ज्योतिष

इस वर्ष 6 ग्रहण लगेंगे जो कि खगोलीय घटना में एक दुर्लभ संयोग, पंडित चंद्र कांत मिश्र

2020 में यदि ज्योतिषियों और वैज्ञानिकों की माने तो इस वर्ष 6 ग्रहण लगेंगे, जो कि खगोलीय घटना में एक दुर्लभ संयोग है .वैसे 1 वर्ष में चार ग्रहण होना सामान्य वार्ता है ,जिसमें दो सूर्य और दो चंद्रग्रहण होते हैं .किंतु वर्ष में 6 ग्रहण का होना और दुनिया के लिए अत्यंत कष्टकारी.  घटनाक्रम की ओर संकेत कर रहा है . इस वर्ष में चार चंद्र और दो सूर्य ग्रहण लगने वाले हैं. इनमें तीन ग्रहण तो 5 जून से 5 जुलाई के मध्य लगेंगे जो अत्यंत चिंता का विषय है ऐसा दुर्लभ संयोग वर्ष 2029 में निर्मित होग. 

 * अशुभ है एक साथ दो ग्रहण-  ज्योतिष मतानुसार एक माह विशेष में दो ग्रहण लगना अशुभ माना गया है .बताया जाता है कि महाभारत काल में 18 दिनों में 2 ग्रहण लगे थे ,जिसका प्रभाव सर्वविदित है.

* पुस्तक ज्योतिष विज्ञान में इस बात का उल्लेख किया गया है ""यदैकमासे ग्रहणं   जायते शशि सूर्ययो :!!शस्त्र कोपै: छयंयांतिभूपा: माया परस्परम!!

 अर्थात -जब एक मास में सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों लगे, तो शस्त्र कोष एवं राजा दोनों का छय(नाश) होता युद्ध सहित माया उत्पन्न होती है!!
  पंडित चंद्र कांत मिश्र
 ज्योतिष कर्मकांड ,आंग्ल भाषा एवं संस्कृत संभाषण  विशेषज्ञ संपर्क करें-9009838679

आज का राशिफल


 मेष -
आज दिन भर आपके जीवन में उत्साह बना रहेगा ,किंतु परिवार में किसी बड़े व्यक्ति का स्वास्थ्य दुर्बल हो सकता है . चिंतित रहेंगे किंतु आप का आकर्षक व्यक्तित्व निश्चय ही लोगों का मन मोह लेगा़़ दिन भर मन में एक दुविधा बनी रहेगी किंतु  प्रयास से इस दुविधा से बाहर आ सकेंगे़

 वृषभ- 
आज आपके जीवन में उमंग बना रहेगा ,जीवनसाथी से प्रेम पर्याप्त मिलेगा अपनी बुरी आदतों को त्यागने का समय आ गया है़ लक्ष्य की प्राप्ति हेतु तनिक और परिश्रम की आवश्यकता है विचार सकारात्मक बने रहेंगे.

 मिथुन -
आज आपका कोई निकटतम मित्र आपकी सहायता आर्थिक रूप से कर सकता है़़ जिससे आप अपने व्यवसाय में गति ला सकते हैं ़घर में जीवन साथी के साथ संबंध परिवर्तनशील बने रहेंगे विचारों में पुराना पन त्याग कर कुछ नया करने का समय आया है़

 कर्क -
आज आपके धन लाभ का योग है किंतु आपको थोड़ा धार्मिक होकर दान पुण्य भी करना चाहिए़ इससे आपकी मानसिक शांति बढ़ेगी एवं भविष्य के लिए अच्छी योजनाएं बना सकेंगे

 कन्या-
आज आपके अंदर अति उत्साह रहेगा .जिसके कारण आपसे कुछ अनुचित हो सकता है. आपके पुराने भेद खुल सकेंगे अथवा खुल सकते हैं जिससे घर में पत्नी के साथ आपका तनाव हो सकता है

 मीन-
आज आपको किसी पुरानी बीमारी से मुक्ति मिल सकती है मन में शांति रहेगी परिवार में बड़ों की सेवा करने का अवसर मिलेगा किसी को पैसे आगे उधार ना दें आज धन संचय की प्रवृत्ति बढ़ेगी

सिंह-
आज आपकी कोई पुरानी बीमारी आपको अधिक परेशान कर सकती हैं .धन का मैनेजमेंट दूसरों को करने ना दें कोई चिंतित करने वाला समाचार आपको आज मिल सकता है किंतु आप में धैर्य बना रहेगा

 वृश्चिक-
 निश्चय ही आज आपके स्वप्न में कोई धार्मिक संदेश मिला होगा अथवा मिलेगा उत्साह बना रहेगा धर्म की ओर रुझान बढ़ेगा आकस्मिक धन लाभ के योग भी आज से बनेंगे

धनु -
आपको अत्यंत तीव्र एवं स्पष्ट वादी निर्णय लेने की आवश्यकता है आपका ढीला एवं आलसी आचरण आप को संकट में डाल सकता है परिवार के सदस्य छोटी सी बात बढ़ा चढ़ा सकते हैं जैसे विवाद की स्थिति निर्मित होगी आलस्य त्याग देना आज उचित होगा

 मकर -
आज के दिन स्त्रियों हेतु शुक्र एवं पुरुषों हेतु मंगल सुनिश्चित रहेगा किंतु आज विवाहित शुक्र एवं अविवाहित मंगल परस्पर घुले मिले रहेंगे अति उत्साह में कोई निर्णय न लें स्थान पर बुद्धि का प्रयोग करें

 कुंभ -
आज आपको कोई नया उत्तरदायित्व मिल सकता है किंतु आपको सबसे पहले उनकी बारीकियों को समझना होगा तभी उत्तरदायित्व लें शीघ्रता में निर्णय लेने पर अधिक भार अनुभव कर सकते हैं परिवार के सदस्यों का सहयोग ना के बराबर होगा

