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एमजीआर के शव के पास 21 घंटे खड़ी रही थीं जयललिता, अब उनके स्मारक के करीब ही हुईं दफन

जयललिता 1982 में आधिकारिक तौर पर एमजीआर की पार्टी एआईएडीएमके में शामिल हुई थीं। पार्टी की तरफ से उन्हें 1984 में राज्य सभा सदस्य बनाया गया था।

जयललिता के फिल्मी मेंटर और राजनीतिक गुरु एमजीआर से उनके संबंधों को लेकर अक्सर कयास लगाते जाते रहे। बात यहां तक पहुंच गई थी कि जब एमजीआर का देहांत हुआ तो उनकी पत्नी जानकी और उनके सहयोगियों ने जयललिता को उनके शव के अंतिम दर्शन करने से रोकने की कोशिश की थी। बाद में जब जयललिता को “अपने नेता” के शव के दर्शन करने का मौका मिला तो वो गालीगलौच और मारपीट के बावजूद वहां कुल 21 घंटे तक खड़ी रही थीं। करीब ढाई दशक बाद वक्त ने ऐसी करवट ली की मंगलवार (5 दिसंबर) को जयललिता को एमजीआर के स्मारक के बगल में ही दफनाया गया। 68 साल की जयललिता ने सोमवार रात 11.30 बजे लंबी बीमारी के बाद आखिरी सांस ली थी। उन्‍हें रविवार को दिल का दौरा पड़ा था। वह 22 सितंबर से ही अस्‍पताल में भर्ती थीं।
कहते हैं कि एमजीआर ने जयललिता की मां “संध्या” (फिल्मी नाम) से वादा किया था कि वो जयललिता का ख्याल रखेंगे। जयललिता एमजीआर से उम्र में 31 साल छोटी थीं। दोनों ने पहली बार 1965 में एक साथ काम किया। उनकी जोड़ी को दर्शकों को खूब प्यार मिला और दोनों ने दो दर्जन से ज्यादा फिल्मों में साथ काम किया। 1972 में एमजीआर फिल्मों से संन्यास लेकर राजनीति में चले गए। जयललिता ने भी 1980 में अपनी आखिरी फिल्म की और 1982 में आधिकारिक तौर पर एमजीआर की पार्टी एआईएडीएमके में शामिल हो गईं। इस तरह फिल्मों की तरह राजनीति में भी उनके पहले गुरु एमजीआर ही बने।
एमजीआर और जयललिता के रिश्ते पहले से ही चर्चाओं में थे। राजनीति में आते ही 1983 में उन्हें पार्टी के प्रचार विभाग का सचिव बना दिया गया। 1984 में उन्हें एमजीआर ने राज्य सभा सदस्य बना दिया। लेकिन कुछ ही सालों बाद जयललिता और एमजीआर के संबंध बिगड़ने लगे। एमजीआर की पत्नी जानकी को दोनों की कथित नजदीकियों पर सख्त एतराज था। जानकी के इसी रवैये का असर तब दिखा जब एमजीआर का 1987 में देहांत हो गया।
इंडिया टुडे को 1988 में दिए एक इंटरव्यू में जयललिता ने उस घटना को याद करते हुए बताया था, “बहुत थोड़े से लोगों का एक समूह नहीं चाहता था कि मैं अपने प्रिय नेता के शव के करीब जाऊं…24 दिसंबर को तड़के एक दोस्त ने मुझे जगाकर एमजीआर के निधन की झकझोर देने वाली खबर दी। मैं दौड़ कर थोत्तम (एमजीआर का निवास) पहुंची लेकिन मुझे घर के अंदर नहीं जाने दिया गया। मैं अपनी कार से निकलकर घर का दरवाजा पीटती रही। थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला लेकिन अंदर जाने पर मैंने देखा कि अंदर सभी कमरों के दरवाजे बंद हैं।”

जयललिता ने उस दिन को याद करते हुए बताया था, “आखिरकार मैं तीसरे तल पर स्थित अपने नेता के कमरे के दरवाजे के बाहर खड़ी हो गई। मुझसे कहा गया कि उनके शव को पिछले दरवाजे से निकालकर राजाजी हाल ले जाया जा रहा है। मैं सीढ़ियों से दौड़ती हुई उतरी और मेन गेट की तरफ भागी। मैंने देखा कि एक ऐंबुलेंस एमजीआर के शव को लेकर जा रही है। मैं उसके पीछे भागी। मैंने अपने कार के ड्राइवर को बुलाया और उसमें बैठकर ऐंबुलेंस के पीछे गई। मैंने किसी और गाड़ी को ऐंबुलेंस और अपनी कार के बीच में नहीं आने दिया।”
जयललिता के अपमान और दुख का यही अंत नहीं हुआ। राजाजी हॉल में एमजीआर के शव को सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया था। जयललिता के शब्दों में, “राजाजी हॉल में मैं पहले दिन अपने नेता के पास 13 घंटे और दूसरे दिन आठ घंटे खड़ी रही।” लेकिन जयललिता को वहां भी जानकी समर्थकों के हाथों अपमानित होना पड़ा। जयललिता ने बताया था, “वहां मेरा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न हुआ। सात या आठ महिलाएं जिनका मैं नाम नहीं लेना चाहूंगी, दूसरे दिन वहां आईं और मेरे बगल में खड़ी हो गईं। उन्होंने मेरे पैर को कुचलना शुरू कर दिया। वो मेरे शरीर में अपने नाखून चुभो रही थीं, चुटकी काट रही थीं। उन लोगों ने मेरे चेहरे को छोड़कर शरीर के हर हिस्से पर चोट की।”
इतना ही नहीं जब एमजीआर का अंतिम संस्कार किया गया तो वहां जयललिता को नहीं जाने दिया गया। जयललिता ने बताया था, “जब उनके शव को परिजनों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए राजाजी हाल के अंदर ले जाया गया तो मुझे अंदर नहीं आने दिया गया।” एमजीआर की अंतिम यात्रा में भी जयललिता के संग बदसलूकी हुई थी। जयललिता के अनुसार जानकी के भांजे दीपन और एआईएडीएम के विधायक केपी रामलिंगम ने उनके संग गालीगलौच और मारपीट की थी। वो लोग नहीं चाहते थे कि जयललिता अंतिम यात्रा में शामिल हों। जयललिता ने एमजीआर के अंतिम संस्कार के बाद राज्य के राज्यपाल और शीर्ष पुलिस अधिकारियों से इस बदसलूकी की शिकायत की थी लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी।

