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सालियों ने जूता चुराई में 1000-1000 के नोट लेने से किया मना, फिर जीजा ने मजबूरन उठाया यह कदम

दादरी के डेरी मच्छा गांव में गुरुवार को बरात आई थी। शादी की रस्में पूरी होने के बाद जूता चुराई की रस्म में जूता वापस करने के बदले में सालियों ने जीजा से 11 हजार रुपए देने की मांग की।

मोदी सरकार द्वारा ब्लैक मनी पर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक के कारण आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी शादी वाले घरों में देखने को मिल रही है। यूपी के दादरी में भी एक शादी के दौरान कुछ ऐसी ही स्थिति बन गई, जिसको लेकर वर और वधु पक्ष दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं। यह समस्या शादी से पहले होने वाली जूता चुराई की रस्म के दौरान उतपन्न हुई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दादरी के डेरी मच्छा गांव में गुरुवार को बरात आई थी। शादी की रस्में पूरी होने के बाद जूता चुराई की रस्म में जूता वापस करने के बदले में सालियों ने जीजा से 11 हजार रुपए देने की मांग की। बदले में जीजा ने 1000 के 21 नोट निकालकर साली के हाथों में थमा दिए। साली ने इन्हें नहीं चलने वाले नोट करार देते हुए लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद वर और वधु पक्ष दोनों के सामने समस्या खड़ी हो गई। वर पक्ष के लोगों ने सालियों को 31 हजार तक देने की पेशकश की, लेकिन वह नहीं मानी। जीजा-साली के बीच जारी मान-मुनौवल के बीच बड़े बुजुर्गों के समझाने के बाद दुल्हें ने सालियों को 21 हजार रुपए का चेक दिया। तब जाकर शादी की बाकी रस्में पूरी हो सकी।
गौरतलब है कि नवंबर महीने में शादियों की भरमार है। इस बीच बड़े नोट बंद किए जाने और नए नोट सीमित मात्रा में मिलने के चलते लोगों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। विवाह के इस सीजन में पूरे देश में करीब 50 लाख शादियां होनी है, अकेले दिल्ली में 40 हजार से ज्यादा शादियां हैं। ऐसे में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है।
8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए ऐलान किया था कि मंगलवार रात्रि 12 बजे के बाद से 500 और 1000 रुपए के नोट अमान्य हो जाएंगे। हालांकि सरकार ने मानवीय आधार पर कुछ स्थितियों में पुराने नोट चलने की छूट दी थी। इनमें पेट्रोल पंप, सीएनजी फिलिंग स्टेशन, मेट्रो सेवा, ट्रेन और बस की टिकट, अस्पताल शामिल है, जहां पुराने नोट 14 नवंबर रात 12 बजे तक चलाए जा सकेंगे। पहले यह अवधि 11 नवंबर तक थी, बाद में इसे बढ़ाया गया।

देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार शख्स ने कहा-डीएम से सीएम तक किसी ने नहीं सुनी फ़रियाद, तब मैंने फहराया पाकिस्तानी झंडा

पुलिस ने उसके घर पर पाकिस्तानी झंडा लगे होने का नोटिस 3 नवंबर की शाम को लिया जब विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चंद्रपाल के घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू किया।

देशद्रोह के आरोप में कानपुर जेल में बंद 36 साल के चंद्रपाल सिंह का कहना है कि वह देशद्रोही नहीं है। वह एक आम आदमी है और व्यवस्था से परेशान है। चंद्रपाल ने कहा, “यही वजह है कि मैंने अपने घर की छत पर पाकिस्तानी झंडा लहरा दिया।” चार सदस्यों वाले परिवार में चंद्रपाल अकेला रोटी का जुगाड़ करने वाला सख्स है। ऊपर से बुजुर्ग पिता की जिम्मेदारी भी कंधों पर है। वह मानता है कि उसने कुछ भी गलत नहीं किया है। चंद्रपाल ने कहा, “मैं एक आम आदमी हूं, जिसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। गरीबों की कोई सुनता नहीं, उन्हें जेल में डालना भी सबसे आसान है।” उसने कहा, “देखिए, जैसे ही मैंने पाकिस्तानी झंडा अपनी छत पर लहराया, अब हर कोई उसकी बात सुनने लगा है।”
कानपुर जेल की खिड़की पर बात करते हुए चंद्रपाल ने कहा, “मैंने खुद पाकिस्तान का झंडा बनाया और हरे रंग के कपड़े पर चांद और सितारे के आकार का सफेद कपड़ा चिपकाया।” उसने नजदीकी पी रोड मार्केट से कपड़े खरीदे थे। उसने कहा कि उसे इसका आइडिया एक न्यूज चैनल को देखते समय आया था।
दरअसल, चंद्रपाल का आरोप है कि अमीर और रसूखदार पड़ोसी ने अवैध तरीके से उसके घर को गिरा दिया और अपना नया घर अवैध तरीके से बनाने लगा। जब उसने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया और उसका काम बंदा करा दिया तो वो उसे धमकी देने लगा। फिर उसे बिजली और पानी के बेतहाशा बढ़े हुए बिल मिले। जब इसकी शिकायत उसने कानपुर विकास प्राधिकरण और कानपुर नगर निगम में करनी चाही तो कोई सुनने वाला नहीं था। इसके बाद उसने डीएम, एसएसपी, सीएम और गवर्नर को भी चिट्ठी लिखी।
पुलिस ने चंद्रपाल के घर पर पाकिस्तानी झंडा लगे होने का नोटिस 3 नवंबर की शाम को तब लिया जब विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने चंद्रपाल के घर के बाहर विरोध-प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद सिसामऊ थाने के एसएचओ ने चंद्रपाल को देशद्रोह और दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और उस पर मुकदमा कर दिया। इसके बाद कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया।

डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तानी बता रहा यह न्यूज चैनल

अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'पाकिस्तानी' बताया जा रहा है। पाकिस्तान के न्यूज चैनल नयो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप का जन्म पाकिस्तान में ही हुआ था और उनका नाम दाउद इब्राहिम खान था।

अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘पाकिस्तानी’ बताया जा रहा है। पाकिस्तान के न्यूज चैनल नयो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप का जन्म पाकिस्तान में ही हुआ था और उनका नाम दाउद इब्राहिम खान था। न्यूज में एंकर ट्रंप के बचपन की कहानी और कुछ फोटोज दिखाती दिख रही है। दुनिया के लिए जैसे डोनाल्ड ट्रंप के जीतने की खबर हैरान कर देने वाली थी वैसे ही यह खबर भी सभी लोगों को चौंका रही है। खबर में बताया गया है कि ट्रंप पाकिस्तान में 14 जून 1946 को पैदा हुए। खबर के मुताबिक, पाकिस्तान के वजीरिस्तान से ट्रंप ने शुरुआती पढ़ाई की थी। न्यूज चैनल का मानना है कि ट्रंप के असली माता-पिता कार एक्सीडेंट में मारे गए थे। बताया गया है इंडो अमेरिकन सैनिक कैप्टन स्टॉकडेल उन्हें अपने साथ लंदन ले गए। वहां से ट्रंप फैमली ने ट्रंप को गोद लिया था। खबर में यह भी बताया जा रहा है पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर भी इस बात की काफी चर्चा है।

इंडियन एक्सप्रेस को पता लगा कि यह वीडियो अभी का नहीं है। बल्कि यह रिपोर्ट पिछले महीने की है। जब ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के एक उम्मीदवार भर थे। बुधवार (9 नवंबर) को ट्रंप राष्ट्रपति चुने गए। राष्‍ट्रपति पद के चुनावों में उन्‍होंने डेमोक्रेटिक पार्टी हिलेरी क्लिंटन को मात दी। वे अमेरिका के 45वें राष्‍ट्रपति हैं। सभी न्‍यूज चैनलों और अखबारों ने हिलेरी की जीत की संभावना जताई थी। ओपिनियन पोल्‍स में भी हिलेरी की जीत दिखाई जा रही थी। लेकिन सब गलत साबित हो गए। राष्‍ट्रपति बनने के लिए 270 वोट चाहिए होते हैं। नतीजों में ट्रंप को 288 इलेक्‍टॉरल वोट मिले।
खबरों के अनुसार ट्रंप ने पेनसिल्वेनिया, फ्लोरिडा, अलास्का, यूटा, आयोवा, एरिजोना, विस्कॉन्सिन, जॉर्जिया, ओहायो, उत्तर कैरोलिना, उत्तर डकोटा, दक्षिण डकोटा, नेब्रास्का, कंसास, ओकलाहोमा, टेक्सास, व्योमिंग, इंडियाना, केंटुकी, टेनेसी, मिसीसिपी, अरकंसास, लुइसियाना, पश्चिम वर्जीनिया, अलबामा, दक्षिण कैरोलिना, मोंटाना, इडाहो और मिसौरी में जीत हासिल की।

भारतीयों ने गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किया how to convert black money to white, टॉप 10 में 6 बीजेपी शासित राज्य

आठ नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने की घोषणा की और उसके आधे घंटे बाद से गूगल पर काला धन सफेद करने वाले भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को 500 और 1000 के पुराने बैंक नोटों के विमुद्रीकरण (चलन से बाहर करने) की घोषणा की। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से देश के अंदर जमा काले धन से मुक्ति मिलेगी और आतंकवादियों को मिलने वाली आर्थिक मदद बंद होगी। घोषणा के बाद देश में कई जगहों से सार्वजनिक स्थानों पर 500 और 1000 के नोट जलाने, बहाने, फाड़कर फेंकने की खबरें आने लगीं। साथ ही ये खबरें भी लगातार आ रही हैं कि बहुत से लोग अपना काला धन सफेद करने के चोर रास्ते या तो तलाश चुके हैं या तलाश रहे हैं। इस घोषणा का असर जमीन के अलावा इंटरनेट पर भी समान रूप से देखने को मिला। जहां सोशल मीडिया पर लोग इसके फायदे-नुकसान को लेकर आपस में गुत्थमगुत्था होते रहे वहीं सर्च इंजन गूगल इंडिया पर घोषणा के अगले दिन बहुत सारे भारती सर्च कर रहे थे कि “हाऊ टू कनवर्ट ब्लैक मनी टू व्हाइट” (काले धन को सफेद कैसे करें)।

आपको ये जानकार और भी हैरत हो सकती है कि गूगल इंडिया पर “काला धन सफेद कैसे करें” सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात के लोग कर रहे हैं। “काला धन सफेद रंग कैसे सफेद करें” सर्च के मामले में गुजरात के बाद हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के लोग आगे रहे। काला धन सफेद करने के अलावा भारतीय जनता गूगल पर सरकार द्वारा जारी किए गए 2000 और 500 के नए नोटों की खूबियों और सिक्योरिटी फीचर्स के बारे में भी सर्च कर रहे हैं। हालांकि गूगल इंडिया में जब हिंदी (देवनागरी और रोमन दोनों लिपियों में) “काला धन” सर्च किया जा रहा है तो उसमें “काला धन सफेद कैसे करें” जैसा कोई विकल्प नहीं दिख रहा है।


पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को रात आठ बजे 500 और हजार के नोट बंद करने की घोषणा की और साढ़े आठ बजे से गूगल पर ‘हाऊ टू कनवर्ट ब्लैक मनी इनटू व्हाइट’ सर्च बढ़ गया। गुरुवार को रात साढ़े आठ बजे सबसे ज्यादा लोगों इस की वर्ड को सर्च कर रहे थे। इस की वर्ड के साथ पिछले तीन दिनों में जिन 10 राज्यों में सर्वाधिक प्रयोग किया गया उनमें से छह बीजेपी प्रशासित हैं। इन छह राज्यों में जम्मू-कश्मीर भी शामिल है जहां बीजेपी की गठबंधन सरकार है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फैसले के बाद बुधवार (नौ नवंबर) को मीडिया से कहा कि “इस एक फैसले से लोगों के पैसे रखने और खर्च करने की संस्कृति बदल जाएगी।” वित्त मंत्री ने कहा कि ईमानदार लोगों को सरकार के इस फैसले से कोई दिक्कत नहीं होगी और उन्हें परेशान होने की कोई वजह नहीं है। सरकार की घोषणा के अनुसार 30 दिसंबर तक बैंकों और डाकघरों में 500 और 1000 के पुराने नोट बदले या जमा किए जा सकेंगे।

सरकारी सोटे की काट खोज रहे कालेधन के कारोबारी, गुप्त बैठकें जारी, निकाले ये तरीके

सरकारी सोटे की काट खोज रहे कालेधन के कारोबारी, गुप्त बैठकें जारी, निकाले ये तरीके