 मीन-
आज आपको किसी सेमिनार अथवा गोष्ठी में जाकर कुछ नया सीखने का अवसर मिलेगा जीवनसाथी से तारतम्य अच्छा बना रहेगा किंतु आपकी वाणी से परिवार के जनों को आघात पहुंच सकता है और पड़ोसियों से संबंध बिगड़ सकते हैं ,इसलिए सचेत रहे नए कार्य का आरंभ कर सकते हैं
  चंद्रकांत मिश्र
 ज्योतिष ,हवन ,कर्मकांड हवन, कर्मकांड आंग्ल एवं संस्कृत भाषा संभाषण विशेषज--्9009838679

पढ़े ग्रहण से प्रकृति एवं मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव-

ज्योतिषी गणना अनुसार सूर्य ग्रहण के समय मंगल ग्रह मीन राशि पर से गोचर करते हुए सूर्य बुध चंद्रमा और राहु को देखेंगे, यह शुभ नहीं माना जा रहा है. क्योंकि जहां एक ओर संसार कोरोना नामक महामारी से पीड़ित है वही ग्रहण के समय शनि गुरु शुक्र व बुध जैसे वृहद एवं अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह वक्री होंगे .अर्थात सीधी दिशा में चलेंगे जबकि राहु व केतु सर्वदा वक्री ही रहते हैं ..इस प्रकार ग्रहण काल में मुख्य ग्रहों का सीधा चलना भी जगत में उथल-पुथल की स्थिति निर्मित कर सकता है .संसार के कई भागों में सीमा विवाद और परस्पर तनाव की स्थिति चरम पर पहुंच सकती है ,,इस संयोग के कारण भयंकर प्राकृतिक आपदा के संकेत दृष्टिगोचर हो रहे हैं.. इन तीनों ग्रहण व वक्री चाल वाले ग्रहों से उत्पन्न दुष्प्रभाव से जून-जुलाई के महीने में कोरोना विषाणु का संक्रमण अत्यंत तीव्र गति से प्रसारित होने एवं स्थिति नियंत्रण के बाहर जा सकती है.. इसके साथ ही कोई पुरातन रोग अथवा किसी नये विषाणु के कारण जनमानस को भारी हानि हो सकती है.. प्राकृतिक आपदाएं जल प्रलय आंधी तूफान चक्रवाती तूफान भूकंप महामारी अतिवृष्टि अनावृष्टि विश्व स्तर पर युद्ध की संभावना किसी विशिष्ट व बड़े नेता की दुर्घटना अथवा उन पर प्राणघातक आधात. की घटनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता ..विश्व में अति चर्चित किसी नेता आदि का साथ छूट जाना अथवा भारत के पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका ने अतिवृष्टि के कारण भयंकर विनाश लीला देखने मिल सकती है ,सार भूत बात यही है की प्रकृति के साथ मनुष्य के अमानवीय आचरण का ही यह परिणाम है कि आज मानवता घो,र संकट में है.. यदि अब भी हम नहीं चेते और हमारा आचरण धर्म सम्मत आध्यात्म सम्मत नहीं हुआ तो समूल नाश निश्चित है .. पंडित चंद्र कांत मिश्र आध्यात्मिक .,ज्योतिषीय गणना सहित ऑग्ल एंव संस्कृत भाषा. विशेषज्ञ

ज्येष्ठ महीने की अमावस्या वट-सावित्री का पर्व आज, महिलाएं इसलिए पूजती है बरगद का पेड़

 रायपुर  -  ज्येष्ठ महीने की अमावस्या, शुक्रवार 22 मई को वट सावित्री व्रत है। इस दिन महिलाएं अपने सुहाग की दीर्घायु और उनकी कुशलता के लिए व्रत रखेंगी। जिसके लेकर महिलाओं ने अपनी तैयारी पूर्ण कर ली हैं। ऐसी मान्यता है कि वट सावित्री व्रत कथा के श्रवण मात्र से महिलाओं के पति पर आने वाली बुरी बला टल जाती है।
बरगद का पेड़ चिरायु होता है। अतः इसे दीर्घायु का प्रतीक मानकर परिवार के लिए इसकी पूजा की जाती है। हालांकि लॉकडाउन की वजह से महिलाएं इस बार पारंपरिक तरीके से बरगद के पेड़ के नीचे पूजा नहीं कर पाएंगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन ही माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और श्रद्घा से यमराज द्वारा अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। अतः इस व्रत का महिलाओं के बीच विशेष महत्व बताया जाता है। महिलाएं भी इसी संकल्प के साथ अपने पति की आयु और प्राण रक्षा के लिए व्रत रखकर पूरे विधि विधान से पूजा करती हैं। इस दिन वट (बड़, बरगद) का पूजन होता है। इस व्रत को स्त्रियां अखंड सौभाग्यवती रहने की मंगलकामना से करती हैं।

वट सावित्री पूजा की व्रत-कथा

पौरणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार, प्राचीन काल में भद्र देश के राजा अश्वपति बड़े ही प्रतापी और धर्मात्मा थे। उनके इस व्यवहार से प्रजा में सदैव खुशहाली रहती थी। अश्वपति की कोई संतान नहीं थीं। राजा अश्वपति संतान प्राप्ति के लिए नित्य यज्ञ और हवन किया करते थे, जिसमें गायत्री मंत्रोच्चारण के साथ आहुतियां दी जाती थीं। उनके इस पुण्य प्राप्त से एक दिन माता गायत्री प्रकट होकर बोली-हे राजन! मैं तुम्हारी भक्ति से अति प्रसन्ना हुई हूं। इसलिए तुम्हें मनचाहा वरदान दे रही हूं। तुम्हारे घर जल्द ही एक कन्या जन्म लेगी। कालांतर में राजा अश्वपति के घर बेहद रूपवान कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम सावित्री रखा गया।