राजकीय सम्‍मान के साथ जयललिता को अंतिम विदाई, एमजीआर की समाधि के पास दफन की गईं ‘अम्‍मा’

तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे. जयललिता के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। चेन्‍नई के अपोलो हॉस्पिटल में सोमवार (5 दिसंबर) की रात 11.30 बजे ‘अम्‍मा’ ने दुनिया को अलविदा कहा। जयललिता का पार्थिव शरीर राजाजी हॉल में अंतिम दर्शन हेतु रखा गया था। जहां लाखों की संख्‍या में समर्थकों ने अपनी प्रिय नेत्री को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी। अम्‍मा का अंतिम संस्‍कार मंगलवार शाम को मरीना बीच पर गया। उन्‍हें एमजीआर की समाधि के बगल में दफनाया गया। सत्‍ता-पक्ष एवं विपक्ष के सभी बड़े नेता जयललिता को श्रद्धांजलि अर्पित करने चेन्‍नई पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजाजी हॉली में जया को पुष्‍पांजलि अर्पित की। जयललिता के उत्‍तराधिकारी चुने गए ओ. पन्‍नीरसेल्‍वम का रो-रोकर बुरा हाल है।जयललिता को रविवार शाम अचानक दिल का दौरा पड़ा था। सोमवार को दिन भर उनके स्वास्थ्य को लेकर तरह तरह की अफवाहें उड़ती रही। देर रात इस बात की पुष्टि कर दी गई कि जयललिता अब हमारे बीच नहीं हैं।

तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के चलते मंगलवार से सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। एक अधिसूचना में कहा गया है कि इस अवधि में सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। सरकार ने राज्य में सभी शिक्षण संस्थानों में तीन दिवसीय अवकाश की भी घोषणा की है। पड़ोस के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी जयललिता के सम्मान में मंगलवार को सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में एक दिन की छुट्टी की घोषणा की है।

13 साल की उम्र में बाल कलाकार से शुरू किया करियर, विपक्ष को खुली चुनौती देकर बनी थीं पहली बार सीएम

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता का सोमवार ( 5 दिसंबर) को चेन्नई के अपोलो हॉस्पिटल में 68 की आयु में निधन हो गया। छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रह चुकीं जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर के एक परंपरागत तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब वो दो साल की थीं तो उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी इसलिए उन्होंने 1961 में महज 13 साल की उम्र में बाल कलाकर के तौर पर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। 1964 में कन्नड़ फिल्म चिन्नादा गोमबे (सोने की गुड़िया) से उन्होंने व्यस्क भूमिकाएं करनी शुरू की। उन्होंने फिल्मी जीवन की शुरुआत भले ही कन्नड़ फिल्मों से की हो लेकिन उन्हें बड़ी सफलता तमिल फिल्मों में मिली।
1965 में जयललिता ने अपनी पहली तमिल फिल्म “वेन्निरा अदाई” (सफेद लिबास) की। इसी साल उन्होंने तमिल फिल्मों के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के साथ भी पहली बार काम किया। एमजीआर और जयललिता की जोड़ी सुनहरे परदे पर हिट रही। दोनों ने एक साथ 28 फिल्मों में लीड रोल किया। 1970 के दशक में दोनों ने अज्ञात कारणों से एक साथ फिल्में करनी बंद कर दी थीं। दोनों ने आखिरी बार 1973 में आई फिल्म पट्टीकट्टू पोनैया में काम किया था। हालांकि जयललिता 1980 तक फिल्मों में काम करती रहीं। उन्होंने अपने करीब बीस साल लंबे फिल्मी करियर में करीब 300 फिल्मों में काम किया। उन्होंने कुछ हिंदी और एक अंग्रेजी फिल्म में भी अभिनय किया था लेकिन वहां वो सफलता का स्वाद नहीं चख सकीं।
फिल्मों में जयललिता के मेंटर रहे एमजीआर राजनीति में भी उनके गुरु बने। 1977 में एआईएडीएमके के नेता के तौर पर एमजीआर पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। उनके पीछे-पीछे जयललिता भी आज्ञाकारी शिष्या की तरह 1982 में एआईएडीएमके की सदस्य बनकर राजनीति में आ गईं। 1983 में उन्हें पार्टी के प्रचार विभाग का सचिव बनाया गया। 1984 में एमजीआर ने उन्हें राज्य सभा का सांसद बनाया। हालांकि कुछ समय बाद ही एमजीआर से उनके मतभेद शुरू हो गए। जब 1987 में एमजीआर का देहांत हुआ तो पार्टी में विरासत की जंग छिड़ गई। पार्टी का एक धड़ा एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन के साथ था तो दूसरा धड़ा जयललिता के साथ।
एआईएडीएमके के कुल 132 विधायकों में से 97 के समर्थन से जानकी 1988 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं लेकिन राजीव गांधी की तत्कालीन केंद्र सरकार ने 21 दिन बाद ही उनकी सरकार को बरखास्त कर दिया। 1989 के तमिलनाडु विधान सभा चुनाव में एआईएडीएमके की अंदरूनी कलह का साफ असर दिखा और डीएमके सत्ता में वापस आ गई। जयललिता के गुट को चुनाव में 27 सीटें मिली थीं वहीं जानकी गुट को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में करारी हार के बाद जानकी ने राजनीति से किनारा कर लिया और एआईएडीएमकी और एमजीआर की राजनीतिक विरासत की एकमात्र उत्तराधिकारी जयललिता बन गईं।

