राजधानी

रेरा में 31 मई तक पंजीयन नहीं करवाने वाले प्रमोटरों पर लगेगी पेनाल्टी

रायपुर-  छत्तीसगढ़ भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) द्वारा रियल एस्टेट परियोजनाओं के उन प्रमोटरों पर निर्धारित पेनाल्टी लगाने का निर्णय लिया है, जिन्होंने पिछले महीने की 31 तारीख तक रेरा में अपना पंजीयन नहीं करवाया है। 
भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण के रजिस्ट्रार  अजय अग्रवाल से प्राप्त जानकारी के अनुसार भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2016 की धारा 3 (1) में प्रमोटर्स द्वारा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को रेरा में पंजीकृत किए बिना यथास्थिति, किसी प्लाट, अपार्टमेंट या भवन या उसके किसी भाग को किसी भी रीति में विज्ञापित, विपणित, बुकिंग, विक्रय या विक्रय का आॅफर नहीं करने संबंधी प्रावधान वर्णित हैं। इसके परन्तुक मेें आॅनगोईंग प्रोजेक्ट्स के रिजस्ट्रेशन हेतु अधिनियम के प्रारंभ की तिथि से तीन मास की अवधि अर्थात 31 जुलाई 2017 के भीतर प्रमोटर्स द्वारा प्राधिकरण को आवेदन प्रस्तुत करने संबंधी प्रावधान भी स्पष्ट वर्णित हैं।

       उन्होंने बताया कि इसके तहत छत्तीसगढ़ भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण की स्थापना के पूर्व छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालयों में आवेदन प्रस्तुत करने हेतु वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की गई थी। छत्तीसगढ़ रेरा द्वारा भी अपनी स्थापना के तुरंत पश्चात फरवरी 2018 से रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई प्रारंभ कर इस हेतु 31 मई 2018 तक की समय-सीमा प्रमोटर्स को प्रदान की गई थी। वस्तुतः प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन हेतु प्रमोटर्स को पर्याप्त समयावधि प्रदान करने के फलस्वरूप उक्त निर्धारित समयावधि में रेरा द्वारा वृद्धि नहीं की जा रहीं है।

       संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश छत्तीसगढ़ से विगत वर्षों में स्वीकृत सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्टस की विकास अनुज्ञा संबंधी संकलित जानकारी से प्राधिकरण के संज्ञान में यह आया कि राज्य में अभी भी बड़ी संख्या में आॅनगोईंग प्रोजेक्ट्स रजिस्ट्रेशन हेतु शेष हैं, जिनमें अधिनियम की धारा 3 (1) के परन्तुक के प्रावधानों के उल्लंघन के फलस्वरूप धारा 59 के प्रावधान आकर्षित होते हैं। अतः उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखकर प्राधिकरण द्वारा 31 मई 2018 के पश्चात 30 जून 2018 तक की अवधि में रजिस्ट्रेशन हेतु स्वस्फूर्त प्रस्तुत आॅनगोईंग प्रोजेक्ट्स में निर्धारित पंजीयन शुल्क के साथ अधिनियम की धारा 59 (1) के तहत पंजीयन शुल्क के 50 प्रतिशत राशि के बराबर शास्ति निर्धारित की गई है, जो न्यूनतम रूपए 10 हजार से कम नहीं होगी

छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल, TI और SI रैंक के अफसरों के तबादले की पूरी सूची

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में थोक में तबादले हुए हैं। पुलिस मुख्यालय पुलिस निरीक्षकों ( टीआई) का तबादला आदेश जारी किया है। जिसमें टीआई के रुप में पदोन्नत हुए अफसरों को नई पोस्टिंग दी गई।

  अमर सिंह कोमरे ( निरीक्षक) नारायणपुर से कांकेर

तेजनाथ सिंह (निरीक्षक) सूरजपुर से कोरिया
अनूप वाजपेयी (निरीक्षक) रायपुर से महासमुंद
श्याम कुमार सिदार (निरीक्षक) कोरबा से बिलासपुर
अब्दुल कादिर खान (निरीक्षक) बस्तर से रायगढ़
रामचरण लहरी (निरीक्षक) बस्तर से रायगढ़
दुर्गेश रावटे (निरीक्षक) धमतरी से कोरबा
सूरज कुमार ध्रुव (निरीक्षक) राजनांदगांव से दुर्ग

अंबर सिंह भारद्वाज (निरीक्षक) कबीरधाम से कांकेर

प्रदीप सोरी (निरीक्षक) कबीरधाम से राजनांदगांव
भरतलाल बरेठ (निरीक्षक) राजनांदगांव से कबीरधाम
सोनल ग्वाला (निरीक्षक) राजनांदगांव से रायपुर
संतराम सोनी (निरीक्षक) राजनांदगांव से कबीरधाम
मुकेश यादव (निरीक्षक) राजनांदगांव से कबीरधाम
मनोज कुमार प्रजापति (निरीक्षक) बलौदाबाजार से सरगुजा
राजेश कुमार साहू (निरीक्षक) बलौदाबाजार से राजनांदगांव
वेदवंती दरियो (निरीक्षक) धमतरी से गरियाबंद
प्रमोद कुमार किस्फोट्टो (निरीक्षक) कोरबा से बिलासपुर
हीरसिंह नेताम (निरीक्षक) रायपुर से धमतरी
सनतकुमार सोनवानी (निरीक्षक) राजनांदगांव से कबीरधाम
याकूब मेनन (निरीक्षक) राजनांदगांव से रायपुर