जब सावित्री बड़ी हुई तो उनके लिए योग्य वर नहीं मिला। इसके बाद राजा अश्वपति ने अपनी कन्या से कहा आप स्वयं मनचाहा वर ढूंढकर विवाह कर सकती हैं। तब सावित्री को एक दिन वन में राजा द्युमत्सेन मिले। सावित्री ने मन ही मन उन्हें अपना पति मान लिया। यह देख नारदजी राजा अश्वपति के पास आकर बोले-हे राजन! आपकी कन्या ने जो वर चुना है, उसकी अकारण जल्द ही मृत्यु हो जाएगी। आप इस विवाह को यथाशीघ्र रोक दें। राजा अश्वपति के कहने के बावजूद सावित्री नहीं मानी और राजा द्युमत्सेन से शादी कर ली।

इसके अगले साल ही राजा द्युमत्सेन की मृत्यु हो गई। उस समय सावित्री अपने पति को गोदकर में लेकर बैठी थी। तभी यमराज आकर राजा द्युमत्सेन की आत्मा को लेकर जाने लगे तो सावित्री उनके पीछे-पीछे चल पड़ी। यमराज के बहुत मनाने के बाद भी सावित्री नहीं मानीं तो यमराज ने उन्हें वरदान मांगने का प्रलोभन दिया। सावित्री ने अपने पहले वरदान में सास-ससुर की दिव्य ज्योति मांगी (ऐसा कहा जाता है कि सावित्री के सास-ससुर अंधे थे) दूसरे वरदान में छिना राजपाट मांगा और दूसरे तीसरे वरदान में सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा, जिसे यमराज ने तथास्तु कह स्वीकार कर लिया।

इसके बाद भी जब सावित्री यमराज के पीछे चलती रही तो यमराज ने कहा-हे देवी ! अब आपको क्या चाहिए? तब सावित्री ने कहा-हे यमदेव आपने सौ पुत्रों की मां बनने का वरदान तो दे दिया, लेकिन बिना पति के मैं मां कैसे बन सकती हूं? यह सुन यमराज स्तब्ध रह गए। इसके बाद उन्होंने राजा द्युमत्सेन को अपने प्राण पाश से मुक्त कर दिया। कालांतर से ही सावत्री की पति सेवा और भक्ति की कथा सुनाई जाती रही है।

भगवान श्री परशुराम के जन्मोत्सव पर महाआरती के बाद बांटा गया प्रसाद..

संवादाता - प्रियांश केशरवानी  ( छतीसगढ़ )

पहली बार शहर में नही निकली शोभायात्रा..

शिवरीनारायण  ( छतीसगढ़ ) || युवा ब्राम्हण परिवार शिवरीनारायण द्वारा अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर भगवान श्री परशुराम जी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। भगवान श्री परशुराम जी की विशेष पूजा अर्चना की गई। पूजा~अर्चना के बाद भगवान श्री परशुराम जी की महाआरती की गई। इस दौरान जमकर आतिशबाजी की गई। भगवान श्री परशुराम के जयकारे लगाए गए। भगवान को सेतुआ, श्रीफल, बूंदी के लड्डू का भोग लगाया गया। विदित हो कि प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर युवा ब्राम्हण परिवार द्वारा भगवान श्री परशुराम जी की भव्य शोभायात्रा नगर में निकाली जाती थी जिसे इस वर्ष कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए स्थगित कर दिया गया।  महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। शोसल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर त्यागी जी महाराज, सुखराम दास, शरद पाण्डेय, अशोक दुबे, अशोक शर्मा, विश्वकांत शर्मा, नवीन शर्मा, अजीत सेन तिवारी, दिनेश शर्मा, अंकित तिवारी, गजेंद्र शर्मा, प्रतीक शुक्ला, प्रशांत शर्मा, सर्वेश शर्मा, अभिजीत पाण्डेय, आशीष दुबे सहित युवा ब्राम्हण परिवार के सदस्य उपस्थित थे।

श्री भगवान शिवरीनारायण मठ मंदिर न्यास में मनाई गई परशुराम जयंती, हुआ घट पूजन

प्रियांश केशरवानी@BBN24NEWS

धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य का भी तन धारण करते हैं भगवान श्री हरि

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर श्री शिवरीनारायण मठ मंदिर में  अक्षय तृतीया का पावन पर्व बड़े ही श्रद्धा भक्ति पूर्वक मनाया गया,  इस अवसर पर  परंपरागत रूप से  घट स्थापित करके घट पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ  भगवान राघवेंद्र सरकार  की विशेष पूजा अर्चना की गई उनका विशेष अलौकिक श्रृंगार करके  सतुआ का भोग  लगाया गया इस अवसर पर शासन के लॉक डाउन के निर्देश का  पालन करते हुए मठ मंदिर के सीमित जन ही उपस्थित हुए

विशेष रुप से इस अवसर पर मठ मंदिर के मुख्तियार श्री सुखराम दास जी , जगन्नाथ मंदिर के पुजारी रामेश्वर दास त्यागी, राम मंदिर के पुजारी श्री नागाजी एवं श्री प्रतीक शुक्ला तथा श्री आदर्श शर्मा जी मठ तथा मंदिर न्यास के समस्त विद्यार्थी गण एवं भगवान शिवरीनारायण मठ ट्रस्ट के सम्माननीय संत गण उपस्थित हुए। घट पूजन के पश्चात श्री शिवरीनारायण भगवान, श्री जगन्नाथ जी, एवं श्री सीताराम जी को सतुआ का भोग लगाया गया प्रसाद समस्त संत जन को वितरण किया गया साथ ही घट पूजा के पश्चात 101 घड़ा नगर के सम्माननीय विप्र बंधुओं को दान स्वरूप भेंट की गई, यह कार्य मठ मंदिर के कर्मचारी श्री नरेश वर्मा एवं वैशाखी यादव द्वारा घर- घर में जाकर पहुंचाते हुए संपन्न किया गया। यहां यह उल्लेखनीय है कि अक्षय तृतीया का पावन पर्व भगवान परशुराम जयंती के रूप में मनाया जाता है भगवान परशुराम जी जगत के पालनहार भगवान विष्णु के अवतार है, भगवान श्री हरि ने अनेक युगों में अनेक बार धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य का तन धारण किया रामचरितमानस में लिखा है कि विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार जब जब संसार में धर्म की हानि होती है अधर्मी, अभिमानी लोगों की वृद्धि हो जाती है तब तब भगवान विविध स्वरूप धारण कर संसार में धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य का तन भी धारण करके उपस्थित होते हैं, यही सनातन धर्म की विशेषता है। विश्व के किसी भी धर्म में परमात्मा साक्षात मनुष्य का तन धारण करके अवतरित नहीं होते, अन्य धर्मों की मान्यता के अनुसार वहां उनके दूत धर्म स्थापना के लिए आते हैं किंतु सनातन धर्म में वह साक्षात शरीर धारण करके संसार की पीड़ा का हरण करते हैं। यही वैदिक सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता है।

