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मुख्यमंत्री में नहीं रह गया जनता से सामना करने का साहस - स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- आज जिस तरह से पहले उत्तर प्रदेश के माननीय संवेदनशील मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी द्वारा काशी में मंदिरों, मूर्तियों को तोड़े जाने और पेंड़ को काटे  जाने के विरुद्ध चलाए जा रहे "मंदिर बचाओ आंदोलन" के लोगों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया और फिर जिस तरह उनको बीच रास्ते रोक कर वापस लौटाया गया , उससे यह पता चलता है कि मुख्यमंत्री के अंदर जनता को सामना करने का साहस समाप्त हो गया है । यह विचार स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती  ने लोहटिया चौराहे से लक्ष्मी कुंड लौटने के उपरांत लोगों से कही ।  ज्ञात हो की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के अंतर्गत विगत 16 मई से काशी में  पुराणोक्त मंदिरों के दर्शन, पूजन की यात्रा पर हैं जिससे काशी के प्राचीन मंदिरों को बचाया जा सके ।   स्वामी जी जब  लगभग 2 किलोमीटर वापस आ गए तब पुलिस के कुछ अधिकारी आये और कहा स्वामी जी वापस चलिए। स्वामी जी ने बताया कि हम मर्यादा मानसम्मान सबकी परवाह किये बगैर इसीलिए मुख्यमंत्री जी के पास जा रहे थे क्योंकि हमको आशा थी शायद मुख्यमंत्री जी को काशी में जो कुछ हो रहा वो ठीक से नहीं पता नहीं होगा । जब उनको हम सब बताएंगे , उनको ध्यान में आएगा और कार्यों को जो कि काशी में अनर्थ के रूप में हो रहे हैं उसे वे रोक देंगे। लेकिन जिस तरह से हम सभी को लौटाया गया उससे  पता चल गया की जनता से सामना करने की हिम्मत माननीय मुख्यमंत्री में नही  है । जरुर उनको कहीं ना कहीं अंतर्मन में अपराध बोध होगा । आगे स्वामी जी ने बताया कि मंदिरों और मूर्तियों के तोड़ने से रोकें जाने तक आंदोलन चलता रहेगा और किसी भी प्रकार से रुकेगा नहीं। हम आशा करेंगे कि सरकार के जिम्मेदार अधिकारियों को सद्बुद्धि आएगी और वह परिस्थिति की गंभीरता को समझेंगे और निर्णय लेंगे । 

देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी :: अविमुक्तेश्वरानंद

:: सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट :: देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी ।। काल अनादि रही संरक्षित, शिव का मयआनंद अलौकिक, घर-घर कंकर-शंकर पूजित, अब क्यूँ सिसकी भरती काशी, नंगे पाँव चला सन्यासी।। “मैंने तो गंगा से मिलकर, अविमुक्त ये क्षेत्र बनाया। अपने अंचल में ले, जलकर, तेरे पुरखे मुक्त कराया। मैंने बाबा शिव को, हठ कर, कैलाश से यहाँ बुलवाया। तेरे मन को शांति मिले, सारे देवों को यहाँ बसाया। मेरे अंग भंग कर अब क्या, मुझे बनायेगा क्योटो-सी” देखा, सिसक रही थी काशी। नंगे पाँव चला सन्यासी ।। ...स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

