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नोटबंदी पर भड़का रूस, कहा- लिमिट इतनी कम है कि अच्छे से डिनर का बिल भी नहीं दे सकते

भारत सरकार द्वारा उठाए गए नोटबंदी के कदम पर रूस ने अपना रुख कड़ा कर लिया है।

भारत सरकार द्वारा उठाए गए नोटबंदी के कदम पर रूस ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। इतना ही नहीं रूस ने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि भारतीय राजदूतों के साथ ‘बदले की कार्यवाही’ की जा सकती है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, रूस की सरकार ने बताया कि राजदूत एलेक्सजेंडर कदाकिन ने विदेश मंत्रालय को नोटबंदी से हो रही परेशानी के लिए एक पत्र लिखा है और फिलहाल उसके जवाब का इंतजार कर रहे हैं। दो दिसंबर को मॉस्को के कुछ सूत्रों ने कहा था कि विरोध जताने के लिए उनकी तरफ से भारतीय राजनयिक को समन भी किया जा सकता है। रूस की सरकार इस बात का विरोध कर रही है कि भारत सरकार ने उनके राजदूतों पर हफ्ते में 50 हजार रुपए निकालने की लिमिट लगा दी है। जिससे उनके राजदूतों को काफी परेशानी हो रही है।
खबर के मुताबिक, राजदूत ने सवाल किया कि इतने पैसों में कैसे काम चलेगा। नोटबंदी से हो रही परेशानी का जिक्र करते हुए एलेक्सजेंडर कदाकिन ने अपने पत्र में लिखा है, ‘लिमिट इतनी कम है कि एक अच्छा सा डिनर का बिल भी नहीं भरा जा सकता।’ उन्होंने आगे सवाल किया कि इतने पैसों में दिल्ली में इतना बड़ा दूतावास कैसे काम करेगा? रूस के दिल्ली में बने दूतावास में लगभग 200 के करीब लोग रहते हैं।
इससे पहले पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने भी नोटबंदी से हो रही परेशानी का जिक्र किया था। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने 8 दिसंबर को नोटबंदी का एलान किया था। बताया गया था कि 30 दिसंबर के बाद 500 और 1000 के नोट चलने बंद हो जाएंगे। साथ ही 2000 और 500 के नए नोट लाने का भी एलान किया गया था। हालांकि, लोगों के पैसे निकालने और जमा करवाने के लिए कुछ पाबंदी लगाई गई हैं जिनके नियम वक्त-वक्त पर सरकार द्वारा बदले जा रहे हैं।
 

जयललिता के निधन पर अपोलो अस्‍पताल ने कहा- हमने उन्‍हें बचाने के लिए हरसंभव क्लिनिकल प्रयास किया

तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता को पांच दिसंबर की रात में निधन हो गया। वे 74 दिन से अपोलो अस्‍पताल में भर्ती थीं।
तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता का पांच दिसंबर की रात में निधन हो गया। वे 74 दिन से अपोलो अस्‍पताल में भर्ती थीं। अपोलो अस्‍पताल ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि रविवार दोपहर को उन्‍हें कार्डिएक अरेस्‍ट हुआ। इसके बाद डॉक्‍टर्स ने उन्‍हें बचाने की पूरी मेहनत की लेकिन कामयाबी नहीं मिली और सोमवार(पांच दिसंबर) को रात साढ़े 11 बजे उनका निधन हो गया। अपोलो अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘‘अवर्णननीय दुख के साथ हम अपनी प्रतिष्ठित सम्मानीय तमिलनाडु की मुख्यमंत्री पुरात्ची थालाइवी अम्मा के रात ग्यारह बजकर 30 मिनट पर दुखद निधन की घोषणा करते हैं। हमारी सम्मानित मुख्यमंत्री सेल्वी जे जयललिता को 22 सितंबर को बुखार और निर्जलीकरण की शिकायतों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। माननीय मुख्यमंत्री पर क्रिटिकल केयर यूनिट में मल्टी डिसिप्लिनरी केयर का असर हुआ और वह काफी हद तक उबर गई थीं और मुंह से खाना लेने में समक्ष हो गई थीं।’’
विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘उस आधार पर माननीय मुख्यमंत्री को एडवांस्ड क्रिटिकल केयर यूनिट से हाई डिपेंडेंसी यूनिट में स्थानांतरित किया गया, जहां हमारे विशेषज्ञ चिकित्सकों की करीबी निगरानी में उनके स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण अंगों के कामकाज में सुधार जारी था।’ विज्ञप्ति में कहा गया है कि दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री को चार दिसंबर की शाम को गंभीर दिल का दौरा पड़ा, जब उनके कमरे में इंटेसिविस्ट थे। मुख्यमंत्री को तत्काल एक घंटे के भीतर सीपीआर और ईसीएमओ मदद प्रदान किया गया। ईसीएमओ फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे आधुनिक उपचार उपलब्ध है। उन्हें जीवित रखने के लिए हर संभव क्लिनिकल प्रयास किये गए। हालांकि, हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद मुख्यमंत्री की स्थिति ने उन्हें उबरने से अक्षम बना दिया और उनका सोमवार( 5 दिसंबर) की रात साढ़े 11 बजे निधन हो गया।
जयललिता के देहांत की खबर से पूरे राज्य में शोक की खबर फैल गई। वहीं, ओ पनीरसेल्वम को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। पनीरसेल्वम ने आधी रात मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के मद्देनजर मंगलवार से सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। मुख्य सचिव पी राम मोहन राव ने एक अधिसूचना में कहा कि इस अवधि में सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इस दौरान कोई आधिकारिक मनोरंजन भी नहीं होगा। सरकार ने राज्य में सभी शिक्षण संस्थानों में तीन दिवसीय अवकाश की भी घोषणा की है। पड़ोस के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी जयललिता के सम्मान में मंगलवार को सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में एक दिन की छुट्टी की घोषणा की है।

जयललिता के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जताया दुख, कहा- जया से बातचीत के मौकों को संजोकर रखेंगे

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंध रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया।

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंध रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। वे अंतिम दर्शन के लिए चेन्‍नई भी जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि इससे भारतीय राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। चेन्नई के एक निजी अस्पताल में 5 दिसंबर रात को अंतिम सांस लेने वाली अन्नाद्रमुक प्रमुख की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि लोगों से उनका जुड़ाव, गरीबों, महिलाओं तथा वंचितों के कल्याण के लिए उनकी चिंता को हमेशा ‘‘प्रेरणा स्रोत’’ के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह उन असंख्य मौकों को हमेशा संजोकर रखेंगे जब ‘‘मुझे जयललिता जी के साथ बातचीत का अवसर मिला। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।’’
कई ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सेल्वी जयललिता के निधन पर बहुत दुखी हूं। उनके निधन ने भारतीय राजनीति में बड़ा शून्य पैदा किया है। इस दुख की घड़ी में मेरी प्रार्थनाएं और भावनाएं तमिलनाडु की जनता के साथ हैं।’’
जयललिता का 75 दिन तक मौत से लड़ने के बाद चेन्नई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके देहांत की खबर से पूरे राज्य में शोक की खबर फैल गई। तीन दिन के लिए राज्य के सारे स्कूलों को बंद रखा गया है। लोगों के दुख और गुस्से को देखते हुए पुलिस अलर्ट पर है। इससे पहले बुखार एवं निर्जलीकरण की शिकायत के चलते जयललिता को 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं देर रात पार्टी मीटिंग में पन्‍नीरसेल्वम को विधयाक दल का नेता चुन लिया गया। बाद में पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली।

…जब विधानसभा में बदसलूकी के बाद जयललिता ने ली थी कसम, अब सीएम बनकर ही लौटूंगी

68 वर्षीय जयललिता 22 सितंबर से ही अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। रविवार को उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हुआ था।

