राज्य

फर्जी कम्पनियां बनाकर करते थे टैक्स चोरी, आरटीआई के जरिए होगा खुलासा

चंडीगढः लगभग दो वर्ष पूर्व सिरसा शहर में आम लोगों के नाम से फर्जी कम्पनियां बनाकर करोड़ों रूपये का लेनदेन कर टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया था। आईजी स्पेशल टीम ने एक व्यापारी से भावदीन टोलनाका पर 1 करोड़ 10 लाख रूपये जब्त किया थे। लेकिन आज तक इस मामले में क्या कार्रवाई हुई, इसके बारे में कोई भी खबर सामने नहीं आई। इस मामले में शिवकुमार जिंदगर ने आयकर विभाग से इस मामले की आरटीआई के तहत जानकारी मांगी है। आरटीआई में उन्होंने पूछा है कि भावदीन टोलनाका पर जब्त किए गए एक करोड 10 लाख रूपये के मामले में आयकर विभाग व पुलिस विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की गई। इस फर्जीवाड़े से जुड़े सरगनाओं अपने बचाव के लिए पहले से ही रास्ते ढूंढ रखे हैं, मगर आरटीआई लगाने के बाद इस मामले की सच्चाई बाहर आ ही जाएगी। शिवकुमार ने आयकर विभाग से आरटीआई के माध्यम से पूछा है कि मई 2018 में हुए खुलासे के बाद पुलिस व प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया गया है? किस विभाग ने क्या कार्रवाई की है? किस अधिकारी द्वारा मामले की जांच की जा रही है? टोल प्लाजा पर जब्त किया गया पैसा किस व्यक्ति अथवा फर्म का है? इन लोगों का फर्जी फर्मों से क्या कनेक्शन है? जांच में किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आई है। हालांकि मामला आयकर विभाग में पिछले दो साल से विचाराधीन है, लेकिन आरटीआई लगन के बाद विभाग को मामले की पूरी जानकारी देनी ही होगी। शिवकुमार ने बताया कि उन्हें निर्धारित समयावधि में सूचना नहीं दी गई है, इसलिए अब वे फर्स्ट अपीलीय अधिकारी के समक्ष अपील करेंगे, ताकि सच्चाई का पता लगाया जा सके। उधर, पुलिस द्वारा जब पड़ताल की गई तो मामले में महेश बंसल, प्रमोद बंसल और रविंद्र नामक व्यक्ति की आरोपी बनाकर जांच शुरू की। महेश बंसल पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया। रविंद्र को जब पुलिस ने रिमांड पर लिया तो पूर्व पार्षद कृष्ण सिंगला के पुत्र अनुपम सिंगला का नाम भी सामने आया। साथ ही दर्जनों फर्जी फर्मों का खेल भी सामने आया, जिसके बाद अनुपम सिंगला के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया। पूरा मामला है क्या? दलअसल, सन् 2018 में भावदीन टोल नाका पर आईजी पुलिस टीम ने एक कार को छानबीन के लिए रोका। तलाशी के दौरान गाड़ी से एक करोड़ 10 लाख रूपये की रकम बरामद की गई। इतनी बड़ी रकम नकद बरामद होने के बाद मामला उछला। आईजी पुलिस टीम ने मामले की जांच-पड़ताल शुरू की तो उन्होंने पाया कि कुछ व्यापारियों ने आम लोगों दस्तावेज लेकर उनके नाम से फर्जी कम्पनियां बनाई और करोड़ों रूपये के लेनदेन के टैक्स की चोरी की जा रही थी। बरामद कैश को आयकर विभाग के हवाले कर दिया गया। आयकर विभाग ने अपने स्तर पर जांच शुरू की, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी मामला जस का तस है।

कानपुर केसः गैंगस्टर विकास दूबे को पकड़ने में पुलिस क्यों रही नाकाम

 लखनऊः गैंगस्टर विकास दूबे को पकड़ने गई पुलिस टीम और अधिकारियों की भारी भूल का खामियाजा आठ पुलिसकर्मियों ने अपनी जान देकर चुकाया। पुलिस को पता ही नहीं चल पाया कि विकास दूबे किस स्तर का अपराधी है। पुलिस दल ने सूचना के आधार पर अचानक छापा मारने का योजना बनाई, लेकिन भीतरघात की वजह से ये सूचना विकास दूबे तक पहुंच गई और उसने इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे डाला और मौके से फरार हो गया।

हालांकि, चौबेपुर के थानेदार विनय तिवारी की संदिग्ध भूमिका को देखते हुए तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। पुलिस को शक है कि उसने ही दबिश देने की सूचना विनय दुबे तक पहुंचाई, जिसकी वजह से वो सतर्क हो गया और इतना बड़ा कांड करने में कामयाब हो गया। थानेदार विनय तिवारी को स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

क्यो रहीं नाकाम पुलिस
पुलिस टीम छापा मारने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। इसके पीछे कई वजहें हैं। एक पुलिस का खुफिया तंत्र पूरी तरह से नाकाम रहा, जिससे पुलिसवालों को ये पता चलता की जहां छापेमारी करने जा रहे हैं, वहां कितने लोग मौजूद हैं, उनके पास कितना असला-बारूद हैं। पुलिस टीम का रवैया ऐसा लगा जैसे वो किसी आम अपराधी को पकड़ने जा रहे हैं। 

