छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में पिछली बार से ज्यादा इस बार सताएगी ठंड

रायपुर:-प्रदेश के मैदानी इलाकों में अल नीनो के चलते इस बार ठंड पिछली बार से ज्यादा सताएगी। ठंड का सबसे ज्यादा असर उत्तरी छत्तीसगढ़ में देखने को मिलेगा। वैसे भी इस बार अभी से रात के तापमान में गिरावट का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में फिलहाल उत्तर से हवा आ रही है। इसलिए आने वाले दिनों में ठंड के बढ़ते की आशंका है। प्रदेश में उत्तर से शुष्क और ठंडी हवा आने के कारण न्यूनतम तापमान में गिरावट होने की प्रबल संभावना है। साथ ही आकाश साफ रहने और सुबह धुंध रहने की संभावना है।

CM भूपेश बघेल के बड़े पिताजी श्यामाचरण बघेल का निधन

रायपुर:-छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी समाज के 2 बार के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रहे दाऊ श्यामाचरण बघेल का आज सुबह 4:00 को 88 वर्ष की उम्र में स्वर्गवास हो गया। वे लंबे अरसे से बीमार थे। वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बड़े पिताजी एवं नरेश बघेल, हरीश बघेल व पालेश्वर बघेल के पिताजी थे। उनके निधन के समाचार से पुरे समाज में शोक की लहर फैल गई है। उनका अंतिम संस्कार आज ग्राम कुरुदडीह में 12:00 बजे होगा।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स दीवाली मेला: छत्तीसगढ़ हर्बल्स के उत्पाद और निःशुल्क नाड़ी परीक्षण तथा वैद्य परामर्श से बढ़ी रौनक

- विभिन्न बीमारियों के इलाज में पारंगत वैद्यराज द्वारा दी जा रही सेवाएं रायपुर. राजधानी के पंडरी स्थित छत्तीसगढ़ हाट परिसर में आयोजित छत्तीसगढ़ हर्बल्स दीवाली मेला की रौनक दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में यह मेला राज्य लघु वनोपज संघ के तत्वाधान में 02 नवम्बर तक आयोजित है। मेला में छत्तीसगढ़ हर्बल्स के 130 से अधिक उत्पाद 15 प्रतिशत की छूट पर उपलब्ध है। प्रबंध संचालक राज्य लघु वनोपज संघ संजय शुक्ला ने बताया कि मेला में प्रतिदिन संध्या 7 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आकर्षक प्रस्तुति भी दी जा रही है। मेला में कोदो-कुटकी, रागी, तिखुर के व्यंजन व पकवान तथा गढ़कलेवा आदि फूड जोन के अलावा बच्चों के लिए निःशुल्क छूला की व्यवस्था है। साथ ही यहां आयुर्वेदिक चिकित्सालय का स्टाल भी लगाया गया है। इसमें निःशुल्क नाड़ी परीक्षण और वैद्य परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ हर्बल्स दीवाली मेला में लगाए गए आयुर्वेदिक चिकित्सालय के स्टाल में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से विभिन्न गंभीर बीमारियों के इलाज में पारंगत वैद्य अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके द्वारा निःशुल्क वैद्य परामर्श सहित नाड़ी परीक्षण का कार्य किया जा रहा है। इनमें पथरी, गठिया, वात, सिकलिंग आदि बीमारियों के इलाज में पारंगत वैद्यराज श्री रामप्रसाद निषाद नारायणपुर क्षेत्र से शामिल है। इसी तरह सफेद पानी, प्रदर, त्वचा रोग, नाड़ी विज्ञान आदि में पारंगत वैद्यराज श्री झुमुकलाल- कवर्धा, कैंसर, शुगर, बवासीर, सायटिका, लकवा, ट्यूमर आदि बीमारी में पारंगत वैद्यराज श्री रामविलास काशी-बलरामपुर तथा वातरोग, मधुमेह आदि में पारंगत वैद्यराज श्री बिरेन्द्र बच-कटघोरा शामिल है। इसके अलावा पीलिया, सामान्य रोग में पारंगत वैद्यराज श्री महादेव धु्रव-गरियाबंद और पीलिया, नेत्ररोग आदि बीमारियों में पारंगत वैद्यराज श्री समधु बघेल-बस्तर द्वारा अपनी-अपनी सेवाएं दी जा रही है।

विदेशी प्रतिभागी आदिवासी नृत्य महोत्सव में भाग लेने को लेकर बेहद उत्साहित, कहा छत्तीसगढ भ्रमण के लिए बढ़िया जगह