तमिलनाडु और जयललिता के राजनीतिक इतिहास में 25 मार्च 1989 का दिन काफी अहम है। उस दिन विधान सभा के अंदर क्या हुआ इस पर विवाद है लेकिन इतना तय है कि डीएमके और एआईडीएमके विधायकों की हाथापाई के बीच जयललिता के संग सदन में अभद्रता की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जयललिता उस दिन सदन से यह कहते हुए बाहर चली गईं कि वो दोबारा मुख्यमंत्री बनकर ही विधान सभा में वापस आएंगी। विधान सभा में हुई बदसलूकी के महज दो साल बाद जयललिता के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके और कांग्रेस गठबंधन ने राज्य की 234 सीटों में से 225 पर जीत हासिल कर ली और जयललिता पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।
मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही वक्त बाद जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था इत्यादि के आरोप लगने लगे। नतीजा ये हुआ कि जब 1996 में विधान सभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी महज चार सीटों पर सिमट गई। इसी साल उनके खिलाफ करुणानिधि सरकार ने भ्रष्टाचार के करीब 48 मामले दर्ज कराए। जयललिता को कई महीने जेल में बिताने पड़े। 1997 में सुब्रमण्यम स्वामी ने उनके ऊपर करीब 66 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति हासिल करने का मामला दर्ज कराया जो एक दशक से अधिक समय तक जयललिता के गले की फांस बना रहा।
साल 2001 के विधान सभा चुनाव में एआईडीएमके ने 196 सीटों पर जीत हासिल करके भारी बहुमत हासिल किया। भ्रष्टाचार के मुकदमे के कारण खुद जयललिता चुनाव नहीं लड़ सकी थीं फिर भी चुनावी जीत के बाद उनकी पार्टी ने उन्हें ही सीएम चुना। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी। उन्होंने अपनी जगह ओ पनीरसेल्वन को सीएम बनाया। साल 2003 में हाई कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के कई मामलों में बरी किए जाने के बाद उन्हें विधान सभा चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई। चुनाव जीतकर वो फिर राज्य की सीएम बनीं। साल 2006 के विधान सभा चुनाव में उन्हें डीएमके गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
साल 2011 के विधान सभा चुनाव में एआईडीएमके को 203 सीटों पर जीत मिली। जयललिता एक बार फिर राज्य की सीएम बनीं। 27 सितंबर 2014 को अदालत ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में चार साल की सजा सुनाते हुए 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। जयललिता को करीब एक महीने जेल में रहना पड़ा। उनकी जगह ओ पनीरसेल्वम एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने। साल 2015 में हाई कोर्ट ने जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी कर दिया और वो फिर से राज्य की सीएम बन गईं।
साल 2016 में हुए विधान सभा चुनाव में जयललिता ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। तमिलनाडु के इतिहास में 32 साल बाद किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला था। तीन दशक पहले ये कारना उनके राजनीतिक गुरु एमजीआर ने किया था। मई 2016 में जयललिता छठवीं बार राज्य की सीएम बनीं। 68 वर्षीय जयललिता 22 सितंबर को तबीयत खराब होने के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती हुईं। राहुल गांधी, अमित शाह और अरुण जेटली जैसे कई प्रमख नेताओं को अस्पताल में उनके मिलने नहीं दिया गया। रविवार (3 दिसंबर) को पहले खबर आई कि वो समान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दी गईं और किसी भी वक्त घर जा सकती हैं लेकिन थोड़ी देर बाद ही ये खबर आने लगी कि उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हुआ। सोमवार को सुबह से ही उनके स्वास्थ्य को लेकर रहस्य का वातावरण बना रहा और शाम को उनके निधन की सूचना आई। रविवार को उन्हें हार्ट अटैक आया था इसके बाद सोमवार सुबह से उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही थी सोमवार देर रात उनके निधन की घोषणा कर दी गई।
 

मौत से 74 दिन लड़ीं जयललिता, 68 साल की उम्र में निधन

68 वर्ष की जयललिता को रविवार को अचानक दिल का दौरा पड़ा था।
तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता के निधन की घोषणा हो गई है। सोमवार देर रात पार्टी  ने उनकी निधन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। राज्य में तीन दिन के शोक की घोषणा की कर दी गई है। तीन दिन तक राज्य में स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे।  68 वर्ष की जयललिता को रविवार को अचानक दिल का दौरा पड़ा था। अस्‍पताल की एक्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर संगीता रेड्डी ने कहा है कि ‘अपोलो और एम्‍स के डॉक्‍टर्स की एक बड़ी टीम सभी जीवनरक्षक उपाय कर रही है।’ इसके बाद सोमवार दोपहर के समय कुछ तमिल टीवी चैनलों ने जयललिता की मौत की खबर चलाई थी, जिसका अस्‍पताल ने खंडन किया है। अस्‍पताल के बाहर उनके हजारों समर्थक इकट्ठे हो रखे हैं। हालांकि बाद में देर रात करीब 12 बजे इस बात की पुष्टि कर दी गई।
बुखार एवं निर्जलीकरण की शिकायत के चलते जयललिता को 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करीब 74 दिन तक जयललिता मौत से लड़ती रही। कुछ दिन पहले अपोलो हॉस्पिटल्स के चेयरमैन प्रताप सी रेड्डी ने कहा था कि तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ‘‘पूरी तरह स्वस्थ हो गई हैं।’’ अस्‍पताल की ओर से चार दिसंबर को जारी बुलेटिन में कहा गया, ”कार्डियोलॉजिस्‍ट, पल्‍मोनोलॉजिस्‍ट और क्रिटिकल केयर स्‍पेशलिस्‍ट्स उनका ट्रीटमेंट और मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वह एक्‍स्‍ट्राकार्पोरियल मेमब्रेन हर्ट असिस्‍ट डिवाइस पर हैं। लंदन से डॉक्‍टर रिचर्ड बैली से भी परामर्श लिया गया है।” पुलिस ने अब संभावित शोक को देखते हुए इंतजाम कर लिए हैं। हॉस्पिटल जाने वाले सारे रास्ते बंद कर दिए गए। प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट करके दुख प्रकट किया है।
जयललिता 1982 में एआईएडीएमके की सदस्य बनकर राजनीति में आईं। 1983 में उन्हें पार्टी के प्रचार विभाग का सचिव बनाया गया। 1984 में एमजीआर ने उन्हें राज्य सभा का सांसद बनाया। हालांकि कुछ समय बाद ही एमजीआर से उनके मतभेद शुरू हो गए। जब 1987 में एमजीआर का देहांत हुआ तो पार्टी में विरासत की जंग छिड़ गई। पार्टी का एक धड़ा एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन के साथ था तो दूसरा धड़ा जयललिता के साथ। इसके बाद से जयललिता तमिलनाडु की राजनीति के केंद्र में रही। 2016 में दूसरी बार विधानसभा का चुनाव जीतनी वाली वो एमजीआर के बाद दूसरी नेता बनी।

