ज्योतिष

डोगरगढ मे माँ बम्लेश्वरी पहाड़ों के उपर है विराजमान ,,मन्दिर ट्रस्ट द्वारा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए किए गए है व्यापक इंतजामात

A REPORT BY : अजीत मिश्रा

राजनांदगांव-- क्वांर नवरात्रि की शुरूवात आज से हो गई है...जिसमे देश के सभी माता देवालयों मे भक्तों का ताता लगेगा और भक्त मातारानी के दर्शन करने पहुचेगें..आज से नवरात्री की शुरूवात हो रही है....आज मां के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है...राजनांदगाँव जिले के डोगरगढ मे माँ बम्लेश्वरी पहाड़ों के उपर विराजमान है...और प्रत्येक वर्ष यहां नवरात्रि का मेला लगता है, इस वर्ष भी मेले को लेकर मन्दिर ट्रस्ट द्वारा बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजामात कर रखे है, मन्दिर ट्रस्ट के सचिव द्वारा बताया गया कि इस वर्ष साढ़े 7 हजार ज्योति कलश भक्तों द्वारा प्रज्वलित करवाये जा रहे है, जिसमे भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा अमेरिका,कनाडा,ब्रिटेन इत्यादि देशों में बसे भारतीय मूल के लोग भी ज्योति कलश स्थापित करवाते है।


- नक्सली प्रभावित क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था के कडे इंतेजाम किये जाते है..इसी कडी मे पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन की तैयारी यहां पुरी कर ली गई है....इसी तैयारी के बीच नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने की वजह से लगभग 6 सौ से अधिक पुलिस के अधिकारी और जवान को यहा तैनात किया गया है...वही इन नव दिनो मे लगभग 15 लाख से अधिक भक्त मातारानी के दर्शन करने डोगरगढ पहुंचते है...जिसमे भक्तों की सुरक्षा से लेकर माता के दर्शन करने तक का पुरा इंतेजाम किया गया है....नवरात्रि मे चप्पे चप्पे मे पुलिस के जवान तैनात रहेगे।

मन्नत हुई पूरी चौहान परिवार दर्शन करने पहुँचे 12 किलोमीटर दूर से जमीन पर लोटते माँ चंडी दाई मंदिर के दरबार ...

शनि सूर्यवंशी *पकरिया*:- पामगढ़ ब्लॉक के मदनपुर गांव के एक परिवार को पकरिया के मंदिर चंडी दाई में अटूट आस्था है। परिवार के दंपति ने पकरिया में विराजित चंडी दाई से बच्चो के स्वस्थ व खुशियाली की मन्नत मांगी थी। उनकी मन्नत पूरी हुई तो परिवार ने खुशी मनाई। वही आज नवरात्रि पर्व के शुरुवात दिन अपने घर से पूरे लोग तेज बारिश के बीच एक साथ भीगते-भीगते पूरे समय तक श्रद्धा में इस कदर लीन की अपनी हार नही मानी व जमीन पर लौटते हुए श्रद्धा भाव से पूरे परिवार के लोग हाथ मे नारियल पकड़ कर चल निकल पड़े चौहान परिवार के रूप सिंह का कहना है कि उसके पूरे परिवार व जच्चा बच्चा के कुछ दिन तबियत खराब था और उनके परिवार के पूरे लोग अस्वस्थ थे तभी स्वस्थ होने के लिए पकरिया स्थित चंडी दाई मंदिर पर मन्नत मांगी थी जो पूरा हुआ और उनका घर परिवार अब खुशहाली की जिंदगी जी रहे है साथ ही उनका कहना है कि माँ चंडी दाई के छत्र छाया से उनका परिवार व घर सब अच्छे है और अब चंडी दाई का दया दृष्टि उन परिवार पर अच्छे से बना हुआ है इसी लिए आज उनके पूरे परिवार के द्वारा माँ चंडी दाई के दरबार में अपने गाँव मदनपुर से 12 किलोमीटर दूर जमीन पर लोटते हुए पकरिया पहुँचकर उन सभी के द्वारा चंडी दाई को नारियल चढ़ाया गया साथ ही उनके परिवार के द्वारा मंदिर पहुँचकर पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना किया गया। वही इनके परिवार के इस अथाह भक्ति को देखकर आसपास व सड़क पर चलते राहगीरों ने इनकी श्रद्धा कि खूब सरहना किया । इनके परिवार में रतन सिंह , जतन सिंह , सम्राट सिंह , बाऊबंडल सिंह , गिरजा बाई समेत परिवार के लोग शामिल थे।