रायपुर. आदिवासी नृत्य महोत्सव में भाग लेने रायपुर पहुंचे श्रीलंका, फिलीस्तीन और नाइजीरिया के प्रतिभागी इस आयोजन को लेकर काफी उत्साहित हैं। फिलीस्तीन से आए दल ने कहा कि वे इस भव्य और खूबसूरत आयोजन का हिस्सा बनकर बेहद खुश हैं। वे यहां अपने देश का परंपरागत ‘दपका’ नृत्य प्रस्तुत करेंगे। वहीं नाइजीरिया से आए दल ने कहा कि वे भारत और छत्तीसगढ़ में हुए अपने स्वागत से अभिभूत हैं। आदिवासी नृत्य महोत्सव में हिस्सा लेने को लेकर वे सभी काफी उत्साहित हैं। छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए बहुत अच्छी जगह है। श्रीलंका से आए नर्तकों के दल ने इस आयोजन के लिए छत्तीसगढ़ शासन को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे यहां अपने नृत्य प्रदर्शन को लेकर काफी उत्सुक हैं और वे बेताबी से इसका इंतजार कर रहे हैं।

बैगा और माड़िया जनजाति के प्रमुख लोक नृत्य

‘राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव‘ राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोक गीत, नृत्य और संपूर्ण कलाओं से परिचित होगा देश और विदेश। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में यह आयोजन 28 से 30 अक्टूबर तक किया जा रहा है। राजधानी का साईंस कॉलेज मैदान आयोजन के लिए सज-धज कर तैयार हो चुका है। इस महोत्सव में विभिन्न राज्यों के आदिवासी लोक नर्तक दल के अलावा देश-विदेश के नर्तक दल भी अपनी प्रस्तुति देंगे। छत्तीसगढ़ राज्य की 5 विशेष पिछड़ी जनजातियों में से एक बैगा जनजाति है। राज्य के कबीरधाम, मंुगेली, राजनांदगांव, बिलासपुर और कोरिया जिले में निवासरत है। बैगा जनजाति अपने ईष्ट देव की स्तुति, तीज-त्यौहार, उत्सव एवं मनोरंजन की दृष्टि से विभिन्न लोकगीत एवं नृत्य का गायन समूह में करते हैं। इनके लोकगीत और नृत्य में करमा, रीना-सैला, ददरिया, बिहाव, फाग आदि प्रमुख हैं। इसी प्रकार दण्डामी माड़िया जनजाति गांेड जनजाति की उपजाति है। सर डब्ल्यू. वी. ग्रिगसन ने अपने प्रसिद्ध ग्रंथ ’द माड़िया जनजाति के सदस्यों द्वारा नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट के आधार पर ’बायसन हार्न माड़िया‘ जनजाति नाम दिया। प्रसिद्ध मानव वैज्ञानिक वेरियर एल्विन का ग्रंथ ’द माड़िया-मर्डर एंड सुसाइड‘ (1941) दण्डामी माड़िया जनजाति पर आधारित है। बैगा और माड़िया जनजाति के रस्मों-रिवाजों पर आधारित प्रमुख लोक नृत्य इस प्रकार हैं। *’रीना सैला नृत्य‘* बैगा जनजाति का प्रकृति एवं वनों से निकट संबंध है। जिसका बखान इनके लोक संस्कृति में व्यापक रूप से देखने को मिलता है। बैगा जनजाति की माताएं, महिलाएं अपने प्रेम एवं वात्सल्य से देवी-देवताओं और अपनी संस्कृति का गुणगान गायन के माध्यम से उनमें गीत एवं नृत्य से बच्चों को परिचित करने का प्रयास करती है। साथ ही बैगा माताएं अपने छोटे शिशु को सिखाने एवं वात्सल्य के रूप में रीना का गायन करती हैं। वेशभूषा महिलाएं सफेद रंग की साड़ी धारण करती हैं। गले में सुता-माला, कान में ढार, बांह में नागमोरी, हाथ में चूड़ी, पैर में कांसे का चूड़ा एवं ककनी, बनुरिया से श्रृंगार करती हैं। वाद्य यंत्रों में ढोल, टीमकी, बांसुरी, ठीसकी, पैजना आदि का प्रयोग किया जाता है। सैला बैगा जनजाति के पुरूषों के द्वारा सैला नृत्य शैला ईष्ट देव एवं पूर्वज देव जैसे-करमदेव, ग्राम देव, ठाकुर देव, धरती माता तथा कुल देव नांगा बैगा, बैगीन को सुमिरन कर अपने फसलों के पक जाने पर धन्यवाद स्वरूप अपने परिवार के सुख-समृद्धि की स्थिति का एक दूसरे को शैला गीत एवं नृत्य के माध्यम से बताने का प्रयास किया जाता है। इनकी वेशभूषा पुरूष धोती, कुरता, जॉकेट, पगड़ी, पैर में पैजना, गले में रंगबिरंगी सूता माला धारण करते है। वाद्य यंत्रों में मांदर,ढोल, टीमकी, बांसुरी, पैजना आदि का प्रमुख रूप से उपयोग करते हैं। बोली बैगा जनजाति द्वारा रीना एवं शैला का गायन स्वयं की बैगानी बोली में किया जाता है। यह नृत्य प्रायः क्वार से कार्तिक माह के बीच मनाए जाने वाले उत्सवों, त्यौहारों में किया जाता है। *’दशहेरा करमा नृत्य‘* बैगा जनजाति समुदाय द्वारा करमा नृत्य भादो पुन्नी से माधी पुन्नी के समय किया जाता है। इस समुदाय के पुरूष सदस्य अन्य ग्रामों में जाकर करमा नृत्य के लिए ग्राम के सदस्यों को आवाहन करते हैं। जिसके प्रतिउत्तर में उस ग्राम की महिलाएं श्रृंगार कर आती है। इसके बाद प्रश्नोत्तरी के रूप में करमा गायन एवं नृत्य किया जाता है। इसी प्रकार अन्य ग्राम से आमंत्रण आने पर भी बैगा स्त्री-पुरूष के दल द्वारा करमा किया जाता है। करमा रात्रि के समय