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अखिलेश यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा- गांववालों को डिजीटल ट्रांजेक्शन कौन सिखाएगा?

लखनऊ में एक समारोह के दौरान अखिलेश यादव ने कहा, 'आपको (मोदी) बताना चाहिए कि डिजिटल इंडिया के लिए कैसी तैयारियां की गई थीं?'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कैशलेस सोसाइटी’ की वकालत पर सवाल खड़े करते हुए रविवार को कहा कि गांवों में रहने वाली आधी से ज्यादा आबादी को लेन-देन के इन डिजिटल तरीकों के बारे में बताने के लिये केंद्र सरकार ने कोई तैयारी नहीं की है। अखिलेश ने ‘लखनऊ हेरिटेज जोन’ के उद्घाटन के अवसर पर कैशलेस सोसाइटी बनाने पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जोर दिये को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘आप (मोदी) बताएं कि डिजिटल इंडिया के लिये आपकी क्या तैयारी है। कैशलेस लेन-देन करना कौन सिखाएगा। इसे गांव तक कैसे पहुंचाएंगे। नौजवान तो फिर भी इसे कर लेते हैं लेकिन बाकी लोगों का क्या।’
उन्होंने कहा, ‘हमने गांवों तक लैपटॉप पहुंचाया है। हमारी स्मार्टफोन योजना के लिये एक करोड़ पंजीकरण हो चुके हैं। आप (मोदी) बताइये, आप क्या तैयारी कर रहे हैं। आपने पूरे देश और समाज को हिला दिया। आपने गुल्लकें तुड़वा दीं। महिलाओं की जमा पूंजी बाहर करवा दी। याद रहे, जो सरकार जनता को दुख देती है, जनता उस सरकार को हटा देती है।’
मुख्यमंत्री ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को विकास के मामले में मुकाबले की चुनौती देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव होने वाला है, मुकाबला कर लीजिये, हमारा ना तो काम में मुकाबला है और ना ही नेतृत्व में। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव के मद्देनजर भाजपा कई यात्राएं निकल रही है। मैं पूछता हूं कि वे बताएं कि पिछले ढाई साल के दौरान केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिये क्या किया है? अखिलेश ने मायावती की अगुवाई वाली बसपा पर भी तंज करते हुए कहा, ‘वो पत्थर वाली सरकार बताए कि उसने अपने राज में जनता के लिये क्या काम किये?’
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की समाजवादी सरकार ने लोगों को खुशी दी है। उसके फैसले आम लोगों के बीच पहुंचे हैं। अगर आप चाहते हैं कि लगातार विकास और तरक्की के काम हों तो प्रदेश में एक बार फिर सपा को सरकार बनाने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ना सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में काम किया है। समाजवादियों ने हर वर्ग को जोड़ने का काम किया है। यहां का विकास ही खुशहाली लाएगा। इससे व्यापार बढ़ेगा और प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। अखिलेश ने पुराने लखनऊ में बने हेरिटेज जोन के काम में लगे अधिकारियों की सराहना की और कहा कि इससे पुराने शहर की खूबसूरती उसके असल रूप में दिखेगी।

हार्ट ऑफ एशिया: भारत-पाकिस्तान तनाव पर बोले सरताज अज़ीज़, किसी देश पर दोष मढ़ना आसान है

अपनी धरती से आतंकवाद पनपने को लेकर तीखी आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने रविवार (4 दिसंबर) को पलटवार करते हुए कहा कि किसी एक देश पर दोषारोपण करना ‘सरल’ है। उन्होंने इसके साथ ही ‘हार्ट ऑफ एशिया’ (एचओए) सम्मेलन में भारत-पाक संबंधों के तनाव का मुद्दा उठाया। अजीज ने जोर दिया कि नियंत्रण रेखा पर ‘तनाव’ के बावजूद उनका बैठक में शामिल होना अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान की पूरी प्रतिबद्धता का सबूत है। उन्होंने नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले दक्षेस सम्मेलन के रद्द होने पर अप्रसन्नता जतायी और क्षेत्रीय सहयोग के लिए इसे झटका बताया। उन्होंने जम्मू कश्मीर के मुद्दे का जिक्र नहीं किया।

