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सपा के दंगल में पिता-पुत्र में नहीं हुई सुलह, अखिलेश गुट ने 1.5 लाख पन्नों का दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपा

समाजवादी पार्टी में जारी कलह और सुलह की कोशिशों के बीच अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। शनिवार को भी दोनों गुटों में बैठकों का दौर चलता रहा। सुलह कराने के मुख्य सूत्रधार आजम खान को माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष पद पर दोनों गुटों में पेंच फंसा हुआ है। इसबीच अखिलेश यादव गुट की तरफ से रामगोपाल यादव ने शनिवार को चुनाव आयोग में 1.5 लाख पन्नों का दस्तावेज सौंपा। आयोग ने 9 जनवरी तक दोनों गुटों से अपने समर्थक विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों समेत अन्य नेताओं का हस्ताक्षरयुक्त हलफनामा सौंपने को कहा है। इसी के मद्देनजर रामगोपाल यादव ने सात प्रतियों में इन दस्तावेजों को आयोग के कार्यालय में जमा कराया है। दस्तावेज सौंपने के बाद उन्होंने दावा किया कि 1.5 लाख पन्नों के इन कागजातों में 200 से अधिक विधायकों, 68 विधान परिषद सदस्यों में से 56 विधान परिषद सदस्यों, 24 सांसदों में से 15 सांसदों तथा 5000 प्रतिनिधियों में से अखिलेश समर्थक करीब 4600 प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।

इधर, समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव के साथ दिल्ली रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को मुलायम सिंह चुनाव आयोग जाकर समर्थक विधायकों, सांसदों और प्रतिनिधियों के दस्तावेज सौंपेंगे और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने आयोग को पत्र लिखकर समय मांगा है।

उधर, दस्तावेज सौंपने के बाद अखिलेश गुट के रामगोपाल यादव ने दावा किया कि 90 फीसदी जनप्रतिनिधि एवं प्रतिनिधि अखिलेश यादव के साथ हैं। इसलिए अखिलेश गुट ही असली समाजवादी पार्टी है। उन्होंने इसी के तहत साइकिल निशान पर दावा ठोका है और मांग की कि उनके गुट को साइकिल दिया जाना चाहिए। रामगोपाल ने दावा किया कि आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों का एक सेट मुलायम सिंह को उनके दिल्ली निवास पर भी भेजा गया है लेकिन उन्होंने पावती देने से इनकार कर दिया। अब उसे उनके लखनऊ के पते पर भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने दस्तावेज सौंपने की समय सीमा 9 जनवरी तय कर रखी है। 3 जनवरी को समाजवादी पार्टी में विभाजन उस वक्त औपचारिक रूप से सामने आ गया था, जब दोनों पक्ष सपा और उसके निशान पर दावा करते हुए चुनाव आयोग के पास पहुंचे थे।

 
 

जाने माने अमेरिकी अर्थशास्त्री ने कहा- नोटबंदी से मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेला

जाने माने अमेरिकी अर्थशास्त्री स्टीव एच हांके ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत में ‘नकदी पर हमले’ से जैसी की उम्मीद थी, अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेल दिया। मैरीलैंड, बाल्टीमोर की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में एपलायड इकोनोमिस्ट हांके ने कहा, ‘नकद राशि के खिलाफ जंग छेड़ने से मोदी ने सरकारी तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेल दिया। मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद मैं यही सोच रहा था कि ऐसा होगा।’
उन्होंने कहा, ‘नकद राशि के खिलाफ जंग छेड़ने से विनिर्माण क्षेत्र प्रभावित हुआ है। मोदी के फैसले से भारत में अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है।’ हांके ने कहा कि नोटबंदी की वजह से भारत 2017 में आर्थिक वृद्धि के मामले में नेतृत्व के मंच से नीचे खिसक सकता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर को अचानक 500 और 1,000 रुपए के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी। सरकार ने यह कदम कालाधन, नकली नोट और भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए उठाया।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के फैसले के बाद कई अन्य अर्थशास्त्रियों ने भी इस फैसले की आलोचना की थी। इसके साथ ही इस फैसले से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर विपक्षी दलों ने भी भाजपा सरकार को निशाना बनाया था। अर्थशास्त्रियों ने कहा था कि इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उनका कहना था कि देश की इकॉनोमी से 85 फीसदी नगदी वापस ले ली गई। साथ ही कहा था कि इस फैसले की वजह से कई उद्योंगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे देश में मंदी और बेरोजगारी बढ़ेगी।

