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यूपी की सभी 403 सीटों पर RSS ने भेजे अपने लोग, घर-घर जाकर बीजेपी के लिए मांग रहे वोट

उत्तर प्रदेश में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) ने भारतीय जनता पार्टी की मदद के लिए काम करना शुरू कर दिया है। इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी मिली है कि RSS ने बीजेपी के लिए एक कैंपेन शुरू किया है। इसमें उसने सभी 403 सीटों पर अपने लोग भेजने शुरू कर दिए हैं। वे लोग घर-घर जाकर बीजेपी के लिए वोट मांग रहे हैं। संघ के लोगों द्वारा पर्चे भी बांटे जा रहे हैं। उनपर लिखा है, ‘राष्ट्रहित में काम करने वाले जो लोग हैं उनके पक्ष में ही मतदाता अपना मतदान करें।’ गौरतलब है कि संघ ने 2014 में लोकसभा चुनाव के वक्त भी ऐसा ही कैंपेन चलाया था।
यूपी में संघ की 35 शाखाएं हैं। वे सभी इसी काम में लगी हुई हैं। संघ की तरफ से सभी 403 सीटों पर अपने स्वंयसेवकों को उतार दिया गया है। हर विधानसभा में एक संयोजक और दो सह संयोजक भी बनाए गए हैं। संघ के जो 35 विभिन्न संस्करण हैं उनमें ABVP, भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय किसान संघ, पूर्व सैनिक सेवा परिषद और स्वदेशी जागरण मंच शामिल हैं। कार्यक्रम को करवा रहे कुछ लोगों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अवध प्रांत की सभी 82 विधानसभा सीटों पर मीटिंग हो चुकी है। उन्होंने बताया कि आने वाले वक्त में बाकी जगहों पर मीटिंग की जाएगी।
प्रचार में बीजेपी का नाम नहीं लेगा संघ: स्वंयसेवकों को सख्त हिदायत है कि प्रचार के दौरान बीजेपी का नाम नहीं लेना है। प्लान यह है कि बाद में बीजेपी कार्यकर्ता खुद आकर लोगों को समझाएंगे कि वह ही ‘असली राष्ट्रवादी पार्टी’ है।
अगले महीने उत्तरप्रदेश समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसमें यूपी के अलावा पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर का नाम शामिल है। यूपी में सात चरणों में मतदान होंगे। 

 

योगेन्द्र यादव बोले- दिल्ली को ‘स्टेपनी’ की तरह यूज कर रहे हैं अरविंद केजरीवाल, सीएम पद छोड़ें

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने शनिवार को आरोप लगाया कि केजरीवाल राष्ट्रीय राजधानी का इस्तेमाल ‘स्टेपनी’ की तरह कर रहे हैं और उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री पद छोड़कर पंजाब पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘दिल्ली के मुख्यमंत्री को दिल्ली का इस्तेमाल स्टेपनी के तौर पर करना बंद करना चाहिए। उन्हें यह पद छोड़कर पंजाब पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अगर उनकी पार्टी पंजाब में सत्ता में आती है तो उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री का कार्यभार ग्रहण करना चाहिए। यदि उनकी पार्टी हारती है, तब भी उन्हें उस राज्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’
केजरीवाल को आप नेता मनीष सिसोदिया द्वारा एक तरह से पंजाब में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। सिसोदिया ने सोमवार को एक रैली में लोगों से कहा था कि ‘ यह सोचकर वोट डालें कि आप अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री (पंजाब का) बनाने के लिए वोट डाल रहे हैं।’
बाद में केजरीवाल ने यह स्पष्ट किया कि पंजाब का अगला मुख्यमंत्री उसी राज्य से होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन के बल पर 2013 में दिल्ली में सत्ता हासिल करने वाली आप सतत रूप से पंजाब में अपनी जमीन तैयार कर रही है। 2014 में इसने चार लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। यादव ने कहा कि आप का ध्यान दिल्ली के बजाय पंजाब, गोवा और गुजरात पर अधिक है।

 

नीतीश कुमार की दही-चूड़ा पार्टी के लिए तीन साल बाद भाजपा नेताओं को गया न्‍योता, भड़की कांग्रेस

