राजधानी

EOW ने कांग्रेस प्रमुख भूपेश बघेल पर कसा शिकंजा, केस दर्ज

रायपुर -आवासीय प्लॉट के फर्जीवाड़े के मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख भूपेश बघेल के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने सोमवार को मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में भूपेश बघेल के मां और पत्नी के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया है। साथ ही सारड़ा में काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ शिकंजा कसा गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक मानसरोवर योजना के तहत पीसीसी प्रमुख भूपेश बघेल ने बड़ा फर्जीवाड़ा किया था। इस मामले में आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो जांच कर रहा था।
इसी मामले में कुछ दिनों पहले मंत्री प्रेम प्रकाश पांडे ने भी आरोप लगाए थे कि बघेल ने शासकीय जमीन दबाने के मामले में रिपोर्ट को सही बताया था। जोगी द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद भूपेश ने कलेक्टर से अपने जमीनों की जांच करवाई थी। कलेक्टर द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में आज ईओडब्लू ने केस दर्ज कर लिया है ।  

रायपुर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य यूनिफाईड कमांड की बैठक नक्सल प्रभावित इलाकों में जिला स्तर पर भी बने यूनिफाईड कमांड

रायपुर -मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने नक्सल समस्या के उन्मूलन के लिए राज्य स्तरीय यूनिफाईड कमांड की तरह छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिलों में जिला स्तरीय यूनिफाईड ऑपरेशनल कमांड के गठन की जरूरत पर विशेष रूप से बल दिया है। डॉ. सिंह आज यहां मंत्रालय (महानदी भवन) में राज्य स्तरीय यूनिफाईड कमांड की बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय यूनिफाईड कमांड का गठन संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के नेतृत्व में हो और उनमें वहां कार्यरत केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के अधिकारियों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि केन्द्र और राज्य दोनों मिलकर इस चुनौती का और भी ज्यादा गंभीरता से मुकाबला कर सकें। 
उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता के लिए यह जरूरी है कि जिला स्तरीय यूनिफाईड कमांड जल्द बनाया जाए और समय-समय पर उसकी साप्ताहिक और पाक्षिक समीक्षा बैठकें भी हों। मुख्यमंत्री ने इसके अलावा सुकमा और बीजापुर जिलों में केन्द्रीय सुरक्षा बलों तथा राज्य सरकार के जिला पुलिस बलांे के जवानों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसमें केन्द्रीय तथा जिला पुलिस बल के 50 से 60 जवानों को तीन दिन से लेकर पांच दिन तक का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि दोनों में तालमेल और भी बढ़ सके। डॉ. सिंह ने बैठक में कहा- केन्द्रीय सुरक्षा बलों का पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों की उपस्थिति उनके बलों की तैनाती वाले स्थानों के नदीक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा - नक्सल समस्या के पूर्ण रूप से निराकरण के लिए प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और विकास दोनों ही मोर्चे पर राज्य और केन्द्र सरकार की सभी एजेंसिया मिलकर काम कर रही है। केन्द्रीय तथा राज्य सुरक्षा बलों में भी बेहतर समन्वय है। 
डॉ. सिंह ने कहा - स्थानीय जनता में सुरक्षा और विश्वास की भावना को और भी अधिक बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिये विकास की गति को तेज करना और सकारात्मक परिणामों तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा - नक्सल प्रभावित जिलों में युवाओं को लाइवलीहुड कॉलेज जैसी परियोजनाओं में कौशल उन्नयन के प्रशिक्षण के साथ रोजगार से जोड़ने के भी अच्छे परिणाम देखे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने दंतेवाड़ा और सुकमा में संचालित एजुकेशन सिटी का उल्लेख करते हुए कहा कि इन विशाल शैक्षणिक परिसरों में नक्सल क्षेत्रों के हजारों बच्चों को प्राथमिक से लेकर हायर सेकेण्डरी की पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार मूलक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। राज्य के सभी पांच संभागीय मुख्यालयों में नक्सल क्षेत्रों के ग्यारहवी और बारहवीं के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना के तहत प्रयास आवासीय विद्यालय भी खोले गए है, जिनमें पढ़कर बच्चे आईआईटी जैसी संस्थाओं में भी पहुंच गए हैं। 

छत्तीसगढ़ में देश के सर्वाधिक मूल्यवान चूना पत्थर खदान की सफल ऑनलाईन नीलामी: राज्य सरकार को मिलेगा ग्यारह हजार करोड़ से ज्यादा का राजस्व

राज्य सरकार को गौण खनिजों की खदानों की ऑनलाईन नीलामी में आज एक और ऐतिहासिक सफलता मिली। रायपुर जिले के अंतर्गत तिल्दा तहसील क्षेत्र में केसला (क्रमांक-2) स्थित सीमेंट ग्रेड के चूना पत्थर खदान की ऑनलाईन नीलामी हुई। यह देश का सबसे अधिक मूल्यवान चूना पत्थर है। इस नीलामी से राज्य शासन को ग्यारह हजार करोड़ से भी ज्यादा राजस्व मिलेगा। एमएसटीसी पोर्टल में ऑनलाईन अथवा ई-नीलामी प्रक्रिया के तहत 21 प्रतिशत फ्लोर प्राईज पर फारवर्ड ऑक्शन एक मई को 11 बजे शुरू हुआ और आज दो मई को 10.57 बजे तक अर्थात करीब 23 घण्टे तक जारी रहा।
इसमें 600 से भी ज्यादा बोलियां विभिन्न कम्पनियों द्वारा लगाई गई। मेसर्स डालमिया सीमेंट, भारत लिमिटेड द्वारा अधिकतम बोली 96.15 प्रतिशत की लगाई गई, जिसे निर्धारित रिजर्व प्राईज का 20 गुना पाया गया। उल्लेखनीय है कि यह तीसरी ऑनलाईन नीलामी है, जो खनिज साधन विभाग की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में सम्पूर्ण पारदर्शिता के साथ सम्पन्न की गई। इस नीलामी के जरिए छत्तीसगढ़ ने देश में अब तक चूना पत्थर ब्लॉक (खदान) की हुई नीलामी में राजस्थान को भी पीछे छोड़ दिया। राजस्थान में प्राप्त अधिकतम बोली 67.94 प्रतिशत थी, जबकि छत्तीसगढ़ को आज सर्वोच्च बोली 96.15 प्रतिशत मिली। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज की सफल और ऐतिहासिक ई-नीलामी के लिए खनिज साधन विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है