दूसरा, कानपुर थाने में कुछ अधिकारी नए आए हैं और जो पहले से हैं वह पहले कभी कानपुर में तैनात नहीं रहे हैं, जिसके चलते उन्हें विकास दूबे के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। जो अधिकारी इस क्षेत्र को जानते थे, उनका पहले ही तबादला हो चुका था।

तीसरा, अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को हल्के में लिया, जिसका खामियाजा पूर पुलिस डिपार्टमेंट को उठाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक दबिश देने गई पुलिस टीम के पास अपराधी को पकड़ने की कोई योजना नहीं थी। किसी पुलिसवाले के शरीर पर बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं थी और न ही किसी ने हेलमेंट पहना था। पुलिस की कार्यशैली को देखकर ऐसा लगा जैसे कि कानपुर पुलिस का पहला कोई बड़ा ऑपरेशन था, जिसमें वो पूरी तरह से फेल हो गई। अगर ऑपरेशन के समय पुलिस थोड़ा भी सतर्क रहती तो शायद इतना बड़ा हादसा होने से बच जाता।

चौथा, पुलिस टीम का रास्ता रोकने के लिए रास्ते में जेसीबी खड़ी थी, उसपर भी पुलिस टीम ने कोई ध्यान नहीं दिया। एसओपी के तहत पुलिस को अलग-अलग टीमें बनाकर अपराधी को चारों तरफ से घेरना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। घटनास्थल पर पहुंचते ही जब चारों तरफ से गोलियां चलना शुरू हो गईं, तब पुलिस टीम मोर्चा संभालना तो दूर अपनी खुद की रक्षा भी नहीं कर पाई। जिसका नतीजा ये रहा कि पुलिस टीम के सीओ, एसओ समेत आठ पुलिसकर्मी बेमौत मारे गये।

हालांकि पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया गया है। यूपी पुलिस ने शनिवार को राज्यभर में 200 से अधिक पुलिसकर्मियों की 20 टीमों का गठन किया, जो खूंखार गैंगस्टर विकास दूबे को गिरफ्तार करने प्रयास में लगी हैं। शनिवार को पूछताछ के लिए 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। आशंका जताई जा रही है कि विकास दूबे नेपाल भागने की फिराक में है। इसलिए नेपाल बार्डर पर लगे थानों में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मीटिंग की। उन्होंने कहा कि राज्य के भीतर आपराधिक गतिविधियों से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। राज्य में इस तरह से 8 पुलिसकर्मियों की हत्या से कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है। जब राज्य की पुलिस ही सुरक्षित नही ंतो आम नागरिक का क्या होगा। अब ये मामला यूपी सरकार के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। इसे ध्यान में रखते हुए पुलिस टीमें चैबीसों घंटे काम कर रही हैं
 

तेजस्वी यादव की माफी पर बिहार में राजनीतिक हलचल शुरू

 
पटनाः विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने लालू-राबड़ी राज के 15 साल के लिए माफी मांगी है, जिसे राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। उनके इस ताजा बयान से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। सबके मन में एक ही विचार आ रहा है कि आखिर क्या वजह है जो, तेजस्वी यादव राबड़ी और लालू यादव की सरकार को गलत ठहरा रहे है।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘ठीक है 15 साल हम लोग सत्ता में रहे, पर हम सरकार में नहीं थे, हम छोटे थे। फिर भी हमारी सरकार रही। इससे कोई इनकार नहीं कर सकता कि लालू प्रसाद यादव के राज में सामाजिक न्याय नहीं हुआ। 15 साल में हमसे कोई भूल हुई हो, तो हम उसके लिए माफी मांग रहे हैं।’’

छवि सुधारने की कोशिश
बिहार में इस समय तीन मुख्य राजनीतिक पार्टियां हैं, जेडीयू, बीजेपी और आरजेडी। राज्य में जेडीयू और बीजेपी का गठबंधन है। चुनाव में दोनों पार्टियों का एक ही मुद्दा रहता है कि लालू-राबड़ी जब सत्ता में थे, तब बिहार में गुंडाराज था और बिहार में उनके 15 साल के कार्यकाल में कोई विकास नहीं हुआ। अब बिहार में चुनाव सर पर हैं। ऐसे समय में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने फैसला किया है कि अपने विरोधी दलों को फिर से ये मुद्दा भुनाने नहीं देंगे। इसी के चलते उन्होंने सार्वजनिक मंच पर बिहार की जनता से माफी मांगकर अपनी पार्टी की छवि सुधारने की एक छोटी सी कोशिश की है।

तेजस्वी का नया पासा 
इससे पहले, तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेजप्रताप यादव के ससुर चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय और तेजप्रताप यादव की तलाक की खबरों के बीच तेजस्वी यादव ने एक नया पासा फैंका है। तेजस्वी ने गुरुवार को चंद्रिका राय के बड़े भाई विधान चंद्र राय की बेटी करिश्मा राय को राजद की सदस्यता दी है। करिश्मा पेशे से डॉक्टर हैं और ऐश्वर्या की चचेरी बहन हैं।

