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चीन की वजह से इस साल भारत को एनएसजी में जगह मिलने का सपना टूटा

वियना में एनएसजी देशों की बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्‍त हो गई है जिसके साथ ही भारत की उम्‍मीदें भी समाप्‍त हो गई।
भारत को न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में इस साल सदस्‍यता मिलने की संभावना लगभग समाप्‍त हो गई है। वियना में एनएसजी देशों की बैठक बिना किसी नतीजे के समाप्‍त हो गई है जिसके साथ ही भारत की उम्‍मीदें भी समाप्‍त हो गई। हालांकि इस मामले के जानकारों का कहना है कि यह भारत के एनएसजी में जाने की प्रक्रिया 2017 में भी जारी रहेगी। भारत और अमेरिका बराक ओबामा के राष्‍ट्रपति कार्यकाल के पूरा होने से पहले इस प्रक्रिया के पूरा होने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार इस साल के अंत तक यह प्रकिया पूरी हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार 11 नवंबर को वियना में हुई बैठक भी उसी तरह से समाप्‍त हुई जिस तरह से सिओल बैठक हुई थी। हालांकि इस बार चीन की मांग- परमाणु अप्रसार संधि में शामिल नहीं होने वाले देशों के लिए मानक तय किए जाए, पर विचार किया गया।

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से अभी इस मामले में कोई जवाब नहीं आया है। इस साल जून में सिओल में बैठक के बाद भारत के एनएसजी सदस्‍यता मिलने की उम्‍मीदें बढ़ी थीं। इस बैठक में अर्जेंटीना के कूटनीतिज्ञ राफेल ग्रोसी को भारत की एप्‍लीकेशनल पर सहमति बनाने के लिए नियुक्‍त किया गया था। हालांकि चीन ने इस नियुक्ति को मानने से इनकार कर दिया था। चीन लगातार भारत को एनएसजी में शामिल किए जाने का विरोध कर रहा है। भारत ने भी कहा है कि चीन एकमात्र देश है जिसने उसका विरोध किया। हालांकि इसके बाद चीन के न्‍यूक्लियर नेगोशिएटर वांग कुन और भारत के निशःस्त्रीकरण के लिए संयुक्‍त सचिव अमनदीप सिंह गिल के बीच 13 सितम्‍बर और 31 अक्‍टूबर को बैठक हुई। इन बैठकों के बाद चीन का क्‍या रूख है यह अभी साफ होना बाकी है लेकिन चीन थोड़ा नरम पड़ा है।

चीन ने भारत के प्रवेश को इस आधार पर बाधित किया था कि उसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। चीन ने इस समूह में प्रवेश को लेकर भारत एवं पाकिस्तान के साथ दो दौर की बातचीत की है। पाकिस्तान की तुलना में भारत को उसके अप्रसार रिकॉर्ड के कारण अमेरिका तथा अधिकतर एनएसजी सदस्यों का समर्थन हासिल है। पाकिस्तान पर पूर्व में परमाणु अप्रसार को लेकर गंभीर आरोप लग चुके हैं विशेषकर उसके परमाणु वैज्ञानिक डा. ए क्यू खान को लेकर। गेंग ने कहा कि वियना बैठक में एनएसजी सदस्यों ने एनएसजी में गैर एनपीटी सदस्यों के प्रवेश को लेकर तकनीकी, कानूनी एवं राजनीतिक मामलों पर चर्चा की।

भारत बनाम इंग्लैंड, दूसरा टेस्ट, डे-2 स्टंप: अश्विन की फिरकी में फंसा इंग्‍लैंड, 103 रन पर पवेलियन लौटी आधी टीम

IND vs ENG, 2nd Test Match: विशाखापत्तनम टेस्ट मैच के दूसरे दिन स्टंप तक इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 5 विकेट खोकर 103 रन बना लिए हैं। उसे भारत के स्कोर की बराबरी करने के लिए 352 रन और बनाने हैं।
भारत-इंग्लैंड के बीच विशाखापत्तनम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने अपनी पहली पारी में 5 विकेट के नुकसान पर 103 रन बना लिए हैं। दूसरे दिन स्टंप के समय बेन स्टोक्स और जॉनी बैरस्टो दोनों 12-12 रन बनाकर नाबाद हैं। इंग्लैंड की पहली पारी में भारत को पहली सफलता तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने दिलाई। उन्होंने कप्तान एलेस्टर कुक को 2 रन के स्कोर पर क्लीन बोल्ड कर दिया। इंग्लैंड का दूसरा विकेट हसीब हमीद के रूप में गिरा। उन्हें 13 रन के स्कोर पर जयंत यादव के थ्रो पर रिद्धिमान साहा ने रन आउट किया।
आर. अश्विन ने भारत को तीसरी सफलता दिलाई। उन्होंने बेन डकेट को 5 रन पर क्लीन बोल्ड कर दिया। अश्विन यहीं नहीं रुके उन्होंने जो रूट (53) को अर्धशतक बनाने के तुरंत बाद उमेश यादव के हाथों कैच आउट कराया। अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे जयंत यादव ने मोइन अली को एलबीडब्ल्यू आउट कर अपने टेसट करियर का पहला विकेट लिया। इससे पहले भारत की पहली पारी 455 रन पर समाप्‍त हुई। मोहम्मद शमी (7) रन बनाकर नॉटआउट रहे। आर अश्विन (58) और पहला टेस्ट मैच खेल रहे जयंत यादव (35) के स्कोर पर आउट हुए।
खेल के दूसरे दिन इंग्लैंड के स्पिन गेंदबाज मोईन अली ने तीन विकेट झटके। इसके अलावा बेन स्टोक्स को एक और आदिल राशिद को दो विकेट मिले। दूसरे दिन कप्तान विराट कोहली अपने तीसरे दोहरे शतक से चूक गए। उन्होंने बेहतरीन 167 रनों की पारी खेली। अपनी इस शानदार पारी में कोहली ने 18 चौके लगाए। कोहली के आउट होते ही टीम इंडिया का लोअर ऑर्डर बिखर गया। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा ने फिर निराश किया और सिर्फ तीन रन ही बना सके।
पहले दिन के स्कोर 317 रन पर चार विकेट से आगे खेलते हुए भारत ने दूसरे दिन पहले सेशन में कप्तान विराट कोहली का विकेट जल्दी गवां दिया। कोहली को मोइन अली ने बेन स्टोक्स के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद ऋद्धिमान साहा और रविन्द्र जडेजा को भी मोइन अली ने सस्ते में निपटा दिया। साहा 3 रन और जडेजा शून्य रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद रविचन्द्रन अश्विन ने अपना पहला टेस्ट मैच खेल रहे जयंत यादव के साथ नौवें विकेट के लिए 64 रनों की साझेदारी कर टीम के स्कोर को 427 रन तक पहुंचाया। अश्विन ने आउट होने से पहले 58 रनों की उपयोगी पारी खेली और अपने टेस्ट करियर का आठवां अर्धशतक लगाया।
भारत बनाम इंग्लैंड, दूसरा टेस्ट: पहले दिन स्टंप तक भारत का स्कोर 317-4, विराट कोहली 151 रन बनाकर नाबाद
जयंत यादव आउट होने वाले 9वें बल्लेबाज रहे उन्हें आदिल रशीद ने जेम्स एंडरसन के हाथों कैच आउट कराया। जयंत ने आउट होने से पहले 35 रनों का अहम योगदान दिया और टीम के स्कोर को 450 के उपर पहुंचाने में सहयोग किया। उमेश यादव आउट होने वाले आखिरी बल्लेबाज रहे उन्होंने 13 रन बनाए। उमेश यादव को भी आदिल रशीद ने मोइन अली के हाथों कैच आउट कराया। इंग्लैंड के लिए मोइन अली और जेम्स एंडरसन ने तीन तीन विकेट झटके। स्टुअर्ट ब्रॉड और बेन स्टोक्स को एक एक विकेट मिला। आदिल रशीद ने दो विकेट झटके।

 

नोटबंदी पर नरेंद्र मोदी कर गए ये 5 बड़ी गलतियां, क्‍या हो सकता है अंजाम?