ग्राम में एक निर्धारित खुला स्थान जिस खरना कहा जाता है में अलाव जलाकर सभी आयु के स्त्री, पुरूष एवं बच्चे नृत्य करते हुए करते है। अपने सुख-दुःख को एक-दूसरे को प्रश्न एवं उत्तर के रूप में गीत एवं नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत करते है। करमा नृत्य के माध्यम से बैगा जनजाति में परस्पर सामन्जस्य, सुख-दुःख के लेन देन के साथ ही नव युवक-युवतियां भी आपस में परिचय प्राप्त करते है। इस नृत्य में महिला सदस्यों द्वारा विशेष श्रृंगार किया जाता है। जिसमें यह चरखाना (खादी) का प्रायः लाल एवं सफेद रंग का लुगड़ा, लाल रंग की ब्लाउज, सिर पर मोर पंख की कलगी, कानों में ढार, गले में सुता-माला, बांह में नागमोरी, कलाई में रंगीन चूड़िया एवं पैरों में पाजनी और विशेष रूप से सिर के बाल से कमर के नीचे तक बीरन घास की बनी लड़ियां धारण करती हैं, जिससे इनका सौंदर्य एवं श्रृंगार देखते ही बनता है। पुरूष वर्ग भी श्रृंगार के रूप में सफेद रंग की धोती, कुरता, काले रंग की कोट, जाकेट, सिर पर मोर पंख लगी पगड़ी और गले में आवश्यकतानुसार माला धारण करते हैं। वाद्य यंत्रों में मांदर, टिमकी, ढोल, बांसुरी, ठिचकी, पैजना आदि का उपयोग किया जाता है। *’करसाड़ नृत्य‘* दण्डामी माड़िया जनजाति नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट, बस्तर, दशहरा के अंतिम दिनों में चलने वाले विशालकाय काष्ठ रथ को खींचने का विशेषाधिकार और स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है। इस नृत्य में दण्डामी माड़िया पुरूष सिर पर कपड़े की पगड़ी या साफा, मोती, माला, कुर्ता या शर्ट, धोती एवं काले रंग का हाफ कोट धारण करते हैं। वहीं महिलाएं साड़ी, ब्लाउज, माथे पर कौड़िया से युक्त पट्टा, गले में विभिन्न प्रकार की माला और गले, कलाई, पैरों पर बाजार में मिलने वाले सामान्य आभूषण पहनती हैं। करसाड़ नृत्य के लिए पुरूष सदस्य अपने गले में लटका कर ढोल एवं मांदर का प्रयोग करता है। महिलाएं लोहे के रॉड के उपरी सिरे में लोहे की विशिष्ट घंटियों से युक्त ’गुजिड़‘ नामक का प्रयोग करती है। एक पुरूष सदस्य सीटी का प्रयोग करत है, नृत्य के दौरान सीटी की आवाज से ही नर्तक स्टेप बदलते हैं। नृत्य के प्रदर्शन का अवसर दण्डामी माड़िया जनजाति में करसाड़ नृत्य वार्षिक करसाड़ जात्रा के दौरान धार्मिक उत्सव में करते हैं। करसाड़ दण्डामी माड़िया जनजाति का प्रमुख त्यौहार है। करसाड़ के दिन सभी आमंत्रित देवी-देवाताओं की पूजा की जाती हैं और पुजारी, सिरहा देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्हों जैसे-डोला, छत्रा, लाट बैरम आदि के साथ जुलूस निकालते हैं। जुलूस की समाप्ति के पश्चात् शाम को युवक-युवतियां अपने विशिष्ट नृत्य पोषाक में सज-सवरकर एकत्र होकर सारी रात नृत्य करते हैं। *’मांदरी नृत्य‘* दंडामी माड़िया जनजाति नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट, बस्तर दशहरा के अंतिम दिनों में चलने वाले विशालकाय काष्ठ रथ को खींचने का विशेषाधिकार और स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है। दंडामी माड़िया जनजाति के सदस्य नृत्य के दौरान पहने जाने वाले गौर सिंग मुकुट को माड़िया समुदाय के वीरता तथा साहस का प्रतीक मानते हैं। इस नृत्य की वेशभूषा में दंडामी माड़िया पुरूष सिर पर कपड़े की पगड़ी या साफा, मोती माला, कुर्ता या शर्ट, धोती एवं काले रंग का हाफ कोट धारण करते हैं। वहीं महिलाएं साड़ी, ब्लाउज, माथे पर कौड़ियों से युक्त पट्टा, गले में विभिन्न प्रकार की माला और गले, कलाई, पैरों पर बाजार में मिलने वाले सामान्य आभूषण पहनी हैं। वाद्य यंत्र मांदरी नृत्य के लिए पुरूष सदस्य अपने गले में लटकाकर ढोल एवं मांदर वाद्य का प्रयोग करते हैं। महिलाएं लोहे के रॉड के उपरी सिरे में लोहे की विशिष्ट घंटियों से युक्त ‘गुजिड़’ का प्रयोग करती हैं। एक पुरूष सदस्य सीटी का प्रयोग करता है, नृत्य के दौरान सीटी की आवाज से ही नर्तक स्टेप बदलते हैं। यह नृत्य दंडामी विवाह, मेला-मंड़ई, धार्मिक उत्सव और मनोरंजन के अवसर पर किया जाता है। विवाह के दौरान अलग-अलग गांवों के अनेक नर्तक दल विवाह स्थल पर आकर नृत्य का प्रदर्शन करते हैं। जिसके बदले में उन्हें ‘लांदा’ (चावल की शराब) और ‘दाड़गो’ (महुए की शराब) दी जाती हैं। दंडामी माड़िया जनजाति के सदस्यों का मानना है कि गौर सिंग नृत्य उनके सामाजिक एकता, सहयोग और उत्साह में वृद्धि करता है। वर्तमान में दंडामी माड़िया जनजाति का गौर सिंग नृत्य अनेक सामाजिक तथा सांस्कृतिक आयोजनों में भी प्रदर्शन के लिए आमंत्रित किया जाता है।

