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धोखे से मारना सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, भारत को चीन से करना पड़ेगा युद्ध : काटजू

कानपुर: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी को धोखे से मारना सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान से नहीं, बल्कि उसके पीछे खड़े सुपर पावर चाइना से युद्ध करना पड़ेगा। पाकिस्तान की औकात दो कौड़ी की है। उन्होंने कहा कि केवल चाइना के बल पर पाकिस्तान कूद रहा है। अब पाक के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करना आसान नहीं है। पॉलिटिशियन अपने फायदे के लिए सेना को बलि का बकरा बना रहे हैं। यह बात उन्होंने शुक्रवार को आईआईटी कानपुर के कल्चरल फेस्ट अंतराग्नि 2016 के टॉक शो में स्टूडेंटों से बातचीत करते दौरान कही।

जनता के दिमाग में भरा गोबर, वोट का जमाना खत्म
इस दौरान उन्होंने कहा कि अब अब वोट और इलेक्शन का जमाना खत्म हो रहा है, हर जगह भ्रष्टाचार और अन्याय है। क्रांति और बंदूक की जरूरत है। जल्द ही हर देशवासी के हाथों में बंदूक होगी। बिना लड़ाई के कुछ नहीं होने वाला है। चीन की क्रांति के दौरान जितनी जानें गई थीं, शायद उससे कहीं ज्यादा जानें इस क्रांति में जाएं। इस दौरान उन्‍होंने ये भी कहा कि देश की जनता के दिमाग में गोबर भरा है।

बाल ठाकरे बाद राज ठाकरे कर रहा गुंडागर्दी
काटजून ने स्टूडेंटों के सामने बातचीत करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगने वाले नेता, गुंडे और गैंगस्टर हैं। एक समय बाल ठाकरे गुंडा था, अब वही गुंडागर्दी राज ठाकरे कर रहा है। बाल ठाकरे के निधन पर राष्ट्रपति, पीएम, सोनिया गांधी और दूसरे नेताओं का संवेदना प्रकट किया जाना भारत में ही संभव है। देश में भूख, गरीबी, रोजगार और विकास नेताओं को नहीं दिख रहा है। यहां उन्‍हें राम मंदिर और जाति दिख रही है।

मायावती और भाजपा पर साधा निशाना
मायावती और भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दलितों के वोट बैंक पर मायावती कुंडली मारकर बैठी हैं। यादव कहीं और हिलने वाले नहीं हैं। ऐसे में बीजेपी के पास धर्म की आग भड़काने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। बीजेपी को भी आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि उनके पास चुनाव जीतने के लिए अब सिर्फ मुस्लिमों का खून बहाना, पाकिस्तान से युद्ध करना या राम मंदिर का मुद्दा का ही रह गया है। अब यूपी चुनाव सिर पर है, ऐसे में बीजेपी के पास सांप्रदायिकता फैलाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। देश की जनता के दिमाग में गोबर भरा है। उसे न तो कुछ दिखाई पड़ता है, न ही उनके पास सोचने समझने की ताकत है। 

यूपी: पीएम नरेंद्र मोदी से बेटी का ‘नामकरण’ करने को कहा, पीएम ने खुद कॉल करके रखा ‘वैभवी’ नाम