सरकार ने नोटबंदी की घोषणा के एक हफ्ते बाद दवा की दुकानों पर 500-1000 के नए नोटों को चलाने की इजाजत दी।
पीएम मोदी ने 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले कालेधन को बड़ा मुद्दा बनाया था। एक चुनावी सभा में मोदी ने यहां तक कह दिया कि विदेशों में भारत का इतना कालाधन पड़ा है कि अगर वो वापस आ जाए तो हर देशवासी के खाते में 15-15 लाख रुपये आ सकते हैं। बीजेपी गठबंधन को लोक सभा में प्रचंड बहुमत मिला और केंद्र में उसकी सरकार बन गई। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के पहले ढाई साल के कार्यकाल में विदेश से कोई कालाधन नहीं आया। पीएम मोदी पर “15-15 लाख हर खाते में” आने की बात याद दिलाकर ताने मारे जाने लगे। शायद यही वजह थी कि मोदी सरकार ने सोचा कि विदेश न सही देश के अंदर पड़े कालेधन पर ही निशाना साधा जाए। मोदी सरकार ने पहले कालेधन की स्वैच्छिक घोषणा की योजना पेश की। इस योजना के तहत 30 सितंबर 2016 तक जो लोग आयकर विभाग में कालाधन जमा करने वालों से कुल जमा राशि पर केवल 45 प्रतिशत टैक्स लिया जाना था।  इस योजना के तहत करीब 65 हजार करोड़ रुपये का कालाधन सामने आया जिससे सरकार को करीब 27 करोड़ रुपये मिले। देश में पड़े कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार ने दूसरी बड़ी कार्रवाई नोटबंदी के तौर पर की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब आठ नवंबर को रात आठ बजे 500 और 1000 के पुराने नोटों को बंद करने की घोषणा की तो आम जनता का शुरुआती रुझान सरकार के इस फैसले के प्रति काफी सकारात्मक था लेकिन इसे अमलीजामा पहनाए जाने को लेकर सरकार की तैयारी इतनी खराब निकली कि वो आलोचनाओं में घिर गई। आइए देखते हैं कि पीएम मोदी ने नोटबंदी को लागू करने में कौन सी पांच बड़ी गलतियां कीं.
1- पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा से गया गलत संदेश- नरेंद्र मोदी ने जब नोटबंदी की घोषणा की तो उन्होंने जोर देकर कहा कि रात 12 बजे से “500 और 1000 के नोट कागज के टुकड़े” रह जाएंगे। पीएम मोदी ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में ये साफ किया कि पुराने नोटों को 30 दिसंबर तक बैंकों में बदला जा सकेगा लेकिन उनका शुरुआती स्वर ऐसा थे जिससे कई लोगों खासकर अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे गरीब तबके को लगा कि पुराने नोट उस दिन के बाद किसी काम के नहीं रहेंगे। इसकी वजह से एक तरह से बदहवासी का आलम हो गया। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए जिसमें भिखारी या कोई बेहद गरीब आदमी 500 या 1000 के नोट नहीं ले रहा है। शुरुआती घोषणा में सरकार ये स्पष्ट नहीं किया कि देश में ढाई लाख रुपये तक की सालान आय कर मुक्त है और  10-20-50 हजार या एक-दो लाख रुपये नकद जमा करने वालों को डरने की जरूरत नहीं है। सरकार की शुरुआती घोषणा से ये भी साफ नहीं हुआ कि जिन लोगों ने अपने बैंक खातों बड़ी धनराशि शादी या इलाज के लिए नकद निकाल रखा है उन्हें डरने की कतई जरूरत नहीं क्योंकि उस पैसे को बगैर किसी कानूनी अड़चन के वापस बैंक में जमा किया जा सकता है। वित्त मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने घोषणा के दो दिन बाद कहा कि ढाई लाख रुपये से अधिक राशि जमा करने वालों की ही जांच की जाएगी। लेकिन तब तक थोड़ी देर हो चुकी थी।