नई दिल्ली । बेशक देश भर में 500 और 1000 रुपये के नोट को लेकर हो-हल्‍ला मचा हुआ है, लेकिन हवाला और सर्राफा करोबारियों ने काले धन पर हाथ मिला लिया है। काले धन को ठिकाने लगाने का तरीका खोज लिया है। 32 हजार रुपये वाला सोना 42 हजार रुपये में खरीदा और बेचा जाएगा। इतना ही नहीं नगदी का पर्चा भी काटा जाएगा। बुधवार को पश्‍चिमी उत्‍तर प्रदेश में हुई हवाला कारोबारियों की बैठक में इस फैसले पर मुहर लग गई है।
बुधवार की दोपहर हवाला कारोबारियों और सर्राफा कारोबारियों की एक बैठक हुई थी। काफी देर तक चली बैठक में आगे तक के लिए कोई ठोस रास्‍ता बेशक नहीं निकला हो, लेकिन मौजूदा वक्‍त के लिए एक छोटा रास्‍ता जरूर निकाल लिया है। बैठक में मौजूद रहे सूत्रों की मानें तो हवाला करोबारी सोने की खरीद करेंगे। बिना किसी लिखा-पढ़ी के भुगतान करेंगे। लेकिन सर्राफा कारोबारियों ने भी मौके का फायदा उठाकर 32 हजार रुपये वाले सोने का भाव 42 हजार रुपये कर दिया।
सर्राफा बाजार के जानकार बताते हैं कि किसी भी सर्राफ के लिए यह बड़ा ही आसान है। वो तो सोने का नंबर  एक में पर्चा काट देगा। बिक्री किए गए सोने पर टैक्‍स भी दे देगा। दस किलो सोना बेचने वाला 40-40 किलो तक सोना बेच रहा है। बैठक के बाद से तो मोबाइल पर ही डीलिंग हो गई है। हवाला वालों ने रुपया सर्राफ के यहां भेज दिया है। सोना आता रहेगा। देर रात तक सर्राफ पर्चा काटने में लगे रहे। यह अलग बात है कि वो किसके नाम से और किस पैन नम्‍बर पर पर्चा काट रहे हैं, यह नहीं पता।

इतना ही नहीं कुछ सर्राफ तो बिना सोना बिक्री के भी नगद का पर्चा काट रहे हैं। यह कालेधन को नम्‍बर एक करने का यह तरीका कुछ इस तरह से है कि जिसके पास नम्‍बर एक में रकम है वो आपसे एक करोड़ रुपये लेकर 70 लाख आपके बैंक खाते में डाल देगा। यहां यह दिखाया जाता है कि आप आपस में दोस्‍त हैं और आपको रुपये की जरूरत थी, इसलिए आपने उधार लिए थे जो कुछ दिन बाद बैंक द्वारा ही आप वापस कर रहे हैं। यह तरीका अपना कर भी खूब आनलाइन लेन-देन किया जा रहा है।
इस बारे में सर्राफा बाजार, आगरा के अध्यक्ष मुरारीलाल फतेहपुरिया ने कहा कि ये सब बड़े व्यापारी कर रहे हैं जिनके पास बड़ी मात्रा में सोना है लेकिन सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यापारियों की संख्या कितनी है। ये तो सरकारी लोगों को देखना चाहिए।
आगरा के पुलिस महानिरीक्षक सुजीत पांडेय ने कहा कि इस मामले को मैं खुद एसएसपी से अभी दिखवा रहा हूं। ऐसी किसी भी तरह की अफरा-तफरी नहीं फैलने दी जाएगी।
गांव की ओर भी दौड़ रहे हवाला कारोबारी
धान की फसल खेतों में पक कर तैयार खड़ी है। अब किसी भी समय किसान अपने हिसाब से फसल काटने को तैयार हैं। धान की फसल खासी महंगी मानी जाती है। इसी को ध्‍यान में रखते हुए कुछ छोटे हवाला कारोबारियों ने गांवों की और दौड़ लगा दी है। कुछ सीधे तो कुछ बिचौलियों के माध्‍यम से किसानों से संपर्क कर रहे हैं। खेत में खड़ी फसल का सौदा किया जा रहा है। सौदा पटने पर किसान को हाथों-हाथ मुंह मांगे दाम दिए जा रहे हैं। ऐसे में किसान भी खुश हैं कि घर बैठे ही खड़ी फसल के दाम मिल रहे हैं।

नोट बंद करने पर मुलायम सिंह की मोदी सरकार से अपील- एक हफ्ते के लिए टाला जाए फैसला

सपा प्रमुख ने कहा कि वह भी हमेशा से कालेधन के खिलाफ रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से गंभीर स्थिति पैदा हुई है और आम लोग नोट बंद होने से परेशान हैं।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने केंद्र सरकार के 500 और 1000 रुपए को बंद करने के फैसले पर असहमती जताई है और कहा है कि इस फैसले को टाल दिया जाए। मुलायम सिंह ने कहा कि फैसले से आम लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है, ऐसे में कम से कम एक हफ्ते के लिए इस फैसले को टाला जाए। उन्होंने कहा कि वह भी हमेशा से कालेधन के खिलाफ रहे हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से गंभीर स्थिति पैदा हुई है और आम लोग नोट बंद होने से परेशान हैं।
गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि राम मनोहर लोहिया के बाद अगर किसी ने कालेधन के खिलाफ सच्ची लड़ाई लड़ी है तो वह समाजवादी पार्टी ही थी। मुलायम सिंह ने कहा कि “हम भी चाहते हैं देश में कालाधन वापस आए और इसका इस्तेमाल देश के विकास में हो। हम नहीं चाहते कि चुनाव में कोई भी पार्टी कालेधन का इस्तेमाल करे। मुलायम सिंह ने कहा, “भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान कालाधन वापस लाने का फैसला किया था। लेकिन आम लोगों का कालेधन को लेकर दबाव पड़ने के बाद उन्होंने नोटों पर ही बैन लगा दिया। केंद्र सरकार ने इस फैसले से पूरे देश में अराजकता फैला दी है। आम लोग रोजमर्रा का सामान भी नहीं खरीद पा रहे।