मिर्जापुर : उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर जिले में रहने वाले एक कपल की बेटी का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद रखा। पीएम मोदी ने खुद कपल को फोन करके कहा कि लड़की का नाम वैभवी रखना है। दरअसल, मिर्जापुर के हंसीपुर गांव के शीकर ब्लॉक में रहने वाले भरत सिंह और विभा ने पीएम मोदी को अपनी बेटी का नामकरण करने के लिए चिठ्ठी लिखी थी। जिसके जवाब में पीएम ने फोन किया। इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में भरत सिंह ने कहा, ‘हम लोगों को एक बेटी चाहिए थी। मेरी कोई बहन नहीं थी। मुझे लगता है कि बेटी मां-बाप की बेटों के मुकाबले ज्यादा देखभाल करती हैं। हमारी बेटी के जन्म के बाद मेरी पत्नी ने पीएम मोदी को पत्र लिखा। उसने पत्र में ‘बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ’ अभियान का जिक्र भी किया था। मेरी पत्नी ने लिखा था कि ऐसी कैंपेन प्रेरणा देती हैं। रियो ओलंपिक में भारत के लिए दो मेडल जीतने वाली लड़कियों का भी मेरी पत्नी ने जिक्र किया था।’
भरत ने बताया कि उसने 13 अगस्त को पीएमओ के पास स्पीड पोस्ट से पत्र भेजा था। भरत ने आगे बताया, ’20 अगस्त को रात 10 बजे के करीब मेरे पास फोन आया। फोन पर बात कर रहे शख्स ने कहा कि पीएम मोदी मुझसे बात करना चाहते हैं। इसके बाद पीएम मोदी लाइन पर आए और लगभग दो मिनट मुझसे बात की। उन्होंने मुझे बधाई दी और बेटी का नाम वैभवी रखने को कहा क्योंकि उसमें मेरा और मेरी पत्नी दोनों के नाम के अक्षर आ रहे थे।’ अगले दिन भरत ने गांववालों को इस बारे में बताया लेकिन किसी ने यकीन नहीं किया।

22 अगस्त को उसने उस नंबर पर कॉल किया जिससे उसे फोन आया था। उसने निवेदन किया कि पीएम मोदी के साइन वाला कोई लेटर उसे भेजा जाए जिसमें पीएम की बात का जिक्र हो। इसके बाद 30 अगस्त को भरत के पास पीएम का लेटर आ गया। लेटर पर पीएम मोदी के साइन भी थे। लेटर में लिखा था, ‘घर में बेटी के आने पर बधाई। तुम लोग वैभवी के हर सपने को पूरा करोगे और वैभवी तुम्हारी शक्ति बनेगी। मेरी तरफ से शुभकामनाएं।’
इसके बाद उसने गांववालों को पत्र दिखाया। इसके बाद भरत ने मीडियवालों को यह बात बताई। भरत 12वीं क्लास तक पढा है। वह आगरा में काम करता है। विभा पोस्ट ग्रेजुएट है। पीएमओ ने भी लेटर भेजे जाने की पुष्टि की है।

बड़े बैंकों ने 32 लाख से ज्यादा डेबिट कार्ड वापस मंगवाए

देश के बड़े बैंकों ने अपने ग्राहकों के 32 लाख से अधिक डेबिट कार्ड या तो ब्लाक कर दिए हैं या वापस मंगवाए हैं ताकि उन्हें किसी वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने से बचाया जा सके।

देश के बड़े बैंकों ने अपने ग्राहकों के 32 लाख से अधिक डेबिट कार्ड या तो ब्लाक कर दिए हैं या वापस मंगवाए हैं ताकि उन्हें किसी वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होने से बचाया जा सके। बैंकों ने यह कदम एक निजी बैंक के एटीएम नेटवर्क का प्रबंध करने वाली भुगतान सेवा प्रदाता फर्म के यहां डेटा में बड़ी सुरक्षा सेंध को देखते हुए उठाया है। अकेले भारतीय स्टेट बैंक ने ही लगभग छह लाख कार्ड वापस मंगवाए हैं। वहीं बैंक आफ बड़ौदा, आइडीबीआइ बैंक, सेंट्रल बैंक व आंध्रा बैंक ने एहतियाती कदम के रूप में डेबिट कार्ड बदले हैं। इस बीच बैंकों के डेटा में बड़े स्तर की इस सेंधमारी पर वित्त मंत्रालय की चिंता भी बढ़ गई है। मंत्रालय ने बैंकों से इस बाबत जानकारी मांगी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने के लिए कहा है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वित्तीय सेवा विभाग ने भारतीय बैंक संघ से इस तरह के डेटा के जोखिम में पड़ने के प्रभाव की जानकारी मांगी है।

