अब छत्तीसगढ़ के हर जिले में होगा अजवाईन महाराष्ट्र से निर्भरता होगी खत्म

भाटापारा। अब अजवाईन के लिए महाराष्ट्र पर से निर्भरता खत्म होने जा रही है। इसी बरस के अगले माह  से किसानों को अजवाईन के ऐसे बीज मिलने जा रहे है। जो हर जिले की मिट्टी के अनुरुप है। किसानो को इसकी उपलब्धता सुनिष्चित करवाने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय के फार्म हाउस में इसके बीज उत्पादन का काम आखिरी चरण मे पहुंच चुका है।
उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने की सरकार की कोषिष लगातार रंग ला रही है।फल- फूल और सब्जी के बाद अब ध्यान मसालो की खेती पर है। इसके लिए पहली बार एक ऐसा मसाला चुना गया जिसकी खेती कम से कम छत्तीसगढ़ में तो संभव ही नही है। इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय के वैज्ञानिको की एक टीम ने इसे चुनौती के रुप में लेते हुए सबसे पहले अजवाईन को लिया।औषधिय गुणों से भरपूर होने  तथा लगभग पूरे साल मांग में बने रहने की वजह से इसकी कीमत मसाला बाजार में हमेषा से ंऊंची रही है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्पादक क्षेत्र महाराष्ट्र में अकोला से इसके ऐसे बीज कलेक्ट किए गए जिसे संषोधित किया जाए। छत्तीसगढ़ की मिट्टी के अनुरुप बनाया जा सके। रिसर्च हुए। सफलता भी मिली।
 
ऐसी खेती, ऐसा उत्पादन 
इ्रंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय के फार्म हाउस मे इसके जो बीज तैयार गए है उसकी मदद से हर जिले में अजवाईन की फसल की जा सकती है क्योंकि रिसर्च के बाद जो बीज तैयार हुए है उनमें मिट्टी की हर किस्म में इसकी खेेती के गुण है। खासकर मैदानी इलाकों के लिए तो यह वरदान है।धान कटाई के बाद नवंबर माह से इसकी बोनी करें । मार्च में फसल तैयार। उत्पादन का आंकड़ा 5 क्विंटल प्रति एकड़ के आसपास अनुमानित है।
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कस्तूरी मेथी के बीज भी मार्च में 
अजवाईन की तरह अब कस्तूरी मेथी की भी खेती अपने यहां ही की जा सकेगी। फिलहाल डिब्बाबंद पैक में उपलब्ध कस्तूरी मेथी जमकर बिक रही है।बाजार में निरंतर वृ़िद्ध के बाद इस पर रिसर्च हुआ है। इसके भी बीज मार्च माह से किसानों को मिलने लगेंगे।
ऐसी है कीमत 
मसाला बाजार में इस वक्त अजवाई्रन की कीमतें काफी बढ़ी हुई है। थोक में बाजार 1500 से 2000 रुपए क्विंटल हेै तो चिल्हर में 225 से 300 रुपए किलो पर मिल रहा हेै। मूलत; जावरा मध्यप्र्रदेष और ऊंझा गुजरात की अजवाईन हमेषा से छत्तीसगढ़ में मांग में रहती आई है। इसी तरह कस्तूरी मेथी चिल्हर में 40 से 400 रुपए किलो और पैिकग  में 200 से 400 रुपए किलो पर बेची जा रही है। थोक बाजार 100 से 150 रुपए किलो पर उपलब्ध है।
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बीज तैयार  
अजवाइ्र्रन के बीज तैयार हो चुके है। रिसर्च के बाद ये बीज हर जिले की मिट्टी के अनुरुप पाई गई ।आगामी माह से ये किसानों को मिलने लगेंगे।
-डा. अमित दीक्षित ,कृषि वैज्ञानिक,(वेजिटेबल), इंदिरा गांधी कृषि विवि., रायपुर
 
जिले में बन रही कार्ययोजना
जिले में इस वक्त धनिया, अदरक ,मिर्च और लहसुन की खेती की जा रही है।उद्यानिकी विभाग लगातार मसालों की खेती को प्रोत्साहन दे रहा है। यह विभाग की ही मेहनत का ही परिणााम है कि अकेले धनिया की खेती 100 हैक्टेयर रकबे में ली जा रही है। विष्वविद्यालय के परिसर से प्रोत्साहित विभाग ने इसके लिए अभी  से अजवाईन की खेती की कार्ययोजना बनाने की तैयारी षुरु की दी है।
वर्जन 
योजना बना रहे
मसाला की खेती को लेकर जिले में जिस तरह रुझान बढ़ रहा है उसे देखते हुए अब अजवाईन के लिए भी कार्ययोजना बनाई जा रही है।
-रामजी चतुर्वेदी सहा.संचालक (उ्रद्यानिकी) बलोैदाबाजार