मकर संक्रांति के मौके पर बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा पार्टी ने हलचल मचा रखी है। जदयू की ओर से 15 जनवरी को दी जाने वाली पार्टी में भाजपा को न्‍योता दिए जाने से कांग्रेस नाराज हो गई है। कांग्रेस और जदयू महागठबंधन में शामिल हैं और बिहार की सत्‍ता में साझेदार हैं। जदयू अध्‍यक्ष नीतीश कुमार की ओर से दी जाने वाली दही-चूड़ा पार्टी के लिए भाजपा नेताओं को तीन साल बाद बुलावा दिया गया है। यह कदम बिहार कांग्रेस अध्‍यक्ष अशोक चौधरी को रास नहीं आया है। चौधरी का कहना है कि भाजपा नेताओं को इस साल क्‍यों बुलाया गया इस बारे में जदयू के प्रदेशाध्‍यक्ष वशिष्‍ठ नारायण सिंह ही बता सकते हैं। लेकिन कांग्रेस इस फैसले से खुश नहीं है। वहीं जदयू नेताओं का इस बारे में कहना है कि बुलावे को लेकर ज्‍यादा राजनीतिक मतलब नहीं निकालना चाहिए। लालू यादव ने भी भाजपा को बुलाया है। हालांकि भाजपा नेता लालू की दही-चूड़ा पार्टी में नहीं आए।
नीतीश कुमार की ओर से भेजे गए न्‍योते पर बिहार भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि उनके पुराने संबंध रहे हैं। उन्‍होंने कहा, ”इसका राजनीतिक मतलब नहीं निकालना चाहिए। जदयू के प्रदेशाध्‍यक्ष ने मुझे बुलाया और मैं जाऊंगा।” रोचक बात है कि इस बार लालू ने भी भाजपा को बुलाया था। लालू ने पहली बार भाजपा नेताओं को न्योता दिया था लेकिन वे नहीं आए। भाजपा की ओर से कहा गया कि उन्‍हें सम्‍मानपूर्वक न्‍योता नहीं दिया गया। लालू की पार्टी में सीएम नीतीश कुमार और अन्‍य राजनेता शामिल हुए। राजद की ओर से बताया गया कि लालू की पार्टी के लिए भाजपा के साथ ही एनडीए के अन्‍य नेताओं को भी आमंत्रण भेजा गया था।
नीतीश कुमार की ओर से भाजपा नेताओं को बुलाए जाने को लेकर कई तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों से पहले दोनों पार्टियों के बीच जो दूरी आई थी वह अब कम हो रही है। दोनों दल लगभग दो दशक तक साथ रहे लेकिन 2013 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाने पर दूर हो गए थे। हाल के कुछ महीनों में जदयू और भाजपा नेताओं में गर्मजोशी बढ़ी है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पिछले दिनों मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया था। साथ ही प्रकाश पर्व के मौके पर कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने भी बिहार सरकार के शराबबंदी के कदम की प्रशंसा की थी।

 

आर्मी जवान की पत्नी का आरोप- कपड़े, जूते, बर्तन के साथ टॉयलेट तक साफ कराते हैं सीनियर अफसर

सोशल मीडिया पर वीडियो के जरिए घटिया खाने की शिकायत बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप तो लगे ही, साथ ही देश भर में यह मुद्दा गर्मा गया है। इस मामले के बाद कई और जवान भी वीडियो के जरिए शिकायत कर रहे हैं। हाल ही में थल सेना में लांस नायक यज्ञप्रताप सिंह ने भी सैन्य अफसरों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। जवान ने वीडियो में आरोप लगाया था कि सेना के अधिकारी जवानों का शोषण करते हैं, जब इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं तो कोर्ट मार्शल करने और नौकरी से निकालने की धमकी देते हैं। वहीं यज्ञप्रताप की पत्नी ने भी सैन्य अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सैनिक की पत्नी ऋचा सिंह कहा कि जब उसके पति देहरादून में पदस्थ थे तब वह उनके साथ ही रहती थी। वहां उन्होंने देखा कि अफसर सैनिकों से नौकरों की तरह काम कराते हैं। घर में कपड़े, जूते, बर्तन यहां तक कि टायलेट तक साफ कराते हैं। इतना ही नहीं, अफसरों के घर की शॉपिंग, बच्चों को स्कूल छोड़ना और कुत्ते को नहलाने जैसे काम भी करने पड़ते हैं। ऋचा ने कहा कि उनके पति ने इसी से आहत होकर आवाज उठाई और फेसबुक पर वीडियो डालकर पीएम मोदी से गुहार लगाई है। सैनिक की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति का मोबाइल छीन लिया गया है और उन्हें परेशान किया जा रहा है।
मैं यज्ञ प्रताप सिंह इस समय 42 ब्रिगेड देहरादून में तैनात हूं। मैं सेना में 15 साल 6 महीने से सर्विस कर रहा हूं। मैंने यह देखा कि भारतीय सेना में अधिकारी जवानों का कैसे शोषण करते हैं। 15 जून 2016 को मैने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षामंत्री, गृहमंत्री और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा। इसके बाद पीएमओ से हमारे दफ्तर एक लेटर आया और बिग्रेडियर से जवाब मांगा गया। जब यह पत्र हमारी ब्रिगेड में पहुंचा तोअधिकारियों ने मेरे ऊपर अभद्र टिप्पणियां करनी शुरू कर दी। वह मुझे टॉर्चर और परेशान करने लगे। मुझे इतना परेशान किया गया कि एक आम सैनिक होता तो या तो सुसाइड कर लेता या फिर अधिकारियों से बदला लेने के लिए कोई कदम उठाता। अगर मैं दुश्मन से लड़ सकता हूं तो मैं कोई ऐसा कदम नहीं उठाउंगा जिससे मेरी वर्दी पर लांछन लगे। आज मुझे चार बजे चार्जशीट या कोर्टमार्शल के लिए बुलाया गया है। हो सकता है मेरा कोर्टमार्शल हो जाए।’