स्वास्थ्य मंत्री ने ब्लड बैंकों में गुणवत्तापूर्ण रक्त उपलब्धता और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा पद्धति पर कार्यशाला का शुभारंभ किया

 रायपुर, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री  अजय चन्द्राकर ने आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में ’शासकीय एवं निजी ब्लड बैंकों में गुणवत्तापूर्ण व सुरक्षित रक्त उपलब्धता तथा निरन्तर चिकित्सा शिक्षा की अत्याधुनिक पद्धति’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ किया।
 शुभारंभ सत्र को सम्बोधित करते हुए  चन्द्राकार ने कहा कि प्रदेशवासियों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है और इसके लिए हम वचनबद्ध है। जन सामान्य को सुरक्षित रक्त पहुंचाने के लिए सतत प्रयास किया रहा है।  
चंद्राकर ने बताया कि वर्ष 2003 में केवल सात की संख्या में ब्लड बैंक उपलब्ध थे, जो बढ़कर अब 25 हो गए हैं। राज्य में निजी क्षेत्रों में ब्लड बैंकों की संख्या 52 है, जहां से लोगों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है। चंद्राकर ने कहा कि राज्य स्तर के स्वास्थ्य संस्थाओं को सतत रूप से आयुर्विज्ञान संस्थान से समन्वय बनाकर लोगोें के स्वास्थ्य के लिए बेहतर काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में निजी क्षेत्र के लोग भी आम आदमी तक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा रहे हैं। निजी क्षेत्रों में भी नीति-निर्देश प्रोटोकाल के अनुरूप होगा, तो आम आदमी को भी सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने कहा कि संसाधन की कमी के बावजूद बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करने वाले ही श्रेष्ठ माने जाते हैं।  चंद्राकर ने कार्यशाला की सफलता के लिए आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
       कार्यशाला को समाज कल्याण विभाग के सचिव  आर प्रसन्ना ने भी सम्बोधित किया। प्रसन्ना ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भी प्रदेश के कुछ जिलों में ब्लड की उपलब्धता तो पर्याप्त है, लेकिन पूरे राज्य में ब्लड व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने ब्लड बैंकों के लिए अलग से पॉलिसी बनाने पर बल दिया। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्रीमती रानू साहू ने भी कार्यशाला को सम्बोधित किया। श्रीमती साहू ने कहा कि अत्याधुनिक नेट (न्यूक्लियर एसीड टेस्ट) मशीन के माध्यम से ब्लड की जांच एम्स व राज्य शासन के प्रयास से किया जाना आवश्यक है। इस दिशा में विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। हर समय नये-नये टेक्नॉलाजी की मशीनें बन रही है। इसी के साथ हमें चलने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को और भी सुरक्षित रक्त मिल सके। कार्यशाला में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रण श्री पी.वी.नरसिम्हा राव, विशेष सचिव स्वास्थ्य श्री ए.पी. त्रिपाठी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक (एम्स) डॉ. नितिन नागरकर, अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉ. एस.के. बिंझवार, महानिदेशक सिकलसेल इंस्टीट्यूट डॉ. अरविन्द नेरल, एम्स अधीक्षक डॉ. अजय दानी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

पर्यावरण दिवस के अवसर पर रायपुर रेल मंडल (डीआरएम ऑफिस) में वृक्षारोपण के साथ विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

रायपुर रायपुर रेल मंडल में आज5 जून पर्यावरण दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमें प्रातः 7:00 बजे प्रभात फेरी निकाली गई जो केंद्रीय विद्यालय डब्ल्यू आर एस कॉलोनी सेक्रेसा मैदान से शुरू होकर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय रायपुर तक आई तत्पश्चात मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण किया गया दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे स्काउट गाइड द्वारा पर्यावरण संरक्षण के ऊपर नुक्कड़ नाटक उल्लास भवन में सेमिनार का आयोजन किया जाएगा जिसमें मंडल रेल प्रबंधक कौसल किशोर सहित अपर मंडल रेल प्रबंधक एवं रायपुर रेल मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी निरीक्षक सुपरवाइजर सभी भाग ले रहे है

स्वास्थ्य मंत्री चंद्राकर आज ब्लड बैंकों में गुणवत्तापूर्ण रक्त उपलब्धता और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा पद्धति संबंधी कार्यशाला का करेंगे शुभारंभ

 रायपुर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  अजय चंद्राकर  11 बजे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में ’शासकीय एवं निजी ब्लड बैंकों में गुणवत्तापूर्ण व सुरक्षित रक्त उपलब्धता तथा निरन्तर चिकित्सा शिक्षा की अत्याधुनिक पद्धति’ विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे।
    इस अवसर पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा स्वास्थ्य विभाग (लिंक) की प्रमुख सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, विशेष सचिव समाज कल्याण श्री आर. प्रसन्ना, खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रण श्री पी.वी.नरसिम्हा राव, विशेष सचिव स्वास्थ्य  ए.पी. त्रिपाठी, संयुक्त सचिव एस.के.जैन, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रानू साहू तथा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक (एम्स) डॉ. नितिन नागरकर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

 

राज्य के सभी नगरीय निकायों में बहुत जल्द शुरू होगा शहरी आजीविका मिशन -अमर अग्रवाल

