देश

संसद पर‍िसर में अकेले दिखे लालकृष्‍ण आडवाणी, गाड़ी के ल‍िए करना पड़ा इंतजार

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने मंगलवार (18 जुलाई) को उप-राष्‍ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके प्रमुख मंत्री, लालकृष्‍ण आडवाणी समेत कई वरिष्‍ठ भाजपा नेता मौजूद थे। नामांकन के बाद सभी साथ में बाहर निकले। वेंकैया नायडू मीडिया से मिलने निकल गए। मगर आडवाणी संसद के गेट नंबर 4 पर अकेले खड़े दिखे। यहां पर सांसद व नेता अक्‍सर अपनी गाड़ी का इंतजार करते हैं। कुछ देर तक गाड़ी नहीं आई तो मीडियाकर्मियों ने उन्‍हें गेट नंबर 4 के सामने बनी जगह पर आने को कहा, जहां पत्रकारों का जमावड़ा लगता है। आडवाणी आए और एक कैमरामैन के साथ बेंच पर बैठ गए। उनके साथ कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं था। इतने वरिष्‍ठ नेता को बिना किसी सुरक्षा के अपने बीच पाकर खबरनवीस हैरान हुए। कुछ लोगों ने आडवाणी से बात करने की कोशिश की, मगर वह कुछ नहीं बोले। मौके का फायदा उठाते हुए कुछ ने फोन निकालकर सेल्‍फी लेनी शुरू कर दी। आडवाणी तुरंत उठे और गेट नंबर 1 की तरफ चल दिए। कुछ देर इंतजार करने के बाद उनका काफिला वहां पहुंचा, जिसके बाद वह वहां से निकल गए।

sabhar 

कपिल शर्मा के शो में कुमार विश्‍वास महिलाओं के लिए कुछ ऐसा बोल गए कि हो गया एफआईआर

 नई दिल्‍ली: आप नेता कुमार विश्वास कपिल शर्मा शो में पहुंचे थे। वहां उन्होंने कविता सुनाते-सुनाते कुछ ऐसा कह दिया जिसपर विवाद हो गया। इतना ही नहीं एक महिला ने तो उनके खिलाफ शिकायत तक दर्ज करवा दी। 1 जुलाई के एपिसोड में कवि कुमार विश्वास, प्रसिद्ध कवि डॉक्‍टर राहत इंदौरी और शायदा शबीना अदीब नजर आए. इसी शो में कुमार विश्‍वास महिलाओं के लिए कुछ ऐसा बोल गए कि कानूनी मामले में फंस गए हैं
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुमार विश्‍वास के खिलाफ महिलाओं के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है. मामला दिल्ली के डाबरी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया गया है. एफआईआर में कहा गया है कि कुमार  विश्वास ने शो में महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और अभद्र टिप्पणी की है.
कुमार विश्वास ने कांग्रेसी नेता और इस शो में नजर आने वाले नवजोत सिंह सिद्धू पर टिप्‍पणी करते हुए कहा था, 'चुनाव के समय अपने मोहल्ले या स्थानीय चुनाव लड़ने में सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि जिस लड़की से आपका अफेयर चल रहा हो, उसके पति को भी जीजाजी कहना पड़ता है. जीजाजी वोट दे देना, सामान तो आप ले ही गए हैं.' मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि शिकायतकर्ता ने कहा कि जब वह अपनी बेटी के साथ यह शो देख रहे थे तो बेटी ने अपनी मां से पूछा, 'मम्मी क्या हम शादी के बाद सामान हो जाएंगे? महिलाएं क्या वस्तु होती हैं?' इसके बाद शिकायतकर्ता ने एफआईआर दर्ज कराई.

बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ के कई प्रोडक्‍ट क्‍वालिटी टेस्‍ट में फेल

योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी ‘पतंजलि’ के कई उत्‍पाद उत्‍तराखंड की एक लैब द्वारा किए गए क्‍वालिटी टेस्‍ट में फेल हो गए हैं। हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की रिपोर्ट के अनुसार, सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब में यह जानकारी दी गई। इसके अनुसार, हरिद्वार की आयुर्वेद और यूनानी कार्यालय में हुई जांच में करीब 40 फीसदी आयुर्वेद उत्‍पाद, जिनमें पतंजलि के उत्‍पाद भी शामिल हैं, मानक के मुताबिक नहीं पाए गए। साल 2013 से 2016 के बीच इकट्ठा किए गए 82 सैम्‍पल्‍स में से 32 उत्‍पाद क्‍वालिटी टेस्‍ट पास नहीं कर सके। पतंजलि का ‘दिव्‍य आंवला जूस’ और ‘शिवलिंगी बीज’ उन उत्‍पादों में शामिल है, जिनकी गुणवत्‍ता मानकों के अनुसार नहीं पाई गई। बता दें कि पिछले महीने सेना की कैंटीन ने भी पतंजलि के आंवला जूस पर प्रतिबंध लगा दिया था। सेना ने यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल स्‍वास्‍थ्‍य प्रयोगशाला द्वारा की गई एक गुणवत्‍ता जांच में पतंजलि के उत्‍पाद के फेल होने पर की थी।
उत्‍तराखंड सरकार की लैब रिपोर्ट के अनुसार, आंवला जूस में तय की गई सीमा से कम पीएच मात्रा मिला। पीएच की मात्रा 7 से कम होने पर एसिडिटी व अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं पैदा होती हैं। आरटीआई के जवाब से यह भी पता चला कि शिवलिंगी बीज का 31.68 फीसदी हिस्‍सा विदेशी था। हालांकि रामदेव के सहयोगी और पतंजलि के मैनेजिंग डायरेक्‍टर आचार्य बालकृष्‍ण ने लैब रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। उन्‍होंने एचटी से बातचीत में कहा, ”शिवलिंगी बीज एक प्राकृतिक बीज है। हम इसमें छेड़छाड़ कैसे कर सकते हैं?” बालकृष्‍ण ने दावा किया कि लैब रिपोर्ट पतंजलि की छवि को खराब करने की एक कोशिश है।पतंजलि के उत्‍पादों के अलावा, आयुर्वेद के अन्‍य 18 सैम्‍पल जैसे- अविपत्तिकरा चूर्ण, तलिसदया चूर्ण, पुष्‍यनूगा चूर्ण, लवण भाष्‍कर चूर्ण, योगराज गुग्‍गूलू, लक्षा गुग्‍गूलू को भी मानकों के मुताबिक नहीं पाया गया।
योग गुरु बाबा रामदेव की पंतजलि देशभर में कई एफएमसीजी प्रॉडक्ट्स बनाकर घर-घर तक पहुंचा रही है। कंपनी ने लगभग सभी तरह के प्रॉडक्ट्स बनाए हैं। साबुन से लेकर आटा तक, जूस से डिटर्जेंट पाउडर तक, ऐसे कई प्रॉडक्ट्स बनाने के लिए पंतजलि जानी जाती है।