 

जवानों के वीडियोज पर पत्रकारों से बोले रक्षा राज्य मंत्री- ये इक्के-दुक्के मामले हैं, आप भी तो करते हैं

भारतीय सेना के जवानों द्वारा वीडियो बनाकर अपनी समस्याएं लोगों के सामने लाने पर रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने पत्रकारों से कहा कि ये इक्के-दुक्के मामले हैं। मीडिया से बात करते हुए भामरे ने कहा, ‘इक्के-दुक्के मामलों के आधार पर पूरी सेना को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता। पूरी सेना के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता। आप लोग भी तो ऐसा करते हैं।’ इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। बता दें, इन दिनों सेना और अद्धसैनिक बलों के जवान समस्याओं के बारे में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर रहे हैं। ऐसे करीब तीन-चार वीडियो सामने आए हैं। इसके बाद पूरे देश में यह बहस का विषय बन गया।
सबसे पहले बीएसएफ के जवान तेज बहादुर ने वीडियो बनाकर कहा था कि उन्हें अच्छी क्वालिटी का खाना नहीं मिलता। उन्होंने नाश्ते, लंच और डीनर का वीडियो बनाया था। इसके बाद ही तेज बहादुर ने अपने सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया था कि सरकार से पैसा जरूर मिलता है, लेकिन सीनियर अधिकारी घपला करते हैं। जिसकी वजह से उन्हें अच्छी क्वालिटी का खाना नहीं मिलता। इसके बाद सीआरपीएफ के एक जवान का वीडियो आया था। सीआरपीएफ जवान ने कहा था कि हम सेना के जवानों जैसा ही काम कर रहे हैं, लेकिन हमें उनकी जैसी सुविधाएं और सैलरी नहीं दी जाती है।
इनके बाद थलसेना के एक जवान यज्ञ प्रतात सिंह का वीडियो सामने आया था। सिंह ने अपने सीनियर अधिकारियों पर शोषण आरोप लगाय था। सिंह ने वीडियो में कहा था कि सेना के सीनियर अधिकारी जवानों से गाड़ी साफ करवाने, जूते पॉलिश करवाने, बच्चे खिलवाने, खाना बनवाना जैसे काम करवाते हैं। जब इसके खिलाफ आवाज उठाई जाए तो वे हमारें खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी देते हैं।
सेना के जवान का वीडियो सामने आने के बाद थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा था कि ऐसी शिकायतों को सार्वजनिक ना करके, मुझसे डायरेक्ट करें। साथ ही कहा था कि इन शिकायतों के लिए शिकायत पेटियां भी रखी जाएंगी।

 

2002 तक गणतंत्र दिवस नहीं मनाने वाले आरएसएस का फरमान- 26 जनवरी को दिल्ली के हर मोहल्ले में फहराओ तिरंगा

 

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) ने ऐलान किया है कि इस बार उनकी तरफ से दिल्ली के हर मोहल्ले में तिंरगा फहराया जाएगा। इसके लिए संघ के हर स्वंयसेवी से कहा गया है कि दिल्ली के हर मोहल्ले में तिंरगा फहराना उनकी जिम्मेदारी है। माना जा रहा है कि ऐसा लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार करने के लिए किया जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले 2002 तक संघ तिरंगा नहीं फहराता था। इसकी वजह यह थी कि संघ ने अखंड भारत के निर्माण की कसम खा रखी थी। इसलिए आजादी के 51 साल बाद भी यानी 2002 तक RSS ने तिरंगे से दूरी बनाई रखी।

क्या है अखंड भारत : अखण्ड भारत भारत के प्राचीन समय के अविभाजित स्वरूप को कहा जाता है। प्राचीन काल में भारत बहुत विस्तृत था जिसमें अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, थाइलैंड आदि शामिल थे। कुछ देश जहां बहुत पहले के समय में अलग हो चुके थे वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि अंग्रेजों से स्वतन्त्रता के काल में अलग हुए।

इससे पिछले साल भी संघ और तिंरगे को लेकर विवाद हुआ था। तब संघ से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने 26 जनवरी को सभी मदरसों को तिरंगा फहराने की नसीहतच लिए कहा था। हालांकि, दारुल उलूम ने उसपर अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी।