रायपुर, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री   अमर अग्रवाल ने कहा है कि राज्य के बचे 91 नगरीय निकायों में भी राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना (एन.यू.एल.एम.) बहुत जल्द शुरू किए जाएंगे। फिलहाल राज्य के कुल 168 निकायों में से 77 निकायांे में यह योजना सफलता पूर्वक संचालित हो रही है। योजना के अंतर्गत शहरी इलाकों की लगभग 2 लाख 55 हजार महिलाएं 22 हजार महिला स्व-सहायता समूह के रूप में संगठित होकर आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। श्री अग्रवाल ने आज राजधानी रायपुर में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला सह सम्मान समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। नगरीय प्रशासन मंत्री ने समारोह में एन.यू.एल.एम. योजना में बेहतरीन कार्यों के लिए 67 बैंक अधिकारियों, मिशन प्रबंधकों  और वरिष्ठ अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि एन.यू.एल.एम. योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2017-18 में छत्तीसगढ़ राज्य को देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। श्री अग्रवाल ने इस अवसर पर सूडा द्वारा प्रकाशित दो पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, संचालक   निरंजन दास, आर.बी.आई. के उप महाप्रबंधक   नीलाभ झा, राज्य स्तरीय बैंकर्स सलाहकार समिति के संयोजक  ब्रम्हसिंह और सूडा के अतिरिक्त सी.ई.ओ.  अभिनव अग्रवाल भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
       
 नगरीय प्रशासन मंत्री ने कार्यशाला सह सम्मान समारोह में बेहतरीन काम-काज के लिए लगभग 67 अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया। इनमें राज्य के विभिन्न बैंकों के प्रबंधक, लीड बैंक मैनेजर, आजीविका मिशन के अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने व्यक्तिगत ऋण के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रथम पुरस्कार -एक्सिस बैंक और दूसरा तथा तीसरा पुरस्कार क्रमशः यूको बैंक और कैनरा बैंक को मिला है। समूह ऋण श्रेणी में प्रथम पुरस्कार श्री एच.डी.एफ.सी. बैंक, दूसरा पुरस्कार एक्सिस बैंक और तीसरा पुरस्कार छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, बैंक लिंकेज के अंतर्गत बैंक ऑफ इण्डिया को प्रथम,देना बैंक को दूसरा और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक को तीसरा पुरस्कार प्रदान किया गया है। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक वर्ग के अंतर्गत व्यक्तिगत ऋण के अंतर्गत शत-प्रतिशत लक्ष्य पूर्ति के लिए प्रथम पुरस्कार जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक बेमेतरा, दूसरा मंुगेली और तीसरा कोरबा को मिला है। समूह ऋण के अंतर्गत प्रथम एल.डी.एम. कोण्डागांव, दूसरा बालोद और तीसरा पुरस्कार गरियाबंद को दिया गया है। बैंक लिंकेज के अंतर्गत शतप्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रथम पुरस्कार एल.डी.एम. गरियाबंद, दूसरा पुरस्कार जशपुरनगर एल.डी.एम. और तीसरा पुरस्कार एलडीएम सूरजपुर को प्राप्त हुआ है।
    नगरीय निकायों के अंतर्गत स्वरोजगार कार्यक्रमों के अंतर्गत शतप्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के लिए नगर निगम बिलासपुर, नगर निगम कोरबा, नगर निगम जगदलपुर, नगरपालिका परिषद जांजगीर नैला, नगरपालिका जशपुर नगर और नगरपालिका परिषद कोण्डागांव को दिया गया है। उत्कृष्ट मिशन प्रबंधक के रूप में बिलासपुर की   प्रज्ञा पोरवाल, कोरबा निगम के  मनीष भोई, रायपुर निगम की सुश्री रीमा शुक्ला, राजनांदगांव निगम की सुषमा मिश्रा आदि को पुरस्कृत किया गया है। कार्यशाला को नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, आर.बी.आई. के उप महाप्रबंधक   नीलाभ झा, संचालक निरंजन दास और राज्य स्तरीय बैंक सलाहकार समिति के संयोजक  ब्रम्हसिंह ने भी सम्बोधित किया। 

प्रदेष में 800 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर 15 अगस्त तक तैयारी हेतु एक दिवसीय कार्यषाला संपन्न

वर्ष 2022 तक सभी उप-स्वास्थ्य केन्द्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बनेंगे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर 

रायपुर-  प्रदेष में इस वर्ष 800 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किये जायेंगे। स्वास्थ्य संचालक रानू साहू ने कहा कि वर्ष 2022 तक सभी उप स्वास्थ्य केन्द्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को आयुष्मान योजना के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में क्रियान्वित किया जायेगा । उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का शुभारंभ किया गया था । राज्य शासन द्वारा निर्णय लेते हुए वर्ष 2018 में 650 चयनित उप स्वास्थ्य केन्द्रों तथा 150 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों कुल 800 केन्द्रों को 15 अगस्त, 2018 तक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में उन्नयन करने का निर्णय लिया गया । इस हेतु संस्थाओं का गेप एनालिसिस कर उसकी पूर्ति की जायेगी । उक्त बातें आज स्वास्थ्य संचालक ने एक दिवसीय कार्यषाला में कही । इस अवसर पर मिषन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन डाॅ. सर्वेष्वर नरेन्द्र भुरे ने स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ होने वाले स्टाॅफ नर्सों के लिये इग्नू द्वारा ब्रिज कोर्स प्रषिक्षण हेतु चयन आदि मापदंडों की जानकारी दी गई । उन्होंने इस सेंटर में सभी मरीजों का इलेक्ट्राॅनिक स्वास्थ्य डाटा का निर्माण किया जायेगा ।
 इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के विषेष सचिव श्री ए.पी. त्रिपाठी, राज्य कार्यक्रम अधिकारी डाॅ. कमलेष जैन, कार्यकारी संचालक राज्य स्वास्थ्य संसाधन केन्द्र डाॅ. प्रबीर चटर्जी, जपाइगों के प्रमुख डाॅ. विवेक यादव तथा 6 जिले बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, कोरबा, कांकेर तथा बीजापुर के सिविल सर्जन व हाॅस्पिटल कंसलटेंट, सभी जिलों के जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन, गैर संचारी रोग के जिला नोडल अधिकारी सहित राज्य स्तर के उप संचालक व स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे । 
उल्लेख है कि आयुष्मान भारत - हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा 6 माह का ब्रिज कोर्स सर्टिफिकेट इन कम्यूनिटी हेल्थ फार नर्सेस पाठ्यक्रम इग्नू द्वारा कराया जा रहा है । यह पाठ्यक्रम उप स्वास्थ्य केन्द्रों को हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर के रुप में विकसित करते हुए समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवायें प्रदान किया जाएगा। बीमारियों से बचाव एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता लाना भी शामिल किया गया है। पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेने पर उप स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ होकर समग्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाय हेतु ’’मिड लेवल सर्विस प्रोवाईडर’’ के रुप में सेवाएं देंगे। 

दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए स्वास्थ्य मंत्री 4 न्यू अत्याधुनिक मोबाईल मेडिकल यूनिट का करेंगे शुभारंभ

रायपुर -  दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा ग्रामीणों को नजदीक में उपलब्ध कराने के लिये 4 और नये अत्याधुनिक मोबाईल मेडिकल यूनिट प्रारंभ किया जा रहा है । स्वास्थ्य संचालक ने बताया कि यह मोबाईल यूनिट रायपुर व बीरगांव, चरोदा तथा कुरूद-धमतरी जिले में संचालित किया जावेगा । उन्होंने बताया कि 4 मोबाईल मेडिकल यूनिट का शुभारंभ 2 जून, 2018 को शाम 5 बजे स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर अपने निवास स्थान से करेंगे । इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित होंगे । 
उन्होंने बताया कि शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 11 शहरों रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा, धमतरी, जगदलपुर, अंबिकापुर व धमतरी में कुल 12 मोबाईल मेडिकल यूनिट सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है । मलिन बस्तियों, शहरी क्षेत्रों से लगे झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोग, ईंट भट्टों व निर्माणाधीन क्षेत्रों में काम करने वाले लोग, औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूर वर्ग के लोग, रिक्षा चालक, घुमतू बच्चों आदि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्राथमिक उपचार एवं रोकथाम किये जायेंगे । प्रत्येक चलित चिकित्सा इकाई में एक-एक डाॅक्टर, एएनएम, लैब टेक्निषियन व फार्मासिस्ट होंगे । 
प्राथमिक उपचार सहित मलेरिया जांच, चर्म रोग, सिकल सेल जांच, हिमोग्लोबिन जांच, टांका की सुविधा, कुत्ता कांटना, सर्पदंष के ईलाज की व्यवस्था होगी । ऐसे रोगों का प्राथमिक उपचार कर उच्च स्वास्थ्य सुविधा हेतु नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्रों में रेफर किया जायेगा । मोबाईल मेडिकल यूनिट में मातृत्व स्वास्थ्य व षिषु स्वास्थ्य की समुचित व्यवस्था जिसमें ए.एन.सी. के लिये हिमोग्लोबिन, सुगर, पेषाब जांच तथा जांच के लिये रेफर की व्यवस्था होगी । कुपोषित बच्चों की जांच व ईलाज, परिवार नियोजन के अंतर्गत गर्भनिरोधक, ओरल काॅन्ट्रासेटिव तथा इमरजेंसी काॅन्ट्रासेटिव व आईयूडी लगाने की व्यवस्था होगी । गैर संचारी रोग मधुमेह, ब्लड प्रेसर, कैंसर इत्यादि रोगों की प्रारंभिक लक्षणों की जांच कर प्रारंभिक उपचार की सुविधा दी जाएगी । वर्तमान में 11 शहरों के 12 मोबाईल मेडिकल यूनिट के सफलतापूर्वक संचालन के बाद अब इसकी संख्या बढ़कर 17 हो गई । जिसमें 1 नया मोबाईल मेडिकल यूनिट कवर्धा जिले में संचालित किया जा रहा है । 

 

हड़ताल पर बैठी नर्सों को पुलिस ने किया गिरफ्तार सेंट्रल जेल में बंद नर्सों को दूसरे जिलों में भेजने की तैयारी

रायपुर। अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठी नर्सों की मुश्किल बढ़ गई है। हड़ताल पर बैठी नर्सों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद नर्स काम पर लौटने को तैयार नहीं है। इधर, हड़ताल के कारण राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।
नर्सों का कहना है कि वो यहां से अपनी मांगें पूरी होने तक नहीं हटेंगी उन्होंने चोरी नहीं की और कुछ गलत काम नहीं किया है। ऐसे में वो चोरों की तरह छिपकर नहीं भागें गी। सब एक साथ हैं। वो जेल भरो आंदोलन करेंगी। जेल में भी आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस ने राम मंदिर के पास से उन्हें पकड़ा है। पुलिस ने पूरे इलाके में धारा 144 लगा दी है। इसके बाद किसी तरह के जुलूस, प्रदर्शन और धरने पर प्रतिबंध लग गया है। नर्सों को धरना स्थल तक जाने से रोकने के लिए बैरिगेट लगा दिए गए हैं।
आपको बता दे की राज्य सरकार की ओर से 28 मई की रात हड़ताली नर्सों पर एस्मा लगा दिया गया था। इसके बाद सभी नर्सों को काम पर लौटने के लिए कहा गया। इसमें से कुछ नर्सें तो काम पर चली गईं, लेकिन ज्यादातर ने हटने से मना कर दिया। इसके बाद सीएमएचओ की ओर से गुरूवार को नर्सों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी। आजाद नगर थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर में पांच नर्सें नामजद और अन्य के खिलाफ थी।
 इधर जेल में बंद नर्सों को दूसरे जिलों में भेजने की प्रशासनिक तैयारी तेज हो गई है. सेंट्रल जेल पहुँचकर विधायक सत्यनारायण शर्मा और महापौर प्रमोद दुबे जमकर विरोध कर रहे हैं. बस्तर जिला अध्यक्ष प्रार्थना राजदास ने कहा कि वे जहाँ भी रहेंगी साथ में रहेंगी. केंद्रीय जेल में अगर महिला कैदियों को रखने की ज्यादा क्षमता नहीं है तो ज्यादा गिरफ्तारियां क्यों की गई है? वे किसी भी अन्य जिला जाने को तैयार नहीं है, उनके साथ पुलिस प्रशासन गलत कर रही है.

