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शशिकला नेे कभी जयललिता के चलते पति को छोड़ दिया था, अब बनाया सलाहकार

माना जाता है कि नटराजन का बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध हैं।
जब एम नटराजन को जयललिता ने खुद और पार्टी से दूर कर दिया तो उनकी पत्नी शशिकला नटराजन जयललिता के साथ ही रहीं। लेकिन अब जयललिता के निधन के बाद नटराजन अपनी पत्नी के अहम सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं। पांच दिंसबर को जयललिता के निधन के अगले दिन चेन्नई के राजाजी हाल में जब उनका शव सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया तो शशिकला और उनके परिवार के 18 सदस्य उनके शव के चारों तरफ खड़े दिखे। जबकि जयललिता ने नवंबर 2011 में शशिकला और उनके 12 रिश्तेदारों को पार्टी से निकाल दिया था। करीब तीन महीने बाद शशिकला की तो वापसी तो हो गई लेकिन जयललिता एम नटराजन समते उनके किसी रिश्तेदार को जयललिता ने जीते जी अपने या पार्टी के नजदीक नहीं आने दिया था।
एआईएडीएमके से निकाले जाने के करीब दो महीने बाद एम नटराजन को एक जमीन घोटाले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से ही एम नटराजन सार्वजनिक चर्चाओं से दूर रहे हैं। माना जाता है कि 1987 में एमजी रामचंद्रन के निधन के बाद जब उनकी पत्नी वीएन जानकी और जयललिता के बीच सत्तासंघर्ष होने लगा तो दोनों के बीच मतभेद मिटाने में नटराजन ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन जब 1991 में जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं उसके बाद नटराजन परिवार पर उनके करीबी होने का अनुचित लाभ लेने के आरोप लगने लगे।
माना जाता है कि नटराजन की वजह से ही उनकी पत्नी शशिकला का जयललिता से परिचय हुआ था। धीरे-धीरे शशिकला जयललिता के करीब आती गईं लेकिन उनके पति से जयललिता की दूरी बढ़ती जा रही थी। 1996 में जयललिता ने नटराजन को अपने पोएस गार्डेन निवास से बाहर कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद एआईएडीएमके की अंदरूनी राजनीति में उनका दखल बना रहा। स्थानीय नेताओं की मानें तो हर विधान सभा चुनाव से पहले उनके घर पर टिकट पाने के इच्छुकों की कतार देखी जा सकती थी।
तमिलनाडु ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी नटराजन को काफी पहुंच वाला माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध हैं। कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से भी उनके बढ़िया तालुक्कात हैं। जयललिता के निधन के बाद जिस तरह दोबारा नटराजन उनके सहालकार के रूप में सामने आए हैं उससे माना जा रहा है कि वो राष्ट्रीय राजनीति में खुद को एआईएडीएमके के संपर्क सूत्र के तौर पर पेश करना चाहते हैं।
60 से अधिक उम्र के नटराजन का जन्म तंजवुर जिले के विलार गांव में हुआ था। उनके पिता साधारण किसान थे। बीए तक की शिक्षा प्राप्त नटराजन ने डीएमके नेताओं का एक छात्र नेता के तौर पर ध्यान खींचा था। नटराजन ने 1965 में राज्य में हुए हिंदी-विरोधी आंदोलन में छात्र नेता के तौर पर बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। बाद में डीएमके सरकार ने उन्हें असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (पीआरो) नियुक्त कर दिया।उसके बाद नटराजन के लिए सत्ता के गलियारों में आमदरफ्त आसान हो गई और वो सत्ता की सीढ़ियां चढ़ते गए।

सेना तैनाती विवाद: ममता बनर्जी का पर्रिकर पर पलटवार- आपको यह भी नहीं पता कि एक सीएम को खत कैसे लिखते हैं

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने मनोहर पर्रिकर की ओर से भेजे गए खत पर नाराजगी जाहिर की।
पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्‍हें यह भी नहीं पता कि एक मुख्‍यमंत्री को खत कैसे लिखते हैं। ममता ने मनोहर पर्रिकर की ओर से भेजे गए खत पर नाराजगी जाहिर की। उन्‍होंने कहा, ”वे सेना को राजनीतिक उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए इस्‍तेमाल कर रहे हैं। उन्‍हें नहीं पता कि एक मुख्‍यमंत्री को खत कैसे लिखते हैं। मैं आपके हवाई दावे पर कड़ा रूख लेती हूं। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के खत की भाषा से खुश नहीं हूं। मैंने सरकार की नीति के बारे में कहा था कि ना कि सेना के बारे में। मेरे लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में राजनीतिक बदले के लिए सम्‍मानित संगठन(सेना) के इस तरह के दुरुपयोग को कभी नहीं देखा। ”
इससे पहले रक्षा मंत्री ने खत लिखकर कहा था कि उनके आरोपों से उन्‍हें गहरा दुख हुआ है और इससे सुरक्षाबलों के उत्‍साह पर बुरा असर पड़ सकता है। पर्रिकर ने कहा कि राजनीतिक दल और राजनेता एक दूसरे के खिलाफ हवाई और बिना तथ्‍यों के आरोप लगा सकते हैं। लेकिन किसी भी व्‍यक्ति को सुरक्षाबलों के बारे में कुछ भी कहने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। दो पेज के इस लेटर में और भी बहुत कुछ लिखा गया है। लेटर में पर्रिकर ने बताया है कि सेना के जिस अभ्यास पर ममता बनर्जी ने विवाद खड़ा किया था वह काफी सालों पहले से हो रहा है। पर्रिकर ने आगे लिखा है कि उसके लिए राज्य सरकार को पहले ही सूचना दे दी गई थी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय नबन्ना भवन के पास स्थित टोल प्लाजा पर सेना के जवान तैनात कर दिए गए थे। उसपर ममता बनर्जी ने सवाल खड़े किए थे। ममता ने कहा था कि सरकार उन्हें घेरने के लिए वह सब कर रही है। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या सेना तख्तापलट की कोशिश कर रही है? इस दौरान 30 घंटे तक ममता बनर्जी सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में ही रही। हालांकि, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने सफाई देते हुए कहा था कि ये एक रूटीन अभ्यास था और राज्य प्रशासन को इसके बारे में पहले से सूचित किया गया था। सेना की ओर से भी कहा गया कि यह रूटीन प्रकिया है।