तमिलनाडु की सीएम जयललिता चेन्नई के अपोलो अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। अस्पताल ने कहा है कि वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं लेकिन सीएम की हालत अभी गंभीर बनी हुई। उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि अपनी जिजीविषा के लिए विख्यात जयललिता ये लड़ाई जरूर जीतेंगे। इस मौके पर उनके चाहने वाले 1989 में तमिलनाडु विधान सभा में हुए उस घटना को याद कर रहे हैं जब सदन में उनके साथ बदसलूकी की गई थी और उन्होंने कसम खाई थी कि वो सीएम बनकर ही विधान सभा में लौटेंगे। महज दो साल बाद उन्होंने अपनी कसम निभाते हुए सीएम के रूप में सदन में वापसी की थी। उनके चाहने वाले उन्हें प्यार से “अम्मा” कहते हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है आकस्मिक स्थिति से तैयार रहने के लिए अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं। वहीं अर्ध सैनिक बलों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। आइए जयललिता की राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं।
जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर के एक परंपरागत तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब वो दो साल की थीं तभी उनके पिता का देहांत हो गया। पिता का निधन परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी इसलिए उन्हें 1961 में महज 13 साल की उम्र में बाल कलाकर के तौर पर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। 1964 में कन्नड़ फिल्म चिन्नादा गोमबे (सोने की गुड़िया) से उन्होंने व्यस्क भूमिकाएं करनी शुरू की। उन्होंने फिल्मी जीवन की शुरुआत भले ही कन्नड़ फिल्मों से की हो लेकिन उन्हें बड़ी सफलता तमिल फिल्मों में मिली। 1965 में जयललिता ने अपनी पहली तमिल फिल्म “वेन्निरा अदाई” (सफेद लिबास) की। इसी साल उन्होंने तमिल फिल्मों के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के साथ भी पहली बार काम किया।
एमजीआर और जयललिता की जोड़ी सुनहरे परदे पर हिट रही। दोनों ने एक साथ 28 फिल्मों में लीड रोल किया। 1970 के दशक में दोनों ने अज्ञात कारणों से एक साथ फिल्में करनी बंद कर दी थीं। दोनों ने आखिरी बार 1973 में आई फिल्म पट्टीकट्टू पोनैया में काम किया था। हालांकि जयललिता 1980 तक फिल्मों में काम करती रहीं। उन्होंने अपने करीब बीस साल लंबे फिल्मी करियर में करीब 300 फिल्मों में काम किया। उन्होंने कुछ हिंदी और एक अंग्रेजी फिल्म में भी अभिनय किया था लेकिन वहां वो सफलता का स्वाद नहीं चख सकीं।
फिल्मों में जयललिता के मेंटर रहे एमजीआर राजनीति में भी उनके गुरु बने। 1977 में एआईएडीएमके के नेता के तौर पर एमजीआर पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। उनके पीछे-पीछे जयललिता भी आज्ञाकारी शिष्या की तरह 1982 में एआईएडीएमके की सदस्य बनकर राजनीति में आ गईं। 1983 में उन्हें पार्टी के प्रचार विभाग का सचिव बनाया गया। 1984 में एमजीआर ने उन्हें राज्य सभा का सांसद बनाया। हालांकि कुछ समय बाद ही एमजीआर से उनके मतभेद शुरू हो गए। जब 1987 में एमजीआर का देहांत हुआ तो पार्टी में विरासत की जंग छिड़ गई। पार्टी का एक धड़ा एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन के साथ था तो दूसरा धड़ा जयललिता के साथ।

एआईएडीएमके के कुल 132 विधायकों में से 97 के समर्थन से जानकी 1988 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं लेकिन राजीव गांधी की तत्कालीन केंद्र सरकार ने 21 दिन बाद ही उनकी सरकार को बरखास्त कर दिया। 1989 के तमिलनाडु विधान सभा चुनाव में एआईएडीएमके की अंदरूनी कलह का साफ असर दिखा और डीएमके सत्ता में वापस आ गई। जयललिता के गुट को चुनाव में 27 सीटें मिली थीं वहीं जानकी गुट को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में करारी हार के बाद जानकी ने राजनीति से किनारा कर लिया और एआईएडीएमकी और एमजीआर की राजनीतिक विरासत की एकमात्र उत्तराधिकारी जयललिता बन गईं।

तमिलनाडु और जयललिता के राजनीतिक इतिहास में 25 मार्च 1989 का दिन काफी अहम है। उस दिन विधान सभा के अंदर क्या हुआ इस पर विवाद है लेकिन इतना तय है कि डीएमके और एआईडीएमके विधायकों की हाथापाई के बीच जयललिता के संग सदन में अभद्रता की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जयललिता उस दिन सदन से यह कहते हुए बाहर चली गईं कि वो दोबारा मुख्यमंत्री बनकर ही विधान सभा में वापस आएंगी। विधान सभा में हुई बदसलूकी के महज दो साल बाद जयललिता के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके और कांग्रेस गठबंधन ने राज्य की 234 सीटों में से 225 पर जीत हासिल कर ली और जयललिता पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।