 

खाने योग्य बर्फ बनाने के लिए इंडिगो कार्मिंन का उपयोग अनिवार्य : खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम का पालन नहीं करने पर होगी कड़ी कार्रवाई

रायपुर अधिकांशतः जल्द से जल्द नष्ट होने वाले खाद्य पदार्थो के संरक्षण, भंडारण, परिवहन आदि के लिए अखाद्य बर्फ का भी इस्तेमाल किया जाता है, इससे खाद्य सामग्री दूषित हो जाती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण में नई दिल्ली  द्वारा खाद्य एवं अखाद्य बर्फ बनाने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया गया है।
    सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन ने खाद्य बर्फ बनाने के संबंध में अधिनियम जारी किया गया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम 2011 के द्वारा खाद्य बर्फ का मानक स्तर निर्धारित किया गया है। बर्फ बनाने के लिए शुद्ध पीने के पानी का उपयोग किया जाना चाहिए। खाद्य बर्फ बनाते समय इंडिगो कार्मिंग या ब्रिलिएंट ब्लू रंग का 10 पी.पी.एम. तक करना अनिवार्य है। इससे नीला रंग दिखने वाले अखाद्य बर्फ एवं रंगहीन दिखने वाले खाद्य बर्फ को पहचाने में आसानी होगी। शासन द्वारा निर्धारित नियम का पालन नहीं करने पर दोषियों के विरूध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे खाद्य कारोबारकर्ता जो अखाद्य या खाद्य बर्फ का निर्माण, भण्डारण या परिवहन करते समय इंडिगो कार्मिंन या ब्रिलिएंट ब्लू रंग का उपयोग नहीं करते हैं, तो खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 नियम एवं विनियम 2011 में निहित प्रावधान के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।  

रोज़ 80,000 से ज्यादा सैनेटरी नैपकिंस कचरे में जाकर पर्यावरण में ज़हर फैलाते हैं अपनाइये बायो डिग्रेडेबल, रिसाइकल्ड और रियूजेबल पैड्स

  रायपुर मासिक चक्र के दौरान दुनियाभर (देशभर) की महिलाओं और युवतियों के सामने आने वाली चुनौतियों के संदर्भ में जागरूकता फैलाने के क्रम में रायपुर ऑब्सटेट्रिक्स तथा गायनोकोलॉजी सोसायटी ( स्त्री एवं प्रसूति रोग संस्था) द्वारा 'मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे' 28 मई को उपलक्ष्य में आज 'रायपुर प्रेस क्लब' में एक विशेष आयोजन किया।
 इसके तहत  प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन कर महिलाओं/युवतियों को जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव में आने वाली चुनौतियों के समाधान के बारे में बताया गया. आयोजन के अंतर्गत स्त्री एवं प्रसूति रोग संस्था की संरक्षक डॉ. आभा सिंह के सक्षम मार्गदर्शन के साथ ही अध्यक्ष डॉ. आशा जैन, सचिव डॉ. तब्बसुम दल्ला, कोषाध्यक्ष डॉ. मोनिका पाठक, उपाध्यक्ष डॉ. आभा डेहरवाल, संयुक्त सचिव डॉ. नीना सक्सेना, क्लिनिकल सचिव डॉ. अविनाशी कुजूर तथा डॉ. अनुराधा चौधरी, तथा संयुक्त कोषाध्यक्ष डॉ. गीता अग्रवाल जैसे विशेषज्ञों ने आने वाले वर्ष के जागरूकता अभियानों की कार्ययोजनाओं के बारे में विस्तार से बताया।

 आरओजीएस अध्यक्ष डॉ. आशा जैन ने बताया की औसतन एक आम महिला अपने जीवन के 35-40 वर्ष रक्तस्राव यानी मासिक चक्र के साथ गुजरती है जिसका मतलब है वह 420 पीरियड्स का सामना करती है. महीने के 5 दिनों का मतलब है प्रतिवर्ष 2 महीने जो कि असल में पूरे जीवन के 7 बरस होते हैं. इस दौरान महिलाएं डिस्पोज़ेबल सैनेटरी पैड्स या टैम्पून्स का उपयोग करती हैं. ये नैपकिंस प्लास्टिक और कैमिकल के बने होते हैं जो संक्रमण और रैशेस के साथ ही अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की आशंका को बढ़ा देते हैं. ये रसायनों से बने हुए सैनेटरी पैड्स नॉन-बायोडिग्रेडेबल यानी प्राकृतिक तरीके से नष्ट न होने वाले होते हैं, न तो इन्हें रीसायकल किया जा सकता है न ही रीयूज। ये पानी में जाकर फूल जाते हैं और ड्रेन (निकासी के स्थानों) में रुकावट डालते हैं.इसके कारण पर्यावरण के लिए कई सारे जोखिम पैदा हो जाते हैं. अगर इन पैड्स को जलाया जाए तो इनसे जहरीला रसायनों वाला धुआं निकलता है. केवल यही नहीं, मल मार्ग के संक्रमण (प्राइवेट पार्ट इंफेक्शन) से ग्रसित एक तिहाई महिलाओं में संक्रमण का कारण सैनेटरी नैपकिंस होते हैं.'

