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एक साथ दो सीटों से चुनाव लड़ने पर लगे रोक : चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से कानून में ऐसे संशोधन की सिफारिश की है, जिससे कोई व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सके।

चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से कानून में ऐसे संशोधन की सिफारिश की है, जिससे कोई व्यक्ति एक साथ दो सीटों पर चुनाव नहीं लड़ सके या ऐसे कानूनी प्रावधान किए जाएं जिससे कोई उम्मीदवार यदि दो सीटों पर चुनाव लड़कर दोनों सीटें जीत जाए और फिर उसे कानूनन एक सीट खाली करनी पड़े, तो ऐसी स्थिति में वह खाली की जा रही सीट पर होने वाले उप-चुनाव के लिए ‘‘उचित’’ धनराशि सरकारी खजाने में जमा कराए। जनप्रतिनिधित्व कानून किसी व्यक्ति को आम चुनाव या उप-चुनाव या दो साल पर होने वाले चुनाव में अधिकतम दो सीटों से किस्मत आजमाने की इजाजत देता है। हालांकि, दोनों सीटें जीत जाने पर कोई व्यक्ति इनमें से किसी एक सीट पर ही कायम रह सकता है और दूसरी सीट उसे छोड़नी पड़ती है।
चुनाव कानूनों में 1996 में हुए एक संशोधन से पहले किसी व्यक्ति की ओर से लड़ी जा सकने वाली सीटों की संख्या पर कोई बंदिश नहीं थी। चुनाव सुधार पर इस महीने की शुरूआत में कानून मंत्रालय को भेजी गई अपनी सिफारिशों में चुनाव आयोग ने कहा कि उसने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33:7: में संशोधन का प्रस्ताव किया है।
साल 2004 के अपने प्रस्ताव में चुनाव आयोग ने कहा था कि यदि लोगों को एक से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कानून में बदलाव नहीं किए जा सकते तो जीतने वाले उम्मीदवार को सीट खाली करने पर वहां होने वाले उप-चुनाव का खर्च वहन करना चाहिए। आयोग ने उस वक्त विधानसभा और विधानपरिषद चुनावों के लिए पांच लाख रूपए जबकि लोकसभा चुनावों के लिए 10 लाख रूपए की धनराशि का प्रस्ताव किया था।
चुनाव आयोग की ओर से की गई सिफारिशों में कहा गया, ‘‘जब कोई उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ता है और दोनों सीटों पर जीत हासिल करता है तो यह जरूरी है कि वह इनमें से कोई एक सीट खाली करे ।’’ सिफारिशों में कहा गया, ‘‘खाली हुई सीट पर उप-चुनाव कराने से सरकारी खजाने, मानवशक्ति और अन्य संसाधनों पर पड़ने वाले अपरिहार्य वित्तीय बोझ के अलावा यह उस चुनाव क्षेत्र के वोटरों के साथ नाइंसाफी होती है, जहां की सीट उम्मीदवार ने खाली की हो ।

कृषि मंत्रालय ने किया था गेहूं की बंपर फसल का दावा, आयात शुल्क हटाकर नरेंद्र मोदी सरकार ने कर दिया शर्मिंदा

नई दिल्ली (पीटीआई )2 अगस्त को कृषि भवन द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देश में 93.50 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था.
ठीक गेहूं की बोवाई के समय केंद्र सरकार ने गेहूं से आयात शुल्क हटाकर केंद्रीय कृषि मंत्रालय के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। कृषि मंत्रालय लगातार कहता आ रहा है कि 2015-16 में भारत में बड़ी स्तर पर गेंहू की पैदावार हुई थी। इसके अलावा मंत्रालय ने अगले साल की पैदावार का अनुमान भी काफी ज्यादा बताया था। 2 अगस्त को कृषि भवन द्वारा जारी किए गए आकड़ों के मुताबिक, 2016-17 में देश में 93.50 मिलियन टन गेहूं के उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया था, यह 2014-15 में 86.53 मिलियन टन से काफी ज्यादा था।
सूत्रों के मुताबिक सरकार के आयात शुल्क हटाने के फैसले के बाद देश में 2016-17 में गेहूं का आयात 60 लाख टन को पार करने की संभावना है जो निजी व्यापारियों के जरिये पिछले 10 साल में होने वाला सर्वाधिक आयात है। अब तक भारतीय व्यापारी करीब 35 लाख टन गेहूं के आयात के लिए अनुबंध कर चुके हैं जबकि 18 लाख टन गेहूं देश में आयात किया जा चुका है। सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में गेहूं पर आयात शुल्क हटाने संबंधी अधिसूचना सदन के पटल पर रखी थी। उन्होंने कहा था कि 8 दिसंबर 2016 को जारी अधिसूचना के अनुसार, गेहूं पर आयात शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सरकार ने इससे पहले इस साल सितंबर में गेहूं के आयात पर शुल्क 25 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत कर दिया गया था।
बता दें कि किसी भी वस्तु पर आयात शुल्क इसलिए लगाया जाता है ताकि आयातित वस्तु का दाम भी देसी उत्पाद के बराबर का हो जाए। इस तरह से सरकार को राजस्व की प्राप्ति होती है तथा देसी उत्पादकों के हितों को चोट भी नहीं पहुंचती है। गौरतलब है कि देश में सबसे अधिक गेहूं की पैदावार उत्तर प्रदेश और पंजाब में होती है। गेहूं के उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर तथा पंजाब दूसरे नंबर पर है। उत्तर प्रदेश की 76 प्रतिशत आबादी खेती पर ही निर्भर है, वहीं पंजाब में यह आंकड़ा 63 फीसदी का है।

नोटबंदी से भाजपा के कई सांसदों में घबराहट, MP बोले- बढ़ रही है नाराजगी, पार्टी भी नरेंद्र मोदी के भरोसे