24 साल बाद फिर आ रही है ये शुभ घड़ी, इन 8 राशि वालों को अचानक मिलेगी कोई बड़ी खुशखबरी


आपको अगले २४ घंटो के अन्दर कोई बहुत बड़ी खुशखबरी मिल सकती हैं। जिनको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा और अधिक धन की प्राप्ति होगी। आप प्रापर्टी, दलाली, ब्याज से अधिक धन कमाएंगे। शनिदेव की कृपा से आपके ऊपर जमकर खुशियों की बरसात होगी। चलिए जानते है उन राशियों के बारे में....

मेष, वृषभ, तुला, कर्क : - इन राशियों के जीवन में चौबीस साल बाद शुभ घड़ी आई है। ,पैसों से जुड़े मामले सभी आसनी से हल हो सकते है। आपकी बौद्धिक चिंतन से कुछ आशंकाएं दूर हो सकती है। लंबे समय बाद परिवार वालों के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर प्राप्त होगा। कार्यभार में इजाफा होगा। आपको कई तरह से धन लाभ होने का योग है आपके परिवार में आपसी प्रेम बढ़ेगा, दिन आनन्द व उल्लास से भरा हुआ होगा व शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य भी काफी अच्छा होगा।

सिंह, कन्या, मिथुन, मीन : - जीवन के हर मोड़ पर आपको सफलता प्राप्त होगी। व्यापार में उन्नति के योग बनते नजर आ रहे हैं और धन लाभ भी हो सकता हैं। आपका खोया हुआ प्यार वापस मिलेगा, आपके बीच की दूरियां मिट जाएंगे। ससुराल पक्ष की तरफ से भी कोई खुशखबरी मिल सकती है। राजकीय कर्मचारियों के लिए नौकरी का वातावरण सुखद होगा। कठिन से कठिन परिस्थितियों का सामना आप आसानी से करेंगे। पैतृक संपत्ति को लेकर घर में उत्पन्न मतभेद की स्थिति समाप्त हो जाएगी। आपके सभी अटके हुए काम बनने लगेंगे। आपको अपने कामकाज का अच्छा परिणाम मिल सकता है। 

 

333 साल बाद भोलेनाथ सिर्फ इन राशियों पर हुए मेहरबान, कहीं आपकी राशि तो नहीं.. पढ़े ..!!


333 साल बाद महादेव इन 4 राशियों पर प्रसन्न हुए हैं जिस कारण इन्हें जल्द ही बड़ी खुशखबरी मिलेगी। इस समय आपकोअधिक मेहनत करनी होगी तभी आपको उस कार्य में सफलता मिल सकती है। घर परिवार की चल रही समस्याएं कुछ कम हो सकती हैं। कुछ छोटे-छोटे कामों में अधिक भागादौड़ी हो सकती है। कुछ अनजान लोगों से बहस होने के योग भी बन रहे हैं। आपको इस प्रकार की स्थिति से बचने का प्रयास करना चाहिए।

आपको बतादे कि आने वाला समय आपके लिए लाइफ चेंजिंग साबित होगा । जिससे आप समाज में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब रहेंगे। और आने वाले समय में आपको जीवन साथी की तरफ से अचानक कोई बहुत बड़ी खुशखबरी सुनने को मिल सकती है, व्यापार करने वाले लोगों को एक बार में बड़ा धन लाभ होने के योग बन रहे हैं, नौकरी करने वाले लोगों को नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है।
वे 4 राशियां मेष, सिंह, तुला और कुंभ हैं।

भगवान करमदेव जी का किया जा रहा पूजा अर्चना

कोटमी सोनार। आदिवासी समाज द्वारा ग्राम परसाही बाना में भगवान करमदेव जी का पूजा अर्चना किया जा रहा है, यहां पर समाज में सुखसमृद्धि ,भाईचारा ,एकता बनी रहे यही कामनाओं के साथ आदिवासी समाज के लोग जुटे हुए है । मांदर के थाप पर कर्मा नृत्य किया जाता है जो आकर्षण का केंद्र बना रहता है आदिवासी समाज के लोग अपने पारम्परिक वेश भूषा धारण किये रहते है ।यह जानकारी रूपेश कुमार कँवर ने दी है। कार्यक्रम को सफल बनाने में ईश्वर सिंह ,मनमोहन ,फिरत राम,रामसिंह,मनोहर सिंह प्यारे लाल सिंह , संतोष कुमार सहित समाज के लोग जुटे हुए है