अजीज ने कहा कि अफगानिस्तान जिन गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, पाकिस्तान उससे अवगत है। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम उनकी नजर में लगातार हिंसा और आतंकवादी कृत्यों में दर्जनों लोगों की जान जा रही है। इसे सामूहिक प्रयासों के जरिए प्रभावी तरीके से और हल करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति काफी जटिल है। हिंसा में हाल में वृद्धि को लेकर किसी एक देश पर दोषारोपण करना सरल है। हमें एक वस्तुपरक और व्यापक रूख रखने की जरूरत है।’ अजीज की इस प्रतिक्रिया के पहले भारत और अफगानिस्तान ने आतंकवाद का समर्थन करने और उसे प्रायोजित करने के लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा तथा आतंकवादियों के साथ साथ उनके आकाओं के खिलाफ ‘ठोस कार्रवाई’ का आह्वान किया।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक मंत्री स्तरीय सम्मेलन का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। गनी ने देश के खिलाफ ‘अघोषित युद्ध शुरू करने के लिए’ पाकिस्तान पर सीधा हमला बोला और पाक-प्रायोजित आतंकवाद के लिए एशियाई या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए जाने की मांग की। अजीज ने सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा, ‘भारत के साथ कामकाजी सीमा और नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ने के बावजूद कार्यक्रम में मेरी भागीदारी अफगानिस्तान तथा क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान की पूरी प्रतिबद्धता का सबूत है।’ उन्होंने अफगान मुद्दे को राजनीतिक बातचीत के जरिए हल करने पर जोर देते हुए कहा, ‘मुझे आज इस उद्देश्य की दिशा में सार्थक बातचीत की उम्मीद है।’

अजीज ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नवंबर में इस्लामाबाद में आयोजित दक्षेस शिखर सम्मेलन का स्थगन इन प्रयासों के लिए झटका था और क्षेत्रीय सहयोग की भावना को कमजोर किया। उन्होंने कहा कि दक्षेस न सिर्फ क्षेत्रीय सहयोग के लिए बल्कि संबंधों में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण मंच है। पाकिस्तान से पनपने वाले सीमा पार आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए भारत दक्षेस सम्मेलन से हट गया था। अफगानिस्तान और दक्षेस के अन्य देशों ने भी इस आधार पर आठ सदस्यीय बैठक को रद्द करने की मांग की थी कि क्षेत्र में आतंकवाद को शह दी जा रही है।

पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठनों द्वारा भारत में कई आतंकवादी हमलों तथा करीब दो महीने पहले नियंत्रण रेखा के पार भारत के लक्षित हमले को लेकर दोनों देशों के संबन्धों में तनाव में वृद्धि के बीच अजीज शनिवार (3 दिसंबर) रात यहां पहुंचे। अजीज ने कहा कि अफगान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत के लिए शांति प्रक्रिया का अभी तक सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है और पाकिस्तान शांति वार्ता को सुगम बनाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमारी नजर में, अफगान संघर्ष का कोई सैन्य हल नहीं है और हमारे सभी प्रयास ‘अफगान नेतृत्व में, अफगान प्रक्रिया’ के जरिए राजनीतिक रूप से बातचीत के माध्यम से हल हासिल करने के लिए होने चाहिए।’

अजीज ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ अफगानिस्तान के संपर्क को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान हार्ट ऑफ एशिया-इंस्ताबुल प्रक्रिया को काफी महत्व देता है। उन्होंने कहा कि अफगान सुरक्षा बल आतंकवादी हमलों का जवाब देने में अपनी जमीन पर दृढ़ता और बहादुरी से डटे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 2020 तक सुरक्षा और आर्थिक विकास क्षेत्रों में अफगानिस्तान को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहरायी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और लोग अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अफगानिस्तान के लोग और वहां की निर्वाचित सरकार के साथ पूरी तरह से एकजुटता में खड़े हैं।