वहीं मदरसों पर तिरंगा फहराने की बात के समर्थन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजाल ने कहा था कि उनका संगठन पिछले पांच बरसों से 26 जनवरी और 15 अगस्त को मदरसों पर तिरंगा फहराने की अपील करता रहा है। उन्होंने कहा था कि उस साल केंद्र में अपनी (बीजेपी) सरकार होने की वजह से उस कार्यक्रम को बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा था।

सैनिकों के खाने पर सालाना 1600 करोड़ खर्च, अर्धसैनिक जवान को रोज 95 रुपये राशन भत्‍ता

देश में अर्धसैनिक बलों में काम करने वाले एक जवान को प्रतिदिन खाने के लिए केवल 95 रुपये का भत्‍ता मिलता है। यह हाल तो तब है जब नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एनडीए सरकार ने मई 2014 में डेली राशन अलाउंस को बढ़ाया था। उस समय सरकार ने अर्धसैनिक बलों के जवानों के प्रतिदिन के राशन भत्‍ते में 12 प्रतिशत की वृद्धि की थी। इससे राशन भत्‍ता 85.96 रुपये से बढ़कर 95.52 रुपये हो गया था। द क्विंट ने गृह मंत्रालय से मिले दस्‍तावेजों के आधार पर यह रिपोर्ट दी है। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआरपीएफ, दिल्‍ली पुलिस आती है।
सातवें वेतन आयोग के बाद भी राशन भत्‍ते में बदलाव नहीं किया गया। आयोग की रिपोर्ट में इस बारे में कहा गया कि इस भत्‍ते को लेकर यथास्थिति बनाए रखी जाए। यह भत्‍ता रक्षा और गृह मंत्रालय की ओर से बढ़ाया जाएगा। वेतन आयोग ने राशन भत्‍ते को टैक्‍स के दायरे से बाहर करने की मांग भी ठुकरा दी थी। रिपोर्ट के अनुसार साल 2011 में रक्षा मंत्रालय ने चिकन और मटन के राशन की मात्रा 110 ग्राम से 180 ग्राम प्रति व्‍यक्ति कर दी थी। वहीं 12 हजार फीट से ऊपर जैसे कि सियाचीन और का‍रगिल जैसी जगहों पर तैनात जवानों के लिए स्‍पेशल राशन होता है। इसमें ब्रांडेड गेंहू का आटा, रेडी टू ईट सब्जियां और ब्रांडेड नमक शामिल होता है। रक्षा मंत्रालय सैनिेकों के लिए ताजा खाने पर सालाना 1600 करोड़ रुपये खर्च करता है।
अगर अमेरिकी सैनिकों को मिलने वाले राशन भत्‍ते से तुलना की जाए तो भारतीय सेना के जवान काफी पीछे हैं। अमेरिकी जवानों को राशन भत्‍ते के रूप में हर महीने 200 डॉलर से ज्‍यादा मिलते हैं। साथ ही आर्मी पोस्‍ट पर रहने वाले जवानों को सैन्‍य क्‍वार्टर और फ्री खाना मिलता है।

 

आरबीआई ने संसदीय समिति को बताया, मोदी सरकार ने दी थी नोटबंदी लागू करने की ‘सलाह’

रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की अगले दिन ही इस सलाह पर विचार करने के लिए बैठक हुई। ‘विचार विमर्श’ के बाद केंद्र सरकार से यह सिफारिश करने का फैसला किया गया कि 500 और 1,000 के नोटों को चलन से बाहर कर दिया जाए। इस सिफारिश के कुछ घंटे बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में नोटबंदी का फैसला किया गया। कुछ मंत्री अभी तक यह कहते रहे हैं कि सरकार ने नोटबंदी का फैसला रिजर्व बैंक की सिफारिश पर किया था। समिति को भेजे नोट में रिजर्व बैंक ने कहा कि पिछले कुछ साल से वह नई श्रृंखला के बैंक नोटों में सुधरे हुए सुरक्षा फीचर्स जोड़ने पर काम कर रहा है, जिससे इनकी नकल न की जा सके। वहीं दूसरी ओर सरकार कालेधन तथा आतंकवाद से निपटने के लिए कदम उठा रही है।
रिजर्व बैंक ने कहा कि खुफिया और प्रवर्तन एजेंसियों के पास इस तरह की रिपोर्ट थी कि ऊंचे मूल्य के नोटों की उपलब्धता की वजह से कालाधन धारकों तथा जाली नोटों का धंधा करने वालों काम आसान हो रहा है। ऊंचे मूल्य के नोटों का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए भी किया जा रहा है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि भारत सरकार और रिजर्व बैंक को लगा कि नई श्रृंखला के नोटों को पेश करने से इन तीनों समस्याओं से निपटने का अवसर मिलेगा। नोट में कहा गया है कि हालांकि शुरुआत में इस पर कोई पुख्ता फैसला नहीं लिया गया कि नोटबंदी की जाए या नहीं, लेकिन नई श्रृंखला के नोट पेश करने की तैयारियां चलती रहीं।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि 7 अक्टूबर, 2014 को उसने सरकार को सुझाव दिया था कि मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए तथा भुगतान करने और करेंसी लॉजिस्टिक्स के प्रबंधन के लिए 5,000 और 10,000 का नोट शुरू करने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सरकार 18 मई, 2016 को 2,000 का नोट पेश करने पर सहमत हुई थी। रिजर्व बैंक ने कहा कि उसने सरकार से 27 मई, 2016 को नई श्रृंखला के बैंक नोट नए डिजाइन, आकार, रंग व थीम के साथ पेश करने की सिफारिश की। इसमें 2,000 का नया नोट भी शामिल है।
सरकार ने इस पर 7 जून, 2016 को अंतिम मंजूरी दे दी। इसी के अनुरूप नोट छापने वाली प्रेस को नई श्रृंखला के नोटों का शुरुआती उत्पादन करने को कहा गया। नोट में कहा गया है कि चूंकि नए डिजाइन और नए मूल्य के नोटों के प्रति लोगों का आकषर्ण होता, ऐसे में यह फैसला किया गया कि 2,000 के नोट पर्याप्त संख्या में छापे जाएं जिससे इन्हें देशभर में एक साथ उपलब्ध कराया जा सके। केंद्रीय बैंक ने कहा कि सरकार ने अपनी 7 नवंबर की सलाह में इस बात का उल्लेख किया कि नकदी से कालेधन में मदद मिलती है क्योंकि नकद लेनदेन का ऑडिट नहीं हो पाता।
संसदीय समिति से नोट में कहा गया है कि कालेधन की समाप्ति से छद्म अर्थव्यवस्था समाप्त होगी जो भारत के वृद्धि परिदृश्य की दृष्टि से सकारात्मक होगी। इसमें यह भी कहा गया है कि पिछले पांच साल के दौरान 500 और 1,000 के नोटों का चलन इन नोटों की नकल के साथ बढ़ा है। आतंकवाद तथा ड्रग्स के लिए जाली भारतीय करेंसी नोट (एफआईसीएन) के इस्तेमाल की व्यापक खबरें हैं। ये नोट पड़ोसी देश में बन रहे हैं जो कि देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं।
ऐसे में सरकार ने 500 और 1,000 के नोटों को चलन से हटाने की सिफारिश की। नोटबंदी की सिफारिश के लिए रिजर्व बैंक के बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि यह प्रस्ताव इससे अच्छे समय नहीं आ सकता था, जबकि साथ ही नई श्रृंखला के नोट आ रहे हैं। इससे मौजूदा नोटों को हटाया जा सकता है और नए डिजाइन के अधिक सुरक्षा खूबियों वाले नोटों को पेश किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि रिजर्व बैंक के कार्यालयों में 2,000 का नोट आ रहे हैं और इन्हें देशभर में करेंसी चेस्ट में भेजा जा रहा हैं। मूल्य के हिसाब से इनके जरिये मांग के एक महत्वपूर्ण हिस्से को पूरा किया जा सकता है।

 

वीडियो वायरल होने के बाद BSF जवान ने कहा- मेरा तबादला कर प्‍लंबर का काम दिया गया

बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के जवान तेज बहादुर यादव के वीडियो ने सोशल मीडिया के साथ-साथ सेना में भी भूचाल ला दिया। एक तरफ सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं वहीं तेज बहादुर ने कहा है कि वीडियो के सबके सामने आने के बाद उसका तबादला करके प्लंबर का काम दे दिया गया है। इतना ही नहीं तेज बहादुर का दावा है कि उसके सीनियर ने वीडियो को हटाने का दवाब भी बनाया था। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, तेज बहादुर ने कहा कि अब बीएसएफ कैंप से उसका ट्रांसफर हेडक्वाटर में कर दिया गया है। उसने यह भी कहा कि उसे प्लंबर का काम करने के लिए दिया गया है। उसने कमांडेंट पर वीडियो को हटाने के लिए दबाव बनाने का आरोप भी लगाया।
खबर के मुताबिक तेज बहादुर ने कहा, ‘मुझे नौकरी जाने का डर नहीं है, मैंने सिर्फ असलियत दिखाई है। अगर जवानों को मेरी वजह से फायदा होता है तो मैं लड़ने को तैयार हूं।’
इससे पहले बीएसफ ने तेज बहादुर द्वारा लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। अधिकारियों की तरफ से तेज बहादुर को शराबी तक कहा गया था। साथ ही कहा गया था कि उसने कई बार पहले भी अनुशासनहीनता का काम किया है। एक अधिकारी ने बताया था कि यादव को कम से कम चार बार बड़ी सजाएं दी जा चुकी है। इनमें शराब पीकर गाली-गलौच करना, अभद्र भाषा का इस्‍तेमाल, गैरमौजूद रहना और आधिकारिक आदेश से विपरीत काम करने के आरोप शामिल हैं। आखिरी अपराध के लिए उन्‍हें बीएसएफ कोर्ट ने सात दिन की कड़ी जेल की सजा दी थी।