1989 में डीएमके विधायकों की कथित बदसलूकी के बाद जयललिता कुछ इस हालत में विधान सभा से बाहर आईं। (एक्सप्रेस आर्काइव)

(1989 में डीएमके विधायकों की कथित बदसलूकी के बाद जयललिता कुछ इस हालत में विधान सभा से बाहर आईं। (एक्सप्रेस आर्काइव))

मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही वक्त बाद जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था इत्यादि के आरोप लगने लगे। नतीजा ये हुआ कि जब 1996 में विधान सभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी महज चार सीटों पर सिमट गई। इसी साल उनके खिलाफ करुणानिधि सरकार ने भ्रष्टाचार के करीब 48 मामले दर्ज कराए। जयललिता को कई महीने जेल में बिताने पड़े। 1997 में सुब्रमण्यम स्वामी ने उनके ऊपर करीब 66 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति हासिल करने का मामला दर्ज कराया जो एक दशक से अधिक समय तक जयललिता के गले की फांस बना रहा।

साल 2001 के विधान सभा चुनाव में एआईडीएमके ने 196 सीटों पर जीत हासिल करके भारी बहुमत हासिल किया। भ्रष्टाचार के मुकदमे के कारण खुद जयललिता चुनाव नहीं लड़ सकी थीं फिर भी चुनावी जीत के बाद उनकी पार्टी ने उन्हें ही सीएम चुना। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी। उन्होंने अपनी जगह ओ पनीरसेल्वन को सीएम बनाया। साल 2003 में हाई कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के कई मामलों में बरी किए जाने के बाद उन्हें विधान सभा चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई। चुनाव जीतकर वो फिर राज्य की सीएम बनीं। साल 2006 के विधान सभा चुनाव में उन्हें डीएमके गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
साल 2011 के विधान सभा चुनाव में एआईडीएमके को 203 सीटों पर जीत मिली। जयललिता एक बार फिर राज्य की सीएम बनीं। 27 सितंबर 2014 को अदालत ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में चार साल की सजा सुनाते हुए 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। जयललिता को करीब एक महीने जेल में रहना पड़ा। उनकी जगह ओ पनीरसेल्वम एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने। साल 2015 में हाई कोर्ट ने जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी कर दिया और वो फिर से राज्य की सीएम बन गईं।
साल 2016 में हुए विधान सभा चुनाव में जयललिता ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। तमिलनाडु के इतिहास में 32 साल बाद किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला था। तीन दशक पहले ये कारना उनके राजनीतिक गुरु एमजीआर ने किया था। मई 2016 में जयललिता छठवीं बार राज्य की सीएम बनीं। 68 वर्षीय जयललिता 22 सितंबर को तबीयत खराब होने के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती हुईं। राहुल गांधी, अमित शाह और अरुण जेटली जैसे कई प्रमख नेताओं को अस्पताल में उनके मिलने नहीं दिया गया। उनकी सेहत को लेकर इस दौरान रहस्य का वातावरण बना रहा। रविवार (3 दिसंबर) को पहले खबर आई कि वो समान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दी गईं और किसी भी वक्त घर जा सकती हैं। लेकिन थोड़ी देर बाद ही ये खबर आने लगी कि उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हुआ है। सोमवार सुबह खबर आई कि उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टिम और ईसीएमओ पर रखा गया है और उनकी हालात चिंताजनक है।

जयललिता के इलाज में सलाह देने वाले लंदन के डॉक्‍टर रिचर्ड बेएल ने लिखा- हालात बेहद खतरनाक, पढ़‍िए उनकी चिट्ठी