2- अस्पतालों और दवा की दुकानों को कड़ा संदेश न देना- नोटबंदी के बाद सबसे ज्यादा स्थिति का सामना ऐसे लोगों को करना पड़ा जो अस्पताल में भर्ती थे या जिन्हें इलाज कराना था। ऐसी कई खबरें आईं कि अस्पतालों ने  पीएम मोदी की घोषणा के तुरंत बाद पुराने नोट लेना बंद कर दिया। इस वजह से एक बड़ी आबादी को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा। शहरी आबादी के पास कार्ड पेमेंट की सुविधा होती है लेकिन आज भी भारत की 68 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है जो प्लास्टिक मनी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करती। मोदी सरकार घोषणा के साथ ही चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को ये कड़ा संदेश में विफल रही कि अगर उनकी वजह से मरीजों को दिक्कत हुई तो उन्हें सरकार के कोपभाजन का शिकार करना पड़ेगा। शुरुआती घोषणा में दवा की दुकानों पर 500-1000 के नोट चलाने की छूट नहीं दी गई थी। इसकी वजह से बीमार लोगों को निजी दवा की दुकानों पर दवाएं लेने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा के समय कहा कि पुराने नोट सरकारी अस्पतालों, पेट्रोल पंपों, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर 11 नवंबर तक चलते रहेंगे। बाद में सरकार ने इस समय सीमा को पहले 14 नवंबर, फिर 18 नवंबर और उसके बाद 24 नवंबर किया। यानी सरकार शुरू में ये अनुमान लगाने में विफल रही कि हालात कितने समय में सामान्य हो पाएंगे। निजी दवा की दुकानों पर पुराने नोट चलेंगे ये फैसला लेने में भी सरकार को छह दिन लग गए।
3- मंडी व्यापारियों की दिक्कत के बारे में नहीं सोचा- मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सरकार नोटबंदी की तैयारी छह महीने से कर रही थी लेकिन इसके बाद जिस तरह के हालात पैदा हुए उससे ऐसा कत्तई नहीं लगता। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट बाजार में थे जिसमें से करीब 14.18 लाख करोड़ रुपये 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। यानी आरबीआई द्वारा जारी कुल नोटों में करीब 85 प्रतिशत 500 और 1000 के नोटों के रूप में था। ऐसे में वित्त मंत्रालय के अफसरों को यह बात समझनी चाहिए थी कि अगर बाजार से 85 प्रतिशत नकद राशि बाहर हो जाएगी तो रोजमर्रा के लेन-देन के लिए पैसे की भारी किल्लत हो जाएगी। इस भावी किल्लत को पूरा करने के लिए आरबीआई 100 और 50 रुपये के नोटों की अधिक मात्रा पहले से बाजार में उतार सकता था जिससे जनता पर तुरंत नकद की कमी का इतना ज्यादा दबाव नहीं पड़ता। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार देश में 31 मार्च तक मौजूद कुल 9026 करोड़ नोटों में करीब 24 प्रतिशत नोट (करीब 2203 करोड़ रुपये) ही प्रचलन में थे। यानी आरबीआई ने 100 और 50 के नोटों की मात्रा बाजार में बढ़ाई होती तो नगद की कमी को एक हद तक पूरा किया जा सकता था।
4- एटीएम में नए नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित न करना- वित्त मंत्रालय की योजना के अनुसार 10 नवंबर से सभी एटीएम से हर कार्ड से दो हजार रुपये निकाल जा सकेंगे। जब 10 नवंबर को सारे एटीएम खुले तो उनके सामने भी बैंकों ही की तरह लम्बी कतार लग गई। लेकिन उनका हाल भी बैंकों जैसा ही हुआ। देश के सारे एटीएम में केवल 100-100 के नोट उपलब्ध थे। नतीजा ये हुआ कि सभी एटीएम कुछ ही घंटों में खाली हो गए और लोगों की हताशा बढ़ गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को बताया कि सभी एटीएम के सामान्य तरीके से काम करने में तीन हफ्ते का वक्त लगेगा। एटीएम में 2000 और पांच सौ के नए नोट उपलब्ध कराने के लिए उनका रीकैलिब्रेशन (बदलाव) करना होगा। मंत्रालय समय रहते पर्याप्त एटीएम का रीकैलिब्रेशन करवाने में विफल रहा, वरना आम लोगों को इतनी मुसीबत नहीं झेलनी पड़ती।
5- 2000 का नोट पहले उतारा 500 का बाद में– बैंकों से 10 नवंबर को जनता को 2000 के नए नोट मिलने शुरू हो गए। गिने-चुने जगहों पर 500 नोटों की उपलब्धता की खबर आई। जिन लोगों को 2000 के नए नोट मिले भी उनकी मुसीबत कम नहीं हुई क्योंकि बाजार में बहुत कम ही दुकानदार 2000 के नोट के बदले 50-100-200 रुपये का सामान देने को तैयार हो रहे थे। जिन लोगों के पास 100 रुपये के नोट थे वो हालात को देखते हुए उसे खर्च करने में बहुत ज्यादा किफायत बरत रहे थे। बाजार में पहले से ही नगद पैसे कम थे ऊपर से इतना बड़े नोट के आने से लोगों के सामने छुट्टे पैसों का संकट बढ़ गया। देश के कई शहरों में लोगों ने शिकायत की कि उन्हें दो हजार रुपये का नोट तो मिल गया लेकिन उसे कोई ले नहीं रहा है। अगर सरकार ने दो हजार रुपये से पहले 500 के नए नोट बाजार में जारी किए होते तो लोगों को इस संकट से बचाया जा सकता था। सरकार की आँख थोड़ी देर से खुली और रविवार को बड़ी संख्या में 500 रुपये के नए नोट जारी किए गए। अगर वित्त मंत्रालय के अफसर आम आदमी की नजर से एक बार इस मसले को देखते तो इस मुश्किल से बचा जा सकता था।

नोटबंदी के खिलाफ ममता बनर्जी करेंगी आंदोलन, कहा- जारी रहेगी जंग, चाहे जेल में डालो या गोली मारो

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के साथ अरविंद केजरीवाल ने भी रैली को संबोधित किया।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गुरुवार को एक बार फिर नोटबंदी के फैसले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर आजादपुर मंडी मे एक रैली को संबोधित किया। रैली में बनर्जी ने कहा, ‘ऐसा संकट तो आपातकाल के दौरान भी नहीं देखा था। यह फैसला भारत को 100 साल पीछे ले जा सकता है। आगे को छोड़ो, देश को पीछे कर दिया। अगर आपमें हिम्मत है तो हमें जेल भेजो और गोली मारो। लेकिन हम हमारी लड़ाई जारी रखेंगे। हम गरीब लोगों को भूखा नहीं मरने देंगे। हमारे देश के लिए लड़ाई जारी रहेगी। पहले नोट बदलने की सीमा 4500 रुपए थी, जो कि अब घटाकर 2000 रुपए कर दी गई है। वे देश को बेचना चाहते हैं। क्या वे संविधान को तोड़ना चाहते हैं। हम उन्हें यह अनुमति नहीं देंगे।’
अपने संबोधन में ममता बनर्जी ने भी सरकार से नोटबंदी तीन दिनों में वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, ‘हम कालेधन के खिलाफ संघर्ष का समर्थन करते हैं लेकिन गरीब और वंचित लोग परेशान नहीं होने चाहिएं। हम चुप नहीं रहेंगे और यदि तीन दिन में ऐसा नहीं किया जाता है तो देशवासी आपको नहीं बख्शेंगे।’ लोगों के वास्ते अपना संघर्ष जारी रखने पर जोर देते हुए ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी, ‘मैं डरी हुई नहीं हूं। मैं अपना संघर्ष जारी रखूंगी। यदि आपमें साहस है तो मुझे जेल में डाल दीजिए, मुझे गोली मार दीजिए।’ विमुद्रीकरण के खिलाफ अपनी लड़ाई को ‘देश, गरीबों एवं भूखे लोगों को बचाने’ का संघर्ष करार देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत ने आपातकाल में भी ऐसा संकट नहीं देखा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह फैसला देश को 100 साल पीछे ले जा सकता है। सरकार हर रोज एक फैसले के साथ सामने आती है। परसों कहा गया था कि नोट बदलने की सीमा 4500 होगी और आज आप कहते हें कि यह 2000 रुपए है।’
उन्होंने इस दलील का मजाक उड़ाया कि लोगों को प्लास्टिक मनी का उपयोग करना चाहिए एवं कहा कि भारत में महज चार फीसदी विनिमय के लिए कार्ड का उपयोग करते हैं। उन्होंने कहा, ‘दूसरे दिन, यह कहा गया कि अंगुलियों पर स्याही लगायी जाएगी। यह चल क्या रहा है? क्या हम नौकर हैं, क्या हम चोर हैं और आप ईमानदार? क्या हर व्यक्ति चोर है?’ वैसे उन्होंने विमुद्रीकरण की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की कुछ विपक्षी दलों की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि ऐसी समितियों से अतीत में कोई नतीजा निकला नहीं। कालेधन पर रोक पर सरकार की कटिबद्धता पर सवाल खड़ा करते हुए उन्होंने पूछा कि विदेशों में रखे गए कालेधन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए गए।

पीएमओ में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का यह भाषण सुनकर हैरान हो गए कार्यक्रम में मौजूद अफसर