मासिक राम कथा स्थगित

प्रियांश केशरवानी @ Bbn24news

भगवान श्री शिवरीनारायण की पावन धरा शिवरीनारायण मठ मंदिर में प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को आयो फसीजित की जाने वाली रविवारीय मासिक रामकथा स्थगित कर दी गई है प्राप्त जानकारी के अनुसार इस माह यह कार्यक्रम 12 अप्रैल को आयोजित होना था किंतु कोरोना वायरस के संक्रमण से ना केवल भारत वर्ष में बल्कि संपूर्ण विश्व में इस समय सोशल डिस्टेंस का पालन सभी नागरिकों के द्वारा किया जा रहा है इसे ध्यान में रखते हुए मारुति मानस प्रचार समिति द्वारा प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को आयोजित की जाने वाली रविवारीय मासिक रामकथा स्थगित कर दी गई है इस संदर्भ में शिवरीनारायण मठ पीठाधीश्वर राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने कहा कि रविवारीय मासिक रामकथा विगत 6 वर्षों से निरंतर आयोजित होते आ रहा है इसमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से मानस के प्रवक्ता एवं श्रोता गण काफी संख्या में उपस्थित होकर राम कथा का रसपान करते हैं एवं अपना जीवन धन्य बनाते आ रहे हैं किंतु वर्तमान विषम परिस्थिति को ध्यान में रखकर यह कार्यक्रम स्थगित की गई है आयोजक निरंजन लाल अग्रवाल ने भी आम जनता से अपील की है कि संकट की इस घड़ी में हम सभी सामाजिक व्यवस्था को दुरुस्त करने में अपनी अपनी सहभागिता निभाएंगे। प्रेस को जानकारी मीडिया प्रभारी निर्मल दास वैष्णव ने प्रदान की

घिवरा मंदिर महोत्सव रद्द, विश्व शांति के लिए हवन का आयोजन

@BBN24 हेमंत जायसवाल / जांजगीर-चांपा -संपूर्ण विश्व में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए हर सार्वजनिक आयोजन को रद्द कर दिया गया है,जांजगीर-चांपा जिले में भी कलेक्टर द्वारा 144 लागू कर दिया गया है,इसी कड़ी में चैत्र वासंती नवरात्र पर्व पर आयोजित घिवरा मंदिर मेला महोत्सव को भी रद्द कर दिया गया है।आज बिर्रा पुलिस थाना स्टाफ जय मां डोकरी दाई मंदिर समिति से मुलाकात कर लोगों को समझाइश दी।अब नवरात्रि पर मंदिर में सिर्फ ज्योति कलश प्रज्जवलित होंगे एवं शासन के नियमानुसार तीन से अधिक लोगों की उपस्थिति नहीं रहेगी।। वहीं आज डोकरी दाई मंदिर में विश्व शांति के लिये हवन-पूजन भी किया गया।।

Aaj Ka Panchang : पढ़ें 15 मार्च का पंचांग : राहुकाल के दौरान न करें कोई शुभ कार्य,

श्री शीतला सप्तमी। सूर्य उत्तरायण। सूर्य दक्षिण गोल। वसंत ऋतु। सायं 4 बजकर 30 मिनट से 6 बजे तक राहुकालम्। 15 मार्च 2020, रविवार 25 फाल्गुन (सौर) शक 1941, 1 चैत्र मास प्रविष्टे 2076, 19 रजब सन् हिजरी 1441, चैत्र कृष्णपक्ष सप्तमी रात्रि 3 बजकर 20 मिनट तक उपरांत अष्टमी, अनुराधा नक्षत्र प्रात: 11 बजकर 23 मिनट तक तदनंतर ज्येष्ठा नक्षत्र, वज्र योग सायं 3 बजकर 16 मिनट तक पश्चात सिद्धि (असृक) योग, विष्टि (भद्रा) करण सायं 3 बजकर 47 मिनट तक, चन्द्रमा वृश्चिक राशि में (दिन-रात)।

आज का शुभ मुहूर्तः

अभिजीत मुहूर्त सुबह 12 बजकर 23 मिनट से दोपहर 01 बजकर 11 मिनट तक होगा। रवि योग सुबह 06 बजकर 47 मिनट से सुबह 11 बजकर 24 मिनट तक। विजय मुहूर्त दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से 03 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। निशिथ काल मध्यरात्रि में 12 बजकर 23 मिनट से 01 बजकर 11 मिनट तक होगा। गौधूलि मुहूर्त शाम 06 बजकर 36 मिनट से शाम 07 बजे तक।

आज का अशुभ मुहूर्तः

राहुकाल सायं 04 बजकर 30 मिनट से 06 बजे तक। दोपहर 03 बजकर 48 मिनट से शाम 05 बजकर 18 मिनट तक गुलिक काल है। शाम 12 बजकर 47 मिनट से 02 बजकर 18 मिनट तक यमगंड रहेगा। भद्रा सुबह 06 बजकर 47 मिनट से दोपहर 03 बजकर 46 तक रहेगा।