रायपुर सेवानिवृत्ति पर श्री राममिलन वर्मा को भावभीनी बिदाई

जनसम्पर्क संचालनालय के वरिष्ठ कर्मचारी श्री राम मिलन वर्मा (सहायक ग्रेड-एक) को आज उनकी सेवानिवृत्ति पर भावभीनी बिदाई दी गई। संचालक जनसम्पर्क श्री राजेश सुकुमार टोप्पो ने संचालनालय के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से श्री वर्मा को स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने शॉल और श्रीफल भेंटकर श्री वर्मा को सम्मानित भी किया। श्री टोप्पो सहित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और खुशहाल जीवन की कामना की।

छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की सौजन्य मुलाकात : इंद्रावती में पुल निर्माण और मुम्बई में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ सदन को लेकर विचार-विमर्श

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज मुम्बई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़नवीस से सौजन्य मुलाकात की। फड़नवीस ने उनका आत्मीय स्वागत किया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के परस्पर हितों से जुड़ी विभिन्न विकास परियोजनाओं के बारे में गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने इंद्रावती नदी पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में भोपालपट्नम के पास तिमेड़ में बन रहे पुल निर्माण जल्द से जल्द में पूर्ण करने की रणनीति पर भी बातचीत की। डॉ. रमन सिंह ने श्री फड़नवीस से मुम्बई में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ सदन के निर्माण के लिए भूमि आवंटन जल्द करने का अनुरोध किया। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मुम्बई में छत्तीसगढ़ सदन का निर्माण विशेष रूप से हमारे यहां के उन मरीजों और उनके परिजनों के लिए लाभदायक होगा, जो इलाज के लिए वहां जाते हैं। कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें मुम्बई महानगर में वहां आवास की समस्या होती है। इसे ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ सरकार ने वहां छत्तीसगढ़ सदन बनाने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने डॉ. रमन सिंह को इसके लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया। 

भ्रष्टाचार निवारक अधिनियम, 1988 के तहत मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके पूरे मंत्रिमंडल को बर्खास्त करने हेतु राज्यपाल को सौपा ज्ञापन

रायपुर/26 अप्रैल 2017। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल श्री बलराम दास टंडन से मुलाकात करके कमीशनखोरी की स्वीकारोक्ति’ करने वाली भ्रष्ट एवं अकर्मण्य भाजपा सरकार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग हेतु ज्ञापन सौंपा। राज्यपाल से मिलकर प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि रमन सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। कांग्रेस लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाते रही है। स्वंय मुख्यमंत्री ने रायगढ़ में भाजपा के राज्य कार्यसमिति की बैठक में कमीशन लेने की बात स्वीकार किया है। ऐसे में इस सरकार को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अतः महामहिम राज्यपाल से निवेदन किया गया कि रमन सरकार को तत्काल बर्खास्त करने की अनुशंसा करे। प्रतिनिधि मंडल में  भूपेश बघेल ,  धनेंद्र साहू, राज्यसभा सांसद छाया वर्मा,  अमितेष शुक्ल,  राजेन्द्र तिवारी,  शिव डहरिया,  गिरीश देवांगन,  ज्ञानेश शर्मा रमेश वल्यानी,  कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय,   नारायण कुर्रे,  एजाज ढेबर शामिल थे।

केन्द्रीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री पहुंचे अस्पताल : नक्सल हमले में घायल जवानों से की मुलाकात

 केन्द्रीय गृहमंत्री  राजनाथ सिंह ने आज यहां पचपेड़ी नाका मार्ग पर एक प्राइवेट अस्पताल में सीआरपीएफ के घायल जवानों से मिलकर उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री हंसराज अहीर के साथ अस्पताल पहुंच कर वहां सीआरपीफए के तीनों घायल जवानों से मुलाकात की। ज्ञातव्य है कि ये जवान कल सुकमा जिले में नक्सल हमले का मुकाबला करते हुए घायल हो गए थे। हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए। केन्द्रीय गृह मंत्री आज सवेरे रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की चौथी बटालियन के परिसर में शहीद जवानों को राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने  इसके बाद चौथी बटालियन में ही अधिकारियों की बैठक ली और बैठक के बाद घायल जवानों से मिलने पहले पचपेड़ी नाका के पास फिर मोवा स्थित प्राइवेट अस्पतालों में घायल जवानों से मिलने गए। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और केन्द्रीय गृह राजमंत्री श्री हंसराज अहीर भी उनके साथ थे। 

छग में CM रमन के कमीशन वाले बयान के खिलाफ 10 हजार जगहों पर नुक्कड़ सभायें भाजपाईयो की पुतले जलाकर प्रदर्शन करेगी कांग्रेस