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह गुरुवार (17 नवंबर) को एक कार्यक्रम में थे। उस कार्यक्रम में सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो के देशभर के अधिकारी मौजूद थे।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह गुरुवार (17 नवंबर) को एक कार्यक्रम में थे। उस कार्यक्रम में सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो के देशभर के अधिकारी मौजूद थे। वहां जितेंद्र सिंह ने सबको यह कहकर चौंका दिया कि सीबीआई और एंटी करप्शन ब्यूरो की वजह से लोग बेफिक्र होकर रहते हैं और आराम से अपना रोजमर्रा का काम करते हैं। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के मुताबिक, जितेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में कहा, ‘अगर हम जैसे लोग अपने रोजमर्रा के काम आराम से पूरा कर पा रहे हैं तो वह आपकी वजह से हैं क्योंकि आप जैसे अफसर हमारी सुरक्षा और संरक्षण में हमेशा लगे रहते हो।’ उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद लोग हैरानी में पड़ गए। उनकी समझ नहीं आ रहा था कि जितेंद्र सिंह सेना से उनकी तुलना कर रहे हैं या फिर उन सबपर नेताओं पर पैनी नजर रखने के लिए व्यंग्य कस रहे हैं। हालांकि, जितेंद्र सिंह ने खुद ही कह दिया कि उन्होंने यही बात कुछ दिन पहले सेना के कुछ जवानों से मिलने पर भी बोली थी।
वहीं एक दूसरा किस्सा गृह मंत्री राजनाथ सिंह का भी है। दरअसल राजनाथ सिंह रेवाड़ी में एक कार्यक्रम के लिए गए हुए थे। राजनाथ सिंह को वहां पर रुके हुए काफी देर हो गई थी और उन्हें किसी और कार्यक्रम के लिए निकलना था। वह उठकर जाने ही लगे कि अचानक कार्यक्रम में एक लड़की ने देशभक्ति गीता गाना शुरू कर दिया। इसपर राजनाथ सिंह को लगा कि बात का खबरों में आने पर उल्टा मतलब निकाला जा सकता है इसलिए वह फिर से बैठ गए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगली मीटिंग में जाने के लिए उन्हें कुछ और समय मिल गया है यानी अब वह वहां लेट भी जा सकते हैं।
राजनाथ सिंह का एक बयान हाल में काफी चर्चा में रहा था। पाकिस्तान और आतंकवाद पर टिप्पणी करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘हमनी के ना आटा चाही, ना टाटा चाही, हमनी के पाकिस्तान में सन्नाटा चाही।’ यह बात उन्होंने भोजपुरी अध्ययन शोध केंद्र के कार्यक्रम में कही थी।

ATM के अलावा पेट्रोल पंप पर मिलेगा कैश, जनता के बीच खुशी की लहर

देश में एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनों को कम करने के लिए सरकार नए-नए ऐलान कर रही हैं। अब आपको राहत देने वाला एक और ऐलान हुआ है कि अब पेट्रोल पंप पर भी आपको पैसे निकालने की सुविधा मिलेगी।

मोदी सरकार के नोटबैन के बाद देश भर में हो रही पैसों की समस्या को ध्यान में रखते हुए अब केंद्र की ओर से इसके समाधान का निर्णय लिया गया। दरअसल, मोदी सरकार ने एटीएम के बाहर लगी लंबी लाइनों को कम करने अब पेट्रोल पंप की मशीनों से कैश भुनाने की सुविधा का ऐलान किया। सरकार का यह फैसला आम जनता को राहत देने वाला है। क्योंकि अब पेट्रोल पंप पर आपकी गाड़ी में न सिर्फ पेट्रोल और डीजल मिलेगा बल्कि यहां आप अपने एटीएम कार्ड और क्रेडिट कार्ड से कैश भी भुना सकते हैं। जी हां, देश के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंप पर आप कार्ड स्वाइप कर पैसे निकाल सकते हैं।
पेट्रोल पंपों पर कार्ड स्वाइप कर 2000 रुपए हर व्यक्ति निकाल सकता है। आरबीआई और एसबीआई की ये संयुक्त मुहिम है और जहां एसबीआई की पीओएस मशीनें हैं वहीं ये सुविधा मिल सकेगी। सरकार के इस नए ऐलान के मुताबिक करीब 2500 पेट्रोल पंपों पर ये सुविधा मिलेगी और आगे चलकर इसे 20,000 पेट्रोल पंपों पर लागू किया जाएगा। सरकार के इस फैसले के बाद जनता के बीच खुशी की लहर दौड़ी है।
एसबीआई के साथ सरकारी तेल कंपनियों ने मिलकर इस सुविधा को शुरू किया है जिससे लोगों की दिक्कतों का समाधान हो सके। बैंक और एटीएम के बाहर लगी लंबी कतारों से लोग बेहद परेशान थे, जिसके बाद कई लोग मोदी सरकार के फैसले को अच्छा तो बता रहे थे लेकिन अपनी दिक्कतों को भी साजा कर रहे थे। लेकिन सरकार के इस फैसले से लोगों कैश की दिक्कत नहीं होगी। बता दें कि शादी वालों घरों के परिवारों के लिए बैंकों से 2.5 लाख रुपये तक निकालने का फैसला आज आया है जो इस समय शादी वाले घरों के लिए बहुत बड़ी राहत बनकर सामने आया है। हालांकि नोट एक्सचेंज की सीमा घटाकर अब सिर्फ 2000 रुपये कर दी गई है।

कृषि मंत्रालय ने मांगी किसानों के लिए पुराने नोटों से बीज खरीदने की इजाजत, वित्त मंत्रालय ने ठुकराया

वित्त मंत्रालय ने किसानों को एक हफ्ते में 25,000 रुपए निकालने की छूट तो दे दी लेकिन 500-1000 रुपए के पुराने नोटों द्वारा बीज खरीदने की इजाजत के लिए दी गई अर्जी को ठुकरा दिया।
वित्त मंत्रालय ने किसानों को एक हफ्ते में 25,000 रुपए निकालने की छूट तो दे दी लेकिन 500-1000 रुपए के पुराने नोटों द्वारा बीज खरीदने की इजाजत के लिए दी गई अर्जी को ठुकरा दिया। मंगलवार को हुई एक मीटिंग में वित्त मंत्रालय ने कृषि मंत्रालय द्वारा दी गई अर्जी को ठुकरा दिया। उसमें कहा गया था कि किसानों को पुराने 500 और 1000 के नोटों से बीज खरीदने दिया जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार द्वारा जनधन खाते बड़े पैमाने पर खोले गए हैं। जिन किसानों को भी दिक्कत है वह जाकर उन खातों में नोट जमा करवा सकते हैं या फिर नोट बदलवा सकते हैं। बताया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 16 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते चालू हैं। किसानों द्वारा उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 15 नवंबर को वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखा था कि सरकार द्वारा चलाई जाने वाली सभी बीज और रबी की फसल खरीद-बेची करने वाली जगहों पर 24 नवंबर तक पुराने नोट चलने चाहिए जैसे कि एयरलाइन्स, रेलवे, पेट्रोल पंप और हॉस्पिटल में चलने दिए जा रहे हैं। सिंह ने कहा था कि इससे किसान अच्छे बीज खरीद सकेगा। सिंह ने कहा था कि रोजना के हिसाब से 24 नवंबर तक 10 हजार रुपए के बीज खरीदने की इजाजत देनी चाहिए। सिंह ने कहा था कि चाहे तो बदले में किसानों से प्रूफ के लिए कुछ जमा भी करवाया जा सकता है। बता दें कि रबी की फसल के लिए नवंबर और 10 दिसंबर तक का वक्त सबसे अहम होता है। 11 नवंबर तक 146.85 लाख हेक्टेयर यानी 23 प्रतिशत गेहूं बोया जा चुका है। यह साल के कुल टारगेट का 23 प्रतिशत होता है।
8 नवंबर की रात से शुरू हुई नोटबंदी से लोग काफी परेशान हैं। बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। इसको देखते हुए सरकार बार-बार नए कदम उठाती है। गुरुवार (17 नवंबर) को वित्त सचिव ने लोगों को कुछ राहत देने वाली खबर दी थी। बताया गया था कि जिन घरों में शादी है वह शादी का कार्ड दिखाकर 2.5 लाख रुपए तक निकाल सकेंगे। लेकिन बैंकों से 4500 रुपए बदलवाने की लिमिट को घटाकर 2000 भी कर दिया गया था। नोटबंदी को लेकर ससंद के दोनों सदनों में भी हंगामा है।