केवल भारतीय स्टेट बैंक ही नहीं आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी बैंक व यस बैंक जैसे बैंकों ने भी धोखाधड़ी की आशंका के मद्देनजर अपने ग्राहकों से एटीएम पिन बदलने को कहा है। एचडीएफसी बैंक ने भी अपने ग्राहकों को सलाह दी है कि वे किसी भी लेनदेन के लिए केवल अपना एटीएम कार्ड इस्तेमाल करें। सूत्रों के मुताबिक यह सुरक्षा चूक हिताची पेमेंट्स सर्विसेज की प्रणाली में एक मालवेयर के जरिए हुई है। यह कंपनी यस बैंक को सेवा देती है। हिताची पेमेंट्स एटीएम सर्विसेज, प्वाइंट आफ सेल सर्विसेज, इमेजिंग पेमेंट्स सर्विसेज आदि के जरिए सेवाएं देती है।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार को भारतीय स्टेट बैंक से जानकारी मिली है कि कुछ डेबिट कार्डों के पिन (निजी पहचान संख्या) दूसरों के हाथ लग गए हैं और बैंक इन्हें सुरक्षित तरीके से नए कार्डों से बदल रहा है। बैंक ने डेटा की सुरक्षा के लिए और भी कुछ कदम उठाए हैं। स्टेट बैंक ने एक बयान में कहा है कि कार्ड नेटवर्क कंपनी एनपीसीआइ, मास्टर कार्ड और वीजा ने विभिन्न बैंकों को सूचित किया है कि कुछ कार्डों का डेटा चोरी हो सकता है। इसके चलते हमने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं और नेटवर्क कंपनियों द्वारा पहचान किए गए कुछ कार्डों को बंद भी किया है।


सूत्रों का कहना है कि एसबीआइ जैसे कई बैंकों ने लगभग छह लाख कार्ड वापस मंगवाए हैं। इस घटना के मद्देनजर यस बैंक के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी राणा कपूर ने आउटसोसर््िंाग में अधिक सतर्कता की जरूरत रेखांकित की है। उन्होंने कहा, जहां आउटसोर्स भागीदार शामिल हैं वहां और अधिक सतर्कता की जरूरत है। यह सुनिश्चित करना होगा कि वे आपूर्ति व प्रणाली को जाोखिम में नहीं डालें। बैंकरों के अनुसार यह सुरक्षा सेंध इस तरह से हुई है कि क्षेत्र में उक्त बैंक का एटीएम इस्तेमाल करने वाला प्रभावित हो सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक ने एक बयान में कहा है, कार्ड नेटवर्क कंपनी एनपीसीआइ, मास्टरकार्ड व वीजा ने डेटा सेंध के मद्देनजर विभिन्न बैंकों को कुछ कार्डाें को संभावित जोखिम के बारे में लिखा है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने एहतियाती कदम उठाए हैं और कुछ ग्राहकों के कार्ड बंद (ब्लाक) कर दिए हैं। एसबीआइ की उप प्रबंध निदेशक व मुख्य परिचालन अधिकारी मंजू अग्रवाल ने कहा कि डेटा सेंध मई व जून के बीच हुई । लेकिन यह सितंबर में सामने आया।
उन्होंने कहा, हमने अपने ग्राहकों से एटीएम पिन नंबर बदलने का आग्रह किया था, लेकिन केवल सात प्रतिशत ग्राहकों ने ही अपना पिन बदला। हमने कार्ड वापस मंगवाने का फैसला किया है क्योंकि हम अपने ग्राहकों को किसी जोखिम में नहीं डालना चाहते। हालांकि उन्होंने वापस मंगवाए गए कार्डाें की संख्या नहीं बताई।

इंसाफ़ की अंतहीन आस छोड़ने को तैेयार नहीं विस्थापित आदिवासी

दामोदर घाटी परियोजना के लिए 240 गांवों के 12 हजार परिवारों की 38 हजार एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण हुआ था। 1670 परिवारों के घर भी परियोजना में ही समा गए थे।