पांच भाजपा सांसदों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर शुरुआती उत्‍साह के बाद अब साफ नाराजगी दिख रही है।

नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार के इसके पीछे के उद्देश्‍य को लेकर बदलते बयानों के बीच भाजपा के कई सांसदों में घबराहट है। नकदी की कमी के चलते लोगों की नाराजगी और गुस्‍से ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में पांच भाजपा सांसदों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर शुरुआती उत्‍साह के बाद अब साफ नाराजगी दिख रही है। उनका कहना है कि नकदी की कमी, एटीएम के बाहर लंबी लाइनों, स्‍थानीय अर्थव्‍यवस्‍था पर बुरे असर के चलते गुस्‍सा बढ़ रहा है। इन सांसदों ने माना कि मजदूरों, बुनकरों, सब्‍जी बेचने वालों, छोटे दुकानदारों और छोटे उद्योग धंधों को नकदी की कमी के चलते समस्‍या के लिए ग्राउंड रिपोर्ट के चलत चिंताएं हैं और अन्‍य सेक्‍टर्स में नौकरियों की कमी सबसे बड़ा खतरा है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों के पार्टी नेताओं ने नोटबंदी की प्रक्रिया को लेकर अंदरूनी बैठकों में चिंताएं जाहिर की हैं। विशेष रूप से उत्‍तर प्रदेश के भाजपा नेताओं में ज्‍यादा खलबली है। गौरतलब है कि यूपी में 2017 में चुनाव होने हैं। इसके चलते नेतृत्‍व ने कुछ समय तक इंतजार करने और फिर उसके अनुसार चुनाव की रणनीति तय करने का फैसला किया है। एक सांसद ने बताया, ”ताजा बयान कि नोटबंदी से डिजीटल इकॉनॉमी का रास्‍ता खुलेगा, यह चुनाव में नहीं बिकने वाला। अभी तो बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसे मुद्दे ही अनसुलझे हैं। हम दुकानदार या छोटे कारोबारी को डिजीटल होने को कैसे कह सकते हैं?”
भाजपा हालांकि उम्‍मीद बनाए हुए है और प्रधानमंत्री की विश्‍वसनीयता व लोगों के उनमें भरोसे के सहारे है। यूपी से आने वाले एक नेता ने बताया, ”लोगों का भरोसा उनसे( मोदी) से उठा नहीं है। वे भाजपा में विश्‍वास नहीं करते, उनका मानना है कि नरेंद्र मोदी मतलब देश के लिए अच्‍छा होगा।” कई सांसदों को वापस लिए गए नोटों के फिर से चलाए जाने की रिपोर्ट ने भी निराश किया है। सांसदों ने बताया कि शुरुआत में कहा गया था कि जो पैसा आएगा वो लोगों की भलाई में लगाया जाएगा और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च होगा। एक सांसद के अनुसार, ”आम जनता ने इस फैसले का स्‍वागत किया। उन्‍हें उम्‍मीद थी कि इससे जीवन आरामदायक बनेगा। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब इसके उलट स्थिति है।”
बिहार से एक वरिष्‍ठ भाजपा सांसद ने बताया, ”पार्टी का धड़ा मानता है कि इस प्रकिया से उम्‍मीद के अनुसार परिणाम नहीं मिला। उन्‍होंने आला नेताओ को इस बारे में बता दिया है।” नोटबंदी के असर के सवाल पर एक दूसरे सांसद बोले, ”केवल मोदीजी ही जानते हैं।” इसी बीच पार्टी नेतृत्‍व ने सांसदों और राज्‍य नेताओं से इंतजार करने व डिजीटल बैंकिंग का प्रचार करने को कहा है। उन्‍हें किसानों व कारोबारियों के लिए ट्रेनिंग कैंप लगाने को कहा गया है।

जनधन खातों में अब तक 74 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये जमा, यूपी के खातों में सबसे ज्यादा पैसा

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से काला धन खपाने को लोग नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। जनधन खातों का भी कुछ इसी तरह इस्तेमाल किया गया है। नोटबंदी के बाद से बड़े पैमाने पर लोगों ने जनधन खातों में पैसा जमा किया है। वित्त मंत्रालय ने बताया है कि 7 दिसंबर तक जनधन खातों में कुल 74 हजार 610 करोड़ रुपये जमा हो गए हैं।
जनधन खातों में जमा राशि के मामले में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश है। उसके बाद पश्चिम बंगाल तथा राजस्थान का नंबर है। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 3.8 करोड़ जनधन खातों में सबसे अधिक 12,021.32 करोड़ रुपये जमा थे। पश्चिम बंगाल में 2.44 करोड़ खातों में 9,193.75 करोड़ रुपये जमा थे।
राजस्थान में जनधन खातों की संख्या 1.9 करोड़ और इनमें जमाराशि 6,291.1 करोड़ रुपये, बिहार में 2.62 करोड़ खातों में 6,160.44 करोड़ रुपये जमा थे। नोटबंदी के बाद से जनधन खातों में 28,973 करोड़ रुपये की भारी राशि जमा हुई है। इसके बावजूद शून्य शेष वाले खातों की संख्या 20 प्रतिशत से अधिक है।

