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साल 2016 के शहंशाह बने विराट कोहली, 52 मैच खेले और बनाए 3000 से ज्‍यादा रन, 11 शतक

विराट कोहली ने मुंबई टेस्‍ट में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। उन्‍होंने 235 रन की पारी खेली और टेस्‍ट में से सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय कप्‍तान बन गए।

विराट कोहली ने मुंबई टेस्‍ट में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। उन्‍होंने 235 रन की पारी खेली और टेस्‍ट में से सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय कप्‍तान बन गए। उन्‍होंने पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ा। धोनी ने साल 2013 में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ चेन्‍नई में 224 रन बनाए थे। मुंबई में इंग्‍लैंड के खिलाफ कोहली ने 340 गेंद का सामना किया और 25 चौके और एक छक्‍का लगाया। यह इंग्‍लैंड के खिलाफ किसी भारतीय का सर्वश्रेष्‍ठ टेस्‍ट स्‍कोर भी है। कोहली चेतेश्‍वर पुजारा के आउट होने के बाद क्रीज पर आए थे और इसके बाद मुरली विजय के साथ मिलकर 116 रन की साझेदारी की। इसके बाद जयंत यादव के साथ आठवें विकेट के लिए 241 रन जोड़े। उनकी पारी के सहारे भारत ने पहली पारी में 631 रन बनाए। विराट कोहली एक साल में तीन दोहरे शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं।
टेस्‍ट में इस साल कोहली ने केवल दो छक्‍के लगाए हैं। मुंबई में दोहरे शतक के दौरान उनके बल्‍ले से एक छक्‍का निकला। वहीं एक अन्‍य छक्‍का उन्‍होंने वेस्‍ट इंडीज दौरे पर सबाइना पार्क में लगाया था। विराट कोहली कप्तान के रूप में टेस्ट मैचों में तीन दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह इंग्‍लैंड के खिलाफ किसी भारतीय का सर्वश्रेष्‍ठ टेस्‍ट स्‍कोर भी है। विराट इस समय जबरदस्‍त फॉर्म में हैं। उन्‍होंने इस साल टेस्‍ट, वनडे और टी20 में कुल मिलाकर 2000 से ज्‍यादा रन बनाए हैं। टेस्‍ट क्रिकेट में इस साल कोहली के बल्‍ले से तीन दोहरे शतक निकले हैं। सबसे पहले वेस्‍ट इंडीज दौरे पर, उसके बाद न्‍यूजीलैंड के खिलाफ और अब इंग्‍लैंड के खिलाफ।
कोहली ने इस साल 10 वनडे खेले हैं और 740 रन बनाए हैं। इनमें तीन शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में इस साल उनका सर्वाधिक स्‍कोर 154 नाबाद रहा। वहीं टी20 में भारतीय टेस्‍ट टीम के कप्‍तान ने 15 मैच खेले हैं और 641 रन बनाए हैं। इसमें 7 अर्धशतक शामिल है। वहीं साल 2016 में कोहली ने अभी तक 11 टेस्ट खेले हैं और 1200 के लगभग रन बनाए हैं। विराट ने इस साल 16 आईपीएल मैच 973 रन भी बनाए हैं। इस टूर्नामेंट में उन्‍होंने सात अर्धशतक और चार शतक भी लगाए हैं। इस तरह से मैचों को देखा जाए तो विराट ने अभी तक इस साल 52 मैच खेले और 86.63 की औसत से 3465 रन बनाए हैं। उन्‍होंने इस साल 20 अर्धशतक और 11 शतक जड़े हैं।

IND vs ENG: विराट कोहली-जयंत यादव रन बनाते रहे, एक के बाद एक रिकॉर्ड टूटते रहे

भारतीय कप्तान विराट कोहली और निचले क्रम के बल्लेबाज जयंत यादव ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट क्रिकेट मैच में आज यहां अपनी शतकीय पारियों के दौरान कुछ व्यक्तिगत रिकार्ड बनाने के अलावा भारत की तरफ से आठवें विकेट के लिये सबसे बड़ी साझेदारी भी निभायी। कोहली और जयंत ने आठवें विकेट के लिये 241 रन जोड़े जो भारत के लिये नया रिकार्ड है। यह टेस्ट क्रिकेट में केवल आठवां अवसर है जबकि आठवें विकेट के लिये 200 से अधिक रन की साझेदारी निभायी गयी। कोहली और जयंत ने मोहम्मद अजहरूद्दीन और टीम के वर्तमान कोच अनिल कुंबले का 20 साल पुराना रिकार्ड तोड़ा। अजहर और कुंबले ने 1996 में कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आठवें विकेट के लिये 161 रन की साझेदारी की थी। इससे पहले यह रिकार्ड रे इलिंगवर्थ और पीटर टेलर के नाम पर था जिन्होंने 1971 में मैनचेस्टर में 168 रन जोड़े थे।
यही नहीं इन दोनों की साझेदारी इंग्लैंड के खिलाफ किसी भी देश की तरफ से आठवें विकेट के लिये दूसरी सबसे बड़ी भागीदारी है। वे केवल दो रन से रिकार्ड की बराबरी करने से चूके गये। आस्ट्रेलिया के एमजे हार्टिगन और क्लेम हिल ने 1908 में 243 रन की साझेदारी की थी। भारत की तरफ से इंग्लैंड के खिलाफ इससे पहले आठवें विकेट की साझेदारी का रिकार्ड सैयद किरमानी और रवि शास्त्री के नाम पर था जिन्होंने 1981 में नयी दिल्ली में 128 रन जोड़े थे। टेस्ट मैचों में आठवें विकेट के लिये सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड इंग्लैंड के जोनाथन ट्राट और स्टुअर्ट ब्राड के नाम पर है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 2010 में लार्ड्स में 332 रन की भागीदारी की थी। कोहली और जयंत की साझेदारी आठवें विकेट के लिये ओवरआल भागीदारी में सातवें स्थान पर है।
जयंत के नाम पर भारत की तरफ से प्रथम श्रेणी मैचों में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड भी है। उन्होंने अमित मिश्रा के साथ मिलकर कर्नाटक के खिलाफ 2012 में हुबली में आठवें विकेट के लिये 392 रन जोड़े थे। कोहली ने लगातार तीसरी श्रृंखला में दोहरा शतक लगाया। वह आस्ट्रेलिया के महान डान ब्रैडमैन और अपने पूर्व साथी राहुल द्रविड़ के बाद ऐसा कारनामा करने वाले दुनिया के तीसरे बल्लेबाज हैं। कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ जुलाई में नार्थसाउंड में 200 और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ अक्तूबर में इंदौर में 211 रन की पारी खेली थी। कोहली हालांकि एक कैलेंडर वर्ष में लगातार तीन श्रृंखलाओं में दोहरे शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं। ब्रैडमैन ने 1930-32 तक तीन श्रृंखलाओं में छह दोहरे शतक जड़े थे। द्रविड़ ने 2003-04 में लगातार तीन श्रृंखलाओं में दोहरे शतक लगाये थे।
दिल्ली के इस स्टार बल्लेबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ और भारतीय कप्तान के रूप में सर्वाधिक व्यक्तिगत पारी खेलने का नया रिकार्ड भी बनाया। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ विनोद कांबली (224 रन, मुंबई 1993) और कप्तान के रूप में महेंद्र सिंह धोनी (224 रन बनाम आस्ट्रेलिया, चेन्नई 2013) के रिकार्ड तोड़े। कोहली ने इसके साथ ही वर्तमान श्रृंखला में 600 रन भी पूरे किये। यह दूसरा अवसर है जबकि उन्होंने अपने करियर में एक श्रृंखला में 600 से अधिक रन बनाये। इससे पहले उन्होंने 2014 – 15 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी की सरजमीं पर चार मैचों की श्रृंखला में 692 रन बनाये थे। कोहली वर्तमान श्रृंखला के चार मैचों में 640 रन बना चुके हैं।

