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इंटरव्यू: अमर्त्य सेन बोले- काला धन के खिलाफ जरा भी कारगर नहीं होगा नरेंद्र मोदी सरकार का नोटबंदी का फैसला

नोटबंदी से लोगों को हो रही मुश्किलों पर उन्होंने कहा, "केवल एक अधिनायकवादी सरकार ही चुपचाप लोगों को इस संकट में झेलने के लिए छोड़ सकती है।
भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बैन को निरंकुश कार्रवाई जैसा बताया है। उन्होंने कहा है कि डिमोनेटाइजेशन सरकार की अधिनायकवादी प्रकृति को दर्शाता है। इंडियन एक्सप्रेस से खास बातचीत में प्रोफेसर सेन ने कहा, “लोगों को अचानक यह कहना कि आपके पास जो करेंसी नोट हैं वो किसी काम का नहीं है, उसका आप कोई इस्तेमाल नहीं कर सकते, यह अधिनायकवाद की एक अधिक जटिल अभिव्यक्ति है, जिसे कथित तौर पर सरकार द्वारा जायज ठहराया जा रहा है क्योंकि ऐसे कुछ नोट कुछ कुटिल लोगों द्वारा काला धन के रूप में जमा किया गया है।” उन्होंने कहा, “सरकार की इस घोषणा से एक ही झटके में सभी भारतीयों को कुटिल करार दे दिया गया जो वास्तविकता में ऐसा नहीं हैं।”
नोटबंदी से लोगों को हो रही मुश्किलों पर उन्होंने कहा, “केवल एक अधिनायकवादी सरकार ही चुपचाप लोगों को इस संकट में झेलने के लिए छोड़ सकती है। आज लाखों निर्दोष लोगों को अपने पैसे से वंचित किया जा रहा है और अपने स्वयं के पैसे वापस लाने की कोशिश में उन्हें पीड़ा, असुविधा और अपमान सहना पड़ रहा है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या नोटबंदी का कुछ सकारात्मक असर दिखेगा जैसा कि प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, “यह मुश्किल लगता है। यह ठीक वैसा ही लगता है जैसा कि सरकार ने विदेशों में पड़े काला धन भारत वापस लाने और सभी भारतीयों को एक गिफ्ट देने का वादा किया था और फिर सरकार उस वादे को पूरा करने में असफल रही।”
सेन ने कहा, जो लोग काला धन रखते हैं उन पर इसका कोई खास असर पड़ने वाला नहीं है लेकिन आम निर्दोष लोगों को नाहक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हर आम आदमी और छोटे कारोबारियों को सड़कों पर ला खड़ा किया है। सेन ने सरकार के उस दावे का भी खंडन किया है कि हर दर्द के बाद का सुकून फलदायी होता है। सेन ने कहा ऐसा कभी-कभी होता है। उन्होंने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, “अच्छी नीतियां कभी-कभी दर्द का कारण बनती हैं, लेकिन जो कुछ भी दर्द का कारण बनता है – चाहे कितना भी तीव्र हो – यह जरूरी नहीं कि वो अच्छी नीति ही हो।

पीएम मोदी बोले- मध्यम वर्ग का शोषण बंद करवाना है, गरीबों को हक दिलाना है

पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर भी हमला बोला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पंजाब के बठिंडा में एम्स की आधारशिला रखी। इस दौरान उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के विकास के लिए सामाजिक ढांचा जरूरी होता है। हमें टॉप लेवल की स्कूलों और अस्पतालों की जरूरत है। हम सत्ता में रहते हुए जो भी फैसला लेते हैं, उन्हें उसी समय में उस पूरा करते हैं। एम्स से यहां के स्थानीय लोगों को मदद मिलेगी। यह सरकार केवल प्रोजेक्ट्स की आधारशिला ही नहीं रखती, बल्कि उन प्रोजेक्ट्स को पूरा भी करती है।’

साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान यहां से कोई ज्यादा दूर नहीं है। जब हमारे बहादुर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक किया, सीमा पार हड़कंप मच गया था और अब भी उनका मामला ठिकाने नहीं लगा है। पाकिस्तान के लोगों से एक बार फिर बात करना चाहता हूं। उन्हें अपनी सरकार से बात करनी चाहिए। उन्हें फैसला करना चाहिए कि क्या वे भारत के खिलाफ जंग लड़ना चाहते हैं। तो उन्हें हमसे भ्रष्टाचार, कालेधन और गरीबी के खिलाफ जंग लड़नी चाहिए। जब पाकिस्तान के पेशावर में स्कूल पर हमला हुआ तो हर भारतीय दुखी था। पाकिस्तान के लोगों को अपनी सरकार से कहना चाहिए कि वह भ्रष्टाचार और जाली नोटों के खिलाफ जंग लड़े।

पीएम मोदी ने कहा, ‘जो पानी मेरे किसान भाईयों का है, वो पाकिस्तान से बहकर समुद्र में जाता है। वो पानी अपने किसानों के लिए लाने का प्रयास करूंगा। जो पानी हिंदुस्तान का है, वे पाकिस्तान नहीं जा सकता। सरकार हमारे किसानों को पूरा पानी दिलाने के लिए हरसंभव काम करेगी। मेरे लिए चुनाव मायने नहीं रखते। मैं मेरे किसानों के भले के लिए सोचता हूं। सिंधु पानी संधि जो है, जिसमें हिंदुस्तान के हक का पानी है जो पाकिस्तान में बह जाता है। अब वो बूंद-बूंद पानी रोक करके पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिंदुस्तान के किसानों के लिए पानी लाऊंगा। कालेधन और भ्रष्टाचार ने मध्यम वर्ग को लूटा है और गरीबों के हक को छीना है। मैं उन्हें वह वापस दिलाना चाहता हूं। मैं हरसंभव यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा हूं कि मध्यम वर्ग को शोषण रुकवा सकूं और गरीबों को उनका हक वापस दिला सकूं।’

नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा, ‘जब लोग इस समय मुश्किलों के दौर में जी रहे थे, ऐसे में भी वे मेरे साथ खड़े थे। उन लोगों का शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। कठिनाईयों का रास्ता भी है, उस रास्ते के लिए आपकी मदद चाहिए। आप के पास जो मोबाइल फोन है। वे सिर्फ फोन नहीं है। मोबाइल फोन को आप अपने बैंक बना सकता है। आप अपना बटुआ बना सकते हैं। रुपए को छुए बिना मोबाइल से व्यापार हो सकता है। डिजिटल कैश की ओर बढ़ना है। मोबाइल फोन में बैंकों के ऐप होते हैं। व्यापारियों को शिक्षित करें।’

ट्विटर यूजर्स बोले- पीएम नरेंद्र मोदी की नोटबंदी लाई मंदी, एप सर्वे का भी उड़ाया मजाक