भारत में मन्दिरों को तोडने वाली पार्टी के रूप में जानी जाएगा भारतीय जनता पार्टी - स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट ::- काशी में हो रहे देव मंदिरों के विध्वंस देव मूर्तियों के अपमान और दिव्य विग्रहों की पूजा से सनातन धर्मियों को वंचित कर रहे किए जाने के विरुद्ध "मंदिर बचाओ आंदोलनम्" के अंतर्गत आज प्रातः काल 7:00 बजे से असि संगमेश्वर महादेव की पूजा कर "काशी बचाओ मंदिर बचाओ यात्रा" आरंभ हो गई । यात्रा के क्रम में असि संगमेश्वर, भद्र विनायक,अर्क विनायक, चंद्रकूप, पराशरेश्वर महादेव , अमरनाथ, महिषासुर मर्दिनी, जगन्नाथ जी , साक्षी गोपाल जी, पुष्कर तालाब, ब्रह्मा वेद विद्यालय, सिद्धेश्वर महादेव, पंचरत्न मंदिर, कुरुक्षेत्र, स्वर्ण लिंगेश्वर, दुर्गा कुंडेश्वर, दर्प विनायक, ज्वरहरेश्वर, ज्वरहरेश्वरी देवी, तिलपर्णेश्वर, शुष्केश्वर महादेव, नागेश्वर महादेव, राधा कृष्ण मंदिर, सीता राम मंदिर, संकुधारा,द्वारकाधीश मंदिर, बैजनाथ महादेव, कामाख्या देवी, प्रत्यंगिरा देवी, बटुक भैरव, उन्मत्त भैरव,देवरिया वीर, कूटदन्त विनायक, क्रीं कुंड और हयग्रीव केशव इन मंदिरों का दर्शन किया गया । यात्रा मध्यान्ह लगभग 12:30 बजे भदैनी पहुंची और वहां हयग्रीव केशव देव का दर्शन कर यात्रा ने विराम लिया । सायंकाल माता आनंदमई आश्रम परिसर में क्षेत्रीय लोगों की एक सभा का आयोजन किया गया । जिसमें अनेक वक्ताओं ने अपने अपने विचार व्यक्त किए सभी ने एक स्वर से इस योजना का विरोध किया । अध्यक्षता करते हुए स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा की हमारे हिंदू सनातन धर्म प्रतीकों को हानि पहुंचाने और नष्ट करने का प्रयास आज से नहीं विगत अनेक वर्षों से चल रहा है । उन्होंने कहा कि सनातन धर्म आस्था का केंद्र गोलू को नष्ट करने का प्रयास भारत में अपना साम्राज्य जमा चुके मुगलों ने किया जब अंग्रेज यहां के शासक बने तो उन्होंने यहां के गुरुकुलों को समाप्त करने का काम किया और अब जब भारतीय जनता पार्टी शासन में आई है तो लगता है कि आने वाला इतिहास भारतीय जनता पार्टी को देश से हिंदू मंदिरों को समाप्त करने वाली पार्टी के रूप में निरूपित करेंगे । जिस तरह से धर्म प्राण नगरी काशी, मंदिरों का शहर काशी, गलियों का शहर काशी, आधुनिक योजनाओं के नाम पर उजाड़ा जा रहा है और जिस तरह विकास के नाम पर सहस्राब्दियों से स्थापित धरोहर को नष्ट किया जा रहा है उसको देखकर तो यही लगता है कि हम किसी भी धर्म के शासनकाल में रह रहे हैं । यात्रा कल प्रातः 6:00 बजे से आरंभ होकर तिलभांडेश्वर महादेव, चिंतामणि गणेश, केदारेश्वर महादेव, हरिश्चंद्र ईश्वर महादेव सब के दर्शन करते हुए क्षेमेश्वर घाट विश्राम करेंगे । "काशी बचाओ मंदिर बचाओ" सभी काशी खंडोंक्त मंदिरों का दर्शन करते हुए दिनांक 29 मई को पूरी होगी और उसी दिन एक बड़ी सभा के माध्यम से मंदिर बचाओ आंदोलन का दूसरा चरण घोषित किया जाएगा । कार्यक्रम में सम्मिलित रहे ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानन्द, स्वामी उद्धव स्वरूप, ब्रह्मचारी कृष्णप्रिया आनंद, ब्रह्मचारी योगेश्वरान्नद, डाक्टर श्रीप्रकाश मिश्र, गिरीश चंद्र तिवारी, शिवप्रसाद पांडे, कवि बृजेंद्र मिश्र दमदार बनारसी जी आदित्य जन उपस्थित रहे ।