सावधान : पितृ पक्ष में भूलकर भी मत करें ये 6 काम,खुशियों में लग सकता है ग्रहण

यह बात तो आप सभी जानते ही होंगे की पितृ पक्ष में 16 श्राद्ध होते है, जिनमे लोग अपने पितरों को खुश करते है। हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इन दिनों लोग अपने पितरों को खुश करने के लिए और उनका आशीर्वाद पाने के लिए विभिन्न प्रकार के कार्य करते है। लेकिन आज की इस पोस्ट में हम आपको उन कामों के बारे में बताएंगे जो आपको भूलकर भी पितृ पक्ष में नहीं करने चाहिए।


आपको बता दे कि 13 सितंबर दिन शुक्रवार को सुबह सात बजकर 34 मिनट पर चतुर्दशी तिथि की समाप्ति है। सात बजकर 35 मिनट पर पूर्णिमा का प्रारंभ होगा, जो कि 14 सितंबर दिन शनिवार को सुबह 10 बजकर 02 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। श्राद्ध तर्पण पिंडदान का समय दोपहर का होता है, इसलिए पूर्णिमा 13 सितंबर दिन शुक्रवार को होगी।

-पितृ पक्ष में अगर कोई आपके घर भोजन-पानी मांगने आए तो उसको कभी भी ख़ाली हाथ वापिस मत जाने दे।
-पितृ पक्ष में गाय, कुत्ता, बिल्ली और कौए आदि को नहीं मारना चाहिए बल्कि इनको खाने के लिए कुछ जरूर देना चाहिए।
-पितृ पक्ष में मांसाहार भोजन का सेवन भूलकर भी मत करे। इसके अलावा इस दौरान शराब आदि का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
-पितृ पक्ष में परिवार में होने वाली आपसी कलह से बचे। इस दौरान अपने घर शांत माहौल रखे।
-पितृ पक्ष के दौरान आप अपने घर में जो भी भोजन पकाते है, उसका सेवन करने से पहले उस भोजन में से कुछ भोजन अपने पित्तरो के लिए निकाल कर रख ले।
-पितृ पक्ष के दौरान भौतिक सुख जैसे सोने के आभूषण, नए वस्त्र, वाहन आदि बिलकुल मत खरीदे। ऐसा करना अशुभ माना जाता है।

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12, 13 और 14 तारीख के दिन इन राशि वालों को मिलेंगे शुभ समाचार कहीं आपकी राशि तो नही, जानने के लिए पढ़े

मिथुन, सिंह, कर्क : -

किसी बड़ी खुशखबरी से आप का मन प्रसन्न रह सकता है। कार्य में तरक्की मिल सकती है। नौकरी तलाश कर रहे लोगो को जल्द ही नौकरी की प्राप्ति भी हो सकती है। आर्थिक स्थिति पहले से काफी ज्यादा मजबूत होती दिखेगी। अछ्हा समय आपके जीवन के लिए शुरू हो चूका है। कार्य क्षेत्र में आपको अच्छा मुनाफा हासिल हो सकता है। कर्मकाज में आपका मन अच्छा रह सकता है। नए मौके आपको मिल सकते है। मान सम्मान के स्तर वृद्धि हो सकती है। भावात्मक संतुलन आपके बने रह सकते है।

मेष, वृषभ, तुला : -

आपके सेहत के मामले में पहले से काफी ज्यादा सुधार देखने को मिलेगा। लेन-देन से जुड़े सभी प्रकार के फैसले आपके ठीक साबित होंगे। कामकाज पर कुछ बड़ी रोक लगानी पड़ सकती है। रुके हुए कुछ कार्य आपके पूर्ण होने वाले हैं। लंबे समय से चली आ रही कुछ परेशानी आपकी खत्म हो सकती है। विदेश यात्रा करने जाने के लिए दिन अच्छा रहने वाला है। सोचा समझा सभी प्रकार का कार्य सिद्ध हो सकता है। खान-पान के प्रति थोड़ी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