कम्युनिस्ट नेता पर अंधाधुंध फायरिंग, हालत नाजुक

 पटना:   बिहार में एक बड़ी वारदात हुई। पूर्वी चंपारण जिले के लखौरा थाना क्षेत्र में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेता बिंदेश्वरी गिरि किसी बारात से घर लौट रहे थे। अचानक बाइक पर सवार अपराधियों ने उनका रास्ता रोका और उनपर ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अकस्मात हुई इस घटना से उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला और वह इस फायरिंग में गंभीर रूप से जख्मी हो गए। उन्हें तुरंत इलाज के लिए मोतिहारी के एक निजी अस्पताल ले जाया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीपीआई नेता बिंदेश्वरी गिरि एक बारात से अपने एक साथी के साथ बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक घर के पास ही उनपर अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई। महत्त्वपूर्ण बात यह रही कि अपराधियों का निशाना केवल सीपीआई नेता पर ही था। वारदात के समय बाइक चला रहे उनके साथी को खरोंच तक भी नहीं आई। अपराधी वारदात के बाद घटनास्थल से फरार हो गए।
 वारदात की सूचना मिलते ही लखौरा थानाध्यक्ष पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस संबंधित क्षेत्र की नाकेबंदी कर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। हालांकि, पुलिस के हाथ अभी तक कुछ नहीं लगा है। पुलिस की दावा है कि जल्द ही मुजरिम उनकी गिरफ्त में होगा।

 फिलहाल वारदात किस कारण से हुई यह अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है। जानकारी के मुताबिक सीपीआई नेता बिंदेश्वरी गिरि पर हत्या का एक मुकदमा भी चल रहा है। पुलिस इस वारदात को रंजिश से जोड़कर केस की छानबीन कर रही है, साथ ही अन्य मामलों को भी ध्यान में रख रही है

बिहार की राजनीति में यशवंत सिन्हा ने ठोेकी ताल, तीसरे मोर्चे का किया ऐलान

पटनाः बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वेटेरन लीडर यशवंत सिन्हा ने फिर से बिहार की राजनीति में कदम रखा हैं। उन्होंने होटल पाटलिपुत्र एक्सोटिका, एक्जीबिशन रोड, पटना में मीडिया से मुखातिब हुए। यशवंत सिन्हा ने शनिवार को पटना में ‘बदलो बिहार, बेहतर बिहार बनाओ’ नाम के अभियान की शुरुआत की।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री सिन्हा ने साफ किया कि आगामी चुनाव में उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी, उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जरूर लड़ेगी, लेकिन वह खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे या नहीं, इसका फैसला मौका आने पर करेंगे। सिन्हा के कार्यक्रम में कई पूर्व सांसद जैसे देवेंद्र यादव, अरूण कुमार और नरेंद्र सिंह उपस्थित थे। उन्होंने साफ किया कि उनके साथ आने के लिए कोई भी स्वतंत्र है लेकिन अगर कोई शर्त के साथ आएगा तो उस पर विचार करना पड़ेगा।

उन्होंने एक ट्वीट कर कहा, ‘‘मीडिया से बातचीत आज बहुत अच्छी रही। बेहतर बिहार एक आंदोलन है जिसे हमें आगे लेकर जाना है। मैं आपका समर्थन और सहयोग चाहता हूं। बिहार को बेहतर बिहार बनाने के लिए तुच्छ विचारों से ऊपर उठना होगा।’’

उन्होंने कहा कि अपने जीवन में कई बार बड़े फैसले लिए, कुछ फैसले तैयारी के साथ लिए गए हैं तो कुछ अंधेरे में कूदने की तरह रहे हैं। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यशवंत सिन्हा ने नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले पंद्रह सालों में नीतीश कुमार ने कोई काम नहीं किया, जिसका प्रमाण हैं मानव सूचकांक। उन्होंने कहा कि इस सूचकांक में बिहार पिछले कई सालों से निचले पायदान पर ही है। 

सिन्हा ने कहा कि वर्चुअल रैली या डिजिटल कैंपेन बिहार जैसे गरीब राज्य में सब दलों के लिए संभव नहीं है। इसका फायदा कुछ दलों को होगा क्योंकि ये यथार्थ से परे हैं। उन्होंने कहा कि अगर डिजिटल माध्यम से चुनाव प्रचार कराने का आदेश दिया जाएगा तो वह इसका विरोध करेंगे। उन्होंने बिहार में चुनाव कराने पर पूछे जाने कहा कि चुनाव आयोग को विचार करना चाहिए कि यह समय उपयुक्त हैं या नहीं लेकिन मेरा मानना है कि चुनाव को लंबा नहीं खींचा जाना चाहिए। चुनाव आयोग बिहार में समय से ही चुनाव करवाये।

महागठबंधन से ‘हम’ पार्टी के अलग होने की अटकलें तेज, हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी 26 जून को पार्टी बैठक कर आगे की रणनीति करेंगे तय

पटनाः महागठबंधन से ‘हम’ पार्टी के अलग होने की अटकलें तेज हो गई है। ‘हम’ सुप्रीमो जीतन राम मांझी 26 जून को पार्टी के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे। राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं की मानें तो मांझी ने जदयू की नैया पर सवार होने का मन बना लिया है। जदयू भी ऐन चुनाव के पहले दलित नेता को पार्टी में शामिल कर अपनी स्थिति को मजबूत करना चाह रही है।

महागठबंधन में शामिल हम नेता पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ‘रालोसपा’ तथा ‘वीआईपी’ पार्टी के नेताओं के साथ बैठक कर राजद के सामने समन्यव समिति बनाने का प्रस्ताव रखा। राजद की बेरुखी से नाराज मांझी ने कांग्रेस के साथ राजद से अलग महागठबंधन का प्रयास किया। जिसे कांग्रेस, रालोसपा तथा वीआईपी ने नहीं माना। जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रेस वार्ता कर दस दिनों के अंदर समन्यव समिति के गठन की मांग की तथा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 24 जून के बाद पार्टी अपने विकल्पों पर विचार करेंगी।