अजीज ने कहा, ‘इस मकसद को हासिल करने के लिए हम जो कर सकते हैं, हम करेंगे।’ आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए अधिक क्षेत्रीय संपर्क पर जोर देते हुए अजीज ने कहा कि पाकिस्तान बढ़ती क्षेत्रीय परिवहन आवश्यकतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय रेल, सड़क और ऊर्जा पारेषण नेटवर्क बना रहा है। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के जरिए अत्याधुनिक आधारभूत ढांचे पर जोर है। अजीज ने उम्मीद जतायी कि बातचीत सार्थक होगी और अफगानिस्तान में स्थायी शांति तथा स्थिरता के लिए प्रयासों पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति और स्थिरता हमारा साझा उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि 2017 में ‘हार्ट ऑफ एशिया’ के सातवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी के लिए अजरबैजान के आमंत्रण का भी पाकिस्तान स्वागत करता है और सम्मेलन में उसकी सक्रिय भागीदारी की उम्मीद करता है।

पीएम मोदी की रैली के लिए मुस्लिम किसान ने दी चार बीघा जमीन, कुर्बान की अरहर की फसल

पीएम मोदी की रैली के लिए 120 बीघा जमीन की जरूरत थी। इस पर भाजपा के स्‍थानीय नेताओं ने विश्‍वरिया गांव के किसानों से बात की।

उत्‍तर प्रदेश के बहराइच में किसानों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के लिए जमीन देने की खबर है। इसके लिए किसानों ने अपनी अधपकी फसल को काटने की तैयारी भी कर ली है। खबर के अनुसार पीएम मोदी की रैली के लिए 120 बीघा जमीन की जरूरत थी। इस पर भाजपा के स्‍थानीय नेताओं ने विश्‍वरिया गांव के किसानों से बात की। किसान रैली के लिए जमीन देने को राजी हो गए। इन किसानों में एक मुस्लिम किसान भी शामिल है। उसने चार बीघा जमीन दी है। पीएम मोदी की यह रैली 11 दिसंबर को होनी है। किसानों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को ठीक कर रहे हैं। वे यहां आ रहे हैं तो फसल दान कर उनका स्‍वागत करेंगे। देश अगर मजबूत होगा तो फसल अगले साल फिर पैदा कर लेंगे।
मोदी की रैली के लिए जमीन देने वाले मुस्लिम किसान का नाम सहजादे है। सहजादे ने चार बीघा जमीन में अरहर की फसल बोई थी। वे अब इस फसल को कटवा रहे हैं। उन्‍होंने स्‍थानीय मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री देश से भ्रष्टाचार और महंगाई मिटाने के लिए कमर कसे हुए हैं। ऐसे में वह अपनी चार बीघा अरहर की फसल प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए क्यों नहीं कटवा सकता। प्रधानमंत्री की रैली नानपारा-बहराइच मार्ग पर बेगमपुर के करीब होगी। इसके लिए जिला प्रशासन और भाजपा नेता तैयारियों में जुटे हुए हैं। प्रस्‍तावित रैली स्‍थल को प्रशासन ने मंजूरी दे दी है। जिला कलेक्‍टर, एसपी, डीआईजी भी रैली स्‍थल का मुआयना कर चुके हैं।