बीजेपी नेता के बोल- चाहते तो ममता को बाल पकड़कर निकाल सकते थे, टीएमसी बिफरी

नई दिल्ली। नोटबंदी पर घमासान के बीच पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस में सियासी नूराकुश्ती चरम पर है। बात अब अपशब्दों के इस्तेमाल तक पहुंच गई है। प. बंगाल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने सीएम ममता बनर्जी पर तीखा बयान देकर सियासी तूफान ला दिया है। अब दोनों तरफ से बयानों के तीर छोड़े जा रहे हैं।
शनिवार को बंगाल के झारग्राम जिले के पश्चिमी मिदनापुर में बीजेपी के युवा मोर्चा को संबोधित करते हुए दिलीप घोष ने ममता पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि नोटबंदी के बाद ममता का दिमाग खराब हो चुका है। इसीलिए वह दिल्ली और फिर पटना गई थीं। जब कुछ हासिल नहीं हुआ तो राज्य सचिवालय में आकर बैठ गईं। हमें तो लगा था कि वह गंगा में कूद जाएंगी।
इस बयान पर मचे बवाल के बीच राज्य बीजेपी प्रमुख दिलीप घोष ने कहा है कि वह अपने बयान पर कायम हैं। घोष ने कहा कि हम लोग जब बंगाल में कोई विरोध करते हैं तो टीएमसी के गुंडे हमको मारते हैं और विरोध नहीं करने देते। जब हम विधानसभा में ये बात उठाते हैं तो स्पीकर बोलने नहीं देते हैं। तो मैंने कहा था कि दिल्ली में जब ये ड्रामा कर रही थीं और वहां पीएम को गाली दे रही थीं तो इससे समझ आता है कि वो अपना मानसिक संतुलन खो चुकी हैं। वहां हमारी पुलिस थी, हम चाहते तो वहां पर बाल पकड़कर इनको निकाल सकते थे, पर हमने ऐसा नहीं किया क्योंकि हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। लेकिन वो हमारे साथ मारपीट करते हैं। वो एक तानाशाह की तरह व्यवहार करती हैं और मैं अपने शब्दों पर कायम हूं।
News18India से बातचीत में भी दिलीप घोष ने यही बात दोहराई। इस सवाल पर कि क्या एक महिला के बारे में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, घोष ने कहा कि जो जिस तरह से बात करेगा, उसे उसी के तरीके से जवाब दिया जाएगा। क्या महिला को अधिकार है कि किसी भी पीएम को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करे, वो पीएम को क्या बोलती हैं?
इस सवाल पर कि आपकी पुलिस है तो क्या आप कुछ भी कर सकते हैं क्या? दिलीप घोष ने कहा- हां, हमारी पुलिस है हम कर सकते थे, लेकिन नहीं किया। कोई कुछ भी बोले हम चुप रहें, ऐसे भी कायर हम नहीं हैं।
उधर, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा ने ममता जी को व्यक्तिगत धमकियां दी हैं। भाजपा ममता दी से सुशासन और नोटबंदी से जुड़े उनके मुद्दों पर नहीं लड़ सकती इसलिए उसके नेता ऐसा कर रहे हैं। घोष ने ममता जी के खिलाफ बहुत ही आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया

घपलेबाजों पर नजर, मोदी सरकार ने करवाया बैंकों की 500 ब्रांचों का स्टिंग!

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद बैंकों पर नजर रखने के लिए तकरीबन 500 ब्रांचों में स्टिंग करवाया है और अब तक 400 सीडी वित्त मंत्रालय पहुंच चुकी हैं। एक अखबार ने इस बात का दावा किया है। बताया जा रहा है कि बैंकों में गड़बड़ियां जांचने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैंकों की 500 ब्रांचों में स्टिंग करवाएं हैं जिसमें सरकारी और निजी दोनों बैंक शामिल हैं।
माना जा रहा है कि इन सीडी से पता चल रहा है कि बैंकों में स्टाफ-पुलिस-दलाल और प्रभावशाली लोगों की सांठ-गांठ से पुराने नोट बदले जा रहे हैं। इनकी सीसीटीवी फुटेज भी सरकार ने मंगवाई है। फिलहाल बैंकों में हुई हर गड़बड़ी की जांच जारी है। जिन कर्मचारियों और अधिकारियों को दोषी पाया जाएगा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

हाल ही में गुजरात के डीसा में हुई रैली में पीएम मोदी ने गड़बड़ी करने वालों को चेताया था। उन्होंंने कहा था कि बैंकों में की जा रही गड़बड़ियों पर सरकार की नजर है। रैली में पीएम मोदी ने कहा था कि इन्हें लग रहा था कि मोदी ने 1000, 500 के नोट बंद कर दिए हैं, पिछले दरवाजे से कुछ कर लेंगे। लेकिन इन्हें पता नहीं कि मोदी ने पिछले दरवाजे पर भी कैमरे लगाए हुए हैं, ये सब लोग पकड़े जाएंगे, कोई बचने वाला नहीं है।
बता दें कि आज नोटबंदी का 34वां दिन है। पिछले तीन से बैंक बंद है लोग बेहाल घूम रहे हैं। कुछ ही एटीएम काम कर रहे हैं और इनके आगे अंतहीन लाइनें लगी हैं। एक तरफ लोग कुछ हजार रुपये के लिए तरस रहे हैं, दूसरी तरफ आए दिन करोड़ों रुपये की बरामदगी के मामले सामने आ रहे हैं। कहा जा रहा है ये सब बैंकों की मिलीभगत के चलते हुआ है। काली कमाई को सफेद करने में अब तक कई बैंक मैनेजरों और स्टाफ को गिरफ्तार भी किया गया है।

ट्रंप के इस बयान से बढ़ सकती हैं भारतीय आईटी कंपनियों की मुश्किलें!