टाइम पर्सन ऑफ द ईयर पोल में जीते पीएम नरेंद्र मोदी, मगर ट्विटर पर उड़ रहा केजरीवाल का मजाक

पीएम मोदी को भारत के अलावा अमेरिका के कैलिफोर्निया और न्‍यू जर्सी में भारी समर्थन मिला है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन द्वारा कराए गए ‘पर्सन ऑफ द ईयर 2016’ का ऑनलाइन रीडर्स पोल जीत लिया है। मोदी ने दुनियाभर के नामी नेताओं, कलाकारों व प्रमुख हस्तियों को पछाड़कर यह खिताब जीता है। हालांकि पर्सन ऑफ द ईयर के संबंध में अंतिम फैसला मैगजीन का संपादक पैनल करेगा, जिसका ऐलान 7 दिसंबर को होगा। 2016 के पर्सन ऑफ द ईयर के लिए चल रही वोटिंग रविवार (4 दिसंबर) को खत्‍म हुई थी। नरेंद्र मोदी को सर्वाधिक 18 प्रतिशत लोगों ने पर्सन ऑफ इ ईयर चुना, जबकि बराक ओबामा, डोनाल्‍ड ट्रंप और विकीलीक्‍स के संस्‍थापक जूलियन असांज को 7-7 फीसदी वोट मिले। रेस में शामिल हिलेरी क्लिंटन को 4 फीसदी तथा दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को 2 प्रतिशत वोट हासिल हुए। सोशल मीडिया पर मोदी के ऑनलाइन पोल में ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुने जाने पर हलचल है। सत्‍ताधारी भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं ने इसपर पीएम को बधाई दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मोदी को ‘सबसे प्रभावशाली व्‍यक्ति’ बताया है। वहीं बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा ने लिखा है कि मोदी के भीतर ‘समय से आगे सोचने की क्षमता है’ जिसने उन्‍हें पर्सन ऑफ द ईयर बनाया।
सोशल मीडिया पर पोल में नरेंद्र मोदी के सबसे आगे होने पर लोग खुशी जता रहे हैं। लेकिन इसी बहाने दिल्‍ली सीएम अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधा जा रहा है। दरअसल, केजरीवाल अक्‍सर केंद्र सरकार व पीएम मोदी की आलोचना करते हैं। इसी वजह से इस मौके का फायदा उठाते हुए यूजर्स ने चुटकी ली है।

पाकिस्‍तानी मीडिया ने फैलाई तमिलनाडु सीएम जे जयललिता की मौत की अफवाह, छापी झूठी खबर

जयललिता को कार्डिएक अरेस्ट की खबर के बाद से अस्पताल के बाहर सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक इकट्ठा हो गए हैं।
पाकिस्‍तानी मीडिया ने तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता की मौत की खबर चला दी है। जबकि जयललिता को चेन्‍नई के अपोलो अस्‍पताल में इलाज चल रहा है, हालांकि उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है। वरिष्‍ठ पाकिस्‍तानी पत्रकार उमर आर कुरैशी ने एक ट्वीट में सोमवार को कहा, ”पाकिस्‍तान के दो सबसे बड़े उर्दू दैनिक अखबारों ने इस सुबह खबर दी कि भारतीय राजनेता जय‍ललिता की मौत हो गई है (वह जीवित हैं)।” अगले ट्वीट में उन्‍होंने कहा, ”प्रिय एक्‍सप्रेस, जियो और नवा-ई-वक्‍त: जयललिता जिंदा हैं।” तमिलनाडु सीएम की स्थिति पर ताजा अपडेट देते हुए अपोलो अस्‍पताल ने सोमवार को घोषणा की थी कि उनकी (जयललिता) हालत ‘बेहद गंभीर’ है। अस्‍पताल ने कहा कि कार्डिएक अरेस्ट के बाद जयललिता को ईसीएमओ (एक्स्ट्रा कॉरपोरियल मेंब्राना आक्सिजेनेशन) और अन्‍य लाइफ सपोर्ट सिस्‍टम्‍स के सहारे रखा गया है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार ने एम्‍स के चार स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टरों को जयललिता के इलाज के लिए चेन्‍नई भेजा। इस टीम में पल्‍मोनोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर जीसी खिलनानी, एनेस्‍थेटिस्‍ट डॉक्‍टर अंजन त्रिखा, कार्डिएक सर्जन डॉक्‍टर सचिन तलवार और कार्डियोलॉजिस्‍ट डॉक्‍टर राजीव नारंग शामिल हैं।
रविवार को जब जयललिता को कार्डिएक अरेस्ट की खबर आई उसके बाद से अस्पताल के बाहर सैकड़ों की संख्या में उनके समर्थक इकट्ठा हो गए हैं। अस्पताल के बाहर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात है। दंगा नियंत्रण बल के 900 जवान भी मौके पर तैनात हैं। वहीं सीआरपीएम समेत अन्य अर्धसैनिक बलों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।

उतरी भारत में कोहरे की मार, 74 ट्रेन लेट, तीन रद्द, फ्लाइट्स का भी बिगड़ा शेड्यूल

उतरी भारत में कोहरे की मार, 74 ट्रेन लेट, तीन रद्द, फ्लाइट्स का भी बिगड़ा शेड्यूल

उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली, बिहार जैसे उत्‍तरी राज्‍यों में कोहरे के चलते ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा है।