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के इलाज में मदद कर रहे ब्रिटिश डॉक्टर रिचर्ड बेएल ने पत्र लिखकर अपनी संवेदना व्यक्ति करते हुए कहा कि सीएम की हालत बहुत गंभीर है। डॉक्टर रिचर्ड ने कहा है कि सीएम जयललिता को चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में विश्व की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा दी जा रही है। अपोलो और एम्स के डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। 22 सिंतबर से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती सीएम जयललिता को रविवार (4 दिसंबर) को कार्डिएक अरेस्ट हुआ जिसके बाद से उनकी स्थित गंभीर बनी हुई है।
पढ़ें डाक्टर रिचर्ड बेएल का पत्र-
कल मुझे ये जानकर बहुत दुख पहुंचा कि मैडम चीफ मिनिस्टर को अचानक कार्डिएक अरेस्ट हुआ है। अपोलो अस्पताल में उनकी स्थिति पर मैं करीबी निगाह बनाए हुए हूं और बाकियों की तरह उनके स्वास्थ्य में आ रहे सुधार से उत्साहित हूं। दुर्भाग्यवश उनकी तबीयत में आए सुधार के बावजूद उनकी सेहत से जुड़े अंदरूनी खतरों की वजह से नई समस्याओं का जोखिम बना रह रहा है।
उनकी हालत बहुत गंभीर है लेकिन मैं इस बात की तस्दीक कर सकता हूं कि उन्हें इस स्तब्ध कर देने वाले झटके से उबरने में हर संभव मदद की जा रही है। उनका इलाज एक अतिकुशल विशेषज्ञ मल्टीडिसिप्लिनरी टीम कर रही है और इस समय वो एक्स्ट्रा-कॉरपोरल लाइफ सपोर्ट पर हैं। ये इस समय दुनिया का सबसे विकसित लाइफ सपोर्ट सिस्टम है और ऐसी स्थिति में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल इसी तकनीक का प्रयोग करते। चेन्नई अपोलो में इस तकनीक की मौजूदगी से पता चलता है कि ये सेंटर उच्चतम विशेषज्ञता से लैस है और अपोलो और एम्स के टीमों ने हर वक्त मैडम का पूरा ख्याल रखा, जो पूरी तरह विश्वस्तरीय है।
इस कठिन वक्त में मेरे विचार और प्रार्थनाएं मैडम, उनके परिवार, उनके शुभेच्छुओं और तमिलनाडु की जनता से साथ है।
प्रोफेसर रिचर्ड बेएल

भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान के घर से चांदी की पांच शहनाइयां चोरी

भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की यादगार धरोहरों में शुमार पांच शहनाइयां वाराणसी स्थित उनके बेटे के घर से चोरी हो गई है जिनमें से एक उनकी पसंदीदा शहनाई थी जो वह मुहर्रम के जुलूस में बजाया करते थे.
भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की यादगार धरोहरों में शुमार पांच शहनाइयां वाराणसी स्थित उनके बेटे के घर से चोरी हो गई है जिनमें से एक उनकी पसंदीदा शहनाई थी जो वह मुहर्रम के जुलूस में बजाया करते थे ।  दस बरस पहले बिस्मिल्लाह खान के इंतकाल के बाद से ही उनकी याद में संग्रहालय बनाने की मांग होती रही लेकिन अभी तक कोई संग्रहालय नहीं बन सका । ऐसे में उनकी अनमोल धरोहरें उनके बेटों के पास घर में संदूकों में पड़ी हैं जिनमें से पांच शहनाइयां कल रात चोरी हो गई ।  बिस्मिल्लाह खान के पौत्र रजी हसन ने वाराणसी से भाषा को बताया ,‘हमें कल रात इस चोरी के बारे में पता चला और हमने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है । चोरी गए सामान में चार चांदी की शहनाइयां, एक चांदी की और एक लकड़ी की शहनाई, इनायत खान सम्मान और दो सोने के कंगन थे ।’
उन्होंने बताया ,‘‘ हमने पिछले दिनों दालमंडी में नया मकान लिया है लेकिन 30 नवंबर को हम सराय हरहा स्थित पुश्तैनी मकान में आये थे जहां दादाजी रहा करते थे । मुहर्रम के दिनों में हम इसी मकान में कुछ दिन रहते थे । जब नये घर लौटे तो दरवाजा खुला था और संदूक का ताला भी टूटा हुआ था । अब्बा (काजिम हुसैन) ने देखा कि दादाजी की धरोहरें चोरी हो चुकी थीं ।’
हसन ने कहा ,ये शहनाइयां दादाजी को बहुत प्रिय थीं । इनमें से एक पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंहराव ने उन्हें भेंट की थी, एक केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने और एक लालू प्रसाद यादव ने दी थी जबकि एक उन्हें उनके एक प्रशंसक से तोहफे में मिली थी ।’ उन्होंने कहा ,‘‘ इनमें से एक उनकी सबसे खास शहनाई थी जिसे वह मुहर्रम के जुलूस में बजाया करते थे । अब उनकी कोई शहनाई नहीं बची है । शायद रियाज के लिये इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की कोई शहनाई बची हो । उनकी धरोहरों के नाम पर भारत रत्न सम्मान, पदमश्री , उन्हें मिले पदक वगैरह हैं ।’ यह पूछने पर कि इतनी अनमोल धरोहरें उन्होंने घर में क्यों रखी थीं , हसन ने कहा कि पिछले दस साल से उनका परिवार इसकी रक्षा करता आया था तो उन्हें लगा कि ये सुरक्षित हैं । उन्होंने कहा , हमें पहले उम्मीद थी कि दादाजी की याद में म्युजियम बन जायेगा लेकिन नहीं बन सका । हम इतने साल से उनकी धरोहरों को सहेजे हुए थे । हमें क्या पता था कि घर से उनका सामान यूं चोरी हो जायेगा ।