अखिलेश यादव ने औरंगजेब को भी पीछे छोड़ा : साध्वी निरंजन ज्योति

केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। साध्वी ने संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश अपने पिता मुलायम सिंह यादव को सपा अध्यक्ष पद से हटाकर खुद वहां बैठ गये। ऐसा कर अखिलेश ने औरंगजेब को भी पीछे छोड़ दिया है।
साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि अखिलेश केवल प्रचार माध्यमों और अपने परिवार में लोकप्रिय हैं। उन्होंने अपने परिवार में विघटन करा दिया है। साध्वी ने इसके साथ ही कहा कि सपा परिवार का झगड़ा मुलायम की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। उन्होंने संभावना जताई कि अगले एक दो-दिन में मुलायम और अखिलेश फिर एक हो सकते हैं।
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री ने बसपा मुखिया मायावती पर प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म के नाम पर वोट मांगने को गलत ठहराने के उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले के बावजूद मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में जिस तरह मुस्लिमों के साथ ही जातीय स्तर पर वोट देने का अनुरोध किया उससे उनकी बौखलाहट उजागर होती है। साध्वी ने विश्वास जताया कि उच्चतम न्यायालय मायावती के इस बयान का स्वत: संज्ञान लेकर उन पर कार्रवाई करेगा।
उन्होंने एक ताजा सर्वेक्षण में अखिलेश के सबसे अधिक लोकप्रिय होने और सपा के सबसे अधिक सीट जीतने के आकलन को गलत बताते हुए कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में भी मीडिया भाजपा को कम सीट पर विजयी दिखाता था लेकिन उसे पूर्ण बहुमत मिला। विधानसभा चुनाव में भी भाजपा तमाम आकलनों को झुठलाते हुए पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। साध्वी ने एक सवाल के जबाब में कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में विकास और ध्वस्त कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाएगी। वहीं राम मन्दिर को लेकर पूछ गए सवाल पर उन्होंने कहा कि राम मन्दिर आस्था का मामला है। यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है।

सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी: तृणमूल कांंगेस कार्यकर्ताओंं ने सीबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं ने आज यहां सीबीआई के राज्य मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। एजेंसी बंदोपाध्याय को मंगलवार देर रात भुवनेश्वर लेकर आयी है। तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता बंदोपाध्याय को रोज वैली ग्रुप के पोंजी घोटाले के सिलसिले में सीबीआई ने मंगलवार को कोलकाता से गिरफ्तार किया था। एजेंसी उन्हें देर रात ही भुवनेश्वर लेकर आयी। इससे पहले सीबीआई ने तृणमूल के एक अन्य सांसद तापस पॉल को समान आरोपों में गिरफ्तार किया था। वह तीन दिन तक सीबीआई हिरासत में रहे थे। चौथी बार लोकसभा सदस्य चुने गए और पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार में राज्यमंत्री रहे बंदोपाध्याय को कथित रूप से विभिन्न प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं देने और असहयोगी रवैये के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
तृणमूल नेता की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन के लिए रामनगर से विधायक अखिल गिरि के नेतृत्व में एकत्र हुए पार्टी कार्यकर्ताओं ने यहां सीबीआई कार्यालय के बाहर धरना दिया। तृणमूल कांग्रेस की ओेडिशा ईकाई के कई सदस्यों और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष आर्य कुमार ज्ञानेन्द्र ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।सीबीआई ने सुदीप बंदोपाध्याय और तापस पॉल को राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया है। तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश ईकाई 10 जनवरी को भुवनेश्वर में विशाल विरोध प्रदर्शन रैली की योजना बना रही है। प्रस्तावित प्रदर्शन रैली में तृणमूल कांग्रेस के कुछ लोकप्रिय नेताओं को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के दो सदस्यीय शिष्टमंडल ने यहां सीबीआई अधिकारियों से भी भेंट की और बंदोपाध्याय और पाल की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध जताया। यहां सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि सीबीआई अदालत में पेश किए जाने से पहले बंदोपाध्याय को मेडिकल परीक्षण के लिए कैपिटल अस्पताल ले जाया जाएगा। जांच एजेंसी बंदोपाध्याय की हिरासत मांगेगी क्योंकि वह कथित रूप से जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। हालांकि बंदोपाध्याय के वकील राजीव मजुमदार ने कहा कि वह अदालत में जमानत याचिका दायर करेंगे क्योंकि उनके मुव्वकिल अस्वस्थ हैं।
मजुमदार ने यहां सीबीआई कार्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा कि वह अस्वस्थ हैं। वह अदालत में जमानत का आवेदन देंगे। उन्होंने मामले में बंदोपाध्याय की संलिप्तता साबित करने की चुनौती सीबीआई को दी। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई बंदोपाध्याय और पाल दोनों से पूछताछ करने की योजना बना रही है क्योंकि दोनों की गिरफ्तारी 17,000 करोड़ रूपए के घोटाले में संलिप्तता के आरोप में हुई है। रोज वैली ग्रुप पर आरोप है कि उसने राज्य के निवेशकों से 17,000 करोड़ रूपए ठगे हैं। पाल ग्रुप के निदेशकों में से एक हैं जबकि बंदोपाध्याय पर पोंजी फर्म का प्रोमोटर होने का आरोप है।

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम सुंदर लाल पटवा का निधन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में 3 दिन का राजकीय शोक की घोषणा