‘हम’ सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने महागठबंधन के सबसे बड़े दल राजद पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस काल में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को जनता के बीच आकर समस्याओं को देखना चाहिए। वहीं कई मौकों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कामों की सराहना भी की है।

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने सोमवार को जहानाबाद में मीडिया से कहा कि,  हम लोगो को भी तैयारी करने का समय चाहिए। 26 जून को बैठक में जो भी फैसला लिया जाएगा, उसी के हिसाब से आगे की रणनीति बनाई जाएगी। वैसे राजनीति में कोई परमानेंट दुश्मन नहीं होता है।

मांझी के बयान के बाद रालोसपा के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा कि समय की मांग है कि हम सब लोग बैठकर ऑल ईज वेल कर लें। वहीं इसको लेकर जदयू उत्साहित हैं, भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि मांझी जी बड़ा नाम है, उनकी घर वापसी का स्वागत करेंगे।

MLC टिकट को लेकर पटना में राबड़ी आवास के बाहर राजद कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

पटनाः बिहार में विधान परिषद चुनाव में राजद के उम्मीद्वारों का ऐलान अभी पार्टी ने नहीं किया है। पार्टी में बाहरी लोगों को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा हो रही है। जिससे पार्टी कार्यकर्ता अपने नेताओं को उम्मीद्वार बनाए जाने के लिए राबड़ी आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने के लिए पहुंच गए। कार्यकर्ताओं ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ नारेबाजी की। चुनावी साल में पार्टी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा राजद को भारी पड़ सकती है।

बिहार विधान परिषद के 9 सीटों पर चुनाव कराया जाना है। विधानसभा में सदस्यों के गणित में राजद 3 सीटो पर जीत हासिल कर सकती है। इन्हीं तीन सीटों की दावेदारी राजद नेता कर रहे हैं। इसके लिए लामबंदी हो रही है, तो वहीं पार्टी कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।.


 राघोपुर के सैकड़ों कार्यकर्ता वरीष्ठ नेता भोला राय को विधान परिषद उम्मीदवार बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए भोला राय ने रविवार को हाजीपुर में बैठक कर अपनी दावेदारी पेश की। वहीं सोमवार को सैकड़ों कार्यकर्ता पटना में राबड़ी आवास पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने भोला राय के समर्थन में नारेबाजी की। वहीं पार्टी के पुराने तथा वफादार नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगाया।
 
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव वर्तमान में राघोपुर से विधानसभा सदस्य हैं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा राबड़ी देवी भी राघोपुर से विधानसभा सदस्य रह चुके हैं।
   
वहीं राजद के तीन उम्मीदवारों के नामों को लेकर हो रही चर्चाओं की मानें तो प्रोफेसर रामवली चंद्रवंशी, मोहम्मद फारूक, सुनील सिंह तथा डा. पुनीत सिंह के नाम सामने आ रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएम को बाहर निकलकर गरीबों से मिलना चाहिए राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर वार जारी

पटनाः बिहार में मानसून आगमन से जहां मौसमी पारा घट गया है वहीं राजनीतिक दलों के बीच पोस्टर वार का मीटर बढ़ता ही जा रहा है। जदयू समर्थकों के पोस्टर लगाए जाने के बाद अब राजद ने फिर पोस्टर जारी कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। पोस्टरों की लड़ाई में वार पलटवार भी हो रहा है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कोरोना में व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा। तेजस्वी यादव ने कहा कि सीएम को बाहर निकलकर गरीबों से मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री जी 90 दिनों से गायब क्यों हैं। कुछ ऐसा ही पोस्टर में भी लिखा है, ‘‘पूछ रहा सारा बिहार कहां छिपे हो नीतीश कुमार’’, जिसे तेजस्वी यादव ने जारी किया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के 100 दिन गायब होने पर 24 जून को गांव-गांव ढोल पीटकर इसकी मुनादी करवायेंगे। राजद कार्यकर्ताओं को पोस्टरों को राज्य की पंचायतों में भी लगाने को कहा गया है।

वहीं पोस्टर वार पर पलटवार करते हुए मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि, ‘‘मानसून की शुरुआत हो चुकी है, राजनीतिक आपदा के शिकार और भ्रष्टाचार के राजकुमार तेजस्वी यादव जी फिर दिल्ली का टिकट न कटा लें।’’
 

जदयू के जबाब पर राजद ने भी वार किया। राजद नेता आलोक कुमार मेहता ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के गरिमा का ख्याल रखना चाहिए। मंत्री पद पर बैठे हुए व्यक्ति को भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए।                       

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि लोग मर रहे हैं और बीजेपी को चुनाव की चिंता पड़ी है। अभी चुनाव छोड़ो और लोगों की मदद करो। हालांकि तेजस्वी यादव खुद राजनीति करते दिखे। उन्होंने वैशाली के बिदुपुर में सोमवार को जनसम्पर्क अभियान चलाया, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की खूब धज्जियां उड़ाई गईं।

 कोरोना वायरस काल में चुनावी जनसम्पर्क अभियान के बीच राज्य में मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।

बिहार विधानसभा चुनावः‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ यानि ‘हम’ के मुखिया जीतन राम माझी ने ली प्रेस वार्ता एक्स सी एम् के बयान से महागठबंधन में बिखराव के संकेत