आरओजीएस की सचिव डॉ. तब्बसुम दल्ला, ने कहा-'लोगों को अपनी इस मानसिकता में परिवर्तन लाना होगा कि मासिक चक्र के बारे में सार्वजनिक तौर पर बात नहीं कर सकते। साथ ही उन्हें इस प्राकृतिक चक्र को किसी पाप की तरह पेश करने की सोच को भी बदलना होगा। हम महिलाओं को ऐसे रियूजेबल, रिसाइकल तथा बायोडिग्रेडेबल पैड्स का प्रयोग करने के लिए उत्साहित कर रहे हैं जो तुलनात्मक रूप से कम महंगे भी हैं. यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा होगा। यदि इन पैड्स को ठंडे पानी में धोया जाए तो दाग लगने के डर से भी छुटकारा पाया जा सकता है.'

आरओजीएस की कोषाध्यक्ष डॉ. मोनिका पाठक ने यह घोषणा की कि- 'हमारी संस्था के सदस्यों ने एक जन समिति का गठन किया है जो पूरे वर्ष स्कूल और कॉलेज की लड़कियों के बीच मासिक चक्र में हाइजीन संबंधी जागरूकता के अभियान को चलाएंगी। यह समिति महिलाओं और लड़कियों के लिए उनके मासिक चक्र को साफ़-सफाई के साथ मैनेज करने के महत्व के बारे में प्रमुखता से बताएगी और इस अभियान के दौरान निजता, सुरक्षा तथा स्त्री गौरव का पूरा ध्यान रखा जायेगा। गौरतलब है कि हमारे देश में मासिक चक्र से जुड़े मिथक और झूठे विश्वास न केवल महिलाओं को अलग-थलग रखते हैं बल्कि उन्हें इस चक्र के दौरान सामान्य हाइजीन तथा सैनिटेशन से भी दूर कर देते हैं. यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि निरक्षरता और जानकारी के अभाव में भारत की 88 प्रतिशत महिलाएं सैनेटरी पैड तक से वंचित हैं. इतने बड़े प्रतिशत के साथ, मासिक चक्र के दौरान अनहाइजीनिक विकल्पों जैसे कि गन्दे-फटे कपड़ों, राख, रेत और भूसे या पेड़ों की छाल पर निर्भर रहने वाली महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि प्रचलित मिथकों तथा अंधविश्वास को तोड़ा जाए.'

मई साल का पांचवा महीना होने के नाते उन बहुत महत्वपूर्ण 5 दिनों या दिनों का औसत नंबर (2-7) का प्रतिनिधित्व करता है जितने दिन एक महिला या लड़की प्रत्येक महीने मासिक चक्र के दौर से गुजरती है. 28 नंबर इस पूरे चक्र के औसत दिनों की संख्या को दर्शाता है, इसलिए ही 28 मई को दुनियाभर में मेंस्ट्रुएशन हाइजीन डे' के तौर पर चुना गया है

अजय चन्द्राकर ने जिला अस्पताल में नन्हें बच्चों को ओ.आर.एस. घोल पिलाकर राज्य स्तरीय ‘गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा’ का शुभारंभ किया