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो 92 साल के थे। राज्य सरकार ने पटवा के निधन के बाद 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की।
पटवा दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार 20 जनवरी, 1980 से लेकर 17 फरवरी ,1980 तक , जब राज्य में जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी थी। फिर 5 मार्च, 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक वो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के मुखिया रहे।
पटवा की राजनीतिक जीवन 1951 में शुरू हुई थी। पटवा पहले इंदौर राज्य प्रजा मंडल में काम किया फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़े । आपातकाल के दौरान पटवा को मीसा के तहत हिरासत में लिया गया था।  1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आंदोलन में भाग लेने के लिए पटवा सात महीने जेल में रहे। पटवा 1997 में छिंदवाड़ा पहला लोकसभा उपचुनाव जीता, लेकिन अगले साल आम चुनाव में वो हार गए। 1999 में, वह होशंगाबाद लोकसभा जीता और 1999 से 2001 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे।
पीएम मोदी ने पटवा के निधन पर शोक जताया। पीएम ने कहा कि वह बहुत ही मेहनती और ईमानदार नेता थे, उनके एमपी सीएम के पद पर रहते हुए किए गए बेहतरीन काम को हमेशा याद किया जाएगा।

 

303 रन बनाने वाले करुण नायर की कहानी: कमजोरी के कारण शुरू में पिच पर गिर जाते थे, 5 महीने पहले नदी में गिरने के बाद बाल-बाल बचे थे

करुण नायर ने इंग्‍लैंड के खिलाफ चेन्‍नई टेस्‍ट में तिहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया।
करुण नायर ने इंग्‍लैंड के खिलाफ चेन्‍नई टेस्‍ट में तिहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। उन्‍होंने नाबाद 303 रन की पारी खेली और अपने पहले ही टेस्‍ट शतक को तिहरे में बदलने वाले तीसरे क्रिकेटर बन गए। भारत की ओर से यह टेस्‍ट मैचों में तीसरा तिहरा शतक था। लेकिन जब भी करुण बल्‍लेबाजी करते हैं तो उनकी मां प्रेमा मैच नहीं देखती। उन्‍हें लगता है कि जब भी ऐसा होता है तो उनका बेटा जल्‍दी आउट हो जाता है। उनका कहना है कि मुंबई टेस्‍ट में जैसे ही उन्‍होंने टीवी चलाया करुण एलबीडब्‍ल्‍यू हो गए। इसके चलते उनके पति कलाधरन ने चेन्‍नई टेस्‍ट देखने जाने के लिए उन पर काफी दबाव डालकर मनाया। एमए चिदबंरम स्‍टेडियम में करुण ने अपनी मां को गलत साबित कर दिया और रिकॉर्डतोड़ पारी खेल डाली।
वीरेंद्र सहवाग के बाद वे दूसरे भारतीय बल्‍लेबाज हैं जिन्‍होंने टेस्‍ट क्रिकेट में शतक लगाया है। रोचक बात है कि शुरुआत में करुण नायर चेन्‍नई टेस्‍ट के लिए भारतीय टीम का हिस्‍सा भी नहीं थे। उन्‍हें मोहाली टेस्‍ट में केएल राहुल के चोटिल होने के बाद लिया गया था। इसके बाद मुंबई टेस्‍ट में अजिंक्‍य रहाणे के चोटिल होने पर उन्‍हें बनाए रखा गया। लेकिन नायर के लिए क्रिकेटर बनने की कहानी इतनी भी आसान नहीं है। पांच महीने पहले 17 जुलाई को करुण केरल में अरुणमला मंदिर में ‘वल्‍ला संध्‍या’ के लिए गए थे। यह कार्यक्रम जिम्‍बाब्‍वे के खिलाफ सीरीज में डेब्‍यू के बाद भगवान का शुक्रिया अदा करने के लिए आयोजित किया गया था। उस समय स्‍नेक बोट में जा रहे थे तो नाव पलट गई थी। करुण तैरना नहीं जानते थे लेकिन फिर भी जैसे तैसे करके रेस्‍क्‍यू वाली जगह पहुंचे और बच गए। इस हादसे में कुछ लोगों को बचाया नहीं जा सका था। करुण जब सुरक्षित जगह पर पहुंचे तो उन्‍हें पता चला कि मरने वालों में उनके कुछ रिश्‍तेदार भी थे।
नायर परिवार के एक करीबी रिश्‍तेदार ने बताया, ”उस घटना ने करुण को हिला दिया और गहरा असर डाला। हम कोशिश करते हैं कि इस मामले को उसके सामने नहीं लाएं।” करुण स्‍वभाव से शर्मीले और संकोची हैं। वे किसी तरह की भावनाएं नहीं दिखाते। उनके पिता कलाधरन मैकेनिकल इं‍जीनियर हैं और बेंगलुरु के चिन्‍नास्‍वामी स्‍टेडियम के स्प्रिकंलर सिस्‍टम पर काम कर चुके हैं। उन्‍हें क्रिकेट का काफी शौक है। परिजनों ने बताया कि करुण का जन्‍म समय से पहले आठवें महीने में ही हो गया था। इसके चलते उनकी टांगें कमजोर थीं और डॉक्‍टर के कहने पर उन्‍हें स्‍पोर्ट में डाला गया।
उनकी मां प्रेमा के अनुसार, ”शुरुआत में वह गिर जाता था और रोता था। यहां तक कि जब वह क्रिकेट खेलने लगा था तब भी हम परेशान रहते थे।” केएल राहुल करुण के बचपन के दोस्‍त हैं। जब करुण ने तिहरा शतक लगाया तो प्रेमा नायर स्‍टेडियम में पति व अन्‍य रिश्‍तेदारों के साथ खड़ी होकर तालियां बजा रही थीं। खुशी के मारे उनकी आंखें भी बरस पड़ी थीं।

प्रखर गांधीवादी और पर्यावरणविद अनुपम मिश्र नहीं रहे

ANUPAM MISHRA BOOK

 


मशहूर गांधीवादी और पर्यावरणविद अनुपम मिश्र का दिल्ली में निधन हो गया है. सोमवार सुबह दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया. वो लंबे समय से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे.