इससे पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले पर गुरुवार को एक प्रेंस कॉन्फ्रेंस की। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि इससे सरकार ने आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपने आने वाले कई सालों का इंतजाम कर लिया है और देश में नोटों की बंदी लगा दी। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों को ही दिक्कत होगी, क्योंकि सरकार ने धन्ना सेठों का पैसा विदेश पहुंचा दिया है। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार, काले धन और जाली नोटों पर लगाम कसने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर को ऐलान किया था कि देशभर में 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट बंद किए जाएंगे। वहीं इनकी जगह 500 और 2000 रुपए के नए नोट जारी किए जाएंगे।

प्रवासियों का विरोध करने वाले डोनाल्ड ट्रंप की मां थीं प्रवासी, रियल एस्टेट-कैसिनो से की अकूत कमाई

डोनाल्ड ट्रंप पांच भाई बहनों में अपने माता-पिता की चौथी संतान हैं। उनकी एक बहन बैंकर है और दूसरी जज है।

रिपबल्किन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के अगले राष्ट्रपति होंगे। मंगलवार (8 नवंबर) को हुए मतदान के बाद ट्रंप को जरूरी इलेक्टोरल वोट मिल गए हैं। उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन को हाराया है। डोनाल्ड ट्रंप का जन्म न्यूयॉर्क के क्वींस में 14 जून 1946 में हुआ था। उनके पिता फ्रेड ट्रंप न्यूयॉर्क में रियल एस्टेट का कारोबार करते थे। फ्रेड ब्रुकलिन और क्वींस में एमआईजी फ्लैट बनाकर काफी दौलत कमायी। ट्रंप की मां मैरी ट्रंप स्कॉटलैंड से आने वाली प्रवासी थीं। उनके माता-पिता ने उन्हें 13 साल की उम्र में न्यूयॉर्क मिलिट्री अकादमी में पढ़ने के लिए भेज दिया था। वो 1964 में अकादमी से पास हुए।
ट्रंप ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवानिया के व्हार्टन स्कूल ऑफ फाइनेंस से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। ट्रंप अपनी पढ़ाई के दौरान छुट्टियों में अपने पिता की कंपनी ‘एलिजाबेथ ट्रंप एंड सन’ में काम करते थे। कॉलेज की पढ़ाई के बाद वो पूरी तरह अपने पिता की कंपनी से जुड़ गए। ट्रंप ने 1971 में पिता का पूरा कारोबार का संभाल लिया। उन्होंने कंपनी का नाम बदलकर “‘ट्रंप ऑर्गेनाइजेशन” कर दिया। वो क्वींस छोड़कर मैनहैट्टन में रहने चले गए।
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप बार-बार इस बात पर जोर देते रहे कि उनके पिता ने कारोबार शुरू करने के लिए उन्हें बड़ी दौलत नहीं दी थी। पहली प्रेसिडेंशियल बहस में हिलेरी क्लिंटन ने कहा था कि ट्रंप ने 1.4 करोड़ डॉलर से अपना कारोबार शुरू किया था। लेकिन ट्रंप ने उनकी बात गलत बताते हुए कहा था कि “मेरे पिता ने 1975 में मुझे बहुत छोटा सा लोन दिया था।” शायद उनकी बात में सच्चाई भी है क्योंकि ट्रंप का कारोबार जिस ऊंचाई पर आज नजर आता है उसकी शुरुआत उनके मैनहैट्टन आने के बाद ही हुई।

मैनहैट्टन आने के बाद ट्रंप ने कई प्रमुख लोगों से संपर्क बढ़ाया। 1971 में ट्रंप ने मैनहट्टन बिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए निर्माण कराना शुरू किया। 1973 में ट्रंप परिवार के कारोबार पर गंभीर सवाल उठे। अमेरिकी सरकार ने उनके पिता और उनकी कंपनी पर लोगों को घर बेचने या किराए पर देने में नस्ली भेदभाव का मामला दर्ज किया। ट्रंप ने मामले को निराधान बताते हुए कहा था कि उनकी कंपनी नस्ली आधार पर भेदभाव नहीं करती। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 1975 में समझौता हुआ जिसके तहत उन्हें अपनी कंपनी के कर्मचारियों को नस्ली भेदभाव के कानून के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए प्रशिक्षण देने की हामी भरनी पड़ी।
1979 में ट्रंप ने कैसिनो (जुआघर) में भी निवेश करना शुरू कर दिया। उन्होंने 1984 में हलीडे इन होटल को खरीद कर ट्रंप प्लाजा और कैसिनो खोला। इसके बाद उन्होंने हिल्टन होटल-कैसिनों भी खरीद लिया। 1980 में उन्होंने न्यूयॉर्क में ग्रैंड हयात होटल का पुनर्निमाण कराया।  हयात होटल के सफल निर्माण के साथ ही वो एक मशहूर डेवलपर हो गए थे। 1990 में उन्होंने अटलांटिक सिटी में “ताजमहल” नामका होटल-कैसिनो खोला। इसे दुनिया का सबसे बड़ा होटल-कैसिनो माना जाता था। हालांकि हाल ही में खबरें आई थीं कि ये ट्रंप का ताजमहल होटल-कैसिनो बंद होने वाला है। रियल-एस्टेट और कैसिनो सेक्टर में ट्रंप ने आने वाले दशकों में भी अपना दबदबा बनाए रखा और अकूत दौलत कमाई। 1990 के दशक में उन्होंने एयरलाइन सेक्टर में भी हाथ आजमाए लेकिन वहां उन्हें सफलता नहीं मिली।
रियल एस्टेट और कैसिनो से अरबपति बन चुके  ट्रंप 2004 में वो एनबीसी के रियलिटी सीरीज द अप्रेंटिस में शामिल हुए। वो इस शो के निर्माता भी थे। ये शो काफी लोकप्रिय हुा। ट्रंप ने पहली 2012 में संकेत दिया कि वो अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव लड़ सकते हैं। 2015 में अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की घोषणा की। जुलाई 2016 में वो अपने प्रतिद्वंद्वी को हराकर आधिकारिक रिपब्लकिन उम्मीदवार बने और आखिरकार चुनाव जीतने में सफल रहे।
ट्रंप पांच भाई बहनों में अपने माता-पिता की चौथी संतान हैं। उनकी एक बहन बैंकर है और दूसरी जज है। उनके भाई रॉबर्ट ट्रंप की कंपनी में अधिकारी हैं। उनके भाई फ्रेडी की 1981 में 43 साल की उम्र में ज्यादा शराब पीने की वजह से मौत हो गई थी। ट्रंप अपने शराब छोड़ने की वजह बताते हुए बार-बार फ्रेडी का हवाला देते रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक तीन शादियां की हैं। उनके पांच बच्चे और आठ पोते-पोती हैं।
चुनाव प्रचार के दौरान हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई दूसरी प्रेसिडेंसियल बहस के दौरान जब हिलेरी से ट्रंप में कोई एक किसी सकारात्मक बात बताने के लिए कहा वो उन्होंने कहा, “मैं उनके बच्चों की इज्जत करती हूं। उनके बच्चे बेहद काबिल और समर्पित हैं और मुझे लगते है कि इससे डोनाल्ड के बारे में काफी कुछ पता चलता है।