उत्‍तरी भारत में सर्दी और कोहरे के चलते ट्रेन और हवाई यातायात पर गहरा असर पड़ा है। उत्‍तर प्रदेश, दिल्‍ली, बिहार जैसे उत्‍तरी राज्‍यों में कोहरे के चलते ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा है। जानकारी के अनुसार दिल्‍ली से आने वाली 74 ट्रेनें देरी से चल रही हैं। वहीं तीन ट्रेनों को कमजोर दृश्‍यता के चलते रद्द कर दिया गया। उत्‍तर प्रदेश में भी कई ट्रेन लेट चल रही हैं। यहां कानपुर में कोहरे के चलते रेल परिवहन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां पर दृश्‍यता 200 मीटर से भी कम रही। वहीं हवाई यातायात पर भी कोहरे का असर पड़ा है। इंडिगो एयरलाइंस की कई फ्लाइट कोहरे के चलते लेट हुई है। इंडिगो की ओर से जारी बयान में कहा गया कि लखनऊ एयरपोर्ट पर दृश्‍ता केट-2 मिनिमा से कम है। इसके चलते यहां से जाने वाली फ्लाइट में देरी हुई है। इंडिगो के अनुसार, वाराणसी, पटना और रांची में भी कोहरे का काफी असर है। यहां से उड़ान भरने वाली और यहां उतरने वाली दोनों तरह की फ्लाइट्स पर असर पड़ा है। फ्लाइट्स के लेट होने का अंदेशा भी जताया जा रहा है। हालांकि दिल्‍ली में एयरपोर्ट पर दृश्‍ता केट-1 मिनिमा से ऊपर है। इसलिए यहां पर कोई दिक्‍कत नहीं है।

लोकसभा और राज्‍य सभा में हंगामा, विपक्ष वोटिंग के साथ बहस और पीएम की माफी की मांग पर अड़ा

संसद के शीतकालीन सत्र में अब तक नोटबंदी के मुद्दे के चलते काम नहीं हो पाया है।

संसद के शीतकालीन सत्र में अब तक नोटबंदी के मुद्दे के चलते काम नहीं हो पाया है। दोनों सदनों लोकसभा और राज्‍यसभा में विपक्ष आक्रामक मूड में है और वोटिेंग के साथ बहस की मांग कर रहा है। सरकार इससे इनकार कर रही है। लेकिन सोमवार (5 दिसंबर) को नोटबंदी पर लोकसभा में बहस हो सकती है। स्‍पीकर सुमित्रा महाजन ने बताया कि वोटिंग के बिना बहस कराने का प्रस्‍ताव आया है। यह प्रस्‍ताव बीजू जनता दल के भ्रतृहरि महताब और तेलंगाना राष्‍ट्र समिति(टीआरएस) के जितेंद्र रेड्डी ने नियम 193 के तहत नोटिस दिया है। यदि इस पर बहस होती है तो संसद में चल रहा गतिरोध समाप्‍त हो सकता है।

नियम 193 के अनुसार कोई भी सदस्‍य जनता से जुड़े मसले पर तत्‍काल बहस चाहता हो वह लिखित में नोटिस दे सकता है। गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र 16 नवंबर से शुरू हुआ था। शीतकालीन सत्र में अभी तक राज्य सभा में पहले दिन बहस हुई थी। उसके बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में बुलाने की मांग को लेकर हंगामे के चलते काम नहीं हो पाया। वहीं लोकसभा में सरकार ने हालांकि आयकर कानून संशोधन पास करा लिया लेकिन इसके अलावा कोई काम नहीं हो पाया है। वहीं विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में बैठक की है।

मुंबई के परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का किया खुलासा, आईटी विभाग ने शुरू की जांच

मुंबई के एक परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा किया है। हालांकि आयकर विभाग ने इस खुलासे को खारिज कर दिया है और जांच शुरू कर दी है।

मुंबई के एक परिवार ने दो लाख करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा किया है। हालांकि आयकर विभाग ने इस खुलासे को खारिज कर दिया है और जांच शुरू कर दी है। मुंबर्इ के चार लोगों के परिवार ने यह खुलासा किया था। आयकर विभाग के अनुसार, जरूरी जांच के बाद सामने आया कि जिन लोगों ने संपत्ति का खुलासा किया वे संदिग्‍ध हैं। साथ ही अंदेशा है कि शायद इन लोगों का दुरुपयोग किया गया हो। इस रकम का खुलासा करने वाले परिवार के सदस्‍यों के नाम अब्‍दुल रज्‍जाक मोहम्‍मद सैयद(खुद), मोहम्‍मद आरिफ अब्‍दुल रज्‍जाक सैयद(बेटा), रूखसाना अब्‍दुल रज्‍जाक सैयद (पत्‍नी) और नूरजहां मोहम्‍मद सैयद(बेटी) हैं। यह परिवार मुंबई के ब्रांदा इलाके में रहता है। परिवार के तीन सदस्‍यों के पैन कार्ड अजमेर के पते पर बने हैं। इसी साल सितंबर में ये लोग मुंबई आएं थे।
इससे पहले अहमदाबाद के रहने वाले महेशकुमार चंपकलाल शाह ने 13860 करोड़ रुपये की संपत्ति का एलान किया था। शाह को तीन दिसंबर को आयकर विभाग ने हिरासत में ले लिया था। मुंबई और अहमदाबाद में किए गए खुलासों की जांच की जा रही है और यहां की रकम को एक अक्‍टूबर को जारी किए गए आंकड़ों में शामिल नहीं किया गया था। सरकार की ओर से एक अक्‍टूबर को बताया गया था कि 65250 करोड़ रुपये की अघोषित सं‍पत्ति का खुलासा हुआ है। बाद में इसमें सुधार कर आंकड़ा 67382 करोड़ रुपये बताया गया था।  केंद्र सरकार ने अघोषित आय का ख्‍ुालासा करने के लिए योजना शुरू की थी।
इस योजना के तहत 30 सितंबर तक सरकार को 45 प्रतिशत टैक्स देकर अघोषित आय घोषित की जा सकती थी। इसके तहत अघोषित आय पर टैक्स चुकाने के बाद आय की स्वैच्छिक करने वाले पर आयकर विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होनी थी।  गुजरात के कारोबारी महेश शाह ने योजना के आखिरी दिन 13 हजार करोड़ रुपये अघोषित आय की जानकारी आयकर विभाग को दी थी। शाह को टैक्स की 975 करोड़ रुपये की पहली किश्त 30 नवंबर तक चुकानी थी। जब आयकर विभाग ने जांच की तो पाया कि शाह ने अहमदाबाद के कई बड़े कारोबारियों के कालेधन को अपना बताकर आय की स्वैच्छिक घोषणा के तहत घोषित किया था। बाद में उन्‍होंने बताया कि कमीशन के लालच में इस रकम को अपना बताया था। वे आयकर विभाग के सामने वास्‍तविक लोेगों के नामों का खुलासा करेंगे।