सरगुजा संभाग में सरकार की सस्ती दवाओं का लाभ मिलने लगा गरीबों को, 71 प्रतिशत तक की सब्सिडी

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महंगी हो रही स्वास्थ्य सेवाओं को गरीब व्यक्ति की पहुंच में लाने के प्रयास के तहत छत्तीसगढ़ में श्री धन्वन्तरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना की शुरूआत की है। योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में सस्ती दवाओं के स्टोर खोले जा रहे हैं। योजना के अंतर्गत सरगुजा संभाग में वर्तमान में 7 सस्ती दवा की दुकाने संचालित है। इन दवा दुकानों में उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दवाएं एम.आर.पी. पर न्यूनतम 50.09 प्रतिशत और अधिकतम 71 प्रतिशत की छूट का लाभ मिल रहा है। सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले के नगर निगम अंबिकापुर में मणिपुर शॉपिंग कॉम्पलेक्स जिला अस्पताल रोड पर सस्ती दवा दुकान संचालित है। बलरामपुर जिले में बलरामपुर नगर पालिका में हॉस्पिटल कैंपस बलरामपुर में और नगर पंचायत रामानुजगंज के वार्ड-05 में जिला न्यायालय के सामने सस्ती दवा की दुकान है। सूरजपुर जिले की नगर पालिका सूरजपुर में पुराना बस स्टैंड के दुकान नं.-4 में तथा नगर पंचायत प्रतापपुर में जनपद पंचायत द्वारा बनाए गए कॉम्पलेक्स में हास्पिटल के सामने सस्ती दवा की दुकान है। इसी तरह से जशपुर जिले के नगर पालिका जशपुर के वार्ड-13 में जिला ग्रंथालय के सामने और नगर पंचायत बगीचा के वार्ड-7 बस स्टैंड में सस्ती दवा का श्री धन्वन्तरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर संचालित है।