रायपुर प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल की अध्यक्षता तथा नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव एवं प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में संपन्न हुई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आपात एवं आवश्यक बैठक बुलाये जाने के कारणों का खुलासा करते हुये कहा कि जिस शर्मनाक ढंग से प्रदेश के मुख्यमंत्री रमन सिंह रायगढ़ में प्रदेश भाजपा कार्यकारिणी की बैठक मंत्रियों, निगम अध्यक्षों एवं पदाधिकारियों को कमीशन लेने की स्वीकारोक्ति कर लोकतंत्र को शर्मसार किया है। कमीशनखोर सरकार का मुखिया होने के नाते डाॅ. रमन सिंह हर दृष्टि से जिम्मेदार है। कांग्रेस मांग करती है कि रमन सिंह मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे, इस्तीफा नहीं देते है तो हमारी राज्यपाल से मांग है कि वे इस कमीशनखोर सरकार को तत्काल भंग कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करे। कांग्रेस सीबीआई, भ्रष्टाचार निवारण समिति, एवं अन्य जांच एजेसियो को तत्काल भ्रष्ट मंत्रियों एवं भाजपा नेताओं के खिलाफ जांच कर कार्यवाही करने हेतु प्रतिवेदन देगी। राज्यपाल एवं राष्ट्रपति को भ्रष्टाचार में आकंठ डुबे भाजपा के रमन सरकार को तत्काल भंग करने हेतु ज्ञापन सौपेगी। भ्रष्ट रमन सरकार को अपदस्थ होने तक कांग्रेस द्वारा पूरे प्रदेश में इस कमीशनखोर के खिलाफ आंदोलन चलाया जायेगा। 10,000 नुक्कड़ सभा पंचायत एवं शहर के मुहल्लों चैक-चैराहो में स्थानीय भाजपा नेता जो कमीशनखोर है उसका पुतला दहन किया जायेगा। मुख्यमंत्री और मंत्री के साथ कमीशनखोर भाजपा नेता का पुतला दहन किया जायेगा। प्रधानमंत्री कहते है न खाउंगा न खाने दूंगा हमारा नारा है अब खाने नहीं दूंगा। वरिष्ठ नेताओं की देख-रेख में आंदोलन होगा। सभी मोर्चा संगठन अपने संबंधित विभाग के भ्रष्टाचार एवं कमीशन खोरी के मुद्दे को उठायेगे। 
कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि कमीशनखोरी की स्वीकारोक्ति के बाद रमन सिंह एक भी दिन सत्ता में बने रहने लायक नहीं है। रमन सिंह के वनवास का समय आ गया है। एक साल के लिये कमीशन बंद करने की बात कहकर उन्होने स्वीकार कर लिया कि कमीशनखोरी उनकी जानकारी में हो रही है। उन्होने संगठन चुनाव व सदस्यता अभियान के संबंध में भी अपने विचार रखे।
इसके साथ ही बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशानुसार संगठन चुनाव जो कि 25 अक्टूबर तक संपन्न करायी जाने के संदर्भ विस्तार से चर्चा की गई। 15 मई तक अनिवार्य रूप से सदस्यता फार्म प्रदेश कार्यालय में जमा करा दिये जायेगे। वही अधिकाधिक सदस्य बनाकर सदस्यता अभियान को निर्धारित समय सीमा पर संपन्न करने का भी निर्देश दिये गये। इसके साथ ही राज्य सरकार के द्वारा आनन-फानन में घोषित की गयी महुआ नीति से हुये नुकसान पर भी व्यापक चर्चा की गई। सरकार ने बिना सोच विचार किये महुआ नीति बना लिया था भले ही बाद में उसे वापस लिया, लेकिन इसके कारण ग्रामीण अंचल और वनांचल के लोगो को नुकसान उठाना पड़ा। 
पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि पूरे प्रदेश में रमन सरकार की कार्यकाल में मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री एवं भाजपा नेतागण केवल एक ही सूत्रीय कार्यक्रम कमीशनखोरी में लगे हुये है। ये छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य है। 
पूर्व अध्यक्ष धनेन्द्र साहू ने छत्तीसगढ़ की मीडिया को धन्यवाद देते हुये कहा कि भारतीय जनता पार्टी की कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री रमन सिंह के कमीशनखोरी की स्वीकारोक्ति को जिस ढंग से पूरे प्रदेश में प्रमुखता के साथ प्रचारित किया जिससे इस सरकार की पोल आम जनता में खुल चुकी है। अब कांग्रेस जनो को विधानसभा से लेकर ग्राम पंचायत तक कमीशनखोर सरकार को बेनकाब करना है। 

आदिवासी क्षेत्रों के लिये एजुकेशन हब के रूप में छत्तीसगढ़ ने देश को दिया नया मॉडल: डॉ. रमन सिंह