नोटबंदी को हिंदू महासभा ने बताया हिंदू विरोधी और नरेंद्र मोदी के शासन के अंत की शुरुआत

अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि नोटबंदी मोदी सरकार के शासन के अंत की शुरुआत है।

अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि नोटबंदी मोदी सरकार के शासन के अंत की शुरुआत है। महासभा के वरिष्‍ठ सदस्‍यों ने मोदी को हिंदू विरोधी भी बताया है। उन्‍होंने कहा कि हिंदुओं में शादी की सीजन से पहले नोटबंदी की गई। वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता देश में इस्‍लामिक बैंकों को बढ़ावा दे रहे हैं। सरकार के कदम पर सवाल उठाते हुए हिंदू महासभा के राष्‍ट्रीय महासचिव पूजा शकुन पांडे ने कहा कि इस योजना का उद्देश्‍य अब तक समझ नहीं आया। उन्‍होंने अलीगढ़ में कहा, ”गरीब लोग जो रोज के 200-300 रुपये कमाते थे वे और सरकारी पेंशन पर जीवन गुजार रहे लोग सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुए हैं। इस कदम का अमीरों पर कोई असर नहीं दिखता।”

पूजा ने आगे कहा कि नोटबंदी का एलान हिंदुओं में शादी का सीजन शुरू होने से ठीक पहले किया गया। हजारों परिवारों को अपने दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों से पैसा उधार लेना पड़ा। कई परिवारों को शादी आगे खिसकानी पड़ी तो कई ने रद्द कर दी। ऐसे समय में तथा‍कथित हिंदुत्‍व पार्टी के नेता देश में इस्‍लामिक बैंकिंग को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका इशारा शोलापुर से भाजपा सांसद ओर महाराष्‍ट्र के सहकारिता मंत्री सुभाष देशमुख की ओर था। देशमुख ने हाल ही में देश का पहला इस्‍लामिक बैंक शुरू किया है। लोकमंगल कॉपरेटिव बैंक लिमिटेड में बिना ब्‍याज के पैसे किए जाते हैं। यह पैसा अल्‍पसंख्‍यक समुदाय के लोगों को जीरो रेट पर उधार दिया जाता है।

अखिलेश यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा- गांववालों को डिजीटल ट्रांजेक्शन कौन सिखाएगा?

लखनऊ में एक समारोह के दौरान अखिलेश यादव ने कहा, 'आपको (मोदी) बताना चाहिए कि डिजिटल इंडिया के लिए कैसी तैयारियां की गई थीं?'