IND vs ENG: पहले दिन रहा स्पिनर्स का दबदबा, लिए सभी विकेट, इंग्लैंड ने बनाए 5/288 रन

मुंबई।  टीम इंडियाऔर इंग्लैंड के बीच चौथे टेस्ट का पहला दिन स्पिनर्स के नाम रहा। वानखेड़े स्टेडियम में खेले जा रहे मैच में अश्विन ने अब तक गिरे 5 में से 4 विकेट लिए हैं, जबकि एक विकेट जडेजा के खाते में गया है। टॉस जीकर पहले बैटिंग कर रही इंग्लैंड की टीम ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक 94 ओवर में 5 विकेट पर 288 रन बनाए हैं। बेन स्टोक्स (25) और जोस बटलर (18) क्रीज पर हैं। (LIVE स्कोर के लिए यहां क्लिक करें)
जडेजा ने दिया पहला झटका, अश्विन ने कराई टीम इंडिया की वापसी
टीम इंडिया को पहली सफलता रवींद्र जडेजा ने दिलाई। उन्होंने एलिस्टर कुक (46) को स्टंप कराया। इसके बाद तो अश्विन एकतरफा इंग्लिश बैट्समैन पर भारी नजर आए। जो रूट को अश्विन ने कोहली के हाथों 21 रन के निजी स्कोर पर लपकवाया। तीसरे विकेट के रूप में मोईन अली आउट हुए। उन्हें अश्विन ने 50 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन भेजा, जबकि जेनिंग्स 112 और बैरिस्टो 14 रन बनाकर आउट हुए।
भारत 5 मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे है। चौथे टेस्ट मैच में जीत या ड्रॉ से वह सीरीज का विजेता बन जाएगा। इंग्लैंड ने भारत को लगातार तीन सीरीज में हराया है। अब भारत के पास इसका हिसाब बराबर करने का बेहतरीन मौका है।
2011, 2014 और फिर 2015 में इंग्लैंड ने हराया
विराट कोहली की अगुआई वाली यह टीम भी इस बात को जानती है और किसी भी हाल में वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी। इंग्लैंड ने भारत को 2011, 2014 और फिर 2015 में हराया था। इसके अलावा भारत के पास लगातार 17 टेस्ट मैचों में अपराजित रहने के रिकार्ड की बराबरी का बेहतरीन मौका है। भारत ने अपने पिछले 16 टेस्ट मैचों में हार का स्वाद नहीं चखा है।
ऐसा रहा मैच का रिजल्ट
राजकोट में खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ रहा था। इसके बाद भारत ने विशाखापट्नम और मोहाली में खेले गए दूसरे और तीसरे टेस्ट मैच में जीत हासिल करते हुए मेहमानों पर दवाब बनाया है। अब तकरीबन सप्ताह भर के अंतराल के बाद मैदान पर उतरने वाली मेजबान टीम जीत दर्ज कर अपने बचे काम को अंजाम देना चाहेगी।
टीमें...
भारत :- विराट कोहली (कप्तान), मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, करूण नायर, रविचंद्रन अश्विन, पार्थिव पटेल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, उमेश यादव, जयंत यादव।
इंग्लैंड :- एलिस्टर कुक (कप्तान), केटन जेनिंग्स, जो रूट, मोइन अली, बेन स्टोक्स, जॉनी बेयरस्टो, जोस बटलर, क्रिस वोक्स, आदिल राशिद, जेम्स एंडरसन, जैक बॉल।

दिल्ली के उप राज्यपाल पर अरविंद केजरीवाल का नया आरोप- नजीब जंग सड़क साफ करने में भी टांग अड़ा रहे

दिल्ली में बढ़े प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि सरकार सड़कों पर जमे धूल को वैक्यूम क्लीनर से साफ करेगी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उप राज्यपाल नजीब जंग पर नया आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एलजी नजीब जंग दिल्ली की सड़कों की वैक्यूम क्लीनर से सफाई करने में टांग अड़ा रहे हैं और बेवजह विभाग से रिपोर्ट मंगवा रहे हैं, ताकि सड़क सफाई का काम बाधित हो सके। दरअसल दीवाली के बाद दिल्ली में बढ़े प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि सरकार दिल्ली की सड़कों पर जमे धूल को वैक्यूम क्लीनर से साफ करेगी। हालांकि, यह काम हो नहीं सका था और हवा की गति में बढ़ोत्तरी होने की वजह से दिल्ली में उस समय ठहरा धुंध छंट गया था। अब जब ठंड बढ़ी है और दिल्ली में फिर से कोहरे और प्रदूषण की धुंध बढ़ी है तब दिल्ली सरकार दिल्ली की सड़कों को साफ करने जा रही है लेकिन एलजी ने इससे संबंधित कुछ फाइलें राजभवन मंगवाई है।
उप राज्यपाल के इस कदम से आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खफा हो गए हैं। उन्होंने जान बूझकर आप सरकार को परेशान करने का आरोप एलजी पर लगाया है। अब कहा जा रहा है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अगले सप्ताह इस मामले में उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करेंगे।
गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग में दिलराज कौर को सदस्य सचिव नियुक्त किए जाने से नाराज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भी उप राज्यपाल नजीब जंग पर निशाना साधा था और उनकी तुलना ‘हिटलर’ से की थी। केजरीवाल ने ट्वीट किया था, ‘उप राज्यपाल हिटलर की तरह व्यवहार कर रहे हैं, पीएम मोदी और अमित शाह के पदचिन्हों पर चल रहे हैं।…नजीब जंग प्रधानमंत्री को अपनी आत्मा बेच चुके हैं।’ इसके बाद केजरीवाल ने जंग पर निशाना साधते हुए एक और ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘नजीब जंग ने उप राष्ट्रपति बनने के लिए अपनी आत्मा को मोदी को बेच दिया। पर मोदी कभी मुस्लिम को उप राष्ट्रपति नहीं बनाएंगे, जंग जो मर्जी कर लें।’
हाल ही में महिला आयोग के सदस्य सचिव की नियुक्ति को लेकर केजरीवाल और जंग के बीच नए सिरे से टकराव की स्थिति पैदा हुई है। बता दें, केजरीवाल पहले भी नजीब जंग पर केंद्र का एजेंट होने का आरोप कई बार लगा चुके हैं। जंग और केजरीवाल में कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। अब सड़कों की सफाई को लेकर भी नया विवाद खड़ा हुआ है।