जीवन जीने की कला सिखाने ,भागवत ज्ञान गंगा का आयोजन

जांजगीर चम्पा। दिनांक 12 मार्च 2020 मनोकामना दुर्गा मंदिर ग्राम नरियारा में सात दिवसीय आध्यात्मिक श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ के आध्यात्मिक खुशहाल रहस्य द्वारा खुशहाल जीवन जीने की कला सिखाने हेतु राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी शशि प्रभा दीदी जी के सानिध्य में भगवत ज्ञान गंगा का आयोजन किया गया है जिसकी शुरुआत दिनांक 16 3 2020 से 22 3 2020 तक समय दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक रहेगाl जिसमें गीता ज्ञान के अद्भुत रहस्य का स्पष्टीकरण किया जाएगा इसकी शुरुआत शोभायात्रा से तथा महात्म्य गीता से किया जायेगा।मनोकामना दुर्गा मंदिर से कलश यात्रा दोपहर 1:00 बजे निकलेगी और जल यात्रा व पूजन कर कथा स्थान पर पहुंचेगी। तत्पश्चात गीता ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ दोपहर 3:00 बजे से 6:00 बजे तक प्रतिदिन यह सात दिवसीय श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया जाएगा नरियारा ग्राम वासियों द्वारा समय पर कलश यात्रा व कथा श्रवण हेतू प्रयास जारी है। इस कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार से रहेगा प्रथम दिवस कलश शोभायात्रा व महात्मा कथा , द्वितीय दिवस आध्यात्मिक रहस्य का प्रकटीकरण, तृतीय दिवस कर्म, विकर्म, अकर्म का बोध एवं प्रहलाद प्रसंग, चतुर्थ दिवस परम सत्य का बोध ,पंचम दिवस सृष्टि का अनादि सत्य, कल्पतरु की कथा ष,्ठम दिवस राजयोग, उद्धव चरित्र , सुदामा चरित्र तथा सप्तम दिवस खुशहाल जीवन जीने हेतु संपूर्ण विधि विधान से हवन ,पूर्णाहुति सहस्त्रधारा, प्रसाद आदि किया जाएगा ब्रह्माकुमारी ज्ञाना बहन ने बताया कि इस आध्यात्मिक गीता ज्ञान यज्ञ हेतू ग्राम वासियों में असीम जिज्ञासा दिखाई दे रही है और बड़ी संख्या में लोगों का आगमन इस कार्यक्रम में होगा कार्यक्रम में बहुत सुंदर झांकियों का दृश्य भी देख पाएंगे।

श्री कृष्ण की पटरानियों में रुक्मणि महत्वपूर्ण स्थान रखती थी -आचार्य नरायण प्रसाद पांडेय जी

कोटमी सोनार। संतोषी मंदिर रहस बेड़ा के पास वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन शुक्ला परिवार द्वारा किया जा रहा है ।कथा व्यास आचार्य श्री नरायण प्रसाद पांडेय जी कटौद वाले के द्वारा कथा का रसपान कराया जा रहा है कथा के छठवें दिवस पर आचार्य श्री ने रास प्रसंग, रूखमणी विवाह का कथा श्रवण कराते हुए द्वारका में रहते हुए भगवान श्रीकृष्ण और बलराम का नाम चारों ओर फैल गया। बड़े-बड़े नृपति और सत्ताधिकारी भी उनके सामने मस्तक झुकाने लगे। उनके गुणों का गान करने लगे। बलराम के बल-वैभव और उनकी ख्याति पर मुग्ध होकर रैवत नामक राजा ने अपनी पुत्री रेवती का विवाह उनके साथ कर दिया। बलराम अवस्था में श्रीकृष्ण से बड़े थे। अतः नियमानुसार सर्वप्रथम उन्हीं का विवाह हुआ। उन दिनों विदर्भ देश में भीष्मक नामक एक परम तेजस्वी और सद्गुणी नृपति राज्य करते थे। कुण्डिनपुर उनकी राजधानी थी। उनके पांच पुत्र और एक पुत्री थी। उसके शरीर में लक्ष्मी के शरीर के समान ही लक्षण थे। अतः लोग उसे लक्ष्मीस्वरूपा कहा करते थे। रुक्मिणी जब विवाह योग्य हो गई, तो भीष्मक को उसके विवाह की चिंता हुई। रुक्मिणी के पास जो लोग आते-जाते थे, वे श्रीकृष्ण की प्रशंसा किया करते थे। वे रुक्मिणी से कहा करते थे, श्रीकृष्ण अलौकिक पुरुष हैं। इस समय संपूर्ण विश्व में उनके सदृश अन्य कोई पुरुष नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध होकर रुक्मिणि ने मन ही मन निश्चय किया कि वह श्रीकृष्ण को छोड़कर किसी को भी पति रूप में वरण नहीं करेगी। उधर, भगवान श्रीकृष्ण को भी इस बात का पता हो चुका था कि विदर्भ नरेश भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी परम रूपवती तो है ही, परम सुलक्षणा भी है। भीष्मक का बड़ा पुत्र रुक्मी भगवान श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। वह बहन रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से करना चाहता था, क्योंकि शिशुपाल भी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था। भीष्मक ने अपने बड़े पुत्र की इच्छानुसार रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ ही करने का निश्चय किया। उसने शिशुपाल के पास संदेश भेजकर विवाह की तिथि भी निश्चित कर दी। रुक्मिणी को जब इस बात का पता लगा, तो वह बड़ी दुखी हुई। उसने अपना निश्चय प्रकट करने के लिए एक ब्राह्मण को द्वारिका श्रीकृष्ण के पास भेजा। उसने श्रीकृष्ण के पास जो संदेश भेजा था, वह इस प्रकार था—‘हे नंद-नंदन! आपको ही पति रूप में वरण किया है। मै आपको छोड़कर किसी अन्य पुरुष के साथ विवाह नहीं कर सकती। मेरे पिता मेरी इच्छा के विरुद्ध मेरा विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहते हैं। विवाह की तिथि भी निश्चित हो गई। मेरे कुल की रीति है कि विवाह के पूर्व होने वाली वधु को नगर के बाहर गिरिजा का दर्शन करने के लिए जाना पड़ता है। मैं भी विवाह के वस्त्रों में सज-धज कर दर्शन करने के लिए गिरिजा के मंदिर में जाऊंगी। मैं चाहती हूं, आप गिरिजा मंदिर में पहुंचकर मुझे पत्नी रूप में स्वीकार करें।श्री कृष्ण के पटरानियों में रूखमणी की महत्वपूर्ण स्थान रहती थी। कार्यक्रम में विजय शुक्ला, अशोक शुक्ला, अमित शुक्ला ,महेश्वर शुक्ला, गोविंदा शुक्ला, दीपक पांडेय, अभय शुक्ला, अंकित शुक्ला, अमन शुक्ला कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे हुए है ।