प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के फैसले पर कराए गए सर्वे के परिणाम बुधवार रात ट्विटर पर शेयर किए थे।
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को 500 व 1000 रुपए के नोटों का विमुद्रीकरण करने का फैसला सोशल मीडिया पर खूब चर्चित है। रोज कोई न कोई ट्रेंड नोटबंदी के फैसले के समर्थन या विरोध में सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर हिट हो जाता है। गुरुवार को #नोटबंदी_लाई_मंदी टॉप ट्रेंड्स में शामिल रहा। यह ट्रेंड लॉरसन एंड टर्बो द्वारा 14 हजार से ज्‍यादा कर्मचारियों को बाहर निकाले जाने के विरोध में शुरू हुआ था। कंपनी के इस फैसले को कुछ लोग आने वाली मंदी की आहट बता रहे हैं। ट्विटर पर कुछ यूजर्स ने इस हैशटैग के साथ पीएम नरेंद्र मोदी पर चुटीली टिप्‍पणियां भी की हैं। पीएम मोदी इधर पिछले कुछ दिनों से अपने भाषण के दौरान भावुक हो जाते हैं, इसी पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा है, ”अब ये अफवाह कौन फैला रहा है कि 2000 का नोट मरोड़ने पर मोदी के रोने की आवाज़ आती है।” एक और यूजर लिखते हैं, ”अधूरी तैयारी के नोटबंदी का ऐलान करके नरेंद्र मोदी, घोड़े को रथ के पीछे बाँधकर हांकने वाले प्रथम प्रधानमंत्री हैं।”

#नोटबंदी_लाई_मंदी हैशटैग के बहाने ‘नरेंद्र मोदी एप’ के जरिए नोटबंदी के फैसले को लेकर कराए गए सर्वे का भी मजाक उड़ाया जा रहा है। तरुण लिखते हैं, ”नरेंद्र मोदी एप सर्वे में ‘बुरा’ कहने का ऑप्शन नहीं था,तो ‘अच्छा’ कहना पड़ा।” सोनू नाम के यूजर ने लिखा है, ”नोटबंदी, सरकार का एक साहसिक क़दम है, लेकिन #नोटबंदी_लाई_मंदी से होने वाली परेशानी पर बात करना, संसद के अंदर और बाहर, लोकतांत्रिक अधिकार है।”

    60 -70 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन? पटरी से उतरी भारतीय अर्थ व्यवस्था #नोटबंदी_लाई_मंदी

    — Tasnim (@Tanim0104) November 24, 2016
प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के फैसले पर कराए गए सर्वे के परिणाम बुधवार रात ट्विटर पर शेयर किए थे। 5 लाख यूजर्स की भागीदारी का दावा कर जो आंकड़े जारी किए गए, उसके हिसाब से 90 फीसदी से ज्‍यादा लोग सरकार के फैसले के साथ हैं। 98 फीसदी लोगों का मानना है कि देश में काला धन मौजूद हैं। 99 फीसदी लोग मानते हैं कि भ्रष्‍टाचार और काले से लड़ाई बेहद जरूरी है। 90 फीसदी लोगोंं ने कहा कि सरकार ने काला धन रोकने के लिए जो कदम उठाए, वे अच्‍छे हैं।

सर्वे में हिस्‍सा लेने वाले 92 फीसदी लोग मानते हैं कि भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की कोशिशें बहुत अच्‍छी हैं। 90 फीसदी लोगों ने 500 व 1000 के पुराने नोट बंद करने के फैसले का समर्थन किया है। 92 फीसदी लोगों का मानना है कि इस फैसले काले धन, भ्रष्‍टाचार और आतंकवाद पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार से लड़ने की नरेंद्र मोदी सरकार की मंशा पर उठाए सवाल, कहा- बताइए कब तक काम करने लगेगा लोकपाल

भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा कि लोकपाल विधेयक लंबे सामाजिक संघर्ष के बाद आया था और मौजूदा सरकार चाहे या न चाहे इसे काम करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार (23 नवंबर) को केंद्र सरकार से पूछा कि अगर वो भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना चाहती है और सार्वजनिक जीवन में शुचिता बहाल करना चाहती है तो दो साल से भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने वाले लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं कर रही है। भारत की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वो लोकपाल को ‘बेजान शब्द’ या ‘बेकाम की चीज’ बनकर नहीं रह जाने देगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने कहा कि लोकपाल विधेयक लंबे सामाजिक संघर्ष के बाद आया था और मौजूदा सरकार चाहे या न चाहे इसे काम करना चाहिए। खंडपीठ ने भारत के एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी से लोकपाल नियुक्त किए जाने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय बताने के लिए कहा है। अदालत ने रोहतगी से कहा, “क्या सरकार इसे आपद स्थिति नहीं समझती कि 2014 में लोकपाल विधेयक पारित होने के बावजूद आज तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हुई है? अगर आप कहते हैं कि सरकार व्यवस्था की सफाई को लेकर बहुत चिंतित है तो फिर पिछले दो साल से आप इस पर अमल क्यों नहीं कर पा रहे हैं? हम लोकपाल जैसी संस्था को बेकार नहीं पड़े रहने देंगे।”

चीफ जस्टिस ठाकुर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूण और जस्टिस एल नागेश्वर राव की इस खंडपीठ ने कहा कि सरकार बहाना बना रही है कि लोक सभा में विपक्ष के नेता न होने के कारण लोकपाल का चयन नहीं हो पा रहा है और इसके लिए कानून में बदलाव (विपक्ष के नेता की जगह सबसे बडी विपक्षी पार्टी के नेता) किए जाने तक इंतजार करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने रोहतगी से कहा, “अगर आपका यही तर्क है तो फिर आप अगले ढाई साल तक लोक सभा में विपक्ष का नेता नहीं पाने जा रहे….इसलिए अगर कानून में संशोधन नहीं हुआ है तो क्या ऐसी महत्वपूर्ण संस्था को बेकार पड़े रहने देंगे? हमें ये बात चिंतित कर रही है कि चूंकि लोक सभा में विपक्ष का नेता नहीं है तो आप पूरे लोकपाल उपेक्षित कर देंगे।” लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2013 को साल 2014 में अधिसूचित किया गया था। इस विधेयक के तहत लोकपाल का चयन एक कमेटी करेगी जिसके सदस्य भारत के प्रधानमंत्री, लोक सभा अध्यक्ष, लोक सभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नियुक्त सुप्रीम कोर्ट का कोई जज और एक प्रसिद्ध न्यायवादी होंगे।

जनहित याचिका दायर करने वालों की तरफ से अदालत में पेश हुए सीनियर एडवोकेट शांति भूषण और एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त, सीबीआई चीफ और मुख्य सूचना आयुक्त इत्यादि की नियुक्त से जुड़े कानून में  संशोधन करके लोक सभा में विपक्ष के नेता की जगह सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता का नाम मान्य कर दिया है। भूषण और शंकरनारायण ने अदालत से कहा कि कोई भी राजनीतिक दल लोकपाल की नियुक्ति नहीं चाहता इसलिए इससे जुड़े कानून में संशोधन नहीं हो पाएगा जिसकी वजह से भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई कुंठित होकर रह गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने एटार्नी जनरल को लताड़ लगाते हुए कहा कि अगर आप चार दूसरी संस्थाओं के लिए कानून में आसानी से बदलाव कर सकते हैं तो इस विधेयक में संशोधन करने में क्या दिक्कत है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “….हमारे ख्याल में अगर हम इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई आदेश देते हैं तो आपको इसका स्वागत करना चाहिए।”