घंटा घड़ियाल प्रतिदिन बजाकर जगाएंगे जन-जन को - रविशंकर द्विवेदी ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- काशी के तीर्थ पुरोहितों ने "मंदिर बचाओ आन्दोलनम्" को समर्थन प्रदान करते हुए काशी वासियों से प्रतिदिन सायंकाल अपने छत पर 8:00 से 8:15 तक घंटा, घड़ियाल और शंख बजाने और "हर हर महादेव" का नारा लगाने का आह्वान किया है । "मंदिर बचाओ आंदोलनम्" के समर्थन के लिए आयोजित आज की इस बैठक में मणिकर्णिका घाट के तीर्थ पुरोहित श्री रविशंकर जी ने कहा कि मंदिरों को तोड़ना और मूर्तियों को अपमानित करना, पूजा को रोक देना आदि कार्य की निंदा की जानी चाहिए । औरंगजेब के समय में भी जजिया कर ले कर हिंदुओं को अपने धर्म के पालन की अनुमति दी जाती थी दुःख की बात है कि आज हिंदू-हिंदू कहने वाली और अपने आपको हिंदुओं की रक्षा करने वाली पार्टी सिद्ध करने की कोशिश करने वाली पार्टी का शासन है । काशी जैसी पवित्र नगरी में मंदिरों को तोड़ा जा रहा है हमारा हृदय अत्यंत आहत है इसलिए और कुछ ना करके हम अपने घर की छत पर प्रतिदिन रात को 8:00 से 8:15 तक घंटा, घड़ियाल बजाकर और "हर हर महादेव" का नारा लगाकर जनता को जगायेंगे और इस तरह से अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराएंगे । हमने शांति का परिचय दिया है , शांति से हमारी बातों की सुनवाई सरकार नहीं कर रही है । कार्यक्रम में समिति के श्री प्रेम शंकर दुबे, नारायण माहेश्वरी, रवि कुमार, कैलाश नाथ, अंकित द्विवेदी, त्रिलोचन शास्त्री, महालक्ष्मी शुक्ल, पद्माकर पांडे, भावना जी, रवि शंकर गिरी, विजय कपूरिया, राजकुमार, मोहन मिश्रा, अंजू चौबे, आदि लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए । कार्यक्रम का संचालन पप्पू यादव ने किया । कार्यक्रम में उपस्थित स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा आंदोलन राजनीतिक आंदोलन नहीं है । आस्था से जुड़ा हुआ और गरिमा से बना हुआ काशी की जनता का आंदोलन है। हम बड़ी शांति और दृढ़ता से अपनी बात को कह रहे हैं । 16 तारीख को जो हमारी काशी यात्रा आरंभ हो रही है उस में भाग लेने के लिए बहुत सारे लोगों ने संपर्क किया था लेकिन बड़ी भीड़ लेकर के चलने पर नगर का यातायात प्रभावित होता है, आम जनता को असुविधा होती है और असामाजिक तत्वों द्वारा गड़बड़ी करने की आशंका बनी रहती है । इन सब बातों को मद्देनजर रखते हुए हमने निर्णय लिया है कि इस काशी यात्रा में कम से कम लोग सम्मिलित रहें, लोग घरों के सामने ही खड़े होकर यात्रा में शामिल लोगों के साथ कनेक्ट करे। काशी की रक्षा के लिए कटिबद्ध स्वामी जी ने यह भी कहा कि आज हमको मणिकर्णिका आकर बड़ी प्रसन्नता हुई है। यह काशी का सबसे बड़ा तीर्थ है । घाट पर रहने वाले लोगों की जो समस्याएं हैं, उसे सही और एक सुंदर वातावरण बनाने का प्रयास किया जाएगा ।

मन्दिर तोड़ने वालों को चिता के लिये आग नहीं ::- विश्वनाथ चौधरी

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् को हमारा पूरा समर्थन है क्योंकि मन्दिर आस्था के केन्द्र हैं । मन्दिरों को तोड़ने और उसका स्थान बदलने की कोशिश करने वालों को काशी के मणिकर्णिका घाट पर चिता के लिये अग्नि देना संभव नहीं है । यह कथन है वाराणसी के डोमराजा के पुत्र डोमराजा का। बरिया चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् से संवाद स्थापित करने के लिये आयोजित संगोष्ठी में पूरे समाज की ओर से बोलते हुये डोमराजा के सुपुत्र विश्वनाथ चौधरी ने व्यक्त किये । सभा में उपस्थित मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती ने कहा कि जहां मंदिरों में पूजा-अर्चना नही होती है वहां रोजी रोटी का संकट, आधि-व्याधि का संकट और मृत्यु भय संकट मंडराने लगता है, इसलिए काशी के इन मंदिरों को तोड़े जाने को और मंदिर में पूजा बंद कराया जाने का खतरा मंडराने लगा है । सभा में उपस्थित रहे बरिया चौधरी, विश्वनाथ चौधरी, राजेंद्र चौधरी, सत्यम चौधरी, रोशन यादव, मनाऊँ यादव, सोनू चौधरी, नीरज चौधरी के साथ सैकड़ो लोग उपस्थित रहे ।