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज दोपहर राजधानी रायपुर में ‘स्कूल शिक्षा में नवाचार एवं श्रेष्ठ अभ्यास’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय पूर्वी क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया। श्री जावड़ेकर ने इस अवसर पर कहा कि बच्चों के स्कूलों को आग लगाने वाले लोग देश के सबसे बड़े दुश्मन है। छत्तीसगढ़ में बस्तर क्षेत्र में शिक्षा की बुनियादी सुविधा बहाल करने के लिये इसका जवाब पोटा केबिन के जरिये शिक्षा से दिया है। उन्होने कहा कि राज्य सरकार की मांग पर अब इन पोटा केबिनों का उन्नयन किया जाएगा। बस्तर संभाग में संचालित 24 पोटा केबिन के उन्नयन और वहां छात्रावास निर्माण के लिये 100 करोड़ रूपये की मंजूरी दी। पोटा केबिन में अब आठवी कक्षा से बढ़ाकर कक्षा नवमी और दसवीं की शिक्षा भी दी जाएगी। उन्होने प्रदेश के स्कूलों के ऑनलाईन मॉनिटरिंग के लिये सभी स्कूलों को टेबलेट देने 100 करोड़ रूपये की परियोजना को मंजूरी दी। दोनो परियोजनाओं में केंद्र शासन द्वारा 60 प्रतिशत और राज्य द्वारा 40 प्रतिशत राशि दी जाएगी।
  केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस अवसर पर कहा कि केन्द्र सरकार ‘सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा’ का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है। देश की शिक्षा व्यवस्था पर हर साल 70 हजार करोड़ रूपये केंद्र सरकार द्वारा खर्च किया जाता है। राज्यों द्वारा भी हजारो करोड़ रूपये खर्च किया जाता है। देश की जीडीपी का 4.5 प्रतिशत शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है जो कम नहीं है। आवश्यकता शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने की है। श्री जावड़ेकर ने कहा-सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए समाज को स्कूलों से जोड़ना होगा। शिक्षकों, बच्चों के पालकों और समाज को बच्चों की शिक्षा के प्रति जिम्मेदारी का अहसास करना होगा। अंग्रेजी माध्यम में ही अच्छी शिक्षा मिलती है इस धारणा को समाप्त करने के लिये पालकों को मार्गदर्शन देना चाहिये। कक्षा पहली से आठवीं में हर क्लॉस में बच्चों को क्या-क्या आना चाहिये इसका पोस्टर स्कूलों में लगना चाहिये और पम्पलेट पालकों को बांटना चाहिये। उन्होने कहा कि कक्षा पांचवी और आठवीं में कमजोर छात्रों को रोकने का अधिकार राज्यों को दिया जाएगा। इसमें केंद्र सरकार द्वारा यह शर्त रखी गई है कि जो छात्र मार्च में परीक्षा में असफल हो गए हैं उन्हे जून में परीक्षा देने का दोबारा मौका देना चाहिये। दूसरी बार भी छात्र परीक्षा में असफल हो जाए तो उसे रोका जा सकता है। 

रायपुर : मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक : राज्य कर्मचारियों को एक जनवरी 2016 से मिलेगा सातवां वेतनमान

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक आज शाम यहां उनके निवास कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक के बाद उद्योग और वाणिज्यिक -कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने मंत्रिपरिषद के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को 1 जनवरी 2016 से लागू करने का निर्णय लिया है। शासकीय कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के अनुसार नगद वेतन भुगतान जुलाई 2017 से किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार के लगभग दो लाख 60 हजार कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा और शासन पर 3500 करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक भार आएगा।
शासकीय सेवकों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए बनेगी छानबीन समितियां
उन्होंने बताया कि बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार राज्य शासन द्वारा पचास वर्ष की आयु अथवा 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर शासकीय सेवकों के अभिलेखों की छानबीन और समीक्षा के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के 22 अगस्त 2000 के परिपत्र की कंडिका-2 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए निर्धारित मानदण्डों और प्रक्रिया में आंशिक संशोधन करने का निर्णय लिया गया। अगर समीक्षा और छानबीन में अनिवार्यऐसे शासकीय सेवकों की ईमानदारी और सनिष्ठा संदेह जनक मिलेगी तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त किया जा सकेगा। इस संबंध में शासकीय सेवक का सम्पूर्ण अभिलेख देखा जाएगा।(ब) शारीरिक क्षमता में कमी होने, शासकीय सेवक के वार्षिक प्रतिवेदन में सम्पूर्ण सेवा काल के अभिलेखों का समग्र मूल्यांकन ’अच्छा’ (ख) श्रेणी से कम होने पर भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकेगी।
इसके लिए छानबीन समिति का गठन किया जाएगा-राजप़ित्रत अधिकारियों के लिए प्रशासकीय विभाग के भारसाधक सचिव की अध्यक्षता में, विभागाध्यक्षों के लिए मुख्य सचिव अथवा उनके द्वारा नामांकित अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छानबीन समिति का गठन किया जाएगा। अराजपत्रित अधिकारियों के लिए विभागाध्यक्ष स्तर की छानबीन समिति गठित की जाएगी। यह समिति केवल विभागाध्यक्ष कार्यालय के शासकीय सेवकों के अभिलेखों की ही छानबीन करेगी, जहां विभागाध्यक्ष के अधिकार एक से अधिक अधिकारियों को हों, वहां पर वह विभागाध्यक्ष छानबीन समिति का अध्यक्ष होगा, जो समन्वय का कार्य करता है, जैसे प्रमुख अभियंता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक आदि। यह समिति ऐसे अराजपत्रित कर्मचारियों के अभिलेखों की भी छानबीन का कार्य करेगी, जिनके गोपनीय प्रतिवेदन संबंधित विभागाध्यक्ष के स्तर पर रखे जाते हैं। विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया जाएगा। इसी तरह संभाग स्तर पर राजस्व कमिश्नर और  जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में छानबीन समिति होगी।

राज्य में बनेगा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण
प्राधिकरण के आदेशों की अवहेलना पर जेल का भी प्रावधान योग आयोग का गठन किया जाएगा जीएसटी के लिए कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन

सी एम् के निर्देश पर परिवहन विभाग ने जारी किया आदेश : छत्तीसगढ़ में सरकारी गाड़ियों में लाल और नीली बत्ती प्रतिबंध

एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस की गाड़ियों में 
हो सकेगा नीली बत्ती का उपयोग
रायपुर  केन्द्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने सरकारी गाड़ियों में लाल बत्ती के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया है। विभाग द्वारा यहां मंत्रालय (महानदी भवन) से इस आशय का आदेश जारी कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि केन्द्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 108 के तहत छत्तीसगढ़ सरकार के परिवहन विभाग द्वारा 18 जून 2014 को एक अधिसूचना जारी गई थी, जिसका प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजपत्र में 19 जून 2014 को किया गया था। इसमें इन बत्तियों के उपयोग के लिए अधिकृत पदाधिकारियों की सूची भी शामिल है। विभाग ने कल 20 अप्रैल को जारी अपने ताजा आदेश में इस अधिसूचना को संशोधित करते हुए इस प्रकार के वाहनों के शीर्ष अग्र भाग पर फ्लैशर सहित लाल बत्ती और फ्लैशर रहित लाल बत्ती तथा वाहन के शीर्ष अग्र भाग पर नीली बत्ती के उपयोग के प्रावधान को तत्काल प्रभाव से विलोपित कर दिया है। ताजा आदेश में परिवहन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस आदेश के जारी होने की तारीख से सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में किसी भी वाहन अथवा पदाधिकारी के यान में शीर्ष अग्र भाग पर फ्लैशर सहित अथवा फ्लैशर रहित लाल बत्ती के उपयोग की अनुमति नहीं है। इसके अलावा एम्बुलेंस, अग्नि शमन (फायर ब्रिगेड) और सुरक्षा, मार्गदर्शन और कानून व्यवस्था में संलग्न पुलिस के मैदानी अमले के वाहनों को छोड़कर किसी भी वाहन अथवा पदाधिकारी को अपने यान के शीर्ष अग्र भाग पर नीली बत्ती के उपयोग की अनुमति नहीं होगी। 

मुझे खुशी है जोगी जी कि मैं आपके स्तर का नहीं: भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने फेसबुक पर लिखा जोगी को खुला पत्र



रायपुर/20 अप्रैल 2017। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कल कहा था कि वे भूपेश बघेल के किसी बात का जवाब नहीं देते क्योंकि वे उनके स्तर के नेता नहीं हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आज अपने फेसबुक पेज पर इसका जवाब देते हुए अजीत जोगी को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उनके कारनामों का जिक्र करते हुए कहा है कि उन्हें खुशी है कि वे उनके स्तर के नहीं और वे उनके स्तर तक जाना भी नहीं चाहते।
श्री बघेल ने कहा है, “मुझे आज हार्दिक खुशी है कि मैं आपके स्तर का नहीं। मैं लाख चाहूं तो भी आपके स्तर पर जाकर न झूठ बोल सकता हूं, न अपनी पार्टी की पीठ में छुरा भोंक सकता हूं और न लोकतंत्र का चीरहरण कर सकता हूं।”
उन्होंने अजीत जोगी को संबोधित करते हुए कहा है कि आप पर बरसों से आरोप है कि आप आदिवासी नहीं। लेकिन आप आदिवासी होने का फर्जी प्रमाण पत्र लिए घूम रहे है। अदालत में चुनौती दी गई तो सरकार के साथ सांठगांठ करके उस पर फैसला तक नहीं होने दे रहे। जब आपके परिजन आदिवासी नहीं तो आप कैसे आदिवासी हो सकते हैं? मुझे याद है कि वर्ष 2013 के चुनावों से पहले जब जांच समिति ने आपके आदिवासी न होने की रिपोर्ट दे दी थी तब आपने रमन सरकार के साथ कैसे समझौता किया और रमन सिंह जी ने अकारण ही रिपोर्ट वापस ले ली। अब फिर से रिपोर्ट आएगी, हो सकता है कि आपके सहयोग से तीन कार्यकाल तक सत्ता में काबिज भाजपा के मुख्यमंत्री आपसे बचाव के लिए आगे आ जाएं। लेकिन हमें न्यायपालिका पर भरोसा है। उम्मीद है कि न्यायालय दूध का दूध पानी का पानी करेगी।