1000-500 के नोट लेकर आगरा में भटक रहे सैलानी, नहीं हो रहा ताज का दीदार

नई दिल्‍ली। बाजार, रेलवे स्‍टेशन और बस अड्डे पर ही नहीं ताजमहल पर भी नोट को लेकर हंगामा हो रहा है। देश-विदेशी पयर्टक हाथों में नोट लेकर घूम रहे हैं, लेकिन उन्‍हें ताज के अंदर जाने का टिकट नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते कर्मचारियों और पयर्टकों में तकरार हो रही है। कुछ गुजराती पर्यटकों ने तो ताज के गेट पर हंगामा भी किया। कुछ ऐसी ही स्‍थिति इलाहबाद और बनारस में भी थी। वहीं विदेशी पर्यटकों के ऑपरेटर मौके का फायदा उठाते हुए चांदी काट रहे हैं।

सात समंदर पार से आए विदेशी पर्यटक जब सुबह ताजमहल पहुंचे तो उन्‍हें झटका लगा। टिकट खिड़की पर उन्‍हें टिकट देने से मना कर दिया गया। वजह बताई गई कि आज से 500 और 1000 रुपये का नोट बंद हो गया है।

 

500, 1000 रुपये के नोट बंद करने से कैशलेस अर्थव्यवस्था की तरफ कदम बढ़ेंगे: अरुण जेटली

नई दिल्ली: 500 और 1000 रुपये के बंद होने के बाद बुधवार को वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने अपनी मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि दरअसल देश में काले धन की समानांतर अर्थव्‍यवस्‍था चल रही थी. उस पर अंकुश लगाने और भ्रष्‍टाचार को रोकने के लिए सरकार ने यह साहसिक कदम उठाया.

जेटली ने कहा कि कल यानी गुरुवार सुबह से नई करेंसी आ जाएगी. सरकार के इस कदम से टैक्‍स कलेक्‍शन के आसार बढ़े हैं और कैशलेस अर्थव्‍यवस्‍था की तरफ देश के कदम बढ़ेंगे. उन्होंने यह भी साफ किया कि 2000 रुपये के नए नोट में GPS चिप की बात गलत है.

वित्त मंत्री ने कहा कि 500, 1000 रुपये के नोट बंद होने से केंद्र के साथ राज्यों को भी लाभ होगा. आमलोगों को घबराने की जरूरत नहीं, उन्हें सिर्फ कुछ दिनों के लिए परेशानी हो सकती है. उन्होंने कहा कि इस फैसले की तुलना वर्ष 1978 में लिए गए निर्णय से नहीं की जा सकती है. उल्लेखनीय है कि 1978 में भी जनता पार्टी की सरकार ने इस तरह की घोषणा की थी.

उन्‍होंने कहा कि काले धन पर एसआईटी बनाई गई और सरकार बेनामी संपत्ति पर भी कानून लाई. पीएम ने कुछ समय पहले 500 और 1000 रुपये के नोट हटाने की सोची. उसी के परिणाम के तहत सरकार ने यह कदम उठाया और पीएम ने अपने पहले राष्‍ट्र के नाम संबोधन में इन नोटों को हटाने की घोषणा की.

500 के नए नोट की क्या होंगी खूबियां, जानिए

सरकार ने काला धन पर लगाम लगाने के लिए मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए 500 और 1000 रुपए के नोट पर रोक लगा दी है।

सरकार ने काला धन पर लगाम लगाने के लिए मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए 500 और 1000 रुपए के नोट पर रोक लगा दी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अब 500 और 2000 के नए नोट जारी करेगी। मंगलवार को पीए मोदी ने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि नए नोट जल्द से जल्द सरकुलेट कर दिए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि आज आधी रात से 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए जाएंगे। नौ और 10 नवंबर के बीच एटीएम से पैसे निकालने की बंदिश होगी। 11 नवंबर तक अस्‍पतालों में पुराने नोट दिए जा सकेंगे। 9 और 10 नवंबर को एटीएम नोट काम नही करेंगे। 72 घंटे तक पुराने नोट से रेलवे, सरकारी बसों और एयरपोर्ट पर टिकट खरीद सकेेंगे। वहीं बैंक ट्रांजेक्‍शन जारी रहेगा। ऑनलाइन पेमेंट, डेबिट, क्रेडिट और डिमांड ड्राफ्ट से भुगतान भी जारी रहेगा। नौ नवंबर को सारे बैंक बंद रहेंगे। आगे से ये सिर्फ कागज का टुकड़ा रह जाएंगे। पुराने नोट के बंद होने के बाद और जो नए नोट जारी किए जाएंगे।

500 रुपए के नए नोट का संभावित डिजाइन

500 रुपए के नए नोट के पीछे लालकिला दिखाया जाएगा।

500 रुपए के नए नोट के पीछे एक तरफ स्वच्छ भारत अभियान की तस्वीर छपी होगी। जिसमें महात्मा गांधी के चश्मे की पिक्चर लगी होगी।

500 रुपए के नए नोट में पांच अंक हिंदी के अंक में लिखा होगा।

500 रुपए के नए नोट में आगे की तरफ रिजर्व बैंक का वजन लिखा होगा

500 रुपए के नए नोट में एक तरफ अशोक स्तंभ बना होगा ।

जिन लोगों के पास 500 और 1000 के नोट हैं तो वो 10 नवंबर से लेकर 30 दिसंबर 2016 तक आप 500 और 1000 के नोट नजदीकी बैंक या डाकघर में जमा करा सकते हैं। इसके बदले जमा की गई रकम के बराबर ही बैंक या डाकघर आपको भुगतान करेंगे।