दलित समाज ने भी मन्दिर बचाओ आन्दोलनम् को दिया अपना समर्थन ।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- धर्म नगरी काशी में चल रहे मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के क्रम में आज 10 मई, बुधवार को शाम पांच बजे दलित बस्ती, ललिता घाट में विश्वनाथ कॉरिडोर बनााये जाने पर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। ज्ञात हो कि 'मन्दिर बचाओ आन्दोलनम्' की शुरुवात 4 दिन पहले काशी के अस्सी घाट से पूज्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के नेतृत्त्व में शुरू हुआ जिसे अपार जन समर्थन मिल रहा है। आज के इस महत्त्वपूर्ण सभा में दलित समाज के सदस्यों को काशी के अनेक विशिष्ट जनों सहित स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती भी संबोधन करेंगे । यह बहुत ही गंभीर विषय बनता जा रहा है जिसे राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार को अविलंब मध्यस्ता करते हुए विपरीत रास्ता ढूंढना होगा और काशी वासियों के हित मे बिना विध्वंश के कार्य करना होगा।

मंदिर बचाओ आन्दोलनम का उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों ने दिया समर्थन।

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" ::- काशी में बन रहे विश्वनाथ कॉरिडोर के विरोध मे स्वामी अभिमुक्तेशस्वरानंद सरस्वती की अगुवाई मे चलाए जा रहे अन्दोलम का उत्तराखंड के बुद्धिजीवियों ने समर्थन किया है। इसमें मांग की गई है कि आंदोलनकारियों द्वारा सरकार के समक्ष रखी गई सात मांगों पर त्वरित विचार किया जाय। काशी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के नाम पर प्राचीन एवं ऐतिहासिक महत्व के मंदिर और धरोहरों को तोड़ा जा रहा है। इसके विरोध में कशी में संत आंदोलनरत है। इसी परिपेक्ष मे यहाँ आयोजित बैठक मे लोगो ने कॉरिडोर योजना पर पुनर्विचार करने की मांग उत्तरप्रदेश के संवेदनशील सरकार से की है। भागवत कथा वाचक आचार्य लोकेश ने कहा कि स्वामी अविमुकेश्वरानंद सरस्वती की अगुवाई मे चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन का समर्थन हम करते हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों को तोड़ा जाना सनातन धर्म पर हमला है। इस अवसर पर मोहन शास्त्री, गजेंद्र, संजय शास्त्री,उमेश उनियाल अदि उपस्थित थे।

हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है दिल्ली की ओर मचा सकता है तबाही, दो दिनों तक अलर्ट जारी

 दिल्ली - उत्तर भारत में कहर बरपाने के बाद फिर से तूफान लौट आया है. हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. अगले दो से तीन घंटे के भीतर तूफान के दिल्ली-एनसीआर में आने की आशंका जताई गई है. हरियाणा के बाद अब मेरठ और गाजियाबाद में भी सभी स्कूल को बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं. दिल्ली में आज सेकेंड शिफ्ट के स्कूल बंद रहेंगे.

इस बीच दिल्ली सचिवालय में मुख्य सचिव अंशु प्रकाश ने मौसम विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की है. इस बैठक में गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, स्वास्थ्य विभाग, दिल्ली पुलिस, अग्निशमन विभाग समेत सभी अहम विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. बैठक में दिल्ली में सेकेंड शिफ्ट में चलने वाले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है. साथ ही सभी स्कूलों को आउटडोर इवेंट नहीं करने की हिदायत दी गई है.

उत्तर भारत में कहर बरपाने के बाद फिर से तूफान लौट आया है. हरियाणा की तरफ से आ रहा तूफान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहा है. अगले दो से तीन घंटे के भीतर तूफान के दिल्ली-एनसीआर में आने की आशंका जताई गई है. हरियाणा के बाद अब मेरठ और गाजियाबाद में भी सभी स्कूल मंगलवार को बंद रखने के आदेश दे दिए गए हैं. दिल्ली में कल सेकेंड शिफ्ट के स्कूल बंद रहेंगे.

इसके साथ ही किसी भी आपात स्थिति के लिए दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की ओर से इमरजेंसी टोल फ्री नंबर (1077) जारी किया गया है. तूफान आने पर क्या करें और क्या न करें, इसकी एडवाइजरी जारी की गई है.

स्थानीय मौसम विभाग और भारत सरकार के भू-विज्ञान मंत्रालय के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली में दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक 50-50 किमी प्रति घंटे की तेजी से धूल भरी हवाएं चलेंगी और शाम 5.30 बजे यह तूफान अपने चरम पर हो सकता है. दिल्ली पुलिस ने कहा है कि रोजाना सफर करने वाले यात्री घर से निकलने से पहले मौसम का मिजाज जरूर देख लें.