अनुपम मिश्र का जन्म महाराष्ट्र के वर्धा में प्रसिद्ध हिंदी कवि भवानी प्रसाद मिश्र और सरला मिश्रा के यहां सन 1948 में हुआ था. पर्यावरण-संरक्षण के प्रति जनचेतना जगाने और सरकारों का ध्यान आकर्षित करने की दिशा में वह काफी वक्त से सक्रिय थे.

दिल्ली के निगमबोध घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया. इससे पहले दिवंगत अनुपम मिश्र का पार्थिव शरीर गांधी शांति प्रतिष्ठान में रखा गया, जहां पहुंचकर लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी. गांधी शांति प्रतिष्ठान से ही उनकी अंतिम यात्रा निगमबोध घाट के लिए रवाना हुई.

हाईब्रीड को टक्कर देगी इंदिरा सेमी बरबट्टी, सफेद बैगन और मिर्च के बीज भी तैयार अगले साल से मिलेंगे किसानों को

 रायपुर सब्जी उत्पादक किसानों के लिए खुषखबरी। सेमी,बरबट्टी, सफेद बैगन और मिर्च के ऐसे बीज तैयार किए जा चुके है जोे हाइ्रब्रीड बीज को कड़ा टक्कर देंगी। ये बीज अगले साल से किसानों तक पहंुचने लगेंगे।े सबसे महत्वपूर्ण यह कि बाजार मे मौजूद हाइ्रब्रीड बीज की कीमतों से इनकी कीमत काफी कम होगी साथ ही उत्पादन भी जोरदार देंगी।


इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय के सब्जी विज्ञानियों ने सब्जी की चार ऐसी प्रजातियों के उन्नत बीज तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है। जिसकी खेती एक बड़े रकबे मे ली जाती है। इनमे सेमी, बरबट्टी, सफेद बैगन और मिर्च मुख्य है। इसके अलावा जिस अनुपात मे उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है उसके बाद तो सब्जी की खेती का रकबा हर जिले के लिए अलग-अलग तय किया जा चुका है। इससे हो यह रहा है निर्यात बढ़ रहा है और हाईब्रीड बीज बनाने वाली कंपनियों को अच्छा बाजार भी मिल रहा है। लेकिन बीतेे कुछ सालों से देखने में यह आ रहा है कि किसान ज्यादा उत्पादन की चाह मे  ऐसे बीज ले रहे है जिनमें कई तरह की अपनी दिक्कत है।े इसलिए इसे ही ध्यान मे रखा जाकर इंदिरा गांधी कृषि विष्वविद्यालय रायपुर के सब्जी वैज्ञानिको ंने ऐसे बीज पर रिसर्च की ठानी  जो ऐसी सभी दिक्कतों से सब्जी उत्पादक किसानों को छुटकारा दिला सके । कोषिष रंग लाई और आखिरकार सब्जी के इन चारों प्रजातियों के बीज तैयार हो गए। प्रयोग के तौर पर विष्वविद्यालय के अपने फार्म हाउस में इसकी फसल ली गई। परिणाम उत्साह बढ़ाने वाले रहे । अब बीज तैयार है। किसानों तक पहुंचने के लिए कोषिष यह की जा रही है कि ये अगले खरीफ की फसल तक सब्जी बाड़ियों मे पहंुच जाए।
 नए बीज देंगे टक्कर
विष्वविद्यालय ने इंदिरा सेमी, इंदिरा लाल बरबट्टी, इंदिरा सफेद बैगन, और इंदिरा मिर्च की जो प्रजाति तैयार की है वे हाईब्रीड बीज को कड़ी टक्कर देगी। कीमत में भी ये कम होगी और उत्पादन भी बाजार में मौजूद हाइ्रब्रीड बीज की तुलना मे ज्यादा देंगी।
 यहां मिलेंगे बीज 
स्ेामी,बरबट्टी, सफेद बैगन और मिर्च के ये उन्नत बीज विष्वविद्यालय के फार्म हाउस के अलावा डी.के.एस. काॅलेज आॅफ एग्री. ऐड रिसर्च स्टेषन भाटापारा से उपलब्ध होगा। अगले सत्र से ये बीज किसानों तक पहुंचने लगेंगे।
वर्जन 
मिलेगा ज्यादा उत्पादन 
सब्जी की इन चारों प्रजातियों के बीज ज्यादा उत्पादन देने वाली है। हाईब्रीड बीज की तुलना में ये काफी सस्ते हैं।
-डा. अमित दीक्षित कृषि वैज्ञानिक (सब्जी विज्ञान) 
 इंदिरा गांधी  कृषि विष्वविद्यालय रायपुर