रायपुर -  स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री   अजय चन्द्राकर ने आज पंडरी स्थित जिला अस्पताल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नन्हें बच्चों को ओ.आर.एस. घोल पिलाकर राज्य स्तरीय ‘गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा’ का शुभारंभ किया। 
चन्द्राकर ने शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मौसम परिवर्तन के साथ ही अनेक मौसमी बीमारियां सामने आती है। बरसात के मौसम में बच्चों में विशेषकर डायरिया के प्रकरण देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा डायरिया नियंत्रण के लिए मौसम परिवर्तन के पहले ही बीमारियों से नियंत्रण के लिए तैयारी की जा रही है। श्री चन्द्राकर ने विभाग के अधिकारियों- कर्मचारियों से सजगता और तत्परता के साथ काम की अपील की। प्रदेश के सभी अस्पतालों में ओ.आर.टी. कार्नर एवं शिशु पोषण तथा  आहार-व्यवहार कार्नर की व्यवस्था की गई है। जहां कोई भी मरीज के परिजन निःशुल्क ओ.आर.एस. का पैकेट ले सकते है। गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा 09 जून तक चलेगा। इस दौरान 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को ओ.आर.एस. पैकेट का वितरण किया जाएगा।
          कार्यक्रम को स्वास्थ्य विभाग की सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने भी सम्बोधित किया। श्रीमती शर्मा ने कहा कि डायरिया की प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से  गहन डायरिया नियंत्रण  पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इससे प्रदेश में शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। उन्होंने लोगों को ऐसे कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।
        कार्यक्रम में शिशु स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमर सिंह ठाकुर ने बताया कि बच्चों को बार-बार दस्त होने पर तत्काल ओ.आर.एस. का घोल पिलाना चाहिए । बच्चे को  तत्काल चिकित्सक के पास ले जाकर पूर्ण उपचार कराना चाहिए। डॉ. ठाकुर ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने एवं  शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से 9 जून, 2018 तक गहन डायरिया नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस दौरान 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों वाले परिवारों को ओ.आर.एस. पैकेट का वितरण तथा घोल बनाने व उपयोग करने के तरीके बताये जायेंगे । स्वास्थ्य कार्यकर्ता के माध्यम से घोल बनाने की जानकारी दी जाएगी। गहन डायरिया नियंत्रण पखवाडे़ मनाने का मुख्य उद्देश्य पांच साल तक की उम्र के बच्चों की मृत्यु डायरिया के कारण होती है, उसे रोकना है। 
         डायरिया का शीघ्र निदान व उपचार करने से निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों की मृत्यु को कम करने में सबसे अहम भूमिका ओ.आर.एस. घोल तथा जिंक टेबलेट की है। ओ.आर.एस. के साथ-साथ जिंक की गोली लगातार 14 दिनों तक चिकित्सकीय सलाह से देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ग्राम स्वास्थ्य व स्वच्छता पोषण समिति की बैठक में शौचालय के उपयोग, खाना खाने के पहले व शौच से आने के बाद साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोने के तरीके की जानकारी देने जागरूक किया जाएगा। जल जनित बीमारियों व पेयजल स्त्रोतों का शुद्धिकरण करने की जानकारी ग्राम स्तर में प्रदान की जाये। 
डायरिया के लक्षण- विशेषज्ञों ने बताया कि दिन में पांच या अधिक बार पतला दस्त होना डायरिया के प्रमुख लक्षण है। सही समय पर इलाज न करवा पाने पर इससे जान का खतरा हो सकता है। ओ.आर.एस. का घोल डायरिया को दूर करने के लिये सबसे प्रभावशाली उपाय है। पतले दस्त होने से जल की मात्रा अधिक होती है। यह दस्त थोड़े-थोड़े अंतराल में आता है। खाने में असावधानी इसका प्रमुख कारण होता है । डायरिया के तीव्र प्रकोप से पेट के निचले हिस्से में पीड़ा या बैचेनी प्रतीत होती है । पेट मरोड़ना, उल्टी आना, बुखार होना, कमजोरी महसूस करना डायरिया के लक्षण है। डायरिया से कमजोरी व निर्जलीकरण की समस्या पैदा हो जाती है।डायरिया होने से शरीर के अंदर से तरल व खनिज लवण बाहर निकलते हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए ओ.आर.एस. का घोल लेना आवश्यक होता है । 

प्रदेश के विकास में बच्चों की सहभागिता महत्वपूर्ण - प्रभा दुबे

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष प्रभा दुबे ने आज जशपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग ,समाज कल्याण ,शिक्षा ,स्वास्थ्य ,पुलिस एवं श्रम विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जिले में बाल अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन और बच्चों के लिए प्रभावी अधिनियम एवं उनके क्रियान्वयन की समीक्षा की. बैठक में श्रीमती दुबे ने किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो  एक्ट आदि मामलों पर चर्चा करते हुए जिला पुलिस को पॉक्सो पीड़ित को 24 घंटे के अंदर अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति के सामने पेश करने दिए निर्देश दिए. 
 बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में बच्चों की सहभागिता महत्वपूर्ण इसलिए बच्चों को उनके कर्तव्यों और अधिकारों की जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है. इसके लिए शिक्षा सबसे बड़ा माध्यम है.अच्छी शिक्षा बच्चों के व्यक्तित्व की मजबूत नींव बनती है. उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को लिए स्कूलों में बाउंड्रीवाल, सी०सी०टीवी०कैमरा लगाने के निर्देश दिए.  दुबे ने स्कूलों में  प्रार्थना के समय बच्चों को गुड टच बैड टच की जानकारी अनिवार्य करने दिए निर्देश भी दिए. बच्चियों के सहयोग और छेड़छाड़ के मामलों की रोकथाम के लिए स्कूल बसों में महिला कंडक्टर रखने निर्देश दिए .और कहा कि बाल अधिकारों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्यवाही करें .
श्रीमती दुबे ने कहा कि हर बच्चे को और उनके माता पिता को बाल अधिकारों की जानकारी होनी आवश्यक है. इसलिए वाल पेंटिंग और वाल राइटिंग के माध्यम से बाल अधिकार के लिए जागरूकता फैलाएं. श्रीमती दुबे ने जशपुर में बाल देखरेख संस्थाओं निरीक्षण भी किया . निजी स्वयं सेवी संस्थाओं की व्यवस्था पर उन्होंने असंतोष व्यक्त किया और , सुधार लाने के लिए उन्हें 15 दिन का समय दिया और जिला महिला बाल विकास अधिकारी को इसकी रिपोर्ट लेकर आयोग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामले में आयोग किसी भी प्रकार की अनियमितता और लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा. 

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य  दिलीप कौशिक अपर कलेक्टर  आई एम ठाकुर,अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक   उनेजा ख़ातून अंसारी,जिला कार्यक्रम अधिकारी    इग्नेशिया टोप्पो और जिला बाल बाल संरक्षण अधिकारी  चन्द्रशेखर यादव भी उपस्थित थे.