 

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान से भारतीय आईटी कंपनियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। ट्रंप ने एच1-बी वीजा पर बोलते हुए कहा है कि अमेरिकी लोगों की रोजगार सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और वे इसकी जगह विदेशी कर्मचारी को नौकरी पर रखे जाने की अनुमति नहीं देंगे। ऐसी स्थिति में भारतीय आईटी कंपनियां मुश्किल में आ सकती हैं।
अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों का कारोबार 150 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है। टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो जैसी कंपनियां अमेरिका में एच1-बी वीजा के जरिए बड़े पैमाने पर भारत से कर्मचारियों को ले जाती रही हैं।
इस दौरान ट्रंप ने डिज्नी वर्ल्ड और दूसरी अमेरिकी कंपनियों का हवाला देते हुए कहा कि एच1-बी वीजा पर अमेरिका आए विदेशियों ने अमेरिकियों की नौकरियां छीन लीं हैं। ट्रंप के इस बयान से भारतीय आईटी कंपनियों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। वीजा का मुद्दा ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान भी प्रमुखता से उठाया था और कहा था अमेरिकी लोगों का रोजगार वे किसी और देश के लोगों के लिए छिनने नहीं देंगे।

साल 2016 के शहंशाह बने विराट कोहली, 52 मैच खेले और बनाए 3000 से ज्‍यादा रन, 11 शतक

विराट कोहली ने मुंबई टेस्‍ट में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। उन्‍होंने 235 रन की पारी खेली और टेस्‍ट में से सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय कप्‍तान बन गए।

विराट कोहली ने मुंबई टेस्‍ट में दोहरा शतक लगाकर इतिहास रच दिया। उन्‍होंने 235 रन की पारी खेली और टेस्‍ट में से सबसे बड़ी पारी खेलने वाले भारतीय कप्‍तान बन गए। उन्‍होंने पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी को पीछे छोड़ा। धोनी ने साल 2013 में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ चेन्‍नई में 224 रन बनाए थे। मुंबई में इंग्‍लैंड के खिलाफ कोहली ने 340 गेंद का सामना किया और 25 चौके और एक छक्‍का लगाया। यह इंग्‍लैंड के खिलाफ किसी भारतीय का सर्वश्रेष्‍ठ टेस्‍ट स्‍कोर भी है। कोहली चेतेश्‍वर पुजारा के आउट होने के बाद क्रीज पर आए थे और इसके बाद मुरली विजय के साथ मिलकर 116 रन की साझेदारी की। इसके बाद जयंत यादव के साथ आठवें विकेट के लिए 241 रन जोड़े। उनकी पारी के सहारे भारत ने पहली पारी में 631 रन बनाए। विराट कोहली एक साल में तीन दोहरे शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं।
टेस्‍ट में इस साल कोहली ने केवल दो छक्‍के लगाए हैं। मुंबई में दोहरे शतक के दौरान उनके बल्‍ले से एक छक्‍का निकला। वहीं एक अन्‍य छक्‍का उन्‍होंने वेस्‍ट इंडीज दौरे पर सबाइना पार्क में लगाया था। विराट कोहली कप्तान के रूप में टेस्ट मैचों में तीन दोहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। यह इंग्‍लैंड के खिलाफ किसी भारतीय का सर्वश्रेष्‍ठ टेस्‍ट स्‍कोर भी है। विराट इस समय जबरदस्‍त फॉर्म में हैं। उन्‍होंने इस साल टेस्‍ट, वनडे और टी20 में कुल मिलाकर 2000 से ज्‍यादा रन बनाए हैं। टेस्‍ट क्रिकेट में इस साल कोहली के बल्‍ले से तीन दोहरे शतक निकले हैं। सबसे पहले वेस्‍ट इंडीज दौरे पर, उसके बाद न्‍यूजीलैंड के खिलाफ और अब इंग्‍लैंड के खिलाफ।
कोहली ने इस साल 10 वनडे खेले हैं और 740 रन बनाए हैं। इनमें तीन शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में इस साल उनका सर्वाधिक स्‍कोर 154 नाबाद रहा। वहीं टी20 में भारतीय टेस्‍ट टीम के कप्‍तान ने 15 मैच खेले हैं और 641 रन बनाए हैं। इसमें 7 अर्धशतक शामिल है। वहीं साल 2016 में कोहली ने अभी तक 11 टेस्ट खेले हैं और 1200 के लगभग रन बनाए हैं। विराट ने इस साल 16 आईपीएल मैच 973 रन भी बनाए हैं। इस टूर्नामेंट में उन्‍होंने सात अर्धशतक और चार शतक भी लगाए हैं। इस तरह से मैचों को देखा जाए तो विराट ने अभी तक इस साल 52 मैच खेले और 86.63 की औसत से 3465 रन बनाए हैं। उन्‍होंने इस साल 20 अर्धशतक और 11 शतक जड़े हैं।