 

अमेरिकी अखबार ने नोटबंदी को बताया ‘भयावह’, कहा- कठिनाई भरे दौर में भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था

न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा है कि नोटबंदी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था भारी कठिनाई झेल रहा है और नकदी की कमी के कारण भारतीयों के जीवन में परेशानियां बढ़ रही हैं। समाचार पत्र ने सोमवार को अपने संपादकीय लेख में कहा कि भारत में 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों के विमुद्रीकरण की भयावह योजना बनाई गई और उसे अंजाम दिया गया और इस बात के शायद ही सबूत हैं कि इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगी। टाइम्स ने कहा, “भारत सरकार द्वारा अचानक सबसे ज्यादा चलन में रही मुद्रा को विमुद्रित करने के दो महीने के बाद अर्थव्यवस्था कठिनाई भरे दौर में है।” लेख के मुताबिक, “विनिर्माण क्षेत्र में मंदी है, रियल एस्टेट तथा कारों की बिक्री गिर गई है, किसान, दुकानदार तथा अन्य भारतीयों के मुताबिक नकदी की कमी ने जीवन को बेहद कठिन बना दिया है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते आठ नवंबर को 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था। देश की पूरी करेंसी में इन दोनों नोटों का हिस्सा 86 फीसदी था। मोदी ने कहा था कि ऐसा करना भ्रष्टाचार, कालेधन तथा आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए आवश्यक था।
समाचार पत्र ने कहा, “नोटबंदी के कदम की योजना भयावह तरीके से बनाई गई और फिर उसका क्रियान्वयन किया गया। भारतवासी बैंकों के बाहर पैसे जमा करने व निकालने के लिए घंटों कतार में खड़े रहे।” लेख में कहा गया, “नए नोटों की आपूर्ति कम है, क्योंकि सरकार ने पर्याप्त मात्रा में पहले इन नोटों की छपाई नहीं की थी। छोटे कस्बों तथा ग्रामीण इलाकों में नकदी की समस्या विकराल है।”
समाचार पत्र ने कहा, “भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि चार नवंबर को चलन में 17,700 अरब रुपये थे, जबकि 23 दिसंबर को यह आंकड़ा इसका आधा 9200 अरब रुपये हो गया।” लेख में कहा गया, “इस बात के बेहद कम सबूत हैं कि नोटबंदी के कदम से भ्रष्टाचार से निपटने में सहायता मिली।”

 

सपा के दंगल में पिता-पुत्र में नहीं हुई सुलह, अखिलेश गुट ने 1.5 लाख पन्नों का दस्तावेज चुनाव आयोग को सौंपा

समाजवादी पार्टी में जारी कलह और सुलह की कोशिशों के बीच अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। शनिवार को भी दोनों गुटों में बैठकों का दौर चलता रहा। सुलह कराने के मुख्य सूत्रधार आजम खान को माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष पद पर दोनों गुटों में पेंच फंसा हुआ है। इसबीच अखिलेश यादव गुट की तरफ से रामगोपाल यादव ने शनिवार को चुनाव आयोग में 1.5 लाख पन्नों का दस्तावेज सौंपा। आयोग ने 9 जनवरी तक दोनों गुटों से अपने समर्थक विधायकों, विधान पार्षदों और सांसदों समेत अन्य नेताओं का हस्ताक्षरयुक्त हलफनामा सौंपने को कहा है। इसी के मद्देनजर रामगोपाल यादव ने सात प्रतियों में इन दस्तावेजों को आयोग के कार्यालय में जमा कराया है। दस्तावेज सौंपने के बाद उन्होंने दावा किया कि 1.5 लाख पन्नों के इन कागजातों में 200 से अधिक विधायकों, 68 विधान परिषद सदस्यों में से 56 विधान परिषद सदस्यों, 24 सांसदों में से 15 सांसदों तथा 5000 प्रतिनिधियों में से अखिलेश समर्थक करीब 4600 प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।

इधर, समाजवादी पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव के साथ दिल्ली रवाना हो गए हैं। माना जा रहा है कि सोमवार को मुलायम सिंह चुनाव आयोग जाकर समर्थक विधायकों, सांसदों और प्रतिनिधियों के दस्तावेज सौंपेंगे और मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुलाकात कर सकते हैं। इसके लिए उन्होंने आयोग को पत्र लिखकर समय मांगा है।