साइरस मिस्त्री के साथी की जुबानी- एक मिनट के अंदर उन्हें हटा दिया गया

टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री के करीबी सहयोगी और टाटा संस ग्रुप के भंग किए गए कार्यकारी परिषद के सदस्य प्रोफेसर निर्मल्य कुमार ने खुलासा किया है कि कैसे एक मिनट के अंदर 103 बिलियन डॉलर वाले ग्रुप के अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया। लंदन बिजनेस स्कूल के पूर्व प्रोफेसर कुमार ने अपने ब्लॉग में ‘आई जस्ट गॉट फायर्ड’ शीर्षक से आलेख लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा है, “24 अक्टूबर की रात 9 बजे के करीब मुझे मेरे एक सहयोगी, जिसके साथ हमने बहुत नजदीक से काम किया है और कई मौकों पर किसी मुद्दे पर हमलोग एक साथ बहस करते थे, का फोन आया। उसने मुझे बताया-‘यह मेरा अप्रिय कर्तव्य है और मुझे यह बताने के लिए कहा गया है कि अब ग्रुप को आपकी सेवा की जरूरत नहीं है।’ मैंने उससे पूछा-‘इसका मतलब यह कि कल सुबह मैं नहीं दिखूं।’ उसका सकारात्मक जबाव आया। जी हां। यह सब एक मिनट के अंदर हो गया।”
कुमार ने लिखा है, “ऐसा नहीं है कि मुझे मेरे काम में दोष की वजह से निकाला गया (मेरा पिछला मूल्यांकन अति उत्तम था)। मैंने हमेशा बेहतर किया। मुझे सिर्फ इसलिए निकाला गया कि मैं उस पद पर था और साइरस के साथ मिलकर अच्छा और व्यापक पैमाने पर काम कर रहा था।” हालांकि, कुमार कहते हैं कि टाटा संस ने एक बयान में उन्हें 29 अक्टूबर को हटाने की बात कही है।

कुमार ने लिखा है कि 18 साल की उम्र से वो काम कर रहे हैं और पहली बार वो अब बेरोजगार हैं। उन्होंने लिखा है, “30 साल के करियर में मुझे तीन बॉस ने प्रभावित किया है। एक हैं ल्यू स्टर्न जिनके अंडर नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से पीएचडी किया, दूसरे हैं एलबीएस के डीन लॉरा टाइसन और तीसरे आप, धन्यवाद साइरस।”
गौरतलब है कि साइरस मिस्‍त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन पद से हटाए जाने से पहले पद छोड़ने को कहा गया था लेकिन मिस्‍त्री ने इससे इनकार कर दिया था। बताया जाता है कि बोर्ड मीटिंग से ठीक पहले मिस्‍त्री को पद छोड़ने को कहा गया। मिस्‍त्री के इनकार के बाद जब मीटिंग में उन्‍हें हटाने का प्रस्‍ताव पास किया गया तो साइरस ने इसे अवैध करार दिया। बताया जाता है कि ऐसा कहकर मिस्‍त्री मीटिंग छोड़कर चले गए। बोर्ड मीटिंग में रतन टाटा को चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन चुना गया था। साथ ही नए चेयरमैन के लिए कमिटी का गठन भी किया गया।

दिवाली के बाद के प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर में करोड़ों लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में भी मुश्किल, सैकड़ों स्कूल बंद

देश की राजधानी दिल्‍ली इन दिनों गहरे धुएं के आगोश में है। दिवाली के बाद से फैले इस स्‍मॉग को लगभग एक सप्‍ताह होने को आया लेकिन अभी तक इसमें कोई कमी देखने को नहीं मिली है।

देश की राजधानी दिल्‍ली इन दिनों गहरे धुएं के आगोश में है। दिवाली के बाद से फैले इस स्‍मॉग को लगभग एक सप्‍ताह होने को आया लेकिन अभी तक इसमें कोई कमी देखने को नहीं मिली है। यह स्‍मॉग इतना जहरीला और गंदा है कि कुछ मिनट के लिए बाहर निकलते ही आंखें जलने लगती हैं और गले में खराश के साथ ही सांस लेने में दिक्‍कत होती है। सरकारी डाटा के अनुसार दिल्‍ली में 17 साल में सबसे खराब स्‍मॉग की स्थिति है। प्रदूषण की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे ने सोमवार को एनसीआर राज्‍यों के पर्यावरण मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई है। इसमें समस्‍या से निपटने के लिए त्‍वरित, शॉर्ट टर्म और लॉन्‍ग टर्म कदम उठाए जाने पर चर्चा होगी।
वहीं दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल नजीब जंग ने भी हाईलेवल की बैठक बुलाई है। दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पड़ोसी राज्‍यों में फसलें जलाए जाने के कारण प्रदूषण का स्‍तर बढ़ा है। फसलों को जलाए जाने से उठा धुआं एक जगह ठहर गया है। उन्‍होंने फसलों को जलाए जाने से रोकने के लिए किसानों को इंसेंटिव दिए जाने की मांग की।

दिल्ली की हवा में इस समय पीएम 2.5 यानि छोटे कणों की मात्रा 700 माइक्रोग्राम पर क्‍यूबिक मीटर है। यह आंकड़ा सरकारी नियम से 12 गुना और विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के नियमों से 70 गुना अधिक है। पीएम 2.5 से फेंफड़ों को सबसे ज्‍यादा नुकसान पहुंचता है। हजारों लोगों ने स्‍मॉग के चलते आंखों में जलन और खांसी की शिकायत की है। दिल्‍ली में 17 हजार से अधिक स्‍कूलों को बंद कर दिया गया है। डॉक्‍टर्स का कहना है कि लोग बाहर निकलने से बचें और घर के अंदर ही रहें।
विज्ञान व पर्यावरण केंद्र (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक (शोध) अनुमिता राय चौधरी ने कहा है कि अब हालात ऐसे हैं कि सरकार को तुरंत हालिया व दूरगामी परामर्श जारी करने के साथ त्वरित व स्थाई उपाय करने की दरकार है। हृदय व सांस की दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों के अलावा बच्चों को बचाने के लिए इमरजेंसी स्तर पर तुरंत उपाय करने की दरकार है। साथ ही सरकार को ऐसा निर्देश भी जारी करना चाहिए कि लोग ज्यादा बाहर न निकलें, घरों में ही रहे। धुएं की जगह पर व्यायाम न करें।
दिवाली के बाद राजधानी में इतना धुआं, धूल व कुहासा छाया रहा कि दिन में भी गाड़ियों की हेडलाइट जलानी पड़ रही है। गुरुवार (4 नवंबर) को हालात थोड़े ठीक हुए थे लेकिन पांच नंवबर को धुएं का असर फिर से बढ़ गया। इस दौरान विजिबिलिटी 100 मीटर के करीब ही रही। दिल्‍ली में स्‍मॉग के लिए डीजल इंजन, कोयले के पॉवर प्लांट और फैक्ट्रियों ने निकलने वाले धुंए से हालात खराब होते जा रहे हैं। इसके अलावा पंजाब और बाकी आसपास के इलाकों में जलने वाली फसल से भी दिल्ली प्रदूषित होती है। वहीं लड़कियों की मदद से खाना बना रहे लोग भी प्रदूषण को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं।