उन्होंने बिना नाम लिए उनके बेटे के विवादित जन्म प्रमाण पत्र पर भी सवाल उठाए हैं और जग्गी हत्याकांड में उनकी लिप्त होने पर भी। उन्होंने लिखा है, “मेरे पास आपकी तरह बेटे के जन्म के तीन प्रमाण पत्र भी नहीं। हर प्रमाण पत्र में जन्म की जगह अलग-अलग? यह कैसे कर पाते हैं आप जोगी जी? न मेरे बेटे पर हत्या का आरोप है। आपके मुख्यमंत्री रहते एनसीपी के नेता रामावतार जग्गी की हत्या कैसे हुई, किसने करवाई यह मामला अभी भी न्यायालय में है और आपका बेटा अभी भी जमानत पर है, तो किसने की जग्गी की हत्या जोगी जी?”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है, “मैं अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों से राजनीति से निपटता हूं, उनकी हत्या करवाने का षडयंत्र न मेरे जहन में आता है और न यह मेरी चरित्र का हिस्सा है।”
कांग्रेस पार्टी के अहसानों की याद दिलाते हुए श्री बघेल ने कहा है कि जैसा धोखा उन्होंने पार्टी को दिया वह अक्षम्य है। उन्होंने लिखा है, “आपको पार्टी ने राज्यसभा में भेजा, लोकसभा का चुनाव लड़ने का मौका दिया, आपको राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाकर आपका कद बढ़ाया। फिर झूठा आदिवासी होने के बाद भी आपको छत्तीसगढ़ का पहला मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन आपने क्या किया? कभी आदिवासी प्रमाण पत्र को लेकर तो कभी खुद मुख्यमंत्री बनने के लालच में आपने भाजपा के मुख्यमंत्री रमन सिंह से समझौते किए और कांग्रेस के प्रत्याशियों को हराने का षडयंत्र किया।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने अंतागढ़ चुनाव में अजीत जोगी और रमन सिंह के परिवारों की भूमिका का भी जिक्र किया है जिसकी वजह से पिता-पुत्र को पार्टी से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने लिखा है, “हद तो तब हो गई जब आपने वर्ष 2014 में अंतागढ़ उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी मंतूराम पवार को भाजपा के हाथों बेच दिया। ऑडियो टेप ने जाहिर कर दिया है कि कैसे आपके बेटे ने मुख्यमंत्री के दामाद पुनीत गुप्ता के साथ मिलकर कांग्रेस प्रत्याशी को सात करोड़ में खरीदा। सिर्फ इसलिए कि कांग्रेस अध्यक्ष होने के नाते मेरा कद बढ़ न जाए? आपने उस पार्टी की पीठ में छुरा भोंका जिसने आपको बड़ा बनाया, हर उतार चढ़ाव में आपका साथ दिया।”
भावुक होते हुए श्री बघेल ने गांधी-नेहरू परिवार के प्रति जोगी की कृतघ्नता का भी जिक्र किया है। वे लिखते हैं, “आपने दरअसल हमारी नेता श्रीमती सोनिया गांधी और राहुल गांधी जी के साथ अक्षम्य धोखा किया है। आपको तो उस परिवार का ऋणी होना चाहिए था लेकिन आप ऐसे दगाबाज कैसे हो गए जोगी जी?”
श्री बघेल ने अपने जवाब में कहा है, “मैं जयचंद कभी नहीं हो सकता।”
मुख्यमंत्री के रूप में अजीत जोगी के कार्यकाल का जिक्र करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है, “छत्तीसगढ़ में जातिवाद का जो जहर आपने बोया वह अक्षम्य है। आपने हमारे कारोबारी भाइयों के मन में डर पैदा कर दिया कि कहीं उन्हें कारोबार समेटकर भागना न पड़े। आपने न कर्मचारियों को बख्शा और न राजनेताओं को। आपने अपनी ही पार्टी के आदिवासी और अनुसूचित जाति के एक-एक नेता की राजनीति खत्म कर दी। आपमें सर्वशक्तिमान होने का जूनून सवार है और आप उसके लिए किसी भी स्तर तक नीचे गिर सकते हैं। मैं इतना नीचे गिरने की कल्पना भी नहीं कर सकता।”
श्री बघेल ने लिखा है, “आप मेरे आदर्श कभी नहीं थे। आप दरअसल किसी के आदर्श नहीं हो सकते। छत्तीसगढ़ के कोई माता-पिता नहीं चाहेंगे कि आप उनके आदर्श बनें।”
श्री भूपेश बघेल ने कहा है कि वे राजनीति छोड़ना पसंद करेंगे लेकिन जोगी के स्तर पर गिरना नहीं। फेसबुक पर उन्होंने लिखा है, “मेरी अंतरात्मा गवाही नहीं देती कि मैं आपके स्तर तक जाउं। मैं राजनीति छोड़कर खेती के अपने पुश्तैनी काम में वापस लौट जाना पसंद करुंगा लेकिन आपके स्तर तक नहीं जाउंगा। स्तर तो छोड़ दीजिए मैं आपके रास्ते पर एक कदम भी नहीं चलना चाहूंगा’’
अंत में उन्होंने लिखा है, “आपका स्तर आपको मुबारक. आपके भ्रमजाल में फंसे आपके करीबियों को मुबारक.मेरा सौभाग्य है कि मैं आपके स्तर का नहीं और मैं अपने स्तर पर खुश हूं। ईश्वर आपको लंबी उम्र और थोड़ी सद्बुद्धि दे।”