वहीं एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत से कहा कि कानून बनाना संसद का काम है और वो लोकपाल की नियुक्ति की कोई तय समयसीमा बताने की स्थिति में नहीं हैं। इस पर अदालत ने उनसे कहा कि वो सक्षम अधिकारी से इस बारे में निर्देश लेकर अदालत को सात दिसंबर को जवाब दें। आपको बता दें कि समाजसेवी अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक पारित करवाने के लिए अखिल भारतीय आंदोलन किया था जिसके बाद केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस गठबंधन सरकार ने ये विधेयक पारित किया था।

बैंक की लाइन में लगी गरीब महिला के 50 हजार चोरी, बिहार के अधिकारी का दिल पसीजा

नई दिल्ली। बैंक के आगे लाइन में खड़ी गरीब महिला का थैला काटकर 50 हजार रुपए चोरी कर लिए गए। गरीब महिला के साथ हुई इस घटना की खबर जब बिहार में एक सरकारी अधिकारी ने टीवी पर देखी तो परिवार की हालत देखकर उसका दिल पसीज गया। बिहार में बीडीओ की पोस्ट पर तैनात अधिकारी खुद दिल्ली आए और पीड़ित महिला को 50 हजार का चेक अपने सैलरी अकाउंट से देकर मदद की।

दरअसल, दिल्ली में मुकुंदपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में पिछले हफ्ते एक महिला पैसे जमा करने के लिए लाइन में लगी थी। यहीं उस महिला के 50 हजार रुपए निकाल लिए गए। यह पैसे महिला ने अपनी 2 बेटियों की शादी के लिए जमा किए थे। ये खबर पटना के खंड विकास अधिकारी को चैनल के माध्यम से मिली। टीवी पर इस खबर को देखने के बाद अधिकारीं का दिल पसीज गया।
अधिकारी एक मां का रोना देख नहीं सके और उन्होंने मुकुंदपुर के इस पीड़ित परिवार की मदद करने का मन बना लिया। बीडीओ डॉ. दीनबंधु दिवाकर ने दिल्ली की एक सामाजिक संस्था से संपर्क किया जिसके फाउंडर उनके टीचर रह चुके हैं। पूरी जानकारी जुटाने के बाद बीडीओ साहब दिल्ली पहुंचे और परिवार से मिलकर उन्हें अपने निजी कोष से 50 हजार की सहायता राशि का चेक सौंपा। मदद की यह राशि पाकर पीड़ित परिवार बेहद खुश और संतुष्ट है। मदद के इस काम में बीडीओ साहब का साथ उनके पूर्व अध्यापक सम्पूर्णानन्द उनियाल ने दिया।
पटना में बीडीओ पद पर तैनात डॉ. दीनबंधु दिवाकर ने बताया कि पटना में मैंने एक राष्ट्रीय न्यूज चैनल पर देखा कि बच्ची की शादी के लिए रखे 50 हजार इस महिला के पास से उड़ा लिए गए। मैं भी एक बच्ची का पिता हूं। मुझे लगा क्यों न इस परिवार की मदद की जाए। मैंने सैलरी अकाउंट से मदद की है।

नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री के भाई की मौत, अस्पताल ने पुराने नोट लेने से किया इनकार, चेक से पेमेंट करने पर ही सौंपा शव

केंद्रीय मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा को अपने छोटे भाई की मौत के बाद नोटबंदी की परेशानी से दो-चार होना पड़ा।

केंद्रीय मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा को अपने छोटे भाई की मौत के बाद नोटबंदी की परेशानी से दो-चार होना पड़ा। दरअसल, सदानंद गौड़ा के छोटे भाई डी वी भास्कर गौड़ा कर्नाटक के मैंगलूरू में कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (केएमसी) भर्ती थे। डी वी भास्कर गौड़ा की उम्र 54 साल थी। वह वहां लंबे वक्त से चली आ रही किसी बीमारी की वजह से भर्ती हुए थे। मंगलवार (22 नवंबर) को उनकी मौत हो गई। सदानंद गौड़ा ने खुद ट्वीट करके अपने भाई डी वी भास्कर गौड़ा की मौत की खबर दी थी। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, गौड़ा के परिवार को 13 लाख रुपए की फाइनल पेमेंट करनी थी। परिवार की तरफ से जो पैसे दिए गए उसमें 48 हजार रुपए 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट थे। लेकिन हॉस्पिटल में उन्हें लेने से मना कर दिया। इसके बाद गौड़ा को चेक मे पेमेंट करनी पड़ी। तब जाकर हॉस्पिटल ने गौड़ा के परिवार को बॉडी ले जाने दी। सूत्रों से यह भी पता चला है कि नोटों को लेकर हॉस्पिटल स्टाफ और गौड़ा परिवार में कुछ कहासुनी भी हुई थी। अंत में हॉस्पिटल ने लिखित में दे दिया कि वह पुराने नोट नहीं ले सकता। इसपर अंत में गौड़ा को चेक से पेमेंट करनी पड़ी थी।
हालांकि, गौड़ा के मीडिया सचिव ने ऐसा कुछ होने से इंकार किया है। मीडिया सचिव मंजुनाथ ने कहा कि गौड़ा या उनके परिवार के किसी सदस्य ने पुराने नोटों से बिल देने की कोशिश की ही नहीं थी। भास्कर गौड़ा किसानी करते थे। उन्हें लगभग दो हफ्ते पहले केएमसी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। सदानंद गौड़ा मौदी सरकार में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री हैं।
गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान किया गया था। उसमें बताया गया था कि 500 और 1000 के नोट 30 दिसंबर 2016 के बाद से नहीं चला करेंगे। इसके साथ ही 2000 और 500 रुपए के नए नोटों के आने की जानकारी भी दी गई थी।

भारत बनाम इंग्लैंड, टेस्ट -2, डे-3; स्टंप: दूसरी पारी में भारत का स्कोर 98-3, 298 रन की है कुल बढ़त

Ind vs Eng Test, Live Cricket Score: तीसरे दिन का खेल शुरू होने के साथ ही भारत की कोशिश होगी कि जल्दी प्रतिद्वंदी टीम के बचे हुए विकेट लेकर उसे पहले सेशन में ही ऑल आउट कर बढ़त हासिल कर ली जाए।
विशाखापत्तनम के वाई. एस. राजशेखर रेड्डी एसीए-वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के दूसरे टेस्ट मैच में मेजबान टीम मजबूत स्थिति में पहुंच गई है। भारत ने तीसरे दिन के खेल की समाप्ती तक अपनी दूसरी पारी में तीन विकेट के नुकसान पर 98 रन बना लिए हैं। भारत की इंग्लैंड पर कुल बढ़त 298 रन की हो गई है और अभी उसके सात विकेट आउट होने बाकी हैं। कप्तान विराट कोहली पहली पारी में 167 रन बनाने के बाद दूसरी पारी में भी 56 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं और अजिंक्य रहाणे 22 रन बनाकर उनका साथ दे रहे हैं।