झारखंड और पश्चिम बंगाल के चार जिलों के बारह हजार विस्थापित आदिवासी परिवारों का जीवट वाकई अनूठा है। मुआवजे और पुनर्वास की आस इन गरीबों ने उजड़ने के छह दशक बाद भी छोड़ी नहीं है। पर पटना, रांची और कोलकाता ही नहीं दिल्ली में बैठी सरकारों को कभी उनकी पीड़ा का अहसास नहीं हुआ। ये बारह हजार आदिवासी परिवार दामोदर घाटी परियोजना के चलते आजादी के बाद ही विस्थापित हो गए थे। अपने मकानों और जमीन के मुआवजे व पुनर्वास के लिए एक बार फिर धनबाद के सीमा पत्थर गांव में 17 अक्तूबर से आमरण अनशन पर हैं।
घटवार आदिवासी महासभा के बैनर तले ये आदिवासी पिछले एक दशक में विभिन्न स्थानों पर दर्जनों बार धरना, प्रदर्शन, भूख हड़ताल और आमरण अनशन कर चुके हैं। इस अवधि में विभिन्न सरकारी एजंसियों ने उनके साथ 34 बार लिखित समझौते भी किए। पर इंसाफ के लिए वे आज भी तरस रहे हैं। महासभा के सलाहकार रामाश्रय सिंह को नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद इंसाफ की उम्मीद बंधी थी। पर केंद्र और झारखंड दोनों जगह भाजपा की सरकारें होने के बाद भी उनकी त्रासदी खत्म नहीं हो पाई।
दामोदर घाटी परियोजना केंद्र सरकार ने ताप बिजली घर के लिए स्थापित की थी। इसके लिए 240 गांवों के 12 हजार परिवारों की 38 हजार एकड़ कृषि भूमि का अधिग्रहण हुआ था। 1670 परिवारों के घर भी परियोजना में ही समा गए थे। लेकिन न तो सबको जमीन का मुआवजा दिया गया और न वादे के मुताबिक हर विस्थापित परिवार के पुनर्वास के लिए एक सदस्य को परियोजना में नौकरी। बकौल रामाश्रय सिंह महज पांच सौ आदिवासी परिवारों को ही अब तक बतौर पुनर्वास नौकरी दी गई। जबकि परियोजना के अधिकारी सबके पुनर्वास का दावा करते हैं। बेचारे आदिवासियों को यही देखकर तो सदमा पहुंचा कि उनके नाम पर नौ हजार फर्जी लोगों को नौकरी दे दी गई।
सीमा पत्थर गांव में विस्थापित आदिवासी परिवारों ने इस साल यों सत्याग्रह तो एक मार्च को ही शुरू कर दिया था पर सरकारी एजंसियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी तो 17 अक्तूबर से सैकड़ों आदिवासी आमरण अनशन पर बैठ गए। इन आदिवासियों की मांग अब अपने मुआवजे और पुनर्वास से ज्यादा इस पुनर्वास घोटाले की सीबीआइ जांच की है। यूपीए सरकार के वक्त भाजपा ने वादा किया था कि वह केंद्र की सत्ता में आई तो नौ हजार आदिवासियों की नौकरी हड़प जाने के घोटाले की सीबीआइ जांच करा कर दोषियों को सजा और आदिवासियों को इंसाफ सुनिश्चित करेगी।
विस्थापित आदिवासियों को अब आसानी से किसी पर भरोसा नहीं होता। उनके साथ छल कपट ही इतनी बार हो चुका है कि वे अब आशंका से मुक्त हो ही नहीं पा रहे। इस साल 27 जून को ही झारखंड के मुख्यमंत्री सचिवालय से रामाश्रय सिंह को टेलीफोन पर सूचना दी गई थी कि राज्य सरकार इस मामले की सीबीआइ जांच की केंद्र के पास सिफारिश जल्द भेजने जा रही है। पर यह आश्वासन भी खरा साबित नहीं हुआ। इससे पहले घटवार आदिवासी महासभा ने दर्जनों पत्र केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और प्रधानमंत्री को भेजे। पर खानापूरी से ज्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ।
आदिवासियों का आरोप है कि दामोदर घाटी परियोजना के अधिकारी सीबीआइ जांच में रोड़ा बने हुए हैं। यह बात उनके साथ बातचीत में पिछले साल 22 अप्रैल को झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी मानी थी। उन्होंने परियोजना के प्रबंधन को पत्र भी लिखा था कि 30 दिन के भीतर मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराएं। लेकिन कुछ नहीं हुआ। धनबाद के एसडीएम ने खुद पिछले साल परियोजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश तक कर दी थी। लेकिन उसे दबा दिया गया।
अपने मुआवजे और पुनर्वास की लड़ाई ये आदिवासी सुप्रीम कोर्ट से भी जीत चुके हैं। 22 जनवरी, 2010 को धनबाद के उपायुक्त की अध्यक्षता में हुए समझौते में दामोदर घाटी निगम ने विस्थापित आदिवासियों को नौकरी देने की दो शर्त रखी थी। एक- जो छूट गए वे एसडीएम के माध्यम से हल्फनामे दें। दो- वे अपने परिवारों से अनापत्ति भी दिलाएं कि किस सदस्य को रोजगार दिया जाए। बकौल रामाश्रय सिंह चार महीने की तय समय सीमा के भीतर 1300 परिवारों ने औपचारिकताएं पूरी कर दी। लेकिन नौकरी एक को भी नहीं मिल पाई।