गुलाम नबी आजाद बोले- उरी हमले में उतने लोग नहीं मारे गए, जितने सरकार की गलत नीति से मर गए

गुलाम नबी आजाद बोले- उरी हमले में उतने लोग नहीं मारे गए, जितने सरकार की गलत नीति से मर गए

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाब नबी आजाद ने राज्यसभा में नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। गुलाब नबी आजाद ने कहा, ‘सरकार की गलत नीति से जितने लोग मर गए हैं, उससे आधे तो पाकिस्तानी आतंकियों ने उरी हमले में नहीं मारे थे। जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा में चर्चा के लिए नहीं आएंगे, हम लोग सदन की कार्यवाही को नहीं चलने देंगे।’ आजाद ने कहा कि नोटबंदी के फैसले की वजह से 40 लोग मारे गए हैं। बता दें, 18 सितंबर को कश्मीर के उरी सेक्टर में आतंकियों ने एक सेना कैम्प पर हमला कर दिया था। इसमें भारतीय सेना के कुल 20 जवान शहीद हो गए थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता वैंकया नायडू ने कहा कि विपक्ष के नेता इस तरह के बयान देकर और इसकी तुलना पाकिस्तानी आतंकी हमलों से करके राष्ट्र का अपमान कर रहे हैं। उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
वहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भी इस फैसले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। इसके साथ ही दोनों ने मांग की है कि सरकार तीन दिन के भीतर इस फैसले को वापस ले। अरविंद केजरीवाल ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ‘देशभक्ति की आड़ में घोटाले हो रहे हैं। लेकिन ये घोटाले होने नहीं देंगे, देश के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार हैं। मोदी सरकार यह आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला कर रही है। 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करके 2000 रुपए लॉन्च करके कैसे भ्रष्टाचार खत्म करेंगे। पीएम मोदी ने विजय माल्या को रात में हवाई जहाज में बैठाकर लंदन भेज दिया। माल्या ने बैंकों के करोड़ो रुपए खा लिए हैं। सरकार ने भी उनके अरबों रुपए का लोन माफ कर दिया है। लेकिन यहां पर लोग लाइनों में खड़े हैं।’ वहीं ममता बनर्जी ने कहा, ‘ऐसा संकट तो आपातकाल के दौरान भी नहीं देखा था। यह फैसला भारत को 100 साल पीछे ले जा सकता है। आगे को छोड़ो, देश को पीछे कर दिया। अगर आपमें हिम्मत है तो हमें जेल भेजो और गोली मारो। लेकिन हम हमारी लड़ाई जारी रखेंगे। हम गरीब लोगों को भूखा नहीं मरने देंगे।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने का ऐलान आठ नवंबर को किया था। इसके साथ ही लोगों को अपने पुराने नोट चेंज करने के लिए 31 दिसंबर का समय दिया था। साथ ही में ही बैंक या एटीएम से पैसे निकालने के लिए एक सीमा तय की गई थी। पीएम के ऐलान के बाद से ही बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं। इस दौरान कईयों की मौत भी हो गई। एटीएम से एक दिन में एक व्यक्ति केवल 2400 रुपए निकाल सकता है, वहीं बैंक से वह सप्ताह में एक बार में 24 हजार रुपए में निकाल सकते हैं।

अब किसानों, मंडी व्यापारियों और जिन घरों में शादी है उन्हें राहत किसान बैंक से हफ्ते में 25 हजार रुपए, मंडी व्यापारी 50 हजार रुपए और शादी वाले 2.5 लाख रुपए निकाल सकेंगे

केंद्र सरकार ने गुरुवार को किसानों, मंडी व्यापारियों और जिन घरों में शादी है उन्हें राहत दी है। गुरुवार को आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने घोषणा की है कि रबी के मौसम में बुवाई सुनिश्चित करने के लिए फसल लोन या किसान क्रेडिट कार्ड के एवज में किसानों को एक हफ्ते में 25,000 रुपए निकासी की अनुमति है। इसके साथ ही कृषि मंडी में व्यापारियों को एक हफ्ते में 50,000 रुपए नकदी आहरण की अनुमति दी गई है, ताकि विविध खर्चों और मजदूरी का भुगतान किया जा सके। किसानों के लिए कृषि लोन बीमा प्रीमियम भुगतान की समयसीमा 15 दिन बढ़ायी गई है। पुराने 500 और 1000 रुपए के नोटों को बदलने की मौजूदा 4500 रुपए की सीमा को शुक्रवार से घटाकर 2000 रुपए किया जाएगा। शादियों के मौजूदा मौसम में विवाह के लिए बैंक खाते से ढाई लाख रुपए तक नकदी की निकासी की जा सकती है।
दास ने बताया कि यह बढ़ी हुई निकासी उन्हें अकाउंट्स से निकाली जा सकती है, जिनके अकाउंट में पैन कार्ड जुड़ा हुआ है। शादी के लिए नकदी निकालने के लिए दुल्हे या दुल्हन के माता-पिता में से एक को बैंक जाकर शादी का कार्ड दिखाना होगा। केंद्र सरकार के कर्मचारियों को भी राहत दी गई है। ग्रुप सी तक के कर्मचारी अपनी सैलरी से 10 हजार रुपए एडवांस निकाल सकते हैं, जो कि उनकी नवंबर की सैलरी में से काट लिए जाएंगे।

नोटबंदी: 50 हजार से अधिक पैसे जमा करने के लिए PAN कार्ड जरूरी, RBI और IT की है कड़ी नजर

RBI के मुताबिक 50 हजार रुपये से ज्यादा कि रकम जमा कराने पर PAN की जानकारी देना अनिवार्य है और आयकर विभाग की भी खातों में जमा होने वाली राशि पर कड़ी नजर है।

नोटबंदी के बाद बैकों खातों में जमा होने वाले पैसों पर आरबीआई की कड़ी निगरनी है। वहीं आरबीआई ने यह साफ कर दिया है कि जिन बैंक खातों में 50 हजार रुपये से ज्यादा कि रकम जमा की जाएगी उनपर उसकी कड़ी नजर रहेगी। 31 दिसंबर तक नोट बदलने की समय सीमा है और इसी बीच आयकर विभाग की बैकों में जमा होने वाले पैसों पर कड़ी नजर रहेगी।
आरबीआई ने यह जानकारी भी दी कि 50 हजार रुपये से ज्यादा की रकम जामा कराने के लिए पैन कार्ड की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सरकार ने भी बैंकों और डाक घरों को यह निर्देश भी दिए हैं कि वह बचत खातों में ढाई लाख रुपये से ज्यादा और करेंट खातों में 12 लाख रुपये से ज्यादा की राशि जमा कराने वालों के बारे में आयकर विभाग को जानकारी दें।
इसके अलावा को-ऑपरेटिव बैंकों को भी तय की गई रकम से ज्यादा की राशि जमा कराए जाने की स्थिति में आयकर विभाग को सूचित करना पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने भी बेंकिंग कंपनियों, को-ऑपरेटिव बैंकों और डाक घरों द्वारा दाखिल की जाने वाली सालाना इंफॉर्मेश रिटर्न रिपोर्ट के बार में नए निर्देश दिए हैं।
नए निर्देशों से पहले बैंक किसी एक खाते में साल भर में 10 लाख रुपये से ज्यादा की रकम जमा होने की ही जानकारी आयकर विभाग को दी जाती थी लेकिन अब इसमें बदलाव किए गए हैं। इसके अलावा जमा की गई रकम, खाता धारक के टैक्स रिटर्न से अधिक पाई जाती है तो 200% का जुर्माना भी लगेगा।