अम्मा के सदमे से 280 की मौत, पार्टी देगी मुआवजा

चेन्नई। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की निकट सहयोगी शशिकला को पार्टी महासचिव बनाए जाने की अटकलों के बीच अन्नाद्रमुक खुल कर उनके पक्ष में आ गई है।

पार्टी प्रवक्ता ओ पोन्नियन ने शनिवार को कहा कि अन्नाद्रमुक में कोई दरार नहीं है। अगर मुख्यमंत्री या अन्य मंत्री शशिकला के पास आते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। पार्टी एकजुट है और जल्द ही पार्टी के महासचिव का चुनाव कर लिया जाएगा, वही "अम्मा" के पदचिह्नों पर चलते हुए पार्टी को संभालेगा। उन्होंने कहा कि पद के लिए ईर्ष्या या प्रतिद्वंद्विता जैसी कोई बात नहीं है।

क्या जयललिता कोई वसीयत छोड़ गई हैं? इस पर सवाल प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इससे अधिक कुछ भी कहने से इन्कार किया। शशिकला के पति के लौट आने के सवाल पर प्रवक्ता ने कहा कि इस सवाल का कोई औचित्य नहीं है।

पोन्नियन के अनुसार, पार्टी को जयललिता एक मजबूत दुर्ग के रूप में बना कर गई हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी पर संगठनात्मक नियंत्रण है। शशिकला उसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार के मुखिया ओ पन्नीरसेल्वम हैं।

यह पूछे जाने पर कि पन्नीरसेल्वम और बाकी मंत्री पोएस गार्डन में क्या शशिकला से मिल रहे हैं उनका जवाब था, "हम अभी तक शोक में हैं और सब जयललिता को श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं, ऐसे में एक वर्ग का काल्पनिक कहानियां बनाना अच्छा नहीं है।

बीमारी के दौरान जयललिता के नजदीक किसी को न फटकने देने से शशिकला के प्रति पार्टी के एक वर्ग में गुस्से को उन्होंने नियोजित अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि जयललिता और एमजी रामचंद्रन की आत्माएं पार्टी को नेतृत्व दे रही हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पार्टी में कोई शून्य है।

सदमे से 280 की मौत

अन्नाद्रमुक ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री जयललिता की मौत के सदमे से तमिलनाडु में 280 लोगों की मौत हो गई है। पार्टी की विज्ञप्ति में ऐसा दावा करते हुए 203 लोगों के नामों की सूची भी जारी की गई है। इससे पहले पार्टी ने कहा था कि 77 लोग मुख्यमंत्री के निधन का सदमा सहन नहीं कर पाए।

अब मृतकों की कुल संख्या 280 हो गई है। बताया गया है कि ये लोग चेन्नई, वेल्लोर, तिरुपुर, कुड्डालोर, कृष्णागिरी और इरोड जैसे जिलों के थे। पार्टी ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपये की राशि देने की बात कही है।


(एजेंसी से इनपुट ) 

अहमदाबाद में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम, मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट को अमित शाह कर रहे पूरा

अहमदाबाद के मोटेरा में बने सरदार पटेल स्‍टेडियम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है जिससे उसकी दर्शक क्षमता बढ़कर 1,10,000 हो जाएगी।

गुजरात के अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम बनाया जा रहा है। अहमदाबाद के मोटेरा में बने सरदार पटेल स्‍टेडियम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है जिससे उसकी दर्शक क्षमता बढ़कर 1,10,000 हो जाएगी। वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम ऑस्‍ट्रेलिया का मेलबोर्न क्रिकेट स्‍टेडियम है। इसकी क्षमता 100024 है। अमित शाह की अध्‍यक्षता वाले गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन ने इसके लिए काम शुरू करा दिया है। यह प्रोजेक्‍ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी ड्रीम प्रोजेक्‍ट में से एक है। मोदी जब गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष थे तब यह फैसला लिया गया था। मोदी साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इस पद से हट गए थे। उसके बाद से यह जिम्‍मा अमित शाह के पास है।
स्‍टेडियम का काम दो साल में पूरा हो जाएगा। पुराने स्‍टेडियम को नष्‍ट किया जा चुका है। स्‍टेडियम निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो(एलएंडटी) को ठेका दिया गया है। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ”मैदान निर्माण कंपनी को सौंप जाने के लिए तैयार है। जब यह स्‍टेडियम पूरा हो जाएगा तो दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम होगा। यह विश्‍वस्‍तर का स्‍टेडियम होगा।” नए स्‍टेडियम में एसी बॉक्‍स की संख्‍या बढ़ी हुई होगी। साथ ही पार्किंग फैसेलिटी को भी अपग्रेड किया जाएगा। यहां पर खाने-पीने की सुविधा, फैन जोन और वाशरूम की सुविधाओं को विश्‍व स्‍तर का बनाया जाएगा।
पुराने मोटेरा स्‍टेडियम में 49000 दर्शक बैठ सकते थे। यहां पर सबसे पहले साल 1983 में टेस्‍ट मैच खेला गया था। कुल मिलाकर मोटेरा में 12 टेस्‍ट, 24 वनडे और एक टी20 मैच खेला गया। आखिरी बार यहां पर भारत और श्रीलंका के बीच साल 2014 में वनडे खेला गया था। भारत में वर्तमान में सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम ईडन गार्डन है। इसके अलावा मुंबई का वानखेड़े, रांची क्रिकेट स्‍टेडियम, रायपुर का वीर नारायण सिंह स्‍टेडियम भी देश के सबसे बड़े स्‍टेडियमों में शामिल है।