इससे पहले तीसरे दिन शनिवार को इंग्लैंड की पहली पारी 255 रनों सिमट गई। इसके साथ ही भारत ने पहली पारी के आधार पर 200 रनों की बढ़त ले ली। दूसरी पारी खेलने उतरी भारतीय टीम की शुरूआत बेहद खराब रही और स्टुअर्ट ब्रॉड ने 17 रन के स्कोर पर मुरली विजय और केएल राहुल को वापस पवेलियन की राह दिखा दी। चेतेश्वर पुजारा भी कुछ खास नहीं कर सके और जेम्स ऐडरसन की गेंद पर महज एक रन बनाकर बोल्ड हो गए। उसके बाद कप्तान विराट कोहली ने रहाणे के साथ मिलकर कोई और विकेट नहीं गिरने दिया और टीम के स्कोर को 98 रन तक पहुंचाया। कोहली ने इस दौरान अपने टेस्ट करियर का 13वां अर्धशतक जमाया।

इससे पहले शनिवार को आॅफ ब्रेक गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन के पांच विकेट के दम पर भारत ने इंग्लैंड को 255 रनों पर ऑलआउट कर दिया। तीसरे दिन लंच के बाद इंग्लैंड की पारी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। इंग्लैंड का कोई भी बल्लेबाज भारतीय स्पिन गेंदबाजों के आगे टिक नहीं पाया। हालांकि, पहले सेशन में बेन स्टोक्स ने जॉनी बेयरेस्टो के साथ मिलकर दमदार साझेदारी करते हुए भारतीय टीम का कड़ा इम्तिहान लिया। लेकिन उमेश यादव ने जॉनी बेयरस्टो (53) को बोल्ड कर टीम इंडिया को छठी सफलता दिला दी। इंग्लैंड की ओर से बेन स्टोक्स ने सर्वाधिक 70 रन बनाए।

टीम इंडिया की ओर से आर अश्विन ने 67 रन देकर सर्वाधिक 5 विकेट लिए, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, रवींद्र जडेजा और जयंत यादव ने एक-एक विकेट चटकाया। अश्विन ने 22वीं बार पारी में 5 या अधिक विकेट लिए हैं। इंग्लैंड ने तीसरे दिन की शुरुआत पांच विकेट से की। टीम का छठवां विकेट और दिन का पहला विकेट बेयरेस्टो के रूप में गिरा। उमेश यादव ने उन्हें क्लीन बोल्ड किया। सातवां विकेट आर अश्विन ने बेन स्टोक्स को आउट कर लिया, स्टोक्स ने 70 रन बनाए। आठवें विकेट के रूप में 4 रन बनाकर खेल रहे जफ़र अंसारी को रवीन्द्र जडेजा ने एलबीडब्ल्यू आउट किया। नौवां और दसवां विकेट अश्विन के खाते में गया। अश्विन ने पहले स्टुअर्ट ब्रॉड और अगले ही गेंद पर जेम्स एंडरसन को चलता किया।

चीन की वजह से इस साल भारत को एनएसजी में जगह मिलने का सपना टूटा

वियना में एनएसजी देशों की बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्‍त हो गई है जिसके साथ ही भारत की उम्‍मीदें भी समाप्‍त हो गई।
भारत को न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में इस साल सदस्‍यता मिलने की संभावना लगभग समाप्‍त हो गई है। वियना में एनएसजी देशों की बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्‍त हो गई है जिसके साथ ही भारत की उम्‍मीदें भी समाप्‍त हो गई। हालांकि इस मामले के जानकारों का कहना है कि यह भारत के एनएसजी में जाने की प्रक्रिया 2017 में भी जारी रहेगी। भारत और अमेरिका बराक ओबामा के राष्‍ट्रपति कार्यकाल के पूरा होने से पहले इस प्रक्रिया के पूरा होने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार इस साल के अंत तक यह प्रकिया पूरी हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार 11 नवंबर को वियना में हुई बैठक भी उसी तरह से समाप्‍त हुई जिस तरह से सिओल बैठक हुई थी। हालांकि इस बार चीन की मांग- परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं होने वाले देशों के लिए मानक तय किए जाए, पर विचार किया गया।

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से अभी इस मामले में कोई जवाब नहीं आया है। इस साल जून में सिओल में बैठक के बाद भारत के एनएसजी सदस्‍यता मिलने की उम्‍मीदें बढ़ी थीं। इस बैठक में अर्जेंटीना के कूटनीतिज्ञ राफेल ग्रोसी को भारत की एप्‍लीकेशनल पर सहमति बनाने के लिए नियुक्‍त किया गया था। हालांकि चीन ने इस नियुक्ति को मानने से इनकार कर दिया था। चीन लगातार भारत को एनएसजी में शामिल किए जाने का विरोध कर रहा है। भारत ने भी कहा है कि चीन एकमात्र देश है जिसने उसका विरोध किया। हालांकि इसके बाद चीन के न्‍यूक्लियर नेगोशिएटर वांग कुन और भारत के निशःस्त्रीकरण के लिए संयुक्‍त सचिव अमनदीप सिंह गिल के बीच 13 सितम्‍बर और 31 अक्‍टूबर को बैठक हुई। इन बैठकों के बाद चीन का क्‍या रूख है यह अभी साफ होना बाकी है लेकिन चीन थोड़ा नरम पड़ा है।

चीन ने भारत के प्रवेश को इस आधार पर बाधित किया था कि उसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। चीन ने इस समूह में प्रवेश को लेकर भारत एवं पाकिस्तान के साथ दो दौर की बातचीत की है। पाकिस्तान की तुलना में भारत को उसके अप्रसार रिकॉर्ड के कारण अमेरिका तथा अधिकतर एनएसजी सदस्यों का समर्थन हासिल है। पाकिस्तान पर पूर्व में परमाणु अप्रसार को लेकर गंभीर आरोप लग चुके हैं विशेषकर उसके परमाणु वैज्ञानिक डा. ए क्यू खान को लेकर। गेंग ने कहा कि वियना बैठक में एनएसजी सदस्यों ने एनएसजी में गैर एनपीटी सदस्यों के प्रवेश को लेकर तकनीकी, कानूनी एवं राजनीतिक मामलों पर चर्चा की।

भारत बनाम इंग्लैंड, दूसरा टेस्ट, डे-2 स्टंप: अश्विन की फिरकी में फंसा इंग्‍लैंड, 103 रन पर पवेलियन लौटी आधी टीम