शिवरीनारायण नगर में संघ का विजयादशमी उत्सव आज

शिवरीनारायण:-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव रविवार 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। जिसमें पथ संचलन सरस्वती शिशु मंदिर शिवरीनारायण से दोपहर 1 बजे प्रारंभ होगी जो नगर के प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए वापस सरस्वती शिशु मंदिर पहुंचेगी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ प्रांत प्रमुख सह शारीरिक प्रमुख विश्वास जलतारे होंगे। अध्यक्षता राजेश अग्रवाल करेंगे। विशिष्ट अतिथि विद्यार्थी हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल सदस्यमहंत त्रिवेणी दास और प्रांतीय मार्गदर्शक मंडल सदस्य महंत दिव्यकांत दास होंगे। आयोजन को सफल बनाने के लिए स्वयंसेवक जुटे हुए हैं।

सीएम भूपेश बघेल का आदेश, चिट फंड कंपनी के फ़रार डायरेक्टर और पदाधिकारियों को तत्काल करें गिरफ्तार

रायपुर:-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज पुलिस अधीक्षकों और पुलिस महानिरीक्षकों की कॉन्फ्रेंस में दो टूक कहा कि- प्रदेश में हुक्का बार पूरी तरह प्रतिबंधित हों। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने प्रदेश में नशे के कारोबार को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे राज्यों से आ रहे नशीले पदार्थ छत्तीसगढ़ में नहीं घुसने चाहिए। उन्होंने कहा कि गाँजे की एक पत्ती भी दूसरे राज्य से छत्तीसगढ़ में नहीं घुसने देना चाहिए। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज यहां न्यू सर्किट हाऊस ऑडिटोरियम में पुलिस अधीक्षकों और पुलिस महानिरीक्षकों की कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई। कॉन्फ्रेंस में गृहमंत्री श्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री श्री रवींद्र चौबे, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, पुलिस महानिदेशक श्री डी. एम. अवस्थी, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री सचिवालय की उपसचिव सुश्री सौम्या चौरसिया उपस्थित रहीं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि -कोविड महामारी के दौरान हमारी सरकार, प्रशासन और पुलिस ने अभूतपूर्व कार्य किया है। आपने प्रवासी मज़दूरों के हित में बेहतरीन कार्य किया है। उन्हांेने इसके लिए सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने पुलिस अधीक्षकों और पुलिस महानिरीक्षकों से कहा कि छोटी छोटी घटनाओं को साम्प्रदायिक और अराजक तत्व बड़ा रूप देने की चेष्टा कर रहे हैं। सभी पुलिस अधीक्षक उन्हें पहचानें, अपना आसूचना तंत्र विकसित करें क्यूँकि ऐसी घटनाओं का सीधा असर प्रदेश की शांति व्यवस्था और सरकार की छवि पर होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि - हर स्तर पर, थाना, अनुविभाग, ज़िला और रेंज लेवल पर सूचना तंत्र विकसित करें। पुलिस अधीक्षक हर ज़िले में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की स्पेशल टीम बनाएँ जो सोशल मीडिया में अफ़वाह फैलाने वालों का चिन्हांकन कर कार्रवाई करें। Also Read - दंतेवाड़ा : महिलाओं को बनाया जा रहा सशक्त, दिया जा रहा मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने कहा कि छोटी घटनाओं का राजनीतिक लाभ लेने अवसरवादी तत्व अफ़वाह, दुष्प्रचार और भ्रामक समाचार फैलाते हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई करना ज़रूरी है। सोशल मीडिया अफ़वाह फैलाने का सबसे बड़ा साधन बन गया है। सोशल मीडिया में भी एक सुदृढ़ आसूचना तंत्र विकसित करना ज़रूरी है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि हत्या के प्रकरणों में 2011 की तुलना में आज की स्थिति में 32 प्रतिशत कमी आई है तथा हत्या के प्रयास में 2011 की तुलना में आज की स्थिति में 37 प्रतिशत कमी आई है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने नशीले पदार्थों पर प्रभावी रोकथाम हेतु सीमावर्ती राज्यों ओडिशा, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के अधिकारियों के साथ आईजी-एसपी को बैठक करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में अब तक चिटफंड कंपनियों के 774 डायरेक्टर और पदाधिकारी गिरफ़्तार किए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने सभी एसपी-आईजी को चिट फंड कम्पनी के शेष फ़रार डायरेक्टर और पदाधिकारियों को तत्काल गिरफ्तार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी एसपी को इसके लिए एक समय सीमा तय कर कार्रवाई करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलेक्टर और एसपी आपसी समन्वय कर चिट फंड कंपनियों की अन्य सम्पत्तियों को चिंहांकित कर करें उन्हें तत्काल कुर्क करने की कार्रवाई करें।

टीआई और आरक्षक घायल, भाग रहे शराब तस्करों ने की पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने की कोशिश