एक्‍ट्रेस गौतमी ने जयललिता की मौत को बताया रहस्‍यमयी, पीएम नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की

जयललिता चेन्नई के ग्रीम्स रोड स्थित अपोलो अस्पताल में 22 सितंबर को भर्ती हुई थीं। उस वक्त उन्हें बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी थी।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जे जयललिता की मौत का रहस्य अब सवालों के घेरे में है। कई लोग अब सवाल पूछने लगे हैं कि उनकी मौत कैसे हुई? मशहूर तमिल अभिनेत्री गौतमी तड़ीमला ने अपने ताजा ब्लॉग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक पत्र लिखकर जयललिता की मौत से जुड़े रहस्यों पर से पर्दा हटाने का अनुरोध किया है। जयललिता की मौत के तीन दिन बाद अपने पोस्ट में गौतमी ने ‘जयललिता को अस्पताल में भर्ती कराए जाने, उनके ठीक होने और फिर अचानक हुई उनकी मौत से जुड़े कई अनसुलझे सवालों’ के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया है।
तमिल अभिनेत्री ने 8 दिसंबर को लिखा है कि जिस समय जयललिता अस्पताल में थीं, उस समय किसी को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने लिखा है, ‘किसी को भी उनतक नहीं पहुंचने दिया जा रहा था। कई गणमान्य लोग जो कि उनके स्वास्थ्य की बिगड़ी हालत से परेशान होकर वहां मिलने पहुंचे थे, उन्हें खुद जयललिता से नहीं मिलने दिया गया।’
इससे पहले गौतमी के ब्लॉग ने खूब चर्चा बटोरी थी जिसमें उन्होंने अपने लिव-इन पार्टनर कमल हासन से अलग होने का जिक्र किया था। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने 28 अक्टूबर, 2016 को पीएम मोदी से मुलाकात की थी। इस बार गौतमी ने सीधे पीएम को संबोधित करते हुए ब्लॉग लिखा है।
अपने ब्लॉग पोस्ट में गौतमी ने लिखा, ‘तमिलनाडु सरकार की मुखिया और लोगों की चहेती नेता के मामले में इतना रहस्य क्यों बनाया गया और उन्हें इस तरह सबसे अलग-थलग क्यों रखा गया? ऐसे समय में जब कि जयललिता की सेहत इतनी नाजुक स्थिति में थी, तब कौन लोग थे जो कि उनकी बीमारी और इलाज से जुड़े फैसले ले रहे थे? और कौन लोग हैं जो कि जनता को इन सवालों के जवाब देने के लिए जिम्मेदार हैं?’
गौतमी ने लिखा है कि लोकतांत्रिक पद्धति के द्वारा चुने गए अपने नेताओं के बारे में जानने का पूरा हक लोगों को है। उन्होंने यह भी लिखा कि इतनी बड़ी घटना से जुड़े सवाल अनसुलझे नहीं रहने चाहिए। अपने पोस्ट में गौतमी ने पीएम मोदी को ऐसा नेता बताया है जो ‘आम लोगों के अधिकारों के लिए खड़े होने से नहीं डरता है।’ गौतमी ने ब्लॉग में यह भरोसा भी जताया है कि प्रधानमंत्री उनकी अपील को सुनेंगे। गौतमी अकेली नहीं हैं जो जयललिता की मौत से जुड़े सवाल पूछ रही हैं। तमिलनाडु में कई राजनैतिक विश्लेषक भी इस तरह के सवालों को अहमियत दे रहे हैं।
गौरतलब है कि जे जयललिता चेन्नई के ग्रीम्स रोड स्थित अपोलो अस्पताल में 22 सितंबर को भर्ती हुई थीं। उस वक्त उन्हें बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी थी। इसके बाद बताया गया कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है लेकिन उससे जुड़ी किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी गई थी। अपोलो अस्पताल की मेडिकल बुलेटिन्स में कहा गया था कि जयललिता की हालत सुधर रही है और वो रिस्पॉन्ड कर रही हैं। 4 दिसंबर को अचानक कहा गया कि उन्हें मैसिव कार्डियक अरेस्ट हुआ है और अगले दिन 5 दिसंबर को 75 दिनों तक लगातार अस्पताल में रहने के बाद अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शशिकला नेे कभी जयललिता के चलते पति को छोड़ दिया था, अब बनाया सलाहकार