IND vs ENG, 2nd Test Match: विशाखापत्तनम टेस्ट मैच के दूसरे दिन स्टंप तक इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 5 विकेट खोकर 103 रन बना लिए हैं। उसे भारत के स्कोर की बराबरी करने के लिए 352 रन और बनाने हैं।
भारत-इंग्लैंड के बीच विशाखापत्तनम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 5 विकेट के नुकसान पर 103 रन बना लिए हैं। दूसरे दिन स्टंप के समय बेन स्टोक्स और जॉनी बैरस्टो दोनों 12-12 रन बनाकर नाबाद हैं। इंग्लैंड की पहली पारी में भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने दिलाई। उन्होंने कप्तान एलेस्टर कुक को 2 रन के स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। इंग्लैंड का दूसरा विकेट हसीब हमीद के रूप में गिरा। उन्हें 13 रन के स्कोर पर जयंत यादव के थ्रो पर रिद्धिमान साहा ने रन आउट किया।
आर. अश्विन ने भारत को तीसरी सफलता दिलाई। उन्होंने बेन डकेट को 5 रन पर क्लीन बोल्ड कर दिया। अश्विन यहीं नहीं रुके उन्होंने जो रूट (53) को अर्धशतक बनाने के तुरंत बाद उमेश यादव के हाथों कैच आउट कराया। अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे जयंत यादव ने मोइन अली को एलबीडब्ल्यू आउट कर अपने टेसट करियर का पहला विकेट लिया। इससे पहले भारत की पहली पारी 455 रन पर समाप्‍त हुई। मोहम्मद शमी (7) रन बनाकर नॉटआउट रहे। आर अश्विन (58) और पहला टेस्ट मैच खेल रहे जयंत यादव (35) के स्कोर पर आउट हुए।
खेल के दूसरे दिन इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाज मोईन अली ने तीन विकेट झटके। इसके अलावा बेन स्टोक्स को एक और आदिल राशिद को दो विकेट मिले। दूसरे दिन कप्तान विराट कोहली अपने तीसरे दोहरे शतक से चूक गए। उन्होंने बेहतरीन 167 रनों की पारी खेली। अपनी इस शानदार पारी में कोहली ने 18 चौके लगाए। कोहली के आउट होते ही टीम इंडिया का लोअर ऑर्डर बिखर गया। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा ने फिर निराश किया और सिर्फ तीन रन ही बना सके।
पहले दिन के स्कोर 317 रन पर चार विकेट से आगे खेलते हुए भारत ने दूसरे दिन पहले सेशन में कप्तान विराट कोहली का विकेट जल्दी गवां दिया। कोहली को मोइन अली ने बेन स्टोक्स के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद ऋद्धिमान साहा और रविन्द्र जडेजा को भी मोइन अली ने सस्ते में निपटा दिया। साहा 3 रन और जडेजा शून्य रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद रविचन्द्रन अश्विन ने अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे जयंत यादव के साथ नौवें विकेट के लिए 64 रनों की साझेदारी कर टीम के स्कोर को 427 रन तक पहुंचाया। अश्विन ने आउट होने से पहले 58 रनों की उपयोगी पारी खेली और अपने टेस्ट करियर का आठवां अर्धशतक लगाया।
भारत बनाम इंग्लैंड, दूसरा टेस्ट: पहले दिन स्टंप तक भारत का स्कोर 317-4, विराट कोहली 151 रन बनाकर नाबाद
जयंत यादव आउट होने वाले 9वें बल्लेबाज रहे उन्हें आदिल रशीद ने जेम्स एंडरसन के हाथों कैच आउट कराया। जयंत ने आउट होने से पहले 35 रनों का अहम योगदान दिया और टीम के स्कोर को 450 के उपर पहुंचाने में सहयोग किया। उमेश यादव आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज रहे उन्होंने 13 रन बनाए। उमेश यादव को भी आदिल रशीद ने मोइन अली के हाथों कैच आउट कराया। इंग्लैंड के लिए मोइन अली और जेम्स एंडरसन ने तीन तीन विकेट झटके। स्टुअर्ट ब्रॉड और बेन स्टोक्स को एक एक विकेट मिला। आदिल रशीद ने दो विकेट झटके।

 

नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी कर गए ये 5 बड़ी गलतियां, क्‍या हो सकता है अंजाम?

सरकार ने नोटबंदी की घोषणा के एक हफ्ते बाद दवा की दुकानों पर 500-1000 के नए नोटों को चलाने की इजाजत दी।
पीएम मोदी ने 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले कालेधन को बड़ा मुद्दा बनाया था। एक चुनावी सभा में मोदी ने यहां तक कह दिया कि विदेशों में भारत का इतना कालाधन पड़ा है कि अगर वो वापस आ जाए तो हर देशवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये आ सकते हैं। बीजेपी गठबंधन को लोक सभा में प्रचंड बहुमत मिला और केंद्र में उसकी सरकार बन गई। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के पहले ढाई साल के कार्यकाल में विदेश से कोई कालाधन नहीं आया। पीएम मोदी पर “15-15 लाख हर खाते में” आने की बात याद दिलाकर ताने मारे जाने लगे। शायद यही वजह थी कि मोदी सरकार ने सोचा कि विदेश न सही देश के अंदर पड़े कालेधन पर ही निशाना साधा जाए। मोदी सरकार ने पहले कालेधन की स्वैच्छिक घोषणा की योजना पेश की। इस योजना के तहत 30 सितंबर 2016 तक जो लोग आयकर विभाग में कालाधन जमा करने वालों से कुल जमा राशि पर केवल 45 प्रतिशत टैक्स लिया जाना था।  इस योजना के तहत करीब 65 हजार करोड़ रुपये का कालाधन सामने आया जिससे सरकार को करीब 27 करोड़ रुपये मिले। देश में पड़े कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार ने दूसरी बड़ी कार्रवाई नोटबंदी के तौर पर की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब आठ नवंबर को रात आठ बजे 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की तो आम जनता का शुरुआती रुझान सरकार के इस फैसले के प्रति काफी सकारात्मक था लेकिन इसे अमलीजामा पहनाए जाने को लेकर सरकार की तैयारी इतनी खराब निकली कि वो आलोचनाओं में घिर गई। आइए देखते हैं कि पीएम मोदी ने नोटबंदी को लागू करने में कौन सी पांच बड़ी गलतियां कीं.
1- पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा से गया गलत संदेश- नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की तो उन्होंने जोर देकर कहा कि रात 12 बजे से “500 और 1000 के नोट कागज के टुकड़े” रह जाएंगे। पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में ये साफ किया कि पुराने नोटों को 30 दिसंबर तक बैंकों में बदला जा सकेगा लेकिन उनका शुरुआती स्वर ऐसा थे जिससे कई लोगों खासकर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे गरीब तबके को लगा कि पुराने नोट उस दिन के बाद किसी काम के नहीं रहेंगे। इसकी वजह से एक तरह से बदहवासी का आलम हो गया। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए जिसमें भिखारी या कोई बेहद गरीब आदमी 500 या 1000 के नोट नहीं ले रहा है। शुरुआती घोषणा में सरकार ये स्पष्ट नहीं किया कि देश में ढाई लाख रुपये तक की सालान आय कर मुक्त है और  10-20-50 हजार या एक-दो लाख रुपये नकद जमा करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है। सरकार की शुरुआती घोषणा से ये भी साफ नहीं हुआ कि जिन लोगों ने अपने बैंक खातों बड़ी धनराशि शादी या इलाज के लिए नकद निकाल रखा है उन्हें डरने की कतई जरूरत नहीं क्योंकि उस पैसे को बगैर किसी कानूनी अड़चन के वापस बैंक में जमा किया जा सकता है। वित्त मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने घोषणा के दो दिन बाद कहा कि ढाई लाख रुपये से अधिक राशि जमा करने वालों की ही जांच की जाएगी। लेकिन तब तक थोड़ी देर हो चुकी थी।