9 साल की बेटी को बचाने के लिए भालू के सामने लेट गई मां

कांकेर। नौ वर्षीय बिटिया को बचाने मां भालू के सामने लेट गई। हमला कर भालू ने उसे घायल कर दिया, इसके बाद गांव के एक अन्य घर में घुसकर दूसरी महिला पर हमला बोल दिया। हो-हल्ला मचने पर जब लोग दौड़े तो भालू पहाड़ी की ओर भाग गया। घायल महिलाओं का जिला चिकित्सालय में इलाज किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार शहर के भंडारीपारा निवासी अनिता यादव पति रूपेश यादव 30 बेटी गौरवी के साथ शनिवार सुबह छह बजे शौच के लिए नदी की ओर गई थी। इसी दौरान अनिता की नजर सामने आ रहे भालू पर पड़ी जो गौरवी की ओर बढ़ रहा था। अनिता दौड़कर बेटी के पास पहुंची और साथ लेकर भागने लगी।

गौरवी तेजी से भाग नहीं पा रही थी और भालू उसके बहुत करीब आ गया था। इस पर अनिता भालू के सामने लेट गई ताकि गौरवी को भागने का मौका मिल जाए। भालू ने अनिता पर हमला कर घायल कर दिया। तब तक गौरवी दूर निकल गई थी।

इसके बाद भालू भंडारीपारा के एक घर में घुसा और राधा निषाद पति बिरसुराम निषाद 40 पर हमला कर दिया। शोर मचाने पर भालू गढ़िया पहाड़ी की ओर भाग गया। अनिता ने बताया कि बेटी को बचाने उसे कुछ नहीं सूझा इसलिए भालू के सामने लेट गई।(नई दुनिया से )

कश्मीर के एक्सपर्ट को पाकिस्तान ने बनाया नया आर्मी चीफ, जानिए ले. जनरल कमर जावेद बाजवा का प्रोफाइल

लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा को पाकिस्तान आर्मी का नया चीफ बनाया गया है।
लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा को पाकिस्तान आर्मी का नया चीफ बनाया गया है। वह मंगलवार (29 नवंबर) से चार्ज लेंगे। उस दिन जनरल राहिल शरीफ अपनी सर्विस से रिटायर हो जाएंगे। जावेद बाजवा बलूच रेजिमेंट के हैं और फिलहाल रावलपिंडी के जनरल हेडक्वाटर में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ ट्रेंनिंग एंड एवेल्यूशन के पद पर काम कर रहे थे। बाजवा को कश्मीर एक्सपर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कश्मीर बॉर्डर के आस-पास के इलाकों में उनकी काफी बार तैनाती हुई है। उन्होंने 10 कोर का भी नेतृत्व किया है जो नियंत्रण रेखा के क्षेत्रों का जिम्मा संभालती है। मेजर जनरल के तौर पर बाजवा ने सेना की उत्तरी कमान का नेतृत्व किया। 10 कोर में लेफ्टिनेंट कर्नल के तौर पर भी सेवा दी। 10 कोर शियाचिन ग्लेशियर और उत्तरी कश्मीर पर नजर रखने का काम करती थी। प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शनिवार (26 नवंबर) को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल जुबैर हयात को फोर-स्टार जनरल के रूप में पदोन्नति देकर सीजेसीएससी नियुक्त किया। वह सबसे वरिष्ठ सेवारत सैन्य अधिकारी हैं।

माना जा रहा है कि बाजवा की न्युक्ति से शायद ही भारत को कोई खास फर्क पड़े। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स को मुताबिक, लेफ्टिनेंट जनरल बाजवा अतिवाद को भारत से ज्यादा पाकिस्तान के लिए खतरा मानते हैं। पाकिस्तानी आर्मी के एक सीनियर अधिकारी जो लेफ्टिनेंट जनरल बाजवा के साथ 10 कोर में तैनात थे उन्होंने कहा कि बाजवा चर्चाओं में रहना पसंद नहीं करते और अपने सैनिको के साथ काफी अच्छे से जुड़े हुए हैं। बाजवा का एक और भारतीय भी कनेक्शन है। ब्रिगेडियर के तौर पर उन्होंने यूएन के शांति बनाने के कांगो मिशन में हिस्सा लिया था। वह कांगो में पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह के साथ संयुक्त राष्ट्र के मिशन में ब्रिगेड कमांडर भी रहे। सिंह ने वहां एक डिवीजन कमांडर के तौर पर सेवा दी थी। वहीं बाजवा ब्रिगेड कामंडर थे।