केरल का रहने वाला है भारत में आईएस का मुख्य रिक्रूटर, शिक्षित युवक बन रहे हैं शिकार

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जिन 67 भारतीयों पर आईएस के लिए काम करने की आशंका है उनके अलावा भी कई लोग इस आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं।

इस साल अप्रैल की एक रात सजीर मंगलाचारी अब्दुल्लाह ने दुबई के लिए उड़ान भरी। उसके बाद वो बहुत कम मिलने वाली छुट्टी पर घर वापसी आया। केरल के कोझीकोड के रहने वाले अब्दुल्ला के पिता ट्रक ड्राइवर हैं। उसकी मेहनत की कमाई से उसका परिवार की आर्थिक हालात काफी सुधर गई थी। उसके दोस्त उसे परिश्रमी और ईमानदार शख्स के तौर पर जानते थे जिसकी राजनीति में कोई रुचि नहीं थी। केरल से खाड़ी देशों में काम करने के लिए जाने के लिए एयर इंडिया के विमान में सवार दूसरे कई कामगारों से वो जरा भी अलग नहीं था। इमिग्रेशन और सुरक्षा जांच पार करने में उसे जरा भी दिक्कत नहीं हुई। वो चार घंटे की उड़ान के लिए अपनी इकोनॉमी क्लास सीट पर आराम से पहुंच चुका था। लेकिन उसके बाद वो आतकंवादी संगठन इस्लामिक स्टेट की आंत में गायब हो गया।
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने इस महीने की शुरुआत में केरल से छह लोगों को भारत में आतंकवादी हमले की योजना बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया। और भारत, अफगानिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात की खुफिया एजेंसियां अब्दुल्ला नाम के व्यक्ति की तलाश कर रही हैं। खुफिया एजेंसियों की माने तो अब्दुल्ला लोगों को बरगला कर इस्लामिक स्टेट से जोड़ने वाला मुख्य सूत्रधार है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार अब्दुल्ला अब अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत में रहता है और वो इस्लामिक स्टेट में अहम पद पर कार्यरत है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार मोसूल और रक्का में इस्लामिक स्टेट का आधार कमजोर होता जा रहा है इसलिए आईएस ने भारतीय जिहादियों  को सैन्य प्रशिक्षण देने के लिए अफगानिस्तान भेजने का निर्देश दिया है। सूत्रों के अनुसार इन जिहादियों को भारत में हमले करने के लिए भी उकसाया जा रहा है। उन्हें खुद से बनाए हुए विस्फोटकों के प्रयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। एक खुफिया अधिकारी ने कहा, “नंगरहार ब्लैक होल की तरह की अबूझ है। अगर आप गायब होना चाहते हैं तो ये बिल्कुल सटीक जगह है। अफगान खुफिया सर्विस भी इस इलाके में खुद को असहाय पाती है।”
अब्दुल्ला ने जिन लोगों को आईएस में शामिल कराया वो सभी शिक्षित हैं। एनआईए के अधिकारियों के अनुसार आईएस के इस सेल की सबसे अहम कड़ी दोहा में रहने वाला मनसीद बिन मोहम्मद है तो पांच साल पहले केरल के पनूर से पश्चिम एशिया चला गया था। वो पहले पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़ा था। केरल सरकार के अनुसार इस संगठन के संबंध आईएस से हैं। मोहम्मद ने एक बार संगठन के लिए हिंदुत्ववादी संगठनों की गतिविधियों पर रिसर्च किया था। एनआईए के अधिकारियों के अनुसार दोहा जाने के बाद वो इस्लामिक स्टेट से जुड़ गया और अबु बकर अल-बगदादी उसका नया नेता बन गया।