पटनाः बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है। राजनितिक दल अपने राजनितिक प्रतिद्वंदी से भिड़ने से पहले की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं। इस प्रक्रिया के तहत गठबंधन के घटक दल सीटों को लेकर अपने साथी दलों पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर चुके हैं। इसी कड़ी में महागठबंधन का एक घटक दल ‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का हालिया बयान इसका स्पष्ट उदाहरण है।

‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ यानि ‘हम’ के मुखिया जीतन राम माझी ने प्रेस वार्ता के दौरान अपने साथी घटक दल ‘राष्ट्रीय जनता दल’ के नेता और पूर्व डिप्टी चीफ मिनिस्टर तेजस्वी यादव पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार कोरोना से त्रस्त है और नेता प्रतिपक्ष घर में बैठे हैं, जबकि ऐसे संकट काल में उन्हें घर से बाहर निकलकर प्रदेशवासियों की समस्या का हल ढूँढना चाहिए था। राजनितिक विशेषज्ञ इसे मांझी द्वारा परोक्ष रूप से नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधते हुए अपने साथी घटक दल ‘राष्ट्रीय जनता दल’ पर मानसिक दबाव बनाने के तौर पर देख रहे हैं। 

इसी वर्ष नवम्बर में विधानसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में इस बयान के कई मायने लगाए जा रहे हैं। बिहार की राजनीती में रूचि रखनेवालों का कहना है कि मांझी ने इस बयान के लिए जो जगह चुनी है वो खास मायने रखती है। मैथिली भाषा बोले जाने वाले वोट बैंक के नजरिये से बिहार का एक बड़ा हिस्सा मिथिलांचल के झंझारपुर और दरभंगा के मध्य में ‘हिंदुस्तान अवाम मोर्चा’ यानि ‘हम’ के मुखिया जीतन राम माझी का प्रेस वार्ता करना एक तीर में कई शिकार करने जैसा है। क्योंकि मिथिलांचल की ये वो जगह है जहां मुस्लिम और यादवों की तादाद बनिस्बत अधिक है जो ‘राष्ट्रीय जनता दल’ का बड़ा वोट बैंक है।

पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की ‘हम’ पार्टी महागठबंधन में रहेगी या नहीं रहेगी, इसका फैसला पार्टी के मुखिया मांझी 25 जून के बाद ले सकते हैं। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि वो हमेशा महागठबंधन में coordination committee बनाने की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन कभी भी उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया।

आगे उन्होंने कहा कि शायद अब महागठबंधन के घटक दल इसकी अहमियत को समझेंगे और समन्वय समिति की गठन कर आगे की रणनीति तैयार कर लेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस माह में महागठबंधन के घटक दलों के नेता आपसी सहमति बना लेंगे, जिससे एनडीए को टक्कर देना सरल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि सहमति नहीं बनती है तो ऐसी स्थिति में ‘हम’ का विकल्प खुला रहेगा और फिर ‘हम’ अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए आजाद होगा।

गुजरात में भूकम्प के झटके, केंद्र राजकोट से 122 किमी दूर, तीव्रता 5

गांधी नगर: रविवार शाम गुजरात के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। 8 बजकर 13 मिनट पर भूंकप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र गुजरात के उत्तर-पश्चिमोत्तर राजकोट में था। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NSC) के अनुसार भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.8 मापी गई। अभी तक इस भूकंप से जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।

बिहार में बैठको का दौर शुरू क्या आरक्षण फिर से बनेगा चुनावी मुद्दा?

पटनाः सुप्रीम कोर्ट की आरक्षण को लेकर हालिया टिप्पणी से बिहार के चुनावी मैदान में एक बार फिर आरक्षण को लेकर बहस छिड़ गई है। तमिलनाडु के राजनीतिक दलों द्वारा मेडिकल कॉलेजों में ऑल इण्डिया कोटा में ओबीसी को पचास फीसदी आरक्षण दिए जाने की मांग से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया। जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि आरक्षण का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है। नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण पर की गई टिप्पणी पर नाराजगी जताई है। इसको लेकर बिहार में बैठको का दौर शुरू हो गया है। सभी दलों के अनुसूचित जाति और जनजाति के नेता आरक्षण को लेकर लामबंद होने लगे हैं।

लोजपा सुप्रीमो तथा केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा ‘‘आरक्षण के मुद्दे पर बार बार विवाद उठता रहता है। आरक्षण पूना पैक्ट की उपज है, इस पर सवाल उठाना, पूना पैक्ट को नकारना है। संविधान के मुताबिक अनुसूचित जातिध्जनजाति पहले से ही पिछड़ा है। संविधान में प्रदत्त अधिकारों के तहत न सिर्फ अनुसूचित जाति/जनजाति बल्कि अन्य पिछड़े वर्ग और ऊंची जाति के गरीब लोगों को भी आरक्षण दिया गया है। बार-बार आरक्षण पर उठने वाले विवाद को खत्म करने के लिए आरक्षण संबंधी सभी कानूनों को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल कराने ने के लिए सभी दल मिलकर प्रयास करें।’’
 