नोटबंदी का एक महीना, सच होती दिख रही है मनमोहन सिंह की भविष्यवाणी, जानिए- हमने क्या खोया और क्या पाया

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के बयान के मुताबिक, बैंकों में अब तक 11.5 लाख करोड़ रुपये वापस आ चुके हैं। सिर्फ 3 लाख करोड़ रुपये बचे हैं और अभी 22 दिन बाकी हैं।
भारत की कुल आधिकारिक जीडीपी (काला धन और सफेद धन मिलाकर) 225 लाख करोड़ रुपये की है। एक अनुमान के मुताबिक इनमें से काला धन 75 लाख करोड़ रुपये और सफेद धन 150 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, देश में कुल कितना कालाधन है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है लेकिन एक आंकलन में कहा गया कि देश में मौजूद काला धन का 8 फीसदी हिस्सा नकदी रुप में है। यानी 75 लाख करोड़ का 8 फीसदी हिस्सा करीब 6 लाख करोड़ रुपये नकदी रूप में है।
आर्थिक मामलों के जानकारों में भी काला धन की रकम पर मतभेद है। प्रो. अरुण कुमार इसे 6.5 लाख करोड़ रुपये मानते हैं। एक सरकारी वकील ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसी उम्मीद है कि 5 लाख करोड़ रुपये नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में वापस नहीं आ सकेंगे। इसलिए कई आर्थिक जानकार करीब-करीब 6 लाख करोड़ रुपया काला धन का अनुमान लगा रहे हैं।
31 मार्च 2016 के आंकड़े के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोटों की कुल कीमत 14.5 लाख करोड़ रुपये थी। सरकार ने इन नोटों को 8 नवंबर 2016 को प्रचलन से बाहर कर दिया। यानी उनकी नोटबंदी कर दी। लिहाजा, आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक 14.5 लाख करोड़ रुपये में से 6 लाख करोड़ रुपये जो काला धन है उसे हटा दिया जाय तो शेष कुल 8.5 लाख करोड़ रुपये सफेद धन है। सरकार को उम्मीद थी कि 500 और 1000 रुपये के रूप में जो कालाधन मौजूद है वह दोबारा बैंकों में जमा नहीं होंगे।
अगर बैंकों में सिर्फ 8.5 लाख करोड़ रुपये ही जमा होते हैं तो सरकार यह दावा कर सकती थी कि काला धन (6 लाख करोड़ रुपया) अर्थव्यवस्था से बाहर हो गया लेकिन अगर कुल 14. 5 लाख करोड़ रुपये बैंकों में वापस जमा हो जाते हैं तो कहा जा सकता है कि सरकार इस मुद्दे पर फेल रही है। हालांकि, सरकारी वकील शुरू से ही सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क देते रहे हैं कि 5 लाख करोड़ रुपये वापस नहीं आ पाएंगे। हालांकि अभी तक करीब 11 लाख करोड़ रुपये वापस बैंकों में जमा हो चुके हैं। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर सरकारी दावे को मान भी लेते हैं तो इस नोटबंदी से सिर्फ 6 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आएंगे।

एक्टर दिलीप कुमार मुंबई के लीलावती अस्पताल में एडमिट, सामने आई तस्वीरें

दिलीप कुमार का 11 दिसंबर को जन्मदिन है और वह 94 साल के हो जाएंगे। उनकी पत्नी सायरा को उम्मीद है कि उससे पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।
बॉलीवुड एक्टर दिलीप कुमार को पांव में सूजन के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंगलवार को 93 साल के दिलीप को मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित लीलावती हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। उनकी पत्नी सायरा बानो ने कहा, “उनके दाएं पांव में सूजन आ गई है और हम अच्छी तरह जांच कराने के लिए यहां आए हैं। इसके अलावा, हर कुछ महीने बाद उनका रूटीन चेकअप भी किया जाता है।” उन्होंने कहा, “दिलीप कुमार ठीक हैं। बुधवार सुबह उनका ब्लड टेस्ट किया गया है और घबराने की कोई भी बात नहीं हैं।”
बता दें कि दिलीप कुमार का 11 दिसंबर को जन्मदिन है और वह 94 साल के हो जाएंगे। उनकी पत्नी सायरा को उम्मीद है कि उससे पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। सायरा ने कहा, “डॉक्टर्स उनकी देखभाल कर रहे हैं। मैं आशा और उम्मीद करती हूं कि अपने जन्मदिन तक वह घर आ जाएंगे।” इससे पहले अप्रैल महीने में भी दिलीप कुमार को सांस लेने में दिक्कत के बाद कुछ दिन के लिए लीलावती हॉस्पिटल में ए़़डमिट कराया गया था।

 

संसद नहीं चलने पर लोकसभा अध्‍यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री पर गुस्‍साए लालकृष्‍ण आडवाणी, कहा- अनिश्चित काल के लिए ही स्‍थगित कर दो

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। इसके बाद लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने संसद नहीं चलने पर बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री पर गुस्सा निकाला। संसद में तीसरे सप्ताह भी लगातार विरोध होने पर आडवाणी ने लोकसभा चलाने के तरीके पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ना संसदीय कार्यमंत्री और और ना ही लोकसभा स्पीकर सदन चला रहे हैं। आडवाणी को संसद में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन की वजह से संसदीय मंत्री अनंत कुमार से नाराजगी जाहिर करते हुए देखा गया है। आडवाणी ने अपनी नाराजगी उस वक्त जाहिर की जब विरोधी दलों के कुछ सदस्य सत्ता पक्ष की बैंच की ओर आए और नारे लगाने लगे।
कांग्रेस और टीएमसी सांसदों द्वारा नारे लगाने के बाद लंच से पहले 15 मिनट के लिए सदन को स्थगित करने से पहले आडवाणी ने कहा, ‘ना ही स्पीकर और ना ही संसदीय कार्यमंत्री सदन चला रहे हैं। मैं स्पीकर के पास यह कहने जा रहा हूं कि वे सदन नहीं चला रही हैं। मैं इसे सार्वजनिक तौर पर कहने जा रहा हूं।’ इस दौरान कुमार चुपचाप उन्हें सुनते रहे। साथ ही अनंत ने मीडिया गैलरी की ओर इशारा करते यह भी कहा कि उनकी यह टिप्पणी मीडिया में रिपोर्ट कर दिया जाएगा।
जब सदन को स्थगित किया गया तो आडवाणी ने लोकसभा के एक अधिकारी से पूछा कि सदन कितने बजे तक के लिए स्थगित किया गया है। जब उन्हें बताया कि दो बजे तक तो उन्होंने कहा, ‘अनिश्चित काल तक क्यों नहीं कर देते?’ इससे पहले भी आडवाणी ने सदन की कार्यवाही को लेकर कुमार से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
बता दें, संसद के शीतकालीन सत्र का चौथा हफ्ता है। बुधवार को कार्यवाही का 16 वां दिन है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। हंगामे के बाद लोकसभा पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई। इससे पहले राज्यसभा और लोकसभा दो बजे तक स्थगित कर दी गई थी। वहीं, कार्यवाही से पहले बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक और विपक्षीय दल के नेताओं की बैठक हुई थी। विपक्ष ने बैठक में नोटबंदी के कारण पेशनधारक और वेतनभोगी कर्मचारियों को हो रही दिक्कत को लेकर नियम 184 के तहत चर्चा की मांग की। वहीं बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक में भी कई फैसले लिए गए।