जे राखे रघुवीर ते उबरे तेहि काल मह -आचार्य राघवाचार्य महाराज

शिवरीनारायण में बाल्मीकि रामायण पर राम कथा सुनाने का सौभाग्य मिला था

छोटे बनना सीखें इससे जीवन संवर जाएगा

●ashish kashyap

जांजगीर चाम्पा:- शिवरीनारायण तीर्थ से पूज्य महाराज जी यहां पधारे हैं यह हम सभी के लिए परम सौभाग्य की बात है आज से लगभग नौ दस वर्ष पूर्व बाल्मीकि रामायण पर राम कथा सुनाने का सौभाग्य मुझे मिला था जिसका स्मरण मुझे आज भी होता है यह बातें श्रीधाम अयोध्या से पधारे हुए अनंतश्री विभूषित श्री स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने व्यासपीठ की आसंदी से अभिव्यक्त की वे बिलोटिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ में श्रोताओं को भागवत कथा का रसपान कराते हुए बोल रहे थे

विदित हो कि सारागांव में बिलोटिया परिवार के द्वारा अपने पूर्वजों के मोक्ष की प्राप्ति के लिए श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित महामंडलेश्वर के पद से विभूषित राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज के पदार्पण के पश्चात व्यासपीठ पर आसीन आचार्य जी ने कहा कि शिवरीनारायण तीर्थधाम से पूज्य महाराज जी पधारे हैं यह हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है आज से लगभग नौ-दस वर्ष पूर्व शिवरीनारायण में बाल्मीकि रामायण की कथा सुनाने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ था वह बहुत ही भव्य आयोजन था जिसका स्मरण मुझे आज भी होता है, छत्तीसगढ़ की धरती पर मेरा प्रथम आगमन था बाद में पूज्य महाराज जी ने मुझे श्री दूधाधारी मठ में भी राम कथा सुनाने के लिए आमंत्रित किया किंतु स्वास्थ्य खराब होने के कारण उपस्थित नहीं हो सका, अब पुनः उनका आदेश प्राप्त हो रहा है आने वाले समय में वह अवसर भी आएगा आचार्य जी ने कहा कि आप सभी अपने जीवन में छोटा बनना सीखे छोटे बने रहने का बहुत लाभ है बछड़ा जब छोटा होता है तो आनंद पूर्वक दुग्धपान करता है जैसे ही वह बड़ा हो जाता है तब उसे भूसा खाना और गाड़ी खींचना पड़ता है उन्होंने कहा कि सेवक का अपराध स्वामी का अपराध माना जाता है इसके लिए उन्होंने महाराज विभीषण की कथा सुना कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया आचार्य जी ने कहा कि इस संसार में सांसारिक मोह माया से वही बचसकता है जिसे भगवान रघुवीर जी बचाते हैं रामचरितमानस का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि -‘जे राखे रघुवीर ते उबरे तेही काल मह’ रघुनाथ जी जिसे बचा देते हैं उसी का बेड़ा पार होता है नहीं तो जीव को अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ता है राजेश्री महन्त जी महाराज के साथ कथा का रसपान करने के लिए मुख्तियार सुखराम दास जी, मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव, अमरेश त्रिपाठी, योगेश उपाध्याय तथा आयोजक परिवार एवं श्रोता गण बड़ी संख्या में भगवत कथा का रसपान करने के लिए उपस्थित हुए थे।

क्या आप जानते है 4 राशियों के लिए बेहद खास है आने वाले ये 15 दिन

ज्योतिष ऐसा मानते हैं कि समय आने पर कुछ राशि के लोगों के सारे दुख समाप्त हो जाते हैं और फायदे ही फायदे होते हैं। हम आपको उन राशियों के बारे में बताने जा रहें है राशिफल का हमारे जीवन में काफी महत्‍व होता है.... वही ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक सभी ग्रह अपने निर्धारित समय पर गोचर करते हैं वही नौ अगस्त को मंगल सिंह राशि में गोचर करेंगे। वही ज्योतिष में मंगल का गोचर बहुत ही मायने रखता हैं। मंगल ऊर्जा, अग्नि और युद्ध का प्रतीक माना जाता हैं।

वही मंगल नौ अगस्त को शुकक्रवार को कर्क राशि से सिंह राशि में गोचर करेंगे। मंगल ग्रह एक राशि में करीब 15 दिनो तक रहते हैं मंगल के सिंह राशि में गोचर करने से 12 राशियों में से कुछ राशियों के लिए आने वाले 15 दिन बहुत ही शुभ और लाभकारी होने के साथ साथ मंगलकारी भी रहेंगे।