 

सूरत के चायवाले से अब 50 किलो चांदी के बर्तन बरामद, छापे में अभी तक 1700 करोड़ की प्रॉपर्टी मिली

सूरत। गुजरात के सूरत में काले कारोबारी किशोर भजियावाला पर पड़ रहे छापे में एक से बढ़कर एक खुलासे हो रहे हैं। छापे में भजियावाला की दुकान से चांदी के बर्तन मिले हैं। इन बर्तनों का वजन करीब 50 किलो है। ये बर्तन दुकान के बेसमेंट में 8 फीट लंबी संदूक में छिपाकर रखे गए थे। दुकान की चाबी नहीं देने पर आयकर विभाग के अधिकारी शटर तोड़कर दुकान में घुसे और बर्तनों को जब्त किया।

 आयकर विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अभी तक उसकी 1700 करोड़ की संपति का पता चला है। आयकर विभाग ने उसके पास से 150 से ज्यादा प्रॉपर्टी के दस्तावेज बरामद किए हैं और ये छापेमारी अभी खत्म नहीं हुई है।
आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक अभी तक भजियावाला के पास से 150 से ज्यादा प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले हैं जिसकी बाजार कीमत 1500 से 1700 करोड़ के आसपास बताई जा रही है। पुलिस अब ये पता लगाने में जुटी है कि ये प्रॉपर्टी किसने नाम है? आयकर विभाग को शक है कि किशोर भजियावाला ने अलग-अलग नाम से ये प्रॉपर्टी खरीदी है।
आयकर विभाग के अफसर पिछले 5 दिन से किशोर भजियावाला के घर तलाशी में जुटे हैं। सूत्रों के मुताबिक अभी तक की जांच में किशोर के पास से 150 करोड़ की नकदी मिली है। बरामद रकम में से 90 लाख नई करेंसी में है। शनिवार को भजियावाला का एक पुराना दफ्तर खोला गया जो लंबे वक्त से बंद पड़ा था। इस दफ्तर से आयकर विभाग ने 2 किलो सोने के गहने जब्त किए। पहले घर, फिर बैंक और फिर दफ्तर में लगातार तलाशी जारी है। शुक्रवार को खोले गए 8 लॉकर में 13 किलो सोना मिला है। इसके अलावा चांदी और 5 लाख की नकदी भी मिली है। गुरुवार को खोले गए 8 बैंक लॉकर में एक करोड़ 8 लाख रुपये मिले थे। इसके अलावा 75 लाख कीमत के गहने भी बरामद हुए हैं।
इतना ही नहीं सूत्रों के मुताबिक किशोर भजियावाला के लॉकर से आयकर विभाग को जो दस्तावेज मिले हैं उसमें और भी चौंकाने वाली जानकारी है। इनकम टैक्स को शक है कि किशोर फर्जी दस्तावेज के सहारे किसान बना है और उसने एक साल के भीतर ही 300 बीघा जमीन खरीदी है। बताया जा रहा है कि एक जाने माने निजी बैंक ने इलाके में अपनी ब्रांच का उद्घाटन किशोर के हाथों करवाया था। पहले दिन आयकर विभाग किशोर भजियावाला के यहां छापा मारा था तो उसके घर से 23 लाख रुपये की नई करेंसी मिली थी।
बताया जा रहा है कि 30 साल पहले किशोर भजियावाला सूरत के उधना इलाके में ठेले पर चाय पकौड़ी बेचता था। इसके बाद उसने ऊंची ब्याजदर पर लोगों को पैसा देने का धंधा शुरू किया। इनकम टैक्स की छापेमारी में 14 बिल्डर के नाम का भी खुलासा हुआ है जो किशोर से ब्याज पर पैसा लेते थे। किशोर भजियावाला की महीने की कमाई साढ़े सात करोड़ बताई जा रही है। मगर आयकर विभाग में वो सालाना सिर्फ डेढ़ करोड़ ही टैक्स भरता है।
आरोप है कि काले धन को सफेद बनाने के लिए किशोर ने भगवान को भी नहीं बख्शा। सूरत के उधना इलाके में उसने एक मंदिर भी बनवाया था और पत्नी कमल भजियावाला के नाम पर एक एनजीओ भी रजिस्टर्ड है, जहां करोड़ों का काला धन सफेद किया जा चुका है। आयकर विभाग अब इन तमाम आरोपों की जांच कर रहा है।

राहुल गांधी को मौका दिया होता तो संसद में पीएम को बेनकाब कर देते: आजाद

जम्मू। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने शनिवार को कहा कि राहुल गांधी को अगर संसद के अंदर बोलने दिया जाता तो प्रधानमंत्री बेनकाब हो जाते। राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता ने कहा कि राहुल गांधी के अवसर नहीं दिया गया जो वह सदन के अंदर कुछ कहना चाहते थे।
आजाद ने कहा कि अगर उन्हें संसद में बोलने दिया जाता तो प्रधानमंत्री बेनकाब हो जाते। अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं था तो फिर सरकार और सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने राहुल गांधी को क्यों नहीं बोलने दिया।
बता दें कि कुछ दिनों पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा था कि मेरे पास पीएम के खिलाफ भ्रष्टाचार की निजी जानकारी है। मेरे पास उनकी पर्सनल जानकारी है, जो मैं लोकसभा में रखना चाहता हूं लेकिन हमें ऐसा करने नहीं दिया जा रहा। हमें बोलने दीजिए हम सब दिखा देंगे।