जनरल शरीफ को 2014 में आर्मी चीफ बनाया गया था। पिछले 20 सालों में शरीफ पहले ऐसे पाकिस्तानी कमांडर बने जो समय पर अपने पद से हट गए। उनसे पहले के लगभग सभी आर्मी चीफ ने तीन साल के बाद एक्सटेंशन ले लिया था।

न्यूयॉर्क में 1960 में फिडेल कास्त्रो को होटलों ने नहीं दिया था कमरा, यूएन कैंपस में ही तंबू गाड़ने की धमकी के बाद महासचिव ने कराया था इंतजाम

भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब मैं कास्त्रो से मिला तो उन्होंने मुझसे कहा, "क्या आप को पता है कि जब मैं न्यूयार्क के उस होटल में रुका तो सबसे पहले मुझसे मिलने कौन आया?

सितंबर 1960 में संयुक्त राष्ट्र की 15वीं वर्षगांठ समारोह में जब दुनिया भर के बड़े नेताओं का न्यूयॉर्क में जमावड़ा लगा था, तब फिदेल कास्त्रो भी न्यूयार्क पहुंचे थे लेकिन उन्हें वहां के किसी भी होटल ने ठहरने के लिए कमरा नहीं दिया था। इससे उन्हें बहुत बड़ा धक्का लगा था कि वहाँ का कोई होटल उन्हें अपने यहाँ रखने के लिए तैयार नहीं है। एक दिन तो वो क्यूबा के दूतावास में रहे लेकिन अगले दिन उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव डैग हैमरशोल्ड से मुलाकात की और कहा था कि ये आप की जिम्मेदारी है कि मेरे और मेरे प्रतिनिधिमंडल के रहने की व्यवस्था करें वर्ना मैं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के प्रांगण में ही तंबू डाल कर रहने लगूंगा। इसके बाद यूएन महासचिव की पहल पर अगले दिन न्यूयॉर्क का टेरेसा होटल ने उन्हें अपने यहाँ कमरा दिया था।

भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जब मैं कास्त्रो से मिला तो उन्होंने मुझसे कहा, “क्या आप को पता है कि जब मैं न्यूयार्क के उस होटल में रुका तो सबसे पहले मुझसे मिलने कौन आया? महान जवाहर लाल नेहरू। मेरी उम्र उस समय 34 साल थी। अंतरराष्ट्रीय राजनीति का कोई तजुर्बा नहीं था मेरे पास। नेहरू ने मेरा हौसला बढ़ाया जिसकी वजह से मुझमें गजब का आत्मविश्वास जगा। मैं ताउम्र नेहरू के उस एहसान को नहीं भूल सकता।”

नटवर सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस में लिखे आलेख में कहा है, “फिदेल कास्त्रो और क्यूबा दोनों एक-दूसरे के पर्याय के रूप में जाने जाते थे। उनकी मौत पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी क्षति है। वो एक ऐसी शख्सियत थे जिन्हें पूरी दुनिया जानती थी। फिदेल कास्त्रो साल 1979 में हवाना में हुए 6ठे शिखर सम्मेलन के अध्यक्ष थे। 1983 में इंदिरा गांधी ने क्यूबा के इस महान नेता से पदभार संभाला थे, तब मैं 7वें शिखर सम्मेलन का महासचिव था।”

