंद्र सरकार। लोकतांत्रिक रूप से चुने हुए राज्य के मुखिया को पीड़ितों से मिलने के कारण गिरफ्तार किया जा रहा है।” लालू ने लिखा है, “अभिव्यक्ति व गैरसरकारी संस्थाओं की आजादी को जिसने भी कुचलने का प्रयास किया उनको न्यायप्रिय जनता ने क्या सबक सिखाया, इनको भूलना नही चाहिए।

लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी हिरासत में लेने की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल एक राज्य के चुने हुए मुख्यमंत्री हैं। उन्हें किसी से भी मिलने का संवैधानिक अधिकार है। मोदी सरकार को संविधान का सम्मान करना चाहिए।

चीन के साथ बढ़ी तनातनी, इंडियन एयरफोर्स ने सीमा से सिर्फ 29 किमी दूर लैंड कराए लड़ाकू विमान

चीन और भारतीय सैनिकों के बीच लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर बुधवार से ही गतिरोध कायम है।

लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव के बीच, भारतीय वायुसेना ने गुरुवार को अपने लड़ाकू विमानों को चीनी सीमा के नजदीक लैंड कराया है। एयरफोर्स ने सी-17 ग्‍लोबमास्‍टर एयरक्राफ्ट को मेचुका के एडवांस्‍ड लैंडिंग ग्राउंड पर लैंड कराया। यह जगह पश्चिमी हिमालय में लद्दाख से लेकर पूर्वी हिमालय में अरुणाचल प्रदेश तक फैसली 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा से सिर्फ करीब 29 किलोमीटर दूर है। विमान ने 4,200 फुट के रवने पर लैंड किया जो भारतीय वायुसेना की देश के दुर्गम इलाकों पर पहुंच की क्षमता को प्रदर्श‍ित करता है। मेचुका अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित है। एयरफोर्स का कहना है कि इतनी ऊंचाई से दुर्गम इलाकों- घाटियों और ऊंची पहाड़‍ियों में सैनिकों को ले जाने में मदद मिलती है। लद्दाख और अरुणाचल में ऐसे कई लैंडिंग ग्राउंड्स बनाए गए हैं। भारतीय वायुसेना ने यह कार्रवाई तब की है, जब बुधवार को भारत-चीन के बीच लद्दाख में तनाव की खबर आई है।

चीन और भारतीय सैनिकों के बीच लद्दाख की बर्फीली ऊंचाइयों पर बुधवार से ही गतिरोध कायम है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान उस क्षेत्र में घुस गए जहां मनरेगा योजना के तहत सिंचाई नहर का निर्माण किया जा रहा था और उन्होंने कार्य को रोक दिया। यह घटना बुधवार दोपहर देमचोक सेक्टर में हुयी जो लेह से करीब 250 किलोमीटर पूर्व में है। वहां महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के तहत एक गांव को ‘‘हॉट स्प्रिंग’’ से जोड़ने के लिए काम चल रहा था।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि करीब 55 चीनी सैनिक वहां पहुंचे और आक्रामक तरीके से काम रोक दिया। इसके बाद सेना तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान वहां पहुंचे और उन्होंने चीनी सैनिकों की ज्यादती को रोका। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने बैनर निकाल लिये है और वे वहां डटे हुए हैं । सेना तथा आईटीबीपी के जवान चीनी सैनिकों को एक इंच आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं जबकि पीएलए का दावा है कि यह क्षेत्र चीन का है।

मार गिराए गए सिमी सदस्‍य के बेटे का दावा-हमें पहले ही उठा ले गई थी पुलिस, 10 घंटे बाद कहा-तुम्‍हारे पिता का हो गया है एनकाउंटर

पुलिस एनकाउंटर में मारे गए आठ सिमी सदस्यों में से पांच खंडवा के रहने वाले थे।

भोपाल जेल से भागे सिमी के आठ सदस्यों के एनकाउंटर के बाद खंडवा के रहने वाले पांच कैदियों का अंतिम संस्कार मंगलवार रात को किया गया। अमजद खान, जाकिर हुसैन, मोहम्मद सलिक, शेख मोहम्मद और अकील खिलजी सोमवार तड़के अन्य तीन के साथ मिलकर भोपाल जेल से फरार हो गए थे, उसके बाद पुलिस ने उन्हें एनकाउंटर में मार गिराया। बुधवार को खंडवा के रहने वाले चार सिमी सदस्यों के वकील जावेद चौहान ने कहा कि हमें पुलिस से अभी तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। चौहान ने कहा, ‘हमारे पास शवों को दफनाने से पहले की वीडियो रिकोर्डिंग है, अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ की जाती है तो हम वीडियो को सबूत के तौर पर दिखा सकते हैं।’ बुधवार को दो सिमी सदस्यों के रिश्तेदारों ने दावा किया कि एनकाउंटर से पहले उन्हें आंखों पर पट्टी और हाथ-पैर बांधकर इंदौर के पास किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया था। वहां पर उनसे कथित रूप से झूठा बयान कबूल करने के लिए कहा गया।

अकील खिजली के 22 वर्षीय बेटे मोहम्मद जलील ने दावा किया कि सुबह 4.30 बजे साधारण कपड़ों में कुछ लोग उसके घर आए और उसे उनके साथ चलने के लिए कहा। उसने बताया कि उसे जेल तोड़ने के बारे में नहीं बताया गया और ना ही यह बताया गया कि उसे हिरासत में क्यों लिया गया है। जलील ने दावा किया, ‘मेरी आंखों पर पट्टी बांधी हुई थी और हाथ-पैर भी बांध दिए गए थे। इसके बाद मुझे कार में डाला गया। मुझे करीब 10 घंटे हिरासत में रखा गया। रात में 10.30 मुझे मेरे पिता के एनकाउंटर में मारे जाने की सूचना दी गई और अंतिम संस्कार में जाने के लिए मुझे छोड़ दिया गया।’ जलील के मुताबिक उससे एक ही सवाल बार-बार पूछा जा रहा था, ‘एक बारी उसको यूज करना, उसको फेंक देना, और डरना मत’ इसका मतलब क्या है। उनका कहा था कि जब मैं मेरे पिता से जेल में मिलता था तो इसका यूज करता था और यह मेरा कॉडवर्ड था। हालांकि, मैंने ऐसा कभी नहीं कहा।’