आज से चार देशों की यात्रा पर नरेंद्र मोदी, 30 साल में पहली बार कोई भारतीय पीएम जाएगा स्पेन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (29 मई) चार देशों की यात्रा पर रवाना होंगे। पीएम इस यात्रा के दौरान जर्मनी, रूस, फ्रांस और स्पेन जाएंगे। स्पेन की यात्रा पर 30 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री जा रहा है। पीएम की यात्रा का मकसद इन देशों के साथ आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना तथा अधिक निवेश आमंत्रित करना है। पीएम मोदी के एजेंडे में अर्थव्यवस्था, विज्ञान और न्यूक्लियर क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अलावा यूरोपीयन यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई शामिल है। पीएम अपनी यात्रा की शुरूआत जर्मनी से करेंगे। वह जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल और राष्ट्रपति फ्रेंक वाल्टर स्टीनमीयर से मुलाकात करेंगे। पीएम और मर्केल व्यापार और निवेश, सुरक्षा और आतंकवाद से मुकाबला, नवोन्मेष और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, शहरी बुनियादी ढांचा, रेलवे और विमानन, स्वच्छ उर्जा, विकास सहयोग, स्वास्थ्य और वैकल्पिक चिकित्सा पर जोर देते हुए सहयोग का भावी रोडमैप तैयार करेंगे। बर्लिन में, मोदी और मर्केल दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपतियों के साथ बातचीत करेंगे ताकि व्यापार एवं निवेश संबंधों को और मजबूत बनाया जा सके।
इसके बाद 31 मई को मोदी स्पेन पहुंचेंगे और यहां राष्ट्रपति मारिआनो रजॉय से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने के आलावा विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी। मोदी यहां स्पेन की टॉप इंडस्ट्रीज के सीईओ से भी मिलेंगे और उन्हें भारत में निवेश के लिए प्रेरित करेंगे। प्रधानमंत्री स्पेन के बाद 31 मई से दो जून के बीच रूस में सेंट पीटर्सबर्ग में रहेंगे। वह 18वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। वह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
मोदी अक्टूबर 2016 में गोवा के शिखर सम्मेलन में हुई बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाएंगे। दोनों नेता दोनों देशों की बड़ी कंपनियों के सीईओ से भी बातचीत करेंगे। इसके बाद मोदी दो जून को फ्रांस की यात्रा पर जाएंगे। वह राष्ट्रपति ई मैक्रॉन से मुलाकात करेंगे। मोदी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सुधार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता, विभिन्न निर्यात संगठनों में भारत की सदस्यता, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, जलवायु परिवर्तन पर सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन आदि मुद्दों पर फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा करेंगे हैं।

आतंकियों का गढ़ बना दक्षिण कश्मीर, घाटी में सक्रिय 282 में से 112 आतंकी यहीं के, हर हफ्ते हो रही नई भर्ती

रविवार (28 मई) को दक्षिणी कश्मीर के त्राल में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर सब्जार भट के जनाजे में प्रशासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी भारी भीड़ उभरी।  भट शनिवार (27 मई) को मारा गया था। पिछले कुछ समय में दक्षिणी कश्मीर उग्रवादियों की नर्सरी बनकर उभरा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार घाटी में सक्रिय 282 उग्रवादियोें में से 112 दक्षिणी कश्मीर से हैं। इन 112 में से 99 उग्रवादी “स्थानीय” हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार कम से कम 20 और “स्थानीय” उग्रवादी इस इलाके में सक्रिय हैं। कई ऐसे हैं जिन्होंने अपने उग्रवादियों से जुड़ने की बात सार्वजनिक नहीं की है। इस इलाके में हर हफ्ते किसी ने किसी के “उग्रवाद” से जुड़ने की खबर आती है।
इन उग्रवादियों को मोटे तौर पर तीन वर्गों में बांटा जा सकता है – 1- वे नौजवान जिन्होंने जेल भेजे जाने के बाद हथियार उठा लिया, 2- साल 2008 में हुए उपद्रव के जेल से वापस आने वालों ने दोबारा उग्रवाद का रास्ता अपना लिया और 3- वो नौजवान वैश्विक जिहाद में भागीदारी के लिए कश्मीर में सक्रिय हैं। पहले दोनों वर्गों का मकसद राजनीतिक है। पहले दोनों वर्ग के उग्रवादी “कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा” बनाना चाहते हैं। तीसरे वर्ग में कितने नौजवान शामिल हैं इसकी सटीक जानकारी नहीं है। पुलवामा के त्राल के रहने वाले 22 वर्षीय बुरहान वानी के पिछले साल जुलाई में मारे जाने के बाद से ये तीसरा वर्ग “अदृश्य दस्ते” की तरह उभरा है।
बुरहान वानी की जगह लेने वाले हिज्बुल मुजाहिद्दीन कमांडर जाकिर राशिद उर्फ मूसा ने हाल ही में हिज्बुल से नाता तोड़ा है। जाकिर से मिले संकेतों के अनुसार इस तीसरे वर्ग ने पाकिस्तान स्थित यूनाइटेड जिहाद काउंसिल (यूजेसी) और श्रीनगर स्थित अलगाववादी संगठन हुर्रियत से अलग राह पकड़ ली है। हिज्बुल छोड़ने से पहले मूसा ने पुलवामा में उग्रवादियों से “गैर-इस्लामी” पाकिस्तानी झंडा न फहराने के लिए कहा था। उसने कश्मीर में चल रहे “संघर्ष” को “इस्लाम के लिए युद्ध” बताया था। मूसा ने गांववालों से तालिबान के समर्थन में नारे लगाने के लिए कहा था। सरकारी अधिकारियों के अनुसार मूसा श्रीनगर के उन दो नए उग्रवादियों में था जो हिज्बुल या लश्कर-ए-तैएबा से संबंधित नहीं था।
इस तीसरे वर्ग के उग्रवादियों में कई बातें साझा हैं-