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कैशलेस सोसाइटी’ की वकालत पर सवाल खड़े करते हुए रविवार को कहा कि गांवों में रहने वाली आधी से ज्यादा आबादी को लेन-देन के इन डिजिटल तरीकों के बारे में बताने के लिये केंद्र सरकार ने कोई तैयारी नहीं की है। अखिलेश ने ‘लखनऊ हेरिटेज जोन’ के उद्घाटन के अवसर पर कैशलेस सोसाइटी बनाने पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जोर दिये को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘आप (मोदी) बताएं कि डिजिटल इंडिया के लिये आपकी क्या तैयारी है। कैशलेस लेन-देन करना कौन सिखाएगा। इसे गांव तक कैसे पहुंचाएंगे। नौजवान तो फिर भी इसे कर लेते हैं लेकिन बाकी लोगों का क्या।’
उन्होंने कहा, ‘हमने गांवों तक लैपटॉप पहुंचाया है। हमारी स्मार्टफोन योजना के लिये एक करोड़ पंजीकरण हो चुके हैं। आप (मोदी) बताइये, आप क्या तैयारी कर रहे हैं। आपने पूरे देश और समाज को हिला दिया। आपने गुल्लकें तुड़वा दीं। महिलाओं की जमा पूंजी बाहर करवा दी। याद रहे, जो सरकार जनता को दुख देती है, जनता उस सरकार को हटा देती है।’
मुख्यमंत्री ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को विकास के मामले में मुकाबले की चुनौती देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का चुनाव होने वाला है, मुकाबला कर लीजिये, हमारा ना तो काम में मुकाबला है और ना ही नेतृत्व में। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चुनाव के मद्देनजर भाजपा कई यात्राएं निकल रही है। मैं पूछता हूं कि वे बताएं कि पिछले ढाई साल के दौरान केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिये क्या किया है? अखिलेश ने मायावती की अगुवाई वाली बसपा पर भी तंज करते हुए कहा, ‘वो पत्थर वाली सरकार बताए कि उसने अपने राज में जनता के लिये क्या काम किये?’
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की समाजवादी सरकार ने लोगों को खुशी दी है। उसके फैसले आम लोगों के बीच पहुंचे हैं। अगर आप चाहते हैं कि लगातार विकास और तरक्की के काम हों तो प्रदेश में एक बार फिर सपा को सरकार बनाने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने ना सिर्फ लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में काम किया है। समाजवादियों ने हर वर्ग को जोड़ने का काम किया है। यहां का विकास ही खुशहाली लाएगा। इससे व्यापार बढ़ेगा और प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। अखिलेश ने पुराने लखनऊ में बने हेरिटेज जोन के काम में लगे अधिकारियों की सराहना की और कहा कि इससे पुराने शहर की खूबसूरती उसके असल रूप में दिखेगी।

हार्ट ऑफ एशिया: भारत-पाकिस्तान तनाव पर बोले सरताज अज़ीज़, किसी देश पर दोष मढ़ना आसान है

अपनी धरती से आतंकवाद पनपने को लेकर तीखी आलोचना झेल रहे पाकिस्तान के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने रविवार (4 दिसंबर) को पलटवार करते हुए कहा कि किसी एक देश पर दोषारोपण करना ‘सरल’ है। उन्होंने इसके साथ ही ‘हार्ट ऑफ एशिया’ (एचओए) सम्मेलन में भारत-पाक संबंधों के तनाव का मुद्दा उठाया। अजीज ने जोर दिया कि नियंत्रण रेखा पर ‘तनाव’ के बावजूद उनका बैठक में शामिल होना अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान की पूरी प्रतिबद्धता का सबूत है। उन्होंने नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाले दक्षेस सम्मेलन के रद्द होने पर अप्रसन्नता जतायी और क्षेत्रीय सहयोग के लिए इसे झटका बताया। उन्होंने जम्मू कश्मीर के मुद्दे का जिक्र नहीं किया।

अजीज ने कहा कि अफगानिस्तान जिन गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, पाकिस्तान उससे अवगत है। उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम उनकी नजर में लगातार हिंसा और आतंकवादी कृत्यों में दर्जनों लोगों की जान जा रही है। इसे सामूहिक प्रयासों के जरिए प्रभावी तरीके से और हल करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान में सुरक्षा स्थिति काफी जटिल है। हिंसा में हाल में वृद्धि को लेकर किसी एक देश पर दोषारोपण करना सरल है। हमें एक वस्तुपरक और व्यापक रूख रखने की जरूरत है।’ अजीज की इस प्रतिक्रिया के पहले भारत और अफगानिस्तान ने आतंकवाद का समर्थन करने और उसे प्रायोजित करने के लिए पाकिस्तान पर निशाना साधा तथा आतंकवादियों के साथ साथ उनके आकाओं के खिलाफ ‘ठोस कार्रवाई’ का आह्वान किया।