माना जाता है कि नटराजन का बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध हैं।
जब एम नटराजन को जयललिता ने खुद और पार्टी से दूर कर दिया तो उनकी पत्नी शशिकला नटराजन जयललिता के साथ ही रहीं। लेकिन अब जयललिता के निधन के बाद नटराजन अपनी पत्नी के अहम सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं। पांच दिंसबर को जयललिता के निधन के अगले दिन चेन्नई के राजाजी हाल में जब उनका शव सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया तो शशिकला और उनके परिवार के 18 सदस्य उनके शव के चारों तरफ खड़े दिखे। जबकि जयललिता ने नवंबर 2011 में शशिकला और उनके 12 रिश्तेदारों को पार्टी से निकाल दिया था। करीब तीन महीने बाद शशिकला की तो वापसी तो हो गई लेकिन जयललिता एम नटराजन समते उनके किसी रिश्तेदार को जयललिता ने जीते जी अपने या पार्टी के नजदीक नहीं आने दिया था।
एआईएडीएमके से निकाले जाने के करीब दो महीने बाद एम नटराजन को एक जमीन घोटाले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से ही एम नटराजन सार्वजनिक चर्चाओं से दूर रहे हैं। माना जाता है कि 1987 में एमजी रामचंद्रन के निधन के बाद जब उनकी पत्नी वीएन जानकी और जयललिता के बीच सत्तासंघर्ष होने लगा तो दोनों के बीच मतभेद मिटाने में नटराजन ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन जब 1991 में जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं उसके बाद नटराजन परिवार पर उनके करीबी होने का अनुचित लाभ लेने के आरोप लगने लगे।
माना जाता है कि नटराजन की वजह से ही उनकी पत्नी शशिकला का जयललिता से परिचय हुआ था। धीरे-धीरे शशिकला जयललिता के करीब आती गईं लेकिन उनके पति से जयललिता की दूरी बढ़ती जा रही थी। 1996 में जयललिता ने नटराजन को अपने पोएस गार्डेन निवास से बाहर कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद एआईएडीएमके की अंदरूनी राजनीति में उनका दखल बना रहा। स्थानीय नेताओं की मानें तो हर विधान सभा चुनाव से पहले उनके घर पर टिकट पाने के इच्छुकों की कतार देखी जा सकती थी।
तमिलनाडु ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी नटराजन को काफी पहुंच वाला माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध हैं। कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से भी उनके बढ़िया तालुक्कात हैं। जयललिता के निधन के बाद जिस तरह दोबारा नटराजन उनके सहालकार के रूप में सामने आए हैं उससे माना जा रहा है कि वो राष्ट्रीय राजनीति में खुद को एआईएडीएमके के संपर्क सूत्र के तौर पर पेश करना चाहते हैं।
60 से अधिक उम्र के नटराजन का जन्म तंजवुर जिले के विलार गांव में हुआ था। उनके पिता साधारण किसान थे। बीए तक की शिक्षा प्राप्त नटराजन ने डीएमके नेताओं का एक छात्र नेता के तौर पर ध्यान खींचा था। नटराजन ने 1965 में राज्य में हुए हिंदी-विरोधी आंदोलन में छात्र नेता के तौर पर बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। बाद में डीएमके सरकार ने उन्हें असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (पीआरो) नियुक्त कर दिया।उसके बाद नटराजन के लिए सत्ता के गलियारों में आमदरफ्त आसान हो गई और वो सत्ता की सीढ़ियां चढ़ते गए।

सेना तैनाती विवाद: ममता बनर्जी का पर्रिकर पर पलटवार- आपको यह भी नहीं पता कि एक सीएम को खत कैसे लिखते हैं

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने मनोहर पर्रिकर की ओर से भेजे गए खत पर नाराजगी जाहिर की।
पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्‍हें यह भी नहीं पता कि एक मुख्‍यमंत्री को खत कैसे लिखते हैं। ममता ने मनोहर पर्रिकर की ओर से भेजे गए खत पर नाराजगी जाहिर की। उन्‍होंने कहा, ”वे सेना को राजनीतिक उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए इस्‍तेमाल कर रहे हैं। उन्‍हें नहीं पता कि एक मुख्‍यमंत्री को खत कैसे लिखते हैं। मैं आपके हवाई दावे पर कड़ा रूख लेती हूं। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के खत की भाषा से खुश नहीं हूं। मैंने सरकार की नीति के बारे में कहा था कि ना कि सेना के बारे में। मेरे लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में राजनीतिक बदले के लिए सम्‍मानित संगठन(सेना) के इस तरह के दुरुपयोग को कभी नहीं देखा। ”
इससे पहले रक्षा मंत्री ने खत लिखकर कहा था कि उनके आरोपों से उन्‍हें गहरा दुख हुआ है और इससे सुरक्षाबलों के उत्‍साह पर बुरा असर पड़ सकता है। पर्रिकर ने कहा कि राजनीतिक दल और राजनेता एक दूसरे के खिलाफ हवाई और बिना तथ्‍यों के आरोप लगा सकते हैं। लेकिन किसी भी व्‍यक्ति को सुरक्षाबलों के बारे में कुछ भी कहने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। दो पेज के इस लेटर में और भी बहुत कुछ लिखा गया है। लेटर में पर्रिकर ने बताया है कि सेना के जिस अभ्यास पर ममता बनर्जी ने विवाद खड़ा किया था वह काफी सालों पहले से हो रहा है। पर्रिकर ने आगे लिखा है कि उसके लिए राज्य सरकार को पहले ही सूचना दे दी गई थी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय नबन्ना भवन के पास स्थित टोल प्लाजा पर सेना के जवान तैनात कर दिए गए थे। उसपर ममता बनर्जी ने सवाल खड़े किए थे। ममता ने कहा था कि सरकार उन्हें घेरने के लिए वह सब कर रही है। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या सेना तख्तापलट की कोशिश कर रही है? इस दौरान 30 घंटे तक ममता बनर्जी सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में ही रही। हालांकि, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने सफाई देते हुए कहा था कि ये एक रूटीन अभ्यास था और राज्य प्रशासन को इसके बारे में पहले से सूचित किया गया था। सेना की ओर से भी कहा गया कि यह रूटीन प्रकिया है।

IND vs ENG: पहले दिन रहा स्पिनर्स का दबदबा, लिए सभी विकेट, इंग्लैंड ने बनाए 5/288 रन