अलग-अलग संगठनों से जुड़े होने के बावजूद वो आपसी तालमेल से काम करते हैं.
इन्हें हथियार चलाने की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं मिली है और इन्होंने हथियार वगैरह स्थानीय स्तर पर हासिल किए हैं।
वो ज्यादातर स्थानीय मुद्दों से प्रेरित हैं और जान देने के लिए तैयार रहते हैं।
उग्रवाद से जुड़ने की सूचना वो बंदूक के संग अपनी तस्वीर सार्वजनिक करके देते हैं।
इंडियन एक्सप्रेस ने जब इन युवाओं के घरवालों से मुलाकात की तो पता चला कि उग्रवादी बनने से पहले पुलिस इन्हें अक्सर “उठाती” रहती थी। इन नौजवानों में बहुत से ऐसे हैं जिनके करीबी रिश्तेदार या परिजन उग्रवाद या अलगाववाद से जुड़े रहे हैं और उन्हें जेल हो चुकी है या वो मारे जा चुके हैं।

मंच पर सुब्रमण्यम स्वामी के साथ खड़ा होकर असदुद्दीन ओवैसी बोले- नरेंद्र मोदी ने इन्‍हें राम मंदिर में उलझा दिया वरना उनका ही दिमाग खाते

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इंडिया टीवी के एक कार्यक्रम में भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी पर तंज कसते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी को राम मंदिर के मुद्दे में उलझा रखा है, वरना स्वामी पीएम मोदी को ही परेशान करते । इसके अलावा ओवैसी ने पूछा कि केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार सीमा पर कुछ क्यों नहीं करती, जहां रोज-रोज हमारे जवान शहीद हो रहे हैं।
इधर, राम मंदिर पर स्वामी ने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करेगाी हमें मान्य होगा। उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई हो इसके लिए वो जुलाई में याचिका दाखिल करेंगे। अगर कोर्ट ने उनकी इस याचिका को मंजूर कर लिया तो दिसंबर तक फैसला आ जाएगा। स्वामी ने कहा कि उस विवादित जमीन पर कई पक्ष अपना दावा ठोक रहे हैं जबकि हमारा कहना है कि हमारी आस्था है कि वहां श्रीराम का जन्म हुआ है, इसलिए हमें वहां पूजा करने की अनुमति दी जाय।
स्वामी ने एक अन्य सवाल के जवाब में ओवैसी पर हमला बोला कि जिन इलाकों में मुसलमानों की आबादी ज्यादा होती है, वहां लोकतंत्र नहीं होता है।

नीतीश कुमार ने जिस अफसर की बचाई नौकरी वो करवाता है बाल तस्करी?

कन्हैया भेलारी

एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग कॉनक्लेव में बिहार के सीएम नीतीश कुमार पटना के एक होटल में एकत्रित प्रबुद्धजनों को बता रहे थे कि कैसे मानव तस्करी एक संगठित अपराध और सामाजिक बुराई के रूप में सभ्य समाज के सामने गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि ‘‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकना हमारी प्राथमिकता है। साल 2008 में हमारी सरकार ने इसके लिए नीति और कार्यक्रम बनाए थे। समाज कल्यााण, श्रम संसाधन और पुलिस विभाग ने कार्रवाई भी की है।’’ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि जनवरी 2013 से दिसम्बर 2016 के बीच कुल 8327 बच्चे गायब हुए, इनमें से 5256 की तलाश की गई लेकिन 3071 बच्चे अभी भी गायब हैं जिनकी खोज की जा रही है। लेकिन हकीकत यह है कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर सरकार द्वारा दिया गया यह आंकड़ा सच्चाई से कोसो दूर है।
7 सितम्बर 2014 को मुज्जफरपुर में मानव तस्करी पर आयोजित एक सेमिनार-कम-ट्रेनिंग प्रोग्राम का उद्घाटन करते हुए तिरहुत प्रक्षेत्र के डीआईजी अजय मिश्रा ने कहा था कि बिहार में हर महीने 4000 बच्चे-बच्चियों की तस्कारी होती है। उन्होने दुःख जाहिर करते हुए खुलासा किया था कि पुलिस उन लोगों को चिन्हित करने में नाकाम रही है जो इस धंधे मे सक्रिय हैं। मुज्फ्फरपुर के जिलाधिकारी अनुपम कुमार भी उस समारोह में उपस्थित थे। ‘सखी’ एनजीओ की संचालिका सुमन सिंह भी अजय मिश्रा के आंकड़े से इतेफाक रखती हैं। वो कहती हैं, ‘‘किडनैप्ड बच्चों को तलाशने या छुड़ाने में बिहार सरकार के किसी भी डिपार्टमेंट से हमलोगों को उम्मीद के मुताबिक सहयोग नहीं मिलता है। अभी एक वीक पहले हमने अपने स्तर से 250 बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया है।’’
बहरहाल, वहां मौजूद कई लोग ऐसे भी थे जो अपने-अपने एनजीओ के मार्फत राज्य में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर सराहनीय काम कर रहे हैं। उन्हीं में से एक ने जनसत्ता.कॉम को जानकारी दी, ‘‘मानव तस्करी का यह घिनौना खेल राज्य में कुछ चुनिंदा वरीय पुलिस अधिकारियों के संरक्षण में होता है। चुराई गई लड़कियों को छुपाकर रखने के लिए मुज्जफरपुर में बाजाप्ता कई बंकर बनाए गए हैं।’’ एक एनजीओ संचालिका ने बताया, ‘‘हमने एक बार मुज्जफरपुर में पदस्थापित एक पुलिस अधिकारी से मिलकर बंधक बनाई गई लड़कियों को छुड़ाने की गुहार की तो उसने मुझे ही धमकाया कि भागो नहीं तो तुम्हें ही उस केस में फंसा दूंगा।’’