IND vs ENG: विराट कोहली-जयंत यादव रन बनाते रहे, एक के बाद एक रिकॉर्ड टूटते रहे

भारतीय कप्तान विराट कोहली और निचले क्रम के बल्लेबाज जयंत यादव ने इंग्लैंड के खिलाफ चौथे टेस्ट क्रिकेट मैच में आज यहां अपनी शतकीय पारियों के दौरान कुछ व्यक्तिगत रिकार्ड बनाने के अलावा भारत की तरफ से आठवें विकेट के लिये सबसे बड़ी साझेदारी भी निभायी। कोहली और जयंत ने आठवें विकेट के लिये 241 रन जोड़े जो भारत के लिये नया रिकार्ड है। यह टेस्ट क्रिकेट में केवल आठवां अवसर है जबकि आठवें विकेट के लिये 200 से अधिक रन की साझेदारी निभायी गयी। कोहली और जयंत ने मोहम्मद अजहरूद्दीन और टीम के वर्तमान कोच अनिल कुंबले का 20 साल पुराना रिकार्ड तोड़ा। अजहर और कुंबले ने 1996 में कोलकाता में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आठवें विकेट के लिये 161 रन की साझेदारी की थी। इससे पहले यह रिकार्ड रे इलिंगवर्थ और पीटर टेलर के नाम पर था जिन्होंने 1971 में मैनचेस्टर में 168 रन जोड़े थे।
यही नहीं इन दोनों की साझेदारी इंग्लैंड के खिलाफ किसी भी देश की तरफ से आठवें विकेट के लिये दूसरी सबसे बड़ी भागीदारी है। वे केवल दो रन से रिकार्ड की बराबरी करने से चूके गये। आस्ट्रेलिया के एमजे हार्टिगन और क्लेम हिल ने 1908 में 243 रन की साझेदारी की थी। भारत की तरफ से इंग्लैंड के खिलाफ इससे पहले आठवें विकेट की साझेदारी का रिकार्ड सैयद किरमानी और रवि शास्त्री के नाम पर था जिन्होंने 1981 में नयी दिल्ली में 128 रन जोड़े थे। टेस्ट मैचों में आठवें विकेट के लिये सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड इंग्लैंड के जोनाथन ट्राट और स्टुअर्ट ब्राड के नाम पर है। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ 2010 में लार्ड्स में 332 रन की भागीदारी की थी। कोहली और जयंत की साझेदारी आठवें विकेट के लिये ओवरआल भागीदारी में सातवें स्थान पर है।
जयंत के नाम पर भारत की तरफ से प्रथम श्रेणी मैचों में सबसे बड़ी साझेदारी का रिकार्ड भी है। उन्होंने अमित मिश्रा के साथ मिलकर कर्नाटक के खिलाफ 2012 में हुबली में आठवें विकेट के लिये 392 रन जोड़े थे। कोहली ने लगातार तीसरी श्रृंखला में दोहरा शतक लगाया। वह आस्ट्रेलिया के महान डान ब्रैडमैन और अपने पूर्व साथी राहुल द्रविड़ के बाद ऐसा कारनामा करने वाले दुनिया के तीसरे बल्लेबाज हैं। कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ जुलाई में नार्थसाउंड में 200 और फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ अक्तूबर में इंदौर में 211 रन की पारी खेली थी। कोहली हालांकि एक कैलेंडर वर्ष में लगातार तीन श्रृंखलाओं में दोहरे शतक बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज हैं। ब्रैडमैन ने 1930-32 तक तीन श्रृंखलाओं में छह दोहरे शतक जड़े थे। द्रविड़ ने 2003-04 में लगातार तीन श्रृंखलाओं में दोहरे शतक लगाये थे।
दिल्ली के इस स्टार बल्लेबाज ने इंग्लैंड के खिलाफ और भारतीय कप्तान के रूप में सर्वाधिक व्यक्तिगत पारी खेलने का नया रिकार्ड भी बनाया। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ विनोद कांबली (224 रन, मुंबई 1993) और कप्तान के रूप में महेंद्र सिंह धोनी (224 रन बनाम आस्ट्रेलिया, चेन्नई 2013) के रिकार्ड तोड़े। कोहली ने इसके साथ ही वर्तमान श्रृंखला में 600 रन भी पूरे किये। यह दूसरा अवसर है जबकि उन्होंने अपने करियर में एक श्रृंखला में 600 से अधिक रन बनाये। इससे पहले उन्होंने 2014 – 15 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ उसी की सरजमीं पर चार मैचों की श्रृंखला में 692 रन बनाये थे। कोहली वर्तमान श्रृंखला के चार मैचों में 640 रन बना चुके हैं।

अम्मा के सदमे से 280 की मौत, पार्टी देगी मुआवजा

चेन्नई। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की निकट सहयोगी शशिकला को पार्टी महासचिव बनाए जाने की अटकलों के बीच अन्नाद्रमुक खुल कर उनके पक्ष में आ गई है।

पार्टी प्रवक्ता ओ पोन्नियन ने शनिवार को कहा कि अन्नाद्रमुक में कोई दरार नहीं है। अगर मुख्यमंत्री या अन्य मंत्री शशिकला के पास आते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। पार्टी एकजुट है और जल्द ही पार्टी के महासचिव का चुनाव कर लिया जाएगा, वही "अम्मा" के पदचिह्नों पर चलते हुए पार्टी को संभालेगा। उन्होंने कहा कि पद के लिए ईर्ष्या या प्रतिद्वंद्विता जैसी कोई बात नहीं है।

क्या जयललिता कोई वसीयत छोड़ गई हैं? इस पर सवाल प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने इससे अधिक कुछ भी कहने से इन्कार किया। शशिकला के पति के लौट आने के सवाल पर प्रवक्ता ने कहा कि इस सवाल का कोई औचित्य नहीं है।

पोन्नियन के अनुसार, पार्टी को जयललिता एक मजबूत दुर्ग के रूप में बना कर गई हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी पर संगठनात्मक नियंत्रण है। शशिकला उसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकार के मुखिया ओ पन्नीरसेल्वम हैं।

यह पूछे जाने पर कि पन्नीरसेल्वम और बाकी मंत्री पोएस गार्डन में क्या शशिकला से मिल रहे हैं उनका जवाब था, "हम अभी तक शोक में हैं और सब जयललिता को श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं, ऐसे में एक वर्ग का काल्पनिक कहानियां बनाना अच्छा नहीं है।

बीमारी के दौरान जयललिता के नजदीक किसी को न फटकने देने से शशिकला के प्रति पार्टी के एक वर्ग में गुस्से को उन्होंने नियोजित अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि जयललिता और एमजी रामचंद्रन की आत्माएं पार्टी को नेतृत्व दे रही हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पार्टी में कोई शून्य है।

सदमे से 280 की मौत

अन्नाद्रमुक ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री जयललिता की मौत के सदमे से तमिलनाडु में 280 लोगों की मौत हो गई है। पार्टी की विज्ञप्ति में ऐसा दावा करते हुए 203 लोगों के नामों की सूची भी जारी की गई है। इससे पहले पार्टी ने कहा था कि 77 लोग मुख्यमंत्री के निधन का सदमा सहन नहीं कर पाए।

अब मृतकों की कुल संख्या 280 हो गई है। बताया गया है कि ये लोग चेन्नई, वेल्लोर, तिरुपुर, कुड्डालोर, कृष्णागिरी और इरोड जैसे जिलों के थे। पार्टी ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपये की राशि देने की बात कही है।


(एजेंसी से इनपुट ) 