नितिन गडकरी की बेटी ने की शादी, मोहन भागवत, रामदेव, राजनाथ, अमित शाह समेत कई वीआईपी बने मेहमान

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की बेटी केतकी गडकरी ने रविवार (चार दिसंबर) को आदित्‍य कासखेदिकर से शादी कर ली। दोनों लंबे समय से दोस्‍त थे।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की बेटी केतकी गडकरी ने रविवार (चार दिसंबर) को आदित्‍य कासखेदिकर से शादी कर ली। दोनों लंबे समय से दोस्‍त थे। आदित्‍य वर्तमान में फेसबुक में काम करते हैं। केतकी गडकरी की तीन संतानों में सबसे छोटी हैं। नागपुर के रहने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के दो बेटे निखिल और सारंग हैं। रोचक बात है कि कुछ साल पहले तक आदित्‍य के पिता रवि कासखेदिकर और नितिन गडकरी के बीच बनती नहीं थी। रवि कासखेदिकर ने नागपुर नगर निगम द्वारा पानी की सप्‍लाई का निजीकरण किए जाने पर गडकरी के खिलाफ आंदोलन भी किया था। शादी का रिसेप्‍शन आठ दिसंबर को होगा। शादी में केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, वेंकैया नायडू, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस समेत कई बड़ी राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं।
असम के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, प्रकाश जावडेकर, हंसराज अहीर, पीयूष गोयल, योगगुरू रामदेव और पूर्व विमानन मंत्री एवं वरिष्ठ राकांपा नेता प्रफुल पटेल आदि इस मौके पर मौजूद अतिविशिष्ट हस्तियां थीं। राजनाथ सिंह और अमित शाह रविवार सुबह आए। फड़णवीस और अन्य नेता शनिवार(3 दिसंबर) को रात में पहुंचे थे। महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल, सुभाष देशमुख, पंकजा मुंडे, गिरीश महाजन, सदाभाऊ खोतकर और गिरीश देशमुख आदि भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सूत्रों के अनुसार, ”शादी कार्यक्रम में करीबी रिश्‍तेदारों और दोस्‍तों को ही बुलाया गया। कई महत्‍वपूर्ण नेताओं को बुलावा नहीं दिया गया था।
वीआईपी मेहमानों के लिए दो रिसेप्‍शन नागपुर और दिल्‍ली में होंगे। नागपुर में रिसेप्‍शन छह और दिल्‍ली में आठ दिसंबर को होगा। दिल्‍ली के कार्यक्रम में राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा व कई विपक्षी पार्टियों के नेताओं को न्‍यौता भेजा गया है। नागपुर के कार्यक्रम में महाराष्‍ट्र के वीआईपी लोगों को बुलाया गया है।” खबरों के अनुसार शादी के लिए 10 हजार मेहमानों को बुलावा भेजा गया था। वहीं ऐसा भी कहा गया था कि मेहमानों को लाने के लिए 50 चार्टर्ड प्‍लेन की व्‍यवस्‍था की गई। हालांकि नितिन गडकरी के दफ्तर की ओर से जारी बयान में कहा गया इस तरह की खबर शरारतपूर्ण और गलत है।

नोटबंदी: 14 लाख करोड़ की करेंसी बनी कागज, लेकिन अबतक कुल 1.5 लाख करोड़ के नए नोट छपे

देश के लोग इस वक्त नोटबंदी के बाद होने वाली परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है।

देश के लोग इस वक्त नोटबंदी के बाद होने वाली परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अबतक कुल 1.5 लाख करोड़ रुपए के नए नोट छापे हैं। जबकि 500 और 1000 रुपए के रूप में देश के 14.18 लाख करोड़ रुपयों को कागज के बराबर बना दिया गया। 1.5 लाख करोड़ रुपए में भी ज्यादातर नोट 2000 रुपए के हैं जो फिलहाल किसी इस्तेमाल के नहीं है क्योंकि लोगों के पास बदले में देने के लिए छुट्टे पैसे ही नहीं हैं। यह रिपोर्ट Credit Suisse research report द्वारा सामने आई है। यह रिपोर्ट 25 नवंबर को आई। 1.5 लाख करोड़ रुपए की नई करेंसी के अलावा 2.2 लाख करोड़ रुपए की करेंसी पहले से चलन में है। नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपए के 2,203 करोड़ नोट कागज के टुकड़े बराबर हो गए। रिपोर्ट का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को अभी जल्दी में 1,000-2,000 करोड़ नोट और छापने होंगे ताकि ट्रांसेक्शन लेवल पहले की स्थिति में आ सके।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी जानकारी दी थी कि बैंक और एटीएम के माध्यम से उसने 10 से 18 नवंबर के बीच 1.03 लाख करोड़ रुपए लोगों तक पहुंचा दिए हैं। 14.18 लाख करोड़ रुपए की पुरानी करेंसी में से 6 लाख करोड़ रुपए विभिन्न बैकों में फिर से जमा हो गई है। रिपोर्ट ने पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों पर कहा है कि आरबीआई एक दिन में 500 रुपए के लगभग 4 से 5 करोड़ नोट छाप रहा है। ऐसे में जनवरी 2017 तक पुरानी करेंसी का कुल 64 प्रतिशत हिस्सा ही चलन में आ पाएगा।

अभी हाल में ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया था कि 23 बिलियन से ज्यादा नोट अब बंद हो गए हैं। अगर उन्हें एक के ऊपर एक रखा जाए तो इनसे बनने वाली आकृति माउंट एवरेस्ट से 300 गुना ज्यादा ऊंची हो सकती है। वहीं इनको एक के आगे एक रखा जाएगा तो चांद तक आने-जाने का रास्ता पांच बार बनाया जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी का एलान किया था। बताया गया था कि 31 दिसंबर के बाद से 500 और 1000 रुपए के नोट चलने बंद हो जाएंगे। पीएम ने कहा था कि 500 और 1000 के नोट 31 दिसंबर के बाद ‘कागज के टुकड़े’ के बराबर होंगे। दुनिया भर में भारत द्वारा नोटबंदी के फैसले को बड़ा कदम बताया जा रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया हर साल 400 मिलियन डॉलर नोट बनाने पर खर्च करता है।