बलरामपुर:-बलरामपुर और कोरिया जिले में शराब की बड़ी खेप पकड़ाई है. बलरामपुर में तस्करों ने पुलिसकर्मियों पर ही वाहन चढ़ाने की कोशिश की है. जिस कारण टीआई और आरक्षक घायल हो गए हैं. बलरामपुर पुलिस ने 50 पेटी अंग्रेजी शराब और कोरिया पुलिस ने 40 पेटी अंग्रेजी शराब जब्त किया है. बलरामपुर जिले के रघुनाथ नगर पुलिस ने शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पिकअप से 50 पेटी अंग्रेजी शराब जब्त किया है. जिसकी कीमत 3 लाख 21 हजार से ज्यादा है. लेकिन कार में सवार तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहे. पुलिस को मुखबीर से सूचना मिली थी कि एक पिकअप में अवैध तरीके से 50 पेटी शराब रखकर एक तस्कर मध्यप्रदेश से छतीसगढ़ की ओर आ रहा है. जिसे पकड़ने के लिए पुलिस की टीम निकली और वाहन को रोकने लगी, लेकिन तस्कर थाना प्रभारी के वाहन को ही ठोकर मारते हुए पिकअप छोड़ जंगल की ओर भाग निकला. इस हादसे में थाना प्रभारी का वाहन भी बुरी तरीके से क्षतिग्रस्त भी हो गया है. इस मामले में रघुनाथनगर पुलिस ने बताया कि पिकअप वाहन में 50 पेटी अंग्रेजी अवैध शराब जब्त किया गया है. वाहन से गोवा अंग्रेजी शराब की कुल 44 पेटी, मोकडवल नंबर वन की 2 पेटी और मिरिंडा की 4 पेटी कुल मात्रा 450 लीटर बरामद हुआ है. जिसकी कीमत 3 लाख 21 हजार से ज्यादा है. तस्करों के खिलाफ धारा 34(2) आबकारी एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है।

फिर बढ़ रहे कोरोना के मरीज, CRPF के 3 जवान मिले कोरोना पॉजिटिव, तीनों को किया गया क्वारंटाइन

जगदलपुर:-छत्तीसगढ़ में एक बार फिर कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। सीआरपीएफ के 3 जवान कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। तीनों जवान अति संवेदनशील भडरीमऊ कैंप में तैनात थे। तीनों जवानों को क्वारंटाइन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में तीनों संक्रमित मिले हैं। बता दें छत्तीसगढ़ में बीते 24 घंटे में 38 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं। वहीं एक की मौत हुई है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान सर्वाधिक 13 संक्रमित मरीज दुर्ग जिले में हैं जबकि रायपुर में पांच, बस्तर एवं अन्य राज्य में चार-चार बिलासपुर में तीन, रायगढ़ एवं कांकेर में दो-दो, बलौदाबाजार, जांजगीर चापा एवं बीजापुर में एक-एक संक्रमित मरीज मिले हैं।

प्रोजेरिया बीमारी से ग्रसित बालक बनेगा एक दिन का कलेक्टर, जताई थी IAS अफसर बनने की इच्छा

गरियाबंद:-जिले में बालक शैलेंद्र आज 1 दिन का कलेक्टर बनेगा। जो अपने आप में यह अनोखा मामला है। बता दें कि प्रोजेरिया नामक लाइलाज बीमारी से ग्रसित इस बालक की कलेक्टर बनने की इच्छा जताई थी। वहीं इसकी जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बालक के प्रति उनके भावनाओं का सम्मान करते हुए सहृदयता दिखाते हुए ना सिर्फ इसके लिए सहमति दी बल्कि स्वयं भी बालक से मिलना चाहा। वहीं आज बालक शैलेंद्र को जिला गरियाबंद का 1 दिन का कलेक्टर बनाया जाएगा। बालक सुबह 11.12 बजे गरियाबंद पहुंचेगा इसके बाद आज ही दोपहर को मुख्यमंत्री से भी शैलेंद्र की मुलाकात भी करवाई जाएगी। आपको बता दें कि यह बालक गरियाबंद जिले के छुरा के मेढकी डबरी गांव का रहने वाला है। जो अपनी जटिल और लाइलाज बीमारी के चलते 16 की उम्र में बुजुर्ग की तरह दीखता है शैलेंद्र के शरीर पर अब झुर्रियां आने लगी हैं सारे बाल झाड़ गए हैं और सर बड़ा हो गया है बालक को 1 दिन का कलेक्टर बनाए जाने की पुष्टि प्रशासन ने की है।

ITBP और CAF के 21 जवान हुए फुड पायजनिंग के शिकार, सीएम भूपेश बघेल ने दिए अफसरों को अहम निर्देश