2- अस्पतालों और दवा की दुकानों को कड़ा संदेश न देना- नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा स्थिति का सामना ऐसे लोगों को करना पड़ा जो अस्पताल में भर्ती थे या जिन्हें इलाज कराना था। ऐसी कई खबरें आईं कि अस्पतालों ने  पीएम मोदी की घोषणा के तुरंत बाद पुराने नोट लेना बंद कर दिया। इस वजह से एक बड़ी आबादी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। शहरी आबादी के पास कार्ड पेमेंट की सुविधा होती है लेकिन आज भी भारत की 68 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है जो प्लास्टिक मनी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करती। मोदी सरकार घोषणा के साथ ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को ये कड़ा संदेश में विफल रही कि अगर उनकी वजह से मरीजों को दिक्कत हुई तो उन्हें सरकार के कोपभाजन का शिकार करना पड़ेगा। शुरुआती घोषणा में दवा की दुकानों पर 500-1000 के नोट चलाने की छूट नहीं दी गई थी। इसकी वजह से बीमार लोगों को निजी दवा की दुकानों पर दवाएं लेने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के समय कहा कि पुराने नोट सरकारी अस्पतालों, पेट्रोल पंपों, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर 11 नवंबर तक चलते रहेंगे। बाद में सरकार ने इस समय सीमा को पहले 14 नवंबर, फिर 18 नवंबर और उसके बाद 24 नवंबर किया। यानी सरकार शुरू में ये अनुमान लगाने में विफल रही कि हालात कितने समय में सामान्य हो पाएंगे। निजी दवा की दुकानों पर पुराने नोट चलेंगे ये फैसला लेने में भी सरकार को छह दिन लग गए।
3- मंडी व्यापारियों की दिक्कत के बारे में नहीं सोचा- मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार नोटबंदी की तैयारी छह महीने से कर रही थी लेकिन इसके बाद जिस तरह के हालात पैदा हुए उससे ऐसा कत्तई नहीं लगता। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख करोड़ रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। यानी आरबीआई द्वारा जारी कुल नोटों में करीब 85 प्रतिशत 500 और 1000 के नोटों के रूप में था। ऐसे में वित्त मंत्रालय के अफसरों को यह बात समझनी चाहिए थी कि अगर बाजार से 85 प्रतिशत नकद राशि बाहर हो जाएगी तो रोजमर्रा के लेन-देन के लिए पैसे की भारी किल्लत हो जाएगी। इस भावी किल्लत को पूरा करने के लिए आरबीआई 100 और 50 रुपये के नोटों की अधिक मात्रा पहले से बाजार में उतार सकता था जिससे जनता पर तुरंत नकद की कमी का इतना ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार देश में 31 मार्च तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थे। यानी आरबीआई ने 100 और 50 के नोटों की मात्रा बाजार में बढ़ाई होती तो नगद की कमी को एक हद तक पूरा किया जा सकता था।
4- एटीएम में नए नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित न करना- वित्त मंत्रालय की योजना के अनुसार 10 नवंबर से सभी एटीएम से हर कार्ड से दो हजार रुपये निकाल जा सकेंगे। जब 10 नवंबर को सारे एटीएम खुले तो उनके सामने भी बैंकों ही की तरह लम्बी कतार लग गई। लेकिन उनका हाल भी बैंकों जैसा ही हुआ। देश के सारे एटीएम में केवल 100-100 के नोट उपलब्ध थे। नतीजा ये हुआ कि सभी एटीएम कुछ ही घंटों में खाली हो गए और लोगों की हताशा बढ़ गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को बताया कि सभी एटीएम के सामान्य तरीके से काम करने में तीन हफ्ते का वक्त लगेगा। एटीएम में 2000 और पांच सौ के नए नोट उपलब्ध कराने के लिए उनका रीकैलिब्रेशन (बदलाव) करना होगा। मंत्रालय समय रहते पर्याप्त एटीएम का रीकैलिब्रेशन करवाने में विफल रहा, वरना आम लोगों को इतनी मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।
5- 2000 का नोट पहले उतारा 500 का बाद में– बैंकों से 10 नवंबर को जनता को 2000 के नए नोट मिलने शुरू हो गए। गिने-चुने जगहों पर 500 नोटों की उपलब्धता की खबर आई। जिन लोगों को 2000 के नए नोट मिले भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई क्योंकि बाजार में बहुत कम ही दुकानदार 2000 के नोट के बदले 50-100-200 रुपये का सामान देने को तैयार हो रहे थे। जिन लोगों के पास 100 रुपये के नोट थे वो हालात को देखते हुए उसे खर्च करने में बहुत ज्यादा किफायत बरत रहे थे। बाजार में पहले से ही नगद पैसे कम थे ऊपर से इतना बड़े नोट के आने से लोगों के सामने छुट्टे पैसों का संकट बढ़ गया। देश के कई शहरों में लोगों ने शिकायत की कि उन्हें दो हजार रुपये का नोट तो मिल गया लेकिन उसे कोई ले नहीं रहा है। अगर सरकार ने दो हजार रुपये से पहले 500 के नए नोट बाजार में जारी किए होते तो लोगों को इस संकट से बचाया जा सकता था। सरकार की आँख थोड़ी देर से खुली और रविवार को बड़ी संख्या में 500 रुपये के नए नोट जारी किए गए। अगर वित्त मंत्रालय के अफसर आम आदमी की नजर से एक बार इस मसले को देखते तो इस मुश्किल से बचा जा सकता था।

नोटबंदी के खिलाफ ममता बनर्जी करेंगी आंदोलन, कहा- जारी रहेगी जंग, चाहे जेल में डालो या गोली मारो