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक और केरल आंधी-तूफान से प्रभावित हो सकते हैं. मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर आंधी की आशंका है.

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार एनसीआर, जींद, रोहतक, भिवानी और नारनौल में अगरे दो घंटों में बारिश हो सकती है. दिल्ली समेत एनसीआर में अगले 3-4 घंटों में 50-70 किमी प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं.

नारों के साथ माताओ व बहनों ने सूपा बजाकर विरोध किया।

सुदीप्तो चटर्जी ::- मन्दिर बचाओ आंदोलनम् के समर्थन में काशी की माताओं बहनों ने सूपा बजाकर विरोध प्रदर्शन किया । आज सायं 5 बजे से काशी के शंकराचार्य घाट पर काशी विश्वनाथ कोरिडोर के अन्तर्गत पौराणिक मन्दिरों को तोडे जाने का विरोध करते हुए अखिल भारतीय आध्यात्मिक उत्थान मण्डल एवं अन्य संस्थाओं की माताओं बहनों ने सूपा बजाकर अपना विरोध प्रदर्शन किया।  इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्रीकाशी विदुषी परिषद् की महामन्त्री सावित्री पाण्डेय ने कहा कि काशी गलियों का शहर है । इसकी पहचान गलियों और मन्दिरो से है । इसको विकृत कर काशी के स्वरूप को न बिगाड़े। रागिनी पाण्डेय ने कहा कि विकास यदि करना है तो सडकों का करें।  बिजली पानी आदि का करें लेकिन मन्दिर को तोडकर कौन सा विकास होता है ? डॉ लता पाण्डेय ने कहा कि आज सूपा बजाकर हम सबने प्रतीकात्मक विरोध किया । सूपा बजाने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार सूपा तोतली चीजों को बाहर कर सार सार को एक जगह पर इकट्ठा करता है उसी प्रकार काशी से बुराई बाहर जाए और अच्छी चीजें यहाँ सदा रहें।  एक तात्पर्य यह भी है कि जिस प्रकार सूपा बजाकर दरिद्रता को भगाया जाता है उसी प्रकार हम विनाशक विकास को भगा रहे हैं। काशी का विकास पोषक हो । विनायक विकास भगाना है।  पोषक विकास को लाना है।। महिला मण्डल करे मुनादी।  मन्दिर को मत तोडो मोदी।। इस तरह के नारों के साथ काशी की माताओं एवं बहनों ने विरोध प्रदर्शन किया। आज के कार्यक्रम में प्रमुख रूप से साध्वी पूर्णाम्बा , साध्वी शारदाम्बा, उर्मिला शुक्ल , अजेया प्रेमलता पाण्डेय, रूबी दुबे पूनम शुक्ल, पूनम तिवारी, माधुरी पाण्डेय , ममता मिश्र, माला मिश्रा , ब्रह्मबाला शर्मा , नीतू सिंह महालक्ष्मी शुक्ला, रितु पाण्डेय, अलमेलु के एस इन्दिरा मिश्रा, उषा देवी ,अंजू यादव , वन्दना यादव आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत मे मंगलाचरण विजया तिवारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन सुनीता जायसवाल ने किया। 

मंदिर बचाओ आन्दोलनम का हुआ शंखनाद ।

सुदीप्तो चटर्जी रिपोर्ट ::- भारत की धर्म नगरी तथा देवताओं के वासस्थान काशी में कॉरिडोर निर्माण हेतु वेद / पुराणों में वर्णित मंदिर तोड़ दिए गए तथा देवताओं का पूजन नहीं हो रहा था। इस विषय को ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के शिष्य प्रतिनिधि दंडी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गम्भीरता से लेते हुए मंदिर बचाओ आन्दोलनम का आज सायं 5 बजे काशी के अस्सी घाट में शंखनाद किया । इस मौके पर उनके साथ श्रीविद्या मठ के बटुक व काशी वासी अधिक संख्या में उनके साथ उपस्थित हुए और राजघाट तक विशाल पदयात्रा निकले। स्वामीश्री का काशी वासियों ने विभिन्न स्थानों पर माला पहनाकर स्वागत किया और वे भी इस मंदिर बचाओ आन्दोलनम में उनके साथ होने की बात कहकर सहयोग देने तथा देवताओं के वासस्थान को नुकसान नहीं होने देने हेतु संकल्प लिए। सभी का मत एक था कि काशी को हमे बचाना है और यदि इस तरह का विध्वंश होगा तो देवता काशी से चले जायेंगे और काशी खाली हो जाएगी। स्वामिश्री के इस आंदोलन में भारी संख्या में लोग जुड़े तथा व्हाट्सएप्प एवं फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से भारत के विभिन्न कोने से लोगों ने अपना समर्थन स्वामिश्री को दिया और आंदोलन से जुड़ने हेतु अपनी इच्छा प्रकट की।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से हुई संकटमोचन मंदिर के महंत की बातचीत; मुहिम तेज करने पर बनी सहमति