रायपुर:-मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजनांदगांव जिले के मलैदा केम्प में आईटीबीपी व सीएएफ के 21 जवानों के फुड पायजनिंग से पीड़ित होने की जानकारी प्राप्त होते ही सभी जवानों के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है।राजनांदगांव जिले के मलैदा कैम्प में आईटीबीपी व सीएएफ के 21 जवानों के फुड पायजनिंग से पीड़ित होने पर सभी का इलाज खैरागढ़ स्थित अस्पताल में किया जा रहा है। सभी जवान खतरे से बाहर है।

ब्यूटी कांटेस्ट: मिनी को मिसेज छत्तीसगढ़ से नवाजा गया

फेम प्रोडक्शन के द्वारा सिटी सेंटर में आयोजन रायपुर। राजधानी के सिटी सेंटर मॉल में आयोजित ब्यूटी कॉन्टेस्ट में मिनी चौहान ने अपनी जगह बनाई है। फाइनल राउंड में कइयों को पछाड़ते हुए अपना ताज हासिल की हैंl आज 2 बजे से शुरू हुए ब्यूटी कॉन्टेस्ट में दर्जनों कंटेस्टेंट ने भाग लिया। देर शाम को फाइनल राउंड में मिनी चौहान के नाम की घोषणा की गई। दरअसल ट्रेडिशनल राउंड में मिनी चौहान ने ट्रेडिशनल ड्रेस पहनकर रैंप वॉक किया। l फिर क्रिएटिविटी राउंड में पॉलीथिन से बने आकर्षक गाउन से रैंप वॉक की। इसके बाद फाइनल राउंड में ब्लैक गाउन के रैंप वॉक से दर्शक मोहित हो गए। मिनी के अंदाज को सभी ने भरपूर प्यार दिया और काफी सराहा। इस विनर कॉन्टेस्ट में मिनी के जीत पर परिवार वालों ने खुशी जताई है। बता दें कि मिनी कोरबा की रहने वाली हैं। ब्यूटी कांटेस्ट के सेमी फिनाले में भी अपनी बढ़त बनाते हुए जगह बनाई थी, इसके बाद फाइनल राउंड में मौका मिलने पर मिनी ने काफी मेहनत करते हुए मुकाम हासिल कर लिया।

प्रतिभावान दिव्यांग छात्रा राजेश्वरी की राह हुई आसान

*मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासनिक अमले ने पहुंचाई नयी व्हील चेयर* कई लोग अभाव और अक्षमताओं को जीत कर अपने जज्बों एवं प्रतिभा से इतिहास लिख जाते है। ऐसी ही एक कहानी कोण्डागांव जिले के मसोरा की 13 वर्षीय बालिका राजेश्वरी पटेल की है। राजेश्वरी जन्म से ही अपने हाथ एवं पैरो को मोड़ने मे असक्षम थी जिसके कारण वह बचपन से ही चलने फिरने में असमर्थ रहीं परंतु इस असमर्थता को उसने कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। मसोरा के माध्यमिक शाला में कक्षा सातवीं में अध्ययनरत राजेश्वरी अपने हाथों से कार्य नहीं कर पाती थीं। ऐसे में उसने अपने पैरों से कार्य करना प्रारंभ कर दिया। आज वह पैरो से कंचे खेलने, पेंटिंग बनाने और रंगोली बनाने जैसे काम भी कर लेती है। राजेश्वरी के पिता दीनूराम पटेल कहते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। हाथों से कार्य न कर पाने के बावजूद पैरो से वह अपने सभी कार्य कर लेती है। राजेश्वरी रंगोली, पेंटिंग के अलावा अच्छा गा भी लेती है। बालिका राजेश्वरी कहती है कि उन्हें उनके परिवारजनों का सदैव सहयोग मिला है। उन्हें स्कूली शिक्षकों और सहपाठियों द्वारा भी सहयोग एवं प्रोत्साहन मिलता है। *मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासनिक अमला पहुंचा गांव* रंगोली प्रतियोगिता में दिव्यांग राजेश्वरी के प्रथम आने और उसके संघर्ष की जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से होने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं संज्ञान लेते हुए कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा को बालिका के हर संभव मदद के साथ नयी व्हील चेयर देने के निर्देश दिए। इस पर एसडीएम गौतमचंद पाटिल, समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक ललिता लकड़ा सहित प्रशासनिक अमले ने तुरंत बालिका राजेश्वरी के घर जाकर उसे नयी व्हील चेयर प्रदान किया। बालिका को पहले भी समाज कल्याण विभाग द्वारा व्हील चेयर प्रदान किया गया था, जो कि पुराना हो गया था। इस अवसर पर प्रशासन द्वारा प्राप्त सहयोग हेतु राजेश्वरी एवं उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री श्री बघेल का आभार व्यक्त किया। *बालिका के लिए समाज कल्याण विभाग बनायेगा नवीन सीपी व्हील चेयर* उपसंचालक समाज कल्याण ललिता लकड़ा ने बताया कि प्रतिभावान छात्रा राजेश्वरी को पूर्व में व्हील चेयर प्रदान करने के साथ विभाग की ओर से प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी प्रदान की जा रही है। राजेश्वरी के लिए विभाग द्वारा नवीन सीपी व्हील चेयर का भी निर्माण किया जा रहा है। इस नवीन व्हील चेयर में पढ़ने एवं अन्य गतिविधियों के संचालन हेतु अलग से टेबल लगाया जायेगा। जिसमें राजेश्वरी पढ़ाई-लिखाई के साथ आसानी से दिन-प्रतिदिन के कार्य कर सकेगी।