 

संसद नहीं चलने पर लोकसभा अध्‍यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री पर गुस्‍साए लालकृष्‍ण आडवाणी, कहा- अनिश्चित काल के लिए ही स्‍थगित कर दो

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। इसके बाद लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने संसद नहीं चलने पर बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री पर गुस्सा निकाला। संसद में तीसरे सप्ताह भी लगातार विरोध होने पर आडवाणी ने लोकसभा चलाने के तरीके पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ना संसदीय कार्यमंत्री और और ना ही लोकसभा स्पीकर सदन चला रहे हैं। आडवाणी को संसद में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन की वजह से संसदीय मंत्री अनंत कुमार से नाराजगी जाहिर करते हुए देखा गया है। आडवाणी ने अपनी नाराजगी उस वक्त जाहिर की जब विरोधी दलों के कुछ सदस्य सत्ता पक्ष की बैंच की ओर आए और नारे लगाने लगे।
कांग्रेस और टीएमसी सांसदों द्वारा नारे लगाने के बाद लंच से पहले 15 मिनट के लिए सदन को स्थगित करने से पहले आडवाणी ने कहा, ‘ना ही स्पीकर और ना ही संसदीय कार्यमंत्री सदन चला रहे हैं। मैं स्पीकर के पास यह कहने जा रहा हूं कि वे सदन नहीं चला रही हैं। मैं इसे सार्वजनिक तौर पर कहने जा रहा हूं।’ इस दौरान कुमार चुपचाप उन्हें सुनते रहे। साथ ही अनंत ने मीडिया गैलरी की ओर इशारा करते यह भी कहा कि उनकी यह टिप्पणी मीडिया में रिपोर्ट कर दिया जाएगा।
जब सदन को स्थगित किया गया तो आडवाणी ने लोकसभा के एक अधिकारी से पूछा कि सदन कितने बजे तक के लिए स्थगित किया गया है। जब उन्हें बताया कि दो बजे तक तो उन्होंने कहा, ‘अनिश्चित काल तक क्यों नहीं कर देते?’ इससे पहले भी आडवाणी ने सदन की कार्यवाही को लेकर कुमार से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
बता दें, संसद के शीतकालीन सत्र का चौथा हफ्ता है। बुधवार को कार्यवाही का 16 वां दिन है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। हंगामे के बाद लोकसभा पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई। इससे पहले राज्यसभा और लोकसभा दो बजे तक स्थगित कर दी गई थी। वहीं, कार्यवाही से पहले बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक और विपक्षीय दल के नेताओं की बैठक हुई थी। विपक्ष ने बैठक में नोटबंदी के कारण पेशनधारक और वेतनभोगी कर्मचारियों को हो रही दिक्कत को लेकर नियम 184 के तहत चर्चा की मांग की। वहीं बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक में भी कई फैसले लिए गए।

 

जेल जाने से टूट गई थीं जयललिता, तभी से बिगड़ी सेहत, साथ रहने वालों ने पहली बार बताईं ये बातें

जयललिता का स्‍वास्‍थ्‍य कभी भी चिंता का विषय नहीं रहा और ना ही कभी तमिलनाडु में यह सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना।
जयललिता का स्‍वास्‍थ्‍य कभी भी चिंता का विषय नहीं रहा और ना ही कभी तमिलनाडु में यह सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना। लेकिन सितम्‍बर 2014 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल जाने के बाद से उनकी तबीयत नासाज रहने लगी। इस मामले में वे आठ महीने बाद बरी हो गई थीं। जया ने हमेशा अपनी गोपनीयता को लेकर सावधान बरतीं और कभी भी किसी को भी इसमें दखल नहीं देने दिया। इसलिए किसी को भी ठीक तरह से नहीं पता कि वे कितनी बीमार थीं। जयललिता सार्वजनिक रूप से आखिरी बार 20 सितम्‍बर को देखी गई थीं। इसके दो दिन बाद उन्‍हें अपोलो अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। जब वैंकेया नायडू और पोन राधाकृष्‍णन चेन्‍नई एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन की नई लाइन का अनावरण करने आए थे तब भी जया अपने दफ्तर से वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ीं। उनकी सुरक्षा टीम के एक अधिकारी ने बताया, ”वह पहले से ही बीमार थीं। उस दिन भी उन्‍हें व्‍हीलचेयर से लाया गया था और वहीं पर वीडियो शूट किया गया।”
कर्नाटक जेल से रिहा होने के बाद जया की तबीयत तेजी से खराब हुई। इसी समय उनके विरोधियों ने उनकी लाइफस्टाइल और कम काम करने को लेकर सवाल उठाए। हाल ही में रिटायर हुए एक आईएएस अधिकारी ने बताया, ”मुख्‍यमंत्री बनने के बाद उन्‍होंने खुद को बड़ी जिम्‍मेदारियों से दूर रखा। पूर्व चीफ सेक्रेटरी शीला बालाकृष्‍णन सहित अन्‍य विश्‍वस्‍त साथियों ने ही सरकार चलाई।” जया के सुरक्षा बेड़े में काम कर चुके एक वरिष्‍ठ पुलिसकर्मी ने पिछले आम चुनावों की घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार फोर्ट सेंट जॉर्ज का आधा रास्‍ता तय करने के बाद उन्‍होंने अचानक कहा कि उन्‍हें घर जाना है। अधिकारी ने बताया, ”उन्‍होंने ड्राइवर को गाड़ी घुमाने को कहा। उन्‍हें बैचेनी महसूस हो रही थी और घर जाना चाहती थीं। उन्‍हें दर्द हो रहा था। इसके चार घंटे बाद वे अपने दफ्तर जा पाईं।”
साल 2015 में सेहत बिगड़ने के बाद जयललिता के सिक्‍योरिटी प्रोटोकॉल में किए गए बदलावों के बारे में एक अधिकारी ने बताया कि आय से अधिक मामले में दोषी ठहराए जाने से पहले मुख्‍यमंत्री और सुरक्षा अधिकारियों की गाड़ी में दो फीट का गैप रहता था। जेल जाने के बाद वह कमजोर हो गई थीं। इसके बाद यह गैप केवल एक फीट रखा गया ताकि जरूरत पड़ने पर जल्‍दी मदद की जा सके। पिछले दो सालों में उन्‍हें लंबे समय तक खड़े रहने में दिक्‍कत होती थी। सार्वजनिक रैलियों के दौरान मंच पर जाने के लिए वह एलिवेटर का इस्‍तेमाल करती थीं। वह बैठकर ही भाषण देती थीं।”
एक पूर्व राज्‍य मंत्री के शब्‍दों में, ”जेल ने उनकी सेहत बिगाड़ दी। जेल में उन्‍होंने डॉक्‍टर्स से मिलने और मेडिकल मामलों की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था। हालांकि कुछ सीनियर नेताओं और नौकरशाहों के समझाने पर वह मानी। हमने उनके लिए विशेष रूप से तैयार की गई कुर्सी जेल में भिजवाई। बाकी नेता जेल के बाहर सोते थे जिससे कि उन्‍हें लगे कि वह अकेली नहीं हैं। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद अम्‍मा बदल गईं थी। उन्‍हें ना तो जमानत और ना बरी होने से खुशी मिली।”