बैंक जा रहे हैं तो जान लीजिए, पुराने नोट बदलकर 4500 ही मिलेंगे, बाकी खाते में डालिए और चेक से निकालिए

आरबीआई द्वारा नोट बदलवाने जा रहे लोगों की ऊंगली पर स्याही का निशान लगाए जाने के फैसले के बाद यह घोषणा की गई है

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कहा कि अब पुराने नोट एक बार ही बदलवाएं जा सकते हैं। पहले था कि 4500 रुपए के पुराने नोट एक आदमी एक दिन में बदलवा सकता है। लेकिन अब एक बार पुराने नोट बदलवाए जाने के बाद, वह व्यक्ति दोबारा से पुराने नोट नहीं बदलवा सकता। इसके लिए उसे अपने पुराने नोट खाते में जमा कराने होंगे। इसके बाद आप चेक के जरिए अपने नोट निकाल सकते हैं। आरबीआई का यह फैसला नोट बदलने जा रहे लोगों की ऊंगली पर स्याही का निशान लगाने के फैसले के बाद लिया गया है। कुछ रिपोर्ट्स आई थीं कि लोग बैंक की अलग-अलग ब्रांच से जाकर नोट बदलवा रहे हैं। इसके बाद यह फैसला लेना पड़ा। आरबीआई ने सभी बैंकों को यह लागू करने का निर्देश दिए हैं। नोटबंदी को लेकर बुधवार को संसद में भी बहस देखने को मिली। संसद में विपक्षी दलों ने नोटबंदी के फैसले को लेकर केंद्रीय सरकार पर निशाना साधा।
बता दें, आम लोगों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अप्रचलित नोटों को बदलवाने वालों की ऊंगली पर अमिट स्याही लगाने तथा जन धन खातों में संदिग्ध जमाओं की निगरानी करने का फैसला किया है। सरकार ने यह कदम नोटों की अदला बदली करवाने में कई गिरोहों के सक्रिय होने की रपटों के बाद उठाया है। ऐसी रपटें हैं कि ऐसे गिरोह के सदस्य बार-बार कतारों में लगकर नोट बदलवा रहे हैं। इससे वास्तविक जरूरतमंदों को परेशानी हो रही है। देशभर में बैंक शाखाओं में बुधवार को कई स्थानों पर एक-एक किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार यानी 16 नवंबर से शुरू हुआ। केंद्र सरकार द्वारा 8 नवंबर को विमुद्रीकरण के फैसले के बाद इस सत्र के हंगामेदार होने के आसार सही साबित हुए। लोकसभा को जहां पूर्व सदस्‍यों को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद स्‍थगित कर दिया गया, वहीं राज्‍यसभा में विपक्ष सत्‍ता पक्ष पर हमलावर रही। कांग्रेस, बसपा, सपा की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को चर्चा के दौरान सदन में बुलाने की मांग उठी। कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने मोदी सरकार पर निशाना सा‍धा। उन्‍होंने कहा कि नोटबंदी के फैसले से पूरी दुनिया में संदेश गया कि भारत की अर्थव्‍यवस्‍था ‘काले धन पर चलती है।’ उन्‍होंने पूछा कि ‘किस कानून ने आपको अधिकार दिया कि हमें अपने अकाउंट से पैसे निकालने पर भी पाबंदी लगा रहे हैं?’
मायावती ने कहा कि नोटबंदी का मुद्दा संवदेशनील है इसलिए पीएम को सदन में चर्चा के वक्‍त मौजूद रहना चाहिए। इस पर नेता विपक्ष गुलाम नबी आजाद ने भी पीएम को बुलाए जाने की मांग कर दी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आश्‍वासन दिया कि वह इस बारे में बात करेंगे।

राजनीतिक दल अपनी आय का स्रोत कब बताएंगे? 6 राष्ट्रीय दलों की 69 % आय अज्ञात स्रोतों से

पिछले साल नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि आरटीआई के तहत आने से राजनीतिक दलों के कामकाज में अड़चन आएगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन पर अंकुश लागने के लिए 500 और 1000 के नोटों को बंद कर दिया। नोटबंदी के बाद जनता को जिस तरह के कष्ट उठाने पड़ रहे हैं उस पर पीएम मोदी समेत तमाम बीजेपी नेताओं ने कहा कि देशहित में जनता को ये कष्ट उठाना ही पड़ेगा। पीएम मोदी ने कहा है कि उनकी सरकार भविष्य में कालेधन पर और भी कार्रवाइयां करेगी। लेकिन लाख टके का सवाल ये है कि क्या इन कार्रवाइयों की जद में  केवल जनता ही होगी या कभी नेताओं पर भी पीएम मोदी की नजरे इनायत होगी? पिछले साल जब आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश की छह राष्ट्रीय पार्टियों से सूचना के अधिकार के तहत आने के बाबत पूछा तो कोई भी पार्टी तैयार नहीं हुई।
सर्वोच्च अदालत ने जब इस मसले पर नरेंद्र मोदी सरकार की राय जाननी चाहिए तो उसने कहा कि “अगर राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के तहत लाया गया तो इससे उनके सुचारू कामकाज में अड़चन आएगी…।” सरकार ने कहा कि जो लोग ढाई लाख रुपये से अधिक मूल्य के पुराने नोट अपने खातों में जमा करेंगे उनके द्वारा जमा किए गए धन की उनके “आय के स्रोत” से मिलान किया जाएगा। जो दोषी पाया जाएगा उस पर टैक्स के अलग 200 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। लेकिन आपको ये जानकार हैरत होगी कि एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक (एडीआर) रिफॉर्म्स के साल 2013-14 के आंकड़ों के अनुसार देश की छह राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का 69.3 प्रतिशत “अज्ञात स्रोत” से आया था।
एडीआर के आंकड़ों के अनुसार साल 2013-14 में छह राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के पास कुल 1518.50 करोड़ रुपये थे। राजनीतिक दलों में सबसे अधिक पैसा बीजेपी (44%) के पास था। वहीं कांग्रेस (39.4%), सीपीआई(एम) (8%), बीएसपी (4.4%) और सीपीआई (0.2%) का स्थान था। सभी राजनीतिक दलों की कुल आय का 69.30 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से आया था। राजनीतिक पार्टियों को अपने आयकर रिटर्न में 20 हजार रुपये से कम चंदे का स्रोत नहीं बताना होता। पार्टी की बैठकों-मोर्चों से हुई आय भी इसी श्रेणी में आती है। साल 2013-14 तक सभी छह राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय में 813.6 करोड़ रुपये अज्ञात लोगों से मिले दान था। वहीं इन पार्टियों को पार्टी के कूपन बेचकर 485.8 करोड़ रुपये की आय हुई थी।
जब के आंकड़े हैं तब कांग्रेस सत्ता में थी और बीजेपी विपक्ष में और यही दोनों दल अज्ञात स्रोत से चंदे के मामले में भी बाकी पार्टियों से आगे थे। साल 2013-14 में कांग्रेस की कुल आय 598.10 करोड़ थी जिसमें 482 करोड़ अज्ञात स्रोतों से आए थे। कांग्रेस को कुल आय का 80.6 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से मिला था। बीजेपी की कुल आय 673.8 करोड़ रुपये थी जिसमें  453.7 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोतों से आए थे।
बीजेपी को कुल आय का 67.5 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से मिला था। सीपीआई(एम) की कुल आय 121.9 करोड़ रुपये थी जिसमें अज्ञात स्रोतों से आय 58.4 करोड़ रुपये थी। सीपीआई (एम) की कुल आय के 47.9 प्रतिशत का स्रोत अज्ञात था।
साल 2013-14 में बीएसपी की कुल आय 66.9 करोड़ रुपये थी जिसमें 48.6 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोतों से आए थे। बीएसपी की 72.6 प्रतिशत आय का स्रोत अज्ञात था। एनसीपी की कुल आय 55.4 करोड़ रुपये थी जिसमें 8.3 करोड़ रुपये अज्ञात स्रोत से आए थे। एनसीपी की कुल आय का 15 प्रतिशत अज्ञात स्रोतों से आया था। अज्ञात स्रोतों से आय के मामले में सीपीआई एकमात्र पाक दामन राष्ट्रीय पार्टी निकली। सीपीआई की कुल आय 2.4 करोड़ रुपये थी जिसमें अज्ञात स्रोतों से कोई भी आय नहीं थी।