नटवर सिंह ने लिखा है, “आखिरी बार मैं उनसे सितंबर 1988 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ हवाना में मिला था। दोनों नेताओं के बीच मुलाकात और बातचीत करीब 6 घंटे तक चली थी। कास्त्रो राजीव गांधी की शख्सियत, स्टाइल और उन पर पड़े प्रभावों के बारे में हमलोगों के सामने रख रहे थे। यह मेरे लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर एक आश्चर्यजनक ट्यूशन था। हालांकि, यह एकतरफा था लेकिन कास्त्रो के प्रभावशाली व्यक्तित्व ने इसे ठोस बना दिया था।” नटवर कहते हैं कि भारत हमेशा से फिदेल कास्त्रो को सम्मान और स्नेह के भाव से देखता रहेगा।

बैंक खाता नहीं है, फिर भी मिलेगा डेबिट कार्ड

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से सभी बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों के पास बैंक खाता नहीं है लेकिन उनके पास आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र है तो उन्हें प्री रिचार्ज डेबिट कार्ड मुहैया कराया जाय।
500 और 1000 रुपये की नोटबंदी के बाद सरकार प्लास्टिक मनी को बढ़ावा देने के सभी विकल्पों पर काम कर रही है। इसी के तहत अगर आपके पास बैंक खाता नहीं है तब भी बैंक आपको डेबिट कार्ड देगा। सरकार के निर्देश पर जल्द ही सभी बैंक यह सुविधा उपलब्ध कराएंगे। इसे प्री रिचार्ज डेबिट कार्ड सेवा का नाम दिया गया है। इस कार्ड में एक तय राशि तक ही पैसा जमा होगा। लोग इसका इस्तेमाल प्लास्टिक मनी के तौर पर कर सकेंगे।
केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से सभी बैंकों को यह निर्देश दिया गया है कि जिन लोगों के पास बैंक खाता नहीं है लेकिन उनके पास आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र है तो उन्हें प्री रिचार्ज डेबिट कार्ड मुहैया कराया जाय। मंत्रालय की तरफ से यह भी कहा गया है कि अगर किसी व्यक्ति के परिवार में किसी सख्स के पास बैंक खाता है तो उससे इस कार्ड को लिंक कर दिया जाय। इसके लिए कार्ड प्राप्त करने वाले व्यक्ति को एक आवेदन देना होगा। इसमें एक सीमा तक राशि तय कर दी जाएगी।
एक अधिकारी के मुताबिक, अगर किसी के पिता या माता या किसी अन्य पारिवारिक सदस्य के नाम से कोई खाता है तो उसका कार्ड उस खाते से लिंक कर दिया जाएगा। अगर इस तरह का कोई खाता नहीं है तो उसे आधार कार्ड या कोई भी वैध पहचान पत्र के साथ आवेदन करना होगा। जैसा कि बैंक क्रेडिट कार्ड देते समय प्रक्रिया का पालन करते हैं।
मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक इस योजना के तहत एक खाते पर अधिकतम पांच कार्ड ही जारी किए जा सकेंगे। इसके साथ ही नाबालिगों को भी प्री रिचार्ज डेबिट कार्ड देने की मंजूरी दी गई है। हालांकि, कार्ड के रिचार्ज की अधिकतम या न्यूनतम सीमा अबी तय नहीं की गई है लेकिन इसे बाद में तय किया जाएगा

नोटबंदी के चलते बिकने से बची महिला, 20 लाख में भाई ने ही किया था सौदा

महिला के भाई ने एजेंट की साथ सौदा किया था कि 20 लाख रुपए कैश दिया जाएगा, लेकिन एजेंट नकदी का इंतजाम नहीं कर पाया।
केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद देशभर के लोग पैसे की किल्लत से प्रभावित हुए हैं। जहां एक धड़ा सरकार के इस फैसले के फायदे गिना रहा है, वहीं कई लोग इसके विरोध में भी हैं। लेकिन राजस्थान के अलवर में सरकार के इस फैसले का फायदा एक महिला को जरूर हुआ है। यह नोटबंदी का ही असर था कि वह बिकते-बिकते बच गई। दरअसल यहां रहने वाली 21 साल की एक महिला का भाई उसे नीलाम कर रहा था। महिला के भाई ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर अपनी बहन का सौदा तस्करी करने वाले एक दलाल के साथ कर दिया था। डील हुई थी कि इसके बदले उन्हें 20 लाख रुपए कैश में दिए जाएंगे।