एनआईए अधिकारियों के अनुसार मनसीद ने एनक्रिप्टेड सोशल मीडिया संदेशों के जरिए कई हमख्याल युवकों को आईएस से जोड़ा। उसके द्वारा आतकंवाद से जोड़े गए ज्यादातर नौजवान शिक्षित हैं। स्वालेह मोहम्मद चेन्नई स्थित एक ऑटोमोबाइल कंपनी में रिसर्चर था। साफवान पूकतिल पीएफआई के दैनिक तेजस में ग्राफिक डिजाइनर था। रामशाद नीलांगन कांदियिल कोझीकोड में चार्टेड अकाउंटेंट का काम करता था। जसीम नीलांगन कांदियिल ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई अधूर छोड़ दी थी। राशिद अली का छोटा मोटा कारोबार था।
एनआईए के अनुसार अब्दुल्लाह ने ही कोदईकनाल में इसराइली पर्यटकों पर हमला करने की योजना बनाई थी। उसने ही बीजेपी नेताओं और “मुस्लिम विरोधी” फैसला देने वाले जोजों पर हमले की भी योजना बनाई थी। सुरक्षा एजेंसियों को यकीन है कि अब्दुल्ला ने 21 केरलवासियों को नंगरहार बुलाया है, जिनमें से आठ नाबालिग भी शामिल हैं। इस गुट का नेतृत्व कट्टरपंथी मौलाना अब्दुल राशिद ने किया था। इस गुट के नंगरहार पहुंचने पर अब्दुल राशिद ने अपने एक दोस्त को भेजे टेलीग्राम संदेश में कहा, “मुजाहिद की जिंदगी कुछ महीनों की होती है। इसका इनाम दूसरी जिंदगी में मिलेगा।”

खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जिन 67 भारतीयों पर आईएस के लिए काम करने की आशंका है उनके अलावा भी कई लोग इस आतंकी संगठन से जुड़े हो सकते हैं। एनआईए के एक अधिकारी ने कहा, “सच बताएं तो हमें ठीक से नहीं पता कि कितने प्रवासी भारतीय इस्लामिक स्टेट से जुड़े हैं।” जिस तरह विभिन्न भारतीय शहरों से आईएस से जुड़े संदिग्ध पकड़े जा रहे हैं उसे देखते हुए ये बात सभी के लिए चिंताजनक है। और इससे भी ज्यादा चिंताजनक है शिक्षित युवकों का इनका शिकार बनना।

किस शुभ मुहूर्त में होगी करवा चौथ की पूजा और किस विधि-विधान से पूरी होगी मनोकामना, पढ़ें यहां

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मानाया जाने वाला करवा चौथ महिलाओं के लिए बेहद खास है। इसलिए इस व्रत की पूजन विधि भी खास हैै।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मानाया जाने वाला करवा चौथ महिलाओं के लिए बेहद खास है। इसलिए इस दिन की पूजा भी खास विधि विधान से होती है। दिन भर से भूखी प्यासी निर्जला वृत रखने के बाद महिलाएं चंद्रमा देखने के बाद ही जल पीती हैं और निवाला लेती हैं। पुराणों के अनुसार करवा चौथ पूजन में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। आज के करवा चौथ की पूजा करने का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 43 और 46 मिनट से लेकर 06 बजकर 50 मिनट तक का है। करवा चौथ के दिन चन्द्र को अर्घ्य देने का समय रात्रि 08.50 बजे है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के साथ ही महिलाएं शिव, पार्वती, कार्तिकेय और गणेश की आराधना भी करें। महिलाएं खास ध्यान रखें कि चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करें। पूजा के बाद मिट्टी के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग की सामग्री रखकर सास को दी जाती है।