दरअसल, यह गिरोहबाज पुलिस अफसर सुरा से तो परहेज करता है लेकिन सुन्दरियों का भंवरा बताया जाता है। अपने द्वारा की गई गलती या यूं कहें कि राजनीति का चस्का, के कारण वह एक बार ऐसे घनचक्कर में फंसा था कि उसकी नौकरी लगभग चली गई थी लेकिन ‘भक्त वत्सल’ वजीरे आला ने लाइफ सेविंग ड्रग से उसको बचा लिया। छपी खबर है कि थूक चाटकर उस अफसर ने कसम खाई कि ताजिन्दगी पॉलिटिक्स के बारे में नहीं सोचेगा।
उधर, पूछने पर श्रम विभाग का एक अधिकारी झुंझुलाकर बताता है कि ‘‘मैन पावर की कमी के कारण हमलोग सीएम के ‘सात निश्चय’ के अलावे और किसी दूसरे टास्क की तरफ नजर नहीं दौड़ा पा रहे हैं क्योंकि सावधानी हटी तो नौकरी गई।’’ उसी तरह पुलिसवाले रोना रोते हैं कि ‘‘सारा ध्यान दारू सीज करने और दारूबाजों को पकड़ने पर है, भांड़ में गई मानव तस्करी।’’
(लेखक पटना के स्वतंत्र पत्रकार हैं।

प्रणब मुखर्जी का राहुल गांधी को संदेश- फैसले लीजिए, अमल कीजिए, इंदिरा ने तीन महीने में ही कर दिया था कांग्रेस का कायाकल्प

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इंदिरा गांधी को लोकतांत्रिक देश की अब तक की ‘‘सबसे स्वीकार्य’’ प्रधानमंत्री बताते हुए उनकी निर्णायक क्षमता को याद किया। मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी नेतृत्व को सांगठनिक मामलों में तेजी से निर्णय लेने का परोक्ष संदेश देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री के काम करने के निर्णायक तरीके को याद किया जिस कारण 1978 में कांग्रेस में दूसरा विभाजन होने के कुछ महीने बाद ही राज्य चुनावों में पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की। राष्ट्रपति ने विशिष्ट अतिथियों की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच कहा कि वह 20वीं सदी की महत्वपूर्ण हस्ती थीं। और भारत के लोगों के लिए अभी भी वह सर्वाधिक स्वीकार्य शासक या प्रधानमंत्री हैं।’’
मुखर्जी ने अतीत को याद करते हुए कहा, ‘‘1977 में कांग्रेस हार गयी थी। मैं उस समय कनिष्ठ मंत्री था। उन्होंने मुझसे कहा था कि प्रणब, हार से हतोत्साहित मत हो। यह काम करने का वक्त है और उन्होंने काम किया।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी मंच पर मौजूद थे। मुखर्जी ने इस अवसर पर इंदिरा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके जीवन और कार्यों पर एक पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने अंसारी द्वारा विमोचित ‘इंडियाज इंदिरा – ए सेंटेनियल ट्रिब्यूट’ की पहली प्रति ग्रहण की। कांग्रेस इंदिरा गांधी की शताब्दी जयंती मना रही है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा द्वारा संपादित इस पुस्तक में इंदिरा गांधी के कार्यों और उनके जीवन की घटनाओं का संकलन है तथा इसकी प्रस्तावना सोनिया गांधी ने लिखी है जो खराब स्वास्थ्य के कारण इस कार्यक्रम में शमिल नहीं हो सकीं। राहुल गांधी ने सोनिया गांधी की ओर से उनका भाषण पढ़ा। भाषण में कहा गया, ‘‘मैने इंदिरा गांधी में देशभक्ति का जो जज्बा देखा वह श्रेष्ठ था जो उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम से आत्मसात किया था।’’ सोनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी एक मित्र और सलाहकार थीं और ‘‘अपनी इच्छाएं मेरे उच्च्पर नहीं थोपें, इसको लेकर वह बेहद सतर्क थीं।’’
राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से कहा, ‘‘इंदिरा गांधी पद, जाति और संप्रदाय जैसे भेदभाव को नापसंद करती थीं। उनके पास दंभ या आडंबर के लिए कोई वक्त नहीं था। वह पाखंड अथवा धोखेबाजी को तत्काल पहचान जाती थीं। उन्हें भारतीय होने का गर्व था, साथ ही वह वृहद एंव सहिष्णु विचारों वाली एक वैश्विक नागरिक थीं। ’’
कांग्रेस में 1978 में दूसरे विभाजन को याद करते हुए राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा कि इंदिरा गांधी को दो जनवरी 1978 को पार्टी अध्यक्ष चुना गया और 20 जनवरी तक कुछ दिनों के अंदर उन्होंने कार्य समिति के गठन को पूरा कर लिया, संसदीय बोर्ड, पीसीसी और एआईसीसी का गठन किया और पार्टी को महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, असम और नेफा विधानसभा चुनावों का सामना करने के लिए तैयार किया।
उन्होंने कहा कि इसके तुरंत बाद उनके नेतृत्व में पार्टी ने आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में दो तिहाई बहुमत से जीत दर्ज की और महाराष्ट्र में अपनी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनाया जहां पार्टी ने कांग्रेस से अलग हो चुके धड़े के साथ मिलकर सरकार बनाई। राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति के अपने सबसे खराब वक्त में इंदिराजी अपने आप को ज्यादा कामों में लगाए रखतीं थीं। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा देश हित में लिए गए अनेक कठोर निर्णयों को भी याद किया। मुखर्जी ने स्वर्ण मंदिर को आतंकवादियों से मुक्त कराने के लिए उनके निर्णय का खास तौर पर जिक्र किया।
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने संक्षिप्त भाषण में कहा कि वह देश, विदेश और विश्व में बदलाव और उथल पुथल के दौर में रहीं और नियति ने उन पर प्रधान नायक की भूमिका अदा करने की जिम्मेदारी अर्पित कर दी। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, ‘‘इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री भर नहीं थी बल्कि विकासशील देशों की स्वीकृत नेता भी थीं। वह वैश्विक शांति में विश्वास करतीं थीं और उनकी बात को बेहद आदर के साथ सुना जाता था।
इस कार्यक्रम में कांग्रेस के कई पूर्व केन्द्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों सहित वरिष्ठ नेता मौजूद थे। अतिथियों में गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, जनार्दन द्विवेदी, पी चिदंबरम, शीला दीक्षित सहित अनेक नेता मौजूद थे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लालू की चिंता- कहीं अखिलेश यादव की तरह मुलायम न बना दे बेटा तेजस्वी

सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला केस में सभी मामलों की अलग-अलग जांच करने के आदेश दिए, जिसके बाद लालू प्रसाद यादव चिंता में डूब गए। चूंकि यह मामले पांच अलग-अलग जगहों पर दर्ज हैं, ऐसे में लालू यादव को एक जगह से दूसरी जगह पर दौड़ना पड़ेगा। जब लालू 2013 में रांची जेल में रहे थे तब लालू को एक वीआईपी की तरह रखा गया था। लालू जेल में ही दरबार लगाते थे, उन्हें हर दिन घर का बना खाना मिलता था। दरअसल झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लालू के पांच विधायकों को समर्थन मिला हुआ था।
लेकिन अगर इस बार लालू को जेल होती है तो उन्हें जेल में पिछली बार की तरह सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। इस समय झारखंड में एनडीए सरकार है, जिसके लालू धुर विरोधी रहे हैं। लालू को डर है कि कहीं तेजस्वी नितीश कुमार से प्रभावित ना हो जाएं या वह भी अखिलेश यादव की तरह ना कर बैठें। बेटा तेजस्वी यादव बिहार के उप मुख्यमंत्री के पद पर हैं, लेकिन लालू को डर है कि कहीं तेजस्वी भी नितीश कुमार से प्रभावित होकर अखिलेश यादव की तरह ना कर बैठें। बड़ा बेटा तेज प्रताप यादव को वैसे तो मंत्री पद दिया हुआ है लेकिन उन्हें राजनीति में उतना सक्रिय नहीं है।
इसके अलावा बेटी मीसा भारती एक सांसद हैं, जिन्हें पार्टी का मुखिया बनाया जा सकता है। हालांकि बिहार विधान परिषद में छह साल पूरे कर चुकी लालू की पत्नी राबड़ी देवी भी एक विकल्प हो सकती हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में लालू यादव पर इस मामले में आपराधिक साजिश का केस चलाने की इजाजत दी है। कोर्ट ने 9 महीनों में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सीबीआई को भी मामले में देरी करने पर फटकार लगाई। साथ ही झारखंड हाईकोर्ट को भी कानून के तय नियमों का पालन नहीं करने पर लताड़ लगाई।
(कूमी कपूर का लेख)

जम्मू कश्मीर: CRPF जवान ने की आत्महत्या, ट्रेनिंग कैंप में मिली लाश

जम्मू कश्मीर में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के एक जवान ने आत्महत्या कर ली। जिस जवान ने आत्महत्या की उसका नाम अनिल कुमार है। वह सीआरपीएफ की35वीं बटालियन में था। अनिल ने बडगाम जिले में ट्रेनिंग सेंटर में ही आत्महत्या की। फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं मिली है।

दो दिन बाद हो सकता है हैकाथॉन, चुनाव आयोग ने दो दिन बाद सभी दलों को बुलाया

नई दिल्ली: ईवीएम विवाद के बीच चुनाव आयोग ने आज सर्वदलीय बैठक की. राष्ट्रीय स्तर की 7 और राज्य स्तर की 48 छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियां इस बैठक में शामिल हुईं. सभी पार्टियों के नुमाइंदे अपनी शिकायत और सुझाव लेकर पहुंचे. बीजेपी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस पर कहा कि दो दिन हैकोथॉन हो सकता है. चुनाव आयोग ने 2 दिन बाद सबको बुलाया है. चुनाव आयोग ने बताया कि ईवीएम हैक नहीं हो सकती. चुनाव आयोग ने कहा कि दो दिन हम आपको मशीन देंगे. अपने एक्सपर्ट लेकर आइये, प्रूव योर बेस्ट.

उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बसपा, सपा समेत कुल 16 पार्टियों ने ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने यह बैठक बुलाई. चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों को ईवीएम से छेड़छाड़ साबित करने की चुनौती दी है. इसके लिए इस महीने के आखिरी हफ्ते में हैकाथॉन की तैयारी है. आज की बैठक में हैकाथॉन की तारीख तय हो सकती है. 

इस सर्वदलीय बैठक में आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विधायक सौरभ भारद्वाज करेंगे. सौरभ भारद्वाज के साथ पार्टी के टेक्निकल टीम के सदस्य भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में ईवीएम जैसी मशीन का डेमो दिखाकर टैम्पर करने का दावा किया और चुनाव आयोग को चुनौती दी कि वे औपचारिक रूप से ईवीएम टैम्पर करने के कार्यक्रम का आयोजन कर जिसमें आप आयोग की ईवीएम को हैक करके दिखाएगी. 

ईवीएम पर चर्चा के अलावा चुनाव आयोग की कोशिश ये है कि चुनावों में पैसे के लेनदेन को संज्ञेय अपराध बनाया जाए और चंदे का सिस्टम पारदर्शी हो. 

ये हैं अहम बिन्दू
चुनावों में रिश्वत संज्ञेय अपराध बने
प्रतिनिधित्व क़ानून में रिश्वत के मामलों में नई धारा जोड़ी जाए
आयोग को रिश्वतखोरी पर चुनाव रद्द करने तक का हक मिले
चुनाव में रिश्वतखोरी पर आरोप तय होते ही विधायक-सांसद अयोग्य हों 
राजनीतिक दलों के चंदे में और पारदर्शिता आए
20 करोड़ से ज्यादा कैश चंदा न हो
या साल के कुल चंदे का 20% से ज्यादा कैश न हो
2000 रुपये से ऊपर का गुमनाम चंदा न हो
चुनावी ख़र्च के लिए उम्मीदवार का अलग बैंक खाता हो
ईवीएम से VVPAT सिस्टम जोड़ा जाए

EVM और सवालों पर चुनाव आयोग  के पास हैं अपने तर्क
ईवीएम से छेड़छाड़ संभव नहीं
ईवीएम कंप्यूटर से नहीं चलता
मशीन इंटरनेट से जुड़ी नहीं
न फ्रिक्वेंसी रिसीवर है, न वायरलैस या बाहरी डेटा पोर्ट
ईवीएम बनाने वाले भी छेड़छाड़ नहीं कर सकते
बनाने वाले को नहीं पता कौन कहां से उम्मीदवार होगा
चिप में ट्रॉजन हॉर्स नहीं डाला जा सकता
2013 के बाद की ईवीएम में नई सुरक्षा प्रणाली
ओटीपी माइक्रोकंट्रोलर, डायनेमिक कोड 
छेड़छाड़ से 100% सुरक्षित
विदेशों में बनी ईवीएम इस्तेमाल नहीं
कई देशों में ईवीएम इसलिए नहीं क्योंकि वो इंटरनेट से जुड़ती थीं
स्थानीय निकाय चुनाव में चुनाव आयोग की ईवीएम इस्तेमाल नहीं
चार चरणों में छानबीन
1000 वोटों का नकली चुनाव नुमाइंदों की मौजूदगी में
विधानसभाओं में भेजने से पहले ईवीएम मिला दी जाती हैं
कड़ी सुरक्षा में स्ट्रांग रूप में रखी जाती हैं
मतगणना केंद्रों में नुमाइंदों को मुहर दिखाई जाती है
EVM मुद्दे पर विपक्ष एकजुट नहीं दिख रहा है. एक ओर आम आदमी पार्टी ने ईवीएम में छेड़छाड़ कर दिखाने की बात कही है... वहीं ज़्यादातर विपक्षी पार्टियां ईवीएम के साथ पेपर बैक अप मशीन लगाने पर ज़ोर दे रही हैं.

(एनडीटीवी से )

कश्मीरी ने ही ली लेफ्टिनेंट उमर फय्याज की जान, हिजबुल आतंकी अब्बास था गैंग का लीडर

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उस आतंकी संगठन की पहचान कर ली है जिसने सेना के अफसर लेफ्टिनेंट उमर फय्याज की हत्या की है। सीएनएन न्यूज के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के पुलिस सूत्रों ने बताया है कि उमर की हत्या में इन्सास राइफल का इस्तेमाल किया गया है जिसे आतंकियों ने पिछले महीने पुलवामा से लूटा था। सूत्रों के मुताबिक लेफ्टिनेंट उमर फय्याज की हत्या हिजबुल के आतंकियों ने की है। पुलिस ने इस मामले में छानबीन तेज कर दी है। पुलिस ने इन्सास राइफल के दो खोखे भी बरामद किए हैं। हालांकि, अभी तक उमर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है, जिससे यह मिलान किया जा सके कि उसकी हत्या में इस्तेमाल हथियार कौन सा था।
फिलहाल मामले में पुलिस ने दक्षिणी कश्मीर में रहने वाले अब्बास नाम के शख्स की इस हत्या के मास्टमाइंड के रूप में पहचान की है। उसके साथ और भी कई आतंकी मौजूद थे जब उमर फय्याज की हत्या की गई थी।
गौरतलब है कि जम्मू एवं कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकवादियों के हमले में युवा कश्मीरी सैन्य अधिकारी शहीद हो गए। बुधवार सुबह उनका गोलियों से छलनी शव मिला था। उमर अपने मामा मोहम्मद मकबूल की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए आए थे।
लेफ्टिनेंट उमर फय्याज की पढ़ाई अनंतनाग के एक स्कूल में हुई थी। उन्होंने साल 2012 में एनडीए ज्वाइन की थी और कमीशंड ऑफिसर की परेड पास कर दिसंबर 2016 में इंडियन आर्मी में शामिल हुए थे। वो दो राजपुताना राइफल्स यूनिट की कमान संभाल रहे थे। ऐसा करने वाले वो सबसे कम उम्र के अधिकारी थे। इसी यूनिट ने करगिल की लड़ाई में तोलोलिंग पर कब्जा कर लड़ाई को निर्णायक दौर में पहुंचाया था। यूनिट ज्वाइन करने के बाद वो पहली छुट्टी पर पारिवारिक समारोह में शामिल होने आए थे, जहां से आतंकवादियों ने उन्हें अगवा कर लिया था। मंगलवार की रात उमर को आतंकियों ने अगवा किया और अगली सुबह उनका गोलियों से छलनी शव मिला था।