मेष- आपको आर्थिक संपन्नता आएगी रुके कार्य पूरे होंगे। इसके अलावा नया काम भी शुरू कर सकते हैं जैसे व्यापार या कोई नया प्रोजक्ट मिलने की संभावना बन रही हैं।

कर्क- नए मित्र बनेंगे जो आगे चलकर आपके कई सारे कार्यों में मदद भी कर सकते हैं अतिरिक्त धन प्राप्त होने के संकेत भी हैं।

सिंह- विदेश यात्रा पर जा सकते हैं नौकरी पेशा जातकों के लिए नौकरी के कई मौके सामने आएंगे। परिवार का साथ प्राप्त हो सकता हैं।

तुला- आपको मान सम्मान और प्रतिष्ठा की प्राप्ति हो सकती हैं इस दौरान आपके पास कोई ऐसा अवसर भी आएगा जो आपकी सफलता में कारगर साबित हो सकता हैं।

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क्या आप जानते है यहाँ है छतीसगढ़ का अदभुत गणेश मन्दिर...

नीलकमल सिंह ठाकुर

बेमेतरा (नवागढ़)- 1312 वर्ष पूर्व नवागढ़ में तांत्रिक विधा से सिद्ध गणेश मंदिर की स्थापना की गई थी। मंदिर के अग्रभाग में शमी का वृक्ष है। श्रद्धालु विघ्नहर्ता के साथ-साथ शमी वृक्ष के भी दर्शन करते हैं। नवागढ़ रियासत के राजा नरबर साय ने सन् 704 में श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित की थी। गणेश जी की प्रतिमा 6 फिट ऊंचे पत्थर की बनी है। मंदिर के अग्रभाग में तांत्रिक विधा से शमी वृक्ष विराजित है। मंदिर के परिसर में अष्टकोशीय कुआं, विशालकाय पत्थरों के लेख, पुरातन विधा अौर गौरवशाली इतिहास के साक्षी हैं। गीता प्रेस गोरखपुर में प्रकाशित धार्मिक पत्रिका कल्याण के अंक में अविभाजित मध्यप्रदेश के सिद्ध गणेश स्थानों में एक नाम नवागढ़ का प्रमुखता से उल्लेखित है। माना जाता है कि नवागढ़ के गणेश मंदिर के अग्रभाग में शमी वृक्ष एक दुर्लभ संयोग है। शमी के पेड़ को शनिदेव का अवतार माना जाता है। सिद्ध गणेश मंदिर में श्रद्धालु विघ्नहर्ता के साथ-साथ शमी वृक्ष का भी दर्शन कर सकते हैं शमी वृक्ष के पूजन-दर्शन से विकार तत्वों से मुक्ति मिलती है। श्रीगणेश के इस मंदिर पर सालभर देश के कोने-कोने से भक्त कष्ट निवारण अौर मंगलकामना के लिए आते हैं। यह भारत का एक ऐसा मंदिर है, जहां श्रीगणेश अौर शमी वृक्ष के दुर्लभ दर्शन होते हैं। मंदिर के चारों अोर राज्य अौर देश के सिद्ध गणेश इस मंदिर में किए जा सकते हैं। सिद्धि के प्रमाण : शासकीय अभिलेख में लगभग १८८४ वर्ग फीट जमीन गणेश मंदिर के नाम दर्ज है। इस मंदिरमें अश्तकोनिय कुआँ व निर्माण की विधा पुरातन इतिहास का साक्षी है, मंदिर के प्रवेश द्वार पर विशालकायपत्थर में उल्लेखित लेख इसकी सिद्धि व पुरातात्त्विक महत्त्व को प्रमाणित कर रहे हैं। धार्मिक पत्रिका गीता प्रेससे प्रकाशित कल्याण में वर्षो पूर्व प्रकाशित मध्यप्रदेश के गणेश स्थान में नवागढ़ का प्रमुखता से उल्लेख है। इसमेंलिखा है की श्री तात्या जी विशम्भ्र्वंत मोहरे ने मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर बहुत प्राचीन है। मन जाता है की १८२० के पूर्व नवागढ़ करादराज गोंड़ सामंत की राजधानी थी। राजधानी के चिन्ह स्वरुप मिट्टी का किला, महामायामंदिर, गणेश मंदिर, राजा बगीचा, बावली तालाब, गोंड़ राजाओ का मकबरा तथा राज्य का विशेष प्रतीक शमी वृक्ष है। लार्ड वेलेजली की सहायक संधि व सब्सिडियरी एलायंस संधि को नागपुर के भोसला राजा ने स्वीकारकिया था। उस समय छत्तीसगढ़ नागपुर के भोसला राजा के अधीन था जिसकी राजधानी रतनपुर थी। इस संधिके तहत ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी टैक्स लगान निर्धारित करते थे। करदराज के गोंड सामंत बार-बार बढ़ाहुआ लगान देते परेशान हो गए थे, इस क्षेत्र के गोंड सामंतो ने विरोध किया। ईस्ट इंडिया के सिपाही व राजा केसिपाहियों ने मिल कर गोंडो पर आक्रमण किया। जिस युद्ध में नवागढ़ का अंतिम राजा महार सिया मारा गया। महाराष्ट्र से आये सैनिक अधिकारी कर्मचारी गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना करते थे।