संगीतमय श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है कोटमी सोनार में ।

कोटमी सोनार। संतोषी मंदिर रहस बेड़ा के पास वार्षिक श्रद्धा के अवसर पर श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा आयोजन शुक्ला परिवार द्वारा किया जा रहा है । कथा व्यास आचार्य श्री नरायण प्रसाद पांडेय जी कटौद वाले के द्वारा कथा का रसपान कराया जा रहा है । कथा के पांचवें दिवस पर आचार्य श्री ने कृष्ण बाललीला ,गोवर्धन पूजा की कथा श्रवण कराते हुए बताये की हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्योहार दीपावली के अगले दिन, कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को गोवर्धन पूजन, गौ-पूजन के साथ-साथ अन्नकूट पर्व भी मनाया जाता है। इस दिन प्रात: ही नहा धोकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने इष्टों का ध्यान किया जाता है। इसके पश्चात् अपने घर या फिर देव स्थान के मुख्य द्वार के सामने गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाना शुरू किया जाता है। इसे छोटे पेड़, वृक्ष की शाखाओं एवं पुष्प से सजाया जाता है। पूजन करते समय निम्न श्लोक कहा जाता है- गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक। विष्णुबाहु कृतोच्छाय गवां कोटिप्रदो भव। भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं और गोप-ग्वालों के साथ गाय चराते हुए गोवर्धन पर्वत पर पहुँचे तो देखा कि वहाँ गोपियाँ 56 प्रकार के भोजन रखकर बड़े उत्साह से नाच-गाकर उत्सव मना रही हैं। श्रीकृष्ण के पूछने पर उन्होंने बताया कि आज के दिन वृत्रासुर को मारने वाले तथा मेघों व देवों के स्वामी इन्द्र का पूजन होता है। इसे इन्द्रोज यज्ञ कहते हैं। इससे प्रसन्न होकर इन्द्र ब्रज में वर्षा करते हैं और जिससे प्रचुर अन्न पैदा होता है। श्रीकृष्ण ने कहा कि इन्द्र में क्या शक्ति है? उससे अधिक शक्तिशाली तो हमारा गोवर्धन पर्वत है। इसके कारण वर्षा होती है। अत: हमें इन्द्र से भी बलवान गोवर्धन की पूजा करनी चाहिए। बहुत विवाद के बाद श्रीकृष्ण की यह बात मानी गई तथा ब्रज में इन्द्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा की तैयारियाँ शुरू हो गईं। सभी गोप-ग्वाल अपने-अपने घरों से पकवान लाकर गोवर्धन की तराई में श्रीकृष्ण द्वारा बताई विधि से पूजन करने लगे। श्रीकृष्ण द्वारा सभी पकवान चखने पर ब्रजवासी खुद को धन्य समझने लगे। नारद मुनि भी यहाँ इन्द्रोज यज्ञ देखने पहुँच गए थे। इन्द्रोज बंद करके बलवान गोवर्धन की पूजा ब्रजवासी कर रहे हैं, यह बात इन्द्र तक नारद मुनि द्वारा पहुँच गई और इन्द्र को नारद मुनि ने यह कहकर और भी डरा दिया कि उनके राज्य पर आक्रमण करके इन्द्रासन पर भी अधिकार शायद श्रीकृष्ण कर लें। इन्द्र गुस्से में लाल-पीले होने लगे। उन्होंने मेघों को आज्ञा दी कि वे गोकुल में जाकर प्रलय पैदा कर दें। ब्रजभूमि में मूसलाधार बरसात होने लगी। बाल-ग्वाल भयभीत हो उठे। श्रीकृष्ण की शरण में पहुँचते ही उन्होंने सभी को गोवर्धन पर्वत की शरण में चलने को कहा। वही सबकी रक्षा करेंगे। जब सब गोवर्धन पर्वत की तराई मे पहुँचे तो श्रीकृष्ण ने गोवर्धन को अपनी कनिष्ठा अंगुली पर उठाकर छाता-सा तान दिया और सभी को मूसलाधार हो रही वृष्टि से बचाया। सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर एक बूँद भी जल नहीं गिरा। यह चमत्कार देखकर इन्द्रदेव को अपनी की हुई गलती पर पश्चाताप हुआ और वे श्रीकृष्ण से क्षमा याचना करने लगे। सात दिन बाद श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत नीचे रखा और ब्रजवासियों को प्रतिवर्ष गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाने को कहा। तभी से यह पर्व के रूप में प्रचलित है।

love राशिफल 18 फरवरी: पढ़े प्रेम के मामले में किन राशियों के सितारे हैं बलवान

मीन और वृश्चिक राशि, ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार 18 फरवरी से मीन और वृश्चिक के सितारे बलवान रहेंगे। इससे इनके रिश्तों में मधुरता आ सकती हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। लव पार्टनर का साथ इन्हे सफल और कामयाब बना सकता हैं। किसी यात्रा के दौरान लव पार्टनर से मुलाक़ात हो सकती हैं। इनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। हनुमान जी की कृपा इनके प्रेम जीवन पर बनी रहेगी।

मेष और धनु राशि, 18 फरवरी से प्रेम के मामले में मेष और धनु राशि के सितारे बलवान रहेंगे। जिससे इनके प्रेम संबंधों में मजबूती आ सकती हैं। इनके सपने साकार हो सकते हैं। इनके रिश्तों में मधुरता आ सकती हैं। प्रेमी प्रेमिका के बीच नजदीकियां बढ़ सकती हैं। इनके संबंधों में मधुरता आ सकती हैं। ये लोग दिल की बात कहने में सफल हो सकते हैं। हनुमान जी की उपासना करना इनके लिए शुभ रहेगा।