ऑडियो: नौ तारीख को आकर सबका हिसाब करो…नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने जारी की मायावती से बातचीत का टेप

बसपा से निष्कासित किए गए पार्टी सुप्रीमो मायावती के पुराने सिपहसलार नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती के साथ बातचीत का एक टेप जारी किया है। इस क्लिप में तथाकथित रूप से मायावती कह रही हैं, “आपने जितने लोगों को टिकट दिलवाया है उनका हिसाब अभी तक नहीं हुआ है।” सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि मायावती पैसों की भूखी हैं। सिद्दीकी ने ऑडियो क्लिपिंग दिखाते हुए कहा कि मायावती अक्सर पैसों की मांग करती रहती हैं। 10 मई को जारी किए गए इस ऑडियो टेप में बातचीत कुछ इस प्रकार है-
टेलीफोन ड्यूटी : बहिन जी बात करेंगी
नसीमुद्दीन : हां दे दीजिए
मायावती : हैलो

नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर बोलीं मायावती- हिसाब नहीं दिया, चंदे का पैसा खा गया, ब्लैकमेलर को निकाल दिया
नसीमुद्दीन : जी बहिन जी आदेश
मायावती : हां भाई नोट करो तुम
ये जो चारो मंडल हैं ..ये मेरठ मंडल, सहारनपुर मंडल, ये मुरादाबाद, और बरेली मंडल
नसीमुद्दीन : जी बहिन जी
मायावती : तो जिनको आपने मेंबरशिप की किताबें दिलवाई हैं तो उनको बोलो अपना हिसाब इधर दफ्तर में जमा करें और नौ तारीख को उनको बुलाना
नसीमुद्दीन : ठीक है बहिन जी
मायावती : अपना हिसाब वो जो अमरपाल शर्मा वाली सीट वाला वो भी अपना हिसाब कंप्लीट करके लेकर आएं
नसीमुद्दीन : बहिन जी मैंने नहीं दिलवाई.. हरक सिंह राव थे, जिलाध्यक्ष थे सब लोग ने पीछे पड़कर दिलवाई
मायावती : चलो छोड़ो आप उनको बुलवाओ वो मुस्लिम समाज के लोग हैं आप अपनी जिम्मेवारी लो टिकट तो आपने दिलवाया था न
नसीमुद्दीन : बहिन जी टिकट भी मैं नहीं चाह रहा था आप पूछ लें
मायावती : चलो जो कुछ भी है आप अपनी जिम्मेवारी को निभाओ मतलब
नसीमुद्दीन : नहीं बहन जी भागकर कहां जाएंगे
मायावती : ये अच्छी बात नहीं है क्योंकि जो मैंने नए लोग लगाए हैं वो उनको कोआपरेट नहीं कर रहे हैं मैं एक्शन लूंगी इनके खिलाफ
नसीमुद्दीन : बहन जी जो आपका आदेश होगा
मायावती : मेरे से इधर ही आकर बात करना मेरे से बात नहीं करो टेलीफोन पर.. मेरा टेलीफोन टैप होता है
नसीमुद्दीन : ठीक है बहिन जी
मायावती : तो आप उनको 9 तारीख की शाम को चार बजे बुलवाओ
नसीमुद्दीन : मैं बुलाता हूं बहन जी
मायावती : रेजीडेंस पर बुलाओ सब अपना हिसाब किताब लेकर आएं
नसीमुद्दीन : मैं कहता हूं बहन जी
मायावती : हां..उनको बोलो.. क्योंकि हमें मेंबरशिप का राउंडअप करना है सारा हिसाब किताब, इधर लखनऊ लेकर आएं और दफ्तर में जमा कराएं और फिर मुझे हिसाब दें और 9 की शाम को चार बजे आप रहोगे
नसीमुद्दीन : मैं रहूंगा, मैं कर लेता हूं मुझे जाना है जहां वहां रोक देता हूं
मायावती : मुझे ये भी हिसाब राउंड अप करना है
नसीमुद्दीन : मैंने नहीं दिलवाई हैं मैं कैसे कहूं
मायावती : इधर रिकार्ड मैंने जो चेक किया है तो अब मेंबरशिप की किताबें ये गरीब और मजलूमों की पार्टी है तो हम उसका हिसाब जनता को देंगे तो ये ठीक नहीं है तो उनसे बोलों कि नौ तारीख की शाम चार बजे आएं आपका जो भी पर्सनल काम है चार बजे के बाद करना 10 तारीख की मीटिंग में रहने का है आप अपना प्रोग्राम बनाओ और नौ को फिर मुझे अपनी पूरी रिपोर्ट भी दो प्रोग्राम की ये चारो मंडल जिन-जिन को दिलवाएं हैं आपकी जिम्मेवारी है, आप वरिष्ठ आदमी थे
नसीमुद्दीन : मैं बुलाता हूं वो आपके सामने बात हो जाएगी
मायावती : बात वात नहीं मैं किसी के माध्यम से नहीं और खासतौर से जो मुस्लिम लोग हैं उनकी जिम्मेवारी टोटल आपकी होगी
नसीमुद्दीन : मैंने नहीं करवाया है
मायावती : चलो छोड़ो अभी जिम्मेवारी से, नहीं भी करवाया है तो अपनी जिम्मेवारी निभाओ। आप वरिष्ठ आदमी हैं.. आपकी मर्जी के बिना मैंने किसी का भी टिकट फाइनल नहीं किया था ये भी मानकर चलो और मैंने मेंबरशिप की किताबें उनको दी थीं कि आप मेंबर बनाओ तब मैं टिकट दूंगी कम से कम हमारी किताबें तो दें दे मेंबरशिप की कटी हुई
नसीमुद्दीन : बुलकार भाई ने बात की है सब लोगों ने बात की है
मायावती : आप वरिष्ठ आदमी हैं इतने साल से देखते रहे हैं इन लोगों का असर नहीं होगा आप वरिष्ठ आदमी थे जिस समाज से ताल्लुक रखते हैं उस समाज के लोगों को मेंबर बनाएं नहीं तो ये न हो कि सिर्फ दलितों को वोट पड़कर रह जाए। आप उनसे बात करो और अपना वो हिसाब किताब लेकर आएं मैं फिर बात करती हूं जो आपका काम है उसमें तेजी करो डिले हो रहा है ये ठीक नहीं है और उसी दिन फिर मैं बात करती हूं।