व्रत के दिन सुबह सुबह के अलावा शाम को भी महिलाएं स्नान करें। इसके पश्चात सुहागिनें यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- ‘मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।’ विवाहित स्त्री पूरे दिन निर्जला (बिना पानी के) रहें। दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा बनाएं, इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है। आठ पूरियों की अठावरी बनाएं, हलवा बनाएं, पक्के पकवान बनाएं। पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं। गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं।
गौरी को बैठाने के बाद उस पर लाल रंग की चुनरी चढ़ाए इसके बाद माता का भी सोलह श्रृंगार करें। वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें। उसके ऊपर दक्षिणा रखें। रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं। गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। सुहागनें भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करें और करवे में पानी भरकर पूजा करें। इस दिन सुहागिनें निर्जला व्रत रखती है और पूजन के बाद कथा पाठ सुनती या पढ़ती हैं। इसके बाद चंद्र दर्शन करने के बाद ही पानी पीकर व्रत खोलती हैं।

मोदी ने पुतिन, जिनपिंग समेत ब्रिक्‍स नेताओं को बनाया अपने जैसा, पहनाई ‘स्‍वदेशी जैकेट’!

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे देशों के प्रतिनिधियों के लिए शनिवार का दिन काफी बिजी रहा। इस दौरान ब्रिक्स नेता मीटिंग्स, मीडिया से बातचीत और उसके अलावा अन्य डील्स के बिजी रहे। बिजी शनिवार के बाद ब्रिक्स नेता एक साथ डिनर के लिए पहुंचे। डिनर के वक्त पहुंचे ब्रिक्स नेताओं में एक बात समान थी कि सभी एक ही डिजाइन की ड्रेस में थे। उन्होंने कुर्ते के साथ कॉटन जैकेट पहनी हुई थी। यह वही जैकेट है जिसे पीएम मोदी पहनते हैं। यह ‘मोदी जैकेट’ के नाम से भी जानी जाती है। ब्रिक्स देशों के नेता, साउथ अफ्रीका के अध्यक्ष जैकब जुमा, रूस के राष्ट्रपति ब्लादमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजिल के राष्ट्रपति माइकल टेमर और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होटल ताज एग्जोटिका में डिनर करने पहुंचे थे। डिनर के लिए सेट पणजी से 55 किलोमीटर दूर गोवा के एक बीच पर बनयाा गया था। ब्रिक्स देशों के सभी शीर्ष नेताओं ने एक ग्रुप फोटो भी खिंचवाई।

जिला रोजगार में स्टेनो टायपिस्ट व सहायक ग्रेड-3 के लिए आवेदन 22 तक

दुर्ग

 जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र दुर्ग से प्राप्त जानकारी अनुसार केन्द्र में स्टेनो टायपस्टि का एक पद अनुसूचित जनजाति (मुक्त) तथा सहायक ग्रेड-3 का एक पद अनुसूचित जनजाति भूतपूर्व सैनिकों के लिए भर्ती किया जाना है। उक्त पदों के लिए इच्छुक उम्मीदवार 22 जनवरी 2014 तक कार्यालयीन समय में आवेदन कर सकते हैं। आवेदक विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाईट कनतहण्हवअण्पद तथा  बहमउचसवलउमदजण्हवअण्पद अवलोकन कर सकते हैं। 

सत्या महंत के फेसबुक वाल से

वक़्त कि ख्वाहिसे क्या है , मेरी गुजारिशें क्या है ,
इन घुलती फ़िज़ाओ कि नुमाइशें क्या है !

क्यू खुद कि हस्ती को ढूंढ़ता रहा यहाँ वहाँ ,आख़िर
समज कर भी न समज सका ,इस चंचल मन कि रज़ा क्या है !