मुंबई।  टीम इंडियाऔर इंग्लैंड के बीच चौथे टेस्ट का पहला दिन स्पिनर्स के नाम रहा। वानखेड़े स्टेडियम में खेले जा रहे मैच में अश्विन ने अब तक गिरे 5 में से 4 विकेट लिए हैं, जबकि एक विकेट जडेजा के खाते में गया है। टॉस जीकर पहले बैटिंग कर रही इंग्लैंड की टीम ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक 94 ओवर में 5 विकेट पर 288 रन बनाए हैं। बेन स्टोक्स (25) और जोस बटलर (18) क्रीज पर हैं। (LIVE स्कोर के लिए यहां क्लिक करें)
जडेजा ने दिया पहला झटका, अश्विन ने कराई टीम इंडिया की वापसी
टीम इंडिया को पहली सफलता रवींद्र जडेजा ने दिलाई। उन्होंने एलिस्टर कुक (46) को स्टंप कराया। इसके बाद तो अश्विन एकतरफा इंग्लिश बैट्समैन पर भारी नजर आए। जो रूट को अश्विन ने कोहली के हाथों 21 रन के निजी स्कोर पर लपकवाया। तीसरे विकेट के रूप में मोईन अली आउट हुए। उन्हें अश्विन ने 50 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन भेजा, जबकि जेनिंग्स 112 और बैरिस्टो 14 रन बनाकर आउट हुए।
भारत 5 मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे है। चौथे टेस्ट मैच में जीत या ड्रॉ से वह सीरीज का विजेता बन जाएगा। इंग्लैंड ने भारत को लगातार तीन सीरीज में हराया है। अब भारत के पास इसका हिसाब बराबर करने का बेहतरीन मौका है।
2011, 2014 और फिर 2015 में इंग्लैंड ने हराया
विराट कोहली की अगुआई वाली यह टीम भी इस बात को जानती है और किसी भी हाल में वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी। इंग्लैंड ने भारत को 2011, 2014 और फिर 2015 में हराया था। इसके अलावा भारत के पास लगातार 17 टेस्ट मैचों में अपराजित रहने के रिकार्ड की बराबरी का बेहतरीन मौका है। भारत ने अपने पिछले 16 टेस्ट मैचों में हार का स्वाद नहीं चखा है।
ऐसा रहा मैच का रिजल्ट
राजकोट में खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ रहा था। इसके बाद भारत ने विशाखापट्नम और मोहाली में खेले गए दूसरे और तीसरे टेस्ट मैच में जीत हासिल करते हुए मेहमानों पर दवाब बनाया है। अब तकरीबन सप्ताह भर के अंतराल के बाद मैदान पर उतरने वाली मेजबान टीम जीत दर्ज कर अपने बचे काम को अंजाम देना चाहेगी।
टीमें...
भारत :- विराट कोहली (कप्तान), मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, करूण नायर, रविचंद्रन अश्विन, पार्थिव पटेल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, उमेश यादव, जयंत यादव।
इंग्लैंड :- एलिस्टर कुक (कप्तान), केटन जेनिंग्स, जो रूट, मोइन अली, बेन स्टोक्स, जॉनी बेयरस्टो, जोस बटलर, क्रिस वोक्स, आदिल राशिद, जेम्स एंडरसन, जैक बॉल।

दिल्ली के उप राज्यपाल पर अरविंद केजरीवाल का नया आरोप- नजीब जंग सड़क साफ करने में भी टांग अड़ा रहे

दिल्ली में बढ़े प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि सरकार सड़कों पर जमे धूल को वैक्यूम क्लीनर से साफ करेगी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उप राज्यपाल नजीब जंग पर नया आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि एलजी नजीब जंग दिल्ली की सड़कों की वैक्यूम क्लीनर से सफाई करने में टांग अड़ा रहे हैं और बेवजह विभाग से रिपोर्ट मंगवा रहे हैं, ताकि सड़क सफाई का काम बाधित हो सके। दरअसल दीवाली के बाद दिल्ली में बढ़े प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा था कि सरकार दिल्ली की सड़कों पर जमे धूल को वैक्यूम क्लीनर से साफ करेगी। हालांकि, यह काम हो नहीं सका था और हवा की गति में बढ़ोत्तरी होने की वजह से दिल्ली में उस समय ठहरा धुंध छंट गया था। अब जब ठंड बढ़ी है और दिल्ली में फिर से कोहरे और प्रदूषण की धुंध बढ़ी है तब दिल्ली सरकार दिल्ली की सड़कों को साफ करने जा रही है लेकिन एलजी ने इससे संबंधित कुछ फाइलें राजभवन मंगवाई है।
उप राज्यपाल के इस कदम से आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खफा हो गए हैं। उन्होंने जान बूझकर आप सरकार को परेशान करने का आरोप एलजी पर लगाया है। अब कहा जा रहा है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया अगले सप्ताह इस मामले में उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात करेंगे।
गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग में दिलराज कौर को सदस्य सचिव नियुक्त किए जाने से नाराज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भी उप राज्यपाल नजीब जंग पर निशाना साधा था और उनकी तुलना ‘हिटलर’ से की थी। केजरीवाल ने ट्वीट किया था, ‘उप राज्यपाल हिटलर की तरह व्यवहार कर रहे हैं, पीएम मोदी और अमित शाह के पदचिन्हों पर चल रहे हैं।…नजीब जंग प्रधानमंत्री को अपनी आत्मा बेच चुके हैं।’ इसके बाद केजरीवाल ने जंग पर निशाना साधते हुए एक और ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘नजीब जंग ने उप राष्ट्रपति बनने के लिए अपनी आत्मा को मोदी को बेच दिया। पर मोदी कभी मुस्लिम को उप राष्ट्रपति नहीं बनाएंगे, जंग जो मर्जी कर लें।’
हाल ही में महिला आयोग के सदस्य सचिव की नियुक्ति को लेकर केजरीवाल और जंग के बीच नए सिरे से टकराव की स्थिति पैदा हुई है। बता दें, केजरीवाल पहले भी नजीब जंग पर केंद्र का एजेंट होने का आरोप कई बार लगा चुके हैं। जंग और केजरीवाल में कई मुद्दों को लेकर मतभेद रहे हैं। अब सड़कों की सफाई को लेकर भी नया विवाद खड़ा हुआ है।

नोटबंदी का एक महीना, सच होती दिख रही है मनमोहन सिंह की भविष्यवाणी, जानिए- हमने क्या खोया और क्या पाया

रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के बयान के मुताबिक, बैंकों में अब तक 11.5 लाख करोड़ रुपये वापस आ चुके हैं। सिर्फ 3 लाख करोड़ रुपये बचे हैं और अभी 22 दिन बाकी हैं।
भारत की कुल आधिकारिक जीडीपी (काला धन और सफेद धन मिलाकर) 225 लाख करोड़ रुपये की है। एक अनुमान के मुताबिक इनमें से काला धन 75 लाख करोड़ रुपये और सफेद धन 150 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, देश में कुल कितना कालाधन है, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है लेकिन एक आंकलन में कहा गया कि देश में मौजूद काला धन का 8 फीसदी हिस्सा नकदी रुप में है। यानी 75 लाख करोड़ का 8 फीसदी हिस्सा करीब 6 लाख करोड़ रुपये नकदी रूप में है।
आर्थिक मामलों के जानकारों में भी काला धन की रकम पर मतभेद है। प्रो. अरुण कुमार इसे 6.5 लाख करोड़ रुपये मानते हैं। एक सरकारी वकील ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसी उम्मीद है कि 5 लाख करोड़ रुपये नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था में वापस नहीं आ सकेंगे। इसलिए कई आर्थिक जानकार करीब-करीब 6 लाख करोड़ रुपया काला धन का अनुमान लगा रहे हैं।
31 मार्च 2016 के आंकड़े के मुताबिक 500 और 1000 रुपये के नोटों की कुल कीमत 14.5 लाख करोड़ रुपये थी। सरकार ने इन नोटों को 8 नवंबर 2016 को प्रचलन से बाहर कर दिया। यानी उनकी नोटबंदी कर दी। लिहाजा, आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक 14.5 लाख करोड़ रुपये में से 6 लाख करोड़ रुपये जो काला धन है उसे हटा दिया जाय तो शेष कुल 8.5 लाख करोड़ रुपये सफेद धन है। सरकार को उम्मीद थी कि 500 और 1000 रुपये के रूप में जो कालाधन मौजूद है वह दोबारा बैंकों में जमा नहीं होंगे।
अगर बैंकों में सिर्फ 8.5 लाख करोड़ रुपये ही जमा होते हैं तो सरकार यह दावा कर सकती थी कि काला धन (6 लाख करोड़ रुपया) अर्थव्यवस्था से बाहर हो गया लेकिन अगर कुल 14. 5 लाख करोड़ रुपये बैंकों में वापस जमा हो जाते हैं तो कहा जा सकता है कि सरकार इस मुद्दे पर फेल रही है। हालांकि, सरकारी वकील शुरू से ही सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क देते रहे हैं कि 5 लाख करोड़ रुपये वापस नहीं आ पाएंगे। हालांकि अभी तक करीब 11 लाख करोड़ रुपये वापस बैंकों में जमा हो चुके हैं। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर सरकारी दावे को मान भी लेते हैं तो इस नोटबंदी से सिर्फ 6 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आएंगे।

एक्टर दिलीप कुमार मुंबई के लीलावती अस्पताल में एडमिट, सामने आई तस्वीरें

दिलीप कुमार का 11 दिसंबर को जन्मदिन है और वह 94 साल के हो जाएंगे। उनकी पत्नी सायरा को उम्मीद है कि उससे पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी।
बॉलीवुड एक्टर दिलीप कुमार को पांव में सूजन के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंगलवार को 93 साल के दिलीप को मुंबई के बांद्रा इलाके में स्थित लीलावती हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। उनकी पत्नी सायरा बानो ने कहा, “उनके दाएं पांव में सूजन आ गई है और हम अच्छी तरह जांच कराने के लिए यहां आए हैं। इसके अलावा, हर कुछ महीने बाद उनका रूटीन चेकअप भी किया जाता है।” उन्होंने कहा, “दिलीप कुमार ठीक हैं। बुधवार सुबह उनका ब्लड टेस्ट किया गया है और घबराने की कोई भी बात नहीं हैं।”
बता दें कि दिलीप कुमार का 11 दिसंबर को जन्मदिन है और वह 94 साल के हो जाएंगे। उनकी पत्नी सायरा को उम्मीद है कि उससे पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। सायरा ने कहा, “डॉक्टर्स उनकी देखभाल कर रहे हैं। मैं आशा और उम्मीद करती हूं कि अपने जन्मदिन तक वह घर आ जाएंगे।” इससे पहले अप्रैल महीने में भी दिलीप कुमार को सांस लेने में दिक्कत के बाद कुछ दिन के लिए लीलावती हॉस्पिटल में ए़़डमिट कराया गया था।

 

संसद नहीं चलने पर लोकसभा अध्‍यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री पर गुस्‍साए लालकृष्‍ण आडवाणी, कहा- अनिश्चित काल के लिए ही स्‍थगित कर दो

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। इसके बाद लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने संसद नहीं चलने पर बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री पर गुस्सा निकाला। संसद में तीसरे सप्ताह भी लगातार विरोध होने पर आडवाणी ने लोकसभा चलाने के तरीके पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ना संसदीय कार्यमंत्री और और ना ही लोकसभा स्पीकर सदन चला रहे हैं। आडवाणी को संसद में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन की वजह से संसदीय मंत्री अनंत कुमार से नाराजगी जाहिर करते हुए देखा गया है। आडवाणी ने अपनी नाराजगी उस वक्त जाहिर की जब विरोधी दलों के कुछ सदस्य सत्ता पक्ष की बैंच की ओर आए और नारे लगाने लगे।
कांग्रेस और टीएमसी सांसदों द्वारा नारे लगाने के बाद लंच से पहले 15 मिनट के लिए सदन को स्थगित करने से पहले आडवाणी ने कहा, ‘ना ही स्पीकर और ना ही संसदीय कार्यमंत्री सदन चला रहे हैं। मैं स्पीकर के पास यह कहने जा रहा हूं कि वे सदन नहीं चला रही हैं। मैं इसे सार्वजनिक तौर पर कहने जा रहा हूं।’ इस दौरान कुमार चुपचाप उन्हें सुनते रहे। साथ ही अनंत ने मीडिया गैलरी की ओर इशारा करते यह भी कहा कि उनकी यह टिप्पणी मीडिया में रिपोर्ट कर दिया जाएगा।
जब सदन को स्थगित किया गया तो आडवाणी ने लोकसभा के एक अधिकारी से पूछा कि सदन कितने बजे तक के लिए स्थगित किया गया है। जब उन्हें बताया कि दो बजे तक तो उन्होंने कहा, ‘अनिश्चित काल तक क्यों नहीं कर देते?’ इससे पहले भी आडवाणी ने सदन की कार्यवाही को लेकर कुमार से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
बता दें, संसद के शीतकालीन सत्र का चौथा हफ्ता है। बुधवार को कार्यवाही का 16 वां दिन है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। हंगामे के बाद लोकसभा पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई। इससे पहले राज्यसभा और लोकसभा दो बजे तक स्थगित कर दी गई थी। वहीं, कार्यवाही से पहले बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक और विपक्षीय दल के नेताओं की बैठक हुई थी। विपक्ष ने बैठक में नोटबंदी के कारण पेशनधारक और वेतनभोगी कर्मचारियों को हो रही दिक्कत को लेकर नियम 184 के तहत चर्चा की मांग की। वहीं बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक में भी कई फैसले लिए गए।