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ अरविंद केजरीवाल ने भी रैली को संबोधित किया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को एक बार फिर नोटबंदी के फैसले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर आजादपुर मंडी मे एक रैली को संबोधित किया। रैली में बनर्जी ने कहा, ‘ऐसा संकट तो आपातकाल के दौरान भी नहीं देखा था। यह फैसला भारत को 100 साल पीछे ले जा सकता है। आगे को छोड़ो, देश को पीछे कर दिया। अगर आपमें हिम्मत है तो हमें जेल भेजो और गोली मारो। लेकिन हम हमारी लड़ाई जारी रखेंगे। हम गरीब लोगों को भूखा नहीं मरने देंगे। हमारे देश के लिए लड़ाई जारी रहेगी। पहले नोट बदलने की सीमा 4500 रुपए थी, जो कि अब घटाकर 2000 रुपए कर दी गई है। वे देश को बेचना चाहते हैं। क्या वे संविधान को तोड़ना चाहते हैं। हम उन्हें यह अनुमति नहीं देंगे।’
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भी सरकार से नोटबंदी तीन दिनों में वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हम कालेधन के खिलाफ संघर्ष का समर्थन करते हैं लेकिन गरीब और वंचित लोग परेशान नहीं होने चाहिएं। हम चुप नहीं रहेंगे और यदि तीन दिन में ऐसा नहीं किया जाता है तो देशवासी आपको नहीं बख्शेंगे।’ लोगों के वास्ते अपना संघर्ष जारी रखने पर जोर देते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी, ‘मैं डरी हुई नहीं हूं। मैं अपना संघर्ष जारी रखूंगी। यदि आपमें साहस है तो मुझे जेल में डाल दीजिए, मुझे गोली मार दीजिए।’ विमुद्रीकरण के खिलाफ अपनी लड़ाई को ‘देश, गरीबों एवं भूखे लोगों को बचाने’ का संघर्ष करार देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आपातकाल में भी ऐसा संकट नहीं देखा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह फैसला देश को 100 साल पीछे ले जा सकता है। सरकार हर रोज एक फैसले के साथ सामने आती है। परसों कहा गया था कि नोट बदलने की सीमा 4500 होगी और आज आप कहते हें कि यह 2000 रुपए है।’
उन्होंने इस दलील का मजाक उड़ाया कि लोगों को प्लास्टिक मनी का उपयोग करना चाहिए एवं कहा कि भारत में महज चार फीसदी विनिमय के लिए कार्ड का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा, ‘दूसरे दिन, यह कहा गया कि अंगुलियों पर स्याही लगायी जाएगी। यह चल क्या रहा है? क्या हम नौकर हैं, क्या हम चोर हैं और आप ईमानदार? क्या हर व्यक्ति चोर है?’ वैसे उन्होंने विमुद्रीकरण की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की कुछ विपक्षी दलों की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि ऐसी समितियों से अतीत में कोई नतीजा निकला नहीं। कालेधन पर रोक पर सरकार की कटिबद्धता पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने पूछा कि विदेशों में रखे गए कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का यह भाषण सुनकर हैरान हो गए कार्यक्रम में मौजूद अफसर

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह गुरुवार (17 नवंबर) को एक कार्यक्रम में थे। उस कार्यक्रम में सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो के देशभर के अधिकारी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह गुरुवार (17 नवंबर) को एक कार्यक्रम में थे। उस कार्यक्रम में सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो के देशभर के अधिकारी मौजूद थे। वहां जितेंद्र सिंह ने सबको यह कहकर चौंका दिया कि सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो की वजह से लोग बेफिक्र होकर रहते हैं और आराम से अपना रोजमर्रा का काम करते हैं। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में कहा, ‘अगर हम जैसे लोग अपने रोजमर्रा के काम आराम से पूरा कर पा रहे हैं तो वह आपकी वजह से हैं क्योंकि आप जैसे अफसर हमारी सुरक्षा और संरक्षण में हमेशा लगे रहते हो।’ उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग हैरानी में पड़ गए। उनकी समझ नहीं आ रहा था कि जितेंद्र सिंह सेना से उनकी तुलना कर रहे हैं या फिर उन सबपर नेताओं पर पैनी नजर रखने के लिए व्यंग्य कस रहे हैं। हालांकि, जितेंद्र सिंह ने खुद ही कह दिया कि उन्होंने यही बात कुछ दिन पहले सेना के कुछ जवानों से मिलने पर भी बोली थी।
वहीं एक दूसरा किस्सा गृह मंत्री राजनाथ सिंह का भी है। दरअसल राजनाथ सिंह रेवाड़ी में एक कार्यक्रम के लिए गए हुए थे। राजनाथ सिंह को वहां पर रुके हुए काफी देर हो गई थी और उन्हें किसी और कार्यक्रम के लिए निकलना था। वह उठकर जाने ही लगे कि अचानक कार्यक्रम में एक लड़की ने देशभक्ति गीता गाना शुरू कर दिया। इसपर राजनाथ सिंह को लगा कि बात का खबरों में आने पर उल्टा मतलब निकाला जा सकता है इसलिए वह फिर से बैठ गए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगली मीटिंग में जाने के लिए उन्हें कुछ और समय मिल गया है यानी अब वह वहां लेट भी जा सकते हैं।
राजनाथ सिंह का एक बयान हाल में काफी चर्चा में रहा था। पाकिस्तान और आतंकवाद पर टिप्पणी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘हमनी के ना आटा चाही, ना टाटा चाही, हमनी के पाकिस्तान में सन्नाटा चाही।’ यह बात उन्होंने भोजपुरी अध्ययन शोध केंद्र के कार्यक्रम में कही थी।

ATM के अलावा पेट्रोल पंप पर मिलेगा कैश, जनता के बीच खुशी की लहर

देश में एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनों को कम करने के लिए सरकार नए-नए ऐलान कर रही हैं। अब आपको राहत देने वाला एक और ऐलान हुआ है कि अब पेट्रोल पंप पर भी आपको पैसे निकालने की सुविधा मिलेगी।

मोदी सरकार के नोटबैन के बाद देश भर में हो रही पैसों की समस्या को ध्यान में रखते हुए अब केंद्र की ओर से इसके समाधान का निर्णय लिया गया। दरअसल, मोदी सरकार ने एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनों को कम करने अब पेट्रोल पंप की मशीनों से कैश भुनाने की सुविधा का ऐलान किया। सरकार का यह फैसला आम जनता को राहत देने वाला है। क्योंकि अब पेट्रोल पंप पर आपकी गाड़ी में न सिर्फ पेट्रोल और डीजल मिलेगा बल्कि यहां आप अपने एटीएम कार्ड और क्रेडिट कार्ड से कैश भी भुना सकते हैं। जी हां, देश के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंप पर आप कार्ड स्वाइप कर पैसे निकाल सकते हैं।
पेट्रोल पंपों पर कार्ड स्वाइप कर 2000 रुपए हर व्यक्ति निकाल सकता है। आरबीआई और एसबीआई की ये संयुक्त मुहिम है और जहां एसबीआई की पीओएस मशीनें हैं वहीं ये सुविधा मिल सकेगी। सरकार के इस नए ऐलान के मुताबिक करीब 2500 पेट्रोल पंपों पर ये सुविधा मिलेगी और आगे चलकर इसे 20,000 पेट्रोल पंपों पर लागू किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद जनता के बीच खुशी की लहर दौड़ी है।
एसबीआई के साथ सरकारी तेल कंपनियों ने मिलकर इस सुविधा को शुरू किया है जिससे लोगों की दिक्कतों का समाधान हो सके। बैंक और एटीएम के बाहर लगी लंबी कतारों से लोग बेहद परेशान थे, जिसके बाद कई लोग मोदी सरकार के फैसले को अच्छा तो बता रहे थे लेकिन अपनी दिक्कतों को भी साजा कर रहे थे। लेकिन सरकार के इस फैसले से लोगों कैश की दिक्कत नहीं होगी। बता दें कि शादी वालों घरों के परिवारों के लिए बैंकों से 2.5 लाख रुपये तक निकालने का फैसला आज आया है जो इस समय शादी वाले घरों के लिए बहुत बड़ी राहत बनकर सामने आया है। हालांकि नोट एक्सचेंज की सीमा घटाकर अब सिर्फ 2000 रुपये कर दी गई है।