सुदीप्तो चटर्जी "खबरीलाल" रिपोर्ट ::- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और संकटमोचन के महंत विश्वम्भर नाथ मिश्र के बीच रविवार को सायंकाल तुलसीघाट पर महंत जी के आवास पर हुई वार्ता में 7 मई, 2018 को सायंकाल अस्सीघाट से वरुणा संगम तक गंगाघाट के किनारे-किनारे आयोजित पदयात्रा को सफल बनाने, हस्ताक्षर अभियान चलाने तथा काशीवासियों को आन्दोलन से जोड़ने पर आम सहमति रही. कहा हमें नहीं चाहिए जापान का "क्योटो" !! अब पक्कामहाल के किसी घर या मंदिर पर नहीं चलना चाहिए हथौड़ा !! संकट मोचन के महंत प्रोफेसर विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि शासन की योजना सामनेघाट से राजघाट तक काॅरिडोर बनाने की ही. जिसे अभी वो उजागर नहीं कर रहे हैं. काशी की पूरी पहचान, धरोहर व संस्कृति को नष्ट कर "क्योटो" बनाना चाहते हैं, जिसका डटकर विरोध किया जाएगा. कहा काशी टूरिस्ट प्लेस नहीं बल्कि धार्मिक व आध्यात्मिक राजधानी है. और यहां लोग शांति प्राप्त करने की तलाश में आते हैं. बीएचयू चिकित्सा विग्यान संस्थान के डाॅ. बीएन मिश्र ने अपनी यूरोप यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस आदि देशों में लोग अपनी पुरानी बस्तियों, गलियों व भवनों को बचाने व सुरक्षित रखने की योजनाएं बना रहे हैं. वहां पुरानी बस्तियों में अब भी गलियां सुरक्षित हैं और यहां पक्कामहाल को जमींदोज करने की योजना बन रही है. बातचीत लगभग एक घंटे तक चली. वार्ता में वरिष्ठ पत्रकार पद्मपति शर्मा, राजेन्द्र तिवारी, राजकुमार सिंह, राजनाथ तिवारी, एके लारी, मुन्ना मारवाड़ी, पदमाकर पांडेय आदि भी मौजूद रहे. पद्मपति शर्मा ने आन्दोलन में राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई. कहा कि कुछ नेता टाइप के लोग आन्दोलन के मंच को हाईजेक करने की कोशिश कर रहे हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आन्दोलन में आने से किसी को रोका नहीं जा सकता है. लेकिन राजनीतिक लोगों को अपनी टोपी उतारकर आना पड़ेगा. उन्होंने काशीवासियों से अपनी संस्कृति व पहचान को बचाने के लिए एकजुट होने तथा सोमवार यानी 7 मई, 2018 को सायंकाल 4 बजे अस्सीघाट से आयोजित पदयात्रा को सफल बनाने की अपील की.