रामविलास पासवान के ट्वीट पर रालोसपा अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया ‘‘सत्ताभोग के कारण आरक्षण खत्म करने वालों के साथ खड़े है। आपकी मंशा पाक है तो मंत्री पद से इस्तीफा देकर सर्वदलीय बैठक बुलाइ, हम सब आपके साथ जरूर खड़े होंगे।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ अशोक कुमार के आवास पर शुक्रवार को अनुसूचित जाति/जनजाति के विधायकों की आरक्षण को लेकर बैठक हुई। बैठक में कांग्रेस, जदयू, भाजपा, हम के विधायकों ने बिहार विधानमंडल अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा का गठन किया।

मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राज्यपाल फागू चैहान से मिल कर अनुसूचित जाति/जनजातियों के विभिन्न मांगों संबंधी  ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के मांगों में आरक्षण संबंधी विवादों के स्थायी निराकरण के लिए आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने, बैकलाॅग पदों पर अभियान चलाकर शीघ्र नियुक्ति करने, प्रमोशन में आरक्षण देने, निजी क्षेत्र के नौकरियों में आरक्षण देने के अलावा आरक्षित वर्ग के छात्रों को सामान्य वर्ग का कट ऑफ माक्र्स प्राप्त करने पर उनकी नियुक्ति पहले की तरह सामान्य वर्ग से करना शामिल है।
 

वहीं राजद इस मोर्चे से अलग अपनी राजनीति कर रहा है। प्रदेश कार्यालय में पार्टी के अनुसूचित जाति/जनजाति के विधायकों ने शुक्रवार को बैठक कर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति का गठन किया है। राजद नेता शिवचंद्र राम ने कहा कि आरक्षण समाप्त किया जा रहा है, इसी को लेकर हमलोग चिंतन मनन किए हैं।

जदयू नेता तथा सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि राज्य में पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण नीतीश कुमार ने ही दिया है।

बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव तथा 2019 के लोकसभा चुनाव में भी आरक्षण चुनावी मुद्दा बना था, जिसने नतीजों पर भी अपना असर दिखाया था। एक बार फिर चुनावी आहट के साथ आरक्षण भी चर्चा में है।

चुनावी एजेंडे को लेकर वार पलटवार के बीच सूबे का सदाबहार चुनावी मुद्दा नया जिला बनाने की मांग

पटनाः आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल चुनावी मूड़ में आ चुके हैं। चुनावी एजेंडे को लेकर वार पलटवार के बीच सूबे का सदाबहार चुनावी मुद्दा जिले को दर्जा देने की मांग फिर सामने आ गया है। इसका कई विधानसभा सीटों पर असर दिखाई दे सकता है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को जदयू कार्यकर्ताओं के साथ विडियो कान्फ्रेसिंग से हो रहे संवाद में नवगछिया को जिले का दर्जा दिए जाने की बात कही। इससे क्षेत्र को जिला बनाने की मांग कर रहे अन्य अनुमंडलों में भी उत्साह का संचार हो गया है। चुनाव के ठीक पहले नये जिला, अनुमंडल, प्रखंड का गठन किया जाता है, तो इसका सीधा फायदा जदयू को मिल सकता है। वहीं इस बार भी इसका इस्तेमाल अगर चुनावी झुनझुने के लिए होता है तो जनता जदयू को उल्टा सबक भी सिखा सकती है। 

राज्य में 20 अगस्त, 2001 को राजद शासनकाल में जहानाबाद से अलग अरवल जिला बनाया गया था। उसके बाद बीते 19 सालों में कई अनुमंडल के लोगों ने जिला बनाने की मांग उठाई। बगहा, विक्रमगंज, रोसड़ा, नवगछिया सहित कई अनुमंडलों में जिला बनाने को लेकर जनता ने तीव्र आंदोलन भी किए। रोसड़ा में ऐतिहासिक मानव श्रृंखला बनाई गई। लेकिन लोगों की आकांक्षाएं धरी की धरी रह गईं। सरकार ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

हालांकि, इन सभी मंडलों में रोसड़ा अनुमंडल की कहानी थोड़ी अलग है। वर्ष 1994 में रोसड़ा को जिला बनाने की सरकारी अधिसूचना जारी हो गई थी। लेकिन ऐन वक्त पर इसे रद्द कर दिया गया। तत्कालीन राजद सरकार के दो ताकतवर मंत्रियों की नूराकुश्ती में रोसड़ा जिला कहानी बन कर रह गया।

वर्ष 2011 की सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रोसड़ा में कहा कि अगर राज्य में नया जिला बनता है तो उसमें पहला नाम रोसड़ा का होगा। वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है तो रोसड़ा को जिला बनाया जाएगा। अभी इन दोनों की सरकार राज्य में शासन कर रही है, वहीं जनता आश्वासन के पूरा होने के इंतजार में है।

बगहा में वर्ष 2018 की समीक्षा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिला बनाने की मांग को अफसरों की कमी के आधार पर खारिज कर दिया था। वहीं बगहा को भी जिला बनने वाली सूची में पहले नंबर पर रखने की बात कही।

इधर, जिला प्रशासन के द्वारा प्रखंड, अनुमंडल और जिला बनाने का प्रस्ताव दिया जाता है। ग्रामीण विकास विभाग को मिले प्रस्तावो के अनुसार राज्य में 3 नये प्रमंडल, 11 जिले के अलावा 18 नये अनुमंडल तथा 310 नये प्रखंडों का प्रस्ताव रखा गया है। जिस पर मंत्री मंडलीय कमेटी वर्ष 2015 से ही विचार कर रही है। जिन 11 नये जिलों के गठन का प्रस्ताव है, उनमें बाढ, गढ़पुरा, नवगछिया, हसनपुर, हथुआ, झंझारपुर, डेहरी, रक्सौल, चकिया, बगहा तथा शेरघाटी का नाम बताया जा रहा है।