डीएम ने दिया ड्राइवर को रिटायरमेंट गिफ्ट, लाल बत्ती वाली गाड़ी सजवाकर खुद पहुंचाया दफ्तर

ड्राइवर को रिटायरमेंट के दिन डीएम ने यूनिक गिफ्ट दिया।
पहली नजर में यह कार देखकर लग रहा है कि इसे दूल्हे के लिए सजाया गया है। लेकिन यहां माजरा कुछ अलग है। जब आप इस फोटो को और गौर से देखेंगे तो इसकी सच्चाई जानने को और उत्सुक हो जाएंगे। तस्वीर में देख सकते हैं सफेद ड्रेस में ड्राइवर पीछे वाली सीट पर बैठा है और कार को एक सूट-बूट पहने कलेक्टर चला रहे हैं। इतना ही नहीं, बल्कि ड्राइवर के लिए कार का गेट भी खोला जाता है। एनडीटीवी की रिपोर्ट इसके पीछे कहानी कुछ यूं है कि महाराष्ट्र के अकोला के डीएम जी श्रीकांत ने अपने ड्राइवर दिगंबर ठाक को रिटायरमेंट का यूनिक गिफ्ट देने का फैसला किया था। कलेक्टर ने पहले अपनी लाल बत्ती वाली कार को सजवाया। उसके बाद उस कार में पीछे अपने ड्राइवर ठाक को बैठाया और खुद कार ड्राइव करके उन्हें दफ्तर पहुंचाया। इसके बाद दफ्तर में पार्टी आयोजित की गई। 58 साल के दिगंबर ने जिले के 18 कलेक्टरों के लिए कारें चलाई हैं।
ऐसा ही एक और मामला झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा टाउनशिप में देखने को मिला है। यहां पिछले 30 सालों से झाड़ू लगानेवाली सुमित्रा देवी की आज बड़ी चर्चा हो रही है। इसकी वजह है उनका रिटायरमेंट और उस दिन विदाई समारोह में उनके बेटों का शामिल होना। दरअसल, जैसे ही रिटायरमेंट फंक्शन शुरू हुआ, वहां तीन बड़े अफसर पहुंचे। एक अफसर नीली बत्ती लगी गाड़ी में पहुंचे तो दो अफसर अलग-अलग बड़ी-बड़ी गाड़ियों में पहुंचे। उनमें एक थे बिहार के सिवान जिले के कलक्टर महेन्द्र कुमार, दूसरे रेलवे के चीफ इंजीनियर वीरेन्द्र कुमार और तीसरे थे मेडिकल अफसर धीरेन्द्र कुमार। ये तीनों सुमित्रा देवी के बेटे हैं जिन्हें उन्होंने बड़ी मेहनत से न केवल पाला-पोषा बल्कि उन्हें बड़ा अधिकारी बनाया। जब तीनों बेटे वहां पहुंचे तो सुमित्रा देवी की आंखें भर आईं। उन्होंने अपने तीनों बेटों का वहां मौजूद अपने अधिकारियों से परिचय कराया तो सबके सब दंग रह गए। सुमित्रा देवी के दूसरे सहयोगी सफाईकर्मियों को उन पर गर्व महसूस हो रहा था।

हाथ में प्लास्टर था, फिर भी मोर्चे पर चले गए थे मेजर सोमनाथ शर्मा- जानिए देश के पहले परमवीर चक्र विजता की वीरता की कहानी

मेजर सोमनाथ शर्मा महज 24 साल की उम्र में कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों से लड़ते हुए 3 नवंबर 1947 को शहीद हो गए थे।


परम वीर चक्र भारत का सबसे बड़ा सैन्य पुरस्कार है। आजाद भारत के इतिहास में अभी तक केवल 22 लोगों को ये पुरस्कार मिला है। भारत का पहला परमवीर चक्र 1950 में दिया गया। पहला परम वीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा (21 जनवरी 1923- 3 नवंबर 1947) को मरणोपरांत प्रदान किया गया था। मेजर शर्मा महज 24 साल की उम्र में देश के लिए कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठियों से लड़ते हुए 3 नवंबर 1947 को शहीद हो गए थे। आजादी के ठीक बाद पाकिस्तानी सैनिकों के निर्देशन में कबायली लश्करों ने कश्मीर में घुसपैठ कर दी थी। हमलावर मोर्टार, लाइट मशीनगन और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस थे। मेजर शर्मा बडगाम में एक पोस्ट पर तैनात थे। शहीद होने से पहले मेजर शर्मा ने ब्रिगेड मुख्यालय को भेजे आखिरी संदेश में उन्होंने कहा था, “दुश्मन हमसे केवल 50 गज दूर है। दुश्मन की संख्या हमसे बहुत ज्यादा है। हमारे ऊपर तेज हमला हो रहा है। लेकिन जब तक हमारा एक भी सैनिक जिंदा है और हमारी बंदूक में एक भी गोली है हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे।