जम्मू कश्मीर: इस साल शहीद हुए 60 जवान, पिछले दो सालों के मुकाबले दोगुनी हुई संख्या

भारतीय आर्मी ने पिछले साल के मुकाबले इस साल अबतक लगभग दोगुने जवानों को खो दिया है।

भारतीय आर्मी ने पिछले साल के मुकाबले इस साल अबतक लगभग दोगुने जवानों को खो दिया है। इसका मुख्य कारण सीजफायर का उल्लंघन बढ़ना, घुसपैठ और पाकिस्तान आर्मी एक्शन टीम (BAT) के लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर हो रहे हमले हैं। साथ ही आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए राज्य में हो रहे ऑपरेशन में भी काफी जवानों ने जान गंवाई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार 15 दिसंबर तक जम्मू कश्मीर में 60 जवान शहीद हो गए थे। वहीं 2015 में शहीद होने वालों की संख्या 33 थी और 2014 में 32 जवानों ने देश के लिए जान दी थी। 60 में से 23 जवान लाइन ऑफ कंट्रोल पर होने वाले सीजफायर और ऑपरेशन्स में मारे गए। वहीं 2015 में ऐसी कार्रवाही में सिर्फ चार और 2014 में सिर्फ पांच शहीद हुए थे। वहीं आंतरिक इलाकों में हुई मुठभेड़ में अबतक 37 जवान शहीद हुए हैं। 2015 में ऐसे हमलों में 29 जवान और 2014 में 27 जवान शहीद हुए थे।
आर्मी अफसर का कहना है कि आंतरिक इलाकों में शहीद होने वालों की संख्या दो बड़े हमलों की वजह से ज्यादा है। जिसमें उरी और नगरोटा हमला शामिल है। उरी हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। उसके बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। जिसके बाद ही सीमा पर सीजफायर उल्लंघन की घटनाएं बढ़ने लगीं। सीजफायर में दोनों ही देशों की तरफ से भारी हथियारों का इस्तेमाल हुआ। जिसमें तोपें भी शामिल हैं।
गौरतलब है कि पिछले तीन हफ्तों से सीजफायर का उल्लंघन कम हो रहा है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए आर्मी के अफसरों ने यह भी माना कि घाटी में आतंक बढ़ गया है। इस साल 100 से ज्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं। उनमें से ज्यादातर घुसपैठ के दौरान मारे गए।

नरेंद्र मोदी सरकार की 50-50 स्कीम में 31 मार्च 2017 तक बस एक ईमेल से किया जा सकेगा काला धन सफेद

केंद्र सरकार ने कालेधन को सफेद करने के लिए स्‍कीम का एलान किया है। इसके अनुसार 50 प्रतिशत टैक्‍स देकर काले धन को सफेद किया जा सकेगा। राजस्‍व सचिव हसमुख अधिया ने बताया कि यह योजना शनिवार (17 दिसंबर) से शुरू होगी। उनके अनुसार, खुद बताने पर 50 प्रतिशत राशि काटी जाएगी। इसके तहत 31 मार्च तक धन सफेद किया जा सकेगा। बैंकों में जमा की जा रही रकम पर नजर रखी जा रही है। कालेधन के पूरे खेल पर सरकार की नजर है। कालेधन की सूचना ईमेल के जरिए दी जा सकती। हालांकि उन्‍होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि इंस्‍पेक्‍टर राज हो जिससे लोगों पर असर पड़े। लोगों को समझना चाहिए कि उनके अकाउंट से जुड़ी सारी जानकारी विभाग के पास है। अधिया ने बताया कि अगर कोई व्‍यक्ति कालेधन को सफेद कर रहा है तो उसकी जानकारी भी ईमेल आईडी के जरिए दी जा सकती है।
अधिया ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण कल्‍याण योजना के तहत 50 प्रतिशत टैक्‍स और पेनल्‍टी के साथ 31 मार्च 2017 तक बेहिसाब नकदी का खुलासा किया जा सकता है। इस योजना के जरिए लोगों के कल्‍याण के लिए योगदान दिया जा सकता है। नई योजना के तहत किए गए खुलासों को गुप्‍त रखा जाएगा। यह जानकारी केस चलाने के लिए इस्‍तेमाल नहीं होगी। टैक्‍स अधिकारियों को कालेधन की जानकारी देने के लिए एक नई ईमेल आईडी बनाई गई है। मुकदमे से बचने और डिसक्‍लोजर स्‍कीम का फायदा लेने के लिए जमा राशि पर चुकाए गए टैक्‍स की रसीद दिखानी होगी। बैंकों में पैसा जमा कराने का मतलब यह नहीं है कि वह सफेद हो गया है। जब तक उस पर टैक्‍स नहीं दिया जाएगा वह धन काला ही रहेगा।
वहीं सीबीडीटी चेयरमैन सुशल चंद्रा ने बताया कि नोटबंदी के बाद से 295 मामलों में सर्वे के बाद 291 मामलों में जांच और जब्‍ती की कार्रवाई की गई है। बैंक खातों में जमा के अनुसार 3000 नोटिस जारी किए गए हैं। अलग-अलग छापों में 80 करोड़ रुपये के नए नोटों के साथ ही 316 करोड़ रुपये जब्‍त किए गए हैं। इसके अलावा 76 करोड़ रुपये की ज्‍वैलरी भी जब्‍त हुई है। गौरतलब है कि वित्‍त मंत्रालय ने पिछले दिनों संसद में टैक्‍सेशन लॉ अमेंडमेंट बिल पेश किया था। इस बिल में काले धन को सफेद रखने का प्रस्‍ताव रखा गया था। संसद के दोनों सदनों में यह बिल पास हो गया था जिसके चलते इस स्‍कीम का रास्‍ता साफ हो गया था।