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक मंत्री स्तरीय सम्मेलन का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। गनी ने देश के खिलाफ ‘अघोषित युद्ध शुरू करने के लिए’ पाकिस्तान पर सीधा हमला बोला और पाक-प्रायोजित आतंकवाद के लिए एशियाई या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए जाने की मांग की। अजीज ने सम्मेलन में अपने संबोधन में कहा, ‘भारत के साथ कामकाजी सीमा और नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ने के बावजूद कार्यक्रम में मेरी भागीदारी अफगानिस्तान तथा क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए पाकिस्तान की पूरी प्रतिबद्धता का सबूत है।’ उन्होंने अफगान मुद्दे को राजनीतिक बातचीत के जरिए हल करने पर जोर देते हुए कहा, ‘मुझे आज इस उद्देश्य की दिशा में सार्थक बातचीत की उम्मीद है।’

अजीज ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नवंबर में इस्लामाबाद में आयोजित दक्षेस शिखर सम्मेलन का स्थगन इन प्रयासों के लिए झटका था और क्षेत्रीय सहयोग की भावना को कमजोर किया। उन्होंने कहा कि दक्षेस न सिर्फ क्षेत्रीय सहयोग के लिए बल्कि संबंधों में सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण मंच है। पाकिस्तान से पनपने वाले सीमा पार आतंकवादी हमलों का जिक्र करते हुए भारत दक्षेस सम्मेलन से हट गया था। अफगानिस्तान और दक्षेस के अन्य देशों ने भी इस आधार पर आठ सदस्यीय बैठक को रद्द करने की मांग की थी कि क्षेत्र में आतंकवाद को शह दी जा रही है।

पाकिस्तान आधारित आतंकवादी संगठनों द्वारा भारत में कई आतंकवादी हमलों तथा करीब दो महीने पहले नियंत्रण रेखा के पार भारत के लक्षित हमले को लेकर दोनों देशों के संबन्धों में तनाव में वृद्धि के बीच अजीज शनिवार (3 दिसंबर) रात यहां पहुंचे। अजीज ने कहा कि अफगान सरकार और तालिबान के बीच बातचीत के लिए शांति प्रक्रिया का अभी तक सकारात्मक नतीजा नहीं निकला है और पाकिस्तान शांति वार्ता को सुगम बनाने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमारी नजर में, अफगान संघर्ष का कोई सैन्य हल नहीं है और हमारे सभी प्रयास ‘अफगान नेतृत्व में, अफगान प्रक्रिया’ के जरिए राजनीतिक रूप से बातचीत के माध्यम से हल हासिल करने के लिए होने चाहिए।’

अजीज ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति के लिए पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ अफगानिस्तान के संपर्क को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान हार्ट ऑफ एशिया-इंस्ताबुल प्रक्रिया को काफी महत्व देता है। उन्होंने कहा कि अफगान सुरक्षा बल आतंकवादी हमलों का जवाब देने में अपनी जमीन पर दृढ़ता और बहादुरी से डटे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 2020 तक सुरक्षा और आर्थिक विकास क्षेत्रों में अफगानिस्तान को समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहरायी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और लोग अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए अफगानिस्तान के लोग और वहां की निर्वाचित सरकार के साथ पूरी तरह से एकजुटता में खड़े हैं।

अजीज ने कहा, ‘इस मकसद को हासिल करने के लिए हम जो कर सकते हैं, हम करेंगे।’ आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए अधिक क्षेत्रीय संपर्क पर जोर देते हुए अजीज ने कहा कि पाकिस्तान बढ़ती क्षेत्रीय परिवहन आवश्यकतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय रेल, सड़क और ऊर्जा पारेषण नेटवर्क बना रहा है। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के जरिए अत्याधुनिक आधारभूत ढांचे पर जोर है। अजीज ने उम्मीद जतायी कि बातचीत सार्थक होगी और अफगानिस्तान में स्थायी शांति तथा स्थिरता के लिए प्रयासों पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में स्थायी शांति और स्थिरता हमारा साझा उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि 2017 में ‘हार्ट ऑफ एशिया’ के सातवें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन की मेजबानी के लिए अजरबैजान के आमंत्रण का भी पाकिस्तान स्वागत करता है और सम्मेलन में उसकी सक्रिय भागीदारी की उम्मीद करता है।