43 करोड़ से निर्माणाधीन स्काईवाक की राजेश मूणत ने ली समीक्षा : स्काईवाक के हर भाग को समय-बद्ध कार्ययोजना बनाकर पूर्ण करने निर्देश

 रायपुर - लोक निर्माण मंत्री  राजेश मूणत ने आज शाम यहां अपने निवास कार्यालय में राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक में सड़कों के ऊपर निर्माणाधीन स्काईवाक की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को स्काईवाक के हर भाग की कार्ययोजना बनाकर उसे समय-बद्ध ढंग से पूर्ण करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।   मूणत ने कहा कि इसके निर्माण में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। श्री मूणत ने अधिकारियों को निर्माणाधीन स्काईवाक के पाइल, पियर्स और सीढ़ी, एस्केलेटर तथा लिफ्ट आदि कार्यों के चिन्हांकित स्थलों में उनके ड्राइंग-डिजाइन के अनुरूप निर्माण के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए। वर्तमान में स्काईवाक में निर्माणाधीन शेष 61 पाईल्स के कार्य को एक माह के भीतर हर हालत में पूर्ण करने के निर्देश दिए। स्काईवॉक के निर्माण का अब तक 42 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है और इसमें 20 करोड़ 94 लाख की राशि व्यय हो चुकी है। 
उल्लेखनीय है कि स्काईवाक का निर्माण राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक में सड़कों के ऊपर फुट ओव्हर ब्रिज के रूप में लगभग 43 करोड़ रूपए की लागत से किया जा रहा है। इसकी लम्बाई एक हजार 400 मीटर लम्बाई है। स्काईवाक में पैदल चलने वाले लोगों की सुविधा के लिए दो लिफ्ट, आठ एस्केलेटर और दस सीढि़यां बनाई जा रही है। इसमें डी.के. अस्पताल के समीप और अम्बेडकर अस्पताल में सड़क की ओर बाउण्ड्रीवाल के समीप लिफ्ट बनाए जाएंगे। इसी तरह तहसील कार्यालय की बाउण्ड्रीवाल के समीप, शहीद स्मारक के समीप और मल्टी लेवल पार्किंग पर एस्केलेटर तथा सीढ़ी का निर्माण होगा। शास्त्री जी की मूर्ति के समीप रेरा कार्यालय के सामने सीढ़ी और केन्द्रीय जेल की ओर बाउण्ड्रीवाल के समीप केवल सीढ़ी बनाए जाएंगे। इसके अलावा कलेक्टोरेट गार्डन में घड़ी चौक की ओर, कलेक्टोरेट गेट के समीप, जिला न्यायालय में सड़क की ओर, मेकाहारा चौक पर बस स्टैण्ड की ओर और अम्बेडकर अस्पताल में सड़क की ओर बाउण्ड्रीवाल के समीप एस्केलेटर तथा सीढ़ी का निर्माण होगा। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के सचिव   सुबोध कुमार सिंह और विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी  अनिल राय सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। 

43 करोड़ से निर्माणाधीन स्काईवाक की राजेश मूणत ने ली समीक्षा : स्काईवाक के हर भाग को समय-बद्ध कार्ययोजना बनाकर पूर्ण करने निर्देश

 रायपुर - लोक निर्माण मंत्री  राजेश मूणत ने आज शाम यहां अपने निवास कार्यालय में राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक में सड़कों के ऊपर निर्माणाधीन स्काईवाक की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों को स्काईवाक के हर भाग की कार्ययोजना बनाकर उसे समय-बद्ध ढंग से पूर्ण करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।   मूणत ने कहा कि इसके निर्माण में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। श्री मूणत ने अधिकारियों को निर्माणाधीन स्काईवाक के पाइल, पियर्स और सीढ़ी, एस्केलेटर तथा लिफ्ट आदि कार्यों के चिन्हांकित स्थलों में उनके ड्राइंग-डिजाइन के अनुरूप निर्माण के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए। वर्तमान में स्काईवाक में निर्माणाधीन शेष 61 पाईल्स के कार्य को एक माह के भीतर हर हालत में पूर्ण करने के निर्देश दिए। स्काईवॉक के निर्माण का अब तक 42 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है और इसमें 20 करोड़ 94 लाख की राशि व्यय हो चुकी है। 
उल्लेखनीय है कि स्काईवाक का निर्माण राजधानी रायपुर के शास्त्री चौक में सड़कों के ऊपर फुट ओव्हर ब्रिज के रूप में लगभग 43 करोड़ रूपए की लागत से किया जा रहा है। इसकी लम्बाई एक हजार 400 मीटर लम्बाई है। स्काईवाक में पैदल चलने वाले लोगों की सुविधा के लिए दो लिफ्ट, आठ एस्केलेटर और दस सीढि़यां बनाई जा रही है। इसमें डी.के. अस्पताल के समीप और अम्बेडकर अस्पताल में सड़क की ओर बाउण्ड्रीवाल के समीप लिफ्ट बनाए जाएंगे। इसी तरह तहसील कार्यालय की बाउण्ड्रीवाल के समीप, शहीद स्मारक के समीप और मल्टी लेवल पार्किंग पर एस्केलेटर तथा सीढ़ी का निर्माण होगा। शास्त्री जी की मूर्ति के समीप रेरा कार्यालय के सामने सीढ़ी और केन्द्रीय जेल की ओर बाउण्ड्रीवाल के समीप केवल सीढ़ी बनाए जाएंगे। इसके अलावा कलेक्टोरेट गार्डन में घड़ी चौक की ओर, कलेक्टोरेट गेट के समीप, जिला न्यायालय में सड़क की ओर, मेकाहारा चौक पर बस स्टैण्ड की ओर और अम्बेडकर अस्पताल में सड़क की ओर बाउण्ड्रीवाल के समीप एस्केलेटर तथा सीढ़ी का निर्माण होगा। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के सचिव   सुबोध कुमार सिंह और विशेष कर्त्तव्यस्थ अधिकारी  अनिल राय सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।