उधर, दस्तावेज सौंपने के बाद अखिलेश गुट के रामगोपाल यादव ने दावा किया कि 90 फीसदी जनप्रतिनिधि एवं प्रतिनिधि अखिलेश यादव के साथ हैं। इसलिए अखिलेश गुट ही असली समाजवादी पार्टी है। उन्होंने इसी के तहत साइकिल निशान पर दावा ठोका है और मांग की कि उनके गुट को साइकिल दिया जाना चाहिए। रामगोपाल ने दावा किया कि आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों का एक सेट मुलायम सिंह को उनके दिल्ली निवास पर भी भेजा गया है लेकिन उन्होंने पावती देने से इनकार कर दिया। अब उसे उनके लखनऊ के पते पर भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने दस्तावेज सौंपने की समय सीमा 9 जनवरी तय कर रखी है। 3 जनवरी को समाजवादी पार्टी में विभाजन उस वक्त औपचारिक रूप से सामने आ गया था, जब दोनों पक्ष सपा और उसके निशान पर दावा करते हुए चुनाव आयोग के पास पहुंचे थे।

 
 

जाने माने अमेरिकी अर्थशास्त्री ने कहा- नोटबंदी से मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेला

जाने माने अमेरिकी अर्थशास्त्री स्टीव एच हांके ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटबंदी के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत में ‘नकदी पर हमले’ से जैसी की उम्मीद थी, अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेल दिया। मैरीलैंड, बाल्टीमोर की जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी में एपलायड इकोनोमिस्ट हांके ने कहा, ‘नकद राशि के खिलाफ जंग छेड़ने से मोदी ने सरकारी तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था को मंदी के रास्ते पर धकेल दिया। मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद मैं यही सोच रहा था कि ऐसा होगा।’
उन्होंने कहा, ‘नकद राशि के खिलाफ जंग छेड़ने से विनिर्माण क्षेत्र प्रभावित हुआ है। मोदी के फैसले से भारत में अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है।’ हांके ने कहा कि नोटबंदी की वजह से भारत 2017 में आर्थिक वृद्धि के मामले में नेतृत्व के मंच से नीचे खिसक सकता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवंबर को अचानक 500 और 1,000 रुपए के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी। सरकार ने यह कदम कालाधन, नकली नोट और भ्रष्टाचार पर प्रहार करने के लिए उठाया।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के फैसले के बाद कई अन्य अर्थशास्त्रियों ने भी इस फैसले की आलोचना की थी। इसके साथ ही इस फैसले से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर विपक्षी दलों ने भी भाजपा सरकार को निशाना बनाया था। अर्थशास्त्रियों ने कहा था कि इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उनका कहना था कि देश की इकॉनोमी से 85 फीसदी नगदी वापस ले ली गई। साथ ही कहा था कि इस फैसले की वजह से कई उद्योंगों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जिससे देश में मंदी और बेरोजगारी बढ़ेगी।

अखिलेश यादव ने औरंगजेब को भी पीछे छोड़ा : साध्वी निरंजन ज्योति

केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने यूपी के सीएम अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। साध्वी ने संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश अपने पिता मुलायम सिंह यादव को सपा अध्यक्ष पद से हटाकर खुद वहां बैठ गये। ऐसा कर अखिलेश ने औरंगजेब को भी पीछे छोड़ दिया है।
साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि अखिलेश केवल प्रचार माध्यमों और अपने परिवार में लोकप्रिय हैं। उन्होंने अपने परिवार में विघटन करा दिया है। साध्वी ने इसके साथ ही कहा कि सपा परिवार का झगड़ा मुलायम की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। उन्होंने संभावना जताई कि अगले एक दो-दिन में मुलायम और अखिलेश फिर एक हो सकते हैं।
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री ने बसपा मुखिया मायावती पर प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म के नाम पर वोट मांगने को गलत ठहराने के उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले के बावजूद मंगलवार को संवाददाता सम्मेलन में जिस तरह मुस्लिमों के साथ ही जातीय स्तर पर वोट देने का अनुरोध किया उससे उनकी बौखलाहट उजागर होती है। साध्वी ने विश्वास जताया कि उच्चतम न्यायालय मायावती के इस बयान का स्वत: संज्ञान लेकर उन पर कार्रवाई करेगा।
उन्होंने एक ताजा सर्वेक्षण में अखिलेश के सबसे अधिक लोकप्रिय होने और सपा के सबसे अधिक सीट जीतने के आकलन को गलत बताते हुए कहा कि पिछले लोकसभा चुनाव में भी मीडिया भाजपा को कम सीट पर विजयी दिखाता था लेकिन उसे पूर्ण बहुमत मिला। विधानसभा चुनाव में भी भाजपा तमाम आकलनों को झुठलाते हुए पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। साध्वी ने एक सवाल के जबाब में कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में विकास और ध्वस्त कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाएगी। वहीं राम मन्दिर को लेकर पूछ गए सवाल पर उन्होंने कहा कि राम मन्दिर आस्था का मामला है। यह राजनीतिक मुद्दा नहीं है।

सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी: तृणमूल कांंगेस कार्यकर्ताओंं ने सीबीआई कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय की गिरफ्तारी के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं ने आज यहां सीबीआई के राज्य मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। एजेंसी बंदोपाध्याय को मंगलवार देर रात भुवनेश्वर लेकर आयी है। तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल के नेता बंदोपाध्याय को रोज वैली ग्रुप के पोंजी घोटाले के सिलसिले में सीबीआई ने मंगलवार को कोलकाता से गिरफ्तार किया था। एजेंसी उन्हें देर रात ही भुवनेश्वर लेकर आयी। इससे पहले सीबीआई ने तृणमूल के एक अन्य सांसद तापस पॉल को समान आरोपों में गिरफ्तार किया था। वह तीन दिन तक सीबीआई हिरासत में रहे थे। चौथी बार लोकसभा सदस्य चुने गए और पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार में राज्यमंत्री रहे बंदोपाध्याय को कथित रूप से विभिन्न प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं देने और असहयोगी रवैये के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
तृणमूल नेता की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन के लिए रामनगर से विधायक अखिल गिरि के नेतृत्व में एकत्र हुए पार्टी कार्यकर्ताओं ने यहां सीबीआई कार्यालय के बाहर धरना दिया। तृणमूल कांग्रेस की ओेडिशा ईकाई के कई सदस्यों और प्रदेश पार्टी अध्यक्ष आर्य कुमार ज्ञानेन्द्र ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।सीबीआई ने सुदीप बंदोपाध्याय और तापस पॉल को राजनीतिक कारणों से गिरफ्तार किया है। तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश ईकाई 10 जनवरी को भुवनेश्वर में विशाल विरोध प्रदर्शन रैली की योजना बना रही है। प्रस्तावित प्रदर्शन रैली में तृणमूल कांग्रेस के कुछ लोकप्रिय नेताओं को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के दो सदस्यीय शिष्टमंडल ने यहां सीबीआई अधिकारियों से भी भेंट की और बंदोपाध्याय और पाल की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध जताया। यहां सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि सीबीआई अदालत में पेश किए जाने से पहले बंदोपाध्याय को मेडिकल परीक्षण के लिए कैपिटल अस्पताल ले जाया जाएगा। जांच एजेंसी बंदोपाध्याय की हिरासत मांगेगी क्योंकि वह कथित रूप से जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। हालांकि बंदोपाध्याय के वकील राजीव मजुमदार ने कहा कि वह अदालत में जमानत याचिका दायर करेंगे क्योंकि उनके मुव्वकिल अस्वस्थ हैं।
मजुमदार ने यहां सीबीआई कार्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा कि वह अस्वस्थ हैं। वह अदालत में जमानत का आवेदन देंगे। उन्होंने मामले में बंदोपाध्याय की संलिप्तता साबित करने की चुनौती सीबीआई को दी। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई बंदोपाध्याय और पाल दोनों से पूछताछ करने की योजना बना रही है क्योंकि दोनों की गिरफ्तारी 17,000 करोड़ रूपए के घोटाले में संलिप्तता के आरोप में हुई है। रोज वैली ग्रुप पर आरोप है कि उसने राज्य के निवेशकों से 17,000 करोड़ रूपए ठगे हैं। पाल ग्रुप के निदेशकों में से एक हैं जबकि बंदोपाध्याय पर पोंजी फर्म का प्रोमोटर होने का आरोप है।

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम सुंदर लाल पटवा का निधन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में 3 दिन का राजकीय शोक की घोषणा

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो 92 साल के थे। राज्य सरकार ने पटवा के निधन के बाद 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा की।
पटवा दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। पहली बार 20 जनवरी, 1980 से लेकर 17 फरवरी ,1980 तक , जब राज्य में जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी थी। फिर 5 मार्च, 1990 से 15 दिसंबर 1992 तक वो भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के मुखिया रहे।
पटवा की राजनीतिक जीवन 1951 में शुरू हुई थी। पटवा पहले इंदौर राज्य प्रजा मंडल में काम किया फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़े । आपातकाल के दौरान पटवा को मीसा के तहत हिरासत में लिया गया था।  1948 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आंदोलन में भाग लेने के लिए पटवा सात महीने जेल में रहे। पटवा 1997 में छिंदवाड़ा पहला लोकसभा उपचुनाव जीता, लेकिन अगले साल आम चुनाव में वो हार गए। 1999 में, वह होशंगाबाद लोकसभा जीता और 1999 से 2001 तक वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे।
पीएम मोदी ने पटवा के निधन पर शोक जताया। पीएम ने कहा कि वह बहुत ही मेहनती और ईमानदार नेता थे, उनके एमपी सीएम के पद पर रहते हुए किए गए बेहतरीन काम को हमेशा याद किया जाएगा।