कुंभ और तुला राशि, ज्योतिष शास्त्र की बात करें तो 18 फरवरी से प्रेम के मामले में कुंभ और तुला राशि के सितारे बलवान रहेंगे। जिससे इन्हे सच्चा प्यार मिल सकता हैं। इस राशि के जातक प्यार में जीत हासिल कर सकते हैं। इन्हे चारों ओर से खुशखबरी मिल सकती हैं। इन्हे प्यार ही प्यार मिल सकता हैं। ये लोग एक सफल प्रेम जीवन एन्जॉय कर सकते हैं। इनके लिए हनुमान जी की आराधना करना लाभकारी साबित हो सकता हैं।

BBN24 : पढ़े महाशिवरात्रि का शुभ मुहूर्त, ऐसे करें शिव जी की पूजा मिलेगा मनचाहा वरदान

महाशिवरात्रि के दिन शिवजी  की पूजा की जाती है। इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनाई जाएगी और शिव पूजा की जाएगी। महाशिवरात्रि के दिन शिव अभिषेक कर उनसे मनोकामनाओं को पूरा करने का आशीर्वाद लिया जाता है।

मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवों के देव महादेव का विवाह हुआ था। इसलिये महादेव के साथ साथ मां पार्वती की पूजा भी इस दिन जरुर करें। कहा जाता है कि इस दिन भोलेनाथ का पूरी श्रृद्धा भाव से पूजा करने पर जीवन की कई समस्याएं खत्म हो जाती हैं। तो आइए जानते हैं महशिवरात्रि के दिन क्या करें क्या ना करें...

महाशिवरात्रि 21 फरवरी को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से 22 फरवरी, शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगा।
शैव संप्रदाय के अनुसार- 21 फरवरी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
वैष्णवों द्वारा- 22 फरवरी को शिवरात्रि पर्व मनाई जाएगी।
शिव खप्पर पूजन- 23 फरवरी, अमावस्या के दिन

  • शिवरात्रि के दिन सुबह नहा धोकर मंदिर जाकर ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए।
  •  इसके बाद शिवलिंग पर शहद, पानी और दूध के मिश्रण से भोले शंकर को स्नान कराना चाहिए।
  •  स्नान कराने के बाद शिव जी पर बेल पत्र, धतूरा, फल और फूल भगवान शिव को अर्पित करें।
  • अंत में धूप और दीप जलाकर शिव जी की आरती करें।

शिवरात्रि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भगवान का रुद्राभिषेक किया जाता है। इस दिन भोले शिव को बेर चढ़ाना भी बहुत शुभ होता है। शिव महापुराण में कहा गया है कि इन छह द्रव्यों, दूध, योगर्ट, शहद,घी, गुड़ और पानी से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से भगवान प्रसन्न होते हैं।

  •  शिव जी का जल से रुद्राभिषेक करने से जातक को शुद्धी मिलती है।
  • भगवान शिव का गु़ड़ से रुद्राभिषेक करने से व्यक्ति को खुशियां प्राप्त होती है।
  •  शिव जी का घी से रुद्राभिषेक करें, आपको हर कार्य में जीत हासिल होगी।
  • शिव जी का शहद से रुद्राभिषेक करना जातक को मीठी वाणी प्रदान करता है।
  •  भगवान शिव का दही से रुद्राभिषेक व्यक्ति को समृद्धि प्रदान करता है।

बिना किसी संत के जीवात्मा को परमात्मा स्वीकार नहीं करते- रामकृष्णाचार्य जी महाराज