5 तारीख गुरुवार की सुबह होगा राशि परिवर्तन, वही इन राशियों को मिलेंगे शुभ समाचार

 

नौकरी देने में कार्य में बढ़ोतरी होने वाली है। आपके लिए आने वाला समय बेहद उत्तम रहेगा। आपको उन्नति या अन्य कई मौके मिल सकते हैं। जीवन साथी के साथ रोमांटिक पल व्यतीत करेंगे। आपको अपने साथी का पूरा साथ मिलेगा। आपकी मानसिक परेशानी दूर होगी। परिवारिक विवाद और लड़ाई झगड़े से खासतौर पर दूर रहने की आवश्यकता है। यह आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। समाज में होने वाले बदलाव आपके लिए बेहद खास रहेंगे।आपका गुस्सा आपके बने बनाए काम को बिगाड़ सकता है। जीवन में होने वाले बदलाव आपके लिए बेहद खास रहेंगे। आप नई मिसाल कायम करने में कामयाब होंगे। 
विद्यार्थी जीवन के लिए आने वाला समय बहुत अच्छा बीतेगा। खास तौर पर आपके नौकरी के क्षेत्र में चल रहे प्रयास सफल रहेंगे। आपके लिए आने वाला समय बेहद ही शुभ रहने वाला है। आपको तरक्की के कई नए नए रास्ते मिलेंगे। आपका नया मार्ग खुलने वाला है। धन की वर्षा होगी। व्यापार से जुड़े लोगों के अपने क्षेत्र में धन लाभ होगा। इन राशि के जातकों के जीवन में खुशियों के पल आने वाले हैं।पति-पत्नी के बीच संबंध मधुर बने रहेंगे। 3 तारीख का दिन व्यावसायिक प्रगति के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से सफल रहेगा।

भाग्यशाली राशियां सिंह, तुला और वृश्चिक राशि हैं।

कोंडागांव बाज़ारपारा गणेशोत्सव समिती ने बनाया है भव्य पंडाल..देखे फोटो

छत्तीसगढ़ (कोंडागांव) शैलेश गुप्ता । गणेशोत्सव समिती के सदस्यों द्वारा प्रतिवर्ष कोंडागांव के बाज़ार पारा में भव्य गणेश जी की प्रतिमा स्थापित कर भजन पूजन किया जाता है। इस वर्ष भी गणेश मंडली के युवकों ने विशालकाय गणेशजी की प्रतिमा स्थापना हेतु बनवाया है, पंडाल की खूबसूरती भी आम लोगों को खूब भा रही है। परंतु बस्तर में भारी बारिश ने गणेशोत्सव की ख़ुशी में ख़लल डाल दिया है। आम नागरिक गणेश स्थापना देखने पहुंच पाए उससे पहले से ही बारिश ने धूम मचा रखा है।