कृषि मंत्रालय ने मांगी किसानों के लिए पुराने नोटों से बीज खरीदने की इजाजत, वित्त मंत्रालय ने ठुकराया

वित्त मंत्रालय ने किसानों को एक हफ्ते में 25,000 रुपए निकालने की छूट तो दे दी लेकिन 500-1000 रुपए के पुराने नोटों द्वारा बीज खरीदने की इजाजत के लिए दी गई अर्जी को ठुकरा दिया।
वित्त मंत्रालय ने किसानों को एक हफ्ते में 25,000 रुपए निकालने की छूट तो दे दी लेकिन 500-1000 रुपए के पुराने नोटों द्वारा बीज खरीदने की इजाजत के लिए दी गई अर्जी को ठुकरा दिया। मंगलवार को हुई एक मीटिंग में वित्त मंत्रालय ने कृषि मंत्रालय द्वारा दी गई अर्जी को ठुकरा दिया। उसमें कहा गया था कि किसानों को पुराने 500 और 1000 के नोटों से बीज खरीदने दिया जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार द्वारा जनधन खाते बड़े पैमाने पर खोले गए हैं। जिन किसानों को भी दिक्कत है वह जाकर उन खातों में नोट जमा करवा सकते हैं या फिर नोट बदलवा सकते हैं। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 16 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते चालू हैं। किसानों द्वारा उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 15 नवंबर को वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखा था कि सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सभी बीज और रबी की फसल खरीद-बेची करने वाली जगहों पर 24 नवंबर तक पुराने नोट चलने चाहिए जैसे कि एयरलाइन्स, रेलवे, पेट्रोल पंप और हॉस्पिटल में चलने दिए जा रहे हैं। सिंह ने कहा था कि इससे किसान अच्छे बीज खरीद सकेगा। सिंह ने कहा था कि रोजना के हिसाब से 24 नवंबर तक 10 हजार रुपए के बीज खरीदने की इजाजत देनी चाहिए। सिंह ने कहा था कि चाहे तो बदले में किसानों से प्रूफ के लिए कुछ जमा भी करवाया जा सकता है। बता दें कि रबी की फसल के लिए नवंबर और 10 दिसंबर तक का वक्त सबसे अहम होता है। 11 नवंबर तक 146.85 लाख हेक्टेयर यानी 23 प्रतिशत गेहूं बोया जा चुका है। यह साल के कुल टारगेट का 23 प्रतिशत होता है।
8 नवंबर की रात से शुरू हुई नोटबंदी से लोग काफी परेशान हैं। बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसको देखते हुए सरकार बार-बार नए कदम उठाती है। गुरुवार (17 नवंबर) को वित्त सचिव ने लोगों को कुछ राहत देने वाली खबर दी थी। बताया गया था कि जिन घरों में शादी है वह शादी का कार्ड दिखाकर 2.5 लाख रुपए तक निकाल सकेंगे। लेकिन बैंकों से 4500 रुपए बदलवाने की लिमिट को घटाकर 2000 भी कर दिया गया था। नोटबंदी को लेकर ससंद के दोनों सदनों में भी हंगामा है।

गुलाम नबी आजाद बोले- उरी हमले में उतने लोग नहीं मारे गए, जितने सरकार की गलत नीति से मर गए

गुलाम नबी आजाद बोले- उरी हमले में उतने लोग नहीं मारे गए, जितने सरकार की गलत नीति से मर गए

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाब नबी आजाद ने राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। गुलाब नबी आजाद ने कहा, ‘सरकार की गलत नीति से जितने लोग मर गए हैं, उससे आधे तो पाकिस्तानी आतंकियों ने उरी हमले में नहीं मारे थे। जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में चर्चा के लिए नहीं आएंगे, हम लोग सदन की कार्यवाही को नहीं चलने देंगे।’ आजाद ने कहा कि नोटबंदी के फैसले की वजह से 40 लोग मारे गए हैं। बता दें, 18 सितंबर को कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकियों ने एक सेना कैम्प पर हमला कर दिया था। इसमें भारतीय सेना के कुल 20 जवान शहीद हो गए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता वैंकया नायडू ने कहा कि विपक्ष के नेता इस तरह के बयान देकर और इसकी तुलना पाकिस्तानी आतंकी हमलों से करके राष्ट्र का अपमान कर रहे हैं। उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
वहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी इस फैसले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। इसके साथ ही दोनों ने मांग की है कि सरकार तीन दिन के भीतर इस फैसले को वापस ले। अरविंद केजरीवाल ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ‘देशभक्ति की आड़ में घोटाले हो रहे हैं। लेकिन ये घोटाले होने नहीं देंगे, देश के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार हैं। मोदी सरकार यह आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला कर रही है। 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करके 2000 रुपए लॉन्च करके कैसे भ्रष्टाचार खत्म करेंगे। पीएम मोदी ने विजय माल्या को रात में हवाई जहाज में बैठाकर लंदन भेज दिया। माल्या ने बैंकों के करोड़ो रुपए खा लिए हैं। सरकार ने भी उनके अरबों रुपए का लोन माफ कर दिया है। लेकिन यहां पर लोग लाइनों में खड़े हैं।’ वहीं ममता बनर्जी ने कहा, ‘ऐसा संकट तो आपातकाल के दौरान भी नहीं देखा था। यह फैसला भारत को 100 साल पीछे ले जा सकता है। आगे को छोड़ो, देश को पीछे कर दिया। अगर आपमें हिम्मत है तो हमें जेल भेजो और गोली मारो। लेकिन हम हमारी लड़ाई जारी रखेंगे। हम गरीब लोगों को भूखा नहीं मरने देंगे।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने का ऐलान आठ नवंबर को किया था। इसके साथ ही लोगों को अपने पुराने नोट चेंज करने के लिए 31 दिसंबर का समय दिया था। साथ ही में ही बैंक या एटीएम से पैसे निकालने के लिए एक सीमा तय की गई थी। पीएम के ऐलान के बाद से ही बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। इस दौरान कईयों की मौत भी हो गई। एटीएम से एक दिन में एक व्यक्ति केवल 2400 रुपए निकाल सकता है, वहीं बैंक से वह सप्ताह में एक बार में 24 हजार रुपए में निकाल सकते हैं।