हांगकांग ओपन सुपर सीरीज: समीर वर्मा के धमाके के बाद पीवी सिंधू का कमाल, बनाई फाइनल में जगह

 

भारत की पीवी सिंधू हांगकांग ओपन के फाइनल में पहुंच गई है। सिंधू ने लगातार दूसरी सुपर सीरीज के फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले पिछले सप्‍ताह उन्‍होंने चीन ओपन सुपर सीरीज जीती थी। रियो ओलंपिक की सिल्‍वर मेडलिस्‍ट सिंधू ने सेमीफाइनल में हांगकांग की यी चियांग न्‍गान को 21-14, 21-16 से हराया। फाइनल में उनका सामना ताई जू यिंग से होगा।

इससे पहले पुरुष वर्ग मेंं भारत के समीर वर्मा हांगकांग ओपन सुपर सीरीज के फाइनल में पहुंच गए। उन्होंने दुनिया के नंबर तीन खिलाड़ी जेन ओ जोर्गेनसेन को 21-19, 24-22 से हराया। समीर वर्मा की रैंकिंग 43वीं हैं। दोनों खिलाडि़यों के बीच दोनों गेम में कड़ा मुकाबला हुआ लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने मैच पॉइंट के समय जीवटता दर्शाते हुए बाजी मारी। दूसरे गेम में समीर ने दो मैच पॉइंट मैच बचाए और 24-22 से गेम और मैच जीता।

उन्‍होंने क्‍वार्टरफाइनल में मलेशिया के चोंग वेई फेंग को 21-17, 23-21 से हराया था। जोर्गेनसेन ने पिछले सप्‍ताह ही चाइना ओपन जीता था। 23 साल के समीर वर्मा के एकेडमी में साथी परुपल्‍ली कश्‍यप, एचएस प्रणय और श्रीकांत भी जोर्गेनसेन को हरा चुके हैं।

इंटरव्यू: अमर्त्य सेन बोले- काला धन के खिलाफ जरा भी कारगर नहीं होगा नरेंद्र मोदी सरकार का नोटबंदी का फैसला

नोटबंदी से लोगों को हो रही मुश्किलों पर उन्होंने कहा, "केवल एक अधिनायकवादी सरकार ही चुपचाप लोगों को इस संकट में झेलने के लिए छोड़ सकती है।
भारत रत्न और नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बैन को निरंकुश कार्रवाई जैसा बताया है। उन्होंने कहा है कि डिमोनेटाइजेशन सरकार की अधिनायकवादी प्रकृति को दर्शाता है। इंडियन एक्सप्रेस से खास बातचीत में प्रोफेसर सेन ने कहा, “लोगों को अचानक यह कहना कि आपके पास जो करेंसी नोट हैं वो किसी काम का नहीं है, उसका आप कोई इस्तेमाल नहीं कर सकते, यह अधिनायकवाद की एक अधिक जटिल अभिव्यक्ति है, जिसे कथित तौर पर सरकार द्वारा जायज ठहराया जा रहा है क्योंकि ऐसे कुछ नोट कुछ कुटिल लोगों द्वारा काला धन के रूप में जमा किया गया है।” उन्होंने कहा, “सरकार की इस घोषणा से एक ही झटके में सभी भारतीयों को कुटिल करार दे दिया गया जो वास्तविकता में ऐसा नहीं हैं।”
नोटबंदी से लोगों को हो रही मुश्किलों पर उन्होंने कहा, “केवल एक अधिनायकवादी सरकार ही चुपचाप लोगों को इस संकट में झेलने के लिए छोड़ सकती है। आज लाखों निर्दोष लोगों को अपने पैसे से वंचित किया जा रहा है और अपने स्वयं के पैसे वापस लाने की कोशिश में उन्हें पीड़ा, असुविधा और अपमान सहना पड़ रहा है।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या नोटबंदी का कुछ सकारात्मक असर दिखेगा जैसा कि प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, “यह मुश्किल लगता है। यह ठीक वैसा ही लगता है जैसा कि सरकार ने विदेशों में पड़े काला धन भारत वापस लाने और सभी भारतीयों को एक गिफ्ट देने का वादा किया था और फिर सरकार उस वादे को पूरा करने में असफल रही।”
सेन ने कहा, जो लोग काला धन रखते हैं उन पर इसका कोई खास असर पड़ने वाला नहीं है लेकिन आम निर्दोष लोगों को नाहक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने हर आम आदमी और छोटे कारोबारियों को सड़कों पर ला खड़ा किया है। सेन ने सरकार के उस दावे का भी खंडन किया है कि हर दर्द के बाद का सुकून फलदायी होता है। सेन ने कहा ऐसा कभी-कभी होता है। उन्होंने इसे स्पष्ट करते हुए कहा, “अच्छी नीतियां कभी-कभी दर्द का कारण बनती हैं, लेकिन जो कुछ भी दर्द का कारण बनता है – चाहे कितना भी तीव्र हो – यह जरूरी नहीं कि वो अच्छी नीति ही हो।

पीएम मोदी बोले- मध्यम वर्ग का शोषण बंद करवाना है, गरीबों को हक दिलाना है

पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान पर भी हमला बोला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को पंजाब के बठिंडा में एम्स की आधारशिला रखी। इस दौरान उन्होंने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के विकास के लिए सामाजिक ढांचा जरूरी होता है। हमें टॉप लेवल की स्कूलों और अस्पतालों की जरूरत है। हम सत्ता में रहते हुए जो भी फैसला लेते हैं, उन्हें उसी समय में उस पूरा करते हैं। एम्स से यहां के स्थानीय लोगों को मदद मिलेगी। यह सरकार केवल प्रोजेक्ट्स की आधारशिला ही नहीं रखती, बल्कि उन प्रोजेक्ट्स को पूरा भी करती है।’

साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि पाकिस्तान यहां से कोई ज्यादा दूर नहीं है। जब हमारे बहादुर जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक किया, सीमा पार हड़कंप मच गया था और अब भी उनका मामला ठिकाने नहीं लगा है। पाकिस्तान के लोगों से एक बार फिर बात करना चाहता हूं। उन्हें अपनी सरकार से बात करनी चाहिए। उन्हें फैसला करना चाहिए कि क्या वे भारत के खिलाफ जंग लड़ना चाहते हैं। तो उन्हें हमसे भ्रष्टाचार, कालेधन और गरीबी के खिलाफ जंग लड़नी चाहिए। जब पाकिस्तान के पेशावर में स्कूल पर हमला हुआ तो हर भारतीय दुखी था। पाकिस्तान के लोगों को अपनी सरकार से कहना चाहिए कि वह भ्रष्टाचार और जाली नोटों के खिलाफ जंग लड़े।