ईवीएम मुद्दे पर चुनाव आयोग ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, 55 राजनीतिक पार्टियां को EC ने दी प्रजेंटेशन

इलेक्ट्रिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल पर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने शुक्रवार को 55 राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों को चर्चा के लिए बुलाया है। इसमें 7 राष्ट्रीय स्तर की पार्टियां और 48 राज्य स्तर की छोटी-बड़ी पार्टियां शामिल हैं। इनमें से 16 पार्टियों की मांग है कि चुनाव के लिए फिर से बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाए। बैठक सुबह करीब 10 बजे नई दिल्ली में शुरू हुई, जिसमें चुनाव आयोग ने ईवीएम मशीन पर प्रजेंटेशन दी है।
इस बैठक में ईवीएम की विश्वसनीयता पर चर्चा की गई। माना जा रहा है इस दौरान चुनाव आयोग के ईवीएम हैकिंग चैलेंज की भी जानकारी दी जा सकती है। इस बैठक में ईवीएम हैकिंग चैलेंज की तारीख का भी ऐलान किया जा सकता है। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने हाल ही में एक ईवीएम को हैक करके दिखाया था। हालांकि चुनाव आयोग का दावा था कि वह असली ईवीएम मशीन नहीं थी, बस उसके जैसी दिखने वाली मशीन थी।

30 बच्चियों से रेप करने वाले पादरी को चर्च ने दी माफी, पर पोकेमॉन गेम खेलने वाले ब्लॉगर को जेल

दक्षिणी मैक्सिको के ओक्साका में 5 से 10 साल की 30 बच्चियों का रेप करने वाले एक कैथोलिक पादरी को जहां वेटिकन सिटी के पोप ने माफी दे दी वहीं रूस के एक चर्च में पोकेमॉन गो गेम खेलने पर रूसी ब्लॉगर रसलन सोकोलोवास्की के खिलाफ धार्मिक घृणा फैलाने और धार्मिक भावनाओं के ठोस पहुंचाने का केस दर्ज करवा दिया। जिसमें कोर्ट ने ब्लॉगर को साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है। ब्लॉगर पर आरोप है कि उसने धार्मिक आधार पर लोगों को उकसाने के मकसद से पारंपरिक चर्च में उसी स्थान पर पोकेमॉन गो गेम खेलते हुए एक वीडियो सोशल साइट पर पोस्ट की है, जहां साल 2012 में रूसी जार के परिवार समेत हत्या कर दी गई थी।
इससे पहले साल 2012 में भी इसी अपराध के लिए दो महिलाओं को दो साल के लिए जेल दिया जा चुका है। रूसी ब्लॉगर का वीडियो अगस्त 2016 का लिया हुआ है जिसे 19 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है। हालांकि, वीडियो में ब्लॉगर सोकोलोवास्की यह कहते हुए दिख रहा है कि वो चर्च में वीडियो बनाने जा रहा है, इस गलत कार्य के लिए उसे गिरफ्तार भी होना पड़ सकता है।
वीडियो में सोकोलोवास्की ने पूछा कि चर्च के पास स्मार्टफोन लेकर टहलने से भला किसे परेशानी होगी लेकिन अब वो पिछले साल अक्टूबर से ही जेल में बंद है। हालांकि वो जज के सामने बार-बार कहता रहा कि वो निर्दोष है लेकिन जज ने उसे यह कहते हुए सजा सुना दी कि सोकोलोवास्की का व्यवहार और उसका धार्मिक घृणा फैलाने वाला वीडियो समाज में विखंडन औक नफरत पैदा करने वाला है, इसलिए उसे अदालत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में सजा सुनाती है।
सोकोलोवास्की को अवैध रूप से स्पेशल टेक्निकल इक्वीपमेंट रखने का भी दोषी ठहराया गया है। उसके घर से पुलिस ने कैमरा लगा एक पेन भी बरामद किया था।