जानिए क्‍यों ब्राह्मण होने के बावजूद दाह संस्‍कार करने के बजाय दफनाई गईं जयललिता

चेन्‍नई के अपोलो हॉस्पिटल में सोमवार (5 दिसंबर) की रात 11.30 बजे 'अम्‍मा' ने दुनिया को अलविदा कहा।

अन्‍य द्रविड़ नेताओं से इतर, जे जयललिता का मरीना बीच पर दाह संस्‍कार नहीं हुआ, बल्कि उन्‍हें दफनाया गया। नियमित रूप से प्रार्थना करने वाली और माथे पर अक्‍सर आयंगर नमम लगाने वाली जयललिता को दफनाने का फैसला सरकार और श‍‍शिकला ने क्‍यों लिया, जबकि आयंगरों में दाह संस्‍कार की प्रथा है। दिवंगत मुख्यमंत्री के अंतिम संस्‍कार से जुड़े एक वरिष्‍ठ सरकारी सचिव ने बताया है‍ कि उन्‍हें मरीना बीच पर दफनाया क्‍यों गया। उन्‍होंने कहा, ”वह हमारे लिए आयंगर नहीं थीं। वह किसी जाति और धार्मिक पहचान से परे थीं। यहां तक कि पेरियार, अन्‍ना दुरई और एमजीआर जैसे ज्‍यादातर द्रविड़ नेता दफनाए गए थे और हमारे पास उनके शरीर का दाह-संस्‍कार करने की कोई मिसाल नहीं है। तो, हम उन्‍हें चंदन और गुलाब जल के साथ दफनाते हैं।” पूर्व नेताओं को दफनाए जाने से समर्थकों को एक स्‍मारक के तौर पर उन्‍हें याद रखने में सहायता होती है। द्रविड़ आंदोलन के नेता नास्तिक होते हैं, जो कि सैद्धांतिक रूप से ईश्‍वर और समान प्रतीकों को नहीं मानते। लेकिन यह दिलचस्‍प है कि ईश्‍वर के अस्तित्‍व से पैदा हुई कमी को मूर्तियों और स्‍मारकों से भर दिया जाता है। फैंस और समर्थकों को विश्‍वास है कि वे अभी भी मरीना बीच पर एमजीआर की घड़ी के टिक-टिक करने की आवाज सुन सकते हैं।
तमिलनाडु के कई नेताओं को दफनाए जाने की प्रक्रिया देखने वाले एक वरिष्‍ठ राजनैतिक एनालिस्‍ट कहते हैं कि दफनाने के पीछे एक से ज्‍यादा वजहें हो सकती हैं। उन्‍होंने कहा, ”चूंकि, वह विश्‍वास रखती थीं, यह तय है कि लोग मृत्‍यु के बाद उन्‍हें दफनाने की ही बात करेंगे। लेकिन उन्‍हें दाह संस्‍कार के लिए एक सगा रिश्‍तेदार चाहिए। जयललिता की सिर्फ सगी भतीजी दीपा जयाकुमार (ज‍यललिता के स्‍वर्गवासी भाई, जयाकुमार की बेटी) हैं। यह भी साफ है कि शशिकला का वंश दीपा को किसी तरह से भी अंतिम संस्‍कार जुलूस के आस-पास फटकने नहीं देगा क्‍योंकि उससे चुनौती पैदा होगी।”
ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी से मीडिया और कम्‍युनिकेशंस में रिसर्च कर रहीं दीपा को अपोलो हॉस्पिटल में भी जयललिता से मिलने नहीं दिया गया था, जबकि वह कई बार उन्‍हें देखने अस्‍पताल गई थीं। दो दिन पहले, पुलिस दीपा और उनके पति को अपोलो हॉस्पिटल के गेट से बाहर धक्‍का देते हुए नजर आई थीं। दोनों को मीडिया से दूर रखने के निर्देश वरि ष्‍ठ नेताओं की तरफ से आए थे।

नोटबंदी पर भड़का रूस, कहा- लिमिट इतनी कम है कि अच्छे से डिनर का बिल भी नहीं दे सकते