पीएम मोदी ने कहा, ‘जो पानी मेरे किसान भाईयों का है, वो पाकिस्तान से बहकर समुद्र में जाता है। वो पानी अपने किसानों के लिए लाने का प्रयास करूंगा। जो पानी हिंदुस्तान का है, वे पाकिस्तान नहीं जा सकता। सरकार हमारे किसानों को पूरा पानी दिलाने के लिए हरसंभव काम करेगी। मेरे लिए चुनाव मायने नहीं रखते। मैं मेरे किसानों के भले के लिए सोचता हूं। सिंधु पानी संधि जो है, जिसमें हिंदुस्तान के हक का पानी है जो पाकिस्तान में बह जाता है। अब वो बूंद-बूंद पानी रोक करके पंजाब, जम्मू-कश्मीर और हिंदुस्तान के किसानों के लिए पानी लाऊंगा। कालेधन और भ्रष्टाचार ने मध्यम वर्ग को लूटा है और गरीबों के हक को छीना है। मैं उन्हें वह वापस दिलाना चाहता हूं। मैं हरसंभव यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा हूं कि मध्यम वर्ग को शोषण रुकवा सकूं और गरीबों को उनका हक वापस दिला सकूं।’

नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा, ‘जब लोग इस समय मुश्किलों के दौर में जी रहे थे, ऐसे में भी वे मेरे साथ खड़े थे। उन लोगों का शुक्रिया अदा करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। कठिनाईयों का रास्ता भी है, उस रास्ते के लिए आपकी मदद चाहिए। आप के पास जो मोबाइल फोन है। वे सिर्फ फोन नहीं है। मोबाइल फोन को आप अपने बैंक बना सकता है। आप अपना बटुआ बना सकते हैं। रुपए को छुए बिना मोबाइल से व्यापार हो सकता है। डिजिटल कैश की ओर बढ़ना है। मोबाइल फोन में बैंकों के ऐप होते हैं। व्यापारियों को शिक्षित करें।’

ट्विटर यूजर्स बोले- पीएम नरेंद्र मोदी की नोटबंदी लाई मंदी, एप सर्वे का भी उड़ाया मजाक

प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के फैसले पर कराए गए सर्वे के परिणाम बुधवार रात ट्विटर पर शेयर किए थे।
पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को 500 व 1000 रुपए के नोटों का विमुद्रीकरण करने का फैसला सोशल मीडिया पर खूब चर्चित है। रोज कोई न कोई ट्रेंड नोटबंदी के फैसले के समर्थन या विरोध में सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर हिट हो जाता है। गुरुवार को #नोटबंदी_लाई_मंदी टॉप ट्रेंड्स में शामिल रहा। यह ट्रेंड लॉरसन एंड टर्बो द्वारा 14 हजार से ज्‍यादा कर्मचारियों को बाहर निकाले जाने के विरोध में शुरू हुआ था। कंपनी के इस फैसले को कुछ लोग आने वाली मंदी की आहट बता रहे हैं। ट्विटर पर कुछ यूजर्स ने इस हैशटैग के साथ पीएम नरेंद्र मोदी पर चुटीली टिप्‍पणियां भी की हैं। पीएम मोदी इधर पिछले कुछ दिनों से अपने भाषण के दौरान भावुक हो जाते हैं, इसी पर तंज कसते हुए एक यूजर ने लिखा है, ”अब ये अफवाह कौन फैला रहा है कि 2000 का नोट मरोड़ने पर मोदी के रोने की आवाज़ आती है।” एक और यूजर लिखते हैं, ”अधूरी तैयारी के नोटबंदी का ऐलान करके नरेंद्र मोदी, घोड़े को रथ के पीछे बाँधकर हांकने वाले प्रथम प्रधानमंत्री हैं।”

#नोटबंदी_लाई_मंदी हैशटैग के बहाने ‘नरेंद्र मोदी एप’ के जरिए नोटबंदी के फैसले को लेकर कराए गए सर्वे का भी मजाक उड़ाया जा रहा है। तरुण लिखते हैं, ”नरेंद्र मोदी एप सर्वे में ‘बुरा’ कहने का ऑप्शन नहीं था,तो ‘अच्छा’ कहना पड़ा।” सोनू नाम के यूजर ने लिखा है, ”नोटबंदी, सरकार का एक साहसिक क़दम है, लेकिन #नोटबंदी_लाई_मंदी से होने वाली परेशानी पर बात करना, संसद के अंदर और बाहर, लोकतांत्रिक अधिकार है।”

    60 -70 लोगों की मौत का जिम्मेदार कौन? पटरी से उतरी भारतीय अर्थ व्यवस्था #नोटबंदी_लाई_मंदी

    — Tasnim (@Tanim0104) November 24, 2016
प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी के फैसले पर कराए गए सर्वे के परिणाम बुधवार रात ट्विटर पर शेयर किए थे। 5 लाख यूजर्स की भागीदारी का दावा कर जो आंकड़े जारी किए गए, उसके हिसाब से 90 फीसदी से ज्‍यादा लोग सरकार के फैसले के साथ हैं। 98 फीसदी लोगों का मानना है कि देश में काला धन मौजूद हैं। 99 फीसदी लोग मानते हैं कि भ्रष्‍टाचार और काले से लड़ाई बेहद जरूरी है। 90 फीसदी लोगोंं ने कहा कि सरकार ने काला धन रोकने के लिए जो कदम उठाए, वे अच्‍छे हैं।

सर्वे में हिस्‍सा लेने वाले 92 फीसदी लोग मानते हैं कि भ्रष्‍टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की कोशिशें बहुत अच्‍छी हैं। 90 फीसदी लोगों ने 500 व 1000 के पुराने नोट बंद करने के फैसले का समर्थन किया है। 92 फीसदी लोगों का मानना है कि इस फैसले काले धन, भ्रष्‍टाचार और आतंकवाद पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।