अहमदाबाद में बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम, मोदी के ड्रीम प्रोजेक्‍ट को अमित शाह कर रहे पूरा

अहमदाबाद के मोटेरा में बने सरदार पटेल स्‍टेडियम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है जिससे उसकी दर्शक क्षमता बढ़कर 1,10,000 हो जाएगी।

गुजरात के अहमदाबाद में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम बनाया जा रहा है। अहमदाबाद के मोटेरा में बने सरदार पटेल स्‍टेडियम का पुनर्निर्माण किया जा रहा है जिससे उसकी दर्शक क्षमता बढ़कर 1,10,000 हो जाएगी। वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम ऑस्‍ट्रेलिया का मेलबोर्न क्रिकेट स्‍टेडियम है। इसकी क्षमता 100024 है। अमित शाह की अध्‍यक्षता वाले गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन ने इसके लिए काम शुरू करा दिया है। यह प्रोजेक्‍ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी ड्रीम प्रोजेक्‍ट में से एक है। मोदी जब गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्‍यक्ष थे तब यह फैसला लिया गया था। मोदी साल 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इस पद से हट गए थे। उसके बाद से यह जिम्‍मा अमित शाह के पास है।
स्‍टेडियम का काम दो साल में पूरा हो जाएगा। पुराने स्‍टेडियम को नष्‍ट किया जा चुका है। स्‍टेडियम निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो(एलएंडटी) को ठेका दिया गया है। गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ”मैदान निर्माण कंपनी को सौंप जाने के लिए तैयार है। जब यह स्‍टेडियम पूरा हो जाएगा तो दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम होगा। यह विश्‍वस्‍तर का स्‍टेडियम होगा।” नए स्‍टेडियम में एसी बॉक्‍स की संख्‍या बढ़ी हुई होगी। साथ ही पार्किंग फैसेलिटी को भी अपग्रेड किया जाएगा। यहां पर खाने-पीने की सुविधा, फैन जोन और वाशरूम की सुविधाओं को विश्‍व स्‍तर का बनाया जाएगा।
पुराने मोटेरा स्‍टेडियम में 49000 दर्शक बैठ सकते थे। यहां पर सबसे पहले साल 1983 में टेस्‍ट मैच खेला गया था। कुल मिलाकर मोटेरा में 12 टेस्‍ट, 24 वनडे और एक टी20 मैच खेला गया। आखिरी बार यहां पर भारत और श्रीलंका के बीच साल 2014 में वनडे खेला गया था। भारत में वर्तमान में सबसे बड़ा क्रिकेट स्‍टेडियम ईडन गार्डन है। इसके अलावा मुंबई का वानखेड़े, रांची क्रिकेट स्‍टेडियम, रायपुर का वीर नारायण सिंह स्‍टेडियम भी देश के सबसे बड़े स्‍टेडियमों में शामिल है।

एक्‍ट्रेस गौतमी ने जयललिता की मौत को बताया रहस्‍यमयी, पीएम नरेंद्र मोदी से दखल देने की मांग की

जयललिता चेन्नई के ग्रीम्स रोड स्थित अपोलो अस्पताल में 22 सितंबर को भर्ती हुई थीं। उस वक्त उन्हें बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी थी।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए जे जयललिता की मौत का रहस्य अब सवालों के घेरे में है। कई लोग अब सवाल पूछने लगे हैं कि उनकी मौत कैसे हुई? मशहूर तमिल अभिनेत्री गौतमी तड़ीमला ने अपने ताजा ब्लॉग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक पत्र लिखकर जयललिता की मौत से जुड़े रहस्यों पर से पर्दा हटाने का अनुरोध किया है। जयललिता की मौत के तीन दिन बाद अपने पोस्ट में गौतमी ने ‘जयललिता को अस्पताल में भर्ती कराए जाने, उनके ठीक होने और फिर अचानक हुई उनकी मौत से जुड़े कई अनसुलझे सवालों’ के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ध्यान आकर्षित किया है।
तमिल अभिनेत्री ने 8 दिसंबर को लिखा है कि जिस समय जयललिता अस्पताल में थीं, उस समय किसी को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा था। उन्होंने लिखा है, ‘किसी को भी उनतक नहीं पहुंचने दिया जा रहा था। कई गणमान्य लोग जो कि उनके स्वास्थ्य की बिगड़ी हालत से परेशान होकर वहां मिलने पहुंचे थे, उन्हें खुद जयललिता से नहीं मिलने दिया गया।’
इससे पहले गौतमी के ब्लॉग ने खूब चर्चा बटोरी थी जिसमें उन्होंने अपने लिव-इन पार्टनर कमल हासन से अलग होने का जिक्र किया था। इससे कुछ दिन पहले ही उन्होंने 28 अक्टूबर, 2016 को पीएम मोदी से मुलाकात की थी। इस बार गौतमी ने सीधे पीएम को संबोधित करते हुए ब्लॉग लिखा है।
अपने ब्लॉग पोस्ट में गौतमी ने लिखा, ‘तमिलनाडु सरकार की मुखिया और लोगों की चहेती नेता के मामले में इतना रहस्य क्यों बनाया गया और उन्हें इस तरह सबसे अलग-थलग क्यों रखा गया? ऐसे समय में जब कि जयललिता की सेहत इतनी नाजुक स्थिति में थी, तब कौन लोग थे जो कि उनकी बीमारी और इलाज से जुड़े फैसले ले रहे थे? और कौन लोग हैं जो कि जनता को इन सवालों के जवाब देने के लिए जिम्मेदार हैं?’
गौतमी ने लिखा है कि लोकतांत्रिक पद्धति के द्वारा चुने गए अपने नेताओं के बारे में जानने का पूरा हक लोगों को है। उन्होंने यह भी लिखा कि इतनी बड़ी घटना से जुड़े सवाल अनसुलझे नहीं रहने चाहिए। अपने पोस्ट में गौतमी ने पीएम मोदी को ऐसा नेता बताया है जो ‘आम लोगों के अधिकारों के लिए खड़े होने से नहीं डरता है।’ गौतमी ने ब्लॉग में यह भरोसा भी जताया है कि प्रधानमंत्री उनकी अपील को सुनेंगे। गौतमी अकेली नहीं हैं जो जयललिता की मौत से जुड़े सवाल पूछ रही हैं। तमिलनाडु में कई राजनैतिक विश्लेषक भी इस तरह के सवालों को अहमियत दे रहे हैं।
गौरतलब है कि जे जयललिता चेन्नई के ग्रीम्स रोड स्थित अपोलो अस्पताल में 22 सितंबर को भर्ती हुई थीं। उस वक्त उन्हें बुखार और डिहाइड्रेशन की परेशानी थी। इसके बाद बताया गया कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है लेकिन उससे जुड़ी किसी भी प्रकार की सूचना नहीं दी गई थी। अपोलो अस्पताल की मेडिकल बुलेटिन्स में कहा गया था कि जयललिता की हालत सुधर रही है और वो रिस्पॉन्ड कर रही हैं। 4 दिसंबर को अचानक कहा गया कि उन्हें मैसिव कार्डियक अरेस्ट हुआ है और अगले दिन 5 दिसंबर को 75 दिनों तक लगातार अस्पताल में रहने के बाद अस्पताल ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शशिकला नेे कभी जयललिता के चलते पति को छोड़ दिया था, अब बनाया सलाहकार