जगह-जगह विराजें भगवान श्री गणेश

धार्मिक नगरी शिवरीनारायण यु तो पूरे भारत वर्ष में श्री गणेश पूजा की धूम रहता है इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ में भी भगवान श्री गणेश जी पूजा की धूम रहता है गौरतलब है कि आज 2 सितंबर से गणेश उत्सव गणेश चतुर्थी के साथ प्रारंभ होने जा रहा है यह गणेश उत्सव 2 सितंबर से 12 सितंबर अनंत चतुर्दशी तक चलेगा नगर के प्रमुख चौक चौराहो मंच पंडाल में विघ्नहर्ता मंगल मूर्ति भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित किए जाएंगे। साथ ही साथ घरों में भी भगवान श्री गणेश जी का स्थापना होता है माना जाता है कि भगवान श्री गणेश जी प्रथम पूज्य देवता है इसी कारण सबसे ज्यादा घरों में भगवान श्री गणेश जी की पूजा निरंतर 12 दिनों तक विधि विधान के साथ किया जाता है और परिवार की खुशहाली सुख-शांति की कामना की जाती है और यह धार्मिक पर्व आजसे शुभारंभ होने जा रहा है सभी अपने भाव भक्ति अनुरूप भगवान की पूजा पाठ तन मन धन करते हैं और जब अनंत चतुर्दशी के दिन होम हवन पूजन पाठ करके विधि-विधान से भगवान श्री गणेश जी की प्रतिमा को नगर के महानदी चित्रोत्पल्ला गंगा महानदी त्रिवेणी संगम में विसर्जित करते हैं...

अकलतरा नगर में दादी का भव्य मंगल पाठ , झांकी का भी किया गया आयोजन

A REPORT BY: YASH LATA

भादी मावस के पावन पर्व पर दादी परिवार अकलतरा द्वारा अकलतरा नगर में दादी का भव्य मंगल पाठ का झांकी सहित आयोजन किया गया । दादी परिवार अकलतरा के 21 महिला सदस्यों द्वारा विगत कई वर्षों से भादी मावस के दिन दादी के भव्य मंगल पाठ का आयोजन किया जाता है एवं साथ ही साथ प्रति माह भी मावस के दिन भी इन महिला सदस्यों के द्वारा क्रमशः एक सदस्य के घर पर भी दादी का पाठ किया जाता है । उक्त दादी परिवार में श्रीमती रेखा अग्रवाल , श्रीमती विमला सिंघानिया , श्रीमती सुनीता गोयल , श्रीमती कल्पना केडिया , श्रीमती सोनल तुलश्यान , श्रीमती सुनीता गुप्ता , श्रीमती मुक्ता सिंघानिया , श्रीमती विनीता केडिया , श्रीमती शिल्पा केडिया , श्रीमती कविता कमानिया , श्रीमती संजू कमानिया , श्रीमती पायल अग्रवाल , श्रीमती सरिता केडिया , श्रीमती निर्मला केडिया , श्रीमती निर्मला बगड़िया , श्रीमती कविता केडिया , श्रीमती कुशुम गुप्ता , श्रीमती सरला लिखमानिया , श्रीमती ज्योति लिखमानिया , श्रीमती संगीता गोयल एवं श्रीमती राजरानी केडिया आदि सदस्य हैं।

 

 

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दीक्षा क्रम से होता है - इंदुभवानन्द

छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज सिरजम तिवारी परिवार की ओर से मुरली मनोहर सुहागा मन्दिर ट्रस्ट कमेटी, ब्रह्मणपारा के विशेष सहयोग से ब्रह्मणपरा में आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सत्र के चतुर्थ दिवस के कथा पर प्रकाश डालते हुए शंकराचार्य आश्रम रायपुर के प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ इंदुभावानांद महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म दीक्षा क्रम से होता है। सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण वसुदेव जी के हृदय में आते हैं जिससे वसुदेव जी का मुखमंडल प्रकाशित हो जाता है। इसके पश्चात भगवान देवकी माता के हृदय में चले जाते है जिससे देवकी का हृदय एवं मुखमंडल प्रकाशित हो जाता है। इसी को दीक्षा क्रम कहते हैं। इसी दीक्षा क्रम से भगवान श्रीकृष्ण का  अबुर्भाव होता है।सामान्य मनुष्य की तरह उनका जन्म नहीं होता है। भगवान स्वयं कहते हैं कि मेरे जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य है, जो इन्हें जान लेता है या इनकी कथा सुन लेता है उसको मेरे स्वरूप की उपलब्धि हो जाती है। आगे प्रवचन में इंदुभवानन्द महाराज ने बामन बलि एवं समुद्रमंथन प्रसंग पर कहा कि शक्ति रहते हुए दीनदुखियों की सहायता करना चाहिए। जो दीनदुखियों की सहायता करते हैं वे भगवान के पुण्य के भागीदार होते हैं। भगवान शंकर ने देवताओं को दीन एवं प्रताड़ित देखकर के स्वयं जहर का पान कर लिया। दिनदुखी भगवान के स्वरूप होते हैं और मनुष्य को दीनदुखियों की सेवा करना चाहिए।