कोरोना काल में खर्चों को कम करने की कवायद हो रही है। ऐसे में नया जिला बनाने से सरकारी राजस्व पर और ज्यादा बोझ पड़ेगा। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने कार्यकर्ताओं से नवगछिया को जिला का दर्जा दिए जाने की बात कही है, इससे कयास लगाया जा रहा है कि चुनाव पूर्व सरकार के द्वारा जिला बनाने की घोषणा की जा सकती है।

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बिहार में सियासी घमासान अब पोस्टर वार में तब्दील

 पटनाः बिहार में सियासी घमासान अब पोस्टर वार में तब्दील हो गया है। पटना की सड़कों पर लगाए गए होर्डिंग से राजनीतिक दल एक-दूसरे पर बढ़त लेने की जुगत में लगे हैं। सतारूढ़ एनडीए और राजद को लेकर लगाए पोस्टर चुनावी एजेंडे को भी सेट कर रहा है, जिसकी लोगों में चर्चा है।

पटना के विभिन्न चैराहों पर जनता दल यूनाइटेड के समर्थकों द्वारा बुधवार को पोस्टर लगाया गया। पोस्टर में लालू यादव, रावड़ी देवी के अलावा मोहम्मद शहाबुद्दीन और राजबल्लभ यादव का फोटो है। जिसमें राजद के 15 साल के शासनकाल के बारे में बताया गया है। व्यवस्था खराब नहीं थी, बल्कि व्यवस्था थी ही नहीं। लोगों में किस तरह के भय का माहौल था, इसको पोस्टरों में दर्शाया गया है।

गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के 73वे जन्मदिन पर पटना में जदयू समर्थकों ने पोस्टर वार को आगे बढ़ा दिया। पोस्टर में लालू प्रसाद यादव की 73 संपत्तियों को दिखाया गया है।

पोस्टर से लालू यादव पर जारी हमले से राजद के नेता तिलमिला उठे हैं। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि, ‘जदयू के पास अपनी उपलब्धि गिनाने को कुछ नहीं है तो उनके नेता को पोस्टरों में बदनाम कर रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड की राजनीति लालू यादव से शुरू होती है और लालू यादव पर आकर समाप्त हो जाती है।                                                                           

हालांकि पोस्टर वार की शुरुआत नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने खुद पोस्टर लगाकर की थी। तेजस्वी के द्वारा लगाए गए पोस्टर में डीजीपी कार्यालय की प्रवासी मजदूरों को लेकर लिखी गई चिट्ठी के साथ प्रवासी मजदूरों के बदहाल स्थिति, बेरोजगारी, क्वारंटीन सेंटर पर कुव्यवस्थाओ पर सवाल उठाए गए थे।  

राज्य के विधानसभा चुनाव में जनता तक पहुंचने के लिए जहां वर्चुअल रैली हो रही  है, वहीं पोस्टर वार भी साथ-साथ चल रही है।

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राज्यसभा चुनावः गहलोत ने बीजेपी पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगाये, कहा हमारे विधायक एकजुट

जयपुरः राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, इससे बीजेपी को
 झटका लग सकता है। इस चुनाव के लिए कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल को राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार हैं, साथ ही पश्चिमी राजस्थान से दलित युवा चेहरा नीरज दांगी हैं। बीजेपी ने राजेंद्र गहलोत को अपना पहला उम्मीदवार बनाया है जबकि ओमकार सिंह लखावत बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।

सीएम अशोक गहलोत के नेतृत्व वाले निर्दलीय विधायकों के साथ कांग्रेस के विधायकों ने आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर जयपुर के शिव विलास रिजॉर्ट में एक बैठक की। बैठक के बाद गहलोत ने कहा कि बैठक बहुत सफल रही है और सब एकजुट होकर यहां से गए हैं। कल फिर बैठक होगी जिसमें पार्टी के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे भी मौजूद रहेंगे।

उन्होंने कहा, राजस्थान में चुनाव है, यह दो महीने पहले भी आयोजित किया जा सकता था। लेकिन उन्होंने गुजरात और राजस्थान में खरीद फरोख्त पूरी नहीं हुई थी, इसलिए उन्होंने चुनाव कराने में देरी की। अब चुनाव होने वाला है और स्थिति जस की तस है। हमारे विधायक बहुत अच्छी स्थिति में हैं, वे समझ गए। उन्हें खूब लोभ लालच देने की कोशिश की गयी।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ‘बीजेपी कब तक खरीद-फरोख्त की राजनीति करेगी। कांग्रेस आने वाले समय में उन्हें झटका देती है तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी। जनता सब कुछ समझ सकती है। आज की बैठक बहुत सफल रही। हर कोई एकजुट है, कल फिर मिलेंगे’। एक निर्दलीय विधायक महादेव सिंह खंडला ने कहा कि ‘मैं कांग्रेस के साथ हूं। मुझे ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है’।

 
गहलोत ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैं राजस्थान का मुख्यमंत्री हूं, जिसके विधायक बिना लालच के सरकार का साथ देते हैं। इसलिए की राज्य में सरकार स्थिर रहनी चाहिए। राज्य के कुछ विधायकों को प्रलोभन दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘करोड़ों अरबों रुपये भेजे जा रहे हैं। सुन रहे हैं कि नकदी स्थानांतरित हो रही है जयपुर में। कौन भेज रहा है। बांटने के लिए एडवांस देने की बातें हो रही हैं। आप लीजिए दस करोड़ एडवांस ले लीजिए। बाद में दस और देंगे फिर पांच और देंगे। क्या हो रहा है। खुला खेल हो रहा है यहां पर।’