 

संसद नहीं चलने पर लोकसभा अध्‍यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री पर गुस्‍साए लालकृष्‍ण आडवाणी, कहा- अनिश्चित काल के लिए ही स्‍थगित कर दो

संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। इसके बाद लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने संसद नहीं चलने पर बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्यमंत्री पर गुस्सा निकाला। संसद में तीसरे सप्ताह भी लगातार विरोध होने पर आडवाणी ने लोकसभा चलाने के तरीके पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि ना संसदीय कार्यमंत्री और और ना ही लोकसभा स्पीकर सदन चला रहे हैं। आडवाणी को संसद में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन की वजह से संसदीय मंत्री अनंत कुमार से नाराजगी जाहिर करते हुए देखा गया है। आडवाणी ने अपनी नाराजगी उस वक्त जाहिर की जब विरोधी दलों के कुछ सदस्य सत्ता पक्ष की बैंच की ओर आए और नारे लगाने लगे।
कांग्रेस और टीएमसी सांसदों द्वारा नारे लगाने के बाद लंच से पहले 15 मिनट के लिए सदन को स्थगित करने से पहले आडवाणी ने कहा, ‘ना ही स्पीकर और ना ही संसदीय कार्यमंत्री सदन चला रहे हैं। मैं स्पीकर के पास यह कहने जा रहा हूं कि वे सदन नहीं चला रही हैं। मैं इसे सार्वजनिक तौर पर कहने जा रहा हूं।’ इस दौरान कुमार चुपचाप उन्हें सुनते रहे। साथ ही अनंत ने मीडिया गैलरी की ओर इशारा करते यह भी कहा कि उनकी यह टिप्पणी मीडिया में रिपोर्ट कर दिया जाएगा।
जब सदन को स्थगित किया गया तो आडवाणी ने लोकसभा के एक अधिकारी से पूछा कि सदन कितने बजे तक के लिए स्थगित किया गया है। जब उन्हें बताया कि दो बजे तक तो उन्होंने कहा, ‘अनिश्चित काल तक क्यों नहीं कर देते?’ इससे पहले भी आडवाणी ने सदन की कार्यवाही को लेकर कुमार से अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
बता दें, संसद के शीतकालीन सत्र का चौथा हफ्ता है। बुधवार को कार्यवाही का 16 वां दिन है। बुधवार को भी नोटबंदी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बन रही। हंगामे के बाद लोकसभा पूरे दिन के लिए स्थगित हो गई। इससे पहले राज्यसभा और लोकसभा दो बजे तक स्थगित कर दी गई थी। वहीं, कार्यवाही से पहले बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक और विपक्षीय दल के नेताओं की बैठक हुई थी। विपक्ष ने बैठक में नोटबंदी के कारण पेशनधारक और वेतनभोगी कर्मचारियों को हो रही दिक्कत को लेकर नियम 184 के तहत चर्चा की मांग की। वहीं बीजेपी पार्लियामेंट्री बैठक में भी कई फैसले लिए गए।

 

जेल जाने से टूट गई थीं जयललिता, तभी से बिगड़ी सेहत, साथ रहने वालों ने पहली बार बताईं ये बातें