मुख्यमंत्री को पता नहीं कि एनआईए अब जांच नहीं कर रही है सीबीआई जांच हो तो शपथ पत्र देने को तैयार हूं”: भूपेश बघेल

मुझे रमन सिंह हिम्मत दिखाने की चुनौती न दें। मेरे पास हिम्मत की कोई कमी नहीं है सीबीआई जांच हो तो शपथ पत्र देने को तैयार हूं”: भूपेश बघेल
रायपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि शायद मुख्यमंत्री जी को पता नहीं है कि एनआईए झीरम मामले की जांच अब नहीं कर रही है और इसलिए एनआईए के समक्ष अब कोई शपथ पत्र देने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ है, अगर झीरम में कांग्रेस के नेताओं को मरवाने में उसका कोई हाथ नहीं था तो झीरम मामले की जांच सीबीआई से करवाएं और वे सीबीआई के सामने शपथ पत्र लेकर हाजिर हो जाएंगे।
आज कांग्रेस भवन में एक पत्रवार्ता में उन्होंने रमन सिंह के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भूपेश बघेल मीडिया के जरिए राजनीति न करें। उन्होंने कहा, “झीरम कांड रमन सिंह जी के लिए राजनीति होगी, हमारे लिए यह भावुक कर देने वाला दिल से जुड़ा मसला है। हमने उस हत्याकांड में अपने शीर्ष नेताओं को गंवाया है। साथ में कई सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई।” श्री बघेल ने कहा कि यह कांग्रेस पार्टी की ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अपूरणीय क्षति थी। हम तो शोक में थे और पता नहीं कब तक रहेंगे, लेकिन हमारा शोक और संताप कई गुना बढ़ जाता है जब हम देखते हैं कि झीरम कांड सिर्फ एक नक्सली हमला नहीं था बल्कि एक व्यापक षडयंत्र था और दुख होता है कि भाजपा की सरकार इस षडयंत्र की जांच नहीं करवाना चाहती और जब इसकी मांग की जाए तो राजनीति करने का आरोप लगाती है। 
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “न्याय मांगने का हक सभी को है। हमारा भी है, बस हम न्याय मांग रहे हैं। आपने आगे कहा कि मुख्यमंत्री रमन सिंह जी ने मुझे चुनौती दी है कि अगर मुझमें हिम्मत है तो मैं एनआईए के समक्ष शपथ पत्र देकर दिखाऊं। रमन सिंह जी व्यस्त मुख्यमंत्री हैं। इन दिनों शराब बेचने और जनता के बीच अपने शासनकाल को सुराज साबित करने का अतिरिक्त बोझ भी उनके ऊपर आ पड़ा है। वे शायद यह जानने के लिए वक्त नहीं निकाल पाए कि एनआईए ने झीरम के मामले की जांच पूरी कर ली है और अब वो आगे कोई जांच नहीं कर रही है। एनआईए की वेबसाइट पर ही जाएं तो साफ लिखा है कि अब इस मामले में कोई जांच नहीं हो रही है, तो फिर वहां शपथ पत्र क्यों दें? हम इसी बात से दुखी हैं कि झीरम जैसे हत्या कांड की अब कोई जांच नहीं हो रही है।”
भूपेश बघेल ने पत्रकारों को एनआईए की वेबसाइट से निकाला हुआ वह पन्ना भी दिखाया जिसमें लिखा है कि एजेंसी अब झीरम के मामले की जांच आगे नहीं कर रही है।
प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने आगे कहा कि विधानसभा के पिछले बजट सत्र में जब झीरम पर चर्चा हुई थी तो मैंने विस्तार से इस पर तर्क रखे थे। पूरा सदन इस बात से सहमत था कि झीरम हत्याकांड में जितनी भी जांच हुई है वह घटना की जांच है, इसके षडयंत्र की जांच नहीं हो रही है। एनआईए ने आरोप पत्र और पूरक आरोप पत्र दोनों दाखिल कर दिए और दोनों से साफ है कि षडयंत्र की जांच नहीं हुई। अब एनआईए ने जांच बंद कर दी। एक जांच आयोग बना है लेकिन उसकी जांच के दायरे में षडयंत्र का पता लगाना नहीं है। विधानसभा में जब सदन एकमत हुआ तो रमन सिंह जी ने दबाव में बेमन घोषणा की थी कि इस मामले को सीबीआई को सौंपा जाएगा। लेकिन हुआ यह कि यह मामला सीबीआई की भिलाई शाखा को भेज दिया गया जो आर्थिक अपराध शाखा है।
श्री बघेल ने आरोप लगाया, “केंद्र में भाजपा की सरकार है और राज्य में भी भाजपा की सरकार है। भाजपा की दोनों सरकारें नहीं चाहतीं कि झीरम कांड की सीबीआई जांच हो। क्यों नहीं चाहतीं इसकी वजहें साफ है। अगर सीबीआई जांच करेगी तो पूछेगी कि उसी बस्तर में विकास यात्रा के लिए 1700 से अधिक जवान सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं और उसी बस्तर में परिवर्तन यात्रा के लिए सिर्फ 138 जवानों की तैनाती क्यों रहती है? सीबीआई पूछेगी कि जब सरकार को पता था कि जिस इलाके से परिवर्तन यात्रा गुजरने वाली है वह नक्सली गतिविधियों वाला इलाका है तो अतिरिक्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? वह पूछेगी कि कैसा आपका आईजी है जो बस्तर में पदस्थ था लेकिन नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा को नहीं जानता? वही महेंद्र कर्मा जो नक्सलियों के साथ लड़ाई में खुलकर सरकार के साथ थे? सीबीआई को बताना पड़ेगा कि घटना के दो घंटे बाद तक भी एक भी सुरक्षा कर्मी क्यों नहीं पहुंचा जबकि कश्मीर के बाद बस्तर ही एक ऐसा इलाका है जहां इतनी भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था है?” उन्होंने कहा कि रमन सिंह जानते हैं कि इन सवालों के जवाब उनकी सरकार को बेनकाब कर देंगे. इसलिए वे ऐसा नहीं कर रहे हैं. सीबीआई जांच को टाल रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री रमन सिंह की चुनौती स्वीकार करता हूं। वे झीरम कांड के षडयंत्र की जांच के लिए सीबीआई को नए सिरे से पत्र लिखें और मैं शपथ पत्र देकर खुद हाजिर हो जाउंगा। अगर मैंने आरोप लगाए हैं कि झीरम से पहले सरकार ने करोड़ों रुपए भिजवाए थे ऐसी सूचना है तो मैं उस सूचना के विवरण भी सीबीआई को दूंगा। जरूरत पड़ी तो समय आने पर जनता को भी बताउंगा।”
श्री बघेल ने कहा, “मुझे रमन सिंह हिम्मत दिखाने की चुनौती न दें। मेरे पास हिम्मत की कोई कमी नहीं है। मैं चुनौती देता हूं कि अगर भाजपा सरकार की नीयत साफ है, अगर झीरम में कांग्रेस के नेताओं को मरवाने में उसका कोई हाथ नहीं था तो झीरम मामले की जांच सीबीआई से करवाएं।”

जेल में मुलाकात की न्यायिक क्यों सीबीआई जांच करवा लें : भूपेश बघेल

रायपुर/18 अप्रैल 2017। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने प्रदेश की भाजपा सरकार को खुली चुनौती दी है कि सरगुजा केंद्रीय जेल में अभय सिंह से उनकी मुलाकात की न्यायिक जांच क्यों सीबीआई जांच करवा ले? उन्होंने पूछा है कि एक सरकार ने जिस व्यक्ति का उपयोग नक्सलियों से निपटने के लिए किया और अच्छे काम के प्रमाण पत्र दिए उससे मिलने पर सरकार और भाजपा दोनों को पसीना क्यों आ रहा है?
श्री बघेल ने यहां जारी एक बयान में कहा है कि जहां तक जांच का सवाल है तो कांग्रेस पिछले चार वर्षों से मांग कर रही है कि झीरम कांड के षडयंत्र की जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा है कि झीरम कांड के षडयंत्र की जांच न तो एनआईए ने की, न यह आयोग के जांच के दायरे में है और न सरकार इसे सीबीआई को सौंपने के लिए जोर लगा रही है। श्री बघेल ने कहा, “जाहिर है कि सरकार झीरम के मामले में कुछ छिपा रही है और जिसे छिपाया जा रहा है उसमें ऐसा जरुर कुछ है जिसमें मुख्यमंत्री सीधे फंसने वाले हैं।”
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा है कि झीरम में कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं की एक साथ हत्या कर दी गई। वह एक ऐसी क्षति थी जिसकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा है कि यह सूचना विचलित करती है कि झीरम कांड से पहले सरकार ने किसी व्यक्ति के जरिए नक्सलियों को करोड़ों रूपए भिजवाए थे। सवाल यह है कि क्यों सरकार ने पैसे भिजवाए?