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला राज्यसभा चुनाव पर विचार-विमर्श करने के लिए जयपुर पहुंचे, उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास सम्पूर्ण बहुमत है और उसके विधायक किसी भी लालच में नहीं आएंगे। भाजपा द्वारा कुछ निर्दलीय विधायकों को कथित तौर पर लालच दिये जाने के सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान की वीर भूमि में भाजपा के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे।

उधर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही है। उन्होंने कहा, भले ही कांग्रेस भाजपा पर आरोप लगाये लेकिन उनका खुद का घर सुरक्षित नहीं है, उनको अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है।

राजस्थान से राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव 19 जून को होने तय हैं। इस चुनाव के लिए कांग्रेस के महासचिव के सी वेणुगोपाल को राजस्थान से राज्यसभा के लिए उम्मीदवार हैं, साथ ही पश्चिमी राजस्थान से दलित युवा चेहरा नीरज दांगी हैं। बीजेपी ने राजेंद्र गहलोत को अपना पहला उम्मीदवार बनाया है जबकि ओमकार सिंह लखावत बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं।

बंगाल में ममता का किला ढहाने की तैयारी, शाह आज फूकेंगे चुनावी रैली का बिगुल

 नई दिल्लीः कोरोना वायरस (कोरोना  वायरस ) की वजह से आने वाले चुनावों में प्रचार के नये-नये तरीके दिखाई देने वाले हैं। बिहार (बिहार ) में वर्चुअल रैली (वर्चुअल  रैली ) की सफलता के बाद गृह मंत्री (होम  मिनिस्टर ) अमित शाह (अमित  शाह ) ने अब इस फार्मूले को पश्चिम बंगाल (वेस्ट  बंगाल ) में अपनाने का सोचा है। इसी कड़ी में मंगलवार को पश्चिम बंगाल में वर्चुअल रैली के जरिए अपने कैंपेन (कैंपेन ) की शुरूआत करने जा रहे हैं। बंगाल में जमीन तलाश रही बीजेपी (बीजेपी ) की यह अहम रैली मानी जा रही है। इस रैली के जरिए अमित शाह प्रदेश में आने वाले चुनावों का बिगुल फूंकने जा रहे हैं। बंगाल में चुनाव अगले साल (2021) में है, लेकिन बीजेपी अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती, इसीलिए इस महामारी में भी बीजेपी के कार्यकर्ता पीछे नहीं हटने वाले।

सूत्रों से पता चला है कि अमित शाह अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफार्म से सुबह से ही बीजेपी कार्यकर्ताओं और पश्चिम बंगाल की आम जनता से रूबरू होंगे। इस रैली में बंगाल बीजेपी के सभी बड़े नेताओं के शिरकत करने की संभावना है। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह रैली बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है, इस रैली से प्रदेश में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। अलगे साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर यह पहली रैली है और बीजेपी के सारे नेता इस रैली को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।

जैसे बिहार में भी बीजेपी ने शाह की वर्चुअल रैली को सफल बनाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी थी। बिहार में जिस तरह से लगभग हर बूथ पर एलईडी लगाकर बीजेपी कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता से संवाद किया गया था। ठीक वैसे ही बंगाल में भी वर्चुअल रैली को वास्तविक रूप देने के लिए बीजेपी की तैयारी वैसी ही है। 

पश्चिम बंगाल में कुल 80 हजार बूथ हैं और बूथ कमेटी 65 हजार बूथों में है। अगर सारे बूथों को जोड़ा जाए तो इस रैली से लगभग 5 लाख से ज्यादा लोग सपरिवार इस वर्चुअल रैली में शामिल होंगे। साथ ही वॉट्सऐप (व्हाट्सप्प ), फेसबुक (फेसबुक ) और दूसरे सोशल मीडिया के जरिए संदेश पहुंचाया जाएगा। जहां इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है वहां भी एलईडी स्क्रीन (लेद  स्क्रीन ) के माध्यम से लोग इस रैली से जुडेंगे।

उधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (ममता  बनर्जी ) बीजेपी के इस महामाारी के दौर में प्रचार बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। ममता ने कहा, ‘इतना खर्च बीजेपी ही वहन कर सकती है, हमारी पार्टी नहीं।’ सूत्रों से पता चला है कि बीजेपी को मंुह तोड़ जवाब देने के लिए ममता बनर्जी भी 21 जुलाई को वर्चुअल रैली कर सकती हैं और जिस तरह भाजपा की वर्चुअल रैली के विरोध में राजद ने बिहार में ‘गरीब अधिकार दिवस’ मनाया था, उसी शैली में ममता बनर्जी इसे ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनायेंगीं।

हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी ने बंगाल में जबर्दस्त कामयाबी हासिल की थी। भारतीय जनता पार्टी ने 42 में से 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। ऐसे में बंगाल का राजनीतिक दंगल बेहद दिलचस्प होता दिख रहा है। इस जानलेवा महामारी के दौर में भी बीजेपी ममता सरकार को ढील देने के मूड़ में बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनावों को लेकर सियासी लड़ाई बेहद दिलचस्प होती दिखाई दे रही है।