ग्राउंड रिपोर्ट: कोई भूखे-प्यासे लाइन में खड़ा है कि हटने पर नंबर न चला जाए तो कोई खड़े-खड़े कर रहा है लंच

नोटबंदी से बेहाल लोग सुबह से शाम तक लग रहे हैं लाइन में। नंबर न चला जाए इस डर से पानी पीने भी नहीं जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा के बाद देश में नगदी की भारी किल्लत हो गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में अब तक दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 10 नवंबर से बैंकों में पुराने नोट बदले जा रहे हैं और पैसे निकाले जा रहे हैं। 11 नवंबर से सभी एटीएम में पैसे निकलने शुरू हो गए हैं। लेकिन बैंकों और एटीएम में शुरुआती दिनों में नगद कुछ देर घंटों में खत्म हो गए। घोषणा के आठ दिन बाद भी हालात बहुत ज्यादा बेहतर नहीं हुए हैं। बैंकों और एटीएम के बाहर भारी संख्या में ग्राहकों की भीड़ देखी जा सकती है। इस भीड़ को संभाल पाना पुलिस और प्रशासन के लिए भी कठिन साबित हो रहा है। पैसे निकालने को लेकर कई जगहों पर विवाद, लड़ाइयां और मारपीट तक की खबरें भी आई हैं। नोटबंदी का आम जनजीवन पर क्या असर हुआ है ये जानने के लिए जनसत्ता ने उन लोगों से बात की जो इससे सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में नोटबंदी के कारण हालात बदतर हो चले हैं। सोमवार (14) नवंबर को सरकार ने घोषणा की कि दवा की दुकानों पर पुराने नोट 24 नवंबर तक चलेंगे लेकिन कई दुकानदार पुराने नोट नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा बीमारों और छोटे बच्चों को फल-फूल और दूध नहीं मिल पा रहे हैं।  छतरपुर जिला अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती 26 वर्षीय रचना रिछारिया ने हाल ही 12 नवंबर को एक बेटे को जन्म दिया है। उनके बेटा स्वास्थ्य ख़राब होने के चलते जन्म से ही SNCU (गहन चिकित्सा वार्ड) में भर्ती है। बाजार में 1000-500 के नोट न चलने की वजह से इनके पति हेमंत रिछारिया जरूरी दवाएं और दूसरी चीजों नहीं खरीद पा रहे हैं। हेमंत नोट बदलने के लिए बैंक के बाहर लाइन में लगे रहते हैं। सुबह से शाम हो जाती है तब कहीं जाकर वो 2000 के नोट बदल पाते हैं। हेमंत मंगलवार (16 नवंबर) सुबह आठ बजे से लाइन में लग गए थे लेकिन शाम के चार बजे उन्हें बैंक से पैसे नहीं मिले थे।
रचना और हेमंत की दो बेटियां (अदिति 6 वर्ष और सिद्धी 3 वर्ष) हैं जो पिछले एक सप्ताह से अपने दादा-दादी के पास रह रही हैं। और तभी से स्कूल भी नहीं जा पा रही हैं। और यहां रचना और उनके बच्चे का भी स्वस्थ्य खराब है। रचना का सारा समय नोटों की तलाश में गए पति की राह देखते और बच्चे को तकते समय निकल जाता है। नोट बंदी के चक्कर में जहां पति दिनभर बैंक के बाहर लाइन में लगा रहता है तो वहीं बीमार रचना अस्पताल में अकेली पड़ी रहती हैं।

छतरपुर शहर के रानी तलैया निवासी 20 वर्षीय बेबी खान ने सोमवार को अस्पताल में स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। बेबी के पति अहमद खान एक होटल में शेफ हैं। बेबी और उनके बच्चे को अस्पताल से मुफ़्त मिले इलाज और दवाइयों के अलावा बाजार से दूसरे जरूरी सामान लेने पड़ते हैं पर नोट न चलने की वजह से उनके पति भी बैंक में लाइन में लगे हुए हैं। बेबी अपनी सास के साथ बैठकर पति के आने का इंतजार कर रही हैं कि वो कब पैसे लेकर आयें तो बच्चे और अपने लिये दवाइयां और अन्य जरुरी सामान मंगवा सकें।

छतरपुर शहर के दूधनाथ कालोनी की रहने वाली 29 वर्षीय अरुणा तिवारी सुबह से एसबीआई बैंक के बसस्टैंड ब्रांच के बाहर लाइन में लगी हुई हैं। घर में इनकी एक चार वर्षीय बेटी ख़ुशी है जो कि एलकेजी में पढ़ती है। जब से नोटबंदी का फरमान आया है अक्सर इनकी बेटी स्कूल नहीं जा पा रही है। जिस दिन खुद तैयार करके भेज देतीं हैं उस दिन जा पाती है। घर में उनकी सास बच्ची को संभालती हैं। उनके पति अपने रोजमर्रा के काम पर निकल जाते हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के लिए जरूरी पैसों की किल्लत के चलते उन्हें नोट बदलने के लिये दिन भर लाइन में लगना पड़ता है। अरुणा लाइन में लगने के लिए लंच साथ लेकर आतीं हैं और कतार में खड़े-खड़े ही लंच कर लेतीं हैं।

28 वर्षीय पार्वती अहिरवार छतरपुर के गठेवरा गांव की रहने वाली हैं। उनके पति देवीदीन अहिरवार मजदूरी करते हैं। नोट बदलने के लिए सुबह सात बजे से बैंक के बाहर लाइन में लग गईं थीं लेकिन दोपहर तीन बजे तक उन्हें पैसे नहीं मिले। पार्वती सुबह से भूखी प्यासी हैं। पार्वती कहती हैं कि वो लोगों की भारी भीड़ की वजह से लाइन तोड़कर पानी पीने तक नहीं जा सकतीं वरना नंबर चला जायेगा। उनके छह साल और चार साल के बच्चे बीमार हैं। बिमारी के चलते बच्चों को वो अपनी भाभी के घर छोड़कर आई हैं। पार्वती कहते हैं कि जब तक बैंक से पैसे नहीं बदल जाते तब तक वो बच्चों का इलाज नहीं करवा पाएंगी।