जयललिता का स्‍वास्‍थ्‍य कभी भी चिंता का विषय नहीं रहा और ना ही कभी तमिलनाडु में यह सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना।
जयललिता का स्‍वास्‍थ्‍य कभी भी चिंता का विषय नहीं रहा और ना ही कभी तमिलनाडु में यह सार्वजनिक बहस का मुद्दा बना। लेकिन सितम्‍बर 2014 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल जाने के बाद से उनकी तबीयत नासाज रहने लगी। इस मामले में वे आठ महीने बाद बरी हो गई थीं। जया ने हमेशा अपनी गोपनीयता को लेकर सावधान बरतीं और कभी भी किसी को भी इसमें दखल नहीं देने दिया। इसलिए किसी को भी ठीक तरह से नहीं पता कि वे कितनी बीमार थीं। जयललिता सार्वजनिक रूप से आखिरी बार 20 सितम्‍बर को देखी गई थीं। इसके दो दिन बाद उन्‍हें अपोलो अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। जब वैंकेया नायडू और पोन राधाकृष्‍णन चेन्‍नई एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन की नई लाइन का अनावरण करने आए थे तब भी जया अपने दफ्तर से वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़ीं। उनकी सुरक्षा टीम के एक अधिकारी ने बताया, ”वह पहले से ही बीमार थीं। उस दिन भी उन्‍हें व्‍हीलचेयर से लाया गया था और वहीं पर वीडियो शूट किया गया।”
कर्नाटक जेल से रिहा होने के बाद जया की तबीयत तेजी से खराब हुई। इसी समय उनके विरोधियों ने उनकी लाइफस्टाइल और कम काम करने को लेकर सवाल उठाए। हाल ही में रिटायर हुए एक आईएएस अधिकारी ने बताया, ”मुख्‍यमंत्री बनने के बाद उन्‍होंने खुद को बड़ी जिम्‍मेदारियों से दूर रखा। पूर्व चीफ सेक्रेटरी शीला बालाकृष्‍णन सहित अन्‍य विश्‍वस्‍त साथियों ने ही सरकार चलाई।” जया के सुरक्षा बेड़े में काम कर चुके एक वरिष्‍ठ पुलिसकर्मी ने पिछले आम चुनावों की घटना का जिक्र किया। उनके अनुसार फोर्ट सेंट जॉर्ज का आधा रास्‍ता तय करने के बाद उन्‍होंने अचानक कहा कि उन्‍हें घर जाना है। अधिकारी ने बताया, ”उन्‍होंने ड्राइवर को गाड़ी घुमाने को कहा। उन्‍हें बैचेनी महसूस हो रही थी और घर जाना चाहती थीं। उन्‍हें दर्द हो रहा था। इसके चार घंटे बाद वे अपने दफ्तर जा पाईं।”
साल 2015 में सेहत बिगड़ने के बाद जयललिता के सिक्‍योरिटी प्रोटोकॉल में किए गए बदलावों के बारे में एक अधिकारी ने बताया कि आय से अधिक मामले में दोषी ठहराए जाने से पहले मुख्‍यमंत्री और सुरक्षा अधिकारियों की गाड़ी में दो फीट का गैप रहता था। जेल जाने के बाद वह कमजोर हो गई थीं। इसके बाद यह गैप केवल एक फीट रखा गया ताकि जरूरत पड़ने पर जल्‍दी मदद की जा सके। पिछले दो सालों में उन्‍हें लंबे समय तक खड़े रहने में दिक्‍कत होती थी। सार्वजनिक रैलियों के दौरान मंच पर जाने के लिए वह एलिवेटर का इस्‍तेमाल करती थीं। वह बैठकर ही भाषण देती थीं।”
एक पूर्व राज्‍य मंत्री के शब्‍दों में, ”जेल ने उनकी सेहत बिगाड़ दी। जेल में उन्‍होंने डॉक्‍टर्स से मिलने और मेडिकल मामलों की जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था। हालांकि कुछ सीनियर नेताओं और नौकरशाहों के समझाने पर वह मानी। हमने उनके लिए विशेष रूप से तैयार की गई कुर्सी जेल में भिजवाई। बाकी नेता जेल के बाहर सोते थे जिससे कि उन्‍हें लगे कि वह अकेली नहीं हैं। लेकिन जेल से बाहर आने के बाद अम्‍मा बदल गईं थी। उन्‍हें ना तो जमानत और ना बरी होने से खुशी मिली।”

जानिए क्‍यों ब्राह्मण होने के बावजूद दाह संस्‍कार करने के बजाय दफनाई गईं जयललिता

चेन्‍नई के अपोलो हॉस्पिटल में सोमवार (5 दिसंबर) की रात 11.30 बजे 'अम्‍मा' ने दुनिया को अलविदा कहा।

अन्‍य द्रविड़ नेताओं से इतर, जे जयललिता का मरीना बीच पर दाह संस्‍कार नहीं हुआ, बल्कि उन्‍हें दफनाया गया। नियमित रूप से प्रार्थना करने वाली और माथे पर अक्‍सर आयंगर नमम लगाने वाली जयललिता को दफनाने का फैसला सरकार और श‍‍शिकला ने क्‍यों लिया, जबकि आयंगरों में दाह संस्‍कार की प्रथा है। दिवंगत मुख्यमंत्री के अंतिम संस्‍कार से जुड़े एक वरिष्‍ठ सरकारी सचिव ने बताया है‍ कि उन्‍हें मरीना बीच पर दफनाया क्‍यों गया। उन्‍होंने कहा, ”वह हमारे लिए आयंगर नहीं थीं। वह किसी जाति और धार्मिक पहचान से परे थीं। यहां तक कि पेरियार, अन्‍ना दुरई और एमजीआर जैसे ज्‍यादातर द्रविड़ नेता दफनाए गए थे और हमारे पास उनके शरीर का दाह-संस्‍कार करने की कोई मिसाल नहीं है। तो, हम उन्‍हें चंदन और गुलाब जल के साथ दफनाते हैं।” पूर्व नेताओं को दफनाए जाने से समर्थकों को एक स्‍मारक के तौर पर उन्‍हें याद रखने में सहायता होती है। द्रविड़ आंदोलन के नेता नास्तिक होते हैं, जो कि सैद्धांतिक रूप से ईश्‍वर और समान प्रतीकों को नहीं मानते। लेकिन यह दिलचस्‍प है कि ईश्‍वर के अस्तित्‍व से पैदा हुई कमी को मूर्तियों और स्‍मारकों से भर दिया जाता है। फैंस और समर्थकों को विश्‍वास है कि वे अभी भी मरीना बीच पर एमजीआर की घड़ी के टिक-टिक करने की आवाज सुन सकते हैं।
तमिलनाडु के कई नेताओं को दफनाए जाने की प्रक्रिया देखने वाले एक वरिष्‍ठ राजनैतिक एनालिस्‍ट कहते हैं कि दफनाने के पीछे एक से ज्‍यादा वजहें हो सकती हैं। उन्‍होंने कहा, ”चूंकि, वह विश्‍वास रखती थीं, यह तय है कि लोग मृत्‍यु के बाद उन्‍हें दफनाने की ही बात करेंगे। लेकिन उन्‍हें दाह संस्‍कार के लिए एक सगा रिश्‍तेदार चाहिए। जयललिता की सिर्फ सगी भतीजी दीपा जयाकुमार (ज‍यललिता के स्‍वर्गवासी भाई, जयाकुमार की बेटी) हैं। यह भी साफ है कि शशिकला का वंश दीपा को किसी तरह से भी अंतिम संस्‍कार जुलूस के आस-पास फटकने नहीं देगा क्‍योंकि उससे चुनौती पैदा होगी।”
ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी से मीडिया और कम्‍युनिकेशंस में रिसर्च कर रहीं दीपा को अपोलो हॉस्पिटल में भी जयललिता से मिलने नहीं दिया गया था, जबकि वह कई बार उन्‍हें देखने अस्‍पताल गई थीं। दो दिन पहले, पुलिस दीपा और उनके पति को अपोलो हॉस्पिटल के गेट से बाहर धक्‍का देते हुए नजर आई थीं। दोनों को मीडिया से दूर रखने के निर्देश वरि ष्‍ठ नेताओं की तरफ से आए थे।