बुधवार को दलाल महिला के भाई को 20 लाख रुपए कैश देता, लेकिन नोटबंदी के चलते दलाल पैसा का बंदोबस्त नहीं कर पाया। एजेंट ने कैश के बदले चेक से पेमेंट करने का ऑफर दिया, जिससे दोनों में बहस शुरू हो गई। अलवर के एडिशनल एसपी पारस जैन ने बताया, “महिला के भाई और एजेंट के बीच हुई बहस से मौका पाकर महिला वहां से भाग निकली। वह भागकर थाने आ गई और पुलिस की मदद मांगी।” जैन ने बताया कि पीड़िता को महिला कॉन्स्टेबल के साथ महिला पुलिस स्टेशन भेजा गया और बयान दर्ज कर लिया गया।

अभी निकाल सकते हैं लिमिटेड कैश:

आपको बता दें कि नोटबंदी के फैसले के बाद बैंक और एटीएम से कैश निकालने की सीमा काफी कम कर दी गई है। एटीएम से जहां एक दिन में प्रतिकार्ड 2500 रुपए निकाल सकते हैं, वहीं बैंक खाते से एक हफ्ते में 24 हजार रुपए निकाल सकते हैं। हालांकि जिन घरों में शादी है उनके लिए यह लिमिट 2.5 लाख रुपए है। लेकिन उसके लिए कुछ शर्तें दी गई हैं।

सिर कलम किए गए सैनिक के पिता ने याद दिलाया एक के बदले 10 सिर का चुनावी वादा, अफसरों के सामने बड़ा सवाल- कैसे दिखाएं शहीद का चेहरा

मंगलवार को कश्मीर के माछिल में पाकिस्तानी सैनिकों ने घात लगाकर हमला किया था। शहीद हुए तीन जवानों के शव में से एक शव के साथ बर्बरता भी की गई थी।
राजस्थान के जोधपुर में जन्मे राइफलमैन प्रभु सिंह बुधवार को 25 साल के हो जाते। लेकिन जन्मदिन से एक दिन पहले ही कश्मीर के माछिल सेक्टर में पाकिस्तानियों के हमले में वह शहीद हो गए। प्रभु सिंह के साथ दो अन्य जवान भी शहीद हुए। शहीद हुए तीन जवानों के शव में से एक शव के साथ बर्बरता भी की गई थी। सूचना मिलने के बाद से ही शेरगढ़ तहसील में प्रभु सिंह के घर मातम पसरा है। शहीद प्रभु सिंह के पिता चंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को अब पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम उठाना ही चाहिए, नहीं तो देश के जवान यूं ही मरते रहेंगे। उन्होंने पीएम मोदी के 2014 में एक सिर के बदले 10 सिर वाले चुनावी वादे की भी याद दिलाई। चंद्र सिंह ने कहा, “चुनावी वादे कभी पूरे नहीं होते। कुछ ना कुछ कमी रह जाती है। प्रधानमंत्री को अब कुछ करना ही चाहिए।”

माछिल सेक्टर में शहीद हुए प्रभु सिंह सिर्फ 25 साल के थे। दो साल पहले ही शादी हुई और 10 महीने की मासूम बेटी पलक है। अपने परिवार की रोजी-रोजी का एकमात्र सहारा प्रभु दिवाली के समय छुट्टी पर घर आए थे। चार बहनों के इकलौते भाई प्रभु के दो बहनों की शादी हो चुकी है जबकि 2 बहनों की शादी की जिम्मेदारी अभी उनके कंधों पर बाकी थी।

सालों से चली आ रही परंपरा:

राइफलमैन प्रभु सिंह का परिवार 100 से ज्यादा सालों से देश की सेवा कर रहा है। शहीद के पिता चंद्र सिंह ने बताया कि जब प्रभु सिंह पैदा हुआ था उन्होंने तभी फैसला कर लिया था कि इसे फौज में भेजेंगे। चंद्र सिंह ने बताया, “किसी और पेशे में जाने का सवाल ही नहीं उठता था। मेरे पिता अचल सिंह ने भी कई सालों तक देश की सेवा की थी। मैं भी 1979 से 1998 तक फौज में रहा था। मेरी पोस्टिंग भी जम्मू-कश्मीर में रही थी। मेरे तीन भाई भी सेना और पुलिस में रहे चुके हैं। देश की सेवा करना हमारी परंपरा रही है।”

आईएएस टॉपर टीना डाबी ने की पुष्टि, जल्द करने वाली हैं सेकेंड टॉपर अतहर आमिर से शादी

अतहर आमिर को टीना डाबी से पहली नजर में प्यार हो गया था। हालांकि टीना ने उनके प्रपोजल कई महीने बाद स्वीकार किया था।
आईएएस, आईएफएस और आईपीएस जैसी सेवाओं के लिए होने वाली केंद्रीय लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 2015 की परीक्षा में पहला स्थान पाने वाली टीना डाबी और दूसरा स्थान पाने वाले अतहर आमिर-उल-शफी ख़ान जल्द ही परिणय सूत्र में बंधने वाले हैं। नौ नवंबर को फेसबुक पर टीना डाबी के नाम से बने एक फेसबुक प्रोफाइल पर स्टेटस अपडेट किया गया था कि “इन अ रिलेशिपशिप विथ अतहर आमिर खान”, उसके बाद ही दोनों की तस्वीरें इस आशय के साथ सोशल मीडिया शेयर की जाने लगी थीं। अब टीना डाबी ने खुद टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार से इस बात की पुष्टि की है कि वो अतहर आमिर से शादी करने वाली हैं और दोनों की जल्द ही सगाई होने वाली है। 22 वर्षीय टीना यूपीएससी परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त करने वाली पहली दलित महिला हैं।
टीना और अतहर इस समय मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। टीना और अतहर पहली बार नई दिल्ली स्थित डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनोल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के नार्थ ब्लॉक स्थित दफ्तर में 11 मई को मिले थे। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक 23 वर्षीय आमिर को उनसे पहली नजर में प्यार हो गया था। टीना ने अखबार को बताया, “हम सुबह मिले और शाम को आमिर मेरे दरवाजे पर था।” लेकिन टीना ने आमिर का प्रपोजल अगस्त में स्वीकार किया। टीना कहती हैं, “लेकिन मैं आमिर को हर रोज उसकी लगन के लिए धन्यवाद कहती हूं। वो शानदार इंसान है।”
सोशल मीडिया पर जब टीना और अतहर की तस्वीरें शेयर की जाने लगीं तो कुछ लोगों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी की। इन कमेंट से टीना आहत भी हुईं। लेकिन वो मानती हैं कि सार्वजनिक जीवन में होने की ये छोटी कीमत उन्हें चुकानी पड़ रही है।  साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वो और आमिर एक-दूसरे के प्यार करते हैं और वो अपने रिश्ते से बहुत खुश हैं।
टीना मानती हैं कि एक स्वतंत्र विचार वाली आत्मनिर्भर महिला होने के नाते उन्हें अपनी जिंदगी के फैसले खुद करने का हक है। टीना ने अखबार को बताया कि उनके और अतहर के परिवार वाले भी इस रिश्ते से खुश हैं। टीना मानती हैं कि किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति के साथ प्यार या शादी करने पर कुछ लोग अंगुली उठाते ही हैं लेकिन ऐसे लोग समाज में केवल पांच प्रतिशत होते हैं। समाज का बड़ा तबका इससे खुश ही होता है। टीना के अनुसार फेसबुक पर ज्यादातर लोगों ने उनके फैसले की प्रशंसा ही की है।