इस बदइंतजामी के बीच आम लोगों का मदद के लिए सामने आने जरूरतमंदों के लिए एकमात्र राहत है। आम लोगों की मुश्किलों को देखते हुए छतरपुर शहर के कई समाजसेवी बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन में लगे लोगों को पानी के पाउच और बिस्किट के पैकेट बांटने में लगे हुए हैं। यह बिस्किट, पाऊच सिर्फ बच्चों, छात्राओं और महिलाओं और वृद्धजनों को बांटे जा रहे हैं। लोगों की इस तरह की मानवीयता और समाज सेवा से परेशां लोग भी भूरी-भूरी प्रसंसा कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर लगाया भ्रष्‍टाचार का आरोप, ट्रेंड चला- मोदी घूस लेते हैं

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पहली बार कुर्सी पर बैठे किसी प्रधानमंत्री का नाम काले धन के किसी घोटाले में आया है।


आम आदमी पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गुजरात का मुख्‍यमंत्री रहते घूस लेने का आरोप लगाया है। दिल्‍ली विधानसभा में नोटबंदी के खिलाफ प्रस्‍ताव पेश करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पहली बार कुर्सी पर बैठे किसी प्रधानमंत्री का नाम काले धन के किसी घोटाले में आया है। उन्‍होंने कहा कि नवंबर 2012 में गुजरात का सीएम रहते हुए मोदी के आदित्य बिरला ग्रुप के लेनदेन के बारे में जानकारी एक लैपटॉप से मिली थी। उसमें ‘गुजरात सीएम-25 करोड़’ लिखा था। केजरीवाल ने कहा कि ”पनामा घोटाले में मोदी जी के कितने दोस्‍तों के नाम थे, मगर कोई एक्‍शन नहीं लिया गया। 648 लोगों के स्विस बैंक अकाउंट नंबर तक लिखे हुए थे, मगर कार्रवाई इसलिए नहीं हुई क्‍योंकि इस लिस्‍ट के अंदर प्रधानमंत्री मोदी जी के दोस्‍त हैं।” दस्‍तावेज सामने रखते हुए सीएम ने कहा, ”आज मैं सबूत लेकर आया हूं। आयकर विभाग ने 15 अक्‍टूबर 2013 को आदित्‍य बिरला ग्रुप पर छापेमारी हुई। वापस आने के बाद इनकम टैक्‍स की अप्रेजल रिपोर्ट में बिरला ग्रुप के अकाउंटेंट ने कहा कि मैं हवाला का पैसा लेकर आता हूं। मेरे बॉस का नाम शुभेन्‍दु अमिताभ हैं। वे बिरला ग्रुप के एक्‍जीक्‍यूटिव प्र‍ेसिडेंट थे।”
केजरीवाल ने आगे कहा, ”जब उनके लैपटॉप, मोबाइल चेक किए गए तो एक एंट्री मिली जिसमें लिखा है ‘गुजरात सीएम-25 करोड़’ आगे ब्रैकेट में लिखा है (12 करोड़ डन- बाकी)। जब शुभेन्‍दु से पूछा गुजरात सीएम का क्‍या मतलब है तो वे बोले कि गुजरात एल्‍केली केमिकल्‍स। आयकर विभाग ने एनालिसिस में लिखा है कि शुभेन्‍दु बोल रहे हैं। 13 में रेड हुई थी, छह महीने के बाद इनकी (मोदी) सरकार आ गई थी। अब इस केस को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है।”
विधानसभा में केजरीवाल के इस बयान के बाद ट्विटर पर #ModiTakesBribes ट्रेंड करने लगा। आम आदमी पार्टी के ट्विटर हैंडल और अन्‍य नेताओं ने भी इस हैशटैग का इस्‍तेमाल कर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
आप नेता संजय सिंह ने ट्विटर पर इसी हैशटैग से लिखा, ”मोदी ने बिड़ला ग्रुप से 25 करोड़ रु रिश्वत ली, अमीरों का 1.14 लाख करोड़ माफ़ कर दिया, मोदी अमीरों के साथ, ग़रीबों के ख़िलाफ़।”

 

मोदी की मां के बैंक पहुंचने पर केजरीवाल का हमला- राजनीति के लिए लाइन में खड़ा किया, मैं होता तो खुद लगता


अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी की मां हीरा बा के लाइन में खड़े होने को गलत बताया।

अरविंद केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी की मां हीरा बा के लाइन में खड़े होने को गलत बताया। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा, ‘मोदीजी ने राजनीति के लिए माँ को लाइन में लगा ठीक नहीं किया। कभी लाइन में लगना हो तो मैं ख़ुद लाइन में लगूँगा, माँ को लाइन में नहीं लगाउँगा।’ इस ट्वीट के साथ केजरीवाल ने पीएम की की मां हीरा बा की फोटो भी ट्वीट की थी। इससे पहले केजरीवाल ने 12 नवंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर कहा था कि 500 और 1000 का नोट बैन करने से पहले ही बीजेपी के लोगों ने अपना माल ठिकाने लगा दिया। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले देश में भ्रष्टाचार कम करने के नाम पर असल में देश में बहुत बड़े स्तर पर घोटाले को अंजाम दिया जा रहा है। केजरीवाल ने कहा था, “मोदी जी का सर्जिकल स्ट्राइक काला धन के ऊपर नहीं है बल्कि आम जनता के वर्षों से जुटाए गए मेहनत के पैसों पर स्ट्राइक है।” उन्होंने देशहित में नोट बैन को तत्काल वापस लेने की मांग की थी।
केजरीवाल ने सोमवार (14 नवंबर) को कहा दिल्ली विधानसभा का आपात सत्र भी बुलाया था। उसमें केजरीवाल ने कहा कि नोटबंदी से दिल्ली के लोगों में दहशत है। बीजेपी पर माल्या को भारत से भगाने का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह राष्ट्रपति से निवेदन करेंगे कि वह इस फैसले को वापस लें।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन मोदी मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर में नोट बदलने के लिए बैंक पहुंची। वह बैंक में 4500 रुपए लेकर बैंक पहुंची थी। हीराबेन गांधीनगर के ओरियेंटल बैंक ऑफ कॉमर्स बैंक में पहुंची थी। उन्हें 10-10 की दो गड्डियां दी गईं। उसके अलावा एक 500 का नया नोट और एक 2000 का नोट मिला। हीराबेन को कुछ लोग सहारा देकर बैंक के अंदर लेकर आए थे क्योंकि उनसे ज्यादा देर खड़ा नहीं रह सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां हीराबेन को मई 2016 को वाराणसी में नारी जागरण सम्‍मान 2016 से नवाजा गया था। यह सम्‍मान नारी जागरण मैगजीन की ओर से दिया गया। नरेंद्र मोदी के बड़े भाई सोमाभाई दामोदार दास मोदी ने अपनी मां की ओर से यह सम्‍मान लिया था। हीराबेन 96 साल की हैं और सफर करने में उन्हें परेशानी होती है।