भारत सरकार द्वारा उठाए गए नोटबंदी के कदम पर रूस ने अपना रुख कड़ा कर लिया है।

भारत सरकार द्वारा उठाए गए नोटबंदी के कदम पर रूस ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। इतना ही नहीं रूस ने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि भारतीय राजदूतों के साथ ‘बदले की कार्यवाही’ की जा सकती है। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, रूस की सरकार ने बताया कि राजदूत एलेक्सजेंडर कदाकिन ने विदेश मंत्रालय को नोटबंदी से हो रही परेशानी के लिए एक पत्र लिखा है और फिलहाल उसके जवाब का इंतजार कर रहे हैं। दो दिसंबर को मॉस्को के कुछ सूत्रों ने कहा था कि विरोध जताने के लिए उनकी तरफ से भारतीय राजनयिक को समन भी किया जा सकता है। रूस की सरकार इस बात का विरोध कर रही है कि भारत सरकार ने उनके राजदूतों पर हफ्ते में 50 हजार रुपए निकालने की लिमिट लगा दी है। जिससे उनके राजदूतों को काफी परेशानी हो रही है।
खबर के मुताबिक, राजदूत ने सवाल किया कि इतने पैसों में कैसे काम चलेगा। नोटबंदी से हो रही परेशानी का जिक्र करते हुए एलेक्सजेंडर कदाकिन ने अपने पत्र में लिखा है, ‘लिमिट इतनी कम है कि एक अच्छा सा डिनर का बिल भी नहीं भरा जा सकता।’ उन्होंने आगे सवाल किया कि इतने पैसों में दिल्ली में इतना बड़ा दूतावास कैसे काम करेगा? रूस के दिल्ली में बने दूतावास में लगभग 200 के करीब लोग रहते हैं।
इससे पहले पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने भी नोटबंदी से हो रही परेशानी का जिक्र किया था। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने 8 दिसंबर को नोटबंदी का एलान किया था। बताया गया था कि 30 दिसंबर के बाद 500 और 1000 के नोट चलने बंद हो जाएंगे। साथ ही 2000 और 500 के नए नोट लाने का भी एलान किया गया था। हालांकि, लोगों के पैसे निकालने और जमा करवाने के लिए कुछ पाबंदी लगाई गई हैं जिनके नियम वक्त-वक्त पर सरकार द्वारा बदले जा रहे हैं।
 

जयललिता के निधन पर अपोलो अस्‍पताल ने कहा- हमने उन्‍हें बचाने के लिए हरसंभव क्लिनिकल प्रयास किया

तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता को पांच दिसंबर की रात में निधन हो गया। वे 74 दिन से अपोलो अस्‍पताल में भर्ती थीं।
तमिलनाडु की मुख्‍यमंत्री जे जयललिता का पांच दिसंबर की रात में निधन हो गया। वे 74 दिन से अपोलो अस्‍पताल में भर्ती थीं। अपोलो अस्‍पताल ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि रविवार दोपहर को उन्‍हें कार्डिएक अरेस्‍ट हुआ। इसके बाद डॉक्‍टर्स ने उन्‍हें बचाने की पूरी मेहनत की लेकिन कामयाबी नहीं मिली और सोमवार(पांच दिसंबर) को रात साढ़े 11 बजे उनका निधन हो गया। अपोलो अस्पताल ने एक बयान में कहा, ‘‘अवर्णननीय दुख के साथ हम अपनी प्रतिष्ठित सम्मानीय तमिलनाडु की मुख्यमंत्री पुरात्ची थालाइवी अम्मा के रात ग्यारह बजकर 30 मिनट पर दुखद निधन की घोषणा करते हैं। हमारी सम्मानित मुख्यमंत्री सेल्वी जे जयललिता को 22 सितंबर को बुखार और निर्जलीकरण की शिकायतों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। माननीय मुख्यमंत्री पर क्रिटिकल केयर यूनिट में मल्टी डिसिप्लिनरी केयर का असर हुआ और वह काफी हद तक उबर गई थीं और मुंह से खाना लेने में समक्ष हो गई थीं।’’
विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘उस आधार पर माननीय मुख्यमंत्री को एडवांस्ड क्रिटिकल केयर यूनिट से हाई डिपेंडेंसी यूनिट में स्थानांतरित किया गया, जहां हमारे विशेषज्ञ चिकित्सकों की करीबी निगरानी में उनके स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण अंगों के कामकाज में सुधार जारी था।’ विज्ञप्ति में कहा गया है कि दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री को चार दिसंबर की शाम को गंभीर दिल का दौरा पड़ा, जब उनके कमरे में इंटेसिविस्ट थे। मुख्यमंत्री को तत्काल एक घंटे के भीतर सीपीआर और ईसीएमओ मदद प्रदान किया गया। ईसीएमओ फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे आधुनिक उपचार उपलब्ध है। उन्हें जीवित रखने के लिए हर संभव क्लिनिकल प्रयास किये गए। हालांकि, हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद मुख्यमंत्री की स्थिति ने उन्हें उबरने से अक्षम बना दिया और उनका सोमवार( 5 दिसंबर) की रात साढ़े 11 बजे निधन हो गया।
जयललिता के देहांत की खबर से पूरे राज्य में शोक की खबर फैल गई। वहीं, ओ पनीरसेल्वम को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। पनीरसेल्वम ने आधी रात मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के मद्देनजर मंगलवार से सात दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। मुख्य सचिव पी राम मोहन राव ने एक अधिसूचना में कहा कि इस अवधि में सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इस दौरान कोई आधिकारिक मनोरंजन भी नहीं होगा। सरकार ने राज्य में सभी शिक्षण संस्थानों में तीन दिवसीय अवकाश की भी घोषणा की है। पड़ोस के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी ने भी जयललिता के सम्मान में मंगलवार को सभी सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में एक दिन की छुट्टी की घोषणा की है।

जयललिता के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने जताया दुख, कहा- जया से बातचीत के मौकों को संजोकर रखेंगे

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंध रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया।

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के साथ अच्छे व्यक्तिगत संबंध रखने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। वे अंतिम दर्शन के लिए चेन्‍नई भी जाएंगे। उन्‍होंने कहा कि इससे भारतीय राजनीति में बड़ा शून्य पैदा हो गया है। चेन्नई के एक निजी अस्पताल में 5 दिसंबर रात को अंतिम सांस लेने वाली अन्नाद्रमुक प्रमुख की सराहना करते हुए मोदी ने कहा कि लोगों से उनका जुड़ाव, गरीबों, महिलाओं तथा वंचितों के कल्याण के लिए उनकी चिंता को हमेशा ‘‘प्रेरणा स्रोत’’ के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह उन असंख्य मौकों को हमेशा संजोकर रखेंगे जब ‘‘मुझे जयललिता जी के साथ बातचीत का अवसर मिला। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।’’
कई ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘सेल्वी जयललिता के निधन पर बहुत दुखी हूं। उनके निधन ने भारतीय राजनीति में बड़ा शून्य पैदा किया है। इस दुख की घड़ी में मेरी प्रार्थनाएं और भावनाएं तमिलनाडु की जनता के साथ हैं।’’
जयललिता का 75 दिन तक मौत से लड़ने के बाद चेन्नई के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके देहांत की खबर से पूरे राज्य में शोक की खबर फैल गई। तीन दिन के लिए राज्य के सारे स्कूलों को बंद रखा गया है। लोगों के दुख और गुस्से को देखते हुए पुलिस अलर्ट पर है। इससे पहले बुखार एवं निर्जलीकरण की शिकायत के चलते जयललिता को 22 सितंबर को अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं देर रात पार्टी मीटिंग में पन्‍नीरसेल्वम को विधयाक दल का नेता चुन लिया गया। बाद में पन्नीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली।