जब कश्मीर पर पाकिस्तानियों ने हमला किया तो 4 कुमाऊं बटालियन के मेजर सोमनाथ शर्मा के दाहिने हाथ एक हॉकी मैच में फ्रैक्चर हो गया था जिसके कारण उस पर प्लास्टर लगा था। डॉक्टर ने उन्हें आराम करने के लिए कहा था लेकिन वो जिद करके मोर्चे पर गए। मेजर शर्मा और उनके साथ श्रीनगर एयरफील्ड से कुछ किलोमीटर दूर बडगाम में एक पोस्ट पर तैनात थे। हमले के दिन से पहले सेना की तीन कंपनियों ने बडगाम की पैट्रोलिंग की थी। जब वहां दुश्मन की कोई गतिविधि का सूत्र नहीं मिला तो तीनों कंपनियों को वापस भेज दिया गया था। केवल मेजर शर्मा की कंपनी को वहां दोपहर  3 बजे तक रुकने के लिए कहा गया। उन्हें औचक हमला होने की स्थिति में हमलावरों को आगे बढ़ने से रोकना था। मेजर शर्मा की कंपनी में कुल 50 जवान थे। हमलावरों की संख्या भारतीय सेना के अनुमान से बहुत ज्यादा थी। दोपहर के करीब 2.30 बजे 500 से ज्यादा पाकिस्तानी हमलावरों ने बडगाम पोस्ट के तीन तरफ से हमला किया। हमलावरों की भारी संख्या देखकर उन्होंने अपने ऊपर के अधिकारियों को मदद भेजने का संदेश दे दिया। लेकिन मदद आने तक दुश्मनों को रोकना जरूरी था क्योंकि अगर उन्हें रोका न जाता तो हमलावर श्रीनगर एयरफील्ड पर कब्जा कर सकते थे जो शेष भारत से कश्मीर घाटी के हवाई संपर्क का एक मात्र जरिया था।

मेजर शर्मा दुश्मन की गोलियों की बौछार के बीच खुले मैदान में आकर सैनिकों के अलग-अलग पोस्ट पर जाकर सटीक गोलीबारी के लिए निर्देश देते रहे। उन्होंने हवाई हमले के लिए दुश्मन की शिनाख्त करने के लिए गोलियों की बौछार के बीच कपड़े की पट्टी बिछाई। वो आखिर अपने बाएं हाथ से सैनिकों की बंदूकों में मैगजीन लगाते रहे। मेजर शर्मा आगे बढ़कर अपने साथियों का नेतृत्व करते रहे है। उनके पास पड़े हुए गोला-बारूद में एक मोर्टार का गोला आकर गिरा और धमाके के चपेट में मेजर शर्मा भी आ गए। उनकी शहादत से प्रेरित उनके साथी दुश्मनों का मुंहतोड़ जवाब देते रहे थे।

फेसबुक में महिला कॉन्स्टेबल के सात लाख फॉलोवर्स

 

गरीबों की है मददगार ,मानवता की मिसाल

रायपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस की महिला कॉन्सटेबल स्मिता टांडी इन दिनों फेसबुक पर छाई हुई हैं। स्मिता जरुरतमंद लोगों तक पहुंचती हैं और फेसबुक के जरिए उनकी मदद करती हैं। फेसबुक पर उनकी पापुलैरिटी किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं है। फेसबुक पर उनके 7 लाख के करीब फॉलोवर्स है जो कि उन्होंने 20 महीने के अंदर बनाए हैं। उनसे ज्यादा फॉलोवर्स सिर्फ राज्य के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के है। जानकर हैरानी कि इस यंग ऑफिसर ने बिना किसी सपोर्ट के लोगों की मदद करके यह मुकाम हासिल किया है। स्मिता अपनी पोस्ट के जरिए जरुरतमंद की समस्या को फेसबुक पर रखती है और लोगों से मदद की अपील करती हैं। उन्होंने पर्सनल ट्रेजडी का शिकार होने के बाद यह अकाउंट बनाया।


स्मिता बताती है कि जब 2013 में वह पुलिस की ट्रेनिंग ले रही थी, उसी दौरान उनके पिता शिव कुमार टांडी बीमार हो गए और उनके इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। वह खुद पुलिस में कॉन्सटेबल थे लेकिन 2007 में दुर्घटना के बाद उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया था। एक प्राइवेट अस्पताल में अचानक उनकी मौत हो गई। तब मैंने सोचा कि पैसों की कमी के कारण हजारों लोगों की मौत हो जाती है और मैंने उनकी मदद करने का फैसला किया।
2014 में अपने दोस्तों के साथ मिलकर टांडी ने फेसबुक ग्रुप बनाया, जहां उन्होंने मरीजों की फोटो डालते हुए वित्तीय मदद देने की लोगों से अपील की थी। सिर्फ फेसबुक पेज से ही नहीं स्मिता ने सरकारी योजनाओं के जरिए भी पैसा इकट्ठा किया, जिनके बारे में लोगों को ज्यादा पता नहीं होता है। उन्होंने बताया कि मैंने लोगों की समस्या का पता लगाकर फेसबुक पर लाना शुरू किया। शुरू में लोग मेरी पोस्ट पर रिस्पॉन्ड नहीं भी करते थे लेकिन एक महीने बाद लोगों ने पैसे दान करना शुरू किया। मेरा मानना है कि लोगों को विश्वास हआ कि मैं फर्जी नहीं हूं और उन्होंने मेरा विश्वास किया।

स्मिता ने बताया कि आसपास के इलाके में जब उन्हें पता चलता है कि किसी को मदद की जरुरत होती है तो वह खुद वहां पहुंचती है और सारी जानकारी एकत्र करके और उसकी पुष्टि करती हैं। इसके बाद फेसबुक पर मदद की अपील करते हुए पोस्ट करती हैं। वह अस्पताल का बिल चुकाने में 25 लोगों की मदद कर चुकीं हैं और फेसबुक के जरिए मदद करने के संबंध में उनका कहना है कि उन्हें संख्या तो याद नहीं लेकिन यह सौ तो होगी ही। स्मिता के कामों में बारे में उनके सीनियर अधिकारियों को पता है, इसके चलते उन्हें भिलाई वुमेन हेल्पलाइन के सोशल मीडिया कंप्लेंट सेल में रखा गया है।

(चित्र स्मिता टांडी के फेसबुक वाल से )

स्मिता ने बताया कि आसपास के इलाके में जब उन्हें पता चलता है कि किसी को मदद की जरुरत होती है तो वह खुद वहां पहुंचती है और सारी जानकारी एकत्र करके और उसकी पुष्टि करती हैं। इसके बाद फेसबुक पर मदद की अपील करते हुए पोस्ट करती हैं। वह अस्पताल का बिल चुकाने में 25 लोगों की मदद कर चुकीं हैं और फेसबुक के जरिए मदद करने के संबंध में उनका कहना है कि उन्हें संख्या तो याद नहीं लेकिन यह सौ तो होगी ही। स्मिता के कामों में बारे में उनके सीनियर अधिकारियों को पता है, इसके चलते उन्हें भिलाई वुमेन हेल्पलाइन के सोशल मीडिया कंप्लेंट सेल में रखा गया है।