*प्रतिभाशाली को कभी भी छोटा नहीं समझना चाहिए*

*जीवन में सफलता का सबसे बड़ा मंत्र सहजता ही है*

राजकुमारी जानकी ने धनुष टूट जाने के पश्चात राघव जी से कहा हे प्रभु इस समाज में जिस ने धनुष को तोड़ा वह तो विनम्रता से सिर झुकाए खड़ा है और जो इसे डिगा तक नहीं सके वे अभी भी अकड़ कर खड़े हैं आप कुछ समय और ऐसे ही खड़े रहें ताकि इन अभिमानीयों को शिक्षा मिले यह बातें निकुंज आश्रम श्रीधाम अयोध्या से पधारे हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री स्वामी रामकृष्णाचार्य जी महाराज ने शिवरीनारायण मठ महोत्सव में राम कथा के रस पान करने के लिए भारी संख्या में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए व्यासपीठ की आसंदी से अभिव्यक्त की उन्होंने कहा कि रावण और बाणासुर जैसे महान योद्धा शिव धनुष को उठाना, तोड़ना तो बहुत बड़ी बात है तिल भर भूमि डिगा नहीं सके, तब दस हजार राजा एक साथ धनुष को उठाने लगे "भूप सहस दस एकहीं बारा, लगे उठावन टरहिं न टारा" कुछ लोग यह प्रश्न करते हैं कि दस हजार राजागण एक साथ धनुष को कैसे पकड़े होंगे याद रखना यह कोई साधारण धनुष नहीं भगवान शिव का धनुष है यह राजाओं को देखकर उनकी क्षमता के अनुसार भारित या हल्का हो जाता था यह धनुष जड़ नहीं चेतन है, राजाओं का जो समूह है वह तारों की तरह है और धनुष अंधकार की तरह *अहंकार शिव बुद्धि अज, मन शशि चित्त महान* शिव का धनुष अहंकार का प्रतीक है और अहंकार को कभी भी अहंकार तोड़ नहीं सकता उसे तो कोई विनम्र पुरुष ही तोड़ सकता है! सभी राजा श्रीहत हो गए अर्थात उनके चेहरे की कांति मलिन पड़ गई पूरे राजसभा में सन्नाटा छा गया, राजा जनक के हृदय में पीड़ा भर आया उन्होंने कहा *वीर विहीन महि मैं जानी* मैं समझ गया कि अब धरती वीरों से रहित हो गई है, वैदेही का विवाह ब्रह्मा ने लिखा ही नहीं है,हे राजाओं अपने -अपने घर को लौट जाओ मैं अपना प्रतिज्ञा छोड़ नहीं सकता अपने सुकृत पुण्य को जाने नहीं दूंगा, भले ही मेरी बेटी कुंवारी ही क्यों न रह जाए, जनक की बातों को सुनकर लक्ष्मण जी क्रोधित हो गए *कही जनक जस अनुचित बानी, विद्यमान रघुकुल मणि जानी* रघुकुल तिलक के समाज में रहते हुए कोई भी ऐसा अनुचित बानी कहने की साहस नहीं कर सकता जैसा जनक ने कहा है! उनके होंठ फड़कने लगे "जब मणि पर विपत्ति आती है तब फनी ही बोलता है" लक्ष्मण जी शेषनाग हैं उन्होंने एक को धनुष टूटने के पहले डांटा और दूसरे को धनुष टूटने के बाद। उन्होंने ज्ञानी जनक जी को भी डाटा और वीर परशुराम जी को भी कारण कि लक्ष्मण जी *रघुपति कीरति बिमल पताका* रघुनाथ जी की कीर्ति को फहराने वाले दंड के समान हैं, वे जीवों के आचार्य हैं जब कोई परमात्मा के विरुद्ध कार्य करता है तब वे उन्हें दंड देने से नहीं चूकते। लक्ष्मण जी की क्रोध से धरती डगमगाने लगी, लेकिन सीता जी के हृदय में प्रसन्नता छा गई वह जानती थी कि जब तक लक्ष्मण बोलेंगे नहीं तब तक रघुनाथ जी डोलेंगे नहीं, वह शांत ही रहेंगे कारण कि रामजी ब्रह्म हैं, उन्हें ना तो संसार में कुछ पाने की लालसा है और ना ही कुछ खोने की चिंता! जब तक किसी का जीवन बाँकी हो उसे तोड़ा नहीं जा सकता इसलिए विश्वामित्र जी समय की प्रतीक्षा कर रहे थे अभी धनुष का जीवन बाँकी था उचित समय आने पर विश्वामित्र ने राघव को आदेश दिया। याद रखना राजा जनक ज्ञानी हैं और जब ज्ञानी दुखित हो जाता है तब समाज का अहित होता है इसलिए मुनि विश्वामित्र ने कहा हे राम उठो धनुष का भंजन करो और हे तात जनक जी के हृदय की संताप को मिटाओ *सहज ही चले सकल जग स्वामी* संपूर्ण जगत के स्वामी साधारण चाल से सहजता पूर्वक चलने लगे, याद रखना आप जब समाज में आगे बढ़ जाओगे तब आपको आलोचना -समालोचना का सामना करना ही पड़ेगा, आप इन सभी के मध्य अपनी सहजता को बनाए रखना राम जी जब धनुष तोड़ने के लिए आगे बढ़े तब माता सुनैना व्याकुल हो गई उसने सोचा कि यह छोटा सा बालक धनुष कैसे तोड़ पाएगा ?इसे कोई समझाता क्यों नहीं है? तब उनकी सखीयों ने कहा- हे महारानी प्रतिभाशाली को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए! एक छोटा सा दीपक कमरे का अंधकार दूर कर देता है। धनुष टूटने के पश्चात माता जानकी जय माला लेकर राघव के सामने उपस्थित हुई वह प्रेम से विहल हो गई है, उनसे प्रेम विवसता के कारण जय माला पहनाई नहीं जा रही थी रामचंद्र जी ने कहा हे राजकुमारी जयमाला पहनाओ तब सीता जी ने कहा प्रभु इस समाज में जिस ने धनुष को तोड़ा वह तो विनम्रता से सिर झुकाए हैं, और जो इसे तिल भर भूमि हिला तक न सके वह अभी भी अकड़ कर खड़े हैं आप कुछ समय ऐसे ही खड़े रहें ताकि अभिमानियों को शिक्षा मिले। धनुष अहंकार का प्रतीक है जब तक अहंकार रहता है तब तक भक्त और भगवान का मिलन हो ही नहीं सकता बिना किसी संत के जीवात्मा को परमात्मा स्वीकार नहीं करते *बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति उपस्थित हुए कथा श्रवण के लिए* शिवरीनारायण मठ महोत्सव अपने पूरे शबाब पर है लोगों का हुजूम उमड़ रहा है लोग दूर-दूर से बड़ी संख्या में सपरिवार आकर के भगवान की कथा को सुनकर अपना जीवन धन्य बना रहे हैं, इसी सिलसिले में अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति श्री जी डी शर्मा कथा सुनने के लिए उपस्थित हुए उनके साथ श्री लक्ष्मण प्रसाद मिश्र भी थे कुलपति ने व्यासपीठ का अभिवादन किया एवं आशीर्वाद प्राप्त की इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि यहां आकर शिक्षा की पद्धति पर विचार करने का मन करता है हम लोग बहुत परिश्रम करके भी ऐसी शिक्षा अपने विश्वविद्यालय एवं विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को प्रदान नहीं कर पाते। हमें भी अपने विश्वविद्यालय स्तर पर इस तरह के शिक्षा पद्धति का समावेश करना होगा ताकि लोगों को अच्छे से अच्छा संस्कार मिल सके, वर्तमान परिवेश में छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त तो कर रहीं हैं लेकिन उचित संस्कार के अभाव में वे अपनी माता पिता एवं समाज से दूर होते जा रहे हैं जो कि चिंता का विषय है उन्होंने राजेश्री महन्त जी महाराज के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया और कहा कि हमें बार-बार इस तरह के कार्यक्रम में उपस्थित होने का सौभाग्य प्रदान करते हैं। मंच में हमेशा की तरह मुख्य यजमान के रूप में राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज विराजित थे।