…जब विधानसभा में बदसलूकी के बाद जयललिता ने ली थी कसम, अब सीएम बनकर ही लौटूंगी

68 वर्षीय जयललिता 22 सितंबर से ही अपोलो अस्पताल में भर्ती हैं। रविवार को उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हुआ था।

तमिलनाडु की सीएम जयललिता चेन्नई के अपोलो अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं। अस्पताल ने कहा है कि वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रहे हैं लेकिन सीएम की हालत अभी गंभीर बनी हुई। उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि अपनी जिजीविषा के लिए विख्यात जयललिता ये लड़ाई जरूर जीतेंगे। इस मौके पर उनके चाहने वाले 1989 में तमिलनाडु विधान सभा में हुए उस घटना को याद कर रहे हैं जब सदन में उनके साथ बदसलूकी की गई थी और उन्होंने कसम खाई थी कि वो सीएम बनकर ही विधान सभा में लौटेंगे। महज दो साल बाद उन्होंने अपनी कसम निभाते हुए सीएम के रूप में सदन में वापसी की थी। उनके चाहने वाले उन्हें प्यार से “अम्मा” कहते हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है आकस्मिक स्थिति से तैयार रहने के लिए अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए हैं। वहीं अर्ध सैनिक बलों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। आइए जयललिता की राजनीतिक सफर पर एक नजर डालते हैं।
जयललिता का जन्म 24 फरवरी 1948 को मैसूर के एक परंपरागत तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब वो दो साल की थीं तभी उनके पिता का देहांत हो गया। पिता का निधन परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी इसलिए उन्हें 1961 में महज 13 साल की उम्र में बाल कलाकर के तौर पर फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। 1964 में कन्नड़ फिल्म चिन्नादा गोमबे (सोने की गुड़िया) से उन्होंने व्यस्क भूमिकाएं करनी शुरू की। उन्होंने फिल्मी जीवन की शुरुआत भले ही कन्नड़ फिल्मों से की हो लेकिन उन्हें बड़ी सफलता तमिल फिल्मों में मिली। 1965 में जयललिता ने अपनी पहली तमिल फिल्म “वेन्निरा अदाई” (सफेद लिबास) की। इसी साल उन्होंने तमिल फिल्मों के सुपरस्टार एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) के साथ भी पहली बार काम किया।
एमजीआर और जयललिता की जोड़ी सुनहरे परदे पर हिट रही। दोनों ने एक साथ 28 फिल्मों में लीड रोल किया। 1970 के दशक में दोनों ने अज्ञात कारणों से एक साथ फिल्में करनी बंद कर दी थीं। दोनों ने आखिरी बार 1973 में आई फिल्म पट्टीकट्टू पोनैया में काम किया था। हालांकि जयललिता 1980 तक फिल्मों में काम करती रहीं। उन्होंने अपने करीब बीस साल लंबे फिल्मी करियर में करीब 300 फिल्मों में काम किया। उन्होंने कुछ हिंदी और एक अंग्रेजी फिल्म में भी अभिनय किया था लेकिन वहां वो सफलता का स्वाद नहीं चख सकीं।
फिल्मों में जयललिता के मेंटर रहे एमजीआर राजनीति में भी उनके गुरु बने। 1977 में एआईएडीएमके के नेता के तौर पर एमजीआर पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने। उनके पीछे-पीछे जयललिता भी आज्ञाकारी शिष्या की तरह 1982 में एआईएडीएमके की सदस्य बनकर राजनीति में आ गईं। 1983 में उन्हें पार्टी के प्रचार विभाग का सचिव बनाया गया। 1984 में एमजीआर ने उन्हें राज्य सभा का सांसद बनाया। हालांकि कुछ समय बाद ही एमजीआर से उनके मतभेद शुरू हो गए। जब 1987 में एमजीआर का देहांत हुआ तो पार्टी में विरासत की जंग छिड़ गई। पार्टी का एक धड़ा एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन के साथ था तो दूसरा धड़ा जयललिता के साथ।

एआईएडीएमके के कुल 132 विधायकों में से 97 के समर्थन से जानकी 1988 में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं लेकिन राजीव गांधी की तत्कालीन केंद्र सरकार ने 21 दिन बाद ही उनकी सरकार को बरखास्त कर दिया। 1989 के तमिलनाडु विधान सभा चुनाव में एआईएडीएमके की अंदरूनी कलह का साफ असर दिखा और डीएमके सत्ता में वापस आ गई। जयललिता के गुट को चुनाव में 27 सीटें मिली थीं वहीं जानकी गुट को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में करारी हार के बाद जानकी ने राजनीति से किनारा कर लिया और एआईएडीएमकी और एमजीआर की राजनीतिक विरासत की एकमात्र उत्तराधिकारी जयललिता बन गईं।

तमिलनाडु और जयललिता के राजनीतिक इतिहास में 25 मार्च 1989 का दिन काफी अहम है। उस दिन विधान सभा के अंदर क्या हुआ इस पर विवाद है लेकिन इतना तय है कि डीएमके और एआईडीएमके विधायकों की हाथापाई के बीच जयललिता के संग सदन में अभद्रता की गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जयललिता उस दिन सदन से यह कहते हुए बाहर चली गईं कि वो दोबारा मुख्यमंत्री बनकर ही विधान सभा में वापस आएंगी। विधान सभा में हुई बदसलूकी के महज दो साल बाद जयललिता के नेतृत्व वाले एआईएडीएमके और कांग्रेस गठबंधन ने राज्य की 234 सीटों में से 225 पर जीत हासिल कर ली और जयललिता पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं।