काशी में मुर्तियों का विध्वंस रोके सरकार - अविमुक्तेश्वरानंद

सुदीप्तो चटर्जी " खबरीलाल " रिपोर्ट ::- श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में कारिडोर के नाम पर मंदिरों और उसमें स्थापित वेद पूराणों में वर्णित विग्रहों को बेरहमी के साथ ध्वस्त किया जा रहा है। काशी में देवी देवताओं को बचाने के लिए जन आन्दोलन शुरु किया जायेगा। मंदिर बचाओ आन्दोलनम् के तहत 7 मई 2018 को सायं 4 बजे अस्सीघाट से राजपाट तक पदयात्रा कर आन्दोलन की शुरुआत की जायेगी। इसके बाद प्रतिदिन काशी 84 घाटों पर अलग-अलग समाज के सभी वर्गो द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जायेगा । ????अस्सीघाट से राजघाट तक पदयात्रा 7 मई को ????श्रीकाशी विश्वनाथ कारिडोर के विरोध का जनता करने लगी रोडमैप तैयार इसी क्रम में 16 मई से काशी में मंदिर तोड़ने के विरोध और देवी देयताओं की सुरक्षा के लिए काशी यात्रा शुरु किया जायेगा, यात्रा का समापन 29 मई को विशाल सभा के साथ किया जायेगा। यह बात शनिवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में आयोजित पत्रकार वार्ता में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट प्रो विजयनाथ मिश्र ने संयुक्त रुप से कही। स्वामीश्री ने कहा कि केन्द्र और प्रदेश में हिन्दूवादी विचार धारा की पोषक सरकारों के इशारे पर काशी में विश्वनाथ कारिडोर के बहाने मंदिर परिसर में विभिन्न भवनों में मंदिर के बावजूद मूहमांगी रकम के बल पर मकानों को खरिदकर उसमे स्थापित पुराणो में वर्णित सैकड़ों वर्ष पुराने मंदिरो को तोडा जा रहा है और सरकार मौन है। उन्होने सरकार को अपनी छ: सूत्री मांग पत्र भी प्रेषित किया। मांग पत्र में कारिडोर प्रोजेक्ट से काशी की जनता को अवगत कराया जाय, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में संपत्तियों की रजिस्ट्री राज्यपाल के नाम क्यो बाबा के नाम पर रजिस्ट्री क्यो नहीं , श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर से सरकारी हस्तक्षेप हटाकर मंदिर को काशीवासियों के हवाले किया जाय, तोडे गये मंदिरों का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण हो, व्यास परंपरा के पोषक व्यासजी को पुन: उनके स्थान पर स्थापित किया जाय, मंदिर और मुर्तियों के विध्वंस की कार्यवाही पर सरकार रोक लगाये, और काशी के मूल स्वरूप के साथ छेडछाड रुके , इसके लिए सरकार लिखित आश्वासन दे ताकि काशी को बचाया जा सके।

हिंदू धर्म में स्वयंभू बाबाओं की कोई जगह नहीं है : स्वामी स्वरूपानंद

खबरीलाल रिपोर्ट ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बड़ा हमला बोला है। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं दोनों की वजह से पहुंचा है। शंकराचार्य ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत पर भी तीखा हमला बोला है। शंकराचार्य के मुताबिक, यह हैरान करने वाली बात है कि आरएसएस चीफ मोहन भागवत हिंदुत्व के बारे में कुछ नहीं जानते हैं। एक राष्ट्रीय पत्रिका से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा, कि भागवत कहते हैं कि हिंदुओं में शादी एक समझौता है, जबकि यह पूरी जिंदगी का साथ है। भागवत कहते हैं कि जो भारत में पैदा हुआ है वो हिंदू है। ऐसे में इंग्लैंड और अमेरिका में हिंदू माता-पिता से पैदा हुए बच्चे को क्या कहेंगे? आगे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि बीजेपी के नेता बीफ के सबसे ज्यादा निर्यातक हैं। उन्होंने इसे बीजेपी का दोहरा चरित्र बताया, जिसके तहत पार्टी गोहत्या की विरोधी है और बीफ के निर्यात को भारत की छवि पर धब्बा बताती है। शंकराचार्य ने यह भी सवाल उठाए कि क्या बीजेपी ने देश से किए अपने द्वारा किये गए वादों को पूरा किया है ? क्या कश्मीर से धारा 370 समाप्त कर दिया गया है ? क्या भारत के युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिला जब कि उन्होंने प्रत्येक वर्ष 2 करोड़ नौकरी देने की बात कही थी ? क्या पीएम मोदी के वादे के मुताबिक भारत के गरीबों को 15-15 लाख रुपये मिल गए ? क्या अयोध्या में राम मंदिर बन गया ? शंकराचार्य के मुताबिक, इन सभी सवालों का जवाब देने में पीएम मोदी समेत बीजेपी नेता नाकाम रहे हैं, जो 2014 के चुनाव प्रचार में इन्होंने किए थे। रेप केस में दोषी ठहराए गए कथा वाचक आसाराम के मामले पर भी शंकराचार्य ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आसाराम को कानून के मुताबिक सजा मिली है, लेकिन उन्हें धर्म के मुताबिक सजा मिलनी बाकी है। न सिर्फ आसाराम बल्कि उनके बेटे नारायण स्वामी को भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए। हिंदू धर्म में इन स्वयंभू बाबाओं की कोई जगह नहीं है। जब तक जनता मूर्ख बनती रहेगी, ऐसे लोग फायदा उठाते रहेंगे। धार्मिक संगठनों पर टैक्स लगाने के उपर शंकराचार्य ने कहा कि सरकार को पहले अपने खर्चों पर लगाम कसनी चाहिए। उनके मुताबिक, सांसदों और विधायकों को अपने वेतन में कटौती करनी चाहिए।