झीरम कांड से पहले सरकार ने किसी के जरिए नक्सलियों को करोड़ों रुपए भिजवाए पुलिस और नक्सलियों के बीच सांठगांठ की सीबीआई जांच हो: भूपेश बघेल

रायपुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि सूचना मिली है कि झीरम कांड से पहले सरकार के किसी के जरिए नक्सलियों को करोड़ों रुपए भिजवाए थे, यह सूचना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य में पुलिस और नक्सलियों के बीच गहरी सांठगांठ है। उन्होंने कहा है कि सरकार खुद तो इसकी जांच करवाएगी नहीं इसलिए इसकी जांच सीबीआई से करवानी चाहिए।
कांग्रेस भवन में आयोजित एक पत्रवार्ता में श्री बघेल ने कहा कि एसपी वीके चैबे की कथित मुठभेड ़में मौत, एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण और रिहाई से लेकर झीरम कांड तक कई मामले हैं जिसमें लगता है कि राज्य के पुलिस अधिकारी भी नक्सलियों से मिले हुए हैं।
उन्होंने कहा कि जब आईएएस एलेक्स पॉल मेनन को नक्सलियों ने अगवा कर लिया था और एकाएक रिहा कर दिया था तब भी हमारे नेता महेंद्र कर्मा जी ने आरोप लगाया था कि नक्सलियों से पैसों का लेन देन हुआ था। कर्मा जी के आरोपों की भी कभी कोई जांच नहीं हुई और सरकार ने कुछ नहीं कहा। उन्होंने कहा कि अभी हमें एक सूचना और प्राप्त हुई है जिससे पता चला है कि झीरम कांड से ठीक पहले सरकार की ओर से किसी व्यक्ति के जरिए नक्सलियों को करोड़ों रुपयों की रकम पहुंचवाई गई थी।
भूपेश बघेल ने कहा कि दो दिन पहले वे जेल में अभय सिंह से मिलकर लौटे हैं। नक्सलियों से कथित लड़ाई में पुलिस का सहयोग देने वाले एक व्यक्ति अभय सिंह ने जब यह पोल खोली कि नक्सलियों और पुलिस के बीच गहरी सांठगांठ है तो पुलिस को यह नागवार गुजरा।
उन्होंने कहा, “हमें संदेह है कि पुलिस किसी भी तरह से अभय सिंह को जान से मार देना चाहती है और इसीलिए कई तरह के फर्जी मामले दर्ज करके उन्हें जेल में रखा हुआ है।”
श्री बघेल ने कहा कि जेल भेजने से पहले उन्हें कोई इंजेक्शन लगाया गया था और हमें संदेह है कि इस अज्ञात इंजेक्शन के बाद से ही उनकी तबियत भी खराब है। अभय सिंह घोषित रूप से पुलिस का सहयोगी या इंफॉर्मर रहा है और उनके योगदान की सरगुजा रेंज के तीन अलग-अलग आईजी ने प्रमाण पत्र देकर सराहना की है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने अभय सिंह से कई घंटों की पूछताछ की। इस पूछताछ की रिपोर्ट तो हाईकोर्ट में प्रस्तुत की गई लेकिन इस अनुरोध के साथ कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए क्योंकि अभय सिंह के पास ऐसी जानकारियां हैं जो अगर सार्वजनिक हो जाएं तो छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को खतरा पैदा हो जाएगा।
श्री बघेल ने कहा कि जाहिर है कि अभय सिंह के पास वो जानकारियां हैं जो पुलिस को बेनकाब कर सकती है। इसीलिए इसके बाद से उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की कोशिश शुरु हई।
उन्होंने बताया कि इस बीच अभय सिंह से पुलिस के आला अफसर मिलने गए थे। अगर वह साधारण अपराधी है तो क्यों पुलिस के आला अफसर उनसे मिलने पहुंच रहे हैं? अफसर लगातार उनसे झीरमकांड की सीडी मांग रहे है। इसका मतलब यह है कि जिस तरह से एसपी वीके चैबे के मुठभेड़ की सीडी बनाई गई थी, उसी तरह से झीरम कांड की भी कोई सीडी बनी है, जो पुलिस की जानकारी में है।
श्री बघेल ने कहा, “हम चाहते हैं कि नक्सली - पुलिस सांठगांठ की पूरी जांच सरकार की ओर से अविलंब सीबीआई को सौंप दी जाए। चूंकि पूरे मामले में सरकार की भूमिका संदिग्ध है इसलिए वह तो इस मामले की जांच करवाने से रही।”
उन्होंने कहा कि सीबीआई ही पता लगा सकती है कि वह कौन व्यक्ति है जिसने सरकार के कहने से झीरम कांड से पहले नक्सलियों को करोड़ों रुपए पहुंचाए थे और सरकार में वह कौन है जो नक्सलियों को पैसे पहुंचवाता है?
उन्होंने अभय सिंह को पूरी सुरक्षा देने और उनके खिलाफ फर्जी मामले वापस लेने की भी मांग की।