एक साथ दो सीटों से चुनाव लड़ने पर लगे रोक : चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से कानून में ऐसे संशोधन की सिफारिश की है, जिससे कोई व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सके।

चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से कानून में ऐसे संशोधन की सिफारिश की है, जिससे कोई व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सके या ऐसे कानूनी प्रावधान किए जाएं जिससे कोई उम्मीदवार यदि दो सीटों पर चुनाव लड़कर दोनों सीटें जीत जाए और फिर उसे कानूनन एक सीट खाली करनी पड़े, तो ऐसी स्थिति में वह खाली की जा रही सीट पर होने वाले उप-चुनाव के लिए ‘‘उचित’’ धनराशि सरकारी खजाने में जमा कराए। जनप्रतिनिधित्व कानून किसी व्यक्ति को आम चुनाव या उप-चुनाव या दो साल पर होने वाले चुनाव में अधिकतम दो सीटों से किस्मत आजमाने की इजाजत देता है। हालांकि, दोनों सीटें जीत जाने पर कोई व्यक्ति इनमें से किसी एक सीट पर ही कायम रह सकता है और दूसरी सीट उसे छोड़नी पड़ती है।
चुनाव कानूनों में 1996 में हुए एक संशोधन से पहले किसी व्यक्ति की ओर से लड़ी जा सकने वाली सीटों की संख्या पर कोई बंदिश नहीं थी। चुनाव सुधार पर इस महीने की शुरूआत में कानून मंत्रालय को भेजी गई अपनी सिफारिशों में चुनाव आयोग ने कहा कि उसने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33:7: में संशोधन का प्रस्ताव किया है।
साल 2004 के अपने प्रस्ताव में चुनाव आयोग ने कहा था कि यदि लोगों को एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कानून में बदलाव नहीं किए जा सकते तो जीतने वाले उम्मीदवार को सीट खाली करने पर वहां होने वाले उप-चुनाव का खर्च वहन करना चाहिए। आयोग ने उस वक्त विधानसभा और विधानपरिषद चुनावों के लिए पांच लाख रूपए जबकि लोकसभा चुनावों के लिए 10 लाख रूपए की धनराशि का प्रस्ताव किया था।
चुनाव आयोग की ओर से की गई सिफारिशों में कहा गया, ‘‘जब कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ता है और दोनों सीटों पर जीत हासिल करता है तो यह जरूरी है कि वह इनमें से कोई एक सीट खाली करे ।’’ सिफारिशों में कहा गया, ‘‘खाली हुई सीट पर उप-चुनाव कराने से सरकारी खजाने, मानवशक्ति और अन्य संसाधनों पर पड़ने वाले अपरिहार्य वित्तीय बोझ के अलावा यह उस चुनाव क्षेत्र के वोटरों के साथ नाइंसाफी होती है, जहां की सीट उम्मीदवार ने खाली की हो ।

कृषि मंत्रालय ने किया था गेहूं की बंपर फसल का दावा, आयात शुल्क हटाकर नरेंद्र मोदी सरकार ने कर दिया शर्मिंदा