माना जाता है कि नटराजन का बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध हैं।
जब एम नटराजन को जयललिता ने खुद और पार्टी से दूर कर दिया तो उनकी पत्नी शशिकला नटराजन जयललिता के साथ ही रहीं। लेकिन अब जयललिता के निधन के बाद नटराजन अपनी पत्नी के अहम सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं। पांच दिंसबर को जयललिता के निधन के अगले दिन चेन्नई के राजाजी हाल में जब उनका शव सार्वजनिक दर्शन के लिए रखा गया तो शशिकला और उनके परिवार के 18 सदस्य उनके शव के चारों तरफ खड़े दिखे। जबकि जयललिता ने नवंबर 2011 में शशिकला और उनके 12 रिश्तेदारों को पार्टी से निकाल दिया था। करीब तीन महीने बाद शशिकला की तो वापसी तो हो गई लेकिन जयललिता एम नटराजन समते उनके किसी रिश्तेदार को जयललिता ने जीते जी अपने या पार्टी के नजदीक नहीं आने दिया था।
एआईएडीएमके से निकाले जाने के करीब दो महीने बाद एम नटराजन को एक जमीन घोटाले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से ही एम नटराजन सार्वजनिक चर्चाओं से दूर रहे हैं। माना जाता है कि 1987 में एमजी रामचंद्रन के निधन के बाद जब उनकी पत्नी वीएन जानकी और जयललिता के बीच सत्तासंघर्ष होने लगा तो दोनों के बीच मतभेद मिटाने में नटराजन ने अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन जब 1991 में जयललिता तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं उसके बाद नटराजन परिवार पर उनके करीबी होने का अनुचित लाभ लेने के आरोप लगने लगे।
माना जाता है कि नटराजन की वजह से ही उनकी पत्नी शशिकला का जयललिता से परिचय हुआ था। धीरे-धीरे शशिकला जयललिता के करीब आती गईं लेकिन उनके पति से जयललिता की दूरी बढ़ती जा रही थी। 1996 में जयललिता ने नटराजन को अपने पोएस गार्डेन निवास से बाहर कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद एआईएडीएमके की अंदरूनी राजनीति में उनका दखल बना रहा। स्थानीय नेताओं की मानें तो हर विधान सभा चुनाव से पहले उनके घर पर टिकट पाने के इच्छुकों की कतार देखी जा सकती थी।
तमिलनाडु ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी नटराजन को काफी पहुंच वाला माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो बीएसपी प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव से उनके अच्छे संबंध हैं। कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं से भी उनके बढ़िया तालुक्कात हैं। जयललिता के निधन के बाद जिस तरह दोबारा नटराजन उनके सहालकार के रूप में सामने आए हैं उससे माना जा रहा है कि वो राष्ट्रीय राजनीति में खुद को एआईएडीएमके के संपर्क सूत्र के तौर पर पेश करना चाहते हैं।
60 से अधिक उम्र के नटराजन का जन्म तंजवुर जिले के विलार गांव में हुआ था। उनके पिता साधारण किसान थे। बीए तक की शिक्षा प्राप्त नटराजन ने डीएमके नेताओं का एक छात्र नेता के तौर पर ध्यान खींचा था। नटराजन ने 1965 में राज्य में हुए हिंदी-विरोधी आंदोलन में छात्र नेता के तौर पर बढ़चढ़कर हिस्सा लिया था। बाद में डीएमके सरकार ने उन्हें असिस्टेंट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर (पीआरो) नियुक्त कर दिया।उसके बाद नटराजन के लिए सत्ता के गलियारों में आमदरफ्त आसान हो गई और वो सत्ता की सीढ़ियां चढ़ते गए।

सेना तैनाती विवाद: ममता बनर्जी का पर्रिकर पर पलटवार- आपको यह भी नहीं पता कि एक सीएम को खत कैसे लिखते हैं

पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने मनोहर पर्रिकर की ओर से भेजे गए खत पर नाराजगी जाहिर की।
पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्‍हें यह भी नहीं पता कि एक मुख्‍यमंत्री को खत कैसे लिखते हैं। ममता ने मनोहर पर्रिकर की ओर से भेजे गए खत पर नाराजगी जाहिर की। उन्‍होंने कहा, ”वे सेना को राजनीतिक उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने के लिए इस्‍तेमाल कर रहे हैं। उन्‍हें नहीं पता कि एक मुख्‍यमंत्री को खत कैसे लिखते हैं। मैं आपके हवाई दावे पर कड़ा रूख लेती हूं। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के खत की भाषा से खुश नहीं हूं। मैंने सरकार की नीति के बारे में कहा था कि ना कि सेना के बारे में। मेरे लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन में राजनीतिक बदले के लिए सम्‍मानित संगठन(सेना) के इस तरह के दुरुपयोग को कभी नहीं देखा। ”
इससे पहले रक्षा मंत्री ने खत लिखकर कहा था कि उनके आरोपों से उन्‍हें गहरा दुख हुआ है और इससे सुरक्षाबलों के उत्‍साह पर बुरा असर पड़ सकता है। पर्रिकर ने कहा कि राजनीतिक दल और राजनेता एक दूसरे के खिलाफ हवाई और बिना तथ्‍यों के आरोप लगा सकते हैं। लेकिन किसी भी व्‍यक्ति को सुरक्षाबलों के बारे में कुछ भी कहने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए। दो पेज के इस लेटर में और भी बहुत कुछ लिखा गया है। लेटर में पर्रिकर ने बताया है कि सेना के जिस अभ्यास पर ममता बनर्जी ने विवाद खड़ा किया था वह काफी सालों पहले से हो रहा है। पर्रिकर ने आगे लिखा है कि उसके लिए राज्य सरकार को पहले ही सूचना दे दी गई थी।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय नबन्ना भवन के पास स्थित टोल प्लाजा पर सेना के जवान तैनात कर दिए गए थे। उसपर ममता बनर्जी ने सवाल खड़े किए थे। ममता ने कहा था कि सरकार उन्हें घेरने के लिए वह सब कर रही है। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या सेना तख्तापलट की कोशिश कर रही है? इस दौरान 30 घंटे तक ममता बनर्जी सचिवालय स्थित अपने दफ्तर में ही रही। हालांकि, रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने सफाई देते हुए कहा था कि ये एक रूटीन अभ्यास था और राज्य प्रशासन को इसके बारे में पहले से सूचित किया गया था। सेना की ओर से भी कहा गया कि यह रूटीन प्रकिया है।

IND vs ENG: पहले दिन रहा स्पिनर्स का दबदबा, लिए सभी विकेट, इंग्लैंड ने बनाए 5/288 रन

मुंबई।  टीम इंडियाऔर इंग्लैंड के बीच चौथे टेस्ट का पहला दिन स्पिनर्स के नाम रहा। वानखेड़े स्टेडियम में खेले जा रहे मैच में अश्विन ने अब तक गिरे 5 में से 4 विकेट लिए हैं, जबकि एक विकेट जडेजा के खाते में गया है। टॉस जीकर पहले बैटिंग कर रही इंग्लैंड की टीम ने पहले दिन का खेल खत्म होने तक 94 ओवर में 5 विकेट पर 288 रन बनाए हैं। बेन स्टोक्स (25) और जोस बटलर (18) क्रीज पर हैं। (LIVE स्कोर के लिए यहां क्लिक करें)
जडेजा ने दिया पहला झटका, अश्विन ने कराई टीम इंडिया की वापसी
टीम इंडिया को पहली सफलता रवींद्र जडेजा ने दिलाई। उन्होंने एलिस्टर कुक (46) को स्टंप कराया। इसके बाद तो अश्विन एकतरफा इंग्लिश बैट्समैन पर भारी नजर आए। जो रूट को अश्विन ने कोहली के हाथों 21 रन के निजी स्कोर पर लपकवाया। तीसरे विकेट के रूप में मोईन अली आउट हुए। उन्हें अश्विन ने 50 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन भेजा, जबकि जेनिंग्स 112 और बैरिस्टो 14 रन बनाकर आउट हुए।
भारत 5 मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे है। चौथे टेस्ट मैच में जीत या ड्रॉ से वह सीरीज का विजेता बन जाएगा। इंग्लैंड ने भारत को लगातार तीन सीरीज में हराया है। अब भारत के पास इसका हिसाब बराबर करने का बेहतरीन मौका है।
2011, 2014 और फिर 2015 में इंग्लैंड ने हराया
विराट कोहली की अगुआई वाली यह टीम भी इस बात को जानती है और किसी भी हाल में वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहेगी। इंग्लैंड ने भारत को 2011, 2014 और फिर 2015 में हराया था। इसके अलावा भारत के पास लगातार 17 टेस्ट मैचों में अपराजित रहने के रिकार्ड की बराबरी का बेहतरीन मौका है। भारत ने अपने पिछले 16 टेस्ट मैचों में हार का स्वाद नहीं चखा है।
ऐसा रहा मैच का रिजल्ट
राजकोट में खेला गया पहला टेस्ट मैच ड्रॉ रहा था। इसके बाद भारत ने विशाखापट्नम और मोहाली में खेले गए दूसरे और तीसरे टेस्ट मैच में जीत हासिल करते हुए मेहमानों पर दवाब बनाया है। अब तकरीबन सप्ताह भर के अंतराल के बाद मैदान पर उतरने वाली मेजबान टीम जीत दर्ज कर अपने बचे काम को अंजाम देना चाहेगी।
टीमें...
भारत :- विराट कोहली (कप्तान), मुरली विजय, लोकेश राहुल, चेतेश्वर पुजारा, करूण नायर, रविचंद्रन अश्विन, पार्थिव पटेल (विकेटकीपर), रवींद्र जडेजा, उमेश यादव, जयंत यादव।
इंग्लैंड :- एलिस्टर कुक (कप्तान), केटन जेनिंग्स, जो रूट, मोइन अली, बेन स्टोक्स, जॉनी बेयरस्टो, जोस बटलर, क्रिस वोक्स, आदिल राशिद, जेम्स एंडरसन, जैक बॉल।