मंदिरों की शहादत की शर्तों पर विकास मंजूर नहीं -स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

खबरीलाल रिपोर्ट ::- ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती काशी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में कारिडोर के बहाने परिसर के पौराणिक महत्व की मंदिरों को ध्वस्त किये जाने से व्यथित हैं। अब वह सनातन संस्कृति की सल्तनत को बचाने के लिए कमर कस चुके है। केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में पहुंचे बीएचयू के न्यूरोलाजिस्ट से तोडकर फेकी गई। मुर्तियों को दिखाते हुये फफक पडे। फिलहाल मठ के बीटुकों द्वारा विश्वनाथ परिसर में ध्वस्त किये गये मंदिरों के विग्रहो का विधि विधान से पूजा किया जा रहा है। इस बाबत स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि हम विकास के विरोधी नहीं है लेकिन पौराणिक मंदिरो को विध्वंस करके और काशी की पहचान को मिटाकर क्षद्म विकास से हिंदू समाज मर्माहत है । उन्होने काशी की मंदिरों को बचाने के लिए लोगो का आह्वान करते हुये यह भी कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ कारिडोर के बहाने नियम विरुद्ध मकानों को खरीदकर सरकार क्रय किये गये भवनों में सैकड़ों वर्ष पुरानी और जिन विग्रहो का प्रमाण शास्त्रो में है उन मंदिरों में स्थापित देव विग्रहो को तोडकर फेंक दिया गया है। वैसे सरकार और सलाहकारों को यह भी पता होना चाहिए कि किसी भी मंदिर को बेचना और खरीदना कानूनन अवैध है।शास्त्ररो के अनुसार यदि विग्रह खंडित हो जाते है तो उस स्थान की पूजा का विधान है। ( Harendra Shukla जी की वॉल पोस्ट साभार )

अयोध्या में मंदिर बनाने वाली पार्टी काशी में पौराणिक मंदिरों को क्यों तोड़ रही है : अविमुक्तेश्वरानंद

खबरीलाल रिपोर्ट ::- ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य प्रतिनिधि तथा ज्योतिष पीठ के प्रभारी दंडी स्वामी अविकुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धर्म प्रदेश के संत मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर यह पूछा कि अयोध्या में मंदिर बनाने वाली पार्टी काशी में पौराणिक मन्दिरों को क्यों तोड़ रही है ? इन पौराणिक मंदिरों में देवी देवताओं के वास हैं और समूचे सनातन धर्मी तथा काशी वासी इन मंदिरों में पूजा अर्चना करते हैं। यदि शासन एवं प्रशासन ने इसे बंद नहीं किया तो देवी देवताओं के वास काशी में कहां होगा। ऐसे में काशी नगरी देवी देवता विहीन हो जाएंगे। श्रद्धालुओं और भक्तों के आस्था से ऐसा खिलवाड़ क्यों और किसलिए ? विकास इन पौराणिक मंदिरों को बिना तोड़े भी अलग रास्ता अपनाकर किया जा सकता है। स्वामी अविकुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी एवं मोदी जी से अपील किये हैं - योगी मोदी जी जिद्द छोड़ो, मोद प्रमोद विनायक जोड़ो। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर मूर्ति तोड़ने वाला भी हिन्दू है और मूर्तियों से अपने आपको जोड़ने वाला भी हिन्दू हैं तो मुझे हिन्दूओं को दो भेद मानने ही होंगे - एक मूतो (मूर्ति तोड़ने वाला) हिन्दू और दूसरा मूजो (मूर्ति से स्वयं को जोड़ने वाला) हिन्दू, तब कहना होगा कि यह संघर्ष मूतो हिन्दू बनाम मूजो हिन्दू के बीच है। इस संघर्ष को आप ही रोक सकते हैं।