नई दिल्ली (पीटीआई )2 अगस्त को कृषि भवन द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देश में 93.50 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था.
ठीक गेहूं की बोवाई के समय केंद्र सरकार ने गेहूं से आयात शुल्क हटाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कृषि मंत्रालय लगातार कहता आ रहा है कि 2015-16 में भारत में बड़ी स्तर पर गेंहू की पैदावार हुई थी। इसके अलावा मंत्रालय ने अगले साल की पैदावार का अनुमान भी काफी ज्यादा बताया था। 2 अगस्त को कृषि भवन द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देश में 93.50 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था, यह 2014-15 में 86.53 मिलियन टन से काफी ज्यादा था।
सूत्रों के मुताबिक सरकार के आयात शुल्क हटाने के फैसले के बाद देश में 2016-17 में गेहूं का आयात 60 लाख टन को पार करने की संभावना है जो निजी व्यापारियों के जरिये पिछले 10 साल में होने वाला सर्वाधिक आयात है। अब तक भारतीय व्यापारी करीब 35 लाख टन गेहूं के आयात के लिए अनुबंध कर चुके हैं जबकि 18 लाख टन गेहूं देश में आयात किया जा चुका है। सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में गेहूं पर आयात शुल्क हटाने संबंधी अधिसूचना सदन के पटल पर रखी थी। उन्होंने कहा था कि 8 दिसंबर 2016 को जारी अधिसूचना के अनुसार, गेहूं पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने इससे पहले इस साल सितंबर में गेहूं के आयात पर शुल्क 25 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत कर दिया गया था।
बता दें कि किसी भी वस्तु पर आयात शुल्क इसलिए लगाया जाता है ताकि आयातित वस्तु का दाम भी देसी उत्पाद के बराबर का हो जाए। इस तरह से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है तथा देसी उत्पादकों के हितों को चोट भी नहीं पहुंचती है। गौरतलब है कि देश में सबसे अधिक गेहूं की पैदावार उत्तर प्रदेश और पंजाब में होती है। गेहूं के उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर तथा पंजाब दूसरे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश की 76 प्रतिशत आबादी खेती पर ही निर्भर है, वहीं पंजाब में यह आंकड़ा 63 फीसदी का है।

नोटबंदी से भाजपा के कई सांसदों में घबराहट, MP बोले- बढ़ रही है नाराजगी, पार्टी भी नरेंद्र मोदी के भरोसे

पांच भाजपा सांसदों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर शुरुआती उत्‍साह के बाद अब साफ नाराजगी दिख रही है।

नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार के इसके पीछे के उद्देश्‍य को लेकर बदलते बयानों के बीच भाजपा के कई सांसदों में घबराहट है। नकदी की कमी के चलते लोगों की नाराजगी और गुस्‍से ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में पांच भाजपा सांसदों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर शुरुआती उत्‍साह के बाद अब साफ नाराजगी दिख रही है। उनका कहना है कि नकदी की कमी, एटीएम के बाहर लंबी लाइनों, स्‍थानीय अर्थव्‍यवस्‍था पर बुरे असर के चलते गुस्‍सा बढ़ रहा है। इन सांसदों ने माना कि मजदूरों, बुनकरों, सब्‍जी बेचने वालों, छोटे दुकानदारों और छोटे उद्योग धंधों को नकदी की कमी के चलते समस्‍या के लिए ग्राउंड रिपोर्ट के चलत चिंताएं हैं और अन्‍य सेक्‍टर्स में नौकरियों की कमी सबसे बड़ा खतरा है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों के पार्टी नेताओं ने नोटबंदी की प्रक्रिया को लेकर अंदरूनी बैठकों में चिंताएं जाहिर की हैं। विशेष रूप से उत्‍तर प्रदेश के भाजपा नेताओं में ज्‍यादा खलबली है। गौरतलब है कि यूपी में 2017 में चुनाव होने हैं। इसके चलते नेतृत्‍व ने कुछ समय तक इंतजार करने और फिर उसके अनुसार चुनाव की रणनीति तय करने का फैसला किया है। एक सांसद ने बताया, ”ताजा बयान कि नोटबंदी से डिजीटल इकॉनॉमी का रास्‍ता खुलेगा, यह चुनाव में नहीं बिकने वाला। अभी तो बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसे मुद्दे ही अनसुलझे हैं। हम दुकानदार या छोटे कारोबारी को डिजीटल होने को कैसे कह सकते हैं?”
भाजपा हालांकि उम्‍मीद बनाए हुए है और प्रधानमंत्री की विश्‍वसनीयता व लोगों के उनमें भरोसे के सहारे है। यूपी से आने वाले एक नेता ने बताया, ”लोगों का भरोसा उनसे( मोदी) से उठा नहीं है। वे भाजपा में विश्‍वास नहीं करते, उनका मानना है कि नरेंद्र मोदी मतलब देश के लिए अच्‍छा होगा।” कई सांसदों को वापस लिए गए नोटों के फिर से चलाए जाने की रिपोर्ट ने भी निराश किया है। सांसदों ने बताया कि शुरुआत में कहा गया था कि जो पैसा आएगा वो लोगों की भलाई में लगाया जाएगा और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च होगा। एक सांसद के अनुसार, ”आम जनता ने इस फैसले का स्‍वागत किया। उन्‍हें उम्‍मीद थी कि इससे जीवन आरामदायक बनेगा। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब इसके उलट स्थिति है।”
बिहार से एक वरिष्‍ठ भाजपा सांसद ने बताया, ”पार्टी का धड़ा मानता है कि इस प्रकिया से उम्‍मीद के अनुसार परिणाम नहीं मिला। उन्‍होंने आला नेताओ को इस बारे में बता दिया है।” नोटबंदी के असर के सवाल पर एक दूसरे सांसद बोले, ”केवल मोदीजी ही जानते हैं।” इसी बीच पार्टी नेतृत्‍व ने सांसदों और राज्‍य नेताओं से इंतजार करने व डिजीटल बैंकिंग का प्रचार करने को कहा है। उन्‍हें किसानों व कारोबारियों के लिए ट्रेनिंग कैंप लगाने को कहा गया है।