सरकार की योजना को धूमिल करने में लगे हैं विभाग के अधिकारी राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में खाली पड़ी रह गई कुर्सियां, पूरे जिले से सिर्फ तीन लोक कला दल पहुंचे जिला स्तरीय कार्यक्रम में हिस्सा लेने।

बलौदा बाजार में आज आदिवासी विकास विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया गया था। विभाग द्वारा समय से जानकारी ना देने के कारण पूरे कार्यक्रम में सभी कुर्सियां खाली दिखाई दी । योजना का प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बलौदा बाजार जिले के छह विकास खंडों से सिर्फ तीन लोक कलाकारों के दल ही पहुंच पाए। जिसमें जय खैरों दाई सुआ भजन गोंडवाना पार्टी बिटकुली भाटापारा, जगमग ज्योत जले सुआ पार्टी चरौदा विकासखंड पलारी एवं जय बजदायी सुआ नृत्य पार्टी खरहा विकासखंड कसडोल से पहुंची थी। जबकि कसडोल बिलाईगढ़ बलौदा बाजार विकासखंड में ही सैकड़ों की संख्या में लोग कला दल एवं सुआ नृत्य करने वाली मंडलिया मौजूद हैं। किंतु विभाग द्वारा प्रचार प्रसार ना किए जाने के कारण लोगों को जानकारी नहीं मिल सकी। और इस आयोजन में ग्रामीण अंचल के प्रतिभागी हिस्सा नहीं ले सके। जिसके कारण सरकार की योजना को पलीता लगाने का काम आदिवासी विकास विभाग के आयुक्त द्वारा किया गया है। जबकि मुख्यमंत्री द्वारा 4 अक्टूबर को ही इस आयोजन की घोषणा कर दी गई थी। किंतु आयुक्त आदिवासी विकास विभाग द्वारा 13 अक्टूबर को कुछ लोगों को इस कार्यक्रम के बारे में खबर दी गई। जिसके कारण प्रतिभागी तैयार नहीं हो सके। आज के कार्यक्रम में पहुंचे सिर्फ तीन सुआ पार्टियों ने अपने कार्यक्रम का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों के चयन मंडल के पदाधिकारियों में डॉक्टर एल एस ध्रुव, राधा ध्रुव, थानू ध्रुव शामिल थे। जिनके द्वारा बिटकुली की पार्टी को प्रथम, पलारी विकासखंड से आए सुआ नृत्य दल को तीसरा स्थान एवं खरहा से पहुंचे सुआ नृत्य दल को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ । आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र ध्रुवंशी ने इस संबंध में बताया कि पूर्व से जानकारी ना होने के कारण बड़ी संख्या में लोग शामिल नहीं हो सके। ज्ञात हो की आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त द्वारा विभागीय योजना के प्रचार-प्रसार में गंभीर लापरवाही बरती गई है। सरकार की योजना को धूमिल करने में लगे हैं विभाग के अधिकारी, राज्य सरकार आदिवासी महोत्सव को विश्व में एक पहचान दिलाने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ सरकार इस आयोजन में भाग लेने देश के समस्त राज्यों के सरकार को निमंत्रण देने खुद अपने मंत्री विधायक और अधिकारियों को भेज कर आमंत्रण दिए जिससे छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार अपनी छवि को आदिवासी यों के हितेषी एवं उसके संस्कृति हो महत्त्व देने वाली सरकार के रूप में पेश करना चाहती है मगर उनके विभाग के अधिकारी सरकार की इस योजना को असफल करने में लगे हुए हैं जिसका ताजा उदाहरण बलोदा बाजार जिला में जिला स्तरीय आदिवासी महोत्सव कार्यक्रम में आदिवासी समाज के मात्र तीन टोली का भाग लेना है इसके पीछे का मूल कारण शासन से मिलने वाली राशि का अधिकारी बंदरबांट कर इस योजना को कागजों में खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं जिससे निश्चित रूप से सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं ऐसे में सरकार आदिवासी महोत्सव को कैसे देश विदेश में एक अलग पहचान दिला पाएंगे ।