1989 में डीएमके विधायकों की कथित बदसलूकी के बाद जयललिता कुछ इस हालत में विधान सभा से बाहर आईं। (एक्सप्रेस आर्काइव)

(1989 में डीएमके विधायकों की कथित बदसलूकी के बाद जयललिता कुछ इस हालत में विधान सभा से बाहर आईं। (एक्सप्रेस आर्काइव))

मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही वक्त बाद जयललिता पर आय से अधिक संपत्ति, भ्रष्टाचार और अव्यवस्था इत्यादि के आरोप लगने लगे। नतीजा ये हुआ कि जब 1996 में विधान सभा चुनाव हुए तो उनकी पार्टी महज चार सीटों पर सिमट गई। इसी साल उनके खिलाफ करुणानिधि सरकार ने भ्रष्टाचार के करीब 48 मामले दर्ज कराए। जयललिता को कई महीने जेल में बिताने पड़े। 1997 में सुब्रमण्यम स्वामी ने उनके ऊपर करीब 66 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति हासिल करने का मामला दर्ज कराया जो एक दशक से अधिक समय तक जयललिता के गले की फांस बना रहा।

साल 2001 के विधान सभा चुनाव में एआईडीएमके ने 196 सीटों पर जीत हासिल करके भारी बहुमत हासिल किया। भ्रष्टाचार के मुकदमे के कारण खुद जयललिता चुनाव नहीं लड़ सकी थीं फिर भी चुनावी जीत के बाद उनकी पार्टी ने उन्हें ही सीएम चुना। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें सीएम की कुर्सी छोड़नी पड़ी। उन्होंने अपनी जगह ओ पनीरसेल्वन को सीएम बनाया। साल 2003 में हाई कोर्ट द्वारा भ्रष्टाचार के कई मामलों में बरी किए जाने के बाद उन्हें विधान सभा चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई। चुनाव जीतकर वो फिर राज्य की सीएम बनीं। साल 2006 के विधान सभा चुनाव में उन्हें डीएमके गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
साल 2011 के विधान सभा चुनाव में एआईडीएमके को 203 सीटों पर जीत मिली। जयललिता एक बार फिर राज्य की सीएम बनीं। 27 सितंबर 2014 को अदालत ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति मामले में चार साल की सजा सुनाते हुए 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। जयललिता को करीब एक महीने जेल में रहना पड़ा। उनकी जगह ओ पनीरसेल्वम एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने। साल 2015 में हाई कोर्ट ने जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी कर दिया और वो फिर से राज्य की सीएम बन गईं।
साल 2016 में हुए विधान सभा चुनाव में जयललिता ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। तमिलनाडु के इतिहास में 32 साल बाद किसी पार्टी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला था। तीन दशक पहले ये कारना उनके राजनीतिक गुरु एमजीआर ने किया था। मई 2016 में जयललिता छठवीं बार राज्य की सीएम बनीं। 68 वर्षीय जयललिता 22 सितंबर को तबीयत खराब होने के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती हुईं। राहुल गांधी, अमित शाह और अरुण जेटली जैसे कई प्रमख नेताओं को अस्पताल में उनके मिलने नहीं दिया गया। उनकी सेहत को लेकर इस दौरान रहस्य का वातावरण बना रहा। रविवार (3 दिसंबर) को पहले खबर आई कि वो समान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दी गईं और किसी भी वक्त घर जा सकती हैं। लेकिन थोड़ी देर बाद ही ये खबर आने लगी कि उन्हें कार्डिएक अरेस्ट हुआ है। सोमवार सुबह खबर आई कि उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टिम और ईसीएमओ पर रखा गया है और उनकी हालात चिंताजनक है।

जयललिता के इलाज में सलाह देने वाले लंदन के डॉक्‍टर रिचर्ड बेएल ने लिखा- हालात बेहद खतरनाक, पढ़‍िए उनकी चिट्ठी

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता के इलाज में मदद कर रहे ब्रिटिश डॉक्टर रिचर्ड बेएल ने पत्र लिखकर अपनी संवेदना व्यक्ति करते हुए कहा कि सीएम की हालत बहुत गंभीर है। डॉक्टर रिचर्ड ने कहा है कि सीएम जयललिता को चेन्नई स्थित अपोलो अस्पताल में विश्व की सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा दी जा रही है। अपोलो और एम्स के डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। 22 सिंतबर से चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती सीएम जयललिता को रविवार (4 दिसंबर) को कार्डिएक अरेस्ट हुआ जिसके बाद से उनकी स्थित गंभीर बनी हुई है।
पढ़ें डाक्टर रिचर्ड बेएल का पत्र-
कल मुझे ये जानकर बहुत दुख पहुंचा कि मैडम चीफ मिनिस्टर को अचानक कार्डिएक अरेस्ट हुआ है। अपोलो अस्पताल में उनकी स्थिति पर मैं करीबी निगाह बनाए हुए हूं और बाकियों की तरह उनके स्वास्थ्य में आ रहे सुधार से उत्साहित हूं। दुर्भाग्यवश उनकी तबीयत में आए सुधार के बावजूद उनकी सेहत से जुड़े अंदरूनी खतरों की वजह से नई समस्याओं का जोखिम बना रह रहा है।
उनकी हालत बहुत गंभीर है लेकिन मैं इस बात की तस्दीक कर सकता हूं कि उन्हें इस स्तब्ध कर देने वाले झटके से उबरने में हर संभव मदद की जा रही है। उनका इलाज एक अतिकुशल विशेषज्ञ मल्टीडिसिप्लिनरी टीम कर रही है और इस समय वो एक्स्ट्रा-कॉरपोरल लाइफ सपोर्ट पर हैं। ये इस समय दुनिया का सबसे विकसित लाइफ सपोर्ट सिस्टम है और ऐसी स्थिति में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल इसी तकनीक का प्रयोग करते। चेन्नई अपोलो में इस तकनीक की मौजूदगी से पता चलता है कि ये सेंटर उच्चतम विशेषज्ञता से लैस है और अपोलो और एम्स के टीमों ने हर वक्त मैडम का पूरा ख्याल रखा, जो पूरी तरह विश्वस्तरीय है।
इस कठिन वक्त में मेरे विचार और प्रार्थनाएं मैडम, उनके परिवार, उनके शुभेच्छुओं और तमिलनाडु की जनता से साथ है